राज्य की कार्यपालिका (Executive Agency) दो प्रमुख भागों में विभाजित है:
1. इन्द्रावती भवन 🌳
यह संचालनालय या निदेशालय भवन के रूप में कार्य करता है। [CG Vyapam(E.chemt.)2016]
🔑 मुख्य कार्य: इसका प्रमुख उत्तरदायित्व सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों का क्रियान्वयन करना है।
📊 पदानुक्रम (Hierarchy):
संचालक
अपर/अतिरिक्त संचालक
संयुक्त संचालक
उप संचालक
सहायक संचालक
2. महानदी भवन 🌊
इसे सचिवालय और मंत्रालय भवन के नाम से भी जाना जाता है। [CG PSC(CMO)2019, (ADH)2022]
💡 मुख्य कार्य: इसका प्राथमिक कार्य सरकार के लिए नीतियों का निर्माण करना है।
📊 पदानुक्रम (Hierarchy):
मुख्य सचिव
अतिरिक्त मुख्य सचिव
प्रमुख / प्रधान सचिव
सचिव
अतिरिक्त सचिव
संयुक्त सचिव
उपसचिव
अवर सचिव
📌 ध्यान दें: रायपुर में स्थित महानदी भवन ही मंत्रालय एवं सचिवालय भवन है। [CG Vyapam(ANM) 2013]
राज्य सचिवालय (State Secretariat) के बारे में
👨💼 नेतृत्व:
राजनीतिक प्रमुख: विभाग के ‘मंत्री’ होते हैं।
प्रशासनिक प्रमुख: सचिव होते हैं।
🧠 भूमिका: सचिवालय एक स्टॉफ एजेंसी के रूप में कार्य करता है, जिसका सीधा संबंध नीति-निर्धारण से होता है।
🌍 केंद्र बिंदु: यह राज्य के संपूर्ण प्रशासन तंत्र का केंद्र माना जाता है।
⚙️ संचालन: राज्य सचिवालय वह स्थान है जहाँ से शासन और प्रशासन के सत्ता सूत्रों का संचालन किया जाता है।
सचिवालय का गठन एवं भूमिका
📖 गठन (Composition)
राज्य सरकार के किसी भी विभाग के राजनीतिक प्रमुख के तौर पर ‘मंत्री’ और प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर सचिव पदस्थापित होते हैं।
सचिवालय में सर्वोच्च राजनीतिक पद मुख्यमंत्री का होता है, जबकि सर्वोच्च प्रशासनिक पद मुख्य सचिव का होता है।
मुख्य सचिव संपूर्ण राज्य सचिवालय का प्रमुख होता है, वहीं एक सचिव एक या दो विभागों का नेतृत्व करता है।
आमतौर पर, सचिव के पद पर वरिष्ठ आई.ए.एस. (IAS) अधिकारी होते हैं, जिन्हें सामान्यज्ञ भी कहा जाता है।
इसका एक अपवाद लोक निर्माण विभाग है, जहाँ प्रमुख का पद मुख्य अभियंता (विशेषज्ञ वर्ग) के पास होता है।
सचिवालय के प्रमुख कार्य और भूमिका
💡 नीति निर्माण: सचिवालय मूल रूप से नीति निर्माण के लिए सबसे प्रमुख संस्था है।
📈 सूचना संग्रहण:
राज्य प्रशासन के विभिन्न आयामों से जुड़ी जानकारी सचिवालय द्वारा एकत्रित की जाती है, और फिर उसका वर्गीकरण व विश्लेषण होता है।
इसी सूचना के आधार पर नीति का निर्माण, निष्पादन और मूल्यांकन का काम किया जाता है। यह जिम्मेदारी सामान्यतः योजना और वित्त विभाग द्वारा पूरी की जाती है।
🤝 समन्वय (Coordination):
प्रशासन की गतिविधियाँ विभिन्न निदेशालयों, मंडलों, और निगमों के माध्यम से संचालित होती हैं। इन सभी में समन्वय स्थापित करना आवश्यक है ताकि राज्य का समग्र विकास हो सके।
राजनीतिक कार्यपालिका में मुख्यमंत्री और प्रशासन में मुख्य सचिव एक कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाते हैं।
📜 नियम एवं नीति निर्माण:
सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के बीच सही तालमेल बनाए रखना।
विधान, नियम और विनियम तैयार करना।
🧑⚖️ कार्मिक प्रशासन (Personnel Administration):
नए पदों का सृजन, अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति, त्यागपत्र, विशेष वेतन भत्ते, और पेंशन से संबंधित निर्णय यहीं लिए जाते हैं।
बदलती परिस्थितियों के अनुसार प्रशासन में आवश्यक सुधार और बदलावों से संबंधित निर्णय भी कार्मिक प्रशासन द्वारा लिए जाते हैं।
🇮🇳 केंद्र एवं अन्य राज्यों से संबंधित दायित्व:
केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की आर्थिक सुविधाएँ और अन्य निर्देश सचिवालय के माध्यम से ही ग्रहण किए जाते हैं।
🚀 प्रशासनिक सुधार:
शासन के सभी विभागों और संस्थाओं से जुड़े प्रशासनिक सुधारों को लागू करने और उनका मूल्यांकन करने का कार्य प्रशासनिक सुधार विभाग करता है।
मुख्यमंत्री सचिवालय
प्रमुख: मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रमुख, मुख्यमंत्री का सचिव होता है।
नोट: छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में 58 विभाग कार्यरत हैं।
👑 मुख्य सचिव (Chief Secretary)
📖 परिचय और पृष्ठभूमि
स्थापना: इस पद का सृजन 1799 में लॉर्ड वेलेजली द्वारा किया गया था। [CG PSC(EAP)2016]
प्रथम मुख्य सचिव: पहले मुख्य सचिव जी.एस. बार्लो थे। [CG PSC(EAP)2016]
समकक्षता: यह पद केंद्र सरकार के मंत्रिमण्डल सचिव (Cabinet Secretary) और कार्मिक सचिव (Personnel Secretary) के बराबर माना जाता है। [CGPSC(ITI Prin.)2016], [CGPSC(EAP)2016]
वार्षिक सम्मेलन: भारत सरकार के मंत्रिमण्डल सचिव (कैबिनेट सचिव), सभी राज्यों के सचिवों के वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करते हैं। [CG PSC(AP)2016]
🧠 मुख्य सचिव की भूमिका
मुख्य सचिव को कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए जाना जाता है:
राज्य का मस्तिष्क: प्रशासनिक ढांचे का ‘मस्तिष्क’ कहा जाता है। [CGPSC(AMO)2017]
प्रमुख/मुखिया:
वे सभी सचिवों के प्रमुख होते हैं। [CGPSC(ACF)2017][CGPSC(LOI)2018]
राज्य प्रशासन के मुखिया होते हैं। [CG Vyapam(ADEO)2017]
राज्य के समस्त लोकसेवकों के प्रमुख होते हैं। [CGPSC(ACF)2017][CGPSC(LOI)2018]
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी: राज्य की प्रशासनिक सेवा के मुख्य अधिकारी। [CGPSC(ABEO)2013] [CGPSC(EAP)2016]
नीति-निर्माता: राज्य के नीति निर्माण में इनकी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। [CG PSC(LAW)2022]
मुख्य सलाहकार: मंत्रिमण्डल के मुख्य सलाहकार होते हैं। [CGPSC(ACF)2017][CGPSC(LOI)2018]
मध्यस्थ (Mediator): वे एक मुख्य सचिव के रूप में मंत्रिमण्डल सचिव होते हैं और राज्य सचिवालय के प्रशासन में मंत्रिमण्डल तक जाने वाली सभी फाइलें उनके माध्यम से ही जाती हैं। [CG PSC(ACF)2016]
📊 पदस्थिति (Official Position)
वे राज्य सचिवालय के शासकीय प्रधान होते हैं।
वे राज्य प्रशासन के प्रशासनिक प्रमुख माने जाते हैं।
राज्य के प्रशासनिक पदानुक्रम में उनका स्थान सर्वोच्च होता है।
वे अन्य सभी सचिवों के मुकाबले शीर्ष पर होते हैं।
मुख्य सचिव को पूरे राज्य प्रशासन का नेता, मार्गदर्शक और नियंत्रक माना जाता है।
📋 शक्तियाँ और कार्य (Powers and Functions)
मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में:
मुख्य सचिव, राज्य प्रशासन से संबंधित सभी मामलों में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के रूप में काम करते हैं।
मुख्यमंत्री, राज्य शासन से जुड़े सभी नीतिगत मुद्दों पर मुख्य सचिव से सलाह लेते हैं।
वे राज्य सरकार के सचिवों और मुख्यमंत्री के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं।
मंत्रिमण्डल के सचिव के रूप में:
मुख्य सचिव, राज्य की नीति बनाने वाले मंडल के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
वे मंत्रिमण्डल सचिवालय के प्रशासन प्रमुख की भूमिका निभाते हैं।
प्रमुख समन्वयक के रूप में:
मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का प्रमुख समन्वयक (Chief Coordinator) होता है।
वह नीति निर्माण के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है। [CGPSC(AMO)2017]
वह सभी विभागों के सचिवों की बैठकों की अध्यक्षता भी करता है।
लोकसेवा के प्रमुख के रूप में:
मुख्य सचिव राज्य की लोकसेवा का प्रमुख होता है।
वह राज्य के वरिष्ठ लोकसेवकों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति से संबंधित मामलों को देखता है।
कुछ विभागों के प्रमुख के रूप में:
वह छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होता है। [CG PSC(ABEO)2013]
सचिवालय के कई विभाग सीधे मुख्य सचिव के नियंत्रण में होते हैं।
🤝 मुख्य सचिव और कैबिनेट सचिव में समानता
केंद्र सरकार में राज्य के मुख्य सचिव के बराबर कोई पद नहीं है; केंद्रीय कैबिनेट सचिव को ही राज्य के मुख्य सचिव के समकक्ष माना जा सकता है।
दोनों अपने-अपने प्रशासन के मुख्य समन्वयक हैं।
दोनों ही अपने-अपने मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करवाते हैं।
दोनों ही अपने-अपने मंत्रिमण्डल के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (क्रम से)
नियुक्ति: मुख्यमंत्री द्वारा [CG PSC(EAP)2016]
क्रम
नाम
1.
श्री अरुण कुमार
2.
श्री सुयोग्य कुमार
3.
श्री ए.के. विजयवर्गीय
4.
श्री आर.पी. बगई
5.
श्री शिवराज सिंह
6.
श्री पी.जाय. उम्मेन
7.
श्री सुनील कुमार
8.
श्री विवेक ढांढ [CG Vyapam (MSI)2021]
9.
श्री अजय सिंह
10.
श्री सुनील कुजूर [CG PSC(SEE)2016]
11.
श्री आर.पी. मण्डल
12.
श्री अमिताभ जैन (वर्तमान में)
🏛️ निदेशालय/संचालनालय (Directorates)
📌 सामान्य जानकारी
संचालन: इस राज्य के विभिन्न निदेशालयों का संचालन इंद्रावती भवन से किया जाता है। [CG Vyapam (Chemist)2016]
परिभाषा: कार्यकारी प्रमुख के कार्यालय को ही निदेशालय कहा जाता है। यह सचिवालय के अधीन एक संस्था है। [CG PSC(ADH)2022]
प्रकृति: निदेशालय को लाइन इकाई (एजेंसी) और विशेषज्ञों की इकाई भी माना जाता है। [CG PSC(ADH)2022]
कार्यकारी अंग: राज्य प्रशासन में निदेशालय एक कार्यकारी अभिकरण है, जिसे कार्यकारी विभाग भी कहते हैं। [CG PSC(ARTO)2022]
⚙️ कार्य (Functions)
मुख्य कार्य: निदेशालय का प्रमुख कार्य नीति का क्रियान्वयन करना है। [CG PSC (ACF) 2017]
जिम्मेदारियाँ:
राज्य सरकार की नीतियों को लागू करने के लिए उत्तरदायी। [CG Vyapam(ETOS)2017]
मंत्रियों को तकनीकी सलाह देना। [CG PSC (AG-3) 2018]
बजट तैयार करना और उसका आवंटन करना। [CG PSC (AG-3) 2018]
नियमों के तहत नियुक्तियां, स्थानांतरण और पदोन्नतियां करना।
अधिकारियों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
विभाग की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए अनुसंधान और प्रयोगात्मक कार्यक्रम चलाना।
अधीनस्थ अधिकारियों पर अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रयोग करना।
👨⚖️ प्रमुख और पदानुक्रम
निदेशालय के नियम-कानून सचिवालय से अलग होते हैं।
इसका प्रधान एक निदेशक होता है, जिसकी सहायता के लिए अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, और सहायक निदेशक होते हैं।
पदानुक्रम:
प्रधान निदेशक / संचालक
अपर / अतिरिक्त निदेशक / संचालक
संयुक्त निदेशक / संचालक
उप निदेशक / संचालक
सहायक निदेशक / संचालक
🏢 राज्य के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष
यहाँ छत्तीसगढ़ राज्य के कुछ प्रमुख विभागों और उनके सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों की सूची दी गई है:
विभाग का नाम
सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी
संबंधित PYQ
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
विकास आयुक्त (प्रमुख सचिव)
[CG PSC (ADP&S)2019]
उच्च शिक्षा विभाग
आयुक्त
पुलिस विभाग
पुलिस महानिदेशक (DGP)
जेल विभाग
महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं
वन विभाग
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF)
[CG PSC(Ast. Geo.)2011]
सहकारिता विभाग
पंजीयक
स्कूली शिक्षा विभाग
संचालक
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
संचालक
महिला एवं बाल विकास विभाग
संचालक
लोक निर्माण विभाग
प्रमुख अभियंता
मुख्यमंत्री सचिवालय
मुख्यमंत्री का सचिव
[CGPSC(ADA)2020]
आदिम जाति कल्याण विकास विभाग
आयुक्त
प्रश्न: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी कौन होता है?उत्तर: (C) विकास आयुक्त (प्रमुख सचिव) [CGPSC(ADPE&S)2019]
🪜 प्रशासनिक पद सोपान (Administrative Hierarchy)
प्रशासन का ढाँचा नीचे दिए गए क्रम में संगठित है, जहाँ जिला प्रशासन की आधारभूत इकाई है। [CG PSC(ADP)2019]
राज्य स्तर: मुख्य सचिव
संभाग स्तर: संभागायुक्त (कमिश्नर)
उपखण्ड/अनुविभाग: उपखण्ड अधिकारी (एस.डी.ओ./एस.डी.एम.)
तहसील स्तर: तहसीलदार
राजस्व क्षेत्र: राजस्व निरीक्षक (आर.आई.)
पटवारी हल्का: पटवारी
गाँव: कोतवाल
आयुक्त पदानुक्रम
आयुक्त
अपर आयुक्त
संयुक्त आयुक्त
उप आयुक्त
सहायक आयुक्त
👨⚖️ जिलाधीश (District Collector)
सृजन: इस पद का सृजन 1772 में लार्ड वारेन हेस्टिंग द्वारा किया गया।
विभाग: यह राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत आता है। [CG PSC(CMO)2019]
महत्वपूर्ण तथ्य:
नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक के सभी अधिकारी राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग का हिस्सा होते हैं। [CG PSC(EAP)2016]
डिप्टी कलेक्टर राजस्व विभाग के अधीन नहीं आता। [CG PSC(CMO)2019]
परिभाषा: जिलाधीश को छत्तीसगढ़ भूराजस्व संहिता 1959 में परिभाषित किया गया है। [CG Vyapam (Lab Tech.)2024]
उत्तरदायित्व (Responsibilities)
जिलाधीश के प्रमुख उत्तरदायित्व इस प्रकार हैं:
राजस्व अधिकारी [CG PSC(EAP)2016]
जिले का प्रमुख प्रशासक
जिला मजिस्ट्रेट
जिला प्रशासन का प्रमुख
जिला निर्वाचन अधिकारी
जिला मतगणना अधिकारी [CG PSC(PDD)2018, (CMO)2019]
जिला आयुक्त/उपायुक्त
जिला आपदा प्रबंधक [CG PSC(ITI, Pri.)2016]
कथन एवं तुलना
बलवंत राय मेहता समिति: इस समिति के अनुसार, जिलाधीश को जिला परिषद् का अध्यक्ष होना चाहिए। [CG PSC(ITI, Pri.)2016]
तुलना: राज्य प्रशासन में कलेक्टर की तुलना ‘फ्रांस के प्रिफेक्ट’ से की जाती है। [CG PSC(AMO)2017]
रेमजे मेकडोनाल्ड: उन्होंने जिलाधीश की तुलना “एक ऐसे कछुए से की थी, जिसकी पीठ पर हाथी रूपी भारत सरकार खड़ी है”। [CG PSC(Asst. Proff.)2016]
DUDA का अध्यक्ष: कलेक्टर, DUDA (District Urban Development Agency) का पदेन अध्यक्ष होता है। [CG PSC(ADP)2019]
🏛️ सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department)
यह राज्य सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है। [CG PSC(ADJE)2020]
प्रमुख कार्य:
नीति संबंधी कार्य [CG Vyapam (DEAG)2018]
प्रशासनिक अधिकारियों की पदस्थापना और सेवाएँ [CG Vyapam (DEAG)2018]
शासकीय सेवकों की सेवाओं से संबंधित नियमों का निर्माण [CG Vyapam (DEAG)2018]
सतर्कता [CG Vyapam(DEAG)2018]
💻 छत्तीसगढ़ में एन.ई.जी.पी. (National e-Governance Plan)
एन.ई.जी.पी. के तहत छत्तीसगढ़ में कई परियोजनाएँ संचालित हैं [CG PSC(Pre)2022]:
स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क
कैपेसिटी बिल्डिंग
सिटीजन कॉन्टेक्ट सेंटर
एग्रीकल्चर-एग्रीस्नेट एंड पी.डी.एस.
कॉमन सर्विस सेंटर
स्टेट डेटा सेंटर
ई-प्रोक्यूरमेंट
नेशनल ई-गवर्नेन्स सर्विस डिलीवरी गेटवे एंड इंडिया पोर्टल
कमर्शियल टैक्स-कॉम्टैक्सनेट
पुलिस-सी.सी.टी.एन.एस.
जी.आई.एस. सिस्टम एंड लैंड रिकार्ड्स
ई-गवर्नेन्स (इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेन्स)
अर्थ: नागरिकों को सरकारी सूचना और सेवाएँ प्रदान करने के लिए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी का एकीकृत उपयोग।
उद्देश्य:
नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करना।
पारदर्शिता और जवाबदेहिता को बढ़ावा देना।
लोगों को सूचनाओं के माध्यम से सशक्त बनाना।
शासन की दक्षता में सुधार करना।
प्रकार: [CG PSC(Pre)202]
G2G: सरकार से सरकार (Government to Government)
G2C: सरकार से नागरिक (Government to Citizen)
G2B: सरकार से व्यापार (Government to Business)
G2E: सरकार से कर्मचारी (Government to Employees)
विशेष: छत्तीसगढ़ में ई-पंचायत प्रोजेक्ट का उद्घाटन 26 जनवरी 2005 को हुआ था। [CG PSC(ADPO)202]
🏛️ राज्य प्रशासन की संरचना
राज्य का प्रशासन तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित है:
कार्यपालिका (Executive) – अनुच्छेद 153-167
राज्यपाल
मुख्यमंत्री
मंत्रिपरिषद
महाधिवक्ता
विधायिका (Legislature) – अनुच्छेद 168-212
विधानमंडल (Legislature Body) – अनुच्छेद 168
विधान परिषद् (अनुच्छेद 169)
विधानसभा (अनुच्छेद 170)
राज्यपाल (अनुच्छेद 153)
न्यायपालिका (Judiciary) – अनुच्छेद 214-231
उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 214)
अधीनस्थ न्यायालय
📜 राज्य की विधायिका
परिचय: राज्य की विधायिका को विधानमंडल कहा जाता है। अनुच्छेद-168 के अनुसार, हर राज्य में एक विधानमंडल होगा। कुछ राज्यों में यह दो सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और राज्यपाल से मिलकर बनता है, जबकि कुछ में यह एक सदन (विधानसभा) और राज्यपाल से मिलकर बनता है।
छत्तीसगढ़ की स्थिति: छत्तीसगढ़ के विधानमंडल में केवल विधानसभा और राज्यपाल शामिल हैं। [CG PSC(Pre)2021]
वर्तमान स्थिति: भारत में केवल 6 राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) में विधान परिषद मौजूद है।
छत्तीसगढ़ में: छत्तीसगढ़ में विधान परिषद नहीं है। [CG PSC (ITI Pri.)2016]
गठन और उन्मूलन: अनुच्छेद-169 के तहत, यदि किसी राज्य की विधानसभा संकल्प पारित करे और संसद सहमत हो, तो उस राज्य में विधान परिषद की स्थापना या समाप्ति की जा सकती है। [CG PSC (ARO) 2022]
🏟️ छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Legislative Assembly) – अस्थायी/निम्न सदन
भवन का नाम: मिनीमाता भवन, रायपुर [CG PSC(SEE)2020][CG PSC(RDA)2014]
कुल सदस्य: 90 [CG Vyapam (MFA), (LOI), (Lect. Comm.) 2023]
आरक्षित सीटों की स्थिति:
परिसीमन से पूर्व: 44 सीटें (ST-34, SC-10) [CG Vyapam(CROS)2017]
वर्तमान में: 39 सीटें (ST-29, SC-10)
वर्ग
परिसीमन के पूर्व
परिसीमन के बाद
अनुसूचित जनजाति (ST)
34
29
अनुसूचित जाति (SC)
10
10
अनारक्षित (General)
46
51
एंग्लो इंडियन
01
—
कुल (वर्तमान)
91
90
नोट: 104वें संविधान संशोधन (2020) के बाद एंग्लो इंडियन समुदाय के मनोनयन का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है।
गणपूर्ति (Quorum): विधानसभा की कार्यवाही के लिए कम से कम 1/10 सदस्यों का होना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सीटों का 10% 9 सदस्य होता है, लेकिन नियम के अनुसार न्यूनतम 10 सदस्य होना अनिवार्य है। [CG PSC (ADH) 2022]
छत्तीसगढ़ विधानसभा का प्रथम सत्र
आरंभ: 14 दिसम्बर 2000 [CG PSC (Pre)2013]
अवधि: 14 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2000 तक (6 दिन)
स्थान: राजकुमार कॉलेज, रायपुर के जशपुर हॉल में
द्वितीय सत्र: 27 फरवरी 2001 को नव-निर्मित विधानसभा भवन में हुआ।
विघटन: 05 दिसम्बर 2003
प्रथम सत्र के प्रमुख पदाधिकारी
प्रथम प्रोटेम स्पीकर: श्री महेन्द्र बहादुर सिंह
प्रथम विधानसभा अध्यक्ष: श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल
प्रथम विधानसभा उपाध्यक्ष: श्री बनवारी लाल अग्रवाल
प्रथम नेता प्रतिपक्ष: श्री नंदकुमार साय
छत्तीसगढ़ विधानसभा: निर्वाचन एवं गठन का इतिहास
निर्वाचन वर्ष
निर्वाचन क्रम
विधानसभा का कार्यकाल
2003
प्रथम विधानसभा निर्वाचन
दूसरी विधानसभा (2003 – 2008)
2008
द्वितीय विधानसभा निर्वाचन
तृतीय विधानसभा (2008 – 2013)
2013
तृतीय विधानसभा निर्वाचन
चतुर्थ विधानसभा (2013 – 2018)
2018
चतुर्थ विधानसभा निर्वाचन
पांचवीं विधानसभा (2018-2023)
2023
पंचम विधानसभा निर्वाचन
छठवीं विधानसभा (2023 – अब तक) [CG PSC(TSI)2024]
** सीटों का आधार**: विधानसभा में सीटों की संख्या का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। [CG PSC(IMO)2020]
प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष)
नियुक्ति व शपथ: राज्यपाल द्वारा। [CG PSC (CMO)2019]
आधार: सदन के एक वरिष्ठ सदस्य को चुना जाता है। [CG PSC (CMO)2019]
कार्य: नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना और स्पीकर के निर्वाचन को संपन्न कराना। [CG PSC (CMO)2019]
विधान सभा
नाम
अवधि
प्रथम
श्री महेन्द्र बहादुर सिंह
01 नवम्बर 2000 से 14 दिसंबर 2000 (14 दिन)
द्वितीय
श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल
19 दिसम्बर 2003 से 22 दिसंबर 2003 (4 दिन)
तृतीय
श्री बोधराम कंवर
05 जनवरी 2009 (1 दिन)
चतुर्थ
श्री सत्यनारायण शर्मा
06 जनवरी 2014 (1 दिन)
पंचम
श्री रामपुकार सिंह
03 जनवरी 2019 से 04 जनवरी 2019 (2 दिन)
षष्ठम
श्री रामविचार नेताम
17 दिसम्बर 2023 से 19 दिसम्बर 2023 (3 दिन)
विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)
कार्य: सदन का संचालन और अनुशासन बनाए रखना।
चयन: विधानसभा के सदस्य अपने में से ही किसी एक को अध्यक्ष चुनते हैं (अनुच्छेद-178)। [CG PSC (Pre)2021]
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष (राज्य गठन के बाद)
क्र.
नाम
कार्यकाल
विशेष
1.
श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल
14.12.2000 से 19.12.2003
प्रथम विधानसभा अध्यक्ष [CG PSC(ADH)2014]
2.
श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय
22.12.2003 से 05.01.2009
भिलाई नगर विधायक
3.
श्री धरमलाल कौशिक
05.01.2009 से 06.01.2014
बिल्हा विधायक
4.
श्री गौरीशंकर अग्रवाल
06.01.2014 से 03.01.2019
कसडोल विधायक [CG PSC (RDA)2014]
5.
डॉ. चरणदास महंत
04.01.2019 से 18.12.2023
सक्ती विधायक
6.
डॉ. रमन सिंह
19.12.2023 से निरंतर…
राजनांदगांव विधायक
नोट: विधानसभा अध्यक्ष का कार्यकाल राज्य में सबसे लंबा होता है क्योंकि वह अगले अध्यक्ष के पद ग्रहण करने तक बना रहता है। [CG PSC(ADA)2020]
3. विधानसभा उपाध्यक्ष (Deputy Speaker)
यह तालिका छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्षों के कार्यकाल और विधानसभा क्रम को दर्शाती है।
क्रम
नाम
कार्यकाल
विधानसभा क्रम
01.
श्री बनवारीलाल अग्रवाल
28.03.2001 से 09.03.2003
प्रथम विधानसभा
02.
श्री धरमजीत सिंह
13.03.2003 से 05.12.2003
(खाली)
03.
श्री बद्रीधर दीवान
12.07.2005 से 11.12.2008
द्वितीय विधानसभा
04.
श्री नारायण चंदेल
02.08.2010 से 11.12.2013
तृतीय विधानसभा
05.
श्री बद्रीधर दीवान
23.07.2015 से 12.12.2018
चतुर्थ विधानसभा [CG Vyapam(RI)2018]
06.
श्री मनोज मंडावी
02.12.2019 से 16.10.2022
पंचम विधानसभा
07.
श्री संतराम नेताम
04.01.2023 से 03.12.2023
(खाली)
4. नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition)
यह सूची छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और उनके कार्यकाल की जानकारी देती है।
क्रम
नाम
कार्यकाल
विशेष
01.
श्री नंदकुमार साय
14/12/2000 से 15/12/2003
संस्कृत में शपथ लेने वाले प्रथम व्यक्ति [CGPSC(ADIHS)2016]
02.
श्री महेन्द्र कर्मा
22/12/2003 से 11/12/2008
दंतेवाड़ा विधायक [CGVyapam(Patwari)2019]
03.
श्री रवीन्द्र चौबे
05/01/2009 से 11/12/2013
साजा विधायक
04.
श्री टी.एस. सिंहदेव
06/01/2014 से 12/12/2018
अम्बिकापुर विधायक
05.
श्री धरमलाल कौशिक
04/01/2019 से 17/08/2022
बिल्हा विधायक
06.
श्री नारायण चंदेल
17/08/2022 से 04/12/2023
जांजगीर विधायक
07.
श्री चरणदास महंत
19/12/2023 से निरंतर…
सक्ती विधायक
विधानसभा सदस्य (Member of Legislative Assembly – MLA)
अर्हता (Eligibility):
उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए। [CG PSC (DAPR, MI,MO)2022]
उसकी आयु 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। [CG PSC (DAPR, MI,MO)2022]
विशेष (Oath):
सदस्य को संविधान की तीसरी अनुसूची में दिए गए प्रारूप के अनुसार शपथ लेना और उस पर हस्ताक्षर करना होता है। [CG PSC (DAPR, MI,MO)2022]
मनोनीत सदस्य (Nominated Member)
प्रावधान: अनुच्छेद 333 के तहत, यदि विधानसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं होता, तो राज्यपाल एक सदस्य को मनोनीत कर सकते थे।
समाप्ति: 104वें संविधान संशोधन (2020) के बाद एंग्लो इंडियन समुदाय से मनोनयन का यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है।
पूर्व मनोनीत सदस्य:
श्रीमती इंग्रिड क्रिस्टीम मेकलाउड: बिलासपुर (प्रथम विधानसभा)
कुमारी रोजलीन बेकमेन: जशपुर (द्वितीय विधानसभा)
श्री बर्नार्ड जोसेफ रोड्रिग्स: रायपुर (तृतीय और चतुर्थ विधानसभा)
छत्तीसगढ़ की छठवीं विधानसभा (2023) की वर्तमान स्थिति
🗺️ छत्तीसगढ़ विधानसभा सीट का आरक्षण वितरण (संभागवार)
यह तालिका दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक संभाग में विधानसभा की सीटें किस प्रकार आरक्षित हैं।
संभाग
अ. जाति (SC)
अ.ज.जाति (ST)
अनारक्षित (General)
कुल सीटें
1. सरगुजा
00
09
05
14
2. बिलासपुर
05
05
15
25
3. रायपुर
02
02
15
19
4. दुर्ग
03
02
15
20
5. बस्तर
00
11
01
12
कुल
10
29
51
90
नव निर्वाचित विधायकों की सूची (2023 चुनाव)
यहाँ विधानसभा क्षेत्र के अनुसार नव निर्वाचित विधायकों और उनकी पार्टी की जानकारी दी गई है।
क्र.
विधानसभा क्षेत्र
विधायक
पार्टी
01.
भरतपुर सोनहट (अ.ज.जा.)
श्रीमती रेणुका सिंह
भाजपा
02.
मनेन्द्रगढ़
श्री श्याम बिहारी जायसवाल
भाजपा
03.
बैकुंठपुर
श्री भईया लाल राजवाड़े
भाजपा
04.
प्रेमनगर
श्री भुलन सिंह मराबी
भाजपा
05.
भटगांव
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े
भाजपा
06.
प्रतापपुर (अ.ज.जा.)
श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते
भाजपा
07.
रामानुजगंज (अ.ज.जा.)
श्री राम विचार नेताम
भाजपा
08.
सामरी (अ.ज.जा.)
श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा
भाजपा
09.
लुण्ड्रा (अ.ज.जा.)
श्री प्रबोध मिंज
भाजपा
10.
अम्बिकापुर
श्री राजेश अग्रवाल
भाजपा
11.
सीतापुर (अ.ज.जा.)
श्री रामकुमार टोप्पो
भाजपा
12.
जशपुर (अ.ज.जा.)
श्रीमती रायमुनी भगत
भाजपा
13.
कुनकुरी (अ.ज.जा.)
श्री विष्णु देव साय
भाजपा
14.
पत्थलगांव (अ.ज.जा.)
श्रीमती गोमती साय
भाजपा
15.
लैलूंगा (अ.ज.जा.)
श्रीमती विद्यावती सिदार
कांग्रेस
16.
रायगढ
श्री ओमप्रकाश चौधरी
भाजपा
17.
सारंगढ़ (अ.जा.)
श्रीमती उत्तरी गनपत जांगडे
कांग्रेस
18.
खरसिया
श्री उमेश पटेल
कांग्रेस
19.
धरमजयगढ़ (अ.ज.जा.)
श्री लालजीत सिंह राठिया
कांग्रेस
20.
रामपुर (अ.ज.जा.)
श्री फूल सिंह राठिया
कांग्रेस
21.
कोरबा
श्री लखन लाल देवांगन
भाजपा
22.
कटघोरा
श्री प्रेमचंद पटेल
भाजपा
23.
पाली तानाखार (अ.ज.जा.)
श्री तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम
गोंगपा
24.
मरवाही (अ.ज.जा.)
श्री प्रणय कुमार मरपच्ची
भाजपा
25.
कोटा
श्री अटल श्रीवास्तव
कांग्रेस
26.
लोरमी
श्री अरूण साव
भाजपा
27.
मुंगेली (अ.जा.)
श्री पुन्नूलाल मोहले
भाजपा
28.
तखतपुर
श्री धर्मजीत सिंह
भाजपा
29.
बिल्हा
श्री धरम लाल कौशिक
भाजपा
30.
बिलासपुर
श्री अमर अग्रवाल
भाजपा
31.
बेलतरा
श्री सुशांत शुक्ला
भाजपा
32.
मस्तूरी (अ.जा.)
श्री दिलीप लहरिया
कांग्रेस
33.
अकलतरा
श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह
कांग्रेस
34.
जांजगीर-चांपा
श्री ब्यास कश्यप
कांग्रेस
35.
सक्ती
डॉ. चरणदास महंत
कांग्रेस
36.
चन्द्रपुर
श्री रामकुमार यादव
कांग्रेस
37.
जैजैपुर
श्री बालेश्वर साहू
कांग्रेस
38.
पामगढ़ (अ.जा.)
श्रीमती शेषराज हरवंश
कांग्रेस
39.
सराईपाली (अ.जा.)
श्रीमती चातुरी नंद
कांग्रेस
40.
बसना
श्री संपत अग्रवाल
भाजपा
41.
खल्लारी
श्री द्वारिकाधीश यादव
कांग्रेस
42.
महासमुन्द
श्री योगेश्वर राजू सिन्हा
भाजपा
43.
बिलाईगढ़ (अ.जा.)
श्रीमती कविता प्राण लहरे
कांग्रेस
44.
कसडोल
श्री संदीप साहू
कांग्रेस
45.
बलौदाबाजार
श्री टंकराम वर्मा
भाजपा
46.
भाटापारा
श्री इंद्र साव
कांग्रेस
47.
धरसीवा
श्री अनुज शर्मा
भाजपा
48.
रायपुर ग्रामीण
श्री मोती लाल साहू
भाजपा
49.
रायपुर नगर (पश्चिम)
श्री राजेश मूणत
भाजपा
50.
रायपुर नगर (उत्तर)
श्री पुरंदर मिश्रा
भाजपा
51.
रायपुर नगर (दक्षिण)
श्री सुनील सोनी
भाजपा
52.
आरंग (अ.जा.)
गुरू खुशवंत साहेब
भाजपा
53.
अभनपुर
श्री इंद्र कुमार साहू
भाजपा
54.
राजिम
श्री रोहित साहू
भाजपा
55.
बिन्द्रानवागढ़ (अ.ज.जा.)
श्री जनक ध्रुव
कांग्रेस
56.
सिहावा (अ.ज.जा.)
श्रीमती अंबिका मरकाम
कांग्रेस
57.
कुरूद
श्री अजय चन्द्राकर
भाजपा
58.
धमतरी
श्री ओंकार साहू
कांग्रेस
59.
संजारी बालोद
श्रीमती संगीता सिन्हा
कांग्रेस
60.
डौंडीलोहारा (अ.ज.जा.)
श्रीमती अनिला भेंडिया
कांग्रेस
61.
गुण्डरदेही
श्री कुंवरसिंह निषाद
कांग्रेस
62.
पाटन
श्री भूपेश बघेल
कांग्रेस
63.
दुर्ग ग्रामीण
श्री ललित चन्द्राकर
भाजपा
64.
दुर्ग शहर
श्री गजेन्द्र यादव
भाजपा
65.
भिलाई नगर
श्री देवेन्द्र यादव
कांग्रेस
66.
वैशाली नगर
श्री रिकेश सेन
भाजपा
67.
अहिवारा (अ.जा.)
श्री डोमनलाल कोर्सवाड़ा
भाजपा
68.
साजा
श्री ईश्वर साहू
भाजपा
69.
बेमेतरा
श्री दीपेश साहू
भाजपा
70.
नवागढ़ (अ.जा.)
श्री दयाल दास बघेल
भाजपा
71.
पंडरिया
श्रीमती भावना बोहरा
भाजपा
72.
कवर्धा
श्री विजय शर्मा
भाजपा
73.
खैरागढ़
श्रीमती यशोदा नीलाम्बर वर्मा
कांग्रेस
74.
डोगरगढ़
श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल
कांग्रेस
75.
राजनांदगांव
डॉ. रमन सिंह
भाजपा
76.
डोंगरगांव
श्री दलेश्वर साहू
कांग्रेस
77.
खुज्जी
श्री भोला राम साहू
कांग्रेस
78.
मोहला-मानपुर (अ.ज.जा.)
श्री इन्द्रशाह मंडावी
कांग्रेस
79.
अंतागढ़ (अ.ज.जा.)
श्री विक्रम उसेण्डी
भाजपा
80.
भानुप्रतापपुर (अ.ज.जा.)
श्रीमती सावित्री मनोज मण्डावी
कांग्रेस
81.
कांकेर (अ.ज.जा.)
श्री आशाराम नेताम
भाजपा
82.
केशकाल (अ.ज.जा.)
श्री नीलकंठ टेकाम
भाजपा
83.
कोन्डागांव (अ.ज.जा.)
श्रीमती लता उसेंडी
भाजपा
84.
नारायणपुर (अ.ज.जा.)
श्री केदार कश्यप
भाजपा
85.
बस्तर (अ.ज.जा.)
श्री लखेश्वर बघेल
कांग्रेस
86.
जगदलपुर
श्री किरण देव
भाजपा
87.
चित्रकोट (अ.ज.जा.)
श्री विनायक गोयल
भाजपा
88.
दन्तेवाड़ा (अ.ज.जा.)
श्री चैतराम अटामी
भाजपा
89.
बीजापुर (अ.ज.जा.)
श्री विक्रम मंडावी
कांग्रेस
90.
कोन्टा (अ.ज.जा.)
श्री कवासी लखमा
कांग्रेस
राज्य की कार्यपालिका (State Executive)
📖 संवैधानिक प्रावधान
विस्तृत वर्णन: भारतीय संविधान के भाग-6 में, अनुच्छेद-152 से अनुच्छेद-237 तक, राज्य सरकारों और उनकी कार्यप्रणाली का विस्तृत वर्णन किया गया है।
कार्य और शक्ति: राज्य की कार्यपालिका का मुख्य कार्य राज्य विधायिका द्वारा बनाए गए नियमों और कानूनों को लागू करना और राज्य प्रशासन को सुचारू रूप से संचालित करना है। कार्यपालिका के पास प्रदत्त विधान (delegated legislation) के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति भी होती है।
प्रमुख पदाधिकारी:
राज्यपाल
मुख्यमंत्री
मंत्रिपरिषद [CG Vyapam (MSI),(VFM)2021]
महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) [CG PSC(ADH)2022]
राज्य प्रशासन की राजनीतिक व्यवस्था (Political System)
राज्य प्रशासन का ढाँचा इस प्रकार है:
विधायिका (Legislature):
विधानमंडल (विधानसभा, विधान परिषद)
राज्यपाल
कार्यपालिका (Executive):
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, महाधिवक्ता
मंत्रिपरिषद
मंत्रालय
प्रशासनिक निकाय: सचिवालय, निदेशालय, संभाग, जिला, उपखण्ड
न्यायपालिका (Judiciary):
उच्च न्यायालय
जिला न्यायालय
सिविल न्यायालय
मुंसिफ अदालत
ग्राम न्यायालय
1. राज्यपाल (The Governor)
नियुक्ति की अवधारणा: भारत में राज्यपाल की नियुक्ति की अवधारणा कनाडा के संविधान से ली गई है। [CG PSC(ACF)2021]
प्रमुख:
राज्यपाल राज्य में कार्यपालिका का प्रमुख होता है। [CG Vyapam (CROS)2018]
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख भी होता है। [CGPSC(AP)2019][CG Vyapam(Mahalekhakar)2015]
संचालन: राज्य का समस्त प्रशासन राज्यपाल के नाम से संचालित किया जाता है (अनुच्छेद-166)।
कार्यालय: राज्यपाल का कार्यालय एक स्वतंत्र संवैधानिक कार्यालय होता है। [CG PSC(ITI Prin)2016]
राज्यपाल से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान
यह तालिका राज्यपाल से संबंधित प्रमुख अनुच्छेदों और उनके विषय-वस्तु की जानकारी प्रदान करती है।
अनुच्छेद
विषय-वस्तु
संबंधित PYQ
अनुच्छेद : 152
परिभाषा
[CG PSC(ADH) 2022, (ADP)2019]
अनुच्छेद : 153
राज्य का राज्यपाल (Governor of State)
अनुच्छेद : 154
राज्यपाल की कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive Authority of Governor)
[CG PSC (ADP)2019]
अनुच्छेद : 155
राज्यपाल की नियुक्ति (Appointment of Governor)
[CG PSC (ADP)2019]
अनुच्छेद : 156
राज्यपाल का कार्यकाल (Tenure of Governor)
[CG PSC (ADP)2019]
अनुच्छेद : 157
अर्हताएँ
अनुच्छेद : 158
पद की शर्तें
अनुच्छेद : 159
शपथ ग्रहण या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद : 160
कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन
अनुच्छेद : 161
क्षमादान शक्तियाँ
अनुच्छेद : 163
राज्यपाल की सहायता के लिए मंत्रिपरिषद् होगी।
[CG PSC (EAP)2016]
अनुच्छेद : 166
कार्यपालिका की समस्त कार्य राज्यपाल के नाम से संचालित होगी।
अनुच्छेद : 167
मुख्यमंत्री का कर्तव्य होगा कि समय-समय पर राज्यपाल को प्रशासन की स्थिति से अवगत कराये।
अनुच्छेद : 174
राज्य के विधानमंडल के सत्र आहूत, सत्रावसान व विधानसभा विघटन
अनुच्छेद : 175
राज्यपाल का सदन अथवा सदनों को संबोधित करने तथा उन्हें संदेश देने का अधिकार
अनुच्छेद : 176
राज्यपाल द्वारा विशेष अभिभाषण
[CGPSC(Pre)2013]
अनुच्छेद : 202(3)क
राज्यपाल की उपलब्धियाँ, भत्ते तथा उसके पद से संबंधित अन्य व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
अनुच्छेद : 213
विधायिका की अवकाश अवधि में राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति
अनुच्छेद : 217
राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल से सलाह लेना
अनुच्छेद : 233
जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
👑 छत्तीसगढ़ के राज्यपालों का क्रम (Governors of Chhattisgarh)
[CG Vyapam (NNRI)2018]
यहाँ छत्तीसगढ़ के गठन से लेकर अब तक के सभी राज्यपालों की सूची उनके कार्यकाल और महत्वपूर्ण विवरणों के साथ दी गई है:
1. श्री दिनेशानंदन सहाय
🗓️ कार्यकाल: 30.11.2000 से 01.06.2003 (2 साल 6 माह)
🗓️ कार्यकाल: 02.06.2003 से 24.01.2007 (3 साल 7 माह)
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: आर्मी
[CG PSC(Lib)2014] [CG Vyapam (FDFG)2024]
3. श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन
🗓️ कार्यकाल: 25.01.2007 से 23.01.2010 (2 साल 11 माह)
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: आई.पी.एस. (IPS)
📍 गृह राज्य: तमिलनाडु
[CG Vyapam (FDFG)2024]
4. श्री शेखर दत्त
🗓️ कार्यकाल: 23.01.2010 से 01.07.2014 (4 साल 5 माह)
⭐ विशेष: इन्होंने सबसे लंबा कार्यकाल पूरा किया और त्यागपत्र देकर पद छोड़ा।
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: आई.ए.एस. (IAS)
📍 गृह राज्य: मध्यप्रदेश
[CG PSC(Pre)2014] [CG Vyapam (FDFG)2024]
5. श्री राम नरेश यादव
🗓️ कार्यकाल: 02.07.2014 से 24.07.2014 (24 दिन)
⭐ विशेष: इन्होंने कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में सेवा दी।
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री (Ex-CM)
[CGVyapam (SMS)2014] [CG Vyapam (VIAD)2021]
6. श्री बलरामजी दास टंडन
🗓️ कार्यकाल: 25.07.2014 से 14.08.2018 (4 साल 21 दिन)
⭐ विशेष: पदावधि के दौरान निधन हो गया।
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: पूर्व उपमुख्यमंत्री
📍 गृह राज्य: पंजाब
[CG Vyapam (HW)2014]
7. श्रीमती आनंदी बेन पटेल
🗓️ कार्यकाल: 15.08.2018 से 28.07.2019 (11 माह 14 दिन)
⭐ विशेष: कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में सेवा दी।
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री (Ex-CM)
8. सुश्री अनुसुइया उइके
🗓️ कार्यकाल: 29.07.2019 से 23.02.2023 (3 साल 7 माह)
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: मध्यप्रदेश की मंत्री
📍 गृह राज्य: मध्यप्रदेश
[CG Vyapam (FDFG)2024]
9. श्री विश्व भूषण हरिचंदन
🗓️ कार्यकाल: 23.02.2023 से 30.07.2024 (1 साल 5 माह)
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल
📍 गृह राज्य: ओड़िशा
10. श्री रामेन डेका
🗓️ कार्यकाल: 31.07.2024 से निरंतर…
🤵 नियुक्ति से पूर्व का पद: असम से पूर्व सांसद
📍 गृह राज्य: असम
📜 राज्यपाल पद के संवैधानिक प्रावधान
राज्य का राज्यपाल (अनुच्छेद-153)
प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान है।
संसदीय व्यवस्था के कारण राज्यपाल, राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है।
राज्य की कार्यपालिका शक्ति (अनुच्छेद-154)
निहित: राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है। [CG PSC(Hathkargha)2011]
प्रयोग: इस शक्ति का प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।
राज्यपाल की नियुक्ति (अनुच्छेद-155)
नियुक्ति: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र (warrant) के माध्यम से की जाती है। [CGVyapam(Cross)2017][CGPSC(DAPR, MI, MO)2022]
सलाह: नियुक्ति केंद्रीय मंत्रि-परिषद की सलाह पर होती है।
परंपरा: आमतौर पर नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से सलाह ली जाती है (यह एक परंपरा है, संवैधानिक बाध्यता नहीं)। इसकी सिफारिश सरकारिया आयोग (1983) ने की थी।
विशेष: 7वें संविधान संशोधन (1956) के अनुसार, एक ही व्यक्ति को एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। [CGVyapam (FI)2013] [CG Vyapam(ECH)2015]
राज्यपाल की पदावधि (अनुच्छेद-156)
कार्यकाल: राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (Pleasure of the President) पद धारण करते हैं। [CGPSC(AP)2019][CGVyapam(CROS)2017]
त्यागपत्र: वह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपते हैं। [CGVyapam(CROS)2017]
अवधि: सामान्यतः कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन वे अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बने रहते हैं।
राज्यपाल पद हेतु अर्हताएं (अनुच्छेद-157)
वह भारत का नागरिक हो। [CGPSC(ARO) 2022]
उसने 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो। [CGPSC(ARO) 2022][CGVyapam(ECH)2013]
राज्यपाल के पद के लिए शर्तें (अनुच्छेद-158)
सदस्यता: वह संसद या राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए।
लाभ का पद: वह कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
वेतन भत्ते:
राज्यपाल के वेतन और भत्ते संसद द्वारा तय किए जाते हैं (वर्तमान में 3.5 लाख रुपये)।
यह राज्य की संचित निधि पर भारित होता है।
यदि एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल है, तो वेतन और भत्ते उन राज्यों के बीच उस अनुपात में बांटे जाएंगे जो राष्ट्रपति तय करें।
विशेषाधिकार:
कार्यकाल के दौरान उन पर कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती और न ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।
उनकी उपलब्धियाँ और भत्ते उनके कार्यकाल के दौरान कम नहीं किए जा सकते।
शपथ ग्रहण (Oath Taking) – अनुच्छेद-159
शपथ कौन दिलाता है?
राज्यपाल को पद की शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।
यदि मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थित हों, तो उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
** राज्यपाल की कार्य एवं शक्तियाँ (Powers and Functions of the Governor)**
राज्यपाल की शक्तियों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है:
कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)
विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)
न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)
शक्तियों का प्रयोग: अनुच्छेद-163 के अनुसार, राज्यपाल अपनी शक्तियों का प्रयोग मंत्रिपरिषद् की सलाह पर करता है। हालांकि, अपनी विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए उसे मंत्रिपरिषद् की सलाह की आवश्यकता नहीं होती। [CGPSC(DAPR, MI, MO)2022] [CGVyapam(Cros)2017][CGPSC(AP)2019]
मंत्रिपरिषद् का पुनर्विचार: राज्यपाल किसी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय को पुनर्विचार के लिए मंत्रिपरिषद् के समक्ष रखने के लिए कह सकता है। [CGPSC(DAPR, MI, MO)2022]
(1) कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive Powers)
मंत्रिपरिषद् का गठन (Formation of Council of Ministers)
अनुच्छेद-154: राज्य की समस्त कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है, और वह इसका प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।
अनुच्छेद-163(1): राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी।
अनुच्छेद-164(1):
राज्यपाल, विधानसभा चुनाव के बाद बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
मंत्रिपरिषद्, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करती है।
अनुच्छेद-164(3):
राज्यपाल, मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाता है (तीसरी अनुसूची के अनुसार)।
विशेष प्रावधान: छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखण्ड और ओड़िशा में, राज्यपाल द्वारा जनजाति कल्याण के लिए एक भारसाधक मंत्री (Minister in charge) की नियुक्ति की जाती है।
महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति
अनुच्छेद-243(k): राज्यपाल, राज्य निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करेगा।
अनुच्छेद-316, 317: राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के संबंध में शक्तियाँ:
प्रावधान
शक्ति
आधार
नियुक्ति
राज्यपाल
अनुच्छेद-316
त्यागपत्र
राज्यपाल को
अनुच्छेद-316
निलम्बित
राज्यपाल द्वारा
अनुच्छेद-317
पदमुक्ति
राष्ट्रपति द्वारा (कदाचार के आधार पर)
अनुच्छेद-317
अनुच्छेद-165:
राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखने वाले किसी व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा।
अन्य नियुक्तियाँ:
राज्यपाल, राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर कुलपतियों की नियुक्ति करता है।
प्रशासनिक अधिकार
अनुच्छेद-166: राज्य का संपूर्ण प्रशासन राज्यपाल के नाम से संचालित होता है।
अनुच्छेद-167: राज्यपाल, मुख्यमंत्री से प्रशासन से संबंधित सूचनाएँ मांग सकता है।
आपातकालीन अधिकार
अनुच्छेद-356: यदि राज्य का प्रशासन संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं चल रहा हो, तो राज्यपाल राष्ट्रपति से राष्ट्रपति शासन लागू करने का अनुरोध कर सकता है। इस दौरान, उसे मंत्रिपरिषद् की सलाह की आवश्यकता नहीं होती।
(2) वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)
अनुच्छेद-198: सभी धन विधेयक राज्यपाल की पूर्वानुमति से ही विधानसभा में प्रस्तुत किए जाते हैं।
अनुच्छेद-202: बजट (राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण) राज्यपाल की पूर्वानुमति से ही प्रस्तुत होता है और वही इसे प्रस्तुत करवाता है।
अनुच्छेद-203(3): विधानसभा में अनुदान की मांग राज्यपाल के नाम पर ही की जाती है। [CGVyapam(Ameen)2017]
अनुच्छेद-360: वित्तीय आपातकाल के दौरान, राज्य का प्रशासन राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार संचालित होता है। राज्य की आकस्मिक निधि पर भी राज्यपाल का नियंत्रण रहता है।
अनुच्छेद-243(i) & 243(y): राज्यपाल हर पाँच वर्ष में पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय समीक्षा के लिए एक वित्त आयोग का गठन करता है।
अप्रत्याशित व्यय: राज्यपाल, किसी अप्रत्याशित खर्च को पूरा करने के लिए राज्य की आकस्मिक निधि से अग्रिम राशि ले सकता है।
(3) विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
राज्यपाल के अध्यादेश जारी करने की शक्ति
भाग: 06
अध्याय: 04
अनुच्छेद: 213
प्रावधान: जब राज्य विधानमंडल का सत्र न चल रहा हो, तब राज्यपाल औपचारिक रूप से अध्यादेश (Ordinance) जारी कर सकता है, जो मुख्यमंत्री की सलाह पर आधारित होता है।
वापसी: राज्यपाल किसी भी समय अध्यादेश को वापस ले सकता है। [CGPSC(AP)2019]
(4) न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)
राज्यपाल की न्यायिक शक्तियाँ और कार्य इस प्रकार हैं:
अनुच्छेद-161: क्षमादान की शक्ति
प्रावधान: यदि किसी व्यक्ति को अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है, तो राज्यपाल उस दंड को क्षमा (Pardon), प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite), परिहार (Remission) या लघुकरण (Commutation) कर सकता है।
सीमाएँ:
राज्यपाल को मृत्यु दंड क्षमा करने का अधिकार नहीं है।
वह संघ सूची के विषयों के तहत दिए गए दंड या सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड को भी क्षमा नहीं कर सकता।
न्यायिक समीक्षा: यह राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति नहीं है, बल्कि वह मंत्रिपरिषद् की सलाह पर कार्य करता है। क्षमादान के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
अनुच्छेद-217: न्यायाधीशों की नियुक्ति में भूमिका
संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में, राष्ट्रपति संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है। [CG Vyapam (FI)2017]
अनुच्छेद-233: अधीनस्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति
राज्यपाल, लोक सेवा आयोग के परामर्श पर अधीनस्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
वह राज्य के उच्च न्यायालय के साथ विचार-विमर्श करके जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति भी करता है।
अनुच्छेद-234: न्यायिक आयोग से संबंधित नियुक्ति
राज्यपाल, राज्य न्यायिक आयोग से जुड़े लोगों (जिला न्यायाधीशों के अतिरिक्त) की नियुक्ति करता है। इन नियुक्तियों के लिए वह उच्च न्यायालय और राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श करता है।
(5) अन्य शक्तियाँ (Other Powers)
सत्राधिकार
अनुच्छेद-174: राज्यपाल विधानमंडल के सदनों का सत्र आहूत (Summon), सत्रावसान (Prorogue) और विधानसभा का विघटन (Dissolve) कर सकता है। [CGPSC(Registrar)2021][CGPSC(AP)2019]
अनुच्छेद-175 (2): इसके तहत, राज्यपाल सरकार के बहुमत को साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट (Floor Test) का आह्वान कर सकता है, यदि यह संदेह हो कि सरकार के पास पर्याप्त विधायकों का समर्थन नहीं है।
विशेष अभिभाषण
अनुच्छेद-176: विधानमंडल में राज्यपाल द्वारा विशेष अभिभाषण दिया जाता है। यह अभिभाषण मंत्रिपरिषद् द्वारा तैयार किया जाता है और यह आम चुनाव के बाद पहली बैठक और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र में होता है। [CGPSC(AP)2019] [CGPSC(Pre)2013]
मंत्रिपरिषद् का उत्तरदायित्व
अनुच्छेद-164 (2): राज्य की मंत्रिपरिषद् विधानमंडल के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
विनिश्चय (Disqualification of Members)
अनुच्छेद-192 (2): यदि विधानसभा के किसी सदस्य की योग्यता से संबंधित कोई प्रश्न उठता है, तो इसका निर्णय राज्यपाल द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। [CGPSC(Pre)2011][CGVyapam (Patwari)2016]
सदस्य मनोनयन
अनुच्छेद-171 (5): राज्यपाल, साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से विधान परिषद् में कुल सदस्यों के 1/6 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।
रिपोर्ट प्रस्तुत करना
राज्यपाल, राज्य के लेखों से संबंधित रिपोर्टें, जैसे राज्य वित्त आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग, और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को राज्य विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करता है।
कार्यवाही हेतु नियुक्ति
यदि विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों का पद रिक्त हो, तो राज्यपाल विधानसभा की कार्यवाही के संचालन के लिए किसी एक सदस्य को नियुक्त कर सकता है।
विधेयकों पर अनुमति (अनुच्छेद-200)
विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक पर राज्यपाल के पास चार विकल्प होते हैं:
स्वीकृति प्रदान करना: विधेयक को कानून बनने की अनुमति दे सकता है।
अस्वीकृत करना: विधेयक पर अपनी स्वीकृति देने से मना कर सकता है।
पुनर्विचार के लिए भेजना: विधेयक (धन विधेयक को छोड़कर) को सदन को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है।
राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना: विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर सकता है (अनुच्छेद-201 के तहत)। [CG PSC(Pre)2024]
नोट: यदि विधानमंडल पुनर्विचार के बाद विधेयक को दोबारा पारित करके राज्यपाल के पास भेजता है, तो राज्यपाल को उस पर अनुमति देनी ही होगी। [CG Vyapam (VSAM)2024]
स्वविवेक शक्तियाँ (Discretionary Powers)
ये वे शक्तियाँ हैं जिनका प्रयोग राज्यपाल बिना मंत्रिपरिषद् की सलाह के करता है।
किसी विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना (अनुच्छेद-200)। [CGPSC(ADI)2016]
राज्य सरकार के बारे में समय-समय पर राष्ट्रपति को प्रतिवेदन भेजना। [CG Vyapam(TET)2016]
राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना। [CG Vyapam (TET) 2016]
विधानसभा में बहुमत न होने की स्थिति में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति करना।
ये स्वविवेक शक्तियाँ नहीं हैं:
मंत्रियों की नियुक्ति और पदमुक्ति। [CG Vyapam (TET)2016]
महाधिवक्ता की नियुक्ति और पदमुक्ति। [CG Vyapam (TET)2016]
क्षमादान शक्ति का प्रयोग। [CG Vyapam (MS)2013]
अध्यादेश जारी करना। [CG PSC(ADI)2016]
राज्य लोकसेवा के अध्यक्ष की नियुक्ति। [CG PSC(ADI)2016]
सरकारिया आयोग की सिफारिशें
राज्यपाल पद के संदर्भ में सरकारिया आयोग ने निम्नलिखित सिफारिशें की थीं:
राज्यपाल उसी राज्य का निवासी नहीं होना चाहिए जहाँ उसे नियुक्त किया जा रहा है।
नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श को संवैधानिक रूप से अनिवार्य किया जाना चाहिए। [CGVyapam (SDAG)2018]
सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल को राजनीति में सक्रिय नहीं रहना चाहिए। [CGVyapam (SDAG)2018]
जो व्यक्ति चुनाव में हार गया हो, उसे राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। [CGVyapam (SDAG)2018]
👑 2. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री (Chief Minister of Chhattisgarh)
📜 मुख्यमंत्री से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद-163:
(i) राज्यपाल को उनके विवेकाधीन कार्यों के अलावा अन्य सभी कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् का गठन किया जाता है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करते हैं।
(ii) राज्यपाल के स्वविवेक से लिए गए निर्णयों की वैधता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
(iii) मंत्रियों द्वारा राज्यपाल को दी गई सलाह की किसी भी न्यायालय में समीक्षा नहीं की जा सकती। [CG PSC(Pre)2021]
अनुच्छेद-164:
(i) नियुक्ति: मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
(ii) सामूहिक जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद् विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
(iii) शपथ: राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाई जाती है।
(iv) सदस्यता: यदि कोई व्यक्ति विधानमंडल का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम 6 महीने तक ही मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है।
(v) वेतन और भत्ते: विधानसभा द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
अनुच्छेद-167:
इस अनुच्छेद में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का विवरण दिया गया है। [CG PSC (EAP)2018]
मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह समय-समय पर राज्य के प्रशासन की स्थिति से राज्यपाल को अवगत कराएं।
91वें संविधान संशोधन (2003) के अनुसार, किसी भी राज्य में मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती, और न्यूनतम संख्या 12 होगी। [CG PSC(Pre)2024]
⚙️ नियुक्ति प्रक्रिया (अनुच्छेद-164(i))
द्वारा: राज्यपाल द्वारा।
आधार: राज्यपाल विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं। मुख्यमंत्री का चयन राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) से हो सकता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति सदस्य नहीं है, तो उसे 6 माह के भीतर सदस्यता ग्रहण करनी होती है।
शपथ (अनुच्छेद-164(iii)): राज्यपाल द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है।
कार्यकाल (अनुच्छेद-164(iv)): अधिकतम 5 वर्ष, या जब तक विधानसभा में बहुमत प्राप्त हो।
अर्हताएँ (अनुच्छेद-164): मुख्यमंत्री को विधानसभा का सदस्य होना चाहिए, अतः उसके लिए वही योग्यताएँ हैं जो एक विधायक के लिए निर्धारित हैं।
👤 मुख्यमंत्री की भूमिका
वह संसदीय व्यवस्था में राज्य का वास्तविक प्रमुख होता है। [CG PSC (ITI Prin)2022]
वह राज्य की कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख माना जाता है। [CG PSC(MI)2010]
छत्तीसगढ़ शासन का सर्वोच्च कार्यकारी प्राधिकारी है (संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होते हैं)।
राज्य के अधिकांश कार्यकारी अधिकार मुख्यमंत्री के पास ही निहित होते हैं। [CG VS(AG-III)2022]
वह नीति आयोग के समक्ष राज्य की योजनाओं का प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। [CG PSC(ADA)2020]
नोट: वर्तमान में, छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग का अध्यक्ष मुख्यमंत्री नहीं है।
🏅 पदेन अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री निम्नलिखित निकायों के पदेन अध्यक्ष होते हैं:
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (1 अगस्त 2007) [CG PSC(ADA)2023,(ADR)2019]
चिप्स (CHiPS – छ.ग. प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन संस्था)
राज्य निवेश संवर्धन बोर्ड [CG PSC(ACF)2017, (TSI)2024]
⭐ विशेष तथ्य
प्रशासन का संचालन विभिन्न स्तर के नौकरशाहों द्वारा किया जाता है। [CG PSC(MI)2010]
सरकारिया आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्यपाल की नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्री से परामर्श किया जाना चाहिए। [CG PSC(ADR)2019]
मुख्यमंत्री, संसदीय सचिवों को शपथ दिलाता है। [CG PSC(ADA)2020(CMO)2019]
मुख्यमंत्री के वेतन और भत्तों का निर्धारण राज्य का विधानमंडल करता है। [CG PSC(LAW) 2022]
सत्ता (Authority) को प्रशासनिक संगठनों की आत्मा कहा जाता है। [CG PSC(SEE)2017]
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री
नाम
कार्यकाल(s)
स्व. श्री अजीत जोगी
2000–2003
डॉ. रमन सिंह
2003, 2008, 2013
श्री भूपेश बघेल
2018–2023
श्री विष्णुदेव साय
2023–अब तक
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़ क्षेत्र से)
क्र.
नाम
कार्यकाल
1.
पं. रविशंकर शुक्ल
1 नवम्बर 1956 से 31 दिसम्बर 1956 तक
2.
श्री द्वारिका प्रसाद मिश्र
1963 से 1967 तक
3.
श्री राजा नरेश चन्द्र
13 मार्च 1969 से 25 मार्च 1969 तक (13 दिन)
4.
श्री श्यामाचरण शुक्ल
1969-72, 1975-77, 1989-90
5.
श्री मोतीलाल वोरा
1985-88, 1989 (25 जनवरी से 08 दिसम्बर)
नोट: द्वारिका प्रसाद मिश्र मूल रूप से जबलपुर के थे, लेकिन उन्होंने छत्तीसगढ़ के कसडोल विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ा था।
🤝 3. राज्य का मंत्रिपरिषद (State Council of Ministers)
📖 गठन एवं नियुक्ति
संवैधानिक आधार (अनुच्छेद 163 (1)): राज्यपाल को उनके स्वविवेकीय कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों में सहायता प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होगा।
नियुक्ति प्रक्रिया:
नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति होती है। यह राज्यपाल की स्वविवेक शक्ति नहीं है।
विभागों का बँटवारा: मुख्यमंत्री के परामर्श पर राज्यपाल द्वारा मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण किया जाता है।
शपथ: मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है।
वेतन, भत्ते व परिलब्धियाँ:
मंत्रियों के वेतन और भत्तों का निर्धारण विधानसभा द्वारा किया जाता है। [CG PSC(Pre)2021]
सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित निर्णय अनुच्छेद-195 के तहत होता है।
💰 वेतन और भत्ते की संरचना
यह तालिका विभिन्न पदाधिकारियों के वेतन और भत्तों का विवरण देती है।
पदनाम
वेतन (मासिक)
वेतन एवं भत्ते (कुल मासिक)
1. मुख्यमंत्री
50,000 रु/-
2,05,000 रु/-
2. विधानसभा अध्यक्ष
47,000 रु/-
1,95,000 रु/-
3. मंत्रिगण (कैबिनेट मंत्री)
45,000 रु/-
1,90,000 रु/-
4. नेता प्रतिपक्ष
45,000 रु/-
1,90,000 रु/-
5. राज्य मंत्रिगण
35,000 रु/-
1,80,000 रु/-
6. विधानसभा उपाध्यक्ष
35,000 रु/-
1,80,000 रु/-
7. संसदीय सचिव
30,000 रु/-
1,75,000 रु/-
8. विधायक
20,000 रु/-
1,60,000 रु/-
नोट: उपरोक्त वेतन के अलावा, दूरभाष भत्ता और चिकित्सा भत्ता जैसी अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
👥 मंत्रिमंडल का आकार
अधिकतम संख्या: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 13 हो सकती है।
संवैधानिक प्रावधान: यह सीमा 91वें संविधान संशोधन (2003) के तहत तय की गई है, जिसके अनुसार राज्य में अधिकतम 13 मंत्री हो सकते हैं। [CG Vyapam (RI)2018]
🗂️ मंत्रिमंडल का प्रकार (Types of Ministers)
कैबिनेट मंत्री [CG PSC (ITI Prin.)2016]
राज्यमंत्री [CG PSC (ITI Prin.)2016]
संसदीय सचिव [CG PSC (ITI Prin.)2016]
नोट: छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में उप-मंत्री और छाया मंत्री का पद नहीं है। संसदीय सचिव को शपथ मुख्यमंत्री द्वारा दिलाई जाती है।
⏳ कार्यकाल (Tenure)
कोई भी मंत्री, मंत्रिपरिषद में राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर बना रहता है।
मंत्रिपरिषद का कार्यकाल तब तक जारी रहता है जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो (जो अधिकतम 5 वर्ष हो सकता है)।
किसी भी मंत्री को मुख्यमंत्री के परामर्श पर राज्यपाल द्वारा बर्खास्त किया जा सकता है।
यदि कोई मंत्री लगातार छः महीने तक राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रहता है, तो वह मंत्री पद पर नहीं रह सकता।
मंत्रालय (Ministry) एवं गृह विभाग
मंत्रालय: छत्तीसगढ़ में 22 सचिवालय विभागों के अंतर्गत 48 प्रशासकीय विभाग कार्यरत हैं।
उदाहरण: गृह मंत्रालय एक सचिवालय है जिसके अधीन पुलिस विभाग, जेल विभाग, और नगर सैनिक विभाग आते हैं। इस कारण सचिवालय की संख्या कम होती है जबकि विभागों की संख्या अधिक होती है।
गृह मंत्रालय – छत्तीसगढ़
अधीन विभाग: पुलिस विभाग, जेल विभाग और होमगार्ड गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं। [CG PSC(ADPO)2013]
उत्तरदायित्व: राज्य के भीतर कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की होती है।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री
शहीद श्री नंदकुमार पटेल [CG (Vidhansabha)2021]
श्री बृजमोहन अग्रवाल
श्री रामविचार नेताम
श्री ननकीराम कंवर
श्री रामसेवक पैंकरा
श्री ताम्रध्वज साहू
श्री विजय शर्मा (वर्तमान में)
विशेष तथ्य
प्रभारी मंत्री के कार्य: जिले के विकास कार्यों का अनुश्रवण (monitoring) करना। [CG Vyapam (Field Man)2018]
वित्त मंत्री का त्यागपत्र: यदि बजट विधानसभा में प्रस्तुत होने से पहले ही लीक हो जाए, तो वित्त मंत्री को त्यागपत्र देना होता है। [CG PSC (Pre)2016]
राज्य शहरी विकास अभिकरण: इसका अध्यक्ष विभागीय मंत्री होता है। [CG PSC(Lib&SO)2019]
प्रथम मंत्रिमंडल का गठन: 12 दिसम्बर 2000 को हुआ था।
प्रशासनिक पद सोपान (Administrative Hierarchy)
प्रशासनिक इकाई (संख्या)
प्रशासनिक प्रमुख
सामान्य प्रशासन
मुख्य सचिव
संभाग (05)
संभागायुक्त (कमिश्नर)
जिला (33)
जिलाधीश (कलेक्टर) (जिला प्रशासन की आधारभूत इकाई [CG PSC(ADP)2019])
उपखण्ड/अनुविभाग (117)
उपखण्ड अधिकारी (एस.डी.एम./एस.डी.ओ.)
तहसील (251)
तहसीलदार
राजस्व क्षेत्र
राजस्व निरीक्षक (आर.आई.)
पटवारी हल्का
पटवारी
गाँव
कोतवाल
**👥 छत्तीसगढ़ मंत्री परिषद् (Chhattisgarh Council of Ministers)
शपथ ग्रहण:
मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री का शपथ: 13 दिसम्बर 2023
मंत्री परिषद् का शपथ: 22 दिसम्बर 2023
**कैबिनेट मंत्रियों की सूची और उनके विभाग
यहाँ छत्तीसगढ़ के वर्तमान कैबिनेट मंत्रियों, उनके विधानसभा क्षेत्रों, और उन्हें आवंटित विभागों का विवरण दिया गया है।
क्र.
मंत्री का नाम (विधानसभा क्षेत्र)
विभाग
1.
श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (कुनकुरी)
सामान्य प्रशासन, खनिज संसाधन, ऊर्जा, जनसंपर्क, वाणिज्यिक कर (आबकारी), परिवहन, एवं अन्य विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित न हों।
2.
श्री अरूण साव, उप मुख्यमंत्री (लोरमी)
लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विधि और विधायी कार्य, एवं नगरीय प्रशासन।
3.
श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री (कवर्धा)
गृह एवं जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी।
4.
श्री ओपी चौधरी, मंत्री (रायगढ़)
वित्त, वाणिज्यिक कर, आवास एवं पर्यावरण, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी।
5.
श्री रामविचार नेताम, मंत्री (रामानुजगंज)
आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास, कृषि विकास, एवं किसान कल्याण।
6.
श्री केदार कश्यप, मंत्री (नारायणपुर)
वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास एवं सहकारिता, एवं संसदीय कार्य मंत्री।
7.
श्री लखनलाल देवांगन, मंत्री (कोरबा)
वाणिज्य और उद्योग, एवं श्रम।
8.
श्री दयालदास बघेल, मंत्री (नवागढ़)
खाद्य, नागरिक आपूर्ति, एवं उपभोक्ता संरक्षण।
9.
श्री श्यामबिहारी जायसवाल, मंत्री (मनेन्द्रगढ़)
लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, एवं बीस सूत्रीय कार्यान्वयन।
10.
श्री टंकराम वर्मा, मंत्री (बलौदाबाजार)
खेलकूद एवं युवा कल्याण, राजस्व, एवं आपदा प्रबंधन।
11.
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मंत्री (भटगांव)
महिला एवं बाल विकास, तथा समाज कल्याण।
**⚖️ छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता (Advocate General of Chhattisgarh)
**अनुच्छेद-165: राज्य के महाधिवक्ता
नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा की जाती है।
योग्यता: उम्मीदवार को उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य होना चाहिए।
कार्यकाल: राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (pleasure of the governor)।
वेतन: राज्यपाल द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं।
विशेष: महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है।
कार्य: उनका कर्तव्य है कि वे कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह दें और ऐसे कानूनी कर्तव्यों का पालन करें जो राज्यपाल उन्हें सौंपें।
**अनुच्छेद-177: महाधिवक्ता के अधिकार
महाधिवक्ता को राज्य के विधानसभा एवं विधान परिषद की कार्यवाही में बोलने या भाग लेने का अधिकार होता है, लेकिन मत देने का अधिकार नहीं होता। [CG Vyapam (MVS) 2018]
उन्हें विधानमंडल की किसी भी समिति की कार्यवाही में भी बोलने और भाग लेने का अधिकार होता है, जिसमें उन्हें सदस्य के रूप में नामित किया गया हो।
**छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ताओं की सूची
क्र.
महाधिवक्ता
कार्यकाल
विशेष
1.
श्री रवीन्द्र श्रीवास्तव
15/11/2000 से 04/12/2003
प्रथम महाधिवक्ता
2.
श्री रवीश चन्द्र अग्रवाल
22/12/2003 से 31/08/2007
–
3.
श्री प्रशान्त मिश्रा
03/09/2007 से 30/11/2009
छ.ग. उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे।
4.
श्री देवराज सिंह सुराणा
15/12/2009 से 21/06/2012
–
5.
श्री संजय के. अग्रवाल
25/06/2012 से 11/09/2013
–
6.
श्री जुगल किशोर गिल्डा
23/01/2014 से 01/01/2019
सबसे लंबा कार्यकाल
7.
श्री कनक तिवारी
02/01/2019 से 31/05/2019
सबसे छोटा कार्यकाल
8.
श्री सतीश चंद्र वर्मा
01/06/2019 से 05/12/2023
–
9.
प्रफुल्ल एन. भारत
10/01/2024 से निरंतर
–
**💰 छत्तीसगढ़ के विभिन्न पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते
**राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State)
भारित व्यय (Charged Expenditure):
राज्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन व भत्ता [CG PSC (ARO) 2022]
राज्य विधानसभा के अध्यक्ष का वेतन और भत्ता [CG PSC (ARO) 2022]
राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष का वेतन और भत्ता [CG PSC (ARO) 2022]