राजनांदगांव में पहले छात्र हड़ताल का नेतृत्व किया।
1909
सरस्वती पुस्तकालय की स्थापना राजनांदगांव में की।
1920
बी.एन.सी. मिल हड़ताल (कुल 36 दिन) का सफल नेतृत्व किया।
1923
झण्डा सत्याग्रह के दौरान, प्रांतीय समिति ने इन्हें दुर्ग जिले से सत्याग्रही भेजने की जिम्मेदारी सौंपी।
1930
“पट्टा मत लो” और “लगान मत दो” जैसे आंदोलनों का संचालन किया।
1933
महाकौशल प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के मंत्री के रूप में पदभार संभाला और 1937 तक इस पद पर रहते हुए पूरे प्रदेश में कांग्रेस को फिर से संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
1936
कांग्रेस की टिकट पर मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए सदस्य के रूप में चुने गए।
1937
छत्तीसगढ़ एजुकेशन सोसायटी के संस्थापक बने।
1938
छत्तीसगढ़ के प्रथम महाविद्यालय ‘छत्तीसगढ़ महाविद्यालय’ का शुभारंभ किया।
1945
छत्तीसगढ़ में भूदान और सर्वोदय आंदोलन का नेतृत्व संभाला।
1947
छत्तीसगढ़ बुनकर सहकारी संघ की स्थापना की।
1950
कौंसिल ऑफ एक्शन इन छत्तीसगढ़ स्टेट के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
1951
जे.बी. कृपलानी द्वारा स्थापित कृषक मजदूर प्रजा पार्टी में शामिल हुए।
🔑 विशेष तथ्य
🏆 सम्मान: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनके सम्मान में सहकारिता के क्षेत्र में एक पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
💪 नेतृत्व: वे राज्य के पहले मजदूर संघ के नेता के रूप में जाने जाते हैं। [CG Vyapam (Panjiyan lipic)2013]
⚖️ त्याग: राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान, उन्होंने रायपुर में अपनी वकालत का अभ्यास त्याग दिया था। [CG PSC(RDD)2015]
🤵 पं. रविशंकर शुक्ल
🗓️ जन्म तिथि: 2 अगस्त 1877, सागर (मध्यप्रदेश)
⚫️ देहांत: 31 दिसंबर 1956
💡 उपाधि: आधुनिक मध्यप्रदेश के निर्माता।
📌 महत्वपूर्ण घटनाक्रम और योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1912
कान्यकुब्ज सभा की स्थापना की।
1921
अंग्रेजी शिक्षा का बहिष्कार करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना करवाई।
1923
रायपुर जिला परिषद् के सदस्य चुने गए और बाद में अध्यक्ष भी बनाए गए।
15 अप्रैल 1930
रायपुर में सोडा (NaOH) और एच.सी.एल. (HCl) का उपयोग करके नमक बनाकर कानून का उल्लंघन किया।
1932
द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम डिक्टेटर के रूप में नियुक्त हुए।
1936
हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘महाकौशल’ का प्रकाशन आरंभ किया।
1937
सी.पी. एवं बरार प्रांत के खरे मंत्रिमण्डल में शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला।
1938
इसी पद पर रहते हुए उन्होंने ‘विद्या मंदिर योजना’ नामक एक नई शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत की।
[CG PSC (Pre)2023]
1940
नारायण भास्कर खरे के त्यागपत्र के बाद मध्य प्रांत के मुख्यमंत्री बने।
1942
इन्हें छत्तीसगढ़ से पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही होने का गौरव प्राप्त है। 8 अगस्त 1942 को कांग्रेस के बॉम्बे अधिवेशन में हिस्सा लिया।
1946
सी.पी. (केन्द्रीय प्रांत) एवं बरार प्रांत के दोबारा मुख्यमंत्री बने।
1947
स्वतंत्रता प्राप्ति के दिन, पं. रविशंकर शुक्ल ने नागपुर के सीताबर्डी में ध्वजारोहण किया।
1951
रायपुर से ‘महाकौशल’ नामक दैनिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।
1 नवम्बर 1956
नवगठित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने और 31 दिसम्बर 1956 तक इस पद पर रहे।
[CG PSC (ADHIS)2014]
🔑 विशेष तथ्य
🏆 सम्मान: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अभिनव प्रयासों के लिए पं. रविशंकर शुक्ल पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
🇮🇳 योगदान: तिलक स्वराज फंड के लिए वामन राव लाखे के सहयोग से, शुक्ल जी ने केवल 5 दिनों में 21 हजार रुपये की राशि एकत्र की थी।
👨⚕️ डॉ. खूबचंद बघेल
📍 जन्म स्थल: पथरी ग्राम (रायपुर), वर्ष 1900 ई.
⚫️ देहांत: 22 फरवरी 1969
💡 पहचान: इन्हें छत्तीसगढ़ के कल्पनाकार के रूप में जाना जाता है। [CG Vyapam (SEAT)2023]
📌 महत्वपूर्ण घटनाक्रम और योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1931
सरकारी पद से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में शामिल हुए।
1942
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, इस क्षेत्र के अन्य नेताओं के साथ डॉ. बघेल को भी गिरफ्तार किया गया। उनकी धर्मपत्नी, राजकुंवर देवी भी उनके साथ 6 माह के लिए जेल गईं।
[CG PSC(Pre)2024]
1950
आचार्य कृपलानी के आह्वान पर कृषक मजदूर पार्टी में शामिल हो गए।
1956
राजनांदगांव में ‘छत्तीसगढ़ महासभा’ का गठन किया।
1967
राजनांदगांव में ‘छत्तीसगढ़ भ्रातृसंघ’ की स्थापना की। राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने वाले प्रथम सांसद बने।
🔑 विशेष तथ्य
✍️ रचनाएं: उनकी प्रमुख रचनाओं में करम छंड़हा, ऊँच-नीच, लेड़गा सुजान, बेटवा बिहाव, और छत्तीसगढ़ का स्वाभिमान शामिल हैं।
🏆 सम्मान: प्रदेश सरकार द्वारा उनकी स्मृति में कृषि के क्षेत्र में डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
🤵 पंडित सुंदरलाल शर्मा
🗓️ जन्म: 21 दिसम्बर 1881, चमसूर (राजिम, गरियाबंद)
⚫️ देहांत: 28 दिसम्बर 1940
👪 पारिवारिक जानकारी: पिता – श्री जियालाल त्रिपाठी, माता – देवती।
💡 उपनाम: इन्हें ‘छत्तीसगढ़ के गांधी’, ‘छत्तीसगढ़ में जनजागरण तथा राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूत’, और ‘छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्नदृष्टा व संकल्पनाकार’ के रूप में जाना जाता है। [CG PSC(Registar)2017], [CG PSC(SEE)2020,(AP)2016]
📌 महत्वपूर्ण घटनाक्रम और योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
1906
‘समित्र मण्डल’ की स्थापना की।
1918
छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम कल्पना करते हुए अपने हाथ से बनाया हुआ एक पांडुलिपि नक्शा तैयार किया। साथ ही, ‘जनेऊ धारण कार्यक्रम’ का आयोजन भी करवाया।
1920
कंडेल नहर सत्याग्रह का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके ही आग्रह पर 20 दिसम्बर 1920 को महात्मा गांधी पहली बार छत्तीसगढ़ आए थे।
1922
जेल में रहते हुए ‘श्री कृष्ण जन्मस्थली’ नामक 18 पृष्ठों की एक पत्रिका लिखी। छत्तीसगढ़ के प्रथम जंगल सत्याग्रह (सिहावा जंगल सत्याग्रह) में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
1924-25
रायपुर शहर में सतनामी आश्रम की स्थापना की।
1925
राजिम में अस्पृश्यता के विरुद्ध एक सशक्त आंदोलन चलाया।
🔑 विशेष तथ्य
🧠 गुरुतुल्य: पंडित सुंदरलाल शर्मा ने महात्मा गांधी से भी पहले अछूतोद्धार का कार्य प्रारंभ कर दिया था, इसी कारण गांधी जी ने उन्हें अपना “गुरु” कहकर सम्मानित किया। [CG Vyapam (EAE) 2017]
🤝 सहयोगी: उन्होंने बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और नारायणराव मेघावाले के साथ मिलकर कंडेल नहर सत्याग्रह का नेतृत्व किया था। [CG PSC(RDA)2014]
🏆 सम्मान: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा साहित्य और आंचलिक साहित्य के क्षेत्र में ‘पंडित सुन्दरलाल शर्मा साहित्य लेखन पुरस्कार’ प्रदान किया जाता है।
🇮🇳 पहचान: वे छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
🤵 ई. राघवेन्द्र राव
🗓️ जन्म: 4 अगस्त, 1889 को कामठी (नागपुर) में हुआ, परन्तु बाद में वे बिलासपुर में आकर बस गए।
⚫️ देहांत: 1942 में दिल्ली में हुआ।
📌 महत्वपूर्ण घटनाक्रम और योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1914
इंग्लैण्ड से बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त कर बिलासपुर लौटे।
1916
बिलासपुर नगर पालिका और डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अध्यक्ष के पद पर चुने गए।
1927
राव साहब ने मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
[CG PSC(Pre)2022]
1937
वे अस्थायी तौर पर मध्य प्रांत के गवर्नर भी नियुक्त हुए।
1941
वे वायसराय की कार्यकारिणी में मनोनीत होने वाले छत्तीसगढ़ के एकमात्र सदस्य बने।
[CG PSC(IMO)2020]
विशेष
द्वितीय विश्व युद्ध के समय वे भारत सरकार में छत्तीसगढ़ से रक्षा सदस्य के पद पर थे।
⚫️ फांसी: 10 दिसम्बर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक पर दी गई। [CG PSC(Pre)2020], [CG Vyapam(HW)2024]
👨👩👧👦 जाति: वे बिंझवार जनजाति से थे। [CGPSC(EAP)2016]
💡 उपाधि: उन्हें छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन का ‘प्रथम शहीद’ माना जाता है। [CG PSC(Pre)2020]
🔑 महत्वपूर्ण तथ्य
🏛️ स्मारक: महासमुंद में स्थित कोडार बांध का नाम ‘वीर नारायण सिंह बांध’ रखा गया है। रायपुर के परसदा में ‘वीरनारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ का निर्माण किया गया है।
⛓️ गिरफ्तारी और फरारी:
उन्हें पहली बार 24 अक्टूबर 1856 को गिरफ्तार किया गया था। [CG PSC(Asst. G-3)2018]
28 अगस्त 1857 को वे जेल से एक सुरंग बनाकर भाग निकलने में सफल हुए।
💪 सेना का गठन: सोनाखान में उन्होंने अपनी सेना तैयार करना शुरू किया और कुछ ही समय में 500 किसानों और आदिवासी युवाओं की एक सेना बना ली। स्मिथ के नेतृत्व वाली अंग्रेजी सेना ने उन्हें पकड़ लिया।
🏆 सम्मान: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी उत्थान के क्षेत्र में उनके नाम पर ‘वीरनारायण सिंह पुरस्कार’ प्रदान किया जाता है।
🤵 वामनराव लाखे
🗓️ जन्म: 1872, रायपुर
💡 उपाधि: जनता द्वारा उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि दी गई।
🌱 जनक: उन्हें रायपुर जिले में ‘सहकारिता का जनक’ माना जाता है।
🎖️ उपाधि का त्याग: ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘रायसाहब’ की उपाधि से सम्मानित किया था। असहयोग आंदोलन के दौरान, उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई यह उपाधि त्याग दी, जिसके बाद जनता ने उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि से नवाजा।
📌 प्रमुख योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1913
रायपुर में ‘को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक’ की स्थापना की।
[CG Vyapam (Asst. Man.)2015]
1945
बलौदाबाजार में ‘किसान को-ऑपरेटिव राइस मिल’ की स्थापना की।
🤵 यतियतनलाल जैन
🗓️ जन्म: 1894
📍 जन्म स्थान: बीकानेर (राजस्थान)
⚫️ देहांत: 1976
💡 पहचान: इन्हें छत्तीसगढ़ में ‘अहिंसा के अग्रदूत’ के रूप में जाना जाता है।
📌 प्रमुख योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1921
कांग्रेस की विधिवत सदस्यता ग्रहण की।
1942
उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के वर्धा प्रस्ताव में भाग लिया था।
विशेष
महासमुंद में ‘विवेकवर्धन आश्रम’ की स्थापना की।
[CG PSC(Pre)2014]
सम्मान
राज्य शासन द्वारा हर साल उनकी स्मृति में अहिंसा के क्षेत्र में ‘यतियतन लाल जैन पुरस्कार’ दिया जाता है।
⚔️ हनुमान सिंह
💡 उपाधि: इन्हें ‘छत्तीसगढ़ का मंगल पाण्डेय’ कहा जाता है।
👨✈️ पद: वे ब्रिटिश सेना की रायपुर स्थित तीसरी बटालियन में ‘मैग्जीन लश्कर’ के पद पर नियुक्त थे।
📌 1857 की क्रांति में भूमिका
🔥 विद्रोह: 1857 की क्रांति के समय, हनुमान सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर 18 जनवरी 1858 को अंग्रेज अधिकारी सार्जेन्ट सिडवेल की हत्या कर दी। [CG PSC (MI)2014]
⚖️ परिणाम: उनके 17 साथियों को 22 जनवरी 1858 को फांसी दे दी गई, लेकिन हनुमान सिंह कभी भी अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आए। [CG PSC (CMO)2019]
🏆 सम्मान: छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खेल के क्षेत्र में प्रशिक्षकों तथा निर्णायकों को ‘हनुमान सिंह पुरस्कार’ प्रदान किया जाता है।
🤵 घनश्याम सिंह गुप्त
🗓️ जन्म: 1885, दुर्ग में
⚫️ देहांत: 1976
💡 उपाधि: इन्हें छत्तीसगढ़ का ‘विधान पुरुष’ कहा जाता है।
📌 प्रमुख योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1917
दुर्ग जिले में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और होमरूल लीग की एक शाखा स्थापित की।
1933
नवम्बर 1933 में गांधी जी के छत्तीसगढ़ आगमन पर, वे दुर्ग में गुप्त जी के निवास पर ठहरे थे।
[CG PSC(Pre)2024]
1937
सन् 1937 में मध्य प्रांत विधानसभा के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए।
अन्य
वे आर्य समाज से भी जुड़े रहे, ‘छत्तीसगढ़ सेवक संघ’ की स्थापना की और दुर्ग में ‘तुलाराम आर्य कन्या विद्यालय’ की भी स्थापना की।
🏹 गेंदसिंह
🏞️ जमींदारी: परलकोट
🔥 विद्रोह: परलकोट विद्रोह (1825)
💡 पहचान: बस्तर के प्रथम शहीद।
⚫️ शहादत: कैप्टन पैबे के आदेश पर 20 जनवरी 1825 को उन्हें फांसी दे दी गई। [CG PSC(Lib)2017],[CG PSC(EAP)2016]
जबलपुर से प्रकाशित होने वाली माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रिका ‘कर्मवीर’ का संपादन भी किया।
[CG Vyapam ADEO]
1946
संविधान निर्मात्री सभा में बिलासपुर से सदस्य के रूप में चुने गए।
रचना
उनकी प्रमुख रचना ‘हॉलैण्ड के स्वाधीनता का इतिहास’ है।
[CG PSC (AMO)]
📰 माधवराव सप्रे
🗓️ जन्म: 19 जून 1871, ग्राम दमोह पथरिया
⚫️ देहांत: 1926
📌 महत्वपूर्ण घटनाक्रम और योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1900
छत्तीसगढ़ का पहला समाचार पत्र ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन पेंड्रा (सी.पी.) से आरंभ किया।
1905
नागपुर में ‘हिन्दी ग्रंथ प्रकाशक मंडली’ की स्थापना की।
1907
केसरी पत्रिका का हिन्दी में ‘हिन्द केसरी’ नाम से रूपांतरण किया।
1908
‘हिंद केसरी’ में प्रकाशित एक लेख के कारण राजद्रोह के आरोप में उन्हें जेल भेजा गया।
1920
राजिम में ‘किसान सभा’ का गठन किया।
🔑 अन्य तथ्य
🎤 कथन: उनका प्रसिद्ध कथन था – “मुझे मोक्ष प्यारा नहीं मैं फिर जन्म लूंगा।” [CG PSC(ADJE)2020]
📖 रचनाएँ: उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘स्वदेशी आंदोलन तथा बॉयकाट’, ‘देश की दुर्दशा’, ‘बम गोले का रहस्य’, तिलक के ‘गीता रहस्य’ का हिंदी अनुवाद, और समर्थ स्वामी रामदास द्वारा रचित ‘दास बोध’ का मराठी से हिंदी अनुवाद शामिल हैं। [CGPSC(ACF)2020]
🏹 गुण्डाधुर
🏞️ क्षेत्र: बस्तर
🏠 ग्राम: नेतानार
👨👩👧👦 जनजाति: धुरवा
🔥 विद्रोह: भूमकाल विद्रोह (2 फरवरी 1910)
🔑 विशेष तथ्य
💪 अजेय: गुण्डाधुर अंत तक अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आ सके।
🏆 सम्मान: उनके नाम पर वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को “खेल रत्न पुरस्कार” दिया जाता है।
💡 पहचान: गुण्डाधुर को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का ‘जननायक’ माना जाता है। [CG PSC(SEE)]
⚔️ विद्रोह की शुरुआत: विद्रोह के दौरान बस्तर का पुशपाल बाजार सबसे पहले लूटा गया था।
🌍 तुलना: उनके अभियान की तुलना तात्या टोपे के अभियान से की जाती है। [CG Vyapam (PDEO)]
🏛️ योगदान: उनके निवास स्थान पर ही पं. सुंदर लाल शर्मा द्वारा 1930 में सत्याग्रह आश्रम स्थापित किया गया था।
🤵 रामप्रसाद देशमुख
🗓️ जन्म: 1878
📍 स्थान: दुर्ग
⚫️ देहांत: 1944
📌 विशेष योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
1935
भूमि विकास बैंक की स्थापना की।
विशेष
दुर्ग में सहकारिता आंदोलन के जनक के रूप में जाने जाते हैं (सहकारिता बैंक की स्थापना)।
🤵 मुंशी अब्दुल रउफ
🗓️ जन्म: 1894
📍 स्थान: रायपुर
📌 स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
वर्ष
घटनाक्रम
1920
नागपुर अधिवेशन में भाग लिया।
1930
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान रायपुर में विशेष योगदान के लिए, उन्हें पाँच पांडवों में से ‘नकुल’ की संज्ञा दी गई थी।
🤵 क्रांति कुमार भारती
🗓️ जन्म: 1894
⚫️ देहांत: 1976
📌 स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
📰 पत्रकारिता: रायपुर से ‘छत्तीसगढ़ केसरी’ नामक पत्रिका का संपादन किया। रायपुर से ‘छ.ग. केसरी’ और बिलासपुर से ‘कर्म क्षेत्र’ का प्रकाशन किया।
🇮🇳 सत्याग्रह: 4 अगस्त 1930 को बिलासपुर के शासकीय हाई स्कूल में तिरंगा फहराया। [CG PSC (ITI Prin]
🤝 सक्रियता: रायपुर में परस राम सोनी के साथ एक सक्रिय क्रांतिकारी थे।
🎖️ अध्यक्ष: बिलासपुर के क्रांतिकारी अधिवेशन में ‘मध्यप्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी’ के अध्यक्ष चुने गए। [CGVyapam(PHEHDA]
🤵 रत्नाकर झा
🗓️ जन्म: 1896
📍 स्थान: खैरागढ़ रियासत
⚫️ देहांत: 1973
🏢 कार्यक्षेत्र: दुर्ग
📌 प्रमुख योगदान और आंदोलन
वर्ष
घटनाक्रम
संबंधित परीक्षा (PYQ)
1920
असहयोग आंदोलन के दौरान दुर्ग में अपनी वकालत का त्याग कर दिया।
[CG PSC(Pre)2017]
1922
दुर्ग आकर बस गए और 1929 में दुर्ग नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए।
1942
दुर्ग में भारत छोड़ो आंदोलन के संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🏦 संस्थापक: दुर्ग में सहकारी बैंक की स्थापना की। [CGVyapam(VSAM)2024]
🤵 अजीत प्रमोद कुमार जोगी
🗓️ जन्म: 29 अप्रैल 1946
⚫️ देहांत: 29 मई 2020
📌 राजनीतिक एवं प्रशासनिक करियर
🥇 प्रथम मुख्यमंत्री: वे छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बने (9 नवम्बर 2000 से 6 दिसम्बर 2003)।
👮♂️ प्रशासनिक सेवा: वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हुए थे।
🔑 साहित्यिक कार्य
✍️ रचनाएं: 1. फुल कुंवर, 2. सदी के मोड़ पर, 3. ‘द रोल ऑफ डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर’
📖 आत्मकथा: सपनों के सौदागर
🤵 मुंशी अब्दुल रउफ (नकुल)
🗓️ 1910: नागपुर अधिवेशन में हिस्सा लिया।
🗓️ 1921: जिला खिलाफत कमेटी में मंत्री रहे।
💡 पहचान: स्वतंत्रता आंदोलन के समय उन्हें पांच पाण्डवों में से एक माना जाता था।
🤵 विद्याचरण शुक्ल
📊 रिकॉर्ड: छत्तीसगढ़ से सबसे अधिक समय तक लोकसभा सदस्य (9 बार) बने रहने का रिकॉर्ड उनके नाम है।
⚫️ दुखद अंत: 25 मई 2013 को झीरम घाटी नक्सली हमले में घायल होने के बाद इलाज के दौरान वेदांता अस्पताल (गुड़गांव) में उनका देहावसान हो गया। [CG PSC(Lib)20]
छ.ग. के महान संत एवं पंथ
🕉️ छत्तीसगढ़ के महान संत एवं पंथ
संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास
📌 जीवन परिचय
🎂 जन्म: 18 दिसम्बर 1756
🏞️ स्थान: गिरौदपुरी (बलौदाबाजार)
👨👩👧👦 परिवार:
पिता: महंगूदास
माता: अमरौतिन बाई
पत्नी: सफुरा बाई
संतान: गुरु अमरदास जी, गुरु बालकदास जी, गुरु अगरदास जी, गुरु अड़गड़िया दास जी एवं माता सहोद्रा
🔑 उत्तराधिकारी: गुरु बालकदास जी [CGPCS(SEE)2020]
💡 आत्मज्ञान की प्राप्ति
वे बचपन से ही चिंतनशील स्वभाव के थे और सत्संग, मनन और ध्यान में डूबे रहते थे। एक बार, शांति की तलाश में जगन्नाथपुरी की यात्रा पर निकले, परन्तु सारंगढ़ से ही वापस आ गए। इसके बाद उन्होंने घर-परिवार का त्याग कर सोनाखान के जंगलों में स्थित छाता पहाड़ पर औरा-धौंरा और तेंदू के पेड़ के नीचे ‘सतनाम’ की साधना आरंभ की। इसी कठोर तप के परिणामस्वरूप उन्हें ‘सतनाम’ के रूप में आत्मज्ञान की अनुभूति हुई।
🌱 प्रवर्तन
छत्तीसगढ़ के एक महान समाज सुधारक के रूप में, उन्होंने वर्ष 1820 से एक सामाजिक सुधार आंदोलन चलाया, जिसे ‘सतनाम’ के नाम से जाना जाता है।
📖 उपदेश के सार
उनके जीवन के दर्शन में सत्य, अहिंसा, करुणा और जीवन के ध्येय का महत्व स्पष्ट होता है।
उन्होंने आम जनता में चेतना जगाने हेतु सतनाम का उपदेश दिया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान में लगातार वृद्धि हुई। इससे प्रभावित होकर दूर-दूर से लोग उनके अनुयायी बनने लगे।
🧠 प्रमुख सिद्धांत बाबा गुरु घासीदास जी द्वारा दिए गए 07 सिद्धांत निम्नलिखित हैं [CG PCS (DSPR, MI, MO)2022]:
सत्य ही ईश्वर है: सतनाम पर विश्वास करो।
मूर्ति पूजा मत करो: अंधविश्वास से बचना चाहिए।
पर स्त्री को माता मानों: नारी समाज का आदर करो।
जीव हिंसा मत करो: अहिंसा के सिद्धांत का पालन करो।
नशापान मत करो: मानवीय चेतना को हमेशा जागृत रखो।
जाति-पाति के प्रपंच में मत पड़ो: सभी मनुष्य एक समान हैं, उनमें कोई भेद नहीं है।
अपराह्न में खेत मत जोतो: पशुओं के प्रति करुणा का भाव रखो।
🌍 प्रमुख स्थल
गिरौदपुरी: इसे सतनाम समाज का एक पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। [CG Vyapam(F1)2017] गिरौदपुरी में बना जैतखाम, जिसकी ऊंचाई 77 मीटर है, की बनावट की तुलना कुतुबमीनार से होती है। [CG Vyapam(Patwari)2016]
तेलासीबाड़ा: यह स्थल सतनाम पंथ से जुड़ा हुआ है। [CGPCS(EAP)2016] [CGPCS(Engg. Set)2015]
भण्डारपुरी: यह स्थान भी सतनाम पंथ से संबंधित है। [CG PCS(SEE) 2017]
✨ विशेष जानकारी
गुरु घासीदास जी को सतनाम पंथ का प्रवर्तक माना जाता है। [CG Vyapam(MBS)2023]
बाबा गुरु घासीदास जी को उन्नीसवीं सदी का एक महान समाज सुधारक भी कहा जाता है। [CG Vyapam(EAE)2017]
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उनकी स्मृति में, सामाजिक चेतना और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में वर्ष 2001 से “गुरु घासीदास सम्मान” की स्थापना की गई है।
महाप्रभु वल्लभाचार्य
📌 जीवन परिचय
भक्तिमार्ग और पुष्टिमार्ग के संस्थापक, वल्लभाचार्य जी का जन्म वैशाख शुक्ल 11, संवत 1535 को रायपुर जिले के राजिम के निकट चम्पारण में एक शमी वृक्ष के नीचे हुआ था। [CG PCS (Pre) 2015,2022, (ADS)2019] [CG Vyapam (HW) 2016, (FE)]
इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट और माता का नाम एलमागार/इल्लमा था।
📖 जन्म की कथा
एक वृतांत के अनुसार, जब उनके माता-पिता काशी की यात्रा पर चम्पारण के जंगल से गुजर रहे थे, तो उनकी पत्नी को अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। शाम का समय था और सभी यात्री पास के चौड़ा नगर में रुकना चाहते थे, लेकिन एलमागार/इल्लमा वहां तक पहुँचने में सक्षम नहीं थीं।
लक्ष्मण भट्ट अपनी पत्नी के साथ उस सुनसान जंगल में ही रुक गए, जबकि उनके साथी आगे नगर तक चले गए। उसी रात, एलमागार/इल्लमा ने एक विशाल शमी वृक्ष के नीचे एक बालक को जन्म दिया।
जन्म के समय बालक निश्चेष्ट और चेतनाहीन प्रतीत हुआ, जिस कारण इल्लमा ने उसे मृत समझ लिया। रात्रि के अंधकार में लक्ष्मण भट्ट भी बालक को ठीक से नहीं देख सके। [CG PCS (IMO) 2020]
ईश्वर की इच्छा मानकर, उन्होंने बालक को कपड़े में लपेटकर शमी वृक्ष के नीचे एक गड्ढे में रख दिया और उसे सूखे पत्तों से ढक दिया। इसके बाद, वे बालक को वहीं छोड़कर आगे नगर की ओर चले गए।
🌱 पुष्टिमार्ग
वल्लभाचार्य जी आगे चलकर भगवान कृष्ण के एक महान भक्त बने। कहा जाता है कि वृंदावन में उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें अपने बालस्वरूप की उपासना करने का आदेश दिया था। इसी विधि का उन्होंने प्रचार किया, जो ‘पुष्टिमार्ग’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यह दर्शन माया से रहित और अद्वैत है, इसलिए इस मत को ‘शुद्धाद्वैत’ भी कहा जाता है। वे वैष्णव धर्म की कृष्णमार्गी शाखा से संबंधित हैं। [CG PSC(RDA)2014]
उन्होंने शुद्धाद्वैतवाद दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसे पुष्टिमार्ग भी कहते हैं। [CG Vyapam (Ameen) 2017,(LOI)2015]
📜 भक्तिकवि
महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग में कई भक्त कवि शामिल हुए, जिनमें महाकवि सूरदास, कुम्भनदास, परमानंददास, और कृष्णदास प्रमुख थे। गोसाईं विट्ठलदास ने इन आठ कवियों को ‘अष्ट छाप’ के रूप में सम्मान दिया।
छत्तीसगढ़ के महाकवि गोपाल पर भी पुष्टिमार्ग का गहरा असर था। उनका प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भक्ति चिंतामणि’ श्रीमद्भागवत के दशमस्कंध पर आधारित है।
✨ विशेष जानकारी
रायपुर में आयोजित होने वाला चम्पारण मेला संत वल्लभाचार्य को ही समर्पित है।
विष्णु भक्त देवपाल
🛠️ निर्माण: विष्णु भक्त देवपाल ने सन 1415 ईस्वी में खल्लारी में भगवान नारायण के एक मंदिर का निर्माण करवाया था।
📜 शिलालेख: खल्लारी से प्राप्त शिलालेख से इस मंदिर निर्माण की जानकारी मिलती है। इस लेख की लिपि देवनागरी और भाषा संस्कृत है।
दूधाधारी महाराज
📌 जीवन परिचय: बलभद्रदास जी का जन्म राजस्थान के जोधपुर के पास आनन्दपुर ग्राम (कालू) में सरस्वती नदी के किनारे संवत् 1580 (1524 ई.) में हुआ था।
🏛️ दूधाधारी मठ: रायपुर का दूधाधारी मठ छत्तीसगढ़ में बहुत प्रसिद्ध है, जिसके संस्थापक दूधाधारी महाराज थे, जो एक महान संत और सिद्ध महात्मा थे। वे केवल दूध का सेवन करते थे, जिस कारण उनका नाम ‘दूधाधारी’ पड़ गया।
🙏 परम भक्त: मठ के महंत बलभद्र दास हनुमान जी के बड़े भक्त थे। महाराजाबंध तालाब के सामने स्थित दूधाधारी मठ में भगवान श्री राम-जानकी, भगवान बालाजी और हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित हैं।
🧘 सन्यास एवं तपस्या: संन्यास लेने के बाद उनके गुरु ने उनका नाम बलभद्रदास रखा था। उन्होंने कुछ वर्षों तक तुरतुरिया की गुफा में तपस्या की और बाद में रायपुर आ गए। रायपुर के हैहयवंशी राजा चामुंड सिंह देव उनके शिष्य बने। राजा ने उन्हें आश्रम बनाने के लिए भूमि दी। इस मठ की स्थापना राजा जैत सिंह के समय में हुई थी, और आज भी यह दूधाधारी मठ यहाँ स्थित है।
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प्रश्न
प्र- दुधाधारी मठ कहां स्थित है ? [CG PSC(Asst Pro. Chem)2016]
(A) रायपुर
(B) बिलासपुर
(C) सरगुजा
(D) दुर्ग
उत्तर- (A) रायपुर
गहिरा गुरु
🎂 जन्म: 1905, गहिरा ग्राम (रायगढ़)
👤 मूल नाम: संत रामेश्वर दास [CG PSC(Pre)2021]
🌱 संस्थापक: सनातन धर्म संत समाज (1943)
🧑🤝🧑 जनजाति: कंवर [CG PSC(ADJE)2020]
🤝 योगदान: समाज उत्थान [CG PSC(ITI Pri.)2016]
🏞️ आश्रम: कैलाश गुफा / गहिरा गुरु गुफा, जो जशपुर के सामरबार में स्थित है। [CG PSC(ADJE)2020] यह आश्रम एक कठोर पहाड़ी को काटकर बनाया गया है [CG Vyapam(FI)2022]। यहाँ एक संस्कृत पाठशाला भी है, साथ ही शिव और पार्वती का एक मंदिर भी स्थापित है। [CG Vyapam(FI)2022]
धनी धर्मदास
📖 जीवन परिचय: संत धर्मदास, जो कबीरदास के प्रमुख शिष्य थे, का जन्म कसौदा गाँव के एक वैश्य परिवार में हुआ था। इनका समय 16वीं सदी का माना जाता है। उन्होंने कबीरपंथ की सबसे बड़ी शाखा, यानी छत्तीसगढ़ शाखा की नींव रखी। [CG PSC (TET-2) 2011]
📜 बीजक: संत कबीर की शिक्षाओं और वाणियों को ‘बीजक’ नामक ग्रंथ में संकलित करने का श्रेय धर्मदास को ही दिया जाता है। कबीरदास के समाधि लेने के बाद, उनकी गद्दी का उत्तराधिकार संत धर्मदास को प्राप्त हुआ।
✍️ रचना: इनकी प्रमुख रचना का नाम ‘अमरसुख निधान’ है।
🗣️ संदेश: उन्होंने कबीर से प्रेरणा लेकर अपने उपदेशों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा, लोकसंस्कृति और लोकपरंपराओं को अपनाया। इसी कारण, उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला कवि भी माना जाता है। प्यारेलाल गुप्त ने उन्हें छत्तीसगढ़ के प्रथम कवि की उपाधि दी है।
✨ विशेष: छत्तीसगढ़ की संस्कृति, साहित्य और धार्मिक परंपरा के विकास में संत धर्मदास जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। 15वीं शताब्दी को ‘कबीर शताब्दी’ के रूप में भी जाना जाता है। [CG PSC (ITI P) 2022]
कबीर पंथ का वंश वृक्ष
धनी धर्मदास (गुरु गद्दी – बांधवगढ़)
सहते जी बाला (गुरु गद्दी – मानकपुर)
बांके जी (गुरु गद्दी – दरभंगा)
चतुर्भुज साहेब (गुरु गद्दी – कर्नाटक)
छत्तीसगढ़ में कबीरपंथ की प्रमुख शाखाएँ
शाखा
संस्थापक
कुदुरमाल (कोरबा)
मुक्तामणि नाम साहेब
रतनपुर (बिलासपुर)
सुदर्शन नाम साहेब
धमधा (दुर्ग)
केवल नाम साहेब
कवर्धा (कबीरधाम)
हक्क नाम साहेब
दामाखेड़ा (बलौदाबाजार)
उग्रनाम साहेब
खरसिया (रायगढ़)
महंत काशीदास
कबीर पंथ की वंश गद्दी एवं गुरुओं की सूची
संत कबीर: संत कबीर ने भारत में पंथ की स्थापना के लिए चारों दिशाओं में चार गुरुओं की नियुक्ति की थी।
धनी धर्मदास: संत कबीर के समाधि लेने के पश्चात्, उन्होंने अपने पुत्र चूड़ामणि (मुक्तामणि) नाम साहेब को बांधवगढ़ की गुरुवाई सौंपी।
मुक्तामणि (चूड़ामणि) नाम साहेब: इन्होंने बांधवगढ़ से कुदुरमाल (कोरबा) में गुरुगद्दी स्थापित की।
सुदर्शन नाम साहेब: इन्होंने रतनपुर (बिलासपुर) में गुरुगद्दी की स्थापना की।
कुलपत/कुलपति नाम साहेब: गुरुगद्दी को रतनपुर से वापस कुदुरमाल में स्थापित किया।
प्रमोध गुरु नाम साहेब (मंडला): इन्होंने गुरुगद्दी को कुदुरमाल से मण्डला में स्थापित किया। इन्हें मुगल बादशाह द्वारा ‘बालापीर’ की उपाधि दी गई थी।
केवल नाम साहेब: गुरुगद्दी को मंडला से धमधा (दुर्ग) में स्थापित किया।
अमोल नाम साहेब (धमधा)
सूरति सनेही नाम साहेब: गुरुगद्दी को मंडला से सिंघोड़ी (छिंदवाड़ा) में ले जाकर स्थापित किया।
हक्क नाम साहेब: इन्होंने सिंघोड़ी से गुरुगद्दी कबीरधाम (कवर्धा) में स्थापित की।
पाक नाम साहेब (कवर्धा)
प्रगट नाम साहेब (कवर्धा)
धीरज नाम साहेब (कवर्धा)
उग्र नाम साहेब (मुकुंद दास साहेब): गुरुगद्दी को कवर्धा से दामाखेड़ा (बलौदाबाजार) में स्थानांतरित किया।
दया नाम साहेब (दामाखेड़ा): इनके कोई पुत्र न होने के कारण गुरुगद्दी रिक्त हो गई।
इसके बाद, गुरुमाता कलाप देवी ने महंत काशीदास को देख-रेख के लिए दीवान नियुक्त किया, लेकिन उन्होंने दामाखेड़ा छोड़कर खरसिया (रायगढ़) में गद्दी स्थापित की।
गुरुमाता कलाप देवी ने कवर्धा गद्दी के वंशज साहेब दास के पुत्र गृन्धमुनि नाम को गोद लेकर गुरुगद्दी पर बैठाया।
गृन्धमुनि नाम साहेब (दामाखेड़ा)
प्रकाशमुनि नाम साहेब (दामाखेड़ा)
रामानंदी आन्दोलन
🕰️ आंदोलन: यह 13वीं शताब्दी का एक प्रमुख आंदोलन था।
🌿 वैष्णव धर्म: श्री राघवानंद के शिष्य, श्री रामानंदजी ने छत्तीसगढ़ के हर कोने में वैष्णव धर्म के सिद्धांतों को फैलाने का सफल प्रयास किया।
👩🏫 दीक्षा: रामानंद जी ने 13वीं शताब्दी में छत्तीसगढ़ की स्त्रियों को वैष्णव मत की दीक्षा दी थी। [CG PSC(ARTO)2022]
🛡️ संगठन: धर्म और भारतीय नारियों के सतीत्व की रक्षा के लिए उन्होंने ‘विरक्त’ दल का गठन किया, जो आज छत्तीसगढ़ में ‘बैरागी’ के नाम से जाने जाते हैं।
🏛️ स्थापना: स्वामी रामानंद जी ने 14वीं शताब्दी में धर्म के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले ‘बैरागी’ नामक विरक्त समाज की स्थापना की थी, जो पूरे छत्तीसगढ़ में फैल गया।
नारा: इस युग का प्रसिद्ध नारा था – “जाति-पांति पूछे नहीं कोई। हरि को भजे सो हरि का होई।”
🤝 शिष्य: कबीर, रामानंद के प्रमुख शिष्यों में से एक थे।
ազ प्रभाव: छत्तीसगढ़ में रामानंदी सम्प्रदाय का गहरा प्रभाव कई शताब्दियों तक बना रहा। इन बैरागी और दशनामी संन्यासियों के मठ प्रदेश के कोने-कोने में स्थापित हैं। इनमें गृहस्थ और विरक्त, दो प्रकार के भेद पाए जाते हैं। राजनांदगांव और छुईखदान के राजा भी बैरागी थे।
** प्रमुख मठ:** इनके दो मुख्य मठ थे:
शिवरीनारायण मठ: यह मठ हैहयवंशी राजाओं के समय से ही अस्तित्व में है। इसके प्रवर्तक स्वामी दयारामजी ग्वालियर राज्य से आए थे। रतनपुर के हैहयवंशी राजा इस गद्दी के शिष्य थे। इस मठ में अब तक 16 महंत हो चुके हैं, और 1956 ई. में लालदास जी इसके महंत बने।
स्वामी गरीबदासी जी का मठ, रायपुर: इनका जन्म संवत् 1560 में हुआ था और इनका आदि मठ पौनी, जिला भंडारा में था। इनके शिष्य बलभद्रदास जी ने रायपुर में दूधाधारी मठ की स्थापना की थी, उस समय रायपुर में राजा जैतसिंहदेव का शासन था। वे केवल दूध का सेवन करते थे। मराठा काल में, बिम्बाजी भोंसले स्वयं महंतजी से मिलने गए और मठ के खर्चों के लिए जागीर प्रदान की। इस मठ के महंत वैष्णवदास जी ने रायपुर में दूधाधारी महाराज संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की।
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प्रश्न
प्र- छत्तीसगढ़ में 13 वीं शताब्दी में स्त्रियों को वैष्णव मत की दीक्षा किसने दी थी ? [CG PSC(ARTO)2022]
(A) राघवानन्द
(B) रामानन्द
(C) धर्मदास
(D) गरीबदास
उत्तर-(B) रामानन्द
स्वामी आत्मानंद
🎂 जन्म: 1929, बरबंदा (मांढर, रायपुर)।
🏫 संस्थापक:
1985: नारायणपुर में रामकृष्ण आश्रम (विवेकानंद आश्रम) के संस्थापक। [CG PSC (Pre) 2015]
1958: रायपुर में रामकृष्ण विवेकानंद आश्रम की स्थापना की।
🕉️ रामनामी संप्रदाय
🕰️ आरंभ: इस संप्रदाय की शुरुआत सन् 1890 में हुई।
📍 स्थान: इसका उद्गम स्थल सक्ति क्षेत्र का चारपारा नामक स्थान है।
🙏 संस्थापक: इसे संत परशुराम द्वारा स्थापित किया गया।
✨ आराध्य देव: ये अलौकिक राम की आराधना करते हैं।
🌍 प्रभाव क्षेत्र: यह संप्रदाय मुख्य रूप से पामगढ़, सारंगढ़, सक्ति क्षेत्र, और रायपुर जैसे इलाकों में सक्रिय है।
📜 प्रमुख मान्यताएँ एवं प्रथाएँ
🏛️ भजन खांब: यह लकड़ी या सीमेंट से बना एक स्तंभ होता है। इसके शिखर पर एक सफेद ध्वज होता है, जिस पर काली स्याही से ‘राम राम’ अंकित किया जाता है।
🎪 रामनामी मेला: हर वर्ष पौष माह के दौरान रामनामी मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला संप्रदाय के विभिन्न क्षेत्रों में वार्षिक अंतराल पर लगता है, जिसका एक उदाहरण ‘बड़े भजन का रामनामी मेला’ है।
👕 रामनामी वस्त्र एवं ओढ़नी: इस संप्रदाय के अनुयायी अपने शरीर पर ऐसे वस्त्र और ओढ़नी पहनते हैं जिन पर अनगिनत बार ‘राम राम’ शब्द लिखा होता है।
🦚 मोर मुकुट: समाज में ‘मोर मुकुट’ पहनना वासनाओं के त्याग और निष्काम अवस्था को प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है।
✍️ शरीर पर ‘राम नाम’ गुदवाने के आधार पर विभाजन
रामनामी समाज के लोगों को उनके शरीर पर ‘राम नाम’ अंकित कराने की शैली के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
शिरोमणि रामनामी: वे व्यक्ति जो अपने मस्तक पर केवल दो बार ‘राम’ शब्द गुदवाते हैं।
सर्वांग रामनामी: जो अपने पूरे माथे पर ‘राम राम’ अंकित करवाते हैं।
नखशिख रामनामी: जो अपने पूरे शरीर पर, सिर से लेकर पैर तक, ‘राम नाम’ अंकित करवाते हैं।
छ.ग. की प्रमुख महिला व्यक्तित्व
🌟 छत्तीसगढ़ की प्रमुख महिला विभूतियाँ
👸 माता कौशल्या
📍 जन्म-स्थान: चंदखुरी, रायपुर (रामायण-काल से संबंधित)।
📜 मूल नाम: भानुमति।
👨👧👦 पिता: राजा भानुमंत (दक्षिण कोसल के शासक)।
💍 विवाह: अयोध्या के राजा दशरथ के साथ संपन्न हुआ।
👑 पुत्र: श्रीराम।
🏛️ मंदिर: चंदखुरी, रायपुर में स्थित है (इसका पुनर्निर्माण संवत् 1973 में हुआ)।
✨ विशेष तथ्य: चंदखुरी, रायपुर में स्थित माता कौशल्या का मंदिर, प्रदेश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे ‘राम वनगमन पर्यटन परिपथ’ योजना के अंतर्गत सबसे पहले विकसित किया गया है।
👑 रूपा देवी (गुप्तवंश)
📖 परिचय: ये गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त की पत्नी थीं।
📜 साक्ष्य: महासमुंद जिले के कोपरा गाँव से समुद्रगुप्त की पत्नी रूपादेवी के होने के प्रमाण मिले हैं। [CG PSC(Asst. G-3)2018]
👸 रानी वासटा
🏰 वंश: इनका संबंध सिरपुर के पांडुवंश से था।
👨👧👦 पिता: मौखरी वंश के राजा सूर्यवर्मा। [CG PSC(ADI)2016]
💍 विवाह: पांडुवंश के शासक हर्षगुप्त के साथ हुआ।
👑 पुत्र: महाशिवगुप्त बालार्जुन (जिनके शासनकाल को छत्तीसगढ़ के इतिहास का ‘स्वर्णकाल’ कहा जाता है) और रणकेशरी।
🙏 योगदान: अपने पति हर्षगुप्त के निधन के बाद, रानी वासटा ने महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल में सिरपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। [CG PSC(SEE)2018]
🏛️ स्थापत्य शैली: यह मंदिर लाल ईंटों से नागर शैली में बनाया गया है। [CG PSC(Sci.Off.)2018, (ADP) 200]
🕉️ विशेषता: यह भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर है, जहाँ बैकुंठ नारायण की प्रतिमा स्थापित है। [CG Vyapam(PHEH)2]
✍️ प्रशस्ति: इस मंदिर की प्रशस्ति की रचना कवि ईशान द्वारा की गई थी।
👑 गुण्ड महादेवी
📖 परिचय: ये बस्तर के छिंदक नागवंशी शासक सोमेश्वरदेव प्रथम की माता थीं।
⚔️ घटनाक्रम: जब कल्चुरी शासक पृथ्वीदेव प्रथम के पुत्र जाजल्यदेव प्रथम ने बस्तर पर आक्रमण किया, तो उसने सोमेश्वर देव प्रथम को पराजित कर मंत्रियों और रानियों सहित कैद कर लिया था। बाद में, माता गुण्ड महादेवी के निवेदन पर उन्हें मुक्त कर दिया गया। [CG Vyapam(Asst. Magn)201]
👸 चमेली देवी
🏰 परिचय: ये एक छिंदकनागवंशी राजकुमारी थीं।
⚔️ युद्ध: इन्होंने अन्नमदेव के साथ युद्ध किया था।
🗿 स्मारक: इनकी स्मृति में सतीमठ (बस्तर) में एक स्मारक स्थित है।
📜 कल्चुरी शासक एवं उनकी पत्नियाँ
शासक
रानी
परीक्षा संदर्भ
रत्नदेव प्रथम
नोनल्लादेवी
पृथ्वीदेव प्रथम
राजल्लादेवी
[CGPSC(ADA)2023]
जाजल्यदेव प्रथम
लाच्छलादेवी
[CGPSC(ADA)2023]
जगतदेव
सोमल्लादेवी
[CGPSC(ADA)2023]
रत्नदेव तृतीय
1. रल्हा, 2. पद्मा
राजसिंह
1. दिव्यपुरी, 2. सुवंशकोरी, 3. कजरीदेवी
रघुनाथ सिंह
1. लक्ष्मणकुवंर, 2. पद्मकुवंर
👸 अंबिका देवी
💍 विवाह: कवर्धा के फणीनागवंशी राजा रामचन्द्र देव का विवाह कल्चुरी राजकुमारी अंबिकादेवी से हुआ था। [CG PSC(ADA)2020, (AP) 2019]
🏹 मेघई अरिचकेलीन / मेघावती
👨👧 पति: भैरवदेव।
✨ विशेष: ये आखेट (शिकार) विद्या में अत्यंत निपुण थीं। इनके नाम पर बस्तर क्षेत्र में मेघई साड़ी प्रसिद्ध है।
** courageous बहादुर कलारिन**
📍 स्मारक: बहादुर कलारिन की माची, बालोद जिले में बालोद-पुरूर मार्ग पर स्थित चिरचारी गाँव में है, जो बालोद से 12 किमी दूर है।
📜 गाथा: बालोद में प्रचलित लोकगाथा के अनुसार, एक हैहयवंशीय राजा शिकार के दौरान बहादुर कलारिन से मिले और उनके सौंदर्य से मोहित होकर उनसे गंधर्व विवाह कर लिया। गर्भवती होने पर उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम छेछान छोरा था। युवा होने पर जब उसने अपनी माँ से पिता का नाम पूछा और माँ ने बता दिया, तो वह राजा-रानियों से घृणा करने लगा। उसने एक सेना बनाकर आस-पास के राजाओं को हराया और उनकी कन्याओं को बंदी बनाकर घर ले आया, जहाँ उनसे अन्न पीसने और कूटने का काम करवाया जाता था।
** tragic अंत:** बहादुर कलारिन ने अपने पुत्र से किसी एक राजकुमारी से विवाह करके बाकी सभी को छोड़ देने का आग्रह किया, लेकिन उसने माँ की बात नहीं मानी। इसके पश्चात्, बहादुर कलारिन ने भोजन में विष मिलाकर अपने पुत्र की हत्या कर दी और स्वयं कुएँ में कूदकर प्राणों की आहुति दे दी।
** modern सम्मान:** राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके नाम पर एक राज्य अलंकरण पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
👑 आनंदी बाई
📖 परिचय: ये छत्तीसगढ़ के प्रथम मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले की पत्नी थीं, जिन्होंने बिम्बाजी की मृत्यु के बाद 1787 से 1801 ई. तक सत्ता का कार्यभार संभाला।
⚔️ संघर्ष: इनका सूबेदार महिपतराव के साथ सत्ता के लिए संघर्ष हुआ था। [CG PSC(ADS)2017]
🏛️ शासन: सूबेदार को शासन के सभी महत्वपूर्ण कार्यों में आनंदीबाई से परामर्श लेना पड़ता था। वास्तव में, अपनी मृत्यु तक आनंदीबाई ने ही शासन चलाया।
🙏 निर्माण कार्य:
उन्होंने रामटेकरी मंदिर में मूर्ति के सामने हाथ जोड़े हुए बिम्बाजी की एक प्रतिमा स्थापित करवाई।
आनंदीबाई ने रतनपुर किले के भीतर श्री लक्ष्मीनारायण का एक छोटा मंदिर भी बनवाया था।
✊ जुगराज कुंवर (रानी चोरिस)
📜 मूल नाम: जुगराज कुंवर (बस्तर के काकतीय शासक भैरमदेव (1853-1891) की पत्नी)।
✨ उपनाम: छत्तीसगढ़ की प्रथम विद्रोहिणी महिला।
💥 विद्रोह:‘रानी-चो-रिस’ का विद्रोह (1878-82)। [CG Vyapam(ADPO)2021, (FNDM) 2021]
🔎 कारण: इस विद्रोह का मुख्य कारण यह था कि ब्रिटिश अधिकारी फ्रेजर के कहने पर काकतीय शासक भैरमदेव ने एक मुस्लिम महिला नावा बाई से विवाह कर लिया था, जबकि राजा की पहले से ही दो पत्नियाँ (जुगराज कुंवर देवी और स्वर्ण कुंवर देवी) थीं। यह तीसरा विवाह उस युग की परंपराओं के विरुद्ध था।
⚖️ परिणाम: रानी जुगराज कुंवर देवी के विद्रोह के बाद, बस्तर की महिलाएँ भैरमदेव के विरुद्ध सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने नारा लगाया कि “भैरम देव या तो नावा बाई को छोडे अथवा बस्तर की राजगद्दी को छोड़ दे।” अंततः, इस नारी शक्ति के सामने ब्रिटिश सरकार को विवश होकर झुकना पड़ा और रानी का यह संघर्ष सफल हुआ।
👸 स्वर्ण कुंवर देवी (बस्तर की राजमाता)
💍 संबंध: काकतीय शासक भैरमदेव से इनका विवाह हुआ था।
🔥 योगदान (भूमकाल विद्रोह 1910): अक्टूबर 1909 में दशहरे के दिन, राजमाता स्वर्ण कुंवर ने लाल कालेन्द्र सिंह की उपस्थिति में आदिवासियों को अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र क्रांति के लिए उत्साहित किया। उनकी सलाह पर, ताड़ीनी की सभा में लाल कालेन्द्र सिंह ने नेतानार गाँव के वीर गुण्डाधूर को 1910 की क्रांति का प्रमुख नियुक्त किया। इस आह्वान के परिणामस्वरूप ही भूमकाल विद्रोह (1910) हुआ।
⛓️ गिरफ्तारी: ब्रिटिश शासन ने उन्हें भूमकाल विद्रोह के दौरान 5 मार्च 1910 को गिरफ्तार कर लिया था। [CG PSC(Pre)2022]
🧕 अंजुम बेगम
🇮🇳 आंदोलन: असहयोग आंदोलन के दौरान 11 अक्टूबर 1921 को उन्होंने खादी प्रदर्शनी का आयोजन किया था।
📍 स्थान: रावणभांठा, रायपुर।
🗓️ कार्यक्रम: खादी प्रदर्शन सप्ताह (07-15 अक्टूबर तक)।
👸 महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी (1921-1936 ई.)
👑 उपाधि: ये छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला शासिका थीं।
🎓 राज्याभिषेक: 1922 में मात्र 12 वर्ष की आयु में उनका राज्याभिषेक हुआ, क्योंकि उनके पिता रूद्रप्रताप देव का असमय निधन हो गया था। [CG PSC(Pre)2020]
💍 विवाह: 1927 में उनका विवाह मयूरभंज के महाराज के भतीजे प्रफुल्ल चंद्र भंजदेव के साथ हुआ।
📖 शासन: वे एक लोकप्रिय और प्रजा-हितैषी शासिका थीं, जिस कारण अंग्रेज शासक उनसे लगातार परेशान रहते थे।
⚫ षड्यंत्र: उनके पति प्रफुल्ल चंद्र भंजदेव ने 1930 में बस्तर को निजामिस्तान बनाने की ब्रिटिश साजिश का विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उनके बस्तर प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
❔ रहस्यमयी मृत्यु: महारानी को अपेंडीसाइटिस के ऑपरेशन के लिए लंदन भेजा गया, जहाँ 1936 में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ आज भी संदिग्ध मानी जाती हैं।
🗞️ विशेष: ‘द इंडियन वुमन हुड’ नामक पत्रिका में महारानी के विषय में एक लेख प्रकाशित हुआ था।
✊ स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ की वीरांगनाएँ
बालिका दयावती कंवर
📍 संबंध: इनका संबंध महासमुंद के तमोरा जंगल सत्याग्रह से था।
🗓️ तिथि: यह घटना 9 सितंबर 1930 को सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण के दौरान हुई।
💥 घटनाक्रम: सत्याग्रह के दौरान, दयावती ने सबसे पहले महिला सत्याग्रहियों के साथ वन में प्रवेश किया। [CG PSC (ARTO)2022] जब तत्कालीन ब्रिटिश अनुविभागीय अधिकारी एम.पी. दुबे ने मार्ग रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने उसे एक तमाचा मारा। [CG PSC (SEE) 2020, (MI) 2018] [CG Vyapam (EAE) 2017]
श्रीमती राधाबाई
📖 संबंध: ये सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932) में चौथी डिक्टेटर और एकमात्र महिला डिक्टेटर थीं।
🏛️ नेतृत्व: उन्होंने रायपुर जिले में आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके कारण 13 जून 1932 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। [CG PSC(Mains)2011, (Pre) 2021]
🤝 सहयोगी: उनके साथ नोहरी बाई, शिवरतन और महंत लालदास भी गिरफ्तार हुए थे।
🙏 योगदान: उन्होंने महिला सशक्तिकरण, अस्पृश्यता निवारण और गांधीजी के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। [CG Vyapam(RI)2017]
🌍 जन्म: इनका जन्म नागपुर में हुआ था।
❤️ सेवा-कार्य: उन्होंने 1918 में रायपुर नगरपालिका में दाई का कार्य किया, जिससे वे “रायपुर नगर की दाई” के नाम से प्रसिद्ध हुईं। लोग उनके त्याग और सेवा-भाव से इतने प्रभावित थे कि उन्हें डॉक्टर कहकर भी पुकारते थे।
💥 आंदोलन: ये सभी सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण में रायपुर में विदेशी वस्त्रों की दुकानों के सामने धरना देने में शामिल थीं।
🗓️ तिथि:13 जून 1932
📍 स्थान: कीका भाई की दुकान के सामने।
✊ नेतृत्वकर्ता: केतकी बाई और रुक्मणीबाई।
⛓️ घटनाक्रम: महिलाओं के इस धरने के परिणामस्वरूप, पुलिस ने इन सभी आंदोलनकारी महिलाओं (केतकी बाई, रुक्मणी बाई, मनटोरा बाई, मुटकी बाई, फुटेनिया बाई, और केजा बाई) को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विदेशी सामानों की बिक्री का विरोध करने के आरोप में जेल में डाल दिया था।
🏛️ मिनीमाता देवी (छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद)
📜 मूल नाम: मिनाक्षी।
🎂 जन्म:1913 में असम के नुवागांव जिले के जमुनामुख गाँव में हुआ।
👩👧 माता: मती बाई।
🎓 शिक्षा: मिनीमाता ने अपनी स्कूली शिक्षा असम में पूरी की। उन्हें असमिया, अंग्रेजी, बांग्ला, हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं का अच्छा ज्ञान था।
💍 विवाह: उनका विवाह गुरु अगमदास (सतनाम पंथ के गुरु) से हुआ था।
✨ उपलब्धियाँ:
मिनीमाता ने अपना पूरा जीवन समाज से गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए समर्पित कर दिया।
1952 से 1972 तक वे लोकसभा में सारंगढ़, जांजगीर और महासमुंद क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती रहीं।
वे मजदूर हितों और नारी शिक्षा के प्रति अत्यंत जागरूक और सहयोगी थीं।
उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध संसद में आवाज उठाई।
हसदेव बांगो परियोजना के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, और इसी कारण इस बांध का नामकरण ‘मिनीमाता’ के नाम पर किया गया।
उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय निवासियों को रोजगार और औद्योगिक प्रशिक्षण प्रदान कराने में भी उल्लेखनीय कार्य किया।
😔 निधन:11 अगस्त 1972 को भोपाल से दिल्ली जाते समय पालम हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया।
राजकुंवर देवी
📖 परिचय: ये डॉ. खूबचंद बघेल की धर्मपत्नी थीं।
⛓️ योगदान:1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था और 6 माह तक जेल में रखा था।
रायपुर की नगरमाता: बिन्नी बाई सोनकर
🎂 जन्म:1927 में रायपुर के एक साधारण किसान परिवार में हुआ।
👩👧 माता: रामबाई।
🙏 कार्य: सन् 1993 में, बिन्नी बाई सोनकर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए एक धर्मशाला के निर्माण हेतु अपनी जमा पूंजी से 10 लाख रुपए रायपुर के तत्कालीन कमिश्नर श्री जे.एल. बोथ को प्रदान किए। [CG PSC(Pre)22]
🏆 सम्मान:
जुलाई 1994 में, तत्कालीन मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री अशोक राव ने भूमिपूजन किया और 1997 में बिन्नीबाई सोनकर धर्मशाला भवन का उद्घाटन अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के हाथों हुआ।
सन् 1998 में, रायपुर नगर निगम ने उन्हें प्रतीक चिह्न और ‘नगरमाता’ की उपाधि देकर सम्मानित किया।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उन्हें समाजसेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘मिनीमाता’ सम्मान से भी नवाजा गया।
बिलासा बाई केंवटिन
🌍 जन्म: बिलासपुर।
📜 परिचय: 16वीं शताब्दी में अपने शौर्य और पराक्रम के लिए प्रसिद्ध बिलासा बाई का जन्म बिलासपुर के मछुआरों की एक गुमनाम बस्ती में हुआ था। वे राजा कल्याण साय के साथ मुगल दरबार में भी उपस्थित हुई थीं।
🏆 सम्मान:
केंवट जाति में जन्म लेकर और मत्स्य पालन के व्यवसाय से जुड़कर इतिहास में अपनी पहचान बनाने के कारण वे आज भी समाज में अत्यंत सम्मानित हैं।
बिलासा बाई केंवटिन के इतिहास से प्रेरणा लेकर, छत्तीसगढ़ के मछुआरों के विकास और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए, राज्य सरकार ने सन् 2006 से “श्रीमती बिलासाबाई केंवटीन पुरस्कार” की स्थापना की है।
राजराजेश्वरी करुणामाता
💍 विवाह:1935 में गुरुगोसाईं अगमदास (गुरु घासीदास जी के परपोते) के साथ हुआ।
🏆 पुरस्कार: हथकरघा क्षेत्र में सूती वस्त्र उत्पादन की पारंपरिक कला और संस्कृति को बनाए रखने के लिए, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनकी स्मृति में राज्य स्तरीय “राजराजेश्वरी करुणामाता हाथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार” की स्थापना की गई है।
🙏 योगदान: उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सुधार, मानव कल्याण और समाज में एकता स्थापित करने तथा सनातन धर्म की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने हथकरघा क्षेत्र में सूती वस्त्र उत्पादन की पारंपरिक कला में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजमोहनी देवी
📖 परिचय: ये छत्तीसगढ़ की एक प्रसिद्ध समाज सेविका थीं।
🌍 आंदोलन: वे भू-दान आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
🤝 स्थापना:1951 में उन्होंने धर्मसेवा और आदिवासी सेवा मंडल की स्थापना की। 1953 में उन्होंने मद्य निषेध आंदोलन चलाया।
🏆 पुरस्कार:
1986 में उन्हें इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
1989 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
ममता चन्द्राकर
🏆 सम्मान: वर्ष 2016 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। वे एक प्रसिद्ध लोक कलाकार और गायिका हैं। संगीत नाटक अकादमी सम्मान (2019) से भी सम्मानित हैं।
सोना बाई रजवार – सरगुजा
🎨 संबंधित क्षेत्र: रजवार भित्तिशिल्प कला।
✨ विशेष:5 सितंबर 2022 को इंदिरा कला विश्वविद्यालय में सोना बाई रजवार के नाम पर एक आर्ट गैलरी की स्थापना की गई। उनकी इस कला ने स्थानीय महिलाओं में रजवार भित्तिशिल्प कला के प्रति एक नई रुचि पैदा की और इस लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई।
🎤 अलका चन्द्राकर: लोकगीत गायिका।
🌟 किस्मतबाई देवार: इन्हें ‘छत्तीसगढ़ की लता मंगेशकर’ कहा जाता है।
फिदाबाई मरकाम (राजनांदगांव)
🎭 सम्मान: लोक कला और आदिवासी लोक कला के क्षेत्र में तुलसी सम्मान (म.प्र.) से सम्मानित।
🎬 अभिनय: हबीब तनवीर और दाऊ मंदराजी के मंचन में अभिनय किया।
अनुपमा भागवत – भिलाई
🎶 क्षेत्र: प्रसिद्ध सितार वादक। [CG VS (AG-3)2021]
रेशमा पंडित
🎂 जन्म: रायपुर।
🎵 क्षेत्र: तबला वादन से संबंधित। [CG VS (AG-3)2021]
💃 सुलक्षणा पंडित: हिंदी फिल्मों में अभिनय और पार्श्व गायन।
नीता डुमरे
🏑 परिचय: प्रसिद्ध महिला हॉकी खिलाड़ी।
🎂 जन्म:10 दिसंबर 1968 को रायपुर में।
🏆 उपलब्धि: उन्होंने कई अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें मध्यप्रदेश शासन का विक्रम अवार्ड और रेलवे खेल पुरस्कार भी मिल चुका है।
सबा अंजुम
🏑 परिचय: प्रसिद्ध महिला हॉकी खिलाड़ी। [CG PSC (AP)2016, (ADD & SO) 2018]
🎂 जन्म:12 जून 1985 को तत्कालीन दुर्ग जिले में।
🏆 प्रदर्शन:
2002 राष्ट्रमंडल खेल, मैनचेस्टर में शानदार प्रदर्शन।
2002 एशियाई खेल, बुसान में शानदार प्रदर्शन।
🎖️ पुरस्कार:
2013 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।
2015 में पद्मश्री से सम्मानित।
🏆 छत्तीसगढ़ की खेल हस्तियाँ
🏑 रेणुका यादव
🏅 परिचय: एक विख्यात महिला हॉकी खिलाड़ी। [CG PSC (YWO)2018, (ARTO) 2017]
🎂 जन्म:18 जुलाई 1994 को राजनांदगांव जिले में।
🌍 उपलब्धि: ये रियो ओलंपिक 2016 में भाग लेने वाली छत्तीसगढ़ की एकमात्र खिलाड़ी थीं। [CG Vyapam (LOI) 2023]
🎖️ सम्मान: इन्हें गुण्डाधूर सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
🏸 आकर्षी कश्यप
🏅 परिचय: एक प्रसिद्ध महिला बैडमिंटन खिलाड़ी। [CG PSC (Lib. & SO)2017, (Sci. Off.) 2018, (ADS) 2019]
🎂 जन्म:24 अगस्त 2001 को भिलाई (दुर्ग) में हुआ था।
🏆 राष्ट्रीय उपलब्धि: तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।
🌍 अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियाँ:
2019: दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली राष्ट्रीय महिला टीम का हिस्सा थीं।
2022: बर्मिंघम, इंग्लैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में टीम चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता।
👮♀️ सम्मान: राज्य सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पुलिस विभाग में उप-पुलिस अधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया गया है।
🏋️♀️ ज्ञानेश्वरी यादव
🏅 परिचय: एक प्रसिद्ध महिला भारोत्तोलन (Weightlifting) खिलाड़ी हैं।
🌟 राष्ट्रीय उपलब्धि: राजनांदगांव की यह खिलाड़ी जूनियर वर्ग में देश की शीर्ष वेट लिफ्टर हैं।
2022: जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक और सीनियर वर्ग में रजत पदक प्राप्त किया।
2023: इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स में स्वर्ण पदक जीता। [CG Vyapam (LOI) 2023]
🌍 अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि:2023 में आयोजित कॉमनवेल्थ वेट लिफ्टिंग चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
💡 विशेष नोट: राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इन्हें रानी अवंति बाई लोधी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
🚺 छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम महिला
पद / सम्मान
नाम
प्रथम महिला कार्यवाहक राज्यपाल
आनंदीबेन पटेल
प्रथम महिला राज्यपाल
सुश्री अनसुइया उइके
प्रथम महिला आयोग की अध्यक्ष
श्रीमती हेमवंत पोर्ते
प्रथम महिला मंत्री (अविभाजित म.प्र. में)
श्रीमती पद्मावती देवी
प्रथम महिला मंत्री (छ.ग. राज्य में)
श्रीमती गीता देवी सिंह (महिला बाल विकास)
प्रथम महिला सांसद
मिनीमाता
छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रथम महिला साहित्यकार
निरूपमा शर्मा
प्रथम महिला उपन्यासकार
सरला शर्मा (माटी के मितान, 2006)
प्रथम महिला संस्मरण लेखिका
सरला शर्मा (सूरता के बादर, 2005)
छ.ग. से पद्मश्री से सम्मानित प्रथम महिला
तीजनबाई (1987)
पद्मभूषण से नवाजी गयी प्रथम महिला
तीजनबाई (2003)
प्रथम पद्मविभूषण प्राप्तकर्ता
तीजनबाई (2019)
मिनीमाता सम्मान की प्रथम प्राप्तकर्ता
श्रीमती बिन्नी बाई (2001)
प्रथम महिला शासक
प्रफुल्ल कुमारी देवी
प्रथम महिला पर्वतारोही
सविता धपवाल
छ.ग. उच्च न्यायालय की प्रथम महिला न्यायधीश
विमला सिंह ठाकुर
🧗♀️ छत्तीसगढ़ की महिला पर्वतारोही
सविता धपवाल
🗻 उपलब्धि: भिलाई निवासी सविता धपवाल ने 1993 में बछेंद्री पाल के साथ मिलकर दुनिया की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एवरेस्ट (8848.87 मीटर), पर विजय प्राप्त की थी।
नैना सिंह धाकड़
🌍 परिचय: एकटागुड़ा (बस्तर) की निवासी।
🗻 उपलब्धियाँ:
2021 में माउंट एवरेस्ट (8848.87 मीटर) को फतह किया।
नेपाल में स्थित माउंट ल्होत्से (8516 मीटर) की भी सफल चढ़ाई पूरी की।
अमिता श्रीवास
🌍 परिचय: जांजगीर-चांपा की निवासी।
🗻 उपलब्धि:8 मार्च 2021 को (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर) अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी, माउंट किलिमंजारो, को फतह किया। [CG Vyapam (VPR)2021]
निशू सिंह
🌍 परिचय: बिलासपुर जिले की निवासी।
🗻 उपलब्धियाँ:
अप्रैल 2021 में अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी, माउंट किलिमंजारो, पर तिरंगा फहराया।
21 मई 2024 को विश्व की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एवरेस्ट, पर भी विजय प्राप्त की। [CG Vyapam (FI)2022]
निशा यादव
🌍 परिचय: बिलासपुर की निवासी।
🗻 उपलब्धि:दिसंबर 2021 में नैनीताल (उत्तराखण्ड) की सबसे ऊँची चोटी, पिक चोटी, को फतह किया। [CG Vyapam (FI)2022]
अंकिता गुप्ता
🌍 परिचय: रायपुर की निवासी।
🗻 उपलब्धि: आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के अवसर पर 15 अगस्त 2022 को यूरोप की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एल्ब्रुस, पर विजय प्राप्त की।
✨ विशेष कार्य: उन्होंने माउंट एल्ब्रुस पर छत्तीसगढ़ पुलिस का लोगो (Logo) लगा हुआ झंडा फहराया और “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा देते हुए न्याय और सशक्तिकरण के छत्तीसगढ़ मॉडल का संदेश दिया।
याशी जैन
🌍 परिचय: रायगढ़ की निवासी।
🗻 उपलब्धियाँ:
वर्ष 2019 में यूरोप की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एल्ब्रुस, को फतह किया।
वर्ष 2023 में विश्व की सबसे ऊँची चोटी, माउंट एवरेस्ट, पर विजय प्राप्त की।