छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -3

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 छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -1

 छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -2

 छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -4

📌 छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह

📖 परिचय
वर्ष 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय, छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह का आरम्भ बड़े स्तर पर विभिन्न स्थानों में हुआ। यह सत्याग्रह सविनय अवज्ञा आंदोलन का ही एक भाग था, जिसमें स्थानीय निवासियों ने वन कानूनों का उल्लंघन किया, जैसे जंगल का उपयोग और चराई पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ना। हालांकि, 5 मार्च 1931 को हुए गांधी-इरविन समझौते के बाद, जब सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित हुआ, तो छत्तीसगढ़ में भी ये जंगल सत्याग्रह धीरे-धीरे समाप्त हो गए।


📜 छत्तीसगढ़ के प्रमुख जंगल सत्याग्रह (एक नजर में)


🗺️ छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रहों का वर्गीकरण

1️⃣ असहयोग आंदोलन के समय हुए सत्याग्रह

2️⃣ सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय हुए सत्याग्रह

3️⃣ जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा नहीं थे


🌱 जंगल सत्याग्रहों का विस्तृत वर्णन

🦁 गट्टासिल्ली

💪 मोहबना-पोंड़ी

🌾 घोंघाडीह

🏞️ पोंडीगांव (सीपत)

💧 रुद्री-नवागांव

🏛️ बेमेतरा

🏹 लभरा सत्याग्रह

🔥 तमोरा सत्याग्रह

🛑 पकरिया सत्याग्रह

🌲 ईदाखार सत्याग्रह

⛰️ बांधाखार सत्याग्रह


📜 अन्य प्रमुख जंगल सत्याग्रह


📌 सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण: छत्तीसगढ़ पर प्रभाव (1932)

📖 आंदोलन की पुनः शुरुआत
जब 1931 का द्वितीय गोलमेज सम्मेलन बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया, तो महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर सविनय अवज्ञा आंदोलन को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया। इस आंदोलन का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहाँ कई “डिक्टेटर” (कार्यवाहक नेता) नियुक्त किए गए।

8 जनवरी 1932 को पं. रविशंकर शुक्ल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आंदोलन के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।

📜 आंदोलन के दौरान नियुक्त 8 डिक्टेटर

द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान, छत्तीसगढ़ में आंदोलन को दिशा देने के लिए कुल 8 डिक्टेटर चुने गए थे, जिनका क्रम इस प्रकार है:

🔑 आंदोलन के दौरान अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम:


📜 अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम (1932)

🌾 किसान सभा का अधिवेशन

🚫 महासमुंद तहसील में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

✊ पेशावर दिवस

🪧 रायपुर और बिलासपुर में धरना


💡 आंदोलन के प्रमुख रचनात्मक कार्यक्रम

🐵 वानर सेना का गठन

✨ बलिदान सप्ताह या सत्याग्रह सप्ताह

⛓️ बंदी दिवस

💣 पत्र बम योजना

🥃 बिलासपुर जिले में मद्य-निषेध कार्यक्रम


🕊️ गांधी जी का छत्तीसगढ़ में दूसरा आगमन (22-28 नवम्बर 1933)

📖 आगमन का संदर्भ
गांधी जी का यह आगमन द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हुआ। [CG PSC (Asst. Prof.) 2016] उनका मुख्य उद्देश्य अछूतोद्धार (हरिजन उद्धार) कार्यक्रम को बढ़ावा देना था। [CG VS(AG-3)2021] [CG PSC(AP)2014] इस यात्रा में उनके साथ मीराबेन, ठक्कर बापा, और महादेव देसाई भी थे। उन्होंने दुर्ग, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी और बिलासपुर जैसे स्थानों का दौरा किया।

🔑 एक विशेष घटना

राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य, स्मिथ पीयर्स, गांधी जी के विचारों से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने गांधी जी को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान कॉलेज में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया। [CGPSC(Pre)2020]



🧠 महत्वपूर्ण तथ्य (Notes)


📜 वर्ष 1933-1936 के अन्य प्रमुख घटनाक्रम

🏫 अनाथालय की स्थापना (1933)

📰 महाकौशल साप्ताहिक हिन्दी पत्रिका

🗳️ केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभा का निर्वाचन (1934)

📚 भारतेंदु साहित्य समिति की स्थापना (1935)

🌍 मध्यप्रांत की राजनीति (1935-36)

🤝 बरार का मध्यप्रांत में विलय (1935)


🗳️ प्रांतीय विधान सभा चुनाव – 1937

📜 पृष्ठभूमि: केंद्रीय व्यवस्थापिका सभा का निर्वाचन (1935)


🗳️ आम चुनाव – 1937

📊 मध्य प्रांत चुनाव में निर्वाचित सदस्य


👑 ई. राघवेन्द्र राव द्वारा अल्पकालीन मंत्रिमंडल का गठन


📜 1938 से 1939 तक की विभिन्न घटनाएं

🤝 सेवादल का गठन – 1938

🏛️ छुईखदान रियासत में स्टेट कांग्रेस की स्थापना – 1938

🎤 कांग्रेस का त्रिपुरी अधिवेशन – 1939


🗓️ छत्तीसगढ़ में मनाए गए प्रमुख दिवस


🕊️ व्यक्तिगत सत्याग्रह (Individual Satyagraha) – 1940

📖 पृष्ठभूमि:
अगस्त 1940 में बॉम्बे (मुंबई) में हुई कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में गांधी जी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की। गांधी जी के आह्वान पर, 17 अक्टूबर 1940 को देश में व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत हुई। पवनार आश्रम के विनोबा भावे को भारत का प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही चुना गया।

छत्तीसगढ़ में प्रभाव:

छत्तीसगढ़ में भी इस आंदोलन का व्यापक प्रभाव पड़ा, जिसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है:


1️⃣ बिलासपुर में प्रभाव

💡 प्रश्न: ठाकुर छेदीलाल ने पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए कब व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारंभ किया? [CG PSC (ADPO) 2021]
(A) 17 अक्टूबर, 1940
(B) 13 अक्टूबर, 1940
(C) 22 अक्टूबर, 1940
(D) 21 नवम्बर, 1940
उत्तर: (C)

2️⃣ रायपुर में प्रभाव

💡 प्रश्न: नवंबर 1940 में, व्यक्तिगत सत्याग्रह का आरंभ पंडित रविशंकर शुक्ल ने किस स्थान से किया? [CG PSC (ADH) 2022]
(A) माना
(B) धमतरी
(C) महासमुंद
(D) राजिम
उत्तर: (A)

3️⃣ दुर्ग में प्रभाव


📜 व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने वाले व्यक्ति


🚂 ललितपुर (उत्तरप्रदेश) की घटना – 1941


🏛️ रायपुर षड्यंत्र केस (Raipur Conspiracy Case) – 1942

🔥 भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) – 1942: छत्तीसगढ़ में प्रभाव

📜 आंदोलन शुरू होने के प्रमुख कारण

✍️ वर्धा प्रस्ताव (1942)


🏛️ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक


🚀 भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

⛓️ मलकानपुर में छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी


🗺️ आंदोलन के दौरान गिरफ्तार नेता एवं स्थान


💥 रायपुर में घटनाक्रम (1942)

🚶 1. रायपुर में विशाल जुलूस

👨‍🎓 2. रायपुर में विद्यार्थी जुलूस का आयोजन

🇮🇳 3. रायपुर में तिरंगा झंडा फहराने का अपराध

💣 4. टेलीफोन लाइन काटने और रेल पटरी उखाड़ने का प्रयास

💥 5. रायपुर डायनामाइट केस, 1942

📰 6. ‘अग्रदूत’ पत्रिका

🔥 बिलासपुर में घटनाक्रम (भारत छोड़ो आंदोलन, 1942)

🗣️ 1. गांधी चौक में विशाल जनसभा का आयोजन (9 अगस्त 1942)

🔗 2. आंदोलन के संबंध में गिरफ्तारियाँ (10 अगस्त 1942)

🎤 3. बिलासपुर में विशाल सभा का आयोजन (15 अगस्त 1942)

🇮🇳 4. बिलासपुर जिला कार्यालय भवन पर तिरंगा फहराना (22 अगस्त 1942)

🚶 5. भुवनभास्कर के नेतृत्व में विशाल जुलूस (2 अक्टूबर 1942)

✊ 6. आई.जी. जठार साहब का बिलासपुर जेल में विरोध (1942)


⚔️ जांजगीर-चांपा और दुर्ग में घटनाक्रम

🌟 जांजगीर-चांपा

🔥 दुर्ग में विशाल जुलूस और आगजनी (1942)


⛓️ बेमेतरा, बलौदा बाजार और अन्य स्थानों में घटनाक्रम

📍 बेमेतरा में गिरफ्तारी (9 अगस्त 1942)

📍 बलौदा बाजार में युवकों का जुलूस (10 अगस्त 1942)

🇮🇳 नागपुर हाईकोर्ट भवन में तिरंगा झंडा फहराना


👑 छत्तीसगढ़ की रियासतों में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रभाव

इस आंदोलन का प्रभाव निम्नलिखित रियासतों पर भी पड़ा:

  1. रायगढ़ रियासत
  2. सारंगढ़ रियासत
  3. राजनांदगांव रियासत
  4. छुई खदान रियासत
  5. खैरागढ़ रियासत

📜 राष्ट्रीय राजनेताओं का छत्तीसगढ़ आगमन

यहाँ उन प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की सूची दी गई है जिन्होंने विभिन्न उद्देश्यों से छत्तीसगढ़ की यात्रा की:

🔑 दो बार छत्तीसगढ़ की यात्रा करने वाले राजनेता:

  1. लोकमान्य बालगंगाधर तिलक (1907 एवं 1918)
  2. महात्मा गांधी (1920 एवं 1933)
  3. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (1921 एवं 1935)
  4. सरदार वल्लभभाई पटेल (1940 एवं 1947)

📈 राजनीतिक विकास (1943 से 1947)

🕊️ बिलासपुर जेल से बंदियों की रिहाई (7 दिसंबर 1944)

** सप्ताह का आयोजन**

🗓️ गांधी जयंती सप्ताह (1945)


👑 बस्तर स्टेट पीपुल्स कांग्रेस (1945)


🗳️ मध्यप्रांत का दूसरा चुनाव (1946)


📜 छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस एवं संविधान सभा (1946–47)

🤝 प्रमुख सम्मेलन और आंदोलन (1946)


ब्रिटिश प्रांत (मध्यप्रांत के छत्तीसगढ़ से – 3 सदस्य)

देशी रियासतों से – 3 सदस्य

🔑 विशेष: