छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -3
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -1
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -2
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -4
📌 छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह
📖 परिचय
वर्ष 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय, छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह का आरम्भ बड़े स्तर पर विभिन्न स्थानों में हुआ। यह सत्याग्रह सविनय अवज्ञा आंदोलन का ही एक भाग था, जिसमें स्थानीय निवासियों ने वन कानूनों का उल्लंघन किया, जैसे जंगल का उपयोग और चराई पर लगे प्रतिबंधों को तोड़ना। हालांकि, 5 मार्च 1931 को हुए गांधी-इरविन समझौते के बाद, जब सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित हुआ, तो छत्तीसगढ़ में भी ये जंगल सत्याग्रह धीरे-धीरे समाप्त हो गए।
📜 छत्तीसगढ़ के प्रमुख जंगल सत्याग्रह (एक नजर में)
| सत्याग्रह का नाम | तिथि | स्थान | प्रमुख नेतृत्वकर्ता |
| गट्टासिल्ली | जून 1930 | धमतरी | नारायणराव मेघावाले, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नत्थूजी जगताप |
| मोहबना-पोंडी | 24 जुलाई 1930 | बालोद | नरसिंह प्रसाद अग्रवाल |
| घोंघाडीह | जुलाई 1930 | बिलासपुर | मुकुंदा, अजीत रावत, पंचम, लटी, संसारी |
| पोंडीगांव (सीपत) | 3 अगस्त, 1930 | बिलासपुर | रामाधार दुबे |
| रुद्री-नवागांव | 22 अगस्त, 1930 | धमतरी | बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायणराव मेघावाले, नत्थूजी जगताप |
| सुकली ग्राम | 25 अगस्त 1930 | बलौदाबाजार | बेनीराम बनऊ एवं बसावन राउत |
| बेमेतरा | 2 सितम्बर 1930 | बेमेतरा | विश्वनाथ तामस्कर |
| लभरा | 8 सितम्बर 1930 | महासमुंद | अरिमर्दन गिरी |
| तमोरा | 9 सितम्बर 1930 | महासमुंद | यतियतन लाल जैन, शंकरराव गनौदवाले |
| पकरिया | 7 अक्टूबर 1930 | जांजगीर-चाम्पा | अयोध्या प्रसाद जैन |
| ईदाखार | 1930 | बिलासपुर | सत्यनारायण खण्डेलवाल, रामनारायण, अमरसिंह, केशवप्रसाद वर्मा |
| बाधाखार | 1930 | कोरबा | मनोहरलाल शुक्ल |
| तानवट | 1930 | स्थानीय लोगों द्वारा | |
| सारंगढ़ | 1930 | सारंगढ़ | धनीराम, जगतराम |
| साहिल्य ग्राम | 1930 | महासमुंद | अंजोर सिंह |
| छुईखदान | 1938 | खै.-छु-ग. | समारू बरई |
| छुरिया | 03 जनवरी 1939 | राजनांदगांव | विद्या प्रसाद यादव |
| बदराटोला | 21 जनवरी 1939 | राजनांदगांव | रामाधीन गोंड |
🗺️ छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रहों का वर्गीकरण
1️⃣ असहयोग आंदोलन के समय हुए सत्याग्रह
- नगरी-सिहावा जंगल सत्याग्रह: यह छत्तीसगढ़ का प्रथम जंगल सत्याग्रह माना जाता है। [CGPSC(ADJ)2019] [CGPSC(Pre)2016] [CGPSC(ADVHS)2013]
2️⃣ सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय हुए सत्याग्रह
- गट्टासिल्ली [CGPSC(MI)2014]
- मोहबना-पोंडी
- पोंडीगांव (सीपत) [CGPSC (CMO)2019, (Pre) 2022]
- रुद्री-नवागांव [CGPSC (CMO)2019](MI)2014]
- लभरा
- तमोरा [CGPSC (CMO)2019, (Pre) 2022,(MI)2014] [CGVyapam(HCAG)2018]
- पकरिया [CGPSC(CMO)2019, (Pre) 2022]
- बांधाखार (कटघोरा) [CGPSC(ADH)2011]
3️⃣ जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा नहीं थे
- छुईखदान
- बदराटोला
🌱 जंगल सत्याग्रहों का विस्तृत वर्णन
🦁 गट्टासिल्ली
- 📅 तिथि: जून 1930 [CGPSC(APE)2016][CG PSC(ADPPO)2017][CG PSC(Asst. Geo.) 2011]
- 📍 जिला: धमतरी
- 👥 नेतृत्वकर्ता: इस सत्याग्रह का नेतृत्व नारायणराव मेघावाले, छोटेलाल श्रीवास्तव, और नत्थूजी जगताप ने किया। [CG PSC(Pre.)2016,(SFE)2017,(Engg.S1)2015] [CG Vyapam(MSI)2021]
💪 मोहबना-पोंड़ी
- 📅 तिथि: 24 जुलाई 1930 [CG PSC(APE)2016][CG PSC(ADPPO)2017]
- 📍 जिला: बालोद (यह क्षेत्र पहले दुर्ग जिले का हिस्सा था)।
- 👥 नेतृत्वकर्ता: नरसिंह प्रसाद अग्रवाल। [CG Vyapam(MSI)2021(LOI)2018] [CG PSC(ADP)2019|CG PSC(Engg.S1)2015]
- 🔑 विशेष: वर्ष 1930 में, पोंडी गाँव में नरसिंह प्रसाद अग्रवाल के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक विशाल जुलूस निकाला गया और नारे लगाए गए। [CG PSC(ADP)2019]
🌾 घोंघाडीह
- 📅 तिथि: जुलाई 1930
- 👥 नेतृत्वकर्ता: इसका नेतृत्व मुकुंदा, अजीत रावत, पंचम, लटी, और संसारी ने किया।
🏞️ पोंडीगांव (सीपत)
- 📅 तिथि: 3 अगस्त 1930 [CGPSC(Pre) 2022]
- 📍 जिला: बिलासपुर
- 👥 नेतृत्वकर्ता: रामाधार दुबे। [CG PSC(CMO)2019][CG Vyapam(LOI)2018]CG PSC(Engg.S1)2015]
- 🔑 विशेष: लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रामाधार दुबे द्वारा चरखा संघ की स्थापना की गई।
💧 रुद्री-नवागांव
- 📅 तिथि: 22 अगस्त 1930 [CGPSC (Pre) 2022), (CMO)2019,(APE)2016,(ADPPO)2017,(Asst. Geo.)2011]
- 📍 जिला: धमतरी [CG PSC(ADH)2011]
- 👥 नेतृत्वकर्ता: इसका नेतृत्व बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नत्थूजी जगताप, और नारायणराव मेघावाले ने संभाला। [CG PSC(CMO)2019] [CG PSC(AP)2016][CG Vyapam(MSI)2021(LOI)2018]
- 🕊️ मृत्यु: 22 अगस्त 1930 को इस सत्याग्रह में पुलिस ने क्रूरता का प्रदर्शन किया। अनुविभागीय अधिकारी द्वारा 17 सितम्बर 1930 को धारा 144 फिर से लागू कर दी गई, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस और भी हिंसक हो गई। लाठी चार्ज और गोलीबारी के कारण लमकेनी गांव के मिन्धु कुम्हार और रत्तू गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें उसी हालत में रायपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया गया। इसी बीच 25 सितंबर 1930 को मिन्धु कुम्हार की दुखद मृत्यु हो गई। [CG Vyapam (CBAS) 2023]
- डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर नत्थूजी जगताप और नारायणराव मेघावाले को गिरफ्तार कर लिया गया।
🏛️ बेमेतरा
- 📅 तिथि: 2 सितम्बर 1930
- 📍 स्थान: बेमेतरा तहसील
- 👥 नेतृत्वकर्ता: विश्वनाथ तामस्कर।
🏹 लभरा सत्याग्रह
- 🗓️ तिथि: 8 सितम्बर 1930
- 🌍 जिला: महासमुंद
- 👥 नेतृत्वकर्ता: अरिमर्दन गिरी
- 🤝 सहयोगी: इस सत्याग्रह में आनंद गोंड़, श्यामलाल गोंड़, फिरतुराम गोंड़ और मंगलू गोंड़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 🔑 विशेष: यह जंगल सत्याग्रह पूरी तरह से गोंड़ जनजाति द्वारा संचालित एक विद्रोह था, जिस वजह से इसे ‘गोंड़ विद्रोह’ के नाम से भी जाना जाता है।
🔥 तमोरा सत्याग्रह
- 🗓️ तिथि: 9 सितम्बर 1930 [CG PSC(CMO)2019,(APE)2016,(ADPPO)2017,(ARTO)2022]{CG Vyapam(CROS)2017]
- 🌍 जिला: महासमुंद [CGPSC (Pre) 2022] [CG PSC(SEE)2020][CG PSC(ADH)2011]
- 👥 नेतृत्वकर्ता: इसका नेतृत्व यतियतन लाल, शंकरराव गनौदवाले और भगवती प्रसाद मिश्र ने किया। [CG PSC(CMO)2019,(Engg. S1)2015(ARTO)2022] [CG Vyapam (MSI)2021(HCAG)2018,(LOI)2018]
- 📜 डिक्टेटर: इस सत्याग्रह के लिए अरिमर्दन गिरी को डिक्टेटर के रूप में नियुक्त किया गया था। [CG PSC(ARTO)2022]
- 🔑 विशेष:
- सर्वप्रथम, दयावती नामक बालिका ने महिला सत्याग्रहियों के दल के साथ वन में प्रवेश कर एक नई मिसाल कायम की। [CG PSC(ARTO)2022]
- इस सत्याग्रह के दौरान, बालिका दयावती ने तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (एस.डी.ओ.पी.) एम.पी. दुबे का मार्ग रोका और उन्हें थप्पड़ मार दिया, जो एक साहसिक कदम था। [CG PSC(SEE)2020][CG PSC(MI)2018][CG Vyapam(EAE)2017(Patwari)2022]
🛑 पकरिया सत्याग्रह
- 🗓️ तिथि: 07 अक्टूबर 1930 [CG PSC(CMO)2019,(Pre)2022]
- 🌍 जिला: जांजगीर-चाम्पा
- 👥 नेतृत्वकर्ता: अयोध्या प्रसाद जैन [CG PSC(CMO)2019]
- 🔑 विशेष: पकरिया, जांजगीर-चांपा जिले का एक गाँव है। सत्याग्रह शुरू होने से पहले ही अयोध्या प्रसाद जैन को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके कारण यह सत्याग्रह हो नहीं पाया।
🌲 ईदाखार सत्याग्रह
- 🗓️ तिथि: 1930
- 🌍 जिला: बिलासपुर
- 👥 नेतृत्वकर्ता: इसका नेतृत्व सत्यनारायण खण्डेलवाल, रामनारायण, अमरसिंह और केशवप्रसाद वर्मा ने किया।
⛰️ बांधाखार सत्याग्रह
- 🗓️ तिथि: 1930
- 🌍 स्थान: कटघोरा (कोरबा) [CGPSC(ADH)2011]
- 👥 नेतृत्वकर्ता: मनोहरलाल शुक्ल
- 🤝 सहयोगी: गया प्रसाद, हेमसिंह और इतवार सिंह गोंड़ इनके प्रमुख सहयोगी थे।
- 🔑 विशेष: इस सत्याग्रह का नेतृत्व मुख्य रूप से गोंड़ एवं कंवर आदिवासियों द्वारा किया गया था।
📜 अन्य प्रमुख जंगल सत्याग्रह
| सत्याग्रह का नाम | तिथि | स्थान / जिला | नेतृत्वकर्ता | विशेष तथ्य |
| तानवट | 1930 | नवापारा | स्थानीय निवासियों द्वारा | इस सत्याग्रह को दबाने के लिए तानवट (नवापारा) के जमींदार ने अंग्रेजों का साथ दिया। |
| सारंगढ़ | 1930 | सारंगढ़ | धनीराम, जगतराम, कुंवरभान | |
| साहिल्य ग्राम | 1930 | महासमुंद | अंजोर सिंह | |
| सुकली ग्राम | 25 अगस्त 1930 | बलौदाबाजार | बेनीराम बनऊ एवं बसावन राउत | |
| छुईखदान | 1938 | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | समारू बरई | |
| छुरिया | 3 जनवरी 1939 | राजनांदगांव | विद्या प्रसाद यादव एवं विश्वेश्वर प्रसाद | |
| बदराटोला | 21 जनवरी 1939 | राजनांदगांव (रियासत) | रामाधीन गोंड | 21 जनवरी 1939 को बदराटोला जंगल सत्याग्रह में रामाधीन गोंड शहीद हो गए थे। [CG PSC(ADPPO)2013]। छत्तीसगढ़ की छुईखदान और बदराटोला रियासतों में यह जंगल सत्याग्रह 1938-39 में स्टेट कांग्रेस के संरक्षण में हुआ था। [CG PSC(ADR)2019] |
📌 सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण: छत्तीसगढ़ पर प्रभाव (1932)
📖 आंदोलन की पुनः शुरुआत
जब 1931 का द्वितीय गोलमेज सम्मेलन बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया, तो महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर सविनय अवज्ञा आंदोलन को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया। इस आंदोलन का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहाँ कई “डिक्टेटर” (कार्यवाहक नेता) नियुक्त किए गए।
8 जनवरी 1932 को पं. रविशंकर शुक्ल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आंदोलन के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।
📜 आंदोलन के दौरान नियुक्त 8 डिक्टेटर
द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान, छत्तीसगढ़ में आंदोलन को दिशा देने के लिए कुल 8 डिक्टेटर चुने गए थे, जिनका क्रम इस प्रकार है:
| डिक्टेटर का क्रम | नाम | प्रमुख बिंदु / विशेष तथ्य |
| प्रथम | पं. रविशंकर शुक्ल | 🔸 उन्हें সমগ্র प्रांत का डिक्टेटर नियुक्त किया गया था। [CGPSC(ABEO) 2013] 🔸 29 जनवरी 1932 को रायपुर में पेशावर दिवस का आयोजन किया। 🔸 19 फरवरी 1932 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। [CGPSC(ADS) 2017],[CGPSC(ADA)2020] |
| द्वितीय | शंकर राव गनौदवाले | 🔸 30 मार्च 1932 को उनकी गिरफ्तारी के बाद, पं. सुन्दरलाल शर्मा ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला। |
| तृतीय | पं. सुन्दरलाल शर्मा | 🔸 19 अप्रैल 1932 को उन्हें सत्याग्रही बुधराम, घासीराम, ज्वालाप्रसाद और रामलाल के साथ बंदी बना लिया गया। |
| चतुर्थ | श्रीमती राधाबाई | 🔸 छत्तीसगढ़ की पहली और एकमात्र महिला डिक्टेटर थीं। 🔸 रायपुर जिले का नेतृत्व उन्होंने संभाला, जिसके कारण 13 जून 1932 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। [CG PSC(Mains)2011][CG PSC(Pre)2021] 🔸 महिला उत्थान, अस्पृश्यता निवारण और सामाजिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। [CG Vyapam(RI)2017] 🔸 उनका जन्म नागपुर में हुआ था और रायपुर में दाई के रूप में प्रसिद्ध होने के कारण लोग उन्हें “डॉक्टर” भी कहते थे। |
| पंचम | रामनारायण मिश्र (हर्षुल) | 🔸 इन्होंने 1932 में पत्र बम की योजना बनाई और 13 जून से 31 जुलाई 1932 तक नेतृत्व किया। |
| षष्ठम | माधवप्रसाद परगनिहा | |
| सप्तम | ब्रम्हदेव / बलदेव दुबे | 🔸 रायपुर में 4 अगस्त 1932 को बंदी दिवस मनाया। |
| अष्ठम | लक्ष्मीनारायण तिवारी | 🔸 ये आंदोलन के अंतिम डिक्टेटर थे। |
🔑 आंदोलन के दौरान अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम:
- 26 जनवरी 1932: रायपुर में प्रतिज्ञा दिवस मनाने पर इस्माईल खान को गिरफ्तार किया गया।
- 29 जनवरी 1932: ठा. प्यारेलाल सिंह को गिरफ्तार किया गया।
- रायपुर जिले में यह आंदोलन 31 दिसंबर 1932 तक सक्रिय रहा।
📜 अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम (1932)
🌾 किसान सभा का अधिवेशन
- 🗓️ तिथि: 10 जनवरी 1932
- 📍 स्थान: चांदनी चौक, रायपुर
- 👥 अध्यक्षता: ठा. प्यारेलाल सिंह
- 🔑 घटनाक्रम: यह अधिवेशन उस समय हुआ जब सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण चल रहा था और “कर न दो, पट्टा मत लो” आंदोलन लोकप्रिय हो रहा था। इसमें लगभग 3,400 किसान शामिल हुए।
🚫 महासमुंद तहसील में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
- 🗓️ तिथि: 12 जनवरी 1932
- 👥 नेतृत्व: क्रांतिकुमार भारतीय, यतियतनलाल, भगवती प्रसाद मिश्र, सत्यानारायण वैष्णव।
✊ पेशावर दिवस
- 🗓️ तिथि: 29 जनवरी 1932
- 🙌 आयोजन: पं. रविशंकर शुक्ल द्वारा।
- 🎯 उद्देश्य: उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में ब्रिटिश शासन की बर्बरता के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करना।
🪧 रायपुर और बिलासपुर में धरना
- रायपुर: 12 फरवरी 1932 को कीका भाई की दुकान के सामने केतकी बाई और रुक्मणीबाई के नेतृत्व में महिलाओं ने विदेशी वस्त्रों के खिलाफ धरना दिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। [CG PSC(Registrar)2017]
- बालोद: फरवरी 1932 में नरसिंह प्रसाद अग्रवाल के नेतृत्व में कांग्रेस स्वयंसेवकों ने जुलूस निकाला। [CGPSC(ADS)2017]
- बिलासपुर: फरवरी 1932 में ठा. छेदीलाल के नेतृत्व में विदेशी वस्त्रों की दुकानों के सामने धरना दिया गया, जिसके बाद अवधराम सोनी, मुरलीधर मिश्र आदि को गिरफ्तार किया गया। [CGPSC(ADS)2017]
💡 आंदोलन के प्रमुख रचनात्मक कार्यक्रम
🐵 वानर सेना का गठन
- 🗓️ गठन: फरवरी 1932, ब्राम्हणपारा, रायपुर। [CG Vyapam(FI)2013]
- 👨🏫 संस्थापक: बलीराम दुबे, जिन्हें उनके क्रांतिकारी स्वभाव के कारण “बलीराम आजाद” भी कहा जाता था।
- 🎯 कार्य: वानर सेना छोटे बच्चों का एक समूह था जो पोस्टर चिपकाने, पर्चे बांटने और नेताओं के संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का जोखिम भरा काम करते थे।
- 🔑 नोट: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रायपुर की यह वानर सेना सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण में बनी थी, जबकि बिलासपुर की वानर सेना (गठन- वासुदेव देवरस) आंदोलन के पहले चरण में ही गठित हो गई थी।
✨ बलिदान सप्ताह या सत्याग्रह सप्ताह
- 🗓️ तिथि: 6 अप्रैल से 12 अप्रैल 1932
- 📍 स्थान: दुर्ग
- 🎯 कार्यक्रम: धरना देना, खादी का प्रचार करना और झंडा फहराना। इस दौरान गेंदमल देशलहरा और व्ही. वाय. तामस्कर को गिरफ्तार किया गया।
⛓️ बंदी दिवस
- 🗓️ तिथि: 4 अगस्त 1932 [CG Vyapam(PHEH)2023]
- 📍 स्थान: रायपुर
- 👥 नेतृत्व: ब्रह्मदेव / बलदेव दुबे
- 🎯 उद्देश्य: विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का विरोध करके गिरफ्तारी देना।
💣 पत्र बम योजना
- 🗓️ वर्ष: 1932
- 🧠 नेतृत्वकर्ता: रामनारायण मिश्र (हर्षुल)
- 🎯 उद्देश्य: राष्ट्रीय हितों के विरोधी और अंग्रेजों के वफादार व्यक्तियों को पत्र बम के माध्यम से डराना और चेतावनी देना।
- 🛠️ योजना: इस योजना के तहत, स्याही सोखने वाले कागज में फास्फोरस के छोटे-छोटे टुकड़े रखकर एक विस्फोटक तैयार किया जाता था, जो पत्र खोलने पर हाथ और मुँह जला देता था।
- ⚖️ परिणाम: इस कार्य के लिए रामनारायण मिश्र (हर्षुल) को गिरफ्तार कर लिया गया।
🥃 बिलासपुर जिले में मद्य-निषेध कार्यक्रम
- 📍 स्थान: मुंगेली तहसील
- 👥 नेतृत्वकर्ता: गजाधर साव, कालीचरण
- 🔑 नोट: 31 दिसंबर 1932 तक, रायपुर जिले में द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान 18 महिलाओं ने अपनी गिरफ्तारियाँ दी थीं।
🕊️ गांधी जी का छत्तीसगढ़ में दूसरा आगमन (22-28 नवम्बर 1933)
📖 आगमन का संदर्भ
गांधी जी का यह आगमन द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हुआ। [CG PSC (Asst. Prof.) 2016] उनका मुख्य उद्देश्य अछूतोद्धार (हरिजन उद्धार) कार्यक्रम को बढ़ावा देना था। [CG VS(AG-3)2021] [CG PSC(AP)2014] इस यात्रा में उनके साथ मीराबेन, ठक्कर बापा, और महादेव देसाई भी थे। उन्होंने दुर्ग, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी और बिलासपुर जैसे स्थानों का दौरा किया।
🔑 एक विशेष घटना
राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य, स्मिथ पीयर्स, गांधी जी के विचारों से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने गांधी जी को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान कॉलेज में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया। [CGPSC(Pre)2020]
🗓️ गांधी जी की विस्तृत यात्रा कार्यक्रम
- 22 नवंबर 1933 (दुर्ग):
- गांधी जी दुर्ग पहुँचे और घनश्याम सिंह गुप्त के निवास पर रुके।
- उन्होंने एक सभा को संबोधित किया और उसी रात रायपुर के लिए रवाना हुए, जहाँ आमापारा से बूढ़ातालाब तक एक ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया। [CGPSC(Pre)2024]
- 23 नवंबर 1933 (रायपुर):
- उन्होंने विक्टोरिया गार्डन (जिसे अब मोतीबाग कहा जाता है) में खादी और स्वदेशी प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।
- इसके बाद मौदहापारा में सभा की और सतनामी आश्रम और अनाथालय का दौरा भी किया।
- 24 नवंबर 1933 (रायपुर):
- उन्होंने लॉरी स्कूल (जो अब माधवराव सप्रे स्कूल है) में एक सभा को संबोधित किया।
- 25 नवंबर 1933 (धमतरी और बिलासपुर):
- धमतरी प्रवास: उन्होंने धमतरी के मकई बंध चौक में एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। [CG Vyapam(VSAM)2024]
- धमतरी में उन्होंने सबसे पहले दाजी मराठी कन्याशाला में भाषण दिया।
- आंदोलन में इस क्षेत्र की सक्रियता देखकर गांधी जी ने प्रभावित होकर कहा, “यह तहसील वास्तव में यहाँ की बारदोली है।”
- बिलासपुर प्रवास: रायपुर से बिलासपुर जाते समय, भाटापारा और बलौदाबाजार में उनका भव्य स्वागत हुआ। बिलासपुर में वे कुंजबिहारी अग्निहोत्री के निवास पर ठहरे।
- धमतरी प्रवास: उन्होंने धमतरी के मकई बंध चौक में एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। [CG Vyapam(VSAM)2024]
- 26 नवंबर 1933:
- उन्होंने सारागांव, खरोरा, पलारी, कनकी, बलौदाबाजार और सिमगा जैसे क्षेत्रों का दौरा किया।
- 27 नवंबर 1933:
- इस दिन उन्होंने डूमरतराई, माना, अभनपुर, भोथीडीह, मरौद और कुरूद की यात्रा की।
- 28 नवंबर 1933:
- सुबह वे बालाघाट के लिए रवाना हो गए। अपने प्रवास के दौरान वे भाटापारा और राजिम भी गए थे।
🧠 महत्वपूर्ण तथ्य (Notes)
- गांधी जी का यह आगमन हरिजन उद्धार के लिए था, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह कार्यक्रम उनसे पहले ही पं. सुन्दरलाल शर्मा राजिम में मंदिरों में हरिजनों को प्रवेश दिलाकर शुरू कर चुके थे। इसी कारण, गांधी जी ने पं. सुंदरलाल शर्मा को इस कार्य में अपना “अग्रणी” (Guru) कहा था। [CGPSC(AP)2016]
- छत्तीसगढ़ के रामदयाल तिवारी ने महात्मा गांधी की इस यात्रा से प्रेरित होकर ‘गांधी मीमांसा’ नामक एक पुस्तक लिखी।
- मोती बाग का पुराना नाम विक्टोरिया बाग था। [CGPSC(AP)2016]
📜 वर्ष 1933-1936 के अन्य प्रमुख घटनाक्रम
🏫 अनाथालय की स्थापना (1933)
- 📍 स्थान: धमतरी
- 🙌 संस्थापक: पं. सुंदरलाल शर्मा
- 🤝 सहयोगी: नत्थूजी जगताप और नारायण राव मेघावाले।
📰 महाकौशल साप्ताहिक हिन्दी पत्रिका
- 🔄 स्थानांतरण: यह पत्रिका नागपुर से रायपुर स्थानांतरित की गई।
- ✍️ प्रकाशन: रायपुर में इसका प्रकाशन पं. रविशंकर शुक्ल ने आरंभ किया।
🗳️ केन्द्रीय व्यवस्थापिका सभा का निर्वाचन (1934)
- 👥 सदस्य: कांग्रेस की ओर से दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्त सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए।
📚 भारतेंदु साहित्य समिति की स्थापना (1935)
- 📍 स्थान: बिलासपुर [CGPSC(ADPO)2013]
🌍 मध्यप्रांत की राजनीति (1935-36)
- 1935: मध्यप्रांत के विधानसभा चुनावों में रायपुर से ठा. प्यारेलाल सिंह चुने गए।
- 1936: मई 1936 में मध्यप्रांत के गवर्नर का अस्थायी कार्यभार ई. राघवेन्द्र राव ने संभाला। [CG Vyapam(MSI)2021]
🤝 बरार का मध्यप्रांत में विलय (1935)
- 📜 अधिनियम: भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत।
- 🎯 उद्देश्य: प्रशासनिक सुविधा को बेहतर बनाना।
🗳️ प्रांतीय विधान सभा चुनाव – 1937
📜 पृष्ठभूमि: केंद्रीय व्यवस्थापिका सभा का निर्वाचन (1935)
- कांग्रेस पार्टी से, दुर्ग के श्री घनश्याम सिंह गुप्त को केंद्रीय व्यवस्थापिका सभा के सदस्य के रूप में चुना गया।
- पं. रविशंकर शुक्ल ने 1935 में ‘महाकौशल’ साप्ताहिक पत्रिका का संपादन शुरू किया।
- 1935 के मध्य प्रांत के विधान सभा चुनाव में, रायपुर से ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी निर्वाचित हुए।
- 1936 में, ई. राघवेन्द्र राव को मध्य प्रांत-बरार का गवर्नर नियुक्त किया गया, और वे यह पद संभालने वाले छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति बने।
🗳️ आम चुनाव – 1937
- पृष्ठभूमि: भारत सरकार अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत, भारत के 11 ब्रिटिश प्रांतों में पहली बार आम चुनाव हुए। कांग्रेस ने 8 प्रांतों में अपनी सरकार बनाई (6 में पूर्ण बहुमत और 2 में समर्थन से)। उस समय छत्तीसगढ़ मध्य प्रांत का हिस्सा था।
- छत्तीसगढ़ में परिणाम: छत्तीसगढ़ के लिए कुल 9 निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए थे। इनमें से केवल बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जहाँ डॉ. ई. राघवेन्द्र राव (स्वतंत्र प्रत्याशी) ने कांग्रेस के उम्मीदवार कुंजबिहारीलाल अग्निहोत्री को हराकर जीत हासिल की।
📊 मध्य प्रांत चुनाव में निर्वाचित सदस्य
| क्र. | निर्वाचन क्षेत्र | विजेता | पार्टी |
| 1. | बिलासपुर | डॉ. ई. राघवेन्द्र राव | स्वतंत्र प्रत्याशी |
| 2. | मुंगेली | रामगोपाल तिवारी | कांग्रेस |
| 3. | कटघोरा | अमरसिंह सहगल | कांग्रेस |
| 4. | जांजगीर | बैरिस्टर छेदीलाल | कांग्रेस |
| 5. | रायपुर | ठा. प्यारेलाल सिंह | कांग्रेस |
| 6. | सरायपाली | पं. रविशंकर शुक्ल | कांग्रेस |
| 7. | धरसींवा | डॉ. खूबचन्द बघेल | कांग्रेस |
| 8. | महासमुंद | तामस्कर वकील | कांग्रेस |
| 9. | दुर्ग | घनश्याम गुप्त | कांग्रेस |
👑 ई. राघवेन्द्र राव द्वारा अल्पकालीन मंत्रिमंडल का गठन
- कारण: मध्य प्रांत के गवर्नर गोवेन ने कांग्रेस के नेता नारायण भास्कर खरे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन कांग्रेस ने यह शर्त रखी कि गवर्नर अपने स्व-विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे, जिसे गवर्नर ने अस्वीकार कर दिया।
- आमंत्रण: कांग्रेस के सरकार बनाने से इनकार करने के बाद, गवर्नर ने 17 स्वतंत्र उम्मीदवारों के समर्थन वाले ई. राघवेन्द्र राव को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
- मंत्रिमंडल:
- मुख्यमंत्री: डॉ. ई. राघवेन्द्र राव
- तीन मंत्री: 1. दादा साहेब खापर्डे, 2. सोवा रिजवी, 3. श्री धर्म भुजंग राव
- कार्यकाल: यह मंत्रिमंडल केवल तीन महीने चला।
- त्यागपत्र: 14 जुलाई 1937 को विधान परिषद् में कांग्रेस नेताओं द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के कारण इस मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ा।
📜 1938 से 1939 तक की विभिन्न घटनाएं
🤝 सेवादल का गठन – 1938
- 📍 स्थान: खैरागढ़
- 👥 संस्थापक: सुखराम और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी। [CG PSC (ADH)2017], [CG PSC (AP)2016]
🏛️ छुईखदान रियासत में स्टेट कांग्रेस की स्थापना – 1938
- 🗓️ स्थापना: 20 नवम्बर 1938
- 📍 स्थान: छुईखदान
- ✊ योगदान: इस संगठन ने 1939 में राजनांदगांव रियासत में हुए छुरिया एवं बदराटोला किसान आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। [CG Vyapam (SAAF) 2021]
🎤 कांग्रेस का त्रिपुरी अधिवेशन – 1939
- 🗣️ अध्यक्षता: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद। (पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस अध्यक्ष चुने गए थे, लेकिन गांधी जी से मतभेद के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया)।
- 🎹 संगीत समिति के अध्यक्ष:पं. पंचकौड़ प्रसाद पाण्डेय। [CG Vyapam (Patwari) 2016]
- उन्हें हारमोनियम बजाने में महारत हासिल थी।
- वे पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर की संगीत शैली से जुड़े थे। [CG Vyapam (LOI)2018]
- बै. छेदीलाल ने उन्हें ‘बाजा मास्टर’ की उपाधि दी थी।
- 🌍 पृथक छत्तीसगढ़ की मांग: इस अधिवेशन में पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग रखी गई, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।
🗓️ छत्तीसगढ़ में मनाए गए प्रमुख दिवस
| दिवस | तिथि | विशेष आयोजन |
| प्रतिज्ञा दिवस | 26 जनवरी 1930 | 26 जनवरी 1932 को इस्माइल खान द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण में इसे फिर से आयोजित किया गया। |
| पेशावर दिवस | 29 जनवरी 1932 | पं. रविशंकर शुक्ल ने उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में पुलिस की बर्बरता के विरोध में रायपुर में इसका आयोजन किया। |
| कैदी दिवस / बंदी दिवस | 4 अगस्त 1932 | रायपुर में बलदेव/ब्रम्हदेव दुबे के नेतृत्व में मनाया गया। [CG Vyapam(PHEH)2023] |
| राजकोट दिवस | 6 मार्च 1939 | राजकोट की जनता पर हुए अत्याचार के विरोध में रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार व भाटापारा में मनाया गया। |
| बंगाल राजबंदी दिवस | 25 जुलाई 1939 | रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, और धमतरी में आयोजित। रायपुर में इस दिन एक सभा में लगभग 3000 लोग शामिल हुए। |
| गांधी जयंती समारोह | 2 अक्टूबर 1939 | |
| युद्ध विरोधी दिवस | 12 नवंबर 1939 |
🕊️ व्यक्तिगत सत्याग्रह (Individual Satyagraha) – 1940
📖 पृष्ठभूमि:
अगस्त 1940 में बॉम्बे (मुंबई) में हुई कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में गांधी जी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की। गांधी जी के आह्वान पर, 17 अक्टूबर 1940 को देश में व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत हुई। पवनार आश्रम के विनोबा भावे को भारत का प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही चुना गया।
छत्तीसगढ़ में प्रभाव:
छत्तीसगढ़ में भी इस आंदोलन का व्यापक प्रभाव पड़ा, जिसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है:
1️⃣ बिलासपुर में प्रभाव
- 🗓️ शुरुआत: 22 अक्टूबर 1940 [CG PSC (ADPO) 2021]
- 👥 नेतृत्व: ठाकुर छेदीलाल (उन्होंने बिलासपुर में पदयात्रा का नेतृत्व किया)।
- 🤝 प्रतिनिधित्व: रामगोपाल तिवारी [CG PSC (Horticulture) 2015, (Pre) 2017]
💡 प्रश्न: ठाकुर छेदीलाल ने पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए कब व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारंभ किया? [CG PSC (ADPO) 2021]
(A) 17 अक्टूबर, 1940
(B) 13 अक्टूबर, 1940
(C) 22 अक्टूबर, 1940
(D) 21 नवम्बर, 1940
उत्तर: (C)
2️⃣ रायपुर में प्रभाव
- 🗓️ शुरुआत: 21 नवंबर 1940
- 📍 स्थान: माना, रायपुर [CG PSC (ADH) 2022]
- 👥 नेतृत्व: पं. रविशंकर शुक्ल, जिन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही माना जाता है। उन्होंने ही छत्तीसगढ़ में इस आंदोलन का शुभारंभ किया। [CG Vyapam SI (Mains) 2023] [CG Vyapam(ECH)2017] [CG PSC (Pre.) 2017]
- 🤝 प्रतिनिधित्व: यतियतनलाल जैन
💡 प्रश्न: नवंबर 1940 में, व्यक्तिगत सत्याग्रह का आरंभ पंडित रविशंकर शुक्ल ने किस स्थान से किया? [CG PSC (ADH) 2022]
(A) माना
(B) धमतरी
(C) महासमुंद
(D) राजिम
उत्तर: (A)
3️⃣ दुर्ग में प्रभाव
- 🏛️ गठन: सत्याग्रह प्रचार समिति का गठन किया गया।
- 🗓️ कब: 29 अक्टूबर 1940
- 👥 नेतृत्व: घनश्याम सिंह गुप्त [CG PSC (Horticult.)2017]
- 🤝 प्रतिनिधित्व: रत्नाकर झा [CG PSC (Pre.) 2017]
📜 व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने वाले व्यक्ति
| स्थान | प्रमुख व्यक्ति |
| रायपुर | पं. रविशंकर शुक्ल, यतियतन लाल जैन [CG PSC (Horticlt.)2015][CG PSC (Pre.) 2017] |
| बिलासपुर | रामगोपाल तिवारी, ठाकुर छेदीलाल, चिंतामणि ओत्तलवार, मुकुंद सिंह क्षत्रिय, डॉ. आर.पी. राय, किशनचंद कायस्थ, ज्वाला प्रसाद मिश्र, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव [CG PSC(Horticlt.)2015(Pre.)2017] |
| दुर्ग | घनश्याम सिंह गुप्त, रत्नाकर झा, व्ही.वाय. तामस्कर, महंत पुसाऊदास, मोहनलाल बाकलीवाल, रामकुमार सिंगरौल, विष्णु प्रसाद चौबे, गोवर्धन लाल शर्मा `[CGPSC(Horticlt.)2015 |
| धमतरी | छोटेलाल श्रीवास्तव [CG PSC (Horticlt.) 2015] |
🚂 ललितपुर (उत्तरप्रदेश) की घटना – 1941
- 🚶 पदयात्रा: 2 अप्रैल 1941 को छत्तीसगढ़ के सत्याग्रहियों के एक दल ने दिल्ली की ओर पैदल मार्च शुरू किया।
- 👥 सदस्य: इस जत्थे में रामराम साहू, रामेश्वर साहू, ज्वाला प्रसाद मिश्र और यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव जैसे प्रमुख सत्याग्रही शामिल थे। (उस समय पं. रविशंकर शुक्ल जेल में थे, इसलिए वे नेतृत्व नहीं कर सके)। [CG PSC(Pre.)2018]
- 🎯 उद्देश्य: गाँव-गाँव में युद्ध-विरोधी भाषण देना, राष्ट्रीयता की भावना जगाना और पैदल दिल्ली पहुँचना।
- ⛓️ गिरफ्तारी: 8 अगस्त 1941 को उत्तरप्रदेश के ललितपुर के पास इस दल को गिरफ्तार कर झांसी जेल भेज दिया गया। बाद में उन्हें सागर और फिर बिलासपुर जेल में स्थानांतरित किया गया।
- 🕊️ रिहाई: 14 दिसंबर 1941 को उन्हें रिहा किया गया।
🏛️ रायपुर षड्यंत्र केस (Raipur Conspiracy Case) – 1942
- 🗓️ वर्ष: 1942
- 🎯 उद्देश्य: विस्फोटक सामग्री और बम बनाना।
- 👤 नेतृत्वकर्ता: परसराम सोनी, जिन्हें “छत्तीसगढ़ का भगतसिंह” कहा जाता है। [CG Vyapam(Patwari)2017, (RI)2017] [CG PSC(ADPPO)2013…(SEE)2020]
- 🤝 सहयोगी: गिरीलाल लोहार, रणवीरसिंह शास्त्री, सुधीर मुखर्जी, दशरथलाल दुबे, प्रेमचंद वासनिक, क्रांतिकुमार भारतीय, और अन्य कई सहयोगी।
- 💣 घटनाक्रम: परसराम सोनी और उनके सहयोगियों ने हथियार बनाने और उनके रखरखाव के लिए रायपुर के ईदगाहभाठा और रावणभांठा को चुना। ईदगाहभाठा में अचानक हुए बम विस्फोट की सूचना तत्कालीन राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य मि. स्मिथ पियर्स ने पुलिस को दे दी।
- प्रथम परीक्षण: रावणभाठा मैदान, रायपुर।
- द्वितीय परीक्षण: ईदगाह मैदान, रायपुर।
- 👤 मुखबिर: शिवनंदन प्रसाद नामक व्यक्ति की मुखबिरी के कारण, पुलिस अधिकारी नरेन्द्र सिन्हा ने 15 जुलाई 1942 को क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया।
- ⚖️ परिणाम: यह योजना असफल हो गई। परसराम सोनी को 7 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन पं. रविशंकर शुक्ल के प्रयासों से 26 जून, 1946 को उन्हें रिहा कर दिया गया।
- 🔗 परसराम सोनी का योगदान: [CGPSC (Registrar)2017]
- रिवॉल्वर बनाने में
- नेपाम बम (अग्नि बम) बनाने में
- बुलेट (गोलियां) बनाने में
- धुँआ फैलाने वाले बम बनाने में
- टाइम बम बनाने में
- क्लोरोफॉर्म बम बनाने में
🔥 भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) – 1942: छत्तीसगढ़ में प्रभाव
📜 आंदोलन शुरू होने के प्रमुख कारण
- अगस्त प्रस्ताव (1940): इसमें भारत की पूर्ण स्वतंत्रता का स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
- व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940): इसकी असफलता ने एक बड़े आंदोलन की आवश्यकता महसूस कराई।
- द्वितीय विश्व युद्ध: युद्ध की बदलती परिस्थितियों ने आंदोलन के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।
- जापान का खतरा: भारत पर जापानी आक्रमण का डर बढ़ रहा था।
- क्रिप्स मिशन (1942): मिशन के झूठे वादों ने भारतीयों को निराश किया।
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल: उनका भारत विरोधी वैश्विक प्रचार भी एक प्रमुख कारण था।
✍️ वर्धा प्रस्ताव (1942)
- 🗓️ आयोजन: 14 जुलाई 1942
- 🎯 उद्देश्य: गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन के प्रस्ताव को पारित करना।
- ⚖️ परिणाम: कांग्रेस ने वर्धा अधिवेशन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
🏛️ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक
- 📍 स्थान: ग्वालिया टैंक, बॉम्बे (अब मुंबई) [CGPSC(ADH)2011]
- 🗓️ कब: 08 अगस्त 1942
- 🎯 क्यों: भारत छोड़ो आंदोलन पर वर्धा प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देने के लिए।
- ⚖️ परिणाम: कमेटी ने कुछ संशोधनों के साथ भारत छोड़ो आंदोलन को मंजूरी दे दी।
- 👥 छत्तीसगढ़ से भागीदार:
- पं. रविशंकर शुक्ल
- महंत लक्ष्मीनारायण दास
- द्वारिकाप्रसाद मिश्र
- कुंज बिहारी अग्निहोत्री
- यतियतनलाल
- बै. छेदीलाल
- घनश्याम सिंह गुप्त
- डॉ. खूबचंद बघेल
🚀 भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत
- 🗓️ कब: 9 अगस्त 1942
- 👤 नेतृत्व: महात्मा गांधी
- 🔑 विशेष: इस आंदोलन की शुरुआत काकोरी ट्रेन एक्शन (9 अगस्त 1925) की सत्रहवीं वर्षगांठ पर “अगस्त क्रांति” के रूप में की गई।
⛓️ मलकानपुर में छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी
- 🗓️ गिरफ्तारी: 9 अगस्त 1942
- 📍 स्थान: मलकानपुर (मध्यप्रांत की सीमा) [CGPSC(Lib)2017]
- 📜 घटनाक्रम: 8 अगस्त को बम्बई में बैठक के बाद, छत्तीसगढ़ के नेता ट्रेन से रायपुर लौट रहे थे। उन्हें अपनी गिरफ्तारी की आशंका थी, इसलिए उन्होंने द्वारिका प्रसाद मिश्र के सुझाव पर मलकानपुर तक का टिकट लिया। योजना के अनुसार, उन्हें 9 अगस्त 1942 को मलकानपुर रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर नागपुर जेल में बंद कर दिया गया।
- 👥 गिरफ्तार नेता: पं. रविशंकर शुक्ल, घनश्याम सिंह गुप्त, बैरिस्टर छेदीलाल, महंत लक्ष्मीनारायण दास, यतियतनलाल जैन, द्वारिका प्रसाद मिश्र, सेठ शिवदास डागा, श्री नारायणराव मेघावाले, डी.एस. मेहता (दुर्गा शंकर मेहता), डॉ. खूबचंद बघेल, कुंजबिहारी अग्निहोत्री। [CGPSC(ADP)2019]
🗺️ आंदोलन के दौरान गिरफ्तार नेता एवं स्थान
| स्थान | गिरफ्तार हुए प्रमुख नेता |
| मलकानपुर | पं. रविशंकर शुक्ल [CG PSC(Pre.)2018,(ADP)2019] |
| रायपुर | त्रेतानाथ तिवारी, याकूब अली [CG PSC(Pre.)2021,(Pre.)2018] |
| बिलासपुर | अमरसिंह सहगल, हरनारायण वाजपेयी [CG PSC(Pre.)2021,(Pre.)2018] |
| दुर्ग | रघुनंदन प्रसाद सिंगरौल, लक्ष्मण सिंह देशमुख [CGPSC(Pre.)2021,(Pre.)2018] |
| बेमेतरा | वी. वाई. तामस्कर (विश्वनाथ यादव तामस्कर) [CG PSC(Pre.)2021] |
| नागपुर | रामकृष्ण ठाकुर, वल्लभ दास गुप्ता |
💥 रायपुर में घटनाक्रम (1942)
🚶 1. रायपुर में विशाल जुलूस
- 🗓️ तिथि: 09 अगस्त 1942 [CG Vyapam(LOI)2018]
- 📍 स्थान: राष्ट्रीय विद्यालय, रायपुर
- 👤 नेतृत्वकर्ता: त्रेतानाथ तिवारी [CG PSC(Sci.Off)2022] [CG Vyapam(LOI)2018]
- 🤝 सहयोगी: कमलनारायण शर्मा, रणवीर सिंह शास्त्री, जयनारायण पांडेय, भगवतीचरण शुक्ल आदि। [CGPSC(Eng.Ser)2013]
- 🔥 कारण: गांधीजी की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही रायपुर में हड़ताल हो गई। स्कूल, कॉलेज और बाजार बंद रहे। शाम को एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसमें छात्र, व्यापारी, मजदूर सभी शामिल थे।
👨🎓 2. रायपुर में विद्यार्थी जुलूस का आयोजन
- 🗓️ कब: 10 अगस्त 1942
- 📍 कहाँ: गांधी चौक, रायपुर
- 👤 नेतृत्वकर्ता: रणवीर सिंह शास्त्री (गिरफ्तारी – 10 अगस्त, रिहाई – 26 सितंबर 1942) [CGPSC(AP)2019][CGVyapam(DEAG)2018] [CGPSC(ADI)2016]
- 👥 शामिल छात्र: छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के छात्रों ने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के नारों के साथ विशाल जुलूस निकाला। [CG PSC (AP)2019(ADS)2017](Pre)2016],[CG Vyapam (CROS)2017]
🇮🇳 3. रायपुर में तिरंगा झंडा फहराने का अपराध
- 🗓️ कब: अगस्त 1942
- 👤 गिरफ्तार: श्री रामकृष्ण ठाकुर [CGPSC(ITI Pri.)2016,(SEE) 2022]
💣 4. टेलीफोन लाइन काटने और रेल पटरी उखाड़ने का प्रयास
- 📍 स्थान: सरोना, रायपुर
- 👥 नेतृत्वकर्ता: रणवीर सिंह शास्त्री और सच्चिदानंद सिन्हा (दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया)।
💥 5. रायपुर डायनामाइट केस, 1942
- 👤 नेतृत्वकर्ता: बिलखनारायण अग्रवाल [CGPSC(ADS)2017]
- 🤝 सहयोगी: ईश्वरीचरण शुक्ल, जयनारायण पांडेय, नागरदास बावरिया आदि। [CGPSC(ADS)2017]…[Maha.)2016]
- 🎯 उद्देश्य: डायनामाइट से रायपुर जेल की दीवार को उड़ाकर राष्ट्रवादी नेताओं को छुड़ाना।
- 💣 घटनाक्रम: जेल की पिछली दीवार पर डायनामाइट लगाया गया, लेकिन दीवार को केवल क्षति पहुँची और राजबंदियों को छुड़ाने की योजना असफल रही।
- 👤 मुखबिर: अविनाश संग्राम
- ⚖️ परिणाम: क्रांतिकारी विस्फोट करने में तो सफल रहे, लेकिन राजबंदियों को मुक्त कराने में असफल रहे।
📰 6. ‘अग्रदूत’ पत्रिका
- 🗓️ प्रकाशन: 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन के समय)
- 📍 स्थान: रायपुर
- ✍️ सम्पादक: केशव प्रसाद वर्मा
🔥 बिलासपुर में घटनाक्रम (भारत छोड़ो आंदोलन, 1942)
🗣️ 1. गांधी चौक में विशाल जनसभा का आयोजन (9 अगस्त 1942)
- 🎯 उद्देश्य: गांधी जी के “करो या मरो” संदेश को जन-जन तक पहुँचाना। [CGPSC(ADR)2019]
- 👤 नेतृत्वकर्ता: हरनारायण वाजपेयी।
- ⛓️ गिरफ्तारी: पुलिस ने हरनारायण वाजपेयी और उनके 12 साथियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी का विरोध कर रही विशाल भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस घटना ने बिलासपुर क्षेत्र में भारत छोड़ो आंदोलन की आग को और भड़का दिया। [CG PSC(Pre)2021]
🔗 2. आंदोलन के संबंध में गिरफ्तारियाँ (10 अगस्त 1942)
- 📜 कारण: 9 अगस्त को गांधी चौक पर हुई घटना के बाद गिरफ्तारियाँ की गईं। [CGPSC(ADR)2019]
- 📍 स्थान: बिलासपुर।
- 👥 गिरफ्तार व्यक्ति:
- अमरसिंह सहगल
- यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव
- डॉ. रामचरण राय [CGPSC(ADR)2019]
- रामगोपाल तिवारी
- मुकुंदराव चिकले
- गणेश प्रसाद
- चिंतामणि ओत्तलवार
🎤 3. बिलासपुर में विशाल सभा का आयोजन (15 अगस्त 1942)
- 👤 नेतृत्वकर्ता: कालीचरण।
- 📜 डिक्टेटर: राजकिशोर वर्मा को बिलासपुर जिले में आंदोलन के संचालन के लिए डिक्टेटर नियुक्त किया गया।
- 🔑 विशेष: 15 अगस्त को कालीचरण की अध्यक्षता में हो रही सभा पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
🇮🇳 4. बिलासपुर जिला कार्यालय भवन पर तिरंगा फहराना (22 अगस्त 1942)
- 👤 द्वारा: जगोबा बाघ।
🚶 5. भुवनभास्कर के नेतृत्व में विशाल जुलूस (2 अक्टूबर 1942)
- 👤 नेतृत्वकर्ता: भुवनभास्कर सिंह। [CGPSC(ADI)2016]
- 🤝 शामिल नेता: रामचरण श्रीवास, छोटेलाल जोगी, मोहन सिंह, कालिका प्रसाद आदि। [CGPSC(ADPO)2013]
- 📜 कारण: 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन शहर में धारा 144 लागू होने के बावजूद जुलूस निकाला गया।
✊ 6. आई.जी. जठार साहब का बिलासपुर जेल में विरोध (1942)
- 📍 स्थान: केन्द्रीय जेल, बिलासपुर।
- 👤 निरीक्षणकर्ता: तत्कालीन आई.जी. जठार साहब।
- ✊ विरोध: जब जठार साहब जेल का निरीक्षण करने पहुँचे, तो कैदियों ने गद्दे पर “वंदे मातरम्” लिखकर ब्रिटिश शासन का अनोखे तरीके से विरोध किया। [CGPSC(MI)2018] Q.No.-110]
- ⚖️ सजा: इस साहसिक कार्य के लिए गणेश प्रसाद एवं भूरेलाल को कठोर दंड दिया गया।
⚔️ जांजगीर-चांपा और दुर्ग में घटनाक्रम
🌟 जांजगीर-चांपा
- शिवरीनारायण में नेतृत्व (दिसम्बर 1942): कपिलनाथ शर्मा, पं. लालजी झाडूराम यादव के नेतृत्व में आंदोलन हुआ।
- कचहरी चौक पर तिरंगा फहराना (1942): योगनिधि (अवरीद निवासी) ने कचहरी चौक पर तिरंगा फहराया।
🔥 दुर्ग में विशाल जुलूस और आगजनी (1942)
- जुलूस (9 अगस्त 1942): आंदोलन के प्रारंभ होते ही दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी को अवैध घोषित कर दिया गया। इसके विरोध में हुए प्रदर्शन में लक्ष्मण सिंह देशमुख [CGPSC(Pre)2021], रत्नाकर झा (म्यूनिसिपल प्रेसिडेंट), मोहनलाल बाकलीवाल आदि को गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी के विरोध में दुर्ग में हड़ताल और बंद का ऐलान किया गया।
- आगजनी की घटनाएं:
- कचहरी में: 28 अगस्त 1942 को रघुनंदन सिंगरौल और मोतीलाल श्रीवास्तव ने कचहरी में आगजनी की। [CG Vyapam(ADEO)2017] [CGPSC(ADI)2016,(ADR)2019]
- नगर पालिका भवन में: 05 सितंबर 1942 को रघुनंदन सिंगरौल और जसवंतसिंह ठाकुर ने नगर पालिका भवन को निशाना बनाया। [CGPSC(ADI)2016]
- पाटन (दुर्ग) में विशाल जुलूस (15 सितंबर 1942):
- 👤 नेतृत्व: रामदेव आचार्य।
- 📜 घटना: दुर्ग के जिलाधीश ने भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें 7 लोग मारे गए।
⛓️ बेमेतरा, बलौदा बाजार और अन्य स्थानों में घटनाक्रम
📍 बेमेतरा में गिरफ्तारी (9 अगस्त 1942)
- 👤 गिरफ्तार: वाई.वी. तामस्कर।
- 📜 कारण: जिला काउंसिल बेमेतरा में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना।
📍 बलौदा बाजार में युवकों का जुलूस (10 अगस्त 1942)
- 👥 गिरफ्तारी: श्री गिरधारी लाल और मनोहर दीक्षित।
🇮🇳 नागपुर हाईकोर्ट भवन में तिरंगा झंडा फहराना
- 🗓️ तिथि: 9 सितंबर 1942
- 👤 नेतृत्वकर्ता: ठाकुर रामकृष्ण सिंह और वल्लभ दास गुप्ता। [CGPSC(ADI)2016] … [LOI)2015]
- 🔑 नोट: ये दोनों नागपुर लॉ कॉलेज के छात्र थे। तिरंगा फहराने के कारण ठाकुर रामकृष्ण सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। [CG PSC (ADPA&S) 2019]
👑 छत्तीसगढ़ की रियासतों में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रभाव
इस आंदोलन का प्रभाव निम्नलिखित रियासतों पर भी पड़ा:
- रायगढ़ रियासत
- सारंगढ़ रियासत
- राजनांदगांव रियासत
- छुई खदान रियासत
- खैरागढ़ रियासत
📜 राष्ट्रीय राजनेताओं का छत्तीसगढ़ आगमन
यहाँ उन प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की सूची दी गई है जिन्होंने विभिन्न उद्देश्यों से छत्तीसगढ़ की यात्रा की:
| क्र. | राजनेता का नाम | आगमन का वर्ष | उद्देश्य और प्रमुख बिंदु |
| 1. | रवीन्द्रनाथ टैगोर | सितम्बर 1902 | व्यक्तिगत कारणों से उनका आगमन हुआ। |
| 2. | बालगंगाधर तिलक | 1907 और 1918 | पहली बार स्वदेशी आंदोलन के समय बिलासपुर आए और दूसरी बार होमरूल लीग के प्रचार के लिए छत्तीसगढ़ आए। |
| 3. | वी.वी. गिरी | 1920 | राजनांदगांव मजदूर मिल की हड़ताल के समझौते के लिए आए थे। |
| 4. | महात्मा गांधी | 20-21 दिसम्बर 1920 | असहयोग आंदोलन के प्रचार के लिए मौलाना शौकत अली के साथ आए। |
| 22-28 नवंबर 1933 | अछूतोद्धार (हरिजन उद्धार) के उद्देश्य से अपने सहयोगियों मीराबेन, ठक्कर बापा और महादेव देसाई के साथ आए। | ||
| 5. | तपस्वी सुंदरलाल | 7 फरवरी 1921 | अपनी रचना “भारत में अंग्रेजी राज” के माध्यम से असहयोग आंदोलन का प्रचार करने आए। |
| 6. | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | 5 जुलाई 1921 | असहयोग आंदोलन के दौरान बिलासपुर में सी. राजगोपालाचारी, सुभद्रा कुमारी चौहान और लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ आगमन हुआ। |
| 11 दिसम्बर 1935 | दूसरी बार छत्तीसगढ़ आए। | ||
| 7. | जवाहर लाल नेहरू | 1936 | रायपुर में आयोजित छठवें शिक्षक सम्मेलन में भाग लेने आए थे। |
| 8. | सरदार वल्लभ भाई पटेल | 18 जनवरी 1940 | रायपुर में कांग्रेस भवन का उद्घाटन करने आए। |
| 1947 | देशी रियासतों के विलीनीकरण की प्रक्रिया के लिए आए। |
🔑 दो बार छत्तीसगढ़ की यात्रा करने वाले राजनेता:
- लोकमान्य बालगंगाधर तिलक (1907 एवं 1918)
- महात्मा गांधी (1920 एवं 1933)
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (1921 एवं 1935)
- सरदार वल्लभभाई पटेल (1940 एवं 1947)
📈 राजनीतिक विकास (1943 से 1947)
🕊️ बिलासपुर जेल से बंदियों की रिहाई (7 दिसंबर 1944)
- 📍 स्थान: बिलासपुर
- 👤 नेतृत्वकर्ता: डॉ. रामचरण राय
- 👥 सम्मिलित व्यक्ति: मथुरा प्रसाद दुबे, मुरलीधर मिश्रा, वासुदेव देवरस, ठाकुर बुद्धेश्वर सिंह, ठाकुर पूरन सिंह।
** सप्ताह का आयोजन**
- दुर्ग में राष्ट्रीय सप्ताह (9-15 अगस्त 1945): इसका आयोजन वी.वाई. तामस्कर ने किया। इसका प्रभाव दुर्ग के साथ-साथ पाटन, बालोद और बेमेतरा में भी शांतिपूर्वक और उत्साह से देखने को मिला।
- रायपुर में गांधी जयंती सप्ताह (26 सितंबर – 2 अक्टूबर 1945): 13 सितंबर को बाबू हरिसिंह दरबार की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें पं. रविशंकर शुक्ल द्वारा यह सप्ताह मनाने का निर्णय लिया गया।
🗓️ गांधी जयंती सप्ताह (1945)
| तिथि | स्थान | दिवस का नाम |
|---|---|---|
| 26 सितम्बर 1945 | गांधी चौक, रायपुर | — |
| 27 सितम्बर 1945 | आनंद समाज पुस्तकालय | विद्यार्थी कांग्रेस एवं राष्ट्रीय युवक संघ दिवस |
| 28 सितम्बर 1945 | टूरी हटरी, रायपुर | ग्रामोद्योग दिवस |
| 29 सितम्बर 1945 | गोलबाजार, रायपुर | प्रौढ़ शिक्षा दिवस |
| 30 सितम्बर 1945 | रामसागर पारा, रायपुर | मज़दूर कांग्रेस दिवस |
| 01 अक्टूबर 1945 | गुढ़ियारी, रायपुर | किसान कांग्रेस दिवस |
| 02 अक्टूबर 1945 | गांधी चौक, रायपुर | गांधी जयंती |
👑 बस्तर स्टेट पीपुल्स कांग्रेस (1945)
- संस्थापक: ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- वर्ष: 1945
- पदाधिकारी:
- अध्यक्ष → ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- सचिव → जयनारायण पाण्डेय
- सदस्य → विनायक सखाराम दाण्डेकर, श्याम नारायण काश्मीरी, मदनलाल बागड़ी
- उद्देश्य:
बस्तर क्षेत्र के निवासियों में राष्ट्रीय चेतना एवं समाजवाद की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना।
🗳️ मध्यप्रांत का दूसरा चुनाव (1946)
- मुख्यमंत्री: पं. रविशंकर शुक्ल (27 अप्रैल 1946)
- गृहमंत्री: द्वारिका प्रसाद मिश्र
- विधानसभा अध्यक्ष: घनश्याम सिंह गुप्त (विधान पुरुष)
- संसदीय सचिव: रामगोपाल तिवारी
- परिणाम: 112 सीटों में से कांग्रेस को 84 सीटों पर शानदार जीत।
- विशेष: शिमला समझौते के तहत पं. रविशंकर शुक्ल को 13 जून 1945 को रिहा किया गया था।
📜 छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस एवं संविधान सभा (1946–47)
🤝 प्रमुख सम्मेलन और आंदोलन (1946)
- समोदा राजनीतिक सम्मेलन (7–8 दिसम्बर): नेतृत्व → डॉ. खूबचंद बघेल [CGPSC (Pre)2020]
- बिलासपुर विद्यार्थी सप्ताह (13–15 दिसम्बर): नेतृत्व → भुवनभास्कर सिंह [CGPSC (Pre)2020]
- बेमेतरा तहसील राजनीतिक सम्मेलन (31 दिसम्बर): नेतृत्व → मोहनलाल बाकलीवाल [CGPSC (Pre)2020]
- स्वाधीनता दिवस आंदोलन (26 जनवरी 1946): महंत लक्ष्मीनारायण दास के आह्वान पर सभी नगरों व तहसीलों में तिरंगा फहराया गया। [CGPSC (Lib.)2017]
🏛️ संविधान सभा में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि (1946)
ब्रिटिश प्रांत (मध्यप्रांत के छत्तीसगढ़ से – 3 सदस्य)
| क्र. | सदस्य | निर्वाचन क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1. | पं. रविशंकर शुक्ल | रायपुर |
| 2. | बैरि. छेदीलाल | बिलासपुर |
| 3. | घनश्याम सिंह गुप्त | दुर्ग |
देशी रियासतों से – 3 सदस्य
| क्र. | सदस्य | रियासत | प्रतिनिधित्व |
|---|---|---|---|
| 1. | रघुराज सिंह दीवान | सरगुजा | सामंतीय नरेश |
| 2. | रामप्रसाद पोटाई | कांकेर | रियासती जनता |
| 3. | पं. किशोर मोहन त्रिपाठी | रायगढ़ | रियासती जनता |
🔑 विशेष:
- 9 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में, घनश्याम सिंह गुप्त को हिन्दी प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- रघुराज सिंह दीवान → सामंतीय नरेशों का प्रतिनिधित्व।
- पं. किशोर मोहन त्रिपाठी व रामप्रसाद पोटाई → रियासती जनता का प्रतिनिधित्व। [CGPSC (ITI Pri.)2022]
15 अगस्त 1947 – स्वतंत्रता दिवस
| क्र. | राजनेता | स्थान | पद |
|---|---|---|---|
| 1. | पं. रविशंकर शुक्ल | सीताबर्डी, नागपुर | मध्यप्रांत के मुख्यमंत्री [CGPSC(AP)2016] |
| 2. | वामनराव लाखे | गांधी चौक, रायपुर | स्वतंत्रता सेनानी [CGPSC(AP)2016] |
| 3. | आर. के. पाटिल | पुलिस लाइन, रायपुर | मध्यप्रांत के खाद्य मंत्री [CG Vyapam(FCPR)2016] |
| 4. | घनश्याम सिंह गुप्त | दुर्ग | विधानसभा सदस्य [CGPSC (Pre)2020] |
| 5. | रामगोपाल तिवारी | गांधी चौक, बिलासपुर | संसदीय सचिव [CGPSC (Pre)2016] |
- 🔑 विशेष:
- इस अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल ने कहा, “हमने जो स्वतंत्रता प्राप्त की है वह किसी दल, पार्टी या सम्प्रदाय की नहीं है। यह स्वतंत्रता इस पुरातन देश में रहने वाले प्रत्येक स्त्री-पुरूष और बालकों की है।”
- कमिश्नर के.व्ही.एल. सेठ ने 200 बंदियों को स्वाधीनता दिवस के अवसर पर जेल से रिहा कर दिया।
- छत्तीसगढ़ की सभी जिलों, तहसीलों, गांवों व परगनों में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।