छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -2
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -1
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -3
छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -4
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी
📌 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का बम्बई अधिवेशन – 1889
- अध्यक्ष: सर विलियम वेडरबर्न
- छत्तीसगढ़ से सदस्य: इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र व्यक्ति श्री रामचन्द्र राव लाखे थे। [CG PSC(SEE)2022]
- कुल भागीदारी: मध्यप्रांत और बरार क्षेत्र से कुल 214 प्रतिनिधियों ने इस कांग्रेस अधिवेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
- विशेष प्रभाव: इस महत्वपूर्ण सत्र से लौटने के बाद, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की विचारधारा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में राजनीतिक चेतना का उदय हुआ।
📌 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन – 1891
- अध्यक्ष: वकील पी. आनंद चार्लू (मद्रास)
- छत्तीसगढ़ से सदस्य: छत्तीसगढ़ से भाग लेने वाले प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे: [CG PSC(Lib)2017]
- माधवराव सप्रे
- रामदयाल तिवारी
- सी.एम. ठक्कर
- वामनराव लाखे
- बद्रीप्रसाद साव
- डोमार सिंह
- किसानों की मांग: इस अधिवेशन के बाद बिलासपुर में करीब 20,000 किसान और मालगुजार एकत्रित हुए। उनकी यह मांग थी कि लगान की दरें स्थायी और निश्चित की जाएं तथा किसानों को न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण सुविधा प्रदान की जाए।
- अधिवेशन का महत्व: इस सत्र में छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख राजनेताओं ने हिस्सा लिया, जिसके फलस्वरूप राज्य में राजनीतिक जागरूकता और चेतना की एक नई लहर फैल गई। इसी दौरान नहर कर और जंगल कर के संबंध में भी प्रस्ताव पारित किए गए। [CG PSC(Lib)2017]
📖 सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाएँ
भारत में 19वीं सदी के दौरान राष्ट्रीय भावना को जगाने में ब्रह्म समाज और आर्य समाज ने एक विशेष भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ के निवासियों में राष्ट्रवाद और राजनीतिक जागरूकता का प्रसार करने के उद्देश्य से 1870 से 1900 के बीच कई संस्थाओं की स्थापना हुई।
| स्थान | प्रमुख संगठन एवं स्थापना वर्ष | परीक्षा संदर्भ |
| रायपुर | 1. वाद-विवाद समिति – 1857 2. वैज्ञानिक एवं साहित्यिक समिति – 1870 3. छत्तीसगढ़ बाल सभा – 1870 4. मालिनी रीडिंग क्लब – 1899 5. लोक शिक्षण संस्थान (People Teachers Association) 6. कवि समाज राजिम – 1899 (संस्थापक: पं. सुंदरलाल शर्मा) | [CGPSC(ARTO)2017] [CG PSC(ARTO)2017, (CMO)2019] [CG PSC (ARTO)2017, (CMO)2019][CG PSC (ARTO)2017, (CMO)2019] |
| बिलासपुर | 1. बुद्धि प्रकाश सभा – 1870 2. रीडिंग क्लब – 1870 3. बंगाल-नागपुर रेलवे इंस्टीट्यूट – 1870 |
- 💡 ध्यान दें: वर्ष 1886 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के बाद, छत्तीसगढ़ की प्रथम राजनीतिक संस्था ‘लोकसभा’ की स्थापना रायपुर में की गई।
🌪️ छत्तीसगढ़ में भीषण अकाल – 1894
- वर्ष 1894 में मध्यप्रांत क्षेत्र में एक गंभीर अकाल पड़ा। स्थिति का निरीक्षण करने के लिए, मध्यप्रांत के चीफ कमिश्नर वुडवर्ड 20 जनवरी, 1894 को रायपुर आए, जहाँ उन्होंने छत्तीसगढ़ के राजाओं और जमींदारों के साथ एक सम्मेलन किया।
🌱 अकाल निवारण सभा
- गठन: 17 मार्च 1900
- स्थान: बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- अध्यक्षता: डिप्टी कमिश्नर
- सहायता राशि: राहत कार्यों हेतु ‘इंडियन चैरिटेबल ब्रिटिश फंड’ के अंतर्गत लगभग 6 हजार रुपये का चंदा एकत्र किया गया।
📰 ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन (1900)
- प्रकाशन अवधि: 1900 से 1902-03 तक [CG PSC(Eng. S-2)2015]
- उद्देश्य: बौद्धिक, साहित्यिक और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना।
- प्रवर्तक: माधवराव सप्रे [CG PSC(Pre)2024]
- सहयोगी: रामराव चिंचोलकर [CG PSC(ADPPO)2017]
- स्थान: पेंढरा, जिला बिलासपुर
- मुद्रणालय: कैय्यूमी प्रेस, रायपुर
- संपादक: माधवराव सप्रे और रामराव चिंचोलकर
- प्रोप्राइटर: श्रीयुत् वामन बलीराम लाखे
- विशेषता: यह छत्तीसगढ़ की प्रथम मासिक पत्रिका थी, जिसमें महावीर प्रसाद द्विवेदी और कामता प्रसाद गुरु जैसे राष्ट्रवादी साहित्यकारों के लेख प्रकाशित होते थे।
🏛️ प्रांतीय कांग्रेस/मध्यप्रांत बरार कांग्रेस
- गठन: 1903
- स्थान: नागपुर
अधिवेशन का विवरण
| क्रम | स्थान | वर्ष | अध्यक्ष |
| प्रथम | नागपुर | 1903 | – |
| द्वितीय | जबलपुर | 1906 | – |
| तृतीय | रायपुर | 1907 | नारायण राव केलकर |
| चतुर्थ | नागपुर | 1915 | हरिसिंह गौर |
| पांचवां | अमरावती | 1916 | हरिसिंह गौर |
| छठवां | नागपुर | 1917 | – |
- 💡 ध्यान दें: प्रांतीय कांग्रेस (मध्यप्रांत एवं बरार) की शाखा 1903 में स्थापित हुई थी, जबकि रायपुर में राष्ट्रीय कांग्रेस की एक स्वतंत्र शाखा 1906 में स्थापित की गई
🏛️ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का बनारस अधिवेशन – 1905
- अध्यक्ष: गोपाल कृष्ण गोखले
- छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि: छत्तीसगढ़ क्षेत्र से इस अधिवेशन में शामिल होने वाले प्रमुख नेता थे:
- माधवराव सप्रे
- रामगोपाल तिवारी
- सी.एम. ठक्कर
- वामनराव लाखे
- बद्रीप्रसाद साव
- पं. रविशंकर शुक्ल
- गजाधर साव
- विशेष वक्तव्य: इस अधिवेशन के दौरान, मध्यप्रांत और बरार के कांग्रेसी नेता डॉ. मुंजे ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की दयनीय स्थिति पर एक महत्वपूर्ण भाषण दिया।
🔥 बंगाल विभाजन का प्रभाव – 1905
- व्यापक असर: बंग-भंग की घटना के बाद पूरे देश में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी, जिसका गहरा प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिला।
- बिलासपुर में नेतृत्व: बिलासपुर में इस आंदोलन का नेतृत्व ताराचंद्र ने किया, जिन्हें जिले में राजनीतिक चेतना जगाने वाले प्रथम कार्यकर्ता के रूप में श्रेय दिया जाता है।
- साहित्यिक योगदान: 1905 में, माधव राव सप्रे ने “हिन्दी ग्रंथमाला” का प्रकाशन आरंभ किया। इसके साथ ही, उन्होंने स्वदेशी आंदोलन के समर्थन में “स्वदेशी बायकॉट एवं आंदोलन” नामक पुस्तक भी प्रकाशित की।
🤝 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन – 1906
- अध्यक्ष: दादाभाई नौरोजी
- छत्तीसगढ़ से सदस्य: इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वामनराव लाखे, माधवराव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल, और लोचन प्रसाद पाण्डेय ने किया।
- मुख्य गतिविधि: स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय मंडलों की स्थापना पर जोर दिया गया। इसी के तहत नागपुर में गठित राष्ट्रीय मंडल में छत्तीसगढ़ से माधवराव सप्रे को भी शामिल किया गया।
🌱 समित्र मण्डल की स्थापना – 1906
- संस्थापक: पं. सुन्दरलाल शर्मा [CG PSC(ADPPO)2017, (Sci. Off.) 2022]
- स्थान: राजिम (गरियाबंद)
- उद्देश्य: इस संगठन का मुख्य लक्ष्य स्वदेशी आंदोलन का समर्थन करना, समाज सुधार के कार्यों को आगे बढ़ाना और जनता के बीच राष्ट्रीयता की भावना का संचार करना था।
🏛️ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की रायपुर-1906
- स्थापना वर्ष: 1906
- संस्थापक: सी.एम. ठक्कर [CG PSC(AP)2019]
- विशेष तथ्य: सी.एम. ठक्कर के अथक प्रयासों से रायपुर में कांग्रेस की एक शाखा की स्थापना संभव हुई। 1906 में ही पं. सुंदरलाल शर्मा ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, और वे ऐसा करने वाले पहले छत्तीसगढ़िया व्यक्ति बने।
💔 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सूरत अधिवेशन – 1907
- स्थान: सूरत
- अध्यक्ष: रासबिहारी घोष
- छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि: सुन्दरलाल शर्मा, डॉ. शिवराम मुंजे, और नारायणराव मेघावाले ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। [CG PSC(ADH)2017,(SEE)2017]
- ऐतिहासिक घटना: यह अधिवेशन कांग्रेस के गरम दल और नरम दल में विभाजन के लिए जाना जाता है।
स्वदेशी आंदोलन का छत्तीसगढ़ पर प्रभाव
सूरत अधिवेशन से लौटने के बाद पं. सुन्दरलाल शर्मा और नारायणराव मेघावाले ने छत्तीसगढ़ में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने के लिए धमतरी, राजिम, और महासमुंद जैसे स्थानों पर स्वदेशी वस्तुओं की दुकानें खोलीं।
- राजिम: डॉ. पूरन सिंह
- धमतरी: यादव राव
- महासमुंद: हरप्रसाद सोनी
- राजनांदगांव: ठाकुर प्यारेलाल सिंह, मास्टर शिवलाल और शंकरलाल खरे ने मिलकर खादी के प्रचार-प्रसार के माध्यम से स्वदेशी आंदोलन को गति दी।
🎤 प्रांतीय कांग्रेस राजनैतिक परिषद का तृतीय सत्र (रायपुर – 1907)
- स्थान: रायपुर का टाऊनहाल
- तिथि: 29 मार्च 1907 [CG PSC(Eng. S-2)2015], [CG PSC (ACF)2017]
- अध्यक्ष: नारायणराव केलकर [CG Vyapam (MBD)2024]
- स्वागतकर्ता अध्यक्ष: हरिसिंह गौर
- प्रमुख घटनाक्रम: अधिवेशन के आरंभ में दादा साहेब खापर्डे ने ‘वंदे मातरम्’ गान का प्रस्ताव रखा। हालांकि, डॉ. हरिसिंह गौर और डॉ. शिवराम मुंजे इस प्रस्ताव से सहमत नहीं थे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद दादा साहेब खापर्डे अपने समर्थकों के साथ अधिवेशन से बाहर चले गए और पास के “तात्यापारा हनुमान मंदिर” में एक जनसभा को संबोधित कर स्वदेशी और बहिष्कार के महत्व पर प्रकाश डाला।
- प्रभाव: इस घटना के परिणामस्वरूप, केंद्रीय कांग्रेस की तरह छत्तीसगढ़ की प्रांतीय कांग्रेस भी दो गुटों में विभाजित हो गई:
- नरम दल के नेता: डॉ. शिवराम मुंजे, नारायणराव केलकर, हरिसिंह गौर, सी.एम. ठक्कर, देवेन्द्र नाथ चौधरी, डॉ. मघोलकर, और रायबहादुर। [CG Vyapam (HW)2024]
- गरम दल के नेता: माधवराव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल, दादा साहब खापर्डे, वामनराव लाखे, ई. राघवेन्द्र राव, हनुमान सिंह, और लक्ष्मणराव उदगीरकर।
- महत्वपूर्ण टिप्पणी: इस बैठक को “सूरत फूट 1907” की पृष्ठभूमि के रूप में देखा जाता है। [CG Vyapam (VAPR)2021]
🙏 लोकमान्य तिलक का आगमन – 1907
- 1907 में, लोकमान्य तिलक ने बिलासपुर की यात्रा की और वे वहां श्री नागन्ना बाबू की कोठरी में रुके थे।
- उनके आगमन से प्रेरित होकर, महाराष्ट्र की तरह ही पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय भावना को जगाने के उद्देश्य से गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाने लगा।
📰 हिन्द केसरी पत्रिका का प्रकाशन (1907-08)
- प्रेरणा: लोकमान्य तिलक की मराठी पत्रिका ‘केसरी’ से प्रेरित। [CG PSC(Engg. Set-1)2015]
- प्रकाशन: हिन्द केसरी पत्रिका (स्वदेशी आंदोलन के प्रचार हेतु)।
- स्थान: नागपुर
- भाषा: हिन्दी
- प्रकाशक: माधवराव सप्रे
- सहयोगी: डॉ. वासुदेव राव, डॉ. लिमये
- प्रमुख लेख:
- ‘ये उपाय टिकाऊ नहीं हैं।’
- ‘देश की दुर्दशा’ [CGPSC(ACF)2021]
- ‘बम-गोले का रहस्य।’
- गिरफ्तारी: 21 मार्च 1908 [CGPSC(Sci. Off.)2022]
- रिहाई: 2 नवंबर 1908
✊ देश की प्रथम छात्र हड़ताल – 1907
- स्थान: नांदगांव स्टेट हाई स्कूल
- कारण: बाल गंगाधर तिलक की गिरफ्तारी के विरोध में।
- नेतृत्वकर्ता: ठा. प्यारेलाल व नंदलाल झा। [CG Vyapam SI (Mains) 2023]
📚 प्रभु आनंद समाज लाइब्रेरी – 1908
- स्थापना वर्ष: 1908
- पूर्व नाम: बारा भाई संस्था
- स्थान: रायपुर
- संस्थापक: जी.आर. देशपाण्डेय एवं बेहराम पेश्ताजी
- विशेष घटना: गांधीजी के प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन के दौरान, 21 दिसंबर 1920 को यहाँ एक विशाल जनसभा आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने महिलाओं को संबोधित किया।
📖 सरस्वती पुस्तकालय की स्थापना – 1909
- स्थान: राजनांदगांव [CGPSC(Sci. Off.)2022] [CG PSC(Engg. Set-1) 2015]
- संस्थापक: ठा. प्यारेलाल सिंह
- सहयोगी: पं. राजू लाल शर्मा, छबिलाल चौबे [CG PSC(SEE)2020]
- उद्देश्य: राजनांदगांव के निवासियों में राष्ट्रीय भावना को प्रेरित करना।
🎉 धमतरी में गणेशोत्सव – 1910
- नेतृत्वकर्ता: नारायण राव मेघावाले
- सभापति: अब्दुल रज्जाक खां
- उद्देश्य: मनोरंजक और शिक्षाप्रद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता में राष्ट्रीय और राजनीतिक चेतना का प्रसार करना।
📜 कान्यकुब्ज महासभा – 1912
- स्थान: रायपुर
- वर्ष: 1912
- संस्थापक: पं. रविशंकर शुक्ल
- उद्देश्य: राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार करना।
🗳️ छत्तीसगढ़ की नगरपालिकाओं के निर्वाचन – 1913
- मध्यप्रांत की विधानसभा में, नागपुर और छत्तीसगढ़ की नगरपालिकाओं के निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित होने वाले छत्तीसगढ़ के प्रथम सदस्य नथमल मुनिम थे। वहीं, मनोनीत (गैर-सरकारी) सदस्यों में सारंगढ़ के ‘राजबहादुर’ जवाहर सिंह शामिल थे। [CG PSC(ABEO)2013]
🏛️ प्रांतीय राजनीतिक परिषद् का चतुर्थ अधिवेशन – 1915
- स्थान: नागपुर
- अध्यक्ष: हरिसिंह गौर
- मंत्री: डॉ. शिवराम मुंजे
- सदस्य: पं. रविशंकर शुक्ल, डी.एन.चौधरी, वामनराव लाखे, नागेन्द्रनाथ-डे
- प्रमुख कार्य: इस अधिवेशन में ‘सी.पी. एवं बरार प्रोविन्शियल एसोसिएशन’ नामक एक समिति का गठन किया गया।
- स्थायी सदस्य:
- रायपुर: डी.एन. चौधरी, राव साहब दानी, पं. रविशंकर शुक्ल, वामनराव लाखे।
- बिलासपुर: नागेन्द्रनाथ डे, मुंशी अकबर खाँ, ठा. मनमोहन सिंह, त्रियम्बक राव देहनकर, कुंजबिहारी अग्निहोत्री।
- दुर्ग: नलिनी कांत चौधरी एवं घनश्याम सिंह गुप्त।
- विशेष: इस समिति की कार्यकारिणी में सी.एम. ठक्कर को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। अधिवेशन में ई. राघवेन्द्र राव ने नरम दल और गरम दल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
🗣️ मालगुजारों का सम्मेलन – 1915
- तिथि: 20 जून, 1915 [CG PSC (Pre)2016]
- स्थान: टाउनहाल, रायपुर [CG PSC (Pre) 2016]
- अध्यक्षता: यादवराव देशमुख
- सदस्य: इस सम्मेलन में 300 मालगुजारों ने भाग लिया। [CG PSC (Pre) 2016]
- उद्देश्य: इस बैठक का मुख्य लक्ष्य विधानसभा में प्रस्तुत होने वाले नए राजस्व विधेयक के संदर्भ में मालगुजारों के हितों की रक्षा करना था।
- प्रमुख मांगें: सम्मेलन में सरकार से राजस्व की दर को कम करने, राजस्व वसूली में रियायत देने, और मालगुजारों के अधिकारों को संरक्षित रखने की मांग की गई।
🏛️ प्रांतीय राजनीतिक परिषद का 5वाँ अधिवेशन – 1916
- तिथि: 5 नवंबर, 1916
- स्थान: अमरावती
- अध्यक्ष: डॉ. हरिसिंह गौर
- स्वागत समिति के अध्यक्ष: मोरोपंत जोशी
होमरूल आंदोलन – 1916
- वर्ष: 1916
- छत्तीसगढ़ में सक्रिय शाखा: छत्तीसगढ़ में ‘तिलकवादी होमरूल’ आंदोलन काफी सक्रिय रहा। [CG PSC(ADI)2016]
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बालगंगाधर तिलक ने आयरलैंड के आंदोलन से प्रेरणा लेकर भारत में होमरूल आंदोलन की शुरुआत की। पूरे भारत में होमरूल लीग की स्थापना की गई, जिसकी दो प्रमुख शाखाएँ थीं: एनी बेसेंट की शाखा और तिलकवादी शाखा।
- छत्तीसगढ़ से सदस्य: छत्तीसगढ़ से कुल 99 सदस्य थे, जिनमें शामिल हैं:
- रायपुर से – 18
- दुर्ग से – 11
- बिलासपुर से – 70 (इस आंदोलन में सबसे अधिक सदस्य बिलासपुर से थे)
🤝 छत्तीसगढ़ में होमरूल लीग की क्षेत्रीय शाखा की स्थापना – 1917
- मुख्यालय: रायपुर
- स्थापना तिथि: 26 अगस्त, 1917
- संस्थापक: बैरिस्टर सी.एम. ठक्कर [CG PSC(ADI)2016]
क्षेत्रीय नेतृत्व और सहयोगी
| स्थान | नेतृत्वकर्ता | प्रमुख सहयोगी | परीक्षा संदर्भ |
| 1. रायपुर | पं. रविशंकर शुक्ल | मूलचंद बोगड़ी, लक्ष्मणराव उदगीरकर, माधव राव सप्रे | [CG PSC(EAP)2016] |
| 2. बिलासपुर | ई. राघवेन्द्र राव | गजाधर साव, मुन्नीलाल स्वामी, गोविंद प्रसाद तिवारी, अंबिका प्रसाद वर्मा | |
| 3. दुर्ग | घनश्याम सिंह गुप्त | [CG PSC(EAP)2016] | |
| 4. राजनांदगांव | ठा. प्यारेलाल सिंह |
📢 होमरूल लीग का क्षेत्रीय सम्मेलन – 1918
- स्थान: रायपुर [CG PSC(ADH)2017],[CG PSC(Asst. Dri. hoti.)2015]
- अध्यक्षता: पं. रविशंकर शुक्ल [CG PSC(ACF)2017]
- विशेष घटना: होमरूल लीग के प्रचार-प्रसार के लिए जनवरी 1918 में, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जब लखनऊ से कलकत्ता की यात्रा पर थे, तो उन्होंने रास्ते में दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर में जनसभाओं को संबोधित किया।
📜 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व – 1918
- तिथि: 26 जनवरी, 1918
- स्थान: दिल्ली
- अध्यक्ष: पं. मदन मोहन मालवीय
- विशेष: भारत सचिव मॉन्टेग्यू से मिलने के लिए गठित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में मध्यप्रांत से 12 सदस्य शामिल हुए। इनमें छत्तीसगढ़ से ई. राघवेन्द्र राव तथा बैरिस्टर सी. एम. ठक्कर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
भारत मंत्री मॉन्टेग्यू का मध्यप्रांत दौरा – 1918
- वर्ष: 1918
- प्रतिनिधिमंडल: उनसे मिलने के लिए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ से पं. विष्णुदत्त शुक्ल, दादा साहेब खापर्डे, हरिसिंह गौर, और सी.एम. ठक्कर जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।
⚫️ रोलेट एक्ट का विरोध – 1919
- विरोध दिवस: छत्तीसगढ़ में 30 मार्च, 1919 को आम हड़ताल की गई और इसे ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया गया।
- रायपुर: माधवराव सप्रे, रविशंकर शुक्ल और महंत लक्ष्मीनारायण ने विरोध का नेतृत्व किया।
- बिलासपुर: ई. राघवेंद्र राव, ठा. छेदीलाल, और अन्य नेताओं ने काले वस्त्र पहनकर जुलूस निकाला।
- रतनपुर: पुरुषोत्तम दास ने बांध निर्माण में लगे मजदूरों से काम बंद करने की अपील की, जिसे मान लिया गया।
- राजनांदगांव: विरोध का नेतृत्व ठा. प्यारेलाल सिंह ने किया।
- राजिम: पं. सुंदरलाल शर्मा और छोटेलाल श्रीवास्तव राजनीतिक चेतना जगाने में सक्रिय रहे।
📚 मध्यप्रांत हिंदी साहित्य सम्मेलन – 1919
- तिथि: 30 मार्च, 1919
- स्थान: रायपुर
- आयोजक: माधवराव सप्रे
- सहयोगी: माखनलाल चतुर्वेदी
🌾 राजिम किसान मजदूर सभा – 1920
- आयोजन माह: फरवरी, 1920
- स्थान: राजिम
- अध्यक्ष: पं. विष्णुदत्त शुक्ल
- सहयोगी: पं. सुन्दरलाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल, माधवराव सप्रे, बाजीराव कृदंत [CG PSC(ACF)2017]
- विशेष: यह सम्मेलन राजिम में माघ पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले विशाल मेले के समय आयोजित किया गया था, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सके।
🤝 खिलाफत आंदोलन – 1920
- कारण: प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों द्वारा अपने वादे से मुकर जाना। [CG PSC(ACF)2017]
- समिति गठन: 17 मार्च, 1920 को रायपुर में खिलाफत कमेटी का गठन किया गया।
- स्थान: रायपुर
- प्रमुख उद्बोधन: राष्ट्रीय नेता असगर अली ने सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल ने एक प्रसिद्ध कथन कहा: ‘अब हम लोग हिन्दू और मुसलमान नहीं रहे, वरन् हिन्दुस्तानी बन गए हैं।’
🗺️ खिलाफत आंदोलन का विस्तार
- सम्मेलन:
- रायपुर: इस आंदोलन का नेतृत्व पं. रविशंकर शुक्ल (हिन्दू नेता) और असगर अली (मुस्लिम नेता) ने मिलकर किया।
- बिलासपुर (खपरगंज स्कूल): यहाँ वजीर खाँ, अकबर खाँ, और हकीम खाँ ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला।
- विशेष: प्रांतीय खिलाफत सम्मेलन 18 नवंबर, 1924 को रायपुर में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता शौकत अली ने की।
🎤 जिला राजनीतिक सम्मेलन – 1920
- स्थान: रायपुर, बिलासपुर, और दुर्ग।
- रायपुर सम्मेलन: मार्च 1920
- दुर्ग सम्मेलन: 1920
- बिलासपुर सम्मेलन:
- तिथि: 11 मई, 1920
- अध्यक्ष: डॉ. बी.एस. मुंजे [CG PSC(ITI Pri.)2022]
- विशेष घटनाक्रम:
- डॉ. ई. राघवेन्द्र राव ने एक जोशीला भाषण देकर रोलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग हत्याकांड का पुरजोर विरोध किया।
- उनके भाषण से प्रेरित होकर, गंगाधर गोपाल दीक्षित ने ‘नायब तहसीलदार’ के पद से त्यागपत्र दे दिया।
- इसका प्रभाव रतनपुर के पण्डित रघुनाथ मिश्र पर भी पड़ा और उन्होंने नॉर्मल स्कूल, बिलासपुर में अपनी पढ़ाई का बहिष्कार कर दिया।
💧 कंडेल नहर सत्याग्रह – 1920
- अवधि: जुलाई 1920
- स्थान: धमतरी जिले का कंडेल गाँव [CGPSC(SEE)2022], [CG Vyapam (RI)2017]
- नहर निर्माण: 1912 (मि. हैरियट द्वारा)
- नेतृत्वकर्ता: पं. सुंदरलाल शर्मा [CSPHCL (2022)], [CG Vyapam SI (Mains) 2023, (DCAG)2018]
- सहयोगी: छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायणराव मेघावाले, नत्थूजी जगताप [CGPSC(ADI)2016] [CGVyapam (MAH)2017]
- संबंध: कंडेल नहर सत्याग्रह का गहरा संबंध असहयोग आंदोलन से था। [CG PSC (ADPPO)2013]
- कारण: इस सत्याग्रह का मुख्य कारण यह था कि नहर विभाग द्वारा लागू किए गए दस वर्षीय समझौते को ग्रामीण स्वीकार नहीं कर रहे थे और वे नहर के पानी का उपयोग करने पर लगाए गए जुर्माने का विरोध कर रहे थे। [CG PSC(ARTO) 2017]
- घटनाक्रम:
- जुलाई 1920: कंडेल के ग्रामीणों ने नहर के पानी का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और ब्रिटिश सरकार के 10-वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने से भी मना कर दिया।
- अगस्त 1920: अंग्रेज अधिकारियों ने नहर की मेड़ को काटकर जबरदस्ती पानी कंडेल गाँव के खेतों में छोड़ दिया और ग्रामीणों पर ₹4033 का जुर्माना ‘पानी चोरी’ के आरोप में लगा दिया।
- परिणाम और गांधीजी का आगमन:
- सितंबर 1920: पं. सुन्दरलाल शर्मा के नेतृत्व में कंडेल में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करने का निर्णय लिया गया।
- 02 दिसम्बर 1920: पं. सुन्दरलाल शर्मा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह में भाग लेने हेतु आमंत्रित करने के लिए कलकत्ता गए। गांधीजी ने उनका निमंत्रण स्वीकार कर लिया। उन्हें छत्तीसगढ़ लाने का श्रेय पं. सुंदरलाल शर्मा को ही दिया जाता है। [CG VS (AG-3)2021]
- 20 दिसंबर 1920: गांधीजी के छत्तीसगढ़ आगमन से पहले ही, ब्रिटिश सरकार ने दबाव में आकर जुर्माने की राशि वापस ले ली और सत्याग्रह समाप्त हो गया।
🙏 महात्मा गांधी का प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन – 20 दिसम्बर 1920
- प्रवास की अवधि: 20-21 दिसंबर 1920 [CGPSC(VAS)2021(MI)2018] [CG Vyapam (RFM)2018]
- सहयोगी: उनके साथ मौलाना शौकत अली भी थे।
- आमंत्रणकर्ता: पं. सुंदरलाल शर्मा [CG Vyapam (FCPR) 2016], [CG PSC (Pre)2018, (ΕΑΡ)2016]
- उद्देश्य: असहयोग आंदोलन के लिए लोगों का समर्थन हासिल करना। [CG PSC(Pre)2019]
कार्यक्रम का विवरण:
- रायपुर में कार्यक्रम:
- 20 दिसम्बर 1920: गांधीजी ने रायपुर के गांधी चौक पर जनसभा को संबोधित किया और असहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
- 21 दिसम्बर 1920: धमतरी से लौटकर, उन्होंने रायपुर के ब्राम्हणपारा में स्थित आनंद समाज वाचनालय में विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित किया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
- तिलक स्वराज फण्ड: इस यात्रा के दौरान महिलाओं ने ‘तिलक स्वराज फण्ड’ हेतु लगभग ₹2000 कीमत के आभूषण दान किए। [CG Vyapam (ECS) 2017, (TET)2019] [CG PSC(Lib.)2017]
- कांग्रेस कमेटी का गठन: इसी समय, गांधीजी के मार्गदर्शन में रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी का चुनाव हुआ, जिसमें बैरिस्टर सी. एम. ठक्कर को प्रथम अध्यक्ष चुना गया।
- धमतरी प्रवास:
- 21 दिसंबर 1920 को गांधीजी ने धमतरी के मकई चौक पर स्थित जानी हुसैन बाड़ा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। [CG PSC (Lib.)2017] [CG Vyapam (MST)2021]
- जब गांधीजी सभा स्थल पर पहुँचे, तो भारी भीड़ के कारण गुरुर के एक व्यापारी ‘उमर सिंह काछी’ ने उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर मंच तक पहुँचाया।
- कुरूद में संबोधन:
- धमतरी से रायपुर वापसी के दौरान उन्होंने कुरूद गाँव में भी उत्साहित जनता को संबोधित किया।
- समग्र प्रभाव: महात्मा गांधी के इस आगमन ने छत्तीसगढ़ में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की। यह नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में लिए जाने वाले असहयोग आंदोलन के निर्णयों का एक सफल पूर्वाभ्यास साबित हुआ।
📊 विभिन्न कांग्रेस अधिवेशनों में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि (सारणी)
| क्रमांक | अधिवेशन | वर्ष | छत्तीसगढ़ से शामिल सदस्य |
| 1. | बम्बई अधिवेशन | 1889 | रामचंद्रराव लाखे |
| 2. | नागपुर अधिवेशन | 1891 | माधवराव सप्रे, रामदयाल तिवारी, सी.एम ठक्कर, वामनराव लाखे, बद्रीप्रसाद साव, डोमारसिंह |
| 3. | बनारस अधिवेशन | 1905 | माधवराव सप्रे, रामगोपाल तिवारी, सी.एम ठक्कर, वामनराव लाखे, बद्रीप्रसाद साव, पं. रविशंकर शुक्ल, गजाधर साव |
| 4. | कलकत्ता अधिवेशन | 1906 | माधवराव सप्रे, वामनराव लाखे, पं. रविशंकर शुक्ल, लोचन प्रसाद पाण्डेय |
| 5. | सूरत अधिवेशन | 1907 | पं. सुंदरलाल शर्मा, डॉ. शिवराम मुंजे, नारायण राव मेघावाले |
| 6. | कलकत्ता अधिवेशन | 1920 | पं. सुंदरलाल शर्मा |
| 7. | काकीनाडा अधिवेशन | 1923 | नारायण राव मेघावाले, पं. सुंदरलाल शर्मा, रामजी लाल सोनी, गिरधारी लाल तिवारी, श्यामलाल गुप्त, श्यामलाल सोम |
✊ मिल मजदूर यूनियन
- अध्यक्ष: ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- उपाध्यक्ष: श्रीलाल जी
- मंत्री: राजूलाल शर्मा
🚩 लाल झण्डा संघ
- स्थापना: लाल झण्डा संघ
- संस्थापक: मिल मजदूर यूनियन
- स्थान: हमालपारा, रायपुर
🏭 BNC मिल मजदूर आंदोलन: तीन प्रमुख चरण
1. प्रथम आंदोलन (अप्रैल 1920)
- स्थान: राजनांदगांव [CG Vyapam (TET) 2021]
- नेतृत्वकर्ता: ठाकुर प्यारेलाल सिंह [CSPHCL (2022)] [CGPSC(SEE)2020, (SEE)2017]
- सहयोगी: शिवलाल मास्टर, शंकर खरे
- प्रमुख मांगें:
- वेतन में वृद्धि की जाए।
- कार्य-दशाओं में सुधार लाया जाए।
- काम के घंटे 8 घंटे निर्धारित किए जाएं।
- हड़ताल की अवधि: यह हड़ताल 36 दिनों तक चली और इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली और सबसे लंबी मजदूर हड़ताल माना जाता है। [CG Vyapam (MFA-1)2023]
- परिणाम: इस आंदोलन का समाधान वी.वी. गिरी के कुशल नेतृत्व में हुआ, जिन्होंने मजदूरों और मिल प्रबंधन के बीच एक समझौता कराया जिसमें मजदूरों के हितों को प्राथमिकता दी गई। [CGPSC(ADPPO)2013,(ABEO)2013,(Registrar)2017]
2. द्वितीय आंदोलन (1924)
- नेतृत्वकर्ता: ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- कारण: मजदूरों ने एक बार फिर अपनी समस्याओं के समाधान हेतु आंदोलन का मार्ग अपनाया। [CGPSC(Registrar)2021]
- दुखद घटना: आंदोलन के दौरान, पुलिस की गोली लगने से एक मजदूर, जरहु गोंड़, की मृत्यु हो गई।
- परिणाम: इस घटना के बाद, ठाकुर साहब को रियासत की शांति-व्यवस्था के लिए खतरा मानते हुए 1924 में राजनांदगांव रियासत से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें रायपुर में आकर बसना पड़ा। [CGPSC(Reg.)2021]
3. तृतीय आंदोलन (फरवरी 1937)
- नेतृत्वकर्ता: ठाकुर प्यारेलाल सिंह
- मजदूर प्रतिनिधि: रामचंद्र सखाराम रूईकर
- कारण:
- मजदूरों के वेतन में 10% की कटौती।
- लगभग 600 मजदूरों को बेगारी के लिए मजबूर करना।
- समर्थन सभा: 2 मई, 1937 को, B.N.C. मिल के 3500 हड़ताली मजदूरों के समर्थन में आर्य समाज लाइब्रेरी में एक सभा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पं. रविशंकर शुक्ल ने की।
- परिणाम: यह हड़ताल 11 महीने तक चली। अंततः, मजदूरों को वापस काम पर लिया गया और उन्हें उनका पूरा वेतन दिया गया। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप ठाकुर प्यारेलाल जी का निष्कासन समाप्त कर दिया गया।
असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)
1. कांग्रेस का विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920, कलकत्ता)
- अध्यक्ष: लाला लाजपत राय
- छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधि: इस विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ से बैरिस्टर छेदीलाल, ई. राघवेंद्र राव, शिवदुलारे मिश्र, और सर्वदत्त वाजपेयी शामिल हुए।
2. कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920, नागपुर)
- अध्यक्ष: विजय राघवाचार्य
- छत्तीसगढ़ से प्रमुख प्रतिनिधि:
- रायपुर: पं. सुन्दरलाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल, वामन राव लाखे, सी.एम.ठक्कर
- धमतरी: नारायणराव मेघावाले, नत्थूजी जगताप, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव
- बिलासपुर: ई. राघवेन्द्र राव, बै. छेदीलाल, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव
- राजनांदगांव: ठा. प्यारेलाल सिंह
- दुर्ग: घनश्याम सिंह गुप्त
- विशेष: इस अधिवेशन के लिए चंदा एकत्र करने हेतु बैरिस्टर अभ्यंकर एवं सेठ जमनालाल बजाज ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया था।
असहयोग आंदोलन में छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम: वकालत का त्याग
असहयोग आंदोलन के समर्थन में, छत्तीसगढ़ के कई प्रतिष्ठित राजनेताओं ने अपनी वकालत का त्याग कर दिया, जिसका विवरण इस प्रकार है:
| क्षेत्र | वकालत का त्याग करने वाले प्रमुख नेता | परीक्षा संदर्भ |
| दुर्ग | घनश्याम सिंह गुप्त, रत्नाकर झा | [CGPSC(ACF)2017,(Pre)2013] |
| राजनांदगांव | ठा. प्यारेलाल, बलदेव प्रसाद मिश्र, गोवर्धन लाल श्रीवास्तव | |
| बिलासपुर | बै. छेदीलाल, ई. राघवेंद्र राव, डी. के. मेहता, एन. आर. खानखोजे | |
| रायपुर | रामदयाल तिवारी, रविशंकर शुक्ल, यादवराव देशमुख, रामनारायण तिवारी | [CG Vyapam (Re-TET) 2024] |
राष्ट्रीय पंचायतों का गठन
वकीलों द्वारा वकालत के त्याग के कारण ठप पड़ी न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राष्ट्रीय पंचायतों की स्थापना की गई।
| स्थान | तिथि | संस्थापक | परीक्षा संदर्भ |
| धमतरी | फरवरी 1921 | बाजीराव कृदंत | |
| रायपुर | 4 मार्च 1921 | सेठ जसकरण डागा | [CGVyapam (PHEH)2025] |
🎖️ उपाधियों और शासकीय सेवाओं का त्याग
असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के कई राजनेताओं ने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई उपाधियों और शासकीय नौकरियों का त्याग कर दिया।
- उपाधि त्याग:
- राय साहब: वामनराव लाखे (जनता ने इन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि दी), बैरिस्टर कल्याण जी, मोरार जी थैंकर, सेठ गोपीकिशन [CGPSC(Pre)2013]
- राय बहादुर: नागेन्द्र नाथ डे [CGPSC(Pre)2020]
- खान साहब: काजी शमशेर खां
- शासकीय सेवा का परित्याग:
- यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव (रेलवे हाई स्कूल से त्यागपत्र)
- गंगा गोपाल दीक्षित (नायब तहसीलदार का पद ठुकराया)
- काजी शमशेर खान और बद्री प्रसाद (ऑनरेरी मजिस्ट्रेट के पद से त्यागपत्र) [CG PSC (AG-3)2018]
काउंसिल और जिला परिषद चुनावों का बहिष्कार (1921)
- यादव राव देशमुख और बाजीराव कृदन्त ने रायपुर जिला परिषद् और प्रांतीय विधानसभा से त्यागपत्र दे दिया। इस त्याग के लिए धमतरी की जनता ने बाजीराव कृदन्त को ‘लोकप्रिय’ की उपाधि से सम्मानित किया। [CG PSC(ACF)2017]
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी का प्रचार
1921 में खादी को बढ़ावा देने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए छत्तीसगढ़ में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए:
- विशाल जुलूस (रायपुर): 1 अगस्त 1920 (विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार हेतु)
- खादी प्रदर्शनी (रायपुर):
- वर्ष: 1921 [CG PSC(ACF)2017] [CG Vyapam (ESC)2017]
- स्थान: रावणभाठा, रायपुर
- आयोजक: श्रीमती अंजुम बेगम [CGPSC(ACF)2017]
- खादी प्रदर्शनी दिवस: 11 अक्टूबर 1921
🧵 खादी और मद्य निषेध कार्यक्रम
- खादी सप्ताह: 7 से 15 अक्टूबर
- विशेष: रायपुर कांग्रेस समिति ने खादी को बढ़ावा देने के लिए 460 चरखे निःशुल्क वितरित किए। 1 अगस्त 1921 को रायपुर नगरपालिका में एक प्रस्ताव पारित कर नगरपालिका के स्कूली बच्चों के लिए खादी की पोशाक अनिवार्य कर दी गई।
धमतरी में खादी प्रचार
- खादी प्रचार केन्द्र: अगस्त 1921 में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव द्वारा स्थापित।
- विशेष योगदान: धमतरी तहसील के मालगुजार श्री दाऊ डोमार सिंह ने चरखों से सूत कातकर और बुनकर श्री बनवारी लाल जी देवांगन से वस्त्र बनवाकर उन्हें रायपुर की खादी प्रदर्शनी में भेजा।
बिलासपुर में वस्त्रालय दुकान
- खादी भण्डार: देवतादीन तिवारी
- स्वदेशी स्टोर: जमुना प्रसाद वर्मा
- स्वदेशी दुकान: कैलाश सक्सेना
- प्रचार कार्य: मनोहर लाल शुक्ल, सर्वदत्त वाजपेयी जैसे नेताओं ने बिलासपुर और मुंगेली में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी के उपयोग को बढ़ावा दिया।
विशेष कार्यक्रम
- चरखा प्रसार: पं. रघुनाथ मिश्र ने रतनपुर में चरखे का प्रचार किया।
- अनिवार्य खादी: असहयोग आंदोलन के दौरान, बिलासपुर नगर पालिका के कर्मचारियों के लिए खादी पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। [CG PSC(ADPES)]
🍷 मद्य निषेध कार्यक्रम
इस आंदोलन के समर्थन में विभिन्न शहरों में शराब की दुकानों के सामने धरना दिया गया।
- रायपुर: 7 फरवरी 1921 को गांधी चौक पर आमसभा का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व पं. सुंदरलाल शर्मा और कुतुबुद्दीन ने किया।
- बिलासपुर: सदर बाजार में स्थित हीरालाल कलार की शराब भट्ठी पर धरना दिया गया।
- दुर्ग और धमतरी: इन जिलों में शराब की नीलामी में किसी ने भाग नहीं लिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शराब दुकानों की नीलामी को सफलतापूर्वक रोका।
🎓 स्कूल-कॉलेज का बहिष्कार और राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना
रायपुर में बहिष्कार का प्रभाव
- 7 फरवरी 1921 को, ‘भारत में अंग्रेजी राज’ के लेखक ‘तपस्वी’ सुन्दरलाल (मुजफ्फरनगर, उत्तरप्रदेश) रायपुर आए। उनके जोशीले भाषणों से प्रेरित होकर नॉर्मल स्कूल के 53 छात्रों ने तुरंत स्कूल छोड़कर असहयोग आंदोलन में भागीदारी की।
बिलासपुर में बहिष्कार का प्रभाव
- ‘कर्मवीर’ पत्रिका के संपादक पं. माखनलाल चतुर्वेदी के ओजस्वी भाषणों से प्रभावित होकर, बिलासपुर और मुंगेली के अनेक छात्रों ने सरकारी स्कूलों का बहिष्कार किया।
🏫 राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना
सरकारी स्कूलों के बहिष्कार के बाद छात्रों की शिक्षा को जारी रखने के लिए, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में राष्ट्रीय विद्यालय स्थापित किए गए। मध्यप्रांत में स्थापित इन विद्यालयों का पाठ्यक्रम जबलपुर राष्ट्रीय शिक्षा समिति द्वारा तैयार किया गया था। [CG PSC(ADPE&S)2019][CG PSC(AP)2016]
1. रायपुर में राष्ट्रीय विद्यालय
- स्थापना: 5 फरवरी 1921
- भवन दानदाता: गोपीकिशन, बालकिशन एवं रामकिशन
- संचालक समिति के मंत्री: वामनराव लाखे
- प्रधानाध्यापक: रामनारायण तिवारी (धमतरी के वकील)
- शैक्षणिक सहयोगी: माधवराव सप्रे, महंत लक्ष्मीनारायण दास [CG PSC(CMO)2019]
- बंद होने का वर्ष: 1924 (आर्थिक समस्याओं के कारण)
2. धमतरी में राष्ट्रीय विद्यालय
- स्थापना: जुलाई 1921
- संस्थापक: बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव (उन्होंने अपने स्वयं के मकान और खर्च पर विद्यालय की स्थापना की)
- प्रधानाध्यापक:
- अजीजुर्रहमान
- ठा. प्यारेलाल सिंह (6 महीने तक)
- शिक्षक: बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, बिसाहू राव
- बंद होने का वर्ष: 1924 (आर्थिक तंगी के कारण)
3. बिलासपुर में राष्ट्रीय विद्यालय
- स्थापना: 1921
- स्थान: बद्रीनाथ साव के घर में स्थापित।
- प्रधानाध्यापक: पं. शिवदुलारे मिश्र [CG Vyapam (FI)2017]
- अध्यापक: यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव
4. राजनांदगांव में राष्ट्रीय विद्यालय
- स्थापना: 1921 [CG PSC (Pre)2021], [CG PSC(Reg.) 2021]
- संस्थापक: डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र, ठा. पन्नालाल सिंह, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, बंशी लाल, पं. बलशास्त्री झा
- विशेष भूमिका: ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने कुछ समय तक इस विद्यालय में प्रधान पाठक के रूप में भी कार्य किया।
🏛️ आश्रमों की स्थापना
असहयोग आंदोलन को गति देने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न आश्रमों की स्थापना की गई।
| आश्रम का नाम | स्थान | वर्ष | स्थापनाकर्ता | परीक्षा संदर्भ |
| सत्याग्रह आश्रम | रायपुर | 7 फरवरी 1921 | सुन्दरलाल शर्मा | [CG PSC(ADH)2022] |
| खादी आश्रम | रायपुर | 1921 | ठा. प्यारेलाल व वामनराव लाखे | |
| असहयोग आश्रम | रायपुर | 1921 | पं. सुंदरलाल शर्मा |
- नोट: सत्याग्रह आश्रम की स्थापना सत्याग्रहियों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से की गई थी।
🤝 अछूतोद्धार कार्यक्रम
- संचालनकर्ता: पं. सुंदरलाल शर्मा (प्रथम शुरुआत-1918)
- उपवास: पं. छबिराम चौबे (21 दिन) (राजनांदगांव निवासी)
🐄 गो-वध निषेध कार्यक्रम
- प्रारंभकर्ता: महंत नैनदास (सतनाम पंथी गुरु) [CG Vyapam (ECH)2016]
- प्रेरणा स्रोत: महात्मा गांधी की शिक्षा
- विशेष: यह गो-वध के विरुद्ध पहला संगठित आंदोलन था, जिसके अंतर्गत करमनडीह बाजार सत्याग्रह भी आयोजित किया गया।
- प्रश्न: इस राज्य में ब्रिटिश काल में गोवध के विरुद्ध प्रथम संगठित आंदोलन करने वाले कौन थे? उत्तर: (D) महंत नैनदास [CG Vyapam (ECH)2016]
⛓️ माखनलाल चतुर्वेदी की गिरफ्तारी / शनिचरी पड़ाव
- सम्मेलन: बिलासपुर जिला राजनीतिक सम्मेलन
- आयोजन: 12 मार्च 1921, शनिचरी बाजार, बिलासपुर
- अध्यक्षता: अब्दुल कादिर सिद्दिकी
- सचिव: ई. राघवेन्द्र राव
- गिरफ्तारी: 12 मई 1921 (उन्हें जबलपुर से बिलासपुर जेल स्थानांतरित किया गया)
- कारण: अंग्रेजों के विरुद्ध ओजस्वी भाषण देना।
- सजा: 5 जुलाई 1921 (8 माह का कठोर कारावास)
- जेल में रचना: बिलासपुर जेल में अपने कारावास के दौरान उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ (14 फरवरी 1922) की रचना की। [CG PSC (Registrar)2017]
- रिहाई: 4 मार्च 1922 (जबलपुर जेल से)
- विशेष:
- उन्होंने ‘कर्मवीर’ पत्रिका का संपादन किया, जिसमें उनके सहयोगी माधवराव सप्रे और पं. विष्णुदत्त शुक्ल थे। [CG PSC (ADH) 2017][CG Vyapam (ADEO) 2017]
- उनकी गिरफ्तारी के विरोध में बिलासपुर में एक सार्वजनिक सभा आयोजित की गई, जिसके अध्यक्ष पं. रविशंकर शुक्ल और प्रमुख वक्ता ई. राघवेन्द्र राव, ठा. छेदीलाल व घनश्याम सिंह गुप्त थे।
👑 प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का विरोध
- वर्ष: 17 मार्च 1921
- नेतृत्व: पं. रविशंकर शुक्ल
🇮🇳 राष्ट्रीय नेताओं का छत्तीसगढ़ आगमन – 1921
1921 में असहयोग आंदोलन के समर्थन और प्रचार हेतु कई राष्ट्रीय नेताओं ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया।
- बिलासपुर आगमन (5 जुलाई 1921):
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद [CG Vyapam (FI)2013]
- सी. राजगोपालाचारी
- सुभद्रा कुमारी चौहान
- रायपुर आगमन:
- सेठ जमनालाल बजाज और मौलाना कुतुबुद्दीन ने रायपुर के गांधी चौक में जनता को संबोधित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
🌳 सिहावा-नगरी जंगल सत्याग्रह
- तिथि: 21 जनवरी, 1922 (इसे छत्तीसगढ़ का प्रथम जंगल सत्याग्रह माना जाता है)। [CG PSC (Pre)2015], [CGVyapam (Ameen) 2017]
- कारण: ब्रिटिश सरकार द्वारा वनों को आरक्षित घोषित कर आदिवासियों के वन में प्रवेश और वनोपज के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना।
- प्रारंभिक नेतृत्वकर्ता: श्यामलाल सोम, पंचम सिंह, विशम्भर पटेल, शोभाराम साहू, और बाली ठाकुर।
- बाद का नेतृत्व: जब प्रारंभिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, तो आंदोलन का नेतृत्व पं. सुंदरलाल शर्मा और उनके सहयोगियों नारायण राव मेघावाले व बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव ने संभाला।
- दमनकर्ता: आई.सी.एस. अधिकारी बेली, जनार्दन प्रसाद और सब-इंस्पेक्टर रामदुलारे।
- सजा: इस सत्याग्रह के लिए सुंदरलाल शर्मा को 1 वर्ष और नारायण राव मेघावाले को 8 माह के कारावास की सजा सुनाई गई।
- विशेष तथ्य: यह असहयोग आन्दोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में संचालित एकमात्र जंगल सत्याग्रह था।
🏛️ मध्य प्रांतीय कांग्रेस कमेटी की विशेष बैठक
- वर्ष: 27 नवंबर, 1921
- अध्यक्षता: ई. राघवेन्द्र राव
- संयोजक: पं. रविशंकर शुक्ल एवं राव साहब देशमुख (छत्तीसगढ़ से)।
- विशेष: इसी बैठक में पं. रविशंकर शुक्ल को रायपुर जिले से अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति के लिए प्रतिनिधि चुना गया।
📜 हिंदी प्रांतीय समिति की बैठक
- तिथि: जनवरी 1922
- गठन: मध्यप्रांत के सभी राष्ट्रीय विद्यालयों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रीय शिक्षण समिति का गठन किया गया, जिसके प्रमुख सदस्य थे – 1. ई. राघवेंद्र राव, 2. बैरिस्टर छेदीलाल, 3. श्यामसुंदर भार्गव।
📢 रायपुर राजनीतिक परिषद् का अधिवेशन
- तिथि: 23 मार्च, 1922 [CG PSC (Lib. & Sports) 2019]
- स्थान: रायपुर
- अध्यक्षता: श्री उमाकांत बलवंत घाटे
- स्वागत समिति के अध्यक्ष: पं. रविशंकर शुक्ल
- उद्देश्य: रायपुर क्षेत्र के निवासियों में राजनीतिक जागृति लाना।
- गिरफ्तारी: इस सम्मेलन के दौरान पं. रविशंकर शुक्ल को गिरफ्तार किया गया। [CG PSC (Lib. & Sports) 2019]
- कारण: उन्होंने पुलिस अधीक्षक को सम्मेलन में मुफ्त प्रवेश पत्र देने से इनकार कर दिया था। [CGVyapam (Patwari)2017]
- प्रमुख अधिकारी:
- डिप्टी कमिश्नर: सी.ए. क्लार्क
- पुलिस कप्तान: जोंस
⛓️ पं. सुंदरलाल शर्मा की गिरफ्तारी और जेल पत्रिका का संपादन
- तिथि: मई 1922
- कारण: असहयोग आंदोलन के दौरान एक मामले की सुनवाई बैजनाथ पण्ड्या की अदालत में होनी थी, जिसमें पं. शर्मा अनुपस्थित रहे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया।
- कारावास: 1 वर्ष
- जेल से संपादन: रायपुर केंद्रीय जेल में रहते हुए, उन्होंने ‘श्रीकृष्ण जन्मस्थली’ नामक एक हस्तलिखित जेल पत्रिका का संपादन किया। [CG Vyapam (Panjiyak lipic)2013] [CG PSC (AMO) 2017]
- पत्रिका का विवरण:
- कुल पृष्ठ: 18
- प्रकार: हस्तलिखित पत्रिका
🇮🇳 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गया अधिवेशन – 1922
- अध्यक्षता: सी.आर. दास
- छत्तीसगढ़ से सदस्य: ई. राघवेंद्र राव, बैरिस्टर छेदीलाल, पं. रविशंकर शुक्ल।
🚫 कर न दो आंदोलन – 1922
- नेतृत्वकर्ता: गनपत सिंह चंद्रवंशी
- स्थान: झिरना (कवर्धा रियासत)
📰 राष्ट्रीय आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका
| पत्रिका का नाम | प्रकाशन वर्ष | संपादक |
| छत्तीसगढ़ मित्र | 1900 | माधवराव सप्रे |
| सरस्वती पत्रिका | 1900 | पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी |
| हिन्दी ग्रंथ प्रकाश मण्डली | 1905 | माधवराव सप्रे |
| हिन्द केसरी | 1907 | माधवराव सप्रे |
| कर्मवीर | 1920 | पं. माखनलाल चतुर्वेदी |
| जेलपत्रिका (श्रीकृष्ण जन्मस्थली) | 1922 | पं. सुंदरलाल शर्मा |
| विकास | 1925 | रघुवीर सहाय |
| उत्थान | 1935 | रायपुर जिला परिषद् |
| कांग्रेस पत्रिका | 1937 | रायपुर कांग्रेस कमेटी |
| अग्रदूत | 1942 | केशव प्रसाद वर्मा |
स्वराज दल और छत्तीसगढ़
स्वराज दल का गठन
- पृष्ठभूमि: दिसंबर 1922 में गया (बिहार) में हुए कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में काउंसिल प्रवेश के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इसी के परिणामस्वरूप, देशबंधु सी.आर. दास ने एक नई पार्टी, स्वराज पार्टी, के गठन का निर्णय लिया।
- गठन: 1 जनवरी, 1923
- नेतृत्व:
- अध्यक्ष: देशबंधु चितरंजन दास
- सचिव: मोतीलाल नेहरू
- उद्देश्य:
- विधान मंडलों में चुनाव लड़ना।
- देश विरोधी कानूनों और नीतियों का विधान मंडल के भीतर से विरोध करना।
- मान्यता: सितंबर 1923 (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा)।
छत्तीसगढ़ में स्वराज दल का प्रभाव
- छत्तीसगढ़ (मध्यप्रांत) में 1923 में सेठ गोविंद दास की अध्यक्षता में स्वराज दल का गठन हुआ। ई. राघवेन्द्र राव छत्तीसगढ़ में स्वराज दल के प्रमुख नेता थे। [CGVyapam (ESC)2022] [CG PSC(AP)2016]
छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेता
| क्रमांक | स्थान | नेता | परीक्षा संदर्भ |
| 1. | रायपुर | पं. रविशंकर शुक्ल, शिवदास डागा | [CGPSC(EAP)2016,(Engg.Set-1)2015],[CGVyapam (FNDM)2021] |
| 2. | बिलासपुर | ई. राघवेन्द्र राव, बैरिस्टर छेदीलाल | [CG Vyapam SI (Mains)2023] [CG PSC(Eng.Set-1)2015,2017] |
| 3. | दुर्ग | घनश्याम सिंह गुप्त | [CG PSC(ABEO)2013] |
| 4. | राजनांदगांव | ठा. प्यारेलाल सिंह |
परिणाम
- नवम्बर 1923 के मध्यप्रांत व बरार प्रांतीय चुनाव में स्वराज दल को 70 में से 42 सीटें प्राप्त हुईं, जिससे उन्हें विधान परिषद् में पूर्ण बहुमत मिला।
- निर्वाचित सदस्य: छत्तीसगढ़ से पं. रविशंकर शुक्ल, ई. राघवेन्द्र राव, और घनश्याम सिंह गुप्त स्वराज पार्टी से निर्वाचित हुए।
- मध्यप्रांत विधान परिषद् (1924-26) में स्वराज दल के सदस्य:
- पं. रविशंकर शुक्ल
- घनश्याम सिंह गुप्त
- ई. राघवेन्द्र राव
- ठाकुर छेदीलाल
- 💡 महत्वपूर्ण तथ्य: पं. सुंदरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ में स्वराज पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल नहीं थे। [CGVyapam (FNDM) 2021]
🤝 सेवा समिति का योगदान
- स्वराज पार्टी की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के कार्यों में सेवा समिति नामक एक संगठन ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
- प्रमुख सक्रिय सदस्य: इस समिति के सक्रिय सदस्यों में घनश्याम सिंह गुप्त, खूबचंद बघेल, और सर्वदत्त बाजपेयी जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।
🚩 झंडा सत्याग्रह – 1923
- पृष्ठभूमि: कांग्रेस द्वारा ‘चरखा युक्त तिरंगे’ को राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक चिन्ह बनाया गया था और पूरे देश में इसका प्रचार किया जा रहा था।
प्रथम चरण: जबलपुर
- तिथि: 11 मार्च, 1923
- स्थान: जबलपुर टाउन हाल
- घटनाक्रम: इस सत्याग्रह की शुरुआत तब हुई जब जबलपुर के टाउन हाल (नगर पालिका भवन) पर तिरंगा फहराया गया। अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर ने इसे उतारने का आदेश दिया, लेकिन कांग्रेस सदस्यों ने इनकार कर दिया। इसके बाद, पुलिस ने झंडे को उतारकर पैरों से कुचल दिया, जिससे कांग्रेसजनों में भारी आक्रोश फैल गया और सत्याग्रह ने जोर पकड़ लिया।
द्वितीय चरण: बिलासपुर
- तिथि: 31 मार्च, 1923
- स्थान: बिलासपुर [CG PSC (Pre) 2020]
- अवसर: प्रांतीय राजपूत सम्मेलन के दौरान।
- विशेष: बिलासपुर के स्थानीय टाउनहाल में झंडा फहराया गया था। इसी के साथ, छत्तीसगढ़ राज्य में 1923 में झंडा सत्याग्रह का आरंभ बिलासपुर से हुआ। [CG Vyapam (AGDO) 2021]
नागपुर झंडा सत्याग्रह
- तिथि: 13 अप्रैल, 1923
- नेतृत्वकर्ता: जमनालाल बजाज
- विशेष: राष्ट्रीय झंडा सत्याग्रह ने नागपुर में एक वृहद रूप धारण किया, जो 13 अप्रैल, 1923 को जमनालाल बजाज के नेतृत्व में शुरू हुआ। इस सत्याग्रह में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग से कई सत्याग्रहियों ने भाग लिया। [CG Vyapam (ESC) 2017]
छत्तीसगढ़ की सहभागिता
- सर्वाधिक भागीदारी: रायपुर जिले की धमतरी तहसील से सबसे अधिक (लगभग 100) लोगों ने इस सत्याग्रह में हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व पं. सुन्दरलाल शर्मा जी ने किया। [CG PSC (ADP) 2019]
- शामिल प्रमुख सदस्य: श्यामलाल सोम, परदेशी राम ध्रुव, विशम्भरलाल पटेल, पंचमसिंह नेताम, कन्हईसिंह ध्रुव, समारूराम, आदि।
- गिरफ्तार आंदोलनकारी: अवधराम गोंड़, कल्याण सिंह, और कन्हैयालाल ताम्रकार (राजिम) जैसे आंदोलनकारियों को तीन से छह माह के कठिन कारावास की सजा दी गई।
- सत्याग्रह का अंत: 18 अगस्त, 1923 को विट्ठल भाई पटेल और तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी फ्राकस्लाई के बीच हुए एक समझौते के बाद यह सत्याग्रह समाप्त हुआ और बंदी बनाए गए सभी सत्याग्रहियों को रिहा कर दिया गया।
- प्रश्न: छत्तीसगढ़ के निम्नलिखित में से किन व्यक्तियों ने अप्रैल 1923 में नागपुर में हुए ‘झण्डा सत्याग्रह’ में भाग लिया था? [CG PSC (AP) 2016]
- श्यामलाल सोम
- परदेशी राम ध्रुव
- नारायणराव गनोदवाले
- विशम्भरलाल पटेल
- उत्तर: (C) 1, 2, 4
🏛️ कांग्रेस का काकीनाड़ा अधिवेशन – 1923
- समय: दिसम्बर 1923
- अध्यक्ष: मौलाना मोहम्मद अली
- स्थान: काकीनाड़ा (आंध्रप्रदेश) [CG Vyapam (LOI) 2017]
- यात्रा का नेतृत्व: नारायणराव मेघावाले
- अन्य सदस्य: पं. सुन्दरलाल शर्मा, रामजी लाल सोनी, गिरधारी लाल तिवारी, श्यामलाल गुप्त, श्यामलाल सोम आदि। [CG PSC(TSI)2019]
- विशेष:
- इस अधिवेशन में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि बस्तर के रास्ते से पैदल आंध्रप्रदेश गए। [CG PSC (Pre)2014]
- इस पैदल यात्रा का मुख्य उद्देश्य बस्तर क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना का संचार करना और अस्पृश्यता निवारण को बढ़ावा देना था।
- धमतरी में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में नत्थूजी जगताप एवं बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव ने इस दल को तिलक लगाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया।
अन्य प्रमुख घटनाक्रम (1924)
- दुर्ग जिला राजनीतिक परिषद् का अधिवेशन:
- तिथि: 16 मार्च, 1924
- अध्यक्ष: पं. सुन्दरलाल शर्मा
- विशेष सहयोग: घनश्याम सिंह गुप्त
- क्रांतिकारी घटना – रायपुर (1924): दुर्ग के एक युवक, शेख मुन्तजीमुद्दीन, ने रायपुर कचहरी परिसर में स्थित जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर कालिख पोत दी।
- साम्प्रदायिक दंगों का प्रभाव – धमतरी (3 अक्टूबर, 1924): धमतरी में मस्जिद के सामने बाजा बजाने को लेकर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प हो गई, जिसे पं. सुन्दरलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में शांतिपूर्ण समझौते से सुलझा लिया गया।
- प्रांतीय खिलाफत सम्मेलन – रायपुर (1924):
- तिथि: 18 नवम्बर, 1924
- अध्यक्ष: मौलाना शौकत अली
- विशेष: इस सम्मेलन में दोनों सम्प्रदायों के लगभग 2000 लोगों ने हिस्सा लिया।
🧵 चरखा संघ (1924)
- स्थान: मुंगेली
- संस्थापक: गजाधर साव
- उद्देश्य: खादी का प्रचार करने और स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने हेतु स्थानीय स्तर पर एक संघ का निर्माण करना।
🙏 पंडित सुन्दरलाल शर्मा जी का अछूतोद्धार कार्यक्रम
जनेऊ कार्यक्रम – 1918
- नेतृत्वकर्ता: पं. सुन्दरलाल शर्मा
- स्थान: मुंगेली
- सहयोगी: छबिराम चौबे, ठा. प्यारेलाल एवं घनश्याम सिंह गुप्त।
- विशेष: इस आंदोलन में छबिराम चौबे ने अस्पृश्यता के विरोध में 21 दिनों का उपवास रखा था।
बेलगांव अधिवेशन – 1924
- अध्यक्ष: महात्मा गांधी
- प्रमुख लक्ष्य: खादी प्रचार, हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं अछूतोद्धार।
- शामिल नेता: पं. सुन्दरलाल शर्मा, महंत लक्ष्मीनारायण, नत्थूजी जगताप आदि।
अछूतोद्धार कार्यक्रम – 1925
- तिथि: 23 नवम्बर, 1925
- स्थान: राजिम
- नेतृत्वकर्ता: पं. सुंदरलाल शर्मा
- घटनाक्रम:
- पं. सुन्दरलाल शर्मा ने अछूतों को मंदिर में प्रवेश दिलाने की योजना बनाई, जिसके लिए राजीवलोचन मंदिर को चुना गया।
- किंतु, मंदिर में प्रवेश के समय बंदूकधारी पुलिस और कट्टर सनातनी हिन्दुओं की उपस्थिति को देखते हुए, उन्होंने राजीवलोचन मंदिर के स्थान पर पास के राम मंदिर में प्रवेश कराया।
- विशेष: उनके इस साहसी कार्य के लिए गांधीजी ने अपने द्वितीय छत्तीसगढ़ आगमन के दौरान पं. सुन्दरलाल शर्मा को “गुरु” की उपाधि दी।
- 1926 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में बालाकृष्ण शिवराम मुंजे चुने गए। [CSPHCL-2019]
- नोट: इससे पहले, सुंदरलाल शर्मा जी ने अछूतोद्धार कार्यक्रम का पहला प्रयास 1920 में रायपुर की पुरानी बस्ती के बजरंग मंदिर में किया था।
🏛️ स्वतंत्र दल का गठन
- स्थापना वर्ष: 1925
- अध्यक्ष: ई. राघवेन्द्र राव
- अन्य सदस्य: पं. रविशंकर शुक्ल, ठा. छेदीलाल
- गठन का कारण: 1925 में चितरंजन दास की मृत्यु के बाद, छत्तीसगढ़ में स्वराज दल में फूट पड़ गई, जिससे वह बिखर गया। इसी के परिणामस्वरूप, स्वतंत्र दल का गठन हुआ।
- राजनीतिक सफलता:
- 1926 के चुनावों में, इस दल से राव साहब और बैरिस्टर छेदीलाल ने विजय प्राप्त की।
- 1926 में मध्यप्रांत सरकार में राव साहब को शिक्षामंत्री बनाया गया।
- 1927 में, ई. राघवेंद्र राव ने शिक्षामंत्री के रूप में साइमन कमीशन का विरोध किया। [CGPSC(SEE) 2022]
- फरवरी 1927 में, गवर्नर ने ई. राघवेन्द्र राव को मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री और रामराव देशमुख को स्थानीय शासन मंत्री के रूप में नियुक्त किया। [CG PSC (Pre) 2022]
संघर्ष: रायपुर जिला परिषद् (1927 से 1937)
- राष्ट्रवादी भावना: रायपुर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल शुरू से ही राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित थी, जिस कारण इसका ब्रिटिश सरकार के साथ अक्सर टकराव होता रहता था।
- अध्यक्षता: 1927 से 1930 तक पं. रविशंकर शुक्ल काउंसिल के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा और उन्होंने जेल से ही काउंसिल का चुनाव लड़ा। [CG PSC(Pre)2019]
- आरोप: पं. शुक्ल पर यह आरोप था कि वे इस संस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों को शासन-विरोधी गतिविधियों में शामिल करते थे और उन्हें विभिन्न धरनों और आंदोलनों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे।
- गतिविधियाँ: काउंसिल द्वारा संचालित स्कूलों में झंडा-वंदन जैसे राष्ट्रवादी कार्यक्रम होते थे।
- ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया:
- काउंसिल की राष्ट्रवादी गतिविधियों से चिढ़कर ब्रिटिश सरकार ने 26 अप्रैल, 1930 को इसे भंग कर दिया।
- चुनावों में, पं. रविशंकर शुक्ल जेल से ही दोबारा अध्यक्ष चुने गए।
- अंततः, 11 नवंबर, 1930 को सरकार ने जिला काउंसिल को तीन वर्षों के लिए पूरी तरह भंग कर दिया। (आयोग द्वारा 12 जून, 1930 की तिथि को सही माना गया) [CG PSC(ARTO)2022]
- पुनः संचालन: रायपुर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल 1930 से 1934 तक स्थगित रही। 8 मार्च, 1934 को शासन ने इसका प्रबंधन पुनः शुक्ल जी को सौंप दिया।
- साहित्यिक योगदान: रायपुर जिला परिषद् द्वारा 1935 में ‘उत्थान’ नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया। [CG Vyapam (MACC)2017]
youth league ka gathan
- वर्ष: 1928
- स्थान: रायपुर [CG PSC(ARO)2022]
- उद्देश्य: राष्ट्रीय आंदोलन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
- नेतृत्वकर्ता: ठाकुर प्यारेलाल सिंह, मौलाना अब्दुल रऊफ और यतियतन लाल जैन। [CG PSC(ITI Pri.)2022]
⚫ साइमन कमीशन का विरोध (1928)
- प्रस्ताव: मध्य प्रांत विधान परिषद् में बृजलाल नारायणी ने साइमन कमीशन के विरोध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
- समर्थन (छत्तीसगढ़): घनश्याम सिंह गुप्त, महंत लक्ष्मीनारायण दास।
- विरोध (छत्तीसगढ़): ठाकुर छेदीलाल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने सभाओं के माध्यम से इस कमीशन का पुरजोर विरोध किया।
🚫 प्रतिबंधित साहित्य का पठन
पुस्तक: ‘भारत में अंग्रेजी राज’
- लेखक: ‘तपस्वी’ राय बहादुर सुंदरलाल (खतौली, मुजफ्फरनगर के निवासी)
- प्रकाशन: 18 मार्च, 1929
- जब्ती: 22 मार्च को 2000 में से 300 पुस्तकें जब्त कर ली गईं।
- विवरण: गांधीजी ने इस पुस्तक का वर्णन ‘यंग इंडिया’ में किया था।
विभिन्न स्थानों पर पाठन:
- जबलपुर का टाउनहाल (30 अप्रैल, 1930):
- पाठन कार्य: सेठ गोविंद दास, पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, माखन लाल चतुर्वेदी, और पं. रविशंकर शुक्ल।
- कार्यवाही: सभी नेताओं को बंदी बना लिया गया।
- मुंगेली:
- पाठन कार्य: क्रांतिकुमार भारतीय ने गोलबाजार में इस पुस्तक का पाठन किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
- भाटापारा:
- पाठन कार्य: मुंशी इस्माईल खाँ और कौसलेन्द्र दास ने ‘चांद का फांसी अंक’ नामक प्रतिबंधित साहित्य का पाठन किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
🌊 सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) का छत्तीसगढ़ पर प्रभाव (प्रथम चरण)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 1929 में महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार के समक्ष रखी गई 11-सूत्रीय मांगों को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने खारिज कर दिया था। इस उपेक्षा के जवाब में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में पूर्ण स्वराज का लक्ष्य निर्धारित करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का सूत्रपात गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से अपनी प्रसिद्ध दांडी यात्रा के साथ किया। 24 दिनों की पदयात्रा के बाद, 6 अप्रैल, 1930 को उन्होंने दांडी पहुँचकर नमक कानून का उल्लंघन किया। इस आंदोलन की लहर से हमारा छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं रहा और यहाँ के स्थानीय नेताओं ने विभिन्न जिलों में आंदोलन की बागडोर संभाली।
कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन, 1929: छत्तीसगढ़ की भूमिका
- अध्यक्षता: पंडित जवाहर लाल नेहरू
- स्थान: लाहौर (रावी नदी के तट पर)
- छत्तीसगढ़ से भागीदारी: इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए लगभग 50 कार्यकर्ताओं और नेताओं का एक दल शामिल हुआ। प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल थे:
- रायपुर: पं. सुन्दरलाल शर्मा, नारायणराव मेघावाले, नत्थूजी जगताप
- दुर्ग: ठाकुर प्यारेलाल सिंह, घनश्याम सिंह गुप्त
- बिलासपुर: क्रांतिकुमार भारतीय, गजाधर साव, डॉ. शिवदुलारे मिश्र, अमर सिंह सहगल
प्रतिज्ञा दिवस का आयोजन, 1930
- तिथि: 26 जनवरी, 1930
- कार्यक्रम: सम्पूर्ण भारत में ‘प्रतिज्ञा दिवस’ मनाया गया। इसी के तहत, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, और जांजगीर-चांपा में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा ली गई।
जबलपुर युद्ध परिषद्, 1930
- गठन: 30 मार्च, 1930
- स्थान: जबलपुर
- सदस्य: इस परिषद् में मध्यप्रांत के प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया, जिनमें छत्तीसगढ़ से पं. रविशंकर शुक्ल और घनश्याम सिंह गुप्त प्रमुख थे।
(A) रायपुर में आंदोलन का संचालन
रायपुर जिला कांग्रेस की बैठक
- तिथि: 3 फरवरी, 1930
- अध्यक्षता: पं. रविशंकर शुक्ल
- शामिल नेता: वामनराव लाखे, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, यतियतन लाल, महंत लक्ष्मीनारायण दास, और अन्य प्रमुख कांग्रेसी नेता।
पूर्ण स्वराज सप्ताह का आयोजन (6-13 अप्रैल, 1930)
- अवधि: 6 अप्रैल से 13 अप्रैल 1930 तक मनाया गया। [CG PSC(EAP)2016]
- दैनिक कार्यक्रम:
- दिवस 1: झण्डा दिवस (राष्ट्रीय ध्वज फहराना)
- दिवस 2: बहिष्कार दिवस (विदेशी वस्तुओं का त्याग)
- दिवस 3: पिकेटिंग (धरना) दिवस (शराब की दुकानों पर प्रदर्शन)
- दिवस 4: गांधी दिवस (गांधीजी के विचारों का प्रचार)
- दिवस 5: महिला दिवस (आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी)
- दिवस 6: गढ़वाल दिवस (गढ़वाल के सैनिकों की वीरता का स्मरण)
- दिवस 7: राजबंदी दिवस (राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग)
- नेतृत्व: पं. रविशंकर शुक्ल
- सहयोग: सेठ लक्ष्मीनारायण दास, ठा. प्यारेलाल सिंह।
रायपुर में नमक कानून का उल्लंघन
- तिथि: 8 अप्रैल, 1930
- नेतृत्व: पं. रविशंकर शुक्ल (उनके सहयोगी ठा. प्यारेलाल सिंह और महंत लक्ष्मीनारायण थे)।
- घटना: पं. रविशंकर शुक्ल ने प्रतीकात्मक रूप से नमक बनाकर छत्तीसगढ़ में सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की।
महाकोशल राजनीतिक परिषद् का सम्मेलन (15 अप्रैल, 1930)
- स्थान: रजबंधा, रायपुर
- अध्यक्षता: सेठ गोविंद दास
- कार्यक्रम: इस सम्मेलन में पं. रविशंकर शुक्ल ने हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और कास्टिक सोडा (NaOH) का उपयोग करके नमक बनाया, जो ब्रिटिश नमक कानून का प्रतीकात्मक उल्लंघन था। इस कार्य में उनके सहयोगी सेठ गोविंद दास और द्वारका प्रसाद मिश्र थे। [CGPSC(ARTO)2017]
- नोट: यह सम्मेलन पहले पं. नेहरू की अध्यक्षता में 13 अप्रैल, 1930 को होना था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी के कारण यह दो दिन विलंब से हुआ।
- गिरफ्तारी: आंदोलन के प्रचार के दौरान पं. रविशंकर शुक्ल को 28 अप्रैल, 1930 को गोंदिया स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया और जबलपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया।
किसानों का आंदोलन: ‘पट्टा मत लो’ और ‘कर न दो’ (1930)
| आंदोलन | स्थान | नेतृत्वकर्ता |
| 🤠 पट्टा मत लो आंदोलन | रायपुर | ठा. प्यारे लाल सिंह |
| 💵 कर न दो आंदोलन | बिलासपुर | गजाधर साव |
- विशेष: ठाकुर प्यारेलाल सिंह को 25 जून 1930 को गिरफ्तार कर एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
छत्तीसगढ़ के पाँच पांडव: आंदोलन के संचालक
रायपुर में सविनय अवज्ञा आंदोलन को सुसंगठित और चरणबद्ध तरीके से संचालित करने का श्रेय पाँच प्रमुख नेताओं को दिया जाता है। उनके योगदान और भूमिका के आधार पर, उन्हें सम्मानपूर्वक ‘पाँच पांडव’ की संज्ञा दी गई:
- युधिष्ठिर (मार्गदर्शक): वामनराव लाखे
- भीम (शक्ति): लक्ष्मी नारायण दास
- अर्जुन (योद्धा): ठाकुर प्यारेलाल [CG PSC (PDD)2018]
- नकुल (रणनीतिकार): मौलाना अब्दुल रऊफ (उनका उपनाम ‘महबी’ था)
- सहदेव (सहयोगी): शिवदास डागा
(B) धमतरी में आंदोलन की गूँज
नेतृत्व और प्रेरणा
- नेतृत्वकर्ता: नारायणराव मेघावाले
- विशेष: धमतरी में आंदोलन की गतिविधियाँ काफी हद तक पं. रविशंकर शुक्ल के क्रियाकलापों से प्रेरित थीं। नारायणराव मेघावाले ने भी रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से नमक बनाकर ब्रिटिश कानून का विरोध किया।
सत्याग्रह आश्रम की स्थापना
- स्थान: धमतरी (स्थानीय नेता नत्थूजी जगताप के निवास पर)। [CG PSC (PDD)2019]
- तिथि: 1 मई, 1930।
- संस्थापक: पंडित सुन्दरलाल शर्मा।
- उद्देश्य: सत्याग्रह में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों को व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान करना।
- सामाजिक सुधार: इस आंदोलन के दौरान, धमतरी तहसील में मद्यपान को सामाजिक बहिष्कार से जोड़कर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार का प्रयास किया गया।
(C) बिलासपुर में आंदोलन का प्रसार
आंदोलन की शुरुआत
- प्रारंभिक नेतृत्व: दिवाकर कार्लीकर ने बिलासपुर में आंदोलन का बिगुल फूंका। उन्होंने शराब की दुकानों के सामने धरना देकर आंदोलन की शुरुआत की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
- गति प्रदान करना: कार्लीकर की गिरफ्तारी के बाद, वासुदेव देवरस और ठाकुर छेदीलाल ने आंदोलन को आगे बढ़ाया।
शनिचरी पड़ाव की ऐतिहासिक सभा
- तिथि: 17 अप्रैल, 1930
- प्रमुख वक्ता: सेठ गोविंद दास
- घटनाक्रम: सभा के समापन पर, ‘सलाइन वॉटर’ (खारे पानी) से नमक बनाकर नमक कानून की सार्वजनिक रूप से अवज्ञा की गई।
- अन्य प्रमुख सदस्य: इस सभा में बैरिस्टर छेदीलाल, शिवदुलारे मिश्र, अमर सिंह सहगल, और यदुनंदन प्रसाद जैसे प्रमुख नेता उपस्थित थे।
जिला राजनीतिक परिषद्, 1930
- स्थान: टाउनहॉल, बिलासपुर
- अध्यक्षता: बैरिस्टर छेदीलाल
- मुख्य निर्णय: इस बैठक में तिरंगा झंडा फहराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
- नोट: 17 मई, 1930 को ठाकुर प्यारेलाल सिंह की अध्यक्षता में जिला परिषद् का गठन किया गया, और बैरिस्टर छेदीलाल के अथक प्रयासों से तीन दिनों के बाद बिलासपुर के टाउनहॉल पर तिरंगा फहराया गया। [CG Vyapam (DEAG)2018]
युवाओं की भूमिका
- 18 मई, 1930 को, युवा नेता क्रांतिकुमार भारतीय के नेतृत्व में बिलासपुर में एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसने आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया।
(D) मुंगेली में आंदोलन
- आंदोलनकारी: रामगोपाल तिवारी, कालीचरण शुक्ल, गजाधर साव, बलदेव और मानिकलाल।
- कार्यक्रम: मुंगेली में नमक बनाकर आंदोलन की शुरुआत की गई और मादक पदार्थों की दुकानों के सामने धरना दिया गया।
- नमक कानून का उल्लंघन: रामगोपाल तिवारी एवं कालीचरण शुक्ल ने नाले के पानी और मिट्टी से नमक बनाकर नमक कानून को तोड़ा।
अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ (बिलासपुर)
- शासकीय स्कूल में झण्डा फहराना:
- तिथि: 4 अगस्त, 1930
- घटना: सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान, क्रांतिकुमार भारतीय ने बिलासपुर के शासकीय हाई स्कूल पर तिरंगा झंडा फहराया। यह झंडा तीन दिनों तक लहराता रहा, और जब पुलिस ने इसे उतारा, तो छात्रों ने इसका पुरजोर विरोध किया। [CGPSC(ITI Prin.)2016] [CG PSC(ADJ)2018]
- सजा: इस साहसिक कार्य के लिए कालीचरण नामक व्यक्ति को कारावास की सजा मिली। [CG PSC (EAP)2016]
- बिलासपुर में वानरसेना का गठन:
- वर्ष: 1928 [CG PSC (AP)2019] [CG Vyapam (FI)2017]
- संस्थापक: वासुदेव देवरस
- नोट: बिलासपुर की वानरसेना का गठन सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण में हुआ, जबकि रायपुर में वानरसेना (संस्थापक: बलीराम आजाद, संचालक: यतियतन लाल) का गठन आंदोलन के द्वितीय चरण (1932) में हुआ था।
- राष्ट्रीय सप्ताह और नमक कानून का उल्लंघन:
- 18 से 23 अगस्त 1930 तक बिलासपुर में राष्ट्रीय सप्ताह मनाया गया।
- इस दौरान ठाकुर छेदीलाल, शिवदुलारे मिश्र, दिवाकर कार्लीकर, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, और अमर सिंह सहगल ने सांकेतिक रूप से नमक बनाकर कानून का उल्लंघन किया।
(E) दुर्ग में आंदोलन की गतिविधियाँ
आंदोलन का आरंभ
- प्रारंभ: 3 अगस्त, 1930
- आंदोलनकारी: आंदोलन का नेतृत्व नरसिंह प्रसाद अग्रवाल, रामचंद्र देशमुख, वी. वाय. तामस्कर, और रत्नाकर झा जैसे प्रमुख नेताओं ने किया।
- कार्यक्रम: दुर्ग में भी नमक बनाकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की गई।
संस्थाओं की स्थापना
इस आंदोलन के दौरान दुर्ग में निम्नलिखित दो महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना हुई:
1. किसान सभा/परिषद (1930)
- स्थान: दुर्ग
- संस्थापक: उदयराम और नरसिंह प्रसाद अग्रवाल
2. विद्यार्थी कांग्रेस (1930)
- स्थान: दुर्ग
- संस्थापक: गंगाधर प्रसाद चौबे, चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय, और गणेश सिंगरौल
- नोट: सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार होने वाले प्रमुख नेताओं में पं. रविशंकर शुक्ल, वामनराव लाखे, शिवदास डागा, अब्दुल रऊफ, और ठाकुर प्यारेलाल सिंह शामिल थे।