छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -2

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  छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -1

  छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -3

  छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहास भाग -4

भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी


भारत में 19वीं सदी के दौरान राष्ट्रीय भावना को जगाने में ब्रह्म समाज और आर्य समाज ने एक विशेष भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ के निवासियों में राष्ट्रवाद और राजनीतिक जागरूकता का प्रसार करने के उद्देश्य से 1870 से 1900 के बीच कई संस्थाओं की स्थापना हुई।


🌱 अकाल निवारण सभा

अधिवेशन का विवरण


सूरत अधिवेशन से लौटने के बाद पं. सुन्दरलाल शर्मा और नारायणराव मेघावाले ने छत्तीसगढ़ में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने के लिए धमतरी, राजिम, और महासमुंद जैसे स्थानों पर स्वदेशी वस्तुओं की दुकानें खोलीं।




🏛️ प्रांतीय राजनीतिक परिषद का 5वाँ अधिवेशन – 1916

होमरूल आंदोलन – 1916

🤝 छत्तीसगढ़ में होमरूल लीग की क्षेत्रीय शाखा की स्थापना – 1917

क्षेत्रीय नेतृत्व और सहयोगी

📢 होमरूल लीग का क्षेत्रीय सम्मेलन – 1918


📜 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व – 1918

भारत मंत्री मॉन्टेग्यू का मध्यप्रांत दौरा – 1918

⚫️ रोलेट एक्ट का विरोध – 1919

📚 मध्यप्रांत हिंदी साहित्य सम्मेलन – 1919

🌾 राजिम किसान मजदूर सभा – 1920

🤝 खिलाफत आंदोलन – 1920


🗺️ खिलाफत आंदोलन का विस्तार

🎤 जिला राजनीतिक सम्मेलन – 1920


💧 कंडेल नहर सत्याग्रह – 1920


🙏 महात्मा गांधी का प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन – 20 दिसम्बर 1920

कार्यक्रम का विवरण:

  1. रायपुर में कार्यक्रम:
    • 20 दिसम्बर 1920: गांधीजी ने रायपुर के गांधी चौक पर जनसभा को संबोधित किया और असहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
    • 21 दिसम्बर 1920: धमतरी से लौटकर, उन्होंने रायपुर के ब्राम्हणपारा में स्थित आनंद समाज वाचनालय में विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित किया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
    • तिलक स्वराज फण्ड: इस यात्रा के दौरान महिलाओं ने ‘तिलक स्वराज फण्ड’ हेतु लगभग ₹2000 कीमत के आभूषण दान किए। [CG Vyapam (ECS) 2017, (TET)2019] [CG PSC(Lib.)2017]
    • कांग्रेस कमेटी का गठन: इसी समय, गांधीजी के मार्गदर्शन में रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी का चुनाव हुआ, जिसमें बैरिस्टर सी. एम. ठक्कर को प्रथम अध्यक्ष चुना गया।
  2. धमतरी प्रवास:
    • 21 दिसंबर 1920 को गांधीजी ने धमतरी के मकई चौक पर स्थित जानी हुसैन बाड़ा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। [CG PSC (Lib.)2017] [CG Vyapam (MST)2021]
    • जब गांधीजी सभा स्थल पर पहुँचे, तो भारी भीड़ के कारण गुरुर के एक व्यापारी ‘उमर सिंह काछी’ ने उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर मंच तक पहुँचाया।
  3. कुरूद में संबोधन:
    • धमतरी से रायपुर वापसी के दौरान उन्होंने कुरूद गाँव में भी उत्साहित जनता को संबोधित किया।

📊 विभिन्न कांग्रेस अधिवेशनों में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि (सारणी)


✊ मिल मजदूर यूनियन

🚩 लाल झण्डा संघ


🏭 BNC मिल मजदूर आंदोलन: तीन प्रमुख चरण

1. प्रथम आंदोलन (अप्रैल 1920)

2. द्वितीय आंदोलन (1924)

3. तृतीय आंदोलन (फरवरी 1937)


असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)

1. कांग्रेस का विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920, कलकत्ता)

2. कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920, नागपुर)

असहयोग आंदोलन में छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम: वकालत का त्याग

असहयोग आंदोलन के समर्थन में, छत्तीसगढ़ के कई प्रतिष्ठित राजनेताओं ने अपनी वकालत का त्याग कर दिया, जिसका विवरण इस प्रकार है:

राष्ट्रीय पंचायतों का गठन

वकीलों द्वारा वकालत के त्याग के कारण ठप पड़ी न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राष्ट्रीय पंचायतों की स्थापना की गई।


🎖️ उपाधियों और शासकीय सेवाओं का त्याग

असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के कई राजनेताओं ने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई उपाधियों और शासकीय नौकरियों का त्याग कर दिया।

काउंसिल और जिला परिषद चुनावों का बहिष्कार (1921)

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी का प्रचार

1921 में खादी को बढ़ावा देने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए छत्तीसगढ़ में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए:


धमतरी में खादी प्रचार

बिलासपुर में वस्त्रालय दुकान

  1. खादी भण्डार: देवतादीन तिवारी
  2. स्वदेशी स्टोर: जमुना प्रसाद वर्मा
  3. स्वदेशी दुकान: कैलाश सक्सेना

विशेष कार्यक्रम

🍷 मद्य निषेध कार्यक्रम

इस आंदोलन के समर्थन में विभिन्न शहरों में शराब की दुकानों के सामने धरना दिया गया।


🎓 स्कूल-कॉलेज का बहिष्कार और राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना

रायपुर में बहिष्कार का प्रभाव

बिलासपुर में बहिष्कार का प्रभाव


🏫 राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना

सरकारी स्कूलों के बहिष्कार के बाद छात्रों की शिक्षा को जारी रखने के लिए, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में राष्ट्रीय विद्यालय स्थापित किए गए। मध्यप्रांत में स्थापित इन विद्यालयों का पाठ्यक्रम जबलपुर राष्ट्रीय शिक्षा समिति द्वारा तैयार किया गया था। [CG PSC(ADPE&S)2019][CG PSC(AP)2016]

1. रायपुर में राष्ट्रीय विद्यालय

2. धमतरी में राष्ट्रीय विद्यालय

3. बिलासपुर में राष्ट्रीय विद्यालय

4. राजनांदगांव में राष्ट्रीय विद्यालय


🏛️ आश्रमों की स्थापना

असहयोग आंदोलन को गति देने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न आश्रमों की स्थापना की गई।

🤝 अछूतोद्धार कार्यक्रम

🐄 गो-वध निषेध कार्यक्रम


⛓️ माखनलाल चतुर्वेदी की गिरफ्तारी / शनिचरी पड़ाव

👑 प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का विरोध

🇮🇳 राष्ट्रीय नेताओं का छत्तीसगढ़ आगमन – 1921

1921 में असहयोग आंदोलन के समर्थन और प्रचार हेतु कई राष्ट्रीय नेताओं ने छत्तीसगढ़ का दौरा किया।

🌳 सिहावा-नगरी जंगल सत्याग्रह

🏛️ मध्य प्रांतीय कांग्रेस कमेटी की विशेष बैठक

📜 हिंदी प्रांतीय समिति की बैठक

📢 रायपुर राजनीतिक परिषद् का अधिवेशन


⛓️ पं. सुंदरलाल शर्मा की गिरफ्तारी और जेल पत्रिका का संपादन

🇮🇳 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गया अधिवेशन – 1922

🚫 कर न दो आंदोलन – 1922

📰 राष्ट्रीय आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका


स्वराज दल और छत्तीसगढ़

स्वराज दल का गठन

छत्तीसगढ़ में स्वराज दल का प्रभाव

छत्तीसगढ़ के प्रमुख नेता

परिणाम

🤝 सेवा समिति का योगदान

🚩 झंडा सत्याग्रह – 1923

प्रथम चरण: जबलपुर

द्वितीय चरण: बिलासपुर

नागपुर झंडा सत्याग्रह

छत्तीसगढ़ की सहभागिता


🏛️ कांग्रेस का काकीनाड़ा अधिवेशन – 1923

अन्य प्रमुख घटनाक्रम (1924)


🧵 चरखा संघ (1924)

🙏 पंडित सुन्दरलाल शर्मा जी का अछूतोद्धार कार्यक्रम

जनेऊ कार्यक्रम – 1918

बेलगांव अधिवेशन – 1924

अछूतोद्धार कार्यक्रम – 1925


🏛️ स्वतंत्र दल का गठन


संघर्ष: रायपुर जिला परिषद् (1927 से 1937)


youth league ka gathan

⚫ साइमन कमीशन का विरोध (1928)

🚫 प्रतिबंधित साहित्य का पठन

पुस्तक: ‘भारत में अंग्रेजी राज’

विभिन्न स्थानों पर पाठन:

  1. जबलपुर का टाउनहाल (30 अप्रैल, 1930):
    • पाठन कार्य: सेठ गोविंद दास, पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, माखन लाल चतुर्वेदी, और पं. रविशंकर शुक्ल।
    • कार्यवाही: सभी नेताओं को बंदी बना लिया गया।
  2. मुंगेली:
    • पाठन कार्य: क्रांतिकुमार भारतीय ने गोलबाजार में इस पुस्तक का पाठन किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
  3. भाटापारा:
    • पाठन कार्य: मुंशी इस्माईल खाँ और कौसलेन्द्र दास ने ‘चांद का फांसी अंक’ नामक प्रतिबंधित साहित्य का पाठन किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

🌊 सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) का छत्तीसगढ़ पर प्रभाव (प्रथम चरण)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वर्ष 1929 में महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार के समक्ष रखी गई 11-सूत्रीय मांगों को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने खारिज कर दिया था। इस उपेक्षा के जवाब में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में पूर्ण स्वराज का लक्ष्य निर्धारित करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का सूत्रपात गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से अपनी प्रसिद्ध दांडी यात्रा के साथ किया। 24 दिनों की पदयात्रा के बाद, 6 अप्रैल, 1930 को उन्होंने दांडी पहुँचकर नमक कानून का उल्लंघन किया। इस आंदोलन की लहर से हमारा छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं रहा और यहाँ के स्थानीय नेताओं ने विभिन्न जिलों में आंदोलन की बागडोर संभाली।


कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन, 1929: छत्तीसगढ़ की भूमिका

प्रतिज्ञा दिवस का आयोजन, 1930

जबलपुर युद्ध परिषद्, 1930


(A) रायपुर में आंदोलन का संचालन

रायपुर जिला कांग्रेस की बैठक

पूर्ण स्वराज सप्ताह का आयोजन (6-13 अप्रैल, 1930)

रायपुर में नमक कानून का उल्लंघन

महाकोशल राजनीतिक परिषद् का सम्मेलन (15 अप्रैल, 1930)

किसानों का आंदोलन: ‘पट्टा मत लो’ और ‘कर न दो’ (1930)

छत्तीसगढ़ के पाँच पांडव: आंदोलन के संचालक

रायपुर में सविनय अवज्ञा आंदोलन को सुसंगठित और चरणबद्ध तरीके से संचालित करने का श्रेय पाँच प्रमुख नेताओं को दिया जाता है। उनके योगदान और भूमिका के आधार पर, उन्हें सम्मानपूर्वक ‘पाँच पांडव’ की संज्ञा दी गई:

  1. युधिष्ठिर (मार्गदर्शक): वामनराव लाखे
  2. भीम (शक्ति): लक्ष्मी नारायण दास
  3. अर्जुन (योद्धा): ठाकुर प्यारेलाल [CG PSC (PDD)2018]
  4. नकुल (रणनीतिकार): मौलाना अब्दुल रऊफ (उनका उपनाम ‘महबी’ था)
  5. सहदेव (सहयोगी): शिवदास डागा

(B) धमतरी में आंदोलन की गूँज

नेतृत्व और प्रेरणा

सत्याग्रह आश्रम की स्थापना


(C) बिलासपुर में आंदोलन का प्रसार

आंदोलन की शुरुआत

शनिचरी पड़ाव की ऐतिहासिक सभा

जिला राजनीतिक परिषद्, 1930

युवाओं की भूमिका


(D) मुंगेली में आंदोलन

अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ (बिलासपुर)

(E) दुर्ग में आंदोलन की गतिविधियाँ

आंदोलन का आरंभ

संस्थाओं की स्थापना

इस आंदोलन के दौरान दुर्ग में निम्नलिखित दो महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना हुई:

1. किसान सभा/परिषद (1930)

2. विद्यार्थी कांग्रेस (1930)