वाक्यांश के लिए एक शब्द (One-word Substitution)
हिन्दी भाषा की एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हम अपनी बात को कम-से-कम शब्दों में प्रभावशाली ढंग से कह सकते हैं। “वाक्यांश के लिए एक शब्द” इसी कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे “शब्द-समूह के लिए एक शब्द” भी कहा जाता है।
यह भाषा को संक्षिप्त (छोटा), सुंदर और गंभीर बनाने में मदद करता है। सरल शब्दों में, यह “गागर में सागर भरने” जैसा काम है।
1. वाक्यांश के लिए एक शब्द क्या है? (Definition & Meaning)
परिभाषा:
जब किसी लम्बे वाक्य या शब्द-समूह के अर्थ को व्यक्त करने के लिए केवल एक सार्थक शब्द का प्रयोग किया जाता है, तो उसे “वाक्यांश के लिए एक शब्द” कहते हैं।
- उदाहरण:
- वाक्यांश: “जो ईश्वर में विश्वास रखता हो”
- एक शब्द: आस्तिक
- प्रयोग: “वह व्यक्ति आस्तिक है।” (यह कहने की ज़रूरत नहीं कि “वह व्यक्ति ईश्वर में विश्वास रखता है।”)
2. इसका महत्व क्या है? (Importance)
- संक्षिप्तता (Conciseness): भाषा को संक्षिप्त और सुगठित बनाता है।
- प्रभावशाली (Effective): बात का असर बढ़ जाता है। ‘अविश्वसनीय’ कहना ‘जिस पर विश्वास न किया जा सके’ कहने से ज़्यादा प्रभावी है।
- कलात्मकता (Artistic): भाषा सुंदर और साहित्यिक लगने लगती है। निबंध, लेख और औपचारिक लेखन में इसका बहुत महत्व है।
- स्पष्टता (Clarity): अर्थ को और अधिक स्पष्ट करता है।
3. महत्वपूर्ण वाक्यांश और उनके लिए एक शब्द की सूची
यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं, जिन्हें श्रेणियों में बांटा गया है:
ईश्वर/आध्यात्म से संबंधित
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| जो ईश्वर में विश्वास रखता हो | आस्तिक |
| जो ईश्वर में विश्वास न रखता हो | नास्तिक |
| जो शिव की उपासना करता हो | शैव |
| जो विष्णु की उपासना करता हो | वैष्णव |
| जो शक्ति/देवी की उपासना करता हो | शाक्त |
| मोक्ष की इच्छा रखने वाला | मुमुक्षु |
मानव स्वभाव/गुणों से संबंधित
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| किए गए उपकार को मानने वाला | कृतज्ञ |
| किए गए उपकार को न मानने वाला | कृतघ्न |
| कम खर्च करने वाला | मितव्ययी |
| बहुत अधिक खर्च करने वाला | अपव्ययी |
| बहुत कम बोलने वाला | अल्पभाषी या मितभाषी |
| बहुत अधिक बोलने वाला | वाचाल |
| जिसका कोई शत्रु पैदा न हुआ हो | अजातशत्रु |
| जो सब कुछ जानता हो | सर्वज्ञ |
| जो बहुत कम जानता हो | अल्पज्ञ |
| जो बहुत कुछ जानता हो | बहुज्ञ |
ज्ञान/जानने की इच्छा से संबंधित
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| जानने की इच्छा रखने वाला | जिज्ञासु |
| जीने की प्रबल इच्छा | जिजीविषा |
| जिसे पढ़ा न जा सके | अपाठ्य |
| जो पहले कभी न हुआ हो | अभूतपूर्व |
| जिसका वर्णन न किया जा सके | अवर्णनीय |
| जिस पर विश्वास न किया जा सके | अविश्वसनीय |
स्थान/पहुँच से संबंधित
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| जहाँ पहुँचा न जा सके | अगम |
| जहाँ पहुँचना बहुत कठिन हो | दुर्गम |
| जिसे जीता न जा सके | अजेय |
| जो कभी पराजित न हुआ हो | अपराजेय |
| आँखों के सामने होने वाला | प्रत्यक्ष |
| आँखों से परे/ओझल | परोक्ष |
| पर्वत के नीचे की भूमि | उपत्यका |
समय/अवधि से संबंधित
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| वर्ष में एक बार होने वाला | वार्षिक |
| महीने में एक बार होने वाला | मासिक |
| पंद्रह दिन में एक बार होने वाला | पाक्षिक |
| सप्ताह में एक बार होने वाला | साप्ताहिक |
| प्रतिदिन होने वाला | दैनिक |
| जो हमेशा रहने वाला हो | शाश्वत / सनातन |
| जो क्षण भर में नष्ट हो जाए | क्षणभंगुर |
अन्य महत्वपूर्ण वाक्यांश
| वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| जिसकी उपमा न दी जा सके | अनुपम |
| दोपहर के बाद का समय | अपराह्न |
| दोपहर से पहले का समय | पूर्वाह्न |
| जो बिना वेतन के काम करे | अवैतनिक |
| जो कानून के विरुद्ध हो | अवैध |
| जिसे क्षमा न किया जा सके | अक्षम्य |
| साथ काम करने वाला व्यक्ति | सहकर्मी |
| साथ पढ़ने वाला व्यक्ति | सहपाठी |
| गोद लिया हुआ पुत्र | दत्तक |
| अच्छे आचरण वाला | सदाचारी |
| क्रम संख्या | वाक्यांश (Phrase) | एक शब्द (One Word) |
| 51. | जिसका जन्म अभी-अभी हुआ हो | नवजात |
| 52. | जिसका कोई आकार न हो | निराकार |
| 53. | जिसका अंत न हो | अनंत |
| 54. | जो कभी बूढ़ा न हो | अजर |
| 55. | जो कभी न मरे | अमर |
| 56. | जिसके माता-पिता न हों | अनाथ |
| 57. | जिसका पति मर गया हो | विधवा |
| 58. | जिसकी पत्नी मर गई हो | विधुर |
| 59. | जो स्त्री कविता लिखती हो | कवयित्री |
| 60. | जो खाने योग्य न हो | अखाद्य |
| 61. | जो पीने योग्य हो | पेय |
| 62. | जो दिखाई न देता हो | अदृश्य |
| 63. | जो पहले जन्मा हो (बड़ा भाई) | अग्रज |
| 64. | जो बाद में जन्मा हो (छोटा भाई) | अनुज |
| 65. | जो मांस खाता हो | मांसाहारी |
| 66. | जो शाक-सब्जी खाता हो | शाकाहारी |
| 67. | जो सब कुछ खाता हो | सर्वाहारी |
| 68. | जो अपने ऊपर निर्भर हो | आत्मनिर्भर |
| 69. | हाथ से लिखा हुआ | हस्तलिखित |
| 70. | अपने देश से प्रेम करने वाला | देशभक्त |
| 71. | दूसरों पर उपकार करने वाला | परोपकारी |
| 72. | काम से जी चुराने वाला | कामचोर |
| 73. | रास्ता दिखाने वाला | पथप्रदर्शक/मार्गदर्शक |
| 74. | जिसके आने की तिथि न हो | अतिथि |
| 75. | जिसकी ग्रीवा (गर्दन) सुंदर हो | सुग्रीव |
| 76. | जो आसानी से मिल जाए | सुलभ |
| 77. | जो कठिनाई से मिलता हो | दुर्लभ |
| 78. | जंगल में लगने वाली आग | दावाग्नि / दावानल |
| 79. | समुद्र में लगने वाली आग | बड़वाग्नि / बड़वानल |
| 80. | पेट में लगने वाली आग (भूख) | जठराग्नि |
| 81. | जो जन्म से अंधा हो | जन्मांध |
| 82. | मन की बात जानने वाला | अंतर्यामी |
| 83. | रात में घूमने-फिरने वाला | निशाचर |
| 84. | जल में रहने वाला जीव | जलचर |
| 85. | पृथ्वी पर रहने वाला जीव | थलचर |
| 86. | आकाश में उड़ने वाला | नभचर |
| 87. | बिना किसी विरोध के | निर्विरोध |
| 88. | जिसे करना आवश्यक हो | अनिवार्य |
| 89. | जिसके नीचे रेखा खींची हो | रेखांकित |
| 90. | जो कानून के अनुसार हो | वैध |
| 91. | दूसरे के अधीन रहने वाला | पराधीन |
| 92. | जिसके समान कोई दूसरा न हो | अद्वितीय |
| 93. | जिसका कोई इलाज न हो सके | असाध्य |
| 94. | अपनी हत्या स्वयं करना | आत्महत्या |
| 95. | इंद्रियों को जीतने वाला | जितेंद्रिय |
| 96. | दूसरों से ईर्ष्या करने वाला | ईर्ष्यालु |
| 97. | जो इतिहास से संबंधित हो | ऐतिहासिक |
| 98. | किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना | अतिशयोक्ति |
| 99. | जिसकी गिनती न की जा सके | अनगिनत / अगणित |
| 100. | जो पहले किसी पद पर रहा हो | भूतपूर्व |
मुहावरे और लोकोक्तियाँ (Idioms and Proverbs)
हिन्दी भाषा की सुंदरता और प्रभावशीलता को बढ़ाने में मुहावरों और लोकोक्तियों का विशेष स्थान है। ये भाषा को सजीव, रोचक और शक्तिशाली बनाते हैं। आम बोलचाल से लेकर साहित्यिक रचनाओं तक, इनका प्रयोग भाषा में जान डाल देता है।
आइए, इन दोनों को विस्तार से और सरल शब्दों में समझते हैं।
1. मुहावरे (Idioms)
परिभाषा:
‘मुहावरा’ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘अभ्यास’।
जब कोई वाक्यांश (phrase) अपने शाब्दिक (literal) अर्थ को छोड़कर किसी विशेष या विलक्षण (figurative) अर्थ को प्रकट करता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।
मुहावरों की विशेषताएँ और पहचान:
- यह एक वाक्यांश होता है, पूरा वाक्य नहीं: जैसे – “आँखें खुलना”। यह अपने आप में अधूरा है।
- इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं होता: इसे किसी वाक्य का अंग बनकर ही प्रयोग किया जा सकता है।
- लिंग, वचन और क्रिया के अनुसार इसका रूप बदल जाता है:
- रमेश की आँखें खुल गईं।
- समय आने पर तुम्हारी भी आँखें खुल जाएँगी।
- इसके अंत में अक्सर क्रिया पद (Verb) ‘ना’ लगा होता है: जैसे – भाग जाना, आँख लगना, कान भरना।
- यह एक विशेष अर्थ देता है: इसका शाब्दिक अर्थ काम नहीं करता।
उदाहरण:
- मुहावरा: आँखें खुलना
- शाब्दिक अर्थ: बंद आँख का खुल जाना।
- विशेष अर्थ: होश आना / सच्चाई का पता चलना।
- वाक्य प्रयोग: जब रमेश ने मुझे धोखा दिया, तब मेरी आँखें खुल गईं।
- मुहावरा: घी के दीये जलाना
- शाब्दिक अर्थ: दीये में घी डालकर जलाना।
- विशेष अर्थ: बहुत अधिक खुशियाँ मनाना।
- वाक्य प्रयोग: भारतीय टीम के विश्व कप जीतने पर पूरे देश ने घी के दीये जलाए।
2. लोकोक्तियाँ (Proverbs)
परिभाषा:
‘लोकोक्ति’ शब्द ‘लोक + उक्ति’ से बना है, जिसका अर्थ है – “लोगों में प्रचलित कहावत (saying)”।
लोकोक्तियाँ जीवन के अनुभवों, पारंपरिक ज्ञान और सत्य को एक संक्षिप्त वाक्य में प्रकट करती हैं। इन्हें कहावतें भी कहते हैं।
लोकोक्तियों की विशेषताएँ और पहचान:
- यह अपने आप में एक पूरा वाक्य होती है: जैसे – “अधजल गगरी छलकत जाए।”
- इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है: इसे किसी बात की पुष्टि, खंडन या उदाहरण देने के लिए वाक्य के अंत या आरंभ में प्रयोग करते हैं।
- इसका रूप कभी नहीं बदलता: यह जैसी है, वैसी ही प्रयोग होती है।
- यह किसी अनुभव या सत्य पर आधारित होती है: इसमें एक गहरी सीख छिपी होती है।
उदाहरण:
- लोकोक्ति: अधजल गगरी छलकत जाए।
- अर्थ: कम ज्ञान या कम क्षमता वाला व्यक्ति दिखावा अधिक करता है।
- वाक्य प्रयोग: सोहन ने अभी-अभी थोड़ी-सी अंग्रेजी सीखी है और हर किसी से अंग्रेजी में ही बात करता है। सच है, अधजल गगरी छलकत जाए।
- लोकोक्ति: आम के आम, गुठलियों के दाम।
- अर्थ: दोहरा लाभ होना (Double benefit)।
- वाक्य प्रयोग: मैंने पुरानी किताबें बेचकर जो पैसे कमाए, उनसे नई किताबें खरीद लीं। इसी को कहते हैं, आम के आम, गुठलियों के दाम।
3. मुहावरे और लोकोक्ति में मुख्य अंतर (Key Differences)
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अक्सर भ्रमित करता है।
| आधार (Basis) | मुहावरा (Idiom) | लोकोक्ति (Proverb) |
| संरचना | यह एक वाक्यांश (phrase) होता है। | यह एक पूरा वाक्य (sentence) होती है। |
| प्रयोग | इसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता। | इसका स्वतंत्र प्रयोग हो सकता है। |
| रूप-परिवर्तन | लिंग, वचन, क्रिया के अनुसार रूप बदल जाता है। | इसका रूप कभी नहीं बदलता। |
| अंत | इसके अंत में प्रायः ‘ना’ आता है। | इसके साथ ऐसा कोई नियम नहीं है। |
| उद्देश्य | भाषा में चमत्कार और सजीवता लाना। | किसी अनुभव, सत्य या सीख को प्रकट करना। |
4. कुछ प्रमुख मुहावरे और उनके अर्थ
- अंगूठा दिखाना – साफ़ इनकार कर देना।
- आँखों का तारा – बहुत प्यारा।
- ईद का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना।
- कमर कसना – तैयार हो जाना।
- कान भरना – चुगली करना।
- नौ दो ग्यारह होना – भाग जाना।
- आग में घी डालना – क्रोध को और भड़काना।
- दाँतों तले उँगली दबाना – हैरान रह जाना।
- लोहे के चने चबाना – बहुत कठिन काम करना।
- खून का घूँट पीकर रह जाना – गुस्सा मन में दबा लेना।
5. कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ और उनके अर्थ
- अंधों में काना राजा – मूर्खों के बीच कम ज्ञान वाला भी विद्वान माना जाता है।
- एक अनार सौ बीमार – चीज़ कम और चाहने वाले अधिक।
- ऊँची दुकान, फीका पकवान – केवल बाहरी दिखावा, असल में गुण न होना।
- कंगाली में आटा गीला – मुसीबत में और मुसीबत आना।
- घर का भेदी, लंका ढाए – आपसी फूट विनाश का कारण बनती है।
- जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ – परिश्रम करने वालों को ही सफलता मिलती है।
- नाच न जाने, आँगन टेढ़ा – अपनी गलती छिपाने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ना।
- बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद – मूर्ख व्यक्ति गुणों की कद्र नहीं कर सकता।
- एक हाथ से ताली नहीं बजती – झगड़ा एक तरफ से नहीं होता।
- मन चंगा तो कठौती में गंगा – यदि मन पवित्र है तो घर ही तीर्थ है।
वाक्य-विचार (Syntax)
“वाक्य-विचार” व्याकरण का वह भाग है, जिसमें वाक्य की परिभाषा, उसके अंग (parts), प्रकार (types), संरचना (structure) और रूपांतरण (transformation) का अध्ययन किया जाता है।
1. वाक्य क्या है? (Definition of a Sentence)
परिभाषा:
शब्दों का वह व्यवस्थित (systematic) और सार्थक (meaningful) समूह, जो किसी भाव या विचार को पूरी तरह से व्यक्त कर सके, वाक्य कहलाता है।
- उदाहरण: “राम पुस्तक पढ़ता है।”
- यह शब्दों का एक व्यवस्थित समूह है (कर्ता, कर्म, क्रिया के क्रम में)।
- इसका एक पूर्ण अर्थ निकल रहा है।
- अतः यह एक वाक्य है।
- अगर हम कहें “पढ़ता है पुस्तक राम”, तो यह व्यवस्थित नहीं है और पूर्ण भाव नहीं दे रहा, इसलिए यह एक शुद्ध वाक्य नहीं है।
2. वाक्य के अंग (Parts of a Sentence)
संरचना के आधार पर वाक्य के दो मुख्य अंग होते हैं:
क) उद्देश्य (Subject)
वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं।
यह सामान्यतः वाक्य का कर्ता (doer) होता है।
- पहचान: वाक्य में “कौन” या “किसने” प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले, वह उद्देश्य होता है।
- उदाहरण:
- मोहन सो रहा है। (कौन सो रहा है? → मोहन)
- लड़की खाना खा रही है। (कौन खा रही है? → लड़की)
- उद्देश्य का विस्तार (Expansion of Subject): कभी-कभी उद्देश्य (कर्ता) की विशेषता बताने वाले शब्द भी उसके साथ जुड़ जाते हैं, इन्हें ‘उद्देश्य का विस्तार’ कहते हैं।
- उदाहरण: “मेहनती बालक मोहन सो रहा है।” (यहाँ ‘मेहनती बालक’ उद्देश्य ‘मोहन’ का विस्तार है।)
ख) विधेय (Predicate)
वाक्य में उद्देश्य (कर्ता) के बारे में जो कुछ भी कहा जाता है, उसे विधेय कहते हैं।
इसमें मुख्य रूप से क्रिया, कर्म और उनके विस्तारक शब्द आते हैं।
- उदाहरण:
- मोहन सो रहा है।
- लड़की खाना खा रही है।
- विधेय का विस्तार (Expansion of Predicate): कर्म की विशेषता बताने वाले शब्द या क्रिया की विशेषता बताने वाले क्रिया-विशेषण विधेय का विस्तार करते हैं।
- उदाहरण: मोहन अपनी पुस्तक ध्यान से पढ़ रहा है। (यहाँ ‘अपनी पुस्तक’, ‘ध्यान से’ विधेय ‘पढ़ रहा है’ का विस्तार है।)
3. वाक्य के भेद (Types of Sentences)
वाक्यों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
(A) अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद
(B) रचना (बनावट) के आधार पर वाक्य के 3 भेद
(A) अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद (Based on Meaning)
- विधानवाचक वाक्य (Assertive Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के होने या करने की सामान्य जानकारी मिलती है।
- उदा: सूर्य पूर्व से उगता है। बच्चे खेल रहे हैं।
- निषेधवाचक वाक्य (Negative Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के न होने का बोध हो।
- उदा: मैं आज स्कूल नहीं जाऊँगा। उसने खाना नहीं खाया।
- प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative Sentence): वह वाक्य जिसमें कोई प्रश्न पूछा जाए।
- उदा: क्या तुम पढ़ रहे हो? तुम कहाँ रहते हो?
- आज्ञावाचक वाक्य (Imperative Sentence): वह वाक्य जिसमें आज्ञा, अनुमति, प्रार्थना या उपदेश का भाव हो।
- उदा: तुम बाहर जाओ। कृपया शांत रहें।
- इच्छावाचक वाक्य (Optative Sentence): वह वाक्य जिसमें इच्छा, शुभकामना, आशीर्वाद या अभिशाप का भाव हो।
- उदा: आपकी यात्रा मंगलमय हो। ईश्वर तुम्हारा भला करे।
- संदेहवाचक वाक्य (Doubtful Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के होने में संदेह या संभावना का भाव हो।
- पहचान: शायद, संभवतः, हो सकता है।
- उदा: शायद आज बारिश हो। संभवतः वह कल आएगा।
- विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory Sentence): वह वाक्य जिसमें हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य जैसे भाव प्रकट हों।
- पहचान: !, वाह!, अरे!, छि!, ओह!
- उदा: वाह! कितना सुंदर दृश्य है। ओह! बहुत बुरा हुआ।
- संकेतवाचक वाक्य (Conditional Sentence): वह वाक्य जिसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करे।
- पहचान: यदि…तो, अगर…तो।
- उदा: यदि तुम मेहनत करते, तो अवश्य सफल होते।
(B) रचना (बनावट) के आधार पर वाक्य के 3 भेद (Based on Structure)
- सरल वाक्य (Simple Sentence):
- पहचान: जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय (अर्थात् एक ही मुख्य क्रिया) हो।
- उदा:
- बारिश हो रही है। (क्रिया: हो रही है)
- बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। (क्रिया: खेल रहे हैं)
- संयुक्त वाक्य (Compound Sentence):
- पहचान: जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र (independent) उपवाक्य किसी योजक शब्द (conjunction) से जुड़े हों। ये उपवाक्य अपना स्वतंत्र अर्थ रखते हैं।
- प्रमुख योजक शब्द: और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, फिर भी, तो, नहीं तो, किंतु, परंतु, लेकिन।
- उदा:
- वह सुबह गया और शाम को लौट आया।
- (यहाँ ‘वह सुबह गया’ और ‘शाम को लौट आया’ दोनों स्वतंत्र वाक्य हैं।)
- मैंने बहुत मेहनत की, किंतु सफल नहीं हो सका।
- मिश्र / मिश्रित वाक्य (Complex Sentence):
- पहचान: जिस वाक्य में एक मुख्य (प्रधान) उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित (dependent) उपवाक्य हों। आश्रित उपवाक्य अपने अर्थ के लिए मुख्य उपवाक्य पर निर्भर रहता है।
- प्रमुख योजक शब्द: कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, यद्यपि, तथापि।
- उदा:
- शिक्षक ने बताया कि कल विद्यालय में अवकाश है।
- (यहाँ ‘कि कल विद्यालय में अवकाश है’ वाक्य ‘शिक्षक ने बताया’ पर आश्रित है।)
- जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह सफल होता है।
4. वाक्य-रूपांतरण (Sentence Transformation)
एक प्रकार के वाक्य को बिना अर्थ बदले दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना वाक्य-रूपांतरण कहलाता है।
- उदाहरण:
- सरल से संयुक्त:
- सरल: सूर्योदय होने पर पक्षी चहचहाने लगे।
- संयुक्त: सूर्योदय हुआ और पक्षी चहचहाने लगे।
- सरल से मिश्र:
- सरल: मेहनती व्यक्ति अवश्य सफल होता है।
- मिश्र: जो व्यक्ति मेहनती होता है, वह अवश्य सफल होता है।
- विधानवाचक से निषेधवाचक:
- विधानवाचक: राम एक अच्छा लड़का है।
- निषेधवाचक: राम एक बुरा लड़का नहीं है। (अर्थ नहीं बदला)
- सरल से संयुक्त:
पद-परिचय (Grammatical Parsing)
परिभाषा:
जैसे हम किसी व्यक्ति से मिलते समय अपना परिचय देते हैं (नाम, पता, काम आदि), ठीक उसी तरह, वाक्य में आए प्रत्येक पद (शब्द) का व्याकरणिक परिचय देना ही पद-परिचय कहलाता है।
- ‘पद’ क्या है? – जब कोई ‘शब्द’ वाक्य में प्रयोग होता है और व्याकरण के नियमों (लिंग, वचन, कारक) से बंध जाता है, तो वह ‘शब्द’ न कहलाकर ‘पद’ बन जाता है।
- जैसे: ‘लड़का’ एक शब्द है। लेकिन “<u>लड़का</u> खेल रहा है।” वाक्य में ‘लड़का’ एक पद है।
1. पद-परिचय के लिए आवश्यक बातें
किसी भी पद का परिचय देने के लिए हमें व्याकरण की इन बातों का ज्ञान होना अनिवार्य है:
- संज्ञा और उसके भेद, लिंग, वचन, कारक।
- सर्वनाम और उसके भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक।
- विशेषण और उसके भेद, अवस्था, लिंग, वचन, विशेष्य।
- क्रिया और उसके भेद (अकर्मक/सकर्मक), काल, वाच्य, लिंग, वचन।
- अव्यय और उसके भेद:
- क्रिया-विशेषण (भेद और जिस क्रिया की विशेषता बताए)
- संबंधबोधक (किससे संबंध है)
- समुच्चयबोधक (किसे जोड़ रहा है)
- विस्मयादिबोधक (कौन-सा भाव है)
2. पद-परिचय कैसे करें? (How to Parse?)
हर प्रकार के पद (शब्द) का परिचय देने के लिए कुछ निश्चित बातें बतानी होती हैं।
(A) विकारी पदों का परिचय (जो लिंग, वचन से बदलते हैं)
| पद का प्रकार | परिचय में क्या-क्या बताना है? |
| 1. संज्ञा (Noun) | 1. भेद: (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक) <br> 2. लिंग: (पुल्लिंग / स्त्रीलिंग) <br> 3. वचन: (एकवचन / बहुवचन) <br> 4. कारक: (कर्ता, कर्म, करण, आदि) <br> 5. क्रिया के साथ संबंध: (कर्ता है, कर्म है, आदि) |
| 2. सर्वनाम (Pronoun) | 1. भेद: (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, आदि) <br> 2. पुरुष: (उत्तम, मध्यम, अन्य) <br> 3. लिंग: (क्रिया के अनुसार) <br> 4. वचन: (एकवचन / बहुवचन) <br> 5. कारक और क्रिया से संबंध |
| 3. विशेषण (Adjective) | 1. भेद: (गुणवाचक, संख्यावाचक, आदि) <br> 2. अवस्था: (मूलावस्था, उत्तरावस्था, उत्तमावस्था) <br> 3. लिंग: (विशेष्य के अनुसार) <br> 4. वचन: (विशेष्य के अनुसार) <br> 5. विशेष्य: (किस संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बता रहा है) |
| 4. क्रिया (Verb) | 1. भेद: (अकर्मक / सकर्मक / प्रेरणार्थक) <br> 2. वाच्य: (कर्तृवाच्य / कर्मवाच्य / भाववाच्य) <br> 3. काल: (भूत / वर्तमान / भविष्य) <br> 4. लिंग: (कर्ता/कर्म के अनुसार) <br> 5. वचन: (कर्ता/कर्म के अनुसार) <br> 6. कर्ता का संकेत |
(B) अविकारी पदों (अव्यय) का परिचय (जो नहीं बदलते)
| पद का प्रकार | परिचय में क्या-क्या बताना है? |
| 1. क्रिया-विशेषण | 1. भेद: (रीतिवाचक, कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक) <br> 2. वह क्रिया जिसकी विशेषता बता रहा है। |
| 2. संबंधबोधक | 1. भेद: (कालवाचक, स्थानवाचक, आदि) <br> 2. जिन पदों से संबंध जोड़ रहा है। |
| 3. समुच्चयबोधक | 1. भेद: (समानाधिकरण / व्यधिकरण) <br> 2. जिन शब्दों या वाक्यों को जोड़ रहा है। |
| 4. विस्मयादिबोधक | 1. कौन-सा भाव प्रकट कर रहा है (हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा)। |
3. पद-परिचय का एक विस्तृत उदाहरण
वाक्य: अरे! रमेश की छोटी बहन आज बस से विद्यालय गई।
आइए, इस वाक्य के प्रत्येक पद का परिचय देते हैं:
| पद (Word) | व्याकरणिक परिचय (Grammatical Parsing) |
| अरे! | विस्मयादिबोधक, आश्चर्य का भाव प्रकट कर रहा है। |
| रमेश की | 1. संज्ञा – व्यक्तिवाचक <br> 2. लिंग – पुल्लिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – संबंध कारक (‘बहन’ से संबंध बता रहा है)। |
| छोटी | 1. विशेषण – गुणवाचक, मूलावस्था <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग (विशेष्य ‘बहन’ के अनुसार) <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. विशेष्य – ‘बहन’। |
| बहन | 1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – कर्ता कारक (‘गई’ क्रिया का कर्ता)। |
| आज | 1. क्रिया-विशेषण – कालवाचक <br> 2. ‘गई’ क्रिया के होने का समय बता रहा है। |
| बस से | 1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – करण कारक (जाने का साधन)। |
| विद्यालय | 1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – पुल्लिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – कर्म कारक (यहाँ ‘स्थान’ के अर्थ में है, अतः अधिकरण कारक भी कुछ विद्वान मानते हैं, पर कर्म अधिक सटीक है)। |
| गई | 1. क्रिया – अकर्मक <br> 2. वाच्य – कर्तृवाच्य <br> 3. काल – सामान्य भूतकाल <br> 4. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 5. वचन – एकवचन <br> 6. कर्ता – ‘बहन’। |
4. पद-परिचय के लिए सरल ट्रिक्स
- पहले शब्द का भेद पहचानें: सबसे पहले यह નક્કી करें कि शब्द संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया या अव्यय में से क्या है।
- विकारी या अविकारी: यह तय करें कि शब्द विकारी है (बदलने वाला) या अविकारी (न बदलने वाला)। अविकारी का परिचय बहुत सरल होता है।
- लिंग और वचन: लिंग और वचन की पहचान के लिए उसे क्रिया के साथ या वाक्य में प्रयोग करके देखें।
- कारक की पहचान: कारक को पहचानने के लिए विभक्ति चिह्नों (ने, को, से, का, में, पर, के लिए) पर ध्यान दें।
- क्रिया-विशेषण की पहचान: क्रिया से “कैसे?”, “कब?”, “कहाँ?”, “कितना?” प्रश्न पूछें। जो उत्तर मिलेगा, वह क्रिया-विशेषण होगा।
पद-परिचय अभ्यास का विषय है। जितना अधिक आप इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही सरल होता जाएगा।
विराम चिह्न (Punctuation Marks)
अर्थ और परिभाषा:
‘विराम’ का शाब्दिक अर्थ होता है— ‘ठहराव’ या ‘रुकना’।
लिखित भाषा में, पढ़ते समय ठहराव (pause) को दर्शाने और वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए जिन संकेतों या चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं।
महत्व:
विराम चिह्न लिखित भाषा के वे संकेत हैं जो बताते हैं कि हमें कहाँ, कितना और कैसे रुकना है ताकि भाव स्पष्ट हो सके। इनके बिना लिखित भाषा दिशाहीन और भ्रामक हो सकती है।
- उदाहरण से महत्व समझें:
- रोको, मत जाने दो। (अर्थ: उसे रोक लो, जाने मत दो।)
- रोको मत, जाने दो। (अर्थ: उसे रोको नहीं, उसे जाने दो।)
- देखा आपने? सिर्फ एक अल्प विराम (,) ने वाक्य का अर्थ पूरी तरह से उल्टा कर दिया।
प्रमुख विराम चिह्न और उनके प्रयोग (Major Punctuation Marks and their Usage)
हिन्दी में प्रयोग होने वाले प्रमुख विराम चिह्न निम्नलिखित हैं:
1. पूर्ण विराम ( । ) – Full Stop
- प्रयोग: इसका प्रयोग प्रश्नवाचक और विस्मयादिबोधक वाक्यों को छोड़कर, हर प्रकार के वाक्य के अंत में होता है। यह वाक्य के समाप्त होने का संकेत है।
- उदाहरण:
- मोहन पुस्तक पढ़ता है।
- तुम घर जाओ।
2. अल्प विराम ( , ) – Comma
- प्रयोग: यह सबसे अधिक प्रयोग होने वाला चिह्न है। इसका उपयोग बहुत थोड़े समय के लिए रुकने के लिए होता है।
- एक जैसे शब्दों को अलग करने के लिए:
- राम, श्याम, मोहन और सोहन खेल रहे हैं।
- उपाधियों को अलग करने के लिए:
- एम.ए., बी.एड.
- हाँ/नहीं के बाद:
- हाँ, मैं कल आऊँगा।
- संबोधन के लिए:
- मित्र, मेरी बात सुनो।
- उद्धरण चिह्न से पहले:
- नेता जी ने कहा, “तुम मुझे खून दो।”
- एक जैसे शब्दों को अलग करने के लिए:
3. अर्ध विराम ( ; ) – Semicolon
- प्रयोग: जब पूर्ण विराम से कम और अल्प विराम से अधिक देर तक रुकना हो। यह दो ऐसे उपवाक्यों को जोड़ता है जो एक दूसरे से संबंधित होते हैं।
- उदाहरण:
- सूर्यास्त हो गया; पक्षी अपने घोंसलों में लौट आए।
- मेहनत करो; सफलता अवश्य मिलेगी।
4. प्रश्नवाचक चिह्न ( ? ) – Question Mark
- प्रयोग: इसका प्रयोग प्रश्न पूछने वाले वाक्यों के अंत में किया जाता है।
- उदाहरण:
- तुम कहाँ रहते हो?
- क्या तुमने खाना खा लिया?
5. विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) – Exclamation Mark
- प्रयोग: हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य, भय जैसे तीव्र भावों को प्रकट करने वाले शब्दों या वाक्यों के अंत में इसका प्रयोग होता है।
- उदाहरण:
- वाह! कितना सुंदर फूल है।
- अरे! तुम आ गए।
- छि! कितनी गंदगी है।
6. योजक चिह्न ( – ) – Hyphen
- प्रयोग: यह दो शब्दों को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- द्वंद्व समास में: माता-पिता, सुख-दुःख।
- तुलना के लिए: चाँद-सा चेहरा।
- शब्दों के दोहराव में: धीरे-धीरे, कभी-कभी।
- सार्थक-निरर्थक युग्म में: चाय-वाय, पानी-वानी।
7. निर्देशक चिह्न ( — ) – Dash
- प्रयोग: यह योजक चिह्न से थोड़ा लंबा होता है।
- संवादों में नाम के बाद:
- राम— तुम कब आए?
- उदाहरण देने या सूची बनाने के लिए:
- भारत में कई महापुरुष हुए— गांधी, नेहरू, पटेल आदि।
- किसी कथन को स्पष्ट करने के लिए:
- मेरी एक ही इच्छा है— मैं डॉक्टर बनूँ।
- संवादों में नाम के बाद:
8. उद्धरण चिह्न ( “…” / ‘…’ ) – Quotation Marks
- प्रयोग:
- दोहरा उद्धरण चिह्न (“…”): किसी के कथन को ज्यों का त्यों (exactly as it is) लिखने के लिए।
- बाल गंगाधर तिलक ने कहा था, “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
- इकहरा उद्धरण चिह्न (‘…’): किसी विशेष शब्द, पुस्तक के नाम या उपनाम पर जोर देने के लिए।
- ‘रामचरितमानस’ एक महान ग्रंथ है।
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ महान कवि थे।
- दोहरा उद्धरण चिह्न (“…”): किसी के कथन को ज्यों का त्यों (exactly as it is) लिखने के लिए।
9. कोष्ठक चिह्न ( ( ) ) – Parentheses/Brackets
- प्रयोग:
- किसी शब्द के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए:
- दशहरे के दिन रावण (दशानन) का दहन किया जाता है।
- नाटक में भावों को बताने के लिए:
- रावण (हँसते हुए)— हे तपस्वी, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
- क्रमांक लिखने के लिए: (क), (ख), (1), (2)।
- किसी शब्द के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए:
10. लाघव चिह्न ( ० ) – Abbreviation Sign
- प्रयोग: किसी बड़े शब्द को संक्षिप्त (short) रूप में लिखने के लिए उस शब्द के पहले अक्षर के बाद यह चिह्न लगाया जाता है।
- उदाहरण:
- डॉक्टर = डॉ०
- पंडित = पं०
- उत्तर प्रदेश = उ० प्र०
11. विवरण चिह्न ( :- ) – Colon-Dash
- प्रयोग: जब किसी विषय का विवरण या ब्योरा देना हो।
- उदाहरण:
- क्रिया के दो मुख्य भेद हैं:- सकर्मक और अकर्मक।
- कृपया निम्नलिखित नियमों का पालन करें:-
12. हंसपद या त्रुटिबोधक चिह्न ( ^ ) – Caret
- प्रयोग: लिखते समय जब कोई शब्द या अंश छूट जाता है, तो उसे पंक्ति के ऊपर लिखने के लिए इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
- उदाहरण:
जा रहा हूँ।- मैं कल दिल्ली ^। (यहाँ ‘जा रहा हूँ’ छूट गया था)।
विराम चिह्नों का सही ज्ञान और प्रयोग हमारी लिखित अभिव्यक्ति को स्पष्ट, सटीक और प्रभावशाली बनाता है।
वाक्य-शुद्धि एवं शब्द-शुद्धि (Sentence and Word Correction)
शुद्ध भाषा के लिए शब्दों और वाक्यों, दोनों का शुद्ध होना अनिवार्य है। आइए, इन दोनों के नियमों और उदाहरणों को व्यवस्थित तालिकाओं में देखें।
भाग 1: शब्द-शुद्धि (वर्तनी-शुद्धि)
यहाँ शब्दों में होने वाली सामान्य अशुद्धियों को उनके शुद्ध रूप और नियम के साथ प्रस्तुत किया गया है।
| अशुद्धि का प्रकार | अशुद्ध (गलत) | शुद्ध (सही) | कारण / नियम |
| मात्रा संबंधी | कवित्री | कवयित्री | ‘व’ पर कोई मात्रा नहीं, ‘य’ पर छोटी ‘इ’। |
| निरोग | नीरोग | संधि नियम (निः + रोग), ‘न’ पर बड़ी ‘ई’। | |
| पत्नि | पत्नी | स्त्रीलिंग शब्द में अंत में प्रायः बड़ी ‘ई’ आती है। | |
| त्यौहार | त्योहार | एक मात्रा (‘ओ’) का प्रयोग होता है, दो (‘औ’) का नहीं। | |
| ‘र’ के रूप संबंधी | आर्शिवाद | आशीर्वाद | ‘र्’ की ध्वनि ‘शी’ के बाद है, इसलिए ‘वा’ पर लगेगा। |
| श्रृंगार | शृंगार | ‘श्’ के साथ ‘ऋ’ की मात्रा लगती है, ‘र’ नहीं। | |
| श्रोत | स्रोत | ‘स’ के नीचे ‘र’ (पदेन) का प्रयोग होता है। | |
| संयुक्त अक्षर संबंधी | उज्जवल | उज्ज्वल | इसमें दो आधे ‘ज्’ का प्रयोग होता है। |
| चिन्ह | चिह्न | ‘ह्’ आधा होता है और ‘न’ पूरा होता है। | |
| महत्व | महत्त्व | ‘महत्’ और ‘त्व’ के योग से दो आधे ‘त्’ आते हैं। | |
| श/ष/स संबंधी | पुरुस्कार | पुरस्कार | विसर्ग संधि (पुरः + कार) के कारण ‘स’ आता है। |
| प्रसंशा | प्रशंसा | पहला ‘श’ (शलगम) और दूसरा ‘स’ (सपेरा) नहीं, बल्कि दोनों ‘श’ होते हैं। | |
| अनावश्यक वर्ण | अत्याधिक | अत्यधिक | ‘अति + अधिक’ से बनता है, इसमें ‘आ’ की मात्रा नहीं लगती। |
| पूज्यनीय | पूजनीय | या तो ‘पूज्य’ होता है या ‘पूजनीय’। ‘पूज्यनीय’ गलत है। |
भाग 2: वाक्य-शुद्धि
यहाँ वाक्यों में होने वाली विभिन्न प्रकार की व्याकरणिक अशुद्धियों को उनके शुद्ध रूप और कारण के साथ प्रस्तुत किया गया है।
1. पदक्रम (Word Order) संबंधी अशुद्धि
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | कारण |
| यहाँ शुद्ध गाय का घी मिलता है। | यहाँ गाय का शुद्ध घी मिलता है। | विशेषण ‘शुद्ध’ घी के लिए है, गाय के लिए नहीं। |
| एक फूलों की माला बनाओ। | फूलों की एक माला बनाओ। | माला ‘एक’ है, फूल अनेक हैं। |
| भीड़ में कई जयपुर के व्यक्ति थे। | भीड़ में जयपुर के कई व्यक्ति थे। | ‘कई’ संख्यावाचक विशेषण ‘व्यक्ति’ के साथ आएगा। |
2. अन्वय (Agreement) संबंधी अशुद्धि (लिंग, वचन, क्रिया का मेल)
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | कारण |
| दही बहुत खट्टी है। | दही बहुत खट्टा है। | ‘दही’ पुल्लिंग शब्द है। |
| मेरा प्राण छटपटाने लगा। | मेरे प्राण छटपटाने लगे। | ‘प्राण’, ‘दर्शन’, ‘हस्ताक्षर’ हमेशा बहुवचन होते हैं। |
| अनेकों लोग वहाँ थे। | अनेक लोग वहाँ थे। | ‘अनेक’ शब्द स्वयं में बहुवचन है, ‘अनेकों’ गलत है। |
3. पुनरुक्ति (Redundancy) संबंधी अशुद्धि
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | कारण |
| कृपया वापस लौट आएँ। | कृपया वापस आएँ / कृपया लौट आएँ। | ‘वापस’ और ‘लौटना’ का अर्थ समान है। |
| वह प्रातःकाल के समय टहलता है। | वह प्रातःकाल टहलता है। | ‘प्रातःकाल’ में ‘समय’ का अर्थ पहले से निहित है। |
| शायद वह अवश्य आएगा। | शायद वह आए / वह अवश्य आएगा। | ‘शायद’ (अनिश्चितता) और ‘अवश्य’ (निश्चितता) एक साथ नहीं आते। |
4. सर्वनाम (Pronoun) संबंधी अशुद्धि
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | कारण |
| मेरे को नहीं पता। | मुझे नहीं पता। | ‘मेरे को’ भाषा का अशुद्ध रूप है, ‘मुझे’ मानक है। |
| आप आपका काम कीजिए। | आप अपना काम कीजिए। | ‘आप’ सर्वनाम के साथ निजवाचक ‘अपना’ का प्रयोग होता है। |
| जो मेहनत करेगा, वह पास होगा। | जो मेहनत करेगा, सो पास होगा। | ‘जो’ के साथ संबंध बताने के लिए ‘सो’ का प्रयोग होता है। |
5. कारक (Case) संबंधी अशुद्धि
| अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | कारण |
| मैंने आज અમદાવાદ जाना है। | मुझे आज अहमदाबाद जाना है। | इस तरह के वाक्यों में ‘ने’ की जगह ‘को’ (मुझे) विभक्ति लगती है। |
| पेड़ में से पत्ते गिर रहे हैं। | पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं। | अलग होने के भाव में ‘से’ (अपादान कारक) का प्रयोग होता है। |
| वह बाजार में गया। | वह बाज़ार गया। | ‘गया’ क्रिया के साथ ‘में’ परसर्ग का प्रयोग अनावश्यक है। |