वाक्यांश के लिए एक शब्द (One-word Substitution)

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हिन्दी भाषा की एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हम अपनी बात को कम-से-कम शब्दों में प्रभावशाली ढंग से कह सकते हैं। “वाक्यांश के लिए एक शब्द” इसी कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे “शब्द-समूह के लिए एक शब्द” भी कहा जाता है।

यह भाषा को संक्षिप्त (छोटा), सुंदर और गंभीर बनाने में मदद करता है। सरल शब्दों में, यह “गागर में सागर भरने” जैसा काम है।


1. वाक्यांश के लिए एक शब्द क्या है? (Definition & Meaning)

परिभाषा:
जब किसी लम्बे वाक्य या शब्द-समूह के अर्थ को व्यक्त करने के लिए केवल एक सार्थक शब्द का प्रयोग किया जाता है, तो उसे “वाक्यांश के लिए एक शब्द” कहते हैं।


2. इसका महत्व क्या है? (Importance)

  1. संक्षिप्तता (Conciseness): भाषा को संक्षिप्त और सुगठित बनाता है।
  2. प्रभावशाली (Effective): बात का असर बढ़ जाता है। ‘अविश्वसनीय’ कहना ‘जिस पर विश्वास न किया जा सके’ कहने से ज़्यादा प्रभावी है।
  3. कलात्मकता (Artistic): भाषा सुंदर और साहित्यिक लगने लगती है। निबंध, लेख और औपचारिक लेखन में इसका बहुत महत्व है।
  4. स्पष्टता (Clarity): अर्थ को और अधिक स्पष्ट करता है।

3. महत्वपूर्ण वाक्यांश और उनके लिए एक शब्द की सूची

यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं, जिन्हें श्रेणियों में बांटा गया है:

ईश्वर/आध्यात्म से संबंधित

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
जो ईश्वर में विश्वास रखता होआस्तिक
जो ईश्वर में विश्वास न रखता होनास्तिक
जो शिव की उपासना करता होशैव
जो विष्णु की उपासना करता होवैष्णव
जो शक्ति/देवी की उपासना करता होशाक्त
मोक्ष की इच्छा रखने वालामुमुक्षु

मानव स्वभाव/गुणों से संबंधित

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
किए गए उपकार को मानने वालाकृतज्ञ
किए गए उपकार को न मानने वालाकृतघ्न
कम खर्च करने वालामितव्ययी
बहुत अधिक खर्च करने वालाअपव्ययी
बहुत कम बोलने वालाअल्पभाषी या मितभाषी
बहुत अधिक बोलने वालावाचाल
जिसका कोई शत्रु पैदा न हुआ होअजातशत्रु
जो सब कुछ जानता होसर्वज्ञ
जो बहुत कम जानता होअल्पज्ञ
जो बहुत कुछ जानता होबहुज्ञ

ज्ञान/जानने की इच्छा से संबंधित

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
जानने की इच्छा रखने वालाजिज्ञासु
जीने की प्रबल इच्छाजिजीविषा
जिसे पढ़ा न जा सकेअपाठ्य
जो पहले कभी न हुआ होअभूतपूर्व
जिसका वर्णन न किया जा सकेअवर्णनीय
जिस पर विश्वास न किया जा सकेअविश्वसनीय

स्थान/पहुँच से संबंधित

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
जहाँ पहुँचा न जा सकेअगम
जहाँ पहुँचना बहुत कठिन होदुर्गम
जिसे जीता न जा सकेअजेय
जो कभी पराजित न हुआ होअपराजेय
आँखों के सामने होने वालाप्रत्यक्ष
आँखों से परे/ओझलपरोक्ष
पर्वत के नीचे की भूमिउपत्यका

समय/अवधि से संबंधित

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
वर्ष में एक बार होने वालावार्षिक
महीने में एक बार होने वालामासिक
पंद्रह दिन में एक बार होने वालापाक्षिक
सप्ताह में एक बार होने वालासाप्ताहिक
प्रतिदिन होने वालादैनिक
जो हमेशा रहने वाला होशाश्वत / सनातन
जो क्षण भर में नष्ट हो जाएक्षणभंगुर

अन्य महत्वपूर्ण वाक्यांश

वाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
जिसकी उपमा न दी जा सकेअनुपम
दोपहर के बाद का समयअपराह्न
दोपहर से पहले का समयपूर्वाह्न
जो बिना वेतन के काम करेअवैतनिक
जो कानून के विरुद्ध होअवैध
जिसे क्षमा न किया जा सकेअक्षम्य
साथ काम करने वाला व्यक्तिसहकर्मी
साथ पढ़ने वाला व्यक्तिसहपाठी
गोद लिया हुआ पुत्रदत्तक
अच्छे आचरण वालासदाचारी

क्रम संख्यावाक्यांश (Phrase)एक शब्द (One Word)
51.जिसका जन्म अभी-अभी हुआ होनवजात
52.जिसका कोई आकार न होनिराकार
53.जिसका अंत न होअनंत
54.जो कभी बूढ़ा न होअजर
55.जो कभी न मरेअमर
56.जिसके माता-पिता न होंअनाथ
57.जिसका पति मर गया होविधवा
58.जिसकी पत्नी मर गई होविधुर
59.जो स्त्री कविता लिखती होकवयित्री
60.जो खाने योग्य न होअखाद्य
61.जो पीने योग्य होपेय
62.जो दिखाई न देता होअदृश्य
63.जो पहले जन्मा हो (बड़ा भाई)अग्रज
64.जो बाद में जन्मा हो (छोटा भाई)अनुज
65.जो मांस खाता होमांसाहारी
66.जो शाक-सब्जी खाता होशाकाहारी
67.जो सब कुछ खाता होसर्वाहारी
68.जो अपने ऊपर निर्भर होआत्मनिर्भर
69.हाथ से लिखा हुआहस्तलिखित
70.अपने देश से प्रेम करने वालादेशभक्त
71.दूसरों पर उपकार करने वालापरोपकारी
72.काम से जी चुराने वालाकामचोर
73.रास्ता दिखाने वालापथप्रदर्शक/मार्गदर्शक
74.जिसके आने की तिथि न होअतिथि
75.जिसकी ग्रीवा (गर्दन) सुंदर होसुग्रीव
76.जो आसानी से मिल जाएसुलभ
77.जो कठिनाई से मिलता होदुर्लभ
78.जंगल में लगने वाली आगदावाग्नि / दावानल
79.समुद्र में लगने वाली आगबड़वाग्नि / बड़वानल
80.पेट में लगने वाली आग (भूख)जठराग्नि
81.जो जन्म से अंधा होजन्मांध
82.मन की बात जानने वालाअंतर्यामी
83.रात में घूमने-फिरने वालानिशाचर
84.जल में रहने वाला जीवजलचर
85.पृथ्वी पर रहने वाला जीवथलचर
86.आकाश में उड़ने वालानभचर
87.बिना किसी विरोध केनिर्विरोध
88.जिसे करना आवश्यक होअनिवार्य
89.जिसके नीचे रेखा खींची होरेखांकित
90.जो कानून के अनुसार होवैध
91.दूसरे के अधीन रहने वालापराधीन
92.जिसके समान कोई दूसरा न होअद्वितीय
93.जिसका कोई इलाज न हो सकेअसाध्य
94.अपनी हत्या स्वयं करनाआत्महत्या
95.इंद्रियों को जीतने वालाजितेंद्रिय
96.दूसरों से ईर्ष्या करने वालाईर्ष्यालु
97.जो इतिहास से संबंधित होऐतिहासिक
98.किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहनाअतिशयोक्ति
99.जिसकी गिनती न की जा सकेअनगिनत / अगणित
100.जो पहले किसी पद पर रहा होभूतपूर्व


मुहावरे और लोकोक्तियाँ (Idioms and Proverbs)

हिन्दी भाषा की सुंदरता और प्रभावशीलता को बढ़ाने में मुहावरों और लोकोक्तियों का विशेष स्थान है। ये भाषा को सजीव, रोचक और शक्तिशाली बनाते हैं। आम बोलचाल से लेकर साहित्यिक रचनाओं तक, इनका प्रयोग भाषा में जान डाल देता है।

आइए, इन दोनों को विस्तार से और सरल शब्दों में समझते हैं।


1. मुहावरे (Idioms)

परिभाषा:
‘मुहावरा’ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘अभ्यास’।
जब कोई वाक्यांश (phrase) अपने शाब्दिक (literal) अर्थ को छोड़कर किसी विशेष या विलक्षण (figurative) अर्थ को प्रकट करता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।

मुहावरों की विशेषताएँ और पहचान:

  1. यह एक वाक्यांश होता है, पूरा वाक्य नहीं: जैसे – “आँखें खुलना”। यह अपने आप में अधूरा है।
  2. इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं होता: इसे किसी वाक्य का अंग बनकर ही प्रयोग किया जा सकता है।
  3. लिंग, वचन और क्रिया के अनुसार इसका रूप बदल जाता है:
    • रमेश की आँखें खुल गईं
    • समय आने पर तुम्हारी भी आँखें खुल जाएँगी
  4. इसके अंत में अक्सर क्रिया पद (Verb) ‘ना’ लगा होता है: जैसे – भाग जाना, आँख लगना, कान भरना
  5. यह एक विशेष अर्थ देता है: इसका शाब्दिक अर्थ काम नहीं करता।

उदाहरण:


2. लोकोक्तियाँ (Proverbs)

परिभाषा:
‘लोकोक्ति’ शब्द ‘लोक + उक्ति’ से बना है, जिसका अर्थ है – “लोगों में प्रचलित कहावत (saying)”
लोकोक्तियाँ जीवन के अनुभवों, पारंपरिक ज्ञान और सत्य को एक संक्षिप्त वाक्य में प्रकट करती हैं। इन्हें कहावतें भी कहते हैं।

लोकोक्तियों की विशेषताएँ और पहचान:

  1. यह अपने आप में एक पूरा वाक्य होती है: जैसे – “अधजल गगरी छलकत जाए।”
  2. इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है: इसे किसी बात की पुष्टि, खंडन या उदाहरण देने के लिए वाक्य के अंत या आरंभ में प्रयोग करते हैं।
  3. इसका रूप कभी नहीं बदलता: यह जैसी है, वैसी ही प्रयोग होती है।
  4. यह किसी अनुभव या सत्य पर आधारित होती है: इसमें एक गहरी सीख छिपी होती है।

उदाहरण:


3. मुहावरे और लोकोक्ति में मुख्य अंतर (Key Differences)

यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अक्सर भ्रमित करता है।

आधार (Basis)मुहावरा (Idiom)लोकोक्ति (Proverb)
संरचनायह एक वाक्यांश (phrase) होता है।यह एक पूरा वाक्य (sentence) होती है।
प्रयोगइसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता।इसका स्वतंत्र प्रयोग हो सकता है।
रूप-परिवर्तनलिंग, वचन, क्रिया के अनुसार रूप बदल जाता हैइसका रूप कभी नहीं बदलता
अंतइसके अंत में प्रायः ‘ना’ आता है।इसके साथ ऐसा कोई नियम नहीं है।
उद्देश्यभाषा में चमत्कार और सजीवता लाना।किसी अनुभव, सत्य या सीख को प्रकट करना।

4. कुछ प्रमुख मुहावरे और उनके अर्थ

  1. अंगूठा दिखाना – साफ़ इनकार कर देना।
  2. आँखों का तारा – बहुत प्यारा।
  3. ईद का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना।
  4. कमर कसना – तैयार हो जाना।
  5. कान भरना – चुगली करना।
  6. नौ दो ग्यारह होना – भाग जाना।
  7. आग में घी डालना – क्रोध को और भड़काना।
  8. दाँतों तले उँगली दबाना – हैरान रह जाना।
  9. लोहे के चने चबाना – बहुत कठिन काम करना।
  10. खून का घूँट पीकर रह जाना – गुस्सा मन में दबा लेना।

5. कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ और उनके अर्थ

  1. अंधों में काना राजा – मूर्खों के बीच कम ज्ञान वाला भी विद्वान माना जाता है।
  2. एक अनार सौ बीमार – चीज़ कम और चाहने वाले अधिक।
  3. ऊँची दुकान, फीका पकवान – केवल बाहरी दिखावा, असल में गुण न होना।
  4. कंगाली में आटा गीला – मुसीबत में और मुसीबत आना।
  5. घर का भेदी, लंका ढाए – आपसी फूट विनाश का कारण बनती है।
  6. जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ – परिश्रम करने वालों को ही सफलता मिलती है।
  7. नाच न जाने, आँगन टेढ़ा – अपनी गलती छिपाने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ना।
  8. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद – मूर्ख व्यक्ति गुणों की कद्र नहीं कर सकता।
  9. एक हाथ से ताली नहीं बजती – झगड़ा एक तरफ से नहीं होता।
  10. मन चंगा तो कठौती में गंगा – यदि मन पवित्र है तो घर ही तीर्थ है।


वाक्य-विचार (Syntax)

“वाक्य-विचार” व्याकरण का वह भाग है, जिसमें वाक्य की परिभाषा, उसके अंग (parts), प्रकार (types), संरचना (structure) और रूपांतरण (transformation) का अध्ययन किया जाता है।


1. वाक्य क्या है? (Definition of a Sentence)

परिभाषा:
शब्दों का वह व्यवस्थित (systematic) और सार्थक (meaningful) समूह, जो किसी भाव या विचार को पूरी तरह से व्यक्त कर सके, वाक्य कहलाता है।


2. वाक्य के अंग (Parts of a Sentence)

संरचना के आधार पर वाक्य के दो मुख्य अंग होते हैं:

क) उद्देश्य (Subject)

वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं।
यह सामान्यतः वाक्य का कर्ता (doer) होता है।

ख) विधेय (Predicate)

वाक्य में उद्देश्य (कर्ता) के बारे में जो कुछ भी कहा जाता है, उसे विधेय कहते हैं।
इसमें मुख्य रूप से क्रिया, कर्म और उनके विस्तारक शब्द आते हैं।


3. वाक्य के भेद (Types of Sentences)

वाक्यों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:

(A) अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद
(B) रचना (बनावट) के आधार पर वाक्य के 3 भेद


(A) अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद (Based on Meaning)

  1. विधानवाचक वाक्य (Assertive Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के होने या करने की सामान्य जानकारी मिलती है।
    • उदा: सूर्य पूर्व से उगता है। बच्चे खेल रहे हैं।
  2. निषेधवाचक वाक्य (Negative Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के न होने का बोध हो।
    • उदा: मैं आज स्कूल नहीं जाऊँगा। उसने खाना नहीं खाया।
  3. प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative Sentence): वह वाक्य जिसमें कोई प्रश्न पूछा जाए।
    • उदा: क्या तुम पढ़ रहे हो? तुम कहाँ रहते हो?
  4. आज्ञावाचक वाक्य (Imperative Sentence): वह वाक्य जिसमें आज्ञा, अनुमति, प्रार्थना या उपदेश का भाव हो।
    • उदा: तुम बाहर जाओ। कृपया शांत रहें।
  5. इच्छावाचक वाक्य (Optative Sentence): वह वाक्य जिसमें इच्छा, शुभकामना, आशीर्वाद या अभिशाप का भाव हो।
    • उदा: आपकी यात्रा मंगलमय हो। ईश्वर तुम्हारा भला करे।
  6. संदेहवाचक वाक्य (Doubtful Sentence): वह वाक्य जिसमें किसी काम के होने में संदेह या संभावना का भाव हो।
    • पहचान: शायद, संभवतः, हो सकता है।
    • उदा: शायद आज बारिश हो। संभवतः वह कल आएगा।
  7. विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory Sentence): वह वाक्य जिसमें हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य जैसे भाव प्रकट हों।
    • पहचान: !, वाह!, अरे!, छि!, ओह!
    • उदा: वाह! कितना सुंदर दृश्य है। ओह! बहुत बुरा हुआ।
  8. संकेतवाचक वाक्य (Conditional Sentence): वह वाक्य जिसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करे।
    • पहचान: यदि…तो, अगर…तो।
    • उदा: यदि तुम मेहनत करते, तो अवश्य सफल होते।

(B) रचना (बनावट) के आधार पर वाक्य के 3 भेद (Based on Structure)

  1. सरल वाक्य (Simple Sentence):
    • पहचान: जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय (अर्थात् एक ही मुख्य क्रिया) हो।
    • उदा:
      • बारिश हो रही है। (क्रिया: हो रही है)
      • बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। (क्रिया: खेल रहे हैं)
  2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence):
    • पहचान: जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र (independent) उपवाक्य किसी योजक शब्द (conjunction) से जुड़े हों। ये उपवाक्य अपना स्वतंत्र अर्थ रखते हैं।
    • प्रमुख योजक शब्द: और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, फिर भी, तो, नहीं तो, किंतु, परंतु, लेकिन।
    • उदा:
      • वह सुबह गया और शाम को लौट आया।
      • (यहाँ ‘वह सुबह गया’ और ‘शाम को लौट आया’ दोनों स्वतंत्र वाक्य हैं।)
      • मैंने बहुत मेहनत की, किंतु सफल नहीं हो सका।
  3. मिश्र / मिश्रित वाक्य (Complex Sentence):
    • पहचान: जिस वाक्य में एक मुख्य (प्रधान) उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित (dependent) उपवाक्य हों। आश्रित उपवाक्य अपने अर्थ के लिए मुख्य उपवाक्य पर निर्भर रहता है।
    • प्रमुख योजक शब्द: कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, यद्यपि, तथापि।
    • उदा:
      • शिक्षक ने बताया कि कल विद्यालय में अवकाश है।
      • (यहाँ ‘कि कल विद्यालय में अवकाश है’ वाक्य ‘शिक्षक ने बताया’ पर आश्रित है।)
      • जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह सफल होता है।

4. वाक्य-रूपांतरण (Sentence Transformation)

एक प्रकार के वाक्य को बिना अर्थ बदले दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना वाक्य-रूपांतरण कहलाता है।



पद-परिचय (Grammatical Parsing)

परिभाषा:
जैसे हम किसी व्यक्ति से मिलते समय अपना परिचय देते हैं (नाम, पता, काम आदि), ठीक उसी तरह, वाक्य में आए प्रत्येक पद (शब्द) का व्याकरणिक परिचय देना ही पद-परिचय कहलाता है।


1. पद-परिचय के लिए आवश्यक बातें

किसी भी पद का परिचय देने के लिए हमें व्याकरण की इन बातों का ज्ञान होना अनिवार्य है:

  1. संज्ञा और उसके भेद, लिंग, वचन, कारक।
  2. सर्वनाम और उसके भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक।
  3. विशेषण और उसके भेद, अवस्था, लिंग, वचन, विशेष्य।
  4. क्रिया और उसके भेद (अकर्मक/सकर्मक), काल, वाच्य, लिंग, वचन।
  5. अव्यय और उसके भेद:
    • क्रिया-विशेषण (भेद और जिस क्रिया की विशेषता बताए)
    • संबंधबोधक (किससे संबंध है)
    • समुच्चयबोधक (किसे जोड़ रहा है)
    • विस्मयादिबोधक (कौन-सा भाव है)

2. पद-परिचय कैसे करें? (How to Parse?)

हर प्रकार के पद (शब्द) का परिचय देने के लिए कुछ निश्चित बातें बतानी होती हैं।

(A) विकारी पदों का परिचय (जो लिंग, वचन से बदलते हैं)

पद का प्रकारपरिचय में क्या-क्या बताना है?
1. संज्ञा (Noun)1. भेद: (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक) <br> 2. लिंग: (पुल्लिंग / स्त्रीलिंग) <br> 3. वचन: (एकवचन / बहुवचन) <br> 4. कारक: (कर्ता, कर्म, करण, आदि) <br> 5. क्रिया के साथ संबंध: (कर्ता है, कर्म है, आदि)
2. सर्वनाम (Pronoun)1. भेद: (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, आदि) <br> 2. पुरुष: (उत्तम, मध्यम, अन्य) <br> 3. लिंग: (क्रिया के अनुसार) <br> 4. वचन: (एकवचन / बहुवचन) <br> 5. कारक और क्रिया से संबंध
3. विशेषण (Adjective)1. भेद: (गुणवाचक, संख्यावाचक, आदि) <br> 2. अवस्था: (मूलावस्था, उत्तरावस्था, उत्तमावस्था) <br> 3. लिंग: (विशेष्य के अनुसार) <br> 4. वचन: (विशेष्य के अनुसार) <br> 5. विशेष्य: (किस संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बता रहा है)
4. क्रिया (Verb)1. भेद: (अकर्मक / सकर्मक / प्रेरणार्थक) <br> 2. वाच्य: (कर्तृवाच्य / कर्मवाच्य / भाववाच्य) <br> 3. काल: (भूत / वर्तमान / भविष्य) <br> 4. लिंग: (कर्ता/कर्म के अनुसार) <br> 5. वचन: (कर्ता/कर्म के अनुसार) <br> 6. कर्ता का संकेत

(B) अविकारी पदों (अव्यय) का परिचय (जो नहीं बदलते)

पद का प्रकारपरिचय में क्या-क्या बताना है?
1. क्रिया-विशेषण1. भेद: (रीतिवाचक, कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक) <br> 2. वह क्रिया जिसकी विशेषता बता रहा है।
2. संबंधबोधक1. भेद: (कालवाचक, स्थानवाचक, आदि) <br> 2. जिन पदों से संबंध जोड़ रहा है।
3. समुच्चयबोधक1. भेद: (समानाधिकरण / व्यधिकरण) <br> 2. जिन शब्दों या वाक्यों को जोड़ रहा है।
4. विस्मयादिबोधक1. कौन-सा भाव प्रकट कर रहा है (हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा)।

3. पद-परिचय का एक विस्तृत उदाहरण

वाक्य: अरे! रमेश की छोटी बहन आज बस से विद्यालय गई।

आइए, इस वाक्य के प्रत्येक पद का परिचय देते हैं:

पद (Word)व्याकरणिक परिचय (Grammatical Parsing)
अरे!विस्मयादिबोधक, आश्चर्य का भाव प्रकट कर रहा है।
रमेश की1. संज्ञा – व्यक्तिवाचक <br> 2. लिंग – पुल्लिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – संबंध कारक (‘बहन’ से संबंध बता रहा है)।
छोटी1. विशेषण – गुणवाचक, मूलावस्था <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग (विशेष्य ‘बहन’ के अनुसार) <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. विशेष्य – ‘बहन’।
बहन1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – कर्ता कारक (‘गई’ क्रिया का कर्ता)।
आज1. क्रिया-विशेषण – कालवाचक <br> 2. ‘गई’ क्रिया के होने का समय बता रहा है।
बस से1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – करण कारक (जाने का साधन)।
विद्यालय1. संज्ञा – जातिवाचक <br> 2. लिंग – पुल्लिंग <br> 3. वचन – एकवचन <br> 4. कारक – कर्म कारक (यहाँ ‘स्थान’ के अर्थ में है, अतः अधिकरण कारक भी कुछ विद्वान मानते हैं, पर कर्म अधिक सटीक है)।
गई1. क्रिया – अकर्मक <br> 2. वाच्य – कर्तृवाच्य <br> 3. काल – सामान्य भूतकाल <br> 4. लिंग – स्त्रीलिंग <br> 5. वचन – एकवचन <br> 6. कर्ता – ‘बहन’।

4. पद-परिचय के लिए सरल ट्रिक्स

  1. पहले शब्द का भेद पहचानें: सबसे पहले यह નક્કી करें कि शब्द संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया या अव्यय में से क्या है।
  2. विकारी या अविकारी: यह तय करें कि शब्द विकारी है (बदलने वाला) या अविकारी (न बदलने वाला)। अविकारी का परिचय बहुत सरल होता है।
  3. लिंग और वचन: लिंग और वचन की पहचान के लिए उसे क्रिया के साथ या वाक्य में प्रयोग करके देखें।
  4. कारक की पहचान: कारक को पहचानने के लिए विभक्ति चिह्नों (ने, को, से, का, में, पर, के लिए) पर ध्यान दें।
  5. क्रिया-विशेषण की पहचान: क्रिया से “कैसे?”, “कब?”, “कहाँ?”, “कितना?” प्रश्न पूछें। जो उत्तर मिलेगा, वह क्रिया-विशेषण होगा।

पद-परिचय अभ्यास का विषय है। जितना अधिक आप इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही सरल होता जाएगा।


विराम चिह्न (Punctuation Marks)

अर्थ और परिभाषा:
‘विराम’ का शाब्दिक अर्थ होता है— ‘ठहराव’ या ‘रुकना’
लिखित भाषा में, पढ़ते समय ठहराव (pause) को दर्शाने और वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए जिन संकेतों या चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं।

महत्व:
विराम चिह्न लिखित भाषा के वे संकेत हैं जो बताते हैं कि हमें कहाँ, कितना और कैसे रुकना है ताकि भाव स्पष्ट हो सके। इनके बिना लिखित भाषा दिशाहीन और भ्रामक हो सकती है।


प्रमुख विराम चिह्न और उनके प्रयोग (Major Punctuation Marks and their Usage)

हिन्दी में प्रयोग होने वाले प्रमुख विराम चिह्न निम्नलिखित हैं:

1. पूर्ण विराम ( । ) – Full Stop

2. अल्प विराम ( , ) – Comma

3. अर्ध विराम ( ; ) – Semicolon

4. प्रश्नवाचक चिह्न ( ? ) – Question Mark

5. विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) – Exclamation Mark

6. योजक चिह्न ( – ) – Hyphen

7. निर्देशक चिह्न ( — ) – Dash

8. उद्धरण चिह्न ( “…” / ‘…’ ) – Quotation Marks

9. कोष्ठक चिह्न ( ( ) ) – Parentheses/Brackets

10. लाघव चिह्न ( ० ) – Abbreviation Sign

11. विवरण चिह्न ( :- ) – Colon-Dash

12. हंसपद या त्रुटिबोधक चिह्न ( ^ ) – Caret


विराम चिह्नों का सही ज्ञान और प्रयोग हमारी लिखित अभिव्यक्ति को स्पष्ट, सटीक और प्रभावशाली बनाता है।


वाक्य-शुद्धि एवं शब्द-शुद्धि (Sentence and Word Correction)

शुद्ध भाषा के लिए शब्दों और वाक्यों, दोनों का शुद्ध होना अनिवार्य है। आइए, इन दोनों के नियमों और उदाहरणों को व्यवस्थित तालिकाओं में देखें।


भाग 1: शब्द-शुद्धि (वर्तनी-शुद्धि)

यहाँ शब्दों में होने वाली सामान्य अशुद्धियों को उनके शुद्ध रूप और नियम के साथ प्रस्तुत किया गया है।

अशुद्धि का प्रकारअशुद्ध (गलत)शुद्ध (सही)कारण / नियम
मात्रा संबंधीकवित्रीकवयित्री‘व’ पर कोई मात्रा नहीं, ‘य’ पर छोटी ‘इ’।
निरोगनीरोगसंधि नियम (निः + रोग), ‘न’ पर बड़ी ‘ई’।
पत्निपत्नीस्त्रीलिंग शब्द में अंत में प्रायः बड़ी ‘ई’ आती है।
त्यौहारत्योहारएक मात्रा (‘ओ’) का प्रयोग होता है, दो (‘औ’) का नहीं।
‘र’ के रूप संबंधीआर्शिवादआशीर्वाद‘र्’ की ध्वनि ‘शी’ के बाद है, इसलिए ‘वा’ पर लगेगा।
श्रृंगारशृंगार‘श्’ के साथ ‘ऋ’ की मात्रा लगती है, ‘र’ नहीं।
श्रोतस्रोत‘स’ के नीचे ‘र’ (पदेन) का प्रयोग होता है।
संयुक्त अक्षर संबंधीउज्जवलउज्ज्वलइसमें दो आधे ‘ज्’ का प्रयोग होता है।
चिन्हचिह्न‘ह्’ आधा होता है और ‘न’ पूरा होता है।
महत्वमहत्त्व‘महत्’ और ‘त्व’ के योग से दो आधे ‘त्’ आते हैं।
श/ष/स संबंधीपुरुस्कारपुरस्कारविसर्ग संधि (पुरः + कार) के कारण ‘स’ आता है।
प्रसंशाप्रशंसापहला ‘श’ (शलगम) और दूसरा ‘स’ (सपेरा) नहीं, बल्कि दोनों ‘श’ होते हैं।
अनावश्यक वर्णअत्याधिकअत्यधिक‘अति + अधिक’ से बनता है, इसमें ‘आ’ की मात्रा नहीं लगती।
पूज्यनीयपूजनीयया तो ‘पूज्य’ होता है या ‘पूजनीय’। ‘पूज्यनीय’ गलत है।

भाग 2: वाक्य-शुद्धि

यहाँ वाक्यों में होने वाली विभिन्न प्रकार की व्याकरणिक अशुद्धियों को उनके शुद्ध रूप और कारण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

1. पदक्रम (Word Order) संबंधी अशुद्धि

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्यकारण
यहाँ शुद्ध गाय का घी मिलता है।यहाँ गाय का शुद्ध घी मिलता है।विशेषण ‘शुद्ध’ घी के लिए है, गाय के लिए नहीं।
एक फूलों की माला बनाओ।फूलों की एक माला बनाओ।माला ‘एक’ है, फूल अनेक हैं।
भीड़ में कई जयपुर के व्यक्ति थे।भीड़ में जयपुर के कई व्यक्ति थे।‘कई’ संख्यावाचक विशेषण ‘व्यक्ति’ के साथ आएगा।

2. अन्वय (Agreement) संबंधी अशुद्धि (लिंग, वचन, क्रिया का मेल)

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्यकारण
दही बहुत खट्टी है।दही बहुत खट्टा है।‘दही’ पुल्लिंग शब्द है।
मेरा प्राण छटपटाने लगा।मेरे प्राण छटपटाने लगे।‘प्राण’, ‘दर्शन’, ‘हस्ताक्षर’ हमेशा बहुवचन होते हैं।
अनेकों लोग वहाँ थे।अनेक लोग वहाँ थे।‘अनेक’ शब्द स्वयं में बहुवचन है, ‘अनेकों’ गलत है।

3. पुनरुक्ति (Redundancy) संबंधी अशुद्धि

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्यकारण
कृपया वापस लौट आएँ।कृपया वापस आएँ / कृपया लौट आएँ।‘वापस’ और ‘लौटना’ का अर्थ समान है।
वह प्रातःकाल के समय टहलता है।वह प्रातःकाल टहलता है।‘प्रातःकाल’ में ‘समय’ का अर्थ पहले से निहित है।
शायद वह अवश्य आएगा।शायद वह आए / वह अवश्य आएगा।‘शायद’ (अनिश्चितता) और ‘अवश्य’ (निश्चितता) एक साथ नहीं आते।

4. सर्वनाम (Pronoun) संबंधी अशुद्धि

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्यकारण
मेरे को नहीं पता।मुझे नहीं पता।‘मेरे को’ भाषा का अशुद्ध रूप है, ‘मुझे’ मानक है।
आप आपका काम कीजिए।आप अपना काम कीजिए।‘आप’ सर्वनाम के साथ निजवाचक ‘अपना’ का प्रयोग होता है।
जो मेहनत करेगा, वह पास होगा।जो मेहनत करेगा, सो पास होगा।‘जो’ के साथ संबंध बताने के लिए ‘सो’ का प्रयोग होता है।

5. कारक (Case) संबंधी अशुद्धि

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्यकारण
मैंने आज અમદાવાદ जाना है।मुझे आज अहमदाबाद जाना है।इस तरह के वाक्यों में ‘ने’ की जगह ‘को’ (मुझे) विभक्ति लगती है।
पेड़ में से पत्ते गिर रहे हैं।पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं।अलग होने के भाव में ‘से’ (अपादान कारक) का प्रयोग होता है।
वह बाजार में गया।वह बाज़ार गया।‘गया’ क्रिया के साथ ‘में’ परसर्ग का प्रयोग अनावश्यक है।