लिंग (Gender)
परिभाषा:
संज्ञा शब्द के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे व्याकरण में ‘लिंग’ कहते हैं।
- ‘लिंग’ शब्द का अर्थ है ‘चिह्न’ या ‘पहचान’।
- यह एक व्याकरणिक अवधारणा है जो केवल प्राणियों पर ही नहीं, बल्कि निर्जीव वस्तुओं पर भी लागू होती है।
- लिंग का निर्धारण शब्द के रूप या उसके साथ प्रयोग होने वाली क्रिया या विशेषण से होता है।
उदाहरण:
- लड़का खेलता है। (कर्ता ‘लड़का’ पुरुष जाति का है, इसलिए क्रिया ‘खेलता है’ भी पुल्लिंग है)।
- लड़की खेलती है। (कर्ता ‘लड़की’ स्त्री जाति की है, इसलिए क्रिया ‘खेलती है’ भी स्त्रीलिंग है)।
- बड़ा कमरा (पुल्लिंग) / बड़ी गाड़ी (स्त्रीलिंग) – (विशेषण से पहचान)
लिंग के भेद (Types of Gender)
हिन्दी व्याकरण में लिंग के दो (2) भेद माने जाते हैं:
- पुल्लिंग (Masculine Gender)
- स्त्रीलिंग (Feminine Gender)
(संस्कृत में एक तीसरा लिंग, ‘नपुंसकलिंग’ भी होता है, लेकिन हिन्दी में केवल दो ही लिंग होते हैं।)
1. पुल्लिंग (Masculine Gender)
- परिभाषा: संज्ञा के जिस रूप से उसके पुरुष जाति के होने का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
- उदाहरण:
- प्राणी: राम, लड़का, पिता, भाई, शेर, घोड़ा, कुत्ता, मोर।
- वस्तु/पदार्थ: घर, कमरा, पहाड़, पेड़, पेन, कंप्यूटर, लोहा, सोना, घी, दूध।
- भाव: दुःख, प्रेम, क्रोध, बचपन, बुढ़ापा, गौरव।
2. स्त्रीलिंग (Feminine Gender)
- परिभाषा: संज्ञा के जिस रूप से उसके स्त्री जाति के होने का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
- उदाहरण:
- प्राणी: सीता, लड़की, माता, बहन, शेरनी, घोड़ी, कुतिया, मोरनी।
- वस्तु/पदार्थ: गाड़ी, नदी, किताब, कलम, कुर्सी, रोटी, दाल, चाँदी, हवा।
- भाव: खुशी, दया, करुणा, सुंदरता, ईमानदारी, गरीबी, जवानी।
लिंग पहचानने के नियम (Rules for Identifying Gender)
लिंग की पहचान दो तरह से की जाती है: प्राणीवाचक और अप्राणीवाचक शब्दों के लिए।
A. प्राणीवाचक संज्ञाओं के लिए (For Living Beings):
- जिन शब्दों से ‘नर’ (male) का बोध हो, वे पुल्लिंग होते हैं। (जैसे – पिता, राजा, बैल)
- जिन शब्दों से ‘मादा’ (female) का बोध हो, वे स्त्रीलिंग होते हैं। (जैसे – माता, रानी, गाय)
- नित्य पुल्लिंग शब्द: कुछ प्राणी हमेशा पुल्लिंग होते हैं (जैसे – कौआ, तोता, मच्छर, चीता, खटमल, खरगोश)। इनका स्त्रीलिंग बनाने के लिए इनके पहले ‘मादा’ शब्द जोड़ा जाता है (जैसे – मादा कौआ, मादा मच्छर)।
- नित्य स्त्रीलिंग शब्द: कुछ प्राणी हमेशा स्त्रीलिंग होते हैं (जैसे – कोयल, मछली, तितली, मकड़ी, लोमड़ी, गिलहरी)। इनका पुल्लिंग बनाने के लिए इनके पहले ‘नर’ शब्द जोड़ा जाता है (जैसे – नर कोयल, नर मछली)।
B. अप्राणीवाचक (निर्जीव) संज्ञाओं के लिए (For Non-Living Things):
निर्जीव वस्तुओं का लिंग परंपरागत होता है, यानी जैसा समाज में बोला जाता है, वैसा ही माना जाता है। इसे पहचानने के लिए व्याकरणिक प्रयोग सबसे सहायक होते हैं:
ट्रिक 1: सर्वनाम का प्रयोग
- शब्द के साथ ‘मेरा/मेरी’ या ‘उसका/उसकी’ लगाकर देखें।
- पुल्लिंग: मेरा घर, मेरा पेन, उसका गुस्सा। (‘मेरा’ ठीक लगे तो पुल्लिंग)
- स्त्रीलिंग: मेरी किताब, मेरी गाड़ी, उसकी ईमानदारी। (‘मेरी’ ठीक लगे तो स्त्रीलिंग)
ट्रिक 2: विशेषण का प्रयोग
- शब्द के साथ ‘अच्छा/अच्छी’ या ‘बड़ा/बड़ी’ लगाकर देखें।
- पुल्लिंग: अच्छा कमरा, बड़ा पेड़। (‘अच्छा’ ठीक लगे तो पुल्लिंग)
- स्त्रीलिंग: अच्छी कहानी, बड़ी नदी। (‘अच्छी’ ठीक लगे तो स्त्रीलिंग)
ट्रिक 3: क्रिया का प्रयोग (सबसे कारगर ट्रिक)
- शब्द का वाक्य में प्रयोग करके देखें कि उसके साथ क्रिया का रूप कैसा आता है।
- पुल्लिंग: पहाड़ ऊँचा है। / सूरज निकलता है।
- स्त्रीलिंग: नदी बहती है। / ट्रेन चल रही है।
कुछ सामान्य नियम:
- पुल्लिंग शब्दों की पहचान:
- पर्वतों के नाम: हिमालय, अरावली, विंध्याचल।
- देशों के नाम: भारत, अमेरिका, जापान (अपवाद: श्रीलंका स्त्रीलिंग है)।
- ग्रहों के नाम: सूर्य, चंद्र, मंगल, शुक्र (अपवाद: पृथ्वी स्त्रीलिंग है)।
- दिनों और महीनों के नाम: सोमवार, मंगलवार; चैत्र, वैशाख (अपवाद: जनवरी, फरवरी, मई, जुलाई – स्त्रीलिंग माने जाते हैं)।
- पेड़ों के नाम: आम, नीम, पीपल, बरगद (अपवाद: इमली, नारंगी, लीची – स्त्रीलिंग हैं)।
- धातुओं के नाम: सोना, लोहा, ताँबा, पीतल (अपवाद: चाँदी स्त्रीलिंग है)।
- जिन शब्दों के अंत में ‘अ’, ‘आ’, ‘पन’, ‘त्व’ आएँ: तन, मन, धन; मोटापा; लड़कपन; पुरुषत्व।
- स्त्रीलिंग शब्दों की पहचान:
- नदियों के नाम: गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी (अपवाद: ब्रह्मपुत्र, सिंधु, सोन – पुल्लिंग हैं)।
- भाषाओं और लिपियों के नाम: हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत; देवनागरी, रोमन।
- तिथियों के नाम: प्रथमा, द्वितीया, पूर्णिमा, अमावस्या।
- नक्षत्रों के नाम: अश्विनी, रोहिणी, भरणी।
- जिन शब्दों के अंत में ‘ई’, ‘आवट’, ‘हट’, ‘ता’, ‘इया’ आएँ: नदी, चिट्ठी; सजावट, लिखावट; घबराहट; सुंदरता, मित्रता; गुड़िया, डिबिया।
लिंग परिवर्तन के नियम (Rules for Gender Change)
पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के कुछ सामान्य नियम हैं:
- ‘अ’/’आ’ को ‘ई’ में बदलकर → लड़का → लड़की; घोड़ा → घोड़ी
- ‘अ’ को ‘आ’ में बदलकर → छात्र → छात्रा
- ‘अक’ को ‘इका’ में बदलकर → लेखक → लेखिका
- शब्द के अंत में ‘इन’ लगाकर → माली → मालिन; धोबी → धोबिन
- शब्द के अंत में ‘आनी’ लगाकर → सेठ → सेठानी; देवर → देवरानी
- शब्द के अंत में ‘नी’ लगाकर → शेर → शेरनी; मोर → मोरनी
- ‘ता’ को ‘त्री’ में बदलकर → नेता → नेत्री; कर्ता → कर्त्री
- ‘वान’ को ‘वती’ में बदलकर → गुणवान → गुणवती
- ‘मान’ को ‘मती’ में बदलकर → बुद्धिमान → बुद्धिमती
वचन (Number)
परिभाषा:
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या क्रिया के जिस रूप से उसकी संख्या का बोध होता है, अर्थात् यह पता चलता है कि वह एक है या एक से अधिक है, उसे व्याकरण में ‘वचन’ कहते हैं।
- ‘वचन’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘संख्या-कथन’ या संख्या बताना।
- यह हमें बताता है कि वर्णित व्यक्ति, वस्तु या प्राणी संख्या में कितना है।
उदाहरण:
- लड़का खेलता है। (यहाँ ‘लड़का’ शब्द से एक होने का बोध हो रहा है)।
- लड़के खेलते हैं। (यहाँ ‘लड़के’ शब्द से एक से अधिक होने का बोध हो रहा है)।
वचन के भेद (Types of Number)
हिन्दी व्याकरण में वचन के दो (2) भेद माने जाते हैं:
- एकवचन (Singular Number)
- बहुवचन (Plural Number)
(संस्कृत में एक तीसरा वचन, ‘द्विवचन’ भी होता है, जो दो की संख्या बताता है, लेकिन हिन्दी में केवल दो ही वचन होते हैं।)
1. एकवचन (Singular Number)
- परिभाषा: शब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या पदार्थ के एक होने का बोध होता है, उसे एकवचन कहते हैं।
- उदाहरण:
- लड़की, पुस्तक, नदी, कुर्सी, तोता, बच्चा, आँख, सड़क, रात, कहानी।
2. बहुवचन (Plural Number)
- परिभाषा: शब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या पदार्थ के एक से अधिक होने का बोध होता है, उसे बहुवचन कहते हैं।
- उदाहरण:
- लड़कियाँ, पुस्तकें, नदियाँ, कुर्सियाँ, तोते, बच्चे, आँखें, सड़कें, रातें, कहानियाँ।
वचन की पहचान के नियम (Rules for Identification)
वचन की पहचान मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है:
1. संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के रूप द्वारा:
- कुछ शब्दों का रूप बदलकर ही पता चल जाता है कि वे एकवचन हैं या बहुवचन।
- उदाहरण: गमला → गमले, घोड़ा → घोड़े, महिला → महिलाएँ।
2. वाक्य में क्रिया के रूप द्वारा:
- कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका रूप एकवचन और बहुवचन, दोनों में समान रहता है। ऐसे शब्दों का वचन वाक्य में प्रयुक्त क्रिया या सहायक क्रिया से पता चलता है।
- उदाहरण:
- पेड़ हरा है। (एक पेड़, क्रिया ‘है’ से पता चला)।
- पेड़ हरे हैं। (कई पेड़, क्रिया ‘हैं’ से पता चला)।
- हाथी आ रहा है। (एकवचन)।
- हाथी आ रहे हैं। (बहुवचन)।
एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम
1. पुल्लिंग संज्ञाओं के लिए:
- आकारांत पुल्लिंग शब्दों (जिनके अंत में ‘आ’ हो) के ‘आ’ को ‘ए’ में बदलकर:
- लड़का → लड़के, घोड़ा → घोड़े, कमरा → कमरे, बेटा → बेटे
- ‘आ’ के अलावा अन्य स्वरों से अंत होने वाले पुल्लिंग शब्द बहुवचन में समान रहते हैं:
- घर → घर, दिन → दिन, साधु → साधु, डाकू → डाकू, भाई → भाई।
2. स्त्रीलिंग संज्ञाओं के लिए:
- अकारांत स्त्रीलिंग शब्दों (जिनके अंत में ‘अ’ हो) के ‘अ’ को ‘एँ’ में बदलकर:
- बात → बातें, रात → रातें, किताब → किताबें, आँख → आँखें
- आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों (जिनके अंत में ‘आ’ हो) के अंत में ‘एँ’ जोड़कर:
- माता → माताएँ, महिला → महिलाएँ, कविता → कविताएँ
- इकारांत या ईकारांत स्त्रीलिंग शब्दों (जिनके अंत में ‘इ’ या ‘ई’ हो) के अंत में ‘इयाँ’ जोड़कर (बड़ी ‘ई’ को छोटी ‘इ’ में बदल देते हैं):
- लड़की → लड़कियाँ, नदी → नदियाँ, रोटी → रोटियाँ, जाति → जातियाँ
- ‘या’ से अंत होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों के ‘या’ पर चंद्रबिंदु (ँ) लगाकर:
- गुड़िया → गुड़ियाँ, चिड़िया → चिड़ियाँ, डिबिया → डिबियाँ
वचन संबंधी विशेष नियम
- आदर/सम्मान के लिए बहुवचन का प्रयोग:
- आदरणीय व्यक्तियों के लिए (चाहे वे एक ही हों) हमेशा बहुवचन क्रिया का प्रयोग किया जाता है।
- उदाहरण:
- पिताजी आ रहे हैं। (एकवचन व्यक्ति, बहुवचन क्रिया)
- गाँधीजी हमारे राष्ट्रपिता थे।
- आप कब आए?
- सदा एकवचन में रहने वाले शब्द:
- कुछ शब्द हमेशा एकवचन में ही प्रयोग होते हैं, चाहे उनका संदर्भ बहुवचन जैसा लगे।
- द्रव्यवाचक संज्ञाएँ: पानी, दूध, घी, तेल, सोना, चाँदी, लोहा।
- भाववाचक संज्ञाएँ: प्रेम, क्रोध, मिठास, ईमानदारी।
- समूहवाचक संज्ञाएँ (एक इकाई के रूप में): जनता, भीड़, पुलिस, सेना।
- अन्य: आकाश, वर्षा, आग, हर एक, प्रत्येक।
- सदा बहुवचन में रहने वाले शब्द (Most Important for Exams):
- कुछ संज्ञा शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग हिन्दी में हमेशा बहुवचन में ही होता है।
- उदाहरण:
- प्राण: उसके प्राण निकल गए। (गया नहीं)
- दर्शन: मैंने आपके दर्शन किए। (किया नहीं)
- हस्ताक्षर: मैंने कागज पर हस्ताक्षर कर दिए। (दिया नहीं)
- आँसू: उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। (रहा था नहीं)
- होश: यह देखकर मेरे तो होश उड़ गए। (गया नहीं)
- बाल: उसके बाल बहुत सुंदर हैं। (है नहीं)
- दाम, लोग, समाचार, होश आदि।
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द / समोच्चारित शब्द / शब्द-युग्म
परिभाषा:
वे शब्द जो सुनने (श्रुति) में या उच्चारण करने में लगभग एक समान (सम् + उच्चारित) लगते हैं, परंतु उनके अर्थों में पर्याप्त भिन्नता होती है, उन्हें श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द या समोच्चारित शब्द कहा जाता है।
- इन्हें शब्द-युग्म (Word Pair) भी कहते हैं, क्योंकि ये अक्सर जोड़े में पूछे जाते हैं और इनमें सूक्ष्म वर्तनी (spelling) का अंतर होता है।
- इन शब्दों का सही अर्थ न जानने पर वाक्य में प्रयोग करते समय अर्थ का अनर्थ हो सकता है, इसलिए भाषा की शुद्धता और सटीकता के लिए इनका ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।
प्रमुख श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों की सूची (अर्थ सहित)
यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण शब्द-युग्म दिए गए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
| क्र.सं. | शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग से अंतर |
| 1. | अन्न – अन्य | अनाज – दूसरा | किसानों ने अन्न उपजाया। / कोई अन्य व्यक्ति आया था। |
| 2. | अलि – आली | भौंरा – सखी | फूल पर अलि मंडरा रहा है। / सीता अपनी आली से बात कर रही है। |
| 3. | अंश – अंस | हिस्सा/भाग – कंधा | मुझे मेरा अंश दे दो। / सैनिक के अंस पर बंदूक थी। |
| 4. | अपेक्षा – उपेक्षा | तुलना में / आशा – निरादर/तिरस्कार | आपकी अपेक्षा वह अधिक बुद्धिमान है। / गुरु की उपेक्षा मत करो। |
| 5. | अवधि – अवधी | समय-सीमा – एक बोली (भाषा) | कार्य करने की अवधि समाप्त हो गई। / तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस लिखी। |
| 6. | कुल – कूल | वंश/योग/सब – किनारा | रघुकुल की यही रीति है। / नदी का कूल बहुत सुंदर है। |
| 7. | कृति – कृती | रचना – रचनाकार/पुण्यात्मा | ‘गोदान’ प्रेमचंद की प्रसिद्ध कृति है। / वह एक कृती पुरुष है। |
| 8. | गृह – ग्रह | घर – नक्षत्र (planet) | यह मेरा गृह है। / सौरमंडल में आठ ग्रह हैं। |
| 9. | चिर – चीर | पुराना/देर तक – वस्त्र/कपड़ा | वह मेरा चिर परिचित है। / द्रौपदी का चीर हरण हुआ था। |
| 10. | जलद – जलज | बादल – कमल | जलद गरज रहे हैं। / तालाब में जलज खिला है। |
| 11. | दिन – दीन | दिवस/वार – गरीब/असहाय | आज का दिन अच्छा है। / हमें दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए। |
| 12. | दशा – दिशा | हालत/अवस्था – तरफ़/ओर | उसकी दशा बहुत खराब है। / सूर्य पूर्व दिशा से निकलता है। |
| 13. | द्रव – द्रव्य | तरल पदार्थ – पदार्थ/धन-संपत्ति | पानी एक द्रव है। / उसके पास बहुत द्रव्य है। |
| 14. | नियत – नीयत | निश्चित – इरादा/इच्छा | गाड़ी आने का समय नियत है। / उसकी नीयत अच्छी नहीं लगती। |
| 15. | प्रसाद – प्रासाद | कृपा/भोग – महल/भवन | भगवान का प्रसाद ग्रहण करो। / राजा का प्रासाद भव्य था। |
| 16. | परिणाम – परिमाण | फल/नतीजा – मात्रा/नाप-तौल | तुम्हारी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा।/मुझे कम परिमाण में चीनी चाहिए। |
| 17. | पवन – पावन | हवा – पवित्र | शीतल पवन चल रही है। / गंगा एक पावन नदी है। |
| 18. | बलि – बली | बलिदान/भेंट – बलवान/शक्तिशाली | देवी को बलि दी गई। / भीम एक बली योद्धा थे। |
| 19. | बात – वात | वचन/कथन – हवा/वायु | अपनी बात पूरी करो। / उसे वात रोग हो गया है। |
| 20. | सर्ग – स्वर्ग | अध्याय/अंश – देवलोक | रामायण में सात सर्ग (कांड) हैं। / अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं। |
| 21. | सम – शम | बराबर – शांति/संयम | सब सम हैं, कोई बड़ा-छोटा नहीं। / क्रोध को शम करो। |
| 22. | शर – सर | बाण – तालाब/सिर | अर्जुन ने शर चलाया। / कमल सर में खिलता है। |
| 23. | शोक – शौक | दुःख – चाह/लगन | उसकी मृत्यु का मुझे बहुत शोक है। / मुझे किताबें पढ़ने का शौक है। |
| 24. | सूत – सुत | धागा/सारथी – पुत्र/बेटा | यह सूत कात रही है। / दशरथ सुत राम थे। |
| 25. | सुर – सूर | देवता/लय – वीर/अंधा | सुर संगीत गा रहे थे। / सूरदास कृष्ण भक्त थे। |
महत्व (Importance)
- भाषा की शुद्धता: इन शब्दों का सही ज्ञान लेखन और भाषण में शुद्धता लाता है।
- सटीक अभिव्यक्ति: यह आपको अपने विचारों को अधिक सटीक और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में मदद करता है।
- प्रतियोगी परीक्षाएँ: ये शब्द लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे – TET, SSC, State PSCs) के हिन्दी व्याकरण खंड में अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
- शब्द भंडार में वृद्धि: इनके अध्ययन से आपका शब्द-भंडार समृद्ध होता है।
याद करने का तरीका (How to Remember)
इन्हें याद करने का सबसे अच्छा तरीका है प्रत्येक शब्द-युग्म को अपने वाक्य में प्रयोग करके देखना। वाक्य बनाने से उनका अर्थ दिमाग में स्थायी हो जाता है और आप उन्हें कभी नहीं भूलते।
‘अ’ से ‘अं’ तक श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (50 उदाहरण)
- अंस – कंधा
अंश – हिस्सा - अन्न – अनाज
अन्य – दूसरा - अनल – आग
अनिल – हवा - अणु – कण
अनु – एक उपसर्ग (पीछे) - अपेक्षा – तुलना में, आशा
उपेक्षा – निरादर, लापरवाही - अगम – जहाँ पहुँचा न जा सके
आगम – शास्त्र, आगमन - अभिराम – सुंदर
अविराम – बिना रुके, लगातार - अचल – पर्वत
अचला – पृथ्वी - अचर – न चलने वाला
अचिर – शीघ्र, नवीन - अलि – भौंरा
आली – सखी - अब्ज – कमल
अब्द – वर्ष, बादल - अतल – तलहीन
अतुल – जिसकी तुलना न हो - अरि – शत्रु
अरी – संबोधन (स्त्री के लिए) - अध्ययन – पढ़ना
अध्यापन – पढ़ाना - अवलंब – सहारा
अविलंब – बिना देर के, शीघ्र - अंबुज – कमल
अंबुद – बादल - असित – काला
अशित – खाया हुआ - अचार – खाने की वस्तु (pickle)
आचार – आचरण, व्यवहार - अभिज्ञ – जानकार
अनभिज्ञ – अनजान - अर्घ – मूल्य, पूजा का जल
अर्घ्य – पूजनीय - अयुक्त – जो उचित न हो
आयुक्त – कमिश्नर - अवनि – पृथ्वी
अवनी – रक्षा करना - अश्म – पत्थर
अश्व – घोड़ा - अहि – साँप
अह – दिन - अभय – निडर
उभय – दोनों - आकर – खान (mine), स्रोत
आकार – बनावट, सूरत - आरति – दुःख, विरक्ति
आरती – धूप-दीप दिखाना - आयात – बाहर से मंगाना
आयत – एक चतुर्भुज - आभास – झलक, भ्रम
आवास – रहने का स्थान, घर - आदि – आरंभ, इत्यादि
आदी – अभ्यस्त, आदत वाला - इति – समाप्त
ईति – दैवीय आपदा (बाढ़, सूखा) - इंदिरा – लक्ष्मी
इंद्रा – इंद्राणी (इंद्र की पत्नी) - इत्र – सुगंध
इतर – अन्य, दूसरा - उर – हृदय
ऊरु – जाँघ - उदार – दानी, दयालु
उदर – पेट - उपल – पत्थर, ओला
उत्पल – कमल - उपकार – भलाई
अपकार – बुराई - उद्धत – उद्दंड, तैयार
उद्यत – तैयार - उधार – ऋण
उद्धार – मुक्ति, बचाव - ऋत – सत्य
ऋतु – मौसम - एकदा – एक बार
यथा – जैसे - ओर – तरफ, दिशा
और – तथा, दूसरा - कटिबंध – कमरबंद, करधनी
कटिबद्ध – तैयार, कमर कसे हुए - कलि – कलियुग
कली – अधखिला फूल - कंकाल – हड्डियों का ढाँचा
कंगाल – गरीब, निर्धन - करकट – कूड़ा
कर्कट – केंकड़ा - कृपण – कंजूस
कृपाण – तलवार, कटार - केस – बाल
केस – मुकदमा - कलुष – पाप, गंदगी
कुलिश – वज्र - अंगना – स्त्री
आँगन – घर का खुला भाग
विलोम शब्द (Ant-onyms) / विपरीतार्थक शब्द
परिभाषा:
वे शब्द जो एक-दूसरे का विपरीत (उल्टा) अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलो-म शब्द या विपरीतार्थक शब्द कहा जाता है।
- ‘विलोम’ का अर्थ ही होता है – ‘उल्टा’ या ‘विपरीत’।
- विलोम शब्द हमेशा सजातीय ही होते हैं, अर्थात्:
- संज्ञा का विलोम संज्ञा ही होगा (जैसे- राजा ↔ रंक)।
- विशेषण का विलोम विशेषण ही होगा (जैसे- अच्छा ↔ बुरा)।
- क्रिया का विलोम क्रिया ही होगा (जैसे- हँसना ↔ रोना)।
- यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव शब्द का विलोम तद्भव ही होता है (जैसे- रात्रि (तत्सम) ↔ दिवस (तत्सम); रात (तद्भव) ↔ दिन (तद्भव))।
प्रमुख विलोम शब्दों की सूची (List of Important Antonyms)
यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण विलोम शब्द दिए गए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
‘अ’ से ‘औ’ तक
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
| अमृत | विष | अल्प | अधिक/महा/प्रचुर |
| अंधकार | प्रकाश | अपना | पराया |
| अपेक्षा | उपेक्षा | आदि | अंत |
| अच्छा | बुरा | आदर | निरादर/अनादर |
| अग्रज | अनुज | आस्तिक | नास्तिक |
| अनुकूल | प्रतिकूल | आकाश | पाताल |
| आयात | निर्यात | आगे | पीछे |
| आलस्य | स्फूर्ति/उद्यम | आशा | निराशा |
| आगामी | विगत | आय | व्यय |
| आजादी | गुलामी | आलोक | अंधकार/तिमिर |
| अर्थ | अनर्थ | आहार | निराहार |
| अल्पायु | दीर्घायु | आद्र | शुष्क |
| अनुराग | विराग | आकर्षण | विकर्षण |
| अपमान | सम्मान | आदान | प्रदान |
| आस्था | अनास्था | इच्छा | अनिच्छा |
| इकट्ठा | अलग | इष्ट | अनिष्ट |
| इहलोक | परलोक | ईमानदार | बेईमान |
| उपकार | अपकार | उत्थान | पतन |
| उन्नति | अवनति | उत्कर्ष | अपकर्ष |
| उपस्थित | अनुपस्थित | उत्तर | दक्षिण/प्रश्न |
| उष्ण | शीत | एक | अनेक |
| एकता | अनेकता | एड़ी | चोटी |
| ऐश्वर्य | अनैश्वर्य | ओजस्वी | निस्तेज |
‘क’ से ‘म’ तक
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
| कटु | मधु | क्रय | विक्रय |
| कृतज्ञ | कृतघ्न | कोमल | कठोर |
| कठिन | सरल | कुरूप | सुंदर |
| क्रोध | क्षमा | कच्चा | पक्का |
| कीर्ति | अपकीर्ति | गरल | सुधा |
| गुरु | लघु | गृहीत | त्यक्त |
| गृहस्थ | संन्यासी | गुप्त | प्रकट |
| गर्मी | सर्दी | गौरव | लाघव |
| घात | प्रतिघात | घृणा | प्रेम |
| चंचल | स्थिर | चेतन | जड़ |
| जय | पराजय | जल | थल |
| जन्म | मृत्यु | जड़ | चेतन |
| जीवन | मरण | जंगम | स्थावर |
| झूठ | सच | तम | प्रकाश |
| तीव्र | मंद | दाता | याचक |
| दुर्लभ | सुलभ | देव | दानव |
| धूप | छाँव | धर्म | अधर्म |
| धनी | निर्धन | न्याय | अन्याय |
| निंदा | स्तुति | नूतन | पुरातन |
| निर्माण | विनाश | नरक | स्वर्ग |
| निकट | दूर | नश्वर | शाश्वत |
| पक्ष | विपक्ष | पवित्र | अपवित्र |
| प्रत्यक्ष | परोक्ष | प्रश्न | उत्तर |
| पूर्ण | अपूर्ण | बंधन | मुक्ति |
| बैर | प्रीति | बुद्धिमान | मूर्ख |
| बाढ़ | सूखा | भोगी | योगी |
| भूत | भविष्य | मानव | दानव |
| मौखिक | लिखित | मान | अपमान |
| मिलन | विरह | मित्र | शत्रु |
‘य’ से ‘ज्ञ’ तक
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
| यश | अपयश | योगी | भोगी |
| युद्ध | शांति | राग | द्वेष |
| राजा | रंक/प्रजा | रुग्ण | स्वस्थ |
| रक्षक | भक्षक | रात | दिन |
| लाभ | हानि | लौकिक | अलौकिक |
| वरदान | अभिशाप | विजय | पराजय |
| विष | अमृत | वृष्टि | अनावृष्टि |
| वृद्धि | ह्रास | वीर | कायर |
| विधवा | सधवा | शासक | शासित |
| शीत | उष्ण | श्वेत | श्याम |
| शुभ | अशुभ | शोक | हर्ष |
| सगुण | निर्गुण | सजीव | निर्जीव |
| संक्षेप | विस्तार | सरस | नीरस |
| सौभाग्य | दुर्भाग्य | स्वतंत्र | परतंत्र |
| स्वर्ग | नरक | स्तुति | निंदा |
| हर्ष | शोक/विषाद | हानि | लाभ |
| हँसना | रोना | हिंसा | अहिंसा |
| क्षर | अक्षर | क्षणिक | शाश्वत |
| ज्ञात | अज्ञात | ज्ञान | अज्ञान |
उपसर्ग (Prefix)
परिभाषा:
‘उपसर्ग’ शब्द दो अंशों से मिलकर बना है: उप + सर्ग
- उप = समीप / निकट
- सर्ग = सृष्टि करना / रचना करना
व्याकरणिक परिभाषा:
वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के आरंभ (शुरू) में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता ला देते हैं, ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं।
- विशेषताएँ:
- ये शब्दांश होते हैं, शब्द नहीं।
- इनका अपना कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता, लेकिन ये अर्थवान होते हैं।
- ये हमेशा मूल शब्द के पहले जुड़ते हैं।
उदाहरण:
‘हार’ एक मूल शब्द है जिसका अर्थ है ‘पराजय’। इसमें विभिन्न उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए जा सकते हैं:
- आ + हार = आहार (अर्थ: भोजन)
- प्र + हार = प्रहार (अर्थ: चोट करना)
- वि + हार = विहार (अर्थ: घूमना)
- उप + हार = उपहार (अर्थ: भेंट)
- सम् + हार = संहार (अर्थ: विनाश)
आप देख सकते हैं कि कैसे अलग-अलग उपसर्गों ने ‘हार’ शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल दिया।
उपसर्ग के प्रकार (Types of Prefix)
हिन्दी भाषा में उपसर्गों को मुख्य रूप से उनके स्रोत के आधार पर चार भागों में बांटा जाता है:
- संस्कृत के उपसर्ग (कुल 22)
- हिन्दी के उपसर्ग (कुल 10 या 13)
- उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग (कुल 19)
- अंग्रेजी के उपसर्ग
1. संस्कृत के उपसर्ग (Tatsam Prefixes)
ये उपसर्ग संस्कृत से सीधे हिन्दी में आए हैं। इनकी संख्या 22 मानी जाती है।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
| अति- | अधिक, ऊपर | अतिरिक्त, अतिशय, अत्यंत (अति+अंत) |
| अधि- | श्रेष्ठ, ऊपर | अधिकार, अधिनायक, अध्यादेश (अधि+आदेश) |
| अनु- | पीछे, समान | अनुशासन, अनुभव, अनुसरण, अन्वय (अनु+अय) |
| अप- | बुरा, हीन | अपमान, अपयश, अपकार, अपराध |
| अभि- | सामने, ओर | अभिमान, अभिनव, अभिनय, अभ्यास (अभि+आस) |
| अव- | बुरा, नीचे | अवगुण, अवसर, अवतार, अवनति |
| आ- | तक, समेत | आजीवन, आहार, आगमन, आकर्षण |
| उत्- | ऊँचा, श्रेष्ठ | उत्थान, उत्कर्ष, उद्भव, उज्ज्वल (उत्+ज्वल) |
| उप- | निकट, छोटा | उपकार, उपसर्ग, उपस्थित, उपनाम |
| दुर्- | बुरा, कठिन | दुर्गम, दुर्जन, दुर्भाग्य, दुर्दशा |
| दुस्- | बुरा, कठिन | दुस्साहस, दुष्कर्म, दुष्चरित्र |
| निर्- | बिना, बाहर | निर्बल, निर्दोष, निर्धन, निर्जीव |
| निस्- | रहित, पूरा | निस्संदेह, निश्चल, निष्काम |
| नि- | नीचे, निषेध | निबंध, निदान, निडर, नियुक्त |
| परा- | उल्टा, पीछे | पराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श |
| परि- | चारों ओर | परिवार, परिभाषा, परिणाम, पर्यावरण (परि+आवरण) |
| प्र- | आगे, अधिक | प्रहार, प्रगति, प्रबल, प्रचार |
| प्रति- | उल्टा, हर एक | प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्यक्ष (प्रति+अक्ष) |
| वि- | भिन्न, विशेष | विज्ञान, विशेष, वियोग, व्यर्थ (वि+अर्थ) |
| सम्- | अच्छी तरह | सम्मान, संतोष, संस्कार, संपूर्ण |
| सु- | अच्छा, सरल | सुपुत्र, सुगम, सुशील, स्वागत (सु+आगत) |
| अन्- | नहीं | अन्आवश्यक, अन्अर्थ, अनंत |
2. हिन्दी के उपसर्ग (Tadbhav Prefixes)
ये उपसर्ग संस्कृत के उपसर्गों से ही विकसित हुए हैं और तद्भव शब्दों के साथ प्रयोग होते हैं।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
| अ-/अन- | नहीं, अभाव | अछूत, अजान, अटल, अनपढ़, अनमोल |
| अध- | आधा | अधपका, अधमरा, अधखिला |
| औ-/अव- | हीन, निषेध | औगुन, औघट, औतार |
| कु-/क- | बुरा | कुचाल, कुचक्र, कुपुत्र, कपूत |
| दु- | बुरा, कम| दुबला, दुकाल |
| नि- | रहित | निडर, निहत्था, निकम्मा |
| भर- | पूरा | भरपेट, भरपूर, भरसक |
| सु-/स- | अच्छा| सुजान, सुघड़, सपूत, सबल|
| उन- | एक कम| उनतीस (30-1), उनचास (50-1), उनसठ |
| पर- | दूसरा | परहित, परदेस, परलोक |
3. उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग (Foreign Prefixes)
ये उपसर्ग अरबी और फ़ारसी भाषा से आए हैं। इनकी संख्या 19 मानी जाती है।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
| अल- | निश्चित | अलविदा, अलमस्त, अलबत्ता |
| कम- | थोड़ा, हीन | कमजोर, कमउम्र, कमअक्ल |
| खुश- | अच्छा | खुशबू, खुशहाल, खुशमिजाज |
| गैर- | बिना, विरुद्ध | गैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरसरकारी |
| ना- | अभाव | नापसंद, नासमझ, नालायक |
| दर- | में | दरअसल, दरकिनार |
| बा- | सहित | बाअदब, बाकायदा, बाइज्जत |
| बद- | बुरा | बदनाम, बदसूरत, बदबू |
| बे- | बिना | बेईमान, बेवजह, बेचैन |
| ला- | बिना | लापरवाह, लाचार, लावारिस |
| सर- | मुख्य | सरताज, सरपंच, सरकार |
| हम- | साथ | हमसफ़र, हमउम्र, हमदर्द |
| हर- | प्रत्येक | हरदिन, हरसाल, हरएक |
4. अंग्रेजी के उपसर्ग
अंग्रेजी के प्रभाव से कुछ अंग्रेजी उपसर्गों का भी हिन्दी में प्रयोग होने लगा है।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
| सब- | अधीन, नीचे | सब-इंस्पेक्टर, सब-जज |
| हेड- | मुख्य | हेड-मास्टर, हेड-ऑफिस |
| हाफ- | आधा | हाफ-पैंट, हाफ-शर्ट |
| को- | सहित | को-ऑपरेटिव, को-एजुकेशन |
| वाइस- | सहायक | वाइस-चांसलर, वाइस-प्रेसीडेंट |
निष्कर्ष
उपसर्ग शब्द निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह नए शब्दों को जन्म देकर भाषा के शब्द-भंडार को समृद्ध करता है और हमें सूक्ष्म अर्थ-भेदों को व्यक्त करने की क्षमता प्रदान करता है।
1. पर्यायवाची शब्द क्या हैं? (Definition & Meaning)
‘पर्यायवाची’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: पर्याय + वाची।
- पर्याय का अर्थ है— समान (Equal)।
- वाची का अर्थ है— बोला जाने वाला (Spoken)।
परिभाषा:
वे शब्द जो अर्थ की दृष्टि से लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। अर्थात, एक ही वस्तु, व्यक्ति या भाव के लिए प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न शब्दों का समूह पर्यायवाची कहलाता है।
- उदाहरण:
- सूर्य को हम सूरज, दिनकर, रवि, भास्कर भी कहते हैं। इन सभी का अर्थ एक ही है।
- फूल को पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून कहा जा सकता है।
2. पर्यायवाची शब्दों का महत्व (Importance of Synonyms)
भाषा में पर्यायवाची शब्दों का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि:
- भाषा को समृद्ध बनाते हैं: ये शब्द भाषा के शब्द-भंडार को बढ़ाते हैं।
- अभिव्यक्ति में विविधता लाते हैं: एक ही बात को बार-बार कहने के लिए अलग-अलग शब्दों का प्रयोग करके हम दोहराव (Repetition) से बच सकते हैं।
- भावों की सूक्ष्मता को व्यक्त करते हैं: यद्यपि पर्यायवाची शब्दों का अर्थ समान होता है, लेकिन कभी-कभी उनके भाव में सूक्ष्म अंतर होता है। सही शब्द का चुनाव भाव को अधिक सटीकता से व्यक्त करता है। (जैसे: ‘जल’ पवित्रता का भाव देता है, जबकि ‘पानी’ सामान्य बोलचाल का शब्द है।)
- साहित्य को सुंदर बनाते हैं: कवि और लेखक अपनी रचनाओं को अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करते हैं।
3. कुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्दों की सूची (List of Important Synonyms)
यहाँ विभिन्न वर्णों से शुरू होने वाले कुछ सामान्य और महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द दिए गए हैं:
अ, आ
- अग्नि: आग, अनल, पावक, ज्वाला, दहन, हुताशन।
- अमृत: सुधा, पीयूष, अमिय, सोम, सुरभोग।
- असुर: राक्षस, दैत्य, दानव, निशाचर, रजनीचर, दनुज।
- आकाश: गगन, नभ, व्योम, अम्बर, आसमान, अंतरिक्ष।
- आंख: नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृग, अक्षि, विलोचन।
- अश्व: घोड़ा, हय, तुरंग, घोटक, वाजि, सैंधव।
इ, ई
- इच्छा: आकांक्षा, कामना, अभिलाषा, चाह, मनोरथ, लालसा।
- इंद्र: सुरेश, देवेंद्र, देवराज, पुरंदर, सुरपति, महेंद्र।
- ईश्वर: प्रभु, भगवान, परमेश्वर, परमात्मा, जगदीश, जगन्नाथ।
क, ग, घ
- कपड़ा: वस्त्र, पट, वसन, अम्बर, चीर।
- कमल: जलज, पंकज, नीरज, सरोज, अरविंद, राजीव, वारिज।
- गणेश: गजानन, लंबोदर, विनायक, गणपति, एकदंत, मूषकवाहन।
- गंगा: भागीरथी, मंदाकिनी, देवनदी, सुरसरिता, जाह्नवी, विष्णुपदी।
- घर: गृह, सदन, आवास, आलय, निकेतन, निलय, भवन।
ज, त
- जल: वारि, पानी, नीर, सलिल, तोय, उदक, अंबु, जीवन, पय।
- जंगल: वन, कानन, विपिन, अरण्य, कांतार।
- तालाब: सर, सरोवर, जलाशय, तड़ाग, पुष्कर, पद्माकर।
द, न, प
- दिन: दिवस, वार, वासर, अह्न, दिवा।
- दुःख: पीड़ा, व्यथा, कष्ट, वेदना, शोक, क्लेश।
- नदी: सरिता, तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निर्झरिणी, कूलंकषा।
- पक्षी: खग, विहग, नभचर, पंछी, द्विज, पखेरू, अंडज।
- पवन: वायु, हवा, समीर, अनिल, वात, मारुत, बयार।
- पर्वत: पहाड़, गिरि, शैल, नग, भूधर, अचल, महीधर।
- पुत्र: बेटा, सुत, तनय, आत्मज, लड़का, तनुज।
- पुत्री: बेटी, सुता, तनया, आत्मजा, दुहिता, नंदिनी।
- पृथ्वी: भूमि, धरा, वसुधा, धरती, वसुंधरा, अचला, मही, भू।
ब, भ, म
- बादल: मेघ, घन, जलद, जलधर, पयोद, नीरद, वारिद, अंबुद।
- मनुष्य: नर, मानव, इंसान, मनुज, मानुष।
- मित्र: दोस्त, सखा, सहचर, मीत, सुहृद।
- माता: माँ, जननी, अंबा, अंबिका, धात्री।
र, ल, व
- राजा: नृप, भूप, नरेश, महीप, भूपति, शासक, अवनीश।
- रात्रि: रात, निशा, रजनी, यामिनी, विभावरी, रैन, तमस्विनी।
- लक्ष्मी: कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, सिंधुजा।
स, ह
- समुद्र: सागर, सिंधु, जलधि, रत्नाकर, पयोधि, उदधि, वारीश।
- सर्प: साँप, नाग, विषधर, भुजंग, अहि, उरग, व्याल, पन्नग।
- सिंह: शेर, वनराज, केसरी, मृगराज, शार्दूल, केहरि।
- सूर्य: रवि, दिनकर, भास्कर, भानु, दिवाकर, आदित्य, दिनेश।
- हाथी: गज, हस्ती, कुंजर, द्विप, करी, मतंग।
- हाथ: कर, हस्त, पाणि, बाहु, भुजा।
पर्यायवाची शब्द याद करने की ट्रिक्स
पर्यायवाची शब्द याद करना अभ्यास का काम है, लेकिन ये ट्रिक्स इसे आसान बना देंगी:
ट्रिक 1: समूह बनाकर याद करें (Grouping Method)
एक-एक शब्द को अलग-अलग याद करने के बजाय, उन्हें ग्रुप में याद करें।
- प्राकृतिक चीजें: (आकाश, हवा, पानी, पृथ्वी, बादल) एक साथ याद करें।
- शरीर के अंग: (आंख, हाथ, पैर) एक साथ।
- देवी-देवता: (इंद्र, गणेश, शिव, विष्णु, लक्ष्मी) एक साथ।
ट्रिक 2: शब्दों की जड़ को पकड़ें (Root Word Method)
यह एक जादू की तरह काम करता है! अगर आपको एक शब्द (जैसे ‘जल’) के पर्यायवाची पता हैं, तो आप उससे कई और शब्द बना सकते हैं।
उदाहरण: ‘जल’ के पर्यायवाची = वारि, नीर, अंबु, पय
- बादल (पानी देने वाला): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘द’ (देने वाला) जोड़ दें।
- जलद, वारिद, नीरद, अंबुद, पयोद
- कमल (पानी में जन्म लेने वाला): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘ज’ (जन्म) जोड़ दें।
- जलज, वारिज, नीरज, अंबुज
- समुद्र (पानी का भंडार/स्वामी): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘धि’ या ‘निधि’ (भंडार) जोड़ दें।
- जलधि, वारिधि, पयोधि, जलनिधि
इस एक ट्रिक से आपने जल, बादल, कमल और समुद्र, यानी 4 शब्दों के लगभग 15-20 पर्यायवाची सीख लिए!
ट्रिक 3: विज़ुअलाइज़ करें (Visualize)
जब किसी शब्द का पर्यायवाची याद करें, तो उसकी तस्वीर अपने मन में बनाएं।
- ‘सिंह’ को याद करते समय एक दहाड़ते हुए शेर (वनराज, केसरी) की कल्पना करें।
- ‘सूर्य’ को याद करते समय उगते हुए सूरज (दिनकर, भास्कर) की कल्पना करें।
ट्रिक 4: दैनिक जीवन में प्रयोग करें (Daily Usage)
जब भी आप किसी से बात करें या कुछ लिखें, तो सामान्य शब्दों की जगह नए सीखे हुए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करने की कोशिश करें।
- “आज बहुत पानी बरस रहा है” की जगह कहें, “आज बहुत वारि बरस रहा है।”
इन ट्रिक्स का नियमित अभ्यास करने से आप समास और पर्यायवाची शब्दों में बहुत आसानी से महारत हासिल कर सकते हैं।