लिंग (Gender)

Page Contents

परिभाषा:
संज्ञा शब्द के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे व्याकरण में ‘लिंग’ कहते हैं।

उदाहरण:


लिंग के भेद (Types of Gender)

हिन्दी व्याकरण में लिंग के दो (2) भेद माने जाते हैं:

  1. पुल्लिंग (Masculine Gender)
  2. स्त्रीलिंग (Feminine Gender)

(संस्कृत में एक तीसरा लिंग, ‘नपुंसकलिंग’ भी होता है, लेकिन हिन्दी में केवल दो ही लिंग होते हैं।)


1. पुल्लिंग (Masculine Gender)

2. स्त्रीलिंग (Feminine Gender)


लिंग पहचानने के नियम (Rules for Identifying Gender)

लिंग की पहचान दो तरह से की जाती है: प्राणीवाचक और अप्राणीवाचक शब्दों के लिए।

A. प्राणीवाचक संज्ञाओं के लिए (For Living Beings):

B. अप्राणीवाचक (निर्जीव) संज्ञाओं के लिए (For Non-Living Things):

निर्जीव वस्तुओं का लिंग परंपरागत होता है, यानी जैसा समाज में बोला जाता है, वैसा ही माना जाता है। इसे पहचानने के लिए व्याकरणिक प्रयोग सबसे सहायक होते हैं:

ट्रिक 1: सर्वनाम का प्रयोग

ट्रिक 2: विशेषण का प्रयोग

ट्रिक 3: क्रिया का प्रयोग (सबसे कारगर ट्रिक)

कुछ सामान्य नियम:


लिंग परिवर्तन के नियम (Rules for Gender Change)

पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के कुछ सामान्य नियम हैं:


वचन (Number)

परिभाषा:
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या क्रिया के जिस रूप से उसकी संख्या का बोध होता है, अर्थात् यह पता चलता है कि वह एक है या एक से अधिक है, उसे व्याकरण में ‘वचन’ कहते हैं।

उदाहरण:


वचन के भेद (Types of Number)

हिन्दी व्याकरण में वचन के दो (2) भेद माने जाते हैं:

  1. एकवचन (Singular Number)
  2. बहुवचन (Plural Number)

(संस्कृत में एक तीसरा वचन, ‘द्विवचन’ भी होता है, जो दो की संख्या बताता है, लेकिन हिन्दी में केवल दो ही वचन होते हैं।)


1. एकवचन (Singular Number)

2. बहुवचन (Plural Number)


वचन की पहचान के नियम (Rules for Identification)

वचन की पहचान मुख्य रूप से दो प्रकार से होती है:

1. संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के रूप द्वारा:

2. वाक्य में क्रिया के रूप द्वारा:


एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम

1. पुल्लिंग संज्ञाओं के लिए:

2. स्त्रीलिंग संज्ञाओं के लिए:


वचन संबंधी विशेष नियम

  1. आदर/सम्मान के लिए बहुवचन का प्रयोग:
    • आदरणीय व्यक्तियों के लिए (चाहे वे एक ही हों) हमेशा बहुवचन क्रिया का प्रयोग किया जाता है।
    • उदाहरण:
      • पिताजी आ रहे हैं। (एकवचन व्यक्ति, बहुवचन क्रिया)
      • गाँधीजी हमारे राष्ट्रपिता थे
      • आप कब आए?
  2. सदा एकवचन में रहने वाले शब्द:
    • कुछ शब्द हमेशा एकवचन में ही प्रयोग होते हैं, चाहे उनका संदर्भ बहुवचन जैसा लगे।
    • द्रव्यवाचक संज्ञाएँ: पानी, दूध, घी, तेल, सोना, चाँदी, लोहा।
    • भाववाचक संज्ञाएँ: प्रेम, क्रोध, मिठास, ईमानदारी।
    • समूहवाचक संज्ञाएँ (एक इकाई के रूप में): जनता, भीड़, पुलिस, सेना।
    • अन्य: आकाश, वर्षा, आग, हर एक, प्रत्येक।
  3. सदा बहुवचन में रहने वाले शब्द (Most Important for Exams):
    • कुछ संज्ञा शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग हिन्दी में हमेशा बहुवचन में ही होता है।
    • उदाहरण:
      • प्राण: उसके प्राण निकल गए। (गया नहीं)
      • दर्शन: मैंने आपके दर्शन किए। (किया नहीं)
      • हस्ताक्षर: मैंने कागज पर हस्ताक्षर कर दिए। (दिया नहीं)
      • आँसू: उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। (रहा था नहीं)
      • होश: यह देखकर मेरे तो होश उड़ गए। (गया नहीं)
      • बाल: उसके बाल बहुत सुंदर हैं। (है नहीं)
      • दाम, लोग, समाचार, होश आदि।

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द / समोच्चारित शब्द / शब्द-युग्म

परिभाषा:
वे शब्द जो सुनने (श्रुति) में या उच्चारण करने में लगभग एक समान (सम् + उच्चारित) लगते हैं, परंतु उनके अर्थों में पर्याप्त भिन्नता होती है, उन्हें श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द या समोच्चारित शब्द कहा जाता है।


प्रमुख श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों की सूची (अर्थ सहित)

यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण शब्द-युग्म दिए गए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

क्र.सं.शब्द-युग्मअर्थवाक्य प्रयोग से अंतर
1.अन्न – अन्यअनाज – दूसराकिसानों ने अन्न उपजाया। / कोई अन्य व्यक्ति आया था।
2.अलि – आलीभौंरा – सखीफूल पर अलि मंडरा रहा है। / सीता अपनी आली से बात कर रही है।
3.अंश – अंसहिस्सा/भाग – कंधामुझे मेरा अंश दे दो। / सैनिक के अंस पर बंदूक थी।
4.अपेक्षा – उपेक्षातुलना में / आशा – निरादर/तिरस्कारआपकी अपेक्षा वह अधिक बुद्धिमान है। / गुरु की उपेक्षा मत करो।
5.अवधि – अवधीसमय-सीमा – एक बोली (भाषा)कार्य करने की अवधि समाप्त हो गई। / तुलसीदास ने अवधी में रामचरितमानस लिखी।
6.कुल – कूलवंश/योग/सब – किनारारघुकुल की यही रीति है। / नदी का कूल बहुत सुंदर है।
7.कृति – कृतीरचना – रचनाकार/पुण्यात्मा‘गोदान’ प्रेमचंद की प्रसिद्ध कृति है। / वह एक कृती पुरुष है।
8.गृह – ग्रहघर – नक्षत्र (planet)यह मेरा गृह है। / सौरमंडल में आठ ग्रह हैं।
9.चिर – चीरपुराना/देर तक – वस्त्र/कपड़ावह मेरा चिर परिचित है। / द्रौपदी का चीर हरण हुआ था।
10.जलद – जलजबादल – कमलजलद गरज रहे हैं। / तालाब में जलज खिला है।
11.दिन – दीनदिवस/वार – गरीब/असहायआज का दिन अच्छा है। / हमें दीन-दुखियों की मदद करनी चाहिए।
12.दशा – दिशाहालत/अवस्था – तरफ़/ओरउसकी दशा बहुत खराब है। / सूर्य पूर्व दिशा से निकलता है।
13.द्रव – द्रव्यतरल पदार्थ – पदार्थ/धन-संपत्तिपानी एक द्रव है। / उसके पास बहुत द्रव्य है।
14.नियत – नीयतनिश्चित – इरादा/इच्छागाड़ी आने का समय नियत है। / उसकी नीयत अच्छी नहीं लगती।
15.प्रसाद – प्रासादकृपा/भोग – महल/भवनभगवान का प्रसाद ग्रहण करो। / राजा का प्रासाद भव्य था।
16.परिणाम – परिमाणफल/नतीजा – मात्रा/नाप-तौलतुम्हारी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा।/मुझे कम परिमाण में चीनी चाहिए।
17.पवन – पावनहवा – पवित्रशीतल पवन चल रही है। / गंगा एक पावन नदी है।
18.बलि – बलीबलिदान/भेंट – बलवान/शक्तिशालीदेवी को बलि दी गई। / भीम एक बली योद्धा थे।
19.बात – वातवचन/कथन – हवा/वायुअपनी बात पूरी करो। / उसे वात रोग हो गया है।
20.सर्ग – स्वर्गअध्याय/अंश – देवलोकरामायण में सात सर्ग (कांड) हैं। / अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं।
21.सम – शमबराबर – शांति/संयमसब सम हैं, कोई बड़ा-छोटा नहीं। / क्रोध को शम करो।
22.शर – सरबाण – तालाब/सिरअर्जुन ने शर चलाया। / कमल सर में खिलता है।
23.शोक – शौकदुःख – चाह/लगनउसकी मृत्यु का मुझे बहुत शोक है। / मुझे किताबें पढ़ने का शौक है।
24.सूत – सुतधागा/सारथी – पुत्र/बेटायह सूत कात रही है। / दशरथ सुत राम थे।
25.सुर – सूरदेवता/लय – वीर/अंधासुर संगीत गा रहे थे। / सूरदास कृष्ण भक्त थे।

महत्व (Importance)

याद करने का तरीका (How to Remember)

इन्हें याद करने का सबसे अच्छा तरीका है प्रत्येक शब्द-युग्म को अपने वाक्य में प्रयोग करके देखना। वाक्य बनाने से उनका अर्थ दिमाग में स्थायी हो जाता है और आप उन्हें कभी नहीं भूलते।


‘अ’ से ‘अं’ तक श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (50 उदाहरण)

  1. अंस – कंधा
    अंश – हिस्सा
  2. अन्न – अनाज
    अन्य – दूसरा
  3. अनल – आग
    अनिल – हवा
  4. अणु – कण
    अनु – एक उपसर्ग (पीछे)
  5. अपेक्षा – तुलना में, आशा
    उपेक्षा – निरादर, लापरवाही
  6. अगम – जहाँ पहुँचा न जा सके
    आगम – शास्त्र, आगमन
  7. अभिराम – सुंदर
    अविराम – बिना रुके, लगातार
  8. अचल – पर्वत
    अचला – पृथ्वी
  9. अचर – न चलने वाला
    अचिर – शीघ्र, नवीन
  10. अलि – भौंरा
    आली – सखी
  11. अब्ज – कमल
    अब्द – वर्ष, बादल
  12. अतल – तलहीन
    अतुल – जिसकी तुलना न हो
  13. अरि – शत्रु
    अरी – संबोधन (स्त्री के लिए)
  14. अध्ययन – पढ़ना
    अध्यापन – पढ़ाना
  15. अवलंब – सहारा
    अविलंब – बिना देर के, शीघ्र
  16. अंबुज – कमल
    अंबुद – बादल
  17. असित – काला
    अशित – खाया हुआ
  18. अचार – खाने की वस्तु (pickle)
    आचार – आचरण, व्यवहार
  19. अभिज्ञ – जानकार
    अनभिज्ञ – अनजान
  20. अर्घ – मूल्य, पूजा का जल
    अर्घ्य – पूजनीय
  21. अयुक्त – जो उचित न हो
    आयुक्त – कमिश्नर
  22. अवनि – पृथ्वी
    अवनी – रक्षा करना
  23. अश्म – पत्थर
    अश्व – घोड़ा
  24. अहि – साँप
    अह – दिन
  25. अभय – निडर
    उभय – दोनों
  26. आकर – खान (mine), स्रोत
    आकार – बनावट, सूरत
  27. आरति – दुःख, विरक्ति
    आरती – धूप-दीप दिखाना
  28. आयात – बाहर से मंगाना
    आयत – एक चतुर्भुज
  29. आभास – झलक, भ्रम
    आवास – रहने का स्थान, घर
  30. आदि – आरंभ, इत्यादि
    आदी – अभ्यस्त, आदत वाला
  31. इति – समाप्त
    ईति – दैवीय आपदा (बाढ़, सूखा)
  32. इंदिरा – लक्ष्मी
    इंद्रा – इंद्राणी (इंद्र की पत्नी)
  33. इत्र – सुगंध
    इतर – अन्य, दूसरा
  34. उर – हृदय
    ऊरु – जाँघ
  35. उदार – दानी, दयालु
    उदर – पेट
  36. उपल – पत्थर, ओला
    उत्पल – कमल
  37. उपकार – भलाई
    अपकार – बुराई
  38. उद्धत – उद्दंड, तैयार
    उद्यत – तैयार
  39. उधार – ऋण
    उद्धार – मुक्ति, बचाव
  40. ऋत – सत्य
    ऋतु – मौसम
  41. एकदा – एक बार
    यथा – जैसे
  42. ओर – तरफ, दिशा
    और – तथा, दूसरा
  43. कटिबंध – कमरबंद, करधनी
    कटिबद्ध – तैयार, कमर कसे हुए
  44. कलि – कलियुग
    कली – अधखिला फूल
  45. कंकाल – हड्डियों का ढाँचा
    कंगाल – गरीब, निर्धन
  46. करकट – कूड़ा
    कर्कट – केंकड़ा
  47. कृपण – कंजूस
    कृपाण – तलवार, कटार
  48. केस – बाल
    केस – मुकदमा
  49. कलुष – पाप, गंदगी
    कुलिश – वज्र
  50. अंगना – स्त्री
    आँगन – घर का खुला भाग

विलोम शब्द (Ant-onyms) / विपरीतार्थक शब्द

परिभाषा:
वे शब्द जो एक-दूसरे का विपरीत (उल्टा) अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलो-म शब्द या विपरीतार्थक शब्द कहा जाता है।


प्रमुख विलोम शब्दों की सूची (List of Important Antonyms)

यहाँ कुछ सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण विलोम शब्द दिए गए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

‘अ’ से ‘औ’ तक

शब्दविलोमशब्दविलोम
अमृतविषअल्पअधिक/महा/प्रचुर
अंधकारप्रकाशअपनापराया
अपेक्षाउपेक्षाआदिअंत
अच्छाबुराआदरनिरादर/अनादर
अग्रजअनुजआस्तिकनास्तिक
अनुकूलप्रतिकूलआकाशपाताल
आयातनिर्यातआगेपीछे
आलस्यस्फूर्ति/उद्यमआशानिराशा
आगामीविगतआयव्यय
आजादीगुलामीआलोकअंधकार/तिमिर
अर्थअनर्थआहारनिराहार
अल्पायुदीर्घायुआद्रशुष्क
अनुरागविरागआकर्षणविकर्षण
अपमानसम्मानआदानप्रदान
आस्थाअनास्थाइच्छाअनिच्छा
इकट्ठाअलगइष्टअनिष्ट
इहलोकपरलोकईमानदारबेईमान
उपकारअपकारउत्थानपतन
उन्नतिअवनतिउत्कर्षअपकर्ष
उपस्थितअनुपस्थितउत्तरदक्षिण/प्रश्न
उष्णशीतएकअनेक
एकताअनेकताएड़ीचोटी
ऐश्वर्यअनैश्वर्यओजस्वीनिस्तेज

‘क’ से ‘म’ तक

शब्दविलोमशब्दविलोम
कटुमधुक्रयविक्रय
कृतज्ञकृतघ्नकोमलकठोर
कठिनसरलकुरूपसुंदर
क्रोधक्षमाकच्चापक्का
कीर्तिअपकीर्तिगरलसुधा
गुरुलघुगृहीतत्यक्त
गृहस्थसंन्यासीगुप्तप्रकट
गर्मीसर्दीगौरवलाघव
घातप्रतिघातघृणाप्रेम
चंचलस्थिरचेतनजड़
जयपराजयजलथल
जन्ममृत्युजड़चेतन
जीवनमरणजंगमस्थावर
झूठसचतमप्रकाश
तीव्रमंददातायाचक
दुर्लभसुलभदेवदानव
धूपछाँवधर्मअधर्म
धनीनिर्धनन्यायअन्याय
निंदास्तुतिनूतनपुरातन
निर्माणविनाशनरकस्वर्ग
निकटदूरनश्वरशाश्वत
पक्षविपक्षपवित्रअपवित्र
प्रत्यक्षपरोक्षप्रश्नउत्तर
पूर्णअपूर्णबंधनमुक्ति
बैरप्रीतिबुद्धिमानमूर्ख
बाढ़सूखाभोगीयोगी
भूतभविष्यमानवदानव
मौखिकलिखितमानअपमान
मिलनविरहमित्रशत्रु

‘य’ से ‘ज्ञ’ तक

शब्दविलोमशब्दविलोम
यशअपयशयोगीभोगी
युद्धशांतिरागद्वेष
राजारंक/प्रजारुग्णस्वस्थ
रक्षकभक्षकरातदिन
लाभहानिलौकिकअलौकिक
वरदानअभिशापविजयपराजय
विषअमृतवृष्टिअनावृष्टि
वृद्धिह्रासवीरकायर
विधवासधवाशासकशासित
शीतउष्णश्वेतश्याम
शुभअशुभशोकहर्ष
सगुणनिर्गुणसजीवनिर्जीव
संक्षेपविस्तारसरसनीरस
सौभाग्यदुर्भाग्यस्वतंत्रपरतंत्र
स्वर्गनरकस्तुतिनिंदा
हर्षशोक/विषादहानिलाभ
हँसनारोनाहिंसाअहिंसा
क्षरअक्षरक्षणिकशाश्वत
ज्ञातअज्ञातज्ञानअज्ञान

उपसर्ग (Prefix)

परिभाषा:
‘उपसर्ग’ शब्द दो अंशों से मिलकर बना है: उप + सर्ग

व्याकरणिक परिभाषा:
वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के आरंभ (शुरू) में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता ला देते हैं, ‘उपसर्ग’ कहलाते हैं।

उदाहरण:
‘हार’ एक मूल शब्द है जिसका अर्थ है ‘पराजय’। इसमें विभिन्न उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए जा सकते हैं:


उपसर्ग के प्रकार (Types of Prefix)

हिन्दी भाषा में उपसर्गों को मुख्य रूप से उनके स्रोत के आधार पर चार भागों में बांटा जाता है:

  1. संस्कृत के उपसर्ग (कुल 22)
  2. हिन्दी के उपसर्ग (कुल 10 या 13)
  3. उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग (कुल 19)
  4. अंग्रेजी के उपसर्ग

1. संस्कृत के उपसर्ग (Tatsam Prefixes)

ये उपसर्ग संस्कृत से सीधे हिन्दी में आए हैं। इनकी संख्या 22 मानी जाती है।

उपसर्गअर्थउदाहरण
अति-अधिक, ऊपरअतिरिक्त, अतिशय, अत्यंत (अति+अंत)
अधि-श्रेष्ठ, ऊपरअधिकार, अधिनायक, अध्यादेश (अधि+आदेश)
अनु-पीछे, समानअनुशासन, अनुभव, अनुसरण, अन्वय (अनु+अय)
अप-बुरा, हीनअपमान, अपयश, अपकार, अपराध
अभि-सामने, ओरअभिमान, अभिनव, अभिनय, अभ्यास (अभि+आस)
अव-बुरा, नीचेअवगुण, अवसर, अवतार, अवनति
आ-तक, समेतजीवन, हार, गमन, कर्षण
उत्-ऊँचा, श्रेष्ठउत्थान, उत्कर्ष, उद्भव, उज्ज्वल (उत्+ज्वल)
उप-निकट, छोटाउपकार, उपसर्ग, उपस्थित, उपनाम
दुर्-बुरा, कठिनदुर्गम, दुर्जन, दुर्भाग्य, दुर्दशा
दुस्-बुरा, कठिनदुस्साहस, दुष्कर्म, दुष्चरित्र
निर्-बिना, बाहरनिर्बल, निर्दोष, निर्धन, निर्जीव
निस्-रहित, पूरानिस्संदेह, निश्चल, निष्काम
नि-नीचे, निषेधनिबंध, निदान, निडर, नियुक्त
परा-उल्टा, पीछेपराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श
परि-चारों ओरपरिवार, परिभाषा, परिणाम, पर्यावरण (परि+आवरण)
प्र-आगे, अधिकप्रहार, प्रगति, प्रबल, प्रचार
प्रति-उल्टा, हर एकप्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्यक्ष (प्रति+अक्ष)
वि-भिन्न, विशेषविज्ञान, विशेष, वियोग, व्यर्थ (वि+अर्थ)
सम्-अच्छी तरहसम्मान, संतोष, संस्कार, संपूर्ण
सु-अच्छा, सरलसुपुत्र, सुगम, सुशील, स्वागत (सु+आगत)
अन्-नहींअन्आवश्यक, अन्अर्थ, अनंत

2. हिन्दी के उपसर्ग (Tadbhav Prefixes)

ये उपसर्ग संस्कृत के उपसर्गों से ही विकसित हुए हैं और तद्भव शब्दों के साथ प्रयोग होते हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
अ-/अन-नहीं, अभावछूत, जान, टल, अनपढ़, अनमोल
अध-आधाअधपका, अधमरा, अधखिला
औ-/अव-हीन, निषेधगुन, घट, तार
कु-/क-बुराकुचाल, कुचक्र, कुपुत्र, पूत

| दु- | बुरा, कम| दुबला, दुकाल |
| नि- | रहित | निडर, निहत्था, निकम्मा |
| भर- | पूरा | भरपेट, भरपूर, भरसक |
| सु-/स- | अच्छा| सुजान, सुघड़, पूत, बल|
| उन- | एक कम| उनतीस (30-1), उनचास (50-1), उनसठ |
| पर- | दूसरा | परहित, परदेस, परलोक |

3. उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग (Foreign Prefixes)

ये उपसर्ग अरबी और फ़ारसी भाषा से आए हैं। इनकी संख्या 19 मानी जाती है।

उपसर्गअर्थउदाहरण
अल-निश्चितअलविदा, अलमस्त, अलबत्ता
कम-थोड़ा, हीनकमजोर, कमउम्र, कमअक्ल
खुश-अच्छाखुशबू, खुशहाल, खुशमिजाज
गैर-बिना, विरुद्धगैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरसरकारी
ना-अभावनापसंद, नासमझ, नालायक
दर-मेंदरअसल, दरकिनार
बा-सहितबाअदब, बाकायदा, बाइज्जत
बद-बुराबदनाम, बदसूरत, बदबू
बे-बिनाबेईमान, बेवजह, बेचैन
ला-बिनालापरवाह, लाचार, लावारिस
सर-मुख्यसरताज, सरपंच, सरकार
हम-साथहमसफ़र, हमउम्र, हमदर्द
हर-प्रत्येकहरदिन, हरसाल, हरएक

4. अंग्रेजी के उपसर्ग

अंग्रेजी के प्रभाव से कुछ अंग्रेजी उपसर्गों का भी हिन्दी में प्रयोग होने लगा है।

उपसर्गअर्थउदाहरण
सब-अधीन, नीचेसब-इंस्पेक्टर, सब-जज
हेड-मुख्यहेड-मास्टर, हेड-ऑफिस
हाफ-आधाहाफ-पैंट, हाफ-शर्ट
को-सहितको-ऑपरेटिव, को-एजुकेशन
वाइस-सहायकवाइस-चांसलर, वाइस-प्रेसीडेंट

निष्कर्ष

उपसर्ग शब्द निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह नए शब्दों को जन्म देकर भाषा के शब्द-भंडार को समृद्ध करता है और हमें सूक्ष्म अर्थ-भेदों को व्यक्त करने की क्षमता प्रदान करता है।


1. पर्यायवाची शब्द क्या हैं? (Definition & Meaning)

‘पर्यायवाची’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: पर्याय + वाची

परिभाषा:
वे शब्द जो अर्थ की दृष्टि से लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। अर्थात, एक ही वस्तु, व्यक्ति या भाव के लिए प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न शब्दों का समूह पर्यायवाची कहलाता है।

2. पर्यायवाची शब्दों का महत्व (Importance of Synonyms)

भाषा में पर्यायवाची शब्दों का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि:

  1. भाषा को समृद्ध बनाते हैं: ये शब्द भाषा के शब्द-भंडार को बढ़ाते हैं।
  2. अभिव्यक्ति में विविधता लाते हैं: एक ही बात को बार-बार कहने के लिए अलग-अलग शब्दों का प्रयोग करके हम दोहराव (Repetition) से बच सकते हैं।
  3. भावों की सूक्ष्मता को व्यक्त करते हैं: यद्यपि पर्यायवाची शब्दों का अर्थ समान होता है, लेकिन कभी-कभी उनके भाव में सूक्ष्म अंतर होता है। सही शब्द का चुनाव भाव को अधिक सटीकता से व्यक्त करता है। (जैसे: ‘जल’ पवित्रता का भाव देता है, जबकि ‘पानी’ सामान्य बोलचाल का शब्द है।)
  4. साहित्य को सुंदर बनाते हैं: कवि और लेखक अपनी रचनाओं को अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करते हैं।

3. कुछ महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्दों की सूची (List of Important Synonyms)

यहाँ विभिन्न वर्णों से शुरू होने वाले कुछ सामान्य और महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द दिए गए हैं:

अ, आ

इ, ई

क, ग, घ

ज, त

द, न, प

ब, भ, म

र, ल, व

स, ह


पर्यायवाची शब्द याद करने की ट्रिक्स

पर्यायवाची शब्द याद करना अभ्यास का काम है, लेकिन ये ट्रिक्स इसे आसान बना देंगी:

ट्रिक 1: समूह बनाकर याद करें (Grouping Method)

एक-एक शब्द को अलग-अलग याद करने के बजाय, उन्हें ग्रुप में याद करें।

ट्रिक 2: शब्दों की जड़ को पकड़ें (Root Word Method)

यह एक जादू की तरह काम करता है! अगर आपको एक शब्द (जैसे ‘जल’) के पर्यायवाची पता हैं, तो आप उससे कई और शब्द बना सकते हैं।

उदाहरण: ‘जल’ के पर्यायवाची = वारि, नीर, अंबु, पय

  1. बादल (पानी देने वाला): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘द’ (देने वाला) जोड़ दें।
    • जल, वारि, नीर, अंबु, पयो
  2. कमल (पानी में जन्म लेने वाला): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘ज’ (जन्म) जोड़ दें।
    • जल, वारि, नीर, अंबु
  3. समुद्र (पानी का भंडार/स्वामी): ‘जल’ के पर्यायवाची में ‘धि’ या ‘निधि’ (भंडार) जोड़ दें।
    • जलधि, वारिधि, पयोधि, जलनिधि

इस एक ट्रिक से आपने जल, बादल, कमल और समुद्र, यानी 4 शब्दों के लगभग 15-20 पर्यायवाची सीख लिए!

ट्रिक 3: विज़ुअलाइज़ करें (Visualize)

जब किसी शब्द का पर्यायवाची याद करें, तो उसकी तस्वीर अपने मन में बनाएं।

ट्रिक 4: दैनिक जीवन में प्रयोग करें (Daily Usage)

जब भी आप किसी से बात करें या कुछ लिखें, तो सामान्य शब्दों की जगह नए सीखे हुए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करने की कोशिश करें।

इन ट्रिक्स का नियमित अभ्यास करने से आप समास और पर्यायवाची शब्दों में बहुत आसानी से महारत हासिल कर सकते हैं।