शब्द-विचार (Morphology)

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शब्द-विचार (Morphology)

शब्द-विचार, व्याकरण का वह दूसरा महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें शब्द की परिभाषा, उसके भेद, उत्पत्ति, रचना, प्रयोग, और अर्थ के आधार पर उसके विभिन्न रूपों का अध्ययन किया जाता है। वर्णों के बाद, शब्द भाषा की सबसे सार्थक इकाई होती है।


1. शब्द की परिभाषा (Definition of Word)

एक या एक से अधिक वर्णों के सार्थक मेल को ‘शब्द’ कहते हैं।

पद (Term): जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों (लिंग, वचन, कारक) से बंधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है, तब वह ‘पद’ कहलाता है।


2. शब्दों का वर्गीकरण (Classification of Words)

शब्दों को मुख्य रूप से चार आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:

क) उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Based on Origin/Source)
ख) रचना या बनावट के आधार पर (Based on Formation)
ग) प्रयोग के आधार पर (Based on Grammatical Usage)
घ) अर्थ के आधार पर (Based on Meaning)


क) उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Based on Origin)

इस आधार पर शब्द के पाँच भेद हैं, जो बताते हैं कि शब्द कहाँ से आया है:

  1. तत्सम (Tatsam):
    • संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिन्दी में बिना किसी परिवर्तन के, ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं।
    • उदाहरण: अग्नि, सूर्य, कार्य, दुग्ध, रात्रि, क्षेत्र।
  2. तद्भव (Tad-bhav):
    • संस्कृत के वे शब्द जो पालि, प्राकृत, अपभ्रंश से होते हुए, कुछ रूप परिवर्तन के साथ हिन्दी में आए हैं।
    • उदाहरण: आग (अग्नि से), सूरज (सूर्य से), काम (कार्य से), दूध (दुग्ध से), रात (रात्रि से), खेत (क्षेत्र से)।
  3. देशज (Deshaj):
    • वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का कोई स्रोत ज्ञात नहीं है और जो स्थानीय प्रभाव या आम बोलचाल से विकसित होकर हिन्दी में आए हैं।
    • उदाहरण: पगड़ी, लोटा, पेट, खिड़की, तेंदुआ, झाड़ू।
  4. विदेशज / आगत (Videshaj / Foreign):
    • वे शब्द जो विदेशी भाषाओं (अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेजी आदि) से हिन्दी में आए हैं।
    • उदाहरण:
      • अंग्रेजी: स्कूल, डॉक्टर, स्टेशन, ट्रेन, पेन।
      • अरबी/फ़ारसी: आदमी, कानून, किताब, तारीख, गरीब।
      • पुर्तगाली: गमला, अलमारी, साबुन, बाल्टी।
  5. संकर (Sankar):
    • जो शब्द दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं।
    • उदाहरण:
      • रेलगाड़ी (रेल [अंग्रेजी] + गाड़ी [हिन्दी])
      • जाँचकर्ता (जाँच [हिन्दी] + कर्ता [संस्कृत])
      • किताबघर (किताब [अरबी] + घर [हिन्दी])

ख) रचना या बनावट के आधार पर (Based on Formation)

इस आधार पर शब्द के तीन भेद हैं:

  1. रूढ़ (Rudh):
    • वे शब्द जो किसी विशेष अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो गए हैं और जिनके खंड करने पर कोई अर्थ नहीं निकलता।
    • उदाहरण: घर (घ + र), जल (ज + ल), दिन, रात, हाथ।
  2. यौगिक (Yaugik):
    • जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों या शब्दांशों के योग से बने हैं। इनके खंड करने पर प्रत्येक खंड का अर्थ होता है। ये उपसर्ग, प्रत्यय या समास से बनते हैं।
    • उदाहरण:
      • पाठशाला (पाठ + शाला)
      • प्रधानमंत्री (प्रधान + मंत्री)
      • विज्ञान (वि + ज्ञान)
      • सामाजिक (समाज + इक)
  3. योगरूढ़ (Yog-rudh):
    • वे यौगिक शब्द जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष (रूढ़) अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो जाते हैं।
    • (ये बहुव्रीहि समास के उदाहरण होते हैं)।
    • उदाहरण:
      • पंकज → (पंक [कीचड़] + ज [जन्मा]) → सामान्य अर्थ: कीचड़ में जन्मा, विशेष अर्थ: कमल
      • दशानन → (दश + आनन) → सामान्य अर्थ: दस मुखों वाला, विशेष अर्थ: रावण
      • लंबोदर → (लंबा + उदर) → सामान्य अर्थ: लंबे पेट वाला, विशेष अर्थ: गणेश जी

ग) प्रयोग के आधार पर (Based on Grammatical Usage)

इस आधार पर शब्द के दो भेद हैं:

  1. विकारी शब्द (Vikari / Declinable):
    • वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार विकार (परिवर्तन) आ जाता है।
    • ये चार प्रकार के होते हैं:
      1. संज्ञा (Noun) → लड़का (लड़के, लड़कों)
      2. **सर्वनाम (Pronoun)**→ मैं (मेरा, मुझे)
      3. **विशेषण (Adjective)**→ अच्छा (अच्छी, अच्छे)
      4. **क्रिया (Verb)**→ जाता है (जाती है, जाते हैं)
  2. अविकारी शब्द (Avikari / Indeclinable):
    • वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता। इन्हें अव्यय भी कहते हैं।
    • ये भी चार प्रकार के होते हैं:
      1. **क्रिया-विशेषण (Adverb)**→ धीरे-धीरे, आज, कल
      2. **संबंधबोधक (Preposition)**→ के ऊपर, के साथ
      3. **समुच्चयबोधक (Conjunction)**→ और, तथा, लेकिन
      4. **विस्मयादिबोधक (Interjection)**→ अरे!, वाह!

घ) अर्थ के आधार पर (Based on Meaning)

इस आधार पर कई भेद किए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  1. सार्थक शब्द: जिन शब्दों का कोई निश्चित अर्थ हो। (जैसे – रोटी, पानी)
  2. निरर्थक शब्द: जिन शब्दों का कोई अर्थ न हो, पर कभी-कभी सार्थक शब्दों के साथ प्रयोग में आते हैं। (जैसे- रोटी-वोटी, पानी-वानी)।
  3. एकार्थी शब्द: जिनका केवल एक ही अर्थ हो (जैसे- किताब, मेज)।
  4. अनेकार्थी शब्द: जिनके एक से अधिक अर्थ हों (जैसे- कर [हाथ, टैक्स], कनक [सोना, धतूरा])।
  5. पर्यायवाची शब्द (Synonyms): समान अर्थ बताने वाले शब्द (जैसे- सूर्य → रवि, दिनकर, भास्कर)।
  6. विलोम शब्द (Antonyms): विपरीत अर्थ बताने वाले शब्द (जैसे- दिन → रात, जीवन → मृत्यु)।

उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(Classification of Words based on Origin/Source)

इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द हिन्दी भाषा में कहाँ से आया है या उसकी उत्पत्ति (जन्म) कहाँ हुई है। हिन्दी भाषा ने अपने विकास क्रम में विभिन्न स्रोतों से शब्दों को ग्रहण किया है, जिससे उसका शब्द-भंडार बहुत समृद्ध हुआ है।

उत्पत्ति के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से पाँच भागों में बाँटा जाता है:


1. तत्सम (Tatsam)

परिभाषा:
‘तत्सम’ शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है:

इस प्रकार, तत्सम का शाब्दिक अर्थ है “उसके समान”, अर्थात् “संस्कृत के समान”

व्याकरणिक परिभाषा:
संस्कृत भाषा के वे शब्द जो अपने मूल (original) रूप में, बिना किसी ध्वनि या रूप में परिवर्तन हुए, सीधे हिन्दी भाषा में प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं।

ये शब्द हिन्दी की जननी संस्कृत भाषा की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषा को एक समृद्ध और मानक शब्दावली प्रदान की है।


तत्सम शब्दों की पहचान कैसे करें? (Tricks to Identify Tatsam Words)

तत्सम शब्दों को पहचानने के कुछ सामान्य नियम और संकेत होते हैं, जो बहुत सहायक हो सकते हैं:

  1. संयुक्त व्यंजनों का प्रयोग:
    • जिन शब्दों में क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे संयुक्त व्यंजन आते हैं, वे प्रायः तत्सम होते हैं।
      • क्ष → क्षेत्र, रक्षा, भिक्षा, साक्षी
      • त्र → पत्र, मित्र, रात्रि, पुत्र
      • ज्ञ → ज्ञान, अज्ञान, यज्ञ
      • श्र → श्रावण, श्रमिक, आश्रय
  2. ‘र’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग:
    • जिन शब्दों में ‘र्’ (रेफ) या ‘र्’ (पदेन) का प्रयोग होता है, वे अक्सर तत्सम होते हैं।
      • ‘र्’ (रेफ) → सूर्य, कर्म, धर्म, वर्षा, कार्य
      • ‘र्’ (पदेन) → ग्राहक, ग्राम, आम्र, चक्र
  3. ‘ऋ’ (ऋषि) की मात्रा ( ृ ) का प्रयोग:
    • जिन शब्दों में ‘ऋ’ की मात्रा का प्रयोग होता है, वे हमेशा तत्सम होते हैं।
      • उदाहरण: कृष्ण, गृह, घृत (घी), अमृत, नृत्य, शृंगार
  4. ‘ष’ (षट्कोण) और ‘ण’ वर्ण का प्रयोग:
    • ‘ष’ और ‘ण’ वर्ण का प्रयोग मुख्य रूप से संस्कृत में ही होता है, इसलिए इनसे बने शब्द प्रायः तत्सम होते हैं।
      • ‘ष’ → कृष्ण, पाषाण, षट्, भविष्य
      • ‘ण’ → कण, गुण, रामायण, कर्ण, चूर्ण
  5. विसर्ग ( ः ) का प्रयोग:
    • जिन संस्कृत शब्दों में विसर्ग का प्रयोग होता है और वे उसी रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, वे तत्सम होते हैं।
      • उदाहरण: प्रातः, अतः, पुनः, दुःख (यह एक अपवाद है जो तद्भव जैसा लगता है पर तत्सम है)।
  6. अनुस्वार ( ं ) का प्रयोग:
    • तत्सम शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग होता है, जबकि उनके तद्भव रूप में अक्सर चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग होता है।
      • उदाहरण: चंद्र (तत्सम) → चाँद (तद्भव), दंत (तत्सम) → दाँत (तद्भव)
  7. ‘श’ (शलगम) और ‘व’ (वन) का प्रयोग:
    • प्रायः जिन शब्दों में ‘श’ आता है, वे तत्सम होते हैं और उनके तद्भव रूप में ‘स’ (सपेरा) हो जाता है।
      • उदाहरण: श्यामल → साँवला, दश → दस, श्मशान → मसान
    • प्रायः जिन शब्दों में ‘व’ आता है, वे तत्सम होते हैं और उनके तद्भव रूप में ‘ब’ (बकरी) हो जाता है।
      • उदाहरण: वर्षा → बरसात, वानर → बन्दर, विवाह → ब्याह, विद्युत → बिजली

तत्सम और उनके तद्भव रूपों की सूची (उदाहरण)

तत्सम शब्दतद्भव शब्द (सरल रूप)
अग्निआग
सूर्यसूरज
हस्तहाथ
दुग्धदूध
ग्रामगाँव
क्षेत्रखेत
रात्रिरात
आम्रआम
मयूरमोर
कर्णकान
चन्द्रचाँद
जिह्वाजीभ
दंतदाँत
मृत्युमौत
स्वर्णसोना

निष्कर्ष

तत्सम शब्द हिन्दी भाषा की शास्त्रीय और साहित्यिक गहराई को दर्शाते हैं। ये शब्द भाषा को सटीकता, गंभीरता और मानक रूप प्रदान करते हैं। हालाँकि आम बोलचाल में तद्भव शब्द अधिक प्रचलित हैं, लेकिन औपचारिक लेखन, साहित्य और अकादमिक भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग आज भी बहुत महत्वपूर्ण है।


2. तद्भव (Tad-bhav)


विभिन्न परिभाषाएँ

तद्भव की अवधारणा को विभिन्न दृष्टिकोणों से परिभाषित किया जा सकता है:

परिभाषा 1: शाब्दिक अर्थ के आधार पर

तद्भव शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है:

इस प्रकार, तद्भव का शाब्दिक अर्थ है: “उससे उत्पन्न हुआ” अर्थात् “संस्कृत से विकसित हुआ।”
यह परिभाषा बताती है कि तद्भव शब्दों का मूल स्रोत संस्कृत ही है, लेकिन वे सीधे वहाँ से नहीं आए, बल्कि समय के साथ विकसित हुए हैं।


परिभाषा 2: भाषा विकास क्रम के आधार पर (सबसे सटीक परिभाषा)

संस्कृत के वे शब्द जो सीधे हिन्दी में न आकर, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश जैसी मध्यकालीन भाषाओं के दौर से गुजरते हुए, ध्वनि-परिवर्तनों (sound changes) के कारण अपना रूप बदलकर हिन्दी में प्रचलित हो गए हैं, ‘तद्भव शब्द’ कहलाते हैं।

यह सबसे व्यापक और वैज्ञानिक परिभाषा है। यह बताती है कि तद्भव शब्द एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा तय करके हिन्दी तक पहुँचे हैं।


परिभाषा 3: सरलता और आम बोलचाल के आधार पर

तत्सम शब्दों के वे सरल, सहज और आम बोलचाल के रूप, जो उच्चारण की सुगमता के कारण लोक-प्रचलन में आ गए हैं, ‘तद्भव शब्द’ कहलाते हैं।

यह परिभाषा तद्भव शब्दों के व्यावहारिक पक्ष पर जोर देती है। लोग अक्सर अपनी सुविधा के लिए कठिन शब्दों को सरल बना लेते हैं, और यही सरलीकरण की प्रक्रिया तद्भव शब्दों को जन्म देती है।


तद्भव शब्दों की पहचान कैसे करें? (Tricks to Identify Tadbhav Words)

जिस प्रकार तत्सम शब्दों को पहचानने के नियम हैं, उसी प्रकार तद्भव को पहचानने के भी कुछ संकेत होते हैं:

  1. चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग:
    • जिन शब्दों में चंद्रबिंदु का प्रयोग होता है, वे लगभग हमेशा तद्भव होते हैं।
    • उदाहरण: गाँव (ग्राम से), चाँद (चन्द्र से), दाँत (दंत से), आँख (अक्षि से), मुँह (मुख से)।
  2. हिन्दी के अपने विकसित व्यंजनों का प्रयोग:
    • जिन शब्दों में उत्क्षिप्त व्यंजन ‘ड़’ और ‘ढ़’ आते हैं, वे प्रायः तद्भव या देशज होते हैं।
    • उदाहरण: घोड़ा (घोटक से), बड़ा।
  3. कठिन वर्णों का सरलीकरण:
    • तत्सम का ‘क्ष’ → तद्भव में अक्सर ‘ख’ या ‘छ’ बन जाता है।
      • क्षेत्र → खेत, क्षीर → खीर, अक्षर → अच्छर/आखर
    • तत्सम का ‘त्र’ → तद्भव में ‘त’ बन जाता है।
      • रात्रि → रात, पत्र → पत्ता
    • तत्सम का ‘ज्ञ’ → तद्भव में ‘ज’ बन जाता है।
      • अज्ञान → अजान, ज्ञानी → ज्ञानी/जानी
    • तत्सम का ‘व’ → तद्भव में ‘ब’ बन जाता है।
      • विवाह → ब्याह, वानर → बन्दर, वर्षा → बरसात
    • तत्सम का ‘श’ → तद्भव में ‘स’ बन जाता है।
      • दश → दस, श्यामल → साँवला
    • तत्सम का ‘ष’ → तद्भव में ‘ख’ या ‘स’ बन जाता है।
      • कृषक → किसान
    • तत्सम का ‘ऋ’ ( ृ ) → तद्भव में ‘र’ या ‘इ’ हो जाता है, या लुप्त हो जाता है।
      • घृत → घी, श्रृंगार → सिंगार
  4. बोलने में सरलता:
    • तद्भव शब्द तत्सम की तुलना में बोलने में बहुत सरल और सहज होते हैं, क्योंकि वे आम जन-जीवन की भाषा के हिस्से होते हैं। (जैसे – दूध, दही, कान, नाक, जीभ)।

तत्सम से तद्भव बनने की प्रक्रिया

यह प्रक्रिया एक प्रकार का ‘ध्वनि-घिसाव’ है, जो समय के साथ और उच्चारण की सुविधा के कारण होती है। संस्कृत की जटिल ध्वनियाँ सरल होती गईं, संयुक्त अक्षर टूटकर सरल अक्षरों में बदल गए, और इस प्रकार हजारों वर्षों की यात्रा के बाद तद्भव शब्दों ने अपना वर्तमान स्वरूप प्राप्त किया।

निष्कर्ष

तद्भव शब्द हिन्दी भाषा की आत्मा हैं। ये वे शब्द हैं जो संस्कृत के गर्भ से निकलकर, आम जनता के बीच पल-बढ़कर, समय के साथ परिपक्व हुए हैं। वे हिन्दी को उसकी सहजता, स्वाभाविकता और लोक-प्रकृति प्रदान करते हैं और भाषा को जन-सामान्य से जोड़ते हैं।


पशु-पक्षियों से संबंधित तत्सम एवं तद्भव शब्द

क्र.सं.तत्सम शब्द (संस्कृत रूप)तद्भव शब्द (हिन्दी का सरल रूप)
1.उष्ट्रऊँट
2.कच्छपकछुआ
3.काककौआ
4.कुक्कुरकुत्ता
5.कोकिलकोयल
6.कपोतकबूतर
7.गर्दभगधा
8.गोगाय
9.घोटकघोड़ा
10.चटकचिड़ा / चिड़िया
11.नकुलनेवला
12.बलि वर्द / वृषभबैल
13.महिष / महिषीभैंस / भैंसा
14.मत्स्यमछली
15.मयूरमोर
16.मूषक / मूषिकमूस / चूहा
17.वानरबन्दर
18.वराहबारह (जंगली सूअर)
19.वृश्चिकबिच्छू
20.व्याघ्रबाघ
21.शुकसुग्गा / तोता
22.सर्पसाँप
23.हस्तिन् / हस्तीहाथी
24.हरिणहिरन
25.मर्कटबंदर (बंदर के लिए एक और शब्द)
26.सिंहसिंह (शेर)
27.शृगालसियार / गीदड़
28.श्वाकुत्ता (कुत्ता के लिए एक और शब्द)
29.श्येनबाज (शिकारी पक्षी)
30.चक्रवाकचकवा (पक्षी)
31.गृध्रगिद्ध
32.चित्रकचीता
33.चटकाचिड़िया
34.तित्तिरितीतर
35.धेनुगाय (गाय का एक और रूप)
36.पिंगलनेवला (नेवला का एक और रूप)
37.पारावतकबूतर (कबूतर का एक और रूप)
38.बर्करबकरा
39.भद्रभला (पशु नहीं, पर जुड़ाव)
40.भल्लुकभालू
41.मेषभेड़
42.वत्स / वत्सकबछड़ा
43.शश / शशकखरहा / खरगोश
44.शार्दूलबाघ (बाघ का एक और रूप)
45.सूकरसूअर
46.सारिकामैना
47.श्येनबाज (पक्षी)
48.श्वाकुत्ता
49.सारंगहिरन / मोर / साँप (अनेकार्थी)
50.चक्रवाकचकवा (पक्षी)
51.कपिबंदर (बंदर का एक और रूप)
52.खरगधा (गधा का एक और रूप)
53.कुरंगहिरन (हिरन का एक और रूप)
54.खद्योतजुगनू (कीट)
55.जम्बुक / जम्बूकजामुन (फल, पर जानवर जैसा नाम)
56.दुर्वादूब (पशु चारा)
57.द्विपहाथी (हाथी का एक और रूप)
58.पन्नगसाँप (साँप का एक और रूप)
59.पतंगटिड्डा / पतंगा (कीट)
60.पृष्ठपीठ (पशु अंग)

3. देशज (Deshaj)

4. विदेशज / आगत (Videshaj / Foreign / Aagat)

5. संकर (Sankar / Hybrid)


निष्कर्ष

उत्पत्ति के आधार पर यह वर्गीकरण दिखाता है कि हिन्दी भाषा एक जीवंत और ग्रहणशील भाषा है, जिसने अपनी मूल संस्कृत विरासत को सहेजने (तत्सम) और सरल करने (तद्भव) के साथ-साथ, स्थानीय बोलियों (देशज) और विदेशी भाषाओं (विदेशज) के शब्दों को भी खुले मन से अपनाया है, जिससे इसका शब्द-भंडार निरंतर समृद्ध होता रहा है।


ख) रचना या बनावट के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(Classification of Words based on Formation/Structure)

इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द कैसे बना है; अर्थात् उसकी संरचना (structure) क्या है। शब्द निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जाता है:

  1. रूढ़ (Rudh / Root Words)
  2. यौगिक (Yaugik / Compound Words)
  3. योगरूढ़ (Yog-rudh / Compound-Root Words)

1. रूढ़ (Rudh)


2. यौगिक (Yaugik)


3. योगरूढ़ (Yog-rudh)


तीनों में अंतर की सरल सारणी

विशेषतारूढ़ शब्दयौगिक शब्दयोगरूढ़ शब्द
संरचनाखंड नहीं हो सकतेदो सार्थक खंड होते हैंदो सार्थक खंड होते हैं
अर्थअपना पारंपरिक अर्थखंडों के अर्थ से जुड़ा अर्थखंडों के अर्थ से भिन्न विशेष अर्थ
पहचानतोड़ने पर अर्थहीनतोड़ने पर भी दोनों भाग सार्थकबहुव्रीहि समास के उदाहरण
उदाहरणपानी, हाथविद्यालय, राष्ट्रपतिगिरिधर, पीतांबर

ग) प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(Classification of Words based on Grammatical Usage)

वाक्य में प्रयोग किए जाने पर शब्दों के रूप में परिवर्तन होता है या नहीं, इस आधार पर शब्दों को दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है:

  1. विकारी शब्द (Vikari / Declinable Words)
  2. अविकारी शब्द (Avikari / Indeclinable Words)

1. विकारी शब्द (Vikari)

विकारी शब्दमूल शब्दलिंग के आधार पर परिवर्तनवचन के आधार पर परिवर्तनकारक के आधार पर परिवर्तन
संज्ञालड़कालड़कीलड़केलड़के ने, लड़कों को
घोड़ाघोड़ीघोड़ेघोड़ों पर
सर्वनाममैं– (लिंग का प्रभाव नहीं)हममेरा, मुझे, मुझसे
वह– (लिंग का प्रभाव नहीं)वेउसका, उसने, उनको
विशेषणअच्छाअच्छीअच्छे
कालाकालीकाले
क्रियाजाता हैजाती हैजाते हैं– (काल का प्रभाव: गया)

2. अविकारी शब्द (Avikari)

अविकारी शब्दउदाहरण वाक्य
क्रिया-विशेषणलड़का धीरे-धीरे चलता है।<br>लड़की धीरे-धीरे चलती है।<br>लड़के धीरे-धीरे चलते हैं। (यहाँ ‘धीरे-धीरे’ शब्द नहीं बदला)
आज बारिश होगी।<br>आज वे आएँगे।<br> (यहाँ ‘आज’ शब्द नहीं बदला)
संबंधबोधकमेज के ऊपर किताब है।<br>घर के सामने पेड़ है।<br>राम के साथ श्याम गया।<br> (यहाँ ‘के ऊपर’, ‘के सामने’, ‘के साथ’ नहीं बदलते)
समुच्चयबोधकराम और श्याम भाई हैं।<br>सीता और गीता सहेलियाँ हैं।<br> (यहाँ ‘और’ शब्द नहीं बदला)
विस्मयादिबोधकअरे! तुम आ गए।<br>वाह! क्या सुंदर दृश्य है।<br> (ये शब्द भावना व्यक्त करते हैं और बदलते नहीं हैं)

तुलनात्मक सारणी: विकारी बनाम अविकारी

आधारविकारी शब्द (Declinable)अविकारी शब्द / अव्यय (Indeclinable)
परिभाषारूप में परिवर्तन होता हैरूप में परिवर्तन नहीं होता
परिवर्तन का कारणलिंग, वचन, कारक, कालइन पर लिंग, वचन, कारक का प्रभाव नहीं
प्रकार4: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया4: क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक
वाक्य में भूमिकामुख्य भूमिका निभाते हैं (कर्ता, कर्म, क्रिया आदि)शब्दों और वाक्यों को जोड़ने या विशेषता बताने का काम करते हैं
उदाहरणलड़का, मैं, अच्छा, खाता हैधीरे-धीरे, के ऊपर, और, वाह!

निष्कर्ष

प्रयोग के आधार पर यह वर्गीकरण हमें यह समझने में मदद करता है कि वाक्य निर्माण में कौन से शब्द स्थिर रहते हैं और कौन से बदलते हैं। यह व्याकरण की शुद्धता और वाक्य की सही संरचना के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है।


घ) अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(Classification of Words based on Meaning)

इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द किस प्रकार का अर्थ प्रकट करता है। अर्थ की दृष्टि से शब्द भाषा की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। इस आधार पर शब्दों के कई भेद किए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:


1. सार्थक और निरर्थक शब्द


2. एकार्थी शब्द (Monosemous Words)


3. अनेकार्थी शब्द (Polysemous Words)


4. पर्यायवाची / समानार्थी शब्द (Synonyms)


5. विलोम / विपरीतार्थक शब्द (Antonyms)


6. श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द / समोच्चारित शब्द (Homophones / Homonyms)


7. वाक्यांश के लिए एक शब्द / अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One-word Substitution)



संज्ञा (Noun)

संज्ञा (Noun)

संज्ञा (Noun) की विभिन्न परिभाषाएँ


1. पारंपरिक और सर्वमान्य परिभाषा

“किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, स्थान, गुण, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं।”


2. व्युत्पत्ति-आधारित परिभाषा (शब्द के अर्थ पर आधारित)

संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है – सम्यक् ज्ञान कराने वाला, अर्थात् ‘नाम’। व्याकरण में ‘नाम’ को ही ‘संज्ञा’ कहा जाता है।”


3. व्याकरणिक प्रकार्य पर आधारित परिभाषा

“संज्ञा एक विकारी शब्द है जो किसी वाक्य में कर्ता (Subject), कर्म (Object), या पूरक (Complement) की भूमिका निभाता है।”


4. दार्शनिक या अवधारणा-आधारित परिभाषा

“प्रत्येक ‘नामरूप’ (Name and Form) जिसका अस्तित्व या तो वास्तविक (concrete) जगत में है या काल्पनिक/अमूर्त (abstract) जगत में, संज्ञा कहलाता है।”


5. सरलीकृत परिभाषा (बच्चों के लिए)

“दुनिया में हर चीज का एक नाम होता है। उसी नाम वाले शब्द (Naming Words) को संज्ञा कहते हैं।”


सभी परिभाषाओं का सार

अलग-अलग शब्दों और दृष्टिकोणों के बावजूद, सभी परिभाषाओं का केंद्रीय भाव एक ही है:

“संज्ञा वह शब्द है जो किसी भी नाम को दर्शाता है, चाहे वह नाम किसी साकार वस्तु का हो, निराकार भाव का हो, किसी स्थान का हो या किसी प्राणी का।”

भाषा में संज्ञा के बिना कोई वाक्य पूर्ण नहीं हो सकता, क्योंकि हर क्रिया का कोई न कोई कर्ता या कर्म होता है, जो अंततः एक संज्ञा या सर्वनाम ही होता है।


संज्ञा के भेद (Types of Noun)

अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के मुख्य रूप से पाँच भेद माने जाते हैं:

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
  2. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
  3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
  4. समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)
  5. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)

नोट: अनेक आधुनिक व्याकरण विशेषज्ञ समूहवाचक और द्रव्यवाचक संज्ञाओं को जातिवाचक संज्ञा का ही उपभेद मानते हैं। इस आधार पर, मुख्य रूप से संज्ञा के तीन भेद भी बताए जाते हैं।


संज्ञा के भेदों की विस्तृत व्याख्या

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)

परिभाषा:
वह शब्द जो किसी एक विशेष (specific) व्यक्ति, एक विशेष प्राणी, एक विशेष वस्तु, या एक विशेष स्थान के नाम का बोध कराता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।


व्यक्तिवाचक संज्ञा की पहचान कैसे करें? (Identification Rules)

  1. यह ‘कौन’ या ‘क्या’ का नहीं, बल्कि ‘किसका नाम’ का जवाब देती है।
    • जातिवाचक: वह एक लड़का है। (कौन है? – लड़का)
    • व्यक्तिवाचक: वह राम है। (लड़के का क्या नाम है? – राम)
  2. यह दुनिया में ‘एक’ और ‘विशेष’ होती है।
    • नदी कहने से दुनिया की सभी नदियाँ समझी जाती हैं (जातिवाचक)।
    • गंगा कहने से केवल एक विशेष नदी का बोध होता है (व्यक्तिवाचक)।
  3. इसे किसी अन्य नाम से नहीं बदला जा सकता।
    • आप दिल्ली को मुंबई नहीं कह सकते, क्योंकि दोनों अपने आप में विशेष और अद्वितीय स्थान हैं।

व्यक्तिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):

व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के नाम आते हैं:


व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

कभी-कभी जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा अपने विशेष गुण के कारण उस गुण वाले सभी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने लगती है, तो वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।


2. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)

परिभाषा:
वह शब्द जो किसी प्राणी, वस्तु, या स्थान की संपूर्ण जाति, वर्ग, या समूह का बोध कराता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।


जातिवाचक संज्ञा की पहचान कैसे करें? (Identification Rules)

  1. यह पूरी श्रेणी (Category) को दर्शाती है:
    • जब हम ‘पर्वत’ कहते हैं, तो यह दुनिया के किसी एक पर्वत का नहीं, बल्कि हिमालय, आल्प्स, एंडीज आदि सभी पर्वतों का बोध कराता है।
    • जब हम ‘लड़का’ कहते हैं, तो यह राम, श्याम, मोहन आदि सभी लड़कों का बोध कराता है।
  2. इसका बहुवचन बन सकता है:
    • व्यक्तिवाचक संज्ञा का बहुवचन नहीं होता (आप ‘रामों’ या ‘दिल्लीयों’ नहीं कहते), लेकिन जातिवाचक संज्ञा का बहुवचन आसानी से बन सकता है।
      • लड़का → लड़के
      • नदी → नदियाँ
      • किताब → किताबें

जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):

जातिवाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के नाम आते हैं:


जातिवाचक संज्ञा के उपभेद (Sub-types of Common Noun)

आधुनिक व्याकरण में कई विद्वान, समूहवाचक संज्ञा और द्रव्यवाचक संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा का ही हिस्सा मानते हैं, क्योंकि वे भी एक प्रकार की जाति या वर्ग का ही बोध कराते हैं।

क) समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun):

ख) द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun):


जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

कभी-कभी जब कोई जातिवाचक शब्द किसी विशेष व्यक्ति के लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाता है, तो वह व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह प्रयोग होने लगता है।


3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)

परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जिनसे किसी प्राणी या वस्तु के गुण, दोष, अवस्था, दशा, भाव या धर्म (स्वभाव) का बोध होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले भाव (उदाहरण सहित):

भाववाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार की अनुभूतियाँ या अवधारणाएँ आती हैं:

भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण (Formation of Abstract Nouns)

भाववाचक संज्ञाएँ दो प्रकार की होती हैं:

क) मूल भाववाचक संज्ञा: कुछ शब्द मूल रूप से ही भाववाचक होते हैं, उन्हें किसी और शब्द से बनाया नहीं जाता।

ख) निर्मित भाववाचक संज्ञा: अधिकांश भाववाचक संज्ञाएँ जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय शब्दों में प्रत्यय (suffix) जोड़कर बनाई जाती हैं।

यह व्याकरण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मूल शब्द (प्रकार)प्रत्ययनिर्मित भाववाचक संज्ञा
जातिवाचक संज्ञा से
बच्चा, लड़का+ पनबचपन, लड़कपन
मानव, प्रभु+ ता / त्वमानवता, प्रभुता / प्रभुत्व
मित्र, शत्रु+ तामित्रता, शत्रुता
चोर, डाकू+ ई / ईचोरी, डकैती
बूढ़ा, मोटा+ पाबुढ़ापा, मोटापा
सर्वनाम से
अपना+ पन / त्वअपनापन / अपनत्व
निज+ त्वनिजत्व
मम+ ता / त्वममता / ममत्व
सर्व+ स्वसर्वस्व
विशेषण से
सुंदर, वीर, मधुर+ ता / यसुंदरता / सौंदर्य, वीरता, मधुरता / माधुर्य
अच्छा, बुरा+ आईअच्छाई, बुराई
मीठा, खट्टा+ आसमिठास, खटास
गर्म, सर्द+ ईगर्मी, सर्दी
गहरा+ आईगहराई
क्रिया से
लिखना, पढ़ना+ आई / आवटलिखाई, लिखाई / लिखावट, पढ़ाई
थकना, सजना+ आवट / आनथकावट, सजावट / थकान
चढ़ना, उतरना+ आई / आईचढ़ाई, उतराई
चुनना, मिलना+ आवचुनाव, मिलाप
हँसना+ ईहँसी
अव्यय से
दूर, समीप+ ई / यदूरी, सामीप्य
शीघ्र, निकट+ ताशीघ्रता, निकटता
ऊपर, नीचे+ ईऊपरी, नीची (विशेषण की तरह भी)
मना+ हीमनाही

निष्कर्ष

भाववाचक संज्ञा भाषा को सूक्ष्मता और गहराई प्रदान करती है। यह हमें उन अवधारणाओं और अनुभूतियों को नाम देने की क्षमता देती है, जिनका कोई भौतिक आकार नहीं है। यह व्याकरण का एक रचनात्मक हिस्सा है जहाँ प्रत्ययों के माध्यम से नए-नए शब्दों का निर्माण निरंतर होता रहता है।

4. समूहवाचक / समुदायवाचक संज्ञा (Collective Noun)

परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जो किसी एक व्यक्ति या वस्तु का बोध न कराकर, व्यक्तियों, वस्तुओं, या प्राणियों के संपूर्ण समूह (Group) या समुदाय (Community) का बोध कराते हैं, उन्हें समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं।

नोट: आधुनिक व्याकरण में इसे जातिवाचक संज्ञा का ही एक उपभेद माना जाता है, क्योंकि ‘सेना’, ‘भीड़’ या ‘कक्षा’ भी एक प्रकार की जाति या वर्ग ही है।


समूहवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):

समूहवाचक संज्ञाओं को बेहतर समझने के लिए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है:

1. व्यक्तियों का समूह:

ये शब्द मनुष्यों के संगठित या असंगठित समूह को दर्शाते हैं।

2. वस्तुओं का समूह:

ये शब्द निर्जीव वस्तुओं के संग्रह या ढेर को दर्शाते हैं।

3. प्राणियों का समूह:

ये शब्द पशु-पक्षियों के झुंड को दर्शाते हैं।


प्रयोग में ध्यान देने योग्य बातें:


निष्कर्ष

समूहवाचक संज्ञा हमें एक ही शब्द में बहुत से सदस्यों को व्यक्त करने की सुविधा देती है, जिससे भाषा संक्षिप्त और प्रभावशाली बनती है। यह भाषा की उस क्षमता को दर्शाती है जहाँ एकवचन शब्द भी समूह का बोध करा सकता है।


5. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)

परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जो किसी ऐसे द्रव्य (Liquid), धातु (Metal), अधातु (Non-metal), या पदार्थ (Substance) का बोध कराते हैं, जिसे नापा या तौला जा सकता है, किन्तु गिना नहीं जा सकता, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।

नोट: आधुनिक व्याकरण में इसे भी जातिवाचक संज्ञा का ही एक उपभेद माना जाता है, क्योंकि ‘सोना’ या ‘दूध’ भी अपनी-अपनी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं।


द्रव्यवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):

द्रव्यवाचक संज्ञाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है:

1. धातु और अधातु (Metals and Non-metals):

वे सभी प्राकृतिक खनिज और पदार्थ जिनसे औजार, आभूषण या अन्य वस्तुएँ बनती हैं।

2. द्रव पदार्थ (Liquid Substances):

वे सभी तरल पदार्थ जिनका हम सेवन करते हैं या अन्य कामों में प्रयोग करते हैं।

3. खाद्य और कृषि पदार्थ (Edible and Agricultural Substances):

वे सभी अनाज और खाद्य सामग्रियाँ जिन्हें नापा या तौला जाता है।

4. अन्य पदार्थ (Other Materials):

वे सभी प्राकृतिक या निर्मित सामग्रियाँ जिनसे वस्तुएँ बनती हैं।

5. गैसीय पदार्थ (Gaseous Substances):


द्रव्यवाचक और जातिवाचक संज्ञा में अंतर:

कभी-कभी द्रव्यवाचक और जातिवाचक में भ्रम हो सकता है।

आधारद्रव्यवाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञा
गणनीयताअगणनीय (Uncountable)गणनीय (Countable)
प्रयोगइनसे अन्य चीजें बनती हैंये बनी-बनाई अंतिम वस्तु होती हैं
उदाहरणलकड़ी (द्रव्यवाचक)कुर्सी (जातिवाचक)<br> ‘कुर्सी’ लकड़ी से बनती है और गिनी जा सकती है।
उदाहरणसोना (द्रव्यवाचक)अंगूठी (जातिवाचक)<br>‘अंगूठी’ सोने से बनती है और गिनी जा सकती है।

निष्कर्ष

द्रव्यवाचक संज्ञा उन सभी मूल पदार्थों या सामग्रियों को नाम देती है जिनसे हमारा भौतिक जगत बनता है। इसकी मुख्य पहचान यह है कि ये अगणनीय (uncountable) होती हैं और अक्सर किसी न किसी अन्य वस्तु के निर्माण में कच्चे माल (raw material) का काम करती हैं।


संज्ञा के रूपों में परिवर्तन

(Interchange in the Forms of Noun)

भाषा में शब्दों का अर्थ उनके प्रयोग पर बहुत अधिक निर्भर करता है। कभी-कभी वाक्य में प्रयोग के विशेष संदर्भ (context) के कारण एक प्रकार की संज्ञा, दूसरे प्रकार की संज्ञा का अर्थ देने लगती है। यह भाषा की एक लचीली और गतिशील प्रकृति को दर्शाता है।

मुख्य रूप से यह परिवर्तन निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है:

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
  2. जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
  3. भाववाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

नियम:
जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा (किसी एक व्यक्ति का नाम) अपने विशेष गुण, दोष या विशेषता के कारण, उस गुण वाले सभी व्यक्तियों या पूरी जाति का बोध कराने लगती है, तब वह व्यक्तिवाचक न रहकर जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।


2. जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

नियम:
जब कोई जातिवाचक संज्ञा (पूरी जाति का नाम) किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान के लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाए और केवल उसी एक का बोध कराए, तब वह जातिवाचक न रहकर व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाती है।


3. भाववाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

नियम:
भाववाचक संज्ञा का प्रयोग हमेशा एकवचन में होता है। लेकिन जब किसी भाववाचक संज्ञा का प्रयोग बहुवचन में किया जाता है, तो वह किसी एक भाव को न बताकर, उस भाव की विभिन्न प्रकार की अभिव्यक्तियों या उस भाव वाले व्यक्तियों का बोध कराने लगती है। तब वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।


संज्ञा के 50 उदाहरण (भेदों सहित)

  1. राम – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  2. लड़का – (जातिवाचक संज्ञा)
  3. ईमानदारी – (भाववाचक संज्ञा)
  4. सेना – (समूहवाचक संज्ञा)
  5. सोना – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  6. दिल्ली – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  7. शहर – (जातिवाचक संज्ञा)
  8. बचपन – (भाववाचक संज्ञा)
  9. कक्षा – (समूहवाचक संज्ञा)
  10. दूध – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  11. गंगा – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  12. नदी – (जातिवाचक संज्ञा)
  13. सुंदरता – (भाववाचक संज्ञा)
  14. भीड़ – (समूहवाचक संज्ञा)
  15. पानी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  16. हिमालय – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  17. पर्वत – (जातिवाचक संज्ञा)
  18. प्रेम – (भाववाचक संज्ञा)
  19. गुच्छा – (समूहवाचक संज्ञा)
  20. लोहा – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  21. रामायण – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  22. किताब – (जातिवाचक संज्ञा)
  23. मित्रता – (भाववाचक संज्ञा)
  24. परिवार – (समूहवाचक संज्ञा)
  25. घी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  26. सोमवार – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  27. दिन – (जातिवाचक संज्ञा)
  28. बुढ़ापा – (भाववाचक संज्ञा)
  29. पुलिस – (समूहवाचक संज्ञा)
  30. गेहूँ – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  31. भारत – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  32. देश – (जातिवाचक संज्ञा)
  33. क्रोध – (भाववाचक संज्ञा)
  34. सभा – (समूहवाचक संज्ञा)
  35. चाँदी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  36. ताजमहल – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  37. इमारत – (जातिवाचक संज्ञा)
  38. ऊँचाई – (भाववाचक संज्ञा)
  39. दल – (समूहवाचक संज्ञा)
  40. कोयला – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  41. जापान – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  42. कुर्सी – (जातिवाचक संज्ञा)
  43. लिखाई – (भाववाचक संज्ञा)
  44. ढेर – (समूहवाचक संज्ञा)
  45. प्लास्टिक – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
  46. होली – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  47. त्योहार – (जातिवाचक संज्ञा)
  48. गरीबी – (भाववाचक संज्ञा)
  49. जुलूस – (समूहवाचक संज्ञा)
  50. पेट्रोल – (द्रव्यवाचक संज्ञा)


सर्वनाम (Pronoun)

परिभाषा:
सर्वनाम शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘सर्व’ + ‘नाम’, जिसका अर्थ है – “सबका नाम”

व्याकरणिक परिभाषा:
वाक्य में संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को ‘सर्वनाम’ कहते हैं।

सर्वनाम की आवश्यकता क्यों है?
सर्वनाम का प्रयोग भाषा को सरल, संक्षिप्त और सुंदर बनाने के लिए किया जाता है। यह संज्ञा शब्दों के बार-बार दोहराव (repetition) से होने वाली नीरसता को दूर करता है।

हिन्दी में मूल सर्वनामों की संख्या 11 है:
मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या। (इन्हीं मूल सर्वनामों के रूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार बदलते रहते हैं)।


सर्वनाम के भेद (Types of Pronoun)

प्रयोग और अर्थ के आधार पर, सर्वनाम के छह (6) मुख्य भेद होते हैं:

1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)

परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग पुरुषों (व्यक्तियों) के नाम के स्थान पर किया जाता है, पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। ये सर्वनाम संवाद (conversation) में भाग लेने वाले तीन प्रकार के पुरुषों (व्यक्तियों) का बोध कराते हैं।

संवाद की स्थिति में तीन तरह के व्यक्ति होते हैं:

  1. वक्ता: बात को कहने वाला।
  2. श्रोता: बात को सुनने वाला।
  3. अन्य: वह व्यक्ति जिसके बारे में बात की जा रही है।

इन्हीं तीन स्थितियों के आधार पर पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद (उपभेद) किए गए हैं।


पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद (Types of Personal Pronoun)

क) उत्तम पुरुष (First Person)

ख) मध्यम पुरुष (Second Person)

ग) अन्य पुरुष (Third Person)


तुलनात्मक सारणी

पुरुषकिसके लिए प्रयोग होता है?सर्वनाम (एकवचन)सर्वनाम (बहुवचन)
उत्तम पुरुषबोलने वाला (वक्ता)मैं, मेरा, मुझेहम, हमारा, हमें
मध्यम पुरुषसुनने वाला (श्रोता)तू, तुम, आपतुम लोग, आप लोग
अन्य पुरुषजिसके बारे में बात होयह, वह, उसेये, वे, उन्हें

2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun)

परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जो किसी पास (निकट) या दूर की निश्चित (certain/specific) व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या घटना की ओर संकेत या इशारा करते हैं, निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द:


उदाहरण:


पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)

निश्चयवाचक सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में बहुत भ्रम होता है। यहाँ इन दोनों के अंतर को समझने और निश्चयवाचक सर्वनाम को आसानी से पहचानने की ट्रिक दी गई है:

गोल्डन रूल (Golden Rule):

“सर्वनाम के ठीक बाद अगर संज्ञा आए, तो वह ‘विशेषण’ बन जाए।”
“सर्वनाम अगर अकेला आए (संज्ञा की जगह पर), तो ‘सर्वनाम’ कहलाए।”

इसका मतलब है:

ट्रिक की प्रैक्टिस (उदाहरण के साथ):

  1. निश्चयवाचक सर्वनाम:
    • यह मेरा घर है।
      • (यहाँ ‘यह’ के बाद संज्ञा नहीं है, बल्कि ‘मेरा’ (संबंधकारक) आया है। ‘यह’ शब्द ‘घर’ संज्ञा की जगह पर प्रयोग हुआ है। इसलिए यह सर्वनाम है।)
    • वह बहुत अच्छा गाता है।
      • (यहाँ ‘वह’ किसी लड़के/व्यक्ति (संज्ञा) की जगह पर आया है। इसके बाद क्रिया की विशेषता है। इसलिए यह सर्वनाम है।)
    • मिठाई मुझे दो, वह मत खाओ।
      • (यहाँ ‘वह’ किसी दूसरी मिठाई (संज्ञा) के लिए आया है। यह सर्वनाम है।)
  2. सार्वनामिक विशेषण (तुलना के लिए):
    • यह घर मेरा है।
      • (यहाँ ‘यह’ के ठीक बाद ‘घर’ (संज्ञा) आ गया है। ‘यह’ शब्द ‘घर’ की विशेषता बता रहा है कि “यह वाला घर”। इसलिए यहाँ ‘यह’ विशेषण है।)
    • वह लड़का बहुत अच्छा गाता है।
      • (यहाँ ‘वह’ के ठीक बाद ‘लड़का’ (संज्ञा) है। इसलिए यहाँ ‘वह’ विशेषण है।)
    • वे लोग कहाँ जा रहे हैं?
      • (यहाँ ‘वे’ के बाद ‘लोग’ (संज्ञा) है। इसलिए यहाँ ‘वे’ विशेषण है।)

एक और ट्रिक (Context देखें):

वाक्य को पढ़कर यह जानने की कोशिश करें कि ‘यह/वह/ये/वे’ शब्द सिर्फ इशारा कर रहा है या किसी की जगह ले रहा है


निश्चयवाचक सर्वनाम और अन्य पुरुष पुरुषवाचक सर्वनाम में अंतर

‘वह’ और ‘वे’ का प्रयोग निश्चयवाचक और अन्य पुरुषवाचक, दोनों में होता है। इनमें अंतर प्रसंग (context) से पता चलता है:

इस सरल नियम और ट्रिक से आप निश्चयवाचक सर्वनाम को कभी गलत नहीं पहचानेंगे।


3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun)

परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनसे किसी निश्चित (certain/specific) व्यक्ति, वस्तु या पदार्थ का बोध नहीं होता, बल्कि हमेशा अनिश्चितता (uncertainty) की स्थिति बनी रहती है, अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द:
हिन्दी में मुख्य रूप से दो अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं:

  1. कोई (Koi):
    • इसका प्रयोग प्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् जीवित प्राणियों/व्यक्तियों) के लिए होता है।
    • यह एकवचन में प्रयोग होता है।
  2. कुछ (Kuch):
    • इसका प्रयोग अप्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् निर्जीव वस्तुओं/पदार्थों) और बहुत सूक्ष्म प्राणियों के लिए होता है।
    • इसका प्रयोग भाववाचक संज्ञा के लिए भी किया जा सकता है।

उदाहरण:

“कोई” का प्रयोग (प्राणियों के लिए):

“कुछ” का प्रयोग (वस्तुओं/पदार्थों के लिए):


पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)

अनिश्चयवाचक सर्वनाम को पहचानना बहुत आसान है। इसके लिए आप इन सरल ट्रिक्स का प्रयोग कर सकते हैं:

ट्रिक 1: “निश्चित नहीं है” का नियम

वाक्य को पढ़ने के बाद खुद से यह सवाल पूछें:

“क्या इस शब्द से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का पता चल रहा है?”

ट्रिक 2: ‘कोई’ = प्राणी और ‘कुछ’ = वस्तु

यह एक बहुत ही पक्की ट्रिक है। वाक्य में यह देखें कि अनिश्चितता किसके बारे में है:

किसके लिए?सर्वनामउदाहरण वाक्य
प्राणीवाचककोईशायद कोई बुला रहा है।
अप्राणीवाचककुछतुम्हारी जेब में कुछ रखा है।

“कोई” का कारक रूप:

कभी-कभी ‘कोई’ का रूप वाक्य में बदल जाता है, जैसे- ‘किसी’, ‘किन्हीं’। यह भी अनिश्चयवाचक सर्वनाम ही होता है।

अनिश्चयवाचक विशेषण से अंतर:

ध्यान दें कि जब ‘कोई’ और ‘कुछ’ के ठीक बाद संज्ञा शब्द आ जाए, तो वे ‘अनिश्चित सार्वनामिक विशेषण’ (Indefinite Adjective) बन जाते हैं।


4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)

परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग प्रश्न (question) पूछने के लिए किया जाता है, प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द:
हिन्दी में मुख्य रूप से दो प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं, जिनके कार्य निश्चित हैं:

  1. कौन (Kaun):
    • इसका प्रयोग प्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् जीवित प्राणियों/व्यक्तियों) के बारे में प्रश्न पूछने के लिए होता है।
  2. क्या (Kya):
    • इसका प्रयोग अप्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् निर्जीव वस्तुओं/पदार्थों/भावों/कार्यों) के बारे में प्रश्न पूछने के लिए होता है।

उदाहरण:

“कौन” का प्रयोग (व्यक्तियों/प्राणियों के लिए):

“क्या” का प्रयोग (वस्तुओं/पदार्थों के लिए):


पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)

प्रश्नवाचक सर्वनाम को पहचानना व्याकरण में सबसे आसान कामों में से एक है। इसकी ट्रिक्स बिलकुल सीधी और सरल हैं:

ट्रिक 1: प्रश्न चिह्न (?) को देखो

ट्रिक 2: “कौन = प्राणी, क्या = वस्तु” का गोल्डन रूल

यह सबसे अचूक ट्रिक है। वाक्य में यह पहचानें कि प्रश्न किसके बारे में पूछा जा रहा है:

किसके लिए प्रश्न?सर्वनामउदाहरण वाक्य
प्राणी/व्यक्ति (Living)कौन, किसे, किसनेवह कौन था?
वस्तु/पदार्थ (Non-living)क्याउसने क्या खाया?

ट्रिक 3: उत्तर में संज्ञा

तुलना (क्रिया-विशेषण से):


सर्वनाम और क्रिया-विशेषण में अंतर

वाक्य में प्रयोग देखें:


5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)

परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जो वाक्य में आए किसी दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्द से संबंध स्थापित करते हैं, संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द (जोड़े में):

(आधुनिक हिन्दी में ‘सो’ की जगह ‘वह’ का प्रयोग अधिक प्रचलित हो गया है।)


उदाहरण:


पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)

संबंधवाचक सर्वनाम को पहचानना बहुत आसान है। इसकी सबसे अच्छी ट्रिक है वाक्य की बनावट को समझना।

ट्रिक 1: “जोड़ी वाले शब्द” खोजें

ट्रिक 2: “मिश्र वाक्य” की पहचान

ट्रिक 3: पहला शब्द प्रश्न जैसा, दूसरा संबंध बताने वाला

अनिश्चयवाचक और प्रश्नवाचक सर्वनाम से अंतर

कभी-कभी अकेले ‘जो’ का प्रयोग देखकर भ्रम हो सकता है।

संबंधवाचक की सबसे पक्की पहचान उसका दो उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य और जोड़ी में आना है। अगर आपको वाक्य में दो क्रियाएँ दिखें और वे एक-दूसरे से जुड़ी हों, तो वहां संबंधवाचक सर्वनाम होने की प्रबल संभावना होती है।


6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

परिभाषा:
‘निज’ शब्द का अर्थ होता है – ‘अपना’ (own), ‘स्वयं’ (self)

निजवाचक सर्वनाम वे सर्वनाम होते हैं, जिनका प्रयोग वाक्य का कर्ता (subject) स्वयं अपने लिए या अपनेपन का बोध कराने के लिए करता है।

मुख्य सर्वनाम शब्द:


उदाहरण:


पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)

निजवाचक सर्वनाम और मध्यम पुरुष ‘आप’ में अक्सर भ्रम होता है। इस भ्रम को दूर करने के लिए यहाँ कुछ बहुत ही कारगर ट्रिक्स दी गई हैं:

ट्रिक 1: “खुद/स्वयं” से बदलकर देखें (The Golden Rule)

जिस वाक्य में ‘आप’, ‘अपने आप’, ‘स्वयं’, ‘खुद’ आदि का प्रयोग हो, वहाँ इन शब्दों को “खुद” या “स्वयं” से बदलकर (replace करके) देखें। यदि वाक्य का अर्थ नहीं बदलता, तो वह निजवाचक सर्वनाम है।

ट्रिक 2: कर्ता (Subject) के साथ प्रयोग

ट्रिक 3: ‘आप’ के दोहरे अर्थ को समझें

इस प्रकार, “खुद/स्वयं” से बदलने वाली ट्रिक निजवाचक सर्वनाम को पहचानने का सबसे सरल और अचूक तरीका है।


सर्वनाम से संबंधित परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

  1. सर्वनाम का अर्थ: सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है – ‘सबका नाम’ (सर्व + नाम)।
  2. परिभाषा: जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।
  3. प्रयोग का उद्देश्य: सर्वनाम का मुख्य उद्देश्य संज्ञा की पुनरावृत्ति (repetition) को रोकना और भाषा को संक्षिप्त एवं सुंदर बनाना है।
  4. हिन्दी में मूल सर्वनाम: हिन्दी में मूल सर्वनामों की संख्या 11 मानी जाती है। ये हैं –
    मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या।
  5. सर्वनाम के कुल भेद: प्रयोग के आधार पर सर्वनाम के कुल 6 भेद होते हैं।
    (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, प्रश्नवाचक, संबंधवाचक, निजवाचक)।
  6. विकारी शब्द: सर्वनाम एक विकारी शब्द है, क्योंकि इसमें लिंग, वचन और कारक के आधार पर रूप परिवर्तन होता है।
  7. लिंग का प्रभाव: हिन्दी सर्वनामों पर लिंग (Gender) का सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। क्रिया से पता चलता है कि सर्वनाम पुरुष के लिए है या स्त्री के लिए।
    • उदाहरण: वह जाता है। (पुल्लिंग) / वह जाती है। (स्त्रीलिंग) → (‘वह’ में कोई बदलाव नहीं हुआ)।
  8. पुरुषवाचक सर्वनाम: इसके तीन भेद होते हैं –
    • उत्तम पुरुष: मैं, हम (बोलने वाला)
    • मध्यम पुरुष: तू, तुम, आप (सुनने वाला)
    • अन्य पुरुष: यह, वह, ये, वे (जिसके बारे में बात हो)
  9. निश्चयवाचक सर्वनाम: इसके दो अन्य नाम भी हैं – संकेतवाचक सर्वनाम और निर्देशक सर्वनाम
    • यह वस्तु या व्यक्ति की निश्चितता का बोध कराता है। (यह, वह, ये, वे)।
  10. अनिश्चयवाचक सर्वनाम: इसमें केवल दो मुख्य सर्वनाम हैं:
    • कोई: प्राणीवाचक (व्यक्तियों के लिए)।
    • कुछ: अप्राणीवाचक (वस्तुओं/पदार्थों के लिए)।
  11. संबंधवाचक सर्वनाम: ये हमेशा जोड़ी में आते हैं और मिश्र वाक्यों में दो उपवाक्यों को जोड़ते हैं।
    • (जैसे- जो-सो, जैसा-वैसा, जिसकी-उसकी)।
    • आधुनिक हिन्दी में ‘सो’ की जगह अक्सर ‘वह’ का प्रयोग होता है (जैसे – जो करेगा, वह भरेगा)।
  12. निजवाचक सर्वनाम: इसमें प्रयुक्त ‘आप’ का अर्थ ‘स्वयं’ (oneself/self) होता है, न कि ‘तुम/You’।
    • इसका प्रयोग कर्ता स्वयं अपने लिए करता है।
    • इसके मुख्य रूप हैं: आप, अपने आप, स्वयं, खुद, स्वतः

सबसे अधिक भ्रमित करने वाले और महत्वपूर्ण तथ्य ( परीक्षा के लिए विशेष )

  1. ‘यह’ और ‘वह’ का प्रयोग:
    • जब ये किसी व्यक्ति (कर्ता) के लिए आते हैं, तो अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम होते हैं।
    • जब ये किसी वस्तु की निश्चितता बताने या संकेत करने के लिए आते हैं, तो निश्चयवाचक सर्वनाम होते हैं।
      • अन्य पुरुष: वह पढ़ रहा है।
      • निश्चयवाचक: वह मेरी किताब है।
  2. सर्वनाम बनाम सार्वनामिक विशेषण (सबसे महत्वपूर्ण):
    • यदि सर्वनाम (जैसे – यह, वह, कोई, कुछ) के ठीक बाद संज्ञा शब्द आ जाए, तो वह सर्वनाम न रहकर सार्वनामिक विशेषण बन जाता है।
      • सर्वनाम: यह मेरी कार है।
      • विशेषण: यह कार मेरी है।
      • सर्वनाम: बाहर कोई है।
      • विशेषण: बाहर कोई आदमी है।
  3. ‘आप’ शब्द के तीन प्रयोग:
    • मध्यम पुरुष: सुनने वाले के लिए आदरपूर्वक (जैसे- आप कहाँ रहते हैं?)।
    • अन्य पुरुष: किसी व्यक्ति के परिचय में आदरपूर्वक (जैसे- गांधीजी राष्ट्रपिता हैं, आपका जन्म गुजरात में हुआ)।
    • निजवाचक: स्वयं/खुद के अर्थ में (जैसे- मैं यह काम आप कर लूँगा)।
  4. प्रश्नवाचक सर्वनाम बनाम क्रिया-विशेषण:
    • कौन, क्याप्रश्नवाचक सर्वनाम हैं (उत्तर में संज्ञा मिलती है)।
    • कहाँ, कब, क्यों, कैसेप्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण हैं (उत्तर में क्रिया की विशेषता मिलती है)।

ये तथ्य सर्वनाम अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं और परीक्षाओं में अक्सर इन्हीं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।



विशेषण (Adjective)

परिभाषा:
वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, मात्रा, अवस्था आदि) बताते हैं, ‘विशेषण’ कहलाते हैं।

जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, उसे ‘विशेष्य’ (Noun/Pronoun being described) कहते हैं।


विशेषण के भेद (Types of Adjective)

प्रयोग और अर्थ के आधार पर, विशेषण के मुख्य रूप से चार (4) भेद होते हैं:

  1. गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)
  2. संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number)
  3. परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)
  4. सार्वनामिक या संकेतवाचक विशेषण (Demonstrative/Pronominal Adjective)

विशेषण के भेदों की विस्तृत व्याख्या

1. गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)

परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, स्वभाव, स्वाद, गंध, स्पर्श, दशा, अवस्था, स्थान, काल आदि से संबंधित विशेषताओं का बोध कराते हैं, गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं।


पहचान की ट्रिक (Trick to Identify)

गुणवाचक विशेषण को पहचानने का सबसे सरल तरीका है विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) से “कैसा?”, “कैसी?” या “कैसे?” का प्रश्न करना। जो शब्द उत्तर में मिलेगा, वही गुणवाचक विशेषण होगा।


गुणवाचक विशेषण के प्रमुख भेद / वर्ग (Major Sub-types)

गुणवाचक विशेषण के अंतर्गत अनेक प्रकार की विशेषताएँ आती हैं, जिन्हें बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित वर्गों में बांटा जा सकता है:

क) गुण-बोधक (Describing Good Qualities):

ख) दोष-बोधक (Describing Faults/Defects):

ग) रंग-बोधक (Describing Colour):

घ) आकार-बोधक (Describing Shape/Size):

ङ) अवस्था-बोधक (Describing State/Condition):

च) स्थान-बोधक (Describing Place/Origin):

छ) स्वाद-बोधक (Describing Taste):

ज) गंध-बोधक (Describing Smell):

झ) स्पर्श-बोधक (Describing Touch):

ञ) काल-बोधक (Describing Time):

निष्कर्ष

गुणवाचक विशेषण, भाषा को रंग, रूप, आकार और भावों से भर देते हैं, जिससे वर्णन अधिक जीवंत और स्पष्ट हो जाता है। यह विशेषण का सबसे सहज और स्वाभाविक रूप है, जिसका प्रयोग हम अपनी रोजमर्रा की बातचीत में सबसे अधिक करते हैं। इसकी पहचान “कैसा/कैसी?” प्रश्न से आसानी से की जा सकती है, जिससे इसे अन्य भेदों से अलग करना सरल हो जाता है।


2. संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number / Numeral Adjective)

परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या, गणना या क्रम संबंधी विशेषता का बोध कराते हैं, संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।

पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक:

इसका विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) हमेशा गणनीय (Countable) होता है, अर्थात् उसे एक, दो, तीन… करके गिना जा सकता है।

प्रश्न: यह “कितने?” (How many?) का उत्तर देता है।


संख्यावाचक विशेषण के भेद (Types of Numeral Adjective)

संख्या निश्चित है या अनिश्चित, इस आधार पर इसके दो मुख्य उपभेद होते हैं:

क) निश्चित संख्यावाचक विशेषण (Definite Numeral Adjective)

ख) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (Indefinite Numeral Adjective)


संख्यावाचक और परिमाणवाचक विशेषण में अंतर (SUPER TRICK)

यह विशेषण का सबसे भ्रमित करने वाला हिस्सा है, लेकिन इसकी ट्रिक बहुत सरल है।

नियम:

यदि विशेषण (कुछ, कई, बहुत, थोड़ा, सब) के बाद आने वाला विशेष्य (संज्ञा) गिना जा सकता (countable) है, तो वह संख्यावाचक होगा।
यदि विशेष्य को गिना नहीं जा सकता, केवल नापा या तौला जा सकता (uncountable) है, तो वह परिमाणवाचक होगा।

उदाहरण वाक्यविशेष्य (संज्ञा)गणनीय / अगणनीय?विशेषण का भेद
मैंने कुछ आम खाए।आमगणनीय (गिने जा सकते हैं)अनिश्चित संख्यावाचक
मुझे कुछ दूध दे दो।दूधअगणनीय (नापा जाता है)अनिश्चित परिमाणवाचक
गिलास में थोड़ा पानी है।पानीअगणनीयअनिश्चित परिमाणवाचक
मेरे पास थोड़े पैसे हैं।पैसेगणनीय (गिने जा सकते हैं)अनिश्चित संख्यावाचक
बाल्टी में बहुत पानी है।पानीअगणनीयअनिश्चित परिमाणवाचक
मेले में बहुत लोग थे।लोगगणनीयअनिश्चित संख्यावाचक

निष्कर्ष

संख्यावाचक विशेषण हमें वस्तुओं और व्यक्तियों को गिनने, उनका क्रम बताने और उनकी संख्या का अनुमान लगाने में मदद करता है। इसका सबसे बड़ा पहचान चिह्न यह है कि इसका संबंध हमेशा ‘गणनीय संज्ञाओं’ से होता है।


3. परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)

परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा, नाप, या तौल (quantity, measurement, weight) संबंधी विशेषता का बोध कराते हैं, परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।

पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक:

इसका विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) हमेशा अगणनीय (Uncountable) होता है, अर्थात् उसे एक, दो, तीन… करके गिना नहीं जा सकता, उसे केवल नापा (जैसे- मीटर, लीटर) या तौला (जैसे- किलो, ग्राम) जा सकता है।

प्रश्न: यह भी “कितना?” या “कितनी?” (How much?) का उत्तर देता है।


परिमाणवाचक विशेषण के भेद (Types of Quantitative Adjective)

मात्रा निश्चित है या अनिश्चित, इस आधार पर इसके दो मुख्य उपभेद होते हैं:

क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण (Definite Quantitative Adjective)

ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण (Indefinite Quantitative Adjective)


परिमाणवाचक और संख्यावाचक विशेषण में अंतर (SUPER TRICK)

यह विशेषण का सबसे भ्रमित करने वाला हिस्सा है, लेकिन इसकी ट्रिक बहुत सरल है।

नियम:

यदि विशेषण (कुछ, कई, बहुत, थोड़ा, सब, ज्यादा) के बाद आने वाला विशेष्य (संज्ञा) गिना जा सकता (countable) है, तो वह संख्यावाचक होगा।
यदि विशेष्य को गिना नहीं जा सकता, केवल नापा या तौला जा सकता (uncountable) है, तो वह परिमाणवाचक होगा।

उदाहरण वाक्यविशेष्य (संज्ञा)गणनीय / अगणनीय?विशेषण का भेद
मैंने थोड़े चावल खाए।चावलअगणनीय (तौला जाता है)अनिश्चित परिमाणवाचक
मैंने थोड़े फल खाए।फलगणनीय (गिने जा सकते हैं)अनिश्चित संख्यावाचक
बाल्टी में बहुत पानी है।पानीअगणनीयअनिश्चित परिमाणवाचक
मेले में बहुत लोग थे।लोगगणनीयअनिश्चित संख्यावाचक
मुझे ज्यादा चीनी मत देना।चीनीअगणनीयअनिश्चित परिमाणवाचक
वहाँ ज्यादा गाड़ियाँ नहीं हैं।गाड़ियाँगणनीयअनिश्चित संख्यावाचक

निष्कर्ष

परिमाणवाचक विशेषण हमें वस्तुओं और पदार्थों की मात्रा और माप-तौल के बारे में जानकारी देता है। इसका सबसे बड़ा पहचान चिह्न यह है कि इसका संबंध हमेशा ‘अगणनीय संज्ञाओं’ से होता है, जिन्हें हम मापते या तोलते हैं, गिनते नहीं।


4. सार्वनामिक विशेषण / संकेतवाचक विशेषण

परिभाषा:
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले लगकर उस संज्ञा की विशेषता बताए या उसकी ओर संकेत करे, तो वह शब्द सर्वनाम न रहकर ‘सार्वनामिक विशेषण’ बन जाता है।


पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक (The Golden Rule)

यदि सर्वनाम शब्द (जैसे- यह, वह, कोई, कौन, जो) के ठीक बाद कोई संज्ञा शब्द आता है, तो वह सर्वनाम शब्द हमेशा सार्वनामिक विशेषण होता है।
यदि सर्वनाम शब्द संज्ञा की जगह पर (अकेला या क्रिया के साथ) आता है, तो वह सर्वनाम ही रहता है।

संरचना: सर्वनाम + संज्ञा = सार्वनामिक विशेषण


सार्वनामिक विशेषण के प्रमुख भेद (Types)

मूल सर्वनामों के आधार पर ही सार्वनामिक विशेषण के भी चार प्रमुख भेद होते हैं:

क) निश्चयवाचक (संकेतवाचक) सार्वनामिक विशेषण

ख) अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण

ग) प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण

घ) संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण


निष्कर्ष

सार्वनामिक विशेषण की एकमात्र और अचूक पहचान यही है कि यह हमेशा संज्ञा के ठीक पहले आकर एक बॉडीगार्ड की तरह उसकी तरफ इशारा करता है या उसकी विशेषता बताता है। यदि सर्वनाम के बाद संज्ञा नहीं है, तो वह विशेषण नहीं हो सकता, वह सर्वनाम ही रहेगा। इस नियम को याद रखने से इस विषय में कभी कोई गलती नहीं होगी।


प्रविशेषण (Praviveshan)

परिभाषा:
हिन्दी व्याकरण में, वे शब्द जो विशेषण की भी विशेषता बताते हैं, ‘प्रविशेषण’ कहलाते हैं।

सरल शब्दों में, विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है और प्रविशेषण उस विशेषण की मात्रा या तीव्रता (degree or intensity) को बताता है।


उदाहरणों से समझें:

1. सामान्य वाक्य (केवल विशेषण के साथ):
* राम ईमानदार लड़का है।
* (यहाँ ‘ईमानदार’ शब्द ‘लड़का’ (संज्ञा) की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह विशेषण है।)

2. प्रविशेषण युक्त वाक्य:
* राम बहुत ईमानदार लड़का है।
* विश्लेषण:
* ‘लड़का’ → संज्ञा (विशेष्य)
* ‘ईमानदार’ → विशेषण (लड़का कैसा है? – ईमानदार)
* ‘बहुत’ → प्रविशेषण (कितना ईमानदार है? – बहुत ईमानदार)।
* यहाँ ‘बहुत’ शब्द ‘लड़का’ की नहीं, बल्कि विशेषण ‘ईमानदार’ की विशेषता बता रहा है।


प्रमुख प्रविशेषण शब्द (Common Praviveshan Words):

हिन्दी में कुछ शब्द अक्सर प्रविशेषण के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। ये शब्द विशेषण की मात्रा, तीव्रता या स्तर को दर्शाते हैं।


विभिन्न वाक्यों में प्रविशेषण के उदाहरण:

  1. कश्मीरी सेब सिंदूरी लाल होता है।
    • सेब (संज्ञा) की विशेषता क्या है? → लाल (विशेषण)
    • कितना लाल? → सिंदूरी लाल।
    • अतः, ‘सिंदूरी’ यहाँ प्रविशेषण है।
  2. यह चाय बहुतमीठी है।
    • मीठी → विशेषण
    • बहुत → प्रविशेषण
  3. वह अत्यंतसुंदर दृश्य था।
    • सुंदर → विशेषण
    • अत्यंत → प्रविशेषण
  4. मुझे थोड़ागर्म पानी चाहिए।
    • गर्म → विशेषण
    • थोड़ा → प्रविशेषण
  5. यह तो बड़ाभारी अन्याय है।
    • भारी → विशेषण
    • बड़ा → प्रविशेषण (यहाँ ‘बड़ा’ का अर्थ आकार में बड़ा नहीं, बल्कि ‘बहुत’ है)।
  6. वह लगभगपूरी तरह ठीक हो गया है।
    • पूरी → विशेषण
    • लगभग → प्रविशेषण
  7. रमेश बिलकुलस्वस्थ है।
    • स्वस्थ → विशेषण
    • बिलकुल → प्रविशेषण

क्रिया-विशेषण और प्रविशेषण में अंतर

पहचान की ट्रिक:

वाक्य में ‘बहुत’, ‘कम’, ‘अधिक’ जैसे शब्दों के बाद अगर विशेषण है, तो वे प्रविशेषण होंगे।
यदि उनके बाद क्रिया है, तो वे क्रिया-विशेषण होंगे।

निष्कर्ष

प्रविशेषण, विशेषण के अर्थ में गहराई और तीव्रता लाता है, जिससे भाषा अधिक सटीक और प्रभावशाली बन जाती है। यह हमें यह बताने में मदद करता है कि कोई गुण या दोष किस स्तर का है।


विशेषण की अवस्थाएँ (Degrees of Adjective)

परिभाषा:
विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं। लेकिन जब दो या दो से अधिक संज्ञाओं के गुणों या दोषों की तुलना (comparison) की जाती है, तो उस तुलना के स्तर (level) को दर्शाने के लिए विशेषण की अवस्थाओं का प्रयोग किया जाता है।

मुख्य रूप से, विशेषण की तीन तुलनात्मक अवस्थाएँ होती हैं:

  1. मूलावस्था (Positive Degree)
  2. उत्तरावस्था (Comparative Degree)
  3. उत्तमावस्था (Superlative Degree)

तीनों अवस्थाओं की विस्तृत व्याख्या

1. मूलावस्था (Positive Degree)

2. उत्तरावस्था (Comparative Degree)

3. उत्तमावस्था (Superlative Degree)


तुलनात्मक सारणी: तीनों अवस्थाएँ

अवस्थामूलावस्था (Positive)उत्तरावस्था (Comparative)उत्तमावस्था (Superlative)
परिभाषाएक की सामान्य विशेषतादो में तुलना (एक बेहतर/बुरा)सब में तुलना (सबसे बेहतर/बुरा)
विशेषताकोई तुलना नहीं‘से अधिक’ या ‘-तर’ प्रत्यय‘सबसे’ या ‘-तम’ प्रत्यय
उदाहरण-1यह फल मीठा है।यह फल उस फल से अधिक मीठा है।यह फल सबसे मीठा है।
उदाहरण-2वह चतुर है।वह तुमसे अधिक चतुर है।वह सबमें सबसे चतुर है।
उदाहरण-3 (तत्सम)उसका कार्य श्रेष्ठ है।उसका कार्य तुम्हारे कार्य से श्रेष्ठतर है।उसका कार्य श्रेष्ठतम है।
उदाहरण-4 (तत्सम)यह लघु कथा है।यह कथा उस कथा से लघुतर है।यह लघुतम कथा है।

निष्कर्ष

विशेषण की ये तीन अवस्थाएँ हमें न केवल किसी की विशेषता बताने, बल्कि तुलनात्मक रूप से उसकी स्थिति को स्पष्ट करने में भी मदद करती हैं। मूलावस्था जहाँ सामान्य वर्णन है, वहीं उत्तरावस्था और उत्तमावस्था तुलनात्मक श्रेष्ठता या निम्नता को दर्शाती हैं, जिससे भाषा में सटीकता आती है।


विशेषण और विशेष्य में संबंध

विशेषण और विशेष्य का संबंध अटूट और अन्योन्याश्रित होता है, अर्थात् वे एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर होते हैं। इस संबंध को हम “स्वामी-सेवक” या “वर्ण्य-वर्णक” के संबंध की तरह समझ सकते हैं, जहाँ एक विशेषता बताता है और दूसरा वह है जिसकी विशेषता बताई जा रही है।

“बिना विशेष्य के विशेषण का कोई अस्तित्व नहीं है, और विशेषण के बिना विशेष्य की विशेषता का पता नहीं चलता।”


विशेषण और विशेष्य के संबंध के प्रमुख नियम:

1. लिंग और वचन का संबंध (Agreement in Gender and Number)

यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है। हिन्दी में, विशेषण का लिंग (Gender) और वचन (Number) हमेशा विशेष्य के अनुसार ही बदलता है।

2. स्थान का संबंध (Position in a Sentence)

वाक्य में विशेषण का प्रयोग दो प्रकार से हो सकता है, जिससे इसके दो भेद माने जाते हैं:

क) उद्देश्य विशेषण (Attributive Adjective)

ख) विधेय विशेषण (Predicative Adjective)

दोनों ही स्थितियों में, विशेषण और विशेष्य का संबंध बना रहता है, केवल वाक्य में उनके स्थान बदल जाते हैं।

3. विशेषण की अवस्थाओं का संबंध

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ (मूलावस्था, उत्तरावस्था, उत्तमावस्था) भी विशेष्य के संदर्भ में ही प्रयोग होती हैं।


सारणी में संबंध

विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम)लिंग/वचनविशेषण का रूपउदाहरण वाक्य
कमरापुल्लिंग, एकवचनबड़ायह बड़ा कमरा है।
कमरेपुल्लिंग, बहुवचनबड़ेये बड़े कमरे हैं।
दीवारस्त्रीलिंग, एकवचनबड़ीयह दीवार बड़ी है।
दीवारेंस्त्रीलिंग, बहुवचनबड़ीये दीवारें बड़ी हैं।

निष्कर्ष

विशेषण और विशेष्य का संबंध आश्रय और आश्रित का है। विशेषण का स्वतंत्र रूप से कोई महत्व नहीं होता, वह अपना अर्थ और स्वरूप हमेशा विशेष्य से ही प्राप्त करता है। विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) जैसा होगा, विशेषण को भी वैसा ही रूप धारण करना पड़ेगा। यही उनके बीच का सबसे गहरा संबंध है जो हिन्दी व्याकरण को एक तार्किक और व्यवस्थित रूप प्रदान करता है।


विशेषण की रचना (Formation of Adjectives)

हिन्दी में कुछ शब्द तो मूल रूप में ही विशेषण होते हैं, लेकिन अधिकांश विशेषण शब्दों की रचना संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, और अव्यय शब्दों में प्रत्यय (suffix) या उपसर्ग (prefix) लगाकर की जाती है।


1. संज्ञा से विशेषण बनाना (From Noun to Adjective)

यह विशेषण बनाने का सबसे आम और व्यापक तरीका है। संज्ञा शब्दों में विभिन्न प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं।

प्रत्ययसंज्ञा शब्दबना हुआ विशेषण
-ई (i)पाप, रोग, धन, जयपुर, जापानपापी, रोगी, धनी, जयपुरी, जापानी
-इक (ik)समाज, इतिहास, विज्ञान, दिनसामाजिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, दैनिक
-इत (it)सम्मान, अपमान, हर्ष, फलसम्मानित, अपमानित, हर्षित, फलित
-ईय (iya)भारत, राष्ट्र, जाति, स्थानभारतीय, राष्ट्रीय, जातीय, स्थानीय
-ईन (een)ग्राम, कुल, रंगग्रामीण, कुलीन, रंगीन
-आ (a)भूख, प्यासभूखा, प्यासा
-आलू (aalu)श्रद्धा, झगड़ा, कृपा, दयाश्रद्धालु, झगड़ालू, कृपालु, दयालु
-एला (ela)विष, रंगविषैला, रंगीला
-वान (vaan)गुण, धन, बलगुणवान, धनवान, बलवान
-मान (maan)बुद्धि, श्री, शक्तिबुद्धिमान, श्रीमान, शक्तिमान
-ईला (eela)चमक, पत्थर, शर्मचमकीला, पथरीला, शर्मीला

2. सर्वनाम से विशेषण बनाना (From Pronoun to Adjective)

सर्वनाम शब्दों में प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं। इनका प्रयोग अक्सर सार्वनामिक विशेषण के रूप में भी होता है।

सर्वनाम शब्दप्रत्ययबना हुआ विशेषणउदाहरण वाक्य
यहयह, ऐसायह किताब मेरी है। ऐसा आदमी मत बनो।
वहवह, वैसावह घर तुम्हारा है। वैसा काम मत करो।
जोजो, जैसाजो छात्र परिश्रम करेगा…। जैसा देश, वैसा भेष।
मैं-रा (मेरा)मेरा, मुझ-सामेरा भाई। मुझ-सा कोई नहीं।
तुम-हारा(तुम्हारा)तुम्हारा, तुम-सातुम्हारा घर। तुम-सा मित्र कहाँ।

3. क्रिया से विशेषण बनाना (From Verb to Adjective)

क्रिया के धातु रूप में प्रत्यय जोड़कर विशेषण बनाए जाते हैं। ये अक्सर किसी क्रिया को करने वाले कर्ता की या क्रिया के परिणाम की विशेषता बताते हैं।

क्रिया धातुप्रत्ययबना हुआ विशेषणउदाहरण
पढ़ना (पढ़)+ आकू / ऐयापढ़ाकू, पढ़ैयावह बड़ा पढ़ाकू लड़का है।
लड़ना (लड़)+ आकूलड़ाकूवह एक लड़ाकू विमान है।
बेचना (बेच)+ आऊबिकाऊयह घर बिकाऊ है।
टिकना (टिक)+ आऊटिकाऊयह सामान बहुत टिकाऊ है।
भूलना (भूल)+ अक्कड़भुलक्कड़वह भुलक्कड़ आदमी है।
घूमना (घूम)+ अक्कड़घुमक्कड़वह घुमक्कड़ स्वभाव का है।
सड़ना (सड़)+ इयलसड़ियलयह सड़ियल आम है।
भागना (भाग)+ ओड़ाभगोड़ावह एक भगोड़ा अपराधी है।

4. अव्यय से विशेषण बनाना (From Adverb/Indeclinable to Adjective)

अव्यय (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक आदि) शब्दों में भी प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं।

अव्यय शब्दप्रत्ययबना हुआ विशेषणउदाहरण
बाहर+ ईबाहरीहमें बाहरी लड़कों से बात नहीं करनी चाहिए।
भीतर+ ईभीतरीयह घर की भीतरी दीवार है।
आगे+ लाअगलाअगला स्टेशन आने वाला है।
पीछे+ लापिछलाउसने पिछला पाठ याद नहीं किया।
ऊपर+ ईऊपरीहमें केवल ऊपरी बातें पता हैं।
नीचे+ लानिचलायह घर का निचला हिस्सा है।

उपसर्ग द्वारा विशेषण निर्माण

कुछ विशेषण उपसर्ग (prefix) लगाकर भी बनाए जाते हैं, जो अक्सर विलोम शब्द बनाने का काम करते हैं।

उपसर्गमूल शब्दनिर्मित विशेषण
निर्-डर, बल, दोषनिडर, निर्बल, निर्दोष
स-बल, पूत, गुणसबल, सपूत, सगुण
बे-ईमान, अदब, चैनबेईमान, बेअदब, बेचैन

निष्कर्ष

विशेषण की रचना एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्याकरणिक प्रक्रिया है। यह हमें संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और अव्यय जैसे विभिन्न प्रकार के शब्दों से नए विशेषण शब्द बनाने की क्षमता देती है, जिससे भाषा में अभिव्यक्ति की सटीकता और समृद्धि बढ़ती है। प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाना इसका सबसे आम और रचनात्मक तरीका है।


विशेषण के 50 उदाहरण (भेदों सहित)

  1. वह एक ईमानदार व्यक्ति है। – (गुणवाचक विशेषण)
  2. यह फूल लाल है। – (गुणवाचक विशेषण)
  3. मेरा घर बड़ा है। – (गुणवाचक विशेषण)
  4. मेज पर चार किताबें रखी हैं। – (निश्चित संख्यावाचक)
  5. वह कक्षा में प्रथम आया। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
  6. मुझे दो किलो चीनी चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  7. यह कमीज दस मीटर कपड़े से बनी है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  8. यह लड़का बहुत होशियार है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  9. बाहर कोई आदमी खड़ा है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  10. मुझे थोड़ा पानी चाहिए। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  11. सभा में कई लोग आए थे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  12. वह लड़की सुंदर है। – (गुणवाचक विशेषण)
  13. मुझे गर्म दूध पीना है। – (गुणवाचक विशेषण)
  14. सड़क ऊँची-नीची है। – (गुणवाचक विशेषण)
  15. मैंने कुछ फल खरीदे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  16. दाल में जरा-सा नमक कम है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  17. किस छात्र ने यह काम किया है? – (सार्वनामिक विशेषण)
  18. वह घर बहुत पुराना है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  19. मोहन बुद्धिमान है। – (गुणवाचक विशेषण)
  20. कौआ काला होता है। – (गुणवाचक विशेषण)
  21. यह पाँचवीं मंजिल है। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
  22. दोनों भाई खेल रहे हैं। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
  23. मुझे आधा लीटर तेल चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  24. जिसकी लाठी उसकी भैंस। – (सार्वनामिक विशेषण)
  25. यह रास्ता बहुत लंबा है। – (गुणवाचक विशेषण)
  26. आज मौसम अच्छा है। – (गुणवाचक विशेषण)
  27. मुझे सब किताबें दे दो। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  28. गिलास में बहुत पानी है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  29. मेरा भाई डॉक्टर है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  30. चाय में चीनी कम है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  31. यह एक ऐतिहासिक इमारत है। – (गुणवाचक विशेषण)
  32. प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदारी से काम करना चाहिए। – (निश्चित संख्यावाचक – प्रत्येकबोधक)
  33. उसने सफेद घोड़ा खरीदा। – (गुणवाचक विशेषण)
  34. वह बहुत गरीब आदमी है। (‘बहुत’ प्रविशेषण है) – (गुणवाचक विशेषण)
  35. मेरी कक्षा में पचास छात्र हैं। – (निश्चित संख्यावाचक – गणनावाचक)
  36. उसे दोगुना लाभ हुआ। – (निश्चित संख्यावाचक – आवृत्तिवाचक)
  37. यह एक भारी पत्थर है। – (गुणवाचक विशेषण)
  38. उसने एक नई कार खरीदी है। – (गुणवाचक विशेषण)
  39. मेरे पास कम पैसे हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  40. उसने काफी दूध पी लिया। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  41. जो लड़की खड़ी है, वह मेरी बहन है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  42. यह आम मीठा है। – (गुणवाचक विशेषण)
  43. चाय बहुत गर्म है। – (गुणवा-चक विशेषण)
  44. लाखों लोग इस मेले में आते हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  45. मुझे तीन गज जमीन खरीदनी है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  46. ऐसा आदमी मैंने कभी नहीं देखा। – (सार्वनामिक विशेषण)
  47. यह पानी स्वच्छ है। – (गुणवाचक विशेषण)
  48. मेरे बगीचे में अनेक फूल हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  49. उसे थोड़ी-सी दाल दे दो। – (अनिश्चित परिमाणवा-चक)
  50. तुम्हारी पुस्तक कहाँ है? – (सार्वनामिक विशेषण)

विशेषण के 50 अतिरिक्त उदाहरण (भेदों सहित)

  1. यह एक भारतीय सैनिक है। – (गुणवाचक विशेषण)
  2. जलेबी बहुत स्वादिष्ट है। – (गुणवाचक विशेषण)
  3. आज तेज हवा चल रही है। – (गुणवाचक विशेषण)
  4. मुझे सात रंग पसंद हैं। – (निश्चित संख्यावाचक)
  5. तीसरा लड़का मेरा भाई है। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
  6. मुझे एक तोला सोना खरीदना है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  7. टंकी में 100 लीटर पानी आता है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  8. कौन-सी कार आपकी है? – (सार्वनामिक विशेषण)
  9. उसकी कलम मेरे पास है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  10. मेरे पास थोड़ी-सी जगह है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  11. बाजार में अनगिनत दुकानें हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  12. वह एक दयालु राजा था। – (गुणवाचक विशेषण)
  13. यह पहाड़ी रास्ता दुर्गम है। – (गुणवाचक विशेषण)
  14. उसका चेहरा गोल है। – (गुणवाचक विशेषण)
  15. उसने कुछ आम खरीदे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  16. भोजन में बिलकुल नमक नहीं है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  17. किन लोगों ने तुम्हें पीटा? – (सार्वनामिक विशेषण)
  18. ये किताबें मेरी हैं। – (सार्वनामिक विशेषण)
  19. यह एक पुराना किला है। – (गुणवाचक विशेषण)
  20. शेर एक खतरनाक जानवर है। – (गुणवाचक विशेषण)
  21. बारह महीने का एक साल होता है। – (निश्चित संख्यावाचक – गणनावाचक)
  22. चारों चोर पकड़े गए। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
  23. मुझे पाव-भर दही चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
  24. जिस थाली में खाना, उसी में छेद करना। – (सार्वनामिक विशेषण)
  25. उसकी आवाज मधुर है। – (गुणवाचक विशेषण)
  26. यह एक आधुनिक मशीन है। – (गुणवाचक विशेषण)
  27. परीक्षा में लगभग सभी छात्र पास हो गए। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  28. मैंने आज ज्यादा खाना खा लिया। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  29. हमारा विद्यालय बहुत बड़ा है। – (सार्वनामिक विशेषण)
  30. उसके पास काफी धन है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  31. यह एक धार्मिक स्थल है। – (गुणवाचक विशेषण)
  32. हर एक खिलाड़ी को मौका मिलेगा। – (निश्चित संख्यावाचक – प्रत्येकबोधक)
  33. मैंने उसे पीली साड़ी में देखा। – (गुणवाचक विशेषण)
  34. यह अत्यंत कठिन प्रश्न है। (‘अत्यंत’ प्रविशेषण) – (गुणवाचक विशेषण)
  35. ट्रेन तीन घंटे देर से है। – (गुणवाचक विशेषण – कालवाचक)
  36. पिता को पुत्र की तिगुनी संपत्ति मिली। – (निश्चित संख्यावाचक – आवृत्तिवाचक)
  37. उसने नीली ऑंखों वाली बिल्ली पाली है। – (गुणवाचक विशेषण)
  38. यह एक नया विचार है। – (गुणवाचक विशेषण)
  39. कुछ बच्चे शरारती होते हैं। – (गुणवाचक विशेषण)
  40. मैंने ढेर सारे कपड़े धोए। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  41. उसे भरपेट भोजन मिला। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  42. कोई किताब मुझे दे दो। – (सार्वनामिक विशेषण)
  43. यह क्या वस्तु है? – (सार्वनामिक विशेषण)
  44. यह एक पावन नदी है। – (गुणवाचक विशेषण)
  45. दो दर्जन केले ले आओ। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
  46. मेरे खेत में कम अनाज पैदा हुआ। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
  47. वे सब बच्चे कहाँ जा रहे हैं? – (सार्वनामिक विशेषण)
  48. ऊपरी मंजिल पर कौन रहता है? – (गुणवाचक विशेषण)
  49. उसके पास चंद रुपये ही बचे थे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
  50. यह मकान बहुत विशाल है। – (‘यह’ सार्वनामिक, ‘विशाल’ गुणवाचक)