शब्द-विचार (Morphology)
शब्द-विचार (Morphology)
शब्द-विचार, व्याकरण का वह दूसरा महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें शब्द की परिभाषा, उसके भेद, उत्पत्ति, रचना, प्रयोग, और अर्थ के आधार पर उसके विभिन्न रूपों का अध्ययन किया जाता है। वर्णों के बाद, शब्द भाषा की सबसे सार्थक इकाई होती है।
1. शब्द की परिभाषा (Definition of Word)
एक या एक से अधिक वर्णों के सार्थक मेल को ‘शब्द’ कहते हैं।
- ‘वर्णों का मेल’: शब्द के लिए वर्णों का जुड़ना आवश्यक है।
- ‘सार्थक मेल’: उस मेल का कोई निश्चित अर्थ निकलना चाहिए।
- उदाहरण:
- ‘क + म + ल’ = कमल → यह एक सार्थक मेल है, इसलिए यह एक शब्द है।
- ‘ल + म + क’ = लमक → यह वर्णों का मेल तो है, पर इसका कोई अर्थ नहीं है, इसलिए यह शब्द नहीं है।
- उदाहरण:
पद (Term): जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों (लिंग, वचन, कारक) से बंधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है, तब वह ‘पद’ कहलाता है।
- जैसे: “कमल तालाब में खिलता है।” → यहाँ ‘कमल’ एक पद है।
2. शब्दों का वर्गीकरण (Classification of Words)
शब्दों को मुख्य रूप से चार आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
क) उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Based on Origin/Source)
ख) रचना या बनावट के आधार पर (Based on Formation)
ग) प्रयोग के आधार पर (Based on Grammatical Usage)
घ) अर्थ के आधार पर (Based on Meaning)
क) उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Based on Origin)
इस आधार पर शब्द के पाँच भेद हैं, जो बताते हैं कि शब्द कहाँ से आया है:
- तत्सम (Tatsam):
- संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिन्दी में बिना किसी परिवर्तन के, ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं।
- उदाहरण: अग्नि, सूर्य, कार्य, दुग्ध, रात्रि, क्षेत्र।
- तद्भव (Tad-bhav):
- संस्कृत के वे शब्द जो पालि, प्राकृत, अपभ्रंश से होते हुए, कुछ रूप परिवर्तन के साथ हिन्दी में आए हैं।
- उदाहरण: आग (अग्नि से), सूरज (सूर्य से), काम (कार्य से), दूध (दुग्ध से), रात (रात्रि से), खेत (क्षेत्र से)।
- देशज (Deshaj):
- वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का कोई स्रोत ज्ञात नहीं है और जो स्थानीय प्रभाव या आम बोलचाल से विकसित होकर हिन्दी में आए हैं।
- उदाहरण: पगड़ी, लोटा, पेट, खिड़की, तेंदुआ, झाड़ू।
- विदेशज / आगत (Videshaj / Foreign):
- वे शब्द जो विदेशी भाषाओं (अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेजी आदि) से हिन्दी में आए हैं।
- उदाहरण:
- अंग्रेजी: स्कूल, डॉक्टर, स्टेशन, ट्रेन, पेन।
- अरबी/फ़ारसी: आदमी, कानून, किताब, तारीख, गरीब।
- पुर्तगाली: गमला, अलमारी, साबुन, बाल्टी।
- संकर (Sankar):
- जो शब्द दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं।
- उदाहरण:
- रेलगाड़ी (रेल [अंग्रेजी] + गाड़ी [हिन्दी])
- जाँचकर्ता (जाँच [हिन्दी] + कर्ता [संस्कृत])
- किताबघर (किताब [अरबी] + घर [हिन्दी])
ख) रचना या बनावट के आधार पर (Based on Formation)
इस आधार पर शब्द के तीन भेद हैं:
- रूढ़ (Rudh):
- वे शब्द जो किसी विशेष अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो गए हैं और जिनके खंड करने पर कोई अर्थ नहीं निकलता।
- उदाहरण: घर (घ + र), जल (ज + ल), दिन, रात, हाथ।
- यौगिक (Yaugik):
- जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों या शब्दांशों के योग से बने हैं। इनके खंड करने पर प्रत्येक खंड का अर्थ होता है। ये उपसर्ग, प्रत्यय या समास से बनते हैं।
- उदाहरण:
- पाठशाला (पाठ + शाला)
- प्रधानमंत्री (प्रधान + मंत्री)
- विज्ञान (वि + ज्ञान)
- सामाजिक (समाज + इक)
- योगरूढ़ (Yog-rudh):
- वे यौगिक शब्द जो अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष (रूढ़) अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो जाते हैं।
- (ये बहुव्रीहि समास के उदाहरण होते हैं)।
- उदाहरण:
- पंकज → (पंक [कीचड़] + ज [जन्मा]) → सामान्य अर्थ: कीचड़ में जन्मा, विशेष अर्थ: कमल
- दशानन → (दश + आनन) → सामान्य अर्थ: दस मुखों वाला, विशेष अर्थ: रावण
- लंबोदर → (लंबा + उदर) → सामान्य अर्थ: लंबे पेट वाला, विशेष अर्थ: गणेश जी
ग) प्रयोग के आधार पर (Based on Grammatical Usage)
इस आधार पर शब्द के दो भेद हैं:
- विकारी शब्द (Vikari / Declinable):
- वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार विकार (परिवर्तन) आ जाता है।
- ये चार प्रकार के होते हैं:
- संज्ञा (Noun) → लड़का (लड़के, लड़कों)
- **सर्वनाम (Pronoun)**→ मैं (मेरा, मुझे)
- **विशेषण (Adjective)**→ अच्छा (अच्छी, अच्छे)
- **क्रिया (Verb)**→ जाता है (जाती है, जाते हैं)
- अविकारी शब्द (Avikari / Indeclinable):
- वे शब्द जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता। इन्हें अव्यय भी कहते हैं।
- ये भी चार प्रकार के होते हैं:
- **क्रिया-विशेषण (Adverb)**→ धीरे-धीरे, आज, कल
- **संबंधबोधक (Preposition)**→ के ऊपर, के साथ
- **समुच्चयबोधक (Conjunction)**→ और, तथा, लेकिन
- **विस्मयादिबोधक (Interjection)**→ अरे!, वाह!
घ) अर्थ के आधार पर (Based on Meaning)
इस आधार पर कई भेद किए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- सार्थक शब्द: जिन शब्दों का कोई निश्चित अर्थ हो। (जैसे – रोटी, पानी)
- निरर्थक शब्द: जिन शब्दों का कोई अर्थ न हो, पर कभी-कभी सार्थक शब्दों के साथ प्रयोग में आते हैं। (जैसे- रोटी-वोटी, पानी-वानी)।
- एकार्थी शब्द: जिनका केवल एक ही अर्थ हो (जैसे- किताब, मेज)।
- अनेकार्थी शब्द: जिनके एक से अधिक अर्थ हों (जैसे- कर [हाथ, टैक्स], कनक [सोना, धतूरा])।
- पर्यायवाची शब्द (Synonyms): समान अर्थ बताने वाले शब्द (जैसे- सूर्य → रवि, दिनकर, भास्कर)।
- विलोम शब्द (Antonyms): विपरीत अर्थ बताने वाले शब्द (जैसे- दिन → रात, जीवन → मृत्यु)।
उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
(Classification of Words based on Origin/Source)
इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द हिन्दी भाषा में कहाँ से आया है या उसकी उत्पत्ति (जन्म) कहाँ हुई है। हिन्दी भाषा ने अपने विकास क्रम में विभिन्न स्रोतों से शब्दों को ग्रहण किया है, जिससे उसका शब्द-भंडार बहुत समृद्ध हुआ है।
उत्पत्ति के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से पाँच भागों में बाँटा जाता है:
1. तत्सम (Tatsam)
परिभाषा:
‘तत्सम’ शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है:
- तत् (तत्) = उसके
- सम् (सम्) = समान
इस प्रकार, तत्सम का शाब्दिक अर्थ है “उसके समान”, अर्थात् “संस्कृत के समान”।
व्याकरणिक परिभाषा:
संस्कृत भाषा के वे शब्द जो अपने मूल (original) रूप में, बिना किसी ध्वनि या रूप में परिवर्तन हुए, सीधे हिन्दी भाषा में प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं।
ये शब्द हिन्दी की जननी संस्कृत भाषा की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषा को एक समृद्ध और मानक शब्दावली प्रदान की है।
तत्सम शब्दों की पहचान कैसे करें? (Tricks to Identify Tatsam Words)
तत्सम शब्दों को पहचानने के कुछ सामान्य नियम और संकेत होते हैं, जो बहुत सहायक हो सकते हैं:
- संयुक्त व्यंजनों का प्रयोग:
- जिन शब्दों में क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे संयुक्त व्यंजन आते हैं, वे प्रायः तत्सम होते हैं।
- क्ष → क्षेत्र, रक्षा, भिक्षा, साक्षी
- त्र → पत्र, मित्र, रात्रि, पुत्र
- ज्ञ → ज्ञान, अज्ञान, यज्ञ
- श्र → श्रावण, श्रमिक, आश्रय
- जिन शब्दों में क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे संयुक्त व्यंजन आते हैं, वे प्रायः तत्सम होते हैं।
- ‘र’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग:
- जिन शब्दों में ‘र्’ (रेफ) या ‘र्’ (पदेन) का प्रयोग होता है, वे अक्सर तत्सम होते हैं।
- ‘र्’ (रेफ) → सूर्य, कर्म, धर्म, वर्षा, कार्य
- ‘र्’ (पदेन) → ग्राहक, ग्राम, आम्र, चक्र
- जिन शब्दों में ‘र्’ (रेफ) या ‘र्’ (पदेन) का प्रयोग होता है, वे अक्सर तत्सम होते हैं।
- ‘ऋ’ (ऋषि) की मात्रा ( ृ ) का प्रयोग:
- जिन शब्दों में ‘ऋ’ की मात्रा का प्रयोग होता है, वे हमेशा तत्सम होते हैं।
- उदाहरण: कृष्ण, गृह, घृत (घी), अमृत, नृत्य, शृंगार
- जिन शब्दों में ‘ऋ’ की मात्रा का प्रयोग होता है, वे हमेशा तत्सम होते हैं।
- ‘ष’ (षट्कोण) और ‘ण’ वर्ण का प्रयोग:
- ‘ष’ और ‘ण’ वर्ण का प्रयोग मुख्य रूप से संस्कृत में ही होता है, इसलिए इनसे बने शब्द प्रायः तत्सम होते हैं।
- ‘ष’ → कृष्ण, पाषाण, षट्, भविष्य
- ‘ण’ → कण, गुण, रामायण, कर्ण, चूर्ण
- ‘ष’ और ‘ण’ वर्ण का प्रयोग मुख्य रूप से संस्कृत में ही होता है, इसलिए इनसे बने शब्द प्रायः तत्सम होते हैं।
- विसर्ग ( ः ) का प्रयोग:
- जिन संस्कृत शब्दों में विसर्ग का प्रयोग होता है और वे उसी रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, वे तत्सम होते हैं।
- उदाहरण: प्रातः, अतः, पुनः, दुःख (यह एक अपवाद है जो तद्भव जैसा लगता है पर तत्सम है)।
- जिन संस्कृत शब्दों में विसर्ग का प्रयोग होता है और वे उसी रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, वे तत्सम होते हैं।
- अनुस्वार ( ं ) का प्रयोग:
- तत्सम शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग होता है, जबकि उनके तद्भव रूप में अक्सर चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग होता है।
- उदाहरण: चंद्र (तत्सम) → चाँद (तद्भव), दंत (तत्सम) → दाँत (तद्भव)
- तत्सम शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग होता है, जबकि उनके तद्भव रूप में अक्सर चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग होता है।
- ‘श’ (शलगम) और ‘व’ (वन) का प्रयोग:
- प्रायः जिन शब्दों में ‘श’ आता है, वे तत्सम होते हैं और उनके तद्भव रूप में ‘स’ (सपेरा) हो जाता है।
- उदाहरण: श्यामल → साँवला, दश → दस, श्मशान → मसान
- प्रायः जिन शब्दों में ‘व’ आता है, वे तत्सम होते हैं और उनके तद्भव रूप में ‘ब’ (बकरी) हो जाता है।
- उदाहरण: वर्षा → बरसात, वानर → बन्दर, विवाह → ब्याह, विद्युत → बिजली
- प्रायः जिन शब्दों में ‘श’ आता है, वे तत्सम होते हैं और उनके तद्भव रूप में ‘स’ (सपेरा) हो जाता है।
तत्सम और उनके तद्भव रूपों की सूची (उदाहरण)
| तत्सम शब्द | तद्भव शब्द (सरल रूप) |
| अग्नि | आग |
| सूर्य | सूरज |
| हस्त | हाथ |
| दुग्ध | दूध |
| ग्राम | गाँव |
| क्षेत्र | खेत |
| रात्रि | रात |
| आम्र | आम |
| मयूर | मोर |
| कर्ण | कान |
| चन्द्र | चाँद |
| जिह्वा | जीभ |
| दंत | दाँत |
| मृत्यु | मौत |
| स्वर्ण | सोना |
निष्कर्ष
तत्सम शब्द हिन्दी भाषा की शास्त्रीय और साहित्यिक गहराई को दर्शाते हैं। ये शब्द भाषा को सटीकता, गंभीरता और मानक रूप प्रदान करते हैं। हालाँकि आम बोलचाल में तद्भव शब्द अधिक प्रचलित हैं, लेकिन औपचारिक लेखन, साहित्य और अकादमिक भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग आज भी बहुत महत्वपूर्ण है।
2. तद्भव (Tad-bhav)
विभिन्न परिभाषाएँ
तद्भव की अवधारणा को विभिन्न दृष्टिकोणों से परिभाषित किया जा सकता है:
परिभाषा 1: शाब्दिक अर्थ के आधार पर
तद्भव शब्द दो संस्कृत शब्दों के मेल से बना है:
- तत् (तत्) = उससे (अर्थात् संस्कृत से)
- भव (भव) = उत्पन्न या विकसित हुआ
इस प्रकार, तद्भव का शाब्दिक अर्थ है: “उससे उत्पन्न हुआ” अर्थात् “संस्कृत से विकसित हुआ।”
यह परिभाषा बताती है कि तद्भव शब्दों का मूल स्रोत संस्कृत ही है, लेकिन वे सीधे वहाँ से नहीं आए, बल्कि समय के साथ विकसित हुए हैं।
परिभाषा 2: भाषा विकास क्रम के आधार पर (सबसे सटीक परिभाषा)
संस्कृत के वे शब्द जो सीधे हिन्दी में न आकर, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश जैसी मध्यकालीन भाषाओं के दौर से गुजरते हुए, ध्वनि-परिवर्तनों (sound changes) के कारण अपना रूप बदलकर हिन्दी में प्रचलित हो गए हैं, ‘तद्भव शब्द’ कहलाते हैं।
यह सबसे व्यापक और वैज्ञानिक परिभाषा है। यह बताती है कि तद्भव शब्द एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा तय करके हिन्दी तक पहुँचे हैं।
- विकास यात्रा का उदाहरण:
- संस्कृत (कर्म) → पालि (कम्म) → प्राकृत (कम्म) → अपभ्रंश → हिन्दी (काम)
- संस्कृत (हस्त) → पालि (हत्थ) → प्राकृत (हत्थ) → अपभ्रंश → हिन्दी (हाथ)
परिभाषा 3: सरलता और आम बोलचाल के आधार पर
तत्सम शब्दों के वे सरल, सहज और आम बोलचाल के रूप, जो उच्चारण की सुगमता के कारण लोक-प्रचलन में आ गए हैं, ‘तद्भव शब्द’ कहलाते हैं।
यह परिभाषा तद्भव शब्दों के व्यावहारिक पक्ष पर जोर देती है। लोग अक्सर अपनी सुविधा के लिए कठिन शब्दों को सरल बना लेते हैं, और यही सरलीकरण की प्रक्रिया तद्भव शब्दों को जन्म देती है।
- उदाहरण:
- ‘क्षेत्र’ बोलना कठिन है, इसलिए आम लोगों ने इसे ‘खेत’ कहना शुरू कर दिया।
- ‘चन्द्र’ की जगह ‘चाँद’ बोलना अधिक सरल है।
तद्भव शब्दों की पहचान कैसे करें? (Tricks to Identify Tadbhav Words)
जिस प्रकार तत्सम शब्दों को पहचानने के नियम हैं, उसी प्रकार तद्भव को पहचानने के भी कुछ संकेत होते हैं:
- चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग:
- जिन शब्दों में चंद्रबिंदु का प्रयोग होता है, वे लगभग हमेशा तद्भव होते हैं।
- उदाहरण: गाँव (ग्राम से), चाँद (चन्द्र से), दाँत (दंत से), आँख (अक्षि से), मुँह (मुख से)।
- हिन्दी के अपने विकसित व्यंजनों का प्रयोग:
- जिन शब्दों में उत्क्षिप्त व्यंजन ‘ड़’ और ‘ढ़’ आते हैं, वे प्रायः तद्भव या देशज होते हैं।
- उदाहरण: घोड़ा (घोटक से), बड़ा।
- कठिन वर्णों का सरलीकरण:
- तत्सम का ‘क्ष’ → तद्भव में अक्सर ‘ख’ या ‘छ’ बन जाता है।
- क्षेत्र → खेत, क्षीर → खीर, अक्षर → अच्छर/आखर
- तत्सम का ‘त्र’ → तद्भव में ‘त’ बन जाता है।
- रात्रि → रात, पत्र → पत्ता
- तत्सम का ‘ज्ञ’ → तद्भव में ‘ज’ बन जाता है।
- अज्ञान → अजान, ज्ञानी → ज्ञानी/जानी
- तत्सम का ‘व’ → तद्भव में ‘ब’ बन जाता है।
- विवाह → ब्याह, वानर → बन्दर, वर्षा → बरसात
- तत्सम का ‘श’ → तद्भव में ‘स’ बन जाता है।
- दश → दस, श्यामल → साँवला
- तत्सम का ‘ष’ → तद्भव में ‘ख’ या ‘स’ बन जाता है।
- कृषक → किसान
- तत्सम का ‘ऋ’ ( ृ ) → तद्भव में ‘र’ या ‘इ’ हो जाता है, या लुप्त हो जाता है।
- घृत → घी, श्रृंगार → सिंगार
- तत्सम का ‘क्ष’ → तद्भव में अक्सर ‘ख’ या ‘छ’ बन जाता है।
- बोलने में सरलता:
- तद्भव शब्द तत्सम की तुलना में बोलने में बहुत सरल और सहज होते हैं, क्योंकि वे आम जन-जीवन की भाषा के हिस्से होते हैं। (जैसे – दूध, दही, कान, नाक, जीभ)।
तत्सम से तद्भव बनने की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया एक प्रकार का ‘ध्वनि-घिसाव’ है, जो समय के साथ और उच्चारण की सुविधा के कारण होती है। संस्कृत की जटिल ध्वनियाँ सरल होती गईं, संयुक्त अक्षर टूटकर सरल अक्षरों में बदल गए, और इस प्रकार हजारों वर्षों की यात्रा के बाद तद्भव शब्दों ने अपना वर्तमान स्वरूप प्राप्त किया।
निष्कर्ष
तद्भव शब्द हिन्दी भाषा की आत्मा हैं। ये वे शब्द हैं जो संस्कृत के गर्भ से निकलकर, आम जनता के बीच पल-बढ़कर, समय के साथ परिपक्व हुए हैं। वे हिन्दी को उसकी सहजता, स्वाभाविकता और लोक-प्रकृति प्रदान करते हैं और भाषा को जन-सामान्य से जोड़ते हैं।
पशु-पक्षियों से संबंधित तत्सम एवं तद्भव शब्द
| क्र.सं. | तत्सम शब्द (संस्कृत रूप) | तद्भव शब्द (हिन्दी का सरल रूप) |
| 1. | उष्ट्र | ऊँट |
| 2. | कच्छप | कछुआ |
| 3. | काक | कौआ |
| 4. | कुक्कुर | कुत्ता |
| 5. | कोकिल | कोयल |
| 6. | कपोत | कबूतर |
| 7. | गर्दभ | गधा |
| 8. | गो | गाय |
| 9. | घोटक | घोड़ा |
| 10. | चटक | चिड़ा / चिड़िया |
| 11. | नकुल | नेवला |
| 12. | बलि वर्द / वृषभ | बैल |
| 13. | महिष / महिषी | भैंस / भैंसा |
| 14. | मत्स्य | मछली |
| 15. | मयूर | मोर |
| 16. | मूषक / मूषिक | मूस / चूहा |
| 17. | वानर | बन्दर |
| 18. | वराह | बारह (जंगली सूअर) |
| 19. | वृश्चिक | बिच्छू |
| 20. | व्याघ्र | बाघ |
| 21. | शुक | सुग्गा / तोता |
| 22. | सर्प | साँप |
| 23. | हस्तिन् / हस्ती | हाथी |
| 24. | हरिण | हिरन |
| 25. | मर्कट | बंदर (बंदर के लिए एक और शब्द) |
| 26. | सिंह | सिंह (शेर) |
| 27. | शृगाल | सियार / गीदड़ |
| 28. | श्वा | कुत्ता (कुत्ता के लिए एक और शब्द) |
| 29. | श्येन | बाज (शिकारी पक्षी) |
| 30. | चक्रवाक | चकवा (पक्षी) |
| 31. | गृध्र | गिद्ध |
| 32. | चित्रक | चीता |
| 33. | चटका | चिड़िया |
| 34. | तित्तिरि | तीतर |
| 35. | धेनु | गाय (गाय का एक और रूप) |
| 36. | पिंगल | नेवला (नेवला का एक और रूप) |
| 37. | पारावत | कबूतर (कबूतर का एक और रूप) |
| 38. | बर्कर | बकरा |
| 39. | भद्र | भला (पशु नहीं, पर जुड़ाव) |
| 40. | भल्लुक | भालू |
| 41. | मेष | भेड़ |
| 42. | वत्स / वत्सक | बछड़ा |
| 43. | शश / शशक | खरहा / खरगोश |
| 44. | शार्दूल | बाघ (बाघ का एक और रूप) |
| 45. | सूकर | सूअर |
| 46. | सारिका | मैना |
| 47. | श्येन | बाज (पक्षी) |
| 48. | श्वा | कुत्ता |
| 49. | सारंग | हिरन / मोर / साँप (अनेकार्थी) |
| 50. | चक्रवाक | चकवा (पक्षी) |
| 51. | कपि | बंदर (बंदर का एक और रूप) |
| 52. | खर | गधा (गधा का एक और रूप) |
| 53. | कुरंग | हिरन (हिरन का एक और रूप) |
| 54. | खद्योत | जुगनू (कीट) |
| 55. | जम्बुक / जम्बूक | जामुन (फल, पर जानवर जैसा नाम) |
| 56. | दुर्वा | दूब (पशु चारा) |
| 57. | द्विप | हाथी (हाथी का एक और रूप) |
| 58. | पन्नग | साँप (साँप का एक और रूप) |
| 59. | पतंग | टिड्डा / पतंगा (कीट) |
| 60. | पृष्ठ | पीठ (पशु अंग) |
3. देशज (Deshaj)
- अर्थ: ‘देश’ + ‘ज’ = “देश में जन्मा हुआ”।
- परिभाषा: वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का स्रोत संस्कृत या कोई अन्य भाषा नहीं है, बल्कि वे भारत के विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय बोलियों या जन-सामान्य की भाषा से विकसित होकर हिन्दी में आ गए हैं, देशज शब्द कहलाते हैं।
- पहचान:
- इनकी उत्पत्ति का कोई व्याकरणिक स्रोत नहीं मिलता।
- ये प्रायः ध्वनि का अनुकरण करने वाले या आम जन-जीवन से जुड़े शब्द होते हैं।
- उदाहरण:
- लोटा
- पगड़ी
- खिड़की
- पेट
- जूता
- झाड़ू
- तेंदुआ
- ठठेरा
- खचाखच
4. विदेशज / आगत (Videshaj / Foreign / Aagat)
- अर्थ: ‘विदेश’ + ‘ज’ = “विदेश में जन्मा हुआ”।
- परिभाषा: वे शब्द जो ऐतिहासिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक कारणों से विदेशी भाषाओं से हिन्दी में आ गए हैं और अब हिन्दी का ही हिस्सा बन गए हैं, विदेशज या आगत (आए हुए) शब्द कहलाते हैं।
- प्रमुख स्रोत और उदाहरण:
- अरबी: आदमी, औरत, किताब, कानून, तारीख, अमीर, गरीब, दुकान।
- फ़ारसी: चश्मा, चेहरा, दिल, जिंदगी, किनारा, बारिश, नमक, सरकार।
- अंग्रेजी: स्कूल, कॉलेज, डॉक्टर, ट्रेन, स्टेशन, पेन, कॉपी, शर्ट, बटन।
- पुर्तगाली: अलमारी, गमला, साबुन, बाल्टी, चाबी, तौलिया, पपीता, संतरा।
- तुर्की: कैंची, चाकू, तोप, बेगम, बहादुर, लाश।
- चीनी: चाय, लीची, पटाखा।
- जापानी: रिक्शा।
5. संकर (Sankar / Hybrid)
- अर्थ: “मिश्रित” या “Hybrid”।
- परिभाषा: वे शब्द जो दो भिन्न-भिन्न भाषाओं के शब्दों को जोड़कर बनाए गए हैं, संकर शब्द कहलाते हैं।
- पहचान:
- इनके दोनों भागों की भाषाएँ अलग-अलग होती हैं।
- उदाहरण (कोष्ठक में भाषाओं का स्रोत):
- रेलगाड़ी (रेल [अंग्रेजी] + गाड़ी [हिन्दी])
- टिकटघर (टिकट [अंग्रेजी] + घर [हिन्दी])
- किताबघर (किताब [अरबी] + घर [हिन्दी])
- जाँचकर्ता (जाँच [हिन्दी] + कर्ता [संस्कृत])
- सीलबंद (सील [अंग्रेजी] + बंद [फ़ारसी])
- तहसीलदार (तहसील [अरबी] + दार [फ़ारसी])
निष्कर्ष
उत्पत्ति के आधार पर यह वर्गीकरण दिखाता है कि हिन्दी भाषा एक जीवंत और ग्रहणशील भाषा है, जिसने अपनी मूल संस्कृत विरासत को सहेजने (तत्सम) और सरल करने (तद्भव) के साथ-साथ, स्थानीय बोलियों (देशज) और विदेशी भाषाओं (विदेशज) के शब्दों को भी खुले मन से अपनाया है, जिससे इसका शब्द-भंडार निरंतर समृद्ध होता रहा है।
ख) रचना या बनावट के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
(Classification of Words based on Formation/Structure)
इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द कैसे बना है; अर्थात् उसकी संरचना (structure) क्या है। शब्द निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जाता है:
- रूढ़ (Rudh / Root Words)
- यौगिक (Yaugik / Compound Words)
- योगरूढ़ (Yog-rudh / Compound-Root Words)
1. रूढ़ (Rudh)
- परिभाषा:
वे शब्द जो किसी विशेष अर्थ के लिए परंपरा से प्रसिद्ध (रूढ़) हो गए हैं और जिनके सार्थक खंड (meaningful parts) नहीं किए जा सकते, रूढ़ शब्द कहलाते हैं। - पहचान की ट्रिक:
- अगर आप शब्द को तोड़ें (खंड करें) तो टूटे हुए हिस्सों का अलग-अलग कोई अर्थ नहीं निकलेगा।
- ये शब्द भाषा के मूल शब्द होते हैं, जिन्हें किसी और शब्द को जोड़कर नहीं बनाया जाता।
- उदाहरण:
- जल → ज + ल (इन दोनों वर्णों का अलग-अलग कोई अर्थ नहीं है)।
- घर → घ + र (इनका कोई अर्थ नहीं)।
- हाथ → हा + थ (इनका कोई अर्थ नहीं)।
- दिन, रात, आँख, कान, घोड़ा, मुँह, रोटी आदि।
2. यौगिक (Yaugik)
- परिभाषा:
‘यौगिक’ का अर्थ है “योग से बना हुआ”। वे शब्द जो दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों या शब्दांशों (उपसर्ग, प्रत्यय) के मेल से बनते हैं, यौगिक शब्द कहलाते हैं। - पहचान की ट्रिक:
- इन शब्दों के खंड किए जा सकते हैं और प्रत्येक खंड का अपना एक स्वतंत्र और सार्थक अर्थ होता है।
- इनकी रचना मुख्य रूप से उपसर्ग (prefix), प्रत्यय (suffix) और समास (compounding) की प्रक्रिया से होती है।
- उदाहरण:
- पाठशाला → पाठ (पढ़ने की सामग्री) + शाला (घर) → पढ़ने का घर
- प्रधानमंत्री → प्रधान (मुख्य) + मंत्री (सलाहकार) → मंत्रियों में मुख्य
- रसोईघर → रसोई (खाना पकाने की जगह) + घर (मकान) → खाना बनाने का घर
- विज्ञान → वि (उपसर्ग, अर्थ – विशेष) + ज्ञान (जानकारी) → विशेष ज्ञान
- सामाजिक → समाज (समूह) + इक (प्रत्यय) → समाज से संबंधित
3. योगरूढ़ (Yog-rudh)
- परिभाषा:
‘योगरूढ़’ का अर्थ है – योग से बनने के बाद रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाना।
वे शब्द जो रचना में यौगिक होते हैं (अर्थात् दो शब्दों के योग से बनते हैं), लेकिन उनका अर्थ एक सामान्य अर्थ न होकर, एक विशेष अर्थ के लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाता है, योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं। - पहचान की ट्रिक:
- ये शब्द दिखते तो यौगिक जैसे हैं, पर अपना सामान्य अर्थ छोड़कर किसी तीसरे विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं।
- बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) के सभी उदाहरण योगरूढ़ शब्द होते हैं।
- उदाहरण:
- पंकज
- योग: पंक (कीचड़) + ज (जन्मा हुआ)
- सामान्य अर्थ: कीचड़ में जन्मी कोई भी वस्तु (जैसे – कीड़ा, केंचुआ)
- रूढ़/विशेष अर्थ: कमल (केवल कमल के लिए प्रसिद्ध)
- दशानन
- योग: दश (दस) + आनन (मुख)
- सामान्य अर्थ: कोई भी दस मुखों वाला
- रूढ़/विशेष अर्थ: रावण
- लंबोदर
- योग: लंबा + उदर (पेट)
- सामान्य अर्थ: कोई भी लंबे पेट वाला व्यक्ति
- रूढ़/विशेष अर्थ: भगवान गणेश
- नीलकंठ → नीला है कंठ जिसका, अर्थात् → भगवान शिव
- जलज → जल में जन्मा, अर्थात् → कमल
- पंकज
तीनों में अंतर की सरल सारणी
| विशेषता | रूढ़ शब्द | यौगिक शब्द | योगरूढ़ शब्द |
| संरचना | खंड नहीं हो सकते | दो सार्थक खंड होते हैं | दो सार्थक खंड होते हैं |
| अर्थ | अपना पारंपरिक अर्थ | खंडों के अर्थ से जुड़ा अर्थ | खंडों के अर्थ से भिन्न विशेष अर्थ |
| पहचान | तोड़ने पर अर्थहीन | तोड़ने पर भी दोनों भाग सार्थक | बहुव्रीहि समास के उदाहरण |
| उदाहरण | पानी, हाथ | विद्यालय, राष्ट्रपति | गिरिधर, पीतांबर |
ग) प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
(Classification of Words based on Grammatical Usage)
वाक्य में प्रयोग किए जाने पर शब्दों के रूप में परिवर्तन होता है या नहीं, इस आधार पर शब्दों को दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है:
- विकारी शब्द (Vikari / Declinable Words)
- अविकारी शब्द (Avikari / Indeclinable Words)
1. विकारी शब्द (Vikari)
- परिभाषा:
‘विकार’ का अर्थ होता है – ‘परिवर्तन’ या ‘बदलाव’।
वे शब्द जिनके रूप में लिंग (Gender), वचन (Number), कारक (Case) और काल (Tense) के कारण परिवर्तन या विकार आ जाता है, विकारी शब्द कहलाते हैं। - सरल शब्दों में, ये वे शब्द हैं जो वाक्य की जरूरत के अनुसार अपना रूप बदल लेते हैं।
- विकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं:
- संज्ञा (Noun)
- सर्वनाम (Pronoun)
- विशेषण (Adjective)
- क्रिया (Verb)
- परिवर्तन कैसे होता है? (उदाहरण)
| विकारी शब्द | मूल शब्द | लिंग के आधार पर परिवर्तन | वचन के आधार पर परिवर्तन | कारक के आधार पर परिवर्तन |
| संज्ञा | लड़का | लड़की | लड़के | लड़के ने, लड़कों को |
| घोड़ा | घोड़ी | घोड़े | घोड़ों पर | |
| सर्वनाम | मैं | – (लिंग का प्रभाव नहीं) | हम | मेरा, मुझे, मुझसे |
| वह | – (लिंग का प्रभाव नहीं) | वे | उसका, उसने, उनको | |
| विशेषण | अच्छा | अच्छी | अच्छे | – |
| काला | काली | काले | – | |
| क्रिया | जाता है | जाती है | जाते हैं | – (काल का प्रभाव: गया) |
2. अविकारी शब्द (Avikari)
- परिभाषा:
‘अविकारी’ का अर्थ है – ‘जिसमें विकार (परिवर्तन) न हो’।
वे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन, कारक और काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, अविकारी शब्द कहलाते हैं। ये शब्द वाक्य में हमेशा अपने मूल रूप में ही बने रहते हैं। - अविकारी शब्दों को ‘अव्यय’ (Avyay) भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘जो व्यय (खर्च/परिवर्तित) न हो’।
- अविकारी शब्द भी चार प्रकार के होते हैं:
- क्रिया-विशेषण (Adverb)
- संबंधबोधक (Preposition)
- समुच्चयबोधक (Conjunction)
- विस्मयादिबोधक (Interjection)
- (कुछ विद्वान
- इनमें परिवर्तन क्यों नहीं होता? (उदाहरण)
| अविकारी शब्द | उदाहरण वाक्य |
| क्रिया-विशेषण | लड़का धीरे-धीरे चलता है।<br>लड़की धीरे-धीरे चलती है।<br>लड़के धीरे-धीरे चलते हैं। (यहाँ ‘धीरे-धीरे’ शब्द नहीं बदला) |
| आज बारिश होगी।<br>आज वे आएँगे।<br> (यहाँ ‘आज’ शब्द नहीं बदला) | |
| संबंधबोधक | मेज के ऊपर किताब है।<br>घर के सामने पेड़ है।<br>राम के साथ श्याम गया।<br> (यहाँ ‘के ऊपर’, ‘के सामने’, ‘के साथ’ नहीं बदलते) |
| समुच्चयबोधक | राम और श्याम भाई हैं।<br>सीता और गीता सहेलियाँ हैं।<br> (यहाँ ‘और’ शब्द नहीं बदला) |
| विस्मयादिबोधक | अरे! तुम आ गए।<br>वाह! क्या सुंदर दृश्य है।<br> (ये शब्द भावना व्यक्त करते हैं और बदलते नहीं हैं) |
तुलनात्मक सारणी: विकारी बनाम अविकारी
| आधार | विकारी शब्द (Declinable) | अविकारी शब्द / अव्यय (Indeclinable) |
| परिभाषा | रूप में परिवर्तन होता है | रूप में परिवर्तन नहीं होता |
| परिवर्तन का कारण | लिंग, वचन, कारक, काल | इन पर लिंग, वचन, कारक का प्रभाव नहीं |
| प्रकार | 4: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया | 4: क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
| वाक्य में भूमिका | मुख्य भूमिका निभाते हैं (कर्ता, कर्म, क्रिया आदि) | शब्दों और वाक्यों को जोड़ने या विशेषता बताने का काम करते हैं |
| उदाहरण | लड़का, मैं, अच्छा, खाता है | धीरे-धीरे, के ऊपर, और, वाह! |
निष्कर्ष
प्रयोग के आधार पर यह वर्गीकरण हमें यह समझने में मदद करता है कि वाक्य निर्माण में कौन से शब्द स्थिर रहते हैं और कौन से बदलते हैं। यह व्याकरण की शुद्धता और वाक्य की सही संरचना के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम है।
घ) अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
(Classification of Words based on Meaning)
इस वर्गीकरण का आधार यह है कि कोई शब्द किस प्रकार का अर्थ प्रकट करता है। अर्थ की दृष्टि से शब्द भाषा की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। इस आधार पर शब्दों के कई भेद किए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
1. सार्थक और निरर्थक शब्द
- सार्थक शब्द (Meaningful Words):
- परिभाषा: वे शब्द जिनका एक निश्चित और स्पष्ट अर्थ होता है, सार्थक शब्द कहलाते हैं। व्याकरण में केवल सार्थक शब्दों का ही अध्ययन किया जाता है।
- उदाहरण: रोटी, पानी, घर, किताब, सुन्दर।
- निरर्थक शब्द (Meaningless Words):
- परिभाषा: वे शब्द जिनका अपना कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता, निरर्थक शब्द कहलाते हैं।
- प्रयोग: इनका प्रयोग अक्सर सार्थक शब्दों के साथ भाषण-प्रवाह, तुकबंदी या अतिरिक्त बल देने के लिए किया जाता है।
- उदाहरण:
- रोटी-वोटी खा लो। (‘वोटी’ का कोई अर्थ नहीं)
- पानी-वानी पी लो। (‘वानी’ का कोई अर्थ नहीं)
- चाय-वाय हो जाए। (‘वाय’ का कोई अर्थ नहीं)
- काम-वाम कर लो। (‘वाम’ का कोई अर्थ नहीं)
2. एकार्थी शब्द (Monosemous Words)
- परिभाषा: वे शब्द जिनका केवल एक ही निश्चित अर्थ होता है, एकार्थी शब्द कहलाते हैं।
- पहचान: इनका प्रयोग किसी और अर्थ में नहीं किया जा सकता। व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, देशों के नाम, और अधिकांश वस्तुनिष्ठ शब्द इसी श्रेणी में आते हैं।
- उदाहरण:
- व्यक्ति: मोहन, राधा
- स्थान: दिल्ली, गंगा, हिमालय
- वस्तु: किताब, मेज, कुर्सी, कंप्यूटर
- दिन/महीने: सोमवार, जनवरी
3. अनेकार्थी शब्द (Polysemous Words)
- परिभाषा: वे शब्द जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं और वाक्य में प्रसंग के अनुसार उनका अलग-अलग अर्थ निकलता है, अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।
- उदाहरण:
- कर → हाथ, टैक्स, सूँड़ (हाथी की), किरण
- कनक → सोना, धतूरा, गेहूँ
- अंबर → आकाश, वस्त्र
- पत्र → पत्ता, चिट्ठी, पंख
- हरि → विष्णु, बन्दर, सिंह, साँप
4. पर्यायवाची / समानार्थी शब्द (Synonyms)
- परिभाषा: वे शब्द जिनका अर्थ लगभग समान होता है, पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहलाते हैं।
- पहचान: ये शब्द एक ही वस्तु या भाव के लिए प्रयोग होते हैं, पर उनके अर्थ में सूक्ष्म भिन्नता हो सकती है।
- उदाहरण:
- सूर्य → रवि, दिनकर, भास्कर, आदित्य
- कमल → जलज, पंकज, नीरज, सरोज
- पानी → जल, नीर, वारि, अंबु
- आग → अग्नि, अनल, पावक, ज्वाला
- आकाश → नभ, गगन, व्योम, अंबर
5. विलोम / विपरीतार्थक शब्द (Antonyms)
- परिभाषा: वे शब्द जो एक-दूसरे का विपरीत (उल्टा) अर्थ प्रकट करते हैं, विलोम शब्द कहलाते हैं।
- उदाहरण:
- दिन ↔ रात
- जीवन ↔ मृत्यु
- सुख ↔ दुःख
- अपना ↔ पराया
- आदर ↔ निरादर
6. श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द / समोच्चारित शब्द (Homophones / Homonyms)
- परिभाषा: वे शब्द जो सुनने और उच्चारण करने में लगभग एक समान लगते हैं, परन्तु उनके अर्थों में भिन्नता होती है, श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।
- उदाहरण:
- अन्न (अनाज) – अन्य (दूसरा)
- अंश (हिस्सा) – अंस (कंधा)
- दिन (दिवस) – दीन (गरीब)
- कुल (वंश, सब) – कूल (किनारा)
- गृह (घर) – ग्रह (नक्षत्र)
7. वाक्यांश के लिए एक शब्द / अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One-word Substitution)
- परिभाषा: जब किसी पूरे वाक्य या वाक्यांश के स्थान पर एक ही शब्द का प्रयोग करके भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाया जाता है, तो उस एक शब्द को ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ कहते हैं।
- उदाहरण:
- जो कभी न मरे → अमर
- जिसका कोई शत्रु न हो → अजातशत्रु
- जिसका अंत न हो → अनंत
- जो ईश्वर में विश्वास रखता हो → आस्तिक
- सप्ताह में एक बार होने वाला → साप्ताहिक
संज्ञा (Noun)
संज्ञा (Noun)
संज्ञा (Noun) की विभिन्न परिभाषाएँ
1. पारंपरिक और सर्वमान्य परिभाषा
“किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, स्थान, गुण, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं।”
- विश्लेषण: यह संज्ञा की सबसे प्रचलित और सरल परिभाषा है। यह संज्ञा के दायरे को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है कि ‘नाम’ ही संज्ञा है।
- व्यक्ति: राम, महात्मा गाँधी
- वस्तु: कलम, पुस्तक
- प्राणी: गाय, शेर
- स्थान: दिल्ली, पर्वत
- गुण/भाव: ईमानदारी, क्रोध
- अवस्था: बचपन, बुढ़ापा
2. व्युत्पत्ति-आधारित परिभाषा (शब्द के अर्थ पर आधारित)
“संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है – सम्यक् ज्ञान कराने वाला, अर्थात् ‘नाम’। व्याकरण में ‘नाम’ को ही ‘संज्ञा’ कहा जाता है।”
- विश्लेषण: यह परिभाषा संज्ञा के मूल अर्थ पर जोर देती है। ‘सम्’ (सम्यक्) + ‘ज्ञा’ (ज्ञान कराना) = संज्ञा। इसका सीधा सा अर्थ है कि जो किसी वस्तु या व्यक्ति का ठीक-ठीक नाम बताए, वही संज्ञा है। यह इस बात पर बल देती है कि दुनिया की हर चीज जिसका कोई अस्तित्व है, उसका एक नाम होता है, और वह नाम ही व्याकरण में संज्ञा कहलाता है।
3. व्याकरणिक प्रकार्य पर आधारित परिभाषा
“संज्ञा एक विकारी शब्द है जो किसी वाक्य में कर्ता (Subject), कर्म (Object), या पूरक (Complement) की भूमिका निभाता है।”
- विश्लेषण: यह परिभाषा संज्ञा को उसके किताबी अर्थ से निकालकर, वाक्य में उसके कार्य (function) के आधार पर परिभाषित करती है। यह बताती है कि संज्ञा वह शब्द है जो:
- क्रिया को करने वाला (कर्ता) बन सकता है। (राम पढ़ता है।)
- क्रिया का फल भोगने वाला (कर्म) बन सकता है। (उसने फल खाया।)
- वाक्य को पूरा करने वाला (पूरक) बन सकता है। (मोहन एक डॉक्टर है।)
यह एक अधिक तकनीकी और व्याकरण-केंद्रित परिभाषा है।
4. दार्शनिक या अवधारणा-आधारित परिभाषा
“प्रत्येक ‘नामरूप’ (Name and Form) जिसका अस्तित्व या तो वास्तविक (concrete) जगत में है या काल्पनिक/अमूर्त (abstract) जगत में, संज्ञा कहलाता है।”
- विश्लेषण: यह एक व्यापक और दार्शनिक परिभाषा है, जो संज्ञा के दायरे को दृश्य और अदृश्य, दोनों जगत तक फैलाती है।
- वास्तविक जगत: वे सभी चीजें जिन्हें हम अपनी इंद्रियों (आँख, कान, नाक आदि) से महसूस कर सकते हैं, जैसे – लड़का, नदी, पत्थर, फूल। ये सभी मूर्त (concrete) संज्ञाएँ हैं।
- काल्पनिक/अमूर्त जगत: वे सभी चीजें जिन्हें हम केवल अपने मन या बुद्धि से अनुभव कर सकते हैं, छू या देख नहीं सकते, जैसे – विचार, खुशी, दुख, सुंदरता, प्रेम, नफरत। ये सभी अमूर्त (abstract) संज्ञाएँ हैं।
5. सरलीकृत परिभाषा (बच्चों के लिए)
“दुनिया में हर चीज का एक नाम होता है। उसी नाम वाले शब्द (Naming Words) को संज्ञा कहते हैं।”
- विश्लेषण: यह परिभाषा शिक्षण की दृष्टि से बनाई गई है ताकि छोटे बच्चे आसानी से समझ सकें। यह संज्ञा को ‘Naming Words’ के रूप में प्रस्तुत करती है, जो याद रखने में बहुत सरल है।
सभी परिभाषाओं का सार
अलग-अलग शब्दों और दृष्टिकोणों के बावजूद, सभी परिभाषाओं का केंद्रीय भाव एक ही है:
“संज्ञा वह शब्द है जो किसी भी नाम को दर्शाता है, चाहे वह नाम किसी साकार वस्तु का हो, निराकार भाव का हो, किसी स्थान का हो या किसी प्राणी का।”
भाषा में संज्ञा के बिना कोई वाक्य पूर्ण नहीं हो सकता, क्योंकि हर क्रिया का कोई न कोई कर्ता या कर्म होता है, जो अंततः एक संज्ञा या सर्वनाम ही होता है।
संज्ञा के भेद (Types of Noun)
अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के मुख्य रूप से पाँच भेद माने जाते हैं:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
- जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
- भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
- समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)
- द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)
नोट: अनेक आधुनिक व्याकरण विशेषज्ञ समूहवाचक और द्रव्यवाचक संज्ञाओं को जातिवाचक संज्ञा का ही उपभेद मानते हैं। इस आधार पर, मुख्य रूप से संज्ञा के तीन भेद भी बताए जाते हैं।
संज्ञा के भेदों की विस्तृत व्याख्या
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
परिभाषा:
वह शब्द जो किसी एक विशेष (specific) व्यक्ति, एक विशेष प्राणी, एक विशेष वस्तु, या एक विशेष स्थान के नाम का बोध कराता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
- ‘व्यक्तिवाचक’ का अर्थ है – ‘व्यक्ति विशेष का बोध कराने वाला’।
- यह संज्ञा किसी पूरी जाति या समूह का नाम नहीं होती, बल्कि उस जाति या समूह के एक खास सदस्य (unique member) का नाम होती है।
- यह हमेशा एकवचन (singular) में होती है, लेकिन सम्मान देने के लिए कभी-कभी इसका प्रयोग बहुवचन क्रिया के साथ होता है (जैसे – “गांधीजी महान थे।”)
व्यक्तिवाचक संज्ञा की पहचान कैसे करें? (Identification Rules)
- यह ‘कौन’ या ‘क्या’ का नहीं, बल्कि ‘किसका नाम’ का जवाब देती है।
- जातिवाचक: वह एक लड़का है। (कौन है? – लड़का)
- व्यक्तिवाचक: वह राम है। (लड़के का क्या नाम है? – राम)
- यह दुनिया में ‘एक’ और ‘विशेष’ होती है।
- नदी कहने से दुनिया की सभी नदियाँ समझी जाती हैं (जातिवाचक)।
- गंगा कहने से केवल एक विशेष नदी का बोध होता है (व्यक्तिवाचक)।
- इसे किसी अन्य नाम से नहीं बदला जा सकता।
- आप दिल्ली को मुंबई नहीं कह सकते, क्योंकि दोनों अपने आप में विशेष और अद्वितीय स्थान हैं।
व्यक्तिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):
व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के नाम आते हैं:
- 1. व्यक्तियों के विशेष नाम:
- महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, लता मंगेशकर, राम, सीता, मोहन, राधा।
- 2. स्थानों (देशों, राज्यों, शहरों, गाँवों) के विशेष नाम:
- देश: भारत, अमेरिका, चीन, जापान, रूस।
- राज्य: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, तमिलनाडु।
- शहर: दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा।
- स्थान: इंडिया गेट, लाल किला, हवा महल, चाँदनी चौक।
- 3. नदियों, पर्वतों, और समुद्रों के विशेष नाम:
- नदियाँ: गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, कावेरी, नील नदी।
- पर्वत: हिमालय, अरावली, विंध्याचल, एंडीज, आल्प्स।
- समुद्र/महासागर: हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी।
- 4. पुस्तकों एवं समाचार-पत्रों के विशेष नाम:
- पुस्तकें: रामायण, महाभारत, कुरान, बाइबिल, गीतांजलि, गोदान।
- समाचार-पत्र/पत्रिकाएँ: दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे।
- 5. दिनों एवं महीनों के विशेष नाम:
- दिन: सोमवार, मंगलवार, रविवार।
- महीने: जनवरी, फरवरी, चैत्र, वैशाख।
- 6. त्योहारों एवं उत्सवों के विशेष नाम:
- होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस, पोंगल, बैसाखी।
- 7. दिशाओं के नाम:
- उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम।
- 8. ऐतिहासिक घटनाओं और युद्धों के नाम:
- पानीपत की लड़ाई, प्लासी का युद्ध, भारत छोड़ो आंदोलन, सिपाही विद्रोह।
- 9. ग्रहों-नक्षत्रों के नाम:
- पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, मंगल, रोहिणी नक्षत्र।
- 10. राष्ट्रीयताओं और जातियों के नाम:
- भारतीय, अमेरिकी, जापानी (जब ये किसी देश के नागरिक का बोध कराएँ)।
व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
कभी-कभी जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा अपने विशेष गुण के कारण उस गुण वाले सभी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने लगती है, तो वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।
- उदाहरण:
- “आज के युग में जयचंदों की कमी नहीं है।”
- यहाँ ‘जयचंदों’ का अर्थ राजा जयचंद से नहीं, बल्कि ‘देशद्रोहियों’ (एक जाति) से है।
- “वह तो अपने घर का विभीषण निकला।”
- यहाँ ‘विभीषण’ का अर्थ रावण के भाई से नहीं, बल्कि ‘घर का भेदी’ (एक जाति) से है।
- “तुम्हारे अच्छे कार्यों से देश के हर घर में एक-एक गाँधी पैदा होगा।”
- यहाँ ‘गाँधी’ का अर्थ महात्मा गाँधी से नहीं, बल्कि ‘सत्य और अहिंसा के पुजारी’ (एक जाति) से है।
- “आज के युग में जयचंदों की कमी नहीं है।”
2. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
परिभाषा:
वह शब्द जो किसी प्राणी, वस्तु, या स्थान की संपूर्ण जाति, वर्ग, या समूह का बोध कराता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
- यह संज्ञा किसी एक विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का नाम न होकर, उस जैसे सभी का बोध कराती है।
- यह एक सामान्य (general) नाम होता है जो उस वर्ग के हर सदस्य पर लागू होता है।
- ‘जाति’ का अर्थ यहाँ किसी सामाजिक जाति से नहीं, बल्कि एक ‘प्रकार’ (kind) या ‘वर्ग’ (class) से है।
जातिवाचक संज्ञा की पहचान कैसे करें? (Identification Rules)
- यह पूरी श्रेणी (Category) को दर्शाती है:
- जब हम ‘पर्वत’ कहते हैं, तो यह दुनिया के किसी एक पर्वत का नहीं, बल्कि हिमालय, आल्प्स, एंडीज आदि सभी पर्वतों का बोध कराता है।
- जब हम ‘लड़का’ कहते हैं, तो यह राम, श्याम, मोहन आदि सभी लड़कों का बोध कराता है।
- इसका बहुवचन बन सकता है:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा का बहुवचन नहीं होता (आप ‘रामों’ या ‘दिल्लीयों’ नहीं कहते), लेकिन जातिवाचक संज्ञा का बहुवचन आसानी से बन सकता है।
- लड़का → लड़के
- नदी → नदियाँ
- किताब → किताबें
- व्यक्तिवाचक संज्ञा का बहुवचन नहीं होता (आप ‘रामों’ या ‘दिल्लीयों’ नहीं कहते), लेकिन जातिवाचक संज्ञा का बहुवचन आसानी से बन सकता है।
जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):
जातिवाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के नाम आते हैं:
- 1. मनुष्यों की जाति:
- लड़का, लड़की, आदमी, औरत, पुरुष, स्त्री, बच्चा, शिशु, बूढ़ा, युवक, युवती।
- 2. संबंधियों, पदों और व्यवसायों के नाम:
- भाई, बहन, माता, पिता, मित्र, शत्रु, शिक्षक, डॉक्टर, वकील, किसान, मंत्री, राजा, मजदूर।
- 3. पशु-पक्षियों की जाति:
- गाय, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली, शेर, हाथी, तोता, मोर, कबूतर, मछली, साँप।
- 4. वस्तुओं की जाति:
- किताब, कलम, मेज, कुर्सी, पंखा, घड़ी, कंप्यूटर, मोबाइल, गाड़ी, घर, बर्तन।
- 5. स्थानों की सामान्य जाति:
- देश, राज्य, शहर, गाँव, नगर, नदी, पर्वत, पहाड़, तालाब, समुद्र, स्कूल, अस्पताल, मंदिर, जंगल।
- 6. प्राकृतिक आपदाओं और तत्वों के नाम:
- आँधी, तूफान, वर्षा, बिजली, भूकंप, ज्वालामुखी।
जातिवाचक संज्ञा के उपभेद (Sub-types of Common Noun)
आधुनिक व्याकरण में कई विद्वान, समूहवाचक संज्ञा और द्रव्यवाचक संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा का ही हिस्सा मानते हैं, क्योंकि वे भी एक प्रकार की जाति या वर्ग का ही बोध कराते हैं।
क) समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun):
- परिभाषा: जो शब्द एक ही जाति के व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह (group) का बोध कराते हैं।
- पहचान: यह शब्द होता तो एकवचन है, पर बोध एक समूह का कराता है।
- उदाहरण:
- कक्षा: (छात्रों का समूह)
- सेना: (सैनिकों का समूह)
- भीड़: (लोगों का समूह)
- गुच्छा: (चाबियों या अंगूर का समूह)
- परिवार, दल, सभा, समिति, झुंड, ढेर।
ख) द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun):
- परिभाषा: जो शब्द किसी धातु, पदार्थ या द्रव्य का बोध कराते हैं, जिन्हें नापा-तौला जा सकता है, पर गिना नहीं जा सकता।
- पहचान: ये ऐसी सामग्रियाँ होती हैं जिनसे दूसरी चीजें बनती हैं।
- उदाहरण:
- सोना, चाँदी, लोहा (धातु)
- दूध, पानी, घी, तेल (द्रव्य)
- गेहूँ, चावल, कोयला (पदार्थ)
जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
कभी-कभी जब कोई जातिवाचक शब्द किसी विशेष व्यक्ति के लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाता है, तो वह व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह प्रयोग होने लगता है।
- उदाहरण:
- “पंडितजी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।”
- यहाँ ‘पंडितजी’ किसी भी पंडित के लिए नहीं, बल्कि एक विशेष व्यक्ति ‘जवाहरलाल नेहरू’ के लिए प्रयोग हुआ है।
- “नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया।”
- यहाँ ‘नेताजी’ का अर्थ किसी भी नेता से नहीं, बल्कि ‘सुभाष चंद्र बोस’ से है।
- “गाँधीजी ने हमें सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया।”
- यहाँ ‘गाँधीजी’ का अर्थ ‘महात्मा गाँधी’ से है।
- “पंडितजी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।”
3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जिनसे किसी प्राणी या वस्तु के गुण, दोष, अवस्था, दशा, भाव या धर्म (स्वभाव) का बोध होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
- ‘भाव’ का अर्थ है ‘अनुभूति’ या ‘अहसास’।
- यह संज्ञा अमूर्त (Abstract) होती है। इसका कोई भौतिक स्वरूप (Physical form) नहीं होता।
- सबसे महत्वपूर्ण पहचान: इसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, इसे केवल महसूस (feel) या अनुभव किया जा सकता है।
- इसका प्रयोग सामान्यतः एकवचन में ही होता है।
भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले भाव (उदाहरण सहित):
भाववाचक संज्ञाओं के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार की अनुभूतियाँ या अवधारणाएँ आती हैं:
- 1. गुण और दोष (Qualities and Faults):
- गुण: सुंदरता, ईमानदारी, अच्छाई, बुद्धिमानी, चतुराई, मधुरता, कोमलता, वीरता।
- दोष: बुराई, कुरूपता, बेईमानी, मूर्खता, कठोरता, कायरता।
- 2. भाव (Emotions/Feelings):
- प्रेम, स्नेह, घृणा, क्रोध, हर्ष, दुःख, भय, करुणा, मित्रता, शत्रुता, आशा, उत्साह।
- 3. अवस्था या दशा (State or Condition):
- मानव जीवन की अवस्थाएँ: बचपन, जवानी (यौवन), बुढ़ापा।
- सामाजिक/आर्थिक दशा: अमीरी, गरीबी, स्वास्थ्य, बीमारी, सुख, दुःख।
- 4. क्रिया का व्यापार (Action as a Noun):
- जब क्रिया का प्रयोग उसके ‘कार्य’ (process) के नाम के रूप में हो।
- उदाहरण: दौड़, चाल, हँसी, लिखाई, पढ़ाई, सजावट, थकावट, बनावट, चढ़ाई, उतार, चुनाव, मिलाप।
- 5. माप (Measurement):
- लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई, गहराई।
भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण (Formation of Abstract Nouns)
भाववाचक संज्ञाएँ दो प्रकार की होती हैं:
क) मूल भाववाचक संज्ञा: कुछ शब्द मूल रूप से ही भाववाचक होते हैं, उन्हें किसी और शब्द से बनाया नहीं जाता।
- उदाहरण: प्रेम, सुख, दुःख, भय, घृणा, जन्म, मृत्यु।
ख) निर्मित भाववाचक संज्ञा: अधिकांश भाववाचक संज्ञाएँ जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय शब्दों में प्रत्यय (suffix) जोड़कर बनाई जाती हैं।
यह व्याकरण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।
| मूल शब्द (प्रकार) | प्रत्यय | निर्मित भाववाचक संज्ञा |
| जातिवाचक संज्ञा से | ||
| बच्चा, लड़का | + पन | बचपन, लड़कपन |
| मानव, प्रभु | + ता / त्व | मानवता, प्रभुता / प्रभुत्व |
| मित्र, शत्रु | + ता | मित्रता, शत्रुता |
| चोर, डाकू | + ई / ई | चोरी, डकैती |
| बूढ़ा, मोटा | + पा | बुढ़ापा, मोटापा |
| — | — | — |
| सर्वनाम से | ||
| अपना | + पन / त्व | अपनापन / अपनत्व |
| निज | + त्व | निजत्व |
| मम | + ता / त्व | ममता / ममत्व |
| सर्व | + स्व | सर्वस्व |
| — | — | — |
| विशेषण से | ||
| सुंदर, वीर, मधुर | + ता / य | सुंदरता / सौंदर्य, वीरता, मधुरता / माधुर्य |
| अच्छा, बुरा | + आई | अच्छाई, बुराई |
| मीठा, खट्टा | + आस | मिठास, खटास |
| गर्म, सर्द | + ई | गर्मी, सर्दी |
| गहरा | + आई | गहराई |
| — | — | — |
| क्रिया से | ||
| लिखना, पढ़ना | + आई / आवट | लिखाई, लिखाई / लिखावट, पढ़ाई |
| थकना, सजना | + आवट / आन | थकावट, सजावट / थकान |
| चढ़ना, उतरना | + आई / आई | चढ़ाई, उतराई |
| चुनना, मिलना | + आव | चुनाव, मिलाप |
| हँसना | + ई | हँसी |
| — | — | — |
| अव्यय से | ||
| दूर, समीप | + ई / य | दूरी, सामीप्य |
| शीघ्र, निकट | + ता | शीघ्रता, निकटता |
| ऊपर, नीचे | + ई | ऊपरी, नीची (विशेषण की तरह भी) |
| मना | + ही | मनाही |
निष्कर्ष
भाववाचक संज्ञा भाषा को सूक्ष्मता और गहराई प्रदान करती है। यह हमें उन अवधारणाओं और अनुभूतियों को नाम देने की क्षमता देती है, जिनका कोई भौतिक आकार नहीं है। यह व्याकरण का एक रचनात्मक हिस्सा है जहाँ प्रत्ययों के माध्यम से नए-नए शब्दों का निर्माण निरंतर होता रहता है।
4. समूहवाचक / समुदायवाचक संज्ञा (Collective Noun)
परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जो किसी एक व्यक्ति या वस्तु का बोध न कराकर, व्यक्तियों, वस्तुओं, या प्राणियों के संपूर्ण समूह (Group) या समुदाय (Community) का बोध कराते हैं, उन्हें समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं।
- सबसे महत्वपूर्ण पहचान: यह शब्द व्याकरण की दृष्टि से एकवचन (singular) होता है, लेकिन यह अपने अर्थ में बहुवचन (plural) का भाव लिए होता है।
- उदाहरण: ‘सेना आ रही है।’ → यहाँ ‘सेना’ शब्द एकवचन है, लेकिन इसका अर्थ ‘बहुत सारे सैनिकों का समूह’ है।
नोट: आधुनिक व्याकरण में इसे जातिवाचक संज्ञा का ही एक उपभेद माना जाता है, क्योंकि ‘सेना’, ‘भीड़’ या ‘कक्षा’ भी एक प्रकार की जाति या वर्ग ही है।
समूहवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):
समूहवाचक संज्ञाओं को बेहतर समझने के लिए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है:
1. व्यक्तियों का समूह:
ये शब्द मनुष्यों के संगठित या असंगठित समूह को दर्शाते हैं।
- कक्षा: विद्यार्थियों का समूह।
- सेना: सैनिकों का समूह।
- पुलिस: पुलिसकर्मियों का समूह।
- भीड़: आम लोगों का अनियंत्रित समूह।
- परिवार: एक साथ रहने वाले सदस्यों का समूह।
- सभा: किसी निश्चित उद्देश्य से एकत्र हुए लोगों का समूह।
- समिति: किसी विशेष कार्य के लिए बनाई गई सदस्यों की टोली।
- दल: राजनीतिक या किसी अन्य कार्य के लिए बना समूह (जैसे – भाजपा दल, खिलाड़ियों का दल)।
- टोली: बच्चों या लोगों का छोटा समूह।
- गिरोह: अपराधियों या बदमाशों का समूह।
- मंडली: भजन या कीर्तन करने वालों का समूह।
- जुलूस: प्रदर्शन करते हुए लोगों का समूह।
2. वस्तुओं का समूह:
ये शब्द निर्जीव वस्तुओं के संग्रह या ढेर को दर्शाते हैं।
- गुच्छा: चाबियों या अंगूरों का संग्रह।
- जैसे: चाबियों का गुच्छा।
- ढेर: अनाज, कूड़े या किताबों का ढेर।
- जैसे: किताबों का ढेर लगा है।
- गट्ठर: लकड़ियों या कपड़ों का बँधा हुआ समूह।
- जैसे: लकड़ियों का गट्ठर।
- पुस्तकालय: पुस्तकों का संग्रह।
- श्रृंखला: घटनाओं या पर्वतों की लड़ी।
- जैसे: पर्वत श्रृंखला।
- मंडल: तारों का समूह।
- जैसे: नक्षत्र मंडल।
3. प्राणियों का समूह:
ये शब्द पशु-पक्षियों के झुंड को दर्शाते हैं।
- झुंड: हाथियों या भेड़ों का समूह।
- जैसे: हिरणों का झुंड।
- काफिला: ऊँटों या यात्रियों का एक साथ यात्रा करने वाला समूह।
- जैसे: ऊँटों का काफिला रेगिस्तान से गुजर रहा था।
- बेड़ा: जहाजों या समुद्री जानवरों का समूह।
- जैसे: जहाजों का बेड़ा।
प्रयोग में ध्यान देने योग्य बातें:
- एकवचन क्रिया: सामान्यतः समूहवाचक संज्ञा के साथ एकवचन क्रिया का प्रयोग होता है, क्योंकि यह एक इकाई (single unit) को दर्शाती है।
- सही: भारतीय सेना बहुत शक्तिशाली है।
- गलत: भारतीय सेना बहुत शक्तिशाली हैं।
- जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग: जब समूहवाचक संज्ञा का प्रयोग बहुवचन में किया जाता है या वह विभिन्न समूहों का बोध कराती है, तो वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।
- उदाहरण:
- आज शहर में दो अलग-अलग सभाएँ हो रही हैं।
- भारत की सेनाएँ विश्व में प्रसिद्ध हैं। (यहाँ सेनाएँ का अर्थ है – जल सेना, थल सेना, वायु सेना)।
- उदाहरण:
निष्कर्ष
समूहवाचक संज्ञा हमें एक ही शब्द में बहुत से सदस्यों को व्यक्त करने की सुविधा देती है, जिससे भाषा संक्षिप्त और प्रभावशाली बनती है। यह भाषा की उस क्षमता को दर्शाती है जहाँ एकवचन शब्द भी समूह का बोध करा सकता है।
5. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)
परिभाषा:
वे संज्ञा शब्द जो किसी ऐसे द्रव्य (Liquid), धातु (Metal), अधातु (Non-metal), या पदार्थ (Substance) का बोध कराते हैं, जिसे नापा या तौला जा सकता है, किन्तु गिना नहीं जा सकता, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
- सबसे महत्वपूर्ण पहचान:
- इन्हें Count नहीं किया जा सकता (uncountable)। हम ‘एक पानी’ या ‘दो सोना’ नहीं कह सकते।
- इनसे अन्य वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
- ये सामान्यतः एकवचन में ही प्रयुक्त होती हैं, इनका बहुवचन नहीं होता।
- ‘द्रव्य’ शब्द का अर्थ केवल ‘तरल पदार्थ’ नहीं है, बल्कि इसमें ठोस, तरल और गैस तीनों अवस्थाओं की सामग्रियाँ शामिल हैं।
नोट: आधुनिक व्याकरण में इसे भी जातिवाचक संज्ञा का ही एक उपभेद माना जाता है, क्योंकि ‘सोना’ या ‘दूध’ भी अपनी-अपनी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
द्रव्यवाचक संज्ञा के अंतर्गत आने वाले प्रमुख वर्ग (उदाहरण सहित):
द्रव्यवाचक संज्ञाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है:
1. धातु और अधातु (Metals and Non-metals):
वे सभी प्राकृतिक खनिज और पदार्थ जिनसे औजार, आभूषण या अन्य वस्तुएँ बनती हैं।
- सोना: (आभूषण बनते हैं)
- चाँदी: (बर्तन, सिक्के, आभूषण बनते हैं)
- लोहा: (औजार, मशीनें बनती हैं)
- ताँबा: (तार, बर्तन बनते हैं)
- पीतल
- स्टील
- कोयला
- हीरा
2. द्रव पदार्थ (Liquid Substances):
वे सभी तरल पदार्थ जिनका हम सेवन करते हैं या अन्य कामों में प्रयोग करते हैं।
- पानी
- दूध
- घी
- तेल (सरसों का तेल, पेट्रोल, डीजल)
- दही
- शहद
- चाय
- रस (गन्ने का रस)
3. खाद्य और कृषि पदार्थ (Edible and Agricultural Substances):
वे सभी अनाज और खाद्य सामग्रियाँ जिन्हें नापा या तौला जाता है।
- गेहूँ
- चावल
- आटा
- दाल
- चीनी / शक्कर
- गुड़
- नमक
- सब्जी (यहाँ सब्जी को एक पदार्थ के रूप में लिया गया है, न कि गिनी जाने वाली इकाई)।
4. अन्य पदार्थ (Other Materials):
वे सभी प्राकृतिक या निर्मित सामग्रियाँ जिनसे वस्तुएँ बनती हैं।
- ऊन: (स्वेटर बनते हैं)
- कपास / रुई: (कपड़े बनते हैं)
- प्लास्टिक: (कुर्सी, बाल्टी बनती हैं)
- कागज
- लकड़ी
- पत्थर
5. गैसीय पदार्थ (Gaseous Substances):
- ऑक्सीजन
- हाइड्रोजन
- धुआँ
- हवा (हालांकि हवा को जातिवाचक भी माना जाता है, पर पदार्थ के रूप में यह द्रव्यवाचक है)।
द्रव्यवाचक और जातिवाचक संज्ञा में अंतर:
कभी-कभी द्रव्यवाचक और जातिवाचक में भ्रम हो सकता है।
| आधार | द्रव्यवाचक संज्ञा | जातिवाचक संज्ञा |
| गणनीयता | अगणनीय (Uncountable) | गणनीय (Countable) |
| प्रयोग | इनसे अन्य चीजें बनती हैं | ये बनी-बनाई अंतिम वस्तु होती हैं |
| उदाहरण | लकड़ी (द्रव्यवाचक) | कुर्सी (जातिवाचक)<br> ‘कुर्सी’ लकड़ी से बनती है और गिनी जा सकती है। |
| उदाहरण | सोना (द्रव्यवाचक) | अंगूठी (जातिवाचक)<br>‘अंगूठी’ सोने से बनती है और गिनी जा सकती है। |
निष्कर्ष
द्रव्यवाचक संज्ञा उन सभी मूल पदार्थों या सामग्रियों को नाम देती है जिनसे हमारा भौतिक जगत बनता है। इसकी मुख्य पहचान यह है कि ये अगणनीय (uncountable) होती हैं और अक्सर किसी न किसी अन्य वस्तु के निर्माण में कच्चे माल (raw material) का काम करती हैं।
संज्ञा के रूपों में परिवर्तन
(Interchange in the Forms of Noun)
भाषा में शब्दों का अर्थ उनके प्रयोग पर बहुत अधिक निर्भर करता है। कभी-कभी वाक्य में प्रयोग के विशेष संदर्भ (context) के कारण एक प्रकार की संज्ञा, दूसरे प्रकार की संज्ञा का अर्थ देने लगती है। यह भाषा की एक लचीली और गतिशील प्रकृति को दर्शाता है।
मुख्य रूप से यह परिवर्तन निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है:
- व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
- जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
- भाववाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
नियम:
जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा (किसी एक व्यक्ति का नाम) अपने विशेष गुण, दोष या विशेषता के कारण, उस गुण वाले सभी व्यक्तियों या पूरी जाति का बोध कराने लगती है, तब वह व्यक्तिवाचक न रहकर जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।
- सरल शब्दों में, जब एक ‘नाम’ सिर्फ नाम न रहकर एक ‘पहचान’ या ‘प्रतीक’ बन जाए।
- पहचान की ट्रिक: ऐसे वाक्यों में व्यक्तिवाचक संज्ञा का बहुवचन रूप भी प्रयोग किया जा सकता है।
- उदाहरण:
- “आज के युग में हरिश्चंद्रों की कमी हो गई है।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘हरिश्चंद्रों’ का अर्थ राजा हरिश्चंद्र (एक व्यक्ति) से नहीं है, बल्कि ‘सत्यवादी लोगों’ (एक जाति/वर्ग) से है।
- “वह तो अपने घर का विभीषण निकला।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘विभीषण’ का अर्थ रावण के भाई से नहीं, बल्कि ‘घर का भेदी’ या ‘विश्वासघाती व्यक्ति’ (एक प्रकार) से है।
- “देश को जयचंदों से सावधान रहना चाहिए।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘जयचंदों’ का अर्थ राजा जयचंद से नहीं, बल्कि ‘देशद्रोहियों’ (एक जाति) से है।
- “वह स्त्री तो साक्षात् लक्ष्मी है।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘लक्ष्मी’ का अर्थ देवी लक्ष्मी से नहीं, बल्कि ‘धन-संपन्न और गुणी स्त्री’ से है।
- “भारत को गांधी के सपनों का देश बनाना है।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘गांधी’ सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि ‘गांधीजी के विचारों और आदर्शों’ का प्रतीक है।
- “आज के युग में हरिश्चंद्रों की कमी हो गई है।”
2. जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
नियम:
जब कोई जातिवाचक संज्ञा (पूरी जाति का नाम) किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान के लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाए और केवल उसी एक का बोध कराए, तब वह जातिवाचक न रहकर व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाती है।
- सरल शब्दों में, जब एक ‘जाति’ का नाम केवल एक ‘खास’ के लिए ही प्रयोग होने लगे।
- उदाहरण:
- “नेताजी ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ का नारा दिया था।”
- विश्लेषण: ‘नेताजी’ एक जातिवाचक शब्द है (जो किसी भी नेता के लिए हो सकता है), लेकिन इस वाक्य में यह केवल एक विशेष व्यक्ति ‘सुभाष चंद्र बोस’ के लिए आया है।
- “पंडितजी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।”
- विश्लेषण: ‘पंडितजी’ जातिवाचक शब्द है, पर यहाँ इसका प्रयोग केवल ‘जवाहरलाल नेहरू’ के लिए हुआ है।
- “महात्मा ने देश को अहिंसा का पाठ पढ़ाया।”
- विश्लेषण: ‘महात्मा’ का अर्थ ‘महान आत्मा’ (जातिवाचक) होता है, पर यहाँ यह केवल ‘महात्मा गाँधी’ के लिए रूढ़ हो गया है।
- “पुरी में भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है।”
- विश्लेषण: ‘पुरी’ का अर्थ ‘नगर’ या ‘शहर’ (जातिवाचक) होता है, लेकिन यहाँ यह एक विशेष स्थान ‘जगन्नाथ पुरी’ का बोध करा रहा है।
- “गोस्वामीजी ने रामचरितमानस की रचना की।”
- विश्लेषण: यहाँ ‘गोस्वामीजी’ जाति न होकर, केवल ‘तुलसीदास जी’ का बोध करा रहा है।
- “नेताजी ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ का नारा दिया था।”
3. भाववाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
नियम:
भाववाचक संज्ञा का प्रयोग हमेशा एकवचन में होता है। लेकिन जब किसी भाववाचक संज्ञा का प्रयोग बहुवचन में किया जाता है, तो वह किसी एक भाव को न बताकर, उस भाव की विभिन्न प्रकार की अभिव्यक्तियों या उस भाव वाले व्यक्तियों का बोध कराने लगती है। तब वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है।
- पहचान की ट्रिक: भाववाचक संज्ञा का बहुवचन रूप हमेशा जातिवाचक होता है।
- उदाहरण:
- “आजकल शहर में बहुत चोरियाँ हो रही हैं।”
- विश्लेषण: ‘चोरी’ एक भाववाचक संज्ञा (एक कार्य का नाम) है। लेकिन ‘चोरियाँ’ (बहुवचन) का अर्थ है – चोरी की ‘अनेक घटनाएँ’। यह एक प्रकार की घटनाओं की जाति का बोध करा रहा है।
- “हमें बुराइयों से बचना चाहिए।”
- विश्लेषण: ‘बुराई’ एक भाव है। लेकिन ‘बुराइयों’ (बहुवचन) का अर्थ है – विभिन्न प्रकार के ‘बुरे कार्य’ या ‘बुरे गुण’।
- “उनकी ऊँचाइयाँ नापने में बहुत समय लगेगा।”
- विश्लेषण: ‘ऊँचाई’ एक भाव है। लेकिन ‘ऊँचाइयाँ’ का अर्थ है ‘उपलब्धियों’ या ‘सफलताओं’ (जो गिनी जा सकती हैं) से।
- “उसकी सारी प्रार्थनाएँ सुनी गईं।”
- विश्लेषण: ‘प्रार्थना’ एक भाव है। लेकिन ‘प्रार्थनाएँ’ का अर्थ है ‘कई बार की गई विनतियाँ’।
- “आजकल शहर में बहुत चोरियाँ हो रही हैं।”
संज्ञा के 50 उदाहरण (भेदों सहित)
- राम – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- लड़का – (जातिवाचक संज्ञा)
- ईमानदारी – (भाववाचक संज्ञा)
- सेना – (समूहवाचक संज्ञा)
- सोना – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- दिल्ली – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- शहर – (जातिवाचक संज्ञा)
- बचपन – (भाववाचक संज्ञा)
- कक्षा – (समूहवाचक संज्ञा)
- दूध – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- गंगा – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- नदी – (जातिवाचक संज्ञा)
- सुंदरता – (भाववाचक संज्ञा)
- भीड़ – (समूहवाचक संज्ञा)
- पानी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- हिमालय – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- पर्वत – (जातिवाचक संज्ञा)
- प्रेम – (भाववाचक संज्ञा)
- गुच्छा – (समूहवाचक संज्ञा)
- लोहा – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- रामायण – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- किताब – (जातिवाचक संज्ञा)
- मित्रता – (भाववाचक संज्ञा)
- परिवार – (समूहवाचक संज्ञा)
- घी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- सोमवार – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- दिन – (जातिवाचक संज्ञा)
- बुढ़ापा – (भाववाचक संज्ञा)
- पुलिस – (समूहवाचक संज्ञा)
- गेहूँ – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- भारत – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- देश – (जातिवाचक संज्ञा)
- क्रोध – (भाववाचक संज्ञा)
- सभा – (समूहवाचक संज्ञा)
- चाँदी – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- ताजमहल – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- इमारत – (जातिवाचक संज्ञा)
- ऊँचाई – (भाववाचक संज्ञा)
- दल – (समूहवाचक संज्ञा)
- कोयला – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- जापान – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- कुर्सी – (जातिवाचक संज्ञा)
- लिखाई – (भाववाचक संज्ञा)
- ढेर – (समूहवाचक संज्ञा)
- प्लास्टिक – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
- होली – (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
- त्योहार – (जातिवाचक संज्ञा)
- गरीबी – (भाववाचक संज्ञा)
- जुलूस – (समूहवाचक संज्ञा)
- पेट्रोल – (द्रव्यवाचक संज्ञा)
सर्वनाम (Pronoun)
परिभाषा:
सर्वनाम शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘सर्व’ + ‘नाम’, जिसका अर्थ है – “सबका नाम”।
व्याकरणिक परिभाषा:
वाक्य में संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को ‘सर्वनाम’ कहते हैं।
सर्वनाम की आवश्यकता क्यों है?
सर्वनाम का प्रयोग भाषा को सरल, संक्षिप्त और सुंदर बनाने के लिए किया जाता है। यह संज्ञा शब्दों के बार-बार दोहराव (repetition) से होने वाली नीरसता को दूर करता है।
- उदाहरण:
- बिना सर्वनाम के:राम एक अच्छा लड़का है। राम सुबह जल्दी उठता है। राम के माता-पिता राम से बहुत प्रेम करते हैं।
- (यहाँ ‘राम’ शब्द का बार-बार आना अटपटा लगता है।)
- सर्वनाम के साथ:राम एक अच्छा लड़का है। वह सुबह जल्दी उठता है। उसके माता-पिता उससे बहुत प्रेम करते हैं।
- (यहाँ ‘वह’, ‘उसके’, ‘उससे’ सर्वनाम हैं, जिनसे वाक्य अधिक स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण हो गया है।)
- बिना सर्वनाम के:राम एक अच्छा लड़का है। राम सुबह जल्दी उठता है। राम के माता-पिता राम से बहुत प्रेम करते हैं।
हिन्दी में मूल सर्वनामों की संख्या 11 है:
मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या। (इन्हीं मूल सर्वनामों के रूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार बदलते रहते हैं)।
सर्वनाम के भेद (Types of Pronoun)
प्रयोग और अर्थ के आधार पर, सर्वनाम के छह (6) मुख्य भेद होते हैं:
1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)
परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग पुरुषों (व्यक्तियों) के नाम के स्थान पर किया जाता है, पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। ये सर्वनाम संवाद (conversation) में भाग लेने वाले तीन प्रकार के पुरुषों (व्यक्तियों) का बोध कराते हैं।
- ‘पुरुष’ का अर्थ यहाँ केवल ‘male’ नहीं है, बल्कि ‘व्यक्ति’ (person) है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष।
संवाद की स्थिति में तीन तरह के व्यक्ति होते हैं:
- वक्ता: बात को कहने वाला।
- श्रोता: बात को सुनने वाला।
- अन्य: वह व्यक्ति जिसके बारे में बात की जा रही है।
इन्हीं तीन स्थितियों के आधार पर पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद (उपभेद) किए गए हैं।
पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद (Types of Personal Pronoun)
क) उत्तम पुरुष (First Person)
- परिभाषा: जिन सर्वनामों का प्रयोग बात को कहने वाला (वक्ता) या लिखने वाला (लेखक) अपने स्वयं के लिए करता है, उन्हें उत्तम पुरुष सर्वनाम कहते हैं।
- सर्वनाम (मूल): मैं (एकवचन), हम (बहुवचन)
- विभिन्न कारकों में रूप:
- एकवचन: मैं, मैंने, मेरा, मेरी, मेरे, मुझे, मुझको, मुझसे।
- बहुवचन: हम, हमने, हमारा, हमारी, हमारे, हमें, हमको, हमसे।
- विशेष प्रयोग: आजकल शिष्टाचार या अधिकार दर्शाने के लिए ‘मैं’ की जगह ‘हम’ का प्रयोग भी एकवचन में किया जाता है (जैसे – “हम जानते हैं कि आप क्या कहना चाहते हैं।”)।
- उदाहरण:
- मैं कल दिल्ली जाऊँगा।
- मैंने अपना काम कर लिया है।
- हमारा देश महान है।
- हमें सच बोलना चाहिए।
ख) मध्यम पुरुष (Second Person)
- परिभाषा: जिन सर्वनामों का प्रयोग बात को सुनने वाले (श्रोता) या पढ़ने वाले (पाठक) के लिए किया जाता है, उन्हें मध्यम पुरुष सर्वनाम कहते हैं।
- सर्वनाम (मूल): तू, तुम, आप
- विभिन्न कारकों में रूप और प्रयोग:
- तू: इसका प्रयोग अत्यधिक निकटता, प्रेम या अनादर के भाव में होता है।
- रूप: तू, तूने, तेरा, तेरी, तेरे, तुझे, तुझको।
- वाक्य: तू कहाँ जा रहा है? भगवान, तेरा शुक्र है!
- तुम: इसका प्रयोग बराबर वालों या छोटों के लिए किया जाता है।
- रूप: तुम, तुमने, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे, तुम्हें, तुमको।
- वाक्य: तुम अपना काम करो।
- आप: इसका प्रयोग आदर, सम्मान या औपचारिकता के लिए किया जाता है, चाहे व्यक्ति उम्र में छोटा हो या बड़ा। यह आदरसूचक सर्वनाम है।
- रूप: आप, आपने, आपका, आपकी, आपके, आपको, आपसे।
- वाक्य: आप बैठिए। आपका नाम क्या है?
- तू: इसका प्रयोग अत्यधिक निकटता, प्रेम या अनादर के भाव में होता है।
ग) अन्य पुरुष (Third Person)
- परिभाषा: जिन सर्वनामों का प्रयोग वक्ता और श्रोता से भिन्न, किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या प्राणी (जिसके बारे में बात हो रही है) के लिए किया जाता है, उन्हें अन्य पुरुष सर्वनाम कहते हैं।
- सर्वनाम (मूल):
- यह, ये (निकट की वस्तु या व्यक्ति के लिए)
- वह, वे (दूर की वस्तु या व्यक्ति के लिए)
- विभिन्न कारकों में रूप:
- एकवचन: यह, इसने, इसका, इसे; वह, उसने, उसका, उसे।
- बहुवचन: ये, इन्होंने, इनका, इन्हें; वे, उन्होंने, उनका, उन्हें।
- उदाहरण:
- यह एक बहुत अच्छी किताब है। (निकट के लिए)
- वह फुटबाल खेल रहा है। (दूर के लिए)
- वे कल यहाँ आए थे।
- उसने मुझसे कहा कि वह नहीं आएगा। (इस वाक्य में ‘उसने’ और ‘वह’ दोनों अन्य पुरुष हैं)।
तुलनात्मक सारणी
| पुरुष | किसके लिए प्रयोग होता है? | सर्वनाम (एकवचन) | सर्वनाम (बहुवचन) |
| उत्तम पुरुष | बोलने वाला (वक्ता) | मैं, मेरा, मुझे | हम, हमारा, हमें |
| मध्यम पुरुष | सुनने वाला (श्रोता) | तू, तुम, आप | तुम लोग, आप लोग |
| अन्य पुरुष | जिसके बारे में बात हो | यह, वह, उसे | ये, वे, उन्हें |
2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun)
परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जो किसी पास (निकट) या दूर की निश्चित (certain/specific) व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या घटना की ओर संकेत या इशारा करते हैं, निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।
- इनकी निश्चितता (certainty) के कारण ही इन्हें निश्चयवाचक कहा जाता है।
- ये संकेत (pointing) करने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें संकेतवाचक सर्वनाम भी कहा जाता है।
मुख्य सर्वनाम शब्द:
- निकट (पास) के लिए:
- एकवचन: यह (Yah)
- बहुवचन: ये (Ye)
- दूर के लिए:
- एकवचन: वह (Vah)
- बहुवचन: वे (Ve)
उदाहरण:
- यह मेरी कलम है।
(इसमें ‘यह’ शब्द एक निश्चित कलम की ओर संकेत कर रहा है जो पास में है।) - वह सुरेश का घर है।
(इसमें ‘वह’ शब्द दूर स्थित एक निश्चित घर की ओर संकेत कर रहा है।) - ये बहुत स्वादिष्ट फल हैं।
(इसमें ‘ये’ पास रखे निश्चित फलों की ओर संकेत कर रहा है।) - वे हमारे विद्यालय के शिक्षक हैं।
(इसमें ‘वे’ दूर खड़े निश्चित शिक्षकों की ओर संकेत कर रहा है।)
पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)
निश्चयवाचक सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में बहुत भ्रम होता है। यहाँ इन दोनों के अंतर को समझने और निश्चयवाचक सर्वनाम को आसानी से पहचानने की ट्रिक दी गई है:
गोल्डन रूल (Golden Rule):
“सर्वनाम के ठीक बाद अगर संज्ञा आए, तो वह ‘विशेषण’ बन जाए।”
“सर्वनाम अगर अकेला आए (संज्ञा की जगह पर), तो ‘सर्वनाम’ कहलाए।”
इसका मतलब है:
- यदि ‘यह’, ‘वह’, ‘ये’, ‘वे’ के ठीक बाद कोई संज्ञा शब्द आ जाए, तो ये सर्वनाम न रहकर ‘सार्वनामिक विशेषण’ (Demonstrative Adjective) बन जाते हैं।
- यदि ‘यह’, ‘वह’, ‘ये’, ‘वे’ किसी संज्ञा के स्थान पर (अकेले या क्रिया के साथ) आएँ, तो वे निश्चयवाचक सर्वनाम होते हैं।
ट्रिक की प्रैक्टिस (उदाहरण के साथ):
- निश्चयवाचक सर्वनाम:
- यह मेरा घर है।
- (यहाँ ‘यह’ के बाद संज्ञा नहीं है, बल्कि ‘मेरा’ (संबंधकारक) आया है। ‘यह’ शब्द ‘घर’ संज्ञा की जगह पर प्रयोग हुआ है। इसलिए यह सर्वनाम है।)
- वह बहुत अच्छा गाता है।
- (यहाँ ‘वह’ किसी लड़के/व्यक्ति (संज्ञा) की जगह पर आया है। इसके बाद क्रिया की विशेषता है। इसलिए यह सर्वनाम है।)
- मिठाई मुझे दो, वह मत खाओ।
- (यहाँ ‘वह’ किसी दूसरी मिठाई (संज्ञा) के लिए आया है। यह सर्वनाम है।)
- यह मेरा घर है।
- सार्वनामिक विशेषण (तुलना के लिए):
- यह घर मेरा है।
- (यहाँ ‘यह’ के ठीक बाद ‘घर’ (संज्ञा) आ गया है। ‘यह’ शब्द ‘घर’ की विशेषता बता रहा है कि “यह वाला घर”। इसलिए यहाँ ‘यह’ विशेषण है।)
- वह लड़का बहुत अच्छा गाता है।
- (यहाँ ‘वह’ के ठीक बाद ‘लड़का’ (संज्ञा) है। इसलिए यहाँ ‘वह’ विशेषण है।)
- वे लोग कहाँ जा रहे हैं?
- (यहाँ ‘वे’ के बाद ‘लोग’ (संज्ञा) है। इसलिए यहाँ ‘वे’ विशेषण है।)
- यह घर मेरा है।
एक और ट्रिक (Context देखें):
वाक्य को पढ़कर यह जानने की कोशिश करें कि ‘यह/वह/ये/वे’ शब्द सिर्फ इशारा कर रहा है या किसी की जगह ले रहा है।
- इशारे के साथ विशेषता बताए (संज्ञा साथ में हो) → विशेषण।
- पूरी तरह संज्ञा की जगह ले ले → सर्वनाम।
निश्चयवाचक सर्वनाम और अन्य पुरुष पुरुषवाचक सर्वनाम में अंतर
‘वह’ और ‘वे’ का प्रयोग निश्चयवाचक और अन्य पुरुषवाचक, दोनों में होता है। इनमें अंतर प्रसंग (context) से पता चलता है:
- निश्चयवाचक सर्वनाम (वस्तु की ओर संकेत):
- वह मेरी कार है। (यहाँ किसी वस्तु की निश्चितता बताई जा रही है)।
- अन्य पुरुष पुरुषवाचक सर्वनाम (व्यक्ति के लिए):
- वह खेल रहा है। (यहाँ किसी व्यक्ति (पुरुष) के बारे में बात हो रही है)।
इस सरल नियम और ट्रिक से आप निश्चयवाचक सर्वनाम को कभी गलत नहीं पहचानेंगे।
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun)
परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनसे किसी निश्चित (certain/specific) व्यक्ति, वस्तु या पदार्थ का बोध नहीं होता, बल्कि हमेशा अनिश्चितता (uncertainty) की स्थिति बनी रहती है, अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।
- ‘अनिश्चय’ का अर्थ है – ‘जिसके बारे में पक्का पता न हो’।
- यह निश्चयवाचक सर्वनाम का ठीक विपरीत (opposite) है।
मुख्य सर्वनाम शब्द:
हिन्दी में मुख्य रूप से दो अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं:
- कोई (Koi):
- इसका प्रयोग प्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् जीवित प्राणियों/व्यक्तियों) के लिए होता है।
- यह एकवचन में प्रयोग होता है।
- कुछ (Kuch):
- इसका प्रयोग अप्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् निर्जीव वस्तुओं/पदार्थों) और बहुत सूक्ष्म प्राणियों के लिए होता है।
- इसका प्रयोग भाववाचक संज्ञा के लिए भी किया जा सकता है।
उदाहरण:
“कोई” का प्रयोग (प्राणियों के लिए):
- लगता है, दरवाजे पर कोई है।
(यहाँ ‘कोई’ शब्द का प्रयोग हुआ है, लेकिन कौन है—यह निश्चित नहीं है। वह राम भी हो सकता है, कोई अजनबी भी, या कोई जानवर भी।) - आज घर कोई आया था।
- यह काम कोई और नहीं कर सकता।
- अगर कोई तुम्हें बुलाए तो मत जाना।
“कुछ” का प्रयोग (वस्तुओं/पदार्थों के लिए):
- दाल में कुछ गिर गया है।
(यहाँ ‘कुछ’ गिरा है, लेकिन क्या गिरा है—कंकड़, मक्खी, या कुछ और—यह निश्चित नहीं है।) - मुझे खाने के लिए कुछ दे दो।
- दूध में कुछ मिलावट लगती है।
- मैंने बाजार से कुछ खरीदा है।
- मेरे पास कहने को कुछ नहीं है। (यहाँ भाव के लिए)
पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)
अनिश्चयवाचक सर्वनाम को पहचानना बहुत आसान है। इसके लिए आप इन सरल ट्रिक्स का प्रयोग कर सकते हैं:
ट्रिक 1: “निश्चित नहीं है” का नियम
वाक्य को पढ़ने के बाद खुद से यह सवाल पूछें:
“क्या इस शब्द से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का पता चल रहा है?”
- अगर जवाब ‘नहीं’ है, तो वह अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
- उदाहरण: “बाहर कोई रो रहा है।”
- सवाल: क्या निश्चित है कि कौन रो रहा है?
- जवाब: नहीं।
- निष्कर्ष: ‘कोई’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
- उदाहरण: “मुझे चाय में कुछ कम लग रहा है।”
- सवाल: क्या निश्चित है कि क्या कम लग रहा है (चीनी, चायपत्ती)?
- जवाब: नहीं।
- निष्कर्ष: ‘कुछ’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
ट्रिक 2: ‘कोई’ = प्राणी और ‘कुछ’ = वस्तु
यह एक बहुत ही पक्की ट्रिक है। वाक्य में यह देखें कि अनिश्चितता किसके बारे में है:
- यदि अनिश्चितता किसी जीवित प्राणी (व्यक्ति, जानवर) के बारे में है, तो ‘कोई’ का प्रयोग होगा।
- यदि अनिश्चितता किसी निर्जीव वस्तु या पदार्थ के बारे में है, तो ‘कुछ’ का प्रयोग होगा।
| किसके लिए? | सर्वनाम | उदाहरण वाक्य |
| प्राणीवाचक | कोई | शायद कोई बुला रहा है। |
| अप्राणीवाचक | कुछ | तुम्हारी जेब में कुछ रखा है। |
“कोई” का कारक रूप:
कभी-कभी ‘कोई’ का रूप वाक्य में बदल जाता है, जैसे- ‘किसी’, ‘किन्हीं’। यह भी अनिश्चयवाचक सर्वनाम ही होता है।
- मुझे किसी ने बुलाया है। (‘किसी’ = कोई)
- यह पुस्तक किसी को दे दो।
अनिश्चयवाचक विशेषण से अंतर:
ध्यान दें कि जब ‘कोई’ और ‘कुछ’ के ठीक बाद संज्ञा शब्द आ जाए, तो वे ‘अनिश्चित सार्वनामिक विशेषण’ (Indefinite Adjective) बन जाते हैं।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम: वहाँ कोई गा रहा है। (गाना क्रिया है, संज्ञा नहीं)।
- अनिश्चित विशेषण: वहाँ कोई लड़का गा रहा है। (‘कोई’ के बाद ‘लड़का’ संज्ञा आ गई)।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम: मुझे कुछ चाहिए। (‘कुछ’ के बाद संज्ञा नहीं)।
- अनिश्चित विशेषण: मुझे कुछ फल चाहिए। (‘कुछ’ के बाद ‘फल’ संज्ञा आ गई)।
4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)
परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग प्रश्न (question) पूछने के लिए किया जाता है, प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।
- इन सर्वनामों का प्रयोग वाक्य में किसी संज्ञा (व्यक्ति, वस्तु, स्थान) के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से होता है।
- इनसे बने वाक्यों के अंत में हमेशा प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग होता है।
मुख्य सर्वनाम शब्द:
हिन्दी में मुख्य रूप से दो प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं, जिनके कार्य निश्चित हैं:
- कौन (Kaun):
- इसका प्रयोग प्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् जीवित प्राणियों/व्यक्तियों) के बारे में प्रश्न पूछने के लिए होता है।
- क्या (Kya):
- इसका प्रयोग अप्राणीवाचक संज्ञाओं (अर्थात् निर्जीव वस्तुओं/पदार्थों/भावों/कार्यों) के बारे में प्रश्न पूछने के लिए होता है।
उदाहरण:
“कौन” का प्रयोग (व्यक्तियों/प्राणियों के लिए):
- बाहर कौन आया है?
(इस प्रश्न का उत्तर कोई संज्ञा (व्यक्ति) होगी, जैसे- ‘राम आया है’ या ‘डाकिया आया है’।) - यह काम कौन करेगा?
- आज खाने पर कौन आ रहा है?
- शेर को किसने देखा? (‘किसने’ शब्द ‘कौन’ का ही कारक रूप है)।
“क्या” का प्रयोग (वस्तुओं/पदार्थों के लिए):
- आप नाश्ते में क्या लेंगे?
(इस प्रश्न का उत्तर कोई संज्ञा (वस्तु) होगी, जैसे- ‘मैं पोहा लूँगा’ या ‘मैं चाय लूँगा’।) - तुम्हारे हाथ में क्या है?
- पिताजी बाजार से क्या लाए हैं?
- आज आपने क्या पढ़ा?
पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)
प्रश्नवाचक सर्वनाम को पहचानना व्याकरण में सबसे आसान कामों में से एक है। इसकी ट्रिक्स बिलकुल सीधी और सरल हैं:
ट्रिक 1: प्रश्न चिह्न (?) को देखो
- जिस वाक्य के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगा हो और उस वाक्य में कौन या क्या जैसे शब्द हों, तो वे लगभग हमेशा प्रश्नवाचक सर्वनाम होते हैं।
- उदाहरण: तुम कहाँ जा रहे हो?
- (प्रश्न चिह्न है, लेकिन ‘कहाँ’ स्थान पूछता है, यह क्रिया-विशेषण है।)
- यह कौन है? (प्रश्न चिह्न है और ‘कौन’ व्यक्ति पूछ रहा है → यह सर्वनाम है।)
ट्रिक 2: “कौन = प्राणी, क्या = वस्तु” का गोल्डन रूल
यह सबसे अचूक ट्रिक है। वाक्य में यह पहचानें कि प्रश्न किसके बारे में पूछा जा रहा है:
- यदि प्रश्न किसी जीवित प्राणी या व्यक्ति के बारे में है, तो ‘कौन’ (या उसके रूप- किसे, किसने) का प्रयोग होगा।
- यदि प्रश्न किसी निर्जीव वस्तु, पदार्थ या भाव के बारे में है, तो ‘क्या’ का प्रयोग होगा।
| किसके लिए प्रश्न? | सर्वनाम | उदाहरण वाक्य |
| प्राणी/व्यक्ति (Living) | कौन, किसे, किसने | वह कौन था? |
| वस्तु/पदार्थ (Non-living) | क्या | उसने क्या खाया? |
ट्रिक 3: उत्तर में संज्ञा
- जिन प्रश्नवाचक शब्दों का उत्तर कोई संज्ञा शब्द होता है, वे प्रश्नवाचक सर्वनाम होते हैं।
- उदाहरण:
- प्रश्न: कौन आया है?
- उत्तर: राम (संज्ञा) आया है। → इसलिए ‘कौन’ एक सर्वनाम है।
- प्रश्न: तुमने क्या खरीदा?
- उत्तर: किताब (संज्ञा) खरीदी। → इसलिए ‘क्या’ एक सर्वनाम है।
तुलना (क्रिया-विशेषण से):
- प्रश्न: तुम कैसे हो?
- उत्तर: अच्छा (विशेषण)। → इसलिए ‘कैसे’ एक क्रिया-विशेषण है।
- प्रश्न: वह कब आएगा?
- उत्तर: कल (क्रिया-विशेषण)। → इसलिए ‘कब’ एक क्रिया-विशेषण है।
सर्वनाम और क्रिया-विशेषण में अंतर
- प्रश्नवाचक सर्वनाम: कौन, क्या, किसे, किसने (संज्ञा के स्थान पर आते हैं)।
- प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण: कब, कहाँ, क्यों, कैसे (क्रिया की विशेषता बताते हैं – समय, स्थान, कारण, रीति)।
वाक्य में प्रयोग देखें:
- कौन (सर्वनाम) आया और कब (क्रिया-विशेषण) आया?
- तुमने क्या (सर्वनाम) कहा और क्यों (क्रिया-विशेषण) कहा?
5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)
परिभाषा:
वे सर्वनाम शब्द जो वाक्य में आए किसी दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्द से संबंध स्थापित करते हैं, संबंधवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।
- ये सर्वनाम वाक्य के दो भागों (उपवाक्यों) को जोड़ने का कार्य भी करते हैं।
- इनका प्रयोग हमेशा जोड़े (pairs) में होता है। एक सर्वनाम प्रश्न-सा लगता है और दूसरा उसका उत्तर या संबंध बताता है।
मुख्य सर्वनाम शब्द (जोड़े में):
- जो → सो / वह
- जैसा → वैसा
- जितना → उतना
- जिसका/जिसकी/जिसके → उसका/उसकी/उसके
(आधुनिक हिन्दी में ‘सो’ की जगह ‘वह’ का प्रयोग अधिक प्रचलित हो गया है।)
उदाहरण:
- जो परिश्रम करेगा, सो/वह सफल होगा।
(यहाँ ‘जो’ का संबंध ‘सो’ या ‘वह’ से है। यह दो बातों को जोड़ रहा है – परिश्रम करना और सफल होना।) - जैसा देश, वैसा भेष।
(यहाँ ‘जैसा’ का संबंध ‘वैसा’ से है।) - जितना गुड़ डालोगे, उतना मीठा होगा।
(यहाँ ‘जितना’ का संबंध ‘उतना’ से है।) - जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
(यहाँ ‘जिसकी’ का संबंध ‘उसकी’ से है।) - जो आया है, सो जाएगा।
- तुम्हें जो करना है, वह करो।
(आधुनिक प्रयोग)
पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)
संबंधवाचक सर्वनाम को पहचानना बहुत आसान है। इसकी सबसे अच्छी ट्रिक है वाक्य की बनावट को समझना।
ट्रिक 1: “जोड़ी वाले शब्द” खोजें
- संबंधवाचक सर्वनाम हमेशा जोड़ी (pair) में आते हैं। वाक्य को पढ़कर देखें कि क्या उसमें “जैसा…वैसा”, “जितना…उतना”, “जो…सो” जैसी कोई जोड़ी मौजूद है।
- अगर आपको वाक्य में ऐसी जोड़ी दिख जाए, तो वे लगभग हमेशा संबंधवाचक सर्वनाम होते हैं।
- उदाहरण:
- जिसने गलती की है, उसे सजा मिलेगी। (जिसने…उसे → जोड़ी)
- जो सोवत है, सो खोवत है। (जो…सो → जोड़ी)
ट्रिक 2: “मिश्र वाक्य” की पहचान
- संबंधवाचक सर्वनाम हमेशा मिश्र वाक्यों (Complex Sentences) में पाए जाते हैं।
- मिश्र वाक्य वह होता है जिसमें एक प्रधान उपवाक्य (Main Clause) और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य (Dependent Clause) होते हैं, जो एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
- उदाहरण: “वह सफल होगा” – यह प्रधान उपवाक्य है। यह किस पर निर्भर है? – “जो परिश्रम करेगा” (यह आश्रित उपवाक्य है)। इन दोनों को ‘जो-वह’ सर्वनाम जोड़ रहे हैं।
ट्रिक 3: पहला शब्द प्रश्न जैसा, दूसरा संबंध बताने वाला
- इस सर्वनाम की जोड़ी का पहला शब्द (जो, जैसा, जिसका) अक्सर एक तरह का अप्रत्यक्ष प्रश्न खड़ा करता है, और दूसरा शब्द (सो, वैसा, उसका) उसका संबंध या परिणाम बताता है।
- प्रश्न: कौन सफल होगा?
- उत्तर/संबंध: जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।
- प्रश्न: किसकी भैंस?
- उत्तर/संबंध: जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
अनिश्चयवाचक और प्रश्नवाचक सर्वनाम से अंतर
कभी-कभी अकेले ‘जो’ का प्रयोग देखकर भ्रम हो सकता है।
- संबंधवाचक: जो करेगा, सो भरेगा। (यहाँ ‘सो’ भी है, यह संबंध बता रहा है)।
- प्रश्नवाचक: वहाँ कौन है? (यह सीधा प्रश्न है)।
- अनिश्चयवाचक: वहाँ कोई है। (यह अनिश्चितता बता रहा है)।
संबंधवाचक की सबसे पक्की पहचान उसका दो उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य और जोड़ी में आना है। अगर आपको वाक्य में दो क्रियाएँ दिखें और वे एक-दूसरे से जुड़ी हों, तो वहां संबंधवाचक सर्वनाम होने की प्रबल संभावना होती है।
6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)
परिभाषा:
‘निज’ शब्द का अर्थ होता है – ‘अपना’ (own), ‘स्वयं’ (self)।
निजवाचक सर्वनाम वे सर्वनाम होते हैं, जिनका प्रयोग वाक्य का कर्ता (subject) स्वयं अपने लिए या अपनेपन का बोध कराने के लिए करता है।
- ये सर्वनाम बताते हैं कि कर्ता ने काम किसी और से नहीं कराया, बल्कि स्वयं किया है।
- यह कर्ता के साथ आकर उसके कार्य पर जोर (emphasis) देने का काम करता है।
मुख्य सर्वनाम शब्द:
- आप
- अपने आप (apne aap)
- स्वयं (swayam)
- खुद (khud)
- स्वतः (swatah)
- निज (nij)
उदाहरण:
- मैं यह कार्य अपने आप कर लूँगा।
(यहाँ ‘अपने आप’ का प्रयोग ‘मैं’ (कर्ता) के लिए हो रहा है, जो बता रहा है कि कर्ता काम खुद करेगा।) - वह स्वयं ही मेरे पास आया था।
(यहाँ ‘स्वयं’ का प्रयोग ‘वह’ (कर्ता) के लिए हुआ है।) - गांधीजी अपना सारा काम खुद करते थे।
(यहाँ ‘खुद’ का प्रयोग ‘गांधीजी’ (कर्ता) के लिए हुआ है।) - मशीन स्वतः चल पड़ी।
(यहाँ ‘स्वतः’ का प्रयोग ‘मशीन’ (कर्ता) के लिए हुआ है, जिसका अर्थ है ‘अपने आप’।) - मैं अपना निज कार्य कर रहा हूँ।
(यहाँ ‘निज’ का प्रयोग ‘अपना’ के अर्थ में है।) - आप भला तो जग भला।
(यह एक विशेष उदाहरण है, जहाँ ‘आप’ का अर्थ ‘तुम’ नहीं, बल्कि ‘स्वयं’ (oneself) है। अर्थात्, यदि व्यक्ति स्वयं भला है, तो उसके लिए जग भी भला है।)
पहचान की ट्रिक (Tricks for Identification)
निजवाचक सर्वनाम और मध्यम पुरुष ‘आप’ में अक्सर भ्रम होता है। इस भ्रम को दूर करने के लिए यहाँ कुछ बहुत ही कारगर ट्रिक्स दी गई हैं:
ट्रिक 1: “खुद/स्वयं” से बदलकर देखें (The Golden Rule)
जिस वाक्य में ‘आप’, ‘अपने आप’, ‘स्वयं’, ‘खुद’ आदि का प्रयोग हो, वहाँ इन शब्दों को “खुद” या “स्वयं” से बदलकर (replace करके) देखें। यदि वाक्य का अर्थ नहीं बदलता, तो वह निजवाचक सर्वनाम है।
- उदाहरण:
- मैं आप ही चला जाऊँगा।
- बदलकर देखें: मैं खुद ही चला जाऊँगा। / मैं स्वयं ही चला जाऊँगा।
- अर्थ बदला? नहीं।
- निष्कर्ष: यहाँ ‘आप’ निजवाचक सर्वनाम है।
- आप कहाँ रहते हैं?
- बदलकर देखें: खुद कहाँ रहते हैं? / स्वयं कहाँ रहते हैं?
- अर्थ बदला? हाँ, अर्थ बदल गया या निरर्थक हो गया।
- निष्कर्ष: यहाँ ‘आप’ मध्यम पुरुष (सुनने वाले के लिए) है, निजवाचक नहीं।
- मैं आप ही चला जाऊँगा।
ट्रिक 2: कर्ता (Subject) के साथ प्रयोग
- निजवाचक सर्वनाम हमेशा वाक्य के कर्ता (Subject) के बाद या उसके काम पर जोर देने के लिए आता है। इसका सीधा संबंध कर्ता से होता है।
- उदाहरण: <u> अपने आप खाना बना लूँगा। (कर्ता ‘मैं’ है, ‘अपने आप’ का संबंध ‘मैं’ से है)।
- <u> खुद चले जाओ। (कर्ता ‘तुम’ है, ‘खुद’ का संबंध ‘तुम’ से है)।
ट्रिक 3: ‘आप’ के दोहरे अर्थ को समझें
- मध्यम पुरुष ‘आप’ (You – respectful):
- यह हमेशा श्रोता (सुनने वाले) के लिए आता है।
- उदाहरण: आप बैठिए। (Someone is being asked to sit)।
- निजवाचक ‘आप’ (Oneself/Self):
- यह हमेशा कर्ता (चाहे वह उत्तम, मध्यम या अन्य पुरुष हो) के लिए आता है और ‘स्वयं’ का अर्थ देता है।
- उदाहरण:
- मैं आप चला जाऊँगा। (मैं स्वयं)
- तुम आप ही यह काम करो। (तुम स्वयं)
- वह आप ही समझ जाएगा। (वह स्वयं)
इस प्रकार, “खुद/स्वयं” से बदलने वाली ट्रिक निजवाचक सर्वनाम को पहचानने का सबसे सरल और अचूक तरीका है।
सर्वनाम से संबंधित परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
- सर्वनाम का अर्थ: सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है – ‘सबका नाम’ (सर्व + नाम)।
- परिभाषा: जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।
- प्रयोग का उद्देश्य: सर्वनाम का मुख्य उद्देश्य संज्ञा की पुनरावृत्ति (repetition) को रोकना और भाषा को संक्षिप्त एवं सुंदर बनाना है।
- हिन्दी में मूल सर्वनाम: हिन्दी में मूल सर्वनामों की संख्या 11 मानी जाती है। ये हैं –
मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या। - सर्वनाम के कुल भेद: प्रयोग के आधार पर सर्वनाम के कुल 6 भेद होते हैं।
(पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, प्रश्नवाचक, संबंधवाचक, निजवाचक)। - विकारी शब्द: सर्वनाम एक विकारी शब्द है, क्योंकि इसमें लिंग, वचन और कारक के आधार पर रूप परिवर्तन होता है।
- लिंग का प्रभाव: हिन्दी सर्वनामों पर लिंग (Gender) का सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। क्रिया से पता चलता है कि सर्वनाम पुरुष के लिए है या स्त्री के लिए।
- उदाहरण: वह जाता है। (पुल्लिंग) / वह जाती है। (स्त्रीलिंग) → (‘वह’ में कोई बदलाव नहीं हुआ)।
- पुरुषवाचक सर्वनाम: इसके तीन भेद होते हैं –
- उत्तम पुरुष: मैं, हम (बोलने वाला)
- मध्यम पुरुष: तू, तुम, आप (सुनने वाला)
- अन्य पुरुष: यह, वह, ये, वे (जिसके बारे में बात हो)
- निश्चयवाचक सर्वनाम: इसके दो अन्य नाम भी हैं – संकेतवाचक सर्वनाम और निर्देशक सर्वनाम।
- यह वस्तु या व्यक्ति की निश्चितता का बोध कराता है। (यह, वह, ये, वे)।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम: इसमें केवल दो मुख्य सर्वनाम हैं:
- कोई: प्राणीवाचक (व्यक्तियों के लिए)।
- कुछ: अप्राणीवाचक (वस्तुओं/पदार्थों के लिए)।
- संबंधवाचक सर्वनाम: ये हमेशा जोड़ी में आते हैं और मिश्र वाक्यों में दो उपवाक्यों को जोड़ते हैं।
- (जैसे- जो-सो, जैसा-वैसा, जिसकी-उसकी)।
- आधुनिक हिन्दी में ‘सो’ की जगह अक्सर ‘वह’ का प्रयोग होता है (जैसे – जो करेगा, वह भरेगा)।
- निजवाचक सर्वनाम: इसमें प्रयुक्त ‘आप’ का अर्थ ‘स्वयं’ (oneself/self) होता है, न कि ‘तुम/You’।
- इसका प्रयोग कर्ता स्वयं अपने लिए करता है।
- इसके मुख्य रूप हैं: आप, अपने आप, स्वयं, खुद, स्वतः।
सबसे अधिक भ्रमित करने वाले और महत्वपूर्ण तथ्य ( परीक्षा के लिए विशेष )
- ‘यह’ और ‘वह’ का प्रयोग:
- जब ये किसी व्यक्ति (कर्ता) के लिए आते हैं, तो अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम होते हैं।
- जब ये किसी वस्तु की निश्चितता बताने या संकेत करने के लिए आते हैं, तो निश्चयवाचक सर्वनाम होते हैं।
- अन्य पुरुष: वह पढ़ रहा है।
- निश्चयवाचक: वह मेरी किताब है।
- सर्वनाम बनाम सार्वनामिक विशेषण (सबसे महत्वपूर्ण):
- यदि सर्वनाम (जैसे – यह, वह, कोई, कुछ) के ठीक बाद संज्ञा शब्द आ जाए, तो वह सर्वनाम न रहकर सार्वनामिक विशेषण बन जाता है।
- सर्वनाम: यह मेरी कार है।
- विशेषण: यह कार मेरी है।
- सर्वनाम: बाहर कोई है।
- विशेषण: बाहर कोई आदमी है।
- यदि सर्वनाम (जैसे – यह, वह, कोई, कुछ) के ठीक बाद संज्ञा शब्द आ जाए, तो वह सर्वनाम न रहकर सार्वनामिक विशेषण बन जाता है।
- ‘आप’ शब्द के तीन प्रयोग:
- मध्यम पुरुष: सुनने वाले के लिए आदरपूर्वक (जैसे- आप कहाँ रहते हैं?)।
- अन्य पुरुष: किसी व्यक्ति के परिचय में आदरपूर्वक (जैसे- गांधीजी राष्ट्रपिता हैं, आपका जन्म गुजरात में हुआ)।
- निजवाचक: स्वयं/खुद के अर्थ में (जैसे- मैं यह काम आप कर लूँगा)।
- प्रश्नवाचक सर्वनाम बनाम क्रिया-विशेषण:
- कौन, क्या → प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं (उत्तर में संज्ञा मिलती है)।
- कहाँ, कब, क्यों, कैसे → प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण हैं (उत्तर में क्रिया की विशेषता मिलती है)।
ये तथ्य सर्वनाम अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं और परीक्षाओं में अक्सर इन्हीं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
विशेषण (Adjective)
परिभाषा:
वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, मात्रा, अवस्था आदि) बताते हैं, ‘विशेषण’ कहलाते हैं।
जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, उसे ‘विशेष्य’ (Noun/Pronoun being described) कहते हैं।
- उदाहरण: “काला घोड़ा दौड़ रहा है।”
- इस वाक्य में ‘घोड़ा’ संज्ञा है।
- घोड़े की विशेषता क्या है? → काला।
- अतः, ‘काला‘ शब्द विशेषण है।
- और ‘घोड़ा‘ शब्द विशेष्य है।
विशेषण के भेद (Types of Adjective)
प्रयोग और अर्थ के आधार पर, विशेषण के मुख्य रूप से चार (4) भेद होते हैं:
- गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)
- संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number)
- परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)
- सार्वनामिक या संकेतवाचक विशेषण (Demonstrative/Pronominal Adjective)
विशेषण के भेदों की विस्तृत व्याख्या
1. गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)
परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, स्वभाव, स्वाद, गंध, स्पर्श, दशा, अवस्था, स्थान, काल आदि से संबंधित विशेषताओं का बोध कराते हैं, गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
- ‘गुण’ शब्द का अर्थ यहाँ केवल ‘अच्छी विशेषता’ नहीं है, बल्कि ‘किसी भी प्रकार की विशेषता’ (any kind of quality) है, चाहे वह अच्छी हो या बुरी।
- यह विशेषण के भेदों में सबसे व्यापक और समृद्ध भेद है, क्योंकि इसके अंतर्गत आने वाले शब्दों की संख्या बहुत अधिक है।
पहचान की ट्रिक (Trick to Identify)
गुणवाचक विशेषण को पहचानने का सबसे सरल तरीका है विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) से “कैसा?”, “कैसी?” या “कैसे?” का प्रश्न करना। जो शब्द उत्तर में मिलेगा, वही गुणवाचक विशेषण होगा।
- उदाहरण:
- वह एक ईमानदार व्यक्ति है।
- प्रश्न: वह कैसा व्यक्ति है?
- उत्तर: ईमानदार → (गुणवाचक विशेषण)
- बाग में सुंदर फूल खिले हैं।
- प्रश्न: बाग में कैसे फूल खिले हैं?
- उत्तर: सुंदर → (गुणवाचक विशेषण)
- उसने काली कमीज पहनी है।
- प्रश्न: उसने कैसी कमीज पहनी है?
- उत्तर: काली → (गुणवाचक विशेषण)
- वह एक ईमानदार व्यक्ति है।
गुणवाचक विशेषण के प्रमुख भेद / वर्ग (Major Sub-types)
गुणवाचक विशेषण के अंतर्गत अनेक प्रकार की विशेषताएँ आती हैं, जिन्हें बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित वर्गों में बांटा जा सकता है:
क) गुण-बोधक (Describing Good Qualities):
- ये शब्द संज्ञा के सकारात्मक गुणों (merits) को दर्शाते हैं।
- उदाहरण: अच्छा, भला, ईमानदार, सच्चा, दानी, सरल, विनम्र, दयालु, परिश्रमी, बुद्धिमान।
ख) दोष-बोधक (Describing Faults/Defects):
- ये शब्द संज्ञा के नकारात्मक गुणों या दोषों (demerits) को दर्शाते हैं।
- उदाहरण: बुरा, खराब, बेईमान, झूठा, दुष्ट, क्रूर, कठोर, आलसी, मूर्ख।
ग) रंग-बोधक (Describing Colour):
- ये शब्द संज्ञा के रंग का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: काला, गोरा, लाल, पीला, हरा, नीला, सफ़ेद, बैंगनी, सुनहरा।
घ) आकार-बोधक (Describing Shape/Size):
- ये शब्द संज्ञा के आकार या रूप-रंग का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: छोटा, बड़ा, मोटा, पतला, लंबा, बौना, गोल, चौकोर, तिकोना, सुंदर, कुरूप, आकर्षक।
ङ) अवस्था-बोधक (Describing State/Condition):
- ये शब्द संज्ञा की दशा या अवस्था का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: नया, पुराना, गीला, सूखा, गरीब, अमीर, बीमार, स्वस्थ, युवा, बूढ़ा, कमजोर, बलवान।
च) स्थान-बोधक (Describing Place/Origin):
- ये शब्द संज्ञा के स्थान या उत्पत्ति का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: शहरी, ग्रामीण, भारतीय, जापानी, चीनी, पहाड़ी, मैदानी, बाहरी, भीतरी, ऊपरी, निचला।
छ) स्वाद-बोधक (Describing Taste):
- ये शब्द संज्ञा के स्वाद का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कसैला, फीका।
ज) गंध-बोधक (Describing Smell):
- ये शब्द संज्ञा की गंध का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: सुगंधित, दुर्गंधपूर्ण, खुशबूदार, बदबूदार।
झ) स्पर्श-बोधक (Describing Touch):
- ये शब्द स्पर्श के अनुभव का बोध कराते हैं।
- उदाहरण: कोमल, कठोर, चिकना, खुरदरा, गर्म, ठंडा।
ञ) काल-बोधक (Describing Time):
- ये शब्द समय संबंधी विशेषता बताते हैं।
- उदाहरण: अगला, पिछला, नया, पुराना, वार्षिक, मासिक, दैनिक, प्रातःकालीन।
निष्कर्ष
गुणवाचक विशेषण, भाषा को रंग, रूप, आकार और भावों से भर देते हैं, जिससे वर्णन अधिक जीवंत और स्पष्ट हो जाता है। यह विशेषण का सबसे सहज और स्वाभाविक रूप है, जिसका प्रयोग हम अपनी रोजमर्रा की बातचीत में सबसे अधिक करते हैं। इसकी पहचान “कैसा/कैसी?” प्रश्न से आसानी से की जा सकती है, जिससे इसे अन्य भेदों से अलग करना सरल हो जाता है।
2. संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number / Numeral Adjective)
परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या, गणना या क्रम संबंधी विशेषता का बोध कराते हैं, संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक:
इसका विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) हमेशा गणनीय (Countable) होता है, अर्थात् उसे एक, दो, तीन… करके गिना जा सकता है।
प्रश्न: यह “कितने?” (How many?) का उत्तर देता है।
- उदाहरण: “मेज पर चार पुस्तकें रखी हैं।”
- प्रश्न: मेज पर कितनी पुस्तकें रखी हैं?
- उत्तर: चार।
- विशेष्य (पुस्तकें): गणनीय है (countable)।
- निष्कर्ष: ‘चार’ संख्यावाचक विशेषण है।
संख्यावाचक विशेषण के भेद (Types of Numeral Adjective)
संख्या निश्चित है या अनिश्चित, इस आधार पर इसके दो मुख्य उपभेद होते हैं:
क) निश्चित संख्यावाचक विशेषण (Definite Numeral Adjective)
- परिभाषा: वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की एक निश्चित (exact) संख्या का बोध कराते हैं, निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
- निश्चित संख्यावाचक विशेषण के प्रमुख प्रकार:
- 1. गणनावाचक (Cardinal):
- यह वस्तुओं या व्यक्तियों की सीधी गिनती (counting) बताता है।
- पूर्णांक बोधक: एक, दो, दस, पचास, सौ। (जैसे – चार केले)
- अपूर्णांक बोधक: आधा, पाव, पौन, सवा, ढाई। (जैसे – ढाई किलो) (यह परिमाण में भी जा सकता है)
- 2. क्रमवाचक (Ordinal):
- यह संख्या के क्रम (order or rank) को बताता है।
- उदाहरण: पहला, दूसरा, तीसरा, दसवाँ, पचासवाँ। (जैसे – दूसरी मंजिल, पहला स्थान)।
- 3. आवृत्तिवाचक (Frequency):
- यह बताता है कि कोई वस्तु विशेष्य से कितनी गुनी अधिक है।
- उदाहरण: दुगुना, तिगुना, चौगुना, दस गुना, सौ गुना। (जैसे – मुझे तुमसे चौगुना लाभ हुआ)।
- 4. समुदायवाचक / समूहवाचक (Collective):
- यह एक समूह के रूप में संख्या को दर्शाता है।
- उदाहरण: दोनों, तीनों, चारों, पाँचों, दर्जन, बत्तीसी, चालीसा। (जैसे – तीनों भाई आ गए)।
- 5. प्रत्येकबोधक (Distributive):
- यह समूह में से हर एक का बोध कराता है।
- उदाहरण: प्रत्येक, हर एक, एक-एक, सवा-सवा। (जैसे – प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिलेगा)।
- 1. गणनावाचक (Cardinal):
ख) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (Indefinite Numeral Adjective)
- परिभाषा: वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का बोध नहीं कराते, बल्कि एक अंदाज या अनिश्चितता का भाव देते हैं, अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
- उदाहरण:
- कक्षा में कुछ छात्र बैठे हैं।
- (‘कुछ’ से यह तो पता चलता है कि छात्र गिने जा सकते हैं, पर उनकी निश्चित संख्या (2, 4, या 10) पता नहीं है।)
- सभा में कई लोग आए थे।
- भूकंप में हजारों घर तबाह हो गए।
- मेले में बहुत बच्चे थे।
- मेरे पास थोड़े ही पेन बचे हैं।
- कक्षा में कुछ छात्र बैठे हैं।
संख्यावाचक और परिमाणवाचक विशेषण में अंतर (SUPER TRICK)
यह विशेषण का सबसे भ्रमित करने वाला हिस्सा है, लेकिन इसकी ट्रिक बहुत सरल है।
नियम:
यदि विशेषण (कुछ, कई, बहुत, थोड़ा, सब) के बाद आने वाला विशेष्य (संज्ञा) गिना जा सकता (countable) है, तो वह संख्यावाचक होगा।
यदि विशेष्य को गिना नहीं जा सकता, केवल नापा या तौला जा सकता (uncountable) है, तो वह परिमाणवाचक होगा।
| उदाहरण वाक्य | विशेष्य (संज्ञा) | गणनीय / अगणनीय? | विशेषण का भेद |
| मैंने कुछ आम खाए। | आम | गणनीय (गिने जा सकते हैं) | अनिश्चित संख्यावाचक |
| मुझे कुछ दूध दे दो। | दूध | अगणनीय (नापा जाता है) | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| गिलास में थोड़ा पानी है। | पानी | अगणनीय | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| मेरे पास थोड़े पैसे हैं। | पैसे | गणनीय (गिने जा सकते हैं) | अनिश्चित संख्यावाचक |
| बाल्टी में बहुत पानी है। | पानी | अगणनीय | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| मेले में बहुत लोग थे। | लोग | गणनीय | अनिश्चित संख्यावाचक |
निष्कर्ष
संख्यावाचक विशेषण हमें वस्तुओं और व्यक्तियों को गिनने, उनका क्रम बताने और उनकी संख्या का अनुमान लगाने में मदद करता है। इसका सबसे बड़ा पहचान चिह्न यह है कि इसका संबंध हमेशा ‘गणनीय संज्ञाओं’ से होता है।
3. परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)
परिभाषा:
वे विशेषण शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा, नाप, या तौल (quantity, measurement, weight) संबंधी विशेषता का बोध कराते हैं, परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
- ‘परिमाण’ का अर्थ ही होता है – ‘मात्रा’ (Quantity)।
पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक:
इसका विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) हमेशा अगणनीय (Uncountable) होता है, अर्थात् उसे एक, दो, तीन… करके गिना नहीं जा सकता, उसे केवल नापा (जैसे- मीटर, लीटर) या तौला (जैसे- किलो, ग्राम) जा सकता है।
प्रश्न: यह भी “कितना?” या “कितनी?” (How much?) का उत्तर देता है।
- उदाहरण: “मुझे दो किलो चीनी चाहिए।”
- प्रश्न: कितनी चीनी चाहिए?
- उत्तर: दो किलो।
- विशेष्य (चीनी): अगणनीय है (uncountable), इसे तौला जाता है।
- निष्कर्ष: ‘दो किलो’ परिमाणवाचक विशेषण है।
परिमाणवाचक विशेषण के भेद (Types of Quantitative Adjective)
मात्रा निश्चित है या अनिश्चित, इस आधार पर इसके दो मुख्य उपभेद होते हैं:
क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण (Definite Quantitative Adjective)
- परिभाषा: वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की एक निश्चित (exact) मात्रा या नाप-तौल का बोध कराते हैं, निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
- पहचान: इनमें मात्रा के साथ मापक इकाई (unit of measurement) जैसे- किलो, ग्राम, लीटर, मीटर, तोला आदि लगी होती है।
- उदाहरण:
- मुझे दो लीटर दूध दे दो।
- उसने कमीज के लिए चार मीटर कपड़ा खरीदा।
- सब्जी में एक चम्मच नमक डालो।
- सुनार ने दस ग्राम सोना तौला।
- मेरे पास एक बीघा जमीन है।
ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण (Indefinite Quantitative Adjective)
- परिभाषा: वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित मात्रा या नाप-तौल का बोध नहीं कराते, बल्कि एक अंदाजा या अनिश्चितता का भाव देते हैं, अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
- उदाहरण:
- चाय में थोड़ी चीनी और डालो।
- (‘थोड़ी’ से यह तो पता चलता है कि चीनी अगणनीय है, पर उसकी निश्चित मात्रा (एक चम्मच या 10 ग्राम) पता नहीं है।)
- मुझे पीने के लिए जरा-सा पानी चाहिए।
- बाल्टी में बहुत दूध है।
- आज कम बारिश हुई।
- मुझे सब अनाज दे दो।
- दाल में ज्यादा घी मत डालना।
- चाय में थोड़ी चीनी और डालो।
परिमाणवाचक और संख्यावाचक विशेषण में अंतर (SUPER TRICK)
यह विशेषण का सबसे भ्रमित करने वाला हिस्सा है, लेकिन इसकी ट्रिक बहुत सरल है।
नियम:
यदि विशेषण (कुछ, कई, बहुत, थोड़ा, सब, ज्यादा) के बाद आने वाला विशेष्य (संज्ञा) गिना जा सकता (countable) है, तो वह संख्यावाचक होगा।
यदि विशेष्य को गिना नहीं जा सकता, केवल नापा या तौला जा सकता (uncountable) है, तो वह परिमाणवाचक होगा।
| उदाहरण वाक्य | विशेष्य (संज्ञा) | गणनीय / अगणनीय? | विशेषण का भेद |
| मैंने थोड़े चावल खाए। | चावल | अगणनीय (तौला जाता है) | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| मैंने थोड़े फल खाए। | फल | गणनीय (गिने जा सकते हैं) | अनिश्चित संख्यावाचक |
| बाल्टी में बहुत पानी है। | पानी | अगणनीय | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| मेले में बहुत लोग थे। | लोग | गणनीय | अनिश्चित संख्यावाचक |
| मुझे ज्यादा चीनी मत देना। | चीनी | अगणनीय | अनिश्चित परिमाणवाचक |
| वहाँ ज्यादा गाड़ियाँ नहीं हैं। | गाड़ियाँ | गणनीय | अनिश्चित संख्यावाचक |
निष्कर्ष
परिमाणवाचक विशेषण हमें वस्तुओं और पदार्थों की मात्रा और माप-तौल के बारे में जानकारी देता है। इसका सबसे बड़ा पहचान चिह्न यह है कि इसका संबंध हमेशा ‘अगणनीय संज्ञाओं’ से होता है, जिन्हें हम मापते या तोलते हैं, गिनते नहीं।
4. सार्वनामिक विशेषण / संकेतवाचक विशेषण
परिभाषा:
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले लगकर उस संज्ञा की विशेषता बताए या उसकी ओर संकेत करे, तो वह शब्द सर्वनाम न रहकर ‘सार्वनामिक विशेषण’ बन जाता है।
- ‘सार्वनामिक’ = सर्वनाम से बना हुआ।
- यह संज्ञा की ओर संकेत (pointing) करता है, इसलिए इसे ‘संकेतवाचक विशेषण’ भी कहते हैं।
पहचान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक (The Golden Rule)
यदि सर्वनाम शब्द (जैसे- यह, वह, कोई, कौन, जो) के ठीक बाद कोई संज्ञा शब्द आता है, तो वह सर्वनाम शब्द हमेशा सार्वनामिक विशेषण होता है।
यदि सर्वनाम शब्द संज्ञा की जगह पर (अकेला या क्रिया के साथ) आता है, तो वह सर्वनाम ही रहता है।
संरचना: सर्वनाम + संज्ञा = सार्वनामिक विशेषण
सार्वनामिक विशेषण के प्रमुख भेद (Types)
मूल सर्वनामों के आधार पर ही सार्वनामिक विशेषण के भी चार प्रमुख भेद होते हैं:
क) निश्चयवाचक (संकेतवाचक) सार्वनामिक विशेषण
- परिभाषा: जब ‘यह’, ‘वह’, ‘ये’, ‘वे’ सर्वनाम संज्ञा से पहले लगकर उसकी ओर निश्चित संकेत करते हैं।
- उदाहरण:
- यह किताब मेरी है।
- (यहाँ ‘यह’ के बाद ‘किताब’ (संज्ञा) आई है। ‘यह’ शब्द किताब की ओर संकेत कर रहा है। अतः, यह सार्वनामिक विशेषण है।)
- उस घर में कौन रहता है?
- वे लोग कहाँ जा रहे हैं?
- इस विद्यार्थी को पुरस्कार मिलेगा।
- यह किताब मेरी है।
- सर्वनाम से तुलना:
- सार्वनामिक विशेषण: यह कार मेरी है। (‘यह’ + संज्ञा)
- निश्चयवाचक सर्वनाम: यह मेरी कार है। (‘यह’ संज्ञा की जगह आया है)।
ख) अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण
- परिभाषा: जब ‘कोई’, ‘कुछ’, ‘किसी’ सर्वनाम संज्ञा से पहले लगकर उसकी अनिश्चितता का बोध कराते हैं।
- उदाहरण:
- बाहर कोई लड़का खड़ा है।
- (यहाँ ‘कोई’ के बाद ‘लड़का’ (संज्ञा) है।)
- मुझे कुछ फल चाहिए।
- शायद किसी आदमी ने दरवाजा खटखटाया।
- बाहर कोई लड़का खड़ा है।
- सर्वनाम से तुलना:
- सार्वनामिक विशेषण: घर में कुछ सामान रखा है।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम: घर में कुछ रखा है।
ग) प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण
- परिभाषा: जब ‘कौन’, ‘क्या’, ‘किस’, ‘कौन-सी’ सर्वनाम संज्ञा से पहले लगकर उससे संबंधित प्रश्न पूछते हैं।
- उदाहरण:
- कौन छात्र आज नहीं आया?
- (यहाँ ‘कौन’ के बाद ‘छात्र’ (संज्ञा) है।)
- तुम किस व्यक्ति से बात कर रहे थे?
- यह क्या चीज है?
- कौन-सी किताब तुम्हारी है?
- कौन छात्र आज नहीं आया?
- सर्वनाम से तुलना:
- सार्वनामिक विशेषण: किस कलम से लिख रहे हो?
- प्रश्नवाचक सर्वनाम: किससे लिख रहे हो?
घ) संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण
- परिभाषा: जब ‘जो’, ‘जिसका’, ‘जिसने’ आदि सर्वनाम संज्ञा से पहले लगकर वाक्य के दूसरे भाग से संबंध बताते हैं। इसका प्रयोग थोड़ा जटिल होता है।
- उदाहरण:
- जो छात्र परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।
- (यहाँ ‘जो’ के बाद ‘छात्र’ (संज्ञा) है, और इसका संबंध ‘वह’ से है।)
- जिस व्यक्ति का यह पर्स है, वह आकर ले जाए।
- जो छात्र परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।
- सर्वनाम से तुलना:
- सार्वनामिक विशेषण: जो किताब मेज पर है, वह मेरी है।
- संबंधवाचक सर्वनाम: जो मेज पर है, वह मेरी है।
निष्कर्ष
सार्वनामिक विशेषण की एकमात्र और अचूक पहचान यही है कि यह हमेशा संज्ञा के ठीक पहले आकर एक बॉडीगार्ड की तरह उसकी तरफ इशारा करता है या उसकी विशेषता बताता है। यदि सर्वनाम के बाद संज्ञा नहीं है, तो वह विशेषण नहीं हो सकता, वह सर्वनाम ही रहेगा। इस नियम को याद रखने से इस विषय में कभी कोई गलती नहीं होगी।
प्रविशेषण (Praviveshan)
परिभाषा:
हिन्दी व्याकरण में, वे शब्द जो विशेषण की भी विशेषता बताते हैं, ‘प्रविशेषण’ कहलाते हैं।
- ‘प्र’ उपसर्ग का अर्थ होता है ‘आगे’ या ‘अधिक’।
- प्र + विशेषण = विशेषण के आगे लगकर उसकी विशेषता को और बढ़ाने वाला शब्द।
सरल शब्दों में, विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है और प्रविशेषण उस विशेषण की मात्रा या तीव्रता (degree or intensity) को बताता है।
- संरचना: प्रविशेषण + विशेषण + संज्ञा/सर्वनाम
उदाहरणों से समझें:
1. सामान्य वाक्य (केवल विशेषण के साथ):
* राम ईमानदार लड़का है।
* (यहाँ ‘ईमानदार’ शब्द ‘लड़का’ (संज्ञा) की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह विशेषण है।)
2. प्रविशेषण युक्त वाक्य:
* राम बहुत ईमानदार लड़का है।
* विश्लेषण:
* ‘लड़का’ → संज्ञा (विशेष्य)
* ‘ईमानदार’ → विशेषण (लड़का कैसा है? – ईमानदार)
* ‘बहुत’ → प्रविशेषण (कितना ईमानदार है? – बहुत ईमानदार)।
* यहाँ ‘बहुत’ शब्द ‘लड़का’ की नहीं, बल्कि विशेषण ‘ईमानदार’ की विशेषता बता रहा है।
प्रमुख प्रविशेषण शब्द (Common Praviveshan Words):
हिन्दी में कुछ शब्द अक्सर प्रविशेषण के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। ये शब्द विशेषण की मात्रा, तीव्रता या स्तर को दर्शाते हैं।
- बहुत → (very)
- अत्यंत / अति → (extremely / very)
- अधिक → (more)
- कम → (less)
- बड़ा / भारी → (big / very – used for emphasis)
- लगभग → (almost / approximately)
- पूरा / बिलकुल → (completely / absolutely)
- जरा / थोड़ा → (a little / slightly)
- काफी → (quite / enough)
विभिन्न वाक्यों में प्रविशेषण के उदाहरण:
- कश्मीरी सेब सिंदूरी लाल होता है।
- सेब (संज्ञा) की विशेषता क्या है? → लाल (विशेषण)
- कितना लाल? → सिंदूरी लाल।
- अतः, ‘सिंदूरी’ यहाँ प्रविशेषण है।
- यह चाय बहुतमीठी है।
- मीठी → विशेषण
- बहुत → प्रविशेषण
- वह अत्यंतसुंदर दृश्य था।
- सुंदर → विशेषण
- अत्यंत → प्रविशेषण
- मुझे थोड़ागर्म पानी चाहिए।
- गर्म → विशेषण
- थोड़ा → प्रविशेषण
- यह तो बड़ाभारी अन्याय है।
- भारी → विशेषण
- बड़ा → प्रविशेषण (यहाँ ‘बड़ा’ का अर्थ आकार में बड़ा नहीं, बल्कि ‘बहुत’ है)।
- वह लगभगपूरी तरह ठीक हो गया है।
- पूरी → विशेषण
- लगभग → प्रविशेषण
- रमेश बिलकुलस्वस्थ है।
- स्वस्थ → विशेषण
- बिलकुल → प्रविशेषण
क्रिया-विशेषण और प्रविशेषण में अंतर
- प्रविशेषण (Modifies Adjective):
- यह विशेषण की विशेषता बताता है।
- उदाहरण: वह बहुत सुंदर है। (‘बहुत’ शब्द ‘सुंदर’ विशेषण की विशेषता बता रहा है)।
- क्रिया-विशेषण (Adverb – Modifies Verb):
- यह क्रिया की विशेषता बताता है।
- उदाहरण: वह बहुत बोलता है। (‘बहुत’ शब्द ‘बोलता है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है)।
पहचान की ट्रिक:
वाक्य में ‘बहुत’, ‘कम’, ‘अधिक’ जैसे शब्दों के बाद अगर विशेषण है, तो वे प्रविशेषण होंगे।
यदि उनके बाद क्रिया है, तो वे क्रिया-विशेषण होंगे।
निष्कर्ष
प्रविशेषण, विशेषण के अर्थ में गहराई और तीव्रता लाता है, जिससे भाषा अधिक सटीक और प्रभावशाली बन जाती है। यह हमें यह बताने में मदद करता है कि कोई गुण या दोष किस स्तर का है।
विशेषण की अवस्थाएँ (Degrees of Adjective)
परिभाषा:
विशेषण शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं। लेकिन जब दो या दो से अधिक संज्ञाओं के गुणों या दोषों की तुलना (comparison) की जाती है, तो उस तुलना के स्तर (level) को दर्शाने के लिए विशेषण की अवस्थाओं का प्रयोग किया जाता है।
मुख्य रूप से, विशेषण की तीन तुलनात्मक अवस्थाएँ होती हैं:
- मूलावस्था (Positive Degree)
- उत्तरावस्था (Comparative Degree)
- उत्तमावस्था (Superlative Degree)
तीनों अवस्थाओं की विस्तृत व्याख्या
1. मूलावस्था (Positive Degree)
- परिभाषा:
जब विशेषण का प्रयोग सामान्य रूप से, बिना किसी की तुलना किए, केवल एक ही व्यक्ति, वस्तु, या स्थान की सामान्य विशेषता बताने के लिए किया जाता है, तो उसे विशेषण की मूलावस्था कहते हैं। - यह विशेषण का मूल रूप (basic form) होता है।
- पहचान: इसमें कोई तुलना नहीं होती।
- उदाहरण:
- राम एक अच्छा लड़का है।
- यह आम मीठा है।
- उसका घर बड़ा है।
- सीता सुंदर है।
2. उत्तरावस्था (Comparative Degree)
- परिभाषा:
जब विशेषण के द्वारा दो व्यक्तियों, वस्तुओं, या स्थानों के गुणों या दोषों की आपस में तुलना की जाती है और उनमें से एक को दूसरे से बेहतर (अधिक) या बुरा (कम) बताया जाता है, तो उसे विशेषण की उत्तरावस्था कहते हैं। - पहचान: इसमें दो संज्ञाओं के बीच तुलना होती है।
- बनाने के नियम:
- विशेषण शब्द के पहले ‘से अधिक’, ‘की अपेक्षा’, ‘की तुलना में’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। (यह हिन्दी का अपना तरीका है)।
- संस्कृत के तत्सम शब्दों में, शब्द के अंत में ‘-तर’ प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- उदाहरण:
- राम, श्याम से अधिक अच्छा है।
- यह आम उस आम की अपेक्षा अधिक मीठा है।
- गीता, सीता से सुंदरतर है। (तत्सम शब्द, ‘-तर’ प्रत्यय के साथ)
- उसका घर मेरे घर से बड़ा है। (यहाँ ‘से’ तुलना दर्शा रहा है)।
- यह मार्ग लघुतर है। (लघु + तर)
3. उत्तमावस्था (Superlative Degree)
- परिभाषा:
जब विशेषण के द्वारा दो से अधिक (अर्थात् सब) व्यक्तियों, वस्तुओं, या स्थानों में तुलना करके किसी एक को सबसे अच्छा (सर्वश्रेष्ठ) या सबसे बुरा (निकृष्ट) बताया जाता है, तो उसे विशेषण की उत्तमावस्था कहते हैं। - पहचान: इसमें एक को पूरे समूह में सर्वश्रेष्ठ या निम्नतम बताया जाता है।
- बनाने के नियम:
- विशेषण शब्द के पहले ‘सबसे’ शब्द जोड़ा जाता है। (यह हिन्दी का अपना तरीका है)।
- संस्कृत के तत्सम शब्दों में, शब्द के अंत में ‘-तम’ प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- उदाहरण:
- राम कक्षा में सबसे अच्छा लड़का है।
- यह आम सभी आमों में सबसे मीठा है।
- गीता अपनी कक्षा में सुंदरतम छात्रा है। (तत्सम शब्द, ‘-तम’ प्रत्यय के साथ)
- माउंट एवरेस्ट विश्व का उच्चतम शिखर है। (उच्च + तम)
- अकबर महानतम शासक था। (महान् + तम)
तुलनात्मक सारणी: तीनों अवस्थाएँ
| अवस्था | मूलावस्था (Positive) | उत्तरावस्था (Comparative) | उत्तमावस्था (Superlative) |
| परिभाषा | एक की सामान्य विशेषता | दो में तुलना (एक बेहतर/बुरा) | सब में तुलना (सबसे बेहतर/बुरा) |
| विशेषता | कोई तुलना नहीं | ‘से अधिक’ या ‘-तर’ प्रत्यय | ‘सबसे’ या ‘-तम’ प्रत्यय |
| उदाहरण-1 | यह फल मीठा है। | यह फल उस फल से अधिक मीठा है। | यह फल सबसे मीठा है। |
| उदाहरण-2 | वह चतुर है। | वह तुमसे अधिक चतुर है। | वह सबमें सबसे चतुर है। |
| उदाहरण-3 (तत्सम) | उसका कार्य श्रेष्ठ है। | उसका कार्य तुम्हारे कार्य से श्रेष्ठतर है। | उसका कार्य श्रेष्ठतम है। |
| उदाहरण-4 (तत्सम) | यह लघु कथा है। | यह कथा उस कथा से लघुतर है। | यह लघुतम कथा है। |
निष्कर्ष
विशेषण की ये तीन अवस्थाएँ हमें न केवल किसी की विशेषता बताने, बल्कि तुलनात्मक रूप से उसकी स्थिति को स्पष्ट करने में भी मदद करती हैं। मूलावस्था जहाँ सामान्य वर्णन है, वहीं उत्तरावस्था और उत्तमावस्था तुलनात्मक श्रेष्ठता या निम्नता को दर्शाती हैं, जिससे भाषा में सटीकता आती है।
विशेषण और विशेष्य में संबंध
विशेषण और विशेष्य का संबंध अटूट और अन्योन्याश्रित होता है, अर्थात् वे एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर होते हैं। इस संबंध को हम “स्वामी-सेवक” या “वर्ण्य-वर्णक” के संबंध की तरह समझ सकते हैं, जहाँ एक विशेषता बताता है और दूसरा वह है जिसकी विशेषता बताई जा रही है।
- विशेषण (Adjective): विशेषता बताने वाला शब्द (सेवक/वर्णक)।
- विशेष्य (Visheshya): जिसकी विशेषता बताई जाए (संज्ञा या सर्वनाम) (स्वामी/वर्ण्य)।
“बिना विशेष्य के विशेषण का कोई अस्तित्व नहीं है, और विशेषण के बिना विशेष्य की विशेषता का पता नहीं चलता।”
विशेषण और विशेष्य के संबंध के प्रमुख नियम:
1. लिंग और वचन का संबंध (Agreement in Gender and Number)
यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है। हिन्दी में, विशेषण का लिंग (Gender) और वचन (Number) हमेशा विशेष्य के अनुसार ही बदलता है।
- नियम: यदि विशेष्य पुल्लिंग है, तो विशेषण भी पुल्लिंग होगा। यदि विशेष्य स्त्रीलिंग है, तो विशेषण भी स्त्रीलिंग होगा। यही नियम वचन पर भी लागू होता है।
- नोट: यह नियम मुख्य रूप से आकारांत विशेषणों (जिनके अंत में ‘आ’ आता है) पर लागू होता है, जैसे – अच्छा, काला, मोटा, बड़ा, छोटा। कुछ विशेषण अपरिवर्तित रहते हैं (जैसे – सुंदर, ईमानदार)।
- उदाहरण (लिंग के अनुसार):
- अच्छा लड़का (विशेष्य ‘लड़का’ पुल्लिंग है, इसलिए विशेषण ‘अच्छा’ भी पुल्लिंग है)।
- अच्छी लड़की (विशेष्य ‘लड़की’ स्त्रीलिंग है, इसलिए विशेषण ‘अच्छा’ बदलकर ‘अच्छी’ हो गया)।
- उदाहरण (वचन के अनुसार):
- काला घोड़ा (विशेष्य ‘घोड़ा’ एकवचन है)।
- काले घोड़े (विशेष्य ‘घोड़े’ बहुवचन है, इसलिए विशेषण ‘काला’ बदलकर ‘काले’ हो गया)।
- काली घोड़ी (स्त्रीलिंग एकवचन)
- काली घोड़ियाँ (स्त्रीलिंग बहुवचन – यहाँ विशेषण नहीं बदला)
2. स्थान का संबंध (Position in a Sentence)
वाक्य में विशेषण का प्रयोग दो प्रकार से हो सकता है, जिससे इसके दो भेद माने जाते हैं:
क) उद्देश्य विशेषण (Attributive Adjective)
- परिभाषा: जब विशेषण विशेष्य (संज्ञा) से ठीक पहले आता है, तो उसे उद्देश्य विशेषण कहते हैं।
- संरचना: विशेषण + विशेष्य
- उदाहरण:
- सफेद गाय घास चर रही है।
- मेहनती छात्र सफल होते हैं।
- मुझे ठंडा पानी चाहिए।
ख) विधेय विशेषण (Predicative Adjective)
- परिभाषा: जब विशेषण विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) के बाद और क्रिया के पहले (या क्रिया के पूरक के रूप में) आता है, तो उसे विधेय विशेषण कहते हैं।
- संरचना: विशेष्य + ………… + विशेषण
- उदाहरण:
- मेरी गाय सफेद है।
- वह छात्र मेहनती है।
- यह पानी ठंडा है।
दोनों ही स्थितियों में, विशेषण और विशेष्य का संबंध बना रहता है, केवल वाक्य में उनके स्थान बदल जाते हैं।
3. विशेषण की अवस्थाओं का संबंध
विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ (मूलावस्था, उत्तरावस्था, उत्तमावस्था) भी विशेष्य के संदर्भ में ही प्रयोग होती हैं।
- मूलावस्था: जब एक ही विशेष्य की बात हो।
- यह सुंदर फूल है।
- उत्तरावस्था: जब दो विशेष्यों की तुलना हो।
- गुलाब का फूल, गेंदे के फूल से अधिक सुंदर है।
- उत्तमावस्था: जब अनेक विशेष्यों में से एक को सर्वश्रेष्ठ बताया जाए।
- गुलाब सबसे सुंदर फूल है।
सारणी में संबंध
| विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) | लिंग/वचन | विशेषण का रूप | उदाहरण वाक्य |
| कमरा | पुल्लिंग, एकवचन | बड़ा | यह बड़ा कमरा है। |
| कमरे | पुल्लिंग, बहुवचन | बड़े | ये बड़े कमरे हैं। |
| दीवार | स्त्रीलिंग, एकवचन | बड़ी | यह दीवार बड़ी है। |
| दीवारें | स्त्रीलिंग, बहुवचन | बड़ी | ये दीवारें बड़ी हैं। |
निष्कर्ष
विशेषण और विशेष्य का संबंध आश्रय और आश्रित का है। विशेषण का स्वतंत्र रूप से कोई महत्व नहीं होता, वह अपना अर्थ और स्वरूप हमेशा विशेष्य से ही प्राप्त करता है। विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) जैसा होगा, विशेषण को भी वैसा ही रूप धारण करना पड़ेगा। यही उनके बीच का सबसे गहरा संबंध है जो हिन्दी व्याकरण को एक तार्किक और व्यवस्थित रूप प्रदान करता है।
विशेषण की रचना (Formation of Adjectives)
हिन्दी में कुछ शब्द तो मूल रूप में ही विशेषण होते हैं, लेकिन अधिकांश विशेषण शब्दों की रचना संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, और अव्यय शब्दों में प्रत्यय (suffix) या उपसर्ग (prefix) लगाकर की जाती है।
1. संज्ञा से विशेषण बनाना (From Noun to Adjective)
यह विशेषण बनाने का सबसे आम और व्यापक तरीका है। संज्ञा शब्दों में विभिन्न प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं।
| प्रत्यय | संज्ञा शब्द | बना हुआ विशेषण |
| -ई (i) | पाप, रोग, धन, जयपुर, जापान | पापी, रोगी, धनी, जयपुरी, जापानी |
| -इक (ik) | समाज, इतिहास, विज्ञान, दिन | सामाजिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, दैनिक |
| -इत (it) | सम्मान, अपमान, हर्ष, फल | सम्मानित, अपमानित, हर्षित, फलित |
| -ईय (iya) | भारत, राष्ट्र, जाति, स्थान | भारतीय, राष्ट्रीय, जातीय, स्थानीय |
| -ईन (een) | ग्राम, कुल, रंग | ग्रामीण, कुलीन, रंगीन |
| -आ (a) | भूख, प्यास | भूखा, प्यासा |
| -आलू (aalu) | श्रद्धा, झगड़ा, कृपा, दया | श्रद्धालु, झगड़ालू, कृपालु, दयालु |
| -एला (ela) | विष, रंग | विषैला, रंगीला |
| -वान (vaan) | गुण, धन, बल | गुणवान, धनवान, बलवान |
| -मान (maan) | बुद्धि, श्री, शक्ति | बुद्धिमान, श्रीमान, शक्तिमान |
| -ईला (eela) | चमक, पत्थर, शर्म | चमकीला, पथरीला, शर्मीला |
2. सर्वनाम से विशेषण बनाना (From Pronoun to Adjective)
सर्वनाम शब्दों में प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं। इनका प्रयोग अक्सर सार्वनामिक विशेषण के रूप में भी होता है।
| सर्वनाम शब्द | प्रत्यय | बना हुआ विशेषण | उदाहरण वाक्य |
| यह | यह, ऐसा | यह किताब मेरी है। ऐसा आदमी मत बनो। | |
| वह | वह, वैसा | वह घर तुम्हारा है। वैसा काम मत करो। | |
| जो | जो, जैसा | जो छात्र परिश्रम करेगा…। जैसा देश, वैसा भेष। | |
| मैं | -रा (मेरा) | मेरा, मुझ-सा | मेरा भाई। मुझ-सा कोई नहीं। |
| तुम | -हारा(तुम्हारा) | तुम्हारा, तुम-सा | तुम्हारा घर। तुम-सा मित्र कहाँ। |
3. क्रिया से विशेषण बनाना (From Verb to Adjective)
क्रिया के धातु रूप में प्रत्यय जोड़कर विशेषण बनाए जाते हैं। ये अक्सर किसी क्रिया को करने वाले कर्ता की या क्रिया के परिणाम की विशेषता बताते हैं।
| क्रिया धातु | प्रत्यय | बना हुआ विशेषण | उदाहरण |
| पढ़ना (पढ़) | + आकू / ऐया | पढ़ाकू, पढ़ैया | वह बड़ा पढ़ाकू लड़का है। |
| लड़ना (लड़) | + आकू | लड़ाकू | वह एक लड़ाकू विमान है। |
| बेचना (बेच) | + आऊ | बिकाऊ | यह घर बिकाऊ है। |
| टिकना (टिक) | + आऊ | टिकाऊ | यह सामान बहुत टिकाऊ है। |
| भूलना (भूल) | + अक्कड़ | भुलक्कड़ | वह भुलक्कड़ आदमी है। |
| घूमना (घूम) | + अक्कड़ | घुमक्कड़ | वह घुमक्कड़ स्वभाव का है। |
| सड़ना (सड़) | + इयल | सड़ियल | यह सड़ियल आम है। |
| भागना (भाग) | + ओड़ा | भगोड़ा | वह एक भगोड़ा अपराधी है। |
4. अव्यय से विशेषण बनाना (From Adverb/Indeclinable to Adjective)
अव्यय (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक आदि) शब्दों में भी प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाए जाते हैं।
| अव्यय शब्द | प्रत्यय | बना हुआ विशेषण | उदाहरण |
| बाहर | + ई | बाहरी | हमें बाहरी लड़कों से बात नहीं करनी चाहिए। |
| भीतर | + ई | भीतरी | यह घर की भीतरी दीवार है। |
| आगे | + ला | अगला | अगला स्टेशन आने वाला है। |
| पीछे | + ला | पिछला | उसने पिछला पाठ याद नहीं किया। |
| ऊपर | + ई | ऊपरी | हमें केवल ऊपरी बातें पता हैं। |
| नीचे | + ला | निचला | यह घर का निचला हिस्सा है। |
उपसर्ग द्वारा विशेषण निर्माण
कुछ विशेषण उपसर्ग (prefix) लगाकर भी बनाए जाते हैं, जो अक्सर विलोम शब्द बनाने का काम करते हैं।
| उपसर्ग | मूल शब्द | निर्मित विशेषण |
| निर्- | डर, बल, दोष | निडर, निर्बल, निर्दोष |
| स- | बल, पूत, गुण | सबल, सपूत, सगुण |
| बे- | ईमान, अदब, चैन | बेईमान, बेअदब, बेचैन |
निष्कर्ष
विशेषण की रचना एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्याकरणिक प्रक्रिया है। यह हमें संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और अव्यय जैसे विभिन्न प्रकार के शब्दों से नए विशेषण शब्द बनाने की क्षमता देती है, जिससे भाषा में अभिव्यक्ति की सटीकता और समृद्धि बढ़ती है। प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाना इसका सबसे आम और रचनात्मक तरीका है।
विशेषण के 50 उदाहरण (भेदों सहित)
- वह एक ईमानदार व्यक्ति है। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह फूल लाल है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मेरा घर बड़ा है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मेज पर चार किताबें रखी हैं। – (निश्चित संख्यावाचक)
- वह कक्षा में प्रथम आया। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
- मुझे दो किलो चीनी चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- यह कमीज दस मीटर कपड़े से बनी है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- यह लड़का बहुत होशियार है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- बाहर कोई आदमी खड़ा है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- मुझे थोड़ा पानी चाहिए। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- सभा में कई लोग आए थे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- वह लड़की सुंदर है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मुझे गर्म दूध पीना है। – (गुणवाचक विशेषण)
- सड़क ऊँची-नीची है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मैंने कुछ फल खरीदे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- दाल में जरा-सा नमक कम है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- किस छात्र ने यह काम किया है? – (सार्वनामिक विशेषण)
- वह घर बहुत पुराना है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- मोहन बुद्धिमान है। – (गुणवाचक विशेषण)
- कौआ काला होता है। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह पाँचवीं मंजिल है। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
- दोनों भाई खेल रहे हैं। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
- मुझे आधा लीटर तेल चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- जिसकी लाठी उसकी भैंस। – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह रास्ता बहुत लंबा है। – (गुणवाचक विशेषण)
- आज मौसम अच्छा है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मुझे सब किताबें दे दो। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- गिलास में बहुत पानी है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- मेरा भाई डॉक्टर है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- चाय में चीनी कम है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- यह एक ऐतिहासिक इमारत है। – (गुणवाचक विशेषण)
- प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदारी से काम करना चाहिए। – (निश्चित संख्यावाचक – प्रत्येकबोधक)
- उसने सफेद घोड़ा खरीदा। – (गुणवाचक विशेषण)
- वह बहुत गरीब आदमी है। (‘बहुत’ प्रविशेषण है) – (गुणवाचक विशेषण)
- मेरी कक्षा में पचास छात्र हैं। – (निश्चित संख्यावाचक – गणनावाचक)
- उसे दोगुना लाभ हुआ। – (निश्चित संख्यावाचक – आवृत्तिवाचक)
- यह एक भारी पत्थर है। – (गुणवाचक विशेषण)
- उसने एक नई कार खरीदी है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मेरे पास कम पैसे हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- उसने काफी दूध पी लिया। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- जो लड़की खड़ी है, वह मेरी बहन है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह आम मीठा है। – (गुणवाचक विशेषण)
- चाय बहुत गर्म है। – (गुणवा-चक विशेषण)
- लाखों लोग इस मेले में आते हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- मुझे तीन गज जमीन खरीदनी है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- ऐसा आदमी मैंने कभी नहीं देखा। – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह पानी स्वच्छ है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मेरे बगीचे में अनेक फूल हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- उसे थोड़ी-सी दाल दे दो। – (अनिश्चित परिमाणवा-चक)
- तुम्हारी पुस्तक कहाँ है? – (सार्वनामिक विशेषण)
विशेषण के 50 अतिरिक्त उदाहरण (भेदों सहित)
- यह एक भारतीय सैनिक है। – (गुणवाचक विशेषण)
- जलेबी बहुत स्वादिष्ट है। – (गुणवाचक विशेषण)
- आज तेज हवा चल रही है। – (गुणवाचक विशेषण)
- मुझे सात रंग पसंद हैं। – (निश्चित संख्यावाचक)
- तीसरा लड़का मेरा भाई है। – (निश्चित संख्यावाचक – क्रमवाचक)
- मुझे एक तोला सोना खरीदना है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- टंकी में 100 लीटर पानी आता है। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- कौन-सी कार आपकी है? – (सार्वनामिक विशेषण)
- उसकी कलम मेरे पास है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- मेरे पास थोड़ी-सी जगह है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- बाजार में अनगिनत दुकानें हैं। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- वह एक दयालु राजा था। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह पहाड़ी रास्ता दुर्गम है। – (गुणवाचक विशेषण)
- उसका चेहरा गोल है। – (गुणवाचक विशेषण)
- उसने कुछ आम खरीदे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- भोजन में बिलकुल नमक नहीं है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- किन लोगों ने तुम्हें पीटा? – (सार्वनामिक विशेषण)
- ये किताबें मेरी हैं। – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह एक पुराना किला है। – (गुणवाचक विशेषण)
- शेर एक खतरनाक जानवर है। – (गुणवाचक विशेषण)
- बारह महीने का एक साल होता है। – (निश्चित संख्यावाचक – गणनावाचक)
- चारों चोर पकड़े गए। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
- मुझे पाव-भर दही चाहिए। – (निश्चित परिमाणवाचक)
- जिस थाली में खाना, उसी में छेद करना। – (सार्वनामिक विशेषण)
- उसकी आवाज मधुर है। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह एक आधुनिक मशीन है। – (गुणवाचक विशेषण)
- परीक्षा में लगभग सभी छात्र पास हो गए। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- मैंने आज ज्यादा खाना खा लिया। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- हमारा विद्यालय बहुत बड़ा है। – (सार्वनामिक विशेषण)
- उसके पास काफी धन है। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- यह एक धार्मिक स्थल है। – (गुणवाचक विशेषण)
- हर एक खिलाड़ी को मौका मिलेगा। – (निश्चित संख्यावाचक – प्रत्येकबोधक)
- मैंने उसे पीली साड़ी में देखा। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह अत्यंत कठिन प्रश्न है। (‘अत्यंत’ प्रविशेषण) – (गुणवाचक विशेषण)
- ट्रेन तीन घंटे देर से है। – (गुणवाचक विशेषण – कालवाचक)
- पिता को पुत्र की तिगुनी संपत्ति मिली। – (निश्चित संख्यावाचक – आवृत्तिवाचक)
- उसने नीली ऑंखों वाली बिल्ली पाली है। – (गुणवाचक विशेषण)
- यह एक नया विचार है। – (गुणवाचक विशेषण)
- कुछ बच्चे शरारती होते हैं। – (गुणवाचक विशेषण)
- मैंने ढेर सारे कपड़े धोए। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- उसे भरपेट भोजन मिला। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- कोई किताब मुझे दे दो। – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह क्या वस्तु है? – (सार्वनामिक विशेषण)
- यह एक पावन नदी है। – (गुणवाचक विशेषण)
- दो दर्जन केले ले आओ। – (निश्चित संख्यावाचक – समुदायवाचक)
- मेरे खेत में कम अनाज पैदा हुआ। – (अनिश्चित परिमाणवाचक)
- वे सब बच्चे कहाँ जा रहे हैं? – (सार्वनामिक विशेषण)
- ऊपरी मंजिल पर कौन रहता है? – (गुणवाचक विशेषण)
- उसके पास चंद रुपये ही बचे थे। – (अनिश्चित संख्यावाचक)
- यह मकान बहुत विशाल है। – (‘यह’ सार्वनामिक, ‘विशाल’ गुणवाचक)