📜 छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: भाग -3

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📜  छत्तीसगढ़ के राजवंशों का अवलोकन

छत्तीसगढ़ में शासन करने वाले विभिन्न राजवंशों को दो मुख्य क्षेत्रों में विभाजित करता है:

1. दक्षिण कोसल के राजवंश 🗺️

सोम/पाण्डु वंश की शाखाएं:

2. बस्तर के राजवंश 🏹

कांकेर की शाखा:


📜  राजर्षितुल्य वंश / शूरवंश / सुरावंश

आरंग ताम्रपत्र का विश्लेषण 📝


📜पर्वतद्वारक वंश और शैल वंश

🏔️ पर्वतद्वारक वंश

☀️ शैल वंश


📜  शरभपुरीय वंश का परिचय

🏹 शरभपुरीय वंश (35.1.20)

शासकों का वंश क्रम 📜


📜  शरभपुरीय वंश के प्रमुख शासक

👑 शरभराज (460-480 ई.)

👑 नरेन्द्र (480-505 ई.)

👑 प्रसन्नमात्र (525-545 ई.)


📜  शरभपुरीय वंश के प्रमुख शासक

👑 जयराज (545-560 ई.)

👑 सुदेवराज / महासुदेवराज (560-580 ई.)


📜  शरभपुरीय वंश का विभाजन और अंतिम शासक

पारिवारिक संबंध एवं सत्ता हस्तांतरण

👑 प्रवरराज प्रथम (580-590 ई.)

👑 व्याघ्रराज/व्याधराज (590-600 ई.)


📜 शरभपुरीय वंश का अंत और क्षेत्रीय नामकरण

👑 प्रवरराज द्वितीय (600-620 ई.)

शरभकालीन वंश की विशेषताएँ 💡

📜 विभिन्न कालखंडों में क्षेत्रों के नाम


📜  नलवंश का परिचय

🏛️ नलवंश

नलवंश की जानकारी के स्रोत 📜


📜 नल वंश के प्रमुख शासक

👑 नल वंश के प्रमुख शासक

  1. शिशुक:
  2. व्याघ्रराज:
  3. वृषभराज:
  4. वराहराज:
  5. भवदत्त वर्मन:
  6. अर्थपति भट्टारक:
  7. स्कन्द वर्मन:

📜  नल वंश के प्रमुख शासक और समापन

  1. स्तम्भराज:
  2. नंदराज:
  3. पृथ्वीराज
  4. विरुपाक्ष
  5. विलासतुंग:
  6. पृथ्वीव्याघ्र:
  7. भीमसेन देव:
  8. नरेन्द्र धबल:

** वंश संबंधी विशेष नोट** 📝


📜  सोम वंश/पाण्डु वंश

🌙 सोम वंश/पाण्डु वंश: एक परिचय

** वंश की शाखाएँ**

🏞️ मैकल का सोमवंश

** मैकल सोमवंश के प्रमुख शासक** 👑

  1. जयबल: ये एक आरंभिक शासक थे, जिन्होंने कोई उपाधि धारण नहीं की।
  2. वत्सबल: ये भी एक आरंभिक शासक थे और कोई उपाधि धारण नहीं की।
  3. नागबल:
  4. भरतबल:
  5. सूरबल:

वंश की सामान्य विशेषताएँ 🏛️

छत्तीसगढ़ के इतिहास में पाण्डु वंश का महत्व 🌟

प्रमुख शासकों का परिचय 👑



ऐतिहासिक साक्ष्यों का विवरण 📝

यह तालिका दर्शाती है कि किस शासक की जानकारी किन अभिलेखों से मिलती है:

मानचित्र का विश्लेषण: बालार्जुन का युग 🗺️

इस मानचित्र से यह स्पष्ट होता है कि बालार्जुन का शासनकाल एक ऐसे दौर में था जब भारत में कई शक्तिशाली राजवंशों का उदय हो रहा था, और सत्ता के लिए संघर्ष आम बात थी।



यात्री का आगमन 🌏 ह्वेनसांग का यात्रा वृत्तांत

छत्तीसगढ़ में वास्तुकला का स्वर्णयुग 🏛️

महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल के दौरान 22 शिव मंदिर, 4 विष्णु मंदिर, 10 बौद्ध विहार, 3 जैन विहार और प्रधानमंत्री निवास जैसे अनेक निर्माण हुए, जिनके प्रमाण आज भी मिलते हैं।

दो महान मंदिरों की तुलना


छत्तीसगढ़ के स्वर्णयुग के प्रमुख स्मारक ✨


🏹 बाण वंश

प्रमुख शासक: विक्रमादित्य 👑


📜 कलिंग का सोमवंश (9वीं-11वीं सदी)

वंश का समग्र परिचय 🌏

सोमवंश की वंशावली 📜


📜 सोमवंश के प्रमुख शासक

आइए, इस वंश के प्रभावशाली शासकों और उनके योगदान को जानते हैं:

👑 शिवगुप्त

👑 महाभवगुप्त प्रथम – जनमेजय (880 से 920 ई.)

👑 महाशिवगुप्त प्रथम – ययाति (920 से 955 ई.)

👑 महाभवगुप्त द्वितीय – भीमरथ (955 से 975 ई.)


📜 पेज 21: सोमवंश के शासक (भाग-2) और पतन

👑 महाशिवगुप्त द्वितीय – धर्मरथ (975 से 995 ई.)

👑 महाभवगुप्त तृतीय – नहुष (995 से 1010 ई.)

👑 इन्द्ररथ (1010 से 1022 ई.)

👑 महाशिवगुप्त तृतीय – चंडीहर ययाति

👑 महाभवगुप्त चतुर्थ – उद्योतकेसरी (1040 से 1065 ई.)

👑 महाशिवगुप्त चतुर्थ – जनमेजय

👑 कर्णकेसरी

📉 वंश का पतन

इस शक्तिशाली वंश का अंत दो प्रमुख शक्तियों के आक्रमण से हुआ:

  1. उत्कल क्षेत्र से गंगवंशीय शासक अनंतवर्मन चोडगंग ने इन्हें पराजित किया।
  2. कोसल क्षेत्र से कल्चुरी नरेश जाजल्यदेव-प्रथम ने सोमवंश के शासन को समाप्त कर दिया।

📜  क्षेत्रीय राजवंशों की स्थापत्य कला और उपाधियाँ

🏛️ क्षेत्रीय राजवंशों द्वारा निर्मित प्रमुख स्थापत्य

यहाँ विभिन्न राजवंशों द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण मंदिरों और महलों की सूची दी गई है, जो उनकी कला और संस्कृति की अमिट छाप छोड़ते हैं:

👑 शासकों द्वारा धारण की गईं उपाधियाँ

यह तालिका विभिन्न राजवंशों के शासकों द्वारा धारण की गई प्रमुख उपाधियों को दर्शाती है, जो उनके प्रभाव और प्रतिष्ठा का प्रतीक थीं:


📜 प्राचीनकालीन शासकों की मुद्राएँ

💰 प्राचीन शासकों द्वारा जारी सिक्के

यह तालिका छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से प्राप्त प्राचीन मुद्राओं और सिक्कों का विवरण देती है, जो तत्कालीन आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं:


📜  शहरों के वर्तमान और प्राचीन नाम

🏛️ नगरों के बदलते नाम और उनके संस्थापक

यह सूची छत्तीसगढ़ के प्रमुख नगरों के वर्तमान नामों को उनके प्राचीन नामों और उन्हें बसाने वाले शासकों (या वंश) से जोड़ती है: