
# h12

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- Published: 2025-09-12T13:56:00+05:30
- Author: Rakesh Kumar

# 📜 छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: भाग -2

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 * [📜 छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: भाग -2](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%93%9C_%E0%A4%9B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8_%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97_-2)
 * [👑 कुषाण वंश (Kushan Period) –](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%91%91_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A3_%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6_Kushan_Period_%E2%80%93)
 * [👑 मेघ वंश (Megh Dynasty)](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%91%91_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%98_%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6_Megh_Dynasty)
 * [👑 मित्र वंश (Mitra Dynasty)](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%91%91_%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6_Mitra_Dynasty)
 * [👑 वाकाटक वंश (Vakatak Dynasty) –](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%91%91_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6_Vakatak_Dynasty_%E2%80%93)
 * [👑 गुप्त वंश (Gupta Period) –](https://parikshahall.com/h12/#%F0%9F%91%91_%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4_%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6_Gupta_Period_%E2%80%93)

#### 󠀁[📜 छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: भाग -1 ](https://parikshahall.com/h11/)󠁿

#### 󠀁[📜 छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास: भाग -3 ](https://parikshahall.com/h13/)󠁿

# **👑 कुषाण वंश (Kushan Period) – **

 * **⏳ शासनकाल:** ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में कुषाणों की सत्ता अल्पकालीन 
   रही होगी। इस बात की पुष्टि छत्तीसगढ़ में मिले कुषाणवंशीय शासक विक्रमादित्य व 
   कनिष्क के सिक्कों से होती है। इसका विवरण इस प्रकार है:
    1. **तेलीकोट (खरसिया), रायगढ़:** यहाँ से कुषाणकालीन **स्वर्ण सिक्के** प्राप्त हुए
       हैं।
    2.  - **खोज:** पुरातत्ववेत्ता **डॉ. सी.के. साहू/शाह** द्वारा।
    3. **झाझापुरी, पेण्डरवा (बिलासपुर):** यहाँ से कुषाणवंशीय राजाओं के **ताँबे के सिक्के**
       प्राप्त हुए हैं। [CG Vyapam (FI)2007]
    4. **कोरबा:** यहाँ से कुषाणकालीन **ताँबे के सिक्के** प्राप्त हुए हैं।
 * **💡 विशेष:** कुषाणवंशीय शासक **विम कदफिस (विम कैडफिसेज)** व **कनिष्क** के कई
   सिक्के इस क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं।

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# **👑 मेघ वंश (Megh Dynasty)**

 * **🌍 शासन का आरंभ:** सातवाहन शासकों के पतन के पश्चात् और गुप्तों के उदय से पहले,
   यह संभव है कि दक्षिण कोसल क्षेत्र में मेघ वंश ने शासन किया हो।
 * **📜 शासकों की जानकारी:** छत्तीसगढ़ में मेघवंशीय शासक **शिवमेघ** व **यमेघ** की
   जानकारी मिलती है।
 * **🕰️ अनुमानित शासन:** संभवतः मेघ वंश ने यहाँ द्वितीय शताब्दी ईस्वी तक शासन किया।
 * **🪙 सिक्कों की प्राप्ति:** मल्हार टकसाल से ढाला गया **माघश्री / मेघश्री** का
   एक सिक्का कौशाम्बी से तथा **शिवमेघ** का एक सिक्का त्रिपुरी से प्राप्त हुआ है।
 * **🔑 ज्ञात शासक:** अभी तक निम्न 6 शासकों के सिक्के प्राप्त हुए हैं:
    1. माघश्री / मेघश्री
    2. यमेघ
    3. विमेघ
    4. शिवमेघ
    5. सत्यमेघ
    6. वसंतमेध

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# **👑 मित्र वंश (Mitra Dynasty)**

 * **🗺️ शासन क्षेत्र:** मैकल एवं मल्हार।
 * **📜 उपाधि:** इन शासकों के नाम के अंत में **‘मित्र’** उपाधि जुड़ी हुई है।
 * **🤝 अधीनता:** ये सातवाहनों के अधीन सामंत के रूप में मल्हार पर शासन कर रहे थे।
 * **🤴 प्रमुख शासक:** 1. रविमित्र 2. सुमित्र 3. चन्द्रमित्र 4. भूमित्र।
 * **🪙 सिक्के:**
    - इन सभी शासकों के सिक्के प्राप्त हुए हैं।
    - इन सिक्कों के पृष्ठ भाग (पीछे) में **वेदिका वृक्ष** का अंकन एवं अग्र भाग में**
      मल्हार चिन्ह**, शासक का नाम और **हाथी** का अंकन है, जो **दक्षिण कोसलीय लिपि**
      में है।
    - **रविमित्र के सिक्के पर** मल्हार टकसाल चिन्ह का अंकन नहीं है। यह संभवतः ईसा
      पूर्व प्रथम सदी के सिक्के हैं।
    - इतिहासकारों के अनुसार, शुंग वंश का साम्राज्य कई क्षेत्रों में विभाजित हो गया
      था, किंतु इन क्षेत्रों के शासकों ने अपने नाम के अंत में ‘मित्र’ शब्द लिखना
      प्रारंभ रखा। अनुमान लगाया जाता है कि मैकल कोसल क्षेत्र में शासित मित्र वंश,
      शुंगों का ही एक भाग था।
 * **✍️ महत्वपूर्ण साक्ष्य:** **‘गामस कोसलीय’** ब्राह्मी लिपि उत्कीर्ण मुद्रा मल्हार
   क्षेत्र में प्राप्त हुई है। यह मुद्रा 2-3री शताब्दी की है, जिसमें **कोसलग्राम**
   उत्कीर्ण है। [CGPSC(ADA)2023][CGPSC (VAS) 2021]

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# **👑 वाकाटक वंश (Vakatak Dynasty) – **

 * **📜 उद्भव:** वाकाटक वंश एक राष्ट्रीय राजवंश था। दक्षिण भारत में सातवाहनों की
   शक्ति क्षीण होने के पश्चात् वाकाटक वंश का उदय हुआ। यह राजवंश ओरछा (महाराष्ट्र)
   के **‘वाकाट’** नामक स्थान से शुरू हुआ था, इसी कारण यह वाकाटक वंश के नाम से विख्यात
   हुआ।
 * **👑 प्रथम शासक:** इस वंश का प्रथम शासक **विंध्यशक्ति** था, जिसका पुत्र **प्रवरसेन
   प्रथम** था। कालांतर में प्रवरसेन प्रथम द्वारा ही दक्षिण कोसल तक साम्राज्य का 
   विस्तार किया गया। [CGPSC(Pre)2021]
 * **🤝 समकालीन प्रभाव:** दूसरी शताब्दी से पांचवीं शताब्दी तक दक्षिण कोसल तथा छत्तीसगढ़
   कभी समकालीन गुप्त तो कभी वाकाटकों के प्रभाव क्षेत्र में रहा। ईसा की तीसरी और 
   चौथी शताब्दी में वाकाटकों का प्रभाव अधिक था।
 * **🏛️ राजधानी:** आरंभिक राजधानी – **पुरिका (बरार)**; बाद में – **नंदिवर्धन (नागपुर)**।
 * **📜 वंश का उपनाम:** किलकिल वंश।
 * **👑 उपाधि:** महाराज (गुप्त-महाराजाधिराज)।
 * **🤝 समकालीन वंश:** गुप्त वंश तथा नल वंश।
 * **📖 जानकारी का स्रोत:** प्रभावती गुप्त का पूना अभिलेख।

#### **🌳 वाकाटक वंश की शाखाएँ**

 * **विंध्यशक्ति (प्रथम शासक)**
    - **↓**
    - **प्रवर सेन प्रथम (छ.ग. में संस्थापक)**
       * **↓ (दो शाखाओं में विभाजन) ↓**

| **नंदीवर्धन शाखा (नागपुर)** | **वत्सगुलाम शाखा (बरार)** | 
| ↓ | ↓ | 
| **रुद्र सेन प्रथम (महेन्द्रसेन) (335-336 ई.)** | **सर्व सेन (शासक) (330-350 ई.)** | 
| ↓ | ↓ | 
| **पृथ्वी सेन प्रथम (360-385 ई.)** | **विंध्य सेन द्वितीय (350-400 ई.)** (विंध्य शक्ति द्वितीय के नाम से शासन किया) | 
| ↓ | ↓ | 
| **रुद्र सेन द्वितीय (विवाह प्रभावती से) (385-410 ई.)** | **प्रवर सेन द्वितीय (400-415 ई.)** | 
| ↓ | ↓ | 
| **दिवाकर सेन → दामोदर सेन (410-440 ई.) (प्रवरसेन द्वितीय)** | **देव सेन (445-475 ई.)** | 
| ↓ | ↓ | 
| **नरेन्द्र सेन (440-460 ई.)** | **हरि सेन (475-515 ई.)** | 
| ↓ |  | 
| **पृथ्वी सेन द्वितीय (460-475 ई.)** |  |

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#### **🤴 छत्तीसगढ़ में शासन करने वाले प्रमुख वाकाटक शासक – **

## 1️⃣ प्रवरसेन प्रथम (Pravarasena-I)

 * छत्तीसगढ़ में वाकाटक वंश का **संस्थापक**। [CGPSC(Pre)2021]
 * यह **विंध्यशक्ति का पुत्र** था। [CGPSC(Pre)2021]
 * **नोट:** विंध्यशक्ति वाकाटक वंश का मूल संस्थापक था, परंतु छत्तीसगढ़ में वंश का
   संस्थापक प्रवरसेन-I माना जाता है।
 * इसका पुत्र **गौतमीपुत्र** था, जिसकी अकाल मृत्यु के बाद पौत्र **रुद्रसेन प्रथम(
   संभवतः महेन्द्रसेन)** शासक बना।
 * इसके बाद वाकाटक वंश दो शाखाओं में बंट गया।

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## 2️⃣ महेन्द्रसेन (रुद्रसेन-I)

 * प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार, **समुद्रगुप्त ने दक्षिण विजय अभियान** में दक्षिण कोसल
   के राजा महेन्द्रसेन को हराया। [CGPSC(Mains)2008; ARTO 2017; AMO 2017; EAP 2016;
   Pre 2017]
 * कुछ इतिहासकार मानते हैं कि रुद्रसेन-I ही प्रयाग प्रशस्ति का महेन्द्रसेन था। [
   CGVyapam (MBS)2013]

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## 3️⃣ रुद्रसेन-II

 * विवाह: गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री **प्रभावती** से।
 * पुत्र:
    1. **दिवाकरसेन**
    2. **दामोदरसेन (प्रवरसेन-II)**
 * विशेष: प्रभावती ने अपने पुत्रों की संरक्षिका के रूप में शासन किया।

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## 4️⃣ प्रवरसेन-II (Damodarasena)

 * मूल नाम: **दामोदरसेन**
 * रचना: **‘सेतु बंध’** (साहित्य में रुचि रखने वाला शासक)
 * धर्म: **शैव धर्म**
 * सिक्का: **स्वर्ण सिक्का – बानाबरद (दुर्ग)**
 * ताम्रपत्र: **बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल (म.प्र.)**
 * दरबारी: महाकवि **कालिदास** इनके दरबार में आये थे।
 * कालिदास ने **रामगढ़ (सरगुजा)** में _मेघदूतम्_ की रचना की और इस पर्वत को **“स्वर्ग
   का द्वार”** कहा।
 * अमरकंटक को कालिदास ने **आम्रकूट** कहा। [CGPSC(AP)2016, TSI 2024]
 * _मेघदूतम्_ का छत्तीसगढ़ी अनुवाद – **मुकुटधर पाण्डेय** ने किया। [CGPSC(AP)2016]
 * नलवंशी प्रभाव के कारण राजधानी अस्थायी रूप से **प्रवरपुर (पवनार, वर्धा)** स्थानांतरित
   की।

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## 5️⃣ नरेन्द्रसेन

 * क्षेत्र: पृथ्वीसेन-II के **बालाघाट लेख** के अनुसार कोसल, मालवा एवं मैकल पर अधिकार।
 * युद्ध:
    1. नलवंशी शासक **वराहराज** को पराजित किया।
    2. ऋद्धिपुर शिलालेख: नलवंशी शासक **भवदत्तवर्मन** ने आक्रमण कर नरेन्द्रसेन को पराजित
       किया और **नंदिवर्धन राजधानी** को तहस-नहस कर दिया।

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## 6️⃣ पृथ्वीसेन-II

 * **केसरीबेड़ा शिलालेख**: इन्होंने अपने पिता की हार का बदला लेने हेतु नलवंशी शासक
   भवदत्तवर्मन के पुत्र **अर्थपति भट्टारक** पर आक्रमण कर उसकी राजधानी **पुष्करी (
   भोपालपट्टनम)** को नष्ट कर दिया।
 * यह **नंदीवर्धन शाखा का अंतिम ज्ञात शासक** था।
 * इसके बाद **हरिसेन** ने छत्तीसगढ़ में शासन किया।

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## 7️⃣ देवसेन

 * यह **वत्सगुलाम शाखा** का शासक था, जिसने अल्प समय तक छत्तीसगढ़ में शासन किया।
 * इसके क्षेत्र पर **स्कन्दवर्मन** ने आक्रमण कर इसे पराजित किया।

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# **👑 गुप्त वंश (Gupta Period) – **

 * **स्थापना:** चौथी शताब्दी ई. में गुप्त वंश की स्थापना हुई थी।
 * **नामकरण:**
    1. **‘दक्षिणापथ / दक्षिण कोसल’** (मध्य छत्तीसगढ़)
    2. **‘महाकान्तार’** (दण्डकारण्य) [CGPSC(ARTO)2017]
 * **जानकारी:** हरिषेण कृत **“प्रयाग प्रशस्ति”** से।
 * **उपाधि:** महाराजाधिराज।

#### **गुप्तकालीन शासक**

 * **समुद्रगुप्त:**
    - हरिषेणकृत प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार, गुप्तवंशीय राजा समुद्रगुप्त ने दक्षिण
      विजय अभियान के लिए कोसल, महाकांतार, कलिंग के मार्ग को अपनाते हुए दक्षिण कोसल
      के वाकाटक राजा **महेन्द्रसेन** को तथा महाकान्तार के नलवंशीय राजा **व्याघ्रराज**
      को हराया था। [CG PSC(VAS)2021][CGPSC(AMO)2017,(Pre)2017, (CMO)2010, (Mains)
      2008] [CG Vyapam (FI)2017, (Mahila Supervisor)2013, (FDFG)2024]
    - समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोसल एवं महाकान्तार को विजय के बाद इन क्षेत्रों को अपनी**
      ग्रहण-मोक्ष-अनुग्रह नीति** के तहत अपने साम्राज्य में सम्मिलित नहीं किया, अपितु
      आधिपत्य स्वीकार कराने के बाद पुनः छोड़ दिया।
    - महासमुन्द के **कोपरा** नामक ग्राम में समुद्रगुप्त की पत्नी **रूपादेवी** के
      साक्ष्य मिले हैं। [CG PSC(Asst. G-3)2018]
 * **रामगुप्त:**
    - इनका सिक्का सन् 1972 में दुर्ग के **बानाबरद** से प्राप्त हुआ।
    - इन स्वर्ण सिक्कों में से एक सिक्का **कांचगुप्त** का, एक स्वर्ण सिक्का **कुमारगुप्त**
      का एवं 7 स्वर्ण सिक्के **स्कंदगुप्त** के हैं। (स्त्रोत – संस्कृति एवं पुरातत्व
      विभाग छत्तीसगढ़ के बानाबरद सूचना पटल में) [CGVyapam (VIAD)2021]
    - इन सिक्कों को महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर में सुरक्षित रखा गया है।
    - **नोट:** आयोग द्वारा पूछे गए प्रश्न में बानाबरद से प्राप्त सिक्कों को **कच्छ,
      चन्द्रगुप्त एवं समुद्रगुप्त** से संबंधित माना गया है। [CGPSC(Reg.)2021]
 * **चन्द्रगुप्त द्वितीय:**
    - इनकी पुत्री **प्रभावती** का विवाह वाकाटकवंशीय राजा **रुद्रसेन द्वितीय** के
      साथ हुआ था।
    - रुद्रसेन की मृत्यु के पश्चात प्रभावती ने संरक्षिका के रूप में सत्ता की बागडोर
      सम्भाली, जिसमें गुप्त साम्राज्य के राज-कर्मचारियों की सहायता ली जाती थी।
    - खरसिया (रायगढ़) के समीप एक गांव से चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के **धनुर्धारी
      प्रकार के स्वर्ण सिक्के** प्राप्त हुए हैं।
    - इसके नवरत्नों में सम्मिलित **कालिदास** ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान मेघदूतम्
      ग्रंथ की रचना की, जिसमें वर्णित **रामगिरि** छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में है।[
      CGPSC(AP)2016]

 * **कुमारगुप्त:**
    - आरंग में कुमार गुप्त के **रत्नजड़ित मयूर सिक्के** प्राप्त हुए हैं।
    - रायपुर जिले के **पिटाईवल्द** ग्राम में **40 सिक्के** प्राप्त हुए हैं, इन सिक्कों
      में गुप्तवंशीय राजाओं **महेन्द्रादित्य** व **क्रमादित्य** का नाम उल्लेखित 
      है। ये नाम कुमार गुप्त व स्कंदगुप्त के थे।
    - खैरताल (रायपुर) से कुमार गुप्त के **215 उत्पीडितांक (उभार) मुद्राएं** प्राप्त
      हुई हैं, जिस पर **‘महेन्द्रादित्यस्य’** उत्कीर्ण है।
    - कुलिया से प्राप्त महेंद्रादित्य का सिक्का **गुप्त ब्राह्मी** में लिखा है।
 * **भानुगुप्त:**
    - भानुगुप्त के **एरण अभिलेख (510 ई.)** में शरभवंशीय राजा **शरभराज** का वर्णन
      है।
 * **विशेष:**
    - गुप्त युग के प्रारंभ में दक्षिण कोसल उत्तर एवं दक्षिण दो भागों में बँटा हुआ
      था। उत्तरी भाग में बिलासपुर, रायपुर एवं संबलपुर क्षेत्र शामिल थे जहाँ राजा**
      महेन्द्र** का शासन था, जबकि दक्षिण (महाकान्तार) में **व्याघ्रराज** का शासन
      था।

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#### **🪙 गुप्तकालीन सिक्के (तालिका)**

| जिला | स्थान | शासक / सिक्का | 
| **दुर्ग** | बानाबरद (1972 में) | 1. **कुमार गुप्त:** 1 स्वर्ण सिक्का 
 2. **स्कंद गुप्त:** 7 स्वर्ण सिक्के 3. **काँच गुप्त:** 1 स्वर्ण सिक्का [CGVyapam(VIAD)2021] | 
| **रायपुर** | आरंग | कुमारगुप्त के **रत्नजड़ित मयूर सिक्का** | 
|  | पिटईवल्द | कुमारगुप्त के 40 सिक्के प्राप्त हुए। इन सिक्कों में गुप्तवंशीय राजाओं का नाम **महेन्द्रादित्य (कुमार गुप्त)** एवं **विक्रमादित्य (स्कंदगुप्त)** उल्लेखित है। | 
|  | खैरताल | कुमारगुप्त के 215 उत्पीड़ितांक सिक्के। | 
| **बालोद** | कुलिया | कुमारगुप्त के सिक्के। | 
| **रायगढ़** | खरसिया | विक्रमादित्य का धनुर्धारी सिक्के। | 
| **गरियाबंद** | पितेबन्दगाँव (राजिम) | 46 कुमारगुप्त + 3 चन्द्रगुप्त द्वितीय के सिक्के। | 
| **बलौदाबाजार** | खेरनाल ग्राम | 54 सिक्के (महेन्द्रादित्य + कुमारगुप्त)। |

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#### **🏛️ गुप्तकालीन स्थापत्य**

 1. **तालागांव का देवरानी-जेठानी मंदिर** (छत्तीसगढ़ का प्राचीनतम मंदिर)।
 2. **पुजारीपाली (बरमकेला) का केंवटीन मंदिर**।
