कार्बनिक रसायन
कार्बनिक यौगिकों का परिचय (Introduction to Organic Compounds)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: जैव-शक्ति सिद्धांत (Vital Force Theory)
प्रारंभ में, 19वीं शताब्दी की शुरुआत में, रसायनज्ञों का मानना था कि कार्बनिक यौगिक केवल जीवित प्राणियों (Living Organisms) के शरीर में एक “जैव-शक्ति” या “Vital Force” के प्रभाव से ही बन सकते हैं। उनका मानना था कि इन यौगिकों को प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता। इस सिद्धांत को बर्जीलियस (Berzelius) ने प्रतिपादित किया था।
जैव-शक्ति सिद्धांत का खंडन:
- 1828 में, जर्मन रसायनज्ञ फ्रेडरिक वोहलर (Friedrich Wöhler) ने अनजाने में इस सिद्धांत को ध्वस्त कर दिया।
- उन्होंने प्रयोगशाला में एक अकार्बनिक यौगिक, अमोनियम सायनेट (NH₄CNO), को गर्म किया और उससे एक कार्बनिक यौगिक, यूरिया ((NH₂)₂CO), का निर्माण कर दिया।
- यह पहली बार था जब किसी कार्बनिक यौगिक को प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाया गया था। इस खोज ने आधुनिक कार्बनिक रसायन विज्ञान के लिए द्वार खोल दिए।
(वोहलर का यह प्रयोग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है)
कार्बनिक यौगिकों की आधुनिक परिभाषा (Modern Definition)
आधुनिक परिभाषा के अनुसार:
कार्बनिक रसायन, रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons) और उनके व्युत्पन्नों (Derivatives) का अध्ययन करती है।
- हाइड्रोकार्बन: केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक (जैसे मीथेन – CH₄)।
- व्युत्पन्न: जब हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन को ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर या हैलोजन जैसे अन्य तत्वों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, तो बनने वाले यौगिक (जैसे मेथेनॉल – CH₃OH)।
- अपवाद: कार्बन के कुछ यौगिक जैसे ऑक्साइड (CO, CO₂), कार्बोनेट (Na₂CO₃), और सायनाइड (KCN) को उनके गुणों के कारण अकार्बनिक रसायन में ही पढ़ा जाता है।
कार्बन की अद्वितीय प्रकृति (The Unique Nature of Carbon)
पृथ्वी पर लाखों की संख्या में कार्बनिक यौगिक मौजूद हैं। कार्बन की इस विशाल विविधता के पीछे इसके दो अद्वितीय गुण जिम्मेदार हैं:
1. कार्बन की चतुष्-संयोजकता (Tetravalency of Carbon)
- परिभाषा: कार्बन की परमाणु संख्या 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है।
- इसके सबसे बाहरी कोश (Valence Shell) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- अपना अष्टक पूरा करने और स्थायित्व प्राप्त करने के लिए, कार्बन न तो 4 इलेक्ट्रॉन खोता है (जिसके लिए बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए) और न ही 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (जिससे नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना मुश्किल हो जाता है)।
- इसके बजाय, कार्बन अपने इन 4 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके चार सहसंयोजी बंध (Covalent Bonds) बनाता है।
- कार्बन की इस चार बंध बनाने की क्षमता को ही उसकी “चतुष्-संयोजकता” कहते हैं। यह कार्बन को चार अन्य परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि) से जुड़ने की अनुमति देता है।
2. श्रृंखलन (Catenation)
- परिभाषा: यह कार्बन परमाणु का स्वयं (self-linking) के ही अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजी बंध बनाकर एक लंबी श्रृंखला (Long Chains), शाखित श्रृंखला (Branched Chains), और वलय (Rings) बनाने का अद्वितीय गुण है।
- महत्व: आवर्त सारणी में किसी भी अन्य तत्व में श्रृंखलन का गुण कार्बन जितना प्रबल नहीं होता है। सिलिकॉन कुछ हद तक यह गुण दर्शाता है, लेकिन उसकी श्रृंखलाएं बहुत छोटी और अस्थिर होती हैं।
- कार्बन के बंधों की मजबूती: कार्बन-कार्बन बंध बहुत मजबूत और स्थायी होते हैं, जिससे ये लंबी श्रृंखलाएं स्थिर रहती हैं।
- श्रृंखलन की यह क्षमता ही कार्बनिक यौगिकों की विशाल संख्या के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
- लंबी श्रृंखला (Straight Chain): प्रोपेन
- शाखित श्रृंखला (Branched Chain): आइसो-ब्यूटेन
- वलय/चक्रीय (Ring/Cyclic): साइक्लोहेक्सेन, बेंजीन
3. बहु-बंध बनाने की क्षमता (Tendency to form Multiple Bonds):
कार्बन न केवल एकल बंध (Single bonds), बल्कि आवश्यकता पड़ने पर द्वि-बंध (Double bonds) और त्रि-बंध (Triple bonds) भी बना सकता है। यह गुण भी कार्बनिक यौगिकों की विविधता को बढ़ाता है।
- एकल बंध: एल्केन (जैसे इथेन)
- द्वि-बंध: एल्कीन (जैसे एथीन)
- त्रि-बंध: एल्काइन (जैसे एथाइन)
निष्कर्ष
कार्बन की ये तीन विशेषताएं – चतुष्-संयोजकता, प्रबल श्रृंखलन गुण, और बहु-बंध बनाने की क्षमता – मिलकर उसे एक असाधारण तत्व बनाती हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के आधार (Basis of Life) और लाखों विभिन्न प्रकार के कार्बनिक यौगिकों के निर्माण के लिए जिम्मेदार है। यह परिचय हमें यह समझने में मदद करता है कि हम कार्बनिक रसायन का अध्ययन एक अलग शाखा के रूप में क्यों करते हैं।
हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
परिभाषा: वे कार्बनिक यौगिक जो केवल कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
- मुख्य स्रोत: इनका सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत कच्चा तेल (Petroleum) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) है। LPG, CNG, पेट्रोल, डीजल – ये सभी हाइड्रोकार्बन के मिश्रण हैं।
- वर्गीकरण: कार्बन परमाणुओं के बीच उपस्थित बंधों (Bonds) के आधार पर, हाइड्रोकार्बन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons)
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons)
- परिभाषा: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल सहसंयोजी बंध (Single Covalent Bonds) होते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
- “संतृप्त” का अर्थ: इसका अर्थ है कि कार्बन श्रृंखला में हाइड्रोजन परमाणुओं की अधिकतम संभव संख्या जुड़ी हुई है और इसमें और हाइड्रोजन नहीं जोड़े जा सकते (बिना कार्बन-कार्बन बंध तोड़े)।
- रासायनिक प्रकृति: ये रासायनिक रूप से कम अभिक्रियाशील (Less Reactive) होते हैं क्योंकि एकल बंध बहुत स्थायी होते हैं।
- इस श्रेणी का नाम: इस श्रेणी के यौगिकों को एल्केन (Alkanes) कहा जाता है। इन्हें पैराफिन (Paraffins) भी कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘कम बंधुता’ या ‘कम अभिक्रियाशील’।
एल्केन (Alkanes)
- विशेषता: सभी कार्बन परमाणुओं के बीच एकल बंध (C-C)।
- सामान्य सूत्र (General Formula): CₙH₂ₙ₊₂
(जहाँ ‘n’ कार्बन परमाणुओं की संख्या है; n ≥ 1) (यह सूत्र परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है) - नामकरण: इनके नाम के अंत में “-एन” (-ane) प्रत्यय (suffix) लगता है।
एल्केन श्रेणी के उदाहरण:
| कार्बन परमाणु (n) | आणविक सूत्र | नाम (Name) | उपयोग/विशेषता |
| 1 | CH₄ | मीथेन (Methane) | प्राकृतिक गैस और CNG का मुख्य घटक, “मार्श गैस” भी कहलाता है। |
| 2 | C₂H₆ | इथेन (Ethane) | प्राकृतिक गैस का दूसरा प्रमुख घटक। |
| 3 | C₃H₈ | प्रोपेन (Propane) | LPG (रसोई गैस) का मुख्य घटक। |
| 4 | C₄H₁₀ | ब्यूटेन (Butane) | LPG (रसोई गैस) और सिगरेट लाइटर का मुख्य घटक। |
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)
- परिभाषा: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-बंध (Double Bond) या एक त्रि-बंध (Triple Bond) उपस्थित होता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
- “असंतृप्त” का अर्थ: इसका अर्थ है कि इनमें हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिकतम संभव संख्या से कम होती है। द्वि-बंध या त्रि-बंध को तोड़कर इनमें और हाइड्रोजन परमाणु जोड़े जा सकते हैं (इस प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण कहते हैं)।
- रासायनिक प्रकृति: द्वि-बंध और त्रि-बंध की उपस्थिति के कारण ये संतृप्त हाइड्रोकार्बन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (More Reactive) होते हैं।
- इस श्रेणी के प्रकार: इन्हें दो मुख्य भागों में बांटा गया है: एल्कीन और एल्काइन।
(a) एल्कीन (Alkenes)
- विशेषता: कार्बन श्रृंखला में कम से कम एक कार्बन-कार्बन द्वि-बंध (C=C) उपस्थित होता है।
- अन्य नाम: इन्हें ओलिफिन (Olefins) भी कहते हैं।
- सामान्य सूत्र (General Formula): CₙH₂ₙ
(जहाँ n ≥ 2, क्योंकि द्वि-बंध के लिए कम से कम दो कार्बन परमाणु चाहिए) - नामकरण: इनके नाम के अंत में “-ईन” (-ene) प्रत्यय लगता है।
एल्कीन श्रेणी के उदाहरण:
| कार्बन परमाणु (n) | आणविक सूत्र | नाम (Name) | उपयोग/विशेषता |
| 2 | C₂H₄ | एथीन (Ethene) / एथिलीन | फलों को कृत्रिम रूप से पकाने में; पॉलीथीन प्लास्टिक बनाने में। |
| 3 | C₃H₆ | प्रोपीन (Propene) | पॉलीप्रोपीलीन प्लास्टिक बनाने में। |
(b) एल्काइन (Alkynes)
- विशेषता: कार्बन श्रृंखला में कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (C≡C) उपस्थित होता है।
- सामान्य सूत्र (General Formula): CₙH₂ₙ₋₂
(जहाँ n ≥ 2) - नामकरण: इनके नाम के अंत में “-आइन” (-yne) प्रत्यय लगता है।
एल्काइन श्रेणी के उदाहरण:
| कार्बन परमाणु (n) | आणविक सूत्र | नाम (Name) | उपयोग/विशेषता |
| 2 | C₂H₂ | एथाइन (Ethyne) / एसिटिलीन | वेल्डिंग के लिए ऑक्सी-एसिटिलीन टॉर्च में; फलों को पकाने में भी। |
| 3 | C₃H₄ | प्रोपाइन (Propyne) | – |
सारांश सारणी: संतृप्त बनाम असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
| विशेषता | संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) | असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन, एल्काइन) |
| कार्बन-कार्बन बंध | केवल एकल बंध (Single bond) | द्वि-बंध (Double bond) या त्रि-बंध (Triple bond) |
| सामान्य सूत्र | CₙH₂ₙ₊₂ | एल्कीन: CₙH₂ₙ, एल्काइन: CₙH₂ₙ₋₂ |
| अभिक्रियाशीलता | कम अभिक्रियाशील | अधिक अभिक्रियाशील |
| हाइड्रोजन की मात्रा | अधिकतम | अधिकतम से कम |
| उदाहरण | मीथेन (CH₄), इथेन (C₂H₆) | एथीन (C₂H₄), एसिटिलीन (C₂H₂) |
समजातीय श्रेणी (Homologous Series)
परिभाषा
कार्बनिक यौगिकों की एक ऐसी श्रृंखला (Series), जिसमें:
- सभी सदस्यों में एक ही प्रकार का क्रियात्मक समूह (Same Functional Group) होता है, और
- जिसके किसी भी दो क्रमागत (Consecutive) सदस्यों के बीच -CH₂- समूह का निश्चित अंतर होता है,
समजातीय श्रेणी कहलाती है।
- इस श्रेणी के सभी सदस्यों को “समजात” (Homologues) कहा जाता है।
- उदाहरण के लिए, एल्केन (Alkanes) एक समजातीय श्रेणी है। मीथेन (CH₄) के बाद इथेन (C₂H₆) आता है, और इन दोनों के बीच का अंतर एक C और दो H परमाणुओं, यानी -CH₂- समूह का है।
समजातीय श्रेणी की विशेषताएं (Characteristics of a Homologous Series)
1. सामान्य सूत्र (General Formula):
- एक समजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों को एक एकल सामान्य सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है।
- उदाहरण:
- एल्केन श्रेणी का सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ है।
- अल्कोहल श्रेणी का सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₁OH है।
2. क्रमागत सदस्यों में अंतर:
- श्रेणी के किन्हीं भी दो लगातार सदस्यों के आणविक सूत्र में -CH₂- समूह का अंतर होता है।
- इसी कारण, उनके आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass) में 14 amu का अंतर होता है।
- गणना: C का द्रव्यमान = 12, H का द्रव्यमान = 1, तो CH₂ का द्रव्यमान = 12 + (2×1) = 14 amu।
3. समान क्रियात्मक समूह (Same Functional Group):
- श्रेणी के सभी सदस्यों में एक ही प्रकार का क्रियात्मक समूह होता है।
- उदाहरण: अल्कोहल श्रेणी के सभी सदस्यों (मेथेनॉल, इथेनॉल, प्रोपेनॉल) में -OH क्रियात्मक समूह होता है।
4. समान रासायनिक गुणधर्म (Similar Chemical Properties):
- चूंकि रासायनिक गुण मुख्य रूप से क्रियात्मक समूह द्वारा निर्धारित होते हैं, इसलिए एक समजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
- उदाहरण: सभी अल्कोहल सोडियम के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देते हैं।
5. भौतिक गुणधर्मों में क्रमिक परिवर्तन (Gradual Change in Physical Properties):
- जैसे-जैसे श्रेणी में नीचे जाते हैं (आणविक द्रव्यमान बढ़ता है), भौतिक गुणों (जैसे गलनांक, क्वथनांक, घनत्व) में एक क्रमिक परिवर्तन (Gradation) देखने को मिलता है।
- नियम: आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ-साथ अणुओं के बीच वांडर वाल्स आकर्षण बल बढ़ता है।
- गलनांक और क्वथनांक (Melting & Boiling Points): आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ-साथ बढ़ते हैं। यही कारण है कि एल्केन श्रेणी के शुरुआती सदस्य (मीथेन, इथेन) गैस हैं, जबकि मध्य के सदस्य (पेंटेन) द्रव हैं, और उच्च सदस्य (ऑक्टाडेकेन) ठोस (मोम जैसे) होते हैं।
- घनत्व (Density): आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ बढ़ता है।
- विलेयता (Solubility): जल में विलेयता आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ आमतौर पर घटती है।
6. समान निर्माण विधियाँ (Similar Methods of Preparation):
- एक श्रेणी के सभी सदस्यों को आमतौर पर एक जैसी सामान्य निर्माण विधियों द्वारा तैयार किया जा सकता है।
प्रमुख समजातीय श्रेणियों के उदाहरण
| श्रेणी का नाम | सामान्य सूत्र (Cₙ…) | क्रियात्मक समूह | प्रथम सदस्य (n=1) | द्वितीय सदस्य (n=2) |
| एल्केन (Alkane) | CₙH₂ₙ₊₂ | कोई नहीं (C-C) | मीथेन (CH₄) | इथेन (C₂H₆) |
| एल्कीन (Alkene) | CₙH₂ₙ (n≥2) | C=C | एथीन (C₂H₄) | प्रोपीन (C₃H₆) |
| एल्काइन (Alkyne) | CₙH₂ₙ₋₂ (n≥2) | C≡C | एथाइन (C₂H₂) | प्रोपाइन (C₃H₄) |
| अल्कोहल (Alcohol) | CₙH₂ₙ₊₁OH | -OH | मेथेनॉल (CH₃OH) | इथेनॉल (C₂H₅OH) |
| एल्डिहाइड (Aldehyde) | CₙH₂ₙ₊₁CHO | -CHO | मेथेनल (HCHO) | इथेनल (CH₃CHO) |
| कार्बोक्सिलिक एसिड | CₙH₂ₙ₊₁COOH | -COOH | मेथेनोइक एसिड (HCOOH) | **इथेनोइक एसिड (CH₃COOH) |
निष्कर्ष
समजातीय श्रेणी की अवधारणा कार्बनिक रसायन विज्ञान के विशाल अध्ययन को सरल और व्यवस्थित बनाती है। यह हमें कुछ सदस्यों के गुणों का अध्ययन करके पूरी श्रेणी के गुणों के बारे में भविष्यवाणी करने में सक्षम बनाती है, जिससे लाखों यौगिकों का अध्ययन संभव हो पाता है।
क्रियात्मक समूह (Functional Group)
परिभाषा
किसी कार्बनिक यौगिक के अणु में उपस्थित वह विशिष्ट परमाणु या परमाणुओं का समूह, जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों (Chemical Properties) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है।
- सरल शब्दों में: यह अणु का वह “सक्रिय” हिस्सा है जो रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है।
- एक ही समजातीय श्रेणी (Homologous Series) के सभी सदस्यों में एक ही प्रकार का क्रियात्मक समूह होता है, यही कारण है कि उनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
- उदाहरण: CH₃OH (मेथेनॉल) और C₂H₅OH (इथेनॉल) दोनों अल्कोहल हैं और दोनों के रासायनिक गुण लगभग समान हैं, क्योंकि दोनों में -OH क्रियात्मक समूह है।
प्रमुख क्रियात्मक समूहों की पहचान
यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण चार क्रियात्मक समूहों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. अल्कोहल (Alcohol)
- पहचान / सूत्र: अणु में हाइड्रॉक्सिल समूह ( का उपस्थित होना।
- जब किसी एल्केन से एक हाइड्रोजन परमाणु को -OH समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, तो अल्कोहल बनता है।
- सामान्य सूत्र: R-OH (जहाँ R एक एल्किल समूह, जैसे CH₃ या C₂H₅, है)।
- नामकरण: नाम के अंत में “-ऑल” (-ol) प्रत्यय (suffix) लगता है।
- उदाहरण:
- मेथेनॉल (Methanol): CH₃OH
- (मीथेन से बना)
- सामान्य नाम: मेथिल अल्कोहल, काष्ठ स्प्रिट (Wood Spirit)।
- इथेनॉल (Ethanol): C₂H₅OH
- (इथेन से बना)
- सामान्य नाम: एथिल अल्कोहल, शराब (Alcohol) का मुख्य घटक।
- प्रोपेनॉल (Propanol): C₃H₇OH
- मेथेनॉल (Methanol): CH₃OH
2. एल्डिहाइड (Aldehyde)
- पहचान / सूत्र: अणु में एल्डिहाइड समूह ( का उपस्थित होना।
- संरचना: इसमें कार्बन परमाणु ऑक्सीजन के साथ द्वि-बंध (Double Bond) और हाइड्रोजन के साथ एकल बंध (Single Bond) से जुड़ा होता है। (-C(=O)-H)
- सामान्य सूत्र: R-CHO
- विशेषता: यह समूह हमेशा कार्बन श्रृंखला के अंत (End) में होता है।
- नामकरण: नाम के अंत में “-अल” (-al) प्रत्यय लगता है।
- उदाहरण:
- मेथेनल (Methanal): HCHO
- (केवल 1 कार्बन परमाणु)
- सामान्य नाम: फॉर्मेल्डिहाइड (Formaldehyde)। इसका 40% जलीय विलयन “फॉर्मेलिन” (Formalin) कहलाता है, जिसका उपयोग जैविक नमूनों को संरक्षित करने में होता है।
- इथेनल (Ethanal): CH₃CHO
- सामान्य नाम: एसिटेल्डिहाइड (Acetaldehyde)।
- मेथेनल (Methanal): HCHO
3. कीटोन (Ketone)
- पहचान / सूत्र: अणु में कीटो या कार्बोनिल समूह ( का उपस्थित होना।
- संरचना: इसमें कार्बन परमाणु ऑक्सीजन के साथ द्वि-बंध से जुड़ा होता है।
- सामान्य सूत्र: R-CO-R’ (जहाँ R और R’ एल्किल समूह हैं)।
- विशेषता: यह समूह हमेशा कार्बन श्रृंखला के बीच (Middle) में होता है, अंत में नहीं।
- नामकरण: नाम के अंत में “-ओन” (-one) प्रत्यय लगता है।
- उदाहरण:
- प्रोपेनोन (Propanone): CH₃COCH₃
- (यह कीटोन श्रेणी का पहला सदस्य है, क्योंकि >C=O समूह के दोनों ओर कम से- कम एक कार्बन होना आवश्यक है)।
- सामान्य नाम: एसीटोन (Acetone)। इसका उपयोग नेल पेंट रिमूवर में एक विलायक के रूप में होता है।
- ब्यूटेनोन (Butanone): CH₃COCH₂CH₃
- प्रोपेनोन (Propanone): CH₃COCH₃
4. कार्बोक्सिलिक एसिड (Carboxylic Acid)
- पहचान / सूत्र: अणु में कार्बोक्सिल समूह ( का उपस्थित होना।
- संरचना: यह कार्बोनिल (>C=O) और हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह का संयोजन है।
- सामान्य सूत्र: R-COOH
- नामकरण: नाम के अंत में “-ओइक एसिड” (-oic acid) प्रत्यय लगता है।
- उदाहरण:
- मेथेनोइक एसिड (Methanoic Acid): HCOOH
- सामान्य नाम: फॉर्मिक एसिड (Formic Acid)। यह चींटियों के डंक (Ant sting), बिच्छू के डंक और बिछुआ (Nettle) के पौधे में पाया जाता है, जिसके कारण जलन होती है।
- इथेनोइक एसिड (Ethanoic Acid): CH₃COOH
- सामान्य नाम: एसिटिक एसिड (Acetic Acid)। इसका 5-8% जलीय विलयन सिरका (Vinegar) कहलाता है।
- मेथेनोइक एसिड (Methanoic Acid): HCOOH
सारांश सारणी: एक नज़र में (बहुत महत्वपूर्ण)
| क्रियात्मक समूह का नाम | संरचना (सूत्र) | सामान्य सूत्र | नाम का अंत (Suffix) | प्रसिद्ध उदाहरण |
| अल्कोहल | – OH | R-OH | -ऑल (-ol) | इथेनॉल (C₂H₅OH) – शराब |
| एल्डिहाइड | – CHO | R-CHO | -अल (-al) | फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) – फॉर्मेलिन |
| कीटोन | > C=O | R-CO-R’ | -ओन (-one) | एसीटोन (CH₃COCH₃) – नेल पेंट रिमूवर |
| कार्बोक्सिलिक एसिड | – COOH | R-COOH | -ओइक एसिड (-oic acid) | एसिटिक एसिड (CH₃COOH) – सिरका |
इस सारणी को याद रखने से आपको क्रियात्मक समूहों की पहचान करने और संबंधित यौगिकों के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने में बहुत मदद मिलेगी।
कार्बनिक यौगिकों का नामकरण: IUPAC प्रणाली
नामकरण की कई प्रणालियाँ हैं, लेकिन सबसे स्वीकृत और सार्वभौमिक प्रणाली IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) प्रणाली है।
एक IUPAC नाम के मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं:
[पूर्वुलग्न (Prefix)] + [शब्द मूल (Word Root)] + [अनुलग्न (Suffix)]
चरण 1: शब्द मूल (Word Root) – मुख्य श्रृंखला की पहचान
- परिभाषा: शब्द मूल अणु में सबसे लंबी निरंतर कार्बन श्रृंखला (Longest Continuous Carbon Chain) में कार्बन परमाणुओं की संख्या को इंगित करता है। यह किसी भी नाम का आधार होता है।
मुख्य शब्द मूल (याद रखना आवश्यक है):
| कार्बन परमाणुओं की संख्या (n) | शब्द मूल (Word Root) |
| 1 | मेथ- (Meth-) |
| 2 | एथ- (Eth-) |
| 3 | प्रोप- (Prop-) |
| 4 | ब्यूट- (But-) |
| 5 | पेंट- (Pent-) |
| 6 | हेक्स- (Hex-) |
| 7 | हेप्ट- (Hept-) |
| 8 | ऑक्ट- (Oct-) |
चरण 2: अनुलग्न (Suffix) – बंधों और क्रियात्मक समूहों की पहचान
अनुलग्न को दो भागों में बांटा गया है: प्राथमिक और द्वितीयक।
(a) प्राथमिक अनुलग्न (Primary Suffix):
- परिभाषा: यह कार्बन-कार्बन बंधों के प्रकार को इंगित करता है। इसे शब्द मूल के ठीक बाद लगाया जाता है।
| कार्बन-कार्बन बंध का प्रकार | प्राथमिक अनुलग्न | उदाहरण |
| एकल बंध (-C-C-) | -एन (-ane) | एथ + एन = एथेन |
| द्वि-बंध (=C=C=) | -ईन (-ene) | एथ + ईन = एथीन |
| त्रि-बंध (≡C≡C≡) | -आइन (-yne) | एथ + आइन = एथाइन |
(b) द्वितीयक अनुलग्न (Secondary Suffix):
- परिभाषा: यह अणु में उपस्थित मुख्य क्रियात्मक समूह (Functional Group) को इंगित करता है।
- नियम: जब द्वितीयक अनुलग्न जोड़ा जाता है, तो प्राथमिक अनुलग्न (-ane, -ene, -yne) का अंतिम ‘e‘ हटा दिया जाता है (यदि द्वितीयक अनुलग्न स्वर a, e, i, o, u से शुरू हो)।
| क्रियात्मक समूह | सूत्र | द्वितीयक अनुलग्न | उदाहरण (प्रोपेन पर आधारित) |
| अल्कोहल | -OH | -ऑल (-ol) | प्रोपेन + ऑल = प्रोपेनॉल |
| एल्डिहाइड | -CHO | -अल (-al) | प्रोपेन + अल = प्रोपेनल |
| कीटोन | >C=O | -ओन (-one) | प्रोपेन + ओन = प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक एसिड | -COOH | **-ओइक एसिड (-oic acid) | ** प्रोपेन + ओइक एसिड = प्रोपेनोइक एसिड |
चरण 3: पूर्वुलग्न (Prefix) – प्रतिस्थापियों की पहचान
- परिभाषा: पूर्वुलग्न अणु में मुख्य कार्बन श्रृंखला से जुड़े प्रतिस्थापी समूहों (Substituent groups) या शाखाओं (Branches) को इंगित करता है।
कुछ सामान्य पूर्वुलग्न:
| समूह | सूत्र | पूर्वुलग्न |
| हैलोजन | -F, -Cl, -Br, -I | फ्लोरो-, क्लोरो-, ब्रोमो-, आयोडो- |
| एल्किल समूह* | -CH₃ | मेथिल (Methyl-) |
| (एक शाखा) | -C₂H₅ | एथिल (Ethyl-) |
*एल्किल समूह एल्केन से एक हाइड्रोजन हटाने पर बनता है (जैसे मीथेन से मेथिल)।
नामकरण के सरल नियम और उदाहरण
1. सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें:
यह आपका “शब्द मूल” तय करेगी।
2. श्रृंखला की नंबरिंग करें:
- नंबरिंग उस सिरे से शुरू करें जहाँ से क्रियात्मक समूह, बहु-बंध (Double/Triple bond) या प्रतिस्थापी को सबसे छोटा संभव नंबर मिले।
3. नाम लिखें (Prefix + Word Root + Suffix):
- सबसे पहले प्रतिस्थापी का नाम उसकी स्थिति (नंबर) के साथ लिखें (पूर्वुलग्न)।
- फिर मुख्य श्रृंखला का शब्द मूल लिखें।
- अंत में बंध के प्रकार (प्राथमिक अनुलग्न) और क्रियात्मक समूह (द्वितीयक अनुलग्न) का नाम लिखें।
उदाहरणों से समझें:
उदाहरण 1: एल्केन (शाखा के साथ)
codeCode
CH₃
|
CH₃-CH-CH₂-CH₃
- सबसे लंबी श्रृंखला: 4 कार्बन की है (सीधी)। -> ब्यूट (But-)
- बंध का प्रकार: सभी एकल बंध हैं। -> -एन (-ane)
- प्रतिस्थापी: -CH₃ (मेथिल) समूह जुड़ा है।
- नंबरिंग: दाएं से नंबरिंग करने पर मेथिल को 3 नंबर मिलता है (-CH(3)-), लेकिन बाएं से नंबरिंग करने पर 2 नंबर मिलता है (-CH(2)-)। हम सबसे छोटा नंबर (2) चुनेंगे।
- पूरा नाम: 2-मेथिल (पूर्वुलग्न) + ब्यूट (शब्द मूल) + एन (अनुलग्न) = 2-मेथिलब्यूटेन
उदाहरण 2: अल्कोहल
codeCode
CH₃-CH₂-CH₂-OH
- सबसे लंबी श्रृंखला: 3 कार्बन की है। -> प्रोप (Prop-)
- बंध का प्रकार: सभी एकल बंध हैं। -> -एन (-ane)
- क्रियात्मक समूह: -OH (अल्कोहल)। -> -ऑल (-ol)
- नंबरिंग: उस सिरे से करेंगे जहाँ से -OH को छोटा नंबर मिले। यहाँ दाएं से करने पर 1 नंबर मिलता है।
- पूरा नाम: प्रोप + एन + 1-ऑल = प्रोपेन-1-ऑल (या सामान्यतः प्रोपेनॉल)
उदाहरण 3: एल्कीन
codeCode
CH₃-CH=CH-CH₃
- सबसे लंबी श्रृंखला: 4 कार्बन की है। -> ब्यूट (But-)
- बंध का प्रकार: एक द्वि-बंध (=) है। -> -ईन (-ene)
- नंबरिंग: द्वि-बंध को सबसे छोटा नंबर मिलना चाहिए। बाएं या दाएं किसी भी तरफ से नंबरिंग करने पर द्वि-बंध कार्बन 2 से शुरू हो रहा है।
- पूरा नाम: ब्यूट + -2-ईन = ब्यूट-2-ईन
यह सरल परिचय आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में कार्बनिक यौगिकों के मूल नामकरण को समझने और पहचानने में मदद करेगा।
महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक:
ईंधन (Fuels)
परिभाषा
ईंधन वह कोई भी पदार्थ है जिसे जलाने (दहन करने) पर ऊष्मा ऊर्जा (Heat Energy) प्राप्त होती है, जिसका उपयोग विभिन्न कार्यों (जैसे खाना पकाना, वाहन चलाना, बिजली बनाना) के लिए किया जाता है।
- एक अच्छे ईंधन (Ideal Fuel) के गुण होते हैं:
- उच्च ऊष्मीय मान (Calorific Value) हो।
- आसानी से उपलब्ध और सस्ता हो।
- जलने पर हानिकारक गैसें या अवशेष कम छोड़े।
- इसका ज्वलन ताप (Ignition Temperature) मध्यम हो।
- ऊष्मीय मान (Calorific Value): 1 किलोग्राम ईंधन के पूर्ण दहन से उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा को उसका ऊष्मीय मान कहते हैं। इसकी इकाई किलोजूल प्रति किलोग्राम (kJ/kg) है। हाइड्रोजन का ऊष्मीय मान सबसे अधिक होता है।
ईंधनों का वर्गीकरण (Classification of Fuels)
ईंधनों को उनकी भौतिक अवस्था के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
- ठोस ईंधन (Solid Fuels)
- द्रव ईंधन (Liquid Fuels)
- गैसीय ईंधन (Gaseous Fuels)
1. ठोस ईंधन (Solid Fuels)
- कोयला (Coal):
- परिचय: यह एक जीवाश्म ईंधन है, जो लाखों वर्षों तक पृथ्वी के नीचे दबे मृत पेड़-पौधों के अपघटन से बनता है।
- कार्बन की मात्रा के आधार पर प्रकार (यह क्रम महत्वपूर्ण है):
- एन्थ्रेसाइट (Anthracite): (90-95% कार्बन) – यह सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोयला है। यह कठोर, काला और चमकदार होता है।
- बिटुमिनस (Bituminous): (70-90% कार्बन) – यह व्यावसायिक रूप से सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला कोयला है।
- लिग्नाइट (Lignite): (60-70% कार्बन) – इसे “भूरा कोयला” (Brown Coal) भी कहा जाता है।
- पीट (Peat): (<60% कार्बन) – यह कोयला निर्माण का प्रारंभिक चरण है और सबसे निम्न गुणवत्ता का होता है।
- अन्य ठोस ईंधन: लकड़ी, कोक (Coke), चारकोल (Charcoal)।
2. द्रव ईंधन (Liquid Fuels)
- पेट्रोलियम (Petroleum) या कच्चा तेल (Crude Oil):
- परिचय: यह एक गहरे रंग का, गाढ़ा तैलीय द्रव है, जिसे “काला सोना” (Black Gold) भी कहा जाता है। यह समुद्र के नीचे दबे मृत समुद्री जीवों के अपघटन से बनता है।
- शोधन (Refining): कच्चे तेल को प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) विधि द्वारा विभिन्न उपयोगी उत्पादों में अलग किया जाता है।
- प्रभाजी आसवन से प्राप्त प्रमुख उत्पाद (क्वथनांक के बढ़ते क्रम में):
- पेट्रोलियम गैस (LPG)
- पेट्रोल (Gasoline): इसकी गुणवत्ता ऑक्टेन संख्या (Octane Number) से मापी जाती है।
- नैफ्था (Naphtha)
- केरोसीन (Kerosene) / मिट्टी का तेल
- डीजल: इसकी गुणवत्ता सीटेन संख्या (Cetane Number) से मापी जाती है।
- स्नेहक तेल (Lubricating Oil)
- पैराफिन मोम (Paraffin Wax)
- एस्फाल्ट / बिटुमेन: (सड़क निर्माण में उपयोग)
- अन्य द्रव ईंधन: अल्कोहल (इथेनॉल)।
3. गैसीय ईंधन (Gaseous Fuels)
(यह खंड परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)
| ईंधन का नाम | पूर्ण रूप (Full Form) | मुख्य घटक (Main Component) | महत्वपूर्ण तथ्य |
| LPG (एल.पी.जी.) | Liquefied Petroleum Gas<br>(द्रवीभूत पेट्रोलियम गैस) | प्रोपेन (C₃H₈) और ब्यूटेन (C₄H₁₀) | • यह एक रंगहीन और गंधहीन गैस है।<br>• रिसाव का पता लगाने के लिए इसमें एक तीव्र गंध वाला पदार्थ “एथिल मरकैप्टन (Ethyl Mercaptan – C₂H₅SH)” मिलाया जाता है।<br>• इसे उच्च दाब पर द्रवित करके सिलेंडरों में भरा जाता है। |
| CNG (सी.एन.जी.) | Compressed Natural Gas<br>(संपीडित प्राकृतिक गैस) | मीथेन (Methane – CH₄) (लगभग 80-90%) | • यह पेट्रोल/डीजल की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) ईंधन है, क्योंकि यह कम प्रदूषण फैलाता है।<br>• वाहनों में उपयोग किया जाता है। |
| प्राकृतिक गैस | Natural Gas | मीथेन (CH₄) | • पेट्रोलियम कुओं से प्राप्त होती है। |
| बायो-गैस / गोबर गैस | Bio-gas / Gobar Gas | मीथेन (CH₄) (लगभग 50-75%) | • यह पशुओं के गोबर और जैविक कचरे के अवायवीय अपघटन (Anaerobic Decomposition) से बनती है। |
| प्रोड्यूसर गैस | Producer Gas | कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) + नाइट्रोजन (N₂) | • इसका उपयोग कांच और स्टील उद्योग में ईंधन के रूप में होता है। |
| जल गैस (वॉटर गैस) | Water Gas / SYN Gas | कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) + हाइड्रोजन (H₂) | • इसका ऊष्मीय मान प्रोड्यूसर गैस से अधिक होता है। |
| कोल गैस | Coal Gas | हाइड्रोजन (H₂) + मीथेन (CH₄) + कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) | • कोयले के भंजक आसवन (Destructive Distillation) से प्राप्त होती है। |
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
- अपस्फोटन (Knocking): पेट्रोल इंजनों में ईंधन का समय से पहले प्रज्वलन, जिससे एक धात्विक ध्वनि उत्पन्न होती है, अपस्फोटन कहलाता है। इसे कम करने के लिए पेट्रोल में टेट्राएथिल लेड (TEL) जैसे एंटी-नॉकिंग एजेंट मिलाए जाते थे, जो अब प्रतिबंधित हैं।
- हाइड्रोजन: इसे “भविष्य का ईंधन” (Fuel of the Future) कहा जाता है क्योंकि इसका ऊष्मीय मान बहुत अधिक होता है और यह जलने पर केवल जल (H₂O) बनाता है, जो प्रदूषण रहित है।
अल्कोहल (Alcohols)
परिभाषा: अल्कोहल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें एक या एक से अधिक हाइड्रॉक्सिल ( क्रियात्मक समूह, किसी संतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं। ये पानी के समान दिखते हैं लेकिन इनकी एक विशिष्ट गंध और गुण होते हैं।
1. मेथेनॉल (Methanol)
- रासायनिक सूत्र: CH₃OH
- IUPAC नाम: मेथेनॉल (Methanol)
- श्रेणी: यह अल्कोहल समजातीय श्रेणी का प्रथम सदस्य (First member) है।
(a) सामान्य नाम और स्रोत:
- सामान्य नाम: इसे मेथिल अल्कोहल (Methyl Alcohol) भी कहा जाता है।
- “काष्ठ स्प्रिट” (Wood Spirit): इसका सबसे प्रसिद्ध नाम “काष्ठ स्प्रिट” है, क्योंकि इसे ऐतिहासिक रूप से लकड़ी के भंजक आसवन (Destructive Distillation of Wood) द्वारा प्राप्त किया जाता था। (यह नाम परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है)
(b) गुण (Properties):
- भौतिक अवस्था: यह एक रंगहीन (Colourless), वाष्पशील (Volatile) द्रव है।
- गंध: इसकी एक विशिष्ट तीखी गंध होती है।
- विलेयता: यह पानी में हर अनुपात में पूरी तरह से घुलनशील (Miscible) है।
(c) सबसे महत्वपूर्ण गुण: विषाक्तता (Toxicity):
- अत्यधिक जहरीला: मेथेनॉल मानव उपभोग के लिए अत्यधिक विषैला (Highly Poisonous) होता है।
- प्रभाव:
- इसकी थोड़ी सी भी मात्रा पीने से व्यक्ति अंधा (Blindness) हो सकता है, क्योंकि यह यकृत (Liver) में मेटाबोलाइज होकर मेथेनल (फॉर्मेल्डिहाइड) और फिर मेथेनोइक एसिड (फॉर्मिक एसिड) में बदल जाता है, जो ऑप्टिक नर्व को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है।
- अधिक मात्रा में सेवन से मृत्यु (Death) हो जाती है। “जहरीली शराब” (Spurious Liquor) कांडों में होने वाली मौतों का मुख्य कारण अक्सर मेथेनॉल ही होता है।
(d) उपयोग (Uses):
- विलायक (Solvent): पेंट, वार्निश और अन्य रासायनिक उत्पादों के लिए एक विलायक के रूप में।
- ईंधन के रूप में: कुछ रेसिंग कारों और स्टोव में ईंधन के रूप में।
- एंटी-फ्रीज: वाहनों के रेडिएटर में पानी को जमने से रोकने के लिए।
- औद्योगिक रसायन: फॉर्मेल्डिहाइड जैसे अन्य रसायनों के निर्माण के लिए एक प्रारंभिक पदार्थ के रूप में।
2. इथेनॉल (Ethanol)
- रासायनिक सूत्र: C₂H₅OH या CH₃CH₂OH
- IUPAC नाम: इथेनॉल (Ethanol)
(a) सामान्य नाम और स्रोत:
- सामान्य नाम: इसे एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) भी कहा जाता है।
- “अनाज अल्कोहल” (Grain Alcohol) / स्प्रिट: इसका सामान्य नाम “अनाज अल्कोहल” या केवल “अल्कोहल” है। इसे किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया द्वारा चीनी युक्त पदार्थों (जैसे गन्ना, अंगूर, अनाज) से बनाया जाता है।
- यह मादक पेयों (Alcoholic Beverages) जैसे बीयर, वाइन, व्हिस्की आदि का मुख्य सक्रिय घटक है।
(b) गुण (Properties):
- भौतिक अवस्था: यह भी एक रंगहीन, वाष्पशील द्रव है।
- गंध: इसकी एक सुखद, विशिष्ट गंध होती है।
- विलेयता: यह भी पानी में हर अनुपात में पूरी तरह से घुलनशील है।
(c) प्रभाव (Effect):
- यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर अवसादक (depressant) प्रभाव डालता है। इसके सेवन से नशा होता है।
- हालांकि यह मेथेनॉल की तरह जहरीला नहीं है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
(d) विकृत अल्कोहल (Denatured Alcohol):
- औद्योगिक उपयोग के लिए इथेनॉल के दुरुपयोग (पीने के लिए) को रोकने के लिए, इसमें मेथेनॉल, पिरीडीन या कॉपर सल्फेट जैसे जहरीले और दुर्गंधयुक्त पदार्थ मिला दिए जाते हैं।
- इस अशुद्ध किए गए इथेनॉल को “विकृत अल्कोहल” कहते हैं, जो पीने के अयोग्य (Unfit for drinking) हो जाता है।
(e) उपयोग (Uses):
- पेय पदार्थ: बीयर, वाइन और अन्य मादक पेयों का मुख्य घटक।
- विलायक (Solvent): टिंचर आयोडीन (Tincture of Iodine) (एक एंटीसेप्टिक), कफ सिरप, और इत्र (Perfumes) में एक विलायक के रूप में।
- ईंधन के रूप में (बायो-फ्यूल): पेट्रोल के साथ मिलाकर (जिसे गैसोहोल (Gasohol) या E10/E20 पेट्रोल कहा जाता है) वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
- एंटीसेप्टिक: त्वचा पर कीटाणुनाशक के रूप में।
मेथेनॉल बनाम इथेनॉल: एक तुलनात्मक सारणी
| विशेषता | मेथेनॉल (CH₃OH) | इथेनॉल (C₂H₅OH) |
| सामान्य नाम | काष्ठ स्प्रिट (Wood Spirit) | अनाज अल्कोहल (Grain Alcohol) |
| स्रोत | लकड़ी का भंजक आसवन | शर्करा का किण्वन (Fermentation) |
| विषाक्तता | अत्यधिक जहरीला (Highly Poisonous) | नशीला, लेकिन कम विषैला |
| शारीरिक प्रभाव | अंधापन और मृत्यु | नशा, यकृत को नुकसान (दीर्घकालिक) |
| मुख्य औद्योगिक उपयोग | विलायक, फॉर्मेल्डिहाइड का निर्माण | विलायक, पेय पदार्थ, एंटीसेप्टिक |
| ईंधन में उपयोग | विशेष ईंधन, एंटी-फ्रीज | गैसोहोल (पेट्रोल में मिश्रण) |
प्रमुख कार्बनिक अम्ल: स्रोत और उपयोग
| सामान्य नाम | IUPAC नाम | रासायनिक सूत्र | मुख्य प्राकृतिक स्रोत | महत्वपूर्ण तथ्य / उपयोग |
| एसिटिक एसिड | इथेनोइक एसिड | CH₃COOH | सिरका (Vinegar) (5-8% घोल) | भोजन में खट्टापन लाने के लिए, अचार में परिरक्षक के रूप में। |
| फॉर्मिक एसिड | मेथेनोइक एसिड | HCOOH | लाल चींटियों का डंक, मधुमक्खी का डंक, बिछुआ (Nettle) पौधे के पत्ते | इसके कारण त्वचा में जलन और दर्द होता है। |
| साइट्रिक एसिड | – | C₆H₈O₇ | खट्टे फल (Citrus Fruits) जैसे – नींबू, संतरा, आंवला | भोजन और पेय पदार्थों में खट्टे स्वाद के लिए, खाद्य परिरक्षक के रूप में। |
| लैक्टिक एसिड | – | C₃H₆O₃ | खट्टा दूध, दही (Curd) | मांसपेशियों में इसके जमाव के कारण थकान (Fatigue) महसूस होती है। |
| ऑक्जेलिक एसिड | इथेनडाइओइक एसिड | C₂H₂O₄ | टमाटर, पालक, अमरूद | फोटोग्राफी में फेरस ऑक्जेलेट के रूप में, स्याही के धब्बे हटाने में। |
| टार्टरिक एसिड | – | C₄H₆O₆ | इमली, कच्चा आम, अंगूर | बेकिंग पाउडर का एक घटक (यह बेकिंग सोडा को अभिक्रिया करने में मदद करता है और कड़वाहट को दूर करता है)। |
| मैलिक एसिड | – | C₄H₆O₅ | सेब (Apple) और कई अन्य फल | फलों के खट्टे स्वाद में योगदान देता है। |
| ब्यूट्रिक एसिड | ब्यूटेनोइक एसिड | C₃H₇COOH | खराब मक्खन (Rancid Butter) | दुर्गंधयुक्त मक्खन की गंध इसी के कारण होती है। |
| एस्कॉर्बिक एसिड | – | C₆H₈O₆ | आंवला, खट्टे फल, ब्रोकोली | यह विटामिन C का रासायनिक नाम है। |
| यूरिक एसिड | – | C₅H₄N₄O₃ | मूत्र (Urine) | गठिया (Gout) रोग में इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। |
| स्टीयरिक एसिड | – | C₁₈H₃₆O₂ | वसा (Fats) | मोमबत्तियां और साबुन बनाने में उपयोग होता है। |
याद रखने के लिए विशेष बिंदु (Exam Focussed Points)
- अम्लों का मिलान (Match the following) सबसे आम प्रश्न प्रारूप है।
- सिरका -> एसिटिक एसिड
- दही -> लैक्टिक एसिड
- इमली -> टार्टरिक एसिड
- नींबू -> साइट्रिक एसिड
- टमाटर -> ऑक्जेलिक एसिड
- चींटी का डंक -> फॉर्मिक एसिड
- विटामिन C का रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक एसिड है।
- मांसपेशियों में थकान लैक्टिक एसिड के जमाव के कारण होती है।
- बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) और टार्टरिक एसिड का मिश्रण है।
- स्याही के धब्बे हटाने के लिए ऑक्जेलिक एसिड का प्रयोग किया जाता है।
यह सारणी आपको विभिन्न अम्लों और उनके स्रोतों को प्रभावी ढंग से याद रखने में मदद करेगी।
बहुलक (Polymers):
बहुलक (Polymers)
परिभाषा: बहुलक और बहुलकीकरण
- एकलक (Monomer): “मोनो” का अर्थ है ‘एक’ और “मर” का अर्थ है ‘इकाई’। एकलक वह सरल और छोटा अणु (Small molecule) है जो बार-बार दोहराकर बहुलक का निर्माण करता है।
- बहुलक (Polymer): “पॉली” का अर्थ है ‘बहुत’। बहुलक एक बहुत बड़ा अणु (Macromolecule) होता है जिसका निर्माण बहुत सारे छोटे-छोटे एकलकों के आपस में सहसंयोजी बंधों द्वारा जुड़ने से होता है।
- बहुलकीकरण (Polymerization): वह प्रक्रिया जिसके द्वारा एकलक अणु आपस में जुड़कर बहुलक का निर्माण करते हैं, बहुलकीकरण कहलाती है।
n [एकलक] –(बहुलकीकरण)–> [-एकलक-]ₙ (बहुलक)
(जहाँ n एक बहुत बड़ी संख्या है)
बहुलकों का वर्गीकरण (Classification of Polymers)
बहुलकों को उनके स्रोत, संरचना और आणविक बलों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
A. स्रोत के आधार पर (Based on Source)
- प्राकृतिक बहुलक (Natural Polymers):
- परिभाषा: वे बहुलक जो हमें पौधों और जंतुओं से प्राप्त होते हैं।
- उदाहरण:
- स्टार्च / मंड: (एकलक – ग्लूकोज) – आलू, चावल, गेहूं में पाया जाता है।
- सेलूलोज़: (एकलक – ग्लूकोज) – पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक। कपास और कागज शुद्ध सेलूलोज़ हैं।
- प्रोटीन: (एकलक – अमीनो एसिड) – बाल, नाखून, त्वचा, मांसपेशियां।
- प्राकृतिक रबर: (एकलक – आइसोप्रीन) – रबर के पेड़ के लेटेक्स से प्राप्त होता है।
- रेशम, ऊन।
- संश्लेषित बहुलक (Synthetic Polymers):
- परिभाषा: वे बहुलक जिन्हें मनुष्यों द्वारा प्रयोगशाला या उद्योग में रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा बनाया जाता है। इन्हें मानव-निर्मित बहुलक (Man-made Polymers) भी कहते हैं।
- उदाहरण: प्लास्टिक (पॉलीथीन, PVC, बेकेलाइट), संश्लेषित रेशे (नायलॉन, टेफ्लॉन), संश्लेषित रबर (नियोप्रीन)।
B. संरचना के आधार पर (Based on Structure – प्लास्टिक पर केंद्रित)
संश्लेषित बहुलकों, विशेष रूप से प्लास्टिक को, उनकी आणविक संरचना और ऊष्मा के प्रति व्यवहार के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है। (यह वर्गीकरण प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)
- थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastics):
- परिभाषा: ये वे बहुलक हैं जो गर्म करने पर मुलायम हो जाते हैं और ठंडा करने पर पुनः कठोर हो जाते हैं।
- गुण: इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जा सकता है, इसलिए इन्हें पुनः चक्रित (Recycled) किया जा सकता है। इनकी संरचना रैखिक (Linear) या थोड़ी शाखित होती है।
- उदाहरण (याद रखना आवश्यक है):
- पॉलीथीन (Polythene): (एकलक – एथीन) – सबसे आम प्लास्टिक, थैलियाँ और बोतलें बनाने में।
- पॉलीविनाइल क्लोराइड (Polyvinyl Chloride – PVC): (एकलक – विनाइल क्लोराइड) – पाइप, जूते, बरसाती कोट, बिजली के तारों के कवर बनाने में।
- पॉलिस्टाइरीन (Polystyrene): (थर्मोकॉल)।
- टेफ्लॉन (Teflon – PTFE): (पॉलीटेट्राफ्लोरोएथीन) – नॉन-स्टिक बर्तनों (Non-stick cookware) पर परत चढ़ाने के लिए, क्योंकि यह ऊष्मारोधी और रासायनिक रूप से अक्रिय होता है।
- नायलॉन (Nylon): एक थर्मोप्लास्टिक रेशा।
- थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastics):
- परिभाषा: ये वे बहुलक हैं जिन्हें निर्माण के दौरान गर्म करने पर एक बार स्थायी रूप से कठोर कर दिया जाता है, और फिर उन्हें दोबारा गर्म करके नरम नहीं किया जा सकता।
- गुण: इन्हें पुनः चक्रित नहीं किया जा सकता। इनकी संरचना में मजबूत क्रॉस-लिंक (Cross-links) होते हैं जो इन्हें कठोर बनाते हैं।
- उदाहरण (याद रखना आवश्यक है):
- बेकेलाइट (Bakelite): (एकलक – फिनोल और फॉर्मेल्डिहाइड) – यह पहला पूर्ण रूप से संश्लेषित प्लास्टिक था। यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक (Insulator) होता है।
- उपयोग: बिजली के स्विच, प्लग, बर्तन के हत्थे (Handles), कंघे बनाने में।
- मेलामाइन (Melamine): (मेलामाइन-फॉर्मेल्डिहाइड) – यह अग्नि-प्रतिरोधी (Fire-resistant) और न टूटने वाला प्लास्टिक है।
- उपयोग: फर्श की टाइलें, न टूटने वाले रसोई के बर्तन, अग्निशामक कर्मचारियों के कपड़े बनाने में।
- बेकेलाइट (Bakelite): (एकलक – फिनोल और फॉर्मेल्डिहाइड) – यह पहला पूर्ण रूप से संश्लेषित प्लास्टिक था। यह ऊष्मा और विद्युत का कुचालक (Insulator) होता है।
प्रमुख संश्लेषित रेशे (Major Synthetic Fibres)
- नायलॉन (Nylon):
- यह पहला पूर्ण रूप से संश्लेषित रेशा था।
- यह बहुत मजबूत, लोचदार और हल्का होता है।
- उपयोग: रस्सी, पैराशूट, टूथब्रश के ब्रिसल्स, मछली पकड़ने का जाल।
- रेयॉन (Rayon):
- इसे “कृत्रिम रेशम” (Artificial Silk) कहा जाता है।
- यह लकड़ी की लुगदी (सेलूलोज़) के रासायनिक उपचार से बनाया जाता है, इसलिए यह एक अर्ध-संश्लेषित (Semi-synthetic) रेशा है।
- पॉलिएस्टर (Polyester):
- टेरिलीन एक लोकप्रिय पॉलिएस्टर है।
- इससे बने कपड़ों में आसानी से सिलवटें नहीं पड़ती हैं।
- ऐक्रिलिक (Acrylic):
- इसे “कृत्रिम ऊन” (Artificial Wool) कहते हैं। यह ऊन से सस्ता होता है।
रबर (Rubber)
- प्राकृतिक रबर (Natural Rubber):
- एकलक: आइसोप्रीन (Isoprene)
- यह बहुत नरम और लोचदार होता है, लेकिन मजबूत नहीं होता।
- रबर का वल्कनीकरण (Vulcanization of Rubber):
- परिभाषा: प्राकृतिक रबर के गुणों में सुधार करने के लिए, इसे सल्फर (Sulphur) के साथ गर्म करने की प्रक्रिया।
- खोज: चार्ल्स गुडइयर (Charles Goodyear)
- लाभ: वल्कनीकरण से रबर अधिक कठोर, मजबूत और टिकाऊ हो जाता है। इसका उपयोग टायर, ट्यूब आदि बनाने में किया जाता है।
- संश्लेषित रबर (Synthetic Rubber):
- नियोप्रीन (Neoprene): (एकलक – क्लोरोप्रीन) – यह तेल और सॉल्वैंट्स के प्रति प्रतिरोधी होता है।
पर्यावरणीय रसायन
पर्यावरणीय रसायन (Environmental Chemistry)
यह हमारे परिवेश में रासायनिक प्रजातियों के स्रोत, अभिक्रियाओं, परिवहन, प्रभाव और नियति का वैज्ञानिक अध्ययन है।
भाग 1: वायु प्रदूषण (Air Pollution)
जब हवा में अवांछित पदार्थ (गैसें, धूल, धुआं) इतनी मात्रा में जमा हो जाते हैं कि वे जीवित प्राणियों और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक हों, तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं।
(a) ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग (Greenhouse Effect and Global Warming)
- ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect):
- परिभाषा: यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो पृथ्वी की सतह को रहने योग्य गर्म बनाए रखती है।
- कार्यप्रणाली: सूर्य से आने वाली शॉर्ट-वेव विकिरण पृथ्वी तक पहुंचती है, लेकिन पृथ्वी से वापस जाने वाली लॉन्ग-वेव (अवरक्त) विकिरण को वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें अवशोषित कर लेती हैं। यह अवशोषित ऊर्जा वायुमंडल को गर्म करती है।
- ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases):
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस, जो जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल) के दहन से उत्पन्न होती है।
- मीथेन (CH₄): धान के खेतों, पशुओं की जुगाली, और आर्द्रभूमि से उत्सर्जित होती है।
- नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O): कृषि गतिविधियों और उर्वरकों के उपयोग से।
- जल वाष्प (H₂O): सबसे प्रचुर मात्रा में मौजूद, लेकिन मानवीय गतिविधियों से सीधे प्रभावित नहीं।
- क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs):
- ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) / भूमंडलीय तापन:
- परिभाषा: मानवीय गतिविधियों के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता बढ़ने से, जब ग्रीनहाउस प्रभाव तीव्र हो जाता है और पृथ्वी की सतह के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि होने लगती है, तो इसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
- प्रभाव: जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, और चरम मौसम की घटनाएं।
(b) अम्ल वर्षा (Acid Rain)
- परिभाषा: वह वर्षा जिसमें सामान्य से अधिक मात्रा में अम्ल (Acid) मौजूद हो, अम्ल वर्षा कहलाती है। सामान्य वर्षा का जल (CO₂) के कारण थोड़ा अम्लीय होता है (pH ≈ 5.6)। जब वर्षा जल का pH मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्ल वर्षा कहते हैं।
- कारण (Formation):
- फैक्ट्रियों, बिजली संयंत्रों और वाहनों से **सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) ** और नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOₓ) गैसें वायुमंडल में उत्सर्जित होती हैं।
- ये गैसें वायुमंडल में मौजूद जल वाष्प (H₂O) और ऑक्सीजन से अभिक्रिया करती हैं।
- अभिक्रिया के बाद सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄) और नाइट्रिक एसिड (HNO₃) बनते हैं।
- ये अम्ल वर्षा जल के साथ मिलकर पृथ्वी पर गिरते हैं।
SO₂ → H₂SO₄
NOₓ → HNO₃
- प्रभाव:
- यह संगमरमर (CaCO₃) से बनी इमारतों और मूर्तियों को संक्षारित (Corrodes) करती है। ताजमहल का पीला पड़ना इसी का एक प्रमुख उदाहरण है (इसे “स्टोन कैंसर” भी कहा जाता है)।
- यह झीलों और नदियों के पानी को अम्लीय बना देती है, जिससे जलीय जीवन (Aquatic Life) नष्ट हो जाता है।
- यह मिट्टी की उर्वरता को कम करती है।
(c) ओजोन परत का क्षरण (Ozone Layer Depletion)
- ओजोन परत (Ozone Layer):
- सूत्र: O₃
- स्थिति: यह समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित है।
- कार्य: यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet – UV) किरणों, विशेषकर UV-B, को अवशोषित कर लेती है और पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
- क्षरण का कारण:
- क्षरण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार यौगिक क्लोरोफ्लोरोकार्बन (Chlorofluorocarbons – CFCs) हैं।
- CFCs का स्रोत: इनका उपयोग पुराने रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर (AC), और एयरोसोल स्प्रे में प्रशीतक (Refrigerant) के रूप में किया जाता था।
- क्रियाविधि: समताप मंडल में पहुंचने पर, CFCs UV किरणों द्वारा टूटकर क्लोरीन (Cl) मुक्त मूलक उत्पन्न करते हैं। क्लोरीन का एक मुक्त मूलक लाखों ओजोन अणुओं (O₃) को नष्ट कर सकता है।
- प्रभाव:
- UV किरणों के पृथ्वी पर पहुंचने से त्वचा कैंसर (Skin Cancer), मोतियाबिंद (Cataracts) और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
- यह पौधों की वृद्धि को भी प्रभावित करता है।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol – 1987):
- यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन परत का क्षरण करने वाले पदार्थों (जैसे CFCs) के उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अब तक की सबसे सफल अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधियों में से एक है।
भाग 2: जल प्रदूषण (Water Pollution)
जब हानिकारक पदार्थ जैसे रसायन, औद्योगिक अपशिष्ट, या सूक्ष्मजीव जल निकायों (नदियों, झीलों, भूजल) में मिल जाते हैं और पानी की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, तो उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
- BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड – Biochemical Oxygen Demand):
- परिभाषा: यह पानी में मौजूद जैव-अपघटनीय कार्बनिक पदार्थ (Biodegradable organic matter) की मात्रा को मापने का एक संकेतक है।
- अर्थ: BOD का मान जितना अधिक होगा, पानी उतना ही अधिक प्रदूषित होगा, क्योंकि सूक्ष्मजीवों को उस कार्बनिक पदार्थ को विघटित करने के लिए उतनी ही अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी।
- सुपोषण (Eutrophication):
- परिभाषा: जब किसी जल निकाय में पोषक तत्वों, विशेष रूप से नाइट्रेट्स और फॉस्फेट्स (जो उर्वरकों और डिटर्जेंट से आते हैं), की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो शैवाल (Algae) की अत्यधिक वृद्धि होने लगती है। इस प्रक्रिया को सुपोषण कहते हैं।
- प्रभाव: जब ये शैवाल मरते हैं, तो बैक्टीरिया उन्हें विघटित करते हैं, इस प्रक्रिया में वे पानी में घुली हुई अधिकांश ऑक्सीजन का उपयोग कर लेते हैं। इससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे मछलियां और अन्य जलीय जीव मर जाते हैं।
- भारी धातु प्रदूषण:
- औद्योगिक अपशिष्टों से निकलने वाली भारी धातुएं जैसे पारा (Mercury – Hg) और कैडमियम (Cd) जल निकायों में जमा हो जाती हैं और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाती हैं।
- पारा के कारण मिनमाटा (Minamata) रोग होता है।
- कैडमियम के कारण इटाई-इटाई (Itai-Itai) रोग होता है।