मिश्र धातु

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मिश्र धातु (Alloys)

परिभाषा (Definition)

मिश्र धातु दो या दो से अधिक धातुओं का, या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) होती है।


मिश्र धातु बनाने का उद्देश्य (Purpose of Alloying)

शुद्ध धातुओं में अक्सर कुछ कमजोरियां होती हैं, जैसे नरम होना, आसानी से संक्षारित होना (जंग लगना), या कम मजबूती। मिश्र धातुएं इन कमियों को दूर करने और धातुओं के गुणों को हमारी आवश्यकता के अनुसार बेहतर बनाने के लिए बनाई जाती हैं।

मिश्र धातु बनाने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. कठोरता बढ़ाने के लिए (To Increase Hardness):
    • उदाहरण: शुद्ध सोना (24 कैरेट) बहुत मुलायम होता है और उससे आसानी से आभूषण नहीं बनाए जा सकते। इसे कठोर बनाने के लिए इसमें तांबा (Copper) या चांदी (Silver) मिलाया जाता है, जिससे आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का निर्माण होता है। इसी तरह, शुद्ध लोहा भी काफी नरम होता है, लेकिन उसमें कार्बन मिलाने पर स्टील बनता है जो बहुत कठोर और मजबूत होता है।
  2. संक्षारण प्रतिरोध (जंग प्रतिरोध) बढ़ाने के लिए (To Increase Corrosion Resistance):
    • उदाहरण: लोहे में आसानी से जंग लग जाता है। लेकिन जब इसमें क्रोमियम (Chromium) और निकल (Nickel) मिलाया जाता है, तो स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) बनता है, जिसमें जंग नहीं लगता। इसीलिए इसका उपयोग बर्तन, सर्जिकल उपकरण और मशीनरी के पुर्जे बनाने में होता है।
  3. गलनांक को कम करने के लिए (To Lower the Melting Point):
    • उदाहरण: सोल्डर (Solder), जो सीसा (Lead) और टिन (Tin) का एक मिश्र धातु है, का गलनांक सीसा और टिन दोनों के व्यक्तिगत गलनांक से कम होता है। इस गुण के कारण इसका उपयोग विद्युत तारों को एक साथ जोड़ने (टांका लगाने) के लिए किया जाता है।
  4. विद्युत प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए (To Increase Electrical Resistance):
    • उदाहरण: नाइक्रोम (Nichrome) (निकल, क्रोमियम, आयरन का मिश्र धातु) और कांस्टेंटन (Constantan) (कॉपर, निकल का मिश्र धातु) का विद्युत प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। इस गुण के कारण इनका उपयोग हीटिंग एलीमेंट (Heating Elements) में किया जाता है, जैसे कि इलेक्ट्रिक हीटर, टोस्टर और आयरन (इस्तरी) में।
  5. ढलाई की क्षमता में सुधार के लिए (To Improve Casting Ability):
    • कुछ मिश्र धातुएं शुद्ध धातुओं की तुलना में ठंडा होने पर कम सिकुड़ती हैं, जिससे वे मूर्तियों और मशीन के पुर्जों की ढलाई (Casting) के लिए बेहतर होती हैं।
    • उदाहरण: कांसा (Bronze) (कॉपर और टिन) का उपयोग मूर्तियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
  6. रंग और दिखावट बदलने के लिए:
    • उदाहरण: पीतल (Brass) (कॉपर और जिंक) का सुनहरा रंग होता है, जिसका उपयोग सजावटी वस्तुओं और संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए किया जाता है।

निष्कर्ष

संक्षेप में, मिश्र धातु बनाना धातुओं के गुणों को अनुकूलित करने और उन्हें हमारी विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए अधिक उपयोगी, टिकाऊ और प्रभावी बनाने की एक शक्तिशाली तकनीक है। शुद्ध धातुओं की कमियों को दूर करके, मिश्र धातुएं इंजीनियरिंग, निर्माण, घरेलू उपयोग और प्रौद्योगिकी के हर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


प्रमुख मिश्र धातुएं, उनके घटक और उपयोग

1. तांबा (Copper – Cu) आधारित मिश्र धातुएं

मिश्र धातु का नाममुख्य घटक (Composition)महत्वपूर्ण उपयोग
पीतल (Brass)तांबा (Cu) + जस्ता/जिंक (Zn)बर्तन, कारतूस के खोखे (Cartridges), सजावटी सामान, वाद्ययंत्र (जैसे तुरही)।
कांसा (Bronze)तांबा (Cu) + टिन (Sn)मूर्तियाँ (Statues), पदक (Medals), सिक्के (Coins), जहाज के प्रोपेलर, घंटियाँ।
जर्मन सिल्वर (नाम में सिल्वर है, पर इसमें सिल्वर नहीं होता)तांबा (Cu) + जस्ता (Zn) + निकल (Ni)बर्तन, सजावटी सामान।
गनमेटलतांबा (Cu) + टिन (Sn) + जस्ता (Zn)तोप (Guns), गियर, बियरिंग।

2. लोहा (Iron – Fe) आधारित मिश्र धातुएं (स्टील्स)

मिश्र धातु का नाममुख्य घटक (Composition)महत्वपूर्ण उपयोग
स्टीललोहा (Fe) + कार्बन (C) (0.1% से 1.5%)निर्माण (पुल, इमारतें), रेल की पटरियां, जहाज।
स्टेनलेस स्टीललोहा (Fe) + क्रोमियम (Cr) + निकल (Ni)जंगरोधी बर्तन (Utensils), सर्जिकल उपकरण, घड़ियाँ, वाहन के पुर्जे।
मैंगनीज स्टीललोहा (Fe) + मैंगनीज (Mn)तिजोरियाँ (Safes), चट्टान तोड़ने वाली मशीनें, हेलमेट।
नाइक्रोम (Heater Coil)निकल (Ni) + क्रोमियम (Cr) + लोहा (Fe)हीटिंग एलीमेंट (Heating Element) जैसे इलेक्ट्रिक हीटर, टोस्टर, आयरन (इस्तरी) की कॉइल में। इसका उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक होता है।

3. एल्युमिनियम (Aluminium – Al) आधारित मिश्र धातुएं

मिश्र धातु का नाममुख्य घटक (Composition)महत्वपूर्ण उपयोग
ड्यूरालुमिनएल्युमिनियम (Al) + तांबा (Cu) + मैंगनीज (Mn) + मैग्नीशियम (Mg)हवाई जहाज (Aircrafts) के हिस्से और प्रेशर कुकर बनाने में (क्योंकि यह हल्का और मजबूत होता है)।
मैग्नेलियमएल्युमिनियम (Al) + मैग्नीशियम (Mg)हल्का होने के कारण हवाई जहाज के पुर्जे, तराजू (Balance beams) बनाने में।

4. सीसा (Lead – Pb) आधारित मिश्र धातुएं

मिश्र धातु का नाममुख्य घटक (Composition)महत्वपूर्ण उपयोग
सोल्डर (Solder) (टांका)सीसा (Pb) + टिन (Sn)इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में टांका लगाने (Soldering) और तारों को जोड़ने के लिए। इसका गलनांक कम होता है।
टाइप मेटलसीसा (Pb) + टिन (Sn) + एंटीमनी (Sb)प्रिंटिंग प्रेस में टाइप बनाने के लिए।

5. अन्य महत्वपूर्ण मिश्र धातुएं

मिश्र धातु का नाममुख्य घटक (Composition)महत्वपूर्ण उपयोग
अमलगम (Amalgam)पारा (Mercury – Hg) + अन्य धातु (Ag, Sn, Zn आदि)दंत चिकित्सक द्वारा दांतों में भराई (Dental Filling) के लिए।
22 कैरेट सोनासोना (Au) + तांबा (Cu) या चांदी (Ag)आभूषण (Jewellery) बनाने के लिए (क्योंकि शुद्ध सोना बहुत मुलायम होता है)।
कृत्रिम सोना (Artificial Gold / Rolled Gold)तांबा (Cu) + एल्युमिनियम (Al)सस्ते आभूषण बनाने में।
कांस्टेंटनतांबा (Cu) + निकल (Ni)थर्मोकपल और बिजली के उपकरणों में।

सारांश सारणी: परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण

मिश्र धातुघटकउपयोग
पीतल (Brass)Cu + Znबर्तन
कांसा (Bronze)Cu + Snमूर्तियाँ, पदक
स्टेनलेस स्टीलFe + Cr + Niजंगरोधी बर्तन
सोल्डरPb + Snटांका लगाना (Soldering)
जर्मन सिल्वरCu + Zn + Niबर्तन (चांदी रहित)
ड्यूरालुमिनAl + Cu (+ Mg, Mn)हवाई जहाज के हिस्से
नाइक्रोमNi + Cr (+ Fe)हीटिंग कॉइल

यह सारणी आपको मिश्र धातुओं से संबंधित प्रश्नों के लिए अच्छी तरह से तैयार करने में मदद करेगी।



महत्वपूर्ण तत्व और उनके यौगिक

 महत्वपूर्ण तत्व और उनके यौगिक

हाइड्रोजन (Hydrogen – H)

आवर्त सारणी में स्थान (Position in Periodic Table)

हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of Hydrogen)

हाइड्रोजन एकमात्र ऐसा तत्व है जिसके समस्थानिकों के अलग-अलग नाम हैं।

समस्थानिक का नामप्रतीक (Symbol)नाभिकीय संरचना (p = प्रोटॉन, n = न्यूट्रॉन)मुख्य विशेषता
प्रोटियम¹₁H1 p, 0 nयह साधारण हाइड्रोजन है और प्रकृति में सबसे अधिक (99.98%) पाया जाता है।
ड्यूटीरियम²₁H or D1 p, 1 nइसे भारी हाइड्रोजन (Heavy Hydrogen) भी कहते हैं। यह भारी जल (D₂O) का निर्माण करता है।
ट्राइटियम³₁H or T1 p, 2 nयह एक रेडियोधर्मी (Radioactive) समस्थानिक है और इसका अर्ध-आयु काल लगभग 12.3 वर्ष होता है।

जल (Water – H₂O)

जल, हाइड्रोजन का सबसे महत्वपूर्ण और सामान्य यौगिक है। इसे सार्वत्रिक विलायक (Universal Solvent) कहा जाता है।

जल के गुण (Properties of Water)

कठोर और मृदु जल (Hard and Soft Water)

जल की कठोरता का कारण:
जल की कठोरता उसमें कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) के घुलनशील लवणों (Soluble Salts) की उपस्थिति के कारण होती है।


जल की कठोरता के प्रकार और उसे दूर करने के उपाय

(a) अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness)

(b) स्थायी कठोरता (Permanent Hardness)


भारी जल (Heavy Water – D₂O)

उपयोग (Uses of Heavy Water)

भारी जल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों (Nuclear Reactors) में होता है।


S-ब्लॉक तत्व (s-block Elements)

परिभाषा: वे तत्व जिनके परमाणुओं के सबसे बाहरी कोश का अंतिम इलेक्ट्रॉन s-उपकोश (s-subshell) में प्रवेश करता है, S-ब्लॉक तत्व कहलाते हैं।

आवर्त सारणी में स्थिति: आवर्त सारणी के बाईं ओर स्थित समूह 1 और समूह 2 के तत्व S-ब्लॉक के अंतर्गत आते हैं।


1. समूह 1: क्षार धातुएं (Alkali Metals)

क्षार धातुओं के सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनके बाहरी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns¹ होता है।
  2. संयोजकता (Valency): ये आसानी से अपना एकमात्र संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर +1 ऑक्सीकरण अवस्था वाला धनायन (M⁺) बनाते हैं।
  3. अभिक्रियाशीलता: ये आवर्त सारणी की सर्वाधिक अभिक्रियाशील धातुएं (Most Reactive Metals) हैं।
  4. विद्युत धनात्मकता: ये सर्वाधिक विद्युत धनात्मक (Most Electropositive) तत्व हैं।
  5. भौतिक गुण:
    • ये चांदी के समान सफेद और मुलायम धातुएं होती हैं। (अपवाद: सीजियम सुनहरा होता है)।
    • इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है
    • इनके घनत्व कम होते हैं (Li, Na, K पानी से भी हल्के होते हैं)।
    • इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत कम होते हैं।
  6. संग्रहण: इनकी अत्यधिक अभिक्रियाशीलता के कारण, इन्हें ऑक्सीजन और नमी से बचाने के लिए केरोसीन (Kerosene) में संग्रहीत किया जाता है (लिथियम को मोम में लपेटकर रखते हैं)।
  7. ज्वाला परीक्षण (Flame Test): ये धातुएं ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं, जो इनकी पहचान के लिए उपयोग होता है:
    • लिथियम (Li): किरमिजी लाल (Crimson Red)
    • सोडियम (Na): सुनहरा पीला (Golden Yellow)
    • पोटैशियम (K): बकाइन/हल्का बैंगनी (Lilac)

सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) के प्रमुख यौगिक और उपयोग:


2. समूह 2: क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals)

क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य गुणधर्म:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनके बाहरी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² होता है।
  2. संयोजकता: ये अपने दो संयोजी इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर +2 ऑक्सीकरण अवस्था वाला धनायन (M²⁺) बनाते हैं।
  3. अभिक्रियाशीलता: ये धातुएं भी अभिक्रियाशील होती हैं, लेकिन क्षार धातुओं की तुलना में कम अभिक्रियाशील होती हैं।
  4. भौतिक गुण:
    • ये चांदी जैसी सफेद धातुएं होती हैं, लेकिन क्षार धातुओं की तुलना में अधिक कठोर होती हैं।
    • इनके घनत्व, गलनांक और क्वथनांक क्षार धातुओं से उच्च होते हैं।
  5. ज्वाला परीक्षण: ये भी ज्वाला को विशिष्ट रंग देती हैं:
    • कैल्शियम (Ca): ईंट जैसा लाल (Brick Red)
    • स्ट्रोंशियम (Sr): गहरा लाल (Crimson Red)
    • बेरियम (Ba): सेब जैसा हरा (Apple Green)

मैग्नीशियम (Mg) और कैल्शियम (Ca) के प्रमुख यौगिक और उपयोग:


क्षार धातुएं बनाम क्षारीय मृदा धातुएं (Alkali vs Alkaline Earth Metals)

विशेषताक्षार धातुएं (समूह 1)क्षारीय मृदा धातुएं (समूह 2)
संयोजी इलेक्ट्रॉन1 (ns¹)2 (ns²)
संयोजकता+1+2
अभिक्रियाशीलताअत्यधिक अभिक्रियाशीलकम अभिक्रियाशील (समूह 1 की तुलना में)
कठोरताबहुत मुलायमकठोर
गलनांक / क्वथनांकबहुत कमकम (लेकिन समूह 1 से अधिक)
यौगिकों की प्रकृतिप्रबल क्षारीयक्षारीय

P-ब्लॉक तत्व (p-block Elements)

परिभाषा: वे तत्व जिनके परमाणुओं का सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन p-उपकोश (p-subshell) में प्रवेश करता है, P-ब्लॉक तत्व कहलाते हैं।

आवर्त सारणी में स्थिति: आवर्त सारणी के दाईं ओर स्थित समूह 13 से लेकर समूह 18 तक के तत्व P-ब्लॉक के अंतर्गत आते हैं।

मुख्य विशेषता: यह आवर्त सारणी का एकमात्र ब्लॉक है जिसमें धातु (Metals), अधातु (Non-metals), और उपधातु (Metalloids) तीनों प्रकार के तत्व शामिल हैं।


समूह-वार अध्ययन (Group-wise Study)

1. समूह 13: बोरॉन परिवार (Boron Family)

2. समूह 14: कार्बन परिवार (Carbon Family)

3. समूह 15: नाइट्रोजन परिवार (Nitrogen Family / Pnictogens)

4. समूह 16: ऑक्सीजन परिवार (Oxygen Family / Chalcogens)

5. समूह 17: हैलोजन परिवार (Halogen Family)

6. समूह 18: अक्रिय या उत्कृष्ट गैसें (Inert or Noble Gases)



दैनिक जीवन में अकार्बनिक रसायन

कांच (Glass)

परिभाषा और प्रकृति (Definition and Nature)

कांच एक अक्रिस्टलीय (Amorphous), पारदर्शी या अल्प-पारदर्शी, अकार्बनिक ठोस पदार्थ है। इसे अक्सर अतिशीतलित द्रव (Supercooled Liquid) के रूप में परिभाषित किया जाता है।


कांच का निर्माण और मुख्य घटक (Manufacturing and Main Components)

कांच का निर्माण विभिन्न कच्चे पदार्थों को एक भट्टी में अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग 1500°C) पर पिघलाकर और फिर उस पिघले हुए मिश्रण को धीरे-धीरे नियंत्रित तरीके से ठंडा करके किया जाता है।

कांच के मुख्य कच्चे पदार्थ:

  1. सिलिका (Silica) या रेत (Sand):
    • रासायनिक सूत्र: SiO₂ (सिलिकॉन डाइऑक्साइड)
    • यह कांच का मुख्य और आधारभूत घटक है। यह लगभग 75% होता है।
  2. सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate) या धावन सोडा:
    • रासायनिक सूत्र: Na₂CO₃
    • यह सिलिका के गलनांक को कम करने के लिए एक गालक (Flux) के रूप में काम करता है।
  3. कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate) या चूना पत्थर:
    • रासायनिक सूत्र: CaCO₃
    • यह कांच को स्थायित्व (Stability) प्रदान करता है और उसे जल-रोधी बनाता है।

इन तीनों को मिलाकर जो कांच बनता है, उसे साधारण कांच या सोडा-लाइम ग्लास (Soda-lime glass) कहते हैं, जो सबसे अधिक उपयोग होने वाला कांच है।


कांच के प्रकार और उनके विशिष्ट उपयोग (Types of Glass and their Uses)

कांच के गुणों को बदलने और उसे विशेष उपयोगों के लिए उपयुक्त बनाने हेतु उसमें विभिन्न रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं।

कांच का प्रकार (Type of Glass)मुख्य घटक (Composition) / विशेषतामहत्वपूर्ण उपयोग
सोडा-लाइम ग्लास (Soda-lime Glass)<br>(साधारण या मृदु कांच)Na₂CO₃ + CaCO₃ + SiO₂खिड़की के शीशे, बोतलें, जार, गिलास, ट्यूबलाइट, बल्ब। (सबसे आम और सस्ता कांच)
फ्लिंट ग्लास (Flint Glass)लेड ऑक्साइड (PbO) मिलाया जाता है।लेंस (Lenses), प्रिज्म (Prisms), ऑप्टिकल उपकरण, कैमरा, सूक्ष्मदर्शी, सजावटी कांच के सामान (उच्च अपवर्तनांक और चमक के कारण)।
पाइरेक्स ग्लास (Pyrex Glass)<br>(बोरोसिलिकेट ग्लास)बोरोन ऑक्साइड (B₂O₃) मिलाया जाता है।प्रयोगशाला के उपकरण (Lab apparatus) जैसे बीकर, टेस्ट ट्यूब; ओवन-प्रूफ कुकवेयर (क्योंकि यह ऊष्मा के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है और तापमान में अचानक बदलाव को सह सकता है)।
पोटाश ग्लास (Potash Glass)<br>(कठोर कांच)सोडियम की जगह पोटेशियम कार्बोनेट (K₂CO₃) का उपयोग।सोडा ग्लास से अधिक कठोर और उच्च तापमान सहने वाला। रासायनिक अभिकर्मकों को रखने वाली बोतलें, प्रयोगशाला उपकरण।
क्रुक्स ग्लास (Crookes’ Glass)सीरियम ऑक्साइड (CeO₂) मिलाया जाता है।धूप के चश्मों (Sunglasses) के लेंस बनाने में, क्योंकि यह हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित कर लेता है।
फोटोक्रोमेटिक ग्लास (Photochromatic Glass)सिल्वर हैलाइड (जैसे AgCl or AgBr) मिलाया जाता है।धूप में स्वतः काले होने वाले चश्मों के लेंस में। जब तेज प्रकाश (UV किरणें) पड़ता है, तो सिल्वर हैलाइड टूटकर सिल्वर बनाता है जिससे कांच गहरा हो जाता है। छाया में यह प्रतिक्रिया उलट जाती है।
क्वार्ट्ज ग्लास (Quartz Glass)<br>(सिलिका ग्लास)केवल पिघले हुए **सिलिका (SiO₂) ** से बनता है।बहुत उच्च तापमान सह सकता है। प्रयोगशाला के उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, अंतरिक्ष यान की खिड़कियां।
बुलेटप्रूफ ग्लासकांच की कई परतों के बीच पॉलीकार्बोनेट (Polycarbonate) की एक परत।बुलेटप्रूफ स्क्रीन, वाहन की खिड़कियां।

कांच को रंग प्रदान करने वाले पदार्थ

विभिन्न धातु ऑक्साइडों को पिघले हुए कांच में मिलाकर उसे रंगीन बनाया जाता है।

रंगमिलाया जाने वाला पदार्थ
नीला (Blue)कोबाल्ट ऑक्साइड (Cobalt Oxide)
हरा (Green)क्रोमियम ऑक्साइड (Cr₂O₃) या फेरस ऑक्साइड (FeO)
लाल (Red)कॉपर ऑक्साइड (Cu₂O) या सेलेनियम ऑक्साइड
नारंगी-लालक्यूप्रस ऑक्साइड (Cu₂O)
पीला (Yellow)कैडमियम सल्फाइड या युरेनियम ऑक्साइड
भूरा (Brown)फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃)

सीमेंट (Cement)

परिभाषा और गुण (Definition and Properties)

सीमेंट एक बहुत महीन (Fine), शुष्क, पाउडर जैसा पदार्थ है जो मुख्य रूप से कैल्शियम, सिलिकॉन, एल्युमिनियम और लोहे के ऑक्साइडों से मिलकर बना होता है।

मुख्य गुण: सीमेंट का सबसे महत्वपूर्ण गुण इसका “आसंजी और संसजी” (Adhesive and Cohesive) होना है, जब इसे पानी के साथ मिलाया जाता है।

आधुनिक सीमेंट: पोर्टलैंड सीमेंट (Portland Cement)

आज हम जिस सीमेंट का उपयोग करते हैं, वह मुख्य रूप से पोर्टलैंड सीमेंट है।


सीमेंट का निर्माण और मुख्य घटक (Manufacturing and Main Components)

सीमेंट का निर्माण दो मुख्य प्रकार के कच्चे माल को मिलाकर किया जाता है:

  1. चूनेदार पदार्थ (Calcareous materials): जो चूना (CaO) प्रदान करते हैं।
  2. मृण्मय पदार्थ (Argillaceous materials): जो सिलिका (SiO₂) और एल्युमिना (Al₂O₃) प्रदान करते हैं।

(a) कच्चे माल (Raw Materials):

घटकस्रोतमुख्य रासायनिक यौगिकप्रतिशत (लगभग)
चूना (Lime)चूना पत्थर (Limestone), चाककैल्शियम ऑक्साइड (CaO)60-65% (सबसे प्रमुख)
सिलिका (Silica)चिकनी मिट्टी (Clay), रेतसिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂)20-25%
एल्यूमिना (Alumina)चिकनी मिट्टी, बॉक्साइटएल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃)5-10%
आयरन ऑक्साइडफेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃)2-3%

(b) निर्माण प्रक्रिया:

  1. उपरोक्त कच्चे माल को सही अनुपात में मिलाकर बहुत बारीक पीसा जाता है।
  2. इस पाउडर को एक घूर्णी भट्टी (Rotary Kiln) में 1400-1500°C के बहुत उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है।
  3. इस प्रक्रिया में, कच्चे माल आपस में पिघलकर छोटे-छोटे, कड़े, कंकड़ जैसे पिंड बनाते हैं जिन्हें “क्लिंकर” (Clinker) कहा जाता है।
  4. क्लिंकर को ठंडा करके उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
  5. इस मिश्रण को फिर से बहुत महीन पीसकर सीमेंट पाउडर तैयार किया जाता है।

सीमेंट का जमना और जिप्सम की भूमिका (Setting of Cement and Role of Gypsum)

सीमेंट का जमना (Setting of Cement):

जिप्सम की भूमिका (Role of Gypsum) – अत्यंत महत्वपूर्ण


सीमेंट से संबंधित अन्य पद (Other terms related to Cement)


उर्वरक (Fertilizers)

परिभाषा (Definition)

उर्वरक वे रासायनिक पदार्थ हैं जिन्हें मिट्टी में मिलाया जाता है ताकि मिट्टी की उर्वरता (Fertility) को बढ़ाया जा सके और पौधों की स्वस्थ वृद्धि (Healthy Growth) के लिए आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) प्रदान किए जा सकें।


पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व (Essential Nutrients for Plants)

पौधों को अपनी वृद्धि के लिए कई पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उनकी आवश्यकता की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

1. प्राथमिक या मुख्य पोषक तत्व (Primary or Macronutrients):

इन पोषक तत्वों की पौधों को सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। इन्हें NPK के नाम से जाना जाता है, जो उर्वरक उद्योग का आधार है।

2. द्वितीयक पोषक तत्व (Secondary Nutrients):

इनकी आवश्यकता प्राथमिक पोषक तत्वों से कम लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों से अधिक होती है।

3. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients):

इनकी आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन ये भी वृद्धि के लिए अनिवार्य हैं।


उर्वरकों के प्रकार (Types of Fertilizers)

उर्वरकों को उनमें मौजूद प्राथमिक पोषक तत्वों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

(a) नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक (Nitrogenous Fertilizers):

ये वे उर्वरक हैं जो पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।

(b) फॉस्फेटी उर्वरक (Phosphatic Fertilizers):

ये वे उर्वरक हैं जो फॉस्फोरस (आमतौर पर फॉस्फेट, P₂O₅ के रूप में) प्रदान करते हैं।

(c) पोटाश उर्वरक (Potassic Fertilizers):

ये वे उर्वरक हैं जो पोटेशियम प्रदान करते हैं। भारत पोटाश उर्वरकों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है।

(d) मिश्रित उर्वरक (Complex or Mixed Fertilizers):

ये वे उर्वरक हैं जिनमें एक से अधिक प्राथमिक पोषक तत्व (N, P, K) होते हैं।


उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभाव


प्रमुख औषधियाँ और उनके कार्य

रसायन चिकित्सा (Chemotherapy): रासायनिक पदार्थों (औषधियों) का उपयोग करके रोगों के उपचार को रसायन चिकित्सा कहते हैं। इन औषधियों को उनके चिकित्सीय प्रभाव के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।


1. ज्वरनाशी (Antipyretics)


2. पीड़ाहारी / दर्दनाशक (Analgesics)

इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

(a) अ-स्वापक (गैर-नशीले) पीड़ाहारी (Non-narcotic Analgesics):

(b) स्वापक (नशीले) पीड़ाहारी (Narcotic Analgesics):


3. प्रतिजैविक (Antibiotics)


4. पूर्तिरोधी (Antiseptics) और विसंक्रामी (Disinfectants)

ये दोनों ही सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को रोकने का काम करते हैं, लेकिन इनके उपयोग में अंतर है।

(a) पूर्तिरोधी (Antiseptics):

(b) विसंक्रामी/कीटाणुनाशक (Disinfectants):


अन्य महत्वपूर्ण औषधियाँ

विस्फोटक (Explosives)

परिभाषा

विस्फोटक वे अस्थिर रासायनिक यौगिक या मिश्रण होते हैं जो बहुत ही कम समय में अत्यधिक तीव्र गति से अपघटित (Decompose) होते हैं। इस प्रक्रिया में, वे बहुत बड़ी मात्रा में ऊष्मा (Heat), प्रकाश (Light), ध्वनि (Sound) और उच्च दाब वाली गैसें (High-pressure Gases) उत्पन्न करते हैं, जिससे एक विनाशकारी विस्फोट (Explosion) होता है।


प्रमुख विस्फोटक और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. डायनामाइट (Dynamite)

2. टी.एन.टी (T.N.T)

3. टी.एन.जी (T.N.G)

4. आर.डी.एक्स (R.D.X)

5. टी.एन.पी (T.N.P)

6. गन पाउडर (Gunpowder)


सारांश सारणी: एक नज़र में

विस्फोटक का नामपूर्ण रूप / मुख्य घटकमहत्वपूर्ण तथ्य
डायनामाइटनाइट्रोग्लिसरीनआविष्कारक – अल्फ्रेड नोबेल
T.N.Tट्राई-नाइट्रो-टॉलूईनसैन्य बमों में व्यापक उपयोग।
T.N.Gट्राई-नाइट्रो-ग्लिसरीनडायनामाइट का मुख्य घटक, “नोबेल का तेल”।
R.D.Xरिसर्च एंड डेवलप्ड एक्सप्लोसिवबहुत शक्तिशाली प्लास्टिक विस्फोटक, अन्य नाम- साइक्लोनाइट।
पिक्रिक एसिडट्राई-नाइट्रो-फिनोल (TNP)पीला क्रिस्टलीय ठोस।
गन पाउडरKNO₃ + चारकोल + सल्फरएक मिश्रण, सबसे पुराने विस्फोटकों में से एक।

खाद्य रसायन (Food Chemistry)

परिभाषा: खाद्य रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो खाद्य पदार्थों के रासायनिक घटकों (Chemical Components), उनकी संरचना, उनके गुणों, और भोजन के प्रसंस्करण, भंडारण और पाचन के दौरान होने वाले रासायनिक परिवर्तनों (Chemical Changes) का अध्ययन करती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, इसके दो सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं:

  1. खाद्य परिरक्षक (Food Preservatives)
  2. कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Artificial Sweeteners)

1. खाद्य परिरक्षक (Food Preservatives)

परिभाषा:

खाद्य परिरक्षक वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जिन्हें खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है ताकि सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) जैसे बैक्टीरिया, यीस्ट और फफूंद की वृद्धि को रोका जा सके या धीमा किया जा सके। इससे भोजन को खराब (Spoilage) होने से बचाया जाता है और उसकी शेल्फ लाइफ (Shelf life) यानी उसे संग्रहीत रखने की अवधि को बढ़ाया जाता है।

परिरक्षण के सामान्य तरीके (General Methods of Preservation):

प्रमुख रासायनिक खाद्य परिरक्षक (Important Chemical Food Preservatives):

(यह खंड परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)

  1. सोडियम बेंजोएट (Sodium Benzoate):
    • रासायनिक सूत्र: C₇H₅NaO₂
    • उपयोग: यह सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले परिरक्षकों में से एक है। इसका उपयोग विशेष रूप से अम्लीय खाद्य पदार्थों (Acidic Foods) जैसे फलों के रस, जैम, जेली, अचार और शीतल पेय (Soft drinks) को संरक्षित करने के लिए किया जाता है।
    • कार्य: यह यीस्ट और फफूंद की वृद्धि को रोकने में बहुत प्रभावी है।
  2. सोडियम मेटाबाईसल्फाइट (Sodium Metabisulphite):
    • रासायनिक सूत्र: Na₂S₂O₅
    • उपयोग: इसका उपयोग जैम, स्क्वैश, और केचप जैसे खाद्य पदार्थों को परिरक्षित करने के लिए किया जाता है। यह रंगहीन खाद्य पदार्थों के लिए उपयुक्त है।
  3. सॉर्बिक एसिड (Sorbic Acid) और इसके लवण:
    • इनका उपयोग पनीर (Cheese), बेकरी उत्पादों और वाइन को परिरक्षित करने में होता है।
  4. सिरका (Vinegar):
    • मुख्य घटक: एसिटिक एसिड (Acetic Acid)
    • यह एक प्राकृतिक परिरक्षक है जिसका उपयोग अचार, सॉस और केचप में किया जाता है।

2. कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Artificial Sweeteners)

परिभाषा:

कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ वे रासायनिक यौगिक होते हैं जो स्वाद में चीनी (सुक्रोज) की तरह मीठे होते हैं, लेकिन या तो शरीर में मेटाबोलाइज नहीं होते (यानी कैलोरी प्रदान नहीं करते) या उनकी मिठास इतनी अधिक होती है कि बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं, जिससे नगण्य कैलोरी मिलती है।

प्रमुख कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Important Artificial Sweeteners):

स्वीटनर का नामचीनी की तुलना में मिठास (लगभग)महत्वपूर्ण तथ्य
सैकरिन (Saccharin)~550 गुना मीठा• यह पहला खोजा गया और सबसे लोकप्रिय कृत्रिम स्वीटनर है।<br>• यह खाना पकाने के तापमान पर स्थिर नहीं होता है।<br>• कुछ लोगों को इसका स्वाद धातु जैसा या कड़वा लगता है।
एस्पार्टेम (Aspartame)~100-200 गुना मीठा• यह सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला स्वीटनर है।<br>• यह अमीनो एसिड (एस्पार्टिक एसिड और फेनिलएलनिन) से बना होता है।<br>• यह खाना पकाने या बेक करने के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि यह गर्म करने पर अपघटित हो जाता है। इसका उपयोग केवल ठंडे खाद्य पदार्थों और शीतल पेयों में किया जाता है। (यह एक बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है)
एलीटेम (Alitame)~2000 गुना मीठा• यह एस्पार्टेम की तुलना में अधिक स्थिर और बहुत अधिक मीठा होता है, जिससे इसकी मिठास को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
सुक्रालोज (Sucralose)~600 गुना मीठा• यह सुक्रोज (चीनी) का एक व्युत्पन्न है।<br>• इसका स्वाद चीनी जैसा ही होता है और यह खाना पकाने के तापमान पर स्थिर (Stable) रहता है।
नियोटेम (Neotame)~7,000-13,000 गुना मीठा• यह एस्पार्टेम का एक व्युत्पन्न है और अब तक के सबसे मीठे पदार्थों में से एक है। यह ऊष्मा के प्रति भी स्थिर है।
साइक्लेमेट (Cyclamate)~30-50 गुना मीठा• कुछ देशों में इसके उपयोग पर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगा दिया गया है।