मिश्र धातु
मिश्र धातु (Alloys)
परिभाषा (Definition)
मिश्र धातु दो या दो से अधिक धातुओं का, या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) होती है।
- निर्माण: मिश्र धातुओं को आमतौर पर मुख्य धातु (Base Metal) को पिघलाकर, फिर उसमें अन्य तत्वों को एक निश्चित अनुपात में घोलकर और फिर मिश्रण को ठंडा करके तैयार किया जाता है।
- प्रकृति: मिश्र धातुएं, मिश्रण होने के बावजूद, अक्सर एक शुद्ध धातु के समान भौतिक गुण प्रदर्शित करती हैं, लेकिन उनके गुणधर्म उनके अवयवी तत्वों से भिन्न होते हैं।
- अमलगम (Amalgam): यदि किसी मिश्र धातु में एक घटक पारा (Mercury – Hg) है, तो उसे विशेष रूप से अमलगम कहा जाता है। (उदाहरण: दंत चिकित्सक द्वारा दांतों में भरी जाने वाली चांदी-टिन अमलगम)। लोहा (Iron) पारे के साथ अमलगम नहीं बनाता है।
मिश्र धातु बनाने का उद्देश्य (Purpose of Alloying)
शुद्ध धातुओं में अक्सर कुछ कमजोरियां होती हैं, जैसे नरम होना, आसानी से संक्षारित होना (जंग लगना), या कम मजबूती। मिश्र धातुएं इन कमियों को दूर करने और धातुओं के गुणों को हमारी आवश्यकता के अनुसार बेहतर बनाने के लिए बनाई जाती हैं।
मिश्र धातु बनाने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- कठोरता बढ़ाने के लिए (To Increase Hardness):
- उदाहरण: शुद्ध सोना (24 कैरेट) बहुत मुलायम होता है और उससे आसानी से आभूषण नहीं बनाए जा सकते। इसे कठोर बनाने के लिए इसमें तांबा (Copper) या चांदी (Silver) मिलाया जाता है, जिससे आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का निर्माण होता है। इसी तरह, शुद्ध लोहा भी काफी नरम होता है, लेकिन उसमें कार्बन मिलाने पर स्टील बनता है जो बहुत कठोर और मजबूत होता है।
- संक्षारण प्रतिरोध (जंग प्रतिरोध) बढ़ाने के लिए (To Increase Corrosion Resistance):
- उदाहरण: लोहे में आसानी से जंग लग जाता है। लेकिन जब इसमें क्रोमियम (Chromium) और निकल (Nickel) मिलाया जाता है, तो स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) बनता है, जिसमें जंग नहीं लगता। इसीलिए इसका उपयोग बर्तन, सर्जिकल उपकरण और मशीनरी के पुर्जे बनाने में होता है।
- गलनांक को कम करने के लिए (To Lower the Melting Point):
- उदाहरण: सोल्डर (Solder), जो सीसा (Lead) और टिन (Tin) का एक मिश्र धातु है, का गलनांक सीसा और टिन दोनों के व्यक्तिगत गलनांक से कम होता है। इस गुण के कारण इसका उपयोग विद्युत तारों को एक साथ जोड़ने (टांका लगाने) के लिए किया जाता है।
- विद्युत प्रतिरोध को बढ़ाने के लिए (To Increase Electrical Resistance):
- उदाहरण: नाइक्रोम (Nichrome) (निकल, क्रोमियम, आयरन का मिश्र धातु) और कांस्टेंटन (Constantan) (कॉपर, निकल का मिश्र धातु) का विद्युत प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। इस गुण के कारण इनका उपयोग हीटिंग एलीमेंट (Heating Elements) में किया जाता है, जैसे कि इलेक्ट्रिक हीटर, टोस्टर और आयरन (इस्तरी) में।
- ढलाई की क्षमता में सुधार के लिए (To Improve Casting Ability):
- कुछ मिश्र धातुएं शुद्ध धातुओं की तुलना में ठंडा होने पर कम सिकुड़ती हैं, जिससे वे मूर्तियों और मशीन के पुर्जों की ढलाई (Casting) के लिए बेहतर होती हैं।
- उदाहरण: कांसा (Bronze) (कॉपर और टिन) का उपयोग मूर्तियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
- रंग और दिखावट बदलने के लिए:
- उदाहरण: पीतल (Brass) (कॉपर और जिंक) का सुनहरा रंग होता है, जिसका उपयोग सजावटी वस्तुओं और संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए किया जाता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, मिश्र धातु बनाना धातुओं के गुणों को अनुकूलित करने और उन्हें हमारी विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए अधिक उपयोगी, टिकाऊ और प्रभावी बनाने की एक शक्तिशाली तकनीक है। शुद्ध धातुओं की कमियों को दूर करके, मिश्र धातुएं इंजीनियरिंग, निर्माण, घरेलू उपयोग और प्रौद्योगिकी के हर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रमुख मिश्र धातुएं, उनके घटक और उपयोग
1. तांबा (Copper – Cu) आधारित मिश्र धातुएं
| मिश्र धातु का नाम | मुख्य घटक (Composition) | महत्वपूर्ण उपयोग |
| पीतल (Brass) | तांबा (Cu) + जस्ता/जिंक (Zn) | बर्तन, कारतूस के खोखे (Cartridges), सजावटी सामान, वाद्ययंत्र (जैसे तुरही)। |
| कांसा (Bronze) | तांबा (Cu) + टिन (Sn) | मूर्तियाँ (Statues), पदक (Medals), सिक्के (Coins), जहाज के प्रोपेलर, घंटियाँ। |
| जर्मन सिल्वर (नाम में सिल्वर है, पर इसमें सिल्वर नहीं होता) | तांबा (Cu) + जस्ता (Zn) + निकल (Ni) | बर्तन, सजावटी सामान। |
| गनमेटल | तांबा (Cu) + टिन (Sn) + जस्ता (Zn) | तोप (Guns), गियर, बियरिंग। |
2. लोहा (Iron – Fe) आधारित मिश्र धातुएं (स्टील्स)
| मिश्र धातु का नाम | मुख्य घटक (Composition) | महत्वपूर्ण उपयोग |
| स्टील | लोहा (Fe) + कार्बन (C) (0.1% से 1.5%) | निर्माण (पुल, इमारतें), रेल की पटरियां, जहाज। |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा (Fe) + क्रोमियम (Cr) + निकल (Ni) | जंगरोधी बर्तन (Utensils), सर्जिकल उपकरण, घड़ियाँ, वाहन के पुर्जे। |
| मैंगनीज स्टील | लोहा (Fe) + मैंगनीज (Mn) | तिजोरियाँ (Safes), चट्टान तोड़ने वाली मशीनें, हेलमेट। |
| नाइक्रोम (Heater Coil) | निकल (Ni) + क्रोमियम (Cr) + लोहा (Fe) | हीटिंग एलीमेंट (Heating Element) जैसे इलेक्ट्रिक हीटर, टोस्टर, आयरन (इस्तरी) की कॉइल में। इसका उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक होता है। |
3. एल्युमिनियम (Aluminium – Al) आधारित मिश्र धातुएं
| मिश्र धातु का नाम | मुख्य घटक (Composition) | महत्वपूर्ण उपयोग |
| ड्यूरालुमिन | एल्युमिनियम (Al) + तांबा (Cu) + मैंगनीज (Mn) + मैग्नीशियम (Mg) | हवाई जहाज (Aircrafts) के हिस्से और प्रेशर कुकर बनाने में (क्योंकि यह हल्का और मजबूत होता है)। |
| मैग्नेलियम | एल्युमिनियम (Al) + मैग्नीशियम (Mg) | हल्का होने के कारण हवाई जहाज के पुर्जे, तराजू (Balance beams) बनाने में। |
4. सीसा (Lead – Pb) आधारित मिश्र धातुएं
| मिश्र धातु का नाम | मुख्य घटक (Composition) | महत्वपूर्ण उपयोग |
| सोल्डर (Solder) (टांका) | सीसा (Pb) + टिन (Sn) | इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में टांका लगाने (Soldering) और तारों को जोड़ने के लिए। इसका गलनांक कम होता है। |
| टाइप मेटल | सीसा (Pb) + टिन (Sn) + एंटीमनी (Sb) | प्रिंटिंग प्रेस में टाइप बनाने के लिए। |
5. अन्य महत्वपूर्ण मिश्र धातुएं
| मिश्र धातु का नाम | मुख्य घटक (Composition) | महत्वपूर्ण उपयोग |
| अमलगम (Amalgam) | पारा (Mercury – Hg) + अन्य धातु (Ag, Sn, Zn आदि) | दंत चिकित्सक द्वारा दांतों में भराई (Dental Filling) के लिए। |
| 22 कैरेट सोना | सोना (Au) + तांबा (Cu) या चांदी (Ag) | आभूषण (Jewellery) बनाने के लिए (क्योंकि शुद्ध सोना बहुत मुलायम होता है)। |
| कृत्रिम सोना (Artificial Gold / Rolled Gold) | तांबा (Cu) + एल्युमिनियम (Al) | सस्ते आभूषण बनाने में। |
| कांस्टेंटन | तांबा (Cu) + निकल (Ni) | थर्मोकपल और बिजली के उपकरणों में। |
सारांश सारणी: परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण
| मिश्र धातु | घटक | उपयोग |
| पीतल (Brass) | Cu + Zn | बर्तन |
| कांसा (Bronze) | Cu + Sn | मूर्तियाँ, पदक |
| स्टेनलेस स्टील | Fe + Cr + Ni | जंगरोधी बर्तन |
| सोल्डर | Pb + Sn | टांका लगाना (Soldering) |
| जर्मन सिल्वर | Cu + Zn + Ni | बर्तन (चांदी रहित) |
| ड्यूरालुमिन | Al + Cu (+ Mg, Mn) | हवाई जहाज के हिस्से |
| नाइक्रोम | Ni + Cr (+ Fe) | हीटिंग कॉइल |
यह सारणी आपको मिश्र धातुओं से संबंधित प्रश्नों के लिए अच्छी तरह से तैयार करने में मदद करेगी।
महत्वपूर्ण तत्व और उनके यौगिक
महत्वपूर्ण तत्व और उनके यौगिक
हाइड्रोजन (Hydrogen – H)
- खोजकर्ता: हेनरी कैवेंडिश (Henry Cavendish)
- नामकरण: लेवोइसियर (Lavoisier)
- यह ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है।
आवर्त सारणी में स्थान (Position in Periodic Table)
- हाइड्रोजन की परमाणु संख्या 1 है (¹₁H)।
- विवादास्पद स्थिति: आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादास्पद (Controversial) है क्योंकि इसके गुण समूह 1 (क्षार धातुओं) और समूह 17 (हैलोजन) दोनों से मिलते-जुलते हैं।
- क्षार धातुओं से समानता: क्षार धातुओं की तरह, हाइड्रोजन भी एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (H⁺) बनाता है।
- हैलोजन से समानता: हैलोजन की तरह, हाइड्रोजन भी एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (H⁻, हाइड्राइड आयन) बना सकता है और द्विपरमाणुक अणु (H₂) बनाता है।
- हालांकि, आमतौर पर इसे इसकी विशेषताओं के कारण समूह 1 के शीर्ष पर रखा जाता है।
हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of Hydrogen)
हाइड्रोजन एकमात्र ऐसा तत्व है जिसके समस्थानिकों के अलग-अलग नाम हैं।
| समस्थानिक का नाम | प्रतीक (Symbol) | नाभिकीय संरचना (p = प्रोटॉन, n = न्यूट्रॉन) | मुख्य विशेषता |
| प्रोटियम | ¹₁H | 1 p, 0 n | यह साधारण हाइड्रोजन है और प्रकृति में सबसे अधिक (99.98%) पाया जाता है। |
| ड्यूटीरियम | ²₁H or D | 1 p, 1 n | इसे भारी हाइड्रोजन (Heavy Hydrogen) भी कहते हैं। यह भारी जल (D₂O) का निर्माण करता है। |
| ट्राइटियम | ³₁H or T | 1 p, 2 n | यह एक रेडियोधर्मी (Radioactive) समस्थानिक है और इसका अर्ध-आयु काल लगभग 12.3 वर्ष होता है। |
जल (Water – H₂O)
जल, हाइड्रोजन का सबसे महत्वपूर्ण और सामान्य यौगिक है। इसे सार्वत्रिक विलायक (Universal Solvent) कहा जाता है।
जल के गुण (Properties of Water)
- उच्च क्वथनांक (High Boiling Point): पानी का क्वथनांक (100°C) असामान्य रूप से उच्च होता है, जिसका कारण इसके अणुओं के बीच मजबूत हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding) का होना है।
- घनत्व (Density): जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है। यही कारण है कि ठंडे प्रदेशों में झीलें सतह पर जम जाती हैं, लेकिन नीचे पानी द्रव अवस्था में रहता है, जिससे जलीय जीवन संभव हो पाता है।
- पृष्ठ तनाव (Surface Tension): हाइड्रोजन बंधन के कारण इसका पृष्ठ तनाव भी उच्च होता है।
कठोर और मृदु जल (Hard and Soft Water)
- मृदु जल (Soft Water): वह जल जो साबुन के साथ आसानी से और अधिक झाग देता है, मृदु जल कहलाता है। (जैसे- वर्षा का जल, आसुत जल)।
- कठोर जल (Hard Water): वह जल जो साबुन के साथ कठिनाई से और कम झाग देता है, कठोर जल कहलाता है।
जल की कठोरता का कारण:
जल की कठोरता उसमें कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) के घुलनशील लवणों (Soluble Salts) की उपस्थिति के कारण होती है।
जल की कठोरता के प्रकार और उसे दूर करने के उपाय
(a) अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness)
- कारण: यह जल में कैल्शियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) के बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻) लवणों (Ca(HCO₃)₂, Mg(HCO₃)₂) के घुले होने के कारण होती है।
- दूर करने के उपाय:
- उबालकर (By Boiling): जल को उबालने पर अघुलनशील कार्बोनेट बनते हैं जो नीचे बैठ जाते हैं और जिन्हें छानकर अलग किया जा सकता है।
Ca(HCO₃)₂ –(ऊष्मा)–> CaCO₃↓ + H₂O + CO₂ - क्लार्क की विधि (Clark’s Method): इसमें बुझा हुआ चूना (Ca(OH)₂) मिलाया जाता है।
- उबालकर (By Boiling): जल को उबालने पर अघुलनशील कार्बोनेट बनते हैं जो नीचे बैठ जाते हैं और जिन्हें छानकर अलग किया जा सकता है।
(b) स्थायी कठोरता (Permanent Hardness)
- कारण: यह जल में कैल्शियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) के क्लोराइड (Cl⁻) और सल्फेट (SO₄²⁻) लवणों (CaCl₂, CaSO₄, MgCl₂, MgSO₄) के घुले होने के कारण होती है।
- दूर करने के उपाय:
- इसे उबालकर दूर नहीं किया जा सकता है।
- धावन सोडा (Washing Soda) मिलाकर: सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) मिलाने पर अघुलनशील कार्बोनेट बनते हैं।
CaCl₂ + Na₂CO₃ → CaCO₃↓ + 2NaCl - आयन-विनिमय विधि (Ion-Exchange Method): इस विधि में जिओलाइट (Zeolites) या आयन-विनिमय रेजिन का उपयोग करके कठोर जल को मृदु बनाया जाता है। जल शोधन (Water Purification) के लिए यह एक आधुनिक और प्रभावी विधि है।
भारी जल (Heavy Water – D₂O)
- परिभाषा: भारी जल, हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटीरियम (D) का ऑक्साइड है। इसका रासायनिक सूत्र D₂O और आणविक भार 20 (साधारण जल का 18) होता है।
- खोजकर्ता: हेरोल्ड यूरे (Harold Urey) – 1931
- निर्माण: साधारण जल के वैद्युत अपघटन द्वारा।
उपयोग (Uses of Heavy Water)
भारी जल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों (Nuclear Reactors) में होता है।
- मंदक (Moderator) के रूप में: इसका मुख्य कार्य विखंडन अभिक्रिया में उत्पन्न तीव्र गति वाले न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करना है ताकि वे आगे श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रख सकें। ग्रेफाइट का भी उपयोग मंदक के रूप में होता है, लेकिन D₂O बेहतर माना जाता है। (यह प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है)
- शीतलक (Coolant) के रूप में: कुछ रिएक्टरों में ऊष्मा को हटाने के लिए।
- ट्रैसर यौगिक के रूप में: ड्यूटेरियम का उपयोग रासायनिक और जैविक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि का अध्ययन करने के लिए भी किया जाता है।
S-ब्लॉक तत्व (s-block Elements)
परिभाषा: वे तत्व जिनके परमाणुओं के सबसे बाहरी कोश का अंतिम इलेक्ट्रॉन s-उपकोश (s-subshell) में प्रवेश करता है, S-ब्लॉक तत्व कहलाते हैं।
आवर्त सारणी में स्थिति: आवर्त सारणी के बाईं ओर स्थित समूह 1 और समूह 2 के तत्व S-ब्लॉक के अंतर्गत आते हैं।
1. समूह 1: क्षार धातुएं (Alkali Metals)
- तत्व: लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबिडियम (Rb), सीजियम (Cs), फ्रांसियम (Fr)। (हाइड्रोजन को क्षार धातु नहीं माना जाता)।
- “क्षार धातु” नाम क्यों?: क्योंकि इनके हाइड्रॉक्साइड (जैसे NaOH, KOH) जल में घुलकर प्रबल क्षार (Strong Alkalis) बनाते हैं।
क्षार धातुओं के सामान्य गुणधर्म:
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनके बाहरी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns¹ होता है।
- संयोजकता (Valency): ये आसानी से अपना एकमात्र संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर +1 ऑक्सीकरण अवस्था वाला धनायन (M⁺) बनाते हैं।
- अभिक्रियाशीलता: ये आवर्त सारणी की सर्वाधिक अभिक्रियाशील धातुएं (Most Reactive Metals) हैं।
- विद्युत धनात्मकता: ये सर्वाधिक विद्युत धनात्मक (Most Electropositive) तत्व हैं।
- भौतिक गुण:
- ये चांदी के समान सफेद और मुलायम धातुएं होती हैं। (अपवाद: सीजियम सुनहरा होता है)।
- इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
- इनके घनत्व कम होते हैं (Li, Na, K पानी से भी हल्के होते हैं)।
- इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत कम होते हैं।
- संग्रहण: इनकी अत्यधिक अभिक्रियाशीलता के कारण, इन्हें ऑक्सीजन और नमी से बचाने के लिए केरोसीन (Kerosene) में संग्रहीत किया जाता है (लिथियम को मोम में लपेटकर रखते हैं)।
- ज्वाला परीक्षण (Flame Test): ये धातुएं ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं, जो इनकी पहचान के लिए उपयोग होता है:
- लिथियम (Li): किरमिजी लाल (Crimson Red)
- सोडियम (Na): सुनहरा पीला (Golden Yellow)
- पोटैशियम (K): बकाइन/हल्का बैंगनी (Lilac)
सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) के प्रमुख यौगिक और उपयोग:
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): साधारण नमक।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): कास्टिक सोडा, साबुन और कागज उद्योग में।
- सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃·10H₂O): धावन सोडा, जल की कठोरता दूर करने में।
- सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃): बेकिंग सोडा, एंटासिड में।
- पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃): शोरा, उर्वरक और बारूद में।
- द्रव सोडियम (Liquid Sodium): नाभिकीय रिएक्टरों में शीतलक (Coolant) के रूप में।
2. समूह 2: क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals)
- तत्व: बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca), स्ट्रोंशियम (Sr), बेरियम (Ba), रेडियम (Ra)।
- “क्षारीय मृदा धातु” नाम क्यों?: “क्षारीय” क्योंकि इनके ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं, और “मृदा” (Earth) क्योंकि इनके ऑक्साइड (जैसे मैग्नीशिया, लाइम) पृथ्वी की भूपर्पटी में बहुतायत से पाए जाते थे।
क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य गुणधर्म:
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनके बाहरी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² होता है।
- संयोजकता: ये अपने दो संयोजी इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर +2 ऑक्सीकरण अवस्था वाला धनायन (M²⁺) बनाते हैं।
- अभिक्रियाशीलता: ये धातुएं भी अभिक्रियाशील होती हैं, लेकिन क्षार धातुओं की तुलना में कम अभिक्रियाशील होती हैं।
- भौतिक गुण:
- ये चांदी जैसी सफेद धातुएं होती हैं, लेकिन क्षार धातुओं की तुलना में अधिक कठोर होती हैं।
- इनके घनत्व, गलनांक और क्वथनांक क्षार धातुओं से उच्च होते हैं।
- ज्वाला परीक्षण: ये भी ज्वाला को विशिष्ट रंग देती हैं:
- कैल्शियम (Ca): ईंट जैसा लाल (Brick Red)
- स्ट्रोंशियम (Sr): गहरा लाल (Crimson Red)
- बेरियम (Ba): सेब जैसा हरा (Apple Green)
मैग्नीशियम (Mg) और कैल्शियम (Ca) के प्रमुख यौगिक और उपयोग:
- मैग्नीशियम (Mg):
- क्लोरोफिल (Chlorophyll) का एक आवश्यक घटक है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
- फ्लैश बल्ब और आतिशबाजी (Fireworks) में (चमकीले सफेद प्रकाश के लिए)।
- मैग्नेलियम (Magnelium) जैसी हल्की मिश्र धातुएं बनाने में।
- मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (Mg(OH)₂): एक एंटासिड (पेट की अम्लता दूर करने के लिए)।
- कैल्शियम (Ca):
- हमारी हड्डियों और दांतों का मुख्य घटक।
- चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट – CaCO₃): सीमेंट, मार्बल और चाक का मुख्य घटक।
- बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड – CaO): सीमेंट और कांच उद्योग में।
- बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड – Ca(OH)₂): सफेदी करने और ब्लीचिंग पाउडर बनाने में।
- जिप्सम (कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट – CaSO₄·2H₂O): सीमेंट और प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने में।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP): टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने में।
क्षार धातुएं बनाम क्षारीय मृदा धातुएं (Alkali vs Alkaline Earth Metals)
| विशेषता | क्षार धातुएं (समूह 1) | क्षारीय मृदा धातुएं (समूह 2) |
| संयोजी इलेक्ट्रॉन | 1 (ns¹) | 2 (ns²) |
| संयोजकता | +1 | +2 |
| अभिक्रियाशीलता | अत्यधिक अभिक्रियाशील | कम अभिक्रियाशील (समूह 1 की तुलना में) |
| कठोरता | बहुत मुलायम | कठोर |
| गलनांक / क्वथनांक | बहुत कम | कम (लेकिन समूह 1 से अधिक) |
| यौगिकों की प्रकृति | प्रबल क्षारीय | क्षारीय |
P-ब्लॉक तत्व (p-block Elements)
परिभाषा: वे तत्व जिनके परमाणुओं का सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन p-उपकोश (p-subshell) में प्रवेश करता है, P-ब्लॉक तत्व कहलाते हैं।
आवर्त सारणी में स्थिति: आवर्त सारणी के दाईं ओर स्थित समूह 13 से लेकर समूह 18 तक के तत्व P-ब्लॉक के अंतर्गत आते हैं।
मुख्य विशेषता: यह आवर्त सारणी का एकमात्र ब्लॉक है जिसमें धातु (Metals), अधातु (Non-metals), और उपधातु (Metalloids) तीनों प्रकार के तत्व शामिल हैं।
समूह-वार अध्ययन (Group-wise Study)
1. समूह 13: बोरॉन परिवार (Boron Family)
- तत्व: बोरॉन (B), एल्युमिनियम (Al), गैलियम (Ga), इंडियम (In), थैलियम (Tl)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np¹
- प्रमुख तत्व:
- बोरॉन (B): एक उपधातु (Metalloid) है। यह बोरेक्स (Borax – Na₂B₄O₇·10H₂O) और बोरिक एसिड (H₃BO₃) जैसे यौगिक बनाता है, जिनका उपयोग कांच उद्योग और एंटीसेप्टिक के रूप में होता है।
- एल्युमिनियम (Al): पृथ्वी की पपड़ी में पाई जाने वाली सबसे प्रचुर धातु है। यह हल्की, मजबूत और संक्षारण प्रतिरोधी होती है। इसका मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Bauxite) है। इसका उपयोग हवाई जहाज, बर्तन और पन्नी (foil) बनाने में होता है।
2. समूह 14: कार्बन परिवार (Carbon Family)
- तत्व: कार्बन (C), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), टिन (Sn), लेड (Pb)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np²
- प्रमुख तत्व:
- कार्बन (C): एक अधातु है और जीवन का आधार है।
- अपरूप (Allotropes): हीरा (Diamond) (सबसे कठोर पदार्थ), ग्रेफाइट (Graphite) (विद्युत का सुचालक, स्नेहक) और फुलरीन (Fullerene C-60)।
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन का स्वयं के परमाणुओं के साथ जुड़कर लंबी श्रृंखला बनाने का अद्वितीय गुण।
- सिलिकॉन (Si): एक उपधातु है। पृथ्वी की पपड़ी में दूसरा सबसे प्रचुर तत्व (ऑक्सीजन के बाद)।
- उपयोग: यह एक अर्धचालक (Semiconductor) है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, ट्रांजिस्टर और सौर सेल बनाने में होता है। सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) को सिलिका या रेत कहते हैं।
- टिन (Sn): धातु, सोल्डर (Solder) मिश्र धातु का घटक।
- लेड/सीसा (Pb): भारी, विषाक्त धातु।
- कार्बन (C): एक अधातु है और जीवन का आधार है।
3. समूह 15: नाइट्रोजन परिवार (Nitrogen Family / Pnictogens)
- तत्व: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), बिस्मथ (Bi)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np³
- प्रमुख तत्व:
- नाइट्रोजन (N): अधातु। वायुमंडल में सबसे प्रचुर गैस (लगभग 78%)।
- उपयोग: पौधों के लिए आवश्यक, अमोनिया (NH₃ – हैबर प्रक्रम) और नाइट्रिक एसिड (HNO₃) के निर्माण में, खाद्य पैकेजिंग (चिप्स के पैकेट) में अक्रिय वातावरण प्रदान करने के लिए, द्रव नाइट्रोजन का उपयोग प्रशीतक (Refrigerant) के रूप में होता है।
- फॉस्फोरस (P): अधातु।
- अपरूप: सफेद/पीला फॉस्फोरस (अत्यधिक अभिक्रियाशील), लाल फॉस्फोरस (माचिस की तीलियों में उपयोग होता है)।
- यह हड्डियों, दांतों और DNA/RNA का एक आवश्यक घटक है।
- नाइट्रोजन (N): अधातु। वायुमंडल में सबसे प्रचुर गैस (लगभग 78%)।
4. समूह 16: ऑक्सीजन परिवार (Oxygen Family / Chalcogens)
- तत्व: ऑक्सीजन (O), सल्फर (S), सेलेनियम (Se), टेल्यूरियम (Te), पोलोनियम (Po)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np⁴
- प्रमुख तत्व:
- ऑक्सीजन (O): अधातु। जीवन के लिए आवश्यक। पृथ्वी की पपड़ी में सबसे प्रचुर तत्व।
- अपरूप: ओजोन (O₃), जो समताप मंडल में सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से हमारी रक्षा करता है।
- सल्फर (S): अधातु।
- उपयोग: रबर के वल्कनीकरण (Vulcanization of Rubber) में, सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄ – “अम्लों का राजा”) के निर्माण में, बारूद में। लहसुन और प्याज की गंध सल्फर यौगिकों के कारण होती है।
- ऑक्सीजन (O): अधातु। जीवन के लिए आवश्यक। पृथ्वी की पपड़ी में सबसे प्रचुर तत्व।
5. समूह 17: हैलोजन परिवार (Halogen Family)
- तत्व: फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), एस्टैटिन (At)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np⁵
- “हैलोजन” नाम का अर्थ: “लवण उत्पादक” (Salt-producer)।
- विशेषताएं:
- ये अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातुएं (Highly Reactive Non-metals) हैं।
- ये रंगीन होते हैं (F- पीली गैस, Cl- हरी-पीली गैस, Br- लाल-भूरा द्रव, I- बैंगनी ठोस)।
- फ्लोरीन (F): आवर्त सारणी का सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व (Most Electronegative Element)।
- क्लोरीन (Cl): जल के शोधन में कीटाणुनाशक (Disinfectant) के रूप में, **ब्लीचिंग पाउडर (CaOCl₂) ** का मुख्य घटक।
- ब्रोमीन (Br): एकमात्र अधातु जो कमरे के तापमान पर द्रव (Liquid) होती है।
- आयोडीन (I): चमकदार ठोस अधातु, घेंघा रोग के उपचार के लिए आवश्यक। टिंचर आयोडीन एक एंटीसेप्टिक है।
6. समूह 18: अक्रिय या उत्कृष्ट गैसें (Inert or Noble Gases)
- तत्व: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टन (Kr), زينون (Xe), रेडॉन (Rn)।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np⁶ (बाहरी कोश पूर्ण)।
- विशेषताएं:
- ये रासायनिक रूप से अक्रिय (Inert) या बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं, क्योंकि इनका बाहरी कोश पूरी तरह से भरा होता है।
- ये सभी गैसें हैं।
- हीलियम (He): दूसरा सबसे हल्का तत्व। मौसम के गुब्बारों और गोताखोरों के ऑक्सीजन सिलेंडर में (नाइट्रोजन की जगह)।
- नियॉन (Ne): विज्ञापन साइन बोर्डों (Neon signs) में चमकीले लाल-नारंगी प्रकाश के लिए।
- आर्गन (Ar): बिजली के बल्बों में फिलामेंट को सुरक्षित रखने के लिए एक अक्रिय वातावरण प्रदान करने हेतु।
- زينون (Xe): ‘स्ट्रेंजर गैस’ कहा जाता है, यह कुछ यौगिक बना सकती है।
- रेडॉन (Rn): एक रेडियोधर्मी अक्रिय गैस।
दैनिक जीवन में अकार्बनिक रसायन
कांच (Glass)
परिभाषा और प्रकृति (Definition and Nature)
कांच एक अक्रिस्टलीय (Amorphous), पारदर्शी या अल्प-पारदर्शी, अकार्बनिक ठोस पदार्थ है। इसे अक्सर अतिशीतलित द्रव (Supercooled Liquid) के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- अक्रिस्टलीय (Amorphous): इसका अर्थ है कि इसमें क्रिस्टलीय ठोसों (जैसे नमक या चीनी) की तरह परमाणुओं की कोई नियमित या निश्चित ज्यामितीय संरचना नहीं होती है। इसके कण अनियमित रूप से व्यवस्थित होते हैं, जैसे एक द्रव में होते हैं।
- अतिशीतलित द्रव (Supercooled Liquid): कांच को यह इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब पिघले हुए मिश्रण को बहुत तेजी से ठंडा किया जाता है, तो उसके कणों को क्रिस्टल संरचना में व्यवस्थित होने का समय नहीं मिलता और वे द्रव की अव्यवस्थित संरचना में ही “जम” जाते हैं। बहुत पुरानी इमारतों की खिड़कियों के कांच का नीचे से मोटा होना इस बात का प्रमाण माना जाता है कि कांच में बहुत धीमी गति से बहने (Flow) का गुण होता है। (यह कथन प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है)
कांच का निर्माण और मुख्य घटक (Manufacturing and Main Components)
कांच का निर्माण विभिन्न कच्चे पदार्थों को एक भट्टी में अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग 1500°C) पर पिघलाकर और फिर उस पिघले हुए मिश्रण को धीरे-धीरे नियंत्रित तरीके से ठंडा करके किया जाता है।
कांच के मुख्य कच्चे पदार्थ:
- सिलिका (Silica) या रेत (Sand):
- रासायनिक सूत्र: SiO₂ (सिलिकॉन डाइऑक्साइड)
- यह कांच का मुख्य और आधारभूत घटक है। यह लगभग 75% होता है।
- सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate) या धावन सोडा:
- रासायनिक सूत्र: Na₂CO₃
- यह सिलिका के गलनांक को कम करने के लिए एक गालक (Flux) के रूप में काम करता है।
- कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate) या चूना पत्थर:
- रासायनिक सूत्र: CaCO₃
- यह कांच को स्थायित्व (Stability) प्रदान करता है और उसे जल-रोधी बनाता है।
इन तीनों को मिलाकर जो कांच बनता है, उसे साधारण कांच या सोडा-लाइम ग्लास (Soda-lime glass) कहते हैं, जो सबसे अधिक उपयोग होने वाला कांच है।
कांच के प्रकार और उनके विशिष्ट उपयोग (Types of Glass and their Uses)
कांच के गुणों को बदलने और उसे विशेष उपयोगों के लिए उपयुक्त बनाने हेतु उसमें विभिन्न रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं।
| कांच का प्रकार (Type of Glass) | मुख्य घटक (Composition) / विशेषता | महत्वपूर्ण उपयोग |
| सोडा-लाइम ग्लास (Soda-lime Glass)<br>(साधारण या मृदु कांच) | Na₂CO₃ + CaCO₃ + SiO₂ | खिड़की के शीशे, बोतलें, जार, गिलास, ट्यूबलाइट, बल्ब। (सबसे आम और सस्ता कांच) |
| फ्लिंट ग्लास (Flint Glass) | लेड ऑक्साइड (PbO) मिलाया जाता है। | लेंस (Lenses), प्रिज्म (Prisms), ऑप्टिकल उपकरण, कैमरा, सूक्ष्मदर्शी, सजावटी कांच के सामान (उच्च अपवर्तनांक और चमक के कारण)। |
| पाइरेक्स ग्लास (Pyrex Glass)<br>(बोरोसिलिकेट ग्लास) | बोरोन ऑक्साइड (B₂O₃) मिलाया जाता है। | प्रयोगशाला के उपकरण (Lab apparatus) जैसे बीकर, टेस्ट ट्यूब; ओवन-प्रूफ कुकवेयर (क्योंकि यह ऊष्मा के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है और तापमान में अचानक बदलाव को सह सकता है)। |
| पोटाश ग्लास (Potash Glass)<br>(कठोर कांच) | सोडियम की जगह पोटेशियम कार्बोनेट (K₂CO₃) का उपयोग। | सोडा ग्लास से अधिक कठोर और उच्च तापमान सहने वाला। रासायनिक अभिकर्मकों को रखने वाली बोतलें, प्रयोगशाला उपकरण। |
| क्रुक्स ग्लास (Crookes’ Glass) | सीरियम ऑक्साइड (CeO₂) मिलाया जाता है। | धूप के चश्मों (Sunglasses) के लेंस बनाने में, क्योंकि यह हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित कर लेता है। |
| फोटोक्रोमेटिक ग्लास (Photochromatic Glass) | सिल्वर हैलाइड (जैसे AgCl or AgBr) मिलाया जाता है। | धूप में स्वतः काले होने वाले चश्मों के लेंस में। जब तेज प्रकाश (UV किरणें) पड़ता है, तो सिल्वर हैलाइड टूटकर सिल्वर बनाता है जिससे कांच गहरा हो जाता है। छाया में यह प्रतिक्रिया उलट जाती है। |
| क्वार्ट्ज ग्लास (Quartz Glass)<br>(सिलिका ग्लास) | केवल पिघले हुए **सिलिका (SiO₂) ** से बनता है। | बहुत उच्च तापमान सह सकता है। प्रयोगशाला के उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, अंतरिक्ष यान की खिड़कियां। |
| बुलेटप्रूफ ग्लास | कांच की कई परतों के बीच पॉलीकार्बोनेट (Polycarbonate) की एक परत। | बुलेटप्रूफ स्क्रीन, वाहन की खिड़कियां। |
कांच को रंग प्रदान करने वाले पदार्थ
विभिन्न धातु ऑक्साइडों को पिघले हुए कांच में मिलाकर उसे रंगीन बनाया जाता है।
| रंग | मिलाया जाने वाला पदार्थ |
| नीला (Blue) | कोबाल्ट ऑक्साइड (Cobalt Oxide) |
| हरा (Green) | क्रोमियम ऑक्साइड (Cr₂O₃) या फेरस ऑक्साइड (FeO) |
| लाल (Red) | कॉपर ऑक्साइड (Cu₂O) या सेलेनियम ऑक्साइड |
| नारंगी-लाल | क्यूप्रस ऑक्साइड (Cu₂O) |
| पीला (Yellow) | कैडमियम सल्फाइड या युरेनियम ऑक्साइड |
| भूरा (Brown) | फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃) |
सीमेंट (Cement)
परिभाषा और गुण (Definition and Properties)
सीमेंट एक बहुत महीन (Fine), शुष्क, पाउडर जैसा पदार्थ है जो मुख्य रूप से कैल्शियम, सिलिकॉन, एल्युमिनियम और लोहे के ऑक्साइडों से मिलकर बना होता है।
मुख्य गुण: सीमेंट का सबसे महत्वपूर्ण गुण इसका “आसंजी और संसजी” (Adhesive and Cohesive) होना है, जब इसे पानी के साथ मिलाया जाता है।
- पानी के साथ मिलाने पर, यह एक प्लास्टिक पेस्ट (लेई) बनाता है जो धीरे-धीरे कठोर (Hardens) हो जाता है और एक कठोर, पत्थर जैसी masse में बदल जाता है। यह गुण पत्थरों, ईंटों और रेत को एक साथ बांधने का काम करता है।
आधुनिक सीमेंट: पोर्टलैंड सीमेंट (Portland Cement)
आज हम जिस सीमेंट का उपयोग करते हैं, वह मुख्य रूप से पोर्टलैंड सीमेंट है।
- आविष्कार: 1824 में, एक अंग्रेज इंजीनियर जोसेफ एस्पडिन (Joseph Aspdin) ने इसका आविष्कार किया।
- नामकरण: इसका नाम “पोर्टलैंड सीमेंट” इसलिए रखा गया क्योंकि कठोर होने के बाद इसका रंग और मजबूती इंग्लैंड के पोर्टलैंड द्वीप (Isle of Portland) पर पाए जाने वाले प्राकृतिक पत्थर के समान थी।
सीमेंट का निर्माण और मुख्य घटक (Manufacturing and Main Components)
सीमेंट का निर्माण दो मुख्य प्रकार के कच्चे माल को मिलाकर किया जाता है:
- चूनेदार पदार्थ (Calcareous materials): जो चूना (CaO) प्रदान करते हैं।
- मृण्मय पदार्थ (Argillaceous materials): जो सिलिका (SiO₂) और एल्युमिना (Al₂O₃) प्रदान करते हैं।
(a) कच्चे माल (Raw Materials):
| घटक | स्रोत | मुख्य रासायनिक यौगिक | प्रतिशत (लगभग) |
| चूना (Lime) | चूना पत्थर (Limestone), चाक | कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) | 60-65% (सबसे प्रमुख) |
| सिलिका (Silica) | चिकनी मिट्टी (Clay), रेत | सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) | 20-25% |
| एल्यूमिना (Alumina) | चिकनी मिट्टी, बॉक्साइट | एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) | 5-10% |
| आयरन ऑक्साइड | – | फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃) | 2-3% |
(b) निर्माण प्रक्रिया:
- उपरोक्त कच्चे माल को सही अनुपात में मिलाकर बहुत बारीक पीसा जाता है।
- इस पाउडर को एक घूर्णी भट्टी (Rotary Kiln) में 1400-1500°C के बहुत उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है।
- इस प्रक्रिया में, कच्चे माल आपस में पिघलकर छोटे-छोटे, कड़े, कंकड़ जैसे पिंड बनाते हैं जिन्हें “क्लिंकर” (Clinker) कहा जाता है।
- क्लिंकर को ठंडा करके उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
- इस मिश्रण को फिर से बहुत महीन पीसकर सीमेंट पाउडर तैयार किया जाता है।
सीमेंट का जमना और जिप्सम की भूमिका (Setting of Cement and Role of Gypsum)
सीमेंट का जमना (Setting of Cement):
- जब सीमेंट में पानी मिलाया जाता है, तो इसके विभिन्न घटक (डाईकैल्शियम सिलिकेट, ट्राइकैल्शियम सिलिकेट, ट्राइकैल्शियम एल्युमिनेट) जल के साथ अभिक्रिया करते हैं।
- यह एक जलयोजन (Hydration) अभिक्रिया है, जो ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है (इसीलिए ताजा ढलाई गर्म महसूस होती है)।
- इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप जिलेटिनस (gelatinous) पदार्थ बनते हैं जो बाद में आपस में जुड़कर कठोर, पत्थर जैसे इंटरलॉकिंग क्रिस्टल बनाते हैं। इसी प्रक्रिया से सीमेंट अपनी मजबूती हासिल करता है।
जिप्सम की भूमिका (Role of Gypsum) – अत्यंत महत्वपूर्ण
- जिप्सम का सूत्र: CaSO₄·2H₂O (कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट)
- समस्या: सीमेंट में मौजूद ट्राइकैल्शियम एल्युमिनेट (C₃A) पानी मिलाते ही बहुत तेजी से अभिक्रिया करता है, जिससे सीमेंट तुरंत जम सकता है। अगर ऐसा हुआ तो काम करने का समय ही नहीं मिलेगा।
- समाधान (जिप्सम का कार्य): क्लिंकर में जिप्सम मिलाने से वह सीमेंट के जमने की प्रारंभिक दर को धीमा कर देता है (It retards the initial setting time of cement)।
- यह श्रमिकों को सीमेंट और कंक्रीट के साथ काम करने और उसे सही आकार देने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करता है।
- निष्कर्ष: जिप्सम सीमेंट में एक मंदक (Retarder) के रूप में कार्य करता है। (यह प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों में से एक है)
सीमेंट से संबंधित अन्य पद (Other terms related to Cement)
- मोर्टार (Mortar – मसाला):
- मिश्रण: सीमेंट + रेत + पानी
- उपयोग: ईंटों या पत्थरों को जोड़ने, और दीवारों पर प्लास्टर करने के लिए।
- कंक्रीट (Concrete):
- मिश्रण: सीमेंट + रेत + मोटी बजरी/गिट्टी (Gravel/Aggregates) + पानी
- उपयोग: छत (स्लैब), खंभे, नींव, सड़कें बनाने के लिए। यह एक अत्यंत मजबूत और टिकाऊ निर्माण सामग्री है।
- प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (Reinforced Cement Concrete – RCC):
- परिभाषा: जब कंक्रीट की तनन क्षमता (tensile strength) बढ़ाने के लिए उसके भीतर लोहे की छड़ों (Iron rods) का जाल बिछा दिया जाता है, तो उसे RCC कहते हैं।
- उपयोग: आधुनिक भवनों, पुलों, बांधों आदि के निर्माण में, क्योंकि यह कंक्रीट और स्टील दोनों की ताकत का संयोजन प्रदान करता है।
उर्वरक (Fertilizers)
परिभाषा (Definition)
उर्वरक वे रासायनिक पदार्थ हैं जिन्हें मिट्टी में मिलाया जाता है ताकि मिट्टी की उर्वरता (Fertility) को बढ़ाया जा सके और पौधों की स्वस्थ वृद्धि (Healthy Growth) के लिए आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) प्रदान किए जा सकें।
- क्यों आवश्यक हैं?: जब एक ही खेत में बार-बार फसलें उगाई जाती हैं, तो मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उर्वरक इन पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति करते हैं, जिससे फसल का उत्पादन बढ़ता है।
- उर्वरक बनाम खाद (Fertilizer vs Manure):
- उर्वरक: ये अकार्बनिक (Inorganic) लवण होते हैं और फैक्ट्रियों में निर्मित किए जाते हैं। ये पोषक-तत्व-विशिष्ट (Nutrient-specific) होते हैं।
- खाद (Manure): यह कार्बनिक (Organic) पदार्थ है जो पौधों और जानवरों के अपशिष्ट के अपघटन से बनता है। यह ह्यूमस प्रदान करता है लेकिन पोषक तत्वों की मात्रा उर्वरक की तुलना में कम होती है।
पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व (Essential Nutrients for Plants)
पौधों को अपनी वृद्धि के लिए कई पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उनकी आवश्यकता की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
1. प्राथमिक या मुख्य पोषक तत्व (Primary or Macronutrients):
इन पोषक तत्वों की पौधों को सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। इन्हें NPK के नाम से जाना जाता है, जो उर्वरक उद्योग का आधार है।
- (a) नाइट्रोजन (Nitrogen – N):
- कार्य: पत्तियों की वृद्धि (Leafy Growth) और पौधे को हरा रंग प्रदान करने के लिए आवश्यक (क्लोरोफिल का मुख्य घटक)। यह प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है।
- कमी के लक्षण: पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
- (b) फॉस्फोरस (Phosphorus – P):
- कार्य: जड़ों के विकास (Root Development), फूलों और बीजों के निर्माण में महत्वपूर्ण। यह ऊर्जा स्थानांतरण (ATP) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कमी के लक्षण: जड़ों का विकास रुक जाता है, पत्तियां बैंगनी रंग की हो सकती हैं।
- (c) पोटेशियम (Potassium – K):
- कार्य: पौधे के समग्र स्वास्थ्य (Overall Health), रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Resistance), और पानी के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक। यह फलों के आकार और गुणवत्ता में सुधार करता है।
2. द्वितीयक पोषक तत्व (Secondary Nutrients):
इनकी आवश्यकता प्राथमिक पोषक तत्वों से कम लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों से अधिक होती है।
- उदाहरण: कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S)।
3. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients):
इनकी आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन ये भी वृद्धि के लिए अनिवार्य हैं।
- उदाहरण: लोहा (Fe), मैंगनीज (Mn), जिंक (Zn), तांबा (Cu), बोरॉन (B)।
उर्वरकों के प्रकार (Types of Fertilizers)
उर्वरकों को उनमें मौजूद प्राथमिक पोषक तत्वों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
(a) नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक (Nitrogenous Fertilizers):
ये वे उर्वरक हैं जो पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।
- 1. यूरिया (Urea):
- रासायनिक सूत्र: (NH₂)₂CO
- नाइट्रोजन सामग्री: 46% (यह किसी भी ठोस उर्वरक में नाइट्रोजन की उच्चतम मात्रा है और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है)
- विशेषता: यह एक कार्बनिक यौगिक (Organic Compound) है, लेकिन इसे एक अकार्बनिक उर्वरक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
- 2. अमोनियम सल्फेट (Ammonium Sulphate):
- रासायनिक सूत्र: (NH₄)₂SO₄
- नाइट्रोजन सामग्री: लगभग 21%
- 3. कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (Calcium Ammonium Nitrate – CAN):
- इसे “किसान खाद” के नाम से भी जाना जाता है।
(b) फॉस्फेटी उर्वरक (Phosphatic Fertilizers):
ये वे उर्वरक हैं जो फॉस्फोरस (आमतौर पर फॉस्फेट, P₂O₅ के रूप में) प्रदान करते हैं।
- 1. सुपरफॉस्फेट ऑफ लाइम (Superphosphate of Lime):
- रासायनिक सूत्र: Ca(H₂PO₄)₂
- 2. ट्रिपल सुपरफॉस्फेट (Triple Superphosphate)
(c) पोटाश उर्वरक (Potassic Fertilizers):
ये वे उर्वरक हैं जो पोटेशियम प्रदान करते हैं। भारत पोटाश उर्वरकों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है।
- 1. पोटेशियम क्लोराइड (Potassium Chloride / Muriate of Potash):
- रासायनिक सूत्र: KCl
- 2. पोटेशियम सल्फेट (Potassium Sulphate):
- रासायनिक सूत्र: K₂SO₄
(d) मिश्रित उर्वरक (Complex or Mixed Fertilizers):
ये वे उर्वरक हैं जिनमें एक से अधिक प्राथमिक पोषक तत्व (N, P, K) होते हैं।
- उदाहरण:
- NPK: वह उर्वरक जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम तीनों हों। उर्वरक के बैग पर लिखे अनुपात (जैसे 12:32:16) का मतलब है कि उसमें 12% N, 32% P₂O₅ और 16% K₂O है।
- डाई-अमोनियम फॉस्फेट (Di-Ammonium Phosphate – DAP): (NH₄)₂HPO₄ – इसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों होते हैं।
उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभाव
- जल प्रदूषण (Water Pollution): उर्वरकों का अतिरिक्त हिस्सा वर्षा के पानी के साथ बहकर नदियों और झीलों में चला जाता है। इससे पानी में शैवाल (Algae) की अत्यधिक वृद्धि होती है (इस प्रक्रिया को सुपोषण या यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) कहते हैं), जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और जलीय जीवन नष्ट हो जाता है।
- मृदा क्षरण (Soil Degradation): लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना और उर्वरता नष्ट हो सकती है, और मिट्टी अम्लीय हो सकती है।
प्रमुख औषधियाँ और उनके कार्य
रसायन चिकित्सा (Chemotherapy): रासायनिक पदार्थों (औषधियों) का उपयोग करके रोगों के उपचार को रसायन चिकित्सा कहते हैं। इन औषधियों को उनके चिकित्सीय प्रभाव के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
1. ज्वरनाशी (Antipyretics)
- परिभाषा: ये वे रासायनिक यौगिक हैं जिनका उपयोग शरीर के बढ़े हुए तापमान (बुखार – Fever) को कम करने के लिए किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: ये मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस में स्थित ताप-नियामक केंद्र पर कार्य करके शरीर के तापमान को सामान्य करती हैं, आमतौर पर पसीना लाकर।
- महत्वपूर्ण तथ्य: ये शरीर के सामान्य तापमान को प्रभावित नहीं करती हैं, केवल बुखार की स्थिति में ही काम करती हैं।
- प्रमुख उदाहरण:
- पैरासिटामोल (Paracetamol): यह सबसे आम और सुरक्षित ज्वरनाशी है। यह एक हल्की पीड़ाहारी भी है। इसका एक अन्य नाम एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) है।
- एस्पिरिन (Aspirin): (रासायनिक नाम – एसिटाइलसैलिसाइलिक एसिड)। यह एक ज्वरनाशी होने के साथ-साथ एक प्रभावी पीड़ाहारी भी है। (इसके बारे में नीचे और पढ़ें)
- आइबूप्रोफेन (Ibuprofen)
2. पीड़ाहारी / दर्दनाशक (Analgesics)
- परिभाषा: ये वे औषधियाँ हैं जो दर्द (Pain) से राहत दिलाती हैं, बिना चेतना, मानसिक भ्रम या पक्षाघात उत्पन्न किए।
इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
(a) अ-स्वापक (गैर-नशीले) पीड़ाहारी (Non-narcotic Analgesics):
- विशेषता: ये आदत बनाने वाली (Non-addictive) नहीं होती हैं।
- कार्य: ये ज्वरनाशी (Antipyretic) का भी काम करती हैं और सूजन (Inflammation) को भी कम करती हैं।
- उदाहरण:
- एस्पिरिन (Aspirin): यह सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द में बहुत प्रभावी है। इसकी रक्त को पतला करने (Blood-thinning) की क्षमता के कारण, इसका उपयोग हृदयाघात (Heart Attack) को रोकने में भी किया जाता है। (यह एक बहुत महत्वपूर्ण गुण है)
- पैरासिटामोल (Paracetamol): यह एक हल्की पीड़ाहारी है, लेकिन इसमें एस्पिरिन की तरह सूजन-रोधी गुण नहीं होते।
(b) स्वापक (नशीले) पीड़ाहारी (Narcotic Analgesics):
- विशेषता: ये औषधियाँ दर्द से राहत तो देती हैं, लेकिन नींद और बेहोशी (Stupor) भी लाती हैं। इनकी आदत (Addiction) लग सकती है।
- स्रोत: ये मुख्य रूप से अफीम पोस्ता (Opium Poppy) से प्राप्त होती हैं।
- उपयोग: इनका उपयोग केवल असहनीय दर्द (जैसे- ऑपरेशन के बाद का दर्द, कैंसर का दर्द, या गंभीर दुर्घटनाओं में) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दिया जाता है।
- उदाहरण:
- मॉर्फीन (Morphine)
- हेरोइन (Heroin)
- कोडीन (Codeine) (इसका उपयोग कुछ कफ सिरप में भी होता है)।
3. प्रतिजैविक (Antibiotics)
- परिभाषा: ये वे रासायनिक पदार्थ हैं (जो सूक्ष्मजीवों जैसे कवक और जीवाणुओं से प्राप्त होते हैं) जो जीवाणुओं (Bacteria) की वृद्धि को रोकते (Bacteriostatic) हैं या उन्हें मार देते (Bactericidal) हैं।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- एंटीबायोटिक्स केवल जीवाणु संक्रमण (Bacterial Infections) के खिलाफ प्रभावी होती हैं।
- ये वायरस (Virus) के कारण होने वाले संक्रमणों (जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम, फ्लू) पर प्रभावी नहीं होती हैं। (यह परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु है)
- खोज:
- पहला एंटीबायोटिक: पेनिसिलिन (Penicillin)
- खोजकर्ता: एलेक्जेंडर फ्लेमिंग (Alexander Fleming) ने 1928 में पेनिसिलियम नोटेटम नामक कवक (Fungus) से इसकी खोज की।
- प्रमुख उदाहरण:
- पेनिसिलिन (Penicillin)
- टेट्रासाइक्लिन (Tetracycline)
- स्ट्रेप्टोमाइसिन (Streptomycin)
- एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin)
4. पूर्तिरोधी (Antiseptics) और विसंक्रामी (Disinfectants)
ये दोनों ही सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को रोकने का काम करते हैं, लेकिन इनके उपयोग में अंतर है।
(a) पूर्तिरोधी (Antiseptics):
- परिभाषा: ये वे रासायनिक पदार्थ हैं जिन्हें जीवित ऊतकों (Living Tissues) जैसे त्वचा, घाव, और कटने पर लगाया जाता है ताकि सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया जा सके।
- उपयोग: इन्हें शरीर पर बाहरी रूप से लगाया जाता है, इन्हें खाया नहीं जाता। ये शरीर के लिए हानिकारक नहीं होते हैं।
- उदाहरण:
- डेटॉल (Dettol): यह क्लोरोजाइलिनॉल (Chloroxylenol) और टरपिनिऑल (Terpineol) का मिश्रण है।
- सेवलॉन (Savlon):
- टिंचर आयोडीन (Tincture of Iodine): यह एल्कोहॉल और पानी के मिश्रण में 2-3% आयोडीन का घोल होता है।
- बोरिक एसिड (Boric Acid): आंखों के लिए हल्के एंटीसेप्टिक के रूप में।
- **हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) **
(b) विसंक्रामी/कीटाणुनाशक (Disinfectants):
- परिभाषा: ये वे रासायनिक पदार्थ हैं जिन्हें निर्जीव वस्तुओं (Non-living Objects) जैसे फर्श, नालियों, और चिकित्सा उपकरणों पर लगाया जाता है ताकि सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया जा सके।
- उपयोग: ये जीवित ऊतकों के लिए हानिकारक होते हैं, इसलिए इन्हें त्वचा पर नहीं लगाया जा सकता।
- उदाहरण:
- फिनोल (Phenol): इसका 1% विलयन विसंक्रामी का काम करता है (जबकि 0.2% विलयन एंटीसेप्टिक का)।
- ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder – CaOCl₂) / क्लोरीन: पीने के पानी को कीटाणुरहित करने के लिए।
अन्य महत्वपूर्ण औषधियाँ
- एंटासिड (Antacids): ये पेट में अम्लता (Acidity) या अपच (Indigestion) को दूर करने के लिए उपयोग की जाने वाली दुर्बल क्षारीय दवाएं हैं।
- उदाहरण: मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (Mg(OH)₂), बेकिंग सोडा (NaHCO₃)।
- प्रशांतक (Tranquilizers): ये तनाव, चिंता और मानसिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर काम करती हैं।
विस्फोटक (Explosives)
परिभाषा
विस्फोटक वे अस्थिर रासायनिक यौगिक या मिश्रण होते हैं जो बहुत ही कम समय में अत्यधिक तीव्र गति से अपघटित (Decompose) होते हैं। इस प्रक्रिया में, वे बहुत बड़ी मात्रा में ऊष्मा (Heat), प्रकाश (Light), ध्वनि (Sound) और उच्च दाब वाली गैसें (High-pressure Gases) उत्पन्न करते हैं, जिससे एक विनाशकारी विस्फोट (Explosion) होता है।
प्रमुख विस्फोटक और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. डायनामाइट (Dynamite)
- आविष्कारक:अल्फ्रेड नोबेल (Alfred Nobel) – 1867
- महत्वपूर्ण तथ्य: अल्फ्रेड नोबेल स्वीडन के रसायनज्ञ थे। डायनामाइट के विध्वंसक उपयोग से दुखी होकर, उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति का उपयोग शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पुरस्कार देने के लिए किया। इन्हीं पुरस्कारों को आज हम नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) के नाम से जानते हैं। (यह ऐतिहासिक तथ्य परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है)
- मुख्य घटक:
- प्रारंभ में, डायनामाइट का मुख्य घटक नाइट्रोग्लिसरीन (Nitroglycerin) था, जो एक अत्यंत अस्थिर और खतरनाक तरल विस्फोटक है।
- अल्फ्रेड नोबेल ने नाइट्रोग्लिसरीन को एक निष्क्रिय अवशोषक पदार्थ (जैसे किज़ेलगुर) में अवशोषित करके इसे अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाया, जिसे डायनामाइट कहा गया।
- उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से चट्टानों को तोड़ने, सुरंगें बनाने, खनन और निर्माण कार्यों में किया जाता है।
2. टी.एन.टी (T.N.T)
- पूर्ण रूप (Full Form): ट्राई-नाइट्रो-टॉलूईन (Tri-Nitro-Toluene)
- रासायनिक सूत्र: C₆H₂(NO₂)₃CH₃
- विशेषता: यह एक शक्तिशाली और अपेक्षाकृत स्थिर (Stable) विस्फोटक है, जिसे सुरक्षित रूप से संग्रहीत और परिवहन किया जा सकता है।
- उपयोग: इसका व्यापक रूप से सैन्य उद्देश्यों (बम और गोले बनाने) और औद्योगिक कार्यों में उपयोग किया जाता है।
3. टी.एन.जी (T.N.G)
- पूर्ण रूप (Full Form):ट्राई-नाइट्रो-ग्लिसरीन (Tri-Nitro-Glycerine)
- इसे सामान्यतः नाइट्रोग्लिसरीन (Nitroglycerin) के नाम से ही जाना जाता है।
- प्रकृति: यह एक रंगहीन, तैलीय द्रव है जो अत्यधिक अस्थिर (Unstable) और झटकों के प्रति संवेदनशील (Sensitive to shocks) होता है।
- अन्य नाम: इसे “नोबेल का तेल” (Nobel’s Oil) भी कहा जाता है।
- उपयोग: इसका उपयोग डायनामाइट और कॉर्डाइट (एक धुआं रहित विस्फोटक) बनाने में किया जाता है।
4. आर.डी.एक्स (R.D.X)
- पूर्ण रूप (Full Form): रिसर्च एंड डेवलप्ड एक्सप्लोसिव (Research and Developed Explosive)
- रासायनिक नाम: साइक्लो-ट्राइमेथिलीन-ट्राइनाइट्रामाइन
- प्रकृति: यह एक अत्यंत शक्तिशाली प्लास्टिक विस्फोटक (Highly Powerful Plastic Explosive) है।
- विभिन्न देशों में नाम:
- संयुक्त राज्य अमेरिका: साइक्लोनाइट (Cyclonite)
- जर्मनी: हेक्सोजेन (Hexogen)
- इटली: टी4 (T4)
- विशेषता: सफेद रंग का ठोस पदार्थ होता है। इसके विस्फोट का तापमान बहुत अधिक होता है।
- खोज: हेंस हेनिंग (Hans Henning), जर्मनी।
5. टी.एन.पी (T.N.P)
- पूर्ण रूप (Full Form): ट्राई-नाइट्रो-फिनोल (Tri-Nitro-Phenol)
- अन्य नाम: इसे पिक्रिक एसिड (Picric Acid) के नाम से भी जाना जाता है।
- प्रकृति: यह पीले रंग का एक क्रिस्टलीय ठोस है।
- उपयोग: विस्फोटक के रूप में और प्रयोगशालाओं में एक अभिकर्मक (Reagent) के रूप में।
6. गन पाउडर (Gunpowder)
- अन्य नाम: काला पाउडर (Black Powder)
- आविष्कार: रोजर बेकन (Roger Bacon)
- संरचना: यह एक मिश्रण (Mixture) है, यौगिक नहीं।
- घटक (यह प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है):
- पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃ – शोरा) (ऑक्सीकारक के रूप में) – लगभग 75%
- चारकोल (Carbon – C) (ईंधन के रूप में) – लगभग 15%
- सल्फर (Sulphur – S) (ईंधन और स्थिरता के लिए) – लगभग 10%
- उपयोग: यह सबसे पुराने ज्ञात रासायनिक विस्फोटकों में से एक है, जिसका उपयोग आग्नेयास्त्रों (Firearms) और आतिशबाजी (Fireworks) में किया जाता है।
सारांश सारणी: एक नज़र में
| विस्फोटक का नाम | पूर्ण रूप / मुख्य घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| डायनामाइट | नाइट्रोग्लिसरीन | आविष्कारक – अल्फ्रेड नोबेल। |
| T.N.T | ट्राई-नाइट्रो-टॉलूईन | सैन्य बमों में व्यापक उपयोग। |
| T.N.G | ट्राई-नाइट्रो-ग्लिसरीन | डायनामाइट का मुख्य घटक, “नोबेल का तेल”। |
| R.D.X | रिसर्च एंड डेवलप्ड एक्सप्लोसिव | बहुत शक्तिशाली प्लास्टिक विस्फोटक, अन्य नाम- साइक्लोनाइट। |
| पिक्रिक एसिड | ट्राई-नाइट्रो-फिनोल (TNP) | पीला क्रिस्टलीय ठोस। |
| गन पाउडर | KNO₃ + चारकोल + सल्फर | एक मिश्रण, सबसे पुराने विस्फोटकों में से एक। |
खाद्य रसायन (Food Chemistry)
परिभाषा: खाद्य रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो खाद्य पदार्थों के रासायनिक घटकों (Chemical Components), उनकी संरचना, उनके गुणों, और भोजन के प्रसंस्करण, भंडारण और पाचन के दौरान होने वाले रासायनिक परिवर्तनों (Chemical Changes) का अध्ययन करती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, इसके दो सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं:
- खाद्य परिरक्षक (Food Preservatives)
- कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Artificial Sweeteners)
1. खाद्य परिरक्षक (Food Preservatives)
परिभाषा:
खाद्य परिरक्षक वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जिन्हें खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है ताकि सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) जैसे बैक्टीरिया, यीस्ट और फफूंद की वृद्धि को रोका जा सके या धीमा किया जा सके। इससे भोजन को खराब (Spoilage) होने से बचाया जाता है और उसकी शेल्फ लाइफ (Shelf life) यानी उसे संग्रहीत रखने की अवधि को बढ़ाया जाता है।
परिरक्षण के सामान्य तरीके (General Methods of Preservation):
- नमक मिलाना: साधारण नमक (NaCl) का उपयोग अचार, मांस और मछली को परिरक्षित करने के लिए किया जाता है।
- चीनी मिलाना: चीनी की अधिक सांद्रता जैम, जेली और मुरब्बों में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकती है।
- सिरका मिलाना: सिरका (एसिटिक एसिड) का अम्लीय वातावरण अचार जैसी वस्तुओं को खराब होने से बचाता है।
- तेल मिलाना: तेल की परत भोजन को हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आने से रोकती है।
प्रमुख रासायनिक खाद्य परिरक्षक (Important Chemical Food Preservatives):
(यह खंड परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)
- सोडियम बेंजोएट (Sodium Benzoate):
- रासायनिक सूत्र: C₇H₅NaO₂
- उपयोग: यह सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले परिरक्षकों में से एक है। इसका उपयोग विशेष रूप से अम्लीय खाद्य पदार्थों (Acidic Foods) जैसे फलों के रस, जैम, जेली, अचार और शीतल पेय (Soft drinks) को संरक्षित करने के लिए किया जाता है।
- कार्य: यह यीस्ट और फफूंद की वृद्धि को रोकने में बहुत प्रभावी है।
- सोडियम मेटाबाईसल्फाइट (Sodium Metabisulphite):
- रासायनिक सूत्र: Na₂S₂O₅
- उपयोग: इसका उपयोग जैम, स्क्वैश, और केचप जैसे खाद्य पदार्थों को परिरक्षित करने के लिए किया जाता है। यह रंगहीन खाद्य पदार्थों के लिए उपयुक्त है।
- सॉर्बिक एसिड (Sorbic Acid) और इसके लवण:
- इनका उपयोग पनीर (Cheese), बेकरी उत्पादों और वाइन को परिरक्षित करने में होता है।
- सिरका (Vinegar):
- मुख्य घटक: एसिटिक एसिड (Acetic Acid)
- यह एक प्राकृतिक परिरक्षक है जिसका उपयोग अचार, सॉस और केचप में किया जाता है।
2. कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Artificial Sweeteners)
परिभाषा:
कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ वे रासायनिक यौगिक होते हैं जो स्वाद में चीनी (सुक्रोज) की तरह मीठे होते हैं, लेकिन या तो शरीर में मेटाबोलाइज नहीं होते (यानी कैलोरी प्रदान नहीं करते) या उनकी मिठास इतनी अधिक होती है कि बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं, जिससे नगण्य कैलोरी मिलती है।
- उपयोग: इनका उपयोग मुख्य रूप से मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए बने खाद्य पदार्थों और “डाइट” या “शुगर-फ्री” उत्पादों (जैसे शीतल पेय, मिठाइयाँ) में किया जाता है ताकि कैलोरी की मात्रा को नियंत्रित किया जा सके।
प्रमुख कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ (Important Artificial Sweeteners):
| स्वीटनर का नाम | चीनी की तुलना में मिठास (लगभग) | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सैकरिन (Saccharin) | ~550 गुना मीठा | • यह पहला खोजा गया और सबसे लोकप्रिय कृत्रिम स्वीटनर है।<br>• यह खाना पकाने के तापमान पर स्थिर नहीं होता है।<br>• कुछ लोगों को इसका स्वाद धातु जैसा या कड़वा लगता है। |
| एस्पार्टेम (Aspartame) | ~100-200 गुना मीठा | • यह सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला स्वीटनर है।<br>• यह अमीनो एसिड (एस्पार्टिक एसिड और फेनिलएलनिन) से बना होता है।<br>• यह खाना पकाने या बेक करने के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि यह गर्म करने पर अपघटित हो जाता है। इसका उपयोग केवल ठंडे खाद्य पदार्थों और शीतल पेयों में किया जाता है। (यह एक बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है) |
| एलीटेम (Alitame) | ~2000 गुना मीठा | • यह एस्पार्टेम की तुलना में अधिक स्थिर और बहुत अधिक मीठा होता है, जिससे इसकी मिठास को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। |
| सुक्रालोज (Sucralose) | ~600 गुना मीठा | • यह सुक्रोज (चीनी) का एक व्युत्पन्न है।<br>• इसका स्वाद चीनी जैसा ही होता है और यह खाना पकाने के तापमान पर स्थिर (Stable) रहता है। |
| नियोटेम (Neotame) | ~7,000-13,000 गुना मीठा | • यह एस्पार्टेम का एक व्युत्पन्न है और अब तक के सबसे मीठे पदार्थों में से एक है। यह ऊष्मा के प्रति भी स्थिर है। |
| साइक्लेमेट (Cyclamate) | ~30-50 गुना मीठा | • कुछ देशों में इसके उपयोग पर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगा दिया गया है। |