तत्वों का वर्गीकरण और गुणधर्म

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तत्वों के आवर्ती वर्गीकरण का प्रारंभिक इतिहास

परिचय: वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों हुई?

19वीं शताब्दी की शुरुआत में, जैसे-जैसे नए तत्वों की खोज होती गई, वैज्ञानिकों के पास दर्जनों तत्वों और उनके यौगिकों के बारे में बहुत सारी जानकारी जमा हो गई। इस विशाल जानकारी को व्यवस्थित करना और उनके गुणों का अध्ययन करना बहुत मुश्किल था। इसलिए, वैज्ञानिकों ने तत्वों को उनके गुणों में समानताओं के आधार पर वर्गीकृत करने का प्रयास शुरू किया ताकि उनका अध्ययन व्यवस्थित और आसान हो सके।


1. डोबेराइनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads – 1817)


2. न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves – 1866)


3. लोथर मेयर का वक्र (Lothar Meyer’s Curve – 1869)


निष्कर्ष

ये प्रारंभिक प्रयास भले ही पूरी तरह से सफल नहीं हुए, लेकिन इन्होंने भविष्य के वर्गीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। इन सभी ने “आवर्तता” (Periodicity) की अवधारणा को जन्म दिया – यानी, तत्वों को एक निश्चित क्रम में रखने पर उनके गुणों की नियमित अंतराल पर पुनरावृत्ति होती है। इसी अवधारणा को आधार बनाकर मेंडेलीफ ने अपनी क्रांतिकारी आवर्त सारणी का निर्माण किया।


मेंडेलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table – 1869)

वैज्ञानिक: रूसी रसायनज्ञ दिमित्री मेंडेलीफ (Dmitri Mendeleev)। इन्हें “आवर्त सारणी का जनक” (Father of the Periodic Table) भी कहा जाता है।


मेंडेलीफ का आवर्त नियम (Mendeleev’s Periodic Law)

यह मेंडेलीफ के वर्गीकरण का आधार है और इसे याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

नियम:
“तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु भारों (Atomic Masses) के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”

अर्थ: इसका अर्थ है कि यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार (Increasing Atomic Mass) के क्रम में व्यवस्थित किया जाए, तो एक नियमित अंतराल के बाद समान गुणों वाले तत्व फिर से प्रकट होते हैं।


मेंडेलीफ की आवर्त सारणी की विशेषताएं (Features)


मेंडेलीफ की आवर्त सारणी की उपलब्धियाँ (Achievements)

मेंडेलीफ की सारणी की सफलता के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण थे:

  1. तत्वों का व्यवस्थित अध्ययन: पहली बार, तत्वों और उनके यौगिकों का अध्ययन अत्यंत व्यवस्थित और सरल हो गया।
  2. नए तत्वों की भविष्यवाणी (Prediction of New Elements): यह मेंडेलीफ की सारणी की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
    • मेंडेलीफ ने अपनी सारणी में कुछ रिक्त स्थान (Empty Spaces) छोड़े और साहसपूर्वक भविष्यवाणी की कि इन स्थानों पर भविष्य में नए तत्व खोजे जाएंगे।
    • उन्होंने इन अनाम तत्वों का नाम, उनके समूह में पहले आने वाले तत्व के नाम में संस्कृत का उपसर्ग “एका-” (Eka-) लगाकर किया।
    • उदाहरण:
      | मेंडेलीफ द्वारा अनुमानित | बाद में खोजा गया तत्व |
      |:—|:—|
      | एका-बोरॉन| स्कैंडियम (Sc)|
      | एका-एल्युमिनियम| गैलियम (Ga)|
      | एका-सिलिकॉन | जर्मेनियम (Ge)|
    • आश्चर्यजनक रूप से, बाद में खोजे गए इन तत्वों के गुण मेंडेलीफ द्वारा अनुमानित गुणों के लगभग समान थे। (PYQ Reference: SSC CGL, RRB NTPC)
  3. परमाणु भारों में सुधार (Correction of Atomic Masses):
    • मेंडेलीफ ने कुछ तत्वों के परमाणु भारों में सुधार किया ताकि उन्हें सारणी में सही स्थान पर रखा जा सके।
    • उदाहरण: बेरिलियम (Be) का परमाणु भार पहले 13.5 माना जाता था, लेकिन मेंडेलीफ ने इसे सही करके 9.0 कर दिया।
  4. अक्रिय गैसों के लिए स्थान:
    • जब बाद में नियॉन (Ne) और आर्गन (Ar) जैसी अक्रिय गैसों (Noble Gases) की खोज हुई, तो उन्हें आवर्त सारणी को बिना छेड़े एक नए समूह (जिसे शून्य समूह कहा गया) में आसानी से रखा जा सका। (PYQ Reference: State PSC)

मेंडेलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएँ या कमियाँ (Limitations or Defects)

आधुनिक आवर्त सारणी की तुलना में, मेंडेलीफ की सारणी में कुछ गंभीर कमियाँ थीं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  1. हाइड्रोजन का अनिश्चित स्थान (Anomalous Position of Hydrogen):
    • हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं (Alkali Metals – समूह 1) और हैलोजन (Halogens – समूह 17) दोनों से मिलते-जुलते हैं।
    • मेंडेलीफ हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में कोई निश्चित स्थान नहीं दे सके। यह उनकी आवर्त सारणी का पहला और सबसे बड़ा दोष था। (PYQ Reference: SSC CHSL, UPSC CDS)
  2. समस्थानिकों (Isotopes) का स्थान:
    • मेंडेलीफ की सारणी परमाणु भार पर आधारित थी।
    • चूंकि एक ही तत्व के समस्थानिकों (जैसे ¹²C, ¹⁴C) के परमाणु भार भिन्न-भिन्न होते हैं, इसलिए उन्हें आवर्त सारणी में अलग-अलग स्थान मिलना चाहिए था।
    • लेकिन, समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होने के कारण उन्हें एक ही स्थान पर रखना पड़ता था। इस विरोधाभास का कोई समाधान मेंडेलीफ की सारणी में नहीं था। (PYQ Reference: NDA, 2019)
  3. अनियमित परमाणु भार क्रम (Anomalous Pairs of Elements):
    • कुछ स्थानों पर, मेंडेलीफ ने गुणों में समानता बनाए रखने के लिए अधिक परमाणु भार वाले तत्व को कम परमाणु भार वाले तत्व से पहले रख दिया, जो उनके अपने ही नियम का उल्लंघन था।
    • उदाहरण:
      • आर्गन (Ar, भार ≈ 39.9) को पोटैशियम (K, भार ≈ 39.1) से पहले रखा गया।
      • कोबाल्ट (Co, भार ≈ 58.9) को निकल (Ni, भार ≈ 58.7) से पहले रखा गया।
      • टेल्यूरियम (Te, भार ≈ 127.6) को आयोडीन (I, भार ≈ 126.9) से पहले रखा गया। (PYQ Reference: RRB JE, 2019)
  4. एक समूह में भिन्न गुण वाले तत्वों का होना:
    • कुछ स्थानों पर, बिल्कुल भिन्न गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में एक साथ रख दिया गया था।

निष्कर्ष

अपनी कमियों के बावजूद, मेंडेलीफ की आवर्त सारणी तत्वों के वर्गीकरण में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। इसने एक मजबूत ढाँचा प्रदान किया जिसके आधार पर बाद में हेनरी मोजले ने परमाणु संख्या की खोज के बाद आधुनिक आवर्त सारणी का निर्माण किया, जिसने मेंडेलीफ की अधिकांश कमियों को दूर कर दिया।


आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)

पृष्ठभूमि: एक क्रांतिकारी खोज

20वीं सदी की शुरुआत तक, मेंडेलीफ की आवर्त सारणी को व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन उसकी कुछ कमियाँ (जैसे हाइड्रोजन का स्थान, समस्थानिकों का स्थान, और अनियमित परमाणु भार क्रम) वैज्ञानिकों को परेशान कर रही थीं। इसका मतलब था कि वर्गीकरण के आधार “परमाणु भार” में ही कोई मौलिक समस्या थी।


1. हेनरी मोजले का योगदान (Henry Moseley’s Contribution – 1913)


2. आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law)

हेनरी मोजले की खोज के आधार पर, मेंडेलीफ के पुराने आवर्त नियम में संशोधन किया गया और आधुनिक आवर्त नियम प्रतिपादित किया गया।

नियम:
“तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म उनकी परमाणु संख्याओं (Atomic Numbers) के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”

अर्थ: इसका अर्थ है कि यदि तत्वों को उनकी बढ़ती हुई परमाणु संख्या (Increasing Atomic Number) के क्रम में व्यवस्थित किया जाए, तो एक नियमित अंतराल के बाद उनके गुणों की पुनरावृत्ति होती है।

आधुनिक आवर्त सारणी इसी नियम पर आधारित है। इसे आवर्त सारणी का दीर्घ रूप (Long Form of the Periodic Table) भी कहा जाता है, जिसका ढाँचा नील बोर के मॉडल से प्रेरित था।
(PYQ Reference: SSC CHSL, UPSC CDS)


आधुनिक आवर्त सारणी ने मेंडेलीफ की कमियों को कैसे दूर किया?

आधुनिक आवर्त सारणी ने वर्गीकरण का आधार परमाणु भार से बदलकर परमाणु संख्या करके, मेंडेलीफ की सारणी की लगभग सभी मुख्य विसंगतियों को दूर कर दिया:

  1. अनियमित परमाणु भार क्रम की समस्या का समाधान:
    • आर्गन (Z=18) की परमाणु संख्या पोटैशियम (Z=19) से कम है। इसलिए, परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में रखने पर आर्गन स्वाभाविक रूप से पोटैशियम से पहले आ जाता है, भले ही उसका परमाणु भार अधिक हो। यही बात कोबाल्ट (Z=27)/निकल (Z=28) पर भी लागू होती है। इस प्रकार यह विसंगति दूर हो गई।
      (PYQ Reference: State PSC)
  2. समस्थानिकों के स्थान की समस्या का समाधान:
    • एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों (Isotopes) की परमाणु संख्या समान होती है।
    • इसलिए, कार्बन के सभी समस्थानिकों (¹²C, ¹⁴C) को आवर्त सारणी में केवल एक ही स्थान (Z=6 पर) पर रखा गया, जो बिल्कुल सही है। अलग-अलग स्थान देने की समस्या समाप्त हो गई।
      (PYQ Reference: NDA, 2019)
  3. तत्वों की स्थिति का तार्किक आधार:
    • परमाणु संख्या से हमें परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पता चलता है। आधुनिक आवर्त सारणी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि एक समूह के तत्वों के गुण समान क्यों होते हैं (क्योंकि उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है)।

आधुनिक सारणी की सीमा:


निष्कर्ष

हेनरी मोजले का काम एक युगांतरकारी खोज थी जिसने तत्वों के वर्गीकरण की पूरी समझ को बदल दिया। परमाणु भार से परमाणु संख्या में बदलाव ने न केवल मेंडेलीफ की सारणी की विसंगतियों को दूर किया, बल्कि तत्वों के आवर्ती व्यवहार के पीछे के वास्तविक कारण – इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – को भी उजागर किया, जिससे आधुनिक, तार्किक और त्रुटि रहित आवर्त सारणी का निर्माण संभव हुआ।

आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना (Structure of the Modern Periodic Table)

आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों को उनकी बढ़ती हुई परमाणु संख्या (Atomic Number) और उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) के आधार पर व्यवस्थित करती है।

1. आवर्त (Periods)

2. समूह (Groups)

प्रमुख समूहों के विशेष नाम (Important Groups with Special Names):

समूह संख्याविशेष नामविशेषता
समूह 1क्षार धातुएं (Alkali Metals) (H को छोड़कर)अत्यधिक अभिक्रियाशील, मुलायम धातुएं।
समूह 2क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals)अभिक्रियाशील धातुएं, क्षार धातुओं से कम।
समूह 15निक्टोजेन्स (Pnictogens)(Nitrogen family)
समूह 16चाल्कोजन्स (Chalcogens)(Oxygen family)
समूह 17हैलोजन (Halogens)अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातुएं, रंगीन होती हैं।
समूह 18अक्रिय गैसें या उत्कृष्ट गैसें (Inert or Noble Gases)रासायनिक रूप से अक्रियाशील होती हैं क्योंकि उनका बाहरी कोश पूरी तरह से भरा होता है।

3. ब्लॉक के आधार पर वर्गीकरण (Classification based on Blocks)

आधुनिक आवर्त सारणी को अंतिम इलेक्ट्रॉन के प्रवेश करने वाले उपकोश (Subshell) के आधार पर चार ब्लॉकों में विभाजित किया गया है।

(a) s-ब्लॉक तत्व (s-block Elements)

(b) p-ब्लॉक तत्व (p-block Elements)

(c) d-ब्लॉक तत्व (d-block Elements)

(d) f-ब्लॉक तत्व (f-block Elements)

यह संरचनात्मक वर्गीकरण हमें तत्वों के गुणों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से जोड़ने में मदद करता है, जिससे रसायन विज्ञान का अध्ययन तार्किक और व्यवस्थित हो जाता है।


आवर्ती गुणधर्म

1. परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius)

परिभाषा

परमाणु त्रिज्या को सामान्यतः किसी परमाणु के नाभिक (Nucleus) के केंद्र से उसके सबसे बाहरी कोश (Outermost Shell) में मौजूद इलेक्ट्रॉन तक की दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है।


आवर्त सारणी में परमाणु त्रिज्या का ट्रेंड (Trend in the Periodic Table)

यह समझना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।


2. आयनन ऊर्जा / आयनन विभव (Ionization Energy / Ionization Potential)

परिभाषा

किसी विलगित गैसीय परमाणु (Isolated Gaseous Atom) के सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा (Minimum Energy) को आयनन ऊर्जा (Ionization Energy – IE) या आयनन विभव (Ionization Potential – IP) कहते हैं।

X (g) + आयनन ऊर्जा → X⁺(g) + e⁻


आवर्त सारणी में आयनन ऊर्जा का ट्रेंड (Trend in the Periodic Table)


सारांश सारणी: गुणों की तुलना

गुण (Property)आवर्त में (बाएँ से दाएँ)समूह में (ऊपर से नीचे)कारण (मुख्य)
परमाणु त्रिज्याघटती है ⬇️बढ़ती है ⬆️कोशों की संख्या बनाम नाभिकीय आवेश
आयनन ऊर्जाबढ़ती है ⬆️घटती है ⬇️नाभिकीय आवेश और परमाणु त्रिज्या

महत्वपूर्ण संबंध:
परमाणु त्रिज्या जितनी कम ہوگی، आयनन ऊर्जा उतनी ही अधिक ہوگی।
(Atomic Radius is inversely proportional to Ionization Energy)

यह संबंध इन दोनों अवधारणाओं को एक साथ समझने और याद रखने में मदद करता है।


1. इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity – EA)

परिभाषा

किसी विलगित गैसीय परमाणु (Isolated Gaseous Atom) के सबसे बाहरी कोश में एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन जोड़ने (adding an electron) पर जो ऊर्जा मुक्त (Energy is Released) होती है, उसे उस परमाणु की इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं।

X (g) + e⁻ → X⁻(g) + ऊर्जा (इलेक्ट्रॉन बंधुता)

इकाई (Unit):

इसे किलोजूल प्रति मोल (kJ/mol) या इलेक्ट्रॉन वोल्ट प्रति परमाणु (eV/atom) में मापा जाता है।


आवर्त सारणी में इलेक्ट्रॉन बंधुता का ट्रेंड (Trend in the Periodic Table)


2. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity – EN)

परिभाषा

किसी यौगिक के अणु में, एक परमाणु की सहसंयोजी बंध (Covalent Bond) के साझा किए गए इलेक्ट्रॉन जोड़ी (Shared pair of electrons) को अपनी ओर आकर्षित करने की सापेक्ष क्षमता (Relative tendency to attract) को उस परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं।

आवर्त सारणी में विद्युत ऋणात्मकता का ट्रेंड (Trend in the Periodic Table)

इसका ट्रेंड लगभग आयनन ऊर्जा के समान है।


इलेक्ट्रॉन बंधुता बनाम विद्युत ऋणात्मकता (Electron Affinity vs. Electronegativity)

(यह अंतर परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)

आधारइलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity)विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity)
परिभाषाविलगित (Isolated) गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर मुक्त ऊर्जाबंधे हुए (Bonded) परमाणु द्वारा साझा इलेक्ट्रॉन जोड़ी को आकर्षित करने की क्षमता
प्रकृतिएक ऊर्जा का निरपेक्ष मान (Absolute value of energy)एक सापेक्षिक प्रवृत्ति (Relative tendency), कोई ऊर्जा नहीं।
इकाईkJ/mol या eV/atomकोई इकाई नहीं (पॉलिंग स्केल)।
सर्वाधिक मान वाला तत्वक्लोरीन (Chlorine, Cl)फ्लोरीन (Fluorine, F)

सारांश सारणी: गुणों की तुलना

गुण (Property)आवर्त में (बाएँ से दाएँ)समूह में (ऊपर से नीचे)सर्वाधिक मान वाला तत्व
परमाणु त्रिज्याघटती है ⬇️बढ़ती है ⬆️सीजियम/फ्रांशियम
आयनन ऊर्जाबढ़ती है ⬆️घटती है ⬇️हीलियम
इलेक्ट्रॉन बंधुताबढ़ती है ⬆️ (अधिक ऋणात्मक)घटती है ⬇️ (कम ऋणात्मक)क्लोरीन (Cl) (अपवाद)
विद्युत ऋणात्मकताबढ़ती है ⬆️घटती है ⬇️फ्लोरीन (F)


धातु, अधातु और उपधातु

धातु (Metals)

परिभाषा: धातु वे तत्व होते हैं जो आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागकर (Lose Electrons) धनायन (Cations) बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। आवर्त सारणी में अधिकांश तत्व (लगभग 80%) धातु हैं और ये सारणी के बाईं ओर तथा मध्य में स्थित होते हैं।


धातुओं के सामान्य भौतिक गुणधर्म (General Physical Properties of Metals)

1. भौतिक अवस्था (Physical State):

2. चमक (Lustre):

3. कठोरता (Hardness):

4. आघातवर्धनीयता (Malleability):

5. तन्यता (Ductility):

6. ऊष्मा की सुचालकता (Thermal Conductivity):

7. विद्युत की सुचालकता (Electrical Conductivity):

8. घनत्व (Density):

9. गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points):

10. ध्वानिक/अनुनादी (Sonorous):


सारांश सारणी: गुणों के चरम और अपवाद (बहुत महत्वपूर्ण)

गुणसर्वोत्तम / उच्चतमसबसे खराब / निम्नतम (या मुख्य अपवाद)
विद्युत सुचालकताचांदी (Ag), फिर तांबा (Cu)सीसा (Pb), पारा (Hg)
ऊष्मा सुचालकताचांदी (Ag), फिर तांबा (Cu)सीसा (Pb), पारा (Hg)
तन्यतासोना (Au)जिंक (Zn) (भंगुर होता है)
आघातवर्धनीयतासोना (Au), चांदी (Ag)जिंक (Zn)
घनत्वऑस्मियम (Os)लिथियम (Li)
कठोरताटंगस्टन (W), क्रोमियम (Cr)सोडियम (Na), पोटैशियम (K) (चाकू से काटे जा सकते हैं)
गलनांकटंगस्टन (W)पारा (Hg), गैलियम (Ga), सीजियम (Cs)
भौतिक अवस्थाठोस (लगभग सभी)पारा (Hg) (कमरे के तापमान पर द्रव)

धातुओं के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties of Metals)

धातुओं के रासायनिक गुण मुख्य रूप से उनके द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने (Losing Electrons) की प्रवृत्ति पर निर्भर करते हैं। जो धातु जितनी आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागती है, वह उतनी ही अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) होती है।


1. ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया (Reaction with Oxygen)

उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides):


2. जल के साथ अभिक्रिया (Reaction with Water)

धातुअभिक्रियाउत्पाद
सोडियम (Na), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca)ठंडे जल (Cold Water) से तेजी से अभिक्रिया करते हैं। (Na और K की अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी और विस्फोटक होती है)।धातु हाइड्रॉक्साइड (NaOH, KOH, Ca(OH)₂)
मैग्नीशियम (Mg)ठंडे जल से अभिक्रिया नहीं करता, केवल गर्म जल (Hot Water) से अभिक्रिया करता है।मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)₂)
एल्युमिनियम (Al), जिंक (Zn), लोहा (Fe)न तो ठंडे और न ही गर्म जल से, केवल भाप (Steam) से अभिक्रिया करते हैं।धातु ऑक्साइड (Al₂O₃, ZnO, Fe₃O₄)
सीसा (Pb), तांबा (Cu), चांदी (Ag), सोना (Au)जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करते हैं।

3. अम्लों के साथ अभिक्रिया (Reaction with Acids)


4. क्षार के साथ अभिक्रिया (Reaction with Bases)


सारांश सारणी: प्रमुख अभिक्रियाएं

अभिक्रियाअभिकारकउत्पादमुख्य गैस
ऑक्सीजन के साथधातु + O₂धातु ऑक्साइड (क्षारीय/उभयधर्मी)
जल के साथधातु + H₂Oधातु हाइड्रॉक्साइड या ऑक्साइड + H₂H₂ (हाइड्रोजन)
तनु अम्लों के साथधातु + Acidलवण + H₂H₂ (हाइड्रोजन)
प्रबल क्षारों के साथउभयधर्मी धातु + Baseलवण + H₂H₂ (हाइड्रोजन)
कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट के साथअम्ल(यहाँ धातु नहीं)CO₂

अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series)

परिभाषा

अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं की एक ऐसी सूची है, जिसमें उन्हें उनकी घटती हुई अभिक्रियाशीलता (Decreasing order of reactivity) के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।


धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी

नीचे दी गई श्रेणी को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसे याद करने के लिए लोकप्रिय स्मरक (mnemonics) का भी उपयोग किया जा सकता है।

धातु (Metal)प्रतीक (Symbol)अभिक्रियाशीलता (Reactivity)स्मरक (Mnemonic)
पोटैशियमKसर्वाधिक अभिक्रियाशील (Most Reactive)Kashi
सोडियमNaNath
कैल्शियमCaCa
मैग्नीशियमMgMali
एल्युमिनियमAlघटती हुई अभिक्रियाशीलता (Decreasing Reactivity) ⬇️Aloo
जिंक (जस्ता)ZnZara
आयरन (लोहा)FeFeeke
लेड (सीसा)PbPakata
(हाइड्रोजन)(H)(संदर्भ बिंदु/Reference Point)Hai.
कॉपर (तांबा)CuCon
मरकरी (पारा)HgHoga
सिल्वर (चांदी)AgAage
गोल्ड (सोना)Auसबसे कम अभिक्रियाशील (Least Reactive)Aur?
(प्लैटिनम)(Pt)(सोने से भी कम अभिक्रियाशील)

(स्मरक: “Kashi Nath Ca Mali Aloo Zara Feeke Pakata Hai. Con Hoga Aage Aur?”)


अभिक्रियाशीलता श्रेणी की मुख्य बातें और अनुप्रयोग

इस श्रेणी का उपयोग कई प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं की भविष्यवाणी करने के लिए किया जा सकता है:

1. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reactions):

2. तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया:

3. जल के साथ अभिक्रिया:

4. धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals):


निष्कर्ष:
अभिक्रियाशीलता श्रेणी रसायन विज्ञान की भविष्यवाणियों के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। यह याद रखना कि कौन सी धातु किससे ऊपर है, आपको कई अभिक्रियाओं के परिणाम का अनुमान लगाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में संबंधित प्रश्नों को आसानी से हल करने में मदद करेगा।


अधातु (Non-metals)

परिभाषा: अधातु वे तत्व होते हैं जो आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके (Gain Electrons) ऋणायन (Anions) बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। आवर्त सारणी में ये तत्व दाईं ओर स्थित होते हैं (समूह 14-18)।

उदाहरण: कार्बन (C), नाइट्रोजन (N), ऑक्सीजन (O), सल्फर (S), फॉस्फोरस (P), क्लोरीन (Cl), हाइड्रोजन (H)।


अधातुओं के सामान्य भौतिक गुणधर्म (General Physical Properties of Non-metals)

1. भौतिक अवस्था (Physical State):

2. चमक (Lustre):

3. कठोरता (Hardness):

4. आघातवर्धनीयता (Malleability) और तन्यता (Ductility):

5. ऊष्मा और विद्युत की सुचालकता (Thermal and Electrical Conductivity):

6. घनत्व (Density):

7. गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points):

8. ध्वानिक/अनुनादी (Sonorous):

9. रंग (Color):


सारांश सारणी: अधातुओं के गुण और उनके महत्वपूर्ण अपवाद

(यह सारणी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)

गुणसामान्य प्रवृत्ति (General Trend)महत्वपूर्ण अपवाद (Important Exception)
भौतिक अवस्थाठोस या गैसब्रोमीन (Br) – द्रव अधातु
चमकचमकदार नहीं होतींआयोडीन (I), हीरा, ग्रेफाइट – चमकदार होते हैं
कठोरतामुलायम और भंगुर होती हैंहीरा (Diamond) – सबसे कठोर ज्ञात पदार्थ
विद्युत सुचालकताकुचालक होती हैंग्रेफाइट (Graphite) – सुचालक होता है
गलनांक / क्वथनांककम होते हैंहीरा और ग्रेफाइट – बहुत उच्च होते हैं

यह सारणी आपको अधातुओं के गुणों और सबसे महत्वपूर्ण बात, उनके अपवादों को याद रखने में मदद करेगी, जिनसे अक्सर प्रश्न बनते हैं।


अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties of Non-metals)

अधातुएं विद्युत ऋणात्मक (Electronegative) तत्व होती हैं, क्योंकि वे रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anions) बनाती हैं।


1. ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया (Reaction with Oxygen)


2. जल के साथ अभिक्रिया (Reaction with Water)


3. क्लोरीन के साथ अभिक्रिया (Reaction with Chlorine)


4. हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया (Reaction with Hydrogen)


सारांश सारणी: प्रमुख अभिक्रियाएं

अभिकारकअभिक्रिया का उत्पादउत्पाद की प्रकृतिउदाहरण
ऑक्सीजन (O₂) के साथअधातु ऑक्साइडअम्लीय या उदासीनCO₂ (अम्लीय), CO (उदासीन), SO₂ (अम्लीय)
जल (H₂O) के साथसामान्यतः कोई अभिक्रिया नहीं(फॉस्फोरस को जल में रखते हैं)
क्लोरीन (Cl₂) के साथसहसंयोजी क्लोराइडसहसंयोजीPCl₃, HCl
हाइड्रोजन (H₂) के साथसहसंयोजी हाइड्राइडसहसंयोजीNH₃, H₂O, H₂S

यह सारणी आपको अधातुओं की विभिन्न तत्वों के साथ होने वाली अभिक्रियाओं के प्रमुख उत्पादों और उनकी प्रकृति को संक्षेप में याद रखने में मदद करेगी।


उपधातु (Metalloids)

परिभाषा

उपधातु (Metalloids) वे तत्व हैं जिनके गुणधर्म धातुओं (Metals) और अधातुओं (Non-metals) के मध्यवर्ती (Intermediate) होते हैं। अर्थात्, वे कुछ गुण धातुओं के समान दर्शाते हैं और कुछ गुण अधातुओं के समान।


प्रमुख उपधातु और उनके उदाहरण (Examples of Metalloids)

आवर्त सारणी में मुख्य रूप से 7 तत्वों को उपधातु के रूप में मान्यता प्राप्त है। इन्हें याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

याद रखने की ट्रिक (Mnemonic):
Bhole Siv As Sab Teri Pooja Kare”
(भोले शिव ऐसे सब तेरी पूजा करें)

प्रतीक (Symbol)तत्व का नाम (Name)परमाणु संख्या (Z)मुख्य विशेषता/उपयोग
Bबोरॉन (Boron)5अत्यंत कठोर (हीरे के बाद दूसरा), पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व, बोरेक्स बनाने में।
Siसिलिकॉन (Silicon)14सबसे महत्वपूर्ण उपधातु, पृथ्वी की पपड़ी में दूसरा सबसे प्रचुर तत्व, अर्धचालक (Semiconductor) के रूप में चिप्स और सौर सेल बनाने में।
Geजर्मेनियम (Germanium)32सिलिकॉन के समान एक महत्वपूर्ण अर्धचालक, फाइबर-ऑप्टिक केबलों में उपयोग।
Asआर्सेनिक (Arsenic)33अत्यंत विषाक्त (Toxic), मिश्र धातुओं को कठोर बनाने और कीटनाशकों में उपयोग।
Sbएंटीमनी (Antimony)51लेड (सीसा) को कठोर बनाने के लिए मिश्र धातुओं में, ज्वाला मंदक के रूप में।
Teटेल्यूरियम (Tellurium)52मिश्र धातुओं में, फोटोकॉपियर और प्रिंटर में फोटोरिसेप्टर के रूप में।
Poपोलोनियम (Polonium)84एक अत्यधिक रेडियोधर्मी उपधातु, जिसे मैरी क्यूरी ने खोजा था। एंटी-स्टैटिक उपकरणों में उपयोग।
(

उपधातुओं के सामान्य गुणधर्म (General Properties of Metalloids)

(a) भौतिक गुण (Physical Properties):

(b) रासायनिक गुण (Chemical Properties):

(c) विद्युत गुण (Electrical Properties):


सारांश सारणी: धातु, उपधातु और अधातु की तुलना

गुणधातु (Metals)उपधातु (Metalloids)अधातु (Non-metals)
दिखावटचमकदार (Lustrous)चमकदारनिष्प्रभ (Dull) (अपवाद: आयोडीन)
चालकतासुचालक (Good Conductor)अर्धचालक (Semiconductor)कुचालक (Insulator) (अपवाद: ग्रेफाइट)
आघातवर्धनीयताहाँ (Yes)नहीं (भंगुर होते हैं)नहीं (भंगुर होती हैं)
तन्यताहाँ (Yes)नहीं (No)नहीं (No)
ऑक्साइड की प्रकृतिसामान्यतः क्षारीयसामान्यतः उभयधर्मीसामान्यतः अम्लीय
उदाहरणलोहा, तांबा, सोनासिलिकॉन, आर्सेनिकऑक्सीजन, सल्फर, क्लोरीन

अर्धचालक (Semiconductors) और उपधातुओं का उपयोग

परिभाषा: अर्धचालक क्या हैं?

अर्धचालक (Semiconductor) वे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) सुचालकों (Conductors) जैसे तांबा, और कुचालकों (Insulators) जैसे रबर, के मध्यवर्ती (Intermediate) होती है।

इनकी सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट विशेषता यह है कि इनकी चालकता को नियंत्रित किया जा सकता है।

उपधातु ही अर्धचालक क्यों हैं?


अर्धचालकों के गुण (जो उन्हें उपयोगी बनाते हैं)

  1. तापमान पर निर्भरता: धातुओं के विपरीत, अर्धचालकों की चालकता तापमान बढ़ाने पर बढ़ती है। परम शून्य तापमान पर, एक शुद्ध अर्धचालक एक पूर्ण कुचालक की तरह व्यवहार करता है।
  2. प्रकाश संवेदनशीलता: कुछ अर्धचालकों की चालकता उन पर पड़ने वाले प्रकाश की तीव्रता के साथ बदलती है (इसी गुण का उपयोग सोलर सेल और फोटोडायोड में होता है)।
  3. डोपिंग (Doping) – चालकता का नियंत्रण: यह अर्धचालकों का सबसे क्रांतिकारी गुण है।

डोपिंग (Doping) – अशुद्धि मिलाना

परिभाषा: एक शुद्ध अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor) की चालकता बढ़ाने के लिए, उसमें जानबूझकर बहुत कम मात्रा में एक विशिष्ट अशुद्धि (Specific Impurity) मिलाने की प्रक्रिया को डोपिंग (Doping) कहते हैं।

डोपिंग के आधार पर, दो प्रकार के बाह्य अर्धचालक बनते हैं:

1. N- प्रकार के अर्धचालक (N-type Semiconductors)

2. P- प्रकार के अर्धचालक (P-type Semiconductors)


उपधातुओं का अर्धचालक के रूप में उपयोग (Applications)

N-प्रकार और P-प्रकार के अर्धचालकों को एक साथ जोड़कर विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जाते हैं, जिन्होंने दुनिया में क्रांति ला दी है।

(a) डायोड (Diode):

(b) ट्रांजिस्टर (Transistor):

(c) इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit – IC or Chip):

(d) सौर सेल (Solar Cells / Photovoltaic Cells):


निष्कर्ष

संक्षेप में, उपधातु (विशेष रूप से सिलिकॉन) आधुनिक दुनिया की रीढ़ हैं। उनके अर्धचालक गुण ने डोपिंग की प्रक्रिया के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स में क्रांति ला दी है, जिससे ट्रांजिस्टर, आईसी चिप्स और सौर सेल जैसे उपकरणों का निर्माण संभव हुआ है। ये उपकरण आज के कंप्यूटर, स्मार्टफोन, संचार प्रणाली और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी का आधार हैं।


धातुकर्म (Metallurgy)

धातुकर्म (Metallurgy)

परिभाषा

धातुकर्म वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी है जो अयस्कों (Ores) से शुद्ध धातु प्राप्त करने तथा उन्हें उपयोग के लिए तैयार करने से संबंधित है। इसमें अयस्क से धातु के निष्कर्षण (Extraction) से लेकर उसके शोधन (Refining) तक की सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं।


चरण 1: मूलभूत शब्दावली (Basic Terminology)

(a) खनिज (Minerals):

(b) अयस्क (Ores):

(c) गैंग या आधात्री (Gangue or Matrix):


चरण 2: धातुकर्म की प्रक्रियाएं (Processes of Metallurgy)

अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल होते हैं:

  1. अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)
  2. धातु का निष्कर्षण (Extraction of Metal from Concentrated Ore)
  3. धातु का शोधन/परिष्करण (Refining of Metal)

(I) अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)

इस चरण में अयस्क से गैंग (अशुद्धियों) को हटाया जाता है। इसे अयस्क प्रसाधन (Ore Dressing) भी कहते हैं। इसके लिए अयस्क और गैंग के भौतिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है।


(II) धातु का निष्कर्षण (Extraction of Metal)

सांद्रित अयस्क से धातु को प्राप्त करने की प्रक्रिया अभिक्रियाशीलता श्रेणी के आधार पर अलग-अलग होती है। पहले अयस्क को ऑक्साइड में बदला जाता है क्योंकि ऑक्साइड से धातु का अपचयन करना आसान होता है।

ऑक्साइड में बदलने की विधियाँ:

  1. निस्तापन (Calcination):
    • परिभाषा: सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति (Absence of Air) में उसके गलनांक से कम ताप पर गर्म करना।
    • किसके लिए?: यह मुख्य रूप से कार्बोनेट (Carbonate) और हाइड्रॉक्साइड (Hydroxide) अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है।
    • उदाहरण (जिंक कार्बोनेट):
      ZnCO₃(s) –(ताप)–> ZnO(s) + CO₂(g)
  2. भर्जन (Roasting):
    • परिभाषा: सांद्रित अयस्क को वायु की अधिकता (Presence of Excess Air) में उसके गलनांक से कम ताप पर गर्म करना।
    • किसके लिए?: यह मुख्य रूप से सल्फाइड (Sulphide) अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है।
    • उदाहरण (जिंक सल्फाइड):
      2ZnS(s) + 3O₂(g) –(ताप)–> 2ZnO(s) + 2SO₂(g)
      (निस्तापन और भर्जन के बीच का अंतर परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)

ऑक्साइड से धातु का अपचयन (Reduction to Metal):


(III) धातु का शोधन/परिष्करण (Refining of Metal)

निष्कर्षण से प्राप्त धातु पूरी तरह से शुद्ध नहीं होती है। अंतिम चरण में इन अशुद्धियों को हटाकर उच्च शुद्धता वाली धातु प्राप्त की जाती है।


प्रमुख धातुओं के अयस्क (Ores of Important Metals)

(यह सूची प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है)

धातुरासायनिक प्रतीकप्रमुख अयस्क (Common Name and Formula)
एल्युमिनियमAlबॉक्साइट (Bauxite) – Al₂O₃·2H₂O
लोहाFeहेमेटाइट (Hematite) – Fe₂O₃<br>मैग्नेटाइट (Magnetite) – Fe₃O₄
तांबाCuकॉपर पाइराइट (Copper Pyrite) – CuFeS₂
पाराHgसिनेबार (Cinnabar) – HgS
जस्ता/जिंकZnजिंक ब्लेंड (Zinc Blende) – ZnS<br>कैलेमाइन (Calamine) – ZnCO₃
सीसा/लेडPbगैलेना (Galena) – PbS
टिनSnकैसिटेराइट (Cassiterite) – SnO₂
सोडियमNaरॉक साल्ट (Rock Salt) – NaCl

खनिज (Minerals)

परिभाषा:

खनिज वे प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक ठोस पदार्थ हैं, जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और एक निश्चित क्रिस्टलीय संरचना होती है। ये पृथ्वी की भूपर्पटी (Earth’s Crust) में पाए जाते हैं और इनमें धातुएं या उनके यौगिक विभिन्न रूपों में मौजूद होते हैं।


अयस्क (Ores)

परिभाषा:

अयस्क वे खनिज हैं, जिनसे किसी धातु का निष्कर्षण बहुत आसानी से, बड़ी मात्रा में और आर्थिक रूप से लाभदायक (Profitably) होता है।


निष्कर्ष: “सभी अयस्क खनिज होते हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।”

यह कथन इन दोनों के बीच के संबंध को पूरी तरह से स्पष्ट करता है:

  1. “सभी अयस्क खनिज होते हैं”: अयस्क बनने के लिए किसी पदार्थ का खनिज होना पहली और अनिवार्य शर्त है। अयस्क खनिजों का ही एक उप-समूह (subset) है।
  2. “…लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं”: कोई खनिज अयस्क केवल तभी कहलाता है जब उससे धातु निकालना लाभदायक हो। ऐसे कई खनिज हैं जिनमें धातु तो होती है, लेकिन:
    • धातु की प्रतिशत मात्रा बहुत कम होती है।
    • धातु का निष्कर्षण बहुत मुश्किल या महंगा होता है।
    • खनिज में हानिकारक अशुद्धियाँ बहुत अधिक होती हैं।

इसलिए, ऐसे खनिजों को केवल “खनिज” कहा जाता है, “अयस्क” नहीं।


खनिज बनाम अयस्क: एक तुलनात्मक सारणी

विशेषता (Feature)खनिज (Mineral)अयस्क (Ore)
परिभाषाप्रकृति में पाया जाने वाला कोई भी पदार्थ जिसमें धातु या उसका यौगिक हो।वह खनिज जिससे धातु का निष्कर्षण लाभदायक हो।
धातु की मात्राधातु की प्रतिशत मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है।धातु की प्रतिशत मात्रा पर्याप्त रूप से अधिक होती है।
आर्थिक महत्वसभी खनिज आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं होते हैं।सभी अयस्क आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
निष्कर्षण (Extraction)सभी खनिजों से धातु का निष्कर्षण संभव या सुविधाजनक नहीं होता।अयस्कों से धातु का निष्कर्षण संभव और सुविधाजनक होता है।
अशुद्धियाँइसमें गैंग (अशुद्धियाँ) की मात्रा अधिक हो सकती है।गैंग की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है या उसे हटाना आसान होता है।
प्रकृति/दायराव्यापक अवधारणा। इसमें सभी अयस्क शामिल हैं।विशिष्ट अवधारणा। यह खनिजों का एक लाभदायक उप-समूह है।
उदाहरणएल्युमिनियम के लिए: चिकनी मिट्टी, बॉक्साइट।एल्युमिनियम के लिए: केवल बॉक्साइट
संबंध“सभी अयस्क खनिज हैं।”“लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं हैं।”

प्रमुख धातुएं और उनके अयस्क (Important Metals and their Ores)

धातु (Metal)प्रतीक (Symbol)अयस्क का सामान्य नाम (Common Name of Ore)अयस्क का रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)अयस्क का प्रकार
एल्युमिनियमAlबॉक्साइट (Bauxite) (सबसे महत्वपूर्ण)Al₂O₃·2H₂Oऑक्साइड अयस्क
कोरंडम (Corundum)Al₂O₃ऑक्साइड अयस्क
लोहा (Iron)Feहेमेटाइट (Hematite) (सर्वाधिक निष्कर्षण)Fe₂O₃ऑक्साइड अयस्क
मैग्नेटाइट (Magnetite) (सर्वोत्तम अयस्क)Fe₃O₄ऑक्साइड अयस्क
सिडेराइट (Siderite)FeCO₃कार्बोनेट अयस्क
आयरन पाइराइट (Iron Pyrite) / “मूर्खों का सोना”FeS₂सल्फाइड अयस्क
तांबा (Copper)Cuकॉपर पाइराइट (Copper Pyrite) / चाल्कोपाइराइटCuFeS₂सल्फाइड अयस्क
मैलाकाइट (Malachite)CuCO₃·Cu(OH)₂कार्बोनेट अयस्क
क्यूप्राइट (Cuprite)Cu₂Oऑक्साइड अयस्क
जस्ता/जिंकZnजिंक ब्लेंड (Zinc Blende) / स्फैलेराइटZnSसल्फाइड अयस्क
कैलेमाइन (Calamine)ZnCO₃कार्बोनेट अयस्क
जिंकाइट (Zincite)ZnOऑक्साइड अयस्क
पारा (Mercury)Hgसिनेबार (Cinnabar) (एकमात्र महत्वपूर्ण अयस्क)HgSसल्फाइड अयस्क
सीसा/लेडPbगैलेना (Galena) (मुख्य अयस्क)PbSसल्फाइड अयस्क
टिनSnकैसिटेराइट (Cassiterite) / टिनस्टोनSnO₂ऑक्साइड अयस्क
मैग्नीशियमMgमैग्नेसाइट (Magnesite)MgCO₃कार्बोनेट अयस्क
डोलोमाइट (Dolomite)MgCO₃·CaCO₃कार्बोनेट अयस्क
कार्नेलाइट (Carnallite)KCl·MgCl₂·6H₂Oक्लोराइड अयस्क
सोडियमNaरॉक साल्ट (Rock Salt) / साधारण नमकNaClक्लोराइड अयस्क
चिली साल्टपीटर (Chile Saltpeter)NaNO₃नाइट्रेट अयस्क
बोरेक्स (Borax) / सुहागाNa₂B₄O₇·10H₂Oबोरेट अयस्क
पोटैशियमKसाल्टपीटर (Nitre) / शोराKNO₃नाइट्रेट अयस्क
कार्नेलाइट (Carnallite)KCl·MgCl₂·6H₂Oक्लोराइड अयस्क
कैल्शियमCaचूना पत्थर (Limestone) / मार्बल / चाकCaCO₃कार्बोनेट अयस्क
जिप्सम (Gypsum)CaSO₄·2H₂Oसल्फेट अयस्क
चांदी (Silver)Agअर्जेंटाइट (Argentite) / सिल्वर ग्लांसAg₂Sसल्फाइड अयस्क
हॉर्न सिल्वर (Horn Silver)AgClक्लोराइड अयस्क
सोना (Gold)Auकैल्वेराइट (Calaverite)AuTe₂टेलुराइड अयस्क
(अधिकतर मुक्त अवस्था (Free State) में मिलता है)Au
यूरेनियमUपिचब्लेंड (Pitchblende)U₃O₈ऑक्साइड अयस्क
थोरियमThमोनाजाइट (Monazite) (थोरियम ऑक्साइड के रूप में)ThO₂ऑक्साइड अयस्क

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु:

यह सारणी आपको धातुओं और उनके अयस्कों से संबंधित अधिकांश प्रश्नों को हल करने में मदद करेगी।


धातुकर्म के चरण (Steps of Metallurgy)

अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

चरण 1: अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)
चरण 2: सांद्रित अयस्क से धातु का निष्कर्षण (Extraction of Metal from Concentrated Ore)
चरण 3: धातु का शोधन या परिष्करण (Refining or Purification of Metal)


चरण 1: अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)


चरण 2: सांद्रित अयस्क से धातु का निष्कर्षण (Extraction of Metal)

इस चरण में सांद्रित अयस्क से धातु प्राप्त की जाती है। इसे दो उप-चरणों में बांटा गया है:
(a) अयस्क का ऑक्साइड में परिवर्तन।
(b) ऑक्साइड का धातु में अपचयन।

(a) अयस्क को ऑक्साइड में बदलना (क्योंकि ऑक्साइड का अपचयन करना आसान होता है)

  1. निस्तापन (Calcination):
    • परिभाषा: सांद्रित अयस्क को वायु की सीमित या अनुपस्थिति (Limited or Absence of Air) में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर जोर से गर्म करना।
    • किसके लिए उपयोगी?: कार्बोनेट अयस्कों (CaCO₃) और हाइड्रॉक्साइड अयस्कों (Al₂O₃·2H₂O) के लिए। इस प्रक्रिया में नमी और वाष्पशील अशुद्धियाँ भी निकल जाती हैं।
    • उदाहरण: ZnCO₃ (कैलेमाइन) –(ताप)–> ZnO + CO₂↑
  2. भर्जन (Roasting):
    • परिभाषा: सांद्रित अयस्क को वायु की अधिकता (Excess of Air) में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म करना।
    • किसके लिए उपयोगी?: मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों (ZnS) के लिए।
    • उदाहरण: 2ZnS (जिंक ब्लेंड) + 3O₂ –(ताप)–> 2ZnO + 2SO₂↑

(b) धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन (Reduction of Metal Oxide to Metal)

धातु की अभिक्रियाशीलता के आधार पर उपयुक्त विधि का चयन किया जाता है।

  1. प्रगलन (Smelting):
    • परिभाषा: यह एक अपचयन प्रक्रिया है जिसमें धातु ऑक्साइड को कोक (कार्बन) जैसे अपचायक (Reducing Agent) और एक गालक (Flux) के साथ मिलाकर उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। गालक (फ्लक्स) अयस्क में मौजूद अगलनीय अशुद्धियों के साथ मिलकर एक गलनीय पदार्थ धातुमल (Slag) बनाता है, जिसे आसानी से हटाया जा सकता है।
    • किसके लिए उपयोगी?: मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं जैसे लोहा, जिंक, टिन, लेड के लिए।
    • उदाहरण (आयरन का निष्कर्षण):
      Fe₂O₃ (हेमेटाइट) + 3C (कोक) → 2Fe (आयरन) + 3CO↑
  2. अन्य विधियाँ:
    • विद्युत-अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction): उच्च अभिक्रियाशील धातुओं (Na, K, Ca, Al) के लिए।
    • स्वतः अपचयन (Auto Reduction): कम अभिक्रियाशील धातुओं (Cu, Hg) के लिए।
    • एल्युमिनोथर्मिक विधि (Thermite Process): इसमें अपचायक के रूप में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग होता है (जैसे- Cr₂O₃ + 2Al → 2Cr + Al₂O₃ ) । रेलवे ट्रैक की वेल्डिंग में थर्माइट अभिक्रिया का उपयोग होता है (Fe₂O₃ + 2Al)।

चरण 3: धातु का शोधन या परिष्करण (Refining of Metal)

निष्कर्षण से प्राप्त धातु (अशुद्ध धातु या कच्ची धातु) में अभी भी कुछ अशुद्धियाँ होती हैं। इन अशुद्धियों को हटाकर उच्च-शुद्धता वाली धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को शोधन कहते हैं।