रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण
रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction)
परिभाषा: वह प्रक्रिया जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (अभिकारक – Reactants) आपस में क्रिया करके नए गुणों वाले एक या एक से अधिक नए पदार्थों (उत्पाद – Products) का निर्माण करते हैं, रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।
- उदाहरण: जब मैग्नीशियम रिबन को हवा में जलाया जाता है, तो यह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड नामक एक सफेद पाउडर बनाता है। यहाँ मैग्नीशियम और ऑक्सीजन अभिकारक हैं, और मैग्नीशियम ऑक्साइड उत्पाद है।
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)
परिभाषा: किसी रासायनिक अभिक्रिया को प्रतीकों (Symbols) और सूत्रों (Formulas) का उपयोग करके एक संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करना रासायनिक समीकरण कहलाता है।
- समीकरण के भाग:
- अभिकारक (Reactants): इन्हें तीर (→) के बाईं ओर लिखा जाता है।
- उत्पाद (Products): इन्हें तीर (→) के दाईं ओर लिखा जाता है।
- तीर (→): यह अभिक्रिया की दिशा को दर्शाता है।
- भौतिक अवस्थाएं: पदार्थ की अवस्था दर्शाने के लिए (s) – ठोस, (l) – द्रव, (g) – गैस, और (aq) – जलीय विलयन का प्रयोग होता है।
- उदाहरण: 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s)
रासायनिक समीकरण को संतुलित करना (Balancing a Chemical Equation)
सिद्धांत: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश होता है। इसे द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) कहते हैं।
इसलिए, रासायनिक समीकरण में तीर के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- उदाहरण: Fe + H₂O → Fe₃O₄ + H₂
- यह असंतुलित है।
- संतुलित समीकरण: 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂
रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (Types of Chemical Reactions)
1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)
- परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद (Single Product) का निर्माण करते हैं।
- सामान्य रूप: A + B → AB
- उदाहरण:
- बिना बुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड) का पानी के साथ अभिक्रिया करके बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) बनाना:
CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा - कोयले का दहन: C(s) + O₂(g) → CO₂(g)
- बिना बुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड) का पानी के साथ अभिक्रिया करके बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) बनाना:
2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)
- परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक (Single Reactant) टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में वियोजित हो जाता है। यह संयोजन अभिक्रिया के विपरीत है।
- सामान्य रूप: AB → A + B
- वियोजन के प्रकार (ऊर्जा स्रोत के आधार पर):
- (a) ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition): ऊष्मा द्वारा वियोजन।
- उदाहरण: कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड का बनना।
CaCO₃(s) –(ऊष्मा)–> CaO(s) + CO₂(g)
- उदाहरण: कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड का बनना।
- (b) वैद्युत वियोजन (Electrolytic Decomposition): विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वियोजन।
- उदाहरण: जल का वैद्युत अपघटन होने पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस का बनना।
2H₂O(l) –(विद्युत धारा)–> 2H₂(g) + O₂(g)
- उदाहरण: जल का वैद्युत अपघटन होने पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस का बनना।
- (c) प्रकाशीय वियोजन (Photolytic Decomposition): सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वियोजन।
- उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड का सूर्य के प्रकाश में सिल्वर और क्लोरीन में टूटना। (इसका उपयोग ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी में होता था)।
2AgCl(s) –(सूर्य का प्रकाश)–> 2Ag(s) + Cl₂(g)
- उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड का सूर्य के प्रकाश में सिल्वर और क्लोरीन में टूटना। (इसका उपयोग ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी में होता था)।
- (a) ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition): ऊष्मा द्वारा वियोजन।
3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
- परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व (More Reactive Element), किसी यौगिक में से कम अभिक्रियाशील तत्व (Less Reactive Element) को विस्थापित (Displace) कर देता है। यह अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) पर आधारित है।
- सामान्य रूप: A + BC → AC + B
- उदाहरण:
- जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा कॉपर को विस्थापित कर देता है और विलयन का रंग हरा हो जाता है।
Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
- जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा कॉपर को विस्थापित कर देता है और विलयन का रंग हरा हो जाता है।
4. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)
- परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें दो अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है।
- सामान्य रूप: AB + CD → AD + CB
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): यदि इस अभिक्रिया में किसी अघुलनशील ठोस (अवक्षेप – Precipitate) का निर्माण होता है, तो उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण:
Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s)↓ + 2NaCl(aq) (यहाँ BaSO₄ का सफेद अवक्षेप बनता है)
- उदाहरण:
5. ऑक्सीकरण-अपचयन (रेडॉक्स) अभिक्रिया (Oxidation-Reduction / Redox Reaction)
- ऑक्सीकरण (Oxidation):
- किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का जुड़ना।
- या, किसी पदार्थ से हाइड्रोजन का हटना।
- या, इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में, इलेक्ट्रॉन का त्याग (Loss of Electrons)।
- अपचयन (Reduction):
- किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का जुड़ना।
- या, किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का हटना।
- या, इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में, इलेक्ट्रॉन का ग्रहण (Gain of Electrons)।
- रेडॉक्स अभिक्रिया: वह अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं।
- उदाहरण:
CuO + H₂ → Cu + H₂O- यहाँ CuO से ऑक्सीजन हट रही है, तो CuO का अपचयन हो रहा है।
- H₂ में ऑक्सीजन जुड़ रही है, तो H₂ का ऑक्सीकरण हो रहा है।
6. ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं (Exothermic and Endothermic Reactions)
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा निकलती (Heat is released) है।
- उदाहरण: प्राकृतिक गैस का दहन (CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा), श्वसन (Respiration)।
- ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें उत्पाद बनाने के लिए ऊष्मा अवशोषित (Heat is absorbed) होती है।
- उदाहरण: सभी वियोजन अभिक्रियाएं, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)।
विलयन (Solutions)
1. विलयन (Solution)
- परिभाषा: विलयन (Solution) दो या दो से अधिक पदार्थों का एक समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) होता है। “समांगी” का अर्थ है कि मिश्रण का संघटन और गुण हर जगह एक समान होता है।
- उदाहरण: जब आप पानी में नमक घोलते हैं, तो नमक के कण पानी में समान रूप से वितरित हो जाते हैं। आप नमक और पानी के कणों को अलग-अलग नहीं देख सकते हैं, और मिश्रण का हर हिस्सा एक जैसा नमकीन होता है।
- विलयन के दो मुख्य घटक होते हैं:
- विलायक (Solvent)
- विलेय (Solute)
- विलयन = विलेय + विलायक
2. विलायक (Solvent)
- परिभाषा: विलयन का वह घटक जो अधिक मात्रा (Larger Quantity) में उपस्थित होता है और दूसरे घटक को अपने में घोलता (Dissolves) है, विलायक (Solvent) कहलाता है।
- जल एक सार्वत्रिक विलायक के रूप में (Water as a Universal Solvent):
- जल (Water, H₂O) को सार्वत्रिक विलायक कहा जाता है क्योंकि यह अधिकांश अन्य पदार्थों की तुलना में बहुत अधिक पदार्थों को घोलने की क्षमता रखता है।
- उदाहरण:
- नमक और पानी के घोल में: पानी विलायक है।
- सोडा वॉटर में: पानी विलायक है।
- टिंचर आयोडीन (Tincture of Iodine) में: एल्कोहॉल विलायक होता है और आयोडीन विलेय। (यह प्रश्न महत्वपूर्ण है)।
3. विलेय (Solute)
- परिभाषा: विलयन का वह घटक जो कम मात्रा (Lesser Quantity) में उपस्थित होता है और विलायक में घुलता (Gets Dissolved) है, विलेय (Solute) कहलाता है।
- उदाहरण:
- नमक और पानी के घोल में: नमक विलेय है।
- सोडा वॉटर में: कार्बन डाइऑक्साइड गैस विलेय है।
- मिश्र धातु पीतल (Brass) में: जस्ता (Zinc) विलेय (लगभग 30%) है।
विलयन के गुण (Properties of a Solution)
- समांगी मिश्रण: विलयन एक समांगी मिश्रण होता है।
- कणों का आकार: विलयन में विलेय के कणों का आकार बहुत छोटा (व्यास में 1 नैनोमीटर से भी कम) होता है। इसलिए, उन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता।
- स्थायित्व: विलयन स्थाई (Stable) होता है। इसके कण नीचे नहीं बैठते हैं, और छानने (Filtration) जैसी भौतिक विधियों से विलेय और विलायक को अलग नहीं किया जा सकता।
- टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect): विलयन के कण बहुत छोटे होने के कारण, वे प्रकाश की किरण को नहीं फैलाते (Do not scatter) हैं। इसलिए, विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं, और उनमें प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता है।
विलयन के प्रकार (Types of Solutions)
विलेय की मात्रा के आधार पर विलयनों को तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:
- (a) संतृप्त विलयन (Saturated Solution):
- परिभाषा: एक निश्चित तापमान पर, जब किसी विलयन में विलेय की और अधिक मात्रा नहीं घोली जा सकती, तो उस विलयन को संतृप्त विलयन कहते हैं। इसका मतलब है कि विलयन ने अपनी अधिकतम घुलन क्षमता हासिल कर ली है।
- यदि आप संतृप्त विलयन में और विलेय डालने की कोशिश करेंगे, तो वह नीचे बैठ जाएगा।
- (b) असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution):
- परिभाषा: यदि किसी विलयन में विलेय की मात्रा, संतृप्त स्तर से कम है, तो उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं।
- इसका मतलब है कि इस विलयन में और अधिक विलेय घोला जा सकता है।
- (c) अतिसंतृप्त विलयन (Supersaturated Solution):
- परिभाषा: वह विलयन जिसमें एक निश्चित तापमान पर, संतृप्तता के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक विलेय घुला हुआ हो। यह एक अस्थाई (Unstable) अवस्था होती है जिसे विलयन को धीरे-धीरे ठंडा करके या अन्य विशेष तरीकों से बनाया जाता है। थोड़ा सा भी हिलाने पर अतिरिक्त विलेय क्रिस्टल बनकर बाहर आ जाता है।
कोलाइडल विलयन और निलंबन (Colloids and Suspensions)
हालांकि ये तकनीकी रूप से विलयन (सच्चे विलयन) नहीं हैं, लेकिन इनकी तुलना अक्सर विलयनों से की जाती है।
- कोलाइडल विलयन (Colloidal Solution):
- यह दिखने में समांगी लगता है, लेकिन वास्तव में एक विषमांगी (Heterogeneous) मिश्रण होता है।
- कणों का आकार सच्चे विलयन से बड़ा लेकिन निलंबन से छोटा होता है (1 nm से 1000 nm)।
- ये कण प्रकाश की किरण को फैलाते हैं, इसलिए ये टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं।
- उदाहरण: दूध, रक्त, स्याही, कोहरा।
- निलंबन (Suspension):
- यह एक विषमांगी (Heterogeneous) मिश्रण है जिसमें विलेय के कण घुलते नहीं हैं, बल्कि विलायक में निलंबित रहते हैं।
- कणों का आकार बड़ा होता है और उन्हें नग्न आंखों से देखा जा सकता है।
- यह अस्थाई होता है और शांत छोड़ देने पर कण नीचे बैठ जाते हैं।
- उदाहरण: रेत और पानी का मिश्रण, चाक पाउडर और पानी का मिश्रण, मैला पानी।
सारांश सारणी: एक नज़र में
| गुण | सच्चा विलयन (Solution) | कोलाइड (Colloid) | निलंबन (Suspension) |
| मिश्रण का प्रकार | समांगी | दिखने में समांगी, पर विषमांगी | विषमांगी |
| कणों का आकार | < 1 nm (बहुत छोटा) | 1 nm – 1000 nm (मध्यम) | > 1000 nm (बड़ा) |
| स्थायित्व | स्थाई | काफी स्थाई | अस्थाई |
| टिंडल प्रभाव | नहीं दर्शाता | दर्शाता है | दर्शा सकता है |
| छानना (Filtration) | अलग नहीं किया जा सकता | अलग नहीं किया जा सकता | अलग किया जा सकता है |
| उदाहरण | नमक का घोल, हवा | दूध, रक्त | रेत-पानी, मैला पानी |
सांद्रता (Concentration) क्या है?
विलयन की सांद्रता यह बताती है कि विलायक (Solvent) या विलयन (Solution) की एक निश्चित मात्रा में विलेय (Solute) की कितनी मात्रा घुली हुई है। मोलरता, मोललता और नॉर्मलता सांद्रता को मापने के ही अलग-अलग तरीके हैं।
इनको समझने के लिए, हमें पहले “मोल (Mole)” को समझना होगा।
मोल (Mole) क्या है?
मोल पदार्थ की मात्रा को मापने की SI इकाई है।
1 मोल = 6.022 × 10²³ कण (परमाणु, अणु, या आयन) (इस संख्या को आवोगाद्रो संख्या कहते हैं)।
साथ ही, 1 मोल = पदार्थ का ग्राम में आणविक द्रव्यमान (Molar Mass in grams)
उदाहरण: पानी (H₂O) का आणविक द्रव्यमान 18 amu है। तो, 1 मोल पानी = 18 ग्राम पानी।
1. मोलरता (Molarity – M)
- परिभाषा: प्रति लीटर विलयन (per litre of the SOLUTION) में घुले हुए विलेय के मोलों (moles of solute) की संख्या को विलयन की मोलरता कहते हैं।
- किस पर आधारित: यह विलयन के आयतन (Volume of Solution) पर आधारित है।
- सूत्र (Formula):
मोलरता (M) = विलेय के मोलों की संख्या / विलयन का आयतन (लीटर में)
M = n / V (in L)
(जहाँ n = विलेय का दिया गया द्रव्यमान / विलेय का आणविक द्रव्यमान) - इकाई (Unit): मोल प्रति लीटर (mol/L) या M (जिसे ‘मोलर’ पढ़ा जाता है)।
- तापमान पर प्रभाव: यह तापमान से प्रभावित होती है। क्योंकि तापमान बदलने पर द्रव का आयतन (Volume) बदलता है (गर्म करने पर फैलता है, ठंडा करने पर सिकुड़ता है), इसलिए विलयन की मोलरता भी बदल जाती है। यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
- उदाहरण: यदि 1 लीटर पानी में सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का 1 मोल (40 ग्राम) घोला जाता है, तो उस विलयन की मोलरता 1 M होगी।
2. मोललता (Molality – m)
- परिभाषा: प्रति किलोग्राम विलायक (per kilogram of the SOLVENT) में घुले हुए विलेय के मोलों (moles of solute) की संख्या को विलयन की मोललता कहते हैं।
- किस पर आधारित: यह विलायक के द्रव्यमान (Mass of Solvent) पर आधारित है।
- सूत्र (Formula):
मोललता (m) = विलेय के मोलों की संख्या / विलायक का द्रव्यमान (किलोग्राम में)
m = n / W (in Kg) - इकाई (Unit): मोल प्रति किलोग्राम (mol/kg) या m (जिसे ‘मोलल’ पढ़ा जाता है)।
- तापमान पर प्रभाव: यह तापमान से प्रभावित नहीं होती है। क्योंकि किसी पदार्थ का द्रव्यमान (Mass) तापमान के साथ नहीं बदलता है। इस गुण के कारण, वैज्ञानिक गणनाओं में मोलरता की तुलना में मोललता को अधिक सटीक माना जाता है। (यह अंतर परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है)।
- उदाहरण: यदि 1 किलोग्राम पानी में ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) का 1 मोल (180 ग्राम) घोला जाता है, तो उस विलयन की मोललता 1 m होगी।
3. नॉर्मलता (Normalcy – N)
- परिभाषा: प्रति लीटर विलयन (per litre of the SOLUTION) में घुले हुए विलेय के ग्राम तुल्यांकों (Gram Equivalents of solute) की संख्या को विलयन की नॉर्मलता कहते हैं।
- अवधारणा: यह मोलरता के समान है, लेकिन ‘मोल’ की जगह ‘ग्राम तुल्यांक’ (Gram Equivalent) का उपयोग करती है।
ग्राम तुल्यांक क्या है?
ग्राम तुल्यांक की अवधारणा तुल्यांकी भार (Equivalent Weight) पर आधारित है।
ग्राम तुल्यांकों की संख्या = विलेय का दिया गया द्रव्यमान / विलेय का तुल्यांकी भार
तुल्यांकी भार की गणना अम्ल, क्षार और लवण के लिए अलग-अलग होती है:
- अम्ल के लिए: तुल्यांकी भार = आणविक द्रव्यमान / क्षारकता (Basicity – त्यागे जा सकने वाले H⁺ आयनों की संख्या)
- उदाहरण: H₂SO₄ के लिए, क्षारकता 2 है, तो तुल्यांकी भार = 98 / 2 = 49.
- क्षार के लिए: तुल्यांकी भार = आणविक द्रव्यमान / अम्लता (Acidity – त्यागे जा सकने वाले OH⁻ आयनों की संख्या)
- उदाहरण: Ca(OH)₂ के लिए, अम्लता 2 है, तो तुल्यांकी भार = 74 / 2 = 37.
- सूत्र (Formula):
नॉर्मलता (N) = विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या / विलयन का आयतन (लीटर में) - इकाई (Unit): ग्राम तुल्यांक प्रति लीटर (Gram eq/L) या N (जिसे ‘नॉर्मल’ पढ़ा जाता है)।
- तापमान पर प्रभाव: मोलरता की तरह, यह भी विलयन के आयतन पर निर्भर करती है, इसलिए यह भी तापमान से प्रभावित होती है।
- मोलरता और नॉर्मलता में संबंध:
नॉर्मलता (N) = मोलरता (M) × n-फैक्टर
(जहाँ n-फैक्टर = अम्ल के लिए क्षारकता, क्षार के लिए अम्लता, या आयन पर कुल आवेश)
सारांश सारणी: एक नज़र में (बहुत महत्वपूर्ण)
| विशेषता (Feature) | मोलरता (Molarity – M) | मोललता (Molality – m) | नॉर्मलता (Normalcy – N) |
| परिभाषा में आधार | विलयन का आयतन (Litre) | विलायक का द्रव्यमान (Kg) | विलयन का आयतन (Litre) |
| विलेय की इकाई | मोल (Mole) | मोल (Mole) | ग्राम तुल्यांक (Gram Equivalent) |
| सूत्र (Formula) | n / V (in L) | n / W (in Kg) | Gram Eq. / V (in L) |
| तापमान पर प्रभाव | प्रभावित होती है ✅ | प्रभावित नहीं होती ❌ | प्रभावित होती है ✅ |
| वैज्ञानिक सटीकता | कम सटीक | अधिक सटीक | कम सटीक |
| इकाई (Unit) | मोल/लीटर (mol/L) | मोल/किलोग्राम (mol/kg) | तुल्यांक/लीटर (eq/L) |
याद रखने की कुंजी:
- MolaRity में ‘R’ है जो LiteRe की याद दिलाता है (आयतन)।
- MolaLity में ‘L’ है जिसे आप KiLogram (द्रव्यमान) से जोड़ सकते हैं।
रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
परिभाषा
रेडियोधर्मिता कुछ भारी और अस्थिर (Unstable) तत्वों के नाभिकों का वह गुण है, जिसके कारण वे स्थायित्व (Stability) प्राप्त करने के लिए स्वतः (Spontaneously) विखंडित होते रहते हैं और कुछ अदृश्य, ऊर्जावान किरणों का उत्सर्जन (Emission) करते हैं।
- जिन पदार्थों में यह गुण पाया जाता है, उन्हें रेडियोधर्मी पदार्थ (Radioactive Substance) कहते हैं (जैसे – यूरेनियम, रेडियम, थोरियम)।
- यह एक नाभिकीय गुण (Nuclear Phenomenon) है।
खोज (Discovery)
- खोजकर्ता: फ्रांसीसी वैज्ञानिक हेनरी बेकुरल (Henri Becquerel)।
- वर्ष: 1896
- कहानी: बेकुरल ने पाया कि यूरेनियम लवण एक फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित कर सकते हैं, भले ही वे काले कागज में लिपटे हों। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यूरेनियम से कुछ अदृश्य किरणें निकल रही हैं।
- ‘रेडियोधर्मिता’ शब्द: यह शब्द मैडम मैरी क्यूरी (Madam Marie Curie) द्वारा गढ़ा गया था। मैरी क्यूरी और उनके पति पियरे क्यूरी ने बाद में दो नए रेडियोधर्मी तत्वों, पोलोनियम (Polonium) और रेडियम (Radium) की खोज की।
- मापन की इकाई: रेडियोधर्मिता की SI इकाई बेकुरल (Becquerel – Bq) है। इसकी अन्य इकाइयाँ क्यूरी (Curie – Ci) और रदरफोर्ड (Rutherford – Rd) हैं।
रेडियोधर्मी किरणें: अल्फा, बीटा और गामा (Radioactive Rays: α, β, and γ)
जब एक रेडियोधर्मी पदार्थ को एक विद्युत क्षेत्र (Electric Field) में रखा जाता है, तो उससे निकलने वाली किरणें तीन भागों में विभाजित हो जाती हैं, जिन्हें अल्फा, बीटा और गामा किरणें कहा जाता है।
1. अल्फा (α) किरणें (Alpha Rays)
- प्रकृति: ये धनावेशित (Positively Charged) कण हैं। प्रत्येक अल्फा कण एक हीलियम नाभिक (Helium Nucleus – He²⁺) के बराबर होता है, जिसमें 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं।
- आवेश (Charge): +2 इकाई।
- द्रव्यमान (Mass): 4 amu (यह सबसे भारी कण है)।
- गति (Speed): प्रकाश की गति का लगभग 1/10वां हिस्सा।
- भेदन क्षमता (Penetrating Power): न्यूनतम (Minimum)। ये एक कागज की पतली शीट द्वारा भी रोकी जा सकती हैं।
- आयनन क्षमता (Ionizing Power): सर्वाधिक (Maximum)। भारी और आवेशित होने के कारण, ये जिस माध्यम से गुजरती हैं, उसे तेजी से आयनित कर देती हैं।
2. बीटा (β) किरणें (Beta Rays)
- प्रकृति: ये ऋणावेशित (Negatively Charged) कण हैं। प्रत्येक बीटा कण एक तीव्र गति वाले इलेक्ट्रॉन (Fast-moving Electron – e⁻) के बराबर होता है।
- आवेश (Charge): -1 इकाई।
- द्रव्यमान (Mass): इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के बराबर (लगभग नगण्य)।
- गति (Speed): प्रकाश की गति का लगभग 9/10वां हिस्सा (बहुत तेज)।
- भेदन क्षमता (Penetrating Power): अल्फा कणों से लगभग 100 गुना अधिक, लेकिन गामा किरणों से कम। ये एल्यूमीनियम की पतली पन्नी को पार कर सकती हैं।
- आयनन क्षमता (Ionizing Power): अल्फा कणों से कम, लेकिन गामा किरणों से अधिक।
3. गामा (γ) किरणें (Gamma Rays)
- प्रकृति: ये कण नहीं, बल्कि उच्च-ऊर्जा वाली विद्युत चुम्बकीय तरंगें (High-energy Electromagnetic Waves) या फोटॉन (Photons) हैं। ये आवेशहीन (Chargeless) होती हैं।
- आवेश (Charge): 0 (उदासीन)।
- द्रव्यमान (Mass): 0 (द्रव्यमान रहित)।
- गति (Speed): प्रकाश की गति (Speed of Light) के बराबर।
- भेदन क्षमता (Penetrating Power): सर्वाधिक (Maximum)। इन्हें रोकने के लिए सीसे (Lead) की मोटी चादर की आवश्यकता होती है।
- आयनन क्षमता (Ionizing Power): न्यूनतम (Minimum)।
तुलनात्मक सारणी: अल्फा, बीटा और गामा किरणें (बहुत महत्वपूर्ण)
| गुण | अल्फा (α) कण | बीटा (β) कण | गामा (γ) किरण |
| प्रकृति | हीलियम नाभिक (He²⁺) | तीव्र गति वाला इलेक्ट्रॉन (e⁻) | विद्युत चुम्बकीय तरंगें |
| आवेश (Charge) | +2 (धनावेशित) | -1 (ऋणावेशित) | 0 (उदासीन) |
| द्रव्यमान | 4 amu (सबसे भारी) | 1/1837 amu (नगण्य) | शून्य |
| गति (Speed) | प्रकाश की गति का ~1/10 | प्रकाश की गति का ~9/10 | प्रकाश की गति के बराबर |
| भेदन क्षमता | न्यूनतम ⬇️ | मध्यम | सर्वाधिक ⬆️ |
| आयनन क्षमता | सर्वाधिक ⬆️ | मध्यम | न्यूनतम ⬇️ |
रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay)
परिभाषा: यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक अस्थिर परमाणु नाभिक अल्फा या बीटा कणों का उत्सर्जन करके एक अलग, अधिक स्थिर नाभिक में बदल जाता है।
रेडियोधर्मी क्षय के नियम:
- अल्फा-क्षय (Alpha Decay):
- जब एक नाभिक एक अल्फा कण (⁴₂He) उत्सर्जित करता है, तो उसकी द्रव्यमान संख्या (A) में 4 की कमी और परमाणु संख्या (Z) में 2 की कमी हो जाती है।
- समीकरण: ᴬZX → ᴬ⁻⁴Z⁻₂Y + ⁴₂He
- उदाहरण: ²³⁸₉₂U → ²³⁴₉₀Th + ⁴₂He
- बीटा-क्षय (Beta Decay):
- जब एक नाभिक एक बीटा कण (e⁻) उत्सर्जित करता है, तो उसकी द्रव्यमान संख्या (A) में कोई परिवर्तन नहीं होता है, लेकिन परमाणु संख्या (Z) में 1 की वृद्धि हो जाती है।
- कारण: नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन, एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन में टूट जाता है। प्रोटॉन नाभिक में रह जाता है और इलेक्ट्रॉन (बीटा कण) बाहर निकल जाता है।
- समीकरण: ᴬZX → ᴬZ+₁Y + e⁻
- उदाहरण: ¹⁴₆C → ¹⁴₇N + e⁻
- गामा-उत्सर्जन (Gamma Emission):
- गामा उत्सर्जन आमतौर पर अल्फा या बीटा क्षय के बाद होता है। जब कोई नाभिक उत्तेजित अवस्था में होता है, तो वह एक गामा किरण उत्सर्जित करके अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को त्यागकर स्थिर अवस्था में आ जाता है।
- गामा उत्सर्जन से नाभिक की परमाणु संख्या या द्रव्यमान संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
अर्ध-आयु काल (Half-life Period)
परिभाषा
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ का अर्ध-आयु काल (T½) वह समय अंतराल (Time Period) है, जितने समय में उस पदार्थ के नाभिकों की प्रारंभिक संख्या घटकर आधी (Half) रह जाती है।
सरल शब्दों में, यह वह समय है जिसमें कोई रेडियोधर्मी पदार्थ विघटित होकर अपनी मूल मात्रा का ठीक आधा रह जाता है।
- उदाहरण: यदि किसी पदार्थ का अर्ध-आयु काल 10 वर्ष है और हमारे पास उस पदार्थ का 100 ग्राम है, तो:
- 10 वर्ष बाद, पदार्थ की मात्रा 50 ग्राम रह जाएगी।
- अगले 10 वर्ष (कुल 20 वर्ष) बाद, पदार्थ की मात्रा 50 ग्राम का आधा, यानी 25 ग्राम रह जाएगी।
- अगले 10 वर्ष (कुल 30 वर्ष) बाद, पदार्थ की मात्रा 25 ग्राम का आधा, यानी 12.5 ग्राम रह जाएगी।
- यह प्रक्रिया इसी तरह चलती रहती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- अर्ध-आयु काल प्रत्येक रेडियोधर्मी तत्व के लिए एक स्थिर (Constant) और अभिलाक्षणिक गुण (Characteristic Property) होता है।
- यह बाहरी कारकों जैसे तापमान (Temperature), दाब (Pressure), या रासायनिक परिवर्तनों से प्रभावित नहीं होता है।
- जिस पदार्थ का अर्ध-आयु काल जितना कम होता है, वह उतना ही अधिक रेडियोधर्मी और अस्थिर होता है, यानी वह उतनी ही तेजी से विघटित होता है।
अर्ध-आयु काल की गणना का सूत्र
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, आपको एक सरल सूत्र याद रखना होगा जो किसी निश्चित समय के बाद बचे हुए पदार्थ की मात्रा की गणना करने में मदद करता है।
सूत्र:
N = N₀ (1/2)ⁿ
जहाँ:
- N = ‘t’ समय के बाद शेष पदार्थ की मात्रा।
- N₀ (N-naught) = पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा (Initial Amount)।
- n = अर्ध-आयु कालों की संख्या (Number of half-lives)।
और, n की गणना इस प्रकार की जा सकती है:
n = कुल समय (t) / अर्ध-आयु काल (T½)
इस सूत्र को कैसे उपयोग करें – उदाहरण के साथ समझें
प्रश्न: एक रेडियोधर्मी पदार्थ का अर्ध-आयु काल 5 वर्ष है। यदि पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा 64 ग्राम है, तो 15 वर्ष बाद पदार्थ की कितनी मात्रा शेष रहेगी? (यह एक विशिष्ट PYQ प्रारूप है)।
हल:
चरण 1: दिया गया डेटा लिखें।
- अर्ध-आयु काल (T½) = 5 वर्ष
- प्रारंभिक मात्रा (N₀) = 64 ग्राम
- कुल समय (t) = 15 वर्ष
चरण 2: अर्ध-आयु कालों की संख्या (n) की गणना करें।
- n = t / T½
- n = 15 / 5 = 3
- इसका मतलब है कि 15 वर्षों में, पदार्थ 3 बार आधा होगा।
चरण 3: मुख्य सूत्र का उपयोग करके शेष मात्रा (N) की गणना करें।
- N = N₀ (1/2)ⁿ
- N = 64 × (1/2)³
- N = 64 × (1/8)
- N = 8
उत्तर: 15 वर्ष बाद पदार्थ की 8 ग्राम मात्रा शेष रहेगी।
वैकल्पिक विधि (बिना सूत्र के):
- प्रारंभ में: 64 ग्राम
- 5 वर्ष बाद (1st half-life): 64 / 2 = 32 ग्राम
- 10 वर्ष बाद (2nd half-life): 32 / 2 = 16 ग्राम
- 15 वर्ष बाद (3rd half-life): 16 / 2 = 8 ग्राम
अर्ध-आयु काल का महत्व और अनुप्रयोग (Significance and Applications)
अर्ध-आयु काल की अवधारणा का विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बहुत महत्व है:
- कार्बन डेटिंग (Carbon Dating):
- जीवाश्मों (Fossils), पुरातात्विक नमूनों (लकड़ी, हड्डियाँ) की आयु का पता लगाने के लिए कार्बन-14 (C-14) के अर्ध-आयु काल का उपयोग किया जाता है।
- कार्बन-14 का अर्ध-आयु काल लगभग 5730 वर्ष होता है। यह तकनीक जीवित जीवों के अवशेषों में बचे C-14 की मात्रा को मापकर काम करती है।
- यूरेनियम डेटिंग (Uranium Dating):
- चट्टानों और पृथ्वी की आयु का पता लगाने के लिए यूरेनियम-238 (U-238) के बहुत लंबे अर्ध-आयु काल (लगभग 4.5 अरब वर्ष) का उपयोग किया जाता है।
- चिकित्सा में (Medical Field):
- रोगों के निदान और उपचार में उपयोग होने वाले रेडियोआइसोटोप की खुराक और प्रभावशीलता का निर्धारण करने में अर्ध-आयु काल महत्वपूर्ण है। कम अर्ध-आयु वाले आइसोटोप को प्राथमिकता दी जाती है ताकि वे शरीर में जल्दी से समाप्त हो जाएं और नुकसान न पहुंचाएं।
- उदाहरण: कैंसर के इलाज में कोबाल्ट-60 का उपयोग।
- परमाणु ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन (Nuclear Energy and Waste Management):
- परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित भंडारण कितने समय तक करना है, यह निर्धारित करने के लिए उसके अर्ध-आयु काल को जानना आवश्यक है। कुछ अपशिष्टों का अर्ध-आयु काल हजारों वर्ष का होता है।
नाभिकीय अभिक्रियाएँ: विखंडन और संलयन
ये दोनों ही प्रक्रियाएँ नाभिकीय अभिक्रियाएँ हैं जिनमें एक परमाणु का नाभिक परिवर्तित होता है और इस प्रक्रिया में अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा (Tremendous Amount of Energy) मुक्त होती है। यह ऊर्जा आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E = mc² के अनुसार, द्रव्यमान के ऊर्जा में रूपांतरण के कारण उत्पन्न होती है।
1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
- परिभाषा: नाभिकीय विखंडन वह प्रक्रिया है जिसमें एक भारी और अस्थिर नाभिक (Heavy and Unstable Nucleus), जब न्यूट्रॉन जैसे कण से टकराता है, तो लगभग दो बराबर आकार के हल्के नाभिकों (Lighter Nuclei) में टूट (Splits) जाता है। इस प्रक्रिया में न्यूट्रॉनों के साथ-साथ विशाल मात्रा में ऊर्जा भी निकलती है।
- “विखंडन” का शाब्दिक अर्थ है “टूटना”।
श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction):
- विखंडन की प्रक्रिया में निकलने वाले न्यूट्रॉन (आमतौर पर 2-3) आगे अन्य भारी नाभिकों से टकराकर उन्हें भी विखंडित करते हैं।
- इससे फिर और न्यूट्रॉन निकलते हैं, जो और अधिक विखंडन करते हैं। इस प्रकार, एक स्व-चालित श्रृंखला (Self-sustaining Chain) शुरू हो जाती है, जिसे श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।
श्रृंखला अभिक्रिया के प्रकार:
- अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrolled Chain Reaction):
- इसमें विखंडन की दर बहुत तेजी से बढ़ती है, जिससे कुछ ही क्षणों में एक विनाशकारी विस्फोट होता है।
- अनुप्रयोग: परमाणु बम (Atom Bomb) इसी सिद्धांत पर आधारित है। (यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है)।
- नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled Chain Reaction):
- इसमें विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉनों में से अधिकांश को अवशोषकों (जैसे कैडमियम या बोरॉन की छड़ें) द्वारा सोख लिया जाता है, जिससे केवल एक न्यूट्रॉन आगे विखंडन के लिए उपलब्ध रहता है। इससे अभिक्रिया एक स्थिर दर पर चलती है।
- अनुप्रयोग: नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactor) में विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) का उत्पादन करने के लिए इसी सिद्धांत का उपयोग किया जाता है। (यह प्रश्न भी बहुत महत्वपूर्ण है)।
- उदाहरण (सबसे आम): यूरेनियम-235 (U-235) का विखंडन:
²³⁵₉₂U + ¹₀n → ²³⁶₉₂U (अस्थिर) → ¹⁴¹₅₆Ba + ⁹²₃₆Kr + 3¹₀n + ऊर्जा
2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
- परिभाषा: नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक बहुत हल्के नाभिक (Very Light Nuclei), अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर, आपस में जुड़कर (Fuse together) एक भारी नाभिक (Heavier Nucleus) का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में विखंडन से भी कई गुना अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
- “संलयन” का शाब्दिक अर्थ है “जुड़ना”।
आवश्यक शर्तें:
- संलयन अभिक्रिया को शुरू करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (करोड़ों डिग्री सेल्सियस) और अत्यधिक उच्च दाब की आवश्यकता होती है।
- इतने उच्च तापमान पर पदार्थ प्लाज्मा (Plasma) अवस्था में होता है।
अनुप्रयोग (Applications):
- सूर्य और अन्य तारों की ऊर्जा का स्रोत: सूर्य के अंदर, हाइड्रोजन के हल्के नाभिक (प्रोटियम और ड्यूटीरियम) मिलकर हीलियम का एक भारी नाभिक बनाते हैं। इसी संलयन प्रक्रिया से सूर्य और तारे लगातार ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। (यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला उदाहरण है)।
- हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb):
- यह अनियंत्रित नाभिकीय संलयन पर आधारित है।
- यह परमाणु बम से कई हजार गुना अधिक शक्तिशाली होता है।
- इसे शुरू करने के लिए आवश्यक उच्च तापमान पैदा करने हेतु, इसके अंदर एक छोटे परमाणु बम (विखंडन बम) का उपयोग ट्रिगर के रूप में किया जाता है।
- भविष्य की ऊर्जा: वैज्ञानिक नियंत्रित नाभिकीय संलयन के माध्यम से स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा उत्पन्न करने की दिशा में काम कर रहे हैं (जैसे ITER – अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर परियोजना)।
- उदाहरण (सूर्य में होने वाली अभिक्रिया):
²₁H (ड्यूटीरियम) + ³₁H (ट्राइटियम) → ⁴₂He (हीलियम) + ¹₀n (न्यूट्रॉन) + ऊर्जा
नाभिकीय विखंडन बनाम नाभिकीय संलयन (Fission vs. Fusion)
(यह सारणी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)
| विशेषता (Feature) | नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) | नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) |
| परिभाषा | एक भारी नाभिक का हल्के नाभिकों में टूटना। | हल्के नाभिकों का जुड़कर एक भारी नाभिक बनाना। |
| आवश्यक कच्चा माल | भारी तत्व (जैसे यूरेनियम, प्लूटोनियम)। | हल्के तत्व (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक)। |
| आवश्यक शर्तें | सामान्य तापमान और दाब पर संभव। | अत्यधिक उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता। |
| मुक्त ऊर्जा | विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। | विखंडन की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा मुक्त होती है। |
| प्राकृतिक घटना | प्राकृतिक रूप से बहुत दुर्लभ। | सूर्य और तारों में प्राकृतिक रूप से होती है। |
| रेडियोधर्मी अपशिष्ट | बहुत अधिक खतरनाक और दीर्घायु रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न होता है। | कम और कम खतरनाक रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न होता है (अपेक्षाकृत स्वच्छ)। |
| नियंत्रण | नियंत्रित किया जा सकता है (रिएक्टर में)। | नियंत्रित करना अत्यंत कठिन है (अभी प्रायोगिक चरण में)। |
| उदाहरण/अनुप्रयोग | परमाणु बम, नाभिकीय रिएक्टर। | हाइड्रोजन बम, सूर्य की ऊर्जा। |
विभिन्न क्षेत्रों में रेडियो आइसोटोप के उपयोग (Applications of Radioisotopes)
परिभाषा: रेडियो आइसोटोप क्या हैं?
रेडियो आइसोटोप किसी तत्व के वे अस्थिर समस्थानिक (Unstable Isotopes) होते हैं जो स्थायित्व प्राप्त करने के लिए स्वतः विखंडित होते हैं और अल्फा, बीटा और गामा जैसी किरणों का उत्सर्जन करते हैं। उनके इसी गुण का उपयोग विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
1. चिकित्सा क्षेत्र में (In Medical Field)
यह रेडियो आइसोटोप का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है, जिसमें निदान (Diagnosis) और उपचार (Therapy) दोनों शामिल हैं।
| रेडियो आइसोटोप का नाम | रासायनिक प्रतीक | मुख्य उपयोग |
| कोबाल्ट-60 | Co-60 | कैंसर के इलाज में (रेडियोथेरेपी) – यह गामा किरणें उत्सर्जित करता है जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। (यह सबसे अधिक पूछा जाता है) |
| आयोडीन-131 | I-131 | थायरॉइड ग्रंथि के कैंसर और घेंघा (Goitre) रोग के इलाज में, तथा थायरॉइड की कार्यप्रणाली की जांच में। |
| फॉस्फोरस-32 | P-32 | रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) के इलाज में। |
| सोडियम-24 | Na-24 | रक्त परिसंचरण तंत्र (Blood Circulation System) में थक्कों (Clots) का पता लगाने के लिए। |
| आयरन-59 | Fe-59 | एनीमिया (रक्ताल्पता) रोग का पता लगाने के लिए। |
| आर्सेनिक-74 | As-74 | ट्यूमर (Tumor) का पता लगाने के लिए। |
| स्ट्रोंशियम-90 | Sr-90 | त्वचा और आँखों के कैंसर के इलाज में। |
2. कृषि क्षेत्र में (In Agricultural Field)
| रेडियो आइसोटोप का नाम | रासायनिक प्रतीक | मुख्य उपयोग |
| फॉस्फोरस-32 | P-32 | पौधों द्वारा उर्वरकों (Fertilizers) के अवशोषण की दर का अध्ययन करने के लिए, जिससे बेहतर उर्वरक विकसित किए जा सकें। |
| कोबाल्ट-60 | Co-60 | खाद्य परिरक्षण (Food Preservation) – गामा किरणों का उपयोग करके आलू, प्याज आदि को अंकुरित होने से रोकने और खाद्य पदार्थों में मौजूद सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित रहें। |
| नाइट्रोजन-15 | N-15 | नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए। |
| (गामा किरणें) | – | कीट नियंत्रण – हानिकारक कीटों को विकिरण द्वारा नपुंसक बनाने के लिए ताकि उनकी आबादी को नियंत्रित किया जा सके। |
3. औद्योगिक क्षेत्र में (In Industrial Field)
| रेडियो आइसोटोप का नाम | रासायनिक प्रतीक | मुख्य उपयोग |
| कोबाल्ट-60 / इरिडियम-192 | Co-60 / Ir-192 | औद्योगिक रेडियोग्राफी – वेल्डिंग जोड़ों, पाइपलाइनों और मशीन के पुर्जों में दरारों या खामियों का पता लगाने के लिए (यह एक्स-रे की तरह काम करता है)। |
| कैलिफोर्नियम-252 | Cf-252 | हवाई अड्डों पर विस्फोटकों (Explosives) का पता लगाने वाले उपकरणों में। |
| अमेरिसियम-241 | Am-241 | स्मोक डिटेक्टर (Smoke Detectors) में – यह धुएं के कणों का पता लगाकर आग लगने की सूचना देता है। |
| कोबाल्ट-60 | Co-60 | गामा स्टरलाइज़ेशन – सर्जिकल उपकरणों जैसे मेडिकल उत्पादों को कीटाणुरहित करने के लिए। |
| क्रिप्टन-85 | Kr-85 | कागज, प्लास्टिक और धातु की चादरों की मोटाई मापने के लिए। |
4. पुरातात्विक और भूवैज्ञानिक क्षेत्र में (In Archaeology and Geology)
| रेडियो आइसोटोप का नाम | रासायनिक प्रतीक | मुख्य उपयोग |
| कार्बन-14 | C-14 | कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) – जीवाश्मों, लकड़ी, और अन्य जैविक पदार्थों की आयु का पता लगाने के लिए। (यह भी सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है) |
| यूरेनियम-238 | U-238 | यूरेनियम डेटिंग – बहुत पुरानी चट्टानों, उल्कापिंडों और पृथ्वी की आयु का अनुमान लगाने के लिए (लेड-डेटिंग के साथ संयोजन में)। |
| पोटेशियम-40 | K-40 | चट्टानों की आयु निर्धारित करने के लिए (पोटेशियम-आर्गन डेटिंग)। |
5. ऊर्जा उत्पादन में (In Energy Production)
| रेडियो आइसोटोप का नाम | रासायनिक प्रतीक | मुख्य उपयोग |
| यूरेनियम-235 | U-235 | नाभिकीय रिएक्टरों में ईंधन (Fuel in Nuclear Reactors) के रूप में नाभिकीय विखंडन द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए। |
| प्लूटोनियम-239 | Pu-239 | परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में। |
यह सारणी आपको विभिन्न रेडियो आइसोटोप के विशिष्ट और महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को याद रखने में मदद करेगी, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।