रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण

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रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction)

परिभाषा: वह प्रक्रिया जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (अभिकारक – Reactants) आपस में क्रिया करके नए गुणों वाले एक या एक से अधिक नए पदार्थों (उत्पाद – Products) का निर्माण करते हैं, रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।


रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)

परिभाषा: किसी रासायनिक अभिक्रिया को प्रतीकों (Symbols) और सूत्रों (Formulas) का उपयोग करके एक संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करना रासायनिक समीकरण कहलाता है।

रासायनिक समीकरण को संतुलित करना (Balancing a Chemical Equation)

सिद्धांत: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश होता है। इसे द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) कहते हैं।

इसलिए, रासायनिक समीकरण में तीर के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।


रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (Types of Chemical Reactions)

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

4. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

5. ऑक्सीकरण-अपचयन (रेडॉक्स) अभिक्रिया (Oxidation-Reduction / Redox Reaction)

6. ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं (Exothermic and Endothermic Reactions)


विलयन (Solutions)

1. विलयन (Solution)


2. विलायक (Solvent)


3. विलेय (Solute)


विलयन के गुण (Properties of a Solution)

  1. समांगी मिश्रण: विलयन एक समांगी मिश्रण होता है।
  2. कणों का आकार: विलयन में विलेय के कणों का आकार बहुत छोटा (व्यास में 1 नैनोमीटर से भी कम) होता है। इसलिए, उन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता।
  3. स्थायित्व: विलयन स्थाई (Stable) होता है। इसके कण नीचे नहीं बैठते हैं, और छानने (Filtration) जैसी भौतिक विधियों से विलेय और विलायक को अलग नहीं किया जा सकता।
  4. टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect): विलयन के कण बहुत छोटे होने के कारण, वे प्रकाश की किरण को नहीं फैलाते (Do not scatter) हैं। इसलिए, विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं, और उनमें प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता है।

विलयन के प्रकार (Types of Solutions)

विलेय की मात्रा के आधार पर विलयनों को तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:


कोलाइडल विलयन और निलंबन (Colloids and Suspensions)

हालांकि ये तकनीकी रूप से विलयन (सच्चे विलयन) नहीं हैं, लेकिन इनकी तुलना अक्सर विलयनों से की जाती है।


सारांश सारणी: एक नज़र में

गुणसच्चा विलयन (Solution)कोलाइड (Colloid)निलंबन (Suspension)
मिश्रण का प्रकारसमांगीदिखने में समांगी, पर विषमांगीविषमांगी
कणों का आकार< 1 nm (बहुत छोटा)1 nm – 1000 nm (मध्यम)> 1000 nm (बड़ा)
स्थायित्वस्थाईकाफी स्थाईअस्थाई
टिंडल प्रभावनहीं दर्शातादर्शाता हैदर्शा सकता है
छानना (Filtration)अलग नहीं किया जा सकताअलग नहीं किया जा सकताअलग किया जा सकता है
उदाहरणनमक का घोल, हवादूध, रक्तरेत-पानी, मैला पानी

सांद्रता (Concentration) क्या है?

विलयन की सांद्रता यह बताती है कि विलायक (Solvent) या विलयन (Solution) की एक निश्चित मात्रा में विलेय (Solute) की कितनी मात्रा घुली हुई है। मोलरता, मोललता और नॉर्मलता सांद्रता को मापने के ही अलग-अलग तरीके हैं।

इनको समझने के लिए, हमें पहले “मोल (Mole)” को समझना होगा।

मोल (Mole) क्या है?

मोल पदार्थ की मात्रा को मापने की SI इकाई है।
1 मोल = 6.022 × 10²³ कण (परमाणु, अणु, या आयन) (इस संख्या को आवोगाद्रो संख्या कहते हैं)।
साथ ही, 1 मोल = पदार्थ का ग्राम में आणविक द्रव्यमान (Molar Mass in grams)
उदाहरण: पानी (H₂O) का आणविक द्रव्यमान 18 amu है। तो, 1 मोल पानी = 18 ग्राम पानी।


1. मोलरता (Molarity – M)


2. मोललता (Molality – m)


3. नॉर्मलता (Normalcy – N)

ग्राम तुल्यांक क्या है?

ग्राम तुल्यांक की अवधारणा तुल्यांकी भार (Equivalent Weight) पर आधारित है।
ग्राम तुल्यांकों की संख्या = विलेय का दिया गया द्रव्यमान / विलेय का तुल्यांकी भार

तुल्यांकी भार की गणना अम्ल, क्षार और लवण के लिए अलग-अलग होती है:


सारांश सारणी: एक नज़र में (बहुत महत्वपूर्ण)

विशेषता (Feature)मोलरता (Molarity – M)मोललता (Molality – m)नॉर्मलता (Normalcy – N)
परिभाषा में आधारविलयन का आयतन (Litre)विलायक का द्रव्यमान (Kg)विलयन का आयतन (Litre)
विलेय की इकाईमोल (Mole)मोल (Mole)ग्राम तुल्यांक (Gram Equivalent)
सूत्र (Formula)n / V (in L)n / W (in Kg)Gram Eq. / V (in L)
तापमान पर प्रभावप्रभावित होती हैप्रभावित नहीं होतीप्रभावित होती है
वैज्ञानिक सटीकताकम सटीकअधिक सटीककम सटीक
इकाई (Unit)मोल/लीटर (mol/L)मोल/किलोग्राम (mol/kg)तुल्यांक/लीटर (eq/L)

याद रखने की कुंजी:



रेडियोधर्मिता (Radioactivity)

रेडियोधर्मिता (Radioactivity)

परिभाषा

रेडियोधर्मिता कुछ भारी और अस्थिर (Unstable) तत्वों के नाभिकों का वह गुण है, जिसके कारण वे स्थायित्व (Stability) प्राप्त करने के लिए स्वतः (Spontaneously) विखंडित होते रहते हैं और कुछ अदृश्य, ऊर्जावान किरणों का उत्सर्जन (Emission) करते हैं।

खोज (Discovery)


रेडियोधर्मी किरणें: अल्फा, बीटा और गामा (Radioactive Rays: α, β, and γ)

जब एक रेडियोधर्मी पदार्थ को एक विद्युत क्षेत्र (Electric Field) में रखा जाता है, तो उससे निकलने वाली किरणें तीन भागों में विभाजित हो जाती हैं, जिन्हें अल्फा, बीटा और गामा किरणें कहा जाता है।

1. अल्फा (α) किरणें (Alpha Rays)

2. बीटा (β) किरणें (Beta Rays)

3. गामा (γ) किरणें (Gamma Rays)


तुलनात्मक सारणी: अल्फा, बीटा और गामा किरणें (बहुत महत्वपूर्ण)

गुणअल्फा (α) कणबीटा (β) कणगामा (γ) किरण
प्रकृतिहीलियम नाभिक (He²⁺)तीव्र गति वाला इलेक्ट्रॉन (e⁻)विद्युत चुम्बकीय तरंगें
आवेश (Charge)+2 (धनावेशित)-1 (ऋणावेशित)0 (उदासीन)
द्रव्यमान4 amu (सबसे भारी)1/1837 amu (नगण्य)शून्य
गति (Speed)प्रकाश की गति का ~1/10प्रकाश की गति का ~9/10प्रकाश की गति के बराबर
भेदन क्षमतान्यूनतम ⬇️मध्यमसर्वाधिक ⬆️
आयनन क्षमतासर्वाधिक ⬆️मध्यमन्यूनतम ⬇️

रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay)

परिभाषा: यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक अस्थिर परमाणु नाभिक अल्फा या बीटा कणों का उत्सर्जन करके एक अलग, अधिक स्थिर नाभिक में बदल जाता है।

रेडियोधर्मी क्षय के नियम:

  1. अल्फा-क्षय (Alpha Decay):
    • जब एक नाभिक एक अल्फा कण (⁴₂He) उत्सर्जित करता है, तो उसकी द्रव्यमान संख्या (A) में 4 की कमी और परमाणु संख्या (Z) में 2 की कमी हो जाती है।
    • समीकरण: ᴬZX → ᴬ⁻⁴Z⁻₂Y + ⁴₂He
    • उदाहरण: ²³⁸₉₂U → ²³⁴₉₀Th + ⁴₂He
  2. बीटा-क्षय (Beta Decay):
    • जब एक नाभिक एक बीटा कण (e⁻) उत्सर्जित करता है, तो उसकी द्रव्यमान संख्या (A) में कोई परिवर्तन नहीं होता है, लेकिन परमाणु संख्या (Z) में 1 की वृद्धि हो जाती है।
    • कारण: नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन, एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन में टूट जाता है। प्रोटॉन नाभिक में रह जाता है और इलेक्ट्रॉन (बीटा कण) बाहर निकल जाता है।
    • समीकरण: ᴬZX → ᴬZ+₁Y + e⁻
    • उदाहरण: ¹⁴₆C → ¹⁴₇N + e⁻
  3. गामा-उत्सर्जन (Gamma Emission):
    • गामा उत्सर्जन आमतौर पर अल्फा या बीटा क्षय के बाद होता है। जब कोई नाभिक उत्तेजित अवस्था में होता है, तो वह एक गामा किरण उत्सर्जित करके अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को त्यागकर स्थिर अवस्था में आ जाता है।
    • गामा उत्सर्जन से नाभिक की परमाणु संख्या या द्रव्यमान संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

अर्ध-आयु काल (Half-life Period)

परिभाषा

किसी रेडियोधर्मी पदार्थ का अर्ध-आयु काल (T½) वह समय अंतराल (Time Period) है, जितने समय में उस पदार्थ के नाभिकों की प्रारंभिक संख्या घटकर आधी (Half) रह जाती है।

सरल शब्दों में, यह वह समय है जिसमें कोई रेडियोधर्मी पदार्थ विघटित होकर अपनी मूल मात्रा का ठीक आधा रह जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:


अर्ध-आयु काल की गणना का सूत्र

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, आपको एक सरल सूत्र याद रखना होगा जो किसी निश्चित समय के बाद बचे हुए पदार्थ की मात्रा की गणना करने में मदद करता है।

सूत्र:

N = N₀ (1/2)ⁿ

जहाँ:

और, n की गणना इस प्रकार की जा सकती है:
n = कुल समय (t) / अर्ध-आयु काल (T½)

इस सूत्र को कैसे उपयोग करें – उदाहरण के साथ समझें

प्रश्न: एक रेडियोधर्मी पदार्थ का अर्ध-आयु काल 5 वर्ष है। यदि पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा 64 ग्राम है, तो 15 वर्ष बाद पदार्थ की कितनी मात्रा शेष रहेगी? (यह एक विशिष्ट PYQ प्रारूप है)।

हल:

चरण 1: दिया गया डेटा लिखें।

चरण 2: अर्ध-आयु कालों की संख्या (n) की गणना करें।

चरण 3: मुख्य सूत्र का उपयोग करके शेष मात्रा (N) की गणना करें।

उत्तर: 15 वर्ष बाद पदार्थ की 8 ग्राम मात्रा शेष रहेगी।

वैकल्पिक विधि (बिना सूत्र के):

  1. प्रारंभ में: 64 ग्राम
  2. 5 वर्ष बाद (1st half-life): 64 / 2 = 32 ग्राम
  3. 10 वर्ष बाद (2nd half-life): 32 / 2 = 16 ग्राम
  4. 15 वर्ष बाद (3rd half-life): 16 / 2 = 8 ग्राम

अर्ध-आयु काल का महत्व और अनुप्रयोग (Significance and Applications)

अर्ध-आयु काल की अवधारणा का विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बहुत महत्व है:

  1. कार्बन डेटिंग (Carbon Dating):
    • जीवाश्मों (Fossils), पुरातात्विक नमूनों (लकड़ी, हड्डियाँ) की आयु का पता लगाने के लिए कार्बन-14 (C-14) के अर्ध-आयु काल का उपयोग किया जाता है।
    • कार्बन-14 का अर्ध-आयु काल लगभग 5730 वर्ष होता है। यह तकनीक जीवित जीवों के अवशेषों में बचे C-14 की मात्रा को मापकर काम करती है।
  2. यूरेनियम डेटिंग (Uranium Dating):
    • चट्टानों और पृथ्वी की आयु का पता लगाने के लिए यूरेनियम-238 (U-238) के बहुत लंबे अर्ध-आयु काल (लगभग 4.5 अरब वर्ष) का उपयोग किया जाता है।
  3. चिकित्सा में (Medical Field):
    • रोगों के निदान और उपचार में उपयोग होने वाले रेडियोआइसोटोप की खुराक और प्रभावशीलता का निर्धारण करने में अर्ध-आयु काल महत्वपूर्ण है। कम अर्ध-आयु वाले आइसोटोप को प्राथमिकता दी जाती है ताकि वे शरीर में जल्दी से समाप्त हो जाएं और नुकसान न पहुंचाएं।
    • उदाहरण: कैंसर के इलाज में कोबाल्ट-60 का उपयोग।
  4. परमाणु ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन (Nuclear Energy and Waste Management):
    • परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित भंडारण कितने समय तक करना है, यह निर्धारित करने के लिए उसके अर्ध-आयु काल को जानना आवश्यक है। कुछ अपशिष्टों का अर्ध-आयु काल हजारों वर्ष का होता है।

नाभिकीय अभिक्रियाएँ: विखंडन और संलयन

ये दोनों ही प्रक्रियाएँ नाभिकीय अभिक्रियाएँ हैं जिनमें एक परमाणु का नाभिक परिवर्तित होता है और इस प्रक्रिया में अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा (Tremendous Amount of Energy) मुक्त होती है। यह ऊर्जा आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E = mc² के अनुसार, द्रव्यमान के ऊर्जा में रूपांतरण के कारण उत्पन्न होती है।


1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction):

श्रृंखला अभिक्रिया के प्रकार:

  1. अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrolled Chain Reaction):
    • इसमें विखंडन की दर बहुत तेजी से बढ़ती है, जिससे कुछ ही क्षणों में एक विनाशकारी विस्फोट होता है।
    • अनुप्रयोग: परमाणु बम (Atom Bomb) इसी सिद्धांत पर आधारित है। (यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है)।
  2. नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled Chain Reaction):
    • इसमें विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉनों में से अधिकांश को अवशोषकों (जैसे कैडमियम या बोरॉन की छड़ें) द्वारा सोख लिया जाता है, जिससे केवल एक न्यूट्रॉन आगे विखंडन के लिए उपलब्ध रहता है। इससे अभिक्रिया एक स्थिर दर पर चलती है।
    • अनुप्रयोग: नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactor) में विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) का उत्पादन करने के लिए इसी सिद्धांत का उपयोग किया जाता है। (यह प्रश्न भी बहुत महत्वपूर्ण है)।

2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

आवश्यक शर्तें:

अनुप्रयोग (Applications):

  1. सूर्य और अन्य तारों की ऊर्जा का स्रोत: सूर्य के अंदर, हाइड्रोजन के हल्के नाभिक (प्रोटियम और ड्यूटीरियम) मिलकर हीलियम का एक भारी नाभिक बनाते हैं। इसी संलयन प्रक्रिया से सूर्य और तारे लगातार ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। (यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला उदाहरण है)।
  2. हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb):
    • यह अनियंत्रित नाभिकीय संलयन पर आधारित है।
    • यह परमाणु बम से कई हजार गुना अधिक शक्तिशाली होता है।
    • इसे शुरू करने के लिए आवश्यक उच्च तापमान पैदा करने हेतु, इसके अंदर एक छोटे परमाणु बम (विखंडन बम) का उपयोग ट्रिगर के रूप में किया जाता है।
  3. भविष्य की ऊर्जा: वैज्ञानिक नियंत्रित नाभिकीय संलयन के माध्यम से स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा उत्पन्न करने की दिशा में काम कर रहे हैं (जैसे ITER – अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर परियोजना)।

नाभिकीय विखंडन बनाम नाभिकीय संलयन (Fission vs. Fusion)

(यह सारणी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)

विशेषता (Feature)नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
परिभाषाएक भारी नाभिक का हल्के नाभिकों में टूटनाहल्के नाभिकों का जुड़कर एक भारी नाभिक बनाना।
आवश्यक कच्चा मालभारी तत्व (जैसे यूरेनियम, प्लूटोनियम)।हल्के तत्व (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक)।
आवश्यक शर्तेंसामान्य तापमान और दाब पर संभव।अत्यधिक उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता।
मुक्त ऊर्जाविशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।विखंडन की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
प्राकृतिक घटनाप्राकृतिक रूप से बहुत दुर्लभ।सूर्य और तारों में प्राकृतिक रूप से होती है।
रेडियोधर्मी अपशिष्टबहुत अधिक खतरनाक और दीर्घायु रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न होता है।कम और कम खतरनाक रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न होता है (अपेक्षाकृत स्वच्छ)।
नियंत्रणनियंत्रित किया जा सकता है (रिएक्टर में)।नियंत्रित करना अत्यंत कठिन है (अभी प्रायोगिक चरण में)।
उदाहरण/अनुप्रयोगपरमाणु बम, नाभिकीय रिएक्टरहाइड्रोजन बम, सूर्य की ऊर्जा

विभिन्न क्षेत्रों में रेडियो आइसोटोप के उपयोग (Applications of Radioisotopes)

परिभाषा: रेडियो आइसोटोप क्या हैं?
रेडियो आइसोटोप किसी तत्व के वे अस्थिर समस्थानिक (Unstable Isotopes) होते हैं जो स्थायित्व प्राप्त करने के लिए स्वतः विखंडित होते हैं और अल्फा, बीटा और गामा जैसी किरणों का उत्सर्जन करते हैं। उनके इसी गुण का उपयोग विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।


1. चिकित्सा क्षेत्र में (In Medical Field)

यह रेडियो आइसोटोप का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है, जिसमें निदान (Diagnosis) और उपचार (Therapy) दोनों शामिल हैं।

रेडियो आइसोटोप का नामरासायनिक प्रतीकमुख्य उपयोग
कोबाल्ट-60Co-60कैंसर के इलाज में (रेडियोथेरेपी) – यह गामा किरणें उत्सर्जित करता है जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। (यह सबसे अधिक पूछा जाता है)
आयोडीन-131I-131थायरॉइड ग्रंथि के कैंसर और घेंघा (Goitre) रोग के इलाज में, तथा थायरॉइड की कार्यप्रणाली की जांच में।
फॉस्फोरस-32P-32रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) के इलाज में।
सोडियम-24Na-24रक्त परिसंचरण तंत्र (Blood Circulation System) में थक्कों (Clots) का पता लगाने के लिए।
आयरन-59Fe-59एनीमिया (रक्ताल्पता) रोग का पता लगाने के लिए।
आर्सेनिक-74As-74ट्यूमर (Tumor) का पता लगाने के लिए।
स्ट्रोंशियम-90Sr-90त्वचा और आँखों के कैंसर के इलाज में।

2. कृषि क्षेत्र में (In Agricultural Field)

रेडियो आइसोटोप का नामरासायनिक प्रतीकमुख्य उपयोग
फॉस्फोरस-32P-32पौधों द्वारा उर्वरकों (Fertilizers) के अवशोषण की दर का अध्ययन करने के लिए, जिससे बेहतर उर्वरक विकसित किए जा सकें।
कोबाल्ट-60Co-60खाद्य परिरक्षण (Food Preservation) – गामा किरणों का उपयोग करके आलू, प्याज आदि को अंकुरित होने से रोकने और खाद्य पदार्थों में मौजूद सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित रहें।
नाइट्रोजन-15N-15नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए।
(गामा किरणें)कीट नियंत्रण – हानिकारक कीटों को विकिरण द्वारा नपुंसक बनाने के लिए ताकि उनकी आबादी को नियंत्रित किया जा सके।

3. औद्योगिक क्षेत्र में (In Industrial Field)

रेडियो आइसोटोप का नामरासायनिक प्रतीकमुख्य उपयोग
कोबाल्ट-60 / इरिडियम-192Co-60 / Ir-192औद्योगिक रेडियोग्राफी – वेल्डिंग जोड़ों, पाइपलाइनों और मशीन के पुर्जों में दरारों या खामियों का पता लगाने के लिए (यह एक्स-रे की तरह काम करता है)।
कैलिफोर्नियम-252Cf-252हवाई अड्डों पर विस्फोटकों (Explosives) का पता लगाने वाले उपकरणों में।
अमेरिसियम-241Am-241स्मोक डिटेक्टर (Smoke Detectors) में – यह धुएं के कणों का पता लगाकर आग लगने की सूचना देता है।
कोबाल्ट-60Co-60गामा स्टरलाइज़ेशन – सर्जिकल उपकरणों जैसे मेडिकल उत्पादों को कीटाणुरहित करने के लिए।
क्रिप्टन-85Kr-85कागज, प्लास्टिक और धातु की चादरों की मोटाई मापने के लिए।

4. पुरातात्विक और भूवैज्ञानिक क्षेत्र में (In Archaeology and Geology)

रेडियो आइसोटोप का नामरासायनिक प्रतीकमुख्य उपयोग
कार्बन-14C-14कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) – जीवाश्मों, लकड़ी, और अन्य जैविक पदार्थों की आयु का पता लगाने के लिए। (यह भी सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है)
यूरेनियम-238U-238यूरेनियम डेटिंग – बहुत पुरानी चट्टानों, उल्कापिंडों और पृथ्वी की आयु का अनुमान लगाने के लिए (लेड-डेटिंग के साथ संयोजन में)।
पोटेशियम-40K-40चट्टानों की आयु निर्धारित करने के लिए (पोटेशियम-आर्गन डेटिंग)।

5. ऊर्जा उत्पादन में (In Energy Production)

रेडियो आइसोटोप का नामरासायनिक प्रतीकमुख्य उपयोग
यूरेनियम-235U-235नाभिकीय रिएक्टरों में ईंधन (Fuel in Nuclear Reactors) के रूप में नाभिकीय विखंडन द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए।
प्लूटोनियम-239Pu-239परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में।

यह सारणी आपको विभिन्न रेडियो आइसोटोप के विशिष्ट और महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को याद रखने में मदद करेगी, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।