क्वांटम संख्याएं(QUANTOM NUMBERS)
क्वांटम संख्याएँ (Quantum Numbers)
परिभाषा: क्वांटम संख्याएँ क्या हैं?
क्वांटम संख्याएँ उन संख्याओं का एक समूह (Set of four numbers) हैं जो एक परमाणु के भीतर किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति (Position) और ऊर्जा (Energy) का पूरी तरह से वर्णन करती हैं।
सरल शब्दों में, जैसे किसी व्यक्ति का पूरा पता बताने के लिए आपको उसके देश, राज्य, शहर और गली नंबर की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार एक परमाणु में किसी इलेक्ट्रॉन का पूरा विवरण देने के लिए आपको चार क्वांटम संख्याओं की आवश्यकता होती है।
यह क्वांटम यांत्रिक मॉडल (Quantum Mechanical Model) का एक हिस्सा है, जिसने बोर के ‘कक्षा’ (Orbit) के सिद्धांत को प्रतिस्थापित कर दिया।
क्वांटम संख्याओं के चार प्रकार
एक इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह से परिभाषित करने के लिए चार क्वांटम संख्याएँ होती हैं:
- मुख्य क्वांटम संख्या (Principal Quantum Number) – n
- दिगंशी क्वांटम संख्या (Azimuthal or Angular Momentum Quantum Number) – l
- चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantum Number) – mₗ
- प्रचक्रण क्वांटम संख्या (Spin Quantum Number) – s
1. मुख्य क्वांटम संख्या (Principal Quantum Number) – n
- परिभाषा: यह क्वांटम संख्या इलेक्ट्रॉन के मुख्य ऊर्जा स्तर (Main Energy Level) या कोश (Shell) को दर्शाती है।
- किसके बारे में बताती है?
- नाभिक से इलेक्ट्रॉन की औसत दूरी।
- इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा।
- मान (Possible Values): इसका मान कोई भी सकारात्मक पूर्णांक हो सकता है: n = 1, 2, 3, 4, …
- सांकेतिक नाम:
- n = 1 के लिए K कोश (K Shell)
- n = 2 के लिए L कोश (L Shell)
- n = 3 के लिए M कोश (M Shell)
- n = 4 के लिए N कोश (N Shell)
- n का मान जितना अधिक होगा, इलेक्ट्रॉन नाभिक से उतना ही दूर होगा और उसकी ऊर्जा भी उतनी ही अधिक होगी।
2. दिगंशी क्वांटम संख्या (Azimuthal Quantum Number) – l
- परिभाषा: इसे कोणीय संवेग क्वांटम संख्या भी कहते हैं। यह मुख्य कोश के भीतर मौजूद उपकोशों (Subshells) के बारे में बताती है।
- किसके बारे में बताती है?
- यह कक्षक (Orbital) के आकार (Shape) को निर्धारित करती है।
- मान (Possible Values): इसका मान n पर निर्भर करता है। किसी दिए गए n के लिए, l के संभव मान 0 से लेकर (n-1) तक हो सकते हैं।
- l = 0, 1, 2, …, (n-1)
- उपकोशों के नाम और आकार:
| l का मान | उपकोश का प्रतीक | उपकोश का आकार (Shape) |
| 0 | s | गोलाकार (Spherical) |
| 1 | p | डम्बल (Dumbbell-shaped) |
| 2 | d | डबल-डम्बल (Double-dumbbell) |
| 3 | f | जटिल (Complex) |
उदाहरण: यदि n = 3 (M कोश) है, तो l के संभव मान 0, 1, और 2 होंगे। इसका मतलब है कि M कोश में तीन उपकोश होते हैं: 3s, 3p, और 3d.
3. चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantum Number) – mₗ
- परिभाषा: यह क्वांटम संख्या उपकोश के भीतर मौजूद कक्षकों (Orbitals) और बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में उनके अभिविन्यास (Orientation) के बारे में बताती है।
- किसके बारे में बताती है?
- अंतरिक्ष में कक्षक किस दिशा में उन्मुख है।
- मान (Possible Values): इसका मान l पर निर्भर करता है। किसी दिए गए l के लिए, mₗ के संभव मान -l से लेकर +l तक (शून्य सहित) हो सकते हैं।
- mₗ = -l, …, 0, …, +l
- किसी उपकोश में कुल कक्षकों की संख्या (2l + 1) होती है।
- उदाहरण:
- यदि l = 0 (s उपकोश), तो mₗ = 0। इसका मतलब है कि s उपकोश में केवल एक कक्षक (1s, 2s, आदि) होता है।
- यदि l = 1 (p उपकोश), तो mₗ = -1, 0, +1। इसका मतलब है कि p उपकोश में तीन कक्षक (px, py, pz) होते हैं, जो x, y और z अक्षों पर अभिविन्यस्त होते हैं।
- यदि l = 2 (d उपकोश), तो mₗ = -2, -1, 0, +1, +2। इसका मतलब है कि d उपकोश में पांच कक्षक होते हैं।
4. प्रचक्रण क्वांटम संख्या (Spin Quantum Number) – s या mₛ
- परिभाषा: यह क्वांटम संख्या इलेक्ट्रॉन के अपनी ही अक्ष पर घूर्णन या प्रचक्रण (Spin) की दिशा को दर्शाती है।
- किसके बारे में बताती है?
- इलेक्ट्रॉन का आंतरिक कोणीय संवेग (Intrinsic Angular Momentum)।
- मान (Possible Values): इसका मान इलेक्ट्रॉन की प्रचक्रण की दिशा पर निर्भर करता है और इसके केवल दो ही संभव मान हो सकते हैं:
- +1/2: दक्षिणावर्त (Clockwise) या ऊपर की ओर स्पिन (Spin-up, ↑)
- -1/2: वामावर्त (Anticlockwise) या नीचे की ओर स्पिन (Spin-down, ↓)
- पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli’s Exclusion Principle):
- इसी सिद्धांत से इस क्वांटम संख्या का महत्व स्थापित होता है। सिद्धांत के अनुसार, “किसी भी एक परमाणु में, किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ एक समान नहीं हो सकतीं।”
- इसका अर्थ है कि एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन ही रह सकते हैं, और उन दोनों का प्रचक्रण (Spin) विपरीत (Opposite) होना चाहिए (एक +1/2 और दूसरा -1/2)।
सारांश सारणी: एक नज़र में
| क्वांटम संख्या का नाम | प्रतीक | क्या दर्शाती है? | संभव मान |
| मुख्य (Principal) | n | कोश (Shell), ऊर्जा, और नाभिक से दूरी। | 1, 2, 3, … |
| दिगंशी (Azimuthal) | l | उपकोश (Subshell) और कक्षक का आकार। | 0, 1, …, (n-1) |
| चुंबकीय (Magnetic) | mₗ | कक्षक (Orbital) और उसका अभिविन्यास। | -l, …, 0, …, +l |
| प्रचक्रण (Spin) | s | इलेक्ट्रॉन का घूर्णन (Spin)। | +1/2, -1/2 |
1. कक्षकों का आकार (Shape of Orbitals)
कक्षक (Orbital) परमाणु के नाभिक के चारों ओर का वह त्रि-आयामी (3D) क्षेत्र है, जहाँ एक इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना (Probability) सबसे अधिक (लगभग 90%) होती है। प्रत्येक कक्षक का आकार दिगंशी क्वांटम संख्या (l) द्वारा निर्धारित होता है।
(a) s-कक्षक (s-orbital)
- दिगंशी क्वांटम संख्या (l): l = 0
- आकार (Shape): गोलाकार और सममित (Spherical and Symmetrical)।
- अभिविन्यास (Orientation): चूँकि यह गोलाकार होता है, इसका कोई दिशात्मक अभिविन्यास नहीं होता। चुंबकीय क्वांटम संख्या (mₗ) का केवल एक मान (0) होता है, इसलिए प्रत्येक s-उपकोश में केवल एक कक्षक होता है।
- चित्र:
- 1s कक्षक सबसे छोटा होता है। 2s कक्षक 1s से बड़ा होता है, लेकिन आकार गोलाकार ही रहता है।
(b) p-कक्षक (p-orbital)
- दिगंशी क्वांटम संख्या (l): l = 1
- आकार (Shape): डम्बल (Dumbbell-shaped)। इसके दो लोब (Lobes) होते हैं जो नाभिक पर मिलते हैं (जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना शून्य होती है, इसे नोड (Node) कहते हैं)।
- अभिविन्यास (Orientation): चुंबकीय क्वांटम संख्या (mₗ) के तीन मान (-1, 0, +1) होते हैं। इसका अर्थ है कि p-उपकोश में तीन कक्षक (Three Orbitals) होते हैं, जो अंतरिक्ष में एक-दूसरे के लंबवत (Perpendicular) तीन अलग-अलग अक्षों – x, y, और z – पर अभिविन्यस्त होते हैं।
- नाम: px, py, और pz
- चित्र:
(c) d-कक्षक (d-orbital)
- दिगंशी क्वांटम संख्या (l): l = 2
- आकार (Shape): डबल-डम्बल (Double-dumbbell-shaped) (अधिकतर)।
- अभिविन्यास (Orientation): चुंबकीय क्वांटम संख्या (mₗ) के पांच मान (-2, -1, 0, +1, +2) होते हैं। इसका मतलब है कि d-उपकोश में पांच कक्षक (Five Orbitals) होते हैं।
- नाम: dxy, dyz, dxz, dx²-y², और dz² (जिसका आकार अलग होता है)।
- (इनके जटिल आकार प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं, संख्या याद रखना अधिक महत्वपूर्ण है)
(d) f-कक्षक (f-orbital)
- दिगंशी क्वांटम संख्या (l): l = 3
- आकार (Shape): इनका आकार जटिल और बहु-लोब (Complex and Multi-lobed) होता है।
- अभिविन्यास (Orientation): चुंबकीय क्वांटम संख्या (mₗ) के सात मान (-3 से +3 तक) होते हैं। इसका मतलब है कि f-उपकोश में सात कक्षक (Seven Orbitals) होते हैं।
2. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration)
परिभाषा: किसी परमाणु के विभिन्न कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण (Distribution of electrons) की व्यवस्था को उस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहते हैं।
इलेक्ट्रॉन कक्षकों में कुछ निश्चित नियमों के अनुसार भरते हैं:
(a) ऑफबाऊ का नियम (Aufbau Principle)
- परिभाषा: “Aufbau” एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है “निर्माण करना”। यह नियम बताता है कि इलेक्ट्रॉन सबसे पहले न्यूनतम ऊर्जा (Lowest Energy) वाले कक्षक में भरते हैं, और जब वह पूरी तरह से भर जाता है, तभी वे अगले उच्च ऊर्जा वाले कक्षक में जाते हैं।
- कक्षकों का ऊर्जा क्रम: इलेक्ट्रॉन किस क्रम में भरेंगे, यह कक्षकों की ऊर्जा पर निर्भर करता है, जिसे (n+l) नियम से निर्धारित किया जाता है।
- जिस कक्षक के लिए (n+l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है।
- यदि दो कक्षकों के लिए (n+l) का मान समान हो, तो उस कक्षक की ऊर्जा कम होगी जिसके लिए
- भरने का सही क्रम:
1s → 2s → 2p → 3s → 3p → 4s → 3d → 4p → 5s → …
(चित्र: ऊर्जा स्तर आरेख)
(b) पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli’s Exclusion Principle)
- परिभाषा: यह सिद्धांत कहता है कि किसी भी परमाणु में, किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ (n, l, mₗ, s) एक समान नहीं हो सकतीं।
- निष्कर्ष: इस नियम का सीधा सा मतलब है कि एक कक्षक (Orbital) में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन ही आ सकते हैं, और उन दोनों का प्रचक्रण (Spin) विपरीत (Opposite) होना चाहिए (एक ऊपर की ओर ↑, और दूसरा नीचे की ओर ↓)।
- उदाहरण: He (Z=2): 1s² (दोनों इलेक्ट्रॉन 1s कक्षक में हैं, लेकिन एक का स्पिन +1/2 और दूसरे का -1/2 है)।
(c) हुंड का अधिकतम बहुलता का नियम (Hund’s Rule of Maximum Multiplicity)
- परिभाषा: यह नियम एक ही उपकोश (Subshell) के कक्षकों (जैसे p, d, f) में इलेक्ट्रॉन भरने से संबंधित है।
- नियम: इसके अनुसार, एक उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (Pairing) तब तक शुरू नहीं होता जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन नहीं भर जाता, और इन सभी अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉनों का प्रचक्रण (Spin) समान होता है।
- सरल शब्दों में: जब तक खाली सीट हो, इलेक्ट्रॉन एक ही सीट पर जोड़ा नहीं बनाते, वे पहले अलग-अलग सीटों पर बैठते हैं।
- उदाहरण: नाइट्रोजन (N, Z=7) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
- 1s² 2s² 2p³
- 2p उपकोश में तीन कक्षक (px, py, pz) हैं। हुंड के नियम के अनुसार, 2p के तीन इलेक्ट्रॉन इस प्रकार भरेंगे:
- px (↑), py (↑), pz (↑) [यह सही है]
- px (↑↓), py (↑), pz ( ) [यह गलत है]
उदाहरण: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखना
- ऑक्सीजन (O, Z=8): 1s² 2s² 2p⁴
- (2p में: px(↑↓), py(↑), pz(↑))
- सोडियम (Na, Z=11): 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹
- अपवाद:क्रोमियम (Cr, Z=24) और कॉपर (Cu, Z=29) जैसे तत्व अर्ध-भरे (half-filled) और पूर्ण-भरे (fully-filled) उपकोशों के अतिरिक्त स्थायित्व के कारण ऑफबाऊ के नियम का पालन नहीं करते हैं।
- Cr (Z=24): अपेक्षित – [Ar] 4s² 3d⁴ वास्तविक – [Ar] 4s¹ 3d⁵
- Cu (Z=29): अपेक्षित – [Ar] 4s² 3d⁹ वास्तविक – [Ar] 4s¹ 3d¹⁰
रासायनिक बंधन (Chemical Bonding)
परिभाषा: रासायनिक बंधन क्या है?
रासायनिक बंधन वह आकर्षण बल है जो विभिन्न परमाणुओं को एक अणु या आयनिक यौगिक में एक साथ बांधकर रखता है।
बंधन क्यों बनते हैं?
परमाणु रासायनिक बंधन इसलिए बनाते हैं ताकि वे स्थायित्व (Stability) प्राप्त कर सकें। यह स्थायित्व आमतौर पर उनके सबसे बाहरी कोश (Valence Shell) में अक्रिय गैसों (Noble Gases) के समान 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक – Octet) या 2 इलेक्ट्रॉन (ड्यूप्लेट – Duplet, हाइड्रोजन के मामले में) का विन्यास प्राप्त करके होता है।
परमाणु यह स्थायित्व तीन मुख्य तरीकों से प्राप्त करते हैं, जिससे तीन प्रमुख प्रकार के बंध बनते हैं:
- आयोनिक (विद्युत संयोजी) बंध (Ionic Bond)
- सहसंयोजी बंध (Covalent Bond)
- उपसहसंयोजी बंध (Coordinate Bond)
1. आयोनिक बंध या विद्युत संयोजी बंध (Ionic or Electrovalent Bond)
- परिभाषा: यह बंध इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (Complete transfer) से बनता है।
- किसके बीच बनता है?: यह आमतौर पर एक धातु (Metal) और एक अधातु (Non-metal) के बीच बनता है।
- प्रक्रिया:
- धातु (Metal) परमाणु आसानी से अपने बाहरी कोश से एक या अधिक इलेक्ट्रॉन खोकर एक धनायन (Cation) बनाता है (जैसे Na → Na⁺ + e⁻)।
- अधातु (Non-metal) परमाणु इन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके एक ऋणायन (Anion) बनाता है (जैसे Cl + e⁻ → Cl⁻)।
- अब, इन विपरीत आवेशित आयनों (धनायन और ऋणायन) के बीच लगने वाला स्थिरविद्युत आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) ही आयोनिक बंध कहलाता है।
- उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) का बनना
- Na (2,8,1) अपना 1 इलेक्ट्रॉन Cl (2,8,7) को दे देता है।
- इससे Na⁺ (2,8) और Cl⁻ (2,8,8) बन जाते हैं। दोनों का अष्टक पूरा हो जाता है।
- अब Na⁺ और Cl⁻ के बीच आकर्षण बल से आयोनिक बंध बनता है।
आयोनिक यौगिकों के गुण (Properties of Ionic Compounds):
- ये क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids) होते हैं और कठोर होते हैं।
- इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च (High) होते हैं, क्योंकि आयनों के बीच का आकर्षण बल बहुत मजबूत होता है।
- विद्युत चालकता (Electrical Conductivity):
- ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि आयन गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं।
- लेकिन, गलित (Molten) अवस्था या जलीय विलयन (Aqueous Solution) में ये विद्युत के सुचालक होते हैं, क्योंकि आयन गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
2. सहसंयोजी बंध (Covalent Bond)
- परिभाषा: यह बंध परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी (Mutual Sharing) से बनता है।
- किसके बीच बनता है?: यह आमतौर पर दो अधातुओं (Non-metals) के बीच बनता है।
- प्रक्रिया: जब दो परमाणुओं को अपना अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, तो वे इलेक्ट्रॉनों का एक-दूसरे के साथ साझा करके एक साझा जोड़ी बनाते हैं। इस साझा जोड़ी पर दोनों परमाणुओं का समान अधिकार होता है।
- प्रकार:
- एकल बंध (Single Bond): जब एक इलेक्ट्रॉन जोड़ी (2 इलेक्ट्रॉन) की साझेदारी होती है। (उदाहरण: H-H in H₂, Cl-Cl in Cl₂)
- द्वि-बंध (Double Bond): जब दो इलेक्ट्रॉन जोड़ियों (4 इलेक्ट्रॉन) की साझेदारी होती है। (उदाहरण: O=O in O₂)
- त्रि-बंध (Triple Bond): जब तीन इलेक्ट्रॉन जोड़ियों (6 इलेक्ट्रॉन) की साझेदारी होती है। (उदाहरण: N≡N in N₂)
- उदाहरण: क्लोरीन (Cl₂) का बनना
- दोनों Cl परमाणुओं (2,8,7) को अपना अष्टक पूरा करने के लिए 1-1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। वे अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करके एक एकल बंध (Cl-Cl) बनाते हैं।
सहसंयोजी यौगिकों के गुण (Properties of Covalent Compounds):
- ये आमतौर पर गैस, द्रव या मुलायम ठोस होते हैं।
- इनके गलनांक और क्वथनांक निम्न (Low) होते हैं, क्योंकि अणुओं के बीच का आकर्षण बल (वान डेर वाल्स बल) कमजोर होता है।
- ये सामान्यतः विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि इनमें स्वतंत्र आयन या इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं। (अपवाद: ग्रेफाइट)
- ये आमतौर पर पानी में अघुलनशील लेकिन कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
3. उपसहसंयोजी बंध (Coordinate Bond)
- परिभाषा: यह एक विशेष प्रकार का सहसंयोजी बंध है जिसमें साझा की जाने वाली इलेक्ट्रॉन की जोड़ी (Shared Pair of Electrons) केवल एक ही परमाणु द्वारा प्रदान की जाती है, लेकिन उस पर अधिकार दोनों परमाणुओं का होता है।
- अन्य नाम: इसे दाता बंध (Dative Bond) भी कहते हैं।
- प्रक्रिया:
- दाता परमाणु (Donor Atom): वह परमाणु जो इलेक्ट्रॉन की जोड़ी प्रदान करता है (इसके पास एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म – Lone Pair होता है)।
- ग्राही परमाणु (Acceptor Atom): वह परमाणु जो उस इलेक्ट्रॉन जोड़ी को स्वीकार करता है (इसका अष्टक अधूरा होता है)।
- प्रदर्शन: इस बंध को दाता परमाणु से ग्राही परमाणु की ओर एक तीर (→) द्वारा दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: अमोनियम आयन (NH₄⁺) का बनना
- अमोनिया (NH₃) में, नाइट्रोजन (N) के पास एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है।
- हाइड्रोजन आयन (H⁺) के पास कोई इलेक्ट्रॉन नहीं होता है।
- नाइट्रोजन अपना एकाकी युग्म H⁺ के साथ साझा करके एक उपसहसंयोजी बंध बनाता है।
4. हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bond)
- परिभाषा: यह एक कमजोर आकर्षण बल है, न कि एक वास्तविक रासायनिक बंध। यह तब बनता है जब हाइड्रोजन (H) परमाणु एक अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक (Highly Electronegative) परमाणु (जैसे F, O, N) से जुड़ा हो, और यह किसी दूसरे विद्युत ऋणात्मक परमाणु के निकट आता है।
- किसके बीच बनता है?: H-F, H-O, और H-N बंध युक्त अणुओं के बीच।
- कारण: F, O, N की उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण, H पर आंशिक धनावेश (partial positive charge) और F, O, N पर आंशिक ऋणावेश (partial negative charge) आ जाता है। यह आंशिक धनावेशित H दूसरे अणु के आंशिक ऋणावेशित परमाणु को आकर्षित करता है, इसी आकर्षण को हाइड्रोजन बंध कहते हैं।
- महत्व:
- पानी (H₂O) के असाधारण गुण: पानी का उच्च क्वथनांक, पृष्ठ तनाव और बर्फ का पानी पर तैरना हाइड्रोजन बंधन के कारण ही होता है।
- जैविक अणु: DNA की दोहरी कुंडली संरचना (double helix structure) और प्रोटीन की संरचना को स्थिर रखने में हाइड्रोजन बंधों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सारांश सारणी
| विशेषता | आयोनिक बंध | सहसंयोजी बंध | हाइड्रोजन बंध |
| निर्माण का आधार | इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण स्थानांतरण | इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी | कमजोर स्थिरविद्युत आकर्षण |
| किसके बीच बनता है | धातु और अधातु | अधातु और अधातु | H और (F, O, N) के बीच |
| शक्ति (Strength) | बहुत मजबूत (वास्तविक बंध) | मजबूत (वास्तविक बंध) | बहुत कमजोर (आकर्षण बल) |
| यौगिकों की प्रकृति | क्रिस्टलीय ठोस | गैस, द्रव, मुलायम ठोस | – |
| गलनांक/क्वथनांक | बहुत उच्च | निम्न | यौगिकों के क्वथनांक को बढ़ाता है |
| उदाहरण | NaCl, MgO, CaCl₂ | H₂, O₂, H₂O, CH₄ | जल (H₂O) के अणुओं के बीच |
अम्ल, क्षार एवं लवण
1. अम्ल (Acids)
(a) परिभाषाएं (Definitions):
- सामान्य अवधारणा: अम्ल वे पदार्थ हैं जो स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं।
- आरहीनियस की अवधारणा: “अम्ल वह पदार्थ है जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺ आयन) देता है।” (यह सबसे आम परिभाषा है)।
- HCl → H⁺ + Cl⁻
- ब्रोंस्टेड-लॉरी की अवधारणा: “अम्ल प्रोटॉन (H⁺) दाता (Donor) होते हैं।”
- लुईस की अवधारणा: “अम्ल इलेक्ट्रॉन की जोड़ी (Electron Pair) के ग्राही (Acceptor) होते हैं।”
(b) अम्लों के गुण (Properties of Acids):
- स्वाद: ये स्वाद में खट्टे होते हैं। (उदाहरण: नींबू में साइट्रिक एसिड)।
- लिटमस पर प्रभाव: अम्ल नीले लिटमस पत्र (Blue Litmus Paper) को लाल (Red) कर देते हैं। (यह सबसे महत्वपूर्ण गुण है)।
- धातुओं से अभिक्रिया: सक्रिय धातुएं (जैसे Zn, Mg) अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H₂) बनाती हैं।
- Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂↑
- कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया: अम्ल धातु कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO₂) निकालते हैं।
- CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑
- क्षार से अभिक्रिया: अम्ल क्षार से अभिक्रिया करके लवण (Salt) और जल (Water) बनाते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण (Neutralization) कहते हैं।
- HCl + NaOH → NaCl + H₂O
(c) अम्लों के प्रकार:
- प्रबल अम्ल (Strong Acids): जो जल में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक मात्रा में H⁺ आयन देते हैं। (जैसे – HCl, H₂SO₄, HNO₃)।
- दुर्बल अम्ल (Weak Acids): जो जल में आंशिक रूप से आयनित होकर कम मात्रा में H⁺ आयन देते हैं। (जैसे – CH₃COOH (एसिटिक एसिड), H₂CO₃ (कार्बोनिक एसिड), साइट्रिक एसिड)।
(d) दैनिक जीवन में पाए जाने वाले अम्ल:
| स्रोत | अम्ल का नाम |
| नींबू / संतरा | साइट्रिक एसिड |
| सिरका (Vinegar) | एसिटिक एसिड |
| दही | लैक्टिक एसिड |
| टमाटर | ऑक्जेलिक एसिड |
| इमली / अंगूर | टार्टरिक एसिड |
| चींटी का डंक / बिच्छू का डंक | फॉर्मिक एसिड (मेथेनोइक एसिड) |
| सेब | मैलिक एसिड |
| आमाशय रस (Stomach) | हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) |
2. क्षार/क्षारक (Bases/Alkalis)
(a) परिभाषाएं (Definitions):
- सामान्य अवधारणा: क्षार वे पदार्थ हैं जो स्वाद में कड़वे/कसैले (Bitter) होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने (Soapy) लगते हैं।
- आरहीनियस की अवधारणा: “क्षार वह पदार्थ है जो जल में घुलकर हाइड्रॉक्सिल आयन (OH⁻ आयन) देता है।”
- NaOH → Na⁺ + OH⁻
- ब्रोंस्टेड-लॉरी की अवधारणा: “क्षार प्रोटॉन (H⁺) ग्राही (Acceptor) होते हैं।”
- लुईस की अवधारणा: “क्षार इलेक्ट्रॉन की जोड़ी के दाता (Donor) होते हैं।”
- क्षारक (Base) और क्षार (Alkali) में अंतर: वे सभी क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार कहलाते हैं। (अर्थात्, सभी क्षार, क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक, क्षार नहीं होते)।
(b) क्षारों के गुण (Properties of Bases):
- स्वाद और स्पर्श: ये स्वाद में कड़वे और स्पर्श में साबुन जैसे चिकने होते हैं।
- लिटमस पर प्रभाव: क्षार लाल लिटमस पत्र (Red Litmus Paper) को नीला (Blue) कर देते हैं।
- अम्ल से अभिक्रिया: ये अम्लों के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।
(c) क्षारों के प्रकार:
- प्रबल क्षार (Strong Bases): जो जल में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक मात्रा में OH⁻ आयन देते हैं। (जैसे – NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड), KOH (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड))।
- दुर्बल क्षार (Weak Bases): जो जल में आंशिक रूप से आयनित होते हैं। (जैसे – NH₄OH (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड), Mg(OH)₂ (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड))।
3. pH स्केल (pH Scale)
- परिभाषा: किसी विलयन की अम्लता (Acidity) या क्षारीयता (Alkalinity) को मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक पैमाना pH स्केल कहलाता है।
- अवधारणा: इसका विकास सोरेंसन (Sorensen) ने किया था। ‘pH’ का अर्थ है “हाइड्रोजन की शक्ति (Power of Hydrogen)”।
- पैमाना: यह 0 से 14 तक होता है।
- pH < 7: विलयन अम्लीय (Acidic) होगा।
- pH = 7: विलयन उदासीन (Neutral) होगा (जैसे – शुद्ध जल)।
- pH > 7: विलयन क्षारीय (Basic/Alkaline) होगा।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- pH मान जितना कम होता है, विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होता है।
- pH मान जितना अधिक होता है, विलयन उतना ही अधिक क्षारीय होता है।
| पदार्थ | लगभग pH मान |
| आमाशय रस (HCl) | 1.5 – 2.5 |
| नींबू का रस | 2.2 |
| सिरका | 2.4 |
| वर्षा का जल | 5.6 – 6.0 |
| दूध | 6.5 |
| शुद्ध जल | 7.0 (उदासीन) |
| मानव रक्त (Blood) | 7.4 (हल्का क्षारीय) |
| खाने का सोडा | 8.3 |
| मिल्क ऑफ मैग्नीशिया | 10 |
| सोडियम हाइड्रॉक्साइड | 14 |
4. लवण (Salts)
- परिभाषा: लवण वह आयनिक यौगिक है जो उदासीनीकरण अभिक्रिया में एक अम्ल और एक क्षार की प्रतिक्रिया से बनता है।
- निर्माण: अम्ल + क्षार → लवण + जल
- उदाहरण: साधारण नमक (NaCl), कॉपर सल्फेट (CuSO₄), पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃)।
दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण लवण
| सामान्य नाम | रासायनिक नाम | रासायनिक सूत्र | मुख्य उपयोग |
| साधारण नमक | सोडियम क्लोराइड | NaCl | भोजन में, परिरक्षक के रूप में। |
| धावन सोडा | सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट | Na₂CO₃·10H₂O | धुलाई के लिए, जल की स्थायी कठोरता हटाने में। |
| खाने का सोडा | सोडियम बाइकार्बोनेट | NaHCO₃ | बेकिंग पाउडर में, एंटासिड के रूप में। |
| ब्लीचिंग पाउडर | कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड | CaOCl₂ | विरंजक के रूप में, कीटाणुनाशक के रूप में। |
| **प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) | ** कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट | CaSO₄·½H₂O | टूटी हड्डियों को जोड़ने में, मूर्तियां बनाने में। |
| जिप्सम | कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट | CaSO₄·2H₂O | सीमेंट उद्योग में, POP बनाने में। |
सूचक (Indicators)
परिभाषा
सूचक (Indicator) वह रासायनिक पदार्थ होता है जो यह बताता है कि दिया गया विलयन अम्लीय (Acidic) है या क्षारीय (Basic)। यह अपने रंग (Colour) या गंध (Smell) में परिवर्तन करके यह सूचना देता है।
सूचकों के प्रकार (Types of Indicators)
सूचकों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators)
- संश्लेषित/कृत्रिम सूचक (Synthetic/Artificial Indicators)
- गंधीय सूचक (Olfactory Indicators)
1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators)
वे सूचक जो प्राकृतिक स्रोतों जैसे पौधों से प्राप्त किए जाते हैं।
- (a) लिटमस (Litmus):
- स्रोत: यह सबसे आम प्राकृतिक सूचक है। इसे “लिचेन” (Lichen) नामक पौधे से निकाला जाता है। (यह प्रश्न बहुत बार पूछा गया है)।
- उपलब्धता: यह विलयन के रूप में या कागज की पट्टियों (लिटमस पेपर) के रूप में उपलब्ध होता है – लाल लिटमस पेपर और नीला लिटमस पेपर।
- रंग परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन (Acidic Solution): नीले (Blue) लिटमस को लाल (Red) कर देता है।
- क्षारीय विलयन (Basic Solution): लाल (Red) लिटमस को नीला (Blue) कर देता है।
- उदासीन विलयन (Neutral Solution): इसका अपना प्राकृतिक रंग बैंगनी (Purple) होता है और यह कोई रंग परिवर्तन नहीं दिखाता है।
- (b) हल्दी (Turmeric):
- प्राकृतिक रंग: पीला।
- रंग परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: पीले रंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता (पीला ही रहता है)।
- क्षारीय विलयन: इसका रंग पीले से लाल-भूरा (Reddish-brown) हो जाता है। (आपने देखा होगा कि जब कपड़े पर लगे हल्दी के दाग पर साबुन (क्षारीय) लगाया जाता है, तो वह लाल-भूरा हो जाता है)।
- (c) लाल पत्ता गोभी का रस (Red Cabbage Juice):
- प्राकृतिक रंग: बैंगनी।
- रंग परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: लाल या गुलाबी हो जाता है।
- क्षारीय विलयन: हरा या पीला हो जाता है।
- (d) हाइड्रेंजिया फूल (Hydrangea Flowers):
- ये फूल मिट्टी की अम्लता या क्षारीयता के अनुसार अपना रंग बदलते हैं (अम्लीय मिट्टी में नीले, क्षारीय मिट्टी में गुलाबी)।
2. संश्लेषित/कृत्रिम सूचक (Synthetic/Artificial Indicators)
वे सूचक जिन्हें प्रयोगशाला में रासायनिक पदार्थों से तैयार किया जाता है।
- (a) फिनोलफ्थेलिन (Phenolphthalein):
- प्राकृतिक रंग: यह स्वयं रंगहीन (Colourless) होता है।
- रंग परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: रंगहीन ही रहता है।
- क्षारीय विलयन: गुलाबी (Pink) रंग का हो जाता है। (यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है)।
- उदासीन विलयन: रंगहीन रहता है।
- (b) मेथिल ऑरेंज (Methyl Orange):
- प्राकृतिक रंग: नारंगी (Orange)।
- रंग परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: लाल (Red) हो जाता है।
- क्षारीय विलयन: पीला (Yellow) हो जाता है।
- उदासीन विलयन: नारंगी रहता है।
3. गंधीय सूचक (Olfactory Indicators)
वे पदार्थ जिनकी गंध (Smell) अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है। इनका उपयोग अक्सर दृष्टिबाधित (Visually Impaired) छात्रों द्वारा किया जाता है।
- (a) प्याज का रस (Onion Juice):
- गंध: इसकी एक तीव्र विशिष्ट गंध होती है।
- परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: प्याज की गंध पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
- क्षारीय विलयन: प्याज की गंध समाप्त हो जाती है या गायब हो जाती है।
- (b) वैनिला एसेंस (Vanilla Essence):
- गंध: इसकी एक मीठी गंध होती है।
- परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: वैनिला की गंध बनी रहती है।
- क्षारीय विलयन: वैनिला की गंध गायब हो जाती है।
- (c) लौंग का तेल (Clove Oil):
- गंध: इसकी अपनी एक विशिष्ट गंध होती है।
- परिवर्तन:
- अम्लीय विलयन: गंध बनी रहती है।
- क्षारीय विलयन: गंध गायब हो जाती है।
सारांश सारणी: एक नज़र में (बहुत महत्वपूर्ण)
| सूचक का नाम | प्राकृतिक रंग | अम्लीय माध्यम में रंग/गंध | क्षारीय माध्यम में रंग/गंध |
| नीला लिटमस पेपर | नीला | लाल | कोई परिवर्तन नहीं (नीला) |
| लाल लिटमस पेपर | लाल | कोई परिवर्तन नहीं (लाल) | नीला |
| हल्दी | पीला | कोई परिवर्तन नहीं (पीला) | लाल-भूरा |
| फिनोलफ्थेलिन | रंगहीन | रंगहीन | गुलाबी (Pink) |
| मेथिल ऑरेंज | नारंगी | लाल | पीला |
| प्याज का रस | तीव्र गंध | गंध बनी रहती है | गंध समाप्त हो जाती है |
| वैनिला एसेंस | मीठी गंध | गंध बनी रहती है | गंध समाप्त हो जाती है |
सारणी 1: प्रमुख अम्ल (Important Acids)
| सामान्य नाम/स्रोत | रासायनिक नाम (Chemical Name) | रासायनिक सूत्र (Formula) |
| अम्लों का राजा (King of Chemicals) / बैटरी एसिड | सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric Acid) | H₂SO₄ |
| शोरे का अम्ल (Spirit of Nitre) | नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) | HNO₃ |
| नमक का अम्ल (Spirit of Salt) / म्यूरिएटिक एसिड | हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric Acid) | HCl |
| सिरका (Vinegar) | एसिटिक एसिड (Acetic Acid) | CH₃COOH |
| चींटी/बिच्छू का डंक, बिछुआ का पौधा | फॉर्मिक एसिड (Formic Acid) / मेथेनोइक एसिड | HCOOH |
| नींबू, संतरा, आंवला (खट्टे फल) | साइट्रिक एसिड (Citric Acid) | C₆H₈O₇ |
| सोडा वॉटर, कोल्ड ड्रिंक | कार्बोनिक एसिड (Carbonic Acid) | H₂CO₃ |
| दही (Curd) | लैक्टिक एसिड (Lactic Acid) | C₃H₆O₃ |
| इमली, अंगूर, कच्चा आम | टार्टरिक एसिड (Tartaric Acid) | C₄H₆O₆ |
| टमाटर, पालक | ऑक्जेलिक एसिड (Oxalic Acid) | C₂H₂O₄ |
| सेब (Apple) | मैलिक एसिड (Malic Acid) | C₄H₆O₅ |
सारणी 2: प्रमुख क्षार/क्षारक (Important Bases)
| सामान्य नाम | रासायनिक नाम (Chemical Name) | रासायनिक सूत्र (Formula) |
| कास्टिक सोडा (Caustic Soda) | सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Sodium Hydroxide) | NaOH |
| कास्टिक पोटाश (Caustic Potash) | पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (Potassium Hydroxide) | KOH |
| बुझा हुआ चूना / चूने का पानी (Slaked Lime) | कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide) | Ca(OH)₂ |
| मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (Milk of Magnesia) | मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Magnesium Hydroxide) | Mg(OH)₂ |
| अमोनिया जल (Ammonia Water) | अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (Ammonium Hydroxide) | NH₄OH |
| बिना बुझा चूना (Quicklime) – (क्षारीय ऑक्साइड) | कैल्शियम ऑक्साइड (Calcium Oxide) | CaO |
सारणी 3: प्रमुख लवण (Important Salts)
यह सारणी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| सामान्य नाम (Common Name) | रासायनिक नाम (Chemical Name) | रासायनिक सूत्र (Formula) |
| साधारण नमक (Table Salt) | सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride) | NaCl |
| धावन सोडा / धोने का सोडा (Washing Soda) | सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Sodium Carbonate Decahydrate) | Na₂CO₃·10H₂O |
| खाने का सोडा / बेकिंग सोडा (Baking Soda) | सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium Bicarbonate) / सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट | NaHCO₃ |
| ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder) | कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (Calcium Oxychloride) | CaOCl₂ |
| प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – POP) | कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium Sulphate Hemihydrate) | CaSO₄·½H₂O |
| जिप्सम (Gypsum) | कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट (Calcium Sulphate Dihydrate) | CaSO₄·2H₂O |
| नौसादर (Sal Ammoniac) | अमोनियम क्लोराइड (Ammonium Chloride) | NH₄Cl |
| नीला थोथा (Blue Vitriol) | कॉपर सल्फेट पेंटाहाइड्रेट (Copper Sulphate Pentahydrate) | CuSO₄·5H₂O |
| हरा थोथा (Green Vitriol) | फेरस सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट (Ferrous Sulphate Heptahydrate) | FeSO₄·7H₂O |
| सफ़ेद थोथा (White Vitriol) | जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट (Zinc Sulphate Heptahydrate) | ZnSO₄·7H₂O |
| चिली साल्टपीटर (Chile Saltpetre) | सोडियम नाइट्रेट (Sodium Nitrate) | NaNO₃ |
| इंडियन साल्टपीटर (शोरा) | पोटेशियम नाइट्रेट (Potassium Nitrate) | KNO₃ |
| सुहागा (Borax) | सोडियम टेट्राबोरेट डेकाहाइड्रेट | Na₂B₄O₇·10H₂O |
| ग्लोबर का लवण (Glauber’s Salt) | सोडियम सल्फेट डेकाहाइड्रेट | Na₂SO₄·10H₂O |
| फिटकरी (Alum) | पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट | K₂SO₄·Al₂(SO₄)₃·24H₂O |
| लाफिंग गैस (Laughing Gas) – (यह एक ऑक्साइड है) | नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous Oxide) | N₂O |
इन सारणियों को अच्छी तरह से याद करने से आप रसायन विज्ञान के एक बड़े हिस्से के प्रश्नों को आसानी से हल कर सकते हैं।