पदार्थ एवं उसकी अवस्थाएं
पदार्थ और उसका वर्गीकरण (Matter and its Classification)
पदार्थ (Matter) की परिभाषा
पदार्थ वह कोई भी वस्तु है जो स्थान घेरती है (Occupies Space) और जिसमें द्रव्यमान (Mass) होता है, तथा जिसे हमारी ज्ञानेन्द्रियों (Sense Organs) द्वारा महसूस किया जा सकता है।
- उदाहरण: किताब, पानी, हवा, मेज, तारे, रेत का कण – ये सभी पदार्थ हैं।
- अपवाद: प्रकाश, ध्वनि, गर्मी, विचार, भावनाएं – ये पदार्थ नहीं हैं क्योंकि इनमें द्रव्यमान नहीं होता और ये स्थान नहीं घेरते।
पदार्थ का वर्गीकरण (Classification of Matter)
पदार्थ को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
- भौतिक वर्गीकरण (Physical Classification): पदार्थ के बाहरी स्वरूप के आधार पर।
- रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification): पदार्थ की आंतरिक संरचना और संघटन के आधार पर।
(यह एक काल्पनिक चित्रण है, वर्गीकरण नीचे पाठ में दिया गया है)
1. भौतिक वर्गीकरण (Physical Classification)
भौतिक गुणों के आधार पर, पदार्थ मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में पाया जाता है:
- (a) ठोस (Solid): वे पदार्थ जिनका आकार (Shape) और आयतन (Volume) दोनों निश्चित होता है। इनके कण बहुत पास-पास और मजबूती से बंधे होते हैं।
- उदाहरण: पत्थर, लकड़ी, बर्फ, लोहा।
- (b) द्रव (Liquid): वे पदार्थ जिनका आयतन तो निश्चित होता है, लेकिन आकार अनिश्चित होता है। वे जिस बर्तन में रखे जाते हैं, उसी का आकार ले लेते हैं। इनके कणों के बीच की दूरी ठोस से अधिक होती है।
- उदाहरण: पानी, दूध, तेल, पारा।
- (c) गैस (Gas): वे पदार्थ जिनका आकार और आयतन दोनों अनिश्चित होता है। वे उपलब्ध पूरे स्थान में फैल जाते हैं। इनके कण बहुत दूर-दूर होते हैं और अनियमित रूप से गति करते हैं।
- उदाहरण: हवा, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, vapeur d’eau (vapeur)।
पदार्थ की अन्य दो अवस्थाएं: प्लाज्मा (Plasma) (अत्यधिक गर्म और आयनित गैस) और बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (Bose-Einstein Condensate – BEC) (अत्यधिक ठंडा पदार्थ)।
2. रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification)
रासायनिक संघटन के आधार पर, पदार्थ को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
- शुद्ध पदार्थ (Pure Substances)
- मिश्रण (Mixtures) / अशुद्ध पदार्थ
(A) शुद्ध पदार्थ (Pure Substances):
वे पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के कणों (परमाणुओं या अणुओं) से मिलकर बने होते हैं और जिनका रासायनिक संघटन निश्चित होता है। इन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।
शुद्ध पदार्थों को आगे दो भागों में बांटा गया है:
1. तत्व (Element):
- परिभाषा: तत्व वह मूलभूत शुद्ध पदार्थ है जिसे किसी भी भौतिक या रासायनिक विधि द्वारा दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।
- यह केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं (Atoms) से मिलकर बना होता है।
- उदाहरण: लोहा (Fe), सोना (Au), ऑक्सीजन (O₂), हाइड्रोजन (H₂)। अभी तक 118 से अधिक तत्वों की खोज हो चुकी है।
- तत्वों के प्रकार:
- धातु (Metals): जैसे – लोहा, सोना, तांबा।
- अधातु (Non-metals): जैसे – ऑक्सीजन, कार्बन, सल्फर।
- उपधातु (Metalloids): जो धातु और अधातु दोनों के गुण दर्शाते हैं। जैसे – सिलिकॉन, जर्मेनियम।
2. यौगिक (Compound):
- परिभाषा: यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों के परमाणुओं के एक निश्चित भार अनुपात (Fixed Ratio by Mass) में रासायनिक संयोजन (Chemical Combination) से बनता है।
- विशेषताएं:
- यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। (यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है)
- यौगिक के घटकों को केवल रासायनिक विधियों द्वारा ही अलग किया जा सकता है, भौतिक विधियों से नहीं।
- उदाहरण:
- जल (H₂O): यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बनता है, जिनका भार अनुपात हमेशा 1:8 रहता है। जल (द्रव, आग बुझाने वाला) के गुण हाइड्रोजन (गैस, ज्वलनशील) और ऑक्सीजन (गैस, जलने में सहायक) से बिल्कुल अलग होते हैं।
- नमक (NaCl), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁)।
(B) मिश्रण (Mixture):
- परिभाषा: मिश्रण वह अशुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों या यौगिकों को किसी भी अनुपात (Any Ratio) में भौतिक रूप से मिलाने (Physical Mixing) से बनता है, जिसमें वे रासायनिक रूप से अभिक्रिया नहीं करते हैं।
- विशेषताएं:
- मिश्रण में उसके अवयवी पदार्थों के गुण मौजूद रहते हैं।
- मिश्रण के घटकों को सरल भौतिक विधियों (जैसे छानना, वाष्पीकरण, चुंबक द्वारा) से अलग किया जा सकता है।
- इसके बनने में कोई ऊर्जा परिवर्तन (जैसे ऊष्मा का निकलना) नहीं होता है।
- उदाहरण: हवा, समुद्री जल, चीनी और पानी का घोल, मिट्टी, पीतल (मिश्र धातुएं मिश्रण होती हैं)।
मिश्रण के प्रकार:
1. समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture):
- परिभाषा: वह मिश्रण जिसके प्रत्येक भाग का संघटन और गुण समान होते हैं। इसके घटकों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
- उदाहरण: पानी में चीनी का घोल, हवा (विभिन्न गैसों का मिश्रण), मिश्र धातु (Alloys)।
- सभी विलयन (Solutions) समांगी मिश्रण होते हैं।
2. विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture):
- परिभाषा: वह मिश्रण जिसके विभिन्न भागों का संघटन और गुण भिन्न-भिन्न होते हैं। इसके घटकों को नग्न आंखों से या सूक्ष्मदर्शी से अलग-अलग देखा जा सकता है।
- उदाहरण: रेत और पानी का मिश्रण, तेल और पानी का मिश्रण, मिट्टी।
- निलंबन (Suspension) और कोलाइड (Colloids) विषमांगी मिश्रण के उदाहरण हैं।
पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter)
पदार्थ की कोई भी अवस्था मुख्य रूप से दो विपरीत बलों के बीच संतुलन का परिणाम होती है:
- अंतराण्विक आकर्षण बल (Intermolecular Force): जो कणों को एक-दूसरे के पास खींचता है।
- ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy): जो कणों को गति देती है और उन्हें एक-दूसरे से दूर करती है।
इन बलों के संतुलन के आधार पर, पदार्थ की निम्नलिखित अवस्थाएँ होती हैं:
A. पारंपरिक या सामान्य अवस्थाएँ (Classical States)
ये वे अवस्थाएँ हैं जो हमारे दैनिक जीवन में आसानी से देखी जा सकती हैं।
1. ठोस (Solid)
- परिभाषा: पदार्थ की वह अवस्था जिसमें कण (परमाणु, अणु) एक-दूसरे के बहुत पास और एक निश्चित क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) में मजबूती से बंधे होते हैं। इनमें अंतराण्विक बल बहुत प्रबल और ऊष्मीय ऊर्जा बहुत कम होती है।
- गुण:
- आकार (Shape): निश्चित
- आयतन (Volume): निश्चित
- घनत्व (Density): उच्च
- संपीड्यता (Compressibility): लगभग नगण्य
- कणों की गति: केवल अपनी जगह पर कंपन (Vibration) कर सकते हैं।
- उदाहरण: लोहा, पत्थर, बर्फ, लकड़ी, नमक।
2. द्रव (Liquid)
- परिभाषा: वह अवस्था जिसमें अंतराण्विक बल कणों को एक साथ रखने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन इतना मजबूत नहीं होता कि उन्हें एक निश्चित स्थान पर रोक सके। कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं।
- गुण:
- आकार (Shape): अनिश्चित (बर्तन का आकार ले लेता है)।
- आयतन (Volume): निश्चित
- घनत्व (Density): ठोस से कम (आमतौर पर)।
- संपीड्यता (Compressibility): बहुत कम।
- कणों की गति: पात्र के भीतर अनियमित रूप से घूम सकते हैं (बहाव का गुण)।
- उदाहरण: पानी, दूध, तेल, पारा, शराब।
3. गैस (Gas)
- परिभाषा: वह अवस्था जिसमें अंतराण्विक बल लगभग नगण्य और ऊष्मीय ऊर्जा बहुत अधिक होती है। कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं और तेजी से सभी दिशाओं में अनियमित रूप से गति करते हैं।
- गुण:
- आकार (Shape): अनिश्चित
- आयतन (Volume): अनिश्चित (उपलब्ध पूरे स्थान में फैल जाती है)।
- घनत्व (Density): बहुत कम।
- संपीड्यता (Compressibility): बहुत अधिक (High)।
- कणों की गति: बहुत तेज और अनियमित।
- उदाहरण: हवा, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, vapeur d’eau (vapeur)।
B. आधुनिक या अपारंपरिक अवस्थाएँ (Modern or Non-classical States)
ये अवस्थाएँ अत्यधिक ऊर्जावान या अत्यधिक ठंडी स्थितियों में पाई जाती हैं।
4. प्लाज्मा (Plasma) – पदार्थ की चौथी अवस्था
- परिभाषा: प्लाज्मा एक आयनित (Ionized) गैस होती है। जब किसी गैस को अत्यधिक उच्च तापमान (Thousands of degrees Celsius) पर गर्म किया जाता है, तो उसके परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को खो देते हैं। यह मुक्त इलेक्ट्रॉनों और धनावेशित आयनों का एक मिश्रण होता है।
- गुण:
- यह विद्युत का सुचालक (Electrically Conductive) होता है।
- यह चुंबकीय क्षेत्रों से प्रभावित होता है।
- इसकी कोई निश्चित आकृति या आयतन नहीं होता है।
- यह ब्रह्मांड में पदार्थ की सबसे आम अवस्था है।
- उदाहरण:
- सूर्य और अन्य तारे: ये मुख्य रूप से प्लाज्मा से बने हैं।
- बिजली की चमक (Lightning)
- फ्लोरोसेंट ट्यूब और नियॉन साइन के अंदर की गैस।
5. बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (Bose-Einstein Condensate – BEC) – पदार्थ की पाँचवी अवस्था
- परिभाषा: यह अवस्था तब बनती है जब किसी गैस (जिसका घनत्व हवा से लाखों गुना कम हो) के बोसॉन कणों को परम शून्य तापमान (-273.15°C) के बहुत करीब तक ठंडा किया जाता है।
- सिद्धांत: इसकी भविष्यवाणी सत्येंद्र नाथ बोस (Satyendra Nath Bose) ने 1924 में की थी और बाद में अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे विकसित किया।
- गुण:
- इतने कम तापमान पर, सभी परमाणु अपनी व्यक्तिगत पहचान खोकर एक साथ मिलकर एक एकल क्वांटम इकाई या “सुपर एटम” की तरह व्यवहार करने लगते हैं।
- इसमें पदार्थ की न्यूनतम ऊर्जा अवस्था होती है।
- उदाहरण: यह अवस्था प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जाती है; इसे केवल प्रयोगशालाओं में ही बनाया जा सकता है।
तुलनात्मक सारणी: पदार्थ की पांच अवस्थाएं
| गुण | ठोस (Solid) | द्रव (Liquid) | गैस (Gas) | प्लाज्मा (Plasma) | बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट |
| कणों की व्यवस्था | पास-पास, व्यवस्थित | पास-पास, अव्यवस्थित | दूर-दूर, अव्यवस्थित | आयन और इलेक्ट्रॉन | सभी कण एक ही अवस्था में |
| ऊर्जा स्तर | न्यूनतम | कम | उच्च | अत्यधिक उच्च | लगभग शून्य |
| आकार (Shape) | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| आयतन (Volume) | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| घनत्व (Density) | उच्च | मध्यम | कम | बहुत कम | अत्यंत कम |
| उदाहरण | लोहा, बर्फ | पानी, तेल | हवा, ऑक्सीजन | तारे, बिजली | प्रयोगशाला में निर्मित |
अन्य दुर्लभ अवस्थाएँ (Other Rare States)
वैज्ञानिक अनुसंधान में कुछ और अवस्थाओं का भी अध्ययन किया जाता है, जो सामान्यतः प्रतियोगी परीक्षाओं के सिलेबस में नहीं होतीं, लेकिन जानकारी के लिए महत्वपूर्ण हैं:
- फर्मिओनिक कंडेनसेट (Fermionic Condensate)
- क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा (Quark-Gluon Plasma)
- सुपरफ्लूइड (Superfluid)
अवस्था परिवर्तन (Change of State of Matter)
पदार्थ का एक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) से दूसरी अवस्था में बदलना अवस्था परिवर्तन कहलाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से पदार्थ को ऊष्मा (Heat) देने या उसमें से ऊष्मा निकालने पर यानी तापमान (Temperature) और दाब (Pressure) में परिवर्तन करने पर होती है।
प्रमुख अवस्था परिवर्तन प्रक्रियाएं
(यह एक काल्पनिक चित्रण है, प्रक्रियाएं नीचे पाठ में दी गई हैं)
1. गलन (Melting) और गलनांक (Melting Point)
- परिभाषा: किसी ठोस (Solid) पदार्थ का ऊष्मा पाकर द्रव (Liquid) अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया गलन (Melting) कहलाती है।
- गलनांक (Melting Point): वह निश्चित तापमान जिस पर कोई ठोस पदार्थ द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उस पदार्थ का गलनांक कहलाता है।
- बर्फ का गलनांक: 0° सेल्सियस (0°C)
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- गलन की प्रक्रिया के दौरान, जब तक कि सारा ठोस द्रव में नहीं बदल जाता, पदार्थ का तापमान स्थिर (Constant) रहता है। इस दौरान दी गई ऊष्मा कणों के बीच के आकर्षण बल को तोड़ने में खर्च होती है।
- अशुद्धि मिलाने पर पदार्थ का गलनांक घट जाता है (जैसे- बर्फ में नमक मिलाने पर वह 0°C से भी कम तापमान पर पिघलने लगती है)।
2. क्वथन/उबलना (Boiling/Vaporization) और क्वथनांक (Boiling Point)
- परिभाषा: किसी द्रव (Liquid) पदार्थ का ऊष्मा पाकर तेजी से गैस (Gas) या वाष्प (Vapor) अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया क्वथन (Boiling) कहलाती है।
- क्वथनांक (Boiling Point): वह निश्चित तापमान जिस पर कोई द्रव उबलने लगता है और गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उस पदार्थ का क्वथनांक कहलाता है।
- पानी का क्वथनांक: 100° सेल्सियस (100°C) (मानक वायुमंडलीय दाब पर)।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- उबलने की प्रक्रिया के दौरान भी पदार्थ का तापमान स्थिर रहता है।
- दाब बढ़ाने पर द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है (इसी सिद्धांत पर प्रेशर कुकर काम करता है)।
- दाब घटाने पर क्वथनांक घट जाता है (पहाड़ों पर पानी जल्दी उबलने लगता है क्योंकि वहां वायुमंडलीय दाब कम होता है)।
3. ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
- परिभाषा: किसी ठोस (Solid) पदार्थ का बिना द्रव अवस्था में आए, सीधे गैस (Gas) अवस्था में परिवर्तित हो जाने की प्रक्रिया ऊर्ध्वपातन कहलाती है।
- निक्षेपण (Deposition): इसकी उलटी प्रक्रिया, जिसमें गैस सीधे ठोस में बदलती है, निक्षेपण कहलाती है।
- उदाहरण: (ये उदाहरण परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं)
- कपूर (Camphor)
- नैफ्थलीन (Naphthalene) (कपड़ों में रखने वाली गोलियां)
- अमोनियम क्लोराइड (Ammonium chloride – नौसादर)
- आयोडीन (Iodine)
- ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (Solid CO₂), जिसे सूखी बर्फ (Dry Ice) भी कहा जाता है।
4. संघनन (Condensation)
- परिभाषा: किसी पदार्थ का गैसीय (Gas) या वाष्प (Vapor) अवस्था से द्रव (Liquid) अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया संघनन कहलाती है। यह प्रक्रिया पदार्थ के ठंडा होने पर होती है।
- उदाहरण:
- ठंडे पानी की बोतल के बाहर पानी की बूंदों का जमा होना (हवा में मौजूद जलवाष्प के संघनन के कारण)।
- बादलों का बनना और वर्षा होना।
5. हिमन/जमना (Freezing/Solidification) और हिमांक (Freezing Point)
- परिभाषा: किसी द्रव (Liquid) पदार्थ का ठंडा होकर ठोस (Solid) अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया हिमन (Freezing) कहलाती है।
- हिमांक (Freezing Point): वह निश्चित तापमान जिस पर कोई द्रव ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उस पदार्थ का हिमांक कहलाता है।
- जल का हिमांक: 0° सेल्सियस (0°C)।
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- अधिकांश पदार्थों के लिए, गलनांक और हिमांक एक ही तापमान होता है।
6. वाष्पीकरण (Evaporation)
- परिभाषा: यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई द्रव अपने क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर धीरे-धीरे वाष्प (Vapor) में परिवर्तित हो जाता है। यह एक सतही प्रक्रिया (Surface Phenomenon) है।
- क्वथन (उबलना) और वाष्पीकरण में अंतर:
- उबलना एक निश्चित तापमान (क्वथनांक) पर होता है और पूरे द्रव में होता है।
- वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर हो सकता है और केवल द्रव की सतह पर होता है।
- प्रभावित करने वाले कारक:
- तापमान: तापमान बढ़ने पर वाष्पीकरण बढ़ता है।
- सतह का क्षेत्रफल: सतह का क्षेत्रफल बढ़ने पर वाष्पीकरण बढ़ता है (कपड़े फैलाकर सुखाने पर जल्दी सूखते हैं)।
- हवा की गति: हवा तेज होने पर वाष्पीकरण बढ़ता है।
- आर्द्रता (Humidity): हवा में नमी (आर्द्रता) अधिक होने पर वाष्पीकरण घटता है।
- उदाहरण:
- गीले कपड़ों का सूखना।
- पसीना आने पर ठंडक महसूस होना (क्योंकि वाष्पीकरण ठंडक (Cooling) पैदा करता है)।
सारांश सारणी
| प्रक्रिया | प्रारंभिक अवस्था | अंतिम अवस्था | आवश्यक स्थिति |
| गलन (Melting) | ठोस | द्रव | ऊष्मा देना |
| क्वथन (Boiling) | द्रव | गैस | ऊष्मा देना |
| संघनन (Condensation) | गैस | द्रव | ठंडा करना |
| हिमन (Freezing) | द्रव | ठोस | ठंडा करना |
| ऊर्ध्वपातन (Sublimation) | ठोस | गैस | ऊष्मा देना |
| निक्षेपण (Deposition) | गैस | ठोस | ठंडा करना |
परमाणु संरचना (Atomic Structure)
परमाणु संरचना (Atomic Structure)
परिभाषा: परमाणु (Atom)
परमाणु (Atom) किसी तत्व का वह सबसे छोटा कण (Smallest Particle) है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है, लेकिन स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता (अक्रिय गैसों को छोड़कर)। यह तत्व के सभी गुणों को प्रदर्शित करता है।
प्रारंभ में, जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्धांत (1808) में यह माना गया था कि परमाणु अविभाज्य (Indivisible) होता है, यानी उसे और छोटे कणों में तोड़ा नहीं जा सकता। लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत में हुए प्रयोगों ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु विभाज्य (Divisible) है और यह और भी छोटे अपरमाणविक कणों (Subatomic Particles) से मिलकर बना है।
परमाणु के मूल कण (Fundamental Particles of an Atom)
एक परमाणु मुख्य रूप से तीन प्रकार के मूल कणों से बना होता है:
- इलेक्ट्रॉन (Electron)
- प्रोटॉन (Proton)
- न्यूट्रॉन (Neutron)
प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के केंद्र में एक छोटे से हिस्से में स्थित होते हैं, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा स्तरों या कक्षाओं (Orbits/Shells) में चक्कर लगाते हैं।
(यह एक काल्पनिक चित्रण है, संरचना नीचे पाठ में दी गई है)
1. इलेक्ट्रॉन (Electron / e⁻)
(a) गुण (Properties):
- आवेश (Charge): यह एक ऋणावेशित (Negatively Charged) कण है।
- आवेश का मान: -1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम (इसे इकाई ऋणावेश -1 माना जाता है)।
- द्रव्यमान (Mass): 9.1 × 10⁻³¹ किलोग्राम (kg)।
- इसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग 1/1837वां हिस्सा होता है, इसलिए इसे लगभग द्रव्यमानहीन (Nearly Massless) माना जाता है।
- स्थिति (Location): इलेक्ट्रॉन परमाणु के नाभिक के चारों ओर की कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
- महत्व:
- यह किसी परमाणु के रासायनिक गुणों (Chemical Properties) को निर्धारित करता है।
- रासायनिक बंधों के निर्माण में इलेक्ट्रॉन ही भाग लेते हैं।
(b) खोज (Discovery):
- खोजकर्ता: जे.जे. थॉमसन (J. J. Thomson)
- वर्ष: 1897
- प्रयोग: थॉमसन ने कैथोड किरण ट्यूब (Cathode Ray Tube) प्रयोग के दौरान इलेक्ट्रॉन की खोज की। उन्होंने पाया कि कैथोड किरणें ऋणावेशित कणों से बनी होती हैं, जिन्हें बाद में ‘इलेक्ट्रॉन’ नाम दिया गया।
2. प्रोटॉन (Proton / p⁺)
(a) गुण (Properties):
- आवेश (Charge): यह एक धनावेशित (Positively Charged) कण है।
- आवेश का मान: +1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम (इसे इकाई धनावेश +1 माना जाता है)। इसका आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर लेकिन विपरीत प्रकृति का होता है।
- द्रव्यमान (Mass): 1.672 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg)।
- इसका द्रव्यमान लगभग न्यूट्रॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है।
- स्थिति (Location): प्रोटॉन परमाणु के नाभिक (Nucleus) में स्थित होता है।
- महत्व:
- किसी तत्व के परमाणुओं में प्रोटॉनों की संख्या उस तत्व की परमाणु संख्या (Atomic Number – Z) को निर्धारित करती है और तत्व की पहचान निश्चित करती है।
(b) खोज (Discovery):
- प्रारंभिक खोज: 1886 में गोल्डस्टीन (Goldstein) ने कैनाल किरणों (Canal Rays) या एनोड किरणों की खोज की जो धनावेशित थीं, लेकिन वे इनकी प्रकृति की सही व्याख्या नहीं कर सके।
- वास्तविक श्रेय: 1919 में, अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने अपने प्रसिद्ध अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग से सिद्ध किया कि परमाणु के नाभिक में धनावेशित कण होते हैं। उन्होंने ही इन्हें ‘प्रोटॉन’ नाम दिया। इसलिए, प्रोटॉन का खोजकर्ता रदरफोर्ड को माना जाता है।
3. न्यूट्रॉन (Neutron / n⁰)
(a) गुण (Properties):
- आवेश (Charge): यह एक आवेशहीन या उदासीन (Neutral) कण है। इस पर कोई आवेश नहीं होता है।
- द्रव्यमान (Mass): 1.674 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg)।
- यह तीनों मूल कणों में सबसे भारी है (हालांकि प्रोटॉन के लगभग बराबर)।
- स्थिति (Location): न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक (Nucleus) में प्रोटॉन के साथ स्थित होता है।
- महत्व:
- यह परमाणु के द्रव्यमान (Mass) में योगदान देता है।
- नाभिक में प्रोटॉनों के बीच प्रतिकर्षण बल को संतुलित करके नाभिक को स्थायित्व (Stability) प्रदान करता है।
(b) खोज (Discovery):
- खोजकर्ता: जेम्स चैडविक (James Chadwick)
- वर्ष: 1932
- प्रयोग: चैडविक ने जब बेरिलियम (Beryllium) पर अल्फा-कणों की बमबारी की, तो उन्होंने देखा कि एक उदासीन कण निकल रहा है जिसका द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर है। उन्होंने इस कण को ‘न्यूट्रॉन’ नाम दिया।
सारांश सारणी: मूल कणों की तुलना
| गुण | इलेक्ट्रॉन (e⁻) | प्रोटॉन (p⁺) | न्यूट्रॉन (n⁰) |
| आवेश (Charge) | -1 (ऋणात्मक) | +1 (धनात्मक) | 0 (उदासीन) |
| सापेक्ष द्रव्यमान | ~1/1837 (नगण्य) | ~1 amu | ~1 amu (सबसे भारी) |
| स्थिति | नाभिक के बाहर | नाभिक के अंदर | नाभिक के अंदर |
| खोजकर्ता | जे.जे. थॉमसन (1897) | रदरफोर्ड (1919) | जेम्स चैडविक (1932) |
1. परमाणु संख्या (Atomic Number – Z)
- परिभाषा: किसी तत्व के परमाणु के नाभिक (Nucleus) में उपस्थित प्रोटॉनों (Protons) की कुल संख्या को उस तत्व की परमाणु संख्या कहते हैं। इसे ‘Z’ प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है।
- सूत्र: Z = प्रोटॉनों की संख्या (p)
- महत्व:
- परमाणु संख्या ही किसी तत्व की पहचान (Identity) है। यह तत्व का मौलिक गुण है और एक तत्व के सभी परमाणुओं के लिए हमेशा समान रहता है। (जैसे- कार्बन के लिए Z हमेशा 6 होगा)।
- एक उदासीन परमाणु (Neutral Atom) में, प्रोटॉनों की संख्या हमेशा इलेक्ट्रॉनों (Electrons) की संख्या के बराबर होती है।
- Z = प्रोटॉनों की संख्या (p) = इलेक्ट्रॉनों की संख्या (e) (केवल उदासीन परमाणु के लिए)
- उदाहरण: ऑक्सीजन की परमाणु संख्या 8 है, इसका मतलब है कि ऑक्सीजन के प्रत्येक परमाणु के नाभिक में 8 प्रोटॉन होते हैं। (SSC CGL, 2017)
2. द्रव्यमान संख्या (Mass Number – A)
- परिभाषा: किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों (Protons) और न्यूट्रॉनों (Neutrons) की संख्या के कुल योग को उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहते हैं। इसे ‘A’ प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है।
- सूत्र: A = प्रोटॉनों की संख्या (p) + न्यूट्रॉनों की संख्या (n)
- चूंकि p = Z, इसलिए A = Z + n
- न्यूट्रॉनों की संख्या की गणना: उपरोक्त सूत्र से, न्यूट्रॉनों की संख्या की गणना की जा सकती है:
- न्यूट्रॉनों की संख्या (n) = द्रव्यमान संख्या (A) – परमाणु संख्या (Z)
- प्रतीकात्मक प्रदर्शन: किसी तत्व ‘X’ को इस प्रकार दर्शाया जाता है:
- ᴬZX (जैसे – ¹²₆C, ²³₁₁Na)
- उदाहरण: सोडियम (²³₁₁Na) की द्रव्यमान संख्या 23 है। इसका अर्थ है कि इसके नाभिक में 11 प्रोटॉन और (23-11) = 12 न्यूट्रॉन हैं। (RRB JE, 2019)
3. समस्थानिक (Isotopes)
- परिभाषा: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या (Atomic Number) समान होती है, लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहते हैं। (यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है)।
- मूल कारण: समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।
- गुण:
- चूंकि प्रोटॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए समस्थानिकों के रासायनिक गुण (Chemical Properties) समान होते हैं।
- न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण इनके भौतिक गुण (Physical Properties) जैसे द्रव्यमान, घनत्व आदि भिन्न होते हैं।
- उदाहरण:
- हाइड्रोजन के समस्थानिक:
- प्रोटियम (¹₁H): (1 प्रोटॉन, 0 न्यूट्रॉन)
- ड्यूटीरियम (²₁H or D): (1 प्रोटॉन, 1 न्यूट्रॉन) – इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं, जिससे भारी जल (D₂O) बनता है। (SSC CHSL, 2018)
- ट्राइटियम (³₁H or T): (1 प्रोटॉन, 2 न्यूट्रॉन) – यह एक रेडियोधर्मी (Radioactive) समस्थानिक है। (UPPSC, 2017)
- कार्बन के समस्थानिक:
- कार्बन-12 (¹²₆C): सामान्य कार्बन।
- कार्बन-14 (¹⁴₆C): एक रेडियोधर्मी समस्थानिक जिसका उपयोग कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) में जीवाश्मों की आयु का पता लगाने के लिए किया जाता है। (NDA, 2019)
- यूरेनियम-235 (²³⁵₉₂U): इसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में होता है।
- आयोडीन-131: घेंघा (Goitre) रोग के इलाज में।
- हाइड्रोजन के समस्थानिक:
4. समभारिक (Isobars)
- परिभाषा: विभिन्न तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है, लेकिन परमाणु संख्या (Atomic Number) भिन्न होती है, उन्हें समभारिक कहते हैं।
- मूल कारण: इनमें प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों दोनों की संख्या भिन्न होती है, लेकिन उनका योग (A = p+n) समान होता है।
- गुण:
- चूंकि परमाणु संख्या भिन्न होती है, इसलिए इनके रासायनिक और भौतिक गुण दोनों भिन्न होते हैं। ये अलग-अलग तत्व होते हैं।
- उदाहरण:
- ¹⁸₄₀Ar (आर्गन), ¹⁹₄₀K (पोटेशियम), ²⁰₄₀Ca (कैल्शियम) – इन तीनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, लेकिन परमाणु संख्या क्रमशः 18, 19 और 20 है।
- ¹⁴₆C (कार्बन) और ¹⁴₇N (नाइट्रोजन)। (Delhi Police Constable, 2020)
5. समन्यूट्रॉनिक (Isotones)
- परिभाषा: विभिन्न तत्वों के वे परमाणु जिनके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समन्यूट्रॉनिक कहते हैं।
- मूल कारण: इनमें प्रोटॉनों की संख्या और द्रव्यमान संख्या दोनों भिन्न होती हैं, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या (n = A – Z) समान होती है।
- गुण: ये पूरी तरह से अलग-अलग तत्व होते हैं, इसलिए इनके सभी गुण भिन्न होते हैं।
- उदाहरण:
- ¹⁴₆C (कार्बन): न्यूट्रॉन = 14-6 = 8
- ¹⁵₇N (नाइट्रोजन): न्यूट्रॉन = 15-7 = 8
- ¹⁶₈O (ऑक्सीजन): न्यूट्रॉन = 16-8 = 8
- ये तीनों (कार्बन-14, नाइट्रोजन-15, और ऑक्सीजन-16) एक-दूसरे के समन्यूट्रॉनिक हैं। (CDS, 2016)
सारांश सारणी: एक नज़र में
| प्रकार | क्या समान होता है? | क्या भिन्न होता है? | उदाहरण |
| समस्थानिक (Isotopes) | परमाणु संख्या (Z) और प्रोटॉन (p) | द्रव्यमान संख्या (A) और न्यूट्रॉन (n) | ¹²C, ¹⁴C |
| समभारिक (Isobars) | द्रव्यमान संख्या (A) | परमाणु संख्या (Z), प्रोटॉन (p), न्यूट्रॉन (n) | ¹⁸Ar, ⁴⁰K, ⁴⁰Ca |
| समन्यूट्रॉनिक (Isotones) | न्यूट्रॉन (n) | परमाणु संख्या (Z), द्रव्यमान संख्या (A) | ¹⁴C, ¹⁵N, ¹⁶O |
परमाणु मॉडल का विकास (Development of Atomic Models)
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के बाद, जब इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन जैसे अपरमाणविक कणों की खोज हुई, तो वैज्ञानिकों के सामने यह चुनौती थी कि ये कण एक परमाणु के भीतर कैसे व्यवस्थित होते हैं। इसी व्यवस्था को समझाने के लिए समय-समय पर विभिन्न मॉडल प्रस्तावित किए गए।
1. थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model – 1904)
- प्रस्तावक: जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson)
- अन्य नाम: प्लम पुडिंग मॉडल (Plum Pudding Model), तरबूज मॉडल (Watermelon Model), रेजिन पुडिंग मॉडल।
- अवधारणा (Postulates):
- थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु एक धनावेशित गोला (Positively Charged Sphere) है।
- ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन (Negatively Charged Electrons) इस धनावेशित गोले में उसी तरह धँसे रहते हैं, जैसे तरबूज में बीज या पुडिंग में प्लम।
- परमाणु में ऋणात्मक और धनात्मक आवेश का मान बराबर होता है, इसलिए परमाणु समग्र रूप से विद्युत उदासीन (Electrically Neutral) होता है।
(चित्र: एक धनात्मक गोले में ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन बिखरे हुए)
- सफलता: इस मॉडल ने परमाणु की उदासीनता की सफलतापूर्वक व्याख्या की।
- सीमाएं/विफलता (Limitations):
- यह मॉडल रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका।
- यह परमाणु के स्थायित्व को समझाने में विफल रहा।
(PYQ Reference: SSC CGL, 2017)
2. रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल (Rutherford’s Nuclear Model – 1911)
- प्रस्तावक: अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford)
- अन्य नाम: सौरमंडलीय मॉडल (Planetary Model)
- प्रयोग: यह मॉडल अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Alpha-particle Scattering Experiment) पर आधारित था, जिसमें सोने की एक बहुत पतली पन्नी पर अल्फा-कणों की बमबारी की गई थी।
- प्रयोग के परिणाम (Observations):
- अधिकांश अल्फा-कण सोने की पन्नी से बिना विचलित हुए सीधे निकल गए।
- कुछ कण छोटे कोणों से विचलित हुए।
- बहुत ही कम कण (लगभग 20,000 में से 1) 180° के कोण पर वापस लौट आए।
- निष्कर्ष और अवधारणा (Conclusions and Postulates):
- परमाणु का अधिकांश भाग खोखला (Empty) होता है।
- परमाणु के केंद्र में एक बहुत छोटा, सघन और धनावेशित भाग होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है। परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान इसी नाभिक में केंद्रित होता है। (नाभिक की खोज का श्रेय रदरफोर्ड को जाता है)।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों (Circular Paths) में ठीक उसी तरह चक्कर लगाते हैं जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।
(चित्र: केंद्र में नाभिक और चारों ओर चक्कर लगाते इलेक्ट्रॉन)
- सीमाएं/विफलता (Limitations):
- यह मॉडल परमाणु के स्थायित्व (Stability) की व्याख्या नहीं कर सका। मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, कोई भी आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) जब त्वरित होता है (वृत्ताकार गति में), तो वह ऊर्जा का विकिरण करेगा। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कम होती जाएगी और वह अंततः नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु नष्ट हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता।
(PYQ Reference: RRB NTPC, 2021)
- यह मॉडल परमाणु के स्थायित्व (Stability) की व्याख्या नहीं कर सका। मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, कोई भी आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) जब त्वरित होता है (वृत्ताकार गति में), तो वह ऊर्जा का विकिरण करेगा। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कम होती जाएगी और वह अंततः नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु नष्ट हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता।
3. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr’s Atomic Model – 1913)
- प्रस्तावक: नील बोर (Niels Bohr)
- अवधारणा (Postulates): इन्होंने रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए क्वांटम सिद्धांत का उपयोग किया।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित या विशेष कक्षाओं (Fixed or Special Orbits) में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें ऊर्जा स्तर (Energy Levels) या स्थिर कक्षा (Stationary Orbit) कहा जाता है। इन कक्षाओं को K, L, M, N… या n=1, 2, 3… द्वारा दर्शाया जाता है।
- जब तक इलेक्ट्रॉन इन निश्चित कक्षाओं में घूमता है, तब तक वह ऊर्जा का विकिरण नहीं करता है। इससे परमाणु के स्थायित्व की समस्या हल हो गई।
- एक इलेक्ट्रॉन ऊर्जा को अवशोषित (Absorb) करके निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जा सकता है, और ऊर्जा को उत्सर्जित (Emit) करके उच्च स्तर से निम्न स्तर पर वापस आ सकता है। उत्सर्जित ऊर्जा प्रकाश (फोटॉन) के रूप में होती है, जो परमाणुओं के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करती है।
(चित्र: नाभिक के चारों ओर निश्चित K, L, M कक्षाएं)
- सफलता: इसने परमाणु के स्थायित्व और हाइड्रोजन जैसे एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की सफलतापूर्वक व्याख्या की।
- सीमाएं/विफलता (Limitations):
- यह मॉडल बहु-इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
- यह जीमान प्रभाव (Zeeman Effect) और स्टार्क प्रभाव (Stark Effect) की व्याख्या करने में विफल रहा।
(PYQ Reference: NDA, 2018)
4. क्वांटम यांत्रिक मॉडल (Quantum Mechanical Model – 1926 onwards)
- मुख्य योगदानकर्ता: इरविन श्रोडिंगर (Erwin Schrödinger), वर्नर हाइजेनबर्ग (Werner Heisenberg)
- अवधारणा (Concept): यह वर्तमान में सबसे स्वीकृत और उन्नत मॉडल है।
- यह इलेक्ट्रॉन की द्वैत प्रकृति (Dual Nature) (कण और तरंग दोनों) पर आधारित है।
- इस मॉडल ने ‘कक्षा’ (Orbit – एक निश्चित पथ) की अवधारणा को ‘कक्षक’ (Orbital) से प्रतिस्थापित कर दिया। कक्षक (Orbital) नाभिक के चारों ओर का वह त्रि-आयामी (3D) क्षेत्र है जहाँ एक इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना (Probability) सबसे अधिक होती है।
- यह हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत पर आधारित है।
- सफलता: यह मॉडल परमाणुओं के व्यवहार और गुणों की सबसे सटीक व्याख्या करता है।
(PYQ Reference: CDS, 2019)
सारांश सारणी: परमाणु मॉडलों की यात्रा
| मॉडल का नाम | प्रस्तावक | मुख्य विचार | मुख्य विफलता/सीमा |
| प्लम पुडिंग मॉडल | जे.जे. थॉमसन | धनावेशित गोले में धँसे इलेक्ट्रॉन | रदरफोर्ड के प्रयोग की व्याख्या नहीं कर सका। |
| नाभिकीय मॉडल | अर्नेस्ट रदरफोर्ड | छोटा, धनावेशित नाभिक और परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन। | परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका। |
| बोर का मॉडल | नील बोर | निश्चित ऊर्जा स्तर या कक्षाएँ। | बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका। |
| क्वांटम यांत्रिक मॉडल | श्रोडिंगर, हाइजेनबर्ग | इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना वाला क्षेत्र (कक्षक)। | अत्यधिक जटिल, लेकिन वर्तमान में स्वीकृत। |
: परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या की मूल अवधारणा
यह सारणी इन दोनों मूलभूत संख्याओं के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट करती है।
| गुण (Property) | परमाणु संख्या (Atomic Number) | द्रव्यमान संख्या (Mass Number) |
| प्रतीक (Symbol) | Z | A |
| परिभाषा | नाभिक में प्रोटॉनों (Protons) की कुल संख्या। | नाभिक में प्रोटॉनों (p) और न्यूट्रॉनों (n) का कुल योग। |
| गणितीय सूत्र | Z = p | A = p + n या A = Z + n |
| महत्व (Significance) | यह तत्व की पहचान (Identity) है। यह एक तत्व के लिए हमेशा निश्चित रहती है। | यह परमाणु के नाभिक के कुल द्रव्यमान का अनुमान देता है। यह एक ही तत्व के लिए भिन्न हो सकती है (समस्थानिकों में)। |
| उदासीन परमाणु में संबंध | प्रोटॉनों (p) की संख्या = इलेक्ट्रॉनों (e) की संख्या | – |
| उदाहरण: कार्बन-12 (¹²₆C) | Z = 6 (यानी 6 प्रोटॉन) | A = 12 (यानी 6 प्रोटॉन + 6 न्यूट्रॉन) |
सारणी 2: प्रकार-अनुसार तुलना (समस्थानिक, समभारिक, समन्यूट्रॉनिक)
यह सारणी इन तीनों महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बीच तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है, जो परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्नों का आधार है।
| आधार (Basis) | समस्थानिक (Isotopes) | समभारिक (Isobars) | समन्यूट्रॉनिक (Isotones) |
| समानता (What is Same?) | परमाणु संख्या (Z) और प्रोटॉनों (p) की संख्या। | द्रव्यमान संख्या (A) (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन का योग)। | न्यूट्रॉनों (n) की संख्या। |
| **भिन्नता (What is Different?) | ** द्रव्यमान संख्या (A) और न्यूट्रॉनों (n) की संख्या। | परमाणु संख्या (Z) और प्रोटॉनों (p) की संख्या। | परमाणु संख्या (Z) और द्रव्यमान संख्या (A)। |
| तत्व (Element) | ये एक ही तत्व (Same Element) के विभिन्न परमाणु होते हैं। | ये विभिन्न तत्वों (Different Elements) के परमाणु होते हैं। | ये विभिन्न तत्वों (Different Elements) के परमाणु होते हैं। |
| रासायनिक गुण (Chemical Properties) | समान होते हैं (क्योंकि प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन समान होते हैं)। | भिन्न होते हैं (क्योंकि तत्व अलग-अलग हैं)। | भिन्न होते हैं (क्योंकि तत्व अलग-अलग हैं)। |
| **भौतिक गुण (Physical Properties) | ** भिन्न होते हैं (क्योंकि द्रव्यमान भिन्न होता है)। | भिन्न होते हैं (यद्यपि द्रव्यमान संख्या समान है)। | भिन्न होते हैं। |
| **आवर्त सारणी में स्थान (Position in Periodic Table) | ** एक ही स्थान (Same Position)। | अलग-अलग स्थान (Different Positions)। | अलग-अलग स्थान (Different Positions)। |
| उदाहरण (Example) | हाइड्रोजन: ¹H, ²H, ³H<br>कार्बन: ¹²₆C, ¹⁴₆C | ¹⁴₆C, ¹⁴₇N<br>⁴⁰₁₈Ar, ⁴⁰₁₉K, ⁴⁰₂₀Ca | ³₁H, ⁴₂He<br>³⁹₁₉K, ⁴⁰₂₀Ca<br>¹⁴₆C, ¹⁵₇N, ¹⁶₈O |
| याद रखने की ट्रिक | सम-स्थानिक: “स्थान” समान (आवर्त सारणी में)। | सम-भारिक: “भार” (द्रव्यमान संख्या) समान। | सम-न्यूट्रॉनिक: “न्यूट्रॉन” समान। |
उदाहरणों की विस्तृत गणना के साथ सारणी
| परमाणु | परमाणु संख्या (Z=p) | द्रव्यमान संख्या (A) | प्रोटॉन (p) | न्यूट्रॉन (n = A-Z) | इलेक्ट्रॉन (e) (उदासीन) | समूह (Group) |
| ¹²₆C | 6 | 12 | 6 | 6 | 6 | समस्थानिक (¹⁴₆C के साथ) |
| ¹⁴₆C | 6 | 14 | 6 | 8 | 6 | |
| ¹⁴₆C | 6 | 14 | 6 | 8 | 6 | समभारिक (¹⁴₇N के साथ) |
| ¹⁴₇N | 7 | 14 | 7 | 7 | 7 | |
| ¹⁴₆C | 6 | 14 | 6 | 8 | 6 | समन्यूट्रॉनिक (¹⁶₈O के साथ) |
| ¹⁶₈O | 8 | 16 | 8 | 8 | 8 | |
| ³⁹₁₉K | 19 | 39 | 19 | 20 | 19 | समन्यूट्रॉनिक (⁴⁰₂₀Ca के साथ) |
| ⁴⁰₂₀Ca | 20 | 40 | 20 | 20 | 20 |
आवर्त सारणी (The Periodic Table)
(प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तत्वों के साथ)
परिचय
आवर्त सारणी रासायनिक तत्वों को उनकी बढ़ती हुई परमाणु संख्या (Increasing Atomic Number) के क्रम में एक सारणीबद्ध व्यवस्था है।
- ऊर्ध्वाधर स्तंभ (Vertical Columns) को समूह (Groups) कहा जाता है। कुल 18 समूह हैं। एक ही समूह के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं।
- क्षैतिज पंक्तियों (Horizontal Rows) को आवर्त (Periods) कहा जाता है। कुल 7 आवर्त हैं।
प्रमुख तत्वों की सूची (Important Elements List)
यहाँ परमाणु संख्या 1 से 30 तक के तत्व दिए गए हैं, जो सबसे अधिक पूछे जाते हैं, साथ ही कुछ अन्य महत्वपूर्ण तत्व भी शामिल हैं।
| परमाणु संख्या (Z) | प्रतीक (Symbol) | तत्व का नाम (Element Name) | समूह | आवर्त | प्रकार |
| 1 | H | हाइड्रोजन (Hydrogen) | 1 | 1 | अधातु |
| 2 | He | हीलियम (Helium) | 18 | 1 | अक्रिय गैस |
| 3 | Li | लिथियम (Lithium) | 1 | 2 | क्षार धातु |
| 4 | Be | बेरिलियम (Beryllium) | 2 | 2 | क्षारीय मृदा धातु |
| 5 | B | बोरॉन (Boron) | 13 | 2 | उपधातु |
| 6 | C | कार्बन (Carbon) | 14 | 2 | अधातु |
| 7 | N | नाइट्रोजन (Nitrogen) | 15 | 2 | अधातु |
| 8 | O | ऑक्सीजन (Oxygen) | 16 | 2 | अधातु |
| 9 | F | फ्लोरीन (Fluorine) | 17 | 2 | हैलोजन |
| 10 | Ne | नियॉन (Neon) | 18 | 2 | अक्रिय गैस |
| 11 | Na | सोडियम (Sodium) | 1 | 3 | क्षार धातु |
| 12 | Mg | मैग्नीशियम (Magnesium) | 2 | 3 | क्षारीय मृदा धातु |
| 13 | Al | एल्युमिनियम (Aluminium) | 13 | 3 | धातु |
| 14 | Si | सिलिकॉन (Silicon) | 14 | 3 | उपधातु |
| 15 | P | फास्फोरस (Phosphorus) | 15 | 3 | अधातु |
| 16 | S | सल्फर (Sulphur) | 16 | 3 | अधातु |
| 17 | Cl | क्लोरीन (Chlorine) | 17 | 3 | हैलोजन |
| 18 | Ar | आर्गन (Argon) | 18 | 3 | अक्रिय गैस |
| 19 | K | पोटैशियम (Potassium) | 1 | 4 | क्षार धातु |
| 20 | Ca | कैल्शियम (Calcium) | 2 | 4 | क्षारीय मृदा धातु |
| 21 | Sc | स्कैंडियम (Scandium) | 3 | 4 | संक्रमण धातु |
| 22 | Ti | टाइटेनियम (Titanium) | 4 | 4 | संक्रमण धातु |
| 23 | V | वैनेडियम (Vanadium) | 5 | 4 | संक्रमण धातु |
| 24 | Cr | क्रोमियम (Chromium) | 6 | 4 | संक्रमण धातु |
| 25 | Mn | मैंगनीज (Manganese) | 7 | 4 | संक्रमण धातु |
| 26 | Fe | लोहा (Iron) | 8 | 4 | संक्रमण धातु |
| 27 | Co | कोबाल्ट (Cobalt) | 9 | 4 | संक्रमण धातु |
| 28 | Ni | निकल (Nickel) | 10 | 4 | संक्रमण धातु |
| 29 | Cu | तांबा (Copper) | 11 | 4 | संक्रमण धातु |
| 30 | Zn | जस्ता (Zinc) | 12 | 4 | संक्रमण धातु |
कुछ अन्य महत्वपूर्ण तत्व (Other Important Elements)
| परमाणु संख्या (Z) | प्रतीक (Symbol) | तत्व का नाम (Element Name) | महत्व / उपयोग |
| 35 | Br | ब्रोमीन (Bromine) | एकमात्र अधातु जो कमरे के तापमान पर द्रव है। |
| 47 | Ag | चांदी (Silver) | सबसे अच्छा विद्युत सुचालक। |
| 50 | Sn | टिन (Tin) | मिश्र धातुओं (कांसा, सोल्डर) में उपयोग होता है। |
| 53 | I | आयोडीन (Iodine) | हैलोजन, घेंघा रोग के उपचार में महत्वपूर्ण। |
| 79 | Au | सोना (Gold) | बहुत अक्रियाशील धातु, आभूषणों में उपयोग। |
| 80 | Hg | पारा (Mercury) | एकमात्र धातु जो कमरे के तापमान पर द्रव है। |
| 82 | Pb | सीसा (Lead) | एक भारी और विषाक्त धातु। |
| 92 | U | यूरेनियम (Uranium) | रेडियोधर्मी तत्व, परमाणु ऊर्जा का मुख्य स्रोत। |
आवर्त सारणी के महत्वपूर्ण समूह और उनके नाम
| समूह संख्या | समूह का नाम | शामिल तत्व (उदाहरण) |
| समूह 1 | क्षार धातुएं (Alkali Metals) (H को छोड़कर) | लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K) |
| समूह 2 | क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals) | बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca) |
| समूह 17 | हैलोजन (Halogens) | फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I) |
| समूह 18 | अक्रिय या उत्कृष्ट गैसें (Inert or Noble Gases) | हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar) |
यह सारणी आपको प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक लगभग सभी महत्वपूर्ण तत्वों और उनकी स्थिति के बारे में एक ठोस आधार प्रदान करती है।