छत्तीसगढ़ एक नवगठित प्रदेश है, परन्तु इसका ऐतिहासिक परिवेश अत्यंत सम्पन्न और समृद्ध रहा है। यहाँ ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक नजरिए से कई बेजोड़ पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जो न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट पहचान बनाते हैं। इन पर्यटन स्थलों का विवरण इस प्रकार है:
📌 छ.ग. पर्यटन मंडल की स्थापना: 18 जनवरी 2002 [CG PSC(Lib&SO)2019][CG PSC(ACF)2016]
📌 मंडल द्वारा पहचाने गए पर्यटन स्थल: 139
📌 राज्य द्वारा संरक्षित पुरातात्विक स्मारक: 58
📜 नवीन पर्यटन नीति 2020
उद्देश्य 🎯
💡 प्रदेश में पर्यटन के लिए नई संभावनाओं को खोजना और उनका विकास सुनिश्चित करना।
💰 पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में बाहरी निवेशकों को निवेश के लिए अवसर प्रदान करना।
🤝 पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय निवेशकों के लिए निवेश के अवसर उपलब्ध कराना।
📈 राज्य में पर्यटन क्षेत्र को उद्योग के समान दर्जा देना।
🏠 प्रदेश के स्थानीय निवासियों के लिए आय के नए स्रोत और रोजगार के मौके बनाने के उद्देश्य से होम स्टे, बेड एंड ब्रेकफास्ट, वाटर टूरिज्म, और इको टूरिज्म के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं।
🗺️ स्वदेश दर्शन योजना
🔑 जारीकर्ता: पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार
🔑 शामिल परियोजना: “ट्राइबल टूरिज्म सर्किट”
🔑 सर्किट का प्रकार: यह देश का प्रथम “ट्राइबल टूरिज्म सर्किट” है।
🔑 लागत: इस सर्किट की अनुमानित लागत 94.23 करोड़ है।
🔑 विकास की थीम: इको पर्यटन एवं एथनिक पर्यटन।
🔑 मूल योजना: स्वदेश दर्शन योजना (भारत सरकार)
चयनित स्थल (छत्तीसगढ़ से 13 स्थल) 📍
क्रम
स्थल
क्रम
स्थल
क्रम
स्थल
1.
जशपुर
2.
कुनकुरी
3.
मैनपाट
4.
कमलेश्वरपुर
5.
महेशपुर
6.
कुरदर
7.
सरोधा-दादर
8.
गंगरेल
9.
कोण्डागांव
10.
नथिया-नवागांव
11.
जगदलपुर
12.
चित्रकोट
13.
तीरथगढ़
🙏 प्रसाद योजना
🗓️ शुरुआत: अक्टूबर 2017
📖 पूरा नाम: PRASAD (तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन ड्राइव) (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Heritage Augmentation Drive)
🏛️ जारीकर्ता: पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार
📍 शामिल स्थल: “डोंगरगढ़-मां बम्लेश्वरी मंदिर” की परियोजना। [CGPSC (Pre) 2021]
🛠️ विकास कार्य:
मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर की पहाड़ी
प्रज्ञागिरी पहाड़ी
पिल्ग्रिम फेसीलिटेशन सेंटर
📝 नोट: “डोंगरगढ़-मां बम्लेश्वरी मंदिर” परियोजना से जुड़े सभी तथ्य राजनांदगांव जिले के विवरण में विस्तार से दिए गए हैं।
🔍 प्रस्तावित स्थल: इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ से दो नए स्थल प्रस्तावित हैं:
कुदरगढ़ (सूरजपुर)
चंद्रपुर (सक्ती)
✨ शक्तिपीठ परियोजना
🌟 प्रावधान: चार धाम परियोजना की तरह ही छत्तीसगढ़ में शक्तिपीठ परियोजना का संचालन हो रहा है, जिसमें पाँच शक्तिपीठों को सम्मिलित किया गया है।
शक्तिपीठ
स्थान
महत्वपूर्ण तथ्य
1. दंतेश्वरी माता
दंतेवाड़ा
मां दंतेश्वरी मंदिर को देश का 52वां शक्तिपीठ माना जाता है। इसका निर्माण 850 साल पहले राजा अन्नमदेव ने करवाया था।
2. बम्लेश्वरी माता
डोंगरगढ़
मां दुर्गा के शक्तिपीठों में से एक मां बम्लेश्वरी मंदिर का निर्माण 2200 साल पहले करवाया गया था।
3. चंद्रहासिनी माता
चंद्रपुर (सक्ती)
महानदी के किनारे स्थित यह मंदिर राज्य के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है।
4. महामाया माता
रतनपुर
रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में राजा रतनदेव प्रथम ने करवाया था।
5. कुदरगढ़ी माता
सूरजपुर
कुदरगढ़ में मां बागेश्वरी का मंदिर 1500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
📖 पूरा नाम: PRASAD (तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन ड्राइव)
🏛️ जारीकर्ता: पर्यटन मंडल, भारत सरकार
🏞️ वाटर टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म
🚀 विकास कार्य: इस पहल के अंतर्गत निम्नलिखित पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है:
हसदो बांगो डेम, बांगो-कोरबा
संजय गांधी जलाशय खूंटाघाट, रतनपुर
मुरूमसिल्ली डेम, धमतरी
गंगरेल रूद्री, धमतरी
सरोधा डेम, कबीरधाम (भारत के पर्यटन मानचित्र में अंकित)
समोदा बैराज, समोदा रायपुर
कोडार डेम, महासमुंद
मलानिया डेम, गौरेला
दुधवा डेम, कांकेर
🕉️ छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल
वैष्णव-धर्म 🚩
भगवान विष्णु और उनके अवतारों को समर्पित प्रमुख मंदिर।
स्थान (जिला)
मंदिर का नाम
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)
नर-नारायण मंदिर
खल्लारी (महासमुंद)
नारायण मंदिर (जगन्नाथ मंदिर)
सिरपुर (महासमुंद)
लक्ष्मण मंदिर / बैकुण्ठ नारायण (विष्णु मंदिर)
[CG Vyapam (Re-TET-2)2024]
नारायणपुर (बलौदाबाजार)
विष्णु मंदिर
[CG PSC(ADA)2020]
राजिम (गरियाबंद)
राजीव लोचन मंदिर (विष्णु मंदिर)
[CG Vyapam (Re-TET-2)2024]
नारायणपाल (लोहांडीगुड़ा, बस्तर)
विष्णु मंदिर (नारायण मंदिर)
[CG Vyapam (FDFG)2024]
बानाबरद (दुर्ग)
विष्णु मंदिर
राजिम (गरियाबंद)
रामचंद्र मंदिर (राम मंदिर)
जांजगीर
नकटा मंदिर (विष्णु मंदिर)
शाक्त पंथ/देवी मां 🙏
देवी माँ के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित महत्वपूर्ण शक्ति स्थल।
स्थान (जिला)
मंदिर का नाम
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
रतनपुर (बिलासपुर)
महामाया मंदिर
[CG PSC(CMO)2019]
मल्हार (बिलासपुर)
डिंडनेश्वरी देवी का मंदिर
भनवारटंक (गौ.पे.म.)
मरही माता मंदिर
चन्द्रपुर (सक्ती)
चन्द्रहासिनी एवं नाथलदाई मंदिर
[CG PSC(Pre)2019]
धमतरी
बिलाईमाता का मंदिर (विंध्यवासिनी देवी)
[CG PSC(Horticulture)2015]
गंगरेल (धमतरी)
अंगारमोती माता का मंदिर
[CG Vyapam(ECH)2017]
चैतुरगढ़ (कोरबा)
महिषासुर मर्दिनी का मंदिर
खल्लारी (महासमुंद)
खल्लारी माता का मंदिर
डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)
बम्लेश्वरी देवी का मंदिर
[CG PSC(ARO,APO)2014, (AP)2016]
कांकेर
सिंहवासिनी देवी का मंदिर
बारसूर (दंतेवाड़ा)
मावली माता का मंदिर
दंतेवाड़ा
दंतेश्वरी माता का मंदिर
[CG PSC (Lib.) 2014]
जगदलपुर (बस्तर)
दंतेश्वरी माता का मंदिर
केशकाल घाटी (कोण्डागांव)
तेलीन माता का मंदिर
चन्दखुरी (रायपुर)
कौशल्या माता का मंदिर
[CG PSC (Lib.) 2017]
खरौद (जांजगीर-चांपा)
माता शबरी मंदिर
[CG PSC(AP)2019]
सुकमा
चिटमिटिन माता मंदिर
[CG Vyapam(RFOI)2018]
अड़भार (सक्ती)
अष्टभुजी माता का मंदिर
बावनकेरा (महासमुंद)
मुंगई माता का मंदिर
घुचापाली (महासमुंद)
चंडीमाता मंदिर
मोहला-मानपुर-अ. चौकी
अम्बादेवी मंदिर
बिलाईगढ़ (सारंगढ़-बिलाईगढ़)
किलबिली माता का मंदिर
कुदरगढ़ (सूरजपुर)
बागेश्वरी देवी का मंदिर
[CG PSC(ADIHS)2014]
बालोद
सिया देवी, गंगा मईया मंदिर
सारंगढ
सम्लेश्वरी माता का मंदिर
चांगभखार (म.-चि.-भ.)
चांगदेवी का मंदिर
[CG PSC(Pre)2021]
सन्ना (जशपुर)
खुड़ियारानी माता का मंदिर
आलोर गुफा (कोण्डागांव)
लिंगेश्वरी माता का मंदिर
🗺️ छ.ग. के प्रमुख शिव एवं विष्णु मंदिरों का मानचित्र अवलोकन
मानचित्र में पूरे छत्तीसगढ़ में फैले भगवान शिव और विष्णु के महत्वपूर्ण देवालयों को दर्शाया गया है, जिनमें से कुछ प्रमुख स्थल इस प्रकार हैं:
उत्तरी छत्तीसगढ़: महाकालेश्वर-शिव (बेलगहना), पातालेश्वर-शिव (मल्हार), रुद्रशिव (तालागांव), प्राचीन शिव मंदिर (पाली, तुम्माण)।
मध्य छत्तीसगढ़: नरनारायण मंदिर (शिवरीनारायण), लक्ष्मणेश्वर-शिव (खरौद), सिद्धेश्वर-शिव (पलारी), लक्ष्मण मंदिर-विष्णु (सिरपुर), गंधेश्वर महादेव (सिरपुर), हटकेश्वर-शिव (रायपुर), राजीवलोचन-विष्णु (राजिम), कुलेश्वर महादेव (राजिम), प्राचीन शिव मंदिर (देवबलौदा)।
दक्षिणी छत्तीसगढ़: कर्णेश्वर-शिव (सिहावा), कुकुर देऊर मंदिर (खपरीग्राम), और बारसूर में स्थित चन्द्रादित्येश्वर-शिव एवं बत्तीसा मंदिर-शिव।
शैव-धर्म 🔱
भगवान शिव को समर्पित राज्य के प्रमुख मंदिर और स्थल।
स्थान (जिला)
मंदिर का नाम
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
सारासोर (सूरजपुर)
गंगाधर मंदिर
तुम्माण (कोरबा)
बंकेश्वर महादेव मंदिर (रत्नदेव प्रथम द्वारा निर्मित), पृथ्वीदेवेश्वर मंदिर (पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा निर्मित)
यह एक पवित्र यात्रा है जिसमें श्रद्धालु पाँच शिवालयों के दर्शन करते हैं। इस यात्रा का केंद्र बिंदु राजिम में स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर है। [CG PSC(FT)2008],[CG PSC (Engg. Set-2) 2015]
यात्रा में शामिल पांच शिवालय:
फणिकेश्वरनाथ मंदिर (फिंगेश्वर)
पटेश्वरनाथ मंदिर (पटेवा)
बम्हनेश्वरनाथ मंदिर (बम्हनी)
चम्पेश्वरनाथ मंदिर (चम्पारण)
कोपेश्वरनाथ मंदिर (कोपरा)
✝️ ईसाई धर्म
राज्य में ईसाई समुदाय के प्रमुख आस्था के केंद्र।
स्थल (जिला)
मुख्य आकर्षण
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
मदकूदीप (मुंगेली)
ईसाई धर्म का प्रसिद्ध मेला (मनियारी व शिवनाथ नदी के संगम पर)
[CG PSC (Pre) 2015], [CG Vyapam (EAE) 2017]
कुनकुरी (जशपुर)
एशिया का दूसरा सबसे बड़ा कैथोलिक चर्च
छोटे सीपत (सक्ती)
ईसाई धर्म का प्रसिद्ध मेला
☸️ बौद्ध-धर्म
बौद्ध विरासत को दर्शाते छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक स्थल।
स्थल (जिला)
प्रमुख स्थल / स्मारक
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
सिरपुर (महासमुंद)
स्वास्तिक विहार, तीवरदेव विहार, प्रभु आनंद कुटी विहार, बौद्ध टीला
[CG Vyapam (RI) 2015]
भोंगापाल (कोण्डागांव)
बौद्ध चैत्यगृह
[CG PSC (ADJ) 2018]
प्रज्ञागिरी (डोंगरगढ़)
बौद्ध प्रतिमा
मैनपाट (सरगुजा)
बौद्ध मंदिर
तुरतुरिया (बलौदाबाजार)
बौद्ध विहार, बुद्ध की विशाल प्रतिमा
** जैन-धर्म**
जैन तीर्थंकरों को समर्पित राज्य के प्रमुख मंदिर और स्थल।
स्थल (जिला)
मंदिर / तीर्थंकर
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
गुंजी / दमाउदरहा (सक्ती)
ऋषभदेव (प्रथम तीर्थंकर)
[CG PSC (Horticulture) 2015, (AP) 2016]
भाटागुड़ा (बस्तर)
शांतिनाथ (16वें तीर्थंकर)
नगपुरा (दुर्ग)
पार्श्वनाथ मंदिर (23वें तीर्थंकर)
[CGPSC(MI)2010]
आरंग (रायपुर)
भाण्डलदेव मंदिर (महावीर स्वामी-24वें तीर्थंकर), सुमतिनाथ (5वें तीर्थंकर)
[CG PSC (EAP) 2016],[CG PSC (IMO) 2020]
⛰️ छत्तीसगढ़ की प्रमुख गुफाएँ
यहाँ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित महत्वपूर्ण गुफाओं की सूची दी गई है।
जिला
गुफा का नाम
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
म.-चि.-भ.
सीतामढ़ी गुफा (घाघरा), जटाशंकरी गुफा
सूरजपुर
बिलद्वार गुफा
जशपुर
कैलाश गुफा (गहिरा गुरू गुफा), जोगी गुफा, खुड़िया गुफा
बलरामपुर
अर्जुनगढ़ की गुफा
सरगुजा
सीताबेंगरा की गुफा, जोगीमारा की गुफा, हाथीपोल की गुफा (रामगढ़ पहाड़ी में), झापीबेंगरा गुफा, आरा पहाड़ी गुफा, बंदरकोट, रकामाड़ा, भालू माड़ा, झील गुफा, पैगा गुफा
💡 विशेष नोट: कैलाश गुफा एक ऐसा नाम है जो जशपुर, बस्तर और सरगुजा तीनों जिलों में स्थित गुफाओं के लिए उपयोग होता है। [CG Vyapam(E.Chemist)2016]
(पृष्ठ 9 पर दिया गया मानचित्र इन सभी गुफाओं की भौगोलिक स्थिति को दर्शाता है।)
🏞️ प्रमुख गुफाओं का विस्तृत विवरण
(A) सरगुजा क्षेत्र की गुफाएँ
रामगढ़ की पहाड़ी
📍 अवस्थिति: यह पहाड़ी सरगुजा जिले में स्थित है।
🕵️♂️ खोजकर्ता: इसकी खोज वर्ष 1848 में कर्नल आउस्ले द्वारा की गई थी।
📜 पौराणिक मान्यता: एक किंवदंती के अनुसार, महाकवि कालिदास ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ मेघदूतम् की रचना यहीं रामगिरि/रामगढ़ की पहाड़ी पर की थी। [CG PSC(EAP)2016]
🌍 भौगोलिक संबंध: रामगिरि/रामगढ़ की पहाड़ी को सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का एक हिस्सा माना जाता है।
यहाँ स्थित प्रमुख गुफाएँ:
🐘 हाथीपोल / ऋक्षबिल गुफा
इसके अंदर एक विशाल सुरंग है, जिसमें से एक हाथी भी सरलता से निकल सकता है, इसी कारण इसे हाथीपोल नाम दिया गया।
इस गुफा के भीतर एक जलकुंड मौजूद है, जिसे सीता कुण्ड के नाम से जाना जाता है।
🎭 सीताबेंगरा गुफा
‘सीताबेंगरा’ का शाब्दिक अर्थ ‘सीता का निवास स्थान’ है। [CG PSC(Pre)2018]
लोककथाओं के अनुसार, माता सीता ने अपने वनवास काल के दौरान इस गुफा में निवास किया था।
इस गुफा को एक नाट्यशाला (थिएटर) के रूप में बनाया गया है, जिसके बाहर अर्ध-चंद्राकार बेंच जैसी संरचनाएं हैं।
मेघदूतम् के अनुसार, हर साल आषाढ़ माह के पहले दिन यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था। [CG PSC(ITI Pri.)2016]
इसकी आंतरिक बनावट को देखते हुए, इसे विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला में से एक माना जा सकता है। [CG Vyapam(RBOS)2017],[CG PSC(TSI)2024]
🎨 जोगीमारा की गुफा
यह गुफा सरगुजा में रामगढ़ की पहाड़ी पर सीताबेंगरा गुफा के पास ही स्थित है। [CG PSC (Reg.)2017]
यह गुफा नर्तकियों के लिए एक विश्राम गृह के रूप में उपयोग होती थी। इसे वरूण देव का मंदिर भी कहा जाता है।
यहाँ से मौर्यकालीन शिलालेख मिले हैं, जिनकी भाषा पाली और लिपि ब्राह्मी है। [CG PSC(ADI)2016]
इन शिलालेखों में नर्तक देवदत्त और देवदासी सुतनुका की प्रेम कहानी का सुंदर वर्णन है। [CG PSC(Mains)2011]
गुफा के अंदर चट्टानों को तराशकर बनाई गईं मानव आकृतियाँ नाट्यकला से संबंधित हैं।
लक्ष्मण बेंगरा की गुफा
(B) रायगढ़ क्षेत्र की गुफाएँ
🖌️ सिंघनपुर गुफा
यह गुफा अपने प्रागैतिहासिक पाषाणकालीन शैलचित्रों के लिए विश्वविख्यात है। [CG PSC(AG-3) 2018],[CG PSC(LIB) 2017]
कबरा पहाड़ गुफा
🦇 बोतल्दा गुफा
इसे छत्तीसगढ़ की सबसे लम्बी गुफा होने का दर्जा प्राप्त है।
🏞️ अन्य गुफाएँ
इस क्षेत्र में बसनाझर, टीपाखोल, ओंगना, बेनीपाट, और अमरगुफा (सोनबरसा) जैसी अन्य महत्वपूर्ण गुफाएँ भी स्थित हैं।
🏞️ क्षेत्रानुसार गुफाओं का विस्तृत विवरण
(C) बालोद जिले की गुफाएँ
🎨 चितवाडोंगरी
📍 अवस्थिति: यह गुफा बालोद जिले की डौंडीलोहारा तहसील में सहगांव के पास स्थित है।
📜 ऐतिहासिक महत्व: यह एक नव-पाषाणकालीन स्थल है, जो अपने शैलचित्रों (Rock Paintings) के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC (Pre.) 2016/2020]
🕵️♂️ खोजकर्ता: इन शैलचित्रों की खोज का श्रेय भगवान सिंह बघेल एवं रमेन्द्र नाथ मिश्र को जाता है।
(D) धमतरी जिले की गुफाएँ
🙏 शांता गुफा
🌍 अवस्थिति: यह गुफा सिहावा में स्थित श्रृंगीऋषि आश्रम के निकट एक रामायणकालीन स्थल है।
📜 पौराणिक मान्यता: ऐसी मान्यता है कि अपने वनवास के दौरान भगवान श्री राम ने श्रृंगी ऋषि के आश्रम में विश्राम किया था। श्रृंगी ऋषि का विवाह भगवान श्री राम की बहन शांता से हुआ था, और उन्हीं के नाम पर इस गुफा का नामकरण किया गया है।
(E) बस्तर जिले की गुफाएँ
🦇 कुटुमसर की गुफा
🕵️♂️ खोजकर्ता: इस गुफा की खोज का श्रेय भूगोल के प्राध्यापक डॉ. शंकर तिवारी को दिया जाता है। उन्होंने 1951 में इसका गहन अध्ययन किया और 1958 में इस पर शोधपत्र प्रकाशित किया। [CG PSC(Pre)2016]
📍 अवस्थिति: यह गुफा बस्तर जिले के गुपनसर पहाड़ के निचले हिस्से में, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर, तीरथगढ़ जलप्रपात के पास स्थित है। [CG PSC(Pre)2016], [CG PSC(AP)2019]
🏷️ उपनाम: इसे ‘कैंपोलाशंकराई गुफा’ और भारत का ‘कार्ल्सवार ऑफ केव’ भी कहा जाता है।
📏 लंबाई: इसकी लंबाई लगभग 4500 फीट है। [CG Vyapam(MFA-1) 2023]
🏗️ निर्माण और संरचना: यह एक भूमिगत गुफा है जिसका निर्माण जल के प्रवाह से हुआ है। इसके कारण यहाँ चूना-पत्थर (CaCO₃) से बनी दो अद्भुत संरचनाएँ पाई जाती हैं:
Stalactites (अश्चुताश्म): गुफा की छत से नीचे की ओर लटकते हुए चूना पत्थर के स्तंभ। [CG PSC(SEE)2020], [CG Vyapam(NNRI)2018]
Stalagmites (निश्चुताश्म): गुफा के धरातल से ऊपर की ओर उठते हुए स्तंभ। [CG Vyapam(NNRI)2018]
✨ विशेषताएँ:
यहां अंधी मछलियाँ (Blind Fish) मिलती हैं, जिन्हें स्थानीय रूप से ‘घोडपल्ली’ या ‘शंकराई’ कहा जाता है। [CG PSC(ADPE&S)2019]
यह भारत की सबसे बड़ी और विश्व की सातवीं सबसे बड़ी गुफा मानी जाती है।
गुफा के अंदर ‘शंकर कुण्ड’ नामक एक जल कुंड भी है।
गुफा का निर्माण लगभग 250 करोड़ वर्ष पहले का माना जाता है।
भूगर्भशास्त्रियों को यहां प्रागैतिहासिक मानव के निवास के साक्ष्य भी मिले हैं।
🌳 अरण्यक गुफा (Aranyak Cave)
स्थान: बस्तर में तोकापाल के पास मंगलपुरी पहाड़ी पर।
खोज: वर्ष 1996 में की गई।
भू-आकृति: यह कार्स्ट स्थलाकृति का उदाहरण है।
नदी: इसका संबंध गंडदेव झोडी नाला से है। [CG Vyapam(AGDO)2018]
🛐 दण्डक गुफा
खोज: 1995 में पतिराम तारण द्वारा की गई।
उपनाम: इसका नामकरण शिव-पार्वती गुफा के रूप में लाला जगदलपुरी द्वारा किया गया था।
क्षेत्र: कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के कोटमसर नाका पर स्थित है।
🛡️ रानी गुफा
खोज: वर्ष 1993।
स्थान: चितापुर (जगदलपुर – दरभा मार्ग पर)।
विशेष: इस गुफा के एक हिस्से में आज भी पुराने अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं।
🏔️ कैलाश गुफा
स्थान: दरभाघाटी के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में।
खोज: 22 मार्च 1993 को वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा की गई।
नामकरण: यहाँ चूने के चट्टानों से बना स्टैलेग्माइट (धरातल से उठी हुई आकृति) कैलाश पर्वत जैसा प्रतीत होता है, इसी कारण इसे कैलाश गुफा कहते हैं।
विशेषताएँ: यह गुफा लगभग 120 फीट गहरी और 1000 फीट लंबी है। यहां की शिवलिंग जैसी चूना पत्थर संरचनाओं की स्थानीय लोग पूजा करते हैं। मानसून के दौरान यह गुफा बंद रहती है और 16 अक्टूबर से 15 जून तक खुली रहती है।
(F) कांकेर जिले की गुफाएँ
🗿 उड़कुड़ा गुफा: चारामा तहसील में स्थित है, यहाँ से महापाषाणकालीन (Megalithic) अवशेष प्राप्त हुए हैं।
🎨 खैरखेड़ा गुफा: चारामा तहसील के खैरखेड़ा गांव में स्थित यह गुफा ‘बलेरा’ नामक प्रसिद्ध शैलचित्रों के लिए जानी जाती है।
🌊 जूड़ी पगार गुफा: यह गुफा गढ़िया पहाड़ी पर सोनई और रूपई तालाब के निकट स्थित है।
विशेष: गुफा के अंदर का दृश्य ऐसा लगता है मानो भगवान कृष्ण गोपिकाओं के साथ रासलीला कर रहे हों। यहाँ कालिया दहन कुंड जैसा एक कुंड भी है। [CG PSC (AMO) 2017]
🔱 उसूर गुफा
स्थान: उसूर पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
विशेष: गुफा के भीतर देवी दुर्गा की तरह दिखने वाली एक प्रतिमा है, जिसकी नवरात्रि में पूजा-अर्चना की जाती है।
लंकापल्ली गुफा: यह लंकापल्ली गांव के समीप स्थित है।
(H) दंतेवाड़ा जिले की गुफाएँ
👺 तुलार गुफा
स्थान: यह बारसूर क्षेत्र के तुलार गाँव में स्थित है।
मान्यता: जनश्रुति के अनुसार, राजा बाणासुर इसी गुफा में रहा करते थे।
📜 प्रमुख गुफाओं के खोजकर्ता
गुफा
खोजकर्ता
वर्ष
रामगढ़ पहाड़ी (सरगुजा)
कर्नल ऑउस्ले
1848
सिंघनपुर गुफा (रायगढ़)
एंडरसन
1910
🦁 छत्तीसगढ़ के लघु चिड़ियाघर (Mini Zoos)
कानन पेंडारी: यह बिलासपुर में स्थित है।
नंदनवन: यह रायपुर में स्थित है।
मैत्रीबाग: भिलाई में स्थित यह उद्यान भारत और रूस की मित्रता का प्रतीक है, जिसे 1972 में स्थापित किया गया था।
जंगल सफारी: नया रायपुर में स्थित यह मानव निर्मित एशिया का सबसे विशाल जंगल सफारी है।
🏛️ छत्तीसगढ़ में संग्रहालय एवं पुस्तकालय
📖 महंत घासीदास संग्रहालय
स्थापना: इसकी स्थापना 1875 में रायपुर में हुई थी। [CG PSC (Lib.) 2021]
महाकौशल कला वीथिका: यह आर्ट गैलरी महंत घासीदास संग्रहालय के परिसर में ही स्थापित की गई है।
वर्तमान भवन: इसके वर्तमान भवन का उद्घाटन 21 मार्च 1953 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया गया था।
🏛️ जिला पुरातत्व संग्रहालय
राजनांदगांव: स्थापना 31 अगस्त 1977
बिलासपुर: स्थापना 1982
जगदलपुर: स्थापना 1988
📚 प्रमुख पुस्तकालय (ग्रंथालय)
महंत सर्वेश्वरदास सार्वजनिक ग्रंथालय: रायपुर (1953 में स्थापित)
सरस्वती पुस्तकालय: राजनांदगांव (1909 में स्थापित)
आनंद समाज पुस्तकालय: रायपुर (1908 में स्थापित)
🗿 नृजातीय म्यूजियम (Anthropological Museum)
स्थान: जगदलपुर (बस्तर), स्थापना 1972 में हुई।
संचालन: यह Anthropological Survey of India द्वारा संचालित है। [CG Vyapam (SDAG) 2016, 2018]
🏞️ देश का प्रथम खुला संग्रहालय
यह बालोद में स्थित है।
🙏 छत्तीसगढ़ के प्रमुख आश्रम
आश्रम का नाम
स्थान / संस्थापक
परीक्षा संदर्भ (PYQ)
गहिरा गुरू आश्रम
जशपुर (खुड़िया गुफा – जशपुर)
वाल्मीकी आश्रम
बारनवापारा (बलौदाबाजार)
तुरतुरिया आश्रम
बारनवापारा (बलौदाबाजार)
विवेकवर्धन आश्रम
महासमुंद (यतियतनलाल द्वारा स्थापित)
सप्तऋषि आश्रम
सिहावा पर्वत (धमतरी)
श्रृंगीऋषि आश्रम
सिहावा पर्वत (धमतरी)
[PSC(Engg. S-2)2015]
लोमश ऋषि आश्रम
सिहावा (धमतरी)
लोमेश ऋषि आश्रम
राजिम (गरियाबंद)
सत्याग्रह आश्रम
रायपुर (पं. सुन्दरलाल शर्मा द्वारा स्थापित)
रामकृष्ण मिशन विवेकानंद सेवाश्रम
रायपुर (1958 में आत्मानंद द्वारा स्थापित)
[CG PSC (Engg.)2015], [CG VYAPAM (TC)2016]
रामकृष्ण मिशन आश्रम
नारायणपुर (1985 में आत्मानंद द्वारा स्थापित)
[CG PSC (Engg.)2015] [CG PSC (Pre)2016]
अत्रिमुनि आश्रम
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
अंगिरस आश्रम
सिहावा
मुचकुंद आश्रम
मेचका सिहावा
शबरी आश्रम
शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)
[CG VYAPAM(CBAS)2023]
मतंग ऋषि आश्रम
शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पुरातात्विक स्थल (Archaeological Sites)
यह सारणी छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों और उनके जिलों की जानकारी दर्शाती है।
वर्ष 2014 तक, छत्तीसगढ़ में 117 स्थलों को पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। [CG PSC (ACF)2016]
पचराही पुरातात्विक स्थल का संबंध फणीनागवंशी शासकों से है। [CG PSC (ADS)2018]
🌍 छत्तीसगढ़ के स्थानों के प्रसिद्ध उपनाम
यहाँ छत्तीसगढ़ के कुछ प्रसिद्ध स्थानों और उनके उपनामों की सूची दी गई है।
स्थान (जिला)
संज्ञा / उपनाम
मैनपाट (सरगुजा)
छत्तीसगढ़ का शिमला
तपकरा (जशपुर)
छत्तीसगढ़ का नागलोक
लाफागढ़ (कोरबा)
छत्तीसगढ़ का चित्तौड़
चैतुरगढ़ (कोरबा)
छत्तीसगढ़ का कश्मीर
रतनपुर (बिलासपुर)
टंकियों का नगर
खरौद (जांजगीर-चांपा)
छत्तीसगढ़ की काशी
भोरमदेव (कवर्धा)
छत्तीसगढ़ का खजुराहो
आरंग (रायपुर)
मंदिरों की नगरी
अबूझमाड़ (नारायणपुर)
छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी
चित्रकोट (बस्तर)
छत्तीसगढ़ का न्याग्रा
राजिम
छत्तीसगढ़ का प्रयाग
जगदलपुर
चौराहों का शहर
भिलाई
छ.ग. की ज्ञान की राजधानी
कोरबा
छ.ग. की ऊर्जा राजधानी
लुड़ेंग
टमाटर की राजधानी
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी
बारसूर
मंदिरों व सरोवरों की नगरी
🗺️ अन्य पर्यटन स्थलों का जिलेवार विस्तृत विवरण
📌 जिला: कांकेर
कांकेर: यहाँ सिंहवासिनी मंदिर, गढ़िया पहाड़, किलागढ़ देवी मंदिर और राजमहल मुख्य आकर्षण हैं। [CG PSC(ACF)2016]
भानुप्रतापपुर: यहाँ प्राचीन किला, गढ़देवी मंदिर, किला पहाड़ जलाशय और शिव मंदिर देखने योग्य हैं।
खण्डीघाट: इस स्थल पर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, माया मोहनी, जोगी गुफा, अष्टभुजी भवानी मंदिर और हर-हर खण्डेश्वर महादेव मंदिर स्थित हैं।
गाड़ागौरी गढ़शीतला: इसके दर्शनीय स्थलों में जोगीगुफा, गढ़माड़िया देव, गढ़हिंगलाज एवं पांचफुलवृक्ष शामिल हैं।
📌 जिला: कोण्डागांव
कोण्डागांव: यह स्थान शिल्पग्राम के लिए प्रसिद्ध है।
केशकाल घाटी: यहाँ तेलिनमाता का मंदिर, फूलों की घाटी, भंगाराम मंदिर और टाटामारी प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। [CG Vyapam (SAAF)2018]
भोंगापाल: इस जगह पर बौद्ध चैत्यगृह और बौद्ध विहार स्थित हैं। [CG PSC(ADJ)2018]
गढ़धनौरा: यहाँ पाषाणघेरे, प्राचीन भग्न ईंटों का मंदिर, और प्राचीन शिव, विष्णु, नरसिंह मंदिर के अवशेष मिलते हैं। [CG Vyapam(RFOI)2018]
📌 जिला: बस्तर
जगदलपुर: यहाँ दंतेश्वरी मंदिर, राजमहल और दलपत सागर प्रमुख हैं।
बस्तर: यह स्थल शिल्पग्राम, संग्रहालय और महादेव मंदिर के लिए जाना जाता है।
माचकोट: यह एक आरक्षित वन क्षेत्र है।
केसरपार: यहाँ भग्न शिवमंदिर स्थित है।
घुमरमुण्डपारा: यहाँ शिवमंदिर है।
गुमड़पाल: यह भी एक शिवमंदिर स्थल है।
छिंदगांव: यहाँ शिवमंदिर स्थापित है।
नारायणपाल: यहाँ विष्णु मंदिर (नारायण मंदिर) और भद्रकाली मंदिर हैं।
ढोडरेपाल: इस स्थान पर विश्वकर्मा मंदिर और चिंगीतराई मंदिर हैं।
📌 जिला: सुकमा
बुकमा: यहाँ चिटमिटिन माता का मंदिर और रामाराम दर्शनीय हैं। [CG Vyapam (RFOI)2018]
📌 जिला: दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा: यहाँ प्रसिद्ध दंतेश्वरी देवी मंदिर है। [CG PSC(Lib)2014]
समलूर: यहाँ कारली महादेव मंदिर स्थित है।
फरसगांव ग्राम: यह ढोलकल पहाड़ी के लिए जाना जाता है।
बारसूर: यहाँ मामा-भांजा मंदिर, बत्तीसा मंदिर, विशाल गणेश प्रतिमा और चंद्रादित्य सरोवर मुख्य आकर्षण हैं। [CG PSC(Engg. G-2)2015][CG Vyapam(SAAF)2018]
बैलाडीला: यह लौह खदान (आकाश नगर) के लिए प्रसिद्ध है।
📌 जिला: बीजापुर
बीजापुर: यहाँ नडापल्ली गुफा और आवापल्ली गुफा दर्शनीय हैं। [CG PSC(AMO)2017][CG PSC(ACF)2016]
भैरमगढ़: यहाँ अर्द्धनारीश्वर मूर्ति (भैरमदेव मंदिर), प्राचीन किले और तालाब हैं।
📌 जिला: नारायणपुर
अबूझमाड़: यह पाषाणकालीन अवशेषों के लिए जाना जाता है।
छोटे डोंगर: यहाँ प्राचीन मंदिर के खंडहर मिलते हैं।
नारायणपुर: यहाँ रामकृष्ण मिशन आश्रम (1985 में आत्मानंद द्वारा स्थापित) और खुरसेल घाटी है। [CG PSC(ACF)2016]
📌 जिला: कबीरधाम
चौराग्राम: भोरमदेव मंदिर और मड़वा महल यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। [CG PSC(ARO,APO)2014]
छपरीग्राम: यहाँ छेरकी महल स्थित है।
पचराही: यह एक पुरातात्विक स्थल है जहाँ प्राचीन कंकालीन मंदिर हैं। [CG Vyapam(RFOI)2018]
ग्राम बेंदा: यहाँ पुरातात्विक मूर्तियाँ मिली हैं।
ओंगानपाट: रामचुवा, कुरकुरी झिरना और नर्मदा कुण्ड यहाँ के दर्शनीय स्थल हैं।
ग्राम आंछी बानो: यहाँ पातालेश्वर महादेव मंदिर है।
नरोधी: यह स्थल माँ नर्मदा कुण्ड और नर्मदाधाम के लिए प्रसिद्ध है।
पारसनगर बकेला: यहाँ पार्श्वनाथ जैन मंदिर और हाफनदी हैं।
ग्राम देवसरा: यहाँ प्राचीनकालीन मूर्तियाँ और प्राचीन गुफाएं हैं।
📌 जिला: दुर्ग
भिलाई: यह मैत्रीबाग के लिए प्रसिद्ध है।
देवबलौदा: यहाँ प्राचीन शिव मंदिर और प्राचीन भग्न बलुआ पत्थर के मंदिर हैं। [CG PSC(ADPPO)2013]
नगपुरा: यह जैन धर्म का तीर्थ स्थल है और यहाँ नागदेव मंदिर, शिवमंदिर और श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थपति भी हैं।
बानाबरद: यहाँ विष्णुमंदिर है।
धमधा: यहाँ शिवमंदिर, चतुर्भुजी मंदिर, प्राचीन किला, बूढ़ा तालाब और त्रिमूर्ति महामाया मंदिर हैं।
पाटन: आग तालाब के लिए जाना जाता है।
ठकुराईन टोला: यहाँ टोलाघाट का शिव मंदिर है।
भरदा चंगोरी: इस स्थल पर बौद्धकालीन भग्न मूर्तियाँ, शिलाखंड और त्रिवेणी संगम के अवशेष हैं।
📌 जिला: राजनांदगांव
डोंगरगढ: यहाँ बम्लेश्वरी मंदिर, बुद्ध प्रतिमा और बूढ़ादेव पहाड़ी प्रमुख हैं। [CG PSC(AROAPO)2014]
साकरादाहरा: यह एक टापू पर स्थित है जहाँ सतबहनियाँ मंदिर, जलदरहा, सुखा बैराज, मोक्षधाम और ओडार बांध हैं।
बिरखा: यहाँ शिव मंदिर और घटियारी हैं।
मक्काटोला: यहाँ माँ कारीपाठ मंदिर स्थित है।
📌 जिला: खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (खै.-छु.-गं.)
चोड़राधाम: यहाँ डोंगेश्वर महादेव, मड़िया खोल, पैलीमेटा बांध (सुरही जलाशय), मोटियारी घाट और नर्मदा कुण्ड प्रमुख आकर्षण हैं।
गंडई: यह स्थल प्राचीन शिव मंदिर के लिए जाना जाता है।
करेला: यहाँ पहाड़ी पर माँ भवानी का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
खैरागढ़: यह इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की स्थली है।
छुईखदान: इसके मुख्य दर्शनीय स्थलों में बैताल रानी घाटी, मोंगरा बैराज और साल्हेवारा घाटी शामिल हैं।
घटियारी: यहाँ एक प्राचीन पुरातात्विक शिव मंदिर मौजूद है।
📌 जिला: मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी
अंबागढ़: यह अम्बादेवी मंदिर और महिषासुर मर्दिनी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
अम्बागढ़ चौकी: यहाँ का मोंगरा बैराज एक महत्वपूर्ण स्थल है।
📌 जिला: बेमेतरा
नवागढ़: यहाँ प्राचीन खेड़ापति मंदिर, महामाया मंदिर (बुचीपुर), शारदा मंदिर और एक प्राचीन बावली है।
ग्राम ढनढनी: इस गांव में जूनी सरोवर, दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर और कृष्ण मंदिर स्थित हैं।
देवरबीजा: यह स्थल सीता देवी मंदिर और सती स्तम्भ के लिए जाना जाता है।
देवकर: यहाँ घुघुसराजा मंदिर स्थित है।
📌 जिला: बालोद
बालोद: इस स्थान पर कपिलेश्वर तालाब, गंगा मैया मंदिर [CG Vyapam (SAAF)2018], कपिलेश्वर मंदिर और सियादेवी मंदिर हैं। [CG PSC(Pre)2012]
चौरेल: यहाँ श्री गौरैया सिद्ध शक्तिपीठ, श्री विमल वैदिक सेवा आश्रम, श्री सद्गुरु कबीरघाट के साथ-साथ 9वीं से 11वीं सदी के कल्चुरीकालीन राजवंश की प्राचीन मूर्तियां भी मौजूद हैं।
नर्मदा धाम ग्राम: यहाँ जलकुण्ड, कर्मा मंदिर, दुर्गा मंदिर, गणेश मंदिर और राम दरबार मंदिर हैं।
चिरचारी: यह स्थल बहादुर कलारीन की माची (स्मारक) के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC(Pre)2015]
करहीभदर: एक महत्वपूर्ण महापाषाणीय स्मारक स्थल।
धनोरा: यहाँ भी महापाषाणीय स्मारक पाए जाते हैं।
कुलिया: यह स्थल भी महापाषाणीय स्मारकों के लिए चिन्हित है।
मुजगहन: एक और महापाषाणीय स्मारक स्थल।
करकाभाठा: यहाँ महापाषाणीय स्मारक के साथ-साथ पाषाण स्तंभ भी मिले हैं। [CG PSC(Reg.)2021]
डौंडीलोहारा: इस स्थान पर भग्न मंदिर, मढ़ियापार और प्राचीन मंदिर हैं।
खपरी: यह कुकुरदेऊर मंदिर के लिए जाना जाता है।
सहगांव: यहाँ चितवाडोंगरी गुफा है, जिसमें ड्रैगन की आकृति के शैल चित्र हैं।
मोहदीपाट: यह मोहंदी पाट बाबाधाम का स्थल है।
🏞️ छत्तीसगढ़ के अन्य पर्यटन स्थल
यह सारणी छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के पर्यटन स्थलों की जानकारी प्रदान करती है।
प्राचीन किला, गुफा, प्राकृतिक पर्यटन स्थलें, शंकर खोल गुफा।
तुम्माण
प्राचीन शिव मंदिर (महादेव मंदिर)।
कुदुरमाल
कबीरपंथ का तीर्थस्थल।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
गौ.-पे.-म.
कबीर चबूतरा, जलेश्वर धाम (प्राचीन शिव मंदिर)।
जांजगीर-चांपा
जांजगीर
विष्णु मंदिर (प्राचीन व बड़ा विष्णु मंदिर), छोटा मंदिर, नहरिया बाबा मंदिर, बरमबाबा चौरा।
खरौद
लक्ष्मणेश्वर मंदिर, शबरी मंदिर, छोटा इष्टिका मंदिर (अण्डलदेव मंदिर)।
शिवरीनारायण
नरनारायण व चन्द्रचूड़ महादेव मंदिर, शिवरीनारायण मंदिर, अर्द्धभग्न केशव नारायण मंदिर, शबरी आश्रम, दूधाधारी मठ।
📌 जिला: गरियाबंद
राजिम: यहाँ राजीव लोचन मंदिर, सोमेश्वर महादेव, कुलेश्वर महादेव और रामचंद्र का मंदिर मुख्य आकर्षण हैं। [CGPSC(Pre)2012]
फिंगेश्वर: यह फणिकेश्वरनाथ महादेव का मंदिर, मौलीमाता और किला के लिए जाना जाता है।
ऋषिझरन: यह एक झरना है जो प्राकृतिक एवं धार्मिक पर्यटन का केंद्र है।
📌 जिला: बलौदाबाजार – भाटापारा
पलारी: यहाँ प्रसिद्ध सिद्धेश्वर शिव मंदिर स्थित है। [CGVyapam(TET)2024], [CGPSC(Pre)2012,(ADJ)2018]
गिरौदपुरी: यह संत गुरुघासीदास जी की जन्म स्थली है। यहाँ सफुरा मठ, प्रसिद्ध जैतखाम और छाता पहाड़ प्रमुख स्थल हैं। [CGVyapam(FI)2017], [CGVyapam(Patwari)2016],[CGPSC(EAP)2016]
दामाखेड़ा: यहाँ कबीर चबूतरा (समाधि मंदिर) और कबीरपंथ की अंतर्राष्ट्रीय गुरूगद्दी स्थित है। [CGPSC(IMO)2020]
सिंगारपुर: यहाँ मावली माता मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, परमेश्वरी देवी मंदिर और विश्वकर्मा मंदिर हैं।
नारायणपुर (कसडोल): यहाँ महंत लालदास द्वारा सूर्य को समर्पित मंदिर, बैरागी का मठ, और महादेव मंदिर हैं।
धोबनी: यह चितावरी देवी मंदिर के लिए जाना जाता है।
डमरू: यहाँ एक प्राचीन भग्न मंदिर स्थित है।
तरपोंगा: यहाँ मावलीदेवी का मंदिर है।
तुरतुरिया: इसे लवकुश की जन्म स्थली माना जाता है और यहाँ बौद्ध विहार भी है।
चंगोरपुरीधाम: यह त्रिवेणी संगम का स्थल है।
सोनाखान: यहाँ शहीद वीर नारायण सिंह का स्मारक और संग्रहालय बना हुआ है।
📌 जिला: रायपुर
रायपुर: शहर के मुख्य दर्शनीय स्थलों में दूधाधारी मठ, शदाणी दरबार, विवेकानंद सरोवर, महंत घासीदास संग्रहालय और पुरखौती मुक्तांगन शामिल हैं। [CGPSC(AP)2016]
चम्पारण: यह महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली है और यहाँ चम्पेश्वर महादेव का मंदिर है। [CGPSC(ADS)2019(Pre) 2023]
आरंग: यहाँ भाण्डलदेव जैन मंदिर, बाघ देउल, संत रविदास मंदिर, बागेश्वरनाथ, जोगेश्वरनाथ, कुमारेश्वरनाथ और पंचमुखी महादेव मंदिर हैं। [CGPSC(EAP)2016, (IMO)2020]
चन्दखुरी: यह स्थल कौशल्या माता के मंदिर और एक प्राचीन शिवमंदिर के लिए प्रसिद्ध है। [CGPSC(Lib)207]
नवागांव (आरंग): यहाँ एक प्राचीन ईंटों से बना मंदिर है।
गिरोद: यहाँ एक शिव मंदिर है।
नाहनाचण्डी: यह माँ चण्डी मंदिर का स्थल है।
📌 जिला: धमतरी
धमतरी: यहाँ एक प्राचीन किला, बिलाई माता मंदिर और रामचन्द्र मंदिर स्थित हैं। [CGPSC(Horticlt)2015]
सिहावा: यहाँ कर्णेश्वर महादेव मंदिर, सप्तऋषि आश्रम (गौतम, मुचकुंद, अंगिरा, अगस्त्य, श्रृंगी ऋषि), सरोवर गुफा और शांतागुफा हैं।
🏞️ छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल
जिला
पर्यटन स्थल
मुख्य दर्शनीय स्थल
संदर्भित परीक्षा (PYQ)
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
देवपुर (कण्डेल)
पातालेश्वर महादेव, डोंगेश्वर घाट (धाम)।
विश्रामपुरी
रामलक्ष्मण टेकरी।
घाघरा
प्रस्तरों का मंदिर, सीतामढ़ी गुफा।
हरचौका
देवी-देवताओं का प्राचीन मंदिर एवं गुफाएं।
मुरेरगढ़ (उमरवाह)
प्राचीन किला एवं मंदिर, हिल स्टेशन।
कोटाडोल
पुरातात्विक स्थल, अशोककालीन मूर्तियां।
[CGPSC(ACF)2021]
पोंडी-चिरमिरी
जगन्नाथ मंदिर।
भगवानपुर (भरतपुर)
चांगदेवी मंदिर।
[CGPSC(Pre)2021]
कोरिया
बैकुंठपुर
छिपछिपी देवी का मंदिर।
सूरजपुर
सारासोर
गंगाधार मंदिर, जलधारा।
कुदरगढ़
वागेश्वरी देवी का मंदिर, कुदरगढ़ देवी, किला, कपिलधारा।
[CGPSC(ADIHS)2017]
सूरजपुर
काल भैरव मंदिर, सीता लेखनी की पहाड़ी, खोपाधाम।
[CGPSC(Pre)2017]
सरगुजा
अम्बिकापुर
महामाया मंदिर, तकिया मजार (बाबा मुरादशाह का मजार)।
शिव मंदिर, देवी का मंदिर (छेरिकी देउर – यह स्मारक है)।
देवगढ़
अर्द्धनारीश्वर शिव मंदिर।
महारानीपुर
देउर मंदिर।
कलचा भदवाही
सतमहला मंदिर संघ।
बलरामपुर
डीपाडीह
प्राचीन मंदिरों का समूह, भग्न मंदिर, सामतसरना।
[CGPSC(Pre)2024]
तातापानी
गरम पानी का फौव्वारा।
[CGVyapam(SDAG)2018]
बेलसर
शिवमंदिर।
जशपुर
जशपुर नगर
रानीदाह प्रपात, दमेरा प्रपात, इंदिरा घाट, लोरो घाट।
पत्थलगांव
किलकिला घाटियां, नंदन झारियां, कोसलापाठ देवता (तमता पहाड़)।
कुनकुरी
महागिरजाघर (एशिया का दूसरा बड़ा चर्च) [CGPSC(Engg.G-2)2015], मधेश्वर पहाड़, बेनेप्रपात। [CGPSC(Pre)2022]
बगीचा
नाशपाती, लीची, आम के बगीचों की घाटियां, खुड़िया रानी की गुफा एवं प्रपात।
सन्ना
प्राकृतिक पर्यटन स्थल।
📜 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक
यह सूची छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार (ASI, रायपुर सर्किल) द्वारा संरक्षित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाती है।
क्र.
स्मारक का नाम
स्थान
जिला
1
चन्द्रादित्य मंदिर
बारसूर
दंतेवाड़ा
2
गणेश प्रतिमा
बारसूर
दंतेवाड़ा
3
मामा भांजा का मंदिर
बारसूर
दंतेवाड़ा
4
दंतेश्वरी मंदिर में रखी प्राचीन प्रतिमाएं
दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा
5
महादेव मंदिर
बस्तर
बस्तर
6
भैरमदेव मंदिर
भैरमगढ
बीजापुर
7
दंतेश्वरी मंदिर
दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा
8
काष्ठ निर्मित मृतक स्मृति स्तंभ
डिलमिली
बस्तर
9
ईटों का टीला
गढ़धनौरा
कोण्डागांव
10
महापाषाणीय स्मारक (उर्सकल)
गामावाड़ा
बस्तर
11
नारायण मंदिर
नारायणपाल
बस्तर
12
कारली महादेव मंदिर
समलूर
दंतेवाड़ा
13
विशाल विष्णु मंदिर
जांजगीर
जांजगीर-चांपा
14
छोटा मंदिर
जांजगीर
जांजगीर-चांपा
15
ईंट निर्मित शबरी मंदिर
खरौद
जांजगीर-चांपा
16
ईंट निर्मित इंदल देउल मंदिर
खरौद
जांजगीर-चांपा
17
प्राचीन गढ़
मल्हार
बिलासपुर
18
पातालेश्वर महादेव मंदिर
मल्हार
बिलासपुर
19
महादेव मंदिर
पाली
कोरबा
20
कंठी देउल मंदिर
रतनपुर
बिलासपुर
21
रतनपुर स्थित समस्त स्मारक
रतनपुर
बिलासपुर
22
पाली अभिलेख
सेमरसल
मुंगेली
23
केशवनारायण मंदिर
शिवरीनारायण
जांजगीर-चांपा
24
चन्द्रचूड़ मंदिर
शिवरीनारायण
जांजगीर-चांपा
25
महादेव मंदिर
तुमान
कोरबा
26
शिव मंदिर
अड़भार
सक्ती
27
चैतुरगढ़, लाफा
पाली
कोरबा
28
कोटगढ़ किला
बरगवां
जांजगीर-चांपा
29
अजमेरगढ़ किला
आमनाला
बिलासपुर
30
काशीगढ़ किला
बावनबाड़ी
सक्ती
31
मंदिर
बेलपान
बिलासपुर
32
भग्न मंदिर
कटघोरा
कोरबा
33
कोटमी किला
कोटमी
जांजगीर-चांपा
34
शिव मंदिर
देवबलोदा
दुर्ग
35
सीता देवी मंदिर एवं सतीस्तंभ
देवरबीजा
बेमेतरा
36
भांड देउल
आरंग
रायपुर
37
महादेव मंदिर
नारायणपुर
बलौदाबाजार
38
आदित्य को समर्पित मंदिर
नारायणपुर
बलौदाबाजार
39
राजीवलोचन मंदिर
राजिम
गरियाबंद
40
सीताबाड़ी
राजिम
गरियाबंद
41
रामचन्द्र मंदिर
राजिम
गरियाबंद
42
लक्ष्मण मंदिर
सिरपुर
महासमुंद
43
सिरपुर स्थित समस्त टीले
सिरपुर
महासमुंद
44
सीता बेंगरा गुफा
उदयपुर
अम्बिकापुर
45
जोगीमारा गुफा
उदयपुर
अम्बिकापुर
🏛️ छत्तीसगढ़ के अन्य संरक्षित स्मारक स्थल
📍 आरंग, रायपुर: रीवा उत्खनन से प्राप्त स्थल।
📍 दलपत सागर, बस्तर: प्राचीन शिव मंदिर।
📍 राजपुर (मुंडागांव), बस्तर: प्राचीन किला।
📍 भैरमगढ़, बीजापुर: प्राचीन किला एवं मंदिर।
📍 जाघंला, बीजापुर: प्राचीन विष्णु मंदिर।
📍 बारसूर, दंतेवाड़ा: सोलहखम्भा मंदिर।
📍 बारसूर, दंतेवाड़ा: पेदम्मागुड़ी मंदिर।
🌟 राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची
यह सूची छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा संरक्षित किए गए महत्वपूर्ण स्मारकों का विवरण देती है।
क्र.
स्मारक का नाम
स्थान
जिला
1
कुलेश्वर मंदिर
नवागांव
धमतरी
2
कर्णेश्वर महादेव मंदिर समूह
सिहावा
धमतरी
3
शिव मंदिर
चंदखुरी
रायपुर
4
प्राचीन ईंट मंदिर
नवागांव
रायपुर
5
शिव मंदिर
गिरौद
रायपुर
6
सिद्धेश्वर मंदिर
पलारी
बलौदाबाजार
7
चितावरी देवी मंदिर
धोबनी
बलौदाबाजार
8
प्राचीन भग्न मंदिर
डमरू
बलौदाबाजार
9
मावली देवी मंदिर
तरपोंगा
बलौदाबाजार
10
फणिकेश्वर महादेव मंदिर
फिंगेश्वर
गरियाबंद
11
आनंदप्रभु कुटी बिहार
सिरपुर
महासमुंद
12
स्वास्तिक विहार
सिरपुर
महासमुंद
13
जगन्नाथ मंदिर
खल्लारी
महासमुंद
14
नागदेव मंदिर
नगपुरा
दुर्ग
15
शिव मंदिर
नगपुरा
दुर्ग
16
विष्णु मंदिर
बानाबरद
दुर्ग
17
शिव मंदिर व चतुर्भुजी मंदिर
धमधा
दुर्ग
18
बहादुर कलारिन की माची
चिरचारी
बालोद
19
महापाषाणीय स्मारक
करकाभाट
बालोद
20
महापाषाणीय स्मारक
करहीभदर
बालोद
21
महापाषाणीय स्मारक
धनोरा
बालोद
22
महापाषाणीय स्मारक
कुलिया
बालोद
23
महापाषाणीय स्मारक
मुजगहन
बालोद
24
मढ़ियापाट (भग्न मंदिर)
डौंडीलोहारा
बालोद
25
प्राचीन मंदिर
डौंडीलोहारा
बालोद
26
कुकुरदेव
खपरी
बालोद
27
शिव मंदिर
पलारी
बालोद
28
शिव मंदिर
जगन्नाथपुर
बालोद
29
कपिलेश्वर मंदिर एवं बावड़ी
बालोद
बालोद
30
बजरंगबली मंदिर
सहसपुर
बेमेतरा
31
शिव मंदिर
सहसपुर
बेमेतरा
32
घुंघसराजा मंदिर
देवकर
बेमेतरा
33
शिव मंदिर, घटियारी
बिरखा
राजनांदगांव
34
भोरमदेव मंदिर
छपरी
कबीरधाम
35
छेरकी महल
चौरा
कबीरधाम
36
मण्डवा महल
छपरी
कबीरधाम
37
महामाया मंदिर
रतनपुर
बिलासपुर
38
प्राचीन शिव मंदिर
किरारीगोढ़ी
बिलासपुर
39
देवरानी-जेठानी मंदिर
अमेरीकांपा
बिलासपुर
40
शिव मंदिर
गनियारी
बिलासपुर
41
धूमनाथ मंदिर
सरगाँव
मुंगेली
42
लक्ष्मणेश्वर मंदिर
खरौद
जांजगीर
43
शैलाश्रय
सिंघनपुर
रायगढ़
44
कबीरपंथी की तीन मजार
कुदुरमाल
कोरबा
45
गुढ़ियारी शिव मंदिर
केशरपाल
बस्तर
46
शिव मंदिर धुमरमुण्डापारा
सिंघईगुढ़ी
बस्तर
47
शिव मंदिर
गुमड़पाल
बस्तर
48
शिव मंदिर
छिंदगाँव
बस्तर
49
प्राचीन टीले (ईंटों के)
गढधनौरा
कोण्डागांव
50
प्राचीन टीला, बुद्ध प्रतिमा
भोंगापाल
कोण्डागांव
51
बत्तीसा मंदिर
बारसूर
दंतेवाड़ा
52
शिव मंदिर
देवटिकरा
सरगुजा
53
देउर मंदिर
महारानीपुर
सरगुजा
54
देवी का मंदिर (छेरिका देउर)
देवटिकरा
सरगुजा
55
सतमहला मंदिर समूह
कलचा भदवाही
सरगुजा
56
भग्न मंदिर
डीपाडीह
बलरामपुर
57
भग्न मंदिर (रानी तालाब के पास)
डीपाडीह
बलरामपुर
58
शिव मंदिर, हर्राटोली
बेलसर
बलरामपुर
📖 छत्तीसगढ़ के पुरातत्व – कला एवं स्थापत्य
🎨 चित्रकला
📌 शैल चित्र
छत्तीसगढ़ में प्रागैतिहासिक युग के कई शैल गृहों के साक्ष्य पाए जाते हैं।
🧠 उस युग में, जब मानव पर्वतीय गुफाओं में रहता था, उसने इन शैलाश्रयों पर चित्रकारी की।
प्रमाण:
कबरा पहाड़ में गेरुआ या गैरिक रंग से छिपकली और मानव समूहों के चित्र बनाए गए हैं। सिंघनपुर की गुफाओं में सीधी रेखाओं और सीढ़ीनुमा आकृतियों में मानव बनाए गए हैं, जहाँ उन्हें शिकार करते हुए दर्शाया गया है। [CG Vyapam (EB.JE) 2024]
📍 चितवाडोंगरी और रायगढ़ के बसनाझार, ओंगना, करमागढ़ तथा लिखामाड़ा जैसे स्थानों से भी अवशेष मिले हैं।
🧑🎨 चितवाडोंगरी में मनुष्य और पशुओं के चित्र अंकित हैं, जिन्हें सबसे पहले भगवान सिंह बघेल और रमेन्द्रनाथ मिश्र द्वारा खोजा गया था। [CG PSC(Pre)2020]
📌 ऐतिहासिक काल की चित्रकला
रामगढ़: 🏛️ सरगुजा जिले में स्थित रामगढ़ को दुनिया की सबसे पुरानी नाट्यशाला के रूप में जाना जाता है, जिसे कर्नल आउस्ले ने 1848 में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था।
भित्ति चित्र: 🖌️ यहाँ मिले दुर्लभ भित्ति चित्रों पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। ये चित्र रामगढ़ पहाड़ी की जोगीमारा गुफा में हैं, जो नर्तकियों के लिए एक आरामगाह थी।
महत्ता: ✨ ये भित्ति चित्र विश्व-प्रसिद्ध अजंता और बाघ की गुफाओं के चित्रों से भी प्राचीन हैं, इसी कारण उनके रंग फीके पड़ गए हैं। इसी वजह से उन्हें वह पहचान और महत्व नहीं मिल सका जिसके वे हकदार हैं।
सीताबेंगरा: 📜 सीताबेंगरा गुफा की छत को लाल रेखाओं द्वारा पाँच भागों में विभाजित किया गया है, और इनमें विभिन्न विषयों पर चित्र पाली भाषा में अंकित हैं।
🎭 इन चित्रों में सुतनुका और कायदक्ष की कथा का वर्णन है। भारतीय कला के विशेषज्ञ आनंद कुमार स्वामी ने इन चित्रों की कलात्मक उत्कृष्टता और प्राचीनता को मान्यता दी है, जिससे भारतीय कला को वैश्विक प्रतिष्ठा मिली।
🏛️ छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राचीन कला केन्द्र
🏰 प्राचीन समय में, छत्तीसगढ़ के सिरपुर, मल्हार, रतनपुर और राजिम कला के महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करते थे।
👑 रतनपुर कलचुरि कला का एक प्रमुख केंद्र था, जबकि सिरपुर का संबंध सोमवंश और नलवंश से था।
⛏️ छत्तीसगढ़ में पुरातात्विक उत्खनन
छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पुरातात्विक खुदाई का काम स्वतंत्रता के बाद सिरपुर में शुरू हुआ।
🗺️ पुरातात्विक खोजों से छत्तीसगढ़ की संपन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी मिलती है।
🏗️ स्थापत्य
स्थापत्य में प्राचीन काल में बने सभी स्मारक शामिल हैं, जैसे – किले, मंदिर, महल, विहार और उनके खंडहर। प्रागैतिहासिक और आद्य-ऐतिहासिक काल में मुख्य रूप से पत्थर, तांबे और लोहे के औजार और मिट्टी के बर्तन पाए गए हैं। इसके साथ ही बालोद के धनोरा नामक स्थान से एक शव स्मारक भी मिला है। हालांकि, इसे स्मारकों की श्रेणी में नहीं गिना जाता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ से मिले अवशेष मुख्य रूप से ऐतिहासिक काल के हैं।
🕍 मंदिर वास्तुकला
शैली: 🏛️ क्षेत्रीय विभाजन के दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ बेसर शैली के अंतर्गत आता है। इस इलाके में एक विशेष मंदिर निर्माण शैली का उल्लेख कुछ प्राचीन ग्रंथों में पाया गया है, जिससे यहां की प्रसिद्ध कोसली मंदिर वास्तुकला शैली के बारे में पता चलता है।
📌 छत्तीसगढ़ के प्राचीनतम मंदिर
📜 प्रदेश में मंदिर वास्तुकला की शुरुआत लगभग 5वीं शताब्दी में शरभपुरीय वंश के शासनकाल में हुई।
✨ मनियारी नदी के किनारे स्थित ताला गांव में ‘देवरानी-जेठानी मंदिर’ मौजूद है। इस मंदिर की संरचना और पत्थर का उत्कृष्ट उपयोग उस समय की कला का बेहतरीन नमूना है।
📌 इष्टिका पुष्टित के मंदिर का काल (6-9वीं शताब्दी)
श्रृंखला: 🧱 छत्तीसगढ़ क्षेत्र में 6ठीं से 9वीं शताब्दी के दौरान ईंटों से मंदिरों के निर्माण का एक सिलसिला देखने को मिलता है।
मंदिर: 🛐 सिरपुर में स्थित लक्ष्मण और राम मंदिर, खरौद का शबरी मंदिर एवं इन्दल देवल, पुजारीपाली का केंवटीन मंदिर, पलारी का सिद्धेश्वर मंदिर, धोबनी का चितावरी मंदिर और राजिम का राजीव लोचन मंदिर, ये सभी मुख्य रूप से ईंटों से बनाए गए हैं।
अपवाद: 💎 इसी दौर में एक अपवाद मल्हार का पत्थर से बना ‘देउर मंदिर’ है, जो ऐसा लगता है कि ताला के मंदिरों की कला शैली का अनुसरण करके बनाया गया है।
मंडप: 🏛️ ईंटों से बने मंदिरों की जमीनी योजना में आमतौर पर एक गर्भगृह, एक अंतराल और स्तंभों पर टिका हुआ एक मंडप होता है। ज्यादातर मंदिरों में अब मंडप नष्ट हो चुके हैं। इन मंदिरों का निर्माण ऊर्ध्वाधर विन्यास में किया गया था।
गर्भगृह: 🙏 गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर स्तंभों और चबूतरे के लिए पत्थर का इस्तेमाल किया गया है, जबकि बाकी का निर्माण ईंटों से हुआ है।
📌 सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर
🌟 छत्तीसगढ़ के ईंट मंदिरों में, सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर भारतीय वास्तुकला का एक अद्वितीय उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
🎨 ईंटों को तराशकर मंदिर की बाहरी दीवारों पर विभिन्न प्रकार की सजावट की गई है, जिसमें चैत्य और कीर्तिमुख जैसी आकृतियाँ शामिल हैं।
🖼️ गर्भगृह का प्रवेश द्वार गुप्तोत्तर काल की कला का एक शानदार नमूना है, जिस पर भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों और कृष्ण लीला के दृश्यों को दर्शाया गया है।
🕉️ गर्भगृह के भीतर बैकुंठ नारायण की प्रतिमा स्थापित की गई है। [CG Vyapam (PHEH)2023]
📌 पाषाण निर्मित कलचुरिकालीन अथवा मध्यकालीन मंदिर वास्तु
🏰 कलचुरि काल की मंदिर वास्तुकला के नमूने आरंग (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), नारायणपुर (बलौदाबाजार), खल्लारी (महासमुंद), तुम्माण (कोरबा), रतनपुर, मल्हार, किरारीगोढ़ी (बिलासपुर), सारागांव, शिवरीनारायण, जांजगीर-चांपा, पाली (कोरबा), बलौदा, देवरबीजा, गंडई बिरखा और घटियारी जैसे स्थानों पर पाए जाते हैं।
📌 दुर्लभ सूर्य मंदिर
☀️ छत्तीसगढ़ में, सरगुजा जिले के डीपाडीह और बलौदाबाजार जिले के नारायणपुर में सूर्य (आदित्य) के मंदिर स्थित हैं। बिलासपुर जिले के मल्हार से एक ही आकार की कई सूर्य प्रतिमाएँ मिली हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि वहाँ द्वादश (बारह) आदित्य मंदिर रहे होंगे।
🗿 मूर्तिकला
ईसा पूर्व दूसरी सदी से लेकर 14वीं सदी ईस्वी तक की मूर्तिकला के कई बेहतरीन उदाहरण पाए गए हैं।
प्रारंभिक मूर्तिशिल्प (200-500 ई.)
🙏 इस श्रेणी की मूर्तियों में, बिलासपुर जिले के बुढ़ीखार (मल्हार) नामक जगह पर मिले सबूतों के आधार पर देश की सबसे पुरानी अंकित चतुर्भुज विष्णु मूर्ति मिली है।
📜 यह मूर्ति चारों तरफ से उकेरी गई है और इस पर यक्ष परंपरा का साफ प्रभाव दिखाई देता है। इसकी लिपि के आधार पर, इसे ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी का माना गया है।
🗿 उत्तरोत्तरकालीन शिल्प (500 से 800 ईस्वी)
काल: 🕰️ वाकाटक काल के बाद, स्थानीय राजवंशों जैसे शरभपुरीय, नलवंशी और सोमवंशी के शासनकाल में बनी कलाकृतियाँ इस श्रेणी में आती हैं। इन कला अवशेषों का समय 5वीं से 8वीं शताब्दी ईस्वी के आस-पास का माना जाता है।
कलाकृतियाँ: 🎨 इस दौर की शिल्पकला में स्वतंत्र मूर्तियों के साथ-साथ मंदिर वास्तुकला में उपयोग की गई कलाकृतियाँ भी शामिल हैं।
स्थल: 📍 इस काल में, छत्तीसगढ़ की सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों का सृजन ताला, सिरपुर, मल्हार, अड़भार, खरौद, शिवरीनारायण और राजिम जैसे स्थानों पर हुआ।
जेठानी मंदिर: 🏛️ ताला गांव के खंडित जेठानी मंदिर से कई विशाल मूर्तियाँ मिली हैं, जो स्थानीय परतदार पत्थरों से बनाई गई हैं।
साम्य: ✨ यहाँ से मिले स्थापत्य खंडों के अवशेषों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि ये मूर्तियाँ गुप्तकालीन मूर्तियों के साथ अद्भुत समानता रखती हैं।
देवरानी मंदिर के द्वार पर बने स्तंभ भारतीय कला का एक बेहतरीन नमूना हैं, जिसमें पुष्प-लताओं, गंगा-यमुना, उमा-महेश्वर, शिव-पार्वती की चौसर क्रीड़ा, गंगावतरण और कीर्तिमुख का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है।
👑 कलचुरिकालीन अर्थात मध्यकालीन शिल्प (1000 से 1400 ईस्वी)
इस समय की मूर्तियाँ छत्तीसगढ़ के कई स्थानों से मिली हैं। इन मूर्तियों को बलुआ पत्थर या काले ग्रेनाइट से बनाया गया था।
ये मूर्तियाँ वैष्णव, शैव, सौर, शाक्त, जैन और बौद्ध धर्मों से संबंधित हैं। इनके अलावा, राजाओं, रानियों, सामंतों और उपासकों की मूर्तियाँ भी बनाई गई थीं।
कलचुरि काल की मूर्तिकला के अवशेष जांजगीर, शिवरीनारायण, मल्हार, खरौद, रतनपुर, पाली, सिरपुर, राजिम, आरंग, कोटगढ़, और अड़भार जैसे स्थानों से प्राप्त हुए हैं।
🏹 गोंड मूर्ति शिल्प (1500-1700 ईस्वी)
काल: 쇠 इस अवधि में छत्तीसगढ़ की कला में गिरावट देखी गई, लेकिन कलात्मक गतिविधियाँ 17वीं-18वीं शताब्दी तक जारी रहीं, जिन्हें गोंडकालीन कलाकृतियों के रूप में जाना जाता है।
संग्रहित: 🖼️ इसके अंतर्गत आमतौर पर गोंड सरदारों या सैनिकों की मूर्तियाँ मिलती हैं। लगभग इसी समय के तीन मंदिरों की मूर्तियाँ रायपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं।
🏺 धातु प्रतिमाएं
सिरपुर की धातु प्रतिमाएं
सांस्कृतिक समृद्धि: ✨ सिरपुर से मिली कई धातु की मूर्तियाँ सोमवंशी शासनकाल में छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सांस्कृतिक संपन्नता को दर्शाती हैं।
महत्वपूर्ण खोज: 📜 तत्कालीन मालगुजार श्यामसुंदर दास के अधिकार क्षेत्र से 25 धातु की प्रतिमाएं मिली थीं। इनमें से छह मूर्तियां उन्होंने विभिन्न लोगों को भेंट कर दी थीं, और दो मूर्तियां मुनि कांति सागर को प्रदान की गई थीं। इन सभी में, ‘तारा’ की प्रतिमा को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
💰 छत्तीसगढ़ में प्राप्त सिक्के
ईसा पूर्व के सिक्के
रायपुर जिले के तारापुर, आरंग और उड़ेला जैसे स्थानों से कुछ आहत मुद्राएँ (punch-marked coins) प्राप्त हुई हैं।
प्राक्-मौर्य काल के सिक्कों का वजन 32 रत्ती निर्धारित था और उन पर पाँच चिह्न अंकित होते थे।
इन सिक्कों पर चार चिह्न—हाथी, बैल, बिंदुओं से घिरे हुए नेत्र, और हल के साथ बैलों की एक जोड़ी—अंकित हैं।
मौर्यकाल के सिक्के प्रमुख रूप से अकलतरा, ठठारी, बार और बिलासपुर से मिले हैं।
🪙 ईसा के पश्चात प्राचीनकालीन सिक्के
सातवाहन सिक्के: 👑 मौर्योत्तर काल में, सातवाहन वंश के राजा अपीलक की मुद्राएँ सक्ती जिले के बालपुर और बिलासपुर के मल्हार से मिली हैं। इस राजा ने सातवाहन सिक्कों का अनुकरण करते हुए स्थानीय राजाओं के माध्यम से तांबे के चौकोर सिक्के चलाए। इन सिक्कों के अग्रभाग पर हाथी की अस्पष्ट आकृति और पृष्ठ भाग पर नाग या खड़ी हुई स्त्री की आकृति अंकित है। इस तरह के सिक्के मल्हार और बालपुर से मिले हैं।
📜 मल्हार से ‘वेदिश्री’ के नाम वाली एक मिट्टी की मुद्रा भी मिली है। [CG PSC(Pre)2024]
🌟 गुप्तकालीन सिक्के
गुप्त अधिसत्ता: 🗡️ छत्तीसगढ़ क्षेत्र में गुप्त सत्ता की स्थापना हो गई थी, जैसा कि समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति से पता चलता है, जिसमें उन्होंने राजा महेन्द्र को हराया था।
मुद्राओं की प्राप्ति: 💰 छत्तीसगढ़ में गुप्त राजाओं की मुद्राएँ 1969 में बानबरद नामक स्थान से मिलीं, जिनकी संख्या नौ थी। इनमें से एक सिक्का ‘कांच’ नामक राजा का है, जिसकी पहचान एलन महोदय ने समुद्रगुप्त से की है।
कुल 07 सिक्के स्कंदगुप्त के, 01 कुमारगुप्त प्रथम का और 01 कांचगुप्त का मिला है। इसके अतिरिक्त, आरंग से कुमारगुप्त प्रथम का एक चाँदी का सिक्का भी प्राप्त हुआ है।
🌏 विश्व के अद्वितीय उत्पीडितांक अथवा ठप्पांकित मुद्राएं
अद्वितीय सिक्के: 🪙 छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों से मिले ठप्पांकित या उभारदार सिक्के पूरी दुनिया के मुद्राशास्त्रीय इतिहास में अद्वितीय हैं। गुप्त और गुप्तोत्तर काल में छत्तीसगढ़ पर विभिन्न राजवंशों ने शासन किया, और इस दौरान एक खास शैली के सिक्कों का प्रचलन हुआ।
काल निर्धारण: 🧠 मुद्राशास्त्री डॉ. लक्ष्मीशंकर निगम के अनुसार, ये सिक्के 6वीं सदी के हैं।
प्राप्ति स्थल: 📍 ये सिक्के रायपुर के खैरताल, पितेबंदगांव; महासमुंद जिले के महासमुंद; बस्तर के एडेंगा; दुर्ग के कुलिया; रायगढ़ के बहरामपुर, नहना मारागुड़ा, मदनपुर, रामपुर; महाराष्ट्र के भंडारा; और झारखंड के शाहाबाद जैसे विभिन्न स्थानों से प्राप्त हुए हैं।
संग्रह: 📜 ये सभी सिक्के उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के संग्रहालयों में रखे गए हैं। इनमें महेन्द्रादित्य (215), स्कन्दगुप्त (4), प्रसन्नमात्र (127), वराहराज (29), भवदत्त (3), नन्दराज (1), स्तम्भ (1), और सभी नागवंशी सिक्के शामिल हैं।
सक्ती जिले के बाराद्वार के पास तलवा गांव से 81 से अधिक सिक्कों का मिलना इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को दर्शाता है।
🏹 सोमवंशी सिक्के
बालपुर (सक्ती) से ‘केशरी’ लेख वाला एक सोने का सिक्का मिला है। इस पर पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय का मानना है कि यह महाशिवगुप्त बालार्जुन के भाई की मुद्रा हो सकती है।
⚔️ कल्चुरी सिक्के
स्वतंत्र सत्ता: 👑 छत्तीसगढ़ में स्थित कलचुरियों की रतनपुर शाखा ने समय के साथ त्रिपुरी की अधीनता स्वीकार करना बंद कर दिया। जाजल्यदेव प्रथम ने अपने नाम के सिक्के चलाना शुरू किया। इस वंश के अन्य शासकों जैसे रत्नदेव द्वितीय, पृथ्वीदेव द्वितीय और प्रतापमल्ल ने भी सिक्के जारी किए।
विभिन्न धातुएं: ✨ जाजल्यदेव प्रथम ने सोने और तांबे के सिक्के बनवाए, जबकि रत्नदेव द्वितीय और पृथ्वीदेव द्वितीय ने सोना, चांदी और तांबा—तीनों धातुओं में सिक्के जारी किए।
प्रतापमल्ल के सिक्के: 🪙 प्रतापमल्ल ने केवल तांबे के सिक्के जारी किए।
सिक्कों की बनावट: 🦁 इनके सिक्कों के अग्रभाग पर हाथी पर हमला करते हुए सिंह का चित्रण मिलता है, जबकि पृष्ठ भाग पर राजा का नाम अंकित होता है। चाँदी के सिक्के सोने के सिक्कों की नकल करके बनाए गए थे, लेकिन तांबे के सिक्कों से पूरी तरह अलग थे।
👹 इसमें राक्षस पर आक्रमण करते हुए हनुमान अथवा सिंह और कटार का चित्रण मिलता है और पृष्ठभाग में राजा का नाम अंकित है। [CG PSC(Pre)2022]
लक्ष्मी का अभाव: 💰 रत्नदेव के सिक्कों पर गज-लक्ष्मी का चित्र नहीं मिलता है।
📜 मुहरें एवं मुद्रांक
मल्हार से प्राप्त मुहरें
🔍 मल्हार की खुदाई से ‘वेद सिरिस’, ‘गामस कोसली’ और ‘महाराज महेन्द्रस्य’ नाम के मुद्रांक प्राप्त हुए हैं। [CG PSC(VAS)2021]
इसके अलावा, मल्हार से चंद्राकर, केशवदेवस्य आदि मुहरें और प्रसन्नमात्र की मुद्रांक के साथ-साथ कुछ अन्य मुहरें और मुद्रांक भी मिले हैं।
सिरपुर से प्राप्त मुहरें
👑 सिरपुर की खुदाई से ‘नन्नराज’ नामक राजा की मुहर मिली है।
☸️ बौद्ध मंत्रों वाले मुद्रांक भी मिले हैं, जिन पर बुद्ध और अवलोकितेश्वर के चित्र अंकित हैं।
अन्य मुहरें
इसके अतिरिक्त, बालपुर से बालकेश्वरी की एक पत्थर की मुद्रा प्राप्त हुई है।
ये सभी मुद्राएँ और मुद्रांक पहली से सातवीं शताब्दी ईस्वी के हैं।
✍️ अभिलेख
महत्वपूर्ण अभिलेख
प्राप्त अभिलेख: 📜 इस क्षेत्र से मौर्यकालीन, सातवाहनकालीन, वाकाटक, गुप्तकालीन, गुप्तोत्तर और कलचुरिकालीन अभिलेख मिले हैं।
प्रमुख राजवंश: 🏛️ नल, राजर्षितुल्य, शरभपुरी, सोमवंशी आदि प्राचीन काल के, तथा मध्यकालीन अभिलेखों में कलचुरि, बस्तर के छिंदक नागवंश और काकतीय वंश, कवर्धा के फणीनागवंश, कांकेर के परवर्ती सोमवंश जैसे राजवंशों के अभिलेख प्राप्त हुए हैं।
विशेष लेख: ✒️ इनमें रामगढ़ का गुफा अभिलेख (तीसरी-दूसरी सदी ई.पू.), किरारी काष्ठ स्तम्भ लेख (दूसरी सदी ईस्वी), सोमवंशी बालार्जुन के 27 ताम्रपत्र (600-650 ईस्वी), नल राजा विलासतुंग का राजिम शिलालेख (700-740 ईस्वी), नागवंशी रानी गंगमहादेवी का बारसूर शिलालेख (1208 ईस्वी), नरसिंह देव के जतनपाल शिलालेख (1224 ईस्वी), टेमरा का सती स्मारक लेख (1324 ईस्वी), कवर्धा का मड़वा महल अभिलेख (1349 ईस्वी), कांकेर के सोमवंशी भानुदेव का कांकेर शिलालेख (1320 ईस्वी), और काकतीयों का दंतेवाड़ा शिलालेख (14वीं सदी का पूर्वार्ध) आदि महत्वपूर्ण लेख हैं।
बाहरी अभिलेख: 🗺️ इनमें कुछ ऐसे महत्वपूर्ण लेख भी हैं जो छत्तीसगढ़ के बाहर के हैं, लेकिन उनसे छत्तीसगढ़ के बारे में जानकारी मिलती है। इनमें भानुगुप्त का एरण अभिलेख और नलवंशी शासकों के ऋद्धिपुर, केसरीबेड़ा, और पोड़ागढ़ अभिलेख प्रमुख हैं।