यह सारणी भारत और छत्तीसगढ़ की जनजातियों से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्यों की तुलना करती है:
आधार
भारत के जनजातीय तथ्य
छत्तीसगढ़ के जनजातीय तथ्य
📜 संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद-342
अनुच्छेद-342
🔢 प्रकार
706
42
🏅 विशेष पिछड़ी जनजाति
75
05 (केंद्र सरकार द्वारा) + 02 (राज्य सरकार द्वारा)
👨👩👧👦 कुल जनसंख्या
10.42 करोड़
78.22 लाख
📈 जनसंख्या प्रतिशत
8.6%
30.62% [CG PSC(ARO)2014]
🔢 संख्यानुसार क्रम
भील > गोंड़ > संथाल
गोंड़ > कंवर > उराँव
📈 जनसंख्या में क्रम
मध्यप्रदेश > महाराष्ट्र > ओडिशा
जशपुर > बस्तर > रायगढ़ [CG PSC(ARO)2022]
📈 प्रतिशत में क्रम
मिजोरम > नागालैंड > मेघालय
सुकमा > बीजापुर > नारायणपुर
📌 जनजातियों का सामान्य परिचय
📖 जनजातीय सूची से संबंधित प्रावधान
संवैधानिक आधार: इसका प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में मिलता है।
सूची का स्रोत: छत्तीसगढ़ में जनजातियों की सूची “मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000” में दी गई है। [CG PSC(Pre)2013, 2019]
धारा: यह धारा 20 के अंतर्गत आता है।
जनजातियों के प्रकार: छत्तीसगढ़ में कुल 42 प्रकार की जनजातियाँ पाई जाती हैं, जिन्हें आगे 161 उपसमूहों में विभाजित किया गया है। [CG Vyapam(ADEO)2017],[CG PSC(ADH)2011]
🏛️ छत्तीसगढ़ में जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान
स्थान: नवा रायपुर, अटल नगर [CG PSC(Asst. HYD)2020, (MI)2014, (ARO) 2022]
स्थापना: 2 सितम्बर, 2004 [CG PSC(Pre)2022]
राष्ट्रीय क्रम: यह देश का 15वां जनजातीय अनुसंधान केंद्र है।
इस तालिका में 12 नवीन जनजातियों को उनके स्वीकार्य पर्यायों के साथ सूचीबद्ध किया गया है:
शामिल जनजाति
पर्याय
भूईंया, भूईयां, भूयां
भारिया, भूमियां
भरिया
भारिया
पंडो, पण्डो, पन्डो
पांडो
धनुहार, धनुवार
धनवार
गोंड़
गदबा, गोंड
कोंद
कौंध
कोड़ाकू
कोडाकू
किसान
नगेसिया, नागासिया
धांगड़
धनगढ़
🗺️ जनजातीय समुदायों का जिलेवार वितरण
जनजातीय जनसंख्या और निवास के आधार पर छत्तीसगढ़ को तीन प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है:
⛰️ उत्तरी सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें सरगुजा संभाग में निवास करने वाली जनजातियाँ शामिल हैं।
🏞️ मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर संभाग की जनजातियाँ आती हैं।
🌲 दक्षिणी सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें बस्तर संभाग में निवास करने वाली जनजातियाँ शामिल हैं।
💡 विशेष तथ्य: मध्य छत्तीसगढ़ की अपेक्षा उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में जनजातियों की संख्या अधिक है। बस्तर को “जनजातियों की भूमि” भी कहा जाता है। [CGPSC(ARTO)2022]
🏅 केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG)
जनजातीय समुदाय
निवास क्षेत्र एवं जिला
बैगा
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मुंगेली, कबीरधाम, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बिलासपुर (मैकल श्रेणी क्षेत्र), कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। [CGVyapam (SET)2024][CGVyapam(LOI)2018,(SI Mains)2023] ध्यान दें: ये मध्यप्रदेश के डिंडोरी, मंडला, जबलपुर और शहडोल जिलों में भी पाए जाते हैं।
अबूझमाड़िया
बीजापुर, दंतेवाड़ा एवं नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में। [CGPSC(Pre)2021]
कमार [CGVyapam(SGST)2021]
गरियाबंद (छुरा एवं मैनपुर विकासखण्ड), धमतरी (नगरी एवं मगरलोड विकासखण्ड), महासमुंद (बागबहरा एवं महासमुंद विकासखण्ड)। [CGVyapam(ASO)2012,(EAE)2018]
पहाड़ी कोरवा
कोरबा, सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर। [CGPSC(Pre)2021]
बिरहोर
रायगढ़ (धरमजयगढ़, लैलूंगा, तमनार विकासखण्ड), जशपुर (बगीचा, कांसाबेल, दुलदुला, पत्थलगांव विकासखण्ड), कोरबा (पाली, पोंड़ी-उपरोड़ा, कोरबा विकासखण्ड), बिलासपुर (कोटा व मस्तूरी विकासखण्ड)। ध्यान दें: इनकी अधिकतम आबादी झारखंड राज्य में है।
🎖️ राज्य सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ
जनजाति
निवास क्षेत्र एवं जिला
भुजिया
गरियाबंद। ध्यान दें: ये ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र में भी मिलते हैं। [CGPSC(Pre)2018, 2021][CGPSC(ADHIS)2008]
पण्डो
सरगुजा संभाग।
🌟 छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ
जनजाति
निवास क्षेत्र एवं जिला
गोंड़
कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर (बस्तर संभाग), धमतरी (रायपुर संभाग), कबीरधाम (दुर्ग संभाग), बिलासपुर, कोरबा (बिलासपुर संभाग), सरगुजा, सूरजपुर (सरगुजा संभाग)। [CGVyapam(SET)2024], [CGPSC(ACF)2017] ध्यान दें: राज्य के अन्य जिलों में इनकी जनसंख्या तुलनात्मक रूप से कम है।
इस पृष्ठ में छत्तीसगढ़ के जनजातियों के वितरण को दर्शाने वाला एक मानचित्र शामिल है, जिसके साथ दो तालिकाएँ भी हैं।
🤝 छत्तीसगढ़ की मिश्रित जनजातियाँ (संकर)
यह तालिका उन जनजातियों को दर्शाती है जो अन्य जनजातियों के मिश्रण से बनी हैं:
मिश्रित जनजाति
उत्पत्ति
भैना
बैगा + कंवर
धनवार
गोंड़ + कंवर
मंझवार
गोंड़ + मुंडा + कंवर
माझी
गोंड़ + मुंडा + कंवर
✨ जनजातियों से जुड़े विशेष तथ्य
तथ्य
संबंधित जनजाति
सबसे बड़ा जनजाति समूह
गोंड़ [CG PSC (Pre.)2013]
सबसे छोटा जनजाति समूह
सौर
सबसे पिछड़ी जनजाति
अबूझमाड़िया
आर्थिक रूप से समृद्ध जनजाति
हल्बा
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनजाति
मुड़िया
सामाजिक दृष्टि से उच्च जनजाति
भतरा
🏹 कंवर जनजाति का निवास क्षेत्र
कंवर जनजाति का सर्वाधिक संकेंद्रण बिलासपुर संभाग में पाया जाता है।
अन्य क्षेत्र: बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चाम्पा, सक्ती, रायगढ़ (बिलासपुर संभाग); कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, बलरामपुर (सरगुजा संभाग); रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद (रायपुर संभाग); और राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कवर्धा (दुर्ग संभाग) में भी ये निवास करते हैं। [CGPSC(ACF)2017]
🌳 उरांव जनजाति का निवास क्षेत्र
प्रमुख क्षेत्र: जशपुर, रायगढ़, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया (छत्तीसगढ़ की उत्तर-पूर्वी सीमा)। [CGPSC(ACF)2017], [CGVyapam(LOI)2015,(EAE) 2018]
💡 विशेष नोट: यह जनजाति झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी पाई जाती है। [CGPSC(CMO)2010]
⛰️ उत्तरी सांस्कृतिक क्षेत्र (सरगुजा संभाग) की जनजातियाँ
कोरवा: सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़ तथा कोरबा।
खड़िया: जशपुर, रायगढ़, रायपुर, महासमुंद। (यह जनजाति बिहार और ओडिशा में भी पाई जाती है।)
खैरवार: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर एवं बिलासपुर। (मध्यप्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में इन्हें ‘कोन्दर’ नाम से जाना जाता है।)
भारिया भूमिया, भुईहर भूमिया, भूमियाँ, भारिया:
भारिया: बिलासपुर एवं मध्यप्रदेश के शहडोल और मंडला क्षेत्र (पालिहा)।
भूमिया: सरगुजा, रायगढ़, जशपुर।
पांडो: सरगुजा क्षेत्र में (पंडो राज्य सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है)।
💡 विशेष नोट: छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) की पातालकोट घाटी में रहने वाले भारिया परिवारों को भारत सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल किया है।
मांझी: सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, कोरबा।
मंझवार: सरगुजा, बलरामपुर, रायगढ़, कोरबा।
मुण्डा: जशपुर एवं बलरामपुर। यह झारखण्ड की एक प्रमुख जनजाति है, इसलिए छत्तीसगढ़ के झारखण्ड से सटे जिलों में प्रमुखता से निवास करती है। [CG Vyapam (MFA-1)2023]
नगेशिया: बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, सरगुजा। (यह झारखण्ड की प्रमुख जनजाति है)। [CGPSC(IMO)2020]
पण्डो: सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया।
बियार: कोरिया, सरगुजा क्षेत्र में। ये मुख्य रूप से गोंड़ और खैरवार जनजातियों के साथ रहते हैं। [CG PSC(CMO)2019]
कोरकू: उत्तर छत्तीसगढ़।
भील: कोरिया। [CG Vyapam (MFA-1)2023]
🌐 मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र की जनजातियाँ (बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग संभाग)
क्र.
जनजातीय समुदाय
निवास क्षेत्र एवं जिला
01.
अगरिया
कवर्धा, बिलासपुर, कोरिया, सरगुजा, जशपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही।
02.
बिंझवार
बलौदाबाजार, रायपुर, महासमुंद, रायगढ़, कोरबा एवं बिलासपुर। [CGPSC(Pre)201]
03.
धनवार
बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, सरगुजा, रायगढ़।
04.
भैना
बिलासपुर, रायगढ़।
05.
भुजिया
गरियाबंद।
06.
कण्डरा
रायपुर, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, धमतरी व गरियाबंद।
07.
कोंध
महासमुंद एवं रायगढ़। (नोट – ओडिशा और आंध्रप्रदेश में भी पाये जाते हैं)
08.
कोल
कोरिया और बिलासपुर।
09.
संवरा
महासमुंद, रायगढ़, बिलासपुर।
10.
सौंता
सरगुजा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़।
11.
शिकारी, पारधी
छत्तीसगढ़ के अधिकांश मैदानी क्षेत्र में।
12.
पाव
बिलासपुर।
13.
परधान
बिलासपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और कबीरधाम। (नोट- मध्यप्रदेश के डिंडोरी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा एवं जबलपुर क्षेत्र में भी पाये जाते हैं) [CGPSC(CMO)21]
🌲 दक्षिण सांस्कृतिक क्षेत्र की जनजातियाँ (बस्तर संभाग)
क्र.
जनजातीय समुदाय
निवास क्षेत्र एवं जिला
01.
मुरिया
कोण्डागांव, बस्तर एवं नारायणपुर। [CGPSC(ADHIS)2008,(ADJ)201]
बस्तर संभाग (मूल निवास ओडिशा राज्य है)। [CG PSC(CMO)2019]
08.
कोया
बीजापुर। [CG Vyapam (TET)2019]
💎 प्रेरक विचार: “कुदरत ने सभी को हीरा बनाया है, जो जितना घिसेगा उतना ही चमकेगा।”
👨👩👧👦 जनजातियों की उपजाति (Sub-Tribes)
छत्तीसगढ़ प्रदेश में मुख्य रूप से 42 प्रकार की जनजातियों का निवास है, जिन्हें आगे 161 उप-जातियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें से, गोंड़ समुदाय की सर्वाधिक 41 उपजातियां और 30 शाखाएं हैं। कुछ प्रमुख जनजातियों की उपजातियाँ इस प्रकार हैं:
⭐ प्रेरक विचार: “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।”
🏛️ आदिवासी एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सरकार ने आदिवासी और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए विकास प्राधिकरणों का गठन किया। 2004 में बने इन प्राधिकरणों का 20 जून 2024 को पुनर्गठन किया गया, जिसका विवरण इस प्रकार है:
1. बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण
गठन: 20 जून 2024 [CGPSC(AMO)2022]
मुख्यालय: जगदलपुर
विस्तार: 1. उत्तरी बस्तर कांकेर, 2. कोण्डागांव, 3. बस्तर, 4. दक्षिणी बस्तर दंतेवाड़ा, 5. सुकमा, 6. बीजापुर, 7. नारायणपुर
बिलासपुर संभाग: कोरबा (सम्पूर्ण), गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (सम्पूर्ण), मुंगेली, बिलासपुर, रायगढ़ के आंशिक क्षेत्र तथा सक्ती जिले के उपयोजना क्षेत्र के 46 ग्राम।
रायपुर संभाग: बलौदाबाजार, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी के आंशिक क्षेत्र।
दुर्ग संभाग: मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (सम्पूर्ण) एवं बालोद, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों सहित, कबीरधाम के आंशिक क्षेत्र।
💡 ध्यान दें: इसमें वे क्षेत्र शामिल होंगे जहाँ अनुसूचित जनजाति की आबादी 25% से अधिक है।
4. अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण
गठन: 20 जून 2024
मुख्यालय: रायपुर
प्रावधान:
यह उन ग्रामों, पारा, और वार्डों में कार्य करेगा जहाँ अनुसूचित जाति की संख्या 25% से अधिक है।
प्रमुख जिले: जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, कबीरधाम, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं धमतरी।
अन्य जिलों में मजरा–टोला, पारा, मोहल्ला, या नगरीय वार्ड जहाँ अनुसूचित जाति की जनसंख्या 25% से ज्यादा है, वे भी इसमें शामिल होंगे।
📊 छत्तीसगढ़ के प्रमुख विकास प्राधिकरण एवं सलाहकार परिषद: एक नजर में
प्राधिकरण/परिषद
स्थापना
मुख्यालय
कार्यक्षेत्र
बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण
20 जून 2024
जगदलपुर
बस्तर संभाग
सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण
20 जून 2024
अम्बिकापुर
सरगुजा संभाग
मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण
20 जून 2024
रायपुर
बिलासपुर + रायपुर + दुर्ग संभाग
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण
20 जून 2024
रायपुर
–
अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद्
23 जुलाई 2019
–
सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद्
20 जनवरी 2023
–
सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
अन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद्
20 जनवरी 2023
–
सम्पूर्ण छत्तीसगढ़
⭐ प्रेरक विचार: “किसी ने सच ही कहा संघर्षों की रातों में इंसान अकेला होता है, और जब सफलता आती है तो पूरा काफिला आपके पीछे होता है।”
🌱 विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (Particularly Vulnerable Tribal Groups – PVTG)
प्रारंभ: 1973 में ढेबर आयोग की सिफारिश पर।
आशय: वे जनजातीय समूह जो अन्य जनजातियों से भी अधिक पिछड़े हुए हैं और समाज की मुख्य धारा से दूर हैं, उन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति कहा जाता है।
नोट: देश भर में ऐसे 75 जनजातीय समूहों की पहचान की गई है, जो 18 राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में निवास करते हैं।
नामकरण: भारत सरकार ने 2006 में ‘आदिम जनजाति समूह (PTG)’ का नाम बदलकर ‘विशिष्टतः असुरक्षित जनजाति समूह (PVTG)’ कर दिया। [CG PSC(VAS)2021]
मापदंड (5वीं पंचवर्षीय योजना के तहत):
साक्षरता दर अत्यंत कम (2% या उससे कम)। [CGPSC(Pre)2023, (ARO)2022]
घटती या स्थिर जनसंख्या। [CG PSC(Pre)2023, (ARO)2022]
आदिम जीवन शैली (कृषि-पूर्व की पद्धतियाँ)।
आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़ी स्थिति (शिकार, वनोपज संग्रहण पर निर्भरता)। [CG PSC(ARO)202]
🔢 छत्तीसगढ़ में PVTGs की संख्या
कुल संख्या: 7 (5+2)
केंद्र सरकार द्वारा घोषित (5): अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा।
राज्य सरकार द्वारा घोषित (2): भुंजिया, पण्डो।
📊 जनगणना और साक्षरता
विशेष पिछड़ी जनजाति
जनसंख्या
साक्षरता
01. बैगा
88,317 (सर्वाधिक)
40.6%
02. पहाड़ी कोरवा
44,026
22.02%
03. कमार
26,622
47.7%
04. अबूझमाड़िया
23,330
19.25%
05. बिरहोर
3,490
39%
01. पण्डो
31,814
–
02. भुजिया
10,603
–
📜 पाँचवीं अनुसूची और छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र
संवैधानिक प्रावधान: पाँचवीं अनुसूची का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग 10 में है। अनुसूचित क्षेत्रों को पहली बार 1950 में अधिसूचित किया गया था।
अनुच्छेद-244(1): यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को छोड़कर अन्य राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है।
अनुच्छेद-244(2): यह 6वीं अनुसूची के तहत असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान करता है।
सम्मिलित राज्य: वर्तमान में 10 राज्य पाँचवीं अनुसूची में शामिल हैं – छत्तीसगढ़, झारखण्ड, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, और हिमाचल प्रदेश।
📅 छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र की अधिसूचना
छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र को राष्ट्रपति द्वारा 20 फरवरी 2003 को अधिसूचित किया गया।
इसके तहत 85 विकासखण्डों के 5050 ग्राम पंचायत शामिल हैं।
📊 महत्वपूर्ण आँकड़े (छत्तीसगढ़)
विवरण
आँकड़ा (2024-25)
जनगणना (2011)
राज्य का क्षेत्रफल
1,35,192 km²
–
राज्य का अनुसूचित क्षेत्र
81,861.88 km²
–
आदिवासी उपयोजना क्षेत्र
91,253 km²
–
कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में प्रतिशत
67.50%
–
राज्य की कुल जनसंख्या
–
255.45 लाख
अनुसूचित जनजाति
–
78.22 लाख (30.62%)
अनुसूचित जाति
–
32.47 लाख (12.81%)
राजस्व जिले
28
–
पूर्णतः अनुसूचित जिले
16
–
आंशिक रूप से अनुसूचित जिले
05
–
आदिवासी विकासखंड
85
–
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP)
19
–
माडा पाकेट (MADA)
09
–
लघु अंचल
02
–
विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह अभिकरण
08 (6+2)
–
विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह प्रकोष्ठ
10
–
🏛️ जनजातियों से संबंधित अभिकरण एवं प्रकोष्ठ
🌟 केंद्रीय अभिकरण (6)
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरण, कवर्धा
विशेष पिछड़ी जनजाति अबूझमाड़िया विकास अभिकरण, नारायणपुर – इसकी स्थापना 13 जून 1978 (1978-79) को हुई। [CGPSC(ADH) 2022]
विशेष पिछड़ी जनजाति कमार विकास अभिकरण, गरियाबंद – इसकी स्थापना 04 सितम्बर 2009 को की गई।
विशेष-पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण, अम्बिकापुर
विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास अभिकरण, जशपुर
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरण, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) – इसका पुनर्गठन 14 सितम्बर 2022 को किया गया।
⭐ राजकीय अभिकरण (2)
छत्तीसगढ़ शासन ने, भारत सरकार के अतिरिक्त, भुजिया और पण्डो जनजातियों को विशेष रूप से कमजोर जनजाति का दर्जा दिया है। इनके विकास के लिए निम्नलिखित अभिकरण बनाए गए हैं:
अभिकरण
स्थापना
मुख्यालय
पण्डो विकास अभिकरण
2002–2003
सूरजपुर
भुजिया विकास अभिकरण
2002–2003
गरियाबंद
🏢 प्रकोष्ठ (10)
विशेष रूप से कमजोर जनजातियों के विकास के लिए, अनुसूचित जनजाति प्रशासन/प्राधिकरण एवं अभिकरणों/प्रकोष्ठों का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विकास योजनाओं को छत्तीसगढ़ शासन संचालित कर रहा है। [CGPSC(AMO, Sci. Off.) 2022]
कमार विकास प्रकोष्ठ, नगरी
कमार विकास प्रकोष्ठ, भानुप्रतापपुर
कमार विकास प्रकोष्ठ, महासमुंद
बैगा विकास प्रकोष्ठ, बैकुंठपुर
बैगा विकास प्रकोष्ठ, राजनांदगांव
बैगा विकास प्रकोष्ठ, मुंगेली
बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, धरमजयगढ़ [CGPSC(AMO)2022]
पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, कोरबा
पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ, बलरामपुर
बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, बिलासपुर (नवीनतम गठित)
🤝 जनजातीय सलाहकार परिषद् (Tribal Advisory Council – TAC)
गठन: 23 जुलाई 2019
पुनर्गठन: 22 जुलाई 2022
संबंध:
संविधान की पाँचवीं अनुसूची से [CG PSC (ARO)2022]
अनुसूचित क्षेत्र से [CG PSC (ARO)2022]
आदिवासी क्षेत्र से [CG PSC (ARO)2022]
गठनकर्ता: राष्ट्रपति के निर्देशन पर।
विशेष प्रावधान: ऐसे गैर-अनुसूचित क्षेत्र राज्य, जहाँ अनुसूचित जनजातियाँ निवास करती हैं, वहाँ भी राष्ट्रपति के आदेश पर जनजातीय सलाहकार परिषद् का गठन किया जा सकता है।
सदस्य संख्या: 20 से अधिक नहीं होनी चाहिए। [CG VS (AG-3) 2021]
👤 परिषद् की संरचना
अध्यक्ष (पदेन): मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
उपाध्यक्ष (पदेन): श्री रामविचार नेताम
सचिव:
श्री अमिताभ जैन, छत्तीसगढ़ शासन
श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आदिम जाति कल्याण विकास विभाग
सदस्य (कुल 18):
श्रीमती रेणुका सिंह (भरतपुर-सोनहट), श्रीमती शकुन्तला सिंह पोर्ते (प्रतापपुर), श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा (सामरी), श्रीमती रायमुनी भगत (जशपुर), श्रीमती गोमती साय (पत्थलगांव), सुश्री लता उसेंड़ी (कोण्डागांव), श्री रामकुमार टोप्पो (सीतापुर), श्री प्रणव कुमार मरपची (मरवाही), श्री विक्रम उसेंड़ी (अंतागढ़), श्री आशाराम नेताम (कांकेर), श्री नीलकंठ टेकाम (केशकाल), श्री विनायक गोयल (चित्रकोट), श्री चैतराम अटामी (दंतेवाड़ा), श्री केदार कश्यप (नारायणपुर), श्री रामनाथ कश्यप, श्री रघुराज सिंह उईके, श्री वेदप्रकाश भगत, श्री कृष्णकुमार वैष्णव।
📜 प्रमुख शर्तें
परिषद् में 3/4 सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायक होने चाहिए।
विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों में से मनोनीत सदस्य परिषद् में तब तक बने रहेंगे, जब तक वे विधायक हैं।
अन्य मनोनीत सदस्य अपनी मनोनयन तिथि से 1 वर्ष की अवधि तक परिषद् के सदस्य रहेंगे।
📋 छत्तीसगढ़ के प्रमुख सलाहकार परिषद्: एक तुलनात्मक दृष्टि
आधार
अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद्
अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद्
अन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद्
गठन
23 जुलाई 2019
20 जनवरी 2023
20 जनवरी 2023
अधिकतम सदस्य
20
20
40
शर्तें
3/4 (15) सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायक
कम से कम 5 सदस्य अनुसूचित जाति वर्ग के विधायक
कम से कम 10 सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग के विधायक
अध्यक्ष
मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री
उपाध्यक्ष
विभागीय मंत्री
भारसाधक मंत्री
भारसाधक मंत्री
सचिव
आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति मंत्रालय के सचिव
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति मंत्रालय के सचिव
भारसाधक सचिव
🌟 जनजातियों के विकास से संबंधित पंचशील सिद्धांत
वर्ष: 1955
स्थान: जगदलपुर (बस्तर)
प्रतिपादक: पं. जवाहर लाल नेहरू
सिद्धांत:
लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार स्वैच्छिक विकास के लिए प्रोत्साहित करना।
जल, जंगल और ज़मीन पर जनजातियों के पारंपरिक अधिकारों का सम्मान करना।
विकास और प्रशासन में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करना।
आदिवासी क्षेत्रों में अत्यधिक प्रशासन से बचना।
परिणामों को केवल आँकड़ों या लागत में न मापकर, व्यक्ति के चारित्रिक विकास के रूप में देखना।
🎤 जनजातियों में प्रचलित लोकगाथा
लोकगाथा
संबंधित जनजाति
कुडुखखण्डी / कड़खडण्डी गाथा
उरांव [CG PSC(ADJE)2020], [CG Vyapam (PHEH)2023]
लिंगोपेन की गाथा
मुरिया
नागाबैगा की गाथा
बैगा
लोहासुर की गाथा
अगरिया
जगार गाथा
हल्बा, भतरा
गोंडवानी गाथा
परधान, देवार
📈 जनजातीय/आदिवासी उपयोजना
प्रारंभ: यह योजना पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79) के दौरान 1976-77 में शुरू हुई।
संचालक: जनजाति मंत्रालय, भारत सरकार।
क्षेत्रफल: 91,253 वर्ग किलोमीटर।
प्रतिशत: 67.50%। [PSC(ARO)2022]
उद्देश्य:
जनजातियों का समग्र और एकीकृत विकास सुनिश्चित करना।
जनजातियों को शोषण से मुक्त कर सुरक्षा प्रदान करना।
विशेष तथ्य:
उपयोजना क्षेत्र की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई विकासखण्ड होती है।
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) में, सहायक परियोजना अधिकारी विभागीय दायित्वों के निर्वहन के लिए पदस्थ होता है।
🗺️ प्रदेश के आदिवासी उपयोजना क्षेत्र
यह तालिका छत्तीसगढ़ के जिलों को एकीकृत आदिवासी विकास परियोजनाओं, माडा पाकेट और लघु अंचलों में वर्गीकृत करती है:
जिला
एकीकृत आदिवासी विकास परि. (19)
माडा पाकेट (9)
लघु अंचल (2)
1. कांकेर
1. भानुप्रतापपुर
2. कोण्डागांव
2. कोण्डागांव
3. बस्तर
3. जगदलपुर
4. दन्तेवाड़ा
4. दन्तेवाड़ा
5. सुकमा
5. कोंटा
6. नारायणपुर
6. नारायणपुर
7. बीजापुर
7. बीजापुर
8. धमतरी
8. नगरी
1. गंगरेल
9. गरियाबन्द
9. गरियाबन्द
10. महासमुंद
2. महासमुंद-1
3. महासमुंद-2
11. बलौदाबाजार
4. बलौदाबाजार
1. धुरीबांधा
12. बालोद
10. डोण्डीलोहारा
[CG PSC(Pre)2022]
13. मो.-मा.-अ.
11. मो.-मा.-अ.
[CGPSC(Pre)2022]
14. कबीरधाम
5. कबीरधाम
15. मुंगेली
16. बिलासपुर
12. गौरेला
[CG PSC(Pre)2022]
17. गौ-पे-म
18. कोरबा
13. कोरबा
19. सक्ती
6. रूगजा
20. रायगढ़
14. धरमजयगढ़
7. गोपालपुर
21. कोरिया
15. बैकुण्ठपुर
22. सूरजपुर
16. सूरजपुर
23. सरगुजा
17. अंबिकापुर
24. बलरामपुर
18. रामानुजगंज-पाल
25. जशपुर
19. जशपुरनगर
26. खै.-छु.-ग.
8. नचनियां
2. बछेराभांटा
27. सारंगढ़
9. सारंगढ़
🛠️ जनजातियों के पारंपरिक कार्य (Occupation of Tribes)
जनजाति
परंपरागत कार्य
हल्बा
कृषि कार्य करते हैं और ‘चिवड़ा’ (पोहा) बनाते हैं। [CG PSC(Reg.)2017]
मुड़िया
काष्ठ एवं लौह शिल्पकला।
अबूझमाड़िया
काष्ठ शिल्प।
गदबा
घरेलू कार्य।
परजा
पशुपालन एवं बांस शिल्पकला।
भतरा
सेवा कार्य। [CGVyapam (VPR)2018]
धुरवा
कृषि पर निर्भर हैं और केन (गन्ना) से बनी वस्तुओं का विक्रय करते हैं। [CG Vyapam (HCAG)2018]
ओझा गोंड़
गोदना गोदने का कार्य।
बैगा
जड़ी-बूटी और तंत्र-मंत्र से बीमारियों का इलाज करते हैं।
अगरिया
लौह शिल्पकला (अयस्क को गलाकर लोहा तैयार करते हैं)। [CGPSC(ACF)2017,(Reg.)2021,(CMO)2019]
परधान
गाथा गायन और संगीत।
कमार
बांस शिल्पकला और टोकरी निर्माण। [CG PSC(ADA)2020] [CG PSC(ADPES)2019]
छिंद पत्ते से चटाई, टोकरी और झाड़ू बनाते हैं। [CG PSC(ITI Pri.)2016],(AG-3),(Lib)2018]
संवरा
सांप पकड़ने का कार्य।
धनवार
बांस शिल्पकला। [CG PSC(SES)2017]
कंवर
सैन्य कार्य।
बिरहोर
बांस के बर्तन बनाना और रस्सी निर्माण।
खड़िया
पालकी ढोने का कार्य।
कोरकू
भूमि खोदने (Land Excavation) का कार्य। [CGPSC(ARO)2022] [CG Vyapam(FNDM)2019]
खैरवार
कत्था निकालने का कार्य। [CG PSC(Lib)2017],[CG PSC(Pre)2016]
पारधी
काले रंग के पक्षी का शिकार।
कोल
कोयला खोदने का कार्य।
पंडोप
कांस्य शिल्प और कृषि कार्य।
मलार
चिमनी निर्माण (धातु शिल्प), सरगुजा में प्रचलित। [CG Vyapam (PHEH)2023]
🎨 जनजाति शिल्प (बांस, छिंद पत्ते आदि से संबंधित)
शिल्प
जनजाति
बांस शिल्प/टोकरी निर्माण में निपुण
कमार [CG PSC(ADPES)2019]
बांस शिल्प (आजीविका प्रधान)
कमार [CG PSC(AP)2016, (Pre)2019]
बांस के बर्तन निर्माण में निपुण
कमार, कंडरा, धनवार, बिरहोर [CG PSC(ADS) 2017]
बांस शिल्पकला
सौंता, बैगा, मांझी, दोरला, परजा।
काष्ठ शिल्प
अबूझमाड़िया, मुड़िया।
छिंद पत्ता शिल्प
शिकारी, पारधी।
मोहलाइन छाल व उरई से रस्सी बनाना
बिरहोर, खोण्ड।
🏛️ जनजातियों के पंचायत प्रमुख
जनजाति
जाति पंचायत का प्रमुख
गरजा
मडूली [CG PSC(ADR)2019]
गोंड़, कण्डरा
राजा/भोई [CG PSC(ARO)2022]
बेयार, नगेशिया, कमार
मुखिया
उरांव
महतो
माझी
माझी
खैरवार
महतो मांझी
खड़िया
परधान
मुण्डा
परहाराजा
धनवार
धनिया
बिंझवार, मंझवार
गौंटिया
अगरिया
गौंटिया
कोल
गोहिया/गोतिया
मुरिया
पटेल
अबूझमाड़िया
मांझी
बिरहोर
मालिक
बैगा
पटेल
कोरवा
टोलादार/मुखिया
कमार
कुरहा [CG PSC(SEE)2017]
पण्डो
मुखिया
भुजिया
पुजेरी/पाती
🍳 जनजातियों के रसोईघर और उनके नाम
जनजाति
रसोईघर का नाम
भुजिया
लाल बंगला [CGPSC(ADA)2020][CGPSC(Pre 2019,2021), (AP) 2016]
अबूझमाड़िया
अंगादी
पारधी
माईघर
बैगा
रांधड़ घर
माड़िया
रांधा लोना
दोरला
ओजल
🏠 जनजातियों के निवास स्थान
जनजाति
निवास स्थान
माड़िया
वेंडुकुरमा
दोरला
दोरभूम
कोरकू, भारिया
ढाना
बिरहोर
टांडा
📖 जनजातियों से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकें एवं उनके लेखक
लेखक
संबंधित पुस्तक
वेरियर एल्विन (Verrier Elwin)
1. द मुड़िया एण्ड देयर घोटुल (1947) [CG Vyapam(SDAG)(ADEO)2017] 2. द गौर (The Gaur) 3. द अगरिया (The Agaria) 4. द बैगा (The Baiga) 5. Maria Murder and Suicide 6. A New Deal for Tribal India
एस.सी. रॉय (शरदचंद्र राय)
द बिरहोर (The Birhor)
श्यामाचरण दुबे (S.C. दुबे)
द कमार (The Kamar)
जार्ज विलफ्रिड ग्रिगसन
द माड़िया गोन्ड्स ऑफ बस्तर (The Maria Gonds of Bastar)
टी.बी. नायक
द भील: एक अध्ययन (The Bhil: A Study)
द अबूझमारियास (The Abujhmarhias) (1963) <br> बारह भाई बिंझवार
दयाशंकर नाग
द ट्राईबल इकॉनामी (बैगाओं पर) [CG PSC(Lib. & Sport)2017]
श्याम राव
द परधान
डब्ल्यू.जी. ग्रिफिथ
द कोल ट्राइब ऑफ सेंट्रल इंडिया
एल.पी. विद्यार्थी
भारतीय आदिवासी: उनकी संस्कृति एवं सामाजिक पृष्ठभूमि
बी. एच. मेहता
गोंड्स ऑफ द सेंट्रल इंडियन हाईलैण्ड्स
डी. हाजरा
द दोरला ऑफ बस्तर
🍹 जनजातियों के पारंपरिक पेय पदार्थ
पेय पदार्थ
जनजाति और बनाने की विधि
सल्फी (Salfi)
मुड़िया, माड़िया (सल्फी वृक्ष से प्राप्त)। [CG PSC(ADH)201]
ताड़ी (Tadi)
बैगा (ताड़ और छिन्द वृक्ष से प्राप्त)। [CG Vyapam(TET-2)202]
हांड़िया (Handiya)
कोरवा (गोंदली, कुटकी और बाजरे के अनाज से बनती है)। [CG Vyapam(TET-2)2024]
छिंदरस
माड़िया एवं अबूझमाड़िया (छिन्द वृक्ष से प्राप्त)।
पेज
गोंड़ (चावल से बनता है)। [CG PSC(ADH)201]
कोसमा
उराँव (कोसम बीज व पके चावल/बासी से)। [CGVyapam(TET-2)2024],[CGPSC(ARO)202:]
दाडना
मुड़िया (महुए से निर्मित)।
लान्दा
बस्तर में चावल से निर्मित (घोटुल में लोकप्रिय)। [CG PSC(ADH)201]
चार
चावल से बना किण्वित पेय, त्यौहारों और विवाह में पिया जाता है (बस्तर में लोकप्रिय)।
सुराम
आदिवासी रक्त वृद्धि के लिए सेवन करते हैं (महुआ से निर्मित)।
भगवान शिव के चिलम से निकली आग में दो मूर्तियों के जलने से
🔑 जनजातियों से संबंधित शब्दावली
शब्दावली
जनजाति
अर्थ
माहला
मुड़िया
सगाई [PSC(VAS)2021]
मोहरिया
मुड़िया
शहनाई बजाने वाला
सिहारी
माड़िया
जंगल में पृथक झोपड़ी
बरग
हल्बा
टोटम
ककई पानी
हल्बा
प्रसूति पश्चात् दी जाने वाली औषधि [CGPSC(ADA)2023]
बाकरा
भतरा
कमरा
कलतोसनाद
दोरला
सगाई
वेन्टा
दोरला
सामूहिक शिकार
झूठी
बिंझवार
गोदना
बान
कोल
गोत्र को बान कहते हैं
💡 विशेष नोट: राज्य में चूरापाट बेर वृक्ष में बान बांधा जाता है। [CGVyapam(PHEH)2023]
(यह पृष्ठ जनजातियों के देवी-देवताओं का मानचित्र प्रस्तुत करता है, जिसे पाठ में बदलना संभव नहीं है।)
🛡️ गोत्र/गण चिन्ह
🗣️ कथन:
मजूमदार एवं मदान के अनुसार: “एक गोत्र अधिकांशतः कुल वंशों का समूह होता है जो अपनी उत्पत्ति एक कल्पित पूर्वज से मानता है, यह पूर्वज मानव, पशु, पेड़-पौधा या कोई निर्जीव वस्तु भी हो सकता है।” [CG PSC(ARO)2022]
फॉक्स के अनुसार: “‘गोत्र’ एकपक्षीय वंश समूह है।” [CGPSC(ARO)2022]
📊 विभाजन: जनजातीय समाज अनेक गण चिन्हों (टोटम) और गोत्रों में विभाजित होता है, जिनका आधार देवताओं की पूजा होती है।
नालुंग पेन: चार देवताओं को पूजने वाले।
सयुंग पेन: पांच देवताओं को पूजने वाले।
सारूंग पेन: छह देवताओं को पूजने वाले।
येरूंग पेन: सात देवताओं को पूजने वाले।
⚭ विवाह वर्जित:
जनजातीय समाज में समगोत्र विवाह प्रतिबंधित होता है।
इन समाजों में बहिर्विवाही गोत्र की प्रथा प्रचलित है।
गोत्र की विशेषता बहिर्विवाही, सामान्य पूर्वज और एकपक्षीय प्रकृति है। [CG PSC(ARO)2022]
✨ विशेष तथ्य:
जनजाति समाज में ‘गण चिन्ह’ (टोटम) का विशेष महत्व है। [CG PSC(Pre)2012]
हल्बा जनजाति में टोटम को ‘बरग’ कहा जाता है। [CG Vyapam(RFM)2018]
कोल जनजाति में गोत्र को ‘बान’ कहा जाता है।
🌳 कुरुख (उरांव) में पशु, पक्षी, पौधे आदि से संबंधित कुल नाम
संबंधित वस्तु
कुल नाम
संबंधित वस्तु
कुल नाम
औषधीय पौधा
कुजुर [CG Vyapam(SI)2023]
बतख
गेडे
मछली
ऐंड, मिंज
लंगूर
हलमन
बगुला
बकुला
फल
किरो
बरगद
बारा
हेज-स्पैरो
केरकेट्टा
जंगली कुत्ता
बरवा, खोया
कौआ
खाखा
नमक
बेक
कबूतर
खलखो
गिलहरी
चिद्र
बाघ
लकड़ा
धान
धन, खेस
कोबरा
नाग
माउस
एडगो
लौह
पन्ना
कछुआ
एक्का, कच्छप
🏠 जनजातियों का युवागृह (Tribal Houses for Young Ones)
युवागृह आदिवासियों की लोक-परंपरा के संवाहक होते हैं। ये गाँव की रात्रिकालीन संस्थाएँ हैं, जहाँ शाम को युवा एकत्रित होकर सांस्कृतिक क्रियाकलापों में भाग लेते हैं।
यह संस्था भावी जीवनसाथी चुनने का अवसर भी प्रदान करती है। घोटुल की सदस्यता विवाह तक ही मान्य होती है।
** youthगृह के प्रकार**
प्रकार
एकलिंगीय युवागृह
द्विलिंगीय युवागृह
प्रक्रिया
अविवाहित युवक-युवतियाँ शाम को युवागृह जाकर रात को घर लौट आते हैं।
अविवाहित युवक-युवतियाँ शाम को जाते हैं और रात भर वहीं रहते हैं।
वास्तविक नाम: घोटुल (अर्थ: गोंगा स्थल या विद्या स्थल)
उद्देश्य:
सामाजिक शिक्षा देना। [CG PSC(Eng-2)2015], [CG Vyapam(CBAS)2023]
जीवनसाथी के चुनाव में सहायक।
सेवाभाव जागृत करना।
प्रचार-प्रसार: 1947 में वेरियर एल्विन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘The Muria and Their Ghotul’ से इसका विश्वव्यापी प्रचार हुआ।
** घोटुल के सदस्य और प्रमुख**
श्रेणी
सदस्य
प्रमुख
पुरुष
चेलिक
सिरेदार [CG PSC(SEE)2017]
महिला
मोटियारिन
बेलोसा [CG PSC(Pre)2014]
** घोटुल से जुड़े नृत्य, वाद्ययंत्र और त्यौहार**
प्रमुख नृत्य:
हुलकीपाटा
मांदरी नृत्य [CGPSC(CMO)2019]
ककसार नृत्य
वाद्ययंत्र: मांदर
त्यौहार:
नुंनानारे दाना पण्डुम: अक्टूबर में मनाया जाता है, जिसमें मोटियारिनें दूसरे घोटुल में जाती हैं। [CG PSC(VAS)2021]
मरका पंडुम
कोरे पंडुम
कारा पंडुम
ईराऊ पंडुम
🚫 घोटुल से संबंधित निषेध
घोटुल में अविवाहित युवक-युवतियों को वर्ष में एक बार प्रवेश दिया जाता है।
विवाहित जोड़ों का घोटुल में आना पूर्णतः वर्जित है।
👥 घोटुल के अतिथि एवं उनके पद
पदनाम
विशेष कार्य
गायता
ग्राम प्रमुख
पद
ग्राम के उपप्रमुख
सिरहा
जादू-टोना, झाड़-फूंक करने वाला
अपरगना मांझी
दूसरे परगना का मुखिया
पेडगा-पेडगी
दूसरे घोटुल से आमंत्रित जवान लड़के-लड़कियां
पंचतौर
जाति पंचायत का मुखिया
साई गुली
घोटुल का साथी
🔑 घोटुल में प्रचलित शब्द और उनके अर्थ
शब्द
अर्थ/आशय
कटकुल
खटिया [CG PSC(VAS)2021]
खरहरा
एक प्रकार का झाड़ू
झरिया
सफाई करने वाला
गुदेगोर
तम्बाकू की डिबिया
चालकी
तम्बाकू बाँटने वाला
पडियां
बांस या लकड़ी से बनी कंघी (चेलिक द्वारा मोटियारिन को भेंट दी जाती है)
थोड़ी
बांस से बनी सुराही
मुसवान
साज-सज्जा करने वाला
कोटवार
सामान्य देख-रेख करने वाला
लांदा
चावल से बना विशेष पेय पदार्थ [CGVyapam(TET-2)2024]
कंटवक
काष्ठ से निर्मित जूते
करधनी
कौड़ी से बनी माला (कमर में पहनी जाती है)
केकरेंग
बांस से निर्मित वाद्ययंत्र
🤝 बेठिया प्रथा
प्रचलन: बस्तर क्षेत्र में। [CGPSC(ARO)2022]
तात्पर्य: ‘बेठिया’ गोंडी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ सामूहिक रूप से किसी व्यक्ति या परिवार का सहयोग करना है।
⚭ जनजातियों में प्रचलित विवाह
जनजातियों में विवाह की परंपराएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: एकल विवाह (Monogamy) और बहु विवाह (Polygamy)।
💑 एकल विवाह (Monogamy)
साली/पत्नी भगिनी विवाह
देवर/पति भ्रातृ विवाह
👨👩👧👦 बहु विवाह (Polygamy)
बहुपति विवाह (Polyandry):
भ्रातृ विवाह
अभ्रातृ विवाह
समूह विवाह
बहुपत्नी विवाह (Polygyny): [CGPSC(ADPO)2021]
💞 जनजातियों में अधिमान्य विवाह (Preferential Marriages)
अधिमान्य विवाह को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
ममेरे और फुफेरे भाई-बहनों का विवाह (Cross-cousin Marriages): इसे दूध लौटावा विवाह भी कहा जाता है।
मौसेरे और चचेरे भाई-बहनों का विवाह (Parallel-cousin Marriages)
साली और भाभी विवाह (Sororate and Levirate Marriages)
विवाह के प्रमुख प्रकार और उनकी विशेषताएँ
क्र.
विवाह का प्रकार
जनजाति
प्रक्रिया और विशेष तथ्य
01.
पैडुल/चढ़ विवाह
गोंड़
लड़का लड़की के घर बारात लेकर जाता है। [CGVyapam(MBD)2024][CGPSC(ADPPO)2013]
02.
पठौनी विवाह
गोंड़
लड़की बारात लेकर लड़के के घर जाती है, और विवाह लड़के के घर में संपन्न होता है। [CGPSC(ARO)2022], [CGPSC(ADPPO)2013]
03.
हठ विवाह/पैठुल विवाह
–
• लड़की द्वारा जबरदस्ती लड़के के घर जाकर विवाह करना। [CGVyapam(EAE)2008] • बैगा जनजाति में इसे पैढू/पैठुल कहते हैं। • पहाड़ी कोरवा और अगरिया में इसे ढुकू विवाह कहते हैं। [CGPSC(Pre)2020]<br> • अबूझमाड़िया जनजाति में इसे ओड़ियत्ता विवाह कहते हैं।
04.
भगेली/पोटा/गंधर्व विवाह
गोंड़
लड़की लड़के के घर जबरदस्ती जाकर रहती है। [CGPSC(ADPPO)2013][CGPSC(Asst. HYD)2020,(Pre)2012]
05.
गंधर्व/प्रेम/सह पलायन विवाह
परजा
• प्रेमी-प्रेमिका स्वेच्छा से विवाह के लिए पलायन करते हैं। • अबूझमाड़िया जनजाति में इस प्रथा को बिथेर विवाह कहते हैं।
06.
मरम्मत विवाह
–
दूसरे जाति में भागकर विवाह करने के बाद घरवाले पुनः रीति-रिवाज से विवाह करवाते हैं।
07.
क्रय/पारिंगधन विवाह
–
वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को उपहार स्वरूप सामान देकर विवाह करना। [CGPSC(Pre)2012], [CG Vyapam(LOI)2018]
08.
छुट्टा विवाह
–
इसमें विवाह का खर्च वर पक्ष द्वारा वहन किया जाता है।
09.
सेवा/चरधिया/लमसेना विवाह
गोंड़
• प्रक्रिया: वर द्वारा वधू मूल्य चुकाने के लिए अपने ससुराल में सेवा देना। [CGPSC(Asst. HYD)2020] • उपनाम: चरघिया (गोंड़ में), घरजन (कंवर में), घरजिया (बिंझवार/भतरा में)।
10.
विनिमय/गुंरावट विवाह
–
• प्रक्रिया: वर-वधू का आदान-प्रदान कर विवाह। [CG PSC(Asst. Geo.)2011] • उपनाम: गोलत विवाह (बिरहोर जनजाति में)।
11.
दूध लौटावा विवाह
गोंड़
ममेरे-फुफेरे भाई-बहन का विवाह किया जाता है। [CG Vyapam(LOI)2018,(POWS)2016]
12.
अपहरण/पायसोतुर विवाह
गोंड़
युवक द्वारा युवती का अपहरण कर विवाह करना। [CGPSC(Pre)2017], [CG Vyapam(RFM)2018,(ADEO)2012]
13.
अरउतो विवाह (विधवा विवाह/चुरीपहनाई)
–
• अन्य नाम: हल्दी-पानी विवाह (विधुर पुनर्विवाह), गवन विवाह (बाल्यकाल में विधवा हुई कन्या का विवाह)। • कोरकू जनजाति: स्त्री पुनर्विवाह को पाटो विवाह कहते हैं। • बैगा जनजाति: पुनर्विवाह को खड़ोनी विवाह कहते हैं। [CG Vyapam(VFM)2021]
14.
महुआ विवाह
–
उचित वर न मिलने पर महुआ या चार वृक्ष से विवाह रस्म निभाया जाता है।
15.
कांड़ विवाह (पुष्प विवाह)
भुजिया
• लड़कियों का विवाह पूर्व किया जाता है, जिसके रस्म को कांडाबरा कहते हैं। [CGPSC(Pre)2020]
16.
तीर विवाह
बिंझवार
लड़की का विवाह तीर के साथ किया जाता है।
17.
सोपनी विवाह
–
यह एक पारंपरिक विवाह है।
18.
उदलिया विवाह
भतरा
इसमें विवाहित स्त्री दूसरे पुरुष से विवाह करने पर अपने पहले पति को सुक/खर्ची वापस करती है।
19.
बरोखी विवाह
भूमिज
[CG PSC(ARO)2022]
✨ विशेष जानकारी
कांडाबरा (पुष्प विवाह): ‘कांड’ का अर्थ तीर होता है, इसलिए इसे कांड विवाह कहते हैं। इसकी रस्मों को कांडाबरा कहा जाता है, जो अबूझमाड़िया में कौमार्य संस्कार से संबंधित है। [CG Vyapam(ECH)2017]
वधू मूल्य: जनजातियों में वधू मूल्य को “सूक या खर्ची” कहा जाता है। [CG Vyapam(PHEH)2023]
माहला सगाई: मुरिया जनजाति में इसे माहला सगाई कहते हैं। [CG Vyapam(VPR)2021]
स्थान: यह नृत्य घोटुल के चारों ओर घूम-घूम कर किया जाता है। [CG PSC(AP)2016][CG PSC(Pre)2016,2018,(ARO)2022]
वाद्ययंत्र: चिटकुल एवं बिरझिया ढोल।
विशेषता: इस नृत्य में कलाकार गायन नहीं करते, केवल नृत्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। नृत्य के बाद पारंपरिक पेय लांदा (चावल से निर्मित) और दाडनों (महुए से निर्मित) दिए जाते हैं।
एबालतोर नृत्य
उद्देश्य: मड़ई के प्रमुख देवता अंगादेव की आराधना के लिए किया जाता है।
विशेषता: नारायणपुर का मड़ई मेला विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ काष्ठ से निर्मित अंगादेव की पूजा के लिए इस नृत्य का आयोजन होता है। [CG PSC(Pre)2016]
गेंड़ी नृत्य या डिटोंग
उद्देश्य: बस्तर की जनजातियाँ वर्षा के देवता भीमा देव को प्रसन्न करने के लिए ‘गेंड़ी नृत्य’ का आयोजन करती हैं। [CG PSC(Eng. G-1)2015][CG Vyapam (DCAG) 2018], [CG PSC(DSPR, MI, MO)2022]
अवसर: नवाखानी पर्व एवं विवाह के अवसर पर।
प्रक्रिया: इस नृत्य में गायन नहीं होता, और नर्तक बांस से बनी गेंड़ी पर चढ़कर तेज गति से नृत्य करते हैं। [CG PSC(Eng. G-1)2015]
हुलकी पाटा नृत्य
स्थान: घोटुल परिसर में मनोरंजन के लिए किया जाता है।
अवसर: यह एक सामान्य अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है।
घोटुल पाटा नृत्य
अवसर: यह नृत्य किसी सदस्य की मृत्यु के अवसर पर किया जाता है। [CG PSC(ADA)2023]
माओ पाटा नृत्य
क्षेत्र: बस्तर अंचल।
स्वरूप: यह गौर पशु (वनभैंसा) के शिकार पर आधारित है।
घटनाक्रम: इसमें कलाकार गौर पशु के शिकार का प्रदर्शन करते हैं, जिसमें एक शिकारी घायल हो जाता है और सिरहा (पुजारी) द्वारा उपचार के बाद स्वस्थ होता है। शिकार की प्राप्ति और साथी के ठीक होने की खुशी में यह नृत्य किया जाता है।
कोलांग पाटा / पूस कोलांग / देव कोलांग
सदस्य: केवल पुरुष।
माह: चैत्र मास (मार्च-अप्रैल)। [CG PSC(Pre)2016]
विशेषता: यह नृत्य देवताओं के सम्मान में, बिना किसी वाद्ययंत्र के, अपने गांव के बजाय दूसरे गांव में किया जाता है। इस नृत्य को 3 साल तक करने के बाद इसका विधिवत विसर्जन होता है, जिसके बाद अगले 3 साल तक घेरता नृत्य किया जाता है।
छेरता नृत्य
अन्य नाम: नकटा-नकटी नृत्य।
अवसर: पूस पुन्नी (पूर्णिमा) के त्यौहार पर।
कोकरेंग नृत्य
स्थान: नारायणपुर के मड़ई मेले में।
दीवाड़ एंडन्ना / दीपावली नृत्य
विशेषता: यह नृत्य दीपावली के अवसर पर केवल लड़कियों द्वारा किया जाता है।
हर एंडन्ना नृत्य
अवसर: विवाह के समय लड़के-लड़कियों द्वारा किया जाता है।
ककसार नृत्य
उद्देश्य: घोटुल (युवागृह) के देवता लिंगोपेन की आराधना के लिए। [CG Vyapam(ESC)2017(FNDM)2019], [CG PSC(TSI)2024], [CG Vyapam(DCAG)2018]
नृत्य: इसे ‘जात्रा पर्व’ के रूप में भी मनाया जाता है। लिंगोपेन को प्रसन्न करने के लिए युवक-युवती रात भर नृत्य-गायन करते हैं। [CG PSC(ARO)2022]
वाद्ययंत्र: तुरही या अकूम।
🏹 अबूझमाड़िया जनजाति से संबंधित नृत्य
काकसाड़ नृत्य / काकसार
उद्देश्य: गोत्र देव की पूजा एवं देवताओं की आराधना के लिए। [CG PSC(Eng. G-1)2015], [CG PSC(ADPO)2021]
विशेषता: इस नृत्य के दौरान युवक-युवतियों को नृत्य मंडली से अपना जीवनसाथी चुनने की अनुमति मिलती है। [CG VS(AG-3)2021]
कोटकी-घोड़ा नृत्य
प्रकृति: यह एक जात्रा पर्व है।
विशेषता: इसमें कोटकी घोड़े का दृश्यांकन होता है और कुछ व्यक्ति चीते का मुखौटा पहनकर युवक-युवतियों पर झपटने का अभिनय करते हैं।
विशेषता: इसे “प्रकृति की पूजा का नृत्य” भी कहते हैं। यह चैत्र पूर्णिमा पर साल वृक्ष में फूल लगने पर किया जाता है। [CG PSC(SEE)2017][CG PSC(Lib.)2014]
कोरकू जनजाति से संबंधित नृत्य
थापड़ी नृत्य:
अवसर: बैशाख माह। [CG Vyapam (Eng. G-1)2021]
विशेषता: इसमें एक व्यक्ति हाथी बनकर नृत्य करता है और मेघनाथ स्तम्भ की स्थापना की जाती है।
ढांढल नृत्य:
अवसर: ज्येष्ठ-आषाढ़ माह की रात्रि में।
विशेषता: इसमें लोग एक-दूसरे पर छोटे-छोटे डंडों से प्रहार करते हैं।
🎭 विभिन्न जनजातियों के विशिष्ट लोकनृत्य
🎉 भतरा एवं कोरकू जनजाति का डंडारी नृत्य
अवसर: यह नृत्य होली (फाल्गुन माह) के अवसर पर किया जाता है। [CG PSC(SEE)2020]
विशेषता: इस जनजाति के लोग चबूतरे पर सेमल का स्तम्भ स्थापित करके उसके चारों ओर घूम-घूमकर नृत्य करते हैं। बस्तर में, डंडारी नाच का संबंध मुख्य रूप से होली के त्यौहार से है। [CG Vyapam(TET-II)2024]
🤝 कंवर जनजाति का बार नृत्य
स्वरूप: यह एक सामूहिक लोकनृत्य है।
आयोजन: इसका आयोजन माघ माह में पांच वर्षों के अंतराल पर होता है।
विशेषता: यह छत्तीसगढ़ की कंवर जनजाति का एक प्रमुख लोकनृत्य है। गांव के मध्य एक खुली जगह पर भीम देवता की स्थापना की जाती है और यह नृत्य लगातार 12 दिनों तक चलता है। कटघोरा अंचल का बार नृत्य सर्वाधिक प्रसिद्ध माना जाता है।
🔥 पहाड़ी कोरवा जनजाति का दमनच नृत्य
अवसर: यह विवाह के अवसरों पर किया जाता है। [CG PSC(Eng.G-2)2015]
विधा: यह एक नृत्य है जिसमें सामान्यतः गायन शामिल नहीं होता।
क्षेत्र: यह नृत्य मुख्य रूप से जशपुर और कोरबा अंचल में प्रचलित है। [CG PSC(ADJ)2018], [CG Vyapam(ESC)2017]
विशेषता: इसे छत्तीसगढ़ के सभी लोकनृत्यों में सबसे “भयानक नृत्य” माना जाता है, जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों भाग लेते हैं।
💃 भारिया जनजाति का सैतम नृत्य
कलाकार: यह नृत्य भारिया जनजाति की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
🥁 कोल जनजाति का कोलदहका/कोलहाई नृत्य
प्रचलित क्षेत्र: सरगुजा क्षेत्र (कोरिया)। [CG PSC(ADPO)2021], [CG Vyapam(FI)2022]
वाद्ययंत्र: झांझ और ढोलक।
विशेषता: यह सवाल-जवाब की शैली पर आधारित होता है, जिसमें पुरुष ढोल के साथ गायन-वादन करते हैं और महिलाएं नृत्य करती हैं।
🕯️ मृतक संस्कार
जनजाति
संस्कार विशेष
माड़िया/दण्डामी माड़िया/बायसन हार्न माड़िया
• कूटेह संस्कार: तीसरे दिन मृतात्मा को पितृ देवों से मिलाने के लिए पूजा। • हनाल गट्टा (स्मृति स्तंभ): मृतक की याद में स्तंभ स्थापित करने की परंपरा। [CGPSC(AP)2016]
अबूझमाड़िया
• अनाल गड्या (मृतक स्तंभ): मृतक स्तंभ की स्थापना।
बैगा
• मृत्यु के बाद मादी नामक शुद्धिकरण संस्कार।
गोंड़
• तीसरे दिन कोज्जी और दसवें दिन कुण्डा मिलन संस्कार होता है।
दोरला/कोया/कोयतुर
• मृत्यु गीत (पेंतर पाटा): बुजुर्ग स्त्रियां गाती हैं। • प्रमुख शब्दावली: वड्डे (धार्मिक प्रमुख), तलूर कुंडा (अग्नि हण्डी), दिनांक (क्रियाकर्म), पस पेर (शुद्धिकरण हेतु हल्दी पानी छिड़कना)।
कोरकू
• सिडोली प्रथा: मृतक को दफनाने और लकड़ी का स्तंभ गाड़ने की परंपरा।
कोरवा
• नवाधाती/नवाधानी प्रथा: 10 दिन का शोक मनाना। • क्रियाकर्म के समय कुमारी भात की परंपरा। [CG PSC(SEE)2020]
भतरा
• प्रमुख शब्दावली: टरंडी (अर्थी/टिकथी), मड़ाभाटा (श्मशान), बांधन कटनी (मामा की आत्मा की शांति हेतु भांजे द्वारा की जाने वाली रस्म)।
उरांव
• पटरा: शव को श्मशान ले जाने हेतु बांस से निर्मित।<br> • छाई भितर: मृत आत्मा को पूर्वजों से मिलाने की क्रिया।
पहाड़ी कोरवा
• जिस झोपड़ी/घर में मृत्यु होती है, उसे नष्ट कर नई झोपड़ी बनाते हैं।
भुजिया
• समगोत्रीय (गोतियार) की मृत्यु पर घर का चूल्हा और पानी का मटका तोड़ दिया जाता है।
बिरहोर
• बिस्सर खाने की प्रथा।
कमार
• घर के सदस्य की मृत्यु होने पर नया घर बना लेते हैं। [CG PSC(ARO)2022]
🎶 जनजाति गीत (Tribal Songs)
जनजाति गीत
क्षेत्र और विशेषताएँ
धनकुल/जगार गीत
क्षेत्र: बस्तर अंचल। जनजाति: हल्बा और भतरा। [CG PSC(Pre)2016,(ADA)2020] गायन की भाषा: हल्बी। वाद्ययंत्र: धनकुल (मटकी, सूपा, बांस की खपच्ची और धनुष से निर्मित)। [CG PSC(ABEO)2013, (ARO)2022] विशेषता: जगार, सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है।
हुलकी पाटा गीत
बस्तर संभाग में प्रचलित है।
गोटुल पाटा गीत
अवसर: मृत्यु। जनजाति: मुड़िया। कथानक: राजा जोलोंगसाय की गाथा। भाषा: हल्बी। अन्य नाम: वीर गीत। [CG PSC(Pre)2023], [CG PSC(ABEO)2013], [CG Vyapam(AGDO)2021]
अवसर: पूष माह की रात्रि में (नई फसल आने पर)। कलाकार: केवल नवयुवतियाँ।
छेरता गीत
अवसर: पूष पूर्णिमा (नई फसल आने पर)। कलाकार: मुख्यतः नवयुवक। [CG VS(AG-3)2021] अन्य नाम: छेरछेरा (बस्तर में)।
रीलो/रैला गीत
जनजाति: मुड़िया एवं माड़िया। प्रकृति: वैवाहिक गीत। गायन: स्त्री और पुरुष बारी-बारी से गाते हैं। [CGPSC(SEE)2020][CGPSC(ACF)2021]
लेंजा गीत
यह एक विशुद्ध हल्बी गीत है, जिसे कभी भी गाया जा सकता है।
चइत परब गीत
यह चैत्र माह में गाया जाने वाला एक प्रतिद्वंद्विता गीत है।
फाग गीत
अवसर: होली। जनजाति: गोंड़ एवं बैगा। वाद्ययंत्र: नगाड़ा। [CG Vyapam(VPR)2021]
लिंगोपाटा गीत
जनजाति: परधान। इसमें धरती के मालिक लिंगो का वर्णन है। [CG PSC(SEE)2017],[CG Vyapam(ECH)2017]
लिंगोपेन गीत
जनजाति: मुड़िया। इसमें लिंगोपेन देव की स्तुति होती है।
गौरा-गौरी गीत
जनजाति: गोंड़। अवसर: कार्तिक माह (दीपावली) में शिव-पार्वती के विवाह का आयोजन कर पूजा-अर्चना की जाती है।
कोटनी गीत
यह एक शृंगार प्रधान वैवाहिक गीत है, जिसमें ओड़िया और भतरी भाषा का प्रभाव दिखता है।
मरम पाटा गीत
यह एक प्रकार का विवाह गीत है। [CG Vyapam(ESC)2017]
💡 ध्यान दें: जनजाति नृत्य और गीतों को “पाटा” या “एडन्ना” के नाम से भी संबोधित किया जाता है।
🎼 जनजातियों में प्रचलित लोकगीतों के विभिन्न स्वरूप
पाटा का नाम
संबंधित गीत
जात्रापाटा
धार्मिक गीत [CG Vyapam(EAE)202016]
पुरुड़पाटा
जन्म गीत
हनाल पाटा
मृत्यु गीत
चुर्चापाटा, मरम पाटा, रीलो पाटा, पेण्डुल पाटा
विवाह गीत
कुर्राल पाटा
नृत्य गीत
कर्सना पाटा
खेल गीत
हुलकी पाटा/लेंगना पाटा
विसर्जन गीत
चिटकुल पाटा
व्यंग्य गीत
डिवाड पाटा
दीवाली गीत
हेले पाटा
नरबलि गीत
🎬 जनजाति नाट्य (Tribal Drama)
माओपाटा (गौर नाट्य)
आशय: गोंड़ी भाषा में ‘माओ’ का अर्थ ‘गौर’ (बायसन) और ‘पाटा’ का अर्थ ‘नृत्य’ है।
प्रमुख जनजाति: मुड़िया।
आधारित: यह शिकार पर आधारित नाट्य है। [CG Vyapam(VPR)2021][CG PSC(Engg.Set-2)2015,(ADP)2018]
वाद्ययंत्र: कोटोड़का, टिमकी।
भतरानाट
क्षेत्र: बस्तर अंचल।
जनजाति: भतरा। [CGPSC(Pre)2018]
उपनाम: बस्तर का आदिवासी थियेटर।
कलाकार: केवल पुरुष सदस्य, जिन्हें ‘नाट कुरया’ कहा जाता है। [CGVyapam(Jan. sam. Off.)2018][CG PSC(Pre)2012]
भाषा: भतरी। [CGPSC(Pre)2012][CGPSC(CMO)2010]
प्रभाव: इस पर ओडिशा का प्रभाव स्पष्ट है, इसलिए इसे ‘उड़िया नाट’ भी कहते हैं।
दहिकांदो
आयोजन: कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर।
विशेषता: इसमें कदम्ब वृक्ष के नीचे राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित कर चारों ओर घूम-घूम कर नृत्य किया जाता है।
खम्बस्वांग (Khamb Swang Drama)
जनजाति: कोरकू। [CG Vyapam(FNDM)2019]
अर्थ: खम्ब के आस-पास किया जाने वाला प्रहसन।
आयोजन: क्वांर नवरात्रि से देव प्रबोधिनी एकादशी तक।
विशेषता: प्रत्येक कोरकू गांव में मेघनाथ खम्ब स्थापित होता है, जिसके आस-पास यह लोकनाट्य किया जाता है।
🏹 बस्तर के आदिवासी समाज में पारद परम्परा
अर्थ: पारद का सामान्य अर्थ ‘शिकार’ होता है। [Vyapam(MBD)2024] [CG PSC(AP)2016]
अवसर: अक्षय तृतीया/अक्ती के बाद यह धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाता है।
🐾 अनुष्ठान शिकार
जनजाति
अनुष्ठान शिकार का नाम
उरांव
फाग सेंदरा, जेठशिकार [CG PSC(Pre)2024]
मुण्डा
बिसु सिकरोर [CG PSC(Pre)2024]
🎤 परम्परागत लोक गीतकार
लोक गीतकार
प्रमुख विशेषताएँ
1. बसदेवा
• इनका मुख्य कार्य गायकी है। • इन्हें ‘हरबोला’ भी कहते हैं।
2. परधान
• ये लिंगोपाटा गीत गाते हैं, जो गोंड़ों के गौरवपूर्ण इतिहास से संबंधित है।
3. पंवारा
• इसमें प्रश्नोत्तरी शैली में लोकगाथा गायन किया जाता है।
4. देवार
• ये छत्तीसगढ़ की परम्परागत लोक गायक जाति हैं। • वाद्ययंत्र: सारंगी, ढुंगरू। • देवार स्त्रियाँ परम्परागत रूप से गोदना गोदने का कार्य करती हैं। [CG PSC(Reg.)2021]
🎉 जनजातियों के पर्व-त्यौहार
माह
पर्व-त्यौहार
जनजाति
क्षेत्र और विशेषताएँ
चैत्र
सरहुल त्यौहार
उरांव
क्षेत्र: सरगुजा अंचल। विशेषता: साल वृक्ष के नीचे मनाया जाता है। [CGVyapam(RFM)2018],[CGPSC(Pre)2016, 2021], [CGVyapam(SAAF)2021]
क्षेत्र: बस्तर संभाग। अन्य नाम: बीज पण्डुम/बीज कुटनी। [CG PSC(Pre)2017]
बैशाख
अरवा तीज
–
–
ज्येष्ठ/जेठ
भीमा जतरा
–
पूजा: भीमा-भीमसेन (इन्द्रदेव) की, अच्छी वर्षा की कामना हेतु।
आषाढ़
गोंचा पर्व
माड़िया
क्षेत्र: बस्तर अंचल। आयोजन: आषाढ़ माह। विशेषता: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा है। इस पर्व में ‘तुपकी’ का विशेष महत्व है। [CG PSC(Pre)2019], [CG Vyapam(ESC)2022], [CG Vyapam(EAE)2018]
बीज बोहनी
कोरवा
कृषि के दौरान आयोजित।
सावन/श्रावण
अमुस त्यौहार
गोंड़, भतरा
श्रावण अमावस्या को मनाया जाता है। जनजातियों का प्रथम त्यौहार। [CG PSC(Pre)2021]
अवधि: 45 दिवस (मुख्य आयोजन 13 दिवस, देवी पूजन 9 दिवस)।
माह: बसंत पंचमी से चैत्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी तक।
महत्व: बस्तर दशहरा के बाद दूसरा प्रमुख पर्व।
बसंत पंचमी: इस दिन त्रिशूल स्थापना और आमा मउर तिहार (देवी-देवताओं को आम का मौर चढ़ाना) होता है।
🎨 छत्तीसगढ़ में लोक शिल्पकला
छत्तीसगढ़ की लोक शिल्पकला को प्रमुख रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
मिट्टी शिल्पकला
धातु शिल्पकला
बांस शिल्पकला
काष्ठ शिल्पकला
छिन्दपत्ता शिल्पकला
सरगुजा: रजवार भित्तिशिल्प। बस्तर: पारंपरिक मूर्तियां।
घड़वा/ढोकरा: बस्तर की प्रसिद्ध कला। बेलधातु/झारा: रायगढ़ की विशेषता। लोहा शिल्प: अगरिया जनजाति।
बर्तन, टुकनी और अन्य घरेलू सामान बनाना।
बंजारा समुदाय की पारंपरिक काष्ठकला।
शिकारी और पारधी जनजाति द्वारा चटाई, झाडू और टोकरी का निर्माण।
⛓️ धातु कला में प्रयुक्त मिश्र धातु
मिश्र धातु
संघटन
पीतल
तांबा (Cu) 80% + जस्ता (Zn) 20%
कांसा
तांबा (Cu) 88% + टिन (Sn) 12%
बेलमेटल
तांबा (Cu) 75% + टिन (Sn) 25%
🏛️ छत्तीसगढ़ में धातु शिल्पकला
प्राचीन काल से ही छत्तीसगढ़ में जनजातियों द्वारा धातु शिल्पकला का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में बस्तर, सरगुजा और रायगढ़ में इस कला की विशेष पहचान है, जहाँ इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है।
यह पूर्वजों की याद को जीवित रखने के लिए बनाए जाते हैं, जो लकड़ी, सीमेंट, मिट्टी या पत्थर के हो सकते हैं। इन पर नक्काशी और पेंटिंग के माध्यम से मृतक के जीवन और सपनों का चित्रण किया जाता है।
📜 अन्य प्रमुख शिल्पकलाएं
🪨 मृतक स्तंभ
जनजाति: माड़िया। [CG PSC(AP)2016]
उपनाम: गायता पखना।
निर्माण: काष्ठ और पाषाण दोनों से।
क्षेत्र: बस्तर और दंतेवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध मृतक स्तंभ पाए जाते हैं।
🌿 पत्ता शिल्पकला
क्षेत्र: मुख्यतः बस्तर, सरगुजा और मध्य छत्तीसगढ़ के वनांचल।
जनजाति: शिकारी एवं पारधी।
शिल्प कार्य: छिंद पत्ते से चटाई, झाडू, खिलौने; और साल (सरई) पत्ते से दोना-पत्तल बनाना।
✨ कंघी शिल्पकला
क्षेत्र: बस्तर संभाग।
जनजाति: मुड़िया, बंजारा।
विशेषता: बस्तर क्षेत्र में कंघी प्रेम के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित है।
🎨 प्रस्तर शिल्पकला
क्षेत्र: बस्तर संभाग (विशेषकर चित्रकोट)।
जनजाति: मुड़िया, माड़िया।
प्रक्रिया: छिनी-हथौड़ा से पत्थरों पर चित्र उकेरे जाते हैं।
ये मुँह से फूंककर बजाए जाते हैं और हवा के उतार-चढ़ाव से संगीत उत्पन्न होता है। | 🔔 ये ठोस धातु या कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।🔔 ये ठोस धातु या कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
घंट/घंटी
मुयांग
चिटकुल
झाब
तिरडुड्डी
पीतल का गोल कटोरीनुमा यंत्र।
गोंड़ी में घंटी को मुयांग कहते हैं (ककसाड़ नृत्य)।
पीतल निर्मित, मंजीरा की आकृति (मांदरी नृत्य)।
घुंघरूओं का गुच्छा।
लोहे का वाद्ययंत्र (माड़िया नाच)। (CG PSC Pre 2023)