📊 छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ: एक तुलनात्मक दृष्टि -1

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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ: एक तुलनात्मक दृष्टि -2

यह सारणी भारत और छत्तीसगढ़ की जनजातियों से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्यों की तुलना करती है:


📖 जनजातीय सूची से संबंधित प्रावधान

🏛️ छत्तीसगढ़ में जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान

🏛️ नृजातीय म्यूजियम (Anthropological Museum), जगदलपुर


(स्त्रोत – www.cgstcommission.com)

यहां छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली 42 जनजातियों की सूची दी गई है:

  1. अगरिया (Agariya)
  2. अंध (Andh)
  3. बैगा (Baiga)
  4. भैना (Bhaina)
  5. भारिया भूमिया, भुईहर भूमिया, भूमियाँ, भारिया, पालिहा, पण्डो (Bharia Bhumia, Bhuinhar Bhumia, Bhumiya, Bhariya, Paliha, Pando)
  6. भतरा (Bhattra)
  7. भील, भिलाला, बारेला, पटेलिया (Bhil, Bhilala, Barela, Patelia)
  8. भील मीना (Bhil Mina)
  9. भुंजिया (Bhunjia)
  10. बियार, बीयार (Biar)
  11. बिंझवार (Binjhwar)
  12. बिरहुल, बिरहोर (Birhul, Birhor)
  13. डामोर, डामरिया (Damor, Damaria)
  14. धनवार (Dhanwar)
  15. गदबा, गदाबा (Gadba, Gadaba)
  16. गोंड (Gond) और इसके उपसमूह: अरख, अर्राख, अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीम्मा, भूता, कोयला भूता, भार, बाइसन हार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया, धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, दोरला, गायकी, गट्टा, गट्टी, गैटा, गोंड गोवारी, हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोयतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुचा मारिया, कुचकी मारिया, माडिया, मारिया, माना, मन्नेवार, मोघ्या, मोघया, मोगिया, मोंघया, मुडिया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राजगोंड, सोनझरी, झरेका, थाटिया, थोट्या, बड़े मारिया, बड्डे मारिया, दरोई।
  17. हल्बा, हल्बी (Halba, Halbi)
  18. कमार (Kamar)
  19. कारकू (Karku)
  20. कवर, कंवर, कौर, चेरवा, तंवर, छत्री (Kawar, Kanwar, Kaur, Cherwa, Tanwar, Chhatri)
  21. खैरवार, कोंदर (Khairwar, Kondar)
  22. खड़िया (Kharia)
  23. कोंध, खोंड, कंध (Kondh, Khond, Kandh)
  24. कोल (Kol)
  25. कोलम (Kolam)
  26. कोरकू, बोपची, मोआसी, निहाल, नाहुल, बोन्धी, बोन्डेया (Korku, Bopchi, Mouasi, Nihal, Nahul, Bonghi, Bondeya)
  27. कोरवा, कोडाकू (Korwa, Kodaku)
  28. माझी (Majhi)
  29. मझवार (Majhwar)
  30. मवासी (Mawasi)
  31. मुण्डा (Munda)
  32. नगेशिया, नगाशिया (Nageshia, Nagashia)
  33. उरांव, धनका, धनगड़ (Oraon, Dhanka, Dhangad)
  34. पाव (Pao)
  35. परधान, पथारी, सरोती (Pardhan, Pathari, Saroti)
  36. पारधी, बहेलिया, बहेल्लिया, चीता पारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टकनकर, टकिया (Pardhi, Bahelia, Bahellia, Chita Pardhi, Langoli Pardhi, Phans Pardhi, Shikari, Takankar, Takia)
  37. परजा (Parja)
  38. सहारिया, सहरिया, सेहारिया, सोसिया, सेहरिया, सोर (Sahariya, Saharia, Seharia, Sehria, Sosia, Sor)
  39. साओत, सौंता (Saot, Saunta)
  40. सौर (Saur)
  41. सवर, सवरा (Sawar, Sawara)
  42. सौंर (Sonr)

✅ वर्तनी सुधार संबंधी नई जनजातियाँ

इस तालिका में 12 नवीन जनजातियों को उनके स्वीकार्य पर्यायों के साथ सूचीबद्ध किया गया है:


जनजातीय जनसंख्या और निवास के आधार पर छत्तीसगढ़ को तीन प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है:

  1. ⛰️ उत्तरी सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें सरगुजा संभाग में निवास करने वाली जनजातियाँ शामिल हैं।
  2. 🏞️ मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर संभाग की जनजातियाँ आती हैं।
  3. 🌲 दक्षिणी सांस्कृतिक क्षेत्र: इसमें बस्तर संभाग में निवास करने वाली जनजातियाँ शामिल हैं।

💡 विशेष तथ्य: मध्य छत्तीसगढ़ की अपेक्षा उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में जनजातियों की संख्या अधिक है। बस्तर को “जनजातियों की भूमि” भी कहा जाता है। [CGPSC(ARTO)2022]

🏅 केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG)

🎖️ राज्य सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ

🌟 छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ


इस पृष्ठ में छत्तीसगढ़ के जनजातियों के वितरण को दर्शाने वाला एक मानचित्र शामिल है, जिसके साथ दो तालिकाएँ भी हैं।

🤝 छत्तीसगढ़ की मिश्रित जनजातियाँ (संकर)

यह तालिका उन जनजातियों को दर्शाती है जो अन्य जनजातियों के मिश्रण से बनी हैं:


🏹 कंवर जनजाति का निवास क्षेत्र

🌳 उरांव जनजाति का निवास क्षेत्र


  1. कोरवा: सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़ तथा कोरबा।
  2. खड़िया: जशपुर, रायगढ़, रायपुर, महासमुंद। (यह जनजाति बिहार और ओडिशा में भी पाई जाती है।)
  3. खैरवार: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर एवं बिलासपुर। (मध्यप्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में इन्हें ‘कोन्दर’ नाम से जाना जाता है।)
  4. भारिया भूमिया, भुईहर भूमिया, भूमियाँ, भारिया:
  5. मांझी: सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, कोरबा।
  6. मंझवार: सरगुजा, बलरामपुर, रायगढ़, कोरबा।
  7. मुण्डा: जशपुर एवं बलरामपुर। यह झारखण्ड की एक प्रमुख जनजाति है, इसलिए छत्तीसगढ़ के झारखण्ड से सटे जिलों में प्रमुखता से निवास करती है। [CG Vyapam (MFA-1)2023]
  8. नगेशिया: बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, सरगुजा। (यह झारखण्ड की प्रमुख जनजाति है)। [CGPSC(IMO)2020]
  9. पण्डो: सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया।
  10. बियार: कोरिया, सरगुजा क्षेत्र में। ये मुख्य रूप से गोंड़ और खैरवार जनजातियों के साथ रहते हैं। [CG PSC(CMO)2019]
  11. कोरकू: उत्तर छत्तीसगढ़।
  12. भील: कोरिया। [CG Vyapam (MFA-1)2023]

💎 प्रेरक विचार: “कुदरत ने सभी को हीरा बनाया है, जो जितना घिसेगा उतना ही चमकेगा।”


छत्तीसगढ़ प्रदेश में मुख्य रूप से 42 प्रकार की जनजातियों का निवास है, जिन्हें आगे 161 उप-जातियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें से, गोंड़ समुदाय की सर्वाधिक 41 उपजातियां और 30 शाखाएं हैं। कुछ प्रमुख जनजातियों की उपजातियाँ इस प्रकार हैं:

🔢 जनजातियों के उप-समूहों की संख्या

यह तालिका कुछ प्रमुख जनजातियों और उनके उप-समूहों की संख्या को दर्शाती है:

🌾 हल्बी

🤝 भतरी

🏞️ सदरी

🛶 दोरली


छत्तीसगढ़ की जनजातियों को भाषाई आधार पर मुख्य रूप से तीन परिवारों में विभाजित किया गया है:

भाषा परिवारनिवास क्षेत्रसंबंधित जनजातिसंबंधित बोली
🌏 मुण्डा भाषा परिवारमुख्यतः उत्तरी छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग, कोरबा और रायगढ़) [CGPSC(ADJ)2018]गदबा (अपवाद), कोरकू, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, नगेशिया, संवरा, सौंता, निहाल, खड़िया, मांझी, कोल, मंझवार।तुरी, सिंगरी, मुंडारी, खड़िया, हो, मांझी।
📜 आर्य भाषा परिवारमुख्यतः मध्य छत्तीसगढ़ (बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग)हल्बा (अपवाद), भतरा (अपवाद), पंडो (अपवाद), कमार, कंवर, बिंझवार, भुजिया, धनवार, भैना, बैगा, धाकड़, बैगानी, देवार, मरार।हल्बी [CGPSC(Pre)201], भतरी, पंडोप [CGPSC(CMO)201], सदरी, छत्तीसगढ़ी।
🏛️ द्रविड़ भाषा परिवारमुख्यतः दक्षिणी छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग) [CGPSC(ARO)2022]उरांव (अपवाद), कोंध (अपवाद), परजा, मुड़िया, माड़िया, गोंड़, दोरला, अबूझमाड़िया, धुरवा, दण्डामी माड़िया।कुडुख, कुई, परजी कोया, दोरली, गोंड़ी [CGPSC(Mains)2016]।

🗺️ छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ, उनकी बोलियाँ और क्षेत्र

यह तालिका विभिन्न जनजातियों द्वारा बोली जाने वाली बोलियों और उनके निवास क्षेत्रों को दर्शाती है:

⭐ प्रेरक विचार: “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।”


छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सरकार ने आदिवासी और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए विकास प्राधिकरणों का गठन किया। 2004 में बने इन प्राधिकरणों का 20 जून 2024 को पुनर्गठन किया गया, जिसका विवरण इस प्रकार है:

1. बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण

2. सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण

3. मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण

4. अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण


⭐ प्रेरक विचार: “किसी ने सच ही कहा संघर्षों की रातों में इंसान अकेला होता है, और जब सफलता आती है तो पूरा काफिला आपके पीछे होता है।”


🔢 छत्तीसगढ़ में PVTGs की संख्या

📊 जनगणना और साक्षरता


📅 छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्र की अधिसूचना

📊 महत्वपूर्ण आँकड़े (छत्तीसगढ़)

🌟 केंद्रीय अभिकरण (6)

  1. विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरण, कवर्धा
  2. विशेष पिछड़ी जनजाति अबूझमाड़िया विकास अभिकरण, नारायणपुर – इसकी स्थापना 13 जून 1978 (1978-79) को हुई। [CGPSC(ADH) 2022]
  3. विशेष पिछड़ी जनजाति कमार विकास अभिकरण, गरियाबंद – इसकी स्थापना 04 सितम्बर 2009 को की गई।
  4. विशेष-पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण, अम्बिकापुर
  5. विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास अभिकरण, जशपुर
  6. विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा विकास अभिकरण, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) – इसका पुनर्गठन 14 सितम्बर 2022 को किया गया।

⭐ राजकीय अभिकरण (2)


🏢 प्रकोष्ठ (10)

विशेष रूप से कमजोर जनजातियों के विकास के लिए, अनुसूचित जनजाति प्रशासन/प्राधिकरण एवं अभिकरणों/प्रकोष्ठों का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विकास योजनाओं को छत्तीसगढ़ शासन संचालित कर रहा है। [CGPSC(AMO, Sci. Off.) 2022]

  1. कमार विकास प्रकोष्ठ, नगरी
  2. कमार विकास प्रकोष्ठ, भानुप्रतापपुर
  3. कमार विकास प्रकोष्ठ, महासमुंद
  4. बैगा विकास प्रकोष्ठ, बैकुंठपुर
  5. बैगा विकास प्रकोष्ठ, राजनांदगांव
  6. बैगा विकास प्रकोष्ठ, मुंगेली
  7. बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, धरमजयगढ़ [CGPSC(AMO)2022]
  8. पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, कोरबा
  9. पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ, बलरामपुर
  10. बिरहोर विकास प्रकोष्ठ, बिलासपुर (नवीनतम गठित)

👤 परिषद् की संरचना

📜 प्रमुख शर्तें


📋 छत्तीसगढ़ के प्रमुख सलाहकार परिषद्: एक तुलनात्मक दृष्टि



📈 जनजातीय/आदिवासी उपयोजना


🗺️ प्रदेश के आदिवासी उपयोजना क्षेत्र

यह तालिका छत्तीसगढ़ के जिलों को एकीकृत आदिवासी विकास परियोजनाओं, माडा पाकेट और लघु अंचलों में वर्गीकृत करती है:


शिल्पजनजाति
बांस शिल्प/टोकरी निर्माण में निपुणकमार [CG PSC(ADPES)2019]
बांस शिल्प (आजीविका प्रधान)कमार [CG PSC(AP)2016, (Pre)2019]
बांस के बर्तन निर्माण में निपुणकमार, कंडरा, धनवार, बिरहोर [CG PSC(ADS) 2017]
बांस शिल्पकलासौंता, बैगा, मांझी, दोरला, परजा।
काष्ठ शिल्पअबूझमाड़िया, मुड़िया।
छिंद पत्ता शिल्पशिकारी, पारधी।
मोहलाइन छाल व उरई से रस्सी बनानाबिरहोर, खोण्ड।

🏠 जनजातियों के निवास स्थान


पेय पदार्थजनजाति और बनाने की विधि
सल्फी (Salfi)मुड़िया, माड़िया (सल्फी वृक्ष से प्राप्त)। [CG PSC(ADH)201]
ताड़ी (Tadi)बैगा (ताड़ और छिन्द वृक्ष से प्राप्त)। [CG Vyapam(TET-2)202]
हांड़िया (Handiya)कोरवा (गोंदली, कुटकी और बाजरे के अनाज से बनती है)। [CG Vyapam(TET-2)2024]
छिंदरसमाड़िया एवं अबूझमाड़िया (छिन्द वृक्ष से प्राप्त)।
पेजगोंड़ (चावल से बनता है)। [CG PSC(ADH)201]
कोसमाउराँव (कोसम बीज व पके चावल/बासी से)। [CGVyapam(TET-2)2024],[CGPSC(ARO)202:]
दाडनामुड़िया (महुए से निर्मित)।
लान्दाबस्तर में चावल से निर्मित (घोटुल में लोकप्रिय)। [CG PSC(ADH)201]
चारचावल से बना किण्वित पेय, त्यौहारों और विवाह में पिया जाता है (बस्तर में लोकप्रिय)।
सुरामआदिवासी रक्त वृद्धि के लिए सेवन करते हैं (महुआ से निर्मित)।

✨ विशेष जानकारी

🎨 गोदना शिल्प प्रशिक्षण केन्द्र


छत्तीसगढ़ में जनजातियों द्वारा की जाने वाली स्थानांतरित कृषि को दिप्पी कृषि या पेण्ड्रा कृषि कहा जाता है। उत्तर-पूर्वी भारत में इसे झूम कृषि कहते हैं।


🌟 बस्तर के प्रमुख देव

👻 आध्यात्मिक मान्यताएँ

💃 नृत्य संबंधित देवी-देवता

🌳 वृक्षों में निवास करने वाले देवी-देवता


🌺 जनजाति एवं उनके प्रमुख देवी-देवता

🌸 प्रमुख ग्राम देवी एवं देवता

🔮 जनजातियों में प्रचलित लोक ज्योतिष

☀️ जनजातियों में सूर्य देवता

🙏 जनजातियों के धार्मिक पुजारी

🧬 जनजाति एवं उनकी उत्पत्ति


(यह पृष्ठ जनजातियों के देवी-देवताओं का मानचित्र प्रस्तुत करता है, जिसे पाठ में बदलना संभव नहीं है।)


🌳 कुरुख (उरांव) में पशु, पक्षी, पौधे आदि से संबंधित कुल नाम


** youthगृह के प्रकार**

** विभिन्न जनजातियों के युवागृह**

जनजातियुवागृह का नाम
1. अबूझमाड़ियाकोसीघोटुल/घोटुल
2. उराँवधुमकुरिया (Dhumkuria) [CG Vyapam(VAPR)2021], [CG PSC(AP)2016], [CG Vyapam(FNDM)2019]
3. मुरिया/मुड़िया (गोंड़)घोटुल [CG Vyapam(Ameen)2017,(SAAF)2018][CGPSC(Lib)2018,(ADA)2020(Reg.)2021,(ARO)(LO)2022]
4. बिरहोरगितिओना [CG PSC(Pre)2020]
5. भारियाघसरवासा [CG Vyapam(VAPR)2021]
6. भुइंयारंगबंग [CG Vyapam(VAPR)2021]
7. परजाधांगाबक्सर [CG Vyapam(VAPR)2021]
8. कोंधधांगड़ा घर (पुरुष), धांगड़ी घर (महिला)

🛖 कोसीघोटुल/घोटुल: एक विस्तृत परिचय


धुमकुरिया (Dhumkuria): उरांव जनजाति का युवागृह

श्रेणीसदस्य/प्रमुखआयु वर्ग के आधार पर नामकरण
जनजातिउराँव1. पुना जोरवार (13 वर्ष से कम)
पुरुष (धांगर)पुरुष प्रमुख (धांगर महतो)2. मजथुरिया जोरवार (13 से 18 वर्ष तक)
महिला (धांगरिन)महिला प्रमुख (बारकी धांगरिन)3. धांगर (18 वर्ष से अधिक पुरुष) [CG PSC(ARO)2022, (AP)2016] [CG Vyapam(VAPR)2021, (FNDM)2019]

घोटुल: मुरिया/मुड़िया (गोंड़) जनजाति का युवागृह

** घोटुल के सदस्य और प्रमुख**

श्रेणीसदस्यप्रमुख
पुरुषचेलिकसिरेदार [CG PSC(SEE)2017]
महिलामोटियारिनबेलोसा [CG PSC(Pre)2014]

** घोटुल से जुड़े नृत्य, वाद्ययंत्र और त्यौहार**


🚫 घोटुल से संबंधित निषेध

👥 घोटुल के अतिथि एवं उनके पद

🔑 घोटुल में प्रचलित शब्द और उनके अर्थ

जनजातियों में विवाह की परंपराएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: एकल विवाह (Monogamy) और बहु विवाह (Polygamy)

💑 एकल विवाह (Monogamy)

👨‍👩‍👧‍👦 बहु विवाह (Polygamy)

💞 जनजातियों में अधिमान्य विवाह (Preferential Marriages)

अधिमान्य विवाह को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. ममेरे और फुफेरे भाई-बहनों का विवाह (Cross-cousin Marriages): इसे दूध लौटावा विवाह भी कहा जाता है।
  2. मौसेरे और चचेरे भाई-बहनों का विवाह (Parallel-cousin Marriages)
  3. साली और भाभी विवाह (Sororate and Levirate Marriages)

विवाह के प्रमुख प्रकार और उनकी विशेषताएँ

✨ विशेष जानकारी

** विभिन्न जनजातियों में प्रचलित विवाह**


मुड़िया जनजाति के नृत्य

अन्य प्रमुख जनजातियों के नृत्य

🎵 जनजाति नृत्य और संबंधित वाद्ययंत्र

🗺️ छत्तीसगढ़ में प्रचलित प्रमुख नृत्यों का क्षेत्रीय वितरण (मानचित्र आधारित)


मुड़िया जनजाति से संबंधित नृत्य

  1. मांदरी नृत्य
  2. एबालतोर नृत्य
  3. गेंड़ी नृत्य या डिटोंग
  4. हुलकी पाटा नृत्य
  5. घोटुल पाटा नृत्य
  6. माओ पाटा नृत्य
  7. कोलांग पाटा / पूस कोलांग / देव कोलांग
  8. छेरता नृत्य
  9. कोकरेंग नृत्य
  10. दीवाड़ एंडन्ना / दीपावली नृत्य
  11. हर एंडन्ना नृत्य
  12. ककसार नृत्य

🏹 अबूझमाड़िया जनजाति से संबंधित नृत्य

  1. काकसाड़ नृत्य / काकसार
  2. कोटकी-घोड़ा नृत्य

🐃 माड़िया जनजाति से संबंधित नृत्य

🌿 दोरला जनजाति का नृत्य


⚔️ धुरवा जनजाति का नृत्य

🌳 बैगा एवं गोंड जनजाति से संबंधित नृत्य

  1. बिल्मा नृत्य
  2. सैला नृत्य / डंडा नृत्य / सैला-रीना नृत्य

🎊 अन्य प्रमुख नृत्य

  1. फाग नृत्य
  2. अटारी नृत्य
  3. परघौनी नृत्य
  4. करमा नृत्य
करमा का प्रकारसंबंधित जाति
1. बैगानी करमाबैगा जनजाति
2. माड़ी करमामाड़िया जनजाति
3. गोंड़ी करमागोंड़ जनजाति
4. भूईहारी करमामुड़िया जनजाति
5. बिरम एवं देवारी करमादेवार जाति

💃 बैगा, उरांव एवं कोरकू जनजाति के विशिष्ट नृत्य

  1. बैगा जनजाति के नृत्य
  2. उरांव जनजाति से संबंधित नृत्य
  3. कोरकू जनजाति से संबंधित नृत्य

🎉 भतरा एवं कोरकू जनजाति का डंडारी नृत्य

🤝 कंवर जनजाति का बार नृत्य

🔥 पहाड़ी कोरवा जनजाति का दमनच नृत्य

💃 भारिया जनजाति का सैतम नृत्य

🥁 कोल जनजाति का कोलदहका/कोलहाई नृत्य


जनजातिसंस्कार विशेष
माड़िया/दण्डामी माड़िया/बायसन हार्न माड़िया• कूटेह संस्कार: तीसरे दिन मृतात्मा को पितृ देवों से मिलाने के लिए पूजा। • हनाल गट्टा (स्मृति स्तंभ): मृतक की याद में स्तंभ स्थापित करने की परंपरा। [CGPSC(AP)2016]
अबूझमाड़िया• अनाल गड्या (मृतक स्तंभ): मृतक स्तंभ की स्थापना।
बैगा• मृत्यु के बाद मादी नामक शुद्धिकरण संस्कार।
गोंड़• तीसरे दिन कोज्जी और दसवें दिन कुण्डा मिलन संस्कार होता है।
दोरला/कोया/कोयतुर• मृत्यु गीत (पेंतर पाटा): बुजुर्ग स्त्रियां गाती हैं। • प्रमुख शब्दावली: वड्डे (धार्मिक प्रमुख), तलूर कुंडा (अग्नि हण्डी), दिनांक (क्रियाकर्म), पस पेर (शुद्धिकरण हेतु हल्दी पानी छिड़कना)।
कोरकू• सिडोली प्रथा: मृतक को दफनाने और लकड़ी का स्तंभ गाड़ने की परंपरा।
कोरवा• नवाधाती/नवाधानी प्रथा: 10 दिन का शोक मनाना। • क्रियाकर्म के समय कुमारी भात की परंपरा। [CG PSC(SEE)2020]
भतरा• प्रमुख शब्दावली: टरंडी (अर्थी/टिकथी), मड़ाभाटा (श्मशान), बांधन कटनी (मामा की आत्मा की शांति हेतु भांजे द्वारा की जाने वाली रस्म)।
उरांव• पटरा: शव को श्मशान ले जाने हेतु बांस से निर्मित।<br> • छाई भितर: मृत आत्मा को पूर्वजों से मिलाने की क्रिया।
पहाड़ी कोरवा• जिस झोपड़ी/घर में मृत्यु होती है, उसे नष्ट कर नई झोपड़ी बनाते हैं।
भुजिया• समगोत्रीय (गोतियार) की मृत्यु पर घर का चूल्हा और पानी का मटका तोड़ दिया जाता है।
बिरहोर• बिस्सर खाने की प्रथा।
कमार• घर के सदस्य की मृत्यु होने पर नया घर बना लेते हैं। [CG PSC(ARO)2022]

🎼 जनजातियों में प्रचलित लोकगीतों के विभिन्न स्वरूप


  1. माओपाटा (गौर नाट्य)
  2. भतरानाट
  3. दहिकांदो
  4. खम्बस्वांग (Khamb Swang Drama)

🐾 अनुष्ठान शिकार

जनजातिअनुष्ठान शिकार का नाम
उरांवफाग सेंदरा, जेठशिकार [CG PSC(Pre)2024]
मुण्डाबिसु सिकरोर [CG PSC(Pre)2024]

🎤 परम्परागत लोक गीतकार

लोक गीतकारप्रमुख विशेषताएँ
1. बसदेवा• इनका मुख्य कार्य गायकी है। • इन्हें ‘हरबोला’ भी कहते हैं।
2. परधान• ये लिंगोपाटा गीत गाते हैं, जो गोंड़ों के गौरवपूर्ण इतिहास से संबंधित है।
3. पंवारा• इसमें प्रश्नोत्तरी शैली में लोकगाथा गायन किया जाता है।
4. देवार• ये छत्तीसगढ़ की परम्परागत लोक गायक जाति हैं। • वाद्ययंत्र: सारंगी, ढुंगरू। • देवार स्त्रियाँ परम्परागत रूप से गोदना गोदने का कार्य करती हैं। [CG PSC(Reg.)2021]
जनजातिपर्व-त्यौहार
उरांवसरहुल, करमा, सोहरई। [CG Vyapam(Patwari)2017,(LOI)2018,(AGDO)2018], [CG PSC(Pre)2016,(Pre)2024]
गोंड़माटी त्यौहार, गौरा-गौरी, मेघनाथ पर्व, लारूकाज, पुपुल साड़, नावाखानी, पोहचानी। [CG Vyapam(FNDM)2019], [CG PSC(AMO)2022]
गोंड़, भतराअमुस त्यौहार।
गोंड़, धुरवा, परजाआमाखाई।
माड़ियागोंचा पर्व, मड़ई पर्व।
अबूझमाड़ियाकाकसाड़ परब।
माड़िया, भतरादियारी।
कोरवाबीजबोहनी, कोरा, धेरसा।
भतरा, हल्बालक्ष्मी जगार, बाली परब।
भीलभगोरिया त्यौहार।
बैगारसनवा पर्व/रतौना पर्व।

‘पण्डुम’ बस्तर की गोंड़ जनजाति में नवाखाई (नई फसल का त्यौहार) को कहते हैं।

✨ विशेष पर्वों का वर्गीकरण


🕰️ महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाक्रम


🏞️ प्रदेश के प्रमुख मड़ई

🌸 फाल्गुन मड़ई

छत्तीसगढ़ की लोक शिल्पकला को प्रमुख रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

⛓️ धातु कला में प्रयुक्त मिश्र धातु


🏛️ छत्तीसगढ़ में धातु शिल्पकला

प्राचीन काल से ही छत्तीसगढ़ में जनजातियों द्वारा धातु शिल्पकला का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में बस्तर, सरगुजा और रायगढ़ में इस कला की विशेष पहचान है, जहाँ इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है।

🍯 घड़वा शिल्पकला / ढोकरा शिल्पकला

🔔 झारा शिल्पकला (बेल मेटल हस्तशिल्प)

🔥 लौह शिल्पकला


🏺 मृत्तिका शिल्पकला (मिट्टी की कला)

यह छत्तीसगढ़ की एक प्राचीन कला है, जिसमें मिट्टी से खिलौने, मूर्तियां और बर्तन बनाए जाते हैं। यह बस्तर और सरगुजा में विशेष रूप से प्रचलित है।

🪵 काष्ठ शिल्पकला (लकड़ी की कला)

** स्थापित काष्ठ स्तंभ**

🕯️ चिमनी/दीपक काष्ठ शिल्पकला

🗿 स्मृति स्तंभ

यह पूर्वजों की याद को जीवित रखने के लिए बनाए जाते हैं, जो लकड़ी, सीमेंट, मिट्टी या पत्थर के हो सकते हैं। इन पर नक्काशी और पेंटिंग के माध्यम से मृतक के जीवन और सपनों का चित्रण किया जाता है।

📜 अन्य प्रमुख शिल्पकलाएं

🪨 मृतक स्तंभ

🌿 पत्ता शिल्पकला

✨ कंघी शिल्पकला

🎨 प्रस्तर शिल्पकला

🎋 बांस शिल्पकला

🧶 सिसल शिल्पकला

🥥 तुम्बा शिल्पकला

🎨 हस्तशिल्प विकास बोर्ड एवं प्रमुख कलाकार

🏛️ हस्तशिल्प विकास बोर्ड

🔨 पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामोद्योग शिल्प केन्द्र (बांसकला केन्द्र)

जनजातीय चित्रकारक्षेत्र
बेलगूर मंडावीनारायणपुर / बस्तर
नर्मदा सोनसायगोंड़ चित्रकारी (रायपुर) [CG Vyapam(MBD)2024]
जनगण सिंह श्यामगोंड़ चित्रकारी
आनंद सिंह श्याम व कलावती गोंड़गोंड़ चित्रकारी
निवास विश्वकर्माबस्तर
बंशीलाल विश्वकर्माबस्तर (आकृति नामक कला संस्थान की स्थापना)
देवेन्द्र सिंह ठाकुरबीजापुर
खेमदास वैष्णवदंतेवाड़ा
बनमाली नेतामकांकेर (बनसागर)
सुरेश विश्वकर्माजगदलपुर

जनजातियों में लोकवाद्य संगीत शास्त्र के अनुसार चार मुख्य वर्गों में विभाजित हैं:

1. तत् वाद्ययंत्र (String Instruments)

यह तंतु आधारित कलात्मक वाद्य यंत्र हैं, जिनका प्रयोग मुख्य रूप से पूजा-अर्चना में होता है।

2. वितत् / अवनद्ध वाद्ययंत्र (Percussion Instruments)

📯 किसी खोखले आधार पर चमड़ा मढ़कर बनाए जाने वाले वाद्ययंत्र

3. घन वाद्ययंत्र (Solid Instruments)

🔔 ये ठोस धातु या कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

4. सुषिर वाद्ययंत्र (Wind Instruments)

ये मुँह से फूंककर बजाए जाते हैं और हवा के उतार-चढ़ाव से संगीत उत्पन्न होता है।
| 🔔 ये ठोस धातु या कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।🔔 ये ठोस धातु या कठोर काष्ठ से बने होते हैं और आघात से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

घंट/घंटीमुयांगचिटकुलझाबतिरडुड्डी
पीतल का गोल कटोरीनुमा यंत्र।गोंड़ी में घंटी को मुयांग कहते हैं (ककसाड़ नृत्य)।पीतल निर्मित, मंजीरा की आकृति (मांदरी नृत्य)।घुंघरूओं का गुच्छा।लोहे का वाद्ययंत्र (माड़िया नाच)। (CG PSC Pre 2023)

⭐ प्रेरक विचार: “आज का काम कल पर टालकर हम अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा नहीं पा सकते हैं” – अब्राहम लिंकन



🌍 जनजातीय समस्याएँ