📖 लोककला और संस्कृति (Folk Art and Culture)-1

Page Contents

📖 लोककला और संस्कृति (Folk Art and Culture)-2

📖 लोककला और संस्कृति (Folk Art and Culture)-3


लोकगीतों का वर्गीकरण


प्रमुख लोकगीत, वाद्ययंत्र और उनके कलाकार



पंडवानी की शैलियाँ

[CG PSC(ARO, APO)2014] [CGVyapam (MFA-2)2023]


🌍 अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि

🎶 शौकिया लोकगायक




ददरिया

चंदैनी/लोरिक चंदा गायन

ढोला-मारू

भरथरी गीत




भोजली गीत

जंवारा गीत

जंवारा गीत के प्रकार




🌧️ सवनाही गीत


🎪 मड़ई गीत


🐍 नगमथ


🕺 डण्डा गीत


🎉 छेरछेरा गीत


📜 ऐतिहासिक लोकगीत

गोपल्ला गीत


悲しい करुणा एवं वेदना से संबंधित लोकगीत

बांस गीत

नचौनी गीत


🎶 जाति से संबंधित लोकगीत

बसदेवा गीत


🌟 बीरम गीत एवं देवार गीत


👶 छत्तीसगढ़ के जन्म संस्कार गीत

सधौरी गीत

सोहर गीत

बधाई गीत

लोरी गीत

बरुआ गीत


💒 छत्तीसगढ़ी विवाह गीत

1. मड़वा छवठनी

2. घुलमाटी

3. मंगरोहन

4. तेलचघी

अन्य प्रमुख विवाह गीत


💍 विवाह के अन्य गीत एवं रस्में

15. भाँवर

16. बिदाई या गौना

17. पहमी गीत

विवाह संबंधी प्रमुख रस्में

छत्तीसगढ़ी गीतों का वर्गीकरण

1. नारी प्रधान गीत (Women-Centric Songs)
संस्कार विषयक गीतजन्म गीत, विवाह गीत
नृत्य गीतसुआ, भोजली
पर्व गीतगौरा, सवनाही
ऋतु गीतबारामासा, ददरिया
अन्य गीतलोरी
2. पुरुष प्रधान गीत (Men-Centric Songs)
नृत्य गीतडंडा, करमा, मड़ई, नाचा
जातीय गीतबांस गीत, देवार गीत, रास
धार्मिक गीतभजन, जंवारा
ऋतु गीतबारहमासा, वर्षागीत

📖 28.2 छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोकगाथाएँ (Major Folktales of Chhattisgarh)


आदिकालीन लोकगाथाएँ

मध्यकालीन लोकगाथाएँ


राउत नाचा


💃 सुआ नृत्य/गौरा नृत्य


🤸 पंथी नृत्य


👏 तेराताली नृत्य


🎭 झिरलिटी नृत्य

🎭 28.4 लोकनाट्य (Folk-Theatre)


💃 28.4.1. नाचा (Nacha)


🎪 छत्तीसगढ़ के प्रमुख नाचा पार्टी/नाचा से संबंधित संस्थान


👴 पितामह: दुलार सिंह मंदराजी


🌟 28.4.2. रहस (Rahas)

रहस के स्वरूप

आधारसवर्ण रहससतनामी रहस
अवधि9 दिनों तक चलता है।10 दिनों तक चलता है।
प्रधानताभक्ति की प्रधानता रहती है।भक्ति के साथ-साथ मनोरंजन का तत्व भी होता है।
कलाकारव्यास का किरदार ब्राह्मण द्वारा निभाया जाता है।व्यास का किरदार जाति के किसी शिक्षित व्यक्ति द्वारा निभाया जाता है।
प्रतिमावेदी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है।वेदी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा के साथ गणेश व रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है।

🤡 28.4.3. गम्मत (Gammat)

गम्मत के प्रकार


👨‍🎨 लोकनाट्य कलाकार (Folk Theatre Artists)

🌟 दुलार सिंह मंदराजी

🌟 दाऊ महासिंह चन्द्राकर

🌟 दाऊ रामचंद्र देशमुख

🌟 हबीब तनवीर

🌟 गोविन्द निर्मलकर

🌟 डोमार सिंह कुंवर

🎤 प्रमुख गीतकार (Prominent Singers)

🌟 तीजन बाई (Teejan Bai)


🌟 झाडूराम देवांगन (Jhaduram Dewangan)


🌟 स्व. देवदास बंजारे (Late Devdas Banjare)


🌟 रितु वर्मा (Ritu Verma)


🌟 उषा बारले (Usha Barle)


🌟 स्व. सुरुजबाई खाण्डे (Late Surujbai Khande)


🌟 स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया (Late Lakshman Masturiya)


🎶 नृत्य एवं संगीत से संबंधित महत्वपूर्ण व्यक्ति (Important Personalities related to Dance and Music)


🎵 संगीतकार (Musicians)

कलाकार का नाम (स्थान)विशेषता/वाद्ययंत्रपरीक्षा संदर्भ
ठाकुर लक्ष्मण सिंह शेखावत (रायगढ़)सितार व संतूर
बुद्धादित्य व विमलेन्दु मुखर्जी (भिलाई)सितार वादक
विष्णु जोशी (रायपुर)ख्याल गायन
भैरो प्रसाद श्रीवास्तव (रायपुर)ध्रुपद गायन
वत्सला पामकरठुमरी गायन
अजगर प्रसाद (दुर्ग)आख्तरंग वादक
बसंत रानाडे (राजनांदगांव)बेला वादक
दीपक व पूनम तिवारी विराटलोक गायक
मीर-अली-मीरलोक गायक
पंचकौड़ प्रसाद पाण्डे (बाजा मास्टर)हारमोनियम वादक
अनुपमा भागवत (भिलाई)सितार वादक[CG Vyapam (KADI-II)2019]
रेश्मा पंडित (रायपुर)तबला वादक[CG VS (AG-3)2021]

🌟 छत्तीसगढ़ के शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व


📜 हिन्दी पंचांग (Hindu Calendar)

🎉 छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहार (माह के अनुसार)


🎊 त्यौहारों का विस्तृत वर्णन

🌸 चैत्र माह (मार्च-अप्रैल)

☀️ वैशाख माह (अप्रैल-मई)

🔥 ज्येष्ठ/जेठ माह (मई-जून)

🌧️ आषाढ़ माह (जून-जुलाई)

🌱 बीज बोहनी



🌦️ सावन (जुलाई-अगस्त)

🌿 हरेली (Hareli)


🐃 अमूस तिहार


🐍 नागपंचमी / नगपांचे


🎑 कजरी त्यौहार


💕 राखी/रक्षाबंधन त्यौहार


🌾 भाद्र/भादो माह (अगस्त-सितम्बर)

🌱 भोजली पर्व


👩‍👦‍👦 बहुरा चौथ पर्व


📜 हलषष्ठी


🌟 जन्माष्टमी पर्व


🐂 पोला


👰 तीजा/हरतालिका


🎶 धनकुल/तीजा जमार


🐘 गणेश चतुर्थी


🌾 नवाखानी


🍂 कुवांर/आश्विन माह (सितम्बर-अक्टूबर)

👩‍👧‍👦 बेटाजूतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत) / जिवतिया पर्व


🌟 जोत-जंवारा पर्व


🏹 दशहरा पर्व/विजयादशमी


🌕 शरद पूर्णिमा


🌾 कोरा पर्व


✨ कार्तिक माह (अक्टूबर-नवम्बर)

🪔 दीपावली/देवारी


🐂 दियारी पर्व


🕉️ गौरा/गौरी-गौरा पर्व


🐄 गोवर्धन पूजा


🎉 मातर त्यौहार


🌳 आंवला पूजा


💒 देवउठनी एकादशी/जेठउनी/तुलसी विवाह


❄️ पौष माह (दिसम्बर-जनवरी)

📿 बड़े भजन का रामनामी मेला

🎁 छेरछेरा पर्व

❄️ छेरता पर्व (Chherta Festival)


🌾 पुपुलसाड पर्व (Pupulsad Festival)


🏔️ माघ माह (जनवरी-फरवरी) – धेरसा पर्व


🌤️ फाल्गुन माह (फरवरी-मार्च)

मेघनाथ पर्व (Meghnath Festival)

ओसामुड़वाँ पर्व (Osamudwan Festival)


💍 28.6 छत्तीसगढ़ के प्रमुख आभूषण (Major Ornaments of Chhattisgarh)

बच्चों, पुरुषों और महिलाओं के विशेष गहने व वस्त्र:

गोदना और अन्य परंपराएं:


🍲 28.7 छत्तीसगढ़ी कलेवा (व्यंजन) – Chhattisgarhi Cuisine

चावल आटे से बने कलेवा / व्यंजन

गेहूँ आटे से बने कलेवा / व्यंजन

व्यंजन का नामप्रयुक्त कच्चा पदार्थस्वादअवसर/विशेष
गुलगुलागेहूं आटा + गुड़ / शक्करमीठाअतिथि सत्कार के समय।
सोहारीगेहूं आटानमकीनविवाह, भोज में।
खपुरीगेहूं आटानमकीनसादी सेंकी हुई रोटी।
बोबरागेहूं आटा + गुड़ / शक्करमीठामातृ नवमीं के दिन बनाते हैं।

चावल एवं गेहूँ आटे के मिश्रण से बने कलेवा / व्यंजन

व्यंजन का नामप्रयुक्त कच्चा पदार्थस्वादअवसर/विशेषपरीक्षा संदर्भ
खुरमीगेहूं + चावल आटामीठातीजा-पोला के समय।
पपची / पपचचावल + गेहूं आटा एवं गुड़मीठाशादी के अवसरों पर।[CG Vyapam(SI Mains)2023][CG PSC(Asst.geo)2011,(Mains)2011]

बेसन (चना दाल) से बने कलेवा / व्यंजन

मैदा से बने कलेवा / व्यंजन

अन्य व्यंजन

खास तथ्य:

👑 28.8 बस्तर का दशहरा (Bastar Dussehra)

(स्रोत – छत्तीसगढ़ का गौरव बस्तर, पेज क्र. 166-170)

📜 प्रमुख तथ्य:

रथ का विभाजन (16 पहियों वाला रथ)

✨ बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्में


विस्तृत कार्यक्रम विवरण

1. पाट जात्रा (Pat Jatra):

2. डेरी-गड़ाई (Deri-Gadai):

3. काछन गादी/रणदेवी (Kachan Gadi/Ranadevi):

4. रैला पूजा व नवरात्र (Raila Puja & Navratra):

5. जोगी बिठाना (Jogi Bithana):

6. रथ परिक्रमा (Rath Parikrama):

7. बेल पूजा (Bel Puja):

दुर्गा अष्टमी/निशाजात्रा (Durga Ashtami/Nishajatra):

जोगी उठाई (Jogi Uthai):

मावली परघाव (Mavli Parghav):

भीतर रैनी (Bhitar Raini):

बाहिर रैनी (Bahir Raini):

मुरिया दरबार (Muria Darbar):

14. काछन जात्रा (Kachan Jatra):

15. कुटुंबजात्रा (Kutumbjatra):

16. गंगामुण्डा जात्रा/ओहाड़ी (Gangamunda Jatra/Ohadi):

  1. 🗓️ अवसर: श्रावण मास में हरेली पर्व के अवसर पर।
  2. 👩‍🎨 कलाकार: यह चित्रकला महिलाओं द्वारा बनाई जाती है।
  3. 🖌️ विशेषता: इस चित्रकला में घर के मुख्य द्वार की दीवारों पर गोबर का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के सुंदर चित्र उकेरे जाते हैं। [CG PSC(SEE)2020]
  4. 🗓️ अवसर: दीपावली के दूसरे दिन, गोवर्धन पूजा के मौके पर।
  5. 👩‍🎨 कलाकार: यह भी महिलाओं द्वारा की जाने वाली एक कला है।
  6. 🌾 विषय: घर में अन्न-धन की समृद्धि की कामना के साथ, धान की कोठी पर विभिन्न प्रकार के मांगलिक चित्र बनाए जाते हैं।
  7. 🗓️ अवसर: यह चित्रकला तीजा पर्व के अवसर पर, भगवान शिव-पार्वती की पूजा के लिए बनाई जाती है।
  8. 🌍 समुदाय: यह चितेर जनजाति द्वारा बनाई जाने वाली एक पारंपरिक पौराणिक चित्रकला है।
  9. 🗓️ अवसर: प्रायः विभिन्न मांगलिक और अनुष्ठानिक कार्यक्रमों के अवसर पर।
  10. 🖌️ विशेषता: सामान्यतः चावल के आटे का उपयोग करके अनेक प्रकार की बेल-बूटियों और पदचिन्हों के सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। यह घर के बरामदे (परछी) से लेकर गली तक बनाई जाती है।
  11. 🗓️ अवसर: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर।
  12. 🖌️ विशेषता: घर की दीवारों पर आठ पुतलिकाएं (कृष्ण के बाल रूप) बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
  13. 🏠 अवसर: सामान्यतः नए घर में प्रवेश करने से पहले।
  14. 🖌️ विशेषता: दीवारों पर मिट्टी के उपयोग से विभिन्न प्रकार की कलात्मक कृतियाँ उकेरी जाती हैं। इनमें विभिन्न जीव-जंतु, बेल-बूटे आदि का चित्रांकन होता है, जो कई वर्षों तक दीवारों पर बने रहते हैं। इसे छत्तीसगढ़ी में ‘नोहडोरा डालना’ भी कहते हैं। [CG VS (AG-3)2021]
  15. 🌍 जनजाति: यह भील जनजाति की एक प्रमुख चित्रकला है।
  16. 📍 उद्गम: इसका उद्गम स्थल मध्यप्रदेश का पिथौरा क्षेत्र माना जाता है।
  17. 🖌️ माध्यम: यह चित्रकारी मुख्य रूप से घरों की दीवारों, कागजों, और कपड़ों पर की जाती है। इसमें चिड़ियों, सांपों, हाथियों और घोड़ों जैसे चित्रों का प्रमुखता से अंकन होता है।
  18. 📍 स्थान: वे रायपुर में रहकर चित्रकला की साधना करते थे।
  19. 📰 पत्रिका: उनके चित्र ‘माधुरी’ और ‘शारदा’ जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे।
  20. 📍 स्थान: वे धमतरी जिले के एक प्रमुख चित्रकार थे।
  21. 🎨 चित्रांकन शैली: उनकी चित्रकला आचार्य नंदलाल बसु की शैली पर आधारित थी।
  22. ✨ विशेषता: उनकी कला में आचार्य बसु की कला का एक सुंदर प्रतिबिंब देखने को मिलता है। उन्होंने 1966 में शांति निकेतन से चित्रकला की शिक्षा प्राप्त की थी।
    1. कल्याण प्रसाद शर्मा
    1. ए. के. मुखर्जी
    1. निरंजन महावर
    1. ए. के. दानी
  23. तातापानी महोत्सव: बलरामपुर (प्रारंभ – 2012) [CG Vyapam (LOI)2023]
  24. रामगढ़ महोत्सव: सरगुजा (आषाढ़ के प्रथम दिवस)
  25. कुदरगढ़ महोत्सव: सूरजपुर
  26. मैनपाट महोत्सव: मैनपाट, सरगुजा (प्रारंभ – 2012) [CG PSC(Registrar)2021]
  27. कोरिया महोत्सव: बैकुण्ठपुर (प्रारंभ – रामानुजप्रताप सिंह) [CG PSC(Registrar)2021]
  28. झुमका महोत्सव: कोरिया
  29. चक्रधर समारोह: रायगढ़ (1985 से प्रारंभ) [CG PSC(ADA)(IMO)2020], [CG Vyapam (ADEO) 2017]
  30. शिवरीनारायण महोत्सव: जांजगीर-चांपा
  31. जाजल्यदेव महोत्सव: जांजगीर [CG PSC(Pre)2018]
  32. मल्हार महोत्सव: बिलासपुर [CG Vyapam (CDM) 2018]
  33. रतनपुर महोत्सव: बिलासपुर
  34. पाली महोत्सव: कोरबा
  35. अरपा महोत्सव: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
  36. राऊत नाचा महोत्सव: बिलासपुर (1978 से प्रारंभ) [CG Vyapam(HW) 2016]
  37. मदकू मेला: दखान, बैतलपुर, मुंगेली (यह एक ईसाई मेला है)
  38. चम्पारण मेला: रायपुर (वल्लभाचार्य जी की जयंती पर)
  39. शहीद वीरनारायण सिंह महोत्सव / सोनाखान महोत्सव: सोनाखान (10 दिसम्बर – आदिवासी लोक महोत्सव) [CG PSC (Lib.) 2014] [CG PSC (ADHIS) 2013]
  40. सिरपुर महोत्सव: महासमुंद (बुद्ध पूर्णिमा) [CG PSC(MI)2014] [CGPSC(Mains)2008]
  41. खल्लारी महोत्सव: महासमुंद (नवरात्रि में) [CG PSC (AMO) 2017][CG Vyapam (ESC) 2017]
  42. कर्णेश्वर महादेव का मेला: धमतरी
  43. शृंगी ऋषि का मेला: सिहावा, धमतरी (माघ पूर्णिमा)
  44. पुन्नी मेला (पूर्व नाम कुंभ मेला): राजिम (माघ माह) [CG Vyapam (ESC)2017(TET)2021] [CG PSC(Mains)2008]
  45. कौशिल्या महोत्सव: चंद्रखुरी (रायपुर)
  46. आरंग महोत्सव: आरंग (रायपुर)
  47. जल-जगार महोत्सव: गंगरेल (धमतरी)
  48. नगपुरा महोत्सव: दुर्ग
  49. डोंगरगढ़ महोत्सव: राजनांदगांव [CG PSC (RDP) 2014][CG PSC (Lib.) 2014]
  50. भोरमदेव महोत्सव: कबीरधाम (1995)
  51. गौरैया मेला: चौरेल, बालोद
  52. अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन: डोंगरगढ़ (प्रतिवर्ष 6 फरवरी को, प्रारंभ 6 फरवरी 1992) [CG PSC(AP)2019]
  53. वीर मेला: राजाराव पठार (बालोद)
  54. बेंदा मेला: कबीरधाम (मकर सक्रांति के अवसर पर)
  55. गढ़िया महोत्सव: कांकेर
  56. गढ़बासला चैतरई मेला: कांकेर
  57. बस्तर दशहरा उत्सव: जगदलपुर [CG PSC (RDA)2014, (Mains) 2008]
  58. बस्तर लोकोत्सव: बस्तर [CG PSC (RDA)2014]
  59. फागुन मड़ई मेला: कोण्डागांव [CG PSC (ADA)2020]
  60. मड़ई महोत्सव: नारायणपुर [CG PSC (CMO)2019, (RDA)2014]
  61. रामाराम मेला: सुकमा (नवाखाई के अवसर पर)
  62. गोंचा पर्व महोत्सव: बस्तर (आषाढ़ माह) [CG PSC (Lib.) 2014]
  63. ढोलकल महोत्सव: फरसपाल (दंतेवाड़ा)
  64. दंतेश्वरी फाल्गुन मड़ई उत्सव: दंतेवाड़ा (बस्तर) (9 दिनों तक आयोजित होता है) [CG Vyapam (AGDO)2021]
  65. 🗓️ प्रारंभ: 2005
  66. 🎯 उद्देश्य: अनुसूचित जाति के परंपरागत लोक कलाओं जैसे- पंथी, भरथरी, पण्डवानी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्रोत्साहित करना।
  67. 💰 राशि: प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रु., द्वितीय पुरस्कार – 0.75 लाख रु., तृतीय पुरस्कार – 0.50 लाख रु.।
  68. ✨ विशेष: राज्य के किसी भी जिले में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन कर कलाकारों को पुरस्कृत किया जाता है।
  69. अगासदीया: भिलाई (दुर्ग)
  70. छत्तीसगढ़ लोकमया मंच: कुम्हारी (दुर्ग)
  71. छत्तीसगढ़ लोकरंग: बिलासपुर
  72. लोक कला मंच: बिलासपुर
  73. लोक शृंगार भारती: बिलासपुर
  74. पुरखौती मुक्तांगन: उपरवारा (नया रायपुर)
  75. लोक कला दर्पण: रायपुर
  76. दफड़ा/चांग: यह लकड़ी के एक गोलाकार व्यास पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाता है, जिसे वादक अपने कंधे पर लटकाकर बजाता है।
  77. नगाड़ा: होली के अवसर पर फाग गीतों के साथ बजाया जाने वाला यह वाद्ययंत्र लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। [CGPSC(PEON) 2022, (VAS)2021]
  78. झांझ व मंजीरा: यह मंजीरे का एक बड़ा स्वरूप होता है, जिसे मांदर के साथ संगत के लिए बजाया जाता है।
  79. ढुढुम: इस वाद्ययंत्र में बारहसिंगा का सींग लगा होता है, जिस कारण इसे ‘सींग बाजा’ भी कहा जाता है। यह गंड़वा बाजा साज का एक प्रमुख वाद्ययंत्र है। [CGPSC(Pre)2023], [CGVyapam (VPR)2021]
  80. ताशा: प्रदेश के मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक प्रसिद्ध वाद्ययंत्र।
  81. अलगोजा: यह बांस से बनी एक विशेष संरचना होती है, जो बांसुरी की तरह दिखती है। इसके दो मुख होते हैं, जिनमें एक साथ हवा फूंककर इसे बजाया जाता है।
  82. मोहरी: प्रादेशिक अंचल में शहनाई का ही एक प्रचलित रूप ‘मोहरी’ है, जो गंड़वा बाजा का एक अभिन्न अंग है। इसे मुख्यतः विवाह के अवसर पर फूंककर बजाया जाता है। [CGVyapam (Lab Tech.)2024], [CG PSC(ADH)2015]
  83. खड़ताल: यह पंडवानी में प्रयोग होने वाला एक प्रमुख वाद्ययंत्र है, जिसे हाथ की अंगुलियों में फंसाकर बजाया जाता है।
  84. मांदर: लकड़ी के खोखले भाग के दोनों सिरों पर बकरे का चमड़ा चढ़ाकर इसे बनाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से जनजाति गीतों, नृत्यों, और मातासेवा गीत के समय किया जाता है।
  85. बीन: इसका प्रयोग सपेरों द्वारा सांप पकड़ने और गांव-गांव जाकर तमाशा दिखाने के लिए किया जाता है।
  86. ढोलक: इसका प्रयोग धार्मिक कार्यों जैसे मंदिरों में भजन-कीर्तन के समय किया जाता है।
  87. बांसुरी: खोखले बांस से बना यह वाद्ययंत्र मुंह से फूंककर बजाया जाता है और लगभग सभी प्रकार के गीतों में इसका प्रयोग होता है।
  88. इकतारा: प्रदेश में भरथरी गीत गाते समय इकतारा का प्रयोग किया जाता है।
  89. टिमटिमी: लकड़ी के खोखले भाग पर चमड़े की परत बांधकर इसे बनाया जाता है। यह वाद्ययंत्र होली और विवाह के अवसर पर देखा जा सकता है।
  90. खंजरी: इसे थाप मारकर और हाथ को हिलाकर बजाया जाता है। इसके घेरे में 3-4 जोड़ी झांझ लगी होती हैं।
  91. तमूरा: इसका निर्माण सूखे लौकी के खोल से किया जाता है। यह एक तत् वाद्ययंत्र है। [CG Vyapam (HELT)2024]
  92. ✨ विशेष:गड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य यंत्रों के नाम इस प्रकार हैं: [CGPSC(Pre)2023]
    1. झांझ
    2. नगाड़ा
    3. मोहरी
    4. गुदुम

📜 पृष्ठ 1: संचार और मीडिया की दुनिया

📌 संचार माध्यमों का अवलोकन

इस खंड के तहत, निम्नलिखित संचार के साधनों का विश्लेषण किया जाता है:


1. रेडियो 📻

2. दूरदर्शन 📺

3. डाक सेवाएं 📮

4. टेलीफोन 📱


📜 सिनेमा और फिल्मी कलाकार

5. सिनेमा 🎬

यहाँ छत्तीसगढ़ी सिनेमा की कुछ प्रमुख फिल्मों का विवरण दिया गया है:

🎭 फिल्मी कलाकार


📜 फिल्म जगत के अन्य चमकते सितारे

■ अनुराग बसु

■ अनुज शर्मा

■ ओमकार दास मानिकपुरी

■ किशोर कुमार साहू (अभिनेता)

■ कांतिलाल राठौर

■ अशोक मिश्र

🎭 अन्य कलाकार


📜 पृष्ठ 4: कला और रंगमंच के दिग्गज

📜 छत्तीसगढ़ का साहित्यिक सफर

⏳ छत्तीसगढ़ी साहित्य का कालक्रम

छत्तीसगढ़ के साहित्य को तीन प्रमुख कालों में बांटा गया है:


1. प्राचीनकालीन रचनाएँ

इस काल का छत्तीसगढ़ी साहित्य मुख्य रूप से प्रेम, वीरता और धार्मिक कथाओं पर केंद्रित था।


2. मध्यकालीन रचनाएँ

इस दौर के प्रमुख छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं:


📜 पृष्ठ 6: मध्यकाल के साहित्यिक रत्न


📜आधुनिक छत्तीसगढ़ी साहित्य के पुरोधा

🌟 छत्तीसगढ़ के प्रथम


📜 छत्तीसगढ़ी व्याकरण के शिल्पकार

यहाँ छत्तीसगढ़ी व्याकरण और भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण लेखकों और उनकी कृतियों का विवरण दिया गया है:

📜 पृष्ठ 9: विभिन्न नामों से जुड़े साहित्यकार

यहाँ छत्तीसगढ़ी साहित्य में विशिष्ट नामों से जुड़ी रचनाओं और उनके रचनाकारों की सूची दी गई है।


📜 प्रमुख गीत, कविताएँ और ऐतिहासिक रचनाएँ

🎶 छत्तीसगढ़ी के प्रमुख गीत एवं कविताओं के रचनाकार

🌾 धान नाम से संबंधित रचनाएँ

🌳 बस्तर नाम से संबंधित रचनाएँ

📚 इतिहास नाम से संबंधित रचनाएँ


📜 पृष्ठ 11: अध्ययन-आधारित रचनाएँ और लोक साहित्य

📖 अध्ययन नाम से रचनाएँ

** folk-literature लोक साहित्य से संबंधित**

🖋️ साहित्यकार और उनकी प्रथम रचना


📜 हीरालाल नाम के रचनाकार

✒️ हीरालाल काव्योपाध्याय

✒️ डॉ. हीरालाल शुक्ल

✒️ रायबहादुर हीरालाल

📜 पृष्ठ 13: राजभाषा आयोग से जुड़े व्यक्तित्व


📜 “पाण्डेय” उपनाम वाले साहित्यकार


📜 पृष्ठ 15: पाण्डेय और सोनी उपनाम के अन्य लेखक

पाण्डेय उपनाम के साहित्यकार

साहित्यकाररचनाएँसंबंधित परीक्षा (PYQ)
मेदनी प्रसाद पाण्डेय (जन्म – 1869)कछेरी (व्यंग्य), दुर्जन दर्पण, संग्रह सागर, सत्संग विलास (महाकाव्य)[CG PSC(Pre)2012]
शुकलाल पाण्डेयछत्तीसगढ़ गौरव, केकरा धरैय्या, खीरा चोट्टा, गियां अऊ भूल-भूलैया, पुरू-झुरू (शेक्सपियर की “कॉमेडी ऑफ एरर्स” का अनुवाद)[CG PSC(Pre)2017]
अनंतराम पाण्डेयकपटी मुनि (नाटक)[CG PSC(ARTO)2022]
शिव दास पाण्डेयछत्तीसगढ़ी दानलीला (पं. सुन्दरलाल शर्मा की रचना से प्रभावित होकर)
कामेश्वर पाण्डेयतुंहर जाय ले गियां, बिपत, जुराव
अनंत प्रसाद पाण्डेयछत्तीसगढ़ी कहावतें, रायगढ़ का इतिहास, रायगढ़ राज्य का भूगोल, छत्तीसगढ़ी शब्द संग्रह
त्रिभुवन पाण्डेय (व्यंग्य लेखक) [CG Vyapam(MFA-2)2023]भगवान विष्णु की भारत यात्रा, पम्पापुर की कथा, पंक्षी मतहंसो, ब्युटी पार्लर में भालू
शिव कुमार पाण्डेयबस्तर का मोंगली : चेंदरू, बस्तर माटी, बस्तर की देव संस्कृति, अबूझमाड़ इतिहास, कला एवं संस्कृति
बलदाऊ प्रसाद पाण्डेयरजनीगंधा, विक्रम कोट के तिलिस्म

सोनी उपनाम के साहित्यकार


📜 “तिवारी” उपनाम से जुड़े साहित्यकार


📜 “शर्मा” उपनाम के यशस्वी साहित्यकार


📜 “वैष्णव” उपनाम वाले कलम के धनी

📜 कपिलनाथ और यदु उपनाम के साहित्यकार

✒️ कपिलनाथ जी नाम से संबंधित


✒️ यदु जी नाम से संबंधित


📜 पृष्ठ 20: “शुक्ल” उपनाम के रचनाकार

“तानों की भट्टी में तपा आदमी राख नहीं सोना बनता है”


📜 “वर्मा” उपनाम के साहित्यिक हस्ताक्षर


📜 वर्मा और साहू वंश के लेखक


साहू जी नाम से संबंधित


📜 मिश्र उपनाम के लेखक और साहित्यिक संगठन

मिश्र जी नाम से संबंधित

प्रमुख साहित्य समिति एवं संगठन

📜 गुप्त और भानु उपनाम के साहित्यकार

✒️ गुप्त जी नाम से संबंधित


✒️ जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’


📜 ठाकुर उपनाम और ऐतिहासिक शिलालेख

✒️ ठाकुर जी नाम से संबंधित


📜 छत्तीसगढ़ी भाषा का सबसे पुराना शिलालेख


📜 पृष्ठ 26: राजनांदगांव त्रिवेणी परिषर के साहित्यकार

“कुछ लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल देते हैं, कुछ लोग अपने एक फैसले से पूरी दुनिया बदल देते हैं”


📜 विविध रचनाकार और उनकी कृतियाँ


📜 विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध साहित्यकार


📜 छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के अन्य हस्ताक्षर


📜 पृष्ठ 30: छत्तीसगढ़ी साहित्य के विविध रंग

📜 पृष्ठ 31: छत्तीसगढ़ी साहित्य के विविध रत्न

यह पृष्ठ छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण साहित्यकारों और उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालता है।


📜 कला और पत्रकारिता के स्तंभ

“रास्तों की परवाह करूंगा, तो मंजिल बुरा मान जायेगी”


📜 छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का विकासक्रम

📚 छत्तीसगढ़ी भाषा से संबंधित पुस्तकों का विकासक्रम

💡 छत्तीसगढ़ साहित्य से संबंधित विशेष तथ्य


📜 छत्तीसगढ़ की महिला साहित्यकार और उनकी रचनाएँ


📜 पृष्ठ 35: छत्तीसगढ़ की अन्य कलमकार महिलाएँ