🌱 छत्तीसगढ़ में प्रचलित लोक-जीवन की वह कला, जो समाज द्वारा स्वीकृत है, लोक संस्कृति कहलाती है। लोक संस्कृति में रीति-रिवाजों के अलावा साहित्य भी शामिल है, जिसे पाँच मुख्य भागों में वर्गीकृत किया गया है: 1. लोकगीत, 2. लोकगाथा, 3. लोककथा, 4. लोकनाट्य, और 5. लोक-सुभाषित। इसके तहत लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य, छत्तीसगढ़ी त्यौहार, पर्व, आभूषण और व्यंजन भी आते हैं।
🌍 इस प्रदेश की लोक संस्कृति मुख्य रूप से प्रकृति से प्रेरित है। [CG Vyapam (PRIA)2018]
🎶 लोकगीत और लोक नृत्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। [CG Vyapam (PRIA)2018]
लक्ष्मण मस्तुरिया, दिलीप षडंगी, केदार यादव, शेख हुसैन
4. चंदैनी
टिमकी, ढोलक
चिन्तादास
[CG Vyapam (DCAG)2018]
5. भरथरी
इकतारा, सारंगी
सुरुजबाई खाण्डे
[CG PSC(Lib.)2017]
6. बांस गीत
मोहराली
केजुराम यादव, नकुल यादव
7. कबीर गीत
भारती बंधु
[CG PSC(Pre)2015]
🌟 पंडवानी
📖 परिचय:
मूलकथा: यह महाभारत की कथा का छत्तीसगढ़ी लोक स्वरूप है। [CG PSC(Lib.)2014, (ARO)2022, (Pre)(ACF)2016]
रचनाकार: सबलसिंह चौहान (रतनपुर) द्वारा दोहा एवं चौपाई में रचित।
शैली: परधान एवं देवारों की पंडवानी गायकी।
अग्रणी: झाडूराम देवांगन को ‘पंडवानी का पितामह’ कहा जाता है।
मुख्य पात्र: नायक – भीम, नायिका – द्रौपदी।
लोकनाट्य: इसे छत्तीसगढ़ में बहादुरी से जुड़ा एक लोक नाटक भी माना जाता है। [CG PSC(ADIHS)2014]
इसे छत्तीसगढ़ की लोक गाथा (बैले) भी कहा जाता है।
🎤 गायन और वाद्ययंत्र:
गायक: एक मुख्य गायक होता है।
वाद्ययंत्र: मुख्य गायक स्वयं तम्बूरा, खंजरी और करताल (खड़ताल) बजाता है। [CG PSC(Pre)2022] अन्य सहयोगी कलाकार तबला, ढोलक, हारमोनियम, बेंजो और मंजीरा के साथ संगत करते हैं।
रागी: एक ‘रागी’ होता है जो ‘हुंकार’ भरता है। [CG PSC(AP)2016] रागी का प्रमुख कार्य हुंकारी भरना और गायक की पंक्तियों को दोहराना है। वह कथा को समकालीन घटनाओं से जोड़ते हुए प्रश्न भी पूछता है।
पंडवानी की शैलियाँ
[CG PSC(ARO, APO)2014] [CGVyapam (MFA-2)2023]
आधार
1. वेदमती शैली
2. कापालिक शैली
गायकी
🔸 इस शाखा के गायक शास्त्र-सम्मत गायकी करते हैं। 🔸 वे महाभारत के अनुसार गाते हैं और स्वयं को पंडवानी गायन का मानक मानते हैं। 🔸 वे स्वयं को महाभारत गायक कहते हैं।
🔹 यह कपाल शास्त्र की वाचक परंपरा पर आधारित है। 🔹 गायक-गायिका कदमों से चलते-फिरते, नृत्य करते और अभिनय करते हैं। 🔹 इसमें भाव और अभिनय का प्रधानता नहीं होती।
गायन
🔸 इसमें केवल गायन होता है।
🔹 इसमें गायन और नृत्य दोनों होते हैं।
वाद्ययंत्र
🔸 —
🔹 पठारी परधान – किंकणी या बाना नामक वाद्य यंत्र 🔹 गोगिया परधान – किडिंग नामक वाद्ययंत्र
💡 ध्यान दें: तीसरे प्रकार की पंडवानी में संवाद को प्रमुखता दी जाती है, जिसमें भावाभिनय कम होता है। इसमें गायन पक्ष कमजोर और भावों का मूर्त रूप लगभग समाप्त हो जाता है। यह पंडवानी के विकास का अंतिम चरण माना जाता है, जहाँ रागी का व्यवहार कुछ-कुछ जोकर जैसा होता है। इस शैली के श्रेष्ठ गायक रेवाराम गंजीर हैं।
🌍 अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि
पंडवानी गीत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। [CG Vyapam (RI)2015]
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने वाले मुख्य कलाकार हैं: 1. झाडूराम देवांगन, 2. तीजनबाई, 3. रितु वर्मा।
अन्य कलाकार: दानी परधान, गोगिया परधान, रामजी देवार।
🎶 शौकिया लोकगायक
रायपुरिहा देवार: पंडवानी के साथ अन्य लोक कथाओं का गायन सारंगी पर करते हैं।
रतनपुरिहा देवार: पंडवानी के साथ अन्य लोक कथाओं का गायन ढुंगरू वाद्य पर करते हैं।
राज्य में कंवर जनजाति के लोग पंडवानी के शौकिया (Interested) गायक के रूप में मिलते हैं। [CG Vyapam(FI)2022]
🦜 सुआ/गौरा गीत
अवसर: सुआ नृत्य के दौरान गाया जाता है।
पर्व: दीपावली। [CG PSC(Lib &SO)2019(AMO)2017]
समापन: शिव-गौरा विवाह के बाद।
प्रतीक: शिव और गौरी।
गीत की पंक्ति: “तरि हरि नहा नरि ना ना रे सुअना।”
रस: श्रृंगार रस। [CG Vyapam (Patwari)2022]
कलाकार: केवल महिलाओं द्वारा (यह एक महिला प्रधान गीत है)। [CG PSC(Mains)2011]
यह मुख्य रूप से गोंड स्त्रियों का नृत्य गीत है। [CG PSC(ACF)2021]
उद्देश्य: सुआ गीत में किशोरियाँ सुआ (तोता) के माध्यम से अपने प्रेमी को संदेश भेजती हैं। यह गीत नारी जीवन के सुख-दुःख और प्रेम को दर्शाता है।
वाद्ययंत्र: इसमें किसी भी वाद्ययंत्र का प्रयोग नहीं किया जाता।
विशेषता: लोरिक चंदा गायन सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक माना जाता है।
ढोला-मारू
आधार: यह मूल रूप से राजस्थानी लोक गीत है जो ढोला और मारू के प्रेम प्रसंग पर आधारित है।
कलाकार: सुरुजबाई खाण्डे एवं जगन्नाथ कुम्हार।
पात्र: नायक – ढोला (नरवर के राजकुमार), नायिका – मारू (पुंगल देश की राजकुमारी), खलनायिका – रेवा (जादूगरनी)।
भरथरी गीत
आधार: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में राजा भरथरी (राजा विक्रमादित्य के छोटे भाई) और रानी पिंगला के वैराग्य जीवन की गाथा। [CG PSC (Pre) 2022], [CG Vyapam (CBAS)2023]
वाद्ययंत्र: इकतारा व सारंगी। [CG Vyapam (Patwari) 2019], [CG PSC(Lib.)2017]
प्रचलित: उज्जैन (मालवा) में लोकगाथा के रूप में जन्मा।
विधा: लोकगीत विधा। [CG Vyapam (FI)2017]
गायक: भरथरी गायक स्वयं को ‘योगी’ कहता है और यह गायन प्रायः नाथपंथी गायकों द्वारा किया जाता है।
🧠 डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार कथा: “एक बार राजा भरथरी शिकार खेलने गए थे। वहां उन्होंने देखा कि एक आदमी की चिता में उसकी पत्नी ने भी कूदकर अपनी जान दे दी। राजा ने घर आकर रानी पिंगला की परीक्षा लेने का सोचा। रानी पिंगला ने कहा कि भरथरी की मृत्यु का समाचार ही उसकी जान ले लेगा। भरथरी शिकार पर जाते हैं और अपनी मृत्यु का झूठा समाचार भेज देते हैं। रानी पिंगला मर जाती हैं। तब गोरखनाथ रानी को जीवित करते हैं और भरथरी उनके शिष्य बनकर वैराग्य धारण कर लेते हैं।”
😂 फणीगीत
शैली: यह व्यंग्य और हास्य पर आधारित एक गीत है। [CG PSC (Pre) 2022]
🌾 पर्व/त्योहारों से संबंधित लोकगीत
भोजली गीत
अवसर: रक्षाबंधन के दूसरे दिन, भादो माह के कृष्णपक्ष की प्रथमा को।
उल्लेख: भोजली गीत में ‘गंगा’ का नाम बार-बार आता है। [CG PSC(Pre)2015]
गीत: “आ हो देवी गंगा, ओ देवी लहर तुरंगा।” [CGPSC(ABEO)2013]
संबंध: यह भूमि और जल से संबंधित गीत है। [CG Vyapam (RI) 2017]
प्रचलन: बुंदेलखंड और उत्तरप्रदेश में इसे ‘कजली पर्व’ के नाम से जाना जाता है।
पूजा: भोजली को गंगा-देवी और साक्षात् अन्नपूर्णा मानकर पूजा जाता है।
विशेष: महिलाएँ टोकरी में खाद और मिट्टी रखकर उसमें धान, गेहूँ, जौ या उड़द के दाने बोती हैं। जब पौधे उग जाते हैं, तो उसे ‘भोजली’ कहते हैं। इसके अंकुरण से विसर्जन तक गाए जाने वाले गीतों को ‘भोजली गीत’ कहा जाता है।
जंवारा गीत
अवसर: चैत्र नवरात्रि में जंवारा गीत गाया जाता है।
उल्लेख: जंवारा गीत में दुर्गा देवी का नाम बार-बार आता है।
बिरही: जंवारा में बोये जाने वाले बीजों को एक दिन पहले भिगोकर रखा जाता है, जिसे ‘बिरही’ कहते हैं।
विसर्जन: नवरात्रि के पहले दिन जंवारा बोया जाता है और नौवें दिन इसका विसर्जन किया जाता है।
जंवारा गीत के प्रकार
आधार
जसगीत [CG PSC(Reg.)2017]
पचरा गीत
विसर्जन गीत
अन्य नाम
एक प्रकार का देवी पूजन गीत
उल्था गीत
उम्हा गीत
अवधि
बिरही डालने के दिन से सप्तमी तक
नवरात्रि के प्रथम दिवस से लेकर सप्तमी तक
अष्टमी के हवन के उपरांत
उल्लेख
इसमें देवी माता के यशोगान, स्तुति, और श्रृंगार का वर्णन होता है।
इस गीत में देवी के वीर भावों का वर्णन मिलता है।
इन गीतों में देवी की स्तुति, आभार प्रदर्शन और विदाई का उल्लेख मिलता है।
🙏 गौरा/गौरी-गौरा गीत
🎉 अवसर: यह गीत दीपावली के पर्व पर गाया जाता है।
👥 कलाकार: यह मुख्य रूप से गोंड समुदाय की स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है।
🛐 पूजा: इसमें शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करके विवाह की रस्में निभाई जाती हैं और फिर पूजा-अर्चना की जाती है।
🎶 गीत:
‘गौरा चौरा’ नामक निश्चित स्थान पर गौरा-गौरी की मूर्ति स्थापित कर महिलाएँ ‘गौरा जगाने’ का गीत गाती हैं।
एक विशेष राग-रागिनी की धुन में मातृ शक्ति की स्तुति को सुनकर श्रोता इतने मग्न हो जाते हैं कि नाचने लगते हैं, जिसे ‘झुपना’ कहा जाता है।
‘अँखरा’ गीत में करुणा का भाव जागृत होता है, वहीं ‘कडइया’ गीत में नारी शक्ति, जो अर्धांगिनी है, उसकी महानता का वर्णन किया जाता है।
गीत के आरम्भ में जिस तरह देवी-देवताओं को जगाया जाता है, उसी प्रकार विसर्जन के समय उन्हें सुलाने का गीत भी गाया जाता है।
🌺 सेवा गीत/जसगीत
अवसर: यह गीत नवरात्रि के दौरान देवी पूजा के समय प्रस्तुत किया जाता है।
🎨 फाग गीत
📅 अवसर: फाल्गुन माह में होली के मौके पर गाया जाता है।
🍃 ऋतु: यह बसंत ऋतु का गीत है।
❤️ प्रधानता: इसमें श्रृंगार रस की प्रमुखता होती है। [CG PSC(ADR)2019] [CG Vyapam (Patwari)2022]
🎤 गीतकार: इसके प्रमुख गीतकार अरुण यादव हैं। [CG VS (AG-3) 2021]
📖 वर्णन: इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम का वर्णन होता है।
🌧️ सवनाही गीत
अवसर: यह सावन माह (वर्षा ऋतु) का एक प्रमुख गीत है।
त्यौहार: यह त्यौहार आषाढ़ महीने के अंतिम रविवार या सावन के पहले रविवार को मनाया जाता है।
उद्देश्य: सावन माह में जादू-टोना और बीमारियों से गाँव के लोगों और पशुओं की सुरक्षा के लिए यह गीत गाया जाता है।
पूजा: इस दिन बैगा द्वारा गाँव में सवनाही देवी की पूजा की जाती है।
अलंकरण: घरों की दीवारों पर गोबर से सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
🎪 मड़ई गीत
अवसर: यह कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक चलता है।
कलाकार: इसे राउत जाति के पुरुषों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
स्थापना: इसमें मयूर पंख और कौड़ियों से सजा एक बांस का स्तंभ स्थापित किया जाता है।
वाद्ययंत्र: ढोल वाद्ययंत्र का प्रयोग होता है।
पूजा: यह गो-पूजन का त्यौहार है।
महत्व: इस लोकनृत्य का जन्म श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने और इंद्र के अहंकार को तोड़ने के बाद गोप-ग्वालों के आनंद उत्सव के रूप में माना जाता है।
🐍 नगमथ
अवसर: यह गीत छत्तीसगढ़ में नागपंचमी के अवसर पर गाया जाता है।
पूजा: इसमें नागदेव की पूजा-अर्चना की जाती है।
🕺 डण्डा गीत
आयोजन: यह कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) से फाल्गुन पूर्णिमा तक आयोजित होता है।
पहचान: इसे छत्तीसगढ़ का ‘रासगीत’ भी कहा जाता है।
नृत्य: युवक-युवतियाँ एक गोलाकार घेरे में घूम-घूम कर हाथों में छोटे डंडे लेकर नृत्य करते हैं।
सुमिरन: डंडा गीत की शुरुआत देवता के स्मरण से होती है, जिसके बाद गीत प्रारंभ होता है।
🎉 छेरछेरा गीत
अवसर: यह गीत पौष पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले छेरछेरा पर्व के मौके पर गाया जाता है।
गीत की पंक्तियाँ:“छेरिक छेरा छेर बरकनीन छेर छेरा। माई कोठी के धान ला हेर हेरा॥”
📜 ऐतिहासिक लोकगीत
गोपल्ला गीत
संबंध: यह गीत कल्चुरी शासक कल्याण साय से संबंधित है। [CG PSC(ADVHS)2013]
उल्लेख: इसमें गोपालराय मल नामक एक बहादुर व्यक्ति की वीरता का वर्णन है, जिसने कल्याण साय को मुगल दरबार की हाजिरी से मुक्ति दिलाई और उनके मान-सम्मान में वृद्धि की।
悲しい करुणा एवं वेदना से संबंधित लोकगीत
बांस गीत
गायन: यह राउत जाति द्वारा गाया जाता है। [CG PSC(Lib & SO)2019, (ADI)2016, (Pre)2016, (ACF)2021]
अवसर: दुःख के अवसरों पर गाया जाने वाला यह एक करुण गीत है।
गाथागायन: इसमें शीत बसंत, मोरध्वज और कर्ण की गाथाएं गाई जाती हैं।
प्रधानता: वियोग श्रृंगार इसका मुख्य भाव है।
पात्र: इसमें रागी, गायक और वादक होते हैं। [CG PSC (SEE) 2017]
वाद्ययंत्र: बांसुरी की तरह बना हुआ वाद्ययंत्र ‘बांस’ (मोहराली) का उपयोग होता है। [CG PSC (SES) 2016]
गीतकार: केजूराम यादव (ग्राम बासीन), नकुल यादव (खैरागढ़)।
नचौनी गीत
विषय: यह नारी के विरह, वेदना, और संयोग-वियोग का गीत है।
🎶 जाति से संबंधित लोकगीत
बसदेवा गीत
संबंध: यह पौराणिक गाथाओं में श्रवण कुमार के जीवन पर आधारित है, जो अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जाते हैं और दशरथ के बाण से उनकी मृत्यु हो जाती है। [CG PSC (ARTO)2016]
गायन: यह बसदेवा जाति के लोगों द्वारा गाया जाता है।
उपनाम: इसे ‘जय-गंगान’ या ‘हरबोला’ भी कहा जाता है।
🌟 बीरम गीत एवं देवार गीत
गायन: यह गीत देवार जाति द्वारा भिक्षा मांगते समय गाया जाता है। [CG Vyapam (Patwari) 2019]
बीरम: देवार जाति की महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गीतों को ‘बीरम गीत’ कहा जाता है। इस गीत के दौरान महिलाएँ बीच-बीच में अपनी चूड़ियाँ खनकाती हैं। [CG PSC (Pre) 2022]
गाथा: देवार जाति के घुमक्कड़ स्वभाव के कारण इनके गीतों में विभिन्न क्षेत्रों की गाथाएं शामिल होती हैं, जैसे:
चंदा रउताइन
नगेसर कइना [CG PSC (AP) 2016]
दसमत कइना
सीताराम नायक – पंडवानी (यह सीताराम बंजारा समुदाय से संबंधित है) [CG Vyapam (FI) 2022]
गीतकार: रेखा सिंह एवं बद्रीसिंह कटारिया।
👶 छत्तीसगढ़ के जन्म संस्कार गीत
यह गीत बच्चे के जन्म से जुड़े विभिन्न संस्कारों पर गाए जाते हैं, जिसका मुख्य रूप सोहर गीत है।
सधौरी गीत
जब कोई स्त्री पहली बार गर्भ धारण करती है, तो गर्भावस्था के सातवें या नौवें महीने में सधौरी संस्कार का आयोजन किया जाता है।
इस संस्कार में मायके पक्ष वाले सधौरी (वस्त्र, आभूषण और सात प्रकार के पकवान) लेकर आते हैं।
सोहर गीत
यह बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला प्रमुख गीत है। [CG PSC (Pre)2022, (Sci. Off.) 2018], [CG PSC (Mains) 2011]
बधाई गीत
शिशु के जन्म के छठें दिन ‘बधाई संस्कार’ मनाया जाता है, जिसे ‘छट्ठी संस्कार’ भी कहते हैं।
इस मौके पर महिलाएँ बधाई गीत गाती हैं। [CG PSC(ITI pri.)2016]
लोरी गीत
यह बच्चों को सुलाने के समय गाई जाने वाली लोरी है।
बरुआ गीत
यह उपनयन संस्कार के समय गाया जाने वाला गीत है।
💒 छत्तीसगढ़ी विवाह गीत
तीन दिनों में सम्पन्न होने वाले विवाह को ‘तीनतेलिया’ और पांच दिनों में सम्पन्न होने वाले विवाह को ‘पांचतेलिया’ कहा जाता है। यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।
1. मड़वा छवठनी
विवाह के मंडप (मड़वा) के लिए ग्रामीण स्तर पर आम, गूलर और महुआ की टहनियों का उपयोग किया जाता है, जिसे ‘हरियर मड़वा’ भी कहते हैं। मड़वा बनाते समय ‘मड़वा छवउनी’ गीत गाया जाता है।
2. घुलमाटी
चुलमाटी को विवाह की शुरुआत माना जाता है। इसमें सुवासिनें (वर की भाभी, बहनें, और बुआ) विवाह के लिए मिट्टी लाने के लिए गाँव के बाहर नदी या तालाब के किनारे जाती हैं और मिट्टी खोदते समय सामूहिक स्वरों में गीत गाती हैं।
3. मंगरोहन
यह विवाह संस्कार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत है। मंगरोहन एक मंगल काष्ठ (शुभ लकड़ी) होता है, जो विवाह के साक्षी के रूप में होता है। इसे गाड़ते समय यह गीत गाया जाता है। [CG Vyapam (SAAF) 2021]
4. तेलचघी
चुलमाटी के बाद हरिद्रालेपन (हल्दी लगाने) का कार्य शुरू होता है, जिसे तेलचघी कहते हैं। यह रस्म वर और वधू दोनों पक्षों द्वारा की जाती है।
अन्य प्रमुख विवाह गीत
मायन गीत: अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा के समय गाया जाता है।
नहडोरी गीत: वर-वधू को नहलाने के बाद कंकन (डोरी) बांधने की रस्म पर गाया जाता है।
चिकट गीत: जब सगे-संबंधी एक-दूसरे को हल्दी का लेप लगाते हैं।
मौर सौंपनी: बारात प्रस्थान से पहले दूल्हे को मौर-मुकुट सौंपते हुए गाया जाता है।
बारात प्रस्थान: बारात की विदाई के समय सुवासिनों द्वारा गाया जाता है।
नकटा नाच: बारात जाने के बाद वर के घर की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला हास-परिहास का नाच-गाना।
परघौनी गीत: बारात का स्वागत करते समय गाया जाता है। [CG Vyapam (SGST) 2021]
समधी भेंट: समधियों के मिलन की रस्म पर गाया जाने वाला गीत।
भड़ौनी गीत: भोजन के समय वर और वधू पक्ष द्वारा एक-दूसरे पर किए जाने वाले हंसी-मजाक का गीत। [CG PSC (MI) 2014], [CG Vyapam (SGST) 2021]
टिकावन: नव-दम्पति को उपहार देते समय गाया जाता है। [CG Vyapam (SGST) 2021]
💍 विवाह के अन्य गीत एवं रस्में
15. भाँवर
यह फेरे लेते समय गाया जाने वाला गीत है। सात फेरों के साथ ही विवाह की रस्म संपन्न हो जाती है। [CG Vyapam (SGST) 2021]
16. बिदाई या गौना
इस अवसर पर पठौनी गीत गाया जाता है, जिसमें कन्या और उसके परिवार की मनोदशा का मार्मिक चित्रण होता है। [CG Vyapam (AVFO) 2012]
17. पहमी गीत
यह विवाह के समय गाए जाने वाले प्रमुख संस्कार गीतों में से एक है। [CG PSC (ARO) 2022]
💡 नोट: छत्तीसगढ़ में विवाह संस्कार गीतों का सही क्रम है: 1. परघौनी, 2. भड़ौनी, 3. टिकावन, 4. भांवर। [CG Vyapam (SGST) 2021]
विवाह संबंधी प्रमुख रस्में
देवतेला/देवतला: विवाह को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए लोक देव को हल्दी चढ़ाने की रस्म। [CG Vyapam (VFM) 2021]
मायमौरी: मातृ पूजन के लिए पकवान बनाना और पितरों का स्मरण करना।
हरदियाही: इस रस्म में पूरे गाँव को आमंत्रित कर एक-दूसरे पर हल्दी और रंग लगाया जाता है।
परछन: बारात के प्रस्थान से पहले की एक रस्म, जिसमें महिलाएँ वर को आशीर्वाद देती हैं।
चौथिया: वधू पक्ष के लोग अपने संबंधियों के साथ वर पक्ष के यहाँ जाते हैं।
छत्तीसगढ़ी गीतों का वर्गीकरण
1. नारी प्रधान गीत (Women-Centric Songs)
संस्कार विषयक गीत
जन्म गीत, विवाह गीत
नृत्य गीत
सुआ, भोजली
पर्व गीत
गौरा, सवनाही
ऋतु गीत
बारामासा, ददरिया
अन्य गीत
लोरी
2. पुरुष प्रधान गीत (Men-Centric Songs)
नृत्य गीत
डंडा, करमा, मड़ई, नाचा
जातीय गीत
बांस गीत, देवार गीत, रास
धार्मिक गीत
भजन, जंवारा
ऋतु गीत
बारहमासा, वर्षागीत
कलाकार और अन्य श्रेणियाँ
परम्परागत जाति कलाकार
बसदेवा, परधान, देवार, भिम्मा
शौकिया गायकी कलाकार
कंवर, बंजारा, अहीर
खेल गीत
अटकन-बटकन, फुगड़ी, गेड़ी आदि
📖 28.2 छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोकगाथाएँ (Major Folktales of Chhattisgarh)
छत्तीसगढ़ की लोकगाथा
प्रकार
प्रधान पात्र
अन्य प्रमुख पात्र
अहिमन रानी
स्त्री प्रधान प्रेमगाथा
अहिमन रानी
राजा वीरसिंह
केवला रानी
स्त्री प्रधान प्रेमगाथा
केवला रानी
राजा मदन सिंह (हरदी के राजा)
रेवा रानी
स्त्री प्रधान प्रेमगाथा
रेवा रानी (पवन रेखा)
राजा उग्रसेन, दुमदुमी राक्षस
दसमत कइना
स्त्री प्रधान प्रेमगाथा
दसमत ओड़निन
दुर्ग के राजा महमदेव
फूलकुंवर की गाथा
स्त्री प्रधान वीरगाथा
वीरांगना फूलकुंवर
राजा जगत
राजा वीरसिंह
पुरुष प्रधान प्रेमगाथा
राजा वीरसिंह
जादूगर योगी
ढोला-मारू
पुरुष प्रधान प्रेमगाथा
नायक – ढोला, नायिका – मारू
जादूगरनी रेवा
लोरिक-चंदा
पुरुष प्रधान प्रेमगाथा
नायक – लोरिक (रीवा), नायिका – चंदा (आरंग)
बावनवीर, बंठवा
फूलबासन
पौराणिक लोकगाथा
माता सीता एवं लक्ष्मण
भौरागढ़ के राजा साल केवरा
सरवन गाथा
पौराणिक लोकगाथा
सरवन कुमार
राजा दशरथ
पंडवानी
पौराणिक लोकगाथा
भीम
कुंती, द्रौपदी, शेष पाण्डव एवं कौरव
भरथरी
पौराणिक लोकगाथा
राजा भरथरी एवं रानी पिंगला
कल्याण साय की गाथा
वीरगाथा
कल्याण साय
गोपाल राय, मुगल सम्राट जहांगीर
गोपल्ला गीत
वीरगाथा
वीर गोपाल राय
कल्याण साय, मुगल सम्राट अकबर
गुजरी गहिरिन की गाथा
वीरगाथा
गुजरी एवं चंद्रावल
मिर्जा पठान
सीताराम नायक-नगेसर कइना
वीरगाथा
सीताराम नायक, नगेसर कइना
रतनपुर एवं मल्हार का वर्णन
कुंवर अछरिया
वीरगाथा
कुंवर अछरिया, साँवर कैना
कनवा दिगम्बर
रायसिंह का पवारा
वीरगाथा
रायसिंध
कोकराय लक्ष्मी नारायण (लच्छू नेंगी)
आल्हा-उदल (घोड़ा नाच)
वीरगाथा
आल्हा और उदल
आल्हा-उदल के भाई
देवी गाथा
धार्मिक लोकगाथा
देवी की महिमा
मुगल सम्राट अकबर एवं बीरबल
लछमन जती
अद्भुत लोकगाथा
लक्ष्मण
इंद्र की बेटी कंवला
🧠 छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं का वर्गीकरण
छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं में कहानी की प्रधानता होती है, लेकिन इनकी एक खास विशेषता यह भी है कि इनमें गेयता (गीत) का तत्व शामिल होता है। इन लोकगाथाओं के विषय विविध हैं, फिर भी प्रेम तत्व की प्रमुखता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसके साथ ही, जीवन के संघर्ष, वीरता, चमत्कार और अलौकिक घटनाओं का भी रोचक चित्रण मिलता है।
आदिकालीन लोकगाथाएँ
❤️ प्रेमप्रधान गाथाएँ:
अहिमन रानी की गाथा
केवला रानी की गाथा
रेवा रानी की गाथा
⚔️ वीरगाथा:
राजा वीर सिंह की गाथा
🙏 धार्मिक एवं पौराणिक गाथाएँ:
फूलबासन की गाथा
पंडवानी की गाथा
🌸 फूलबासन की गाथा:“बड़ सइताधारी लक्ष्मन जती जोगी, बारा बरस जोग करे रे भाई। सात दोहरा के भोजन पका के, बिन जोते के जमीन के चाउर, हरी मुंगन के दार पकाई, बिगन सिकुन के पतरी बना के…”[CG PSC (Pre) 2021]
मध्यकालीन लोकगाथाएँ
❤️ प्रेमप्रधान गाथाएँ:
लोरिक-चंदा की गाथा
ढोला-मारू की गाथा
⚔️ वीरगाथा:
फूलकुँवर गाथा
गोपल्ला गीत
🙏 धार्मिक एवं पौराणिक गाथाएँ:
देवी की गाथा
सरवन की गाथा
नगेसर कइना की गाथा
दसमत कइना
कल्याण साय की गाथा
रायसिंह का पवारा
आल्हा-उदल
सीताराम नायक
भैरव
रसालू
🕺 लोक-नृत्य (Folk-Dance)
राउत नाचा
🎭 अन्य नाम: इसे गहिरा नाच या अहीरा नाच भी कहते हैं।
📅 अवसर: यह नृत्य दीपावली के उत्सव के दौरान, कार्तिक प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होकर एक पखवाड़े तक चलता है। [CG PSC (Asst. HYD)2020][CG Vyapam (ARO, APO)2014]
** प्रतीक:** इसे भगवान कृष्ण की पूजा के प्रतीक के रूप में किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, कृष्ण द्वारा अन्यायी मामा कंस का वध करने के बाद यह नृत्य विजय के प्रतीक के रूप में शुरू हुआ था। [CG Vyapam (ASO,BLI)2012]
** प्रमुख वाद्ययंत्र:** गंड़वा बाजा।
** कलाकार:** यह नृत्य राउत जाति द्वारा किया जाता है। इसमें केवल पुरुष कलाकार ही हिस्सा लेते हैं। कभी-कभी पुरुष कलाकार महिला का वेश धारण कर भी नृत्य करते हैं। वे हाथ में सजी हुई लाठी लेकर टोली में गाते और नृत्य करते हैं। [CG Vyapam (LOI)2023]
** संदर्भ:** इसमें प्रस्तुत दोहे श्रृंगार, प्रेम, हास्य और पौराणिक संदर्भों से युक्त होते हैं।
** प्रदर्शन:** यह एक शौर्य कलात्मक प्रदर्शन है।
** प्रमुख रस्म:** राउत लोग मातर त्यौहार मनाते हैं और खण्ड देव की पूजा करते हैं। [CG PSC (Pre)2016]सुहई बांधना एक महत्वपूर्ण रस्म है, जिसमें पलाश और मोर पंख से बनी रस्सीनुमा संरचना को जानवरों के गले में बांधा जाता है।
📜 राउत नाचा के दोहे:जइसन तुम लिहो दिहो, तइसन देबो असीस। अन्नधन भंडार भरे, तुम जीयो लाख बरीस।।
** दोहा गायन:** नृत्य के दौरान एक व्यक्ति दोहा बोलता है और बाकी सभी उसे दोहराते हुए गंड़वा बाजा की धुन पर नाचते हैं।
🎭 अन्य नाम: इसे गौरा नृत्य या तोता नृत्य भी कहा जाता है। इसे छत्तीसगढ़ का गरबा नृत्य भी कहते हैं (यह नाम मुकुटधर पाण्डेय ने दिया था)। [CG Vyapam (ESC)2022]
📅 अवसर: यह दीपावली के समय, कार्तिक कृष्ण पक्ष से शुरू होकर दीवाली के पूर्व तक चलता है। [CG PSC (AMO)2017]
** नृत्य:** इसमें केवल महिलाएँ ही भाग लेती हैं। वे मिट्टी के तोते बनाकर उसके चारों ओर थापड़ी बजाकर नृत्य करती हैं। दोनों तोतों को शिव-पार्वती का प्रतीकात्मक स्वरूप माना जाता है। [CG PSC(Mains)2011] [CG Vyapam (ECH)2017]
🎶 सुआ गीत:तरी हरी नहा नरी ना ना रे सुअना कइसे के बन गे वो ह निरमोही रे सुअना कोन बैरी राखे बिलमाय चोंगी अस झोइला में जर-झर गेंव रे सुअना[CG Vyapam(CBAS)2023]
💡 ध्यान दें:
द गौर: द बाईसन हार्न नृत्य।
गौरा: सुआ नृत्य।
गौरा-गौरी: एक पर्व है (गोंड़ जनजाति का)।
🤸 पंथी नृत्य
🙏 संबंध: संत गुरु घासीदास से संबंधित।
** समुदाय:** सतनाम पंथ के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। [CG PSC(Lib)2017]
** प्रमुख कलाकार:** स्वर्गीय देवदास बंजारे एवं राधेश्याम बारले (2021 में पद्मश्री से सम्मानित)। [CG Vyapam (ITI Pri)2022]
** प्रमुख वाद्ययंत्र:** मांदर व झांझ।
** विशेष:** नर्तक नृत्य के दौरान कलाबाजी करते हैं और पिरामिड जैसी संरचना बनाते हैं। [CG Vyapam (FI)2013]
👏 तेराताली नृत्य
** कलाकार:** महिला नर्तकों द्वारा किया जाता है।
** वाद्ययंत्र:** महिला नर्तक अपने पूरे शरीर पर मंजीरा नामक वाद्ययंत्र बांधकर नृत्य करती हैं।
** विशेष:** पूरे नृत्य अनुष्ठान के दौरान कलाकार ताली या थाप बजाते हैं। [CG VS(AG-3)2021]
🎭 झिरलिटी नृत्य
** क्षेत्र:** यह बस्तर क्षेत्र का एक लोकनृत्य है।
** कलाकार:** सामान्यतः बच्चों द्वारा किया जाता है।
** विशेष:** इस नृत्य में बच्चे फटे-पुराने और घिसे-पिटे कपड़े पहनते हैं, अपने चेहरे रंगते हैं और गाँव के सभी घरों के सामने टोलियों में नृत्य करते हैं। [CG VS(AG-3)2021]
🎭 28.4 लोकनाट्य (Folk-Theatre)
लोकनाट्य एक ऐसी विधा है जिसमें नृत्य, गायन और अभिनय का संगम होता है। इसे सामान्यतः समारोहों के रूप में या कुछ स्थानीय सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालने के उद्देश्य से एक नाट्य मंच के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनाट्यों का विवरण इस प्रकार है:
💃 28.4.1. नाचा (Nacha)
📛 अन्य नाम: इसे छैला पार्टी, छैला नृत्य, या नचौरी के नाम से भी जाना जाता है। बस्तर में नाचा (स्वांग) को झेरिया नाम से भी संबोधित किया जाता है।
🌟 लोकप्रियता: यह छत्तीसगढ़ का सबसे अधिक प्रचलित लोकनाट्य है और ग्रामीण क्षेत्रों में यह सर्वव्यापी है। [CG Vyapam (AGDO)2018][CG Vyapam (ESC)2017]
📜 प्राचीन नाम: इसका प्राचीन नाम ‘पेखन’ है, जो ‘प्रेक्षण’ (देखना) शब्द से बना है।
🕰️ प्रारंभ: इसका आरंभ मराठा काल में हुआ था, जिसे तब नाचा कहा जाता था।
🔄 समरूपता: नाचा की प्रस्तुति महाराष्ट्र के ‘तमाशा’ से काफी मिलती-जुलती है।
🕺 कलाकार:
यह मूल रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता था, लेकिन आजकल महिलाएँ भी इसमें अभिनय करती हैं।
नाचा में जो पुरुष महिला का किरदार निभाते हैं, उन्हें ‘नाच्या’ कहा जाता है।
कभी-कभी देवार जाति की महिलाएँ भी इसमें भाग लेती हैं।
😂 हास्य पात्र: इसमें जोक्कड़ एवं परी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
📍 आयोजन स्थल: इसका मंचन गाँव के चौपाल, मैदान, चौक-चौराहों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर होता है।
🎭 स्वरूप: इसके दो मुख्य स्वरूप हैं:
बैठे साज
खड़े साज (वर्तमान में सबसे अधिक प्रचलित)
🎪 छत्तीसगढ़ के प्रमुख नाचा पार्टी/नाचा से संबंधित संस्थान
प्रमुख लोक संस्था (Folk Institute)
संस्थापक (Founder)
परीक्षा संदर्भ
रवेली नाचा पार्टी (1927-28)
दुलार सिंह मंदराजी
[CG Vyapam (DCAG)2018][CG PSC(MI)2014]
छ.ग. देहाती कला मंच (1951)
रामचन्द्र देशमुख
हिन्दुस्तान थियेटर (1954), नया थियेटर (1959)
हबीब तनवीर
[CG Vyapam(Chemist)2017],[CG PSC(MI)2010]
चंदैनी गोंदा नाचा पार्टी (1971)
दाऊ रामचन्द्र देशमुख
[CGPSC(Asst. HYD)2020][CGVyapam (FI)2017]
सोनहा बिहान
दाऊ महासिंह चन्द्राकर
[CG Vyapam (DCAG)2018, (VSAM)2024]
चिन्हारी नाचा पार्टी
ममता चन्द्राकर
मटेवा नाचा पार्टी
नाइकदास एवं झुमुकदास
सिंगनी नाचा पार्टी
ठाकुर राम
रायपुर लोक-कला मंच
पी. आर. उरांव
अवंतिका (1973-1974)
मिर्जा मसूद
रंग छत्तीसा
पूनम विराट तिवारी
💡 नोट: चंदैनी गोंदा नाचा पार्टी और लोरिक चंदा पार्टी, दोनों अलग-अलग नाचा पार्टियाँ हैं।
👴 पितामह: दुलार सिंह मंदराजी
विषय: प्रहसन और व्यंग्य नाचा के मुख्य तत्व हैं। यह सामाजिक कुरीतियों, समाज में फैली बुराइयों और ढोंग जैसी समस्याओं को समाप्त करने का एक माध्यम है। इसमें गायन, वादन, नृत्य, अभिनय और संवाद जैसे सभी कलात्मक तत्वों का समावेश होता है।
योगदान: छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी ‘रवेली नाचा पार्टी’ थी, जिसके संस्थापक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी थे। उन्हें नाचा का भीष्म पितामह कहा जाता है। [CG PSC (MI) 2014, (ADH) 2011] [CG Vyapam (ADEO) 2012]
🌟 28.4.2. रहस (Rahas)
📛 अन्य नाम: इसे रहस लीला, रास लीला, या यज्ञ भी कहा जाता है।
** प्रतीक:** रहस छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। [CG Vyapam (LOI) 2015]
** प्रभाव:** यह उत्तरप्रदेश की रासलीला से प्रभावित है। [CG Vyapam (Ameen) 2017]
📅 अवसर: यह होली के समय आयोजित किया जाता है। [CG PSC (ITI Pri.)2016]
📖 विषयवस्तु:
यह राधा और कृष्ण की मनमोहक रासलीला की कथा का छत्तीसगढ़ी रूपांतरण है। [CG Vyapam (EAE)2017]
इसमें पौराणिक चरित्रों की ‘मानव आकार की प्रतिमाएं’ बनाई जाती हैं। [CG PSC (Horti.Clt.)2015]
छत्तीसगढ़ में बाबू रेवाराम द्वारा रचित रहस की पांडुलिपियाँ काफी प्रचलित हैं। [CG PSC(Mains)2011]
🕰️ स्वर्णिम काल: रतनपुर के हैहयवंशी राजाओं का शासनकाल रहस के लिए स्वर्णिम काल माना जाता है।
😂 कलाकार: इसमें विदूषक की भूमिका एक हास्य कलाकार द्वारा निभाई जाती है।
** प्रमुख कलाकार:** 1. कौशल सिंह, 2. बिसेसर सिंह, 3. केसरी सिंह, 4. बिलासपुर के मंझला महाराज।
📍 प्रचलन: यह बिलासपुर संभाग में सबसे अधिक प्रचलित है।
💃 नृत्य: धमतरी जिले में रहस के दौरान मुख्य रूप से रहस नृत्य होता है। [CG VS (AG-3)2021]
🎪 आयोजन स्थल:
रहस के रंगमंच को बेड़ा या रासबेड़ा कहा जाता है। [CG PSC(ARO)2022]
रहस के संचालन का जिम्मा रासधारी का होता है।
रहस शुरू करने से पहले प्रतीक के रूप में थुन्ह खम्भ स्थापित किया जाता है।
🎶 गायन: गायक रासबेड़ा की परिक्रमा करते हुए गाते हैं। बीच-बीच में अर्थ बताने वाले को ‘गुटकहा’, नृत्य करने वाले को ‘नचकरहा’, और रासधारियों को ‘पंडित’ कहते हैं।
रहस के स्वरूप
आधार
सवर्ण रहस
सतनामी रहस
अवधि
9 दिनों तक चलता है।
10 दिनों तक चलता है।
प्रधानता
भक्ति की प्रधानता रहती है।
भक्ति के साथ-साथ मनोरंजन का तत्व भी होता है।
कलाकार
व्यास का किरदार ब्राह्मण द्वारा निभाया जाता है।
व्यास का किरदार जाति के किसी शिक्षित व्यक्ति द्वारा निभाया जाता है।
प्रतिमा
वेदी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
वेदी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा के साथ गणेश व रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है।
🤡 28.4.3. गम्मत (Gammat)
🎭 शैली: यह हास्य-व्यंग्य शैली पर आधारित है।
🕰️ काल: यह भोंसले शासनकाल में अत्यंत लोकप्रिय था।
🔗 भाग: गम्मत को नाचा का ही एक हिस्सा माना जाता है।
🎯 विषय:
यह सामाजिक कुरीतियों और विषमताओं पर प्रहार करता है।
गम्मत में प्रहसन के माध्यम से कृष्ण लीला का भी मंचन किया जाता है।
🕺 कलाकार:
नर्तक की भूमिका भी पुरुष ही निभाते हैं।
विदूषक के रूप में जोक्कड़ एवं परी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। [CG Vyapam (VSAM)2024]
📍 आयोजन: इसका मंचन खुले मंच पर होता है।
🎭 स्वरूप: इसके दो प्रकार हैं: 1. खड़े साज, 2. बैठे साज।
गम्मत के प्रकार
आधार
1. खाड़े साज
2. बैठे साज
अन्य नाम
खड़ी गम्मत
रतनपुरिहा गम्मत
प्रणेता
बाबू रेवाराम
प्रक्रिया
इसमें गायन, वादन, अभिनय, नृत्य आदि खड़े होकर किया जाता है।
इसमें कलाकार अभिनय तथा गायन बैठकर करते हैं।
💡 नोट: गम्मत में दो पात्रों के बीच संवाद होता है, जिन्हें गम्मतिहा कहते हैं। गम्मतिहा लोकनृत्य छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से संबंधित है। दण्डामी माड़िया क्षेत्र में गाड़ा लोक गम्मत का प्रदर्शन किया जाता है। [CG VS (AG-3)2021]
👨🎨 लोकनाट्य कलाकार (Folk Theatre Artists)
🌟 दुलार सिंह मंदराजी
** उपाधि:** इन्हें “छत्तीसगढ़ नाचा के भीष्म पितामह” और “नाचा के प्रवर्तक व पुरोधा” कहा जाता है। [CG Vyapam(ADEO)2012] [CG Vyapam(DEAG)2018]
** जन्म:** 1 अप्रैल 1910 (रवेली ग्राम, दुर्ग, एक संपन्न जमींदार परिवार में)।
** निधन:** 24 सितम्बर 1984।
** स्थापना:** “रवेली नाचा पार्टी” (1928-29 में, नाचा को प्रोत्साहन देने हेतु)।
** मंडली:** इनकी मंडली में जयंती, फिदाबाई और साहूदास जैसे प्रसिद्ध कलाकार थे।
** सम्मान:** 1984 में भिलाई में लोककला महोत्सव में सम्मानित।
** विशेष:** राज्य शासन द्वारा लोककला के क्षेत्र में इनके नाम पर ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है।
🌟 दाऊ महासिंह चन्द्राकर
** उपाधि:** इन्हें “छत्तीसगढ़ लोककला के पुजारी” कहा जाता है।
** जन्म:** 1917, आमदी (दुर्ग)।
** लोककला मंच:** “सोनहा बिहान” के संस्थापक। [CG VS (AG-3)2021]
उन्होंने नरेन्द्रदेव वर्मा की रचना ‘सुबह की तलाश’ पर आधारित ‘सोनहा बिहान’ नामक नाटक का मंचन किया।
उन्होंने लोरिक-चंदा की कहानी को खड़े साज की शैली में प्रस्तुत करके एक नया प्रयोग किया।
🌟 दाऊ रामचंद्र देशमुख
** उपाधि:** इन्हें “छत्तीसगढ़ लोककला के उद्धारक” कहा जाता है।
** जन्म:** 1916, बघेला ग्राम (दुर्ग)।
** निधन:** 1998।
** योगदान:**
1951: देहाती कला मंच का गठन। [CG Vyapam (SI Pre)2023]
1971: चंदैनी गोंदा नाचा पार्टी का गठन। [CG Vyapam (EAE)2017]
1984: प्रसिद्ध साहित्यकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की कहानी ‘कारी’ का अभिनय किया, जिससे ‘चंदैनी गोंदा’ की ख्याति पूरे प्रदेश में फैल गई।
** नवोदित कलाकार:** इनके मंच से विसंम्भर यादव, लक्ष्मण मस्तुरिया (गीतकार), खुमान साव (संगीतकार), केदार यादव (गायक), और भैया लाल हेड़ऊ (अभिनेता) जैसे कलाकार उभरे।
🌟 हबीब तनवीर
** जन्म:** 1923 (रायपुर में)।
** निधन:** 2009 (भोपाल में)।
** बचपन का नाम:** हबीब अहमद खान।
** स्थापना:**
हिन्दुस्तान थियेटर, दिल्ली (1954)।
नया थियेटर, भोपाल (1959)।
** प्रमुख नाटक:** चरण दास चोर (1975), आगरा बाजार (1954), माटी की गाड़ी। [CG VS (AG-3)2021]
** प्राप्त पुरस्कार:** पद्मश्री (1983), पद्मभूषण (2002)।
** विशेष:** ये छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध रंगमंचकर्मी हैं। [CG PSC(IMO)2020]
🌟 गोविन्द निर्मलकर
** जन्म:** 1935, निधन: 2014।
** अभिनय:** मिरजा सोहरत बेगम (1960), बहादुर कलारिन (1978) आदि।
** प्रसिद्धि:** 1960 में हबीब तनवीर के ‘नया थियेटर’ और ‘चरण दास चोर’ में चोर की भूमिका निभाकर प्रसिद्धि पाई।
** सम्मान:** पद्मश्री (2009)।
** विशेष:** इन्हें बचपन से ही नाचा से इतना लगाव था कि 20 वर्ष की आयु में ही पैरों में घुंघरू बांधकर अपने गुरु मदन निषाद के नेतृत्व में नाचा कलाकार बन गए।
🌟 डोमार सिंह कुंवर
** संबंध:** नाचा के प्रसिद्ध कलाकार।
** निवासी:** बालोद।
** सम्मान:** पद्मश्री (2023)।
🎤 प्रमुख गीतकार (Prominent Singers)
🌟 तीजन बाई (Teejan Bai)
🗓️ जन्म: 1956, पाटन (दुर्ग)।
🎤 गायन प्रारंभ: 1973 से पंडवानी गायन शुरू किया।
🎭 शैली: पंडवानी की कापालिक शैली से संबंधित हैं। [CGVyapam (FI)2013]
🌍 अंतर्राष्ट्रीय पहचान: पंडवानी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इन्होंने फ्रांस, मॉरीशस, स्विटजरलैंड, जर्मनी जैसे देशों में पंडवानी प्रस्तुत की है।
🏆 प्राप्त पुरस्कार:
पद्मश्री (1987)
पद्म भूषण (2003)
पद्म विभूषण (2019)
फुकुओका सम्मान, जापान (2018)
संगीत नाटक अकादमी सम्मान
संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान, 2022
📺 विशेष: श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित प्रसिद्ध धारावाहिक “भारत एक खोज” में इन्होंने पंडवानी गायन किया। [CGPSC (VAS) 2021]
🌟 झाडूराम देवांगन (Jhaduram Dewangan)
👑 उपाधि: इन्हें छत्तीसगढ़ में “पंडवानी के गुरु” के रूप में जाना जाता है।
🗓️ जन्म: 1927, ग्राम बासिन (भिलाई)।
✨ प्रेरणा: इन्हें छत्तीसगढ़ी महाभारत से प्रेरणा मिली।
🎭 पंडवानी गायन:
ये वेदमती शैली के एक प्रसिद्ध गायक थे। [CG PSC (ADH) 2011]
इन्होंने किशोरावस्था से ही पंडवानी गायन प्रारंभ कर दिया था।
इन्होंने पंडवानी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई।
इन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष भी पंडवानी का गायन किया।
👨🏫 प्रमुख शिष्य: पूनाराम निषाद, चेतनराम एवं प्रभा यादव।
🌟 स्व. देवदास बंजारे (Late Devdas Banjare)
📍 जन्म: सांकरा ग्राम (धमतरी)। [CG PSC(Pre)2015]
🕺 विशेष योगदान: इन्होंने पंथी नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
🌟 रितु वर्मा (Ritu Verma)
🗓️ जन्म: 1979, रूआबांधा, भिलाई (दुर्ग)।
🎤 गायिका: ये पंडवानी की वेदमती शैली की गायिका हैं।
🌟 उषा बारले (Usha Barle)
📍 निवासी: भिलाई, दुर्ग।
🎤 गायिका: ये पंडवानी की कापालिक शैली की गायिका हैं।
🏆 प्राप्त पुरस्कार:पद्मश्री पुरस्कार, 2023।
🌟 स्व. सुरुजबाई खाण्डे (Late Surujbai Khande)
🎤 गायिका: ये भरथरी, ढोला-मारू और चंदैनी की प्रसिद्ध गायिका थीं। [CG Vyapam(NNRI)2018|CG PSC(Pre)2017, (TSI)2024]
🎶 उपलब्धि: आल्हा-उदल और निर्गुण मार्ग के भजनों में भी निपुण थीं।
🌍 विशेष: इन्होंने हबीब तनवीर की मंडली के साथ अमेरिका, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे देशों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भरथरी गायन का मंचन किया।
🌟 स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया (Late Lakshman Masturiya)
✍️ प्रसिद्धि: एक महान गीतकार के रूप में जाने जाते हैं। [CG PSC(ACF)2016]
🎶 प्रसिद्ध गीत:“मोर संग चलव रे”।
📝 निबंध: “माटी कहे कुम्हार से” (छत्तीसगढ़ी)।
🏆 विशेष: इनके नाम पर राज्य सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान के लिए “लक्ष्मण मस्तुरिया लोक गीत पुरस्कार” दिया जाता है।
🎶 नृत्य एवं संगीत से संबंधित महत्वपूर्ण व्यक्ति (Important Personalities related to Dance and Music)
पंचकौड़ प्रसाद पाण्डेय (जांजगीर):
“बाजा मास्टर” के नाम से प्रसिद्ध थे (यह नाम ठाकुर छेदीलाल द्वारा दिया गया था)।
“पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर शैली” के गायक एवं वादक थे। [CG Vyapam (LOI) 2018]
ध्रुपद और धमार गायकी पर इनका एकाधिकार माना जाता था।
बुधादित्य मुखर्जी (भिलाई):
प्रसिद्ध सितार वादक।
लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले पहले भारतीय थे और सितार पर टप्पा बजाने वाले प्रथम कलाकार भी थे।
2019 में पद्मश्री से सम्मानित हुए।
विमलेंदु मुखर्जी (भिलाई): प्रसिद्ध सितार वादक।
राजा भूपदेव सिंह: प्रसिद्ध तबला वादक।
ठाकुर लक्ष्मण सिंह: प्रसिद्ध मृदंग वादक।
डॉ. अरुण कुमार सेन एवं अनिता सेन: प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक।
मंजुला दास गुप्ता: इन्हें ‘छत्तीसगढ़ की लता’ कहा जाता है (यह नाम स्व. मोतीलाल वोरा जी ने दिया था)।
डॉ. मंडावी सिंह: कत्थक नृत्य शैली से संबंधित हैं। [CG PSC (EAP) 2016]
सुलक्षणा पंडित: हिंदी फिल्मों की पार्श्व गायिका एवं अभिनेत्री।
राधेश्याम बारले: पंथी नृत्य के प्रसिद्ध कलाकार, जिन्हें 2021 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मदन चौहान:
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध संगीत शिक्षक, गजल और सूफी गायक, जो ‘गुरूजी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।
2020 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हुए।
जी.सी.डी. भारती (भारती बंधु):
कबीर गायन के प्रसिद्ध कलाकार।
2013 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित।
2020 में चक्रधर सम्मान से सम्मानित।
2021 में तुलसी सम्मान (म.प्र. सरकार) से सम्मानित।
पण्डित कार्तिक राम:
कत्थक नृत्य के एक प्रसिद्ध कलाकार थे।
1981 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शिखर सम्मान से सम्मानित किए गए।
अनुपमा भागवत (भिलाई): एक प्रसिद्ध सितार वादक हैं। [CG VS (AG-3)2021]
रेशमा पंडित (रायपुर): तबला वादन से संबंधित हैं। [CG VS (AG-3)2021]
डॉ. चंदन सिंह: कत्थक नृत्य के प्रसिद्ध कलाकार हैं। [CG VS (AG-3)2021]
🎵 संगीतकार (Musicians)
कलाकार का नाम (स्थान)
विशेषता/वाद्ययंत्र
परीक्षा संदर्भ
ठाकुर लक्ष्मण सिंह शेखावत (रायगढ़)
सितार व संतूर
बुद्धादित्य व विमलेन्दु मुखर्जी (भिलाई)
सितार वादक
विष्णु जोशी (रायपुर)
ख्याल गायन
भैरो प्रसाद श्रीवास्तव (रायपुर)
ध्रुपद गायन
वत्सला पामकर
ठुमरी गायन
अजगर प्रसाद (दुर्ग)
आख्तरंग वादक
बसंत रानाडे (राजनांदगांव)
बेला वादक
दीपक व पूनम तिवारी विराट
लोक गायक
मीर-अली-मीर
लोक गायक
पंचकौड़ प्रसाद पाण्डे (बाजा मास्टर)
हारमोनियम वादक
अनुपमा भागवत (भिलाई)
सितार वादक
[CG Vyapam (KADI-II)2019]
रेश्मा पंडित (रायपुर)
तबला वादक
[CG VS (AG-3)2021]
🌟 छत्तीसगढ़ के शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व
कला का क्षेत्र
संबंधित महत्वपूर्ण व्यक्ति
🎶 शास्त्रीय गायन
मानसिंह, वत्सला पामकर, श्रीमती अनिता सेन, डॉ. अरूण सेन, दिगम्बर केलकर, विप्लव चक्रवर्ती, डॉ. चन्द्रमोहन वर्मा, मनोहर गणेश गंगाजली वाले, रतनदास, विष्णुकृष्ण जोशी
🎵 सुगम संगीत
मदन चौहान, शेखर सेन, हुकम चन्द्र शर्मा, कल्याण सेन, मंजुला दासगुप्ता
🎤 गजल गायन
श्रीमती अपर्णा त्रिपाठी, स्वाति देशपांडे
💃 शास्त्रीय नृत्य
भरतनाट्यम: श्रीमती मधुरिमा, चन्द्रशेखर शास्त्री कत्थक: वासंती वैष्णव, आरती जैन, पं. कार्तिक राम, डॉ. चंदन सिंह, पं. रामलाल
🥁 शास्त्रीय वाद्य
तबला: सिद्धिनाथ झा, मुकुंद नारायण भाले, सुनील थवाईत, महेन्द्रप्रताप, सोहन दुबे, सुखेंदु चटर्जी पखावज: कमलनारायण सिंह मृदंग: नारायण सिंह, कोदऊ सिंह बाँसुरी: संतोष टॉक सितार: लक्ष्मण सिंह शेखावत, कंकना बनर्जी, विमलेन्दु मुखर्जी, डोमारसिंह, इंद्राणी चक्रवर्ती, बुधादित्य मुखर्जी, अवनींद्र शिवलीकर सारंगी: अमर सिंह वायलिन/बेला: बसंत रानाडे, तुलसीराम देवांगन, कीर्ति व्यास, श्री एस. गुप्ता जलतरंग: राजेश गनोदवाले
📅 28.5 छत्तीसगढ़ के त्यौहार व पर्व (Festivals and Celebrations of Chhattisgarh)
📜 हिन्दी पंचांग (Hindu Calendar)
मूल आधार: यह पंचांग शक संवत् 78 ई. पर आधारित है, जिसमें सप्ताह के सात दिन और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 365 दिन होते हैं।
माह का क्रम: हिंदी कैलेंडर का पहला महीना ‘चैत्र’ और अंतिम महीना ‘फाल्गुन’ होता है।
नामकरण: इस वैदिक महीने के नाम राशियों के आधार पर रखे गए हैं।
विशेष: इस पर्व में धुरवा जनजाति द्वारा प्रसिद्ध ‘धुरवा नृत्य’ किया जाता है और जनश्रुति के अनुसार सूअर और मुर्गे की बलि दी जाती है।
🙏 चैत नवरात्रि:
अवसर: चैत्र शुक्ल प्रथमा से नवमीं तक।
उपासना: देवी शक्तियों की उपासना की जाती है।
प्रमुख देवियाँ: बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी, चन्द्रहासिनी, विन्ध्यवासनी, बिलाईमाता, महामाया, अंगारमोती एवं गंगाई माता।
प्रथा: इस दौरान ‘जंवारा खोंचकर’ मितान (मित्र) बनाने की प्रथा है।
🏹 रामनवमीं:
अवसर: चैत्र शुक्ल पक्ष नवमीं (श्रीराम जन्मोत्सव)।
मेला: डभरा (सक्ती) में रामनवमी के अवसर पर विशाल मेला लगता है।
🍚 बासी तिहार:
अवसर: यह अप्रैल के महीने में मनाया जाता है।
महत्व: यह जनजातियों के लिए वर्ष का अंतिम पर्व और बासी खाने का त्यौहार होता है।
☀️ वैशाख माह (अप्रैल-मई)
✨ अक्षय तृतीया (अक्ती):
आयोजन: बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया। [CG PSC(ADPO)2021], [CGVyapam(MSI)2021, (Patwari) 2022]
परंपरा: जल दान करने की परंपरा है। [CGVyapam (CBAS)2023]
प्रारंभ: इस दिन किसान खेतों की पूजा करके कृषि कार्य की शुरुआत करते हैं।
विशेष: इस पर्व पर पुतरा-पुतरी (गुड़िया-गुड्डे) का विवाह किया जाता है, और मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देता है। [CG PSC(Lib)2017] [CGVyapam (MBD)2024]
💍 अरवा तीज:
अवसर: वैशाख माह।
विशेष: इस दिन अविवाहित लड़कियाँ आम की डाली से मंडप बनाकर विवाह की विभिन्न रस्मों का प्रतीकात्मक रूप से निर्वाह करती हैं।
🔥 ज्येष्ठ/जेठ माह (मई-जून)
☁️ भीमा जतरा:
क्षेत्र: बस्तर एवं दंतेवाड़ा।
पूजा: भीमा (भीमसेन) को इन्द्रदेव के रूप में और ग्राम देव की पूजा की जाती है।
विशेष: अच्छी फसल, बारिश और कृषि में बाधा न आने की कामना की जाती है। वर्षा की कामना के लिए मेंढ़क-मेंढ़की का विवाह कराया जाता है।
🌊 गंगा दशहरा:
अवसर: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी। [CGPSC(Pre.)2018, 2019], [CG Vyapam (HCAG)2018]
मान्यता: माना जाता है कि इस दिन गंगा माता स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
पूजा: यह पर्व जल स्रोतों और नदियों के सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व को उजागर करता है।
🌧️ आषाढ़ माह (जून-जुलाई)
** रथ गोंचा पर्व:**
क्षेत्र: बस्तर। [CG PSC(Pre)2019]
अवसर: आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया। [CG PSC(Pre)2014]
स्थान: जगदलपुर (बस्तर)। [CGVyapam (EAE)2018]
पूजा: ‘भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा’ निकाली जाती है। [CSPHCL-2019]
आराध्य देवी: गुंडिचा देवी।
🌱 बीज बोहनी
🌍 जनजाति: यह पर्व कोरवा जनजाति द्वारा मनाया जाता है।
🗓️ अवसर: आषाढ़ के महीने में, मुख्यतः कृषि कार्यों के दौरान, यह पर्व आयोजित किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे बीज बोने से पहले भी मनाया जाता है।
🙏 विशेष: यह पर्व कृषि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।
रथ द्वितीया पर्व (रथ यात्रा)
🗓️ अवसर: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है।
✨ पूजा: इस दिन लकड़ी से बनी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों की पूजा की जाती है।
🐘 शोभायात्रा: मूर्तियों को एक साथ रथ पर बैठाकर शोभायात्रा निकाली जाती है।
🍚 प्रसाद: इस अवसर पर गजा मूंग का प्रसाद विशेष रूप से वितरित किया जाता है। [CG PSC(Pre)2019]
🤝 प्रथा: गजा मूंग खिलाकर मितान (दोस्त) बनाने की परंपरा भी इस पर्व से जुड़ी है।
🌦️ सावन (जुलाई-अगस्त)
🌿 हरेली (Hareli)
🌾 पहचान: इसे छत्तीसगढ़ अंचल का प्रथम त्यौहार माना जाता है।
🗓️ आयोजन: यह सावन (श्रावण) माह की अमावस्या को मनाया जाता है। [CG Vyapam (E.Chemist)2016]
📛 उपनाम: इसे ‘गेंड़ी पर्व’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन बच्चों के लिए गेंड़ी (बांस के डंडे) बनाई जाती है।
🧑🌾 प्रमुखता: यह मुख्य रूप से किसानों द्वारा मनाया जाने वाला पर्व है। [CG PSC(CMO P-2)2010]
🎯 खेल: इस मौके पर कई पारंपरिक खेल आयोजित होते हैं:
नारियल फेंक प्रतियोगिता
कबड्डी प्रतियोगिता
गेंड़ी दौड़ प्रतियोगिता
रस्साकशी
फुगड़ी
💃 नृत्य: इस दिन गेंड़ी नृत्य का भी आयोजन किया जाता है।
🙏 पूजा-विधि: इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है:
कुटकी देवी की पूजा की जाती है। [CG Vyapam (RBOS)2017]
गोरइंया देव (पशुओं के रक्षक देवता) की पूजा होती है।
किसान अपने लौह उपकरणों और कृषि औजारों की पूजा करते हैं। [CG PSC(AMO)2017,(ADS)2017]
👻 मान्यताएं और टोटके: ऐसी मान्यता है कि इस दिन बुरी आत्माएं और शक्तियां अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं। उनसे बचने के लिए कई उपाय किए जाते हैं:
महिलाएं घर की मुख्य दीवार पर गोबर से चित्र बनाती हैं। [CG PSC(SEE)2020]
राउत समुदाय के लोग अपने मालिकों के घर के दरवाजों पर नीम की पत्तियां लगाते (खोंचते) हैं। [CG PSC(AD.Agri.Fish)2013]
लोहार अपने मालिकों के दरवाजों पर कील ठोंकते हैं।
🌴 बस्तर में: बस्तर क्षेत्र की जनजातियाँ इसे अमुस त्यौहार के रूप में मनाती हैं।
🥞 व्यंजन: हरेली के दिन गुड़ का चीला नामक पारंपरिक पकवान बनाया जाता है।
🐃 अमूस तिहार
🗓️ अवसर: हरेली अमावस्या या सावन अमावस्या।
🌍 जनजाति: गोंड़ और भतरा।
🌿 विशेष: इस दिन पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए औषधीय पौधों की पूजा की जाती है।
🐍 नागपंचमी / नगपांचे
🗓️ अवसर: सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि। [CG PSC(ITI Prin.)2016]
🎪 मेला: जांजगीर-चांपा के दलहा पहाड़ पर एक विशाल मेला आयोजित होता है।
💪 खेल: इस अवसर पर कुश्ती और बिरौंछा जैसे पारंपरिक खेल खेले जाते हैं। [CG PSC(AP)2009]
🎑 कजरी त्यौहार
🗓️ तिथि: सावन शुक्ल नवमी से लेकर सावन पूर्णिमा तक।
🙏 उपासना: यह त्यौहार केवल संतानवती माताओं द्वारा देवी भगवती की पूजा के रूप में मनाया जाता है।
🌱 कामना: अच्छी फसल की कामना की जाती है।
🌾 शुरुआत: इस पर्व के साथ ही गेहूँ और जौ की बुवाई की शुरुआत हो जाती है। [CGVyapam (KADI)2019]
💕 राखी/रक्षाबंधन त्यौहार
🗓️ अवसर: सावन माह की पूर्णिमा।
✨ प्रतीक: यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है।
🌾 भाद्र/भादो माह (अगस्त-सितम्बर)
🌱 भोजली पर्व
🗓️ आयोजन: भादो माह के कृष्ण पक्ष की प्रथम तिथि को। [CG PSC(ADPO)2021, (Pre)2024]
विभिन्न विद्वानों के अनुसार भोजली बोने और विसर्जन की तिथियाँ:
विद्वान/व्यक्ति
बोवाई का समय
विसर्जन का समय
डॉ. दयाशंकर शुक्ल
सावन शुक्ल पंचमी
सावन पूर्णिमा
डॉ. हनुमंत नायडू
सावन शुक्ल नवमीं
सावन पूर्णिमा
रामकृष्ण तिवारी
सावन शुक्ल पंचमी/सप्तमी
सावन पूर्णिमा
डॉ. गोरेलाल चंदेल
सावन शुक्ल सप्तमी/नवमीं
भाद्रकृष्ण प्रथमा
🎶 गीत: “अहो देवी गंगा, लहर तुरंगा। हमर भोजली दाई के भीजे आठों अंगा॥” इस गीत में गंगा नदी का उल्लेख बार-बार आता है।
🤝 प्रतीक: भोजली पर्व प्रकृति पूजा और मित्रता का प्रतीक है। इस दिन मितान बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
🌱 बीज: भोजली में पांच प्रकार के बीज (धान, गेहूँ, चना, उड़द तथा कोदो) बोये जाते हैं।
🌊 विसर्जन: भोजली विसर्जन को छत्तीसगढ़ी में सरोना/सिराना या उजेना कहते हैं।
👩👦👦 बहुरा चौथ पर्व
🗓️ आयोजन: भादो माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को।
🙏 व्रत: माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के लिए यह व्रत रखती हैं। [CGPSC(Pre)2020]
🐄 पूजा: इस दिन सिंह और गाय-बछड़े की पूजा की जाती है।
📜 हलषष्ठी
📛 अन्य नाम: खमरछठ, कमरछठ, एवं हलछठ।
🗓️ आयोजन: भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को। [CGPSC(ARTO)2017]
🤰 व्रतधारी: यह व्रत केवल संतानवती माताएं ही रखती हैं।
🥣 सेवन: इस व्रत में पसहर चावल (बिना हल चलाए उगी भूमि का चावल) का सेवन किया जाता है। [CGPSC(SEE)2016]
📜 संबंध: इस पर्व का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। [CG Vyapam (VAPR)2021]
🌟 जन्माष्टमी पर्व
📛 अन्य नाम: आठे कन्हैया पर्व।
🗓️ आयोजन: कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि।
🎪 मेला: रायगढ़ के गौरीशंकर मंदिर में इस अवसर पर विशेष मेला लगता है।
🐂 पोला
📛 अन्य नाम: पोरा या बड़गा।
🗓️ आयोजन: भाद्रपद माह की अमावस्या। [CG PSC(YWO)2018]
🍪 व्यंजन:ठेठरी (पार्वती का प्रतीक) और खुरमी (शिव का प्रतीक)।
🐂 मान्यता: किसान इस दिन बैलों को सजाते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
🔨 विशेष: इस दिन गेंड़ी का विसर्जन किया जाता है, और मैदानी इलाकों में पोरा पटकने की परंपरा भी है। [CG PSC(Lib)2017]
👰 तीजा/हरतालिका
🗓️ आयोजन: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि।
🏠 कार्यक्रम: इस पर्व में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखने के लिए अपने मायके जाती हैं। [CG PSC(ACF)2017]
🥥 विशेष: तीजा के एक दिन पहले महिलाएं करूभात खाती हैं और फिर अगले दिन निर्जला उपवास रखती हैं। [CG PSC(SEE)2016]
🎶 धनकुल/तीजा जमार
🌍 जनजाति: हल्बा और भतरा।
🗓️ अवसर: भादो माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीजा पर्व के दौरान)। [CG PSC(ABEO)2013]
🗣️ गायन की भाषा: हल्बी।
🎻 वाद्य यंत्र:धनकुल (मटकी, बांस की खपच्ची, सूपा और धनुष से निर्मित)।
🙏 पूजा: महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए देवी गौरी या लक्ष्मी की पूजा करती हैं।
🐘 गणेश चतुर्थी
🗓️ अवसर: भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी।
✨ विशेष: इस दिन रायगढ़ के रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह का आयोजन होता है, जिसे गणेश उत्सव के रूप में भी जाना जाता था। इसकी शुरुआत राजा भूपदेव सिंह ने की थी।
🗓️ अवसर: भादो माह में शुक्ल पक्ष नवमीं से पूर्णिमा तक, नई फसल आने की खुशी में।
🙏 विशेष: अपने पूर्वजों को नई फसल और मदिरा अर्पित करते हैं, और आदिशक्ति बुढ़ादेव की पूजा की जाती है।
🍂 कुवांर/आश्विन माह (सितम्बर-अक्टूबर)
👩👧👦 बेटाजूतिया (जीवित्पुत्रिका व्रत) / जिवतिया पर्व
🗓️ तिथि: कुवांर कृष्ण पक्ष की अष्टमी (पितर पाख)।
🙏 व्रत: महिलाएं अपने पुत्रों की मंगलकामना के लिए यह व्रत रखती हैं। [CG Vyapam (SAAF)2016]
🌿 विशेष: इस दिन चिटचिटा (एक पौधे) की दातुन करने की परंपरा है और शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
🌟 जोत-जंवारा पर्व
🗓️ आयोजन: यह पर्व साल में दो बार, कुवांर और चैत्र माह की नवरात्रि में आयोजित किया जाता है।
🌱 रस्म: नवरात्रि के पहले दिन माता के मंदिर में ज्योति कलश स्थापित कर जंवारा बोया जाता है।
🏹 दशहरा पर्व/विजयादशमी
🗓️ आयोजन: कुवांर माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को।
✨ विशेष: रावण पर भगवान राम की विजय के प्रतीक के रूप में (असत्य पर सत्य की जीत) मनाया जाता है। इस दिन सोनपत्ती (शमी पत्र) भेंट करने की प्रथा प्रचलित है। [CG Vyapam (Chemist)2016]
🌕 शरद पूर्णिमा
📜 मान्यता: ऐसा माना जाता है कि इस दिन आसमान से अमृत की वर्षा होती है, जिसे खीर के माध्यम से ग्रहण किया जाता है।
🌾 कोरा पर्व
🌍 जनजाति: कोरवा।
🗓️ अवसर: आश्विन माह में, आदिवासियों द्वारा कुटकी गोंदली की फसल काटने के बाद, यानी कृषि के समय आयोजित होता है।
✨ कार्तिक माह (अक्टूबर-नवम्बर)
🪔 दीपावली/देवारी
🗓️ अवसर: कार्तिक माह की अमावस्या।
🎨 विशेष: दीपावली पर छत्तीसगढ़ में गोबर से चित्रांकन करने की परंपरा है। लक्ष्मी पूजन को यहाँ सुरहोती के नाम से भी जानते हैं।
🐂 दियारी पर्व
🌍 जनजाति: माड़िया (बस्तर क्षेत्र)।
🗓️ अवसर: दीपावली के समय।
🐄 कार्यक्रम: इस दिन पशुओं को विशेष पकवान खिलाया जाता है और फसल की पूजा की जाती है। [CGPSC(ADJE)2020] [CGVyapam(ESC)2017]
🕉️ गौरा/गौरी-गौरा पर्व
🌍 जनजाति: गोंड़। [CG PSC(ARTO)2017,(AP)2016]
🗓️ अवसर: दीपावली के समय, कार्तिक अमावस्या से 5-7 दिन पहले शुरू हो जाता है।
💞 विशेष: यह पर्व शिव-पार्वती (गौरा-गौरी) के विवाह उत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
🐄 गोवर्धन पूजा
🗓️ अवसर: कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि। [CG PSC(ADPO)2021]
🐄 विशेष: इस दिन गौठान में गोबर से विशेष आकृतियाँ बनाकर उन्हें पशुओं के खुर से कुचलवाया जाता है और इस गोबर को तिलक के रूप में लगाया जाता है।
🎉 मातर त्यौहार
🗓️ आयोजन: कार्तिक माह में (गोवर्धन पूजा के बाद भाई दूज के दिन)। [CGPSC(Pre.)2016]
🌍 समुदाय: राउत/यादव जाति में प्रचलित।
🙏 विशेष: राउत जाति के लोग खोडहर देव (लकड़ी से निर्मित) की पूजा करते हैं और पशुधन को सोहाई बांधकर दोहा गाते हुए नृत्य करते हैं। [CG Vyapam (TET) 2019]
🌳 आंवला पूजा
🗓️ अवसर: कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमीं (आंवला नवमीं)। [CG PSC(ITI Prin.)2016]
🍽️ विशेष: ग्रामीण क्षेत्रों में आंवला के पेड़ के नीचे सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है।
💒 देवउठनी एकादशी/जेठउनी/तुलसी विवाह
🗓️ आयोजन: कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी एकादशी। [CG PSC(Pre)2015]
🌱 विशेष: इस पर्व पर गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी और सालिकराम का विवाह कराया जाता है। प्रदेश में धान की कटाई भी सामान्यतः इसी दिन से प्रारंभ होती है।
❄️ पौष माह (दिसम्बर-जनवरी)
📿 बड़े भजन का रामनामी मेला
🗓️ अवसर: पौष माह के शुक्ल पक्ष एकादशी से तीन दिनों तक। [CGPSC(Pre.)2018]
🌾 फसल: यह त्यौहार नई धान की फसल घर आने की खुशी में मनाया जाता है।
👦 विशेष: इस दिन बच्चे घर-घर जाकर अन्न (धान) मांगते हैं, और युवक-युवतियां डंडा नृत्य एवं सुआ नृत्य भी करते हैं। [CG PSC(ITI Pri.) 2022] [CG PSC(CMO)2010]
❄️ छेरता पर्व (Chherta Festival)
🌍 जनजाति: यह पर्व गोंड, भूमिया, और पनका जनजातियों द्वारा मनाया जाता है।
🗓️ तिथि: पौष महीने की पूर्णिमा को।
🌱 महत्व: छेरता का शाब्दिक अर्थ है ‘धरती’। इस दिन कृषक समुदाय अपने साल भर के लेखा-जोखा और हिसाब-किताब का बंदोबस्त करते हैं। यह एक प्रकार से कृषि वर्ष के समापन का प्रतीक है।
🌾 पुपुलसाड पर्व (Pupulsad Festival)
🗓️ आयोजन: यह त्यौहार पौष माह में मनाया जाता है।
🌍 जनजाति और क्षेत्र: यह बस्तर अंचल में रहने वाली गोंड जनजाति का एक महत्वपूर्ण पर्व है।
🏔️ माघ माह (जनवरी-फरवरी) – धेरसा पर्व
🌍 जनजाति: यह कोरवा जनजाति का एक प्रमुख त्यौहार है।
🗓️ अवसर: माघ माह (जनवरी-फरवरी) में मनाया जाता है।
🌾 विशेष: यह पर्व सरसों, दलहन जैसी फसलों की कटाई के बाद आयोजित होता है और कृषि से गहराई से जुड़ा हुआ है।
🌤️ फाल्गुन माह (फरवरी-मार्च)
मेघनाथ पर्व (Meghnath Festival)
🌍 जनजाति: यह पर्व गोंड़ और कोरकू जनजातियों द्वारा मनाया जाता है।
🗓️ माह: फागुन के महीने में, होली के दूसरे दिन इसका आयोजन होता है।
📍 क्षेत्र: मुख्य रूप से बस्तर क्षेत्र में मनाया जाता है।
🏛️ विशेष: गोंड़ जनजाति द्वारा मेघनाथ की स्मृति में एक स्तंभ स्थापित करके उसके चारों ओर नृत्य किया जाता है, जो इस पर्व का मुख्य आकर्षण है। [CG PSC(Pre.)2016] [CG Vyapam (SAAF)2018]
ओसामुड़वाँ पर्व (Osamudwan Festival)
🌍 जनजाति: यह भुजिया जनजाति का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व है।
🗓️ माह: फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है।
🎻 वाद्ययंत्र: इस पर्व में धनकुल बाजा का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
✨ महत्व: यह पर्व भुजिया जनजाति की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत प्रतीक है।
💍 28.6 छत्तीसगढ़ के प्रमुख आभूषण (Major Ornaments of Chhattisgarh)
पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन गड़कलेवा रायपुर (26 जनवरी 2016) और बिलासपुर में उपलब्ध है। [CG PSC (AP)2016]
पिड़िया, जो चावल के आटे और शक्कर से बनता है, राजीव लोचन मंदिर में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। [CG PSC(Eng)2015]
👑 28.8 बस्तर का दशहरा (Bastar Dussehra)
(स्रोत – छत्तीसगढ़ का गौरव बस्तर, पेज क्र. 166-170)
🏹 अद्वितीय परंपरा: बस्तर का दशहरा भारत के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से पूरी तरह अलग है। जहां बाकी भारत में यह पर्व रावण वध और सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, वहीं बस्तर का दशहरा पूरी तरह से देवी दंतेश्वरी को समर्पित है। यह पर्व श्रावण अमावस्या से शुरू होकर आश्विन शुक्ल त्रयोदशी तक चलता है।
⏳ भव्य आयोजन: यह दुनिया का सबसे लंबा, यानी 75 दिनों तक चलने वाला त्यौहार है, जिसमें 13 दिनों तक चलने वाली प्रमुख रस्में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती हैं। [CG PSC(Pre)2018], (Lib)2017]
📜 प्रमुख तथ्य:
प्रारंभकर्ता: काकतीय वंश के महान शासक पुरुषोत्तम देव (1408 से 1439 ई.)।
प्रारंभ: श्रावण अमावस्या (हरेली पर्व) से।
समापन: आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को।
प्रथम कार्यक्रम: पाट जात्रा।
प्रथम रस्म: काछन गादी।
अंतिम रस्म: मुरिया दरबार। [CG PSC(CMO)2019]
तुपकी का निर्माण: यह धुरवा एवं भतरा जनजाति द्वारा किया जाता है।
बिसाहा पैसा: बस्तर दशहरे के खर्च के लिए एकत्रित किया जाने वाला धन।
रथ की कहानी: काकतीय शासक पुरुषोत्तम देव भगवान जगन्नाथ के परम भक्त थे। एक बार वे जगन्नाथपुरी गए, जहां पुजारी के माध्यम से उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि मिली और उपहार में 16 पहियों वाला एक विशाल रथ भेंट किया गया।
रथ का विभाजन (16 पहियों वाला रथ)
04 पहियों वाला रथ:
नाम: फूल रथ
परिचालन: क्वांर शुक्ल पक्ष द्वितीया से सप्तमी तक।
खींचना: कचोरापाटी एवं अगरवारा के ग्रामीण।
08 पहियों वाला रथ:
नाम: रैनी रथ / विशाल रथ
परिचालन: भीतर रैनी एवं बाहर रैनी के दौरान।
खींचना: किलेपाल के माड़िया।
✨ बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्में
जात्रा (Ritual)
अवसर (Timing)
कार्यक्रम (Program)
पाट जात्रा
श्रावण अमावस्या (हरेली पर्व)
रथ निर्माण के लिए लकड़ी की पूजा।
डेरी-गड़ाई
भादो शुक्ल पक्ष द्वादश या त्रयोदश
साल वृक्ष की दो टहनियों को स्थापित करना।
काछन गादी
क्वांर/आश्विन अमावस्या
काछन देवी को बेल के कांटों से बने सिंहासन पर बिठाना।
रैला पूजा
क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा
मिरगान जाति की महिलाओं द्वारा रैला पूजा।
जोगी बिठाना
आश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा
कलश स्थापना।
रथ परिक्रमा
क्वांर शुक्ल पक्ष द्वितीया से सप्तमी
चार पहियों वाले रथ का प्रतिदिन परिक्रमण।
बेल पूजा
क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी
मंदिर के पास स्थित बेल वृक्ष की पूजा।
निशाजात्रा
क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी
इतवारी बाजार से पूजा मंडप तक शोभायात्रा।
जोगी उठाई
क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी
9 दिन से व्रत पर बैठे जोगी को भेंट देकर उठाना।
मावली परघाव
क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी
मावली देवी का स्वागत करना।
भीतर रैनी
विजयादशमी
आठ पहियों वाले रथ का नगर भ्रमण।
बाहिर रैनी
आश्विन शुक्ल एकादशी
राजा द्वारा देवी को नया अन्न अर्पित कर प्रसाद ग्रहण करना।
मुरिया दरबार
आश्विन शुक्ल द्वादशी
ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा और समाधान।
काछन जात्रा
आश्विन शुक्ल द्वादशी
काछन देवी का आभार व्यक्त करना।
कुटुंबजात्रा
आश्विन शुक्ल तेरस
सभी स्थानीय देवी-देवताओं को विदाई देना।
ओहाड़ी
आश्विन शुक्ल चतुर्दशी
मावली माता के सम्मान में गंगामुण्डा जात्रा का आयोजन।
विस्तृत कार्यक्रम विवरण
1. पाट जात्रा (Pat Jatra):
यह बस्तर दशहरे का पहला कार्यक्रम है, जिसमें रथ निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी की पूजा की जाती है।
अवसर: श्रावण अमावस्या (हरेली पर्व)।
लकड़ी लाने का दायित्व: अगरवारा, कचोरापाटी और राकेरा परगना के गाँवों का।
2. डेरी-गड़ाई (Deri-Gadai):
स्थान: सिरहासार भवन, जगदलपुर।
अवसर: भादो शुक्ल पक्ष द्वादश या त्रयोदश।
अर्थ: साल वृक्ष की दो टहनियों (डेरियों) को स्थापित करने की रस्म डेरी-गड़ाई कहलाती है, जिसे बिलोरी ग्राम के व्यक्ति द्वारा संपन्न किया जाता है।
पूजा: यह बस्तर दशहरे की शुरुआत का प्रतीक है, जो काछिन देवी की पूजा से होता है। [CG Vyapam (FCPR)2016]
संवाहिका: महरा समुदाय की एक 9 वर्षीय कुंवारी कन्या पर काछन देवी आती हैं, जिनसे दशहरे के निर्विघ्न समापन का आशीर्वाद लिया जाता है। [CG PSC(EAP)2016]
4. रैला पूजा व नवरात्र (Raila Puja & Navratra):
अवसर: क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा।
पूजा: काछन गादी कार्यक्रम के बाद, मिरगान जाति की महिलाएँ रैला पूजा करती हैं। साथ ही, दंतेश्वरी, मावली और कंकालीन देवियों के मंदिर में कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा विधि-विधान से प्रारंभ की जाती है।
5. जोगी बिठाना (Jogi Bithana):
अवसर: आश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा। [CG PSC (YWO) 2018]
अर्थ: दशहरे के निर्विघ्न संपन्न होने के लिए हल्बा समुदाय का एक सदस्य 9 दिनों तक व्रत रखकर योग साधना में बैठता है, जिसे ‘जोगी बिठाई’ कहते हैं।
विशेष: इसमें सात मांगुर मछलियों को अर्पित करने की भी प्रथा है। [CGVyapam(RI)2017,(LOI)2023]
6. रथ परिक्रमा (Rath Parikrama):
अवसर: क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया से सप्तमी तक।
रथ: चार पहियों वाला ‘फूल रथ’, जिसे फूलों से सजाया जाता है। इस पर मां दंतेश्वरी के छत्र को विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाता है।
7. बेल पूजा (Bel Puja):
अवसर: क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी।
इस रस्म के अंतर्गत मंदिर के पास स्थित बेल वृक्ष की पूजा की जाती है। [CG Vyapam (SAAF)2018]
जुलूस: जगदलपुर नगर के इतवारी बाजार से पूजा मंडप तक एक भव्य जुलूस निकलता है।
जोगी उठाई (Jogi Uthai):
अवसर: क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी।
9 दिनों की कठिन योग साधना के बाद, जोगी को भेंट प्रदान कर सम्मानपूर्वक उठाया जाता है।
मावली परघाव (Mavli Parghav):
अवसर: क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी। [CG PSC (YWO) 2018], [CG PSC (SEE) 2017]
अर्थ: ‘मावली देवी का स्वागत करना’।
कार्यक्रम: बस्तर की इष्टदेवी मावली माता को पालकी में बिठाकर दंतेवाड़ा से जगदलपुर लाया जाता है, जहाँ चार माड़िया जाति के लोग उन्हें कंधे पर उठाकर लाते हैं।
भीतर रैनी (Bhitar Raini):
अवसर: विजयादशमी (क्वांर/आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी)। [CGVyapam (VDAG)2021]
कार्यक्रम: इस दिन आठ पहियों वाले विशाल रथ को नगर भ्रमण कराया जाता है और भ्रमण के बाद उसे कुमढ़ाकोट ले जाया जाता है।
📜 किंवदंती: एक किंवदंती के अनुसार, एक बार राजा भतरा और मुड़िया समुदाय के लोगों को निमंत्रण देना भूल गए थे, जिससे नाराज होकर वे रथ को चुराकर कुमढ़ाकोट ले गए। तब राजा ने वचन दिया कि इस रस्म के बाद वे समस्याओं के समाधान के लिए एक दरबार लगाएंगे, जिसे मुरिया दरबार कहा गया।
बाहिर रैनी (Bahir Raini):
अवसर: आश्विन शुक्ल एकादशी।
कार्यक्रम: कुमढ़ाकोट में राजा, देवी को नया अन्न अर्पित कर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस कार्यक्रम में धनुकांडेया का विशेष प्रदर्शन होता है, जिसमें भतरा जाति के लोग धनुर्धारी बनते हैं।
मुरिया दरबार (Muria Darbar):
अवसर: आश्विन शुक्ल द्वादशी।
स्थान: सिरहासार, जगदलपुर।
कार्यक्रम: इस सभा में ग्रामवासियों की सामान्य समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान किया जाता है। प्रथम बार मुरिया दरबार का आयोजन 8 मार्च 1876 में किया गया था।
14. काछन जात्रा (Kachan Jatra):
अवसर: आश्विन शुक्ल द्वादशी।
कार्यक्रम: बस्तर दशहरा पर्व के सभी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए काछन देवी का आभार प्रकट करने हेतु यह पूजा की जाती है।
15. कुटुंबजात्रा (Kutumbjatra):
अवसर: आश्विन शुक्ल तेरस।
कार्यक्रम: बस्तर दशहरे में शामिल हुए सभी स्थानीय देवी-देवताओं को विदाई देने की रस्म कुटुंबजात्रा कहलाती है।
कार्यक्रम: मावली माता के विदाई सम्मान में गंगामुण्डा जात्रा संपन्न होती है और दंतेवाड़ा से लाई गई मावली माता को विदा किया जाता है। [CGVyapam(VFM)2021]
🗓️ अवसर: श्रावण मास में हरेली पर्व के अवसर पर।
👩🎨 कलाकार: यह चित्रकला महिलाओं द्वारा बनाई जाती है।
🖌️ विशेषता: इस चित्रकला में घर के मुख्य द्वार की दीवारों पर गोबर का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के सुंदर चित्र उकेरे जाते हैं। [CG PSC(SEE)2020]
🗓️ अवसर: दीपावली के दूसरे दिन, गोवर्धन पूजा के मौके पर।
👩🎨 कलाकार: यह भी महिलाओं द्वारा की जाने वाली एक कला है।
🌾 विषय: घर में अन्न-धन की समृद्धि की कामना के साथ, धान की कोठी पर विभिन्न प्रकार के मांगलिक चित्र बनाए जाते हैं।
🗓️ अवसर: यह चित्रकला तीजा पर्व के अवसर पर, भगवान शिव-पार्वती की पूजा के लिए बनाई जाती है।
🌍 समुदाय: यह चितेर जनजाति द्वारा बनाई जाने वाली एक पारंपरिक पौराणिक चित्रकला है।
🗓️ अवसर: प्रायः विभिन्न मांगलिक और अनुष्ठानिक कार्यक्रमों के अवसर पर।
🖌️ विशेषता: सामान्यतः चावल के आटे का उपयोग करके अनेक प्रकार की बेल-बूटियों और पदचिन्हों के सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। यह घर के बरामदे (परछी) से लेकर गली तक बनाई जाती है।
🗓️ अवसर: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर।
🖌️ विशेषता: घर की दीवारों पर आठ पुतलिकाएं (कृष्ण के बाल रूप) बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
🏠 अवसर: सामान्यतः नए घर में प्रवेश करने से पहले।
🖌️ विशेषता: दीवारों पर मिट्टी के उपयोग से विभिन्न प्रकार की कलात्मक कृतियाँ उकेरी जाती हैं। इनमें विभिन्न जीव-जंतु, बेल-बूटे आदि का चित्रांकन होता है, जो कई वर्षों तक दीवारों पर बने रहते हैं। इसे छत्तीसगढ़ी में ‘नोहडोरा डालना’ भी कहते हैं। [CG VS (AG-3)2021]
🌍 जनजाति: यह भील जनजाति की एक प्रमुख चित्रकला है।
📍 उद्गम: इसका उद्गम स्थल मध्यप्रदेश का पिथौरा क्षेत्र माना जाता है।
🖌️ माध्यम: यह चित्रकारी मुख्य रूप से घरों की दीवारों, कागजों, और कपड़ों पर की जाती है। इसमें चिड़ियों, सांपों, हाथियों और घोड़ों जैसे चित्रों का प्रमुखता से अंकन होता है।
📍 स्थान: वे रायपुर में रहकर चित्रकला की साधना करते थे।
📰 पत्रिका: उनके चित्र ‘माधुरी’ और ‘शारदा’ जैसी प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे।
📍 स्थान: वे धमतरी जिले के एक प्रमुख चित्रकार थे।
🎨 चित्रांकन शैली: उनकी चित्रकला आचार्य नंदलाल बसु की शैली पर आधारित थी।
✨ विशेषता: उनकी कला में आचार्य बसु की कला का एक सुंदर प्रतिबिंब देखने को मिलता है। उन्होंने 1966 में शांति निकेतन से चित्रकला की शिक्षा प्राप्त की थी।
गोंचा पर्व महोत्सव: बस्तर (आषाढ़ माह) [CG PSC (Lib.) 2014]
ढोलकल महोत्सव: फरसपाल (दंतेवाड़ा)
दंतेश्वरी फाल्गुन मड़ई उत्सव: दंतेवाड़ा (बस्तर) (9 दिनों तक आयोजित होता है) [CG Vyapam (AGDO)2021]
🗓️ प्रारंभ: 2005
🎯 उद्देश्य: अनुसूचित जाति के परंपरागत लोक कलाओं जैसे- पंथी, भरथरी, पण्डवानी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्रोत्साहित करना।
💰 राशि: प्रथम पुरस्कार – 1 लाख रु., द्वितीय पुरस्कार – 0.75 लाख रु., तृतीय पुरस्कार – 0.50 लाख रु.।
✨ विशेष: राज्य के किसी भी जिले में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन कर कलाकारों को पुरस्कृत किया जाता है।
अगासदीया: भिलाई (दुर्ग)
छत्तीसगढ़ लोकमया मंच: कुम्हारी (दुर्ग)
छत्तीसगढ़ लोकरंग: बिलासपुर
लोक कला मंच: बिलासपुर
लोक शृंगार भारती: बिलासपुर
पुरखौती मुक्तांगन: उपरवारा (नया रायपुर)
लोक कला दर्पण: रायपुर
दफड़ा/चांग: यह लकड़ी के एक गोलाकार व्यास पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाता है, जिसे वादक अपने कंधे पर लटकाकर बजाता है।
नगाड़ा: होली के अवसर पर फाग गीतों के साथ बजाया जाने वाला यह वाद्ययंत्र लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। [CGPSC(PEON) 2022, (VAS)2021]
झांझ व मंजीरा: यह मंजीरे का एक बड़ा स्वरूप होता है, जिसे मांदर के साथ संगत के लिए बजाया जाता है।
ढुढुम: इस वाद्ययंत्र में बारहसिंगा का सींग लगा होता है, जिस कारण इसे ‘सींग बाजा’ भी कहा जाता है। यह गंड़वा बाजा साज का एक प्रमुख वाद्ययंत्र है। [CGPSC(Pre)2023], [CGVyapam (VPR)2021]
ताशा: प्रदेश के मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक प्रसिद्ध वाद्ययंत्र।
अलगोजा: यह बांस से बनी एक विशेष संरचना होती है, जो बांसुरी की तरह दिखती है। इसके दो मुख होते हैं, जिनमें एक साथ हवा फूंककर इसे बजाया जाता है।
मोहरी: प्रादेशिक अंचल में शहनाई का ही एक प्रचलित रूप ‘मोहरी’ है, जो गंड़वा बाजा का एक अभिन्न अंग है। इसे मुख्यतः विवाह के अवसर पर फूंककर बजाया जाता है। [CGVyapam (Lab Tech.)2024], [CG PSC(ADH)2015]
खड़ताल: यह पंडवानी में प्रयोग होने वाला एक प्रमुख वाद्ययंत्र है, जिसे हाथ की अंगुलियों में फंसाकर बजाया जाता है।
मांदर: लकड़ी के खोखले भाग के दोनों सिरों पर बकरे का चमड़ा चढ़ाकर इसे बनाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से जनजाति गीतों, नृत्यों, और मातासेवा गीत के समय किया जाता है।
बीन: इसका प्रयोग सपेरों द्वारा सांप पकड़ने और गांव-गांव जाकर तमाशा दिखाने के लिए किया जाता है।
ढोलक: इसका प्रयोग धार्मिक कार्यों जैसे मंदिरों में भजन-कीर्तन के समय किया जाता है।
बांसुरी: खोखले बांस से बना यह वाद्ययंत्र मुंह से फूंककर बजाया जाता है और लगभग सभी प्रकार के गीतों में इसका प्रयोग होता है।
इकतारा: प्रदेश में भरथरी गीत गाते समय इकतारा का प्रयोग किया जाता है।
टिमटिमी: लकड़ी के खोखले भाग पर चमड़े की परत बांधकर इसे बनाया जाता है। यह वाद्ययंत्र होली और विवाह के अवसर पर देखा जा सकता है।
खंजरी: इसे थाप मारकर और हाथ को हिलाकर बजाया जाता है। इसके घेरे में 3-4 जोड़ी झांझ लगी होती हैं।
तमूरा: इसका निर्माण सूखे लौकी के खोल से किया जाता है। यह एक तत् वाद्ययंत्र है। [CG Vyapam (HELT)2024]
✨ विशेष:गड़वा बाजा के प्रमुख वाद्य यंत्रों के नाम इस प्रकार हैं: [CGPSC(Pre)2023]
झांझ
नगाड़ा
मोहरी
गुदुम
📜 पृष्ठ 1: संचार और मीडिया की दुनिया
📌 संचार माध्यमों का अवलोकन
इस खंड के तहत, निम्नलिखित संचार के साधनों का विश्लेषण किया जाता है:
रेडियो 📻
दूरदर्शन 📺
सिनेमा 🎬
डाक सेवाएं 📮
टेलीफोन 📱
1. रेडियो 📻
🎙️ आगाज: भारत में रेडियो का पहला प्रसारण 1923 में बॉम्बे के रेडियो क्लब द्वारा किया गया था।
📡 छत्तीसगढ़ में आरम्भ: प्रदेश में आकाशवाणी केंद्र की स्थापना 2 अक्टूबर, 1963 को रायपुर में की गई।
💡 विशेष: ‘रेडियो संगवारी’ छत्तीसगढ़ का प्रथम छत्तीसगढ़ी डिजिटल रेडियो स्टेशन है।
🏢 कुल आकाशवाणी केंद्र: राज्य में इस समय 6 आकाशवाणी केंद्र संचालित हैं:
रायपुर (सबसे पहला-1963)
अंबिकापुर (1976)
जगदलपुर (1977)
बिलासपुर (1991)
रायगढ़ (1992)
सरायपाली [CG Vyapam(MFA)2023][CG PSC (LO) 2022]
⭐ खास जानकारी: भारत में एफ.एम. सेवा की शुरुआत 1977 में हुई, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य में इसका प्रारंभ 1991-92 में हुआ। इसके आकाशवाणी केंद्र रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ में स्थित हैं।
2. दूरदर्शन 📺
🇮🇳 राष्ट्रीय शुरुआत: भारत में दूरदर्शन का आरम्भ 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली से हुआ, जबकि इसका नियमित प्रसारण 1965 से शुरू हुआ।
🌴 प्रदेश में शुरुआत: छत्तीसगढ़ में दूरदर्शन की शुरूआत 1994 में रायपुर जिले से हुई।
📶 ट्रांसमीटर: राज्य में तीन ट्रांसमीटर हैं:
रायपुर
जगदलपुर
अम्बिकापुर (10Kw)
🎨 प्रथम रंगीन टेलीविजन: इसका प्रारंभ 25 अप्रैल, 1982 को हुआ।
3. डाक सेवाएं 📮
📨 भारत में प्रारंभ: देश में डाक सेवा 01 अक्टूबर, 1854 को शुरू की गई।
🏢 छत्तीसगढ़ डाक मंडल: इस मंडल का गठन 12 जनवरी, 2001 को हुआ।
📊 आंकड़े: 31 अगस्त 2021 तक, राज्य में 10 मुख्य डाकघर और 3946 उप-डाकघर थे।
4. टेलीफोन 📱
** census2011 के अनुसार:** राज्य के 30.7 प्रतिशत परिवारों के पास टेलीफोन और मोबाइल की सुविधा उपलब्ध है।
📈 TRAI के आंकड़े: भारत सरकार के TRAI के आँकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2023 तक राज्य में 1148.43 लाख मोबाइल उपयोगकर्ता थे।
📜 सिनेमा और फिल्मी कलाकार
5. सिनेमा 🎬
यहाँ छत्तीसगढ़ी सिनेमा की कुछ प्रमुख फिल्मों का विवरण दिया गया है:
फिल्म
वर्ष
निर्माता
निर्देशक
गीतकार
विशेष तथ्य
कहि देबे संदेस (पहली फिल्म)
1965 [CG PSC(Pre)2016]
मनु नायक
मनु नायक (राजदीप)
हनुमन्त नायडू
मनु नायक को छत्तीसगढ़ फिल्म जगत का संस्थापक माना जाता है। [CG PSC(PDD)2018]
घर द्वार (दूसरी फिल्म)
1971
विजय कुमार पाण्डेय
निरंजन तिवारी
हरि ठाकुर
मोर छंइहा भुईया
2000
शिवदयाल जैन
सतीश जैन
लक्ष्मण मस्तुरिया
यह छत्तीसगढ़ की पहली रंगीन फिल्म थी।
भूलन द मेज
2021
मनोज वर्मा
मनोज वर्मा
–
67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म का पुरस्कार मिला। [CG Vyapam (FI)2022]
🎭 फिल्मी कलाकार
🤝 संगठन: छत्तीसगढ़ के कलाकारों के हितों की रक्षा के लिए “छत्तीसगढ़ सिनेमा एण्ड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसियेशन (CITVA)” का निर्माण किया गया है।
🎥 फिल्म सिटी: नवा रायपुर के अटल नगर में पुरखौती मुक्तांगन के पास एक फिल्म सिटी का निर्माण कार्य प्रगति पर है। [CG PSC (MI) 2018]
■ सत्यदेव दुबे
🌍 स्थान: बिलासपुर
🏆 सम्मान: पद्म भूषण (2011)
🌟 विशेष: इन्होंने ‘थियेटर ऑफ ड्रामेटिक’ से शिक्षा प्राप्त की थी। वे एक प्रसिद्ध रंगकर्मी, फिल्म निर्माता, और संवाद-पटकथा लेखक थे। उनकी यादगार फिल्मों में अंकुर, निशांत, भूमिका, जुनून, कलयुग और आक्रोश शामिल हैं।
■ नत्थू दादा रामटेके
🌍 स्थान: राजनांदगांव
🌟 विशेष: इन्होंने “शराबी” फिल्म में नत्थू दादा का किरदार निभाया था।
■ भईयालाल हेड़ाऊ (अभिनेता)
🌍 स्थान: राजनांदगांव
🌟 विशेष: वे सोनहा बिहान और चंदैनी गोंदा के एक जाने-माने कलाकार थे। उन्होंने कई फिल्मों और धारावाहिकों में अभिनय किया है।
📜 फिल्म जगत के अन्य चमकते सितारे
■ अनुराग बसु
🌍 स्थान: भिलाई
🌟 विशेष: एक कुशल निर्देशक और लेखक, जिन्हें बर्फी, मर्डर, साया, और लाइफ इन ए मेट्रो जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। [CG Vyapam (AGDO)2021]
■ अनुज शर्मा
🌟 विशेष: एक प्रसिद्ध अभिनेता, जिन्हें 2014 में पद्मश्री से नवाजा गया। [CG Vyapam (AGDO)2021]
■ ओमकार दास मानिकपुरी
🌟 विशेष: इन्होंने आमिर खान द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पीपली लाईव’ में ‘नत्था’ नामक ग्रामीण का किरदार निभाया था। साथ ही ‘भूलन द मेज’ फिल्म में मुख्य भूमिका में भी थे। [CG Vyapam (AGDO) 2021]
■ किशोर कुमार साहू (अभिनेता)
🌍 स्थान: दुर्ग
🌟 विशेष: इनकी स्मृति में फिल्म के क्षेत्र में “किशोर कुमार साहू स्मृति राष्ट्रीय अलंकरण” और “किशोर कुमार साहू स्मृति राजकीय सम्मान” प्रदान किए जाते हैं। इन्होंने 1948 की फिल्म ‘नदिया के पार’ का निर्देशन भी किया था। [CG PSC(Pre)2018]
■ कांतिलाल राठौर
🌍 स्थान: राजनांदगांव
🌟 विशेष: इनके द्वारा बनाई गई गुजराती फिल्म ‘कंकू’ को क्षेत्रीय भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
■ अशोक मिश्र
🌍 स्थान: रायपुर (संवाद लेखक)
🌟 विशेष: इन्हें 1995 में फिल्म ‘नसीम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिला।
🌟 विशेष: इन्होंने मृच्छकटिकम, चरणदास चोर, माटी की गाड़ी, और आगरा बाजार जैसे नाटकों का मंचन किया। उन्होंने दिल्ली में ‘हिन्दुस्तान थियेटर’ (1954) और भोपाल में ‘नया थियेटर’ (1959) जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की। [CG Vyapam (ECH)2017]
■ ममता चन्द्राकर
🌟 विशेष: एक प्रसिद्ध लोक कलाकार और गायिका, जिन्हें 2016 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
■ अलका चन्द्राकर
🌟 विशेष: लोकगीत गायिका।
■ अनूप रंजन पाण्डेय
🌟 विशेष: बिलासपुर के ‘बनार बैण्ड’ के संयोजक, जिन्हें 2019 में लोककला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान दिया गया। [CG Vyapam (MSI)2021]
📜 पृष्ठ 4: कला और रंगमंच के दिग्गज
■ खुमान साव
🌍 स्थान: राजनांदगांव
🌟 विशेष: ‘चंदैनी गोंदा’ पार्टी के संगीतकार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के विजेता।
■ मदन चौहान
🌟 विशेष: एक प्रसिद्ध गीतकार, जिन्हें 2020 में पद्मश्री सम्मान मिला।
■ फिदाबाई मरकाम (राजनांदगांव)
🌟 विशेष: लोक कला और आदिवासी लोक कला के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘तुलसी सम्मान’ से सम्मानित। इन्होंने हबीब तनवीर और दाऊ मंदराजी के मंच पर अभिनय किया।
■ किस्मत बाई देवार
🌟 विशेष: इन्हें “छत्तीसगढ़ की लता मंगेशकर” के नाम से जाना जाता है।
👑 उपाधि: इन्हें “पण्डवानी की पुरखिन दाई” की उपाधि प्राप्त है।
■ राकेश तिवारी
🌟 विशेष: छत्तीसगढ़ी नाटक ‘राजा फोकलवा’ के लेखक एवं निर्देशक हैं। [CG PSC (ABEO)2013]
📜 छत्तीसगढ़ का साहित्यिक सफर
⏳ छत्तीसगढ़ी साहित्य का कालक्रम
छत्तीसगढ़ के साहित्य को तीन प्रमुख कालों में बांटा गया है:
आदिकाल / गाथाकाल (1000 ई. से 1500 ई. तक) 🏹
मध्यकाल (1500 ई. से 1900 ई. तक) 🏰
आधुनिक काल (1900 ई. से अब तक) ✒️
1. प्राचीनकालीन रचनाएँ
इस काल का छत्तीसगढ़ी साहित्य मुख्य रूप से प्रेम, वीरता और धार्मिक कथाओं पर केंद्रित था।
💘 प्रेम गाथा:
अहिमन रानी
केवला रानी
रेवा रानी
🙏 धार्मिक गाथा:
फूलबासन: यह सीता-लक्ष्मण की कहानी पर आधारित है। [CGVyapam(MBS)2021][CGPSC(Mains)2015]
पंडवानी: यह द्रौपदी के तीजा पर्व पर वर्णित है।
⚔️ वीरगाथा:
लक्ष्मीनिधि कर्णराय की गाथा: यह खैरागढ़ के राजा पर आधारित है।
👤 आदिकालीन प्रमुख साहित्यकार:
दलराम राव: इन्होंने खैरागढ़ के राजा ‘लक्ष्मीनिधि कर्णराय’ पर एक लेख लिखा और पहली बार ‘छत्तीसगढ़’ शब्द का प्रयोग किया था। [CG PSC(VAS)2021]“लक्ष्मीनिधि राय सुनो चित्त दे, गढ़ छत्तीस में न गढ़या रही, मरदूमी रही नहिं मरदन के फेर, हिम्मत से न लड़ैया रही।”
अन्य कवि: दलवीर राव, मानिक राव, और सुंदर राव इस काल के अन्य प्रमुख कवि थे।
2. मध्यकालीन रचनाएँ
इस दौर के प्रमुख छत्तीसगढ़ी साहित्यकार और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं:
💪 वीरगाथाएं:
फूलकुंवर देवी की गाथा
कल्याण साय की गाथा
गोपल्ला गीत
ढोला-मारू
नगेसर कइना
रायसिंह के पवारा
लोरिक चंदा
बलि की गाथा
सरवन गीत
धोबिन की गाथा
रसालू
रमझन
🌱 धार्मिक एवं सामाजिक गीत (भक्तिगीत):
कबीरपंथ: इसकी छत्तीसगढ़ी शाखा संत धर्मदास द्वारा स्थापित की गई।
सतनाम पंथ: इसकी रचनाएं बाबा गुरूघासीदास द्वारा की गईं।
✍️ स्वतंत्र रचनाकार:
गोपालचंद्र मिश्र
माखन मिश्र
बाबू रेवाराम
लक्ष्मण कवि
प्रहलाद दुबे
शिवदत्त शास्त्री
खाण्डेराव
💡 ध्यान दें: छत्तीसगढ़ काव्य का स्वर्ण युग ‘गाथा युग’ को ही माना जाता है।
📜 पृष्ठ 6: मध्यकाल के साहित्यिक रत्न
1. गोपाल चन्द्र मिश्र
👑 उपाधि: इन्हें “छत्तीसगढ़ के वाल्मीकि” के रूप में जाना जाता है।
भक्ति चिन्तामणि (1700): यह कृष्ण पर आधारित एक प्रबंध काव्य है। [CG PSC(Pre)2015]
जैमिनी अश्वमेघ (1695): [CG PSC(Pre)2015]
शठ शतक
रामप्रताप: यह 7 कांडों में विभाजित एक राम प्रबंध काव्य है। [CGPSC(Pre)2015,(EAP)2016,(Lib)2017]
🔑 विशेष जानकारी: गोपाल चन्द्र मिश्र कल्चुरी शासक राजसिंह के दरबारी कवि थे और उन्होंने ही पहली बार अपनी रचना ‘खूब तमाशा’ में राजनीतिक संदर्भ में ‘छत्तीसगढ़’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
2. माखनलाल मिश्र
📜 रचनाएं:
रामप्रताप: इन्होंने अपने पिता गोपाल मिश्र की अधूरी कृति ‘रामप्रताप’ को पूरा किया।
गोपाल विरचित
श्री नागपिंगल छंद विलास
3. बाबू रेवाराम (1812-1873)
🏡 निवासी: रतनपुर [CGPSC(Pre)2018,(ITI Pri.)2016]
🖊️ पहचान: मराठाकालीन लेखक और छत्तीसगढ़ के पहले इतिहासकार। [CG Vyapam (NSA)2016]
📜 रचनाएं:
रत्नपुर का इतिहास
ब्राम्हणस्त्रोत
गंगालहरी, नर्मदाष्टक, माता के भजन [CG PSC(AP)2019]
गीता माधव (महाकाव्य): [CG PSC(AP)2019]
सार रामायण दीपिका
विक्रम विलास (1839 ई.): [CG PSC(AP)2019][CG PSC(SEE)2017]
रत्नपरीक्षा, रहस, रामाश्वमेध [CG PSC(Mains)2012]
तारीख-ए-हैहयवंशी (1858): [CG PSC(ARTO)2017]
कृष्णलीला के भजन, दोहावली [CG PSC(AP)2009]
लोक लावण्य वृत्तांत (3 भागों में): [CG PSC(RDSP)2022]
🔑 विशेष जानकारी: छत्तीसगढ़ी में भजनों का व्यापक प्रचार इनके द्वारा ही किया गया। ये हिन्दी साहित्य के रीतिकाल और भारतेन्दु युग के संधि काल के एक महत्वपूर्ण रचनाकार थे।
4. लक्ष्मण कवि
📜 रचना: भोंसला वंश प्रशस्ति। [CG PSC(AP)2009]
5. प्रहलाद दुबे
📜 रचना: जयचन्द्रिका।
6. शिवदत्त शास्त्री
📜 रचनाएं: इतिहास समुच्चय, रतनपुर आख्यान। [CSPHCL-2019]
7. खाण्डेराव (रतनपुर) [CG Vyapam Patwari)2022]
📜 रचनाएं:
राधाविनोद: श्रीमद् भागवत के दशम् स्कंध पर आधारित खण्डकाव्य। [CG PSC(AP)2019]
🎭 प्रथम नाट्यकार: लोचन प्रसाद पाण्डेय (कृति – कलिकाल)
🌄 छायावाद के प्रवर्तक: मुकुटधर पाण्डेय (कृति – कुररी के प्रति) [CG Vyapam(Ameen)2017,(ECH)2017],[CG PSC(ABEO)2013]
📖 प्रथम कहानीकार: बंशीधर पाण्डेय (कृति – हीरू के कहिनी) [CG PSC(Mains)2011],[CG PSC(ABEO)2013]
✒️ प्रथम कवि: नरसिंह दास वैष्णव (कृति – शिवायन, 1904)
(प्यारेलाल गुप्त के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्रथम कवि धनी धरमदास हैं।)
👩🎨 प्रथम कवयित्री: निरूपमा शर्मा ‘सोनाबाई’ (कृति – पतरेंगी)
😂 प्रथम हास्य कवि: शुकलाल प्रसाद पाण्डेय
📜 प्रथम खण्डकाव्यकार: पं. सुन्दरलाल शर्मा (कृति – छत्तीसगढ़ी दानलीला)
📙 प्रथम महाकाव्यकार: कपिलनाथ कश्यप (श्री प्रणयन जी) (कृतियाँ – 1. श्रीराम कथा 2. श्री कृष्ण कथा 3. श्रीमहाभारत कथा) [CG PSC(Mains)2019][CG PSC(Pre)2012]
** उपन्यासकार:** शिवशंकर शुक्ल (कृतियाँ – 1. दियना के अंजोर 2. मोंगरा) [CG PSC(Reg.)2017][CG PSC(Pre)2016], [CG PSC(Asst. Prof. engg.)2016], [CG Vyapam(FNDM)2019,(VPR)2021(Chemist)2016]
👩💼 प्रथम महिला उपन्यासकार: सरला शर्मा (कृति – माटी के मितान, 2006) [CG PSC(Mains)2018]
📜 प्रथम छन्दशास्त्री: जगन्नाथ प्रसाद “भानु” (उपाधि-भानु 1885), जिनकी पहली रचना ‘छंद प्रभाकर’ (1893) है। [CG PSC(Pre)(ADA)2020]
📄 प्रथम निबंधकार: केयूर भूषण (कृति – राणी ब्राम्हण की दुर्दशा) [CG PSC(Mains)2012]
👩🏫 प्रथम महिला हिन्दी साहित्यकार: निरूपमा शर्मा (कृति – बूंदों का सागर) [CG PSC(CMO P-2)2010]
✍️ प्रथम महिला संस्मरण लेखिका: सरला शर्मा (कृति – सुरता के बादर, 2005)
😄 व्यंग्य लेखन प्रारंभ: शरद कोठारी
💬 छत्तीसगढ़ी में प्रथम व्यंग्य संग्रह: ‘कलादास के कलाकारी’ (लेखक – जयप्रकाश मानस)
🗣️ हल्बी भाषा के प्रथम साहित्यकार: ठाकुर पूरन सिंह [CG PSC(Pre)2023]
📜 छत्तीसगढ़ी व्याकरण के शिल्पकार
यहाँ छत्तीसगढ़ी व्याकरण और भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण लेखकों और उनकी कृतियों का विवरण दिया गया है:
🧠 पी.एस. पट्टावी:
गोंडी बोली : व्याकरण और कोश [CG PSC(Pre)2019]
🧠 डॉ. चितरंजन कर एवं डॉ. सुधीर शर्मा:
बोलचाल की छत्तीसगढ़ी [CG PSC(Pre)2019]
छत्तीसगढ़ी की व्याकरणिक कोटियाँ
छत्तीसगढ़ी भाषा : स्वरूप एवं संभावनाएं
🧠 डॉ. सुधीर शर्मा एवं जयप्रकाश मानस:
राजभाषा छत्तीसगढ़ी
🧠 डॉ. रमेशचन्द्र महरोत्रा एवं डॉ. सुधीर शर्मा:
मानक छत्तीसगढ़ी का सुलभ व्याकरण
🧠 डॉ. रमेशचन्द्र महरोत्रा:
छत्तीसगढ़ी परिचय और प्रतिमान
छत्तीसगढ़ी शब्दकोश
छत्तीसगढ़ी मुहावरा कोश
छत्तीसगढ़ी मुहावरे और लोकोक्तियाँ
🧠 नंदकिशोर तिवारी:
छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन [CG PSC(Mains)2019]
🧠 साधना जैन:छत्तीसगढ़ी और खड़ी बोली के व्याकरणों का तुलनात्मक अध्ययन
💡 विशेष तथ्य:
छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य के विकास के काल विभाजन में आदिकाल, जिसे गाथायुग भी कहा जाता है, का समय विक्रम संवत 1000-1500 माना जाता है। [CGVyapam(VPR)2021]
📜 पृष्ठ 9: विभिन्न नामों से जुड़े साहित्यकार
यहाँ छत्तीसगढ़ी साहित्य में विशिष्ट नामों से जुड़ी रचनाओं और उनके रचनाकारों की सूची दी गई है।
श्रेणी
रचना
रचनाकार
संबंधित परीक्षा (PYQ)
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ परिचय
बलदेव प्रसाद मिश्र
[CG PSC(Pre)2018]
प्राचीन छत्तीसगढ़
प्यारेलाल गुप्त
[CG Vyapam(LOI)2018]
छत्तीसगढ़ परिदर्शन
पालेश्वर प्रसाद शर्मा
मेरा छत्तीसगढ़
परदेशी राम वर्मा
छत्तीसगढ़ गौरव
शुकलाल पाण्डेय
बेटी
बेटी बिदा
बृजलाल शुक्ल
बेटी के बिदा
श्यामलाल चतुर्वेदी
बेटी के बिदा
दानेश्वर शर्मा
[CGPSC(Mains)2012,15]
बेटी के मनसुबा और बर के खोज
लखनलाल गुप्त
सुरता
सुरता
रमेश कुमार चौहान
सुरता के सुतरी
डॉ. पी.सी.लाल यादव
सुरता के चंदन
हरि ठाकुर
सुरता के सोन किरन
लखनलाल गुप्त
महात्म्य
कातिक महात्म्य
गिरिजा शर्मा
रतनपुर महात्म्य
शंकरदत्त मिश्र
रतनपुर महात्म्य
लाला राम तिवारी
रतनपुर महात्म्य
बैजनाथ प्रसाद स्वर्णकार
राजीव क्षेत्र महात्म्य
पं. सुन्दरलाल शर्मा
सुरुज
नवा सुरूज
डॉ. सुरेन्द्र दुबे
नावा सुरूज के नावा अंजोर
आरेख चन्द्रकांत
बिहान
नवा बिहान
टिकेन्द्र टिकरिया
नावा बिहान
कपिलनाथ कश्यप
सोनहा बिहान
नरेन्द्रदेव वर्मा
किसान
किसान करलई
डॉ. खूबचंद बघेल
किसान के करलई
निरंजनलाल गुप्त
राम/रामायण
रामराज्य (नाटक)
मलिकराम त्रिवेदी
[CG PSC(Pre)2016]
रामराज्य (महाकाव्य)
बलदेव प्रसाद मिश्र
सार रामायण दीपिका
बाबू रेवाराम
रामायण सार संग्रह
गंगाधर मिश्र
[CGPSC(EAP)2017]
राम कथा
हीरालाल शुक्ल
श्रीरामकथा
कपिलनाथ कश्यप
राम वनगमन
मन्नुलाल यदु
राम बनवास
श्यामलाल चतुर्वेदी
राम अउ केंवट संवाद
द्वारिका प्रसाद तिवारी
रामप्रताप
गोपाल मिश्र, माखन मिश्र
[CG PSC(Lib.)2017]
रामाश्वमेध
बाबू रेवाराम
[CGPSC(ARTO)2017]
छत्तीसगढ़ रमायेन
हेमनाथ यदु
छत्तीसगढ़ी रमायन (महाकाव्य)
प्रभंजन शास्त्री
छत्तीसगढ़ी रामायण (काव्य)
पं. सुन्दरलाल शर्मा
छत्तीसगढ़ की रामायण (शोध ग्रंथ)
मन्नुलाल यदु
पंचामृत रमायन
जगन्नाथ प्रसाद भानु
शिलालेख
गीतों का शिलालेख
हरि ठाकुर
[CG PSC(Mains)2023]
गुंजी का शिलालेख
लोचन प्रसाद पाण्डेय
जीवनी/आत्मकथा
आरूग फूल (देवदास जी की जीवनी)
परदेशी राम वर्मा
अगास दिया (खूबचंद बघेल की जीवनी)
सुरता के सोन किरन
लखनलाल गुप्त
गोस्वामी तुलसीदास (जीवनी)
द्वारिका प्रसाद तिवारी
लोचनप्रसाद पाण्डेय (जीवनी)
प्यारेलाल गुप्त
छत्तीसगढ़ के रत्न
हरि ठाकुर
📜 प्रमुख गीत, कविताएँ और ऐतिहासिक रचनाएँ
🎶 छत्तीसगढ़ी के प्रमुख गीत एवं कविताओं के रचनाकार
रचना
रचनाकार
संबंधित परीक्षा (PYQ)
गंवई के गीत
विमल कुमार पाठक
[CG PSC(Mains)2016]
छत्तीसगढ़ी गीत अऊ कविता
हरि ठाकुर
[CG PSC(Mains)2012]
छत्तीसगढ़ सुराज गीत
गिरिवर दास वैष्णव
[CG Vyapam(SAAF)2021]
सुराज गीत, फागुन गीत, डबकत गीत
द्वारिका प्रसाद तिवारी
[CG Vyapam(DCAG)2018]
बियासी के नागर गीत
कुंज बिहारी चौबे
[CG Vyapam(VPR)2021][CG PSC(Mains. M)2012]
अरपा पैरी के धार
नरेन्द्र देव वर्मा
[CG PSC(SEE)2017]
छत्तीसगढ़ी गीतमाला
विद्याभूषण मिश्र
दुनिया अठवारी बजार रे
नरेन्द्र देव वर्मा
[CG PSC(Mains. M)2012]
धमनी हाट
द्वारिका प्रसाद तिवारी
[CG PSC(Mains)2012]
घानी मूनी घोर दे
रविशंकर शुक्ल
[CG PSC(Mains)2022]
छत्तीसगढ़ गीत
रामेश्वर वैष्णव
छत्तीसगढ़ी जागरण गीत
रामेश्वर वैष्णव
गीतों का शिलालेख
हरि ठाकुर
[CG PSC(Mains)2023]
🌾 धान नाम से संबंधित रचनाएँ
धान का कटोरा (पत्रिका): डॉ. विनय कुमार पाठक [CG PSC(Mains)2012]
धान के कटोरा (काव्य): हरि ठाकुर
कहां बिलागे मोर धान के कटोरा: केयूर भूषण
धान की आत्मकथा: कपिलनाथ कश्यप
धान लुआई: प्यारेलाल गुप्त
🌳 बस्तर नाम से संबंधित रचनाएँ
बस्तर के संस्कृति एवं इतिहास: लाला जगदलपुरी (इसमें हल्बी एवं भतरी शब्दों का प्रयोग है)
बस्तर का इतिहास: लालकालीन्द्र सिंह
आदिवासी बस्तर का वृहद् इतिहास: हीरालाल शुक्ल [CG PSC(Mains)2019]
नागवंश का इतिहास: लाल प्रद्युमन सिंह
📚 इतिहास नाम से संबंधित रचनाएँ
रचना
रचनाकार
संबंधित परीक्षा (PYQ)
मध्यप्रदेश का इतिहास
रायबहादुर हीरालाल
[CG PSC(IMO)2020][CG PSC(Pre)2020]
आयरलैण्ड का इतिहास
पं. रविशंकर शुक्ल
हालैण्ड की स्वाधीनता का इतिहास
बैरिस्टर छेदीलाल
[CG PSC(ADH)2015]
फ्रांस राज्य क्रांति
प्यारेलाल गुप्त
ग्रीस का सुधार
प्यारेलाल गुप्त
बस्तर का खूनी इतिहास
केदारनाथ ठाकुर
[CG PSC(Mains)2011]
बस्तर का खूनी इतिहास
गनपतलाल साव बिलासपुरी
अष्टराज अम्भोज
धानूलाल श्रीवास्तव
[CG PSC(Pre)2019]
📜 पृष्ठ 11: अध्ययन-आधारित रचनाएँ और लोक साहित्य
📖 अध्ययन नाम से रचनाएँ
रचनाकार
रचना
संबंधित परीक्षा (PYQ)
डॉ. मन्नुलाल यदु
छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियों का भाषा-वैज्ञानिक अध्ययन
[CG PSC(Mains)2016,2018,2019]
डॉ. शंकर शेष
छत्तीसगढ़ी का भाषा-शास्त्रीय अध्ययन (1973)
[CG PSC(Mains)2012,2014]
भालचन्द्र राव तैलंग
छत्तीसगढ़ी, हल्बी, भतरी बोलियों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन (1966)
[CG PSC(Mains)2015,2018]
दयाशंकर शुक्ल
छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य का अध्ययन
[CG PSC(Mains)2012,(SEE)2017,(Pre)2020]
साधना जैन
छत्तीसगढ़ी और खड़ी बोली के व्याकरणों का तुलनात्मक अध्ययन
नंदकिशोर तिवारी
छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन
डॉ. विमल कुमार पाठक
छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन
नोट:“छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन” नामक कृति दो अलग-अलग लेखकों – नंदकिशोर तिवारी और डॉ. विमल कुमार पाठक – द्वारा लिखी गई है।
** folk-literature लोक साहित्य से संबंधित**
शकुन्तला वर्मा:“छत्तीसगढ़ी लोक जीवन और लोक साहित्य” का अध्ययन
दयाशंकर शुक्ल:“छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य” का अध्ययन [CGPSC(Pre)2020,(Mains)2012,(SEE)2017]
त्रिलोचन पाण्डेय:लोकसाहित्य का अध्ययन
गंगा प्रसाद गुप्त:छत्तीसगढ़ का साहित्य और उसके साहित्यकार
🖋️ साहित्यकार और उनकी प्रथम रचना
साहित्यकार
प्रथम रचना
संबंधित परीक्षा (PYQ)
जगन्नाथ प्रसाद भानु
छंद प्रभाकर (1893-94)
[CG PSC (Pre)2020]
लोचनप्रसाद पाण्डेय
कविता कुसुम माला (1909), यह छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली प्रकाशित कविता संग्रह है
[CG Vyapam(VPR)2021]
प्यारेलाल गुप्त
लाल बैरागिन
पदुमलाल-पुन्नालाल बक्शी
तारिणी
मुकुटधर पाण्डेय
प्रार्थना पंचक
बलदेव प्रसाद मिश्र
मदन महल
द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’
कुछु काहीं (1934)
गजानंद माधव मुक्तिबोध
चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964)
देवी प्रसाद वर्मा (बच्चू जांजगीरी)
मड़ैया गाती है
हरि ठाकुर
भौहें
आनंदी सहाय शुक्ल
जय लोकतंत्र
प्रमोद वर्मा
साहित्य रूप
श्रीकांत वर्मा
बोलो उनके पद चिन्हों की धूल उठाने कौन चलेगा
गुलशेर अहमद खां ‘शानी’
भावुक
शिवशंकर शुक्ल
दियना के अंजोर
सुन्दरलाल शर्मा
राजीव क्षेत्र महात्म्य (1898)
निरूपमा शर्मा
पतरेंगी (1968)
📜 हीरालाल नाम के रचनाकार
✒️ हीरालाल काव्योपाध्याय
🏆 उपाधि:
छत्तीसगढ़ के प्रथम व्याकरणाकार
छत्तीसगढ़ के पाणिनी [CG PSC(CMO P-2)2010]
🏡 निवासी: धमतरी
📘 पुस्तक:छत्तीसगढ़ी बोली का व्याकरण [CG PSC(Mains)2023]
⏳ लेखन वर्ष: 1885 [CGVyapam(AGDO)2021]
📜 प्रकाशन वर्ष: 1890, ‘ए ग्रामर ऑफ छत्तीसगढ़ी डायलेक्ट’ [CG PSC(ACF)2016]
📑 पुनः प्रकाशन:
‘ए ग्रामर ऑफ द डायलेक्ट ऑफ छत्तीसगढ़ इन द सेन्ट्रल प्राविन्सेंस’ – डॉ. ग्रियर्सन
1921- ‘ए ग्रामर ऑफ द छत्तीसगढ़ी डायलेक्ट ऑफ ईस्टर्न, हिन्दी’ – लोचन प्रसाद पाण्डेय [CGVyapam(VAPR)2021]
👤 अनुवादक: छत्तीसगढ़ी व्याकरण का अंग्रेजी में अनुवाद डॉ. ग्रियर्सन ने 1890 में किया और इसे ‘जर्नल ऑफ एशियाटिक सोसायटीज ऑफ बंगाल’ के अंक में प्रकाशित कराया। [CG PSC(ACF)2016]
🗓️ जीवन: जन्म – 1856, मृत्यु – 1890
📚 रचनाएँ: शालागीत चन्द्रिका (1881), दुर्गायन, गीतरसिक, बालोपयोगी गीत
✒️ डॉ. हीरालाल शुक्ल
📘 कृति:आदिवासी बस्तर का वृहद् इतिहास (सात खण्डों में) [CG PSC(Mains)2019]
प्रथम खण्ड: रामायण का पुरातत्व
द्वितीय खण्ड: ऐतिहासिक समारंभ और बस्तर के नल
तृतीय खण्ड: चक्रकोट का छिंदक नाग (760 ई. – 1324 ई.)
चतुर्थ खण्ड: बस्तर के चालुक्य और गिरिजन
पंचम खण्ड: आधुनिक बस्तर : परतंत्रता और प्रतिकार
षष्ठम खण्ड: समकालीन बस्तर (1947 – 2005)
सप्तम खण्ड: मौखिक इतिहास और आदिवासी कविता
अन्य रचनाएँ:
आदिवासी संस्कृति, संगीत एवं नृत्य
प्राचीन बस्तर अर्थात् दण्डकारण्य का सांस्कृतिक इतिहास
आदिवासी संगीत [CG PSC(Pre)2023]
आदिवासी भाषा विज्ञान
रामकथा (हल्बी, गोंडी, माड़िया, मुड़िया)
छत्तीसगढ़ का जनजातीय इतिहास।
✒️ रायबहादुर हीरालाल
📚 रचनाएँ:
मध्यप्रदेश का इतिहास [CG PSC(IMO)2020]
मध्यप्रांत और बरार का शिलालेख
एथनोग्राफिक नोट्स
ट्राइबस् एण्ड कास्ट ऑफ दी सेन्ट्रल प्राविसेंस ऑफ इंडिया
एपिग्राफिया इंडिका
इन्सक्रिप्सन इन द सेन्ट्रल प्राविसेंस
📜 पृष्ठ 13: राजभाषा आयोग से जुड़े व्यक्तित्व
श्यामलाल चतुर्वेदी
जन्म: 1926
विशेष: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे।
सम्मान: 2018 में पद्मश्री से सम्मानित।
रचनाएँ:
बेटी के बिदा [CG PSC(ADJ)2019]
भोलवा भोलाराम बनिस (कहानी) [CG PSC(Mains)2012]
पर्राभर लाई (काव्य संग्रह) [CG PSC(Mains M.)2012,(Pre)2011(AP)2009][CG Vyapam(SI Mains)2023]
मया के मोटरी [CG Vyapam(MFA-1)2023]
सतवंतिन सुकवारा (कहानी) [CG PSC(Mains)2013]
जब आईस बादर करिया
राम बनवास (खण्डकाव्य) [CG PSC(Mains)2012, 2015, 2022]
ऊंकर अगोरा मा
मैथिली परिणय
दानेश्वर शर्मा
जन्म: 1931
रचनाएँ:
बेटी के बिदा (छत्तीसगढ़ी गीत) [CG Vyapam(SI Mains)2023][CG PSC(CMO)2010]
लव-कुश (खण्डकाव्य)
उखरे बर सन्मान
हर मौसम छंद लिखूंगा (काव्य संग्रह)
गीत-अगीत
छत्तीसगढ़ के लोकगीत
मड़ई
तपत कुरू भई तपत कुरू (काव्य संग्रह)
नोट: दानेश्वर शर्मा की कृति “बेटी के बिदा” उनके काव्य संग्रह ‘तपत कुरू भई तपत कुरू’ से है, जबकि श्यामलाल चतुर्वेदी की इसी नाम की रचना उनके काव्य संग्रह ‘पर्राभर लाई’ में संकलित है।
लोक व्यवहार एवं कार्यालयीन छत्तीसगढ़ी [CG PSC(Mains)2023]
पं. मुकुटधर पाण्डेय की साहित्य संगीत साधना (डॉ. विनय कुमार पाठक एवं डॉ. कावेरी दाभड़कर द्वारा) [CG PSC(ACF)2017]
नोट: इन्होंने ‘युगधर्म’ में ‘गुड़ी के गोठ-बात’ का स्तंभ लेखन भी किया है। [CG PSC(ADPRO)2019]
सुरेन्द्र दुबे (हास्य कवि)
जन्म: 1953
सम्मान: 2010 में पद्मश्री पुरस्कार।
विशेष: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम सचिव।
रचनाएँ:
मोर पंड़वा गंवागे (कविता)
सवाल ही सवाल है
पीरा (नाटक)
नवा सुरूज
दो पांव का आदमी
किस-किस पर कविता लिखूं
मिथक मंचन
नुक्कड़ नाटक संग्रह
📜 “पाण्डेय” उपनाम वाले साहित्यकार
लोचन प्रसाद पाण्डेय
जन्म: जनवरी 1887, बालपुर (सक्ती)
विशेष: छत्तीसगढ़ के प्रथम नाट्यकार [CG Vyapam(ITI, HW)2023]
रचनाएँ:
कविता कुसुम माला (प्रथम कविता, 1909) [CG Vyapam(VPR)2021]
कलिकाल (छत्तीसगढ़ी का प्रथम नाटक, 1905) [CG PSC(Mains)2016]
दो मित्र (उपन्यास)
भूतहा मण्डल
मृगी दुखमोचन [CG PSC(Mains)2015]
बाल विनोद, नीतिमाला, किरारी का काष्ठ स्तम्भ (निबंध), गुंजी का शिलालेख (निबंध), रघुवंश सार, कौशल कौमुदी, पद्य पुष्पांजलि, माधव मंजरी, मेवाड़ गाथा, नीति कविता
संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद: 1. भर्तृहरि नीति शतक 2. रघुवंश
ए ग्रामर ऑफ द छत्तीसगढ़ी डायलॅक्ट ऑफ ईस्टर्न, हिंदी (1921) (यह जार्ज ग्रियर्सन द्वारा 1890 में प्रकाशित व्याकरण का संशोधित संस्करण है) [CGVyapam(VAPR)2021]
नोट: पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय जी को छत्तीसगढ़ के पुरातत्ववेत्ता और छत्तीसगढ़ी गद्य के संस्थापक साहित्यकार के रूप में भी जाना जाता है। [CG Vyapam(FNDM)2019]
मुकुटधर पाण्डेय
जन्म: सितम्बर 1895
सम्मान: पद्मश्री 1976 (छत्तीसगढ़ के प्रथम पद्मश्री प्राप्तकर्ता)
विशेष: छायावाद के जनक [CG Vyapam(ECH)2017] [CG PSC(Mains)2019]
रचनाएँ:
कुररी के प्रति (छायावाद की प्रथम कविता) [CG PSC(ABEO)2013, (Pre)2013]
मोर कहां गवां गे गाँव, अँचरा के छाँव, दार, भात चुरगे
📜 “तिवारी” उपनाम से जुड़े साहित्यकार
साहित्यकार
जन्म
रचनाएँ और प्रमुख कार्य
संबंधित परीक्षा (PYQ)
राजेन्द्र तिवारी
–
भूईया के पाकिस चून्दी
[CG PSC(ADH)2014]
रामदयाल तिवारी (छ.ग. के विद्यासागर)
जुलाई 1892
गांधी मीमांसा, गांधीज्म एक्सरेड, कानफ्लिक्ट ऑफ कल्चर, हमारे नेता व स्वराज्य प्रश्नोत्तरी (बाल साहित्य)
[CG PSC(ADVHS)2013]
नंद किशोर तिवारी
1941
परेमा (एकांकी), लोकाक्षर (छत्तीसगढ़ी त्रैमासिक पत्रिका), छत्तीसगढ़ी साहित्य का ऐतिहासिक अध्ययन, छत्तीसगढ़ी साहित्य की दशा एवं दिशा, तीन कथा (नाटक)
[CG PSC(Mains)2012]
द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’
जुलाई 1908
राम अउ केंवट संवाद [CG PSC(Mains)2016], धमनी हाट (कविता) [CG PSC(CMO)2019,(Mains)2012][CG Vyapam(LOI)2023], कुछु-कांही (प्रथम रचना 1934), गाँधी गीत, फागुन गीत, सुराज गीत (1958), योजना गीत, डबकत गीत, लेड़गा लइका, शिव स्तुति, क्रांति प्रवेश, गोस्वामी तुलसीदास (जीवनी), बुड़ती बेरा
डॉ. शंकर शेष
अक्टूबर 1933
भाषा-शास्त्रीय अध्ययन: छत्तीसगढ़ी का भाषा-शास्त्रीय अध्ययन [CG PSC(Mains)2012, 2014]। नाटक: घरौंदा (इस पर फिल्म बन चुकी है) [CG PSC(Lib.)2019], दूरियाँ, रक्तबीज, बाढ़ का पानी, कालजयी, फंदी। उपन्यास: गांधारी, धर्मक्षेत्र–कुरूक्षेत्र
संजीव तिवारी
–
छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्यकार, बियंग के रंग (छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह), गुरतुर गोठ (पत्रिका)
📜 “शर्मा” उपनाम के यशस्वी साहित्यकार
साहित्यकार
जन्म और उपाधि
रचनाएँ
संबंधित परीक्षा (PYQ)
पं. सुन्दरलाल शर्मा
1881, छत्तीसगढ़ी काव्य के भारतेन्दु, प्रबंध काव्य के जनक, छ.ग. के गांधी
खण्ड काव्य: छत्तीसगढ़ी दानलीला, कंस वध [CG Vyapam(DCAG)2018,(VAPR)2021,(SI Mains)2023][CG PSC(Mains),(MI)2014]। पत्रिका: रायपुर जेल पत्रिका (1922), दुलरवा पत्रिका, श्री राजीव प्रेम पियुष पत्रिका (1898)। काव्य: करुणा पच्चीसी, छत्तीसगढ़ी रामायण। उपन्यास: श्रीकृष्ण जन्म आख्यान, सच्चा सरदार। नाटक: प्रहलाद चरित्र, ध्रुव चरित्र [CG Vyapam(DCAG)2018], सीता परिणय, पार्वती परिणय, विक्रम शशिकला। कहानी: दुखिया गरीब किसान। अन्य: काव्यामृत वर्षिणी, सतनामी भजनमाला
डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा
अप्रैल 1928
कहानी: सुसक झन कुररी सुरता ले, तिरिया जनम झनि देय [CG PSC(ACF)2016,(Mains)2013, 2015]। अन्य: सूरुज साखी हे, छत्तीसगढ़ परिदर्शन, सांसों का दस्तक (उपन्यास), छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परम्परा, छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहार, नमोस्तुते महामाये, प्रबंध पाटल। नोट: ‘गुड़ी के गोठ’ नाम से नवभारत में साप्ताहिक कॉलम लिखते थे।
कृष्ण कुमार शर्मा
–
छेरछेरा (छत्तीसगढ़ी उपन्यास)
[CG PSC(AAD & SO)2018]
शंभुलाल शर्मा
–
बादर के मांदर, नोनी बर फूल
अरुणकुमार शर्मा
–
मान के साथ
डॉ. सुधीर शर्मा
–
‘साहित्य वैभव’ पत्रिका का संपादन, ‘छत्तीसगढ़ दर्शन’, ‘शोध प्रकल्प (शोध पत्रिका)
📜 “वैष्णव” उपनाम वाले कलम के धनी
नरसिंह दास वैष्णव (प्रथम कवि)
रचनाएँ:
शिवायन (1904) [CG PSC(Mains)2018]
नरसिंह चौंतीसा
जानकी माई हित विनय
नोट: ये जन्मांध भक्ति कवि थे। [CG PSC(Mains)2014]
हरिहर वैष्णव
जन्म: जनवरी, 1955
रचनाएँ:
धनकुल (बस्तर के लोक महाकाव्य)
बस्तर के तीज त्यौहार
लछमी जगार, तीजा जगार
बस्तर की लोक कथाएँ, बस्तर की गीत कथाएँ
बस्तर का आदिवासी एवं लोक संगीत, बस्तर की आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्प परम्परा
मोह भंग (कहानी संग्रह)
छत्तीसगढ़ का लोक साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक एवं मिथक कथाएँ
गिरिवर दास वैष्णव
रचनाएँ:
“छत्तीसगढ़ सुराज” गीत (इसका अन्य नाम ‘छत्तीसगढ़ दर्पण’ भी है, जिसे 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में वितरित किया गया था) [CG Vyapam(SAAF)2021,(Lab Tech.)2024][CG PSC(Mains)2012]
बुढ़वा बिहाव
पुरवजों के पराक्रम
मजदूरन के मरना
पण्डित के पाखण्ड
रामेश्वर वैष्णव
जन्म: फरवरी, 1946
रचनाएँ:
नोनी बेंदरी (छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह)
बाल्टी भर आंसू (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
छत्तीसगढ़ महतारी के महिमा (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह) [CG PSC(Pre)2012]
छत्तीसगढ़ी गीत, छत्तीसगढ़ी जागरण गीत
पत्थर की बस्तियाँ, अस्पताल बीमार हे
📜 कपिलनाथ और यदु उपनाम के साहित्यकार
✒️ कपिलनाथ जी नाम से संबंधित
कपिलनाथ कश्यप
उपाधि: “छत्तीसगढ़ के भागीरथ कवि” के रूप में प्रसिद्ध।
जन्म: मार्च, 1906
प्रमुख रचनाएँ:
महाकाव्य: श्री राम कथा, श्री कृष्ण कथा, श्री महाभारत कथा [CG PSC(Mains)2022]
नाटक: गुराँवट बिहाव, अंधियारी रात, नावा बिहान (छत्तीसगढ़ी नाटक)
काव्य: गजरा, निसैनी, अब तो जागौ रे
खण्डकाव्य: सीता की अग्नि परीक्षा
कहानी: डहर के फूल, डहर के कांटा
अन्य: धान की आत्मकथा, श्रीमद्भागवत गीता (छत्तीसगढ़ी काव्य में अनुवाद)
नोट: ‘प्रणयन’ का अर्थ है रचना को पूरा करने वाला। कपिलनाथ कश्यप जी को श्रीराम कथा, श्री कृष्ण कथा, और श्री महाभारत कथा का प्रणेता माना जाता है। [CG PSC(Pre)2012] इनके द्वारा रामचरित मानस का छत्तीसगढ़ी भाषा में भी अनुवाद किया गया।
कपिलनाथ मिश्र
रचनाएँ:
खुसरा चिरई के बिहाव [CG PSC(Mains)2015, 2023]
समधी के फजीता
✒️ यदु जी नाम से संबंधित
हेमनाथ यदु
जन्म: 1924
रचनाएँ:
छत्तीसगढ़ रमायेन (किष्किंधा काण्ड)
सोन चिरड्या, अरण्य काण्ड, सुंदर काण्ड, परबतिया
बनिहार, छत्तीसगढ़ अऊ छत्तीसगढ़िया, छत्तीसगढ़ के माटी, चंदा-चंदैनी
जीवन यदु
रचनाएँ:
अइसनेच रात पहाही, अनकहा है जो तुम्हारा, झील के मुक्ति के लिए, लोक स्वपन में लिलिहंसा
डॉ. हेमु यदु
रचना: छत्तीसगढ़ पर्यटन में रामवनगमन पथ
डॉ. मन्नूलाल यदु
रचनाएँ:
छत्तीसगढ़ी कहावत कोश
छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियों का भाषा-वैज्ञानिक अध्ययन [CG PSC(Mains)2016]
छत्तीसगढ़ की रामायण (शोध-ग्रंथ), छत्तीसगढ़ की रामायण दंडकारण्य काण्ड, छत्तीसगढ़ की रामायण बाल-काण्ड, राम वनगमन
📜 पृष्ठ 20: “शुक्ल” उपनाम के रचनाकार
विनोद कुमार शुक्ल
सम्मान: प्रथम सुंदरलाल शर्मा पुरस्कार प्राप्तकर्ता (2000), 2023 में पेन अमेरिका व्लादिमीर नाबाकोव अवॉर्ड से सम्मानित।
जन्म: जनवरी, 1937
रचनाएँ:
पेड़ पर कमरा
हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी
दीवार में एक खिड़की रहती थी (उपन्यास, साहित्य अकादमी पुरस्कार) [CG PSC(Pre)2014],[CG PSC(Pre)2013]
वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह
नौकर की कमीज [CG Vyapam(FDFG)2024][CG PSC(Pre)2014, (YWO)2018, (Engg. G-2)2015]
लगभग जयहिन्द [CG Vyapam(FDFG)2024]
खिलेगा तो देखेंगे [CG Vyapam(FDFG)2024][CG PSC(Pre)2014]
कविता से लंबी कविता
बौना पहाड़ [CG Vyapam(FDFG)2024]
आकाश धरती को खट्खटाता है।
सब कुछ होना बचा रहेगा
शिवशंकर शुक्ल
विशेष: छत्तीसगढ़ के प्रथम उपन्यासकार।
रचनाएँ:
दियना के अंजोर (उपन्यास): कुछ विद्वानों के अनुसार यह प्रथम छत्तीसगढ़ी उपन्यास है। [CG PSC(TSI)2024, (Pre)2016,(APE)2016,(ADJ)2019][CGVyapam(Chemist)2016]
मोंगरा (छत्तीसगढ़ी उपन्यास): [CG PSC(Reg.) 2017,(ADR)2019][CG Vyapam(VPR)2021] नोट: मोंगरा का हिन्दी में अनुवाद नरेन्द्रदेव वर्मा द्वारा किया गया है।
मीरा
डोकरी के कहिनी (बाल कहानियाँ)
दमांद बाबू दुलरू
रधिया (कहानी)
सुहागी (उपन्यास)
दयाशंकर शुक्ल
रचना: छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य का अध्ययन [CG PSC(SEE)2017] [CG PSC(Mains)2012]
बृजलाल शुक्ल
रचनाएँ: बेटी बिदा, किसन कन्हैया, सुकुवा (डॉ. विनय कुमार पाठक पर केन्द्रित खण्ड काव्य), चंदा उए अकास म, सबरी सत्कार
आनंदी सहाय शुक्ल
रचनाएँ: जय लोकतंत्र (पहली रचना), नथनी हाट बिकानी, उधो गीत
“तानों की भट्टी में तपा आदमी राख नहीं सोना बनता है”
आरूग फूल (श्री देवदास बंजारे की जीवनी) [CG PSC(Mains)2013]
अगास दिया (पत्रिका) (डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी)
माटी पुत्र (कहानी संग्रह), प्रस्थान (उपन्यास), सुतक (उपन्यास), बुधिया की तीन रातें (कहानी संग्रह)
थप्पड़, दिन-प्रतिदिन, औरत खेत नहीं (कहानी संग्रह), जतन (छत्तीसगढ़ कथा संग्रह)
श्रीकांत वर्मा (बिलासपुर)
जन्म: सितंबर, 1931
✍️ प्रमुख रचनाएँ 📚 विधा 📝 रचनाएँ 📚 विधा 📝 रचनाएँ ✒️ काव्य/कविता झाड़ी (1964), भटका मेघ (1957) 📖 उपन्यास दूसरी बार, जिरह 🎭 नाटक संवाद, जिरह 🏠 घर जलसा घर (1973) 🌍 यात्रा वृतांत अपोलो का रथ 📗 विविध मगध (साहित्य अकादमी पुरस्कार), फैसले का दिन, माया दर्पण, गरुड़ किसने देखा है
डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा (बिलासपुर)
उपाधि: कातिब रायपुरी
जन्म: नवंबर, 1939
रचनाएँ:
छत्तीसगढ़ी भाषा का उद्विकास [CG Vyapam(VFM)2021][CG PSC(Mains)2023]
अपूर्वा (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
सुबह की तलाश (उपन्यास) [CG Vyapam(SI)2022] (महासिंह चन्द्राकर के सोनहा बिहान का हिन्दी रूपांतरण)
खेत ला बिसार झन, ढोला मारू, मोला गुरू बनई लेते (छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध प्रहसन)
विवेक ज्योति पत्रिका का संपादन, छत्तीसगढ़ी गीतगुच्छ
अरपा पैरी के धार: इस गीत को राज्य सरकार द्वारा नवम्बर 2019 में छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत घोषित किया गया। [CG PSC(SEE)2017, (Pre)2019,(ACF)2021]
दुनिया अठवारी बजार रे (कविता) [CG PSC(Mains. M)2012]
मोंगरा (शिवशंकर शुक्ल के उपन्यास का हिन्दी में अनुवाद)
श्री माँ की वाणी, श्री राम की वाणी, श्री कृष्ण की वाणी, श्री बुद्ध की वाणी
नरेन्द्र वर्मा
रचनाएँ:
थरहा (छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों की प्रकाशित पुस्तकों की सूची)
आनी-बानी के गोठ, तब अउ अब, आज के गोठ
📜 वर्मा और साहू वंश के लेखक
देवी प्रसाद वर्मा (‘बच्चू जांजगीरी’)
जन्म: जुलाई 1927
रचनाएँ:
मड़ैया गाती है (पहला कविता संग्रह), बस्तर की वीरांगना, रास्ता काटती बिल्ली
संपादन: माधवराव सप्रे की कहानियाँ, माधवराव सप्रे की निबंधावली, लोचन प्रसाद पाण्डेय के निबंध
अन्य: माधवराव सप्रे – इतिहास चिंतन, मस्तों का मसीहा (जीवनी), थमा हुआ जल, मेरे प्रिय गीत, तस्वीर के टुकड़े (उपन्यास), इमामबाड़ा (कहानी), किसको कितना याद करूं (संस्मरण)
प्रमोद वर्मा
जन्म: जून 1929
रचनाएँ:
साहित्य रूप (1971), अंग्रेजी की स्वच्छंद कविता, हलफनामा, कालजयी मुक्तिबोध, कदाचित संदर्शन
लिखित: 1703 ई. में, मैथिली पण्डित, भगवान मिश्र द्वारा लिखित।
स्थापित: दंतेश्वरी मंदिर
विशेष: दंतेवाड़ा से प्राप्त संवत 1760 का यह शिलालेख राजा दिग्पाल देव से संबंधित है और इसमें छत्तीसगढ़ी मिश्रित गद्य का प्रयोग हुआ है। [CG Vyapam(VPR)2021]
📜 पृष्ठ 26: राजनांदगांव त्रिवेणी परिषर के साहित्यकार
गजानन माधव मुक्तिबोध
जन्म: नवंबर, 1917
रचनाएँ:
चाँद का मुँह टेढ़ा है (प्रथम कविता संग्रह): [CG Vyapam(FNDM)2019]
अंधेरे में (अंतिम कविता)
ब्रम्ह राक्षस
भूरी-भूरी खाक धूल
कामायनी एक पुनर्विचार
काठ का सपना
एक साहित्यिक डायरी
सतह से उठता आदमी
तार सप्तक (1943)
मुक्तिबोध रचनावली (छः खण्डों में)
नए साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र
नोट: इनके लेखन में मार्क्सवादी दर्शन की व्याख्या प्रमुखता से मिलती है। [CG Vyapam(TET)2017]
उपन्यास: भोला, वे दिन, कथा चक्र: [CG PSC(Mains)2016]
कहानी: कनक रेखा, मंजरी, त्रिवेणी, पंचपात्र
नाटक: प्रायश्चित, भोला, त्रिपथगा
कविता संग्रह: अश्रुदल, ग्राम गौरव, शतदल
नोट: इनकी पहली कहानी ‘तारिणी’, जबलपुर की ‘हितकारणी’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। इनके नाम पर प्रदेश सरकार द्वारा शोध पीठ स्थापित है और इन्हें “साहित्य वाचस्पति” की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
“कुछ लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल देते हैं, कुछ लोग अपने एक फैसले से पूरी दुनिया बदल देते हैं”
📜 विविध रचनाकार और उनकी कृतियाँ
रचनाकार
जन्म / विशेषता
रचनाएँ
संबंधित परीक्षा (PYQ)
केयूर भूषण
मार्च, 1928, प्रथम रविशंकर शुक्ल पुरस्कार प्राप्तकर्ता
सोना कैना, कालू भगत (कहानी) [CG PSC(VAS)2021][CG Vyapam(VFM)2021], फुटहा करम, कुल के मरजाद (उपन्यास) [CG Vyapam(SAAF)2018(VPR)2021][CGPSC(Mains)2016], राणी ब्राम्हण की दुर्दशा, लोक लाज (उपन्यास) [CG PSC(VAS)2021], लहर (काव्य) [CG Vyapam(VFM)2021], आंसू म फिले अंचरा (कहानी) [CG PSC(Mains)2012], कहां बिलागे मोर धान के कटोरा (उपन्यास) [CG Vyapam(VFM)2021], समे के बलिहारी, डोंगराही रद्दा, मोर मयारू गाँव
डॉ. खूबचंद बघेल
–
नाटक: करम छंड़हा [CGPSC(Mains)2014][CGVyapam(FCPR)2016], ऊंच-नीच [CG PSC(ADPPO)2013], लेड़गा सुजान [CG PSC(ADPPO)2013], बेटवा बिहाव [CG PSC(ADPPO)2013], जनरैल सिंह, किसान करलई। नोट: ‘कथा कन्थली’ इनके अप्रकाशित ग्रंथों का संग्रह है।
हृदय सिंह चौहान
–
फुटहा करम
[CG PSC(Mains)2022][CG Vyapam(VPR)2021]
संजीव बख्शी
–
भूलन कान्दा (उपन्यास, इसी पर ‘भूलन द मेज’ फिल्म बनी है)
[CG Vyapam(FCPR)2016(FI)2022, (MFA-2)2023]
गोविंदराम विठ्ठल
–
छत्तीसगढ़ी नागलीला (1924)
[CGPSC(Pre)2012]
कुंज बिहारी चौबे
जन्म 1916
बियासी के नागर (गीत) [CG Vyapam(VPR)2021][CG PSC(Mains)2012], गांधी गौरा, चल मोर मईयाँ, बियासी गीत, मैं पापों का शुचिगान किया करता हूँ
डॉ. श्रीधर व्यंकटेश केतकर
–
गोंडवानातील प्रियंवदा (उपन्यास), ब्राह्मण कन्या (उपन्यास)
[CG Vyapam(RBOS)2017]
अमृतलाल दुबे
–
तुलसी के बिरवा जगाय
[CG Vyapam(PRIA)2018][CG Vyapam(LOI) 2018]
पं. मलिक राम त्रिवेदी
–
रामराज्य (नाटक), प्रबोध चन्द्रोध
[CG PSC(Pre)2016]
📜 विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध साहित्यकार
नारायण लाल परमार
जन्म: जनवरी, 1927, मूलतः गुजरात से।
विशेषता: छत्तीसगढ़ के बाल साहित्यकार [CG PSC(EAP)2016]
रचनाएँ:
सुरूज नइ मरै [CG PSC(Mains)2021]
कांवर भर धूप
विस्मय का वृंदावन
सोन के माली (दि प्लेट ऑफ गोल्ड का छत्तीसगढ़ी अनुवाद)
अक्ल बड़ी या भैंस, मतवार अउ दूसर एकांकी, खोखले शब्दों के खिलाफ
उपन्यास: 1. पूजामयी 2. प्यार की लाज 3. छलना
टिकेन्द्र टिकरिया
रचनाएँ:
साहूकार ले छुटकारा
गवइहां (नाटक), नवा बिहान (नाटक), देवार डेरा (नाटक) [CG Vyapam(Lab Tech.)2024]
नाक में चूना, पितर पिंड, संउत के डर
भगवती सेन
जन्म: मई 1930
रचनाएँ: नदिया मरे पियास, दही के भोरहा म, नया खून, देख रे आंखी, सुन रे कान [CG PSC(Mains)2021]
बद्री विशाल परमानंद
जन्म: जुलाई, 1917
रचनाएँ: पिंयूरी लिखे तोर भाग, का तैं मोला मोहनी डारे
राजीव रंजन प्रसाद
रचनाएँ:
बस्तरनामा (शोधग्रंथ): 2018 में राहुल सांकृत्यायन पर्यटन पुरस्कार से सम्मानित। [CG Vyapam(FNDM)2019]
लाल अंधेरा: [CG PSC(ADJ)2019]
आमचो बस्तर (उपन्यास)
मौन मगध (इन्दिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार 2014)
बस्तर के जननायक, ढोलकल (उपन्यास), बस्तर 1857 (उपन्यास), अश्वत्थामा
मानक छत्तीसगढ़ी व्याकरण, छत्तीसगढ़ी मुहावरा कोश, वृहद् छत्तीसगढ़ी शब्दकोश, छत्तीसगढ़ी की वर्तनी, छत्तीसगढ़ी कहावतें एवं लोकोक्तियाँ
डॉ. चितरंजन कर
बोलचाल की छत्तीसगढ़ी [CG PSC(Pre)2019], छत्तीसगढ़ी भाषा: स्वरूप और संभावना, छत्तीसगढ़ की भाषाएं, छत्तीसगढ़ी की व्याकरणिक कोटियाँ, छत्तीसगढ़ के अभिलेखों का नाम: वैज्ञानिक अनुशीलन, छत्तीसगढ़ी गजल और मुकुन्द कौशल
प्रभंजन शास्त्री
बिन भांड़ी के अंगना, छत्तीसगढ़ी रामायाण (महाकाव्य), पूजा के नरियर, अंजनी नंदन (खण्डकाव्य), श्रीमद्भागवत गीता का छत्तीसगढ़ी अनुवाद
डॉ. पीसी लाल यादव
पण्डवानी परम्परा एवं प्रयोग (समीक्षा), मोर गांव के कोरा (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह), सुरता के सुतरी (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह), सरग निसेनी
बुधराम यादव
चकमक चिंगारी भरे (छत्तीसगढ़ी दोहा संग्रह), अँचरा के मया
महावीर अग्रवाल
छत्तीसगढ़ी कैसे सीखें (हिन्दी-छत्तीसगढ़ी-अंग्रेजी), छत्तीसगढ़ के लोकनाट्य नाचा, लालबत्ती जल रही है (व्यंग्य संग्रह), साहित्यिक पत्रिका सापेक्ष का 32 वर्षों से संपादन
डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
हरे पेड़ की सूखी टहनी (गीत संग्रह), पुन्नी के चंदा (गीत संग्रह), यादों की मीनार (गजल संग्रह), संपादित कृतियाँ-गुड़ेरिया (काव्य संग्रह), हिंदकी (गजल संग्रह)
मोर गजल के उड़त परेवा (काव्य संग्रह), धर ले गा कुदारी, छत्तीसगढ़ी गजल, हमर भुईया हमर अगास, मया के मुंदरी, केरवंछ
[CGPSC(Mains)2022]
रमेशकुमार सिंह चौहान
छन्द चालीसा (छंद संग्रह), सुरता (काव्य संग्रह)
रमेश नैयर
छत्तीसगढ़ के पंचरत्न, छत्तीसगढ़ के नवरत्न
लक्ष्मण मस्तुरिया
रचनाएँ: 1. छत्तीसगढ़ के माटी (छत्तीसगढ़ दर्शन), 2. माटी कहे कुम्हार से (निबंध संग्रह), 3. मोर संग चलव रे (गीत), 4. गंवई गंगा (गीत संग्रह) [CG PSC(ACF)2016], 5. सोनाखान के आगी, 6. मैं छत्तीसगढ़िया आँव रे, 7. हमू बेटा भुईयाँ के, धुनही बंसुरिया, गाय न घोरू सुख सोवय सोरू। नोट: ये ‘छत्तीसगढ़ के जनकवि’ के रूप में प्रसिद्ध हैं और IGKV के कुलगीत के रचयिता हैं।
कंचना धुरवा, गुण्डाधुर: बस्तर का जननायक, दस्तक देती छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ का इतिहास
दादूलाल जोशी
आनी-बानी
रघुवर अग्रवाल ‘पथिक’
उजियारा बगरात चल, जले रक्त से दीप, चरगोड़िया
जमुना प्रसाद कसार
झांपी
[CGPSC(Mains)2021]
नरेन्द्र कौशिक अमसेनवी
पानी ले पनियर, बिहान होय के पहली, माटी महक गईस, जांगर बसय गाँव
[CGPSC(Mains)2022]
📜 पृष्ठ 31: छत्तीसगढ़ी साहित्य के विविध रत्न
यह पृष्ठ छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण साहित्यकारों और उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालता है।
साहित्यकार
रचनाएँ
संबंधित परीक्षा (PYQ)
तेजिंदर सिंह गगन
वह मेरा चेहरा, कला पादरी, सीढ़ियों पर चिता, घोड़ा बादल, क्या तुम नहा चुके, हैलो सुजित
सतीश चौबे
रोशन हाथों की दस्तके
रवि श्रीवास्तव
पहाड़ पर चढ़ते पांव (काव्य संग्रह), लालबत्ती का डुबता सूरज (व्यंग्य)
विभु खरे
सही आदमी की तलाश, मेरे साथ यही तो दिक्कत है, मां तुम कविता नहीं हो, तालों में बंद प्रजातंत्र, अपरिभाषित, हवाओं में विद्रोह
[CG PSC(Mains)2023]
गुलशेर अहमद खाँ ‘शानी’
भावुक (पहली कहानी), एक लड़की की डायरी, काला जल, बबुल की छाव, डाली नहीं फूलती, छोटे घेरे का विद्रोह, बिरादरी, नदी और सीपियाँ, साँप और सीढ़ी, सड़क पार करते हुए, शर्त का क्या हुआ ?
अरूण कुमार निगम
छंद के छ, शब्द गठरिया बांध, चैत की चंदनिया
स्वराज्यप्रसाद त्रिवेदी
माधुरी, नव भारत, आलोक, काव्य संग्रह (स्वराज्य गान, अदमी पर रहे न रहे बात रह जाती है), ग्रंथ (भुख, बरसों बाद भी, भाषण के पौधे हरियाये)
दशरथ लाल निषाद ‘विद्रोही’
गमकत मोंगरा, छत्तीसगढ़ के गांधी, छत्तीसगढ़ के बासी, छत्तीसगढ़ के भाजी, छत्तीसगढ़ के मितानी, निषाद संदेश