प्रतिशत: देश के कुल वन का 12.26% हिस्सा छत्तीसगढ़ में है। (भारत सरकार के अनुसार 7.71%)
सर्वाधिक वन क्षेत्रफल एवं प्रतिशत: बीजापुर जिला।
न्यूनतम वन क्षेत्रफल एवं प्रतिशत: बेमेतरा जिला।
प्रदेश में वनों का कुल क्षेत्रफल:59,820 वर्ग कि.मी. (44.25%)। (स्रोत-आर्थिक सर्वेक्षण 2024-; [CG Vyapam SI (Pre)2023])
प्रशासनिक वर्गीकरण: [CG PSC(Pre)2023]
आरक्षित वन: 25,910 km² (43.31%)
संरक्षित वन: 24,036 km² (40.18%)
अवर्गीकृत वन: 9,874 km² (16.61%)
💡 विगत वर्षों के प्रश्न
प्रश्न: वन-क्षेत्र (Forest Area) की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का भारत में कौन-सा क्रम है?
(उत्तर B) चतुर्थ क्रम [CG PSC(Pre), (ADJ)2019]
प्रश्न: वन-आवरण (Forest Cover) के अंतर्गत राज्य का भारत में क्या क्रम है?
(उत्तर C) तृतीय [CG Vyapam(SGST)2021]
प्रश्न: वनाच्छादित क्षेत्र (Forest Cover) के लिए इस राज्य का क्रम क्या है?
(उत्तर C) तृतीय [CGVyapam(Patwari)2016, (AGDO)2018]
प्रश्न: आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार प्रदेश का वन क्षेत्रफल कितना है?
(उत्तर B) 59,820 वर्ग कि.मी. [CG PSC(Pre)2023]
🔑 मुख्य तथ्य
छत्तीसगढ़, भारत का पहला राज्य है जिसने वन पारिस्थितिकी तंत्र को हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) से जोड़ा है। [CG PSC(Pre) 2024]
वन फसलों की खेती की कला और विज्ञान को सिल्वीकल्चर के नाम से जाना जाता है। [CG PSC(Pre) 2024]
2. भारत सरकार – ISFR(2023) (Indian State Forest Report)
🌲 वन क्षेत्रफल (Forest Area)
आशय: किसी भौगोलिक क्षेत्र के वनावरण और वृक्षावरण के कुल योग को वन क्षेत्रफल कहा जाता है।
वन क्षेत्रफल:59,816 वर्ग किमी. (55812 + 5355)। [CG Vyapam (MFA-1) 2023]
प्रतिशत:44.25%।
क्रम:चौथा क्रम। 1. मध्यप्रदेश (94689), 2. महाराष्ट्र (61952), 3. ओडिशा (61204), 4. छत्तीसगढ़ (59816)।
🌳 वनावरण/वनाच्छादन (Forest Cover)
आशय: एक हेक्टेयर से अधिक और 10% से अधिक वृक्ष छत्र घनत्व वाली भूमि को वनावरण कहते हैं। इसमें उद्यान, बांस और ताड़ भी शामिल हैं।
वन-आवरण:55,812 वर्ग किमी.।
प्रतिशत:41.28%।
क्रम:तीसरा क्रम। 1. मध्यप्रदेश (77073), 2. अरुणाचल प्रदेश (65882), 3. छत्तीसगढ़ (55812)। [CG Vyapam (MSI)2021]
📊 वनावरण का विवरण
🌿 तथ्य
🌍 क्षेत्रफल (km²)
📉 प्रतिशत
🏞️ सर्वाधिक
🏜️ न्यूनतम
🌳 अत्यंत सघन वन
7,416
5.49%
बीजापुर
बेमेतरा
🌲 सामान्य सघन वन
31,983
23.65%
बीजापुर
बेमेतरा
🍂 खुला वन
16,411
12.14%
बीजापुर
बेमेतरा
🌏 कुल वन
55,812
41.28%
बीजापुर
बेमेतरा
🌱 वृक्षावरण (Tree Cover)
आशय: एक हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल और 10% से कम वृक्ष छत्र घनत्व वाली भूमि को वृक्षावरण कहते हैं।
वृक्षावरण:5355 वर्ग किमी.।
प्रतिशत:3.96%।
⭐ विशेष तथ्य
भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17% हिस्सा वन है।
देश के कुल वनावरण का 7.80% हिस्सा छत्तीसगढ़ में मौजूद है। [CG PSC(RDA)2014], [CG PSC (MI)2014]
देश के कुल वन का 7.71% हिस्सा छत्तीसगढ़ में है।
राज्य में प्रति व्यक्ति वन एवं वृक्षावरण 0.232 हेक्टेयर है।
2021 की तुलना में 2023 में राज्य के वनावरण में 683.62 वर्ग किमी. की वृद्धि दर्ज की गई है।
ISFR रिपोर्ट 2021 के अनुसार, बस्तर व कबीरधाम जिले के कुल वन क्षेत्रफल में आंशिक कमी आई है। [CG PSC(ITI Pri)2022]
वन एवं वृक्षावरण में सबसे अधिक वृद्धि दिखाने वाले राज्य: 1. छत्तीसगढ़ (684 वर्ग किमी), 2. उत्तरप्रदेश, 3. ओडिशा।
📂 वनों का वर्गीकरण
छत्तीसगढ़ की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिस कारण यहाँ के वनों में काफी विविधता पाई जाती है। वनों को तीन मुख्य आधारों पर बांटा जा सकता है:
(A) प्रशासनिक आधार
(B) प्रजातीय बहुलता
(C) प्राकृतिक/भौगोलिक आधार
🏛️ (A) प्रशासनिक आधार पर वर्गीकरण
राज्य के वनों को प्रबंधन एवं संरक्षण के दृष्टिकोण से तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:
वर्गीकरण
क्षेत्रफल
प्रतिशत
सर्वाधिक
न्यूनतम
आरक्षित वन
25,910 वर्ग किमी.
43.31 %
दंतेवाड़ा
कोरबा [CG PSC (ADPE&S)
संरक्षित वन
24,036 वर्ग किमी.
40.18 %
सरगुजा
जांजगीर-चांपा [CG Vyapam (AG-3)
अवर्गीकृत वन
9,874 वर्ग किमी.
16.61 %
दंतेवाड़ा
धमतरी [CG PSC(CMO)
1. आरक्षित वन (Reserved Forests):
क्षेत्रफल: 25,910 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 43.31%।
यह प्रशासनिक आधार पर प्रदेश में सबसे बड़ा वन क्षेत्रफल है। [CG Vyapam (SAAF)2021]
छत्तीसगढ़ के सभी राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्य इसी श्रेणी में आते हैं।
इन वनों में पर्यावरण, जैवविविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अनधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित होता है।
2. संरक्षित वन (Protected Forests):
क्षेत्रफल: 24,036 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 40.18%।
इन वनों में स्थानीय निवासियों को सीमित मात्रा में लघु वनोपज इकट्ठा करने, जलाऊ लकड़ी और पशुचारण की अनुमति दी जाती है। [CG PSC (Asst. G-3) 2018]
3. अवर्गीकृत वन (Non Classified Forests):
क्षेत्रफल: 9,874 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 16.61%।
ये नगरों और गांवों से लगे खुले वन होते हैं जो राजस्व विभाग के नियंत्रण में आते हैं।
🌿 (B) प्रजातीय बहुलता के आधार पर वर्गीकरण
राज्य में प्रजातीय बहुलता के अनुसार तीन मुख्य प्रकार के वन पाए जाते हैं।
वनों का अवरोही क्रम: मिश्रित > साल > सागौन > शीशम [CG PSC(ACF)2021]
1. मिश्रित वन (Mixed forests):
क्षेत्रफल: 29,942 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 50.05%।
सर्वाधिक: मैदानी क्षेत्रों में।
विस्तार: दुर्ग, रायपुर, महासमुंद, जशपुर, कोरिया आदि (मध्य छ.ग.)।
विशेषता: यह राज्य के सर्वाधिक क्षेत्र में फैला हुआ वन है। [CG PSC(ADH)2011]
2. साल/सरई वन (Sal/Sarai forests):
क्षेत्रफल: 24,244 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 40.53%। [CG PSC(Pre)2014]
विस्तार: मैकल श्रेणी, महासमुंद, धमतरी, बालोद, उदयपुर और छुरी की पहाड़ी, जशपुर पाट प्रदेश आदि।
विशेषता:
सबसे अच्छी किस्म के साल वन केशकाल घाटी (कोंडागांव) में मिलते हैं।
बस्तर के कोमलनार एवं मगनार क्षेत्र के साल वृक्ष नेपाल के तराई के समान ऊँचे हैं।
साल, पतझड़ वन की श्रेणी में आता है।
यह छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष है। [CG PSC(Ragister)2021]
बस्तर को साल वनों का द्वीप कहा जाता है। [CG Vyapam (SEAT)2023]
3. सागौन वन (Sagwan/Teak forests):
क्षेत्रफल: 5,633 वर्ग किमी.।
प्रतिशत: 9.42%। [CG PSC(Pre)2014]
सर्वाधिक: नारायणपुर।
विस्तार: नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर आदि जिले।
विशेषता:
खुरसेल घाटी में सर्वोत्तम प्रकार की सागौन मिलती है। [CGPSC(ACF)2016]
यहां का सागौन वृक्ष बर्मा के सागौन वृक्ष के समान माना जाता है। [CG Vyapam(FI)2022]
🐾 संरक्षित क्षेत्र का अवलोकन
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय उद्यान (2899 वर्ग कि.मी.), अभ्यारण्य (3770 वर्ग कि.मी.), बायोस्फीयर रिजर्व, टाइगर रिजर्व, हाथी रिजर्व, और अन्य संरक्षित क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल 14086.612 वर्ग कि.मी. है।
यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का 10.41% और राज्य के वन क्षेत्रफल का 23.54% है। [CG Vyapam (ESC)2022]
🌍 (C) प्राकृतिक / भौगोलिक आधार पर वर्गीकरण (Geographical Classification)
देश के वनों का प्राकृतिक वर्गीकरण सबसे पहले 1968 में चैंपियन एवं सेठ द्वारा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “A Revised Survey of The Forest Types of India” में किया गया था। इस वर्गीकरण के अनुसार, प्रदेश में मौजूद 10 प्रजातियों को प्राकृतिक आधार पर दो वर्गों में बांटा गया [CG VS(AG-3)
आधार
उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन
उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
प्रतिशत
47.69 प्रतिशत
51.65 प्रतिशत
विस्तार
100-150 से.मी. वर्षा वाले क्षेत्र
75-100 से.मी. वर्षा वाले क्षेत्र
शामिल वन
साल व सागौन वन
मिश्रित वन
क्षेत्र
उत्तरी एवं दक्षिणी वन वृत्त
मुख्य रूप से महानदी बेसिन
विशेष
यहाँ केवल वनोपज की प्राप्ति होती है।
यहाँ वनोपज और लकड़ी दोनों मिलते हैं।
💡 ध्यान दें:
छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
जशपुर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन और महानदी बेसिन में मिश्रित वन मिलते हैं।
छत्तीसगढ़ में सामान्यतः पतझड़ वन पाए जाते हैं।
🗺️ छत्तीसगढ़ का वनस्पति क्षेत्र (मानचित्र के अनुसार)
साल वन: 40.53%
मिश्रित वन: 50.05%
सागौन वन: 09.42%
🪵 वनोपज के प्रकार
वनों से मिलने वाले संसाधनों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
(A) मुख्य वनोपज
यह वनोपज इमारती लकड़ी (काष्ठ उत्पाद) और जलाऊ लकड़ी के रूप में होती है। देश में कुल 13 मुख्य प्रजातियों को इमारती लकड़ी के रूप में घोषित किया गया है, जिनमें से 6 राष्ट्रीयकृत प्रजातियां छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं।
राष्ट्रीयकृत प्रजातियां:
साल या सरई (Shorea robusta) [CG Vyapam(CROS)2017]
सागौन (Tectona grandis)
साजा (Terminelia tomentosa) [CGPSC(NapTaul)2013]
बीजा (Cpterocarpus marsupium)
खैर (Acacia catechu)
शीशम (Dalbergia sissoo)
अराष्ट्रीयकृत प्रजातियां:
आंवला वृक्ष
तेंदू वृक्ष
कर्रा वृक्ष
महुआ वृक्ष
खैर (Khair) वृक्ष की विशेषताएं:
खैर के वृक्ष से कत्था प्राप्त किया जाता है। [CGPSC(CMO)2019]
सरगुजा की खैरवार जनजाति पारंपरिक रूप से खैर वृक्ष से कत्था निकालने का काम करती है। [CGPSC(Pre)2016]
कत्था निकालने के लिए अम्बिकापुर में सरगुजा वुड प्रोडक्ट नामक इकाई संचालित है। [CGPSC(AP)2019]
(B) लघु एवं गौण वनोपज
लघु वनोपज में बांस, तेंदूपत्ता, इमली, महुआ और चिरौंजी जैसी चीजें शामिल हैं। इनके खरीद मूल्य का निर्धारण अपेक्स समिति द्वारा किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर करते हैं।
राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज:
तेंदूपत्ता
धवड़ा गोंद
कुल्लू गोंद
अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज:
हर्रा बीज
साल बीज
इमली आदि
1. बांस वन (Bamboo Forests): [CG PSC(ABEO)2013]
क्षेत्रफल: 6556 वर्ग किमी.
प्रतिशत: 11 प्रतिशत
विस्तार: राज्य के सीमावर्ती जिलों में
बांस की अन्य विशेषताएं:
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा लाठी बांस (Dendra Culamus Strictus) या नर बांस पाया जाता है। [CG PSC(Pre)2]
सरगुजा संभाग में कटंग बांस भी मिलता है।
छत्तीसगढ़ के वन राजस्व में बांस का 12% और लघु वनोपज राजस्व में 20% हिस्सा है।
बांस को “आदिवासियों का हरा सोना” कहा जाता है, जबकि पत्ते के रूप में हरा सोना तेंदूपत्ता को कहते हैं। [CG PSC(IMO)2]
2. तेंदूपत्ता (Tendu Leaf):
उपनाम: हरा सोना [CG Vyapam(DEAG):
प्रतिशत: देश के कुल तेंदूपत्ता उत्पादन का 17% हिस्सा छत्तीसगढ़ से आता है। [CG PSC(ADVHS) 2013]
प्रमुख क्षेत्र: बस्तर और सरगुजा।
प्रकार: यह एक लघु वनोपज है। [CG PSC(MI)2]
संग्रहण: यह एक राष्ट्रीयकृत उत्पाद है और इसका संग्रहण समर्थन मूल्य पर होता है। [CG PSC(ADI)2016]
MSP: मानक बोरा ₹5500।
मात्रा: एक मानक बोरे में 50,000 तेंदूपत्ता होते हैं (50 पत्तों के 1000 बंडल)। [CG Vyapam(AGDO);
उत्पादन: वर्ष 2024-25 में 15.56 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता का उत्पादन हुआ।
3. रतनजोत (Jatropha) एवं करंज: इन पौधों से बायोडीजल प्राप्त होता है।
4. लाख:
प्राप्ति: लाख का कीट पलाश, बेर और कुसुम के पेड़ों पर पाया जाता है।
स्थान: भारत में छत्तीसगढ़ लाख उत्पादन में दूसरे स्थान पर है (पहला स्थान झारखंड का है)। [CG PSC(Pre)2023] [CG Vyapam(FI)2]
5. महुआ: यह एक बहुउपयोगी वृक्ष है। पत्तों से दोना-पत्तल, फूल से मदिरा और बीज से तेल बनता है। इसका जनजातीय संस्कृति में विशेष महत्व है। [CG PSC(Lib)2]
छत्तीसगढ़ में उत्पादित राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज: [CGPSC(IMO)2]
तेंदूपत्ता
धावड़ा गोंद
कुल्लू गोंद
🌿 छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ
गठन: 31 अक्टूबर 2000 [CG PSC (ADR)2019]
उद्देश्य: लघु वनोपजों के विपणन, संग्रहण, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना तथा आदिवासियों को शोषण से बचाना।
संग्रहण कार्य: प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाता है।
नोट: यह संघ 67 वनोपजों का संग्रहण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करता है।
उद्देश्य: प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और वनौषधियों के विशाल भंडार का संरक्षण और संवर्धन करना।
विशेष पहल:
राज्य में वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 34 वन मण्डलों के लिए कार्य आयोजना को स्वीकृति दी है।
औषधीय पादप बोर्ड द्वारा राज्य में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में 14 हर्बल गार्डन स्थापित किए गए हैं।
इंस्टिट्यूशनल हर्बल गार्डन: Institute of Technology & Sciences, Gariaband Devbhog Road.
स्कूल हर्बल गार्डन (प्रस्तावित): कांकेर, कोंडागांव, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और महासमुंद जिलों के 200 स्कूलों में हर्बल गार्डन स्थापित किए जाएंगे।
वनस्पति विज्ञान सर्वेक्षण के अनुसार, प्रदेश में 159 किस्म के औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
🌿 छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड
पुराना नाम: औषधीय पादप बोर्ड (2020 में नाम बदला गया)।
गठन: 28 जुलाई 2004 (इसका पुनर्गठन 23 अक्टूबर 2020 को किया गया)।
उद्देश्य: औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन, विनाश रहित विदोहन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी नीतियां तैयार करना तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना।
कार्य: UNDP परियोजना के तहत 7 औषधीय पौधा संरक्षित क्षेत्र (MPCA) स्थापित किए गए हैं। ये क्षेत्र बस्तर, धमतरी, खैरागढ़, मरवाही, जशपुर, सरगुजा और दक्षिण कोंडागांव वन मंडलों में स्थित हैं।
विगत वर्षों का प्रश्न:
प्रश्न: यू.एन.डी.पी. परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में कितने औषधीय पौधा संरक्षित क्षेत्र की स्थापना की जा चुकी है? [CG Vyapam (ESC)2017]
(उत्तर A) 7 (नोट: वर्तमान जानकारी के अनुसार सही उत्तर 7 है)।
पूरा नाम: CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority).
उद्देश्य: क्षतिग्रस्त वनों का सुधार करना और पौधों का संरक्षण व संवर्धन करना, जिसे क्षतिपूर्ति वनीकरण कहा जाता है। [CGPSC(Homeo. Lib)
विशेष: इस योजना को वन विभाग द्वारा “परिवर्तन” नाम दिया गया है। इसके तहत वनों का विकास, निर्माण, और पर्यावरण संरक्षण किया जाता है। [CG PSC(IMO)]
शामिल वन मण्डल: इस योजना में 7 वन मण्डल शामिल हैं: केशकाल, धमतरी, कोरबा, कटघोरा, धरमजयगढ़, बलरामपुर और सरगुजा।
📢 प्रचार-प्रसार एवं मार्केटिंग
हर्बल उत्पाद विक्रय केंद्र: इनका संचालन रायपुर रेलवे स्टेशन और स्वामी विवेकानंद विमानतल, रायपुर में किया जा रहा है, जहाँ लगभग 120 प्रकार के हर्बल उत्पाद बेचे जाते हैं।
विगत वर्षों का प्रश्न:
प्रश्न: छत्तीसगढ़ में हर्बल उत्पाद का विक्रय केन्द्र कहाँ स्थापित नहीं किया गया है? [CGPSC(IMO)]
(उत्तर C) जगदलपुर बस स्टैण्ड
📊 वानिकी क्षेत्र का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में भागीदारी का विवरण (स्थिर भाव 2011-12)
सांख्यिकी
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
2024-25
भागीदारी (लाख)
747645
801927
826433
857859
871183
905725
वृद्धि (%)
11.00
7.26
3.06
3.8
1.55
3.96
हिस्सा (%)
3.18
3.37
3.28
3.19
3.04
2.95
नोट: सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वानिकी क्षेत्र का योगदान अस्थिर रहा है (इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया है)।
🏞️ वन्यप्राणी संरक्षित क्षेत्र (Wildlife Protected Area)
वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्र
संख्या
वन क्षेत्र (वर्ग कि.मी. में)
प्रतिशत
1. राष्ट्रीय उद्यान
03
2. टाइगर रिजर्व
04
14086.612
23.55 [CG Vyapam (VAPR)2021]
3. वन्यप्राणी अभ्यारण्य
11
4. बायोस्फीयर रिजर्व
01
5. हाथी रिजर्व
02
6. मगरमच्छ संरक्षण
7. चिड़ियाघर
🐅 राष्ट्रीय उद्यान (National Park)
1. इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Indravati National Park)
स्थापना: 1978 (छत्तीसगढ़ का पहला राष्ट्रीय उद्यान)। [CG PSC (RDA)2014]
जिला: बीजापुर।
क्षेत्रफल: 1258 वर्ग किमी. (कुल क्षेत्रफल 2799 वर्ग किमी.)। [CG PSC (SEE) 2017]
नदी: पार्क के बीच से इंद्रावती नदी बहती है।
वन्य जीव: बाघ (टाइगर)।
गेम सेंचुरी: यहाँ राज्य का एकमात्र कुटरू गेम सेंचुरी स्थित है।
प्रोजेक्ट टाइगर: यह राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है जिसे 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर घोषित किया गया था। [CG PSC (Mains) 2011]
टाइगर रिजर्व: इसे 2009 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला, जो राज्य का पहला टाइगर रिजर्व है। [CG PSC (Nap taul) 2013]
2. गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (Guru Ghasidas National Park)
स्थापना: 1981। [CG PSC (SEE)2017,(Lib.) 2014]
पूर्व नाम: संजय राष्ट्रीय उद्यान।
नाम परिवर्तन: 7 अगस्त 2001।
जिला: कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर व सूरजपुर। [CG Vyapam (Patwari)2019]
क्षेत्रफल: 1440.70 वर्ग किमी. (लगभग 1441 वर्ग किमी.), यह प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। [CG PSC (SEE) 2017]
प्रमुख जीव: नीलगाय, बाघ आदि।
विशेष: इस राष्ट्रीय उद्यान से बनास, गोपद और नेयुर नदियां बहती हैं।
टाइगर रिजर्व (2024): इसे तमोरपिंगला अभ्यारण्य के साथ मिलाकर प्रदेश का चौथा और भारत का 56वां टाइगर रिजर्व बनाया गया है।
3. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park)
स्थापना: 22 जुलाई 1982।
जिला: बस्तर।
क्षेत्रफल: 200 वर्ग किमी., यह प्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है। [CG PSC(Pre
नदी: कांगेर नदी पार्क के बीचों-बीच से बहती है।
प्रमुख जीव: पहाड़ी मैना (राज्य पक्षी), उड़न गिलहरी।
इस उद्यान में भैंसादरहा नामक स्थान पर प्राकृतिक रूप से मगरमच्छ पाए जाते हैं।
यहाँ प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा स्थित है, जिसमें अंधी मछलियां (शंकराईन) मिलती हैं।
जैवविविधता को बढ़ावा देने के लिए यहाँ तितली पार्क स्थापित किया गया है।
इसे 1982-85 में एशिया का प्रथम बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया गया था, लेकिन यह वर्तमान में लागू नहीं है। [CG Vyapam (ADEO)]
📊 राज्य के 3 राष्ट्रीय उद्यानों का सारांश
क्र.
राष्ट्रीय उद्यान
स्थापना
जिला
क्षेत्रफल
विशेष
1.
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान
1978
बीजापुर
1258 वर्ग कि.मी.
छत्तीसगढ़ का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान
2.
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
1981
कोरिया, म.चि.भ., सूरजपुर
1441 वर्ग कि.मी.
राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान
3.
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
1982
बस्तर
200 वर्ग कि.मी.
प्रदेश का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान
🐯 टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve)
आशय: वे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य जिन्हें विशेष रूप से बाघों के संरक्षण के लिए संरक्षित किया जाता है, टाइगर रिजर्व कहलाते हैं।
NTCA रिपोर्ट 2022: इस रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 17 है।
विशेष: भारत का पहला टाइगर रिजर्व 1973 में जिम कॉर्बेट को बनाया गया था।
📊 छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व
नाम
प्रोजेक्ट टाइगर का दर्जा
टाइगर रिजर्व का दर्जा
विशेष
1. इंद्रावती
1983 [CGPSC(VAS)2021]
2009
[CGVyapam (VAPR)2021]
2. उदंती + सीतानदी
2006
2009
[CGPSC(SEE)2017]
3. अचानकमार
2006
2009
[CGPSC(SEE)2017]
4. गुरु घासीदास-तमोरपिंगला
—
2024
सबसे बड़ा (देश का 56वां)
🏞️ वन्यप्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries)
वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में प्रदेश में अभ्यारण्यों की स्थापना की गई है, जो आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। छत्तीसगढ़ में कुल 11 अभ्यारण्य हैं। [CG PSC(RDA)2014]
📊 सभी 11 अभ्यारण्यों का संक्षिप्त विवरण
क्र.
अभ्यारण्य
जिला
स्थापना वर्ष
क्षेत्रफल (वर्ग किमी)
विशेष तथ्य
1.
तमोरपिंगला
सूरजपुर
1978
608
सबसे बड़ा अभ्यारण्य, सर्वाधिक नीलगाय [CG PSC(MI)2014]
2.
सेमरसोत
बलरामपुर
1978
430
[CG PSC(ACF)2017]
3.
बादलखोल
जशपुर
1975
105
सबसे छोटा अभ्यारण्य [CG PSC(Lib)2014]
4.
गोमर्डा
सारंगढ़
1975
278
सर्वाधिक सोनकुत्ता [CG PSC(ARO,APO)2014]
5.
बारनवापारा
बलौदाबाजार
1976
245
सर्वाधिक साँप [CG PSC(ADHIS)2014]
6.
उदन्ती
गरियाबंद
1983
230
सर्वाधिक वनभैंसा एवं मोर [CG PSC(SEE)2016]
7.
सीतानदी
धमतरी
1974
559
प्रदेश का सबसे प्राचीन अभ्यारण्य, सर्वाधिक तेंदुआ [CG PSC(ACF)2017]
8.
अचानकमार
मुंगेली
1975
552
सर्वाधिक बाघ [CG PSC(Lib&SO)2019]
9.
भोरमदेव
कवर्धा
2001
352
प्रदेश का नवीनतम अभ्यारण्य [CG PSC(Engg.)2015]
10.
भैरमगढ़
बीजापुर
1983
139
11.
पामेड़
बीजापुर
1983
265
स्त्रोत: वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन प्रशासकीय प्रतिवेदन 2023-24 एवं कवर्धा जिला प्रशासन की वेबसाइट। (नोट: पूर्व में भोरमदेव अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 163 वर्ग कि.मी. लिया जाता था।)
आशय: वन्यप्राणी अभ्यारण्य एक ऐसा प्राकृतिक आवास है जहाँ पक्षियों और जानवरों की विशेष प्रजातियों की सुरक्षा की जाती है। यहाँ प्रतिबंध अपेक्षाकृत कम होते हैं और जनता के लिए एक निश्चित सीमा तक खुला रहता है।
पहाड़ियाँ: कबरा डोंगर इस क्षेत्र का सबसे ऊँचा स्थान है (ऊँचाई 579 मी.)।
5. बारनवापारा अभ्यारण्य [CG PSC (Pre) 2022]
जिला: बलौदाबाजार
स्थापना: 1976
क्षेत्रफल: 245 वर्ग किमी.
नदी: बलमदेही नदी, जिसमें सातदेवधारा जलप्रपात स्थित है।
जीव-जंतु: रेंगने वाले जीवों (धामन, नाग, अजगर) के लिए प्रसिद्ध है।
पर्यटन स्थल: तुरतुरिया आश्रम (जहाँ लव-कुश का जन्म हुआ था) यहीं स्थित है।
6. उदन्ती अभ्यारण्य
जिला: गरियाबंद [CGPSC(ACF)]
स्थापना: 1983 (वनभैंसा के संरक्षण हेतु)
क्षेत्रफल: 230 वर्ग किमी. [CG PSC(SEE)]
नदी: उदन्ती नदी, जिसमें गोदना जलप्रपात स्थित है।
वन्यजीव: वनभैंसा (सर्वाधिक), मोर
टाइगर रिजर्व: इसे 2009 में सीतानदी अभ्यारण्य के साथ टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
दीपआशा परियोजना: यह परियोजना वनभैंसा संरक्षण से संबंधित है, जिसके तहत करनाल रिसर्च इंस्टीट्यूट (हरियाणा) द्वारा कृत्रिम गर्भाधान से “दीपआशा” नामक मादा वनभैंसा का जन्म हुआ था। [CG Vyapam(RI)2015]
7. सीतानदी अभ्यारण्य [CGPSC(ACF)2021]
जिला: धमतरी
स्थापना: 1974 (राज्य का सबसे प्राचीन अभ्यारण्य)
क्षेत्रफल: 559 वर्ग किमी. (प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा अभ्यारण्य)
वन्यजीव: तेंदुआ (सर्वाधिक संख्या में)
नदी: सीतानदी
जलाशय: सोंदूर जलाशय
टाइगर रिजर्व: इसे 2009 में उदंती अभ्यारण्य के साथ टाइगर रिजर्व बनाया गया।
8. अचानकमार अभ्यारण्य [CGPSC(ACF)2021]
जिला: मुंगेली
स्थापना: 1975
टाइगर रिजर्व: 2009
बायोस्फीयर रिजर्व: 2005 (देश का 14वां), इसे 2012 में UNESCO के MAB (मानव और जैवमण्डल) कार्यक्रम में शामिल किया गया। [CG PSC(CMO)2010]
क्षेत्रफल: 552 वर्ग किमी.
नदी: मनियारी नदी
वन्यजीव: बाघ (सर्वाधिक संख्या में)
विशेष: हाल ही में यहाँ काला तेंदुआ (बघीरा) देखा गया है जो विश्वभर में दुर्लभ है।
9. भोरमदेव अभ्यारण्य
जिला: कबीरधाम
स्थापना: 2001 (राज्य का सबसे नवीनतम अभ्यारण्य) [CG PSC (AMO)2017]
क्षेत्रफल: 352 वर्ग किमी.
वन्यजीव: गेको (सरीसृप), ऑरेंज ऑकलीफ तितली (जिसे नवम्बर 2021 में राष्ट्रीय तितली चुना गया)। [CG Vyapam(FCPR)2016]
सर्वाधिक इमारती लकड़ी व इमली: बस्तर में। [CG PSC(ADS)2019]
तेंदूपत्ता के प्रमुख उत्पादक जिले: सरगुजा एवं बस्तर। [CGVyapam(FCPR)2016]
लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ का स्थान: द्वितीय (प्रथम-झारखंड)। [CG PSC(Pre)2024]
पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामोद्योग शिल्प केन्द्र (बांस कला केन्द्र): जगदलपुर।
वनों का वितरण: उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ में मध्य छत्तीसगढ़ की तुलना में अधिक वन क्षेत्रफल है। [CG PSC(SEE)2022]
जशपुर के वन: जशपुर जिले में वनों को ढाब के नाम से जाना जाता है। [CG PSC(ITI Pri.)2022]
कुल वन ग्राम: छत्तीसगढ़ में कुल 90 वन ग्राम हैं (कुल ग्राम 20,551)।
दण्डकारण्य क्षेत्र के वनोपज: यहाँ के बहुमूल्य खाद्य वनोपज चिरौंजी और इमली हैं।
🌳 मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना (Chief Minister’s Tree Wealth Scheme)
परिचय: यह एक महत्वपूर्ण योजना है जो राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
शुभारंभ: 21 मार्च 2023 (विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर)।
लक्ष्य: 5 वर्षों में 80 लाख एकड़ में 15 करोड़ वृक्षारोपण करना।
उद्देश्य:
ग्रामीण क्षेत्रों में वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना।
किसानों की आय में वृद्धि करना।
छत्तीसगढ़ के वनों का संरक्षण और संवर्धन करना।
काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना।
शामिल प्रजाति: इस योजना के तहत इस वर्ष 12 प्रकार के प्रजाति के वृक्षों का रोपण किया जाएगा। इनमें क्लोनल यूकेलिप्टस, रूटशूट टीक, टिश्यू कल्चर चंदन, मेलिया दुबिया, सामान्य बांस, टिश्यू कल्चर बम्बू, रक्त चंदन, आंवला, खमार, शीशम और महानीम शामिल हैं।
📋 वन विभाग से संबंधित अन्य योजनाएं
1. मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना
तिथि: 1 जून 2021।
उद्देश्य: निजी क्षेत्र के कृषकों, शासकीय विभागों और ग्राम पंचायतों को अपनी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना। इसके तहत अधिकतम 3 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
2. छात्रवृत्ति योजना के चार घटक
मेधावी छात्र-छात्राओं हेतु पुरस्कार योजना (2011-12): तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना।
प्रतिभाशाली शिक्षा प्रोत्साहन योजना (2013-14)
व्यावसायिक कोर्स हेतु छात्रवृत्ति योजना (2011-12)
गैर-व्यावसायिक स्नातक शिक्षा हेतु अनुदान (2012-13)
3. राज्य स्तरीय सी-मार्ट
तिथि: 10 जनवरी 2022।
उद्देश्य: स्व-सहायता समूहों, शिल्पियों और अन्य पारंपरिक कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित उत्पादों के लिए एक संगठित विपणन व्यवस्था प्रदान करना, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
4. अन्य योजनाएं
फूल इमली प्रसंस्करण कार्यवनधन विकास योजना: 2019
कोसा कुकुन क्रय संग्रहण योजना: 1 अगस्त 2022
मिलेट मिशन योजना: 2021
🍃 तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार के प्रमुख निर्णय
संग्रहण पारिश्रमिक ₹4000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रति मानक बोरा कर दिया गया है।
चरण पादुका योजना फिर से शुरू की जाएगी, जो 2006 में शुरू हुई थी।
तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा हेतु एक नवीन योजना संचालित की जाएगी, जिसके लिए शासन 75% और राज्य लघु वनोपज संघ 25% वित्तीय अनुदान देगा।
इस तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र से 12,50,000 संग्राहकों को योजना का लाभ मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधन (Mineral Resources of Chhattisgarh)
💎 खनिज संपदा: छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से संपन्न राज्य है। वर्तमान में यहाँ 28 प्रकार के खनिजों की उपस्थिति के प्रमाण मिले हैं, जिनमें से 21 प्रकार के खनिजों का खनन कार्य किया जा रहा है।
⛏️ खनिजों का वर्गीकरण (Classification of Minerals)
💡 ध्यान दें: चूना पत्थर को उसकी श्रेणी के आधार पर प्रमुख और गौण, दोनों प्रकार के खनिजों में शामिल किया जाता है।
📊 खनिज राजस्व में योगदान (Contribution in Mineral Revenue)
भारत संघ के खनिज मूल्य में योगदान: छत्तीसगढ़ का योगदान 14.42% (2023-24 के अनुसार) है।
राज्य के राजस्व में खनिज राजस्व का योगदान: कुल राजस्व में खनिज का हिस्सा 27% है। [CG PSC(ACF)2017,(ADH)2022]
खनिज राजस्व में योगदान का क्षेत्रवार विभाजन (2023-24)
मुख्य खनिज: 96.21%
गौण खनिज: 3.79%
योगदान के आधार पर खनिजों का क्रम:
कोयला: 37.71%
लौह अयस्क: 29.51%
चूना पत्थर: 5.31%
डोलोमाइट और अन्य: शेष [CGPSC(ITI Prin.)2022]
💰 खनिज राजस्व आय (Mineral Revenue Income)
वित्तीय वर्ष 2023-24: इस वर्ष खनिज से कुल ₹12795.35 करोड़ की आय हुई।
मुख्य खनिज का योगदान: ₹6756.97 करोड़
गौण खनिज का योगदान: ₹265.91 करोड़
वित्तीय वर्ष 2023-24 के राजस्व का विवरण
स्रोत
राशि (लाख में)
1. मुख्य खनिज
675696.67
2. गौण खनिज
26591.02
3. गौण खनिज (रेत से)
752.61
4. अर्थदण्ड एवं राजसात
2995.10
5. विविध प्राप्तियाँ
2677.25
6. नीलामी से प्राप्त राशि (कोल ब्लॉक्स)
183885.52
कुल योग
1279534.55
मुख्य एवं गौण खनिजों का विभिन्न वर्षों में योगदान (लाख ₹ में)
तथ्य
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
1. मुख्य खनिज
452437.66
467608.35
732035.44
827964.84
675696.67
2. गौण खनिज
19479.95
26095.41
25285.63
24672.03
26591.02
खनिज राजस्व
619572.6
551701.46
1230538.57
1294132.89
1279534.55
मुख्य खनिजों के उत्पादन का वर्ष-वार विवरण (हजार टन में)
मुख्य खनिज
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
कोयला
157064
158409
154120
184895
206772
चूना पत्थर
42699
40378
41888
44735
49279
लौह अयस्क
34724
36989
41313
42548
46042
बॉक्साइट
1566
715
968
1057
1033
टिन (कि.ग्रा.)
15546
16865
26383
45429
22335
📝 प्रश्नों के प्रारूपानुसार
प्रत्येक खनिज की उत्पादन की प्रवृत्ति में उतार-चढ़ाव देखा गया है। [CG PSC(SEE)20]
कोयले का उत्पादन 2019-20 और 2021-22 में पिछले वर्ष की तुलना में घटा।
लौह अयस्क का उत्पादन 2019-20 में पिछले वर्ष की तुलना में घटा। [CG PSC(Pre)201]
📈 खनन और उत्खनन क्षेत्र का GSDP में योगदान (स्थिर भाव 2011-12)
विवरण
2019-20
2020-21
2021-22
2022-23
2023-24
2024-25
योगदान (लाख रु.)
2481577
2550559
2656946
2926273
3225572
3429576
वृद्धि (%)
-2.18
2.78
4.17
10.14
10.23
6.32
योगदान (%)
10.54
10.72
10.54
10.87
11.26
11.16
पूर्व वर्षों के प्रश्नों के अनुसार [CGPSC(MI)2018]
📉 वर्ष 2019-20: वृद्धि दर ऋणात्मक (-2.18%) रही।
💹 वर्ष 2023-24: सर्वाधिक वृद्धि प्रतिशत (10.23%) दर्ज किया गया। [CGVyapam(ESC)2017]
📊 वर्ष 2023-24: सर्वाधिक योगदान (11.26%) रहा। [CGPSC(ACF)2017]
📈 प्रवृत्ति: 2019-20 से 2024-25 तक इस क्षेत्र की भागीदारी में उतार-चढ़ाव रहा है।
कुल खनिज उत्पादन का मूल्य (करोड़ ₹ में)
वर्ष
छत्तीसगढ़
भारत
योगदान का %
2019-20
10001
69901
14.31%
2020-21
11941
67814
17.60% (सर्वाधिक)
2021-22
23023
132748
17.34%
2022-23
18511
123177
15.03%
2023-24
20247
140417
14.42%
स्त्रोत: भारतीय खान ब्यूरो प्रकाशन।
🗺️ छत्तीसगढ़ के प्रमुख खनिज भण्डार की स्थिति (2024-25)
स्त्रोत: विभागीय प्रशासकीय प्रतिवेदन 2024-25
क्र.
खनिज का नाम
इकाई
देश में कुल भण्डार
छ.ग. में कुल भण्डार
देश में छ.ग. का हिस्सा
01.
कोयला
मिलियन टन
352126
74192
20.53%
02.
चूना पत्थर
मिलियन टन
227589
13211
5.80%
03.
लौह अयस्क
मिलियन टन
24057
4592
19.09%
04.
डोलोमाइट
मिलियन टन
8415
992
~20%
05.
बॉक्साइट
मिलियन टन
4958
992
~20%
06.
टिन अयस्क
मिलियन टन
83.72
30
35.83%
07.
हीरा
मिलियन कैरेट
31.72
1.3
4.09%
08.
स्वर्ण
टन
518.23
5.0
0.96%
🔄 खनिज भण्डारण एवं उत्पादन (2023-24): एक तुलना
क्र.
खनिज का नाम
भण्डारण (मिलियन टन में)
उत्पादन (हजार टन में)
01.
कोयला
74192
206772
02.
चूना पत्थर
13211
49279
03.
लौह अयस्क
4592
46042
04.
बॉक्साइट
992
1033
05.
टिन
30
22335 (कि.ग्रा.)
प्रश्नों के प्रारूपानुसार
छत्तीसगढ़ में खनिजों का भण्डारण क्रम: कोयला > चूनापत्थर > लौह अयस्क > बॉक्साइट > टिन
छत्तीसगढ़ में खनिजों का उत्पादन क्रम: कोयला > चूनापत्थर > लौह अयस्क > बॉक्साइट > टिन
🏭 मुख्य खनिजों के उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान (2023-24)
खनिज का प्रकार
उत्पादन (%)
मूल्य (%)
भण्डारण (%)
1. कोयला
20.73
–
20.53
2. लौह-अयस्क
16.64
19.01
19.09
3. चूना पत्थर
10.94
11.83
5.80
4. बॉक्साइट
4.32
4.58
20
5. टिन
100.00
100.00
35.83
💸 मुख्य खनिजों की रॉयल्टी दर (राशि प्रति टन)
मुख्य खनिज
2013-14
2014-15
1. लौह अयस्क
300.00
450.00
2. कोयला
145.00
145.00
3. बॉक्साइट
130.00
140.00
4. लाईमस्टोन
63.00
80.00
5. डोलोमाइट
63.00
75.00
💡 महत्वपूर्ण जानकारी:
सर्वाधिक रॉयल्टी दर वाला मुख्य खनिज लौह अयस्क है। [CGPSC(ADPPO)2017]
वर्ष 2014-15 में लौह अयस्क की रॉयल्टी दर में 50% की वृद्धि हुई थी।
गौण खनिजों में सर्वाधिक रॉयल्टी दर ग्रेनाइट (काला रंग) की है (₹2000 प्रति घन मीटर)।
🏆 छत्तीसगढ़ के खनिज राजस्व प्राप्तियों में जिलों का क्रम
खनिज प्रकार
🥇 प्रथम
🥈 द्वितीय
🥉 तृतीय
मुख्य खनिज
दंतेवाड़ा
कोरबा
बालोद
गौण खनिज
रायपुर
जांजगीर-चांपा
बिलासपुर
कुल खनिज
दंतेवाड़ा
कोरबा
बालोद
📊 अखिल भारतीय स्तर पर प्रमुख खनिजों का भण्डारण एवं उत्पादन (विवरण)
यहाँ छत्तीसगढ़ के प्रमुख खनिजों के भण्डारण, उत्पादन और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विस्तृत सारणी दी गई है। (स्त्रोत – मिनरल ईयर बुक-2022, भण्डारण, आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25)
उत्पादन & भण्डारण: दंतेवाड़ा, कांकेर, बालोद, कवर्धा
19.01
3. चूना पत्थर
13211 मिलियन टन (5.80%), स्थान-5
49279 हजार टन (10.94%), स्थान-4
उत्पादन & भण्डारण: बलौदाबाजार, जांजगीर, रायपुर
11.83
4. बॉक्साइट
992 मिलियन टन (20%), स्थान-4
1033 हजार टन (4.32%), स्थान-4
उत्पादन & भण्डारण: सरगुजा, बलरामपुर, कवर्धा
4.58
5. टिन
30 मिलियन टन (35.83%), स्थान-2
22335kg (100.00%), स्थान-1
उत्पादन & भण्डारण: दंतेवाड़ा एवं सुकमा
35.83
6. डोलोमाइट
992 मिलियन टन (20%), स्थान-3
—
उत्पादन: बिलासपुर, सक्ती<br>भण्डारण: बिलासपुर
—
🏭 छत्तीसगढ़ में खनिज उत्खनन करने वाली प्रमुख कंपनियाँ
🏢 NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम)
कार्य: छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से लौह-अयस्क का उत्पादन।
दर्जा: यह भारत सरकार की एक नवरत्न कंपनी है।
उत्खनन प्रारंभ: इसकी पहली इकाई 1968 में दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में स्थापित की गई थी। यहाँ के उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क को विशाखापट्टनम् बंदरगाह के माध्यम से जापान को निर्यात किया जाता है।
उप-मुख्यालय: दंतेवाड़ा (इसका मुख्यालय हैदराबाद में है)। [CG PSC(Lib)2014]
🔥 SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड)
स्थापना: 1985 (उत्पादन 1987 से)।
मुख्यालय: बिलासपुर। [CG PSC(Lib)2014, (LAW) 2022]
कार्य: छत्तीसगढ़ में कोयले का उत्पादन करना।
दर्जा: यह एक मिनीरत्न कंपनी है।
💼 CMDC (छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम)
स्थापना: 7 जून, 2001। [CGVyapam(Horti clt.)2015]
मुख्यालय: रायपुर।
उद्देश्य: खनिजों का उचित दोहन कर राज्य के विकास को गति देना।
कार्य: यह खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। [CG PSC(Asst. Geol.)2011]
अंशपूंजी: 5 करोड़ रुपये, जो राज्य सरकार द्वारा 100% निवेशित है।
परियोजनाएँ: इसके द्वारा 07 परियोजनाएँ संचालित हैं: [CG PSC(Reg.)2021]
टिन (कैसेटेराइट) परियोजना
कोरंडम परियोजना
बॉक्साइट परियोजना
कोल परियोजना (मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के साथ संयुक्त उपक्रम)।
लौह अयस्क परियोजना (आरीडोंगरी मुख्य परियोजना, तथा NMDC के साथ संयुक्त उपक्रम)।
डोलोमाइट खनिज परियोजना (छीतापड़रिया, जैजैपुर)।
डायमंड परियोजना (NMDC के साथ संयुक्त उपक्रम)।
🤝 संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures)
बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड (B.R.P.L.): 5 मई 2016 को गठित। इसमें CMDC, NMDC, SAIL और IRCON शामिल हैं। इसका उद्देश्य रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन का निर्माण करना है।
छत्तीसगढ़ कॉपर लिमिटेड (C.C.L.): 21 मई 2018 को गठित। इसमें CMDC और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (भारत सरकार का उपक्रम) शामिल हैं।
💎 विभिन्न चट्टानों से प्राप्त होने वाले खनिज
खनिज
चट्टान/शैल क्रम
1. कोयला
गोंडवानाक्रम [CGPSC(TSI)2024]
2. लोहा
धारवाड़ शैल क्रम
3. हीरा
किम्बरलाइट
4. चूना, डोलोमाइट
कड़प्पा शैल समूह [CGPSC(TSI)2024]
5. बॉक्साइट
दक्कन ट्रैप [CGPSC(TSI)2024]
6. टिन
कैसेटेराइट अयस्क [CGPSC(TSI)2024]
📈 उत्पादन की दृष्टि से राज्य का क्रम
रैंक
खनिज
प्रथम
टिन, डोलोमाइट, अलेक्जेंड्राइट
द्वितीय
लौह अयस्क, कोयला
चतुर्थ
बॉक्साइट, चूना पत्थर
💰 जिला खनिज संस्थान न्यास (District Mineral Institute Trust – DMFT)
अधिनियम: जिला खनिज न्यास संस्थान अधिनियम-2015।
लागू: 12 जनवरी 2015 से। [CGPSC(Pre)2]
गठन: राज्य के सभी 33 जिलों में। [CGVyapam(VAPR)2021]
अध्यक्ष: जिला कलेक्टर (पदेन)।
सदस्य: संबंधित जिले के लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्य।
लाभांश क्षेत्र: इसमें सुपोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पेयजल, ऊर्जा और जल विभाजक विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। [CGPSC(YWO)2018]
विशेष:
DMF से प्राप्त राशि का 30% हिस्सा उस क्षेत्र के विकास के लिए तथा 10% हिस्सा खदान के विकास के लिए प्रदान किया जाता ہے। [CGVyapam(DCAG)20]
यह न्यास एक गैर-लाभकारी संस्था है।
🪙 अन्य खनिज (Other Minerals)
मैंगनीज (Manganese):
मातृ शिला: धारवाड़ युग की चट्टान।
उपयोग: शुष्क बैटरी निर्माण, फोटोग्राफी, चमड़ा, माचिस और पेंट उद्योग में।
क्षेत्र: जांजगीर-चांपा (मुलमुला), गरियाबंद (छुरा, सरसोली), बिलासपुर, बस्तर। बिलासपुर में इसका अधिकतम निक्षेप है। [CG Vyapam(TET)2019]
मांड घाटी कोयला क्षेत्र (रायगढ़): यह छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कोयला खान (भंडारित) है। [CGPSC(ADI)2016]
छुरी-उदयपुर की पहाड़ी: यहाँ गोंडवाना क्रम की चट्टानों में कोयले का निक्षेप पाया जाता ہے। [CGVyapam(FI)2022]
हसदेव अरण्य क्षेत्र: यह क्षेत्र मनेन्द्रगढ़, कोरिया, कोरबा, बिलासपुर और सरगुजा में फैला हुआ है। [CGPSC(Pre)2011]
🔩 लौह अयस्क (Iron Ore)
📜 सामान्य परिचय
🔸 मातृ शिला: यह धारवाड़ क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है। [CGPSC(TSI)20:]
🔩 लौह अयस्क के प्रकार: छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से हेमेटाइट किस्म का लौह अयस्क पाया जाता ہے। (अन्य प्रकार: मैग्नेटाइट, लिमोनाइट, सिडेराइट) [CG PSC(SEE)20]
⛏️ उत्खनन: इसका उत्खनन NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम) द्वारा किया जाता है, जिसका उप-मुख्यालय दंतेवाड़ा में है। [CG PSC (Lib)2014, (ADI):]
💰 राजस्व आय में योगदान
देश में: खनिज मूल्य में लौह अयस्क का योगदान सर्वाधिक (22.63%) है। [CGVyapam(SAAF)]
राज्य में: प्रदेश के खनिज राजस्व में इसका दूसरा सर्वाधिक योगदान (29.51%) है।
रॉयल्टी: लौह अयस्क, राज्य में सर्वाधिक रॉयल्टी वाली धातु है (दूसरा स्थान कोयले का है)। [CG PSC(Reg)]
📊 भण्डारण (राष्ट्रीय स्तर पर)
मात्रा: 4592 मिलियन टन (देश के कुल भंडार का 5वां हिस्सा)।
प्रतिशत: 19.09%।
स्थान:तृतीय (1. ओडिशा, 2. कर्नाटक, 3. छत्तीसगढ़)।
राज्य में प्रमुख जिले: 1. दंतेवाड़ा, 2. कांकेर, 3. कवर्धा।
💡 नोट: धमतरी, दुर्ग और कोरिया जिलों में लौह अयस्क के साक्ष्य नहीं मिले हैं। [CGPSC(ADPO)2013]
⭐ बैलाडीला क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ (दंतेवाड़ा)
यहाँ लौह अयस्क का सबसे विस्तृत भंडार क्षेत्र स्थित है, जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी NMDC द्वारा उत्खनन किया जाता है।
यहाँ से उत्खनित लौह अयस्क जापान को विशाखापट्टनम् बंदरगाह के माध्यम से निर्यात किया जाता है। [CG PSC(PDD)2018]
बैलाडीला में कुल 14 निक्षेप हैं, जिनमें से निक्षेप क्रमांक 5 सबसे बड़ा है। [CG Vyapam Patwari)2017]
बैलाडीला, भारत की सबसे बड़ी मशीनीकृत खान है। [CG PSC(Lib)2014]
छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क का सर्वाधिक उत्पादन दंतेवाड़ा जिले में ही होता ہے। [CGVyapam (FI)2022]
🔑 अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
NMDC को आवंटित निक्षेप: भारत सरकार ने NMDC को 4 लौह अयस्क निक्षेप आवंटित किए हैं:
आरीडोंग्री (कांकेर)
कवर्धा (कबीरधाम)
बैलाडीला निक्षेप क्षेत्र-4 (दंतेवाड़ा)
बैलाडीला निक्षेप क्षेत्र-13 (दंतेवाड़ा)
दल्लीराजहरा खान: बालोद जिले की इस खान से पहले भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति होती थी, কিন্তু বর্তমানে इसकी आपूर्ति रावघाट माइन्स से की जा रही है।
रावघाट लौह अयस्क परियोजना: यह परियोजना कांकेर एवं नारायणपुर जिले में विस्तृत है।
💎 चूना पत्थर (Limestone)
📜 सामान्य परिचय
मातृ शिला: यह कड़प्पा क्रम के शैल समूहों में पाया जाता ਹੈ।
निर्माण: यह अवसादी (Sedimentary Rock) चट्टानों से बनता ہے। [CG Vyapam(FCPR);]
विस्तार: छत्तीसगढ़ में सीमेंट ग्रेड का चूना पत्थर मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के मैदान में पाया जाता है। [CG PSC(SEE)]
राजस्व: देश के कुल खनिज मूल्य में इसका योगदान 11.83% है।
उपयोग: सीमेंट, लोहा-इस्पात, चीनी, उर्वरक और रसायन उद्योगों में इसका उपयोग होता ہے।
📊 भण्डारण एवं उत्पादन (2023-24, राष्ट्रीय स्तर पर)
💡 नोट: NMDC और CMDC के संयुक्त उपक्रम (NCL) द्वारा महासमुंद के सरायपाली में बलौदा-बेलमुण्डी डायमण्ड ब्लॉक में पूर्वेक्षण और खनन की कार्यवाही प्रक्रिया में है।
💍 अलेक्जेन्ड्राइट (Alexandrite)
उप नाम: इसे ‘गरीबों का रत्न’ या अभिशापित रत्न/प्राकृतिक हीरा के नाम से भी जाना जाता है।
क्षेत्र: देवभोग तहसील (गरियाबंद) के सेन्दुमुड़ा और लाटापारा में। [CG Vyapam (LOI):]
विशेषता: रूस के साइबेरिया के अलावा, भारत में यह केवल छत्तीसगढ़ में ही पाया जाता ہے, जो इसे एक दुर्लभ एवं बहुमूल्य धातु बनाता ਹੈ। [CG PSC(Pre):]
🔴 गारनेट (Garnet Stone)
उपयोग: इसका उपयोग एब्रेसिव (अपघर्षक) और आभूषण उद्योगों में किया जाता ਹੈ। [CG PSC(ARTO)2022, (ACF)2]
उपयोग: इसका उपयोग चीनी मिट्टी उद्योग और हाइड्रोक्लोरिक एसिड निर्माण में अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता ਹੈ। [CG PSC(ARO,APO)2014][CG Vyapam (PDEO)]
🗺️ प्रमुख क्षेत्र
महासमुंद: चुराकट्टा, माकरमुत्ता, घाटकछार।
राजनांदगांव: चांदीडोंगरी, केरवापानी, लामटीडोंगरी।
⚪ क्वार्टजाइट (Quartzite)
🗺️ प्रमुख क्षेत्र
राजनांदगांव: अमलीडीह, बोरतालाब। [CG PSC(ARO,APO)]
महासमुंद: परसापाली, सालेतराई।
रायगढ़: उर्दना, रामपुर।
बेमेतरा: दानीटोला क्षेत्र, कलकसा, खुरसुल।
📜 नवीनतम खनिज साक्ष्य
जिला
खनिज
स्थान
महासमुंद
निकिल, क्रोमियम
केलवार डबरी, भालूकोना
सुकमा
लिथियम
गोविंदपाल, मुडपाल
कोरबा
लिथियम
कटघोरा, जेजंरा, छुरी, घुंचापुर
💎 छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले खनिज एवं संबंधित जिले (संख्यावार)
कोरण्डम, बाक्साइट (गार्नेट, ताम्र अयस्क सूक्ष्म मात्रा में)
27.
सुकमा
क्वार्ट्ज, चूनापत्थर, कोरण्डम, टिन, लिथियम (गेलेना, ग्रेफाईट सूक्ष्म मात्रा में)
28.
म.-चि.-भ.
कोयला
29.
सारंगढ़
डोलोमाइट
30.
मो.-मा.-अं.
लौह अयस्क, यूरेनियम (स्वर्ण सूक्ष्म मात्रा में)
31.
खै.-छुई.-गं.
लौह अयस्क
32.
गौ.-पे.-म.
कोयला
33.
सक्ती
चूनापत्थर, डोलोमाइट
📖 छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति एवं विकास केन्द्र
📜 छ.ग. शासन की प्रमुख नीतियाँ
क्र.
नीति
प्रभावी अवधि
अवधि
1.
6वीं छ.ग. औद्योगिक नीति
1 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक
6 वर्ष
2.
छ.ग. इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति
1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2027 तक
5 वर्ष
3.
सौर ऊर्जा नीति
1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2027 तक
10 वर्ष [CG Vyapam(PHEH)2023]
4.
छ.ग. महिला उद्यमिता नीति
1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2028 तक
5 वर्ष
✨ राज्य की नई औद्योगिक नीति 2024-2030 (6वीं औद्योगिक नीति)
🔮 दृष्टिकोण (Vision): इस नीति के प्रावधान “अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन @ 2047” की परिकल्पना को साकार करने के लक्ष्य के साथ प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास को नए आयाम मिलेंगे। [CG PSC(Pre)2019]
⏳ समयावधि: 1 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक। [CG Vyapam(SAAF, AGDO)2021]
🌐 सभी विकासखण्डों, जिलों और संभागों में औद्योगिक विकास के लिए एक प्रगतिशील नीति को लागू करना।
🤝 राज्य के सभी आम लोगों और इच्छुक उद्यमियों के लिए एक अनुकूल और सहयोगी प्रशासनिक माहौल सुनिश्चित करना।
🏭 सभी विकासखण्डों को औद्योगिक क्षेत्रों के एक नेटवर्क के रूप में विकसित करना।
💡 नवीनतम तकनीक पर आधारित उद्योगों के विकास के लिए विशेष प्रावधान करना।
🌾 कोर सेक्टर पर आधारित उत्पादों जैसे स्टील, सीमेंट, थर्मल पावर के साथ-साथ कृषि, खाद्य और वनोपज उत्पादों को स्थानीय स्तर पर संसाधित करना।
🧑🏭 उपलब्ध मानव संसाधनों को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार के योग्य बनाना।
📈 कोर सेक्टर के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी नए निवेश को आकर्षित करना।
🤖 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देना।
🏗️ अधोसंरचना विकास एवं औद्योगिक भूमि प्रबंधन
राज्य के समग्र विकास के लिए प्रदेश के विकासखंडों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से, मांग के अनुसार नए औद्योगिक क्षेत्र और पार्क स्थापित किए जाएंगे।
वर्तमान में राज्य में लगभग 56 औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। नए क्षेत्रों की स्थापना के लिए CSIDC के माध्यम से भूमि बैंक बनाया जाएगा।
प्रदेश में इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर की स्थापना के लिए प्रयास किए जाएंगे। संभावित कॉरीडोर:
कोरबा-बिलासपुर-रायपुर-नागपुर
कोरबा-बिलासपुर-रायपुर-विशाखापट्टनम
निजी निवेशकों द्वारा निजी औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और Water & Effluent Treatment Plant स्थापित किए जाएंगे।
प्रदेश में भण्डारण क्षमता बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक पार्क के विकास हेतु भूमि आवंटन की दरों को सुविधाजनक बनाया जाएगा।
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए CSIDC द्वारा बहुमंजिला औद्योगिक भवन और शेड बनाए जाएंगे।
📊 निवेशकों का वर्गीकरण (7 श्रेणियाँ)
सामान्य वर्ग के उद्यमी
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उद्यमी
अप्रवासी भारतीय (NRI), प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक (FDI), और निर्यातक निवेशक
महिला उद्यमी एवं तृतीय लिंग (Third Gender)
सेवानिवृत्त सैनिक, दिव्यांग और नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति
महिला स्व-सहायता समूह (SHG) के उद्यमी
किसान उत्पादक संगठन (FPO) के उद्यमी
🏭 उद्योगों का वर्गीकरण (निवेश के आकार पर, 4 श्रेणियाँ) [CG PSC(ITI Prin.)202]
स्पंज आयरन, एकीकृत स्टील प्लांट, तापीय विद्युत उत्पादन संयंत्र
स्टोन क्रेशर / मिट्टी निर्माण (केवल समूह-1 एवं 2 के विकासखण्डों के लिए)
राइस मिल एवं परबॉईलिंग (केवल समूह-1 एवं 2 के विकासखण्डों के लिए)
सभी प्रकार के उत्पादों की रिपैकिंग
राज्य शासन द्वारा अधिसूचित अन्य कोई उद्यम
🏢 कोर-सेक्टर उद्योगों की सूची
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की दृष्टि से कोर सेक्टर उद्योगों को वर्गीकृत किया गया है।
छत्तीसगढ़ के कोर सेक्टर (04)
भारत के कोर सेक्टर (08) [CG PSC(ITI Prin.)2016]
1. स्टील संयंत्र
1. कोयला
2. सीमेंट संयंत्र [CGPSC(ITI Prin)2016]
2. स्टील
3. ताप विद्युत संयंत्र
3. सीमेंट
4. एल्युमिनियम संयंत्र [CGPSC(ITI Prin)2016]
4. विद्युत
5. उर्वरक
6. कच्चा तेल
7. प्राकृतिक गैस
8. पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद
💡 नोट:
छत्तीसगढ़ के कोर सेक्टर में आटोमोबाईल उद्योग शामिल नहीं है। [CG PSC(MI)]
छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से खनिज आधारित उद्योग विद्यमान हैं। [CG PSC(Pre)]
🏆 औद्योगिक पुरस्कार योजना
प्रारंभ: 2009. [CG PSC (Mains)2, CG Vyapam (VPR)]
पुरस्कार श्रेणियाँ (05):
सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का समग्र मूल्यांकन
अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग द्वारा स्थापित सूक्ष्म एवं लघु उद्योग
निर्यातक सूक्ष्म एवं लघु उद्योग
महिला उद्यमी द्वारा स्थापित उद्योग
स्टार्टअप इकाइयां
पुरस्कार राशि: प्रत्येक श्रेणी में तीन पुरस्कार दिए जाते हैं:
प्रथम पुरस्कार: ₹ 1,51,000
द्वितीय पुरस्कार: ₹ 1,00,000
तृतीय पुरस्कार: ₹ 51,000
📈 राज्य निवेश संवर्धन/प्रोत्साहन बोर्ड
अध्यक्ष: मुख्यमंत्री (पदेन)।
कार्य:10 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर निर्णय लेना। [CGPSC(ACF)2017,(TSI)20]
प्रावधान: छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2006 के तहत।
नोट: राज्य में वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में 14 निर्यात संवर्धन कौंसिल कार्यरत हैं।
🏭 छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area in Chhattisgarh)
राज्य में औद्योगिक विकास तीन मुख्य विभागों द्वारा किया जाता ہے:
(A) छ.ग. राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (CSIDC)
(B) एकीकृत अधोसंरचना विकास केन्द्र (IIDC)
(C) उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार
(A) छ.ग. राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (CSIDC)
गठन: 7 अप्रैल 2001। [CG PSC(ADP)2019]
कॉर्पोरेट कार्यालय: रायपुर। [CG PSC(MI)2014]
पंजीकरण: यह भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत है।
अधिकृत पूँजी: ₹ 10 करोड़।
पूर्ववर्ती निगम: राज्य गठन के बाद, मध्य प्रदेश शासन के 8 निगमों को मिलाकर CSIDC का गठन किया गया, जिनमें M.P. औद्योगिक केन्द्र विकास निगम, M.P. लघु उद्योग निगम, M.P. वित्त निगम आदि शामिल थे।
🔧 CSIDC के प्रमुख कार्य
राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और उसका प्रचार-प्रसार करना। [CGVyapam (SGST)2018]
औद्योगिक क्षेत्रों/पार्कों की स्थापना करना और अधोसंरचना का विकास करना।
लघु उद्योगों के विपणन (Marketing) में सहायता प्रदान करना।
कच्चे माल की आपूर्ति और उद्योगों का संचालन सुनिश्चित करना।
राजधानी रायपुर में राज्योत्सव और नई दिल्ली में भारत अंतर्राष्ट्रीय मेले का आयोजन और प्रबंधन करना। [CGVyapam (SGST)2018]
समय-समय पर शासन द्वारा दिए गए अन्य कार्यों को पूरा करना।
निवेशकों की बैठकें आयोजित करना। [CGVyapam (SGST)2018]
औद्योगिक उत्पाद सूचकांक (Index) तैयार करना। [CGVyapam (SGST)2018]
💡 विगत वर्षों का प्रश्न
प्रश्न: छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन का कार्य नहीं है?
(A) निवेशकों की बैठक आयोजित करना।
(B) भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में भाग लेना।
(C) औद्योगिक उत्पाद सूचकांक तैयार करना।
(D) छत्तीसगढ़ की राजधानी में वार्षिक राज्य उत्सव का आयोजन करना।
(उत्तर B) भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में भाग लेना [CG Vyapam(SGST)2018] (नोट: CSIDC मेला में भाग लेने के बजाय, राज्य का मंडल निर्माण एवं संचालन करता है, जो एक सूक्ष्म अंतर है।)
🏭 राज्य में स्थापित औद्योगिक विकास क्षेत्र (Established Industrial Development Areas)
धुरागांव (लोहांडीगुड़ा), कलचा (लघु औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित), फ्रेजरपुर, पंडरीपानी, गीदम रोड
दंतेवाड़ा
टेकनार (IIDC) [CG PSC (ADPPO)201]
सुकमा
सुकमा
🏗️ औद्योगिक विकास केंद्र/क्षेत्र का वर्गीकरण
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) ने औद्योगिक क्षेत्रों को मुख्य रूप से 4 श्रेणियों में विभाजित किया है।
श्रेणी (Category)
क्षेत्रफल (Area)
कुल हेक्टेयर
वृहद् औद्योगिक क्षेत्र
200 हेक्टेयर से अधिक
2614.053
मध्यम औद्योगिक क्षेत्र
100 से 200 हे. तक
407.703
लघु औद्योगिक क्षेत्र
50 से 100 हेक्टेयर तक
392.39
सूक्ष्म औद्योगिक क्षेत्र
0 से 50 हेक्टेयर तक
462.353
🌳 1. वृहद् औद्योगिक क्षेत्र (200 हेक्टेयर से अधिक) – कुल 05 क्षेत्र
औद्योगिक विकास केन्द्र सिलतरा, रायपुर
केंद्र: यह प्रदेश का सबसे विशाल और विस्तृत औद्योगिक केंद्र है। [CG PSC(Pre)2012(Asst. Geo)2011,(CMO)]
कॉम्प्लेक्स: यहाँ साइकल कॉम्प्लेक्स और एग्रो एक्सपोर्ट जोन स्थापित हैं। [CGVyapam(ADEO)]
औद्योगिक क्षेत्र उरला, रायपुर
स्थापना: 1990 (यह प्रदेश का प्रथम औद्योगिक विकास केंद्र है)। [CGVyapam(MFA)]
विशेष: यहाँ ड्राइपोर्ट की स्थापना की गई है और यह सर्वाधिक रोजगार तथा निवेश वाला औद्योगिक क्षेत्र है। यह एक पूर्णतः विकसित औद्योगिक केंद्र है। [CGVyapam(ESC)]
औद्योगिक विकास केन्द्र सिरगिट्टी, बिलासपुर
विकास: इस केंद्र का विकास दक्षिण-पूर्वी कोलफील्ड्स (SECL) की स्थापना के कारण हुआ और इसका लाभ भी इसे मिला। [CGVyapam(TET);]
औद्योगिक विकास केन्द्र बोरई, दुर्ग
विकास: इस केंद्र की स्थापना भिलाई इस्पात उद्योग के प्रभाव क्षेत्र में हुई है। [CG Vyapam(MFA)2017]
औद्योगिक क्षेत्र सिलपहरी, बिलासपुर
🏭 2. मध्यम औद्योगिक क्षेत्र (100 से 200 हेक्टेयर तक)
औद्योगिक क्षेत्र भनपुरी, रायपुर
इंजीनियरिंग पार्क, हथखोज, भिलाई
औद्योगिक क्षेत्र मेटलपार्क, रायपुर
🤏 3. लघु औद्योगिक क्षेत्र (50 से 100 हेक्टेयर तक)
महरूम कला (राजनांदगांव)
औद्योगिक क्षेत्र – तिफरा (बिलासपुर) [CG PSC(Pre)2015(ADPPO)2013]
बिरकोनी (IIDC) (महासमुंद) [CG PSC(Pre)2014]
नयनपुर-गिरिवरगंज (IIDC) (सरगुजा) [CGPSC(ACF)2021]
फूड पार्क – बागौद (धमतरी)
लखनपुरी (IIDC) (कांकेर)
महुआपाली/सियारपाली (रायगढ़)
खम्हरिया (मुंगेली)
सिलपहरी (बिलासपुर)
कलचा (बस्तर)
खैरा (बेमेतरा)
परसगढ़ी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)
बाराद्वार (सक्ती)
🔬 4. सूक्ष्म औद्योगिक क्षेत्र (0 से 50 हेक्टेयर तक)
औद्योगिक क्षेत्र
स्थान
रावांभाठा, आमासिवनी, तेन्दुआ, बरतोरी, तिल्दा
रायपुर [CGPSC(ACF)2021)]
अंजनी
पेण्ड्रारोड (गौ-पे-म) [CGPSC(ACF)2021)]
हरिनछपरा (IIDC)
कबीरधाम [CG PSC(ADS)2019]
टेकनार (IIDC)
दंतेवाड़ा [CGPSC(ADPPO)2013]
कापन (IIDC)
जांजगीर-चाम्पा [CGPSC(ADPPO)2013]
गंगापुर खुर्द
सरगुजा [CG PSC(ACF)2017]
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर
नवा रायपुर
महरूम खुर्द, पांगरीखुर्द
राजनांदगांव
अवरेठी, केसदा
भाटापारा, बलौदाबाजार
बरबसपुर
सूरजपुर
रिखी
सरगुजा
नारायणबहली
जशपुर
हथकेरा बिदबिदा
मुंगेली
खपरीखुर्द
रायपुर
सिलपहरी (ब्लाक-A, B व C)
बिलासपुर
📈 ईज-ऑफ-डूईंग बिजनेस (EoDB – Ease of doing business)
संचालन: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (भारत सरकार) एवं विश्व बैंक द्वारा।
कार्य संचालन: वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।
रैंकिंग: वर्ष 2022 और 2023 की ईज-ऑफ-डूईंग बिजनेस रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने चौथा (4th) स्थान हासिल किया। [CGPSC(Pre)2019], [CGVyapam(FI)2022]
🏗️ (B) एकीकृत अधोसंरचना विकास केन्द्र (IIDC)
स्थापना: भारत सरकार की इस योजना के तहत राज्य में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत विकास केंद्रों की स्थापना की जाती है।
उद्देश्य: लघु एवं सूक्ष्म (अति लघु) उद्योगों की स्थापना करना।
अनुदान: परियोजना लागत का 60% या अधिकतम 6 करोड़ रुपये। [CG PSC(ITI Pr)]
नोडल एजेंसी: सी.एस.आई.डी.सी. (CSIDC)।
संख्या: 09 निर्मित, 2 निर्माणाधीन तथा 2 प्रस्तावित (कुल 13)।
📊 एकीकृत अधोसंरचना विकास केंद्र (IIDC) की सूची
क्र.
औद्योगिक क्षेत्र का नाम
जिला
क्षेत्रफल (हेक्टेयर)
01.
बिरकोनी
महासमुंद
96.42
02.
खम्हरिया
मुंगेली
60
03.
लखनपुरी
कांकेर
53.30
04.
नयनपुर-गिरिवरगंज
सूरजपुर
51.23
05.
कापन
जांजगीर-चाम्पा
43.06
06.
महुआपाली/सियारपाली
रायगढ़
39
07.
परसगढ़ी
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
32
08.
हरिनछपरा
कबीरधाम
20.93
09.
टेकनार
दंतेवाड़ा
19.27
🏗️ एकीकृत अधोसंरचना विकास केंद्र अंतर्गत प्रस्तावित
क्र.
औद्योगिक क्षेत्र
जिला
क्षेत्रफल (एकड़)
01.
अभनपुर
रायपुर
39.88
02.
जी-जामगांव
धमतरी
24.71
✨ प्रस्तावित नवीन औद्योगिक क्षेत्र
क्र.
प्रस्तावित क्षेत्र
जिला
क्षेत्रफल (एकड़)
01.
ग्राम परसिया
मुंगेली
192.02
02.
ग्राम सेलर
बिलासपुर
95.02
🛠️ (C) ग्रामीण कार्यशाला/औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक संस्थान
(संचालक – उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़)
जिला
औद्योगिक क्षेत्र / संस्थान
रायगढ़
पुसौर [CGPSC(ADJE)2020]
जांजगीर-चांपा
चांपा
कोरबा
कोरबा
सरगुजा
अंबिकापुर
सूरजपुर
अजिरमा
जशपुर
गम्हरिया
कोरिया
बैकुण्ठपुर
मनेन्द्रगढ़-चि.-भ.
चैनपुर
दुर्ग
भिलाई
बालोद
बालोद
राजनांदगांव
राजनांदगांव, डोंगरगढ़, मोहरा, सोमनी, गठुला
कोण्डागांव
कोण्डागांव
नारायणपुर
नारायणपुर
बस्तर
जगदलपुर, फ्रेजरपुर, पंडरीपानी, गीदम रोड, कुरन्दी
💡 विगत वर्षों का प्रश्न
प्रश्न: ग्रामीण कार्यशाला “पुसौर” किस जिले में स्थित है?
(A) बिलासपुर
(B) जशपुर
(C) जांजगीर-चांपा
(D) रायगढ़
✅ (उत्तर-D) रायगढ़ [CGPSC(ADJE)2020]
🏭 छत्तीसगढ़ में प्रमुख औद्योगिक पार्क (Industrial Parks in Chhattisgarh)