🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-2 🎯
🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-1 🎯
🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-3🎯
🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-4🎯
🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-5🎯
🎯छत्तीसगढ़: भूगोल भाग-6🎯
छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन और भू-आकृतियाँ (पर्वत, पठार, पाटप्रदेश एवं मैदान) 🏞️
📌 छत्तीसगढ़ के भौतिक क्षेत्रों का वर्गीकरण चट्टानों की बनावट, भूमि की ऊँचाई-निचाई, मिट्टी के प्रकार, ढलान और नदी प्रणालियों के आधार पर चार मुख्य भागों में किया गया है।
छत्तीसगढ़ के भौतिक विभाग (एक नजर में) 🗺️
1. जशपुर सामरीपाट
- क्षेत्रफल: 6,208 वर्ग किमी² (4.59%)
- उप-विभाग:
- सामरीपाट / कुसमीपाट (ऊपरी घाट):
- लहसुन पाट
- जमीर पाट
- जारंग पाट
- जशपुरपाट (निचली घाट):
- पण्डरा पाट
- मैनपाट
- सामरीपाट / कुसमीपाट (ऊपरी घाट):
2. पूर्वी बघेलखण्ड का पठार
- क्षेत्रफल: 21,863 वर्ग किमी² (16.16%)
- उप-विभाग:
- सोहागपुर बेसिन
- कन्हार बेसिन
- रिहन्द बेसिन
- देवगढ़ पहाड़ी
- सरगुजा बेसिन
- हसदो-रामपुर बेसिन
3. महानदी बेसिन
- क्षेत्रफल: 68,064 वर्ग किमी² (50.34%)
- उप-विभाग:
- छ.ग. का मैदान:
- शिवनाथ-महानदी दोआब
- शिवनाथ पार का मैदान
- बिलासपुर का मैदान
- हसदो-मांड बेसिन
- महानदी पार संकरा मैदान
- सीमांत उच्च भूमि:
- मैकल श्रेणी
- उत्तरी उच्चभूमि
- दक्षिणी उच्चभूमि
- पूर्वी उच्चभूमि (रायपुर उच्च भूमि)
- छ.ग. का मैदान:
4. दण्डकारण्य
- क्षेत्रफल: 39,060 वर्ग किमी² (28.91%)
- उप-विभाग:
- कोटरी नदी (कांकेर) बेसिन
- अबूझमाड़ की पहाड़ी
- उत्तरी-पूर्वी पठार
- दक्षिण का पठार
- गोदावरी-शबरी बेसिन
जशपुर-सामरीपाट प्रदेश का विस्तृत विवरण 🌄
📖 परिभाषा: पाट प्रदेश उस ऊँची, समतल और पठारी भूमि को कहते हैं जिसका शीर्ष सपाट होता है और किनारे सीढ़ी की तरह तीव्र ढलान वाले होते हैं।
- 🌍 विस्तार: इसके अंतर्गत पूरा जशपुर जिला, बलरामपुर की सामरी-कुसमी तहसील और सरगुजा का मैनपाट इलाका आता है। इस प्रदेश के उत्तरी हिस्से से कर्क रेखा होकर गुजरती है।
- 📍 स्थिति: यह छत्तीसगढ़ की उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित एक अकेली भू-आकृति है। [CG PSC(SEE)2017] [CG Vyapam (SI Mains)2023]
- ** हिस्सा:** यह छोटा नागपुर पठार के पश्चिमी भाग का अंग है। [CG PSC(Asst. Geo.)2011]
- 📏 क्षेत्रफल: इसका क्षेत्रफल 6,208 वर्ग किलोमीटर है, जो छत्तीसगढ़ का सबसे छोटा भौतिक विभाग है। [CG Vyapam (SI Mains)2023]
- 📊 प्रतिशत: यह छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का 4.59 प्रतिशत हिस्सा है।
- 🔄 उपविभाग: इसे तीन भागों में बांटा गया है: 1. सामरी पाट (ऊपरी घाट), 2. जशपुर पाट (नीच घाट), 3. मैनपाट।
- ↘️ ढाल: इस प्रदेश की ढलान दक्षिण-पूर्व की ओर है।
- 💧 प्रमुख नदियाँ: यहाँ की मुख्य नदियाँ ईब, मैनी, शंख आदि हैं।
- 💎 खनिज: यहाँ प्रमुख रूप से बॉक्साइट पाया जाता है। [CG PSC(SO&AMO)2022][CG PSC(ARTO)2017]
- 🌱 मिट्टी: इस क्षेत्र में लेटेराइट मिट्टी मिलती है।
- 🍎 फसल: यहाँ बागवानी फसलें जैसे टमाटर, लीची, चाय आदि उगाई जाती हैं।
- 🗿 शैल समूह: यहाँ अधिकांश भागों में अन्तर्वेधी आग्नेय शैल, धारवाड़ समूह, लैटेराइट, रवेदार और नाइस चट्टानें पाई जाती हैं। जशपुर के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भागों में आद्य शैलों के साथ अन्य शैलें भी मौजूद हैं।
- 🔑 प्रमुख पाट: पठारी क्षेत्र के समतल ऊपरी हिस्से को पाट कहा जाता है।
- ➡️ क्रम (पूर्व से पश्चिम): छत्तीसगढ़ में पाट प्रदेशों का पूर्व से पश्चिम की ओर क्रम इस प्रकार है: जमीर पाट > जारंग पाट > जशपुर पाट > मैनपाट। [CG PSC(ABEO)2013]
जशपुर-सामरीपाट के प्रमुख उप-विभाग 🏞️
1. सामरी पाट / कुसमी पाट (ऊपर घाट)
- 🗣️ परिभाषा: जशपुर जिले का उत्तरी हिस्सा और दक्षिणी बलरामपुर जिले का कुसमी क्षेत्र, सामरीपाट अथवा पाट (ऊपर घाट) के नाम से जाना जाता है।
- 📍 विस्तार: यह सामरी तहसील (बलरामपुर) और जशपुर जिले के उत्तरी भाग में फैला हुआ है।
- ⛰️ ऊँची चोटी: गौरलाटा (1225 मी.) छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है। [CG PSC (Reg.) 2017,(Pre)2021], [CG PSC (ARO)2022]
- ↕️ औसत ऊँचाई: इसकी औसत ऊँचाई 600-750 मीटर है।
- 🏞️ क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल 2225 वर्ग किलोमीटर है।
- 💡 पाट प्रदेश: यह उत्तरी छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा पाट प्रदेश है। इसी क्षेत्र में राज्य की सबसे अधिक ऊँचाई वाली पहाड़ी स्थित है। [CG Vyapam (Patwari) 2019], [CG PSC(ADP)2014]
- ** पठार:** खुरिया पठार और जशपुर पठार इसके प्रमुख पठार हैं। खुरिया पठार जशपुर पाट के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। [CG PSC(ADA)2014]
जशपुर पठार की चोटियाँ 🏔️
| पंडरापाट की चोटियाँ | जशपुर पठार की चोटियाँ | ||
| 1. पंडरापाट | 1123 मी. | 1. कुरंग पहाड़ | 1000 मी. |
| 2. बुरजुडीह | 2. गड़पहाड़ | 982 मी. | |
| 3. भंवर पहाड़ | 1028 मी. | 3. लाकी पहाड़ | 1007 मी. |
| 4. तेन्दूपाता | 1038 मी. | 4. सिनीगुवा पहाड़ | 911 मी. |
| 5. सुलेशा पहाड़ी | 1118 मी. | 5. केन कछार | 921 मी. |
| 6. डुंगर पहाड़ | 878 मी. |
प्रमुख पाट उपविभाग
i. लहसुन पाट
- विस्तार: बलरामपुर।
- स्थिति: यह सामरी पाट के पश्चिम में स्थित है। [CG PSC(ARO)2022]
ii. जमीर पाट
- विस्तार: बलरामपुर।
- स्थिति: यह सामरी पाट के पूर्वी हिस्से पर है।
- विशेष: इस क्षेत्र को “बॉक्साइट का मैदान” भी कहा जाता है।
iii. जारंग पाट
- विस्तार: सरगुजा (सीतापुर एवं लुण्ड्रा तहसील) और बलरामपुर जिले में।
- दिशा: उत्तर-पूर्व।
- ऊँचाई: 1145 मीटर।
- विशेष: यह बॉक्साइट का सबसे बड़ा भंडारण क्षेत्र माना जाता है।
2. जशपुर पाट (नीच घाट) ⛰️
- 📖 परिभाषा: जशपुर जिले में ईब-मैनी नदी के उत्तर में स्थित पूरे भू-भाग को जशपुर पाट या ‘नीच घाट’ कहा जाता है। ऊपरी घाट की सीमा बनाने वाले कगार के दक्षिणी क्षेत्र को भी नीच घाट कहते हैं।
- 🌍 विस्तार: यह बगीचा, जशपुर, कुनकुरी, और पत्थलगांव तहसीलों में फैला है।
- 🏞️ पठार: माखेल पठार (ईब और मैनी नदी के बीच जल विभाजक)।
- 🧭 दिशा: उत्तर-पूर्व सीमांत।
- ↕️ औसत ऊँचाई: 275-500 मीटर।
- 📏 क्षेत्रफल: 4304 वर्ग किलोमीटर (यह राज्य का सबसे बड़ा और लंबा पाट प्रदेश है)। [CG PSC(AP)2016]
- 💎 खनिज: बॉक्साइट। [CG PSC(ARTO)2016]
- 🌸 घाटी: लोरो घाटी (जशपुर जिला) फूलों की खेती के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC(SEE)2020]
- 🏙️ नगर: जशपुर नगर और कुनकुरी शहर इसी पाट प्रदेश में स्थित हैं। [CG PSC(ACF)2021]
- 💡 विशेष: मैनी नदी जशपुर की पश्चिमी सीमा पर एक छोटी घाटी बनाती है, जिसे काकिया क्षेत्र कहते हैं।
पंडरा पाट
- 📍 स्थित: जशपुर पाट के उत्तर-पूर्व भाग में।
- जिला: जशपुर।
- ऊँचाई: 1123 मीटर।
- 🌊 पहाड़ी: यहाँ स्थित खुरजा पहाड़ी के रानीझुला स्थान से ईब नदी और बखोना चोटी से कन्हार नदी का उद्गम होता है। [CG PSC(ARO)2022]
3. मैनपाट 🌲
- 🏷️ उपनाम: इसे “छत्तीसगढ़ का शिमला” और “छत्तीसगढ़ का तिब्बत/छोटा तिब्बत” भी कहा जाता है। [CG PSC(MI)2014(SEE)2020] [CG PSC(AP)2016]
- 🌍 विस्तार: यह दक्षिण अम्बिकापुर, सीतापुर तहसील (सरगुजा) और धरमजयगढ़ तहसील के उत्तरी भाग में फैला है।
- 🧭 दिशा: उत्तर-मध्य छत्तीसगढ़।
- ↕️ ऊँचाई: 1152 मीटर।
- 🌊 उद्गम: मांड नदी। [CG PSC(Pre)2022]
- 💎 खनिज: बॉक्साइट (वर्तमान में यहाँ से बॉक्साइट की आपूर्ति बाल्को (BALCO) को की जा रही है)। [CG Vyapam (Patwari)2016]
- ** réfugiés:** 1962 में यहाँ तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था। [CG PSC(LAW)2022 (Pre)2016(ARTO)2017]
- 🙏 संस्कृति: यह स्थान छत्तीसगढ़ में तिब्बती संस्कृति (बौद्ध धर्म) का एक प्रमुख केंद्र है। [CG PSC(ADVSH)2011]
- 🏞️ प्रकृति: मैनपाट एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। [CG PSC(YWO)2018]
मैनपाट के आकर्षण
- 🌊 जलप्रपात:
- सरभंजा जलप्रपात: मांड नदी के उद्गम स्थल पर (सरभंग ऋषि का आश्रम)।
- टाइगर प्वाइंट: मैनपाट के पूर्वी हिस्से से महादेव मुड़ा नदी निकलती है, जिस पर यह जलप्रपात स्थित है।
- मछली/फिश प्वाइंट जलप्रपात: यह पहाड़ी नाले पर बना है और यहाँ बहुत सारी मछलियाँ मिलती हैं।
- मेहता प्वाइंट: यह सरगुजा और रायगढ़ की सीमा निर्धारित करता है।
- देवप्रवाह झरना: पहाड़ी नाले से निर्मित झरना।
- ईको प्वाइंट
- 🏞️ घाटियाँ: कदनई, करदन, सकरिया, गोविंदपुर, पैगा।
- 🕳️ गुफाएँ: बंदरकोट, राकामाड़ा, भालूमाड़ा, झील गुफा, पैगा गुफा।
- 🧗 एडवेंचर जोन: परपटिया, मालतीपुरी। [CG PSC(ADJE)2021]
- 📍 स्थिति:
- दक्षिण में: उदयपुर हिल।
- पूर्वी सीमा: मांड नदी।
- पश्चिम में: रेहर नदी।
- उत्तर में: रिहंद की सहायक नदी घुनघुट्टा नदी। [CG PSC(Pre)2021]
पूर्वी बघेलखण्ड का पठार 🌄
- 🌍 विस्तार: यह पठार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा (मैनपाट को छोड़कर) और बलरामपुर (सामरी तहसील को छोड़कर) तक फैला हुआ है।
- 📍 भाग: यह बघेलखण्ड पठार का पूर्वी हिस्सा है, जो इस पठार का लगभग 47.32% है। [CG Vyapam (SI Mains)2023]
- 📏 क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल 21,863 वर्ग किलोमीटर है।
- 📊 प्रतिशत: यह छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का 16.16% है।
- 🧭 ढाल: इस पठार की ढलान उत्तर की ओर है।
- 🌊 नदी अपवाह तंत्र: यहाँ की नदियाँ सोन/गंगा नदी अपवाह तंत्र का हिस्सा हैं।
- 💧 प्रमुख नदियाँ: इस क्षेत्र में बनास, गोपद, रिहन्द, कन्हार, और बीजाल जैसी प्रमुख नदियाँ बहती हैं।
- 🏞️ घेराव: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार देवगढ़ और छुरी की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। [CG Vyapam (CBAS)2023]
- 🗿 बनावट: यह गोंडवाना शैल क्रम (सरगुजा बेसिन) से बना है। [CG PSC(YWO)2018][CG PSC(AP)2016]
- ⏳ युग: इसका निर्माण जुरासिक युग में हुआ। [CG PSC(SEE)2022]
- 💎 खनिज: यहाँ कोयला प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- 🌱 मिट्टी: इस क्षेत्र में लाल-पीली मिट्टी मिलती है।
- 🌽 फसल: यहाँ की मुख्य फसलें मक्का और मोटे अनाज हैं।
- ↔️ जल विभाजक: यह महानदी और गंगा नदी के अपवाह तंत्रों के बीच जल विभाजक का काम करता है।
- ⛰️ घाटी: बनास, रम्पर और गोपद नदियाँ उत्तर-पश्चिम सीमा और उत्तर से बहते हुए संकरी घाटियों का निर्माण करती हैं। रिहन्द और कन्हार नदियाँ मध्यवर्ती मैदान और उत्तरी पाट को अलग करती हैं।
- 🗻 पहाड़ियां: प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, चांगभखार कोरिया क्षेत्र में, बलुआ पत्थर की विषम पहाड़ियाँ हैं।
- 🏔️ ऊँची चोटी:
- मुख्य चोटी: देवगढ़ की पहाड़ी (1033 मी.)।
- अन्य चोटियाँ: मुस्की (1086 मी.), रेनडाहा, तंजारा राजपुरी (1030 मी.), बद्रा (920 मी.), जतरसुखा (990 मी.), धोबोताल, और उमारता।
- 🗺️ उपविभाग (उत्तर से दक्षिण):
- सोहागपुर बेसिन (यह छ.ग. में स्थित नहीं है)
- कन्हार बेसिन
- रिहन्द बेसिन
- देवगढ़ की पहाड़ियां
- सरगुजा बेसिन
- हसदो-रामपुर बेसिन
पूर्वी बघेलखण्ड पठार के उप-विभाग 🗺️
1. सोहागपुर बेसिन
- 💡 नोट: यह बेसिन छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत नहीं आता, बल्कि यह पश्चिम बघेलखण्ड का एक हिस्सा है।
2. कन्हार बेसिन
- 🧭 दिशा: प्रदेश की उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित है।
- 🌊 नदी: यह कन्हार नदी द्वारा बनाया गया बेसिन है।
- 📍 विस्तार: यह बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में फैला है।
3. रिहन्द बेसिन
- 🧭 दिशा: यह उत्तरी सीमांत पर स्थित है।
- 🏷️ उपनाम: इसे सिंगरौली बेसिन भी कहा जाता है।
- 📍 अवस्थिति: उत्तर में देवगढ़ की पहाड़ियों और पश्चिम में कन्हार बेसिन के बीच स्थित है।
- 🗺️ फैलाव: यह बलरामपुर की वाड्रफनगर तहसील में फैला हुआ है।
4. चांगभखार-देवगढ़ की पहाड़ी
- 🏞️ जिला: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया। [CGPSC(ABEQ)2013]
- 🗺️ विस्तार: जनकपुर, बैकुंठपुर, मनेन्द्रगढ़, उत्तरी सूरजपुर, प्रतापपुर, उत्तरी अम्बिकापुर, पश्चिमी कुसमी और दक्षिणी रामानुजगंज।
- 🧭 दिशा: प्रदेश के उत्तरी भाग में। [CGVyapam (TET-2)2024] [CG PSC(Registrar)2018]
- ⛰️ ऊँची चोटी: देवगढ़ (1033 मी.)। इसका उत्तरी हिस्सा बहुत अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। यह उत्तरी छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची भूमि है। [CGVyapam (DCAG)2018] [CG PSC(SEE)2022]
- 💡 तथ्य: यह पहाड़ी उत्तर छत्तीसगढ़ (पूर्वी बघेलखण्ड पठार) की सबसे ऊँची भूमि है। [CG PSC(SEE)2020]
- 💎 खनिज: बेरिल।
- 🌊 नदी: महानदी की सहायक नदी हसदो इसी पहाड़ी से निकलती है।
- 📍 हिस्सा: यह पहाड़ी पूर्वी बघेलखण्ड पठार के अंतर्गत आती है। [CG PSC(Sci. off)2018]
सरगुजा बेसिन / मध्यवर्ती उच्च मैदान
- 🏷️ अन्य नाम: मध्यवर्ती उच्च मैदान (पूर्वी बघेलखण्ड पठार का)।
- 🗺️ विस्तार: अम्बिकापुर, दक्षिणी सूरजपुर, दक्षिणी प्रतापपुर, और पश्चिमी सीतापुर आदि।
- 🔨 निर्माण: यह देवगढ़, मैनपाट और छुरी पहाड़ियों के मध्य रिहन्द बेसिन से बना है।
- 💎 खनिज: कोयला।
- 🌊 नदी: इसके मध्य से रेहर और गुनगुट्टा नदियाँ दक्षिण से उत्तर की ओर बहती हैं।
- 💡 विशेष: नदियों के कटाव के कारण इस क्षेत्र में कई कटी-फटी पहाड़ियाँ और घाटियाँ मिलती हैं। विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला, रामगढ़ की पहाड़ी, इसी बेसिन में है। [CG Vyapam (Lab Tech.)2024]
- 📝 नोट: छत्तीसगढ़ का यह उत्तरी भाग मुख्यतः सतपुड़ा उच्च श्रेणी वाले पठार से बना है। [CGYS(AG-3)2021]
- 🧭 स्थिति:
- दक्षिण-पूर्व में: पाट प्रदेश (मैनपाट, जारंगपाट, सामरीपाट, जशपुरपाट)।
- दक्षिण-पश्चिम में: हसदेव-रामपुर बेसिन।
- उत्तर में: चिरवेन और हराई पहाड़ी।
6. हसदो-रामपुर बेसिन
- 🗺️ विस्तार: सरगुजा से बिलासपुर तक। [CGPSC(ARO)2014][CGPSC(MI)2014]
- 💎 खनिज: कोयला।
- 📍 स्थिति:
- उत्तर में: देवगढ़ की पहाड़ी।
- उत्तर-पूर्व में: सरगुजा बेसिन।
- दक्षिण-पूर्व में: कोरबा बेसिन और छुरी-उदयपुर की पहाड़ी।
- दक्षिण-पश्चिम में: पेंड्रा-लोरमी पठार।
- 🌊 निर्माण: इसका निर्माण हसदेव और उसकी सहायक छोटी नदियों द्वारा हुआ है।
पूर्वी बघेलखण्ड के पठार की प्रमुख भू-स्थलाकृतियाँ ⛰️
1. कुदरगढ़ / सीता लेखानी की पहाड़ी
- 📍 स्थित: बलनारे ग्राम, सूरजपुर। [CG PSC(RDSP, MI) 2022, (Pre)]
- 🏷️ स्थानीय नाम: सीता लेखनी की पहाड़ी।
- 📜 नामकरण: एक किंवदंती के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने इन पत्थरों पर लिखा था, इसलिए इसे सीता लेखनी कहा जाता है।
- 🙏 मंदिर: बागेश्वरी मंदिर / कुदरगढ़ी मंदिर।
- 🎉 मेला: कुदरगढ़ का मेला (रामनवमी पर)।
2. कैमूर पर्वत शृंखला
- 🗺️ विस्तार: कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।
- 🏞️ भाग: यह विंध्याचल पर्वत श्रेणी का हिस्सा है। [CG PSC(ACF)]
3. रामगढ़ की पहाड़ी
- 🗺️ विस्तार: सरगुजा में।
- 🏞️ भाग: सतपुड़ा पर्वत का हिस्सा। [CG PSC(Pre)]
- 🌊 तट: यह रामगढ़ की पहाड़ी मंदाकिनी नदी के किनारे है। [CG Vyapam (VSAM)2]
- ⛰️ गुफा: सीताबेंगरा, जोगीमारा, लक्ष्मणबेंगरा।
- 🕵️♂️ खोजकर्ता: कर्नल आउस्ले (1848 ई.)।
- 📖 प्रकाशन: जर्मन डॉ. ब्लॉस ने 1904 में इसे आर्कियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट में प्रकाशित किया।
- 📜 साक्ष्य: यहाँ इतिहास के कई काल-खण्डों के साक्ष्य मिलते हैं:
- रामायणकालीन: सीताबेंगरा गुफा, सीता कुंड, लक्ष्मण बेंगरा, रावण दरवाजा, तुर्रा पानी, रामगढ़ का किला।
- मौर्यकालीन: जोगीमारा की गुफा।
- गुप्तकालीन: महाकवि कालिदास ने अपने यात्रा वृतांत में रामगढ़ को ‘रामगिरी’ कहा है।
रामगढ़ पहाड़ी और अन्य पहाड़ियों का विवरण 📜
सीताबेंगरा
- यह विश्व की सबसे पुरानी नाट्यशाला है, जिसे सरगुजा की अजंता गुफा भी कहते हैं। [CG PSC(TSI)2024,(ARO)2022,(SEE)2020]
- कालिदास कृत ‘मेघदूतम्’ के अनुसार यहाँ आषाढ़ महीने में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे।
- माना जाता है कि 200 ई.पू. में भरतमुनि ने यहीं नाट्यशास्त्र की रचना की थी।
जोगीमारा
- यह एक मौर्यकालीन गुफा है जो सीताबेंगरा गुफा के पास है। [CG PSC(ADI)2016]
- यहाँ नर्तक देवदत्त और सुतनुका की प्रेम कहानी का वर्णन है।
- गुफा में लिखे लेख की भाषा पाली और लिपि ब्राह्मी है।
लक्ष्मण बेंगरा
- यह जोगीमारा गुफा के समकालीन है।
हाथीपोल की गुफा
- इस गुफा में एक विशाल सुरंग है जहाँ से एक हाथी आसानी से निकल सकता है। इसके अंदर एक कुंड है जिसे सीता कुंड कहते हैं।
4. मांजटोली की पहाड़ी
- 📍 जिला: मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी।
- 🌊 नदी उद्गम: यहाँ से बनास नदी निकलती है।
5. सोनहत की पहाड़ी
- 📍 जिला: मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी।
- 💎 खनिज: यह एक कोयला क्षेत्र है, जहाँ मुख्य रूप से अर्द्ध-कोकिंग कोयला मिलता है।
महानदी बेसिन का परिचय 🏞️
महानदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित प्रवाह क्षेत्र को ही महानदी बेसिन के नाम से जाना जाता है। इसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
- 🏷️ उपनाम: इसे ‘छत्तीसगढ़ का मैदान’, ‘महानदी का मैदान’ या ‘मध्य भारत का धान का कटोरा’ भी कहा जाता है। इसे राज्य का हृदय स्थल भी माना जाता है। [CG PSC(Lib)]
- 🌍 विस्तार: इस बेसिन के अंतर्गत राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, रायपुर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा, रायगढ़ और सारंगढ़ जिले शामिल हैं।
- 📍 स्थिति: यह मध्य छत्तीसगढ़ में स्थित है, जिसमें बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग आते हैं।
- 📏 क्षेत्रफल: इसका क्षेत्रफल 68,064 वर्ग किलोमीटर है, जो प्रदेश का सबसे बड़ा भौतिक विभाग है।
- 📊 प्रतिशत: यह छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का 50.34 प्रतिशत है, यानी यह राज्य के आधे हिस्से में फैला हुआ है। [CG Vyapam (SI Mains)]
- 🌀 आकृति: इसकी आकृति पंखे (चापाकार) या तश्तरी (तस्तरी नुमा) जैसी है।
- 🧭 ढाल: इस बेसिन का ढलान पूर्व दिशा की ओर है। [CG PSC(Pre)]
- ⛰️ ऊँचाई: मध्य क्षेत्र में इसकी ऊँचाई 300 मीटर से कम है।
- 🔨 निर्माण/बनावट: इसका निर्माण कड़प्पा शैल समूह की क्षैतिजिक अवसादी चट्टानों पर हुआ है। महानदी बेसिन के लगभग 50% क्षेत्र में कड़प्पा शैल समूह मौजूद हैं, जबकि कुछ हिस्सों में आर्कियन, गोंडवाना (रायगढ़, कोरबा), दक्कन ट्रैप और धारवाड़ क्रम की चट्टानें भी मिलती हैं। [CG PSC(AAD&SO)2018] [CGVyapam (VDAG)]
- 💎 खनिज: यहाँ चूना पत्थर, डोलोमाइट और कोयला प्रमुख खनिज हैं।
- 🏔️ सबसे ऊँची चोटी: बदरगढ़ (1176 मी.), कबीरधाम।
- 🌱 मिट्टी: इस क्षेत्र में लाल-पीली और काली मिट्टी पाई जाती है।
महानदी बेसिन का वर्गीकरण 🗺️
महानदी बेसिन को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
- (A) छत्तीसगढ़ का मैदान
- (B) सीमांत उच्च भूमि
(A) छत्तीसगढ़ का मैदान
- 🏷️ उपनाम: महानदी बेसिन।
- 📏 क्षेत्रफल: 31600 वर्ग किलोमीटर।
- 🌀 आकृति: पंखाकार।
- 🔨 उत्पत्ति: इसका निर्माण कड़प्पा शैल समूह की क्षैतिजिक अवसादी चट्टानों पर महानदी और उसकी सहायक नदियों के कटाव और जमाव से हुआ है।
1. शिवनाथ-महानदी दोआब
- 📍 स्थिति: यह मैदानी क्षेत्र महानदी बेसिन के दक्षिणी हिस्से में स्थित है। [CG PSC(ADVS)2013]
- 🗺️ विस्तार: इसके विस्तार में दुर्ग और रायपुर जिलों के सभी क्षेत्र, बलौदाबाजार जिले के अधिकांश क्षेत्र, और बेमेतरा, बालोद, महासमुंद जिलों के कुछ हिस्से शामिल हैं।
- 🌊 प्रवाह क्षेत्र: यहाँ की मुख्य नदियाँ शिवनाथ और खारून हैं। इस क्षेत्र की नदियाँ सीधी बहती हैं और उनकी सहायक नदियाँ पहाड़ों से अर्धचंद्राकार रूप में आकर मिलती हैं।
- 🗿 शैल समूह: कड़प्पा शैल समूह।
- 💎 खनिज: चूना पत्थर।
- 🌱 मिट्टी: काली मिट्टी, मिश्रित लाल और रेतीली मिट्टी।
2. शिवनाथ पार का मैदान
- 🧭 स्थिति: यह मैदानी इलाका शिवनाथ नदी के पश्चिमी भाग में पड़ता है। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के मैदान का पश्चिमी भाग आता है।
- 🌊 प्रवाह क्षेत्र: मैकल श्रेणी से निकलने वाली आमनेर, सुरही, कर्रा, हाफ जैसी नदियाँ यहाँ बहती हैं।
- 🗿 शैल समूह: कड़प्पा शैल समूह।
- 🌱 मिट्टी: यहाँ की भांठा भूमि के नीचे ‘मटासी’ और ‘डोरसा’ नामक पीली, छिद्रयुक्त और रेतीली मिट्टी पाई जाती है। डोरसा मिट्टी पीली और काली मिट्टी का मिश्रण होती है। यहाँ नए जमे हुए गाद (सिल्ट) को ‘कछार’ कहा जाता है।
3. बिलासपुर का मैदान
- 🗺️ विस्तार: जांजगीर, बिलासपुर और मुंगेली के क्षेत्र।
- 📍 स्थिति: यह महानदी बेसिन का उत्तरी हिस्सा है। इसके:
- पश्चिम में: अरपा-लीलागर का मैदान, मैकल पर्वत श्रेणी।
- पूर्व में: हसदो-मांड का मैदान।
- उत्तर-पश्चिम में: पेण्ड्रा-लोरमी का पठार।
- उत्तर-पूर्व में: हसदो बेसिन, छुरी-उदयपुर की पहाड़ियाँ।
- 🌊 प्रवाह क्षेत्र: अरपा, आगर, मनियारी और लीलागर नदियाँ।
- 🧭 ढाल: दक्षिण-पूर्व की ओर।
- 🌱 मिट्टी: लाल-पीली, काली और मिश्रित मिट्टियाँ।
- ⛰️ पहाड़ी: रतनपुर और सेन्टी की पहाड़ी।
- 💡 विशेष: लोरमी और हसदेव बेसिन के बीच पेंड्रा का पठार स्थित है।
4. हसदो-मांड बेसिन
- 🗺️ विस्तार: इसका फैलाव कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती और रायगढ़ जिलों में है।
- 📍 स्थित: यह क्षेत्र चंवरढाल (कुम्हार पहाड़) और सारंगढ़ पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह छत्तीसगढ़ बेसिन के उत्तर-पूर्व में हसदेव और मांड नदी के मध्य का क्षेत्र है।
- 🌊 प्रवाह: यहाँ हसदो, मांड और केलो नदियाँ बहती हैं।
- 🏞️ बेसिन:
- 1. कोरबा बेसिन: हसदेव नदी द्वारा निर्मित इस बेसिन का विस्तार कटघोरा और कोरबा तहसील में है। इसकी समुद्र तल से औसत ऊँचाई 250-300 मीटर है।
- 2. रायगढ़ बेसिन: मांड और केलो नदी द्वारा निर्मित यह बेसिन रायगढ़ जिले में है। इसकी औसत ऊँचाई 300 मीटर है। इस बेसिन की सीमा पर छोटी-छोटी पहाड़ियों की श्रृंखला है, जिसे ‘चंवरढाल’ कहते हैं।
- 💡 विशेष: यह बेसिन पूर्व की ओर धीरे-धीरे संकरा होता जाता है। इस क्षेत्र में कड़प्पा युग की चूने की चट्टानों पर जमा हुआ एक विशाल जलोढ़ मैदान है।
5. महानदी पार का संकरा मैदान
- 🗺️ विस्तार: इस मैदान के अंतर्गत धमतरी का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, तथा रायपुर और बलौदाबाजार के पश्चिमी हिस्से शामिल हैं।
- 📍 स्थित: यह महानदी के पूर्व में एक संकरी पट्टी के रूप में है, जो छत्तीसगढ़ के मध्य भाग से पूर्व की ओर किनारे-किनारे फैली है। इसके:
- पूर्व में: रायपुर की उच्च भूमि।
- पश्चिम में: महानदी-शिवनाथ दोआब क्षेत्र।
- ⛰️ ऊंचाई:
- औसत ऊंचाई 305 मीटर।
- उत्तरी भाग की समुद्र सतह से ऊंचाई लगभग 245 मीटर।
- पूर्वी भाग में चौड़ाई 13-16 किलोमीटर तक।
- 🗿 चट्टान: यहाँ कड़प्पायुगीन शैल और चूना युक्त चट्टानें मिलती हैं।
दलहा पहाड़ 🏔️
- 📍 स्थान: अकलतरा, जांजगीर-चांपा। [CG PSC(ARO)2022, (ARTO)2017]
- 🏷️ अन्य नाम: सिन्दुरगिरी / सिंघुलगिरी।
- 📜 नामकरण:
- जनश्रुति: एक मान्यता के अनुसार, यहीं पर भगवती महासती का सिन्दूर गिरा था।
- भौगोलिक कारण: आस-पास का क्षेत्र दलदली होने के कारण इसे ‘दलदला पहाड़’ कहा जाने लगा।
- एक अन्य कारण: यहाँ छोटी-छोटी पहाड़ियों के कई समूह (दल) हैं, और ‘दलबद्ध’ होने की वजह से ही इसे दलहा कहते हैं।
- ⛰️ ऊँचाई: 760 मीटर।
- 🙏 मंदिर: 1. नागेश्वर शिव मंदिर, 2. भगवती विश्वेश्वरी मंदिर (यहाँ प्रतिमा छिन्नमस्ता अर्थात् सिर विहीन है)।
- 🧘 आश्रम: सिद्ध बाबा का आश्रम।
- 🎉 मेला: नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी) पर स्थानीय लोग सर्प को दूध पिलाने आते हैं और कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
- 💡 विशेष: विश्वेश्वरी देवी को स्थानीय लोग ‘हिंगलाज माई’ के नाम से जानते हैं और इसे ‘सिन्दुर शक्ति पीठ’ के रूप में पूजते हैं।
(B) सीमांत उच्च भूमि: एक अवलोकन 🌄
- 📏 क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल 36,464 वर्ग किलोमीटर है।
- 📍 स्थिति: यह उच्च भूमि छत्तीसगढ़ के मैदान के चारों ओर फैली हुई है।
- 🌍 विस्तार: इसके अंतर्गत कवर्धा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, और महासमुंद जिले आते हैं।
- 🗿 निर्माण: इसका निर्माण आर्कियन, गोंडवाना और दक्कन ट्रैप जैसे विभिन्न शैल समूहों से हुआ है।
- 🗺️ उप-विभाग: भू-वैज्ञानिक संरचना में विविधता और नदियों द्वारा कटाव के कारण, सीमांत उच्च भूमि को निम्नलिखित उप-विभागों में विभाजित किया गया है:
मैकल श्रेणी ⛰️
- 🌍 विस्तार: राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कबीरधाम, लोरमी और पेंड्रा-गौरेला-मरवाही तक। [CG PSC (Reg.)2021, (Eng.)2015]
- 📍 स्थिति: यह श्रेणी छत्तीसगढ़ के पश्चिमी भाग में एक दीवार की तरह खड़ी है। [CG PSC(AP)2009]
- 🧭 ढाल: इसका ढलान पश्चिम से पूर्व की ओर (West to East) है। [CG PSC (ITI Pri.) 2016]
- 🏞️ भाग: यह सतपुड़ा पर्वत का पूर्वी किनारा है।
- 🗺️ निर्धारण:
- यह खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और कवर्धा की दक्षिण-पश्चिमी सीमा बनाती है। [CG PSC (EAP)2016]
- यह मध्यप्रदेश के मण्डला जिले और छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के बीच सीमा रेखा का काम करती है।
- ↔️ जल विभाजक:
- यह शिवनाथ नदी और वैनगंगा नदी के बीच जल विभाजक है।
- यह ऊपरी महानदी बेसिन को ऊपरी नर्मदा बेसिन से अलग करती है। [CG PSC(MI)2018]
- 🏔️ ऊँची चोटी:
- 1. बदरगढ़ (1176 मी.): कबीरधाम जिले में स्थित है और यह छत्तीसगढ़ के पश्चिमी भाग की सबसे ऊँची चोटी है। [CG PSC(Pre)2008]
- अन्य: झाला पहाड़ (1136 मी.), देवसानी पहाड़ (1125 मी.), बाह्मनगढ़ (1127 मी.), लीलावनी, भरकुण्ड।
- 🏞️ घाटी:
- चिल्फी घाटी, कवर्धा (NH-30): (प्रस्तावित) टाइगर रिजर्व।
- बृजवानी घाटी (NH-53): राजनांदगांव।
- शिवनाथ घाटी
- 💧 उद्गम स्थल:
- कांदावानी (कबीरधाम): यहाँ से हाफ नदी का उद्गम होता है।
- कुलहाड़ी / कुलहारी की पहाड़ी (मोहला-मानपुर-अ.चौकी): यहाँ से बाघ नदी का उद्गम होता है।
- प्रज्ञागिरी की पहाड़ी (राजनांदगांव)
- 🌦️ वृष्टिछाया: मैकल श्रेणी के कारण कबीरधाम जिला एक वृष्टिछाया क्षेत्र में आता है। [CG PSC(ARTO)2017]
- 🌳 वन: मैकल श्रेणी के पूर्वी भाग (कबीरधाम, मुंगेली, आदि) में साल (Sal Forest) के वन पाए जाते हैं। [CG PSC(Registar)2017]
- 👥 जनजाति: इस क्षेत्र में बैगा और अगरिया जनजातियाँ निवास करती हैं। [CG Vyapam (AGDO)2018]
- 💡 विशेष: अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व इसी क्षेत्र में स्थित है। इसके दक्षिण-पश्चिम में महोबा डोंगर पर्वत है, जिसकी समुद्र सतह से औसत ऊँचाई लगभग 800 मीटर है।
2. उत्तरी उच्चभूमि (छुरी-उदयपुर की पहाड़ी) 🗻
उत्तरी उच्च भूमि को छुरी-उदयपुर की पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसका विस्तार कोरबा से लेकर रायगढ़ जिले तक है और यह महानदी बेसिन के उत्तर में स्थित है। इसके दो मुख्य भाग हैं:
1. छुरी पहाड़ी
- 🗺️ विस्तार: कोरबा (सर्वाधिक)। [CG PSC(Pre)2021]
- 📍 स्थिति: यह महानदी बेसिन के उत्तर में स्थित है, जिसके:
- पश्चिम में: हसदो नदी, पेण्ड्रा पठार।
- पूर्व में: मांड नदी।
- उत्तर में: महादेव पहाड़।
- दक्षिण-पश्चिम में: हसदो-रामपुर बेसिन, कोरबा बेसिन।
- ⛰️ पर्वत श्रेणियाँ: केरता/केरला पहाड़ (967 मी.), पउनाखेड़ा (969), पुटका पहाड़, बिजौरा पहाड़ (1089)।
- 🌊 नदी: रिहन्द नदी का उद्गम स्थल।
- 📏 औसत ऊँचाई: 450-1000 मीटर।
- 🗿 शैलसमूह: यहाँ गोंडवाना शैल समूह, तालचेर और बाराकर श्रेणी की चट्टानें पाई जाती हैं। [CG Vyapam (FI)2018]
- 💎 खनिज: रेत, पत्थर और शैल संस्तरों के बीच कोयले का बड़ा भंडार है। [CG Vyapam (FI)2018]
2. उदयपुर पहाड़ी
- 🗺️ विस्तार: रायगढ़।
- 📍 स्थिति: यह रायगढ़ जिले के उत्तर-पश्चिम मध्यवर्ती भाग में स्थित है, जिसके:
- पश्चिम में: छुरी हिल्स, माण्ड नदी।
- पूर्व में: कुरकुट नदी।
- उत्तर में: मैनपाट (इसका उत्तरी भाग नीच घाट से जुड़ा हुआ है)।
- 🏔️ पहाड़ी: समुद्रतल से 723 मी. ऊँची लैलूंगा पहाड़ी, जहाँ से केलो नदी का उद्गम होता है।
- ⛰️ ऊँची चोटी: मैनीफर (760 मी.), लाम पहाड़, बारखोवा डोंगर, महादेव पहाड़ (988 मी.), और अन्य पहाड़ियाँ। [CG PSC(ADPO)2021]
उत्तरी उच्चभूमि की अन्य स्थलाकृतियाँ 🌄
- 💡 विशेष: गज और चोरनई नदियाँ पूर्व और पश्चिम दिशा से आकर हसदेव नदी में मिलती हैं। यह श्रेणी हसदेव नदी द्वारा मैकल श्रेणी से अलग होती है।
- 📝 नोट: छुरी-उदयपुर पहाड़ी का विस्तार रायगढ़ से कोरबा तक है। [CG PSC(Pre)2015]
■ चंवरढाल पर्वत शृंखला
- 🗺️ विस्तार: जांजगीर-चांपा, सक्ती और खरसिया का मैदान (रायगढ़)। [CGPSC(ARTO)2022]
- 📖 परिचय: छत्तीसगढ़ बेसिन को उत्तरी उच्च भूमि से अलग करने के लिए रायगढ़ के दक्षिण-उत्तरी भाग में छोटी-छोटी पहाड़ियों की एक श्रृंखला है, जिसे चंवरढाल कहते हैं।
- 🏷️ अन्य नाम: कुम्हार पहाड़। [CG Vyapam (SAAF)2018]
- 🕳️ स्थित: सिंघनपुर की गुफा। [CG PSC (IMO)2020]
■ पेण्ड्रा-लोरमी का पठार
- 🏞️ भाग: यह मैकल-श्रेणी का विच्छेदित (कटा-फटा) पठार है। इस क्षेत्र में वर्षा कम होती है।
- 🏔️ प्रमुख चोटी:
- पलमा चोटी (1080 मी.): गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। [CG Vyapam (VPR)2021]
- लाफागढ़ (1048 मी.): कोरबा।
- चंदेली पहाड़ (821 मी.): लोरमी।
- 🏰 पर्यटन स्थल: चैतुरगढ़ (लाफागढ़)। [CG Vyapam (VSAM)2024]
- 🌍 विस्तार: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, कोरबा जिले में।
- 📍 क्षेत्र: पण्डरिया तहसील, लोरमी, पेण्ड्रा और कटघोरा तहसील।
- 💡 विशेष: हाफ नदी इसकी पश्चिमी सीमा बनाती है। अचानकमार वन्य जीव अभ्यारण्य इसी श्रृंखला पर स्थित है।
3. दक्षिणी उच्चभूमि 🏜️
- 🗺️ विस्तार: इस क्षेत्र के अंतर्गत मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर का दक्षिण-पूर्वी भाग आता है।
- ↔️ जल विभाजक: यह गोदावरी अपवाह तंत्र और महानदी की सहायक नदी शिवनाथ के मध्य जल विभाजक का कार्य करता है।
- ⛰️ चोटी: 1. डोंगरबोर (700 मी.), 2. कौचार (597 मी.)।
■ कुटक राजहरा पहाड़ी
- 📍 स्थिति: बालोद जिले में खरखरा और तान्दुला नदियों के मध्य।
- 📏 ऊँचाई: 674 मीटर।
- 💎 निक्षेप: लौह निक्षेप।
4. पूर्वी उच्च भूमि 🌄
- 🏷️ अन्य नाम: इसे रायपुर उच्च भूमि भी कहा जाता है।
- 🌍 विस्तार: यह रायपुर संभाग में फैला हुआ है।
- 📍 स्थिति: यह रायपुर संभाग के दक्षिण-पूर्वी भाग में एक अर्धचंद्राकार (आधे चाँद जैसी) आकृति में स्थित है।
- 🏞️ प्रमुख भाग:
- सोनबेरा पठार (सबसे ऊँचा भाग)
- सिहावा पहाड़ी
- बसना बेसिन
- सोनाखान पहाड़ी
- छाता पहाड़
■ सोनबेरा पठार
- 🗺️ विस्तार: यह गरियाबंद और महासमुंद जिलों में फैला है।
- 🏞️ भाग: यह पूर्वी उच्च भूमि का सबसे ऊँचा हिस्सा है। [CG PSC(ADA)21]
- 💧 उद्गम: जोंक नदी का उद्गम स्थल।
- 🏞️ बेसिन: इसके उत्तर-पूर्वी भाग में बसना बेसिन स्थित है।
■ सिहावा पर्वत
- 📍 जिला: धमतरी।
- 📜 प्राचीन नाम: इसका प्राचीन नाम सुक्तिमती था। [CG Vyapam (Chemist)20]
- 🌊 उद्गम: यहाँ के फरसिया नामक स्थान के गणेश घाट से महानदी का उद्गम होता है। [CG PSC(Registrar)20]
- 🙏 आश्रम: यहाँ सप्तशृंगी ऋषि का आश्रम है। सप्त ऋषियों (श्रृंगी, अगस्त्य, गौतम, मुचकंद, अंगिरा, कंक, शरभंग) के आश्रम यहीं थे। [CG Vyapam (TET-2)20]
- 🏛️ मंदिर: कर्णेश्वर महादेव मंदिर (राजा कर्णेश्वर द्वारा निर्मित)।
- 🎉 मेला: कर्णेश्वर महादेव मेला।
- ⛰️ अन्य पहाड़: मुंडागिरी (680 मी.), बोरड़ पहाड़ (617 मी.), काटीगांव (631 मी.), गिधावा पर्वत (732 मी.)।
■ बसना बेसिन
- 🧭 स्थिति: उत्तर-पूर्वी भाग (रायपुर की उच्च भूमि का हिस्सा)।
■ शिशुपाल पर्वत
- 📍 जिला: महासमुंद।
- 🌊 जलप्रपात: घोड़ाधार (कथाओं के अनुसार, एक राजा ने घोड़े की आँखों पर पट्टी बांधकर इसी जलप्रपात में छलांग लगा दी थी)।
- 📏 ऊँचाई: 899 मी. (इसकी ऊँची चोटी का नाम धारीडोंगरी है)।
■ भातृनवागढ़ की पहाड़ी
- 📍 जिला: गरियाबंद।
■ छाता पहाड़
- 📍 जिला: बलौदाबाजार।
- 💡 विशेष: यह स्थल सतनाम पंथ के संस्थापक, संत गुरु घासीदास जी से संबंधित एक पवित्र तीर्थ स्थल है। [CG PSC(ITI Pri.)201]
सीमांत उच्च भूमि की अन्य स्थलाकृतियाँ 🏞️
1. दुर्ग सीमान्त उच्च भूमि
- 🗺️ विस्तार: डौंडीलोहारा (बालोद), अम्बागढ़ चौकी।
- ⛰️ पहाड़ियाँ: राजहरा की पहाड़ी और डोंगरगढ़ की पहाड़ी।
- 💡 विशेष: दल्लीराजहरा की पहाड़ी का विस्तार मानपुर क्षेत्र और बालोद जिले तक है। यह खरखरा और तांदुला नदी के दोआब में स्थित है।
2. लुड़ेग की पहाड़ी
- 📍 जिला: रायगढ़ (धरमजयगढ़ और लैलूंगा क्षेत्र)।
- 💧 नदी: केलो नदी का उद्गम (लैलूंगा क्षेत्र से)।
3. दल्लीराजहरा की पहाड़ी
- 📍 जिला: बालोद।
- 💎 खनिज: लौह अयस्क (हेमेटाईट प्रकार का)।
- 🏭 आपूर्ति: पूर्व में यहाँ से भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति की जाती थी।
- 🏢 स्वामित्व: भिलाई इस्पात संयंत्र।
4. बोरियाटिब्बु
- 📍 जिला: मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी।
- 💎 खनिज: लौह अयस्क।
पर्वतों के प्राचीन नाम 📜
| प्राचीन नाम | वर्तमान नाम |
| सुक्तिमती पर्वत | सिहावा पर्वत |
| सोम पर्वत | अमरकंटक पर्वत |
| हस्तु पर्वत | कोरबा, रायगढ़ क्षेत्र के पर्वत |
छत्तीसगढ़ की प्रमुख बेसिन और उनकी स्थिति 🗺️
| बेसिन | स्थिति |
| कन्हार बेसिन | रामानुजगंज (बलरामपुर) |
| सिंगरौली (रिहन्द) बेसिन | वाड्रफनगर (बलरामपुर) |
| सरगुजा बेसिन | सरगुजा एवं सूरजपुर |
| हसदो-रामपुर बेसिन | बिलासपुर से सरगुजा |
| हसदो-मांड बेसिन | कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती एवं रायगढ़ |
| बसना बेसिन | महासमुंद |
| कोटरी / कांकेर बेसिन | कांकेर |
| उर्मिल (गोदावरी-शबरी) बेसिन | बीजापुर से सुकमा |
दण्डकारण्य का पठार 🌳
- 🌍 विस्तार: दण्डकारण्य का पठार छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा राज्यों में फैला है। इसका उत्तरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में आता है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में कांकेर के पखांजुर में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के विस्थापितों को बसाने के लिए 1971 में दण्डकारण्य परियोजना शुरू की थी। [CG Vyapam (HCAG)2018, (FI)2022, (ASO, BLI)2018]
- 📖 परिचय: यह प्रदेश छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह धारवाड़युगीन शैल, ग्रेनाइट और नीस से समृद्ध है, जिस कारण यहाँ लोहा, टिन, कोरंडम, अभ्रक, और हीरा जैसे खनिज पाए जाते हैं। इसलिए इस क्षेत्र को “खनिजों की भूमि” भी कहा जाता है।
- 🗺️ विस्तार: सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोण्डागांव, बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और मोहला तहसील (मो-मा-अ.)।
- 📍 स्थिति: छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित है, जिसके:
- उत्तर में: महानदी का मैदान।
- दक्षिण में: गोदावरी घाटी।
- पूर्व में: ओडिशा का कोरापुट पठार और शबरी नदी घाटी।
- पश्चिम में: वेनगंगा और गोदावरी नदी घाटी।
- 📏 क्षेत्रफल: 39,060 वर्ग किलोमीटर।
- 📊 प्रतिशत: 28.91 प्रतिशत।
- 🏞️ उप-विभाग:
- कोटरी-महानदी का मैदान (कांकेर बेसिन)।
- अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ।
- उत्तर-पूर्वी पठार।
- दक्षिण का पठार।
- गोदावरी शबरी का मैदान।
- 🧭 ढाल: दक्षिण की ओर।
- 🌊 अपवाह तंत्र: गोदावरी नदी अपवाह तंत्र। गोदावरी-शबरी नदियों का जलग्रहण क्षेत्र इसी भौतिक विभाग में स्थित है। [CGPSC(Pre)2023]
- 💧 प्रमुख नदियाँ: कोटरी (उत्तर-पश्चिम), इन्द्रावती (मध्य), नारंगी, डंकिनी-शंखिनी, शबरी आदि।
- 🏔️ चोटी: नंदीराज (1210 मी.)। यह प्रदेश की दूसरी और दक्षिण छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है। [CGPSC(Lib & SO)2019]
- 🗿 शैल: आर्कियन तथा धारवाड़।
- 💎 प्रमुख खनिज: लौह अयस्क, टिन। [CG Vyapam (ASO) 2012]
- 🌳 वन: साल वन (इसे “साल वनों का द्वीप” भी कहा जाता है)।
दण्डकारण्य पठार के प्रमुख उप-विभाग 🏞️
01. कोटरी-महानदी का मैदान (कांकेर बेसिन)
- 📏 औसत ऊँचाई: 300-500 मीटर।
- ↔️ चौड़ाई: इस बेसिन की अधिकतम चौड़ाई लगभग 60 किलोमीटर है।
- 📍 स्थिति: यह मैदान कांकेर बेसिन के उत्तर में महानदी बेसिन के निकट, दण्डकारण्य के उत्तरी भाग में स्थित है। इसके पश्चिमी भाग में कोटरी नदी उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है। यह दण्डकारण्य का पठार महानदी और गोदावरी नदी बेसिन के बीच स्थित है। [CG PSC(Pre)2023]
- 💡 विशेष: यह प्रदेश के उत्तरी भाग में प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।
02. कोटरी नदी बेसिन
- 🧭 स्थिति: यह छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है। [CG PSC(Registrar)2017]
03. अबूझमाड़ की पहाड़ी 🌲
- 📖 अर्थ: “अबूझ” का अर्थ है ‘जिसे समझा न जा सके’ या ‘अनजान/अज्ञात’, और “माड़” का अर्थ है ‘पर्वत’। इस प्रकार, अबूझमाड़ का तात्पर्य एक अनजान पर्वतीय क्षेत्र से है।
- 🌍 विस्तार: यह नारायणपुर जिले में, दण्डकारण्य के दक्षिण-पश्चिम भू-भाग में स्थित है। [CG PSC (ITI Pri.) 2016], [CGVyapam (ESC) 2017, (HW) 2024]
- 📏 औसत ऊँचाई: 600-800 मीटर।
- 📍 स्थिति:
- उत्तर में: कोटरी नदी मैदान।
- उत्तर-पूर्व में: रावघाट की पहाड़ी।
- दक्षिण में: इंद्रावती नदी।
- पूर्व में: बोरडिंग नदी (इंद्रावती की सहायक)।
- 🗿 निर्माण: इसका निर्माण ग्रेनाइट और नाइस शैलों से हुआ है।
- 🏷️ उपनाम: इसे “छत्तीसगढ़ का चेरापूंजी” (औसत वर्षा 187 से.मी.) भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ सर्वाधिक वर्षा होती है। इसी पर्वत श्रृंखला के कारण नारायणपुर सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आता है। [CGPSC(Reg.)2021(ACF)2016(ADJ)2018]
- ⛰️ शैल: इस पहाड़ी की उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी सीमाओं पर धारवाड़ तथा कड़प्पा की चट्टानें मिलती हैं।
- 🏞️ घाटी: खुरसेल घाटी। यहाँ सर्वोच्च गुणवत्ता के सागौन वन पाए जाते हैं। [CG PSC(ADA)2023], [CG PSC(Pre)2016]
- 👥 जनजाति: अबूझमाड़िया।
- 🐊 नदी: जाटलूर नदी में प्राकृतिक रूप से मगरमच्छ पाए जाते हैं।
- 💡 विशेष: यह बस्तर के पठार का सबसे अधिक ऊँचाई वाला क्षेत्र है। सोनपुर की घाटी इस पहाड़ी के उत्तरी हिस्से को शेष भाग से अलग करती है, और इंद्रावती नदी घाटी अबूझमाड़ को दक्षिण की ओर से सीमांकित करती है। [CG PSC(ADD&SO)2018]
04. उत्तर-पूर्वी पठार
- 🏷️ अन्य नाम: बस्तर का पठार।
- 🌍 विस्तार: उत्तर में कोण्डागांव से लेकर दक्षिण-पूर्व में जगदलपुर तहसील तक।
- 🗿 चट्टान: यह ग्रेनाइट तथा नीस शैल से बना है।
- 📍 स्थिति:
- उत्तर में: तेलिन घाटी।
- उत्तर-पश्चिम में: मतला घाटी।
- दक्षिण में: तुलसी डोंगर (दरभा घाटी)।
- दक्षिण-पश्चिम में: टंगरी डोंगर (बस्तानार)।
- 🌀 आकृति: गुम्बदाकार (गोल)।
- 📏 औसत ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 800 मीटर ऊँचा।
05. दक्षिण का पठार
- 🌍 विस्तार: दण्डकारण्य के अधिकांश भाग, बीजापुर, और सुकमा के कोंटा तहसील के ऊपरी हिस्सों में।
- 📍 स्थिति: अबूझमाड़ की पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी पठार के दक्षिण में। इस पठार के पूर्व में सुकमा घाटी है।
- 🗿 निर्माण: ग्रेनाइट और नाइस चट्टानों से।
- 💡 पहाड़ी: इसके मध्य में बैलाडीला की पहाड़ी स्थित है।
06. गोदावरी-शबरी का मैदान
- 📍 स्थिति: गोदावरी और शबरी नदी के मध्य का क्षेत्र। [CG PSC (CMO) 20]
- 🏷️ उपनाम: इसे “उर्मील बेसिन” भी कहते हैं।
- 🌍 विस्तार: उत्तर में बीजापुर तहसील से लेकर दक्षिण में कोंटा तहसील तक।
- 📏 औसत ऊँचाई: 300 मीटर से कम।
- 💎 खनिज: टिन की प्राप्ति। [CG PSC(ACF) 20:]
- 💡 विशेष: शबरी घाटी के मैदान की मिट्टी लाल-दोमट है, जो अनुपजाऊ होती है। इसके उत्तर में अलबका की पहाड़ियाँ और बीजापुर तहसील के पश्चिम में उसुर की पहाड़ी स्थित है।
दण्डकारण्य पठार की अन्य स्थलाकृतियाँ 🗺️
1. रावघाट की पहाड़ी
- 🧭 स्थिति: अबूझमाड़ पहाड़ी के उत्तर-पूर्व में।
- 📍 जिला: कांकेर।
- 💎 खनिज: लौह अयस्क के 6 विभिन्न भंडार।
- 🏭 आपूर्ति: वर्तमान में यहाँ से भिलाई स्टील प्लांट को लौह अयस्क की आपूर्ति की जा रही है। [CG Vyapam (E.Chem.)2016]
2. आरीडोंगरी पहाड़ी
- 📍 जिला: भानुप्रतापपुर तहसील क्षेत्र (कांकेर जिले)।
- 💎 खनिज: यह लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध है। [CG Vyapam (MFA)2023][CG PSC(ABEO)2013]
3. गढ़िया पहाड़ी
- 📍 जिला: कांकेर जिले में। [CG PSC(AP)2019, (Sci Off.)2022, (SO&CMO)] [CG PSC(ACF)2016]
- 🎉 महोत्सव: इस पहाड़ी पर सितम्बर महीने में गढ़िया महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
- 🏞️ तालाब: रूपई और सोनई तालाब (इनका नामकरण राजा की दोनों बेटियों के नाम पर हुआ था, जिनकी तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई थी)।
- 🕳️ गुफा: जुड़ीपगार गुफा / छुरीपगार गुफा।
4. केशकाल घाटी
- 📜 नामकरण: इस स्थान पर “केशलु” नामक व्यक्ति शेर से युद्ध करते हुए मारा गया था।
- 🗺️ विस्तार: कोण्डागांव।
- 🚪 उपनाम: बस्तर का प्रवेश द्वार; छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जल विभाजक पर्वत।
- 🏞️ घाटी:
- 1. तेलिन घाटी: कोण्डागांव। यहाँ तेलिन माता का सती मंदिर है और यहाँ तेलिन माता महोत्सव मनाया जाता है। [CG PSC(EAP)2016]
- 2. केशकाल घाटी: जल विभाजक घाटी।
- ↔️ विभाजक:
- गोदावरी नदी प्रणाली और महानदी प्रणाली के मध्य।
- छत्तीसगढ़ बेसिन और बस्तर पठार के बीच सीमा बनाती है।
- महानदी और इन्द्रावती के मध्य जल विभाजक है।
- 💎 खनिज: बॉक्साइट।
- 🌳 वन: साल वन।
- 🏨 हिल स्टेशन: टाटामारी।
5. मलाजकुण्डम पहाड़ी
- 📍 जिला: कांकेर जिले में।
- 💧 नदी उद्गम: दूध नदी का।
- 🌊 जलप्रपात: मलाजकुण्डम जलप्रपात।
6. बैलाडीला पहाड़ी
- 🗺️ विस्तार: दंतेवाड़ा।
- 🏔️ चोटी: नंदीराज/नंदराज (ऊंचाई 1210 मी.)। यह छत्तीसगढ़ की दूसरी और दक्षिण छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी है। [CG PSC (Lib & SO) 2( ]
- 🗿 बनावट: पुरातन शैलों (Oldest Rock) से (आर्कियन + धारवाड़)। [CG PSC (ACF) 2( [CG PSC(ADPPO)2(]
- 🌊 उद्गम स्थल: 1. मल्गेर नदी (मल्गेर घाटी), 2. शंखिनी नदी (नंदीराज की चोटी)। [CG PSC (Pre) 20]
- 💎 खनिज:
- निक्षेप: 14 लौह अयस्क निक्षेप।
- प्रकार: हेमेटाइट (द्वितीय श्रेणी)।
- उत्खनन: NMDC द्वारा।
- निर्यात: यहाँ से लौह अयस्क विशाखापट्टनम बंदरगाह के माध्यम से जापान भेजा जाता है।
- भण्डार: यह एशिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क का भण्डार है, जिससे यह क्षेत्र लौह अयस्क में समृद्ध है।
- 💡 विशेष: इसके ऊपरी भाग को “आकाश नगर” के नाम से जाना जाता है। यह पहाड़ी इन्द्रवती नदी के दक्षिण में स्थित है। में स्थित है।
दण्डकारण्य पठार की अन्य प्रमुख पहाड़ियाँ 🏞️
7. अलबका पहाड़ी
- 📍 जिला: बीजापुर। [CG Vyapam(MFA)2023][CG PSC(Horti. Cul.)2015,(ITI Pri.)20]
8. अलबामा हिल्स
- 🧭 स्थिति: यह बीजापुर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है।
9. उसूर की पहाड़ी
- 📍 जिला: बीजापुर।
- 🧭 दिशा: यह बीजापुर तहसील के पश्चिम में है।
- 🗿 निर्माण: कड़प्पा शैलों से।
10. गोलापल्ली की पहाड़ी
- 🧭 स्थिति: यह कोंटा तहसील के दक्षिण में स्थित है। [CG PSC(ARTO) 2022]
- 📏 ऊँचाई: लगभग 950 मीटर।
11. बस्तर का पठार
- 🧭 स्थिति: बस्तर और सुकमा क्षेत्र में।
- 🏞️ घाटी: झीरमघाटी (सुकमा) और दरभाघाटी (बस्तर)। [CGVyapam(FI)2013]
छत्तीसगढ़ के प्रमुख जल विभाजक पर्वत/पठार 🏔️↔️🌊
| पर्वत / पठार | नदियों का विभाजन | ऐतिहासिक प्रश्न |
| केशकाल पर्वत | • महानदी और इन्द्रावती के मध्य। • छत्तीसगढ़ बेसिन और बस्तर पठार के बीच सीमा। | [CG PSC(Eng. S1)2015] |
| मैकल पर्वत श्रेणी | • शिवनाथ और वेनगंगा (महाराष्ट्र) के मध्य। • महानदी और नर्मदा नदी अपवाह तंत्र के मध्य। | [CG PSC(Pre)2011] |
| देवगढ़ की पहाड़ी | गोपद और रिहन्द के मध्य। | |
| कैमूर पर्वत श्रृंखला | सोन/गंगा और महानदी के मध्य। | |
| माखेल पठार | ईब और मैनी नदी के मध्य। |
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्वत, पहाड़ियाँ और उच्चावच स्थल 🏜️
| क्र. | पहाड़ी / चोटी | ऊँचाई (मीटर में) | क्षेत्र | ऐतिहासिक प्रश्न |
| 1. | गौरलाटा | 1225 | सामरीपाट (बलरामपुर) | |
| 2. | नन्दीराज | 1210 | बैलाडीला (दंतेवाड़ा) | [CG PSC(Lib&SO)2] |
| 3. | बदरगढ़ | 1176 | मैकल श्रेणी (कबीरधाम) | [CG PSC(Pre)2] |
| 4. | मैनपाट | 1152 | सरगुजा | |
| 5. | पलमागढ़ की चोटी | 1080 | पेंड्रा-लोरमी का पठार (गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही) | |
| 6. | अबूझमाड़ की पहाड़ी | 1076 | नारायणपुर | [CG Vyapam(ESC)2017][CG PSC (ITI Pri.) 2] |
| 7. | लाफागढ़ चोटी | 1048 | पेंड्रा-लोरमी का पठार (कोरबा) | |
| 8. | जारंग पाट | 1045 | बलरामपुर | |
| 9. | देवगढ़ चोटी | 1033 | कोरिया | |
| 11. | धारी डोंगर (शिशुपाल पर्वत) | 899 | महासमुंद | |
| 12. | पेण्ड्रा-लोरमी का पठार | 800 | गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही | |
| 13. | दलहा पहाड़ | 760 | अकलतरा (जांजगीर-चांपा) | [CG PSC(ARTO)20] |
| 14. | डोंगरगढ़ की पहाड़ी | 704 | मैकल श्रेणी (राजनांदगाँव) | |
| 15. | दल्लीराजहरा | 700 | बालोद |
जिलों के अनुसार प्रमुख पर्वत/पठार 🗺️
| जिला | पर्वत/पठार | ऐतिहासिक प्रश्न |
| मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर | 1. चांगभखार की पहाड़ी 2. मांजटोली की पहाड़ी (यहाँ से बनास नदी का उद्गम) 3. धोबोताल की पहाड़ी, उमारता की पहाड़ी 4. फाटपानी पहाड़ी | [CG PSC(ABEO)2013] |
| कोरिया | 1. कैमूर पर्वत श्रृंखला 2. सोनहत की पहाड़ी | |
| सूरजपुर | 1. सीता लेखनी की पहाड़ी | [CG PSC(Pre)2017] |
| बलरामपुर | 1. जमुरीपाठ की पहाड़ी, चैइता पहाड़ी | |
| सरगुजा | 1. रामगढ़ की पहाड़ी, देवगढ़ की पहाड़ी 2. महामाया की पहाड़ी 3. किंधा पहाड़ी पम्पापुर 4. पिल्खा पहाड़ |
| जिला | पर्वत/पठार | ऐतिहासिक प्रश्न |
| जशपुर | 1. जशपुर पाट (सबसे बड़ा पाट प्रदेश) 2. मधेश्वर पहाड़ 3. सुलेमा पहाड़, लुड़ेंग पहाड़, आदि 4. तमता पहाड़ी पत्थलगांव, जशपुर 5. देश-देखा पहाड़ | [CG PSC(Pre)2022] |
| गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | 1. बिजौरा पहाड़ | [CG PSC(ADPO)2021] |
| कोरबा | 1. छुरी-उदयपुर की पहाड़ी 2. चैतुरगढ़ की पहाड़ी (पेंड्रा लोरमी पहाड़ी का भाग) 3. फुटका पहाड़ी, केरता पहाड़, आदि | [CG PSC(ITI Pri.)2016] |
| बिलासपुर | 1. कका पहाड़ी (रतनपुर) 2. चोर पहाड़ी रतनपुर (रामटेकरी मंदिर) 3. एकवीरा पहाड़ी रतनपुर 4. दलहा बाबा पहाड़ कोटा | |
| जांजगीर | 1. दलहा पहाड़, अकलतरा | |
| सक्ती | 1. पलगड़ा पहाड़, खरसिया मार्ग पर | |
| रायगढ़ | 1. गजमार पहाड़ी 2. लाम पहाड़ी, बारखोवा डोंगर, आदि 3. कबरा पहाड़ी 4. चवरढ़ाल/कुम्हार पहाड़ी | |
| बलौदाबाजार | 1. छाता पहाड़ी 2. सोनाखान की पहाड़ी 3. बालुकिनी पर्वत, तुरतुरिया | [CG PSC(ITI Pri.)2016] |
| रायपुर | 1. सोनडोंगरी पहाड़ी | |
| धमतरी | 1. मेचका पहाड़ 2. सिहावा पर्वत (सुक्तिमति पर्वत) 3. टांगरी डोंगरी – सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र | |
| महासमुंद | 1. ब्रम्हगिरी पहाड़ी 2. शिशुपाल की पर्वत/बुड़ा डोंगर 3. रदन की पहाड़ी | |
| गरियाबंद | 1. मलेवा डोंगर की पहाड़ी 2. सोनबेरा की पहाड़ी 3. गौरागढ़ की पहाड़ी 4. भातृगढ़ पहाड़ी (पैरी नदी का उद्गम) 5. नरियर की पहाड़ी | [CG PSC(ADA)2020] |
| कवर्धा | 1. कांदावानी की पहाड़ी (हाफ नदी का उद्गम) 2. झाला पहाड़ 3. भूरकुण्ड पहाड़ी, पण्डरिया | |
| राजनांदगांव | 1. प्रज्ञागिरी की पहाड़ी/डोंगरगढ़ की पहाड़ी 2. चंद्रगिरी की पहाड़ी | |
| मो.-मा.-आ. | 1. कुलझारी/कुलहारी पहाड़ी 2. बोरियाटिब्बू की पहाड़ी | |
| बालोद | 1. दल्लीराजहरा की पहाड़ी 2. पेटेचुवा की पहाड़ी (खारून नदी का उद्गम) 3. कुटकराजहरा की पहाड़ी (कोटरी नदी का उद्गम) | |
| कांकेर | 1. गढ़िया पहाड़ी 2. आरी डोंगरी, भानुप्रतापपुर तहसील 3. रावघाट की पहाड़ी 4. मलाजकुण्डम की पहाड़ी | [CG PSC(ACF)2016][CGVyapam(MFA)2023] |
| कोण्डागांव | 1. बड़े डोंगर | |
| नारायणपुर | 1. छोटे डोंगर 2. रक्साडोंगरी/राकसहाड़ा | |
| बस्तर | 1. मांझीडोंगरी 2. तुलसीडोंगर की पहाड़ी (दरभा घाटी) 3. मंगलपुर की पहाड़ी (अरण्यक गुफा) | |
| दंतेवाड़ा | 1. बैलाडीला की पहाड़ी | |
| सुकमा | 1. गोलापल्ली पहाड़ 2. टिकनपल्ली पहाड़ | [CG PSC(ARTO)2022] |
| बीजापुर | 1. अलबका की पहाड़ी 2. आवापल्ली पहाड़ 3. नडापल्ली पहाड़ 4. लंकापल्ली पहाड़ 5. उसुर पहाड़ | [CG PSC(ITI Pri.)2016] |
छत्तीसगढ़ के भौतिक विभागों का तुलनात्मक विवरण 🌍
| तथ्य | पूर्वी बघेलखण्ड | जशपुर सामरी पाट | छ.ग. का मैदान | दण्डकारण्य |
| क्षेत्रफल (km²) | 21,863 (16.16%) | 6,208 (4.59%) | 68,064 (50.34%) | 39,060 (28.91%) |
| संभाग | सरगुजा | सरगुजा | रायपुर + दुर्ग | बस्तर |
| अन्य नाम | सरगुजा बेसिन | कन्हार बेसिन | महानदी बेसिन | इन्द्रावती बेसिन |
| भू-गर्भिक (शैल) | गोंडवाना | दक्कन ट्रेप | कड़प्पा | धारवाड़ / ग्रेनाइट नी |
| ढाल | उत्तर | दक्षिण-पूर्व की ओर | पूर्व की ओर | दक्षिण की ओर |
| अपवाह तंत्र | सोन, गंगा | अधिकांशतः महानदी | महानदी | गोदावरी नदी |
| खनिज | कोयला | बॉक्साइट | चूना, डोलोमाइट | लोहा, टिन, हीरा |
| मिट्टी | लाल पीली | लाल पीली + लेटेराइट | लाल पीली | लाल दोमट+लाल बलुई |
| फसल | मोटे अनाज, तिलहन | बागवानी | धान | धान, कोदो-कुटकी, मोटा अनाज |
| वनक्षेत्र | 50 प्रतिशत | सबसे कम | ||
| जलवायु | उप-महाद्वीपीय | उप-महाद्वीपीय | उप-महाद्वीपीय | उप-महाद्वीपीय |
| ऊँची चोटी | देवगढ़ (1033 मी.) | गौरलाटा (1225मी.) | बदरगढ़ (1176 मी.) | बैलाडीला (1210 मी.) |
| औसत वर्षा | 125-150 सेमी. | 172 सेमी. | 125-150 सेमी. | 167 सेमी. |
| तापमान | 35°C लगभग | 32°C लगभग (Mini) | 36°C लगभग (Max) | 35°C लगभग |
| जनजाति | उरांव, कोल | कोरवा, नगेशिया, बिरहोर | सौंरा, बिंझवार, धनवार | गोंड़, हल्बा, माड़िया, मुड़िया |
छत्तीसगढ़ के भौतिक विभागों का विस्तृत अवलोकन 🗺️
यह सारणी छत्तीसगढ़ के विभिन्न भौतिक प्रदेशों का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करती है।
🏞️ पाट प्रदेश (Pat Regions)
| भौतिक विभाग/उप-विभाग | क्षेत्र की स्थिति | विस्तार | औसत ऊँचाई (समुद्र तल से) और विशेष तथ्य |
| 1. मैनपाट | उत्तर-मध्य | दक्षिण अम्बिकापुर और सीतापुर तहसील में। | 1152 मीटर। |
| 2. जारंगपाट | उत्तर-पूर्व | सीतापुर और लुण्ड्रा तहसील में। | 1045 मीटर। |
| 3. सामरीपाट | पूर्वोत्तर सीमांत | सामरी तहसील में। | 600-750 मीटर। (गौरलाटा चोटी, सबसे ऊँचा भाग – 1225 मी.) |
| 4. जशपुरपाट | उत्तर-पूर्व सीमांत | बगीचा, जशपुर, कुनकुरी, पत्थलगांव तहसील में। | 275-500 मीटर। (यह सबसे बड़ा पाट प्रदेश है।) |
⛰️ पठारी प्रदेश (Plateau Regions)
| भौतिक विभाग/उप-विभाग | क्षेत्र की स्थिति | विस्तार | औसत ऊँचाई (समुद्र तल से) और विशेष तथ्य |
| 1. पेण्ड्रा-लोरमी पठार | मध्य-पश्चिम | पेण्ड्रा, कटघोरा, लोरमी और पण्डरिया तहसील में। | औसत 800 मीटर। (पलमा चोटी 1080 मी., लाफागढ़ 1048 मी.) |
| 2. धमतरी-महासमुंद उच्च भूमि | दक्षिण-पूर्व सीमांत क्षेत्र | धमतरी, कुरूद, राजिम, महासमुंद, गरियाबंद, सरायपाली, देवगढ़ तहसीलों में। | 400-900 मीटर। (धारीडोंगर 899 मी., सबसे ऊँचा भाग) |
| 3. दुर्ग-उच्च भूमि | दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र | गुरूर, संजारी, बालोद, डौंडीलोहारा, गुण्डरदेही, अम्बागढ़, मोहला तहसीलों में। | 500-800 मीटर। (दल्लीराजहरा 700 मी., सबसे ऊँचा भाग) |
| 4. बस्तर का पठार | बस्तर एवं सुकमा | बस्तर और सुकमा तहसील में। | — |
🌾 मैदानी भाग (Plains Region)
| भौतिक विभाग/उप-विभाग | क्षेत्र की स्थिति | विस्तार | औसत ऊँचाई (समुद्र तल से) और विशेष तथ्य |
| 1. सरगुजा बेसिन | उत्तर-मध्य क्षेत्र | दक्षिण अम्बिकापुर, दक्षिण सूरजपुर, दक्षिण प्रतापपुर, पश्चिम सीतापुर तहसीलों में। | 400-500 मीटर। (रामगढ़ की पहाड़ी 1022 मी., विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला) |
| 2. हसदेव-रामपुर बेसिन | उत्तर-पश्चिम | दक्षिण मनेन्द्रगढ़, पूर्वी पेण्ड्रा और उत्तरी कटघोरा तहसील में। | 300-450 मीटर। (यह श्रृंखलाबद्ध जलप्रपातों का क्षेत्र है।) |
| 3. कोरबा बेसिन | उत्तर-मध्य | दक्षिण कटघोरा, दक्षिण कोरबा तहसीलों में। | 250-350 मीटर। |
| 4. रायगढ़ बेसिन | पूर्वी भाग | दक्षिण धरमजयगढ़, घरघोड़ा तहसील, खरसिया व रायगढ़ तहसीलों में। | 300 मीटर। |
| 5. बिलासपुर-रायगढ़ | मध्य भाग | मुंगेली-तखतपुर, बिलासपुर। | 150-300 मीटर। |
| 6. बस्तर मैदान | दक्षिण भाग | बीजापुर-सुकमा। | — |
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पहाड़ी क्षेत्र 🏔️
| क्र. | पहाड़ी क्षेत्र | स्थिति | विस्तृत क्षेत्र | औसत ऊँचाई (मीटर में) एवं विशेष तथ्य |
| 1. | मैकल श्रेणी | पश्चिम सीमांत | डोंगरगढ़, खैरागढ़, छुईखदान, कवर्धा, पण्डरिया, लोरमी तहसीलों में। | 700-900 मी. (बदरगढ़ सबसे ऊँचा भाग 1176 मी.) |
| 2. | छुरी-उदयपुर की पहाड़ी | उत्तर-पूर्व भाग | कोरबा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा तहसीलों में। | 800-900 मी. |
| 3. | चांगभखार-देवगढ़ पहाड़ी | उत्तर भाग | जनकपुर, बैकुंठपुर, मनेन्द्रगढ़, उत्तर सूरजपुर, प्रतापपुर, आदि तहसीलों में। | 600-1000 मी. (देवगढ़ चोटी 1033 मी., सबसे ऊँचा भाग) |
| 4. | अबूझमाड़ की पहाड़ियाँ | दक्षिण-पश्चिमी भाग | नारायणपुर, पखांजूर, बीजापुर, कोंडागांव तहसीलों में। | 600-900 मी. |
छत्तीसगढ़ की प्रमुख घाटियाँ: एक विस्तृत सारणी 🏞️
| प्रमुख घाटी | जिला | विशेष तथ्य |
| • सोनहत घाटी | कोरिया | यह अर्द्ध-कोकिंग कोयला के लिए प्रसिद्ध है। |
| • बालम घाट | कोरिया | — |
| • लोरो घाटी | जशपुर | यह घाटी फूलों की खेती के लिए विख्यात है, जिसे ‘फूलों की घाटी’ भी कहते हैं। |
| • मैनीनदी घाटी | जशपुर | — |
| • केन्दाघाटी | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | — |
| • चिल्फी (भोरमदेव) घाटी | कवर्धा | यह लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध है। |
| • पीड़ा घाटी | कवर्धा | — |
| • साल्हेवारा घाटी | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | — |
| • बैताल रानी घाटी | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | — |
| • बृजवानी घाटी | राजनांदगांव | — |
| • पिंजारिन घाटी | कांकेर | यहाँ प्रसिद्ध चर्रे-मर्रे जलप्रपात स्थित है। |
| • चारामा घाटी | कांकेर | — |
| • केशकाल घाटी | कोण्डागांव | यह गोदावरी और महानदी बेसिन के बीच एक प्राकृतिक विभाजक का कार्य करती है। |
| • तेलीन घाटी | कोण्डागांव | इस घाटी में तेलीन माता और भंगाराम का मंदिर है। |
| • कांगेर घाटी | बस्तर | यहाँ प्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। |
| • दरभा घाटी | बस्तर | यहाँ से अभ्रक की प्राप्ति होती है। |
| • विनता घाटी | बस्तर | इसे “बस्तर का कश्मीर” कहा जाता है। [CG Vyapam(Lab Tech.)2024] |
| • वास नदी घाटी | बस्तर | यहाँ से टिन की प्राप्ति होती है। |
| • बस्तानार घाटी | बस्तर | यह तुलसी डोंगर पर स्थित है। |
| • अरनपुर घाटी | दंतेवाड़ा | इस घाटी में फुलपाड़ जलप्रपात है। |
| • मल्गेर घाटी | दंतेवाड़ा | यहाँ से मल्गेर नदी का उद्गम होता है। |
| • झीरम घाटी | सुकमा | यहाँ से अभ्रक की प्राप्ति होती है। |
| • खुरसेल घाटी | नारायणपुर | यह सागौन (लकड़ी) के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC(ADA)2023] |
| • आमदई घाटी | नारायणपुर | यह लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध है। |
| • झारा घाटी | नारायणपुर | इस घाटी में प्रसिद्ध नोगोबाबा जलप्रपात स्थित है। |
📝 नोट: व्यापम ने फूलों की घाटी का उत्तर केशकाल लिया है, जबकि पी.एस.सी. ने फूलों की घाटी के लिए लोरो घाटी को सही माना है।
❓ प्रश्न: खुरसेल घाटी किस जिले में स्थित है?
(A) सुकमा
(B) बस्तर
(C) कोण्डागांव
(D) नारायणपुर
उत्तर- (D) [CG PSC(ADA)2023]
नदी अपवाह तंत्र 🏞️
- 📌 परिभाषा: एक मुख्य नदी और उसकी सहायक धाराओं द्वारा निर्मित प्रवाह क्षेत्र को उस नदी का अपवाह तंत्र कहा जाता है।
- 🌊 वर्गीकरण: जल प्रवाह के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ प्रदेश के नदी अपवाह तंत्र को पाँच मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। [CG VS (AG-3)]
छत्तीसगढ़ के प्रमुख अपवाह तंत्र
| क्र. | अपवाह तंत्र/कछार | प्रतिशत (%) | क्षेत्रफल (लाख हेक्टेयर) | स्थिति | विस्तार |
| 1. | महानदी | 56.15% | 77.432 | मध्य | बिलासपुर, रायपुर एवं दुर्ग संभाग |
| 2. | गोदावरी | 28.64% | 39.497 | दक्षिण | बस्तर संभाग / दण्डकारण्य |
| 3. | सोन/गंगा | 13.63% | 18.789 | उत्तर | सरगुजा संभाग / पूर्वी बघेलखण्ड |
| 4. | ब्राह्मणी नदी | 1.03% | 1.423 | उत्तर-पूर्व | जशपुर जिला |
| 5. | नर्मदा नदी | 0.55% | 0.759 | पश्चिम | कवर्धा एवं खै.-छु.-ग. जिला |
🧠 महत्वपूर्ण तथ्य
- 🌍 छत्तीसगढ़ का उत्तरी हिस्सा गंगा नदी अपवाह तंत्र का एक अंश है। [CG PSC (CMO)]
- 🌱 राज्य का दक्षिणी भू-भाग गोदावरी नदी अपवाह तंत्र द्वारा सिंचित होता है। [CG PSC (CMO)]
- 🔑 छत्तीसगढ़ का अधिकांश क्षेत्र महानदी अपवाह तंत्र के अधीन आता है। [CG PSC (CMO)]
महानदी अपवाह तंत्र (MAHANADI DRAINAGE SYSTEM)
- 📍 अवस्थिति: यह छत्तीसगढ़ के मध्यवर्ती हिस्से में स्थित है। [CG PSC (EAP)]
- ↘️ ढाल: इसकी ढाल पूर्व दिशा की ओर है।
- 🗺️ क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल 77,432 लाख हेक्टेयर है। [CG PSC (Pre)2011, (Sci.Off)]
- 📊 प्रतिशत: यह छत्तीसगढ़ का सबसे विशाल अपवाह तंत्र है, जो कुल क्षेत्र का 56.15% है। [CG PSC(AP)] [CG PSC(SEE) 2017], [CG Vyapam (SGST)]
- 💧 सिंचाई: वर्ष 1901 में (प्रारंभ) इस दौरान कुछ नदियों पर नहरों का निर्माण किया गया था।
महानदी 📖
- उद्गम स्थल: इसका उद्गम धमतरी जिले की नगरी तहसील में स्थित सिहावा पर्वत के फरसिया नामक स्थान पर गणेशघाट से होता है। [CG PSC(Reg.) 2017, (Lib)2014, (Mains)2011] [CG Vyapam (MBS-I)]
- विसर्जन (मुहाना): यह नदी कटक (ओडिशा) के पास बंगाल की खाड़ी में विसर्जित हो जाती है।
- कुल लंबाई: इसकी कुल लंबाई 858 किलोमीटर है, जो इसे छत्तीसगढ़ की सबसे लंबी नदी बनाती है।
- छत्तीसगढ़ में प्रवाह लंबाई: राज्य के भीतर यह 286 किलोमीटर तक प्रवाहित होती है, जो इसे छत्तीसगढ़ में बहने वाली दूसरी सबसे लंबी नदी बनाती है।
- नदी का प्रकार: यह एक अनुवर्ती नदी है, जो ढलान की दिशा में बहती है।
- विस्तार क्षेत्र: यह नदी छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों (मध्य छत्तीसगढ़) में फैली हुई है। [CG Vyapam (FI)]
- तटीय स्थल:
- राजिम (गरियाबंद)
- आरंग (रायपुर)
- सिरपुर (महासमुंद)
- पलारी (बलौदाबाजार)
- शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)
- चन्द्रपुर (सक्ती) [CG PSC(Pre)2]
- प्रवाह वाले जिले: यह कुल 11 जिलों से होकर बहती है: (1) धमतरी, (2) कांकेर, (3) बालोद, (4) रायपुर, (5) गरियाबंद, (6) महासमुंद, (7) बलौदाबाजार, (8) जांजगीर-चांपा, (9) सक्ती, (10) रायगढ़, (11) सारंगढ़-बिलाईगढ़।
सहायक नदियाँ
उत्तर से मिलने वाली सहायक नदियाँ [CG PSC(ARTO)202]
- शिवनाथ नदी
- हसदेव
- बोराई
- मांड
- केलो नदी
- ईब नदी
दक्षिण से मिलने वाली सहायक नदियाँ
- दूध नदी
- सिलयारी नदी
- सोंढुर नदी
- पैरी नदी
- सूखा नदी
- जोंक नदी
- लात नदी
- 💡 मुख्य तथ्य: शिवनाथ नदी, महानदी की सबसे विशाल सहायक नदी है।
सात नदियों का संगम
- स्थान: हथखोज, राजिम (गरियाबंद) (यह गाँव रायपुर, महासमुंद और गरियाबंद की सीमा पर स्थित है)।
- अन्य नाम: इसे शक्तिटोंक, सप्तधारा, और सतधारा के नाम से भी जाना जाता है।
- नदियाँ: यहाँ महानदी, पैरी, सोंढुर, सुखानदी, बेसला (केशवा), सरगी और बगनई नदियों की जलधाराओं का संगम होता है।
त्रिवेणी संगम (तीन नदियों का मिलन स्थल) 🙏
- राजिम (गरियाबंद): महानदी + पैरी + सोंढुर [CG PSC (Sci. Off.) 2018]
- शिवरीनारायण (जांजगीर-चाम्पा): महानदी + शिवनाथ + जोंक [CG Vyapam (FNDM)2019]
- चंद्रपुर (सक्ती): महानदी + मांड + लात
बांध एवं परियोजनाएँ
राज्य में स्थित परियोजनाएँ
- रूद्री बैराज: धमतरी (1912–15)
- दुधवा जलाशय: कांकेर (1962–65) [CGPSC(Pre)2016]
- गंगरेल बांध: धमतरी (1979) [CGPSC(ADH)2011] [CGVyapam(Patwari), (MFA)2017]
ओडिशा में स्थित परियोजनाएँ
- हीराकुंड बांध:
- निर्माण कार्य का आरंभ 1948 में हुआ। [CGVyapam(MSI)]
- निर्माण कार्य 1958 में पूर्ण हुआ।
- स्थान: सम्बलपुर (ओड़िशा)
- विशेषता: यह भारत का सबसे लंबा बांध है। [Vyapam (RFA)]
प्रमुख बैराज 🛶
- समोदा बैराज: रायपुर
- शिवरीनारायण बैराज: जांजगीर-चांपा
- बसंतपुर बैराज: जांजगीर-चांपा [CG PSC (ACF)]
- मिरौनी बैराज: सक्ती [CG PSC (ACF)]
- साराडीह बैराज: सक्ती [CG PSC (ACF)2017], [CG Vyapam (SAAF)]
- कलमा बैराज: सक्ती [CG Vyapam (CROSS) 2017], [CG Vyapam (MFA)]
पेयजल आपूर्ति 💧
- नया रायपुर को महानदी पर बने टीला एनीकट से पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है। [CG Vyapam (FI)2]
- मैरोनी बैराज से सक्ती शहर को पेयजल की आपूर्ति होगी।
महानदी का नामकरण 📜
- प्राचीन नाम: कनकनंदिनी
- सतयुग / वायु पुराण: नीलोत्पला [CG Vyapam (MFA) 2023][CG PSC (Pre) 2017, 202]
- द्वापर युग / स्कन्द पुराण: चित्रोत्पला गंगा [CG PSC (ITI Prin.) 2022, (EAP) 20]
- विष्णु पुराण: ऋषिकुल्या / ऋषितुल्या
- वर्तमान नाम: महानदी (यह नाम श्रृंगी ऋषि की प्रिय शिष्या महानंदा के नाम पर पड़ा)।
- अन्य प्रचलित नाम (संज्ञा): इसे “छत्तीसगढ़ की गंगा” और “छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा” भी कहा जाता है। [CG PSC (Lib.)2017], [CG PSC (MI)20]
विशेष तथ्य ✨
- छत्तीसगढ़ की सबसे लम्बी नदी: महानदी (858 कि.मी.) [CG Vyapam (MB) 20]
- छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लम्बी नदी: शिवनाथ (290 कि.मी.)
- जल विभाजक पर्वत: केशकाल घाटी, महानदी और इंद्रावती नदी के बीच जल विभाजक का कार्य करती है। [CG PSC (Engg. S-1)20]
- सस्पेंशन ब्रिज (लक्ष्मण झूला): यह राजिम में त्रिवेणी संगम पर बनाया गया है। [CG PSC(Pre)20]
- महानदी पर सड़क पुल: पुसौर के सूरजगढ़ गाँव और सरिया के नदीगाँव के बीच महानदी पर राज्य का सबसे लंबा ‘सड़क पुल’ निर्मित है, जिसकी लंबाई 1830 मीटर है।
- सर्वाधिक क्षेत्र: महानदी छत्तीसगढ़ का सबसे अधिक क्षेत्र कवर करती है। [CG PSC (Pre)]
महानदी की दक्षिण दिशा से आने वाली सहायक नदियाँ 🏞️
1. दूध नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: इसका उद्गम मलाजकुंडम पहाड़ी (खड़का, कांकेर) से होता है।
- संगम स्थल 🌊: यह नदी महानदी में मिल जाती है।
- तटीय क्षेत्र 📍: कांकेर इसके तट पर स्थित है।
- जलप्रपात 🏞️: मलाजकुंडम जलप्रपात (कांकेर) इसी नदी पर है।
2. सिलयारी नदी
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: यह धमतरी क्षेत्र में बहती है।
- संगम स्थल 🌊: इसका विलय महानदी में होता है।
- परियोजना 댐: मॉडुमसिल्ली जलाशय, जिसे बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव बांध (1923) भी कहा जाता है, इसी नदी पर बना है। [CG Vyapam(FDFG)2024], [CG PSC(ADI)2016]
3. सोंदूर नदी
- प्राचीन नाम 📜: इसे सुन्दराभूति नदी या सोण्ड नदी के नाम से भी जाना जाता था।
- उद्गम स्रोत 🌱: यह नवरंगपुर पहाड़ी (कोरापुट जिला, ओडिशा) से निकलती है।
- संगम स्थल 🌊: पैरी नदी में (मालगांव के पास) इसका संगम होता है।
- लंबाई 📏: इसकी कुल लंबाई 80.5 किलोमीटर है।
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: यह गरियाबंद और धमतरी जिलों से होकर गुजरती है।
- सहायक धाराएँ 🏞️: बाघ, लीलांजन, और गोगोर इसकी सहायक नदियाँ हैं।
- परियोजना 댐: सोंदूर परियोजना (1979-80, धमतरी) इसी पर आधारित है।
- 💡 विशेष जानकारी: यह परियोजना धमतरी के सीतानदी वन अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है। [CG PSC(ACF)2021]
4. पैरी नदी
- प्राचीन नाम 📜: इसे पयोधरा (पलाशिनी – जोंक नदी) भी कहा जाता था।
- उद्गम स्रोत 🌱: इसका उद्गम भातृगढ़ पहाड़ी, मैनपुर पठार, बिन्द्रानवागढ़ तहसील (गरियाबंद) से होता है। [CG Vyapam (Asst. Lekha.)2018]
- संगम स्थल 🌊: यह राजिम के निकट महानदी में मिल जाती है।
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: यह नदी गरियाबंद जिले में बहती है।
- सहायक धारा 🏞️: सोंदूर नदी इसकी सहायक नदी है।
- तटीय साक्ष्य 考古: सिरकट्टी (गरियाबंद) के पास पाण्डुका नामक स्थल पर 2500 साल पुराने बंदरगाह के प्रमाण मिले हैं।
- परियोजना 댐: सिकासार परियोजना (1995, गरियाबंद) इसी नदी पर है।
- 💡 विशेष जानकारी: सिकासार परियोजना में वर्ष 2006 से विद्युत उत्पादन (3.5MW x 2 यूनिट = 7MW) किया जा रहा है। [CG PSC (Pre) 2015]
5. सूखा नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: तुमगांव, महासमुंद।
- संगम स्थल 🌊: महानदी।
- सहायक धाराएँ 🏞️: कोडार नदी और घुनघुटी नदी।
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: गरियाबंद एवं महासमुंद।
- परियोजना 댐: सूखा नदी की सहायक कोडार नदी पर शहीद वीर नारायण सिंह परियोजना (महासमुंद जिला) स्थित है।
6. जोंक नदी
- प्राचीन नाम 📜: पलाशिनी।
- उद्गम स्रोत 🌱: सोनबेरा पठार (गौरागढ़ पहाड़ी से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करती है)। [CG PSC(IMO)2020]
- 💡 विस्तार: सोनबेरा पठार का विस्तार ओडिशा राज्य के साथ-साथ गरियाबंद और महासमुंद जिले के कुछ हिस्सों में भी है।
- कुल लंबाई 📏: 210 किलोमीटर (छत्तीसगढ़ + ओडिशा)।
- संगम स्थल 🌊: महानदी (शिवरीनारायण के पास)।
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: महासमुंद, बलौदाबाजार।
- परियोजनाएँ 댐:
- जोंक परियोजना, महासमुंद
- जोंक बेलार परियोजना, बलौदाबाजार
7. लात नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: रदन की पहाड़ी (सराईपाली, महासमुंद)।
- संगम स्थल 🌊: महानदी (चन्द्रपुर)।
8. सुरंगी नदी
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: सारंगढ़ / रायगढ़।
- संगम स्थल 🌊: महानदी (यह ओंग नदी के माध्यम से ओडिशा में मिलती है)।
9. बलमदेही नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: बारनवापारा क्षेत्र।
- संगम स्थल 🌊: महानदी (ठाकुरदिया/नंदनिया, बलौदाबाजार)।
- जलप्रपात 🏞️: सातदेवधारा जलप्रपात (महासमुंद)।
10. तेल नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: देवभोग (गरियाबंद)। [CG PSC (ITI Prin.)2016, (Engg. S-1)2015, (VAS)2021]
- सहायक 🏞️: यह महानदी के दाहिने तट से मिलने वाली एक सहायक नदी है। [CG PSC (Pre)2024]
महानदी की उत्तर दिशा से आने वाली सहायक नदियाँ 🏞️
1. शिवनाथ नदी
- प्राचीन नाम 📜: शुनिनदी (मत्स्य एवं वामन पुराण में उल्लेखित) और शिवानदी।
- उद्गम स्रोत 🌱: गोड़ी गांव, गढ़चिरौली (महाराष्ट्र)। (इसका पूर्व उद्गम स्थल पानाबरस पठार का कोलगुल (ऊँचाई 626.4 मी.) माना जाता था)।
- मुहाना 🌊: शिवरीनारायण के पास महानदी में।
- 💡 प्रमुख तथ्य: यह महानदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। [CG Vyapam (MFA-I)2023][CG PSC(ADIHS)20]
- कुल लंबाई 📏: 290 किलोमीटर (यह छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है, जबकि छत्तीसगढ़ की सबसे लम्बी नदी महानदी है)। [CGPSC(TSI)2024][CG Vyapam (MBD)20]
- सहायक नदियाँ 🏞️:
- उत्तर से: सुरही, आमनेर, हाफ, मनियारी, अरपा, लीलागर।
- दक्षिण से: खरखरा, तांदुला, खारून, जमुनिया।
- मुख्य सहायक: मनियारी नदी, शिवनाथ की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
- अन्य सहायक: सोमबरसा, नानकट्टी, घुमाना।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: कुल 08 जिलों में बहती है – (1) मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, (2) राजनांदगांव, (3) दुर्ग, (4) बेमेतरा, (5) मुंगेली, (6) बिलासपुर, (7) बलौदाबाजार, (8) जांजगीर-चाम्पा।
- तटीय स्थल 📍: (1) दुर्ग, (2) नांदघाट (बेमेतरा), (3) मदकूद्वीप (मुंगेली), (4) सोमनाथ (बलौदाबाजार)। [CGPSC(CMO)201]
- परियोजना 댐: मोंगरा बैराज परियोजना (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी)।
- दोआब क्षेत्र 🌍: महानदी और शिवनाथ नदी का दोआब रायपुर-दुर्ग जिलों तक फैला हुआ है। [CG PSC (ADVHS)201]
- ऐतिहासिक महत्व 🏰: यह नदी ऐतिहासिक समय में छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों को दो हिस्सों (18-18 गढ़ों) में विभाजित करती थी। [CG PSC (ADPPO)2013]
शिवनाथ की दक्षिण दिशा से आने वाली सहायक नदियाँ
1. खरखरा नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: डौंडीलोहारा।
- जलाशय 🌊: खरखरा जलाशय (जिला – बालोद)।
- आधिकारिक नाम 📛: राजीव गांधी जलाशय।
- विशेषता 🧱: यह मिट्टी से निर्मित बांध है (1967)। [CG PSC (ITI Pri.)2016]
2. तांदुला नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: भानुप्रतापपुर की पहाड़ी (कांकेर)। [CG VS(AG-3)2021]
- लंबाई 📏: 64 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: कांकेर, बालोद, दुर्ग।
- तटीय स्थान 📍: डौंडी, गुण्डरदेही।
- परियोजना 댐: तांदुला जलाशय (बालोद), यह छत्तीसगढ़ की पहली परियोजना (1913) है। इस बांध से शिवनाथ और खारून नदी के दोआब क्षेत्र में सिंचाई होती है।
- सहायक नदी 🏞️: जुहार/जुवारी नदी (इस पर गोंदली जलाशय स्थित है)।
- त्रिवेणी संगम 🙏: तांदुला नदी + लोहार नदी + भोथली नदी = चौरेल ग्राम (यहाँ गौरैया मेला लगता है)।
3. खारून नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: पेटेचुआ पहाड़ी (संजारी-बालोद)। [CG PSC(AP)2009]
- संगम स्थल 🌊: शिवनाथ नदी (सोमनाथ, बलौदाबाजार)। [CGPSC(AP)2016]
- लंबाई 📏: 120 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: बालोद, रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार।
- तटीय शहर 🏙️: रायपुर।
- प्रमुख घाट ⛩️: 1. तरीघाट (दुर्ग), 2. महादेवघाट (रायपुर)।
- सस्पेंशन ब्रिज 🌉: लक्ष्मण झूला, महादेव घाट (रायपुर)।
- विशेषता 💎: यह ग्रेनाइट और चूना पत्थर की चट्टानों पर लाल-पीली, रेतीली और जलोढ़ मिट्टी के बीच से बहती है।
4. जमुनिया नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: बलौदाबाजार। [CGPSC(Pre)2014]
- सहायक 🏞️: यह शिवनाथ नदी की एक सहायक नदी है।
शिवनाथ की उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली सहायक नदियाँ
1. आमनेर नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: मैकल श्रेणी (कबीरधाम)।
- संगम स्थल 🌊: शिवनाथ नदी (दुर्ग)।
- प्रमुख संगम 🙏:
- खैरागढ़ में आमनेर, मुस्का और पिपरिया का त्रिवेणी संगम है।
- सिल्ली शक्ति घाट पर शिवनाथ, आमनेर और नंदकठी का त्रिवेणी संगम है।
2. हाफ नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: कांदावनी की पहाड़ी, पण्डरिया (कबीरधाम)।
- संगम स्थल 🌊: शिवनाथ नदी (नांदघाट, बेमेतरा)।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: कबीरधाम, बेमेतरा, मुंगेली।
- लंबाई 📏: 44 किलोमीटर।
- जलप्रपात 🏞️: कवंलधार।
- सहायक नदी 🏞️: सकरी नदी (कवर्धा शहर इसी नदी के किनारे बसा है)।
3. मनियारी नदी
- उद्गम स्रोत 🌱: पेण्ड्रा-लोरमी का पठार, सिंहावल सागर (मुंगेली), मैकल श्रेणी। [CG Vyapam (CROSS)201]
- संगम स्थल 🌊: शिवनाथ नदी (मदकूद्वीप के समीप)।
- 💡 मुख्य तथ्य: यह शिवनाथ नदी में मिलने वाली सबसे प्रमुख सहायक नदी है।
- कुल लंबाई 📏: 134 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: मुंगेली, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। यह मुंगेली और बिलासपुर के बीच सीमा रेखा का निर्धारण करती है।
- सहायक नदियाँ 🏞️: आगर, छोटी नर्मदा, टेसुवा और घोंघा।
- संबंधित स्थल 📍:
- सेतगंगा: टेसुवा नदी के तट पर स्थित है।
- खर्रा घाट: आगर नदी के तट पर स्थित है। [CG Vyapam (TET)202]
- प्रमुख घाट ⛩️: शिवघाट, लोरमी।
- तटीय स्थल 🏙️: लोरमी, तखतपुर, तालागांव। अमेरीकापा तालागांव इसी नदी के किनारे बसा है। [CG Vyapam (Asst. Lekha.)201] [CGPSC(ADJE), (ADA) 202]
- परियोजना 댐: खुड़िया बांध / राजीव गांधी जलाशय (1924-30)। [CG Vyapam (RI)2015], [CG PSC(SEE)2017,(Registrar)2017]
शिवनाथ की सहायक नदियाँ (उत्तर-पश्चिम से) 🏞️
1. आगर नदी
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम भुरकुण्ड पहाड़ी, पण्डरिया से होता है।
- संगम 🌊: यह मनियारी नदी में मिल जाती है।
- तटीय स्थल 📍: इसके तट पर 1. मुंगेली और 2. खर्रा घाट स्थित हैं।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह लोरमी और पथरिया तहसील (मुंगेली जिला) में बहती है।
2. अरपा नदी
- प्राचीन नाम 📜: इसे कृपा नदी के नाम से भी जाना जाता था।
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम खोड़ी-खोंगसरा पहाड़ी के चौरस भू-खण्ड (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) से होता है। [CGVyapam (RI)2015(MBD)2023]
- संगम 🌊: यह नदी मानिकचौरी, मस्तुरी के पास शिवनाथ नदी में विलीन हो जाती है।
- लंबाई 📏: इसकी कुल लंबाई 100 किलोमीटर है।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर और बलौदाबाजार जिलों में बहती है।
- परियोजना 댐: इसके ऊपर भैंसाझार परियोजना कोटा (बिलासपुर) के निकट स्थित है।
- 🧠 ध्यान दें: भैंसादरहा बस्तर में कांगेर नदी पर स्थित एक प्राकृतिक मगरमच्छ संरक्षण स्थल है।
- सहायक नदी 💧: खारंग इसकी सहायक नदी है, जिस पर खूंटाघाट बांध / संजय गांधी परियोजना (1920) निर्मित है। [CG Vyapam (CACC)2018]
3. लीलागर नदी
- उद्गम स्थल 🌱: इसका स्रोत हरदीबाजार, कोरबा (पूर्वी पहाड़ी) है।
- संगम 🌊: यह नदी पामगढ़ के दक्षिण-पश्चिम में स्थित देवरघटा नामक स्थान पर शिवनाथ नदी में मिलती है।
- कुल लंबाई 📏: इसकी कुल लंबाई 135 किलोमीटर है।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह कोरबा और बिलासपुर जिलों से होकर बहती है।
- प्राचीन नाम 📜: इसका पुराना नाम निडिला नदी है।
- तटीय स्थल 📍:
- देवरघटा: यहाँ महानदी, शिवनाथ और लीलागर नदियों का संगम होता है।
- मल्हार: यह स्थल लीलागर-शिवनाथ-अरपा, इन तीनों नदियों से घिरा हुआ है। मल्हार शहर लीलागर नदी के तट पर बसा है। [CG Vyapam (AGDEO)2021]
छत्तीसगढ़ में निर्मित सस्पेंशन ब्रिज 🌉
| क्र. | नदी | स्थान (जिला) | उद्घाटन वर्ष |
| 1. | खारून नदी | महादेवघाट (रायपुर) | 2018 |
| 2. | महानदी | राजिम त्रिवेणी संगम (गरियाबंद) | 2022 |
| 3. | खारून नदी | ठकुराईनटोला (दुर्ग) | प्रस्तावित |
| 4. | शिवनाथ नदी | महमराघाट (दुर्ग) | प्रस्तावित |
2. हसदेव नदी (Hasdev River)
- प्राचीन नाम 📜:
- महानद (मार्कण्डेय, वायु, ब्राम्हण, मत्स्य पुराण में) [CG PSC(ABEO)2013 (ARO,APO)2014]
- हस्तिसोमा/हस्तुसोमा (महाभारत एवं पद्म पुराण में वर्णित), हर्षदेव
- उद्गम स्थल 🌱: देवगढ़ पहाड़ी, सोनहत पठार (जिला – कोरिया व मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)।
- संगम 🌊: यह केरा-सिलादेही/महुआडीह के पास महानदी में मिलती है। [CG PSC (ARO,APO)2]
- कुल लंबाई 📏: 176 किलोमीटर।
- जलप्रपात 🏞️: 1. अमृतधारा, 2. गावरघाट, 3. अकुरीनाला।
- सहायक नदियाँ 💧: तान, झींग, उतेंग, गेज (सबसे लंबी सहायक नदी), अहिरन (जटाशंकरी), चोरनई, हंसिया, केवई। [CG PSC (ARTO)2]
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: 1. कोरिया 2. मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 3. कोरबा 4. जांजगीर-चाम्पा।
- तटीय शहर 🏙️: 1. मनेन्द्रगढ़, 2. कोरबा 3. चांपा, 4. पीथमपुर (जांजगीर-चांपा)। [CG PSC(ABEO)2013], [CG Vyapam (AAF)]
- 💡कटघोरा और छूरी शहर अहिरन नदी के किनारे स्थित हैं।
- मंदिर 🙏: पीथमपुर में हसदेव नदी के किनारे कलेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है।
- परियोजना 댐: मिनीमाता (हसदेव बांगो) परियोजना 1967, माचाडोली (कोरबा)। [CG PSC(LO)2]
- घाटी 🏞️: हसदेव नदी की घाटी कोयला खदानों के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC (Pre)2]
- विशेष जानकारी ✨:
- हसदेव-रामपुर कोयला क्षेत्र सरगुजा तक फैला हुआ है। [CG PSC (MI)2]
- अहिरन और खारंग नदी को नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत जोड़ने की योजना है।
हसदेव की सहायक नदियाँ
हंसिया नदी
- उद्गम 🌱: फाटपानी की पहाड़ी, घुटरा ग्राम।
- संगम 🌊: हसदेव नदी (म.चि.भ.)।
- लंबाई 📏: 30.6 कि.मी.।
- जलप्रपात 🏞️: कर्मघोघा जलप्रपात।
केवई नदी
- उद्गम 🌱: बैरागी की पहाड़ी (म.चि.भ.)।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश।
- लंबाई 📏: 36 कि.मी.।
गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क 🦕
- स्थान 📍: आमाखेरवा, मनेन्द्रगढ़ (म.चि.भ.)।
- संगम 🙏: हसदेव और हंसिया नदी के संगम पर स्थित। [CGPSC(LO)2022]
- विस्तार 🗺️: लगभग 1 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है।
- जीवाश्म 🦴: यहाँ पाए गए जीवाश्म 25 करोड़ वर्ष पुराने हैं। [CG PSC(Registrar)20]
- चट्टान 🗿: गोंडवाना सुपर ग्रुप चट्टान। [CG PSC(Registrar)20:]
- विशेष दर्जा 🌟:
- राज्य सरकार ने इस पार्क को संरक्षित और बायोडायवर्सिटी हैरिटेज साइट बनाने का निर्णय लिया है।
- यह एशिया का सबसे बड़ा और छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल्स पार्क है।
- यह भारत का 5वाँ समुद्री फॉसिल्स पार्क है।
3. बोरई नदी
- उद्गम स्थल 🌱: कोरबा पठार।
- संगम 🌊: महानदी।
4. मांड नदी
- प्राचीन नाम 📜: मंदवाहिनी, मंदगा (मार्कण्डेय पुराण, वायुपुराण, ब्राम्हण पुराण)।
- उद्गम स्थल 🌱: मैनपाट (सरगुजा)। [CG Vyapam (SI Mains)2023] [CG PSC(ADVHS)2013, (Pre)2021]
- संगम 🌊: चंद्रपुर के निकट महानदी में।
- संगम स्थल 🙏: चंद्रपुर (महानदी + मांड नदी + लात नदी) के संगम पर चन्द्रहासिनी देवी मंदिर स्थित है। [CGPSC(Pre.)2019]
- कुल लंबाई 📏: 155 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: सरगुजा, रायगढ़, सक्ती।
- सहायक नदियाँ 💧:
- दायीं ओर से: कोईराज, चिन्दई।
- बायीं ओर से: कुरकुट।
- जलप्रपात 🏞️: सरभंजा जलप्रपात, मैनपाट (सरगुजा)।
- विशेष जानकारी ✨:
- मांड नदी घाटी में कोयले की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। [CGPSC(ABEO)2013]
- मांड नदी चंवरढाल पहाड़ी से होकर प्रवाहित होती है।
5. केलो नदी
- उद्गम स्थल 🌱: लुड़ेग पहाड़ी, लैलूंगा तहसील (रायगढ़)। [CG Vyapam (WRSE)2022]
- संगम 🌊: महानदी (ओडिशा में महादेवपाली नामक स्थान के पास)।
- कुल लंबाई 📏: 97 किलोमीटर।
- सहायक नदियाँ 💧: कोलडेगा और राजर।
- तटीय शहर 🏙️: रायगढ़ (इसे “रायगढ़ की जीवन रेखा” भी कहा जाता है)।
- बहाव क्षेत्र 🌳: यह भालूमार अभ्यारण्य, तराईमाल अभ्यारण्य और गजमार पहाड़ी से होकर बहती है।
- परियोजना 댐: केलो नदी परियोजना / स्व. दिलीप सिंह जूदेव परियोजना (रायगढ़ जिले में)।
6. ईब नदी
- उद्गम स्थल 🌱: खुरजा पहाड़ी के रानीझूला नामक स्थान से, पंडरापाट (जशपुर)। [CG PSC (ADIHS)2013, (ITI Pri.)2016, (Lib.&SO)2019]
- संगम 🌊: संबलपुर (ओडिशा) में महानदी में।
- कुल लंबाई 📏: 202 किलोमीटर (जिसमें से 87 किलोमीटर छत्तीसगढ़ में बहती है)।
- सहायक नदियाँ 💧: सिरीनदी, खोरूंग नदी, डोरकी नदी और मैनी नदी।
- जलप्रपात 🏞️: गुल्लु, बेने और छुरी जलप्रपात (जशपुर)।
- विशेष जानकारी ✨: इस नदी की रेत में सोने के कण पाए जाते हैं। [CG PSC (ADA)2023]
गोदावरी नदी अपवाह तंत्र
- प्रवाह की दिशा 🧭: गोदावरी प्रवाह बेसिन छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित है।
- **जल ग्रहण क्षमता (%)**💧: यह छत्तीसगढ़ के कुल अपवाह तंत्र का 28.64% जल संग्रह करता है। [CG PSC (Scei. Off.) 2018]
- विस्तार 🗺️:
- यह 39.497 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। [CG PSC(ITI Prin.)202]
- छत्तीसगढ़ में अपवाह क्षेत्र के विस्तार के नजरिए से यह दूसरे स्थान पर आता है। [CG Vyapam (Patwari) 2017]
- बस्तर पठार की मुख्य नदी इंद्रावती नदी है। [CG PSC(Asst. HYD)2020]
- प्रमुख नदियाँ 🏞️: इंद्रावती और शबरी इस तंत्र की मुख्य नदियाँ हैं।
- परियोजना 댐: पोलावरम परियोजना / इंदिरा सागर परियोजना (गोदावरी नदी पर)। [CG Vyapam (CROS)2017], [CG PSC(ADH)2011]
- विशेष तथ्य 📌:
- यह परियोजना छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश राज्यों के बीच विवाद का विषय है। [CG Vyapam(CROS)2017]
- गोदावरी नदी छत्तीसगढ़ की दक्षिण-पश्चिम सीमा (बीजापुर) पर भद्रकाली से लेकर कोट्टरू तक लगभग 15 कि.मी. तक बहती है।
- प्राचीन नाम 📜: मंदाकिनी, इंद्र।
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम मुंगेर पर्वत, कालाहांडी जिला (ओडिशा) से होता है, जो छत्तीसगढ़ के बाहर है। [CG Vyapam (MBD)2024]
- संगम स्थल 🌊: यह भद्रकाली नामक स्थान के पास गोदावरी नदी में मिल जाती है।
- कुल लंबाई 📏: 264 किलोमीटर।
- राज्य में प्रवेश 🚪: इंद्रावती नदी छत्तीसगढ़ राज्य में बस्तर जिले से होकर प्रवेश करती है। [CG Vyapam (MFA)2023]
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बहती है।
- तटीय स्थल 🏙️: जगदलपुर, बारसूर और भोपालपट्टनम् आदि इसके किनारे बसे प्रमुख स्थल हैं।
- प्रमुख जलप्रपात 🏞️:
- चित्रकोट जलप्रपात (बस्तर)
- सातधारा जलप्रपात (बीजापुर) [CG Vyapam (Ameen)2017],[CG Vyapam (Patwari), (CROSS)2017]
- प्रवाह की दिशा 🧭: यह पश्चिम दिशा की ओर प्रवाहित होती है। [CG Vyapam (CROSS)2017],[CG Vyapam (ECH) 2017]
- सहायक नदियाँ 💧:
- उत्तर से: कोटरी, निबरा, गुडरा, बोरडिंग, नारंगी।
- दक्षिण से: तालपेरू, चिंतावागु, शंखिनी, डंकिनी।
- विशेष तथ्य ✨:
- इसे बस्तर संभाग की जीवन रेखा या जीवनदायिनी कहा जाता है। [CG PSC (Engg.)2016]
- यह गोदावरी बेसिन और बस्तर के पठार की सर्वप्रमुख नदी है। [CG Vyapam (Patwari) 2019][CG PSC (ADI)2016]
- यह एक अध्यारोपित नदी है (जो ऊपरी चट्टानी परत को काटकर निचली परत तक पहुँचकर अपनी घाटी का निर्माण करती है)।
- केशकाल घाटी, गोदावरी और महानदी प्रणालियों को एक दूसरे से अलग करती है।
- दण्डकारण्य की अपवाह प्रणाली वृक्षाकार है।
- प्राचीन नाम 📜: परलकोट नदी। [CG Vyapam (CACC) 2018]
- उद्गम 🌱: राजहरा की पहाड़ी (दुर्ग उच्च भूमि मोहला-मानपुर)। [CG Vyapam (FNDM) 2019]
- लंबाई 📏: 135 कि.मी. (यह इंद्रावती की सबसे बड़ी सहायक नदी है)।
- संगम 🌊: इंद्रावती नदी में (बीजापुर)। [CG Vyapam (CACC)2018]
- सहायक नदियाँ 💧: वालर नदी, खण्डी नदी।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, कांकेर, नारायणपुर एवं बीजापुर।
- बेसिन 🌍: कोटरी नदी बेसिन छत्तीसगढ़ की “दक्षिण-पश्चिम” दिशा में स्थित है। [CG PSC (Registrar) 2017]
- उद्गम 🌱: अंतागढ़।
- संगम 🌊: इंद्रावती (भैरमगढ़ के पास)।
- गुडरा नदी: अबूझमाड़ (नारायणपुर) से निकलकर इंद्रावती (बारसूर) में मिलती है।
- बोरडिंग नदी: कोण्डागांव से निकलकर इंद्रावती (बोधघाट के पास) में मिलती है।
- नारंगी नदी: माकड़ी (कोंडागांव) से निकलकर इंद्रावती (चित्रकूट के पास) में मिलती है।
- सहायक: मारकण्डी नदी।
- तटीय शहर: कोंडागांव शहर।
- विशेष: नारायणपाल (बस्तर) का प्रसिद्ध विष्णु मंदिर इंद्रावती और नारंगी नदी के संगम पर है। [CG PSC (Pre)2016,(Lib)2]
- उद्गम 🌱: डांगरी-डोंगरी (दंतेवाड़ा)।
- संगम 🌊: इंद्रावती नदी में।
- सहायक नदी 💧: शंखिनी नदी।
- विशेष: डंकिनी-शंखिनी नदी के संगम पर दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी मंदिर स्थित है। [CG PSC (ADJE)2]
- उद्गम 🌱: नंदीराज चोटी, बैलाडीला पहाड़ी (दंतेवाड़ा)। [CG PSC (ITI Prin.)2]
- संगम 🌊: डंकिनी नदी में।
- विशेष: शंखिनी नदी का जल रक्ताभ (लाल) होता है और यह छत्तीसगढ़ की सबसे प्रदूषित नदी मानी जाती है। [CG PSC (SEE)2]
- उद्गम 🌱: कुटरू (बीजापुर पठार)।
- संगम 🌊: इंद्रावती नदी (बीजापुर)।
- प्राचीन नाम 📜: कोलाब नदी।
- उद्गम स्थल 🌱: नन्दपुर पर्वत, कोरापुट क्षेत्र (सिनकारम पहाड़ी), ओडिशा से निकलती है। यह नदी भी छत्तीसगढ़ के बाहर से उद्गमित होकर बस्तर में दक्षिण की ओर बहती है। [CG Vyapam (SEDT)21]
- संगम स्थल 🌊: आंध्रप्रदेश के कुनावरम् के पास गोदावरी नदी में।
- कुल लंबाई 📏: 173 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: बस्तर, सुकमा (यह छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा रेखा बनाती है)।
- तटीय स्थल 📍: कोंटा (यह स्थल शबरी और सिलेरू नदी के संगम पर स्थित है)। [CG Vyapam (E Chem.)20]
- सहायक नदियाँ 💧: गेर, मालेंगर, कांगेर (जिसकी सहायक नदी मुनगाबहार है)।
- जलप्रपात 🏞️:
- गुप्तेश्वर जलप्रपात (सुकमा)
- रानीदरहा (सुकमा) [CG PSC(ACF)2017,(Pre)2016]
- 💡 महत्वपूर्ण: मुनगाबहार नदी, जो कांगेर की सहायक है, पर तीरथगढ़ जलप्रपात (बस्तर) स्थित है।
- भैंसादरहा 🐊: कांगेर नदी में स्थित यह स्थान मगरमच्छों के प्राकृतिक संरक्षण के लिए जाना जाता है। [CG PSC(AP)2019]
- जल परिवहन ⛵: इस नदी पर कोंटा (सुकमा) से आंध्रप्रदेश के कुनावरम् तक (36 कि.मी.) जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध है, जो राज्य में एकमात्र है। [CG PSC (ADVHS)2013]
- उद्गम 🌱: बैलाडीला की पहाड़ी से। [CG PSC(Pre)2021]
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: दंतेवाड़ा, सुकमा।
- संगम 🌊: केरलापाल के समीप शबरी नदी में।
- जलप्रपात 🏞️: मल्गेर इंदुल जलप्रपात (सुकमा)।
- विशेष: माल्गेर की घाटी में बैलाडीला लौह अयस्क के निक्षेप (क्रमांक 13-14) पाए जाते हैं।
- उद्गम 🌱: कुलझारी/कुलहारी पहाड़ी (मोहला-मानपुर-अंबागढ़)।
- संगम 🌊: यह वेनगंगा नदी के माध्यम से गोदावरी नदी में मिल जाती है।
- विशेष: यह नदी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच सीमा का निर्माण करती है। [CG Vyapam (E Chem.)2016]
- गठन 📅: 28 अगस्त 2021।
- सम्मिलित जिले (07) 🗺️: दंतेवाड़ा, बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोण्डागांव, राजनांदगांव।
- (ध्यान दें: बस्तर संभाग का सुकमा जिला इसमें सम्मिलित नहीं है)।
- संरचना 🧑⚖️: अध्यक्ष – मुख्यमंत्री।
- सम्मिलित जिले (04) 🗺️: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, बिलासपुर, कोरबा।
सोन/गंगा नदी अपवाह तंत्र (SON/GANGA DRAINAGE SYSTEM) 🏞️
- प्रवाह की दिशा 🧭: छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से की ढलान उत्तर की ओर होने के कारण, इस क्षेत्र की नदियाँ उत्तर दिशा में बहती हैं।
- जलग्रहण क्षमता 💧: यह राज्य का तीसरा सबसे बड़ा नदी अपवाह तंत्र है, जो कुल क्षेत्र का 13.63 प्रतिशत कवर करता है। [CG PSC(AMO)20:]
- प्रवाह का क्षेत्र 🗺️: इसका कुल प्रवाह क्षेत्र 18.789 लाख हेक्टेयर है।
- अन्य नाम 📜: इसे गंगा नदी अपवाह तंत्र भी कहते हैं, क्योंकि सोन नदी, गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी है। संस्कृत साहित्य में सोन नदी को ‘हिरण्यबाहु नदी’ के नाम से जाना जाता है।
- मुख्य सहायक नदियाँ 🏞️: रिहन्द और कन्हार इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
सोन नदी अपवाह तंत्र की मुख्य सहायक नदियाँ
1. बनास नदी
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम मांजटोली की पहाड़ी, कुड़िया क्षेत्र, भरतपुर तहसील (म.चि.भ.) से होता है। यह पहाड़ी देवगढ़ पहाड़ी के पश्चिमी भाग में स्थित है।
- संगम स्थल 🌊: यह मध्य प्रदेश के शहडोल में डेम्भा गांव के पास (सोन नदी में) मिल जाती है। [CG PSC(Pre)202]
- जलप्रपात 🏞️: रामदा/रमदहा जलप्रपात (म.चि.भ.)। [CG PSC(Pre)202]
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और शहडोल जिले की सीमा पर बहती है।
- सहायक धाराएँ 💧:
- बायीं ओर से: गोहिरादी, ओदारी, झानपार।
- दायीं ओर से: रम्पा, मुवाही, कोरमार।
2. गोपद नदी
- उद्गम स्थल 🌱: सोनहत पठार (म.चि.भ.)।
- संगम स्थल 🌊: सोन नदी पर। [CG PSC(ABEO)2013]
- सहायक धाराएँ 💧: गोइनी, नेयुर, सेहरा, कंदास और मोहन नदी।
- संगम 🙏: गोपद + बनास + नेऊर = भंवरसेन (कोरिया)।
- विशेषता ✨: यह नदी मध्य प्रदेश के सीधी और छत्तीसगढ़ के म.चि.भ. जिले के बीच सीमा रेखा का निर्धारण करती है।
3. नेयुर नदी
- गुफा 🏞️: घाघरा गुफा।
- सीमा रेखा 🗺️: यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मध्य एक सीमा रेखा का निर्माण करती है।
4. रिहन्द नदी
- प्राचीन नाम 📜: रेणुका, रेहर, रेण्ड, रेणु।
- नामकरण का आधार ✨: एक लोककथा के अनुसार, जमदग्नि ऋषि की पत्नी (परशुराम की माता) रेणुका यहाँ एक नदी के रूप में बहती हैं।
- उद्गम स्थल 🌱: छुरी-मतिरिंगा पहाड़ी, अंबिकापुर तहसील (सरगुजा)। [CG PSC(ADPO)2021]
- संगम स्थल 🌊: सोन नदी (सोनभद्र जिला)।
- कुल लम्बाई 📏: 145 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर।
- राज्यों में प्रवाह 🧭: छत्तीसगढ़ ➔ मध्यप्रदेश ➔ उत्तरप्रदेश।
- तटीय स्थल 📍: पुरातात्विक स्थल महेशपुर (सरगुजा)।
- सहायक धाराएँ 💧: घुनघुट्टा, मोरनी, महान, सूर्या, गोबरी, खरपारी, गोकनाई, पीपरकछार, रामदिया। [CG Vyapam(PHEH)2023]
- जलप्रपात 🏞️: रक्सगण्डा (सूरजपुर)।
- परियोजना 댐: गोविंद वल्लभ पंत/रिहन्द बांध (उ.प्र. के मिर्जापुर)। [CG Vyapam(AGDO)2018][CG PSC(Pre.)2016]
- बेसिन 🌍: सिंगरौली बेसिन (इसे रिहन्द बेसिन भी कहा जाता है)।
- विशेषता ❤️: रिहन्द नदी को सरगुजा की जीवन रेखा कहा जाता है। [CG PSC(RDSP MI)2022]
5. कन्हार नदी
- उद्गम स्थल 🌱: बखोना चोटी, गिधा-धोधी (खुड़िया पठार), जशपुर।
- संगम स्थल 🌊: सोन नदी में (सोनभद्र जिला)।
- कुल लम्बाई 📏: 115 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: जशपुर, बलरामपुर। यह नदी बलरामपुर में डीपाडीह और घुघरी के मैदान में प्रवेश करती है।
- तटीय स्थल 📍: पुरातात्विक स्थल डीपाडीह (बलरामपुर)। यह स्थान कन्हार, गलफुआ और सूर्या नदी के त्रिवेणी संगम पर स्थित है। [CG PSC(CMO)2019] [CG PSC(ADPO)2021]
- सहायक धाराएँ 💧:
- बायें तट पर: सूर्या, चनान, सेन्दूर तथा कुर्सा।
- दायें तट पर: गलफुल्ला, सेमरखार, रिगर तथा चेर्रा।
- जलप्रपात 🏞️: कोठली जलप्रपात (कन्हार नदी पर) और चनान नदी पर पवई जलप्रपात स्थित है। [CG PSC(AP)2014] [CG PSC(ACF)2017]
- विशेषता ✨: यह नदी छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा का निर्माण करती है।
6. मवई नदी
- उद्गम स्थल 🌱: भरतपुर तहसील (म.चि.भ.)।
- तटीय स्थल 📍: सीतामढ़ी हरचौका (मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम यहाँ रुके थे)।
- संगम स्थल 🌊: बनास नदी में (भरतपुर के पास बरवाही ग्राम के समीप)।
ब्राह्मणी नदी अपवाह तंत्र (BRAHMANI DRAINAGE SYSTEM)
- हिस्सेदारी 📊: यह कुल अपवाह तंत्र का 1.03 प्रतिशत है।
- विस्तार 🗺️: इसका प्रवाह क्षेत्र 1.423 लाख हेक्टेयर में फैला हुआ है।
- मुख्य सहायक नदियाँ 🏞️: 1. शंख नदी (छत्तीसगढ़), 2. कोयल नदी (झारखंड)।
नर्मदा नदी अपवाह तंत्र (NARMADA DRAINAGE SYSTEM)
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम अमरकंटक के नर्मदा कुण्ड से होता है। इसके अन्य नाम नामदोस, मैकल सुता, सौमोदेवो, रेवा हैं।
- विशेषता 📊: यह राज्य का सबसे छोटा अपवाह तंत्र है, जो कुल अपवाह तंत्र का 0.55 प्रतिशत हिस्सा रखता है। [CG Vyapam (E Chem)]
- मुख्य सहायक नदियाँ 🏞️:
- जोहिला नदी (अमरकंटक से उद्गम)।
- बंजर नदी (पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे लम्बी नदी)। [CG PSC (SEI)]
- ताड़ा नदी। [CG Vyapam (Patwar)]
- जानकारी: बंजर नदी खै.-छु.-ग. जिले के बंजरपुर और ताड़ा नदी कवर्धा जिले से निकलती हैं।
नदी विविध 🧩
त्रिवेणी संगम (तीन नदियों का संगम)
| संगम स्थान | नदियाँ | PYQ |
| 1. राजिम (गरियाबंद) | महानदी + पैरी + सोंदूर | [CG PSC (Sci. Off.) 2018] |
| 2. शिवरीनारायण (जांजगीर-चाम्पा) | महानदी + शिवनाथ + जोंक | [CG Vyapam (FNDM) 2019] |
| 3. चंद्रपुर (सक्ती) | महानदी + मांड + लात | |
| 4. खैरागढ़ (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) | आमनेर + मुस्का + पिपरिया | [CGPSC(Sci. Off.)2022] |
| 5. परलकोट (कांकेर) | कोटरी + निबरा + गुडरा | [CG Vyapam(SMS)2008] |
| 6. डीपाडीह (बलरामपुर) | कन्हार + गलफुआ + सूर्या | [CG PSC (ADPO)2021] |
| 7. चौरेल ग्राम (बालोद) | तांदूला + भोथली + लोहार | |
| 8. चोंडीघाट (बस्तर का प्रयाग) | इंद्रावती + मारकण्डी + आंजर नाला | |
| 9. भंवरसेन (कोरिया) | बनास + गोपद + नेऊर | |
| 10. देवरघटा (पामगढ़, जांजगीर-चाम्पा) | महानदी + शिवनाथ + लीलागर | |
| 11. सिल्ली शक्ति घाट (दुर्ग) | शिवनाथ + आमनेर + नंदकठी |
द्विवेणी संगम (दो नदियों का संगम)
| संगम स्थल | नदियाँ |
| 1. सोमनाथ (बलौदाबाजार) | शिवनाथ + खारून |
| 2. भद्रकाली (बीजापुर) | इंद्रावती + गोदावरी |
| 3. दंतेवाड़ा (दंतेवाड़ा) | शंखिनी + डंकिनी |
| 4. मानिकचौरी (बिलासपुर) | अरपा + शिवनाथ |
| 5. सिलादेही, केरा (जांजगीर-चांपा) | महानदी + हसदेव |
| 6. मदकूद्वीप (मुंगेली) | मनियारी + शिवनाथ |
| 7. कोंटा (सुकमा) | शबरी + सिलेरू |
| 8. बोदरागढ़ का किला (बस्तर) | इंद्रावती + नारंगी |
| 9. डेम्भा (शहडोल, म.प्र.) | सोननदी + बनासनदी |
| 10. महादेवपाली (ओड़िशा) | महानदी + केलोनदी |
नदी के तट पर स्थित घाट
| घाट का नाम | नदी |
| 1. महादेव घाट (रायपुर) | खारून नदी |
| 2. तरीघाट (दुर्ग) | खारून नदी |
| 3. नांदघाट (बेमेतरा) | शिवनाथ नदी |
| 4. सग्नीघाट (दुर्ग) | शिवनाथ नदी |
| 5. महमरा घाट (दुर्ग) | शिवनाथ नदी |
| 6. छठघाट (बिलासपुर) | अरपा नदी |
| 7. खर्राघाट (मुंगेली) | आगर नदी |
| 8. शिवघाट (मुंगेली) | मनियारी नदी |
नदियों के प्राचीन नाम 📜
मुख्य नदियों के प्राचीन नाम
| वर्तमान नाम | प्राचीन नाम |
| महानदी | नीलोत्पला, चित्रोत्पला, कनकनंदनी |
| लीलागर नदी | निडिला |
| इंद्रावती नदी | मंदाकिनी |
| शबरी नदी | कोलाब |
| कोटरी नदी | परलकोट |
| रिहन्द नदी | रेण्ड, रेणुका, रेहर |
| पैरी नदी | पयोधरा |
| हसदेव नदी | हस्तुसोमा, महानद |
| माण्ड नदी | मंदगा, मंदवाहिनी |
| खारंग नदी | कुरंग नदी |
| शिवनाथ नदी | शुनि नदी, शिवा नदी |
| अरपा नदी | कृपा नदी |
| जोंक नदी | पलाशिनी |
| सोन नदी | हिरण्यबाहु [CG PSC (AMO) 2022] |
अन्य नदियाँ एवं उनके प्रवाह क्षेत्र
| नदी | प्रवाह क्षेत्र |
| नेयुर, पतले, रांपा, दौना नदी | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर |
| शंख नदी | जशपुर |
| तेल नदी [CG PSC (AP)2016] | देवभोग तहसील, गरियाबंद |
| संकरी | कबीरधाम |
| सुरही [CG PSC (AP)2016] | राजनांदगाँव |
| सुरंगी नदी | सारंगढ़ |
| सारंगी, बलमदेही | महासमुंद |
| जाटलुर, कुकुर | नारायणपुर |
| नयनी, देवधा | कांकेर |
| तमुरा, लसुरा | कोण्डागांव |
| लमती नदी | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई |
| मारी (मोरल) नदी | भैरमगढ़ (बीजापुर) |
| वेनगंगा | बलरामपुर |
जीवन रेखा नदी ❤️
| नदी का नाम | किस क्षेत्र की जीवन रेखा |
| महानदी | छत्तीसगढ़ की [CG PSC (Lib.) 2017] |
| रिहन्द नदी | सरगुजा की |
| केलो नदी | रायगढ़ की |
| अरपा नदी | बिलासपुर की |
| हसदेव नदी | कोरबा, जांजगीर-चांपा की |
| आगर नदी | मुंगेली की |
| खारून नदी | रायपुर की |
| इंद्रावती नदी | बस्तर क्षेत्र की/दण्डकारण्य प्रदेश की [CG PSC(Engg.)2016] |
नदियों की लम्बाई 📏
| नदी का नाम | लम्बाई (कि.मी. में) |
| महानदी | 858 (286 छ.ग. में) |
| शिवनाथ नदी | 290 |
| इंद्रावती नदी | 264 |
| जोंक नदी | 210 |
| ईब नदी | 202 (87 छ.ग. में) |
| हसदेव नदी | 176 |
| शबरी नदी | 173 |
| मांड नदी | 155 |
| रिहंद नदी | 145 |
| लीलागर नदी | 135 |
| कोटरी नदी | 135 |
| मनियारी नदी | 134 |
| खारून | 120 |
| कन्हार नदी | 115 |
| अरपा नदी | 100 |
| केलोनदी | 97 |
| सोंदूर नदी | 80 |
| दूध नदी | 64 |
| हाफनदी | 44 |
नदी के तट पर स्थित स्थल 🏙️
| शहर (जिला) | नदियाँ |
| भरतपुर-जनकपुर | बनास नदी |
| डीपाडीह (बलरामपुर) | कन्हार |
| महेशपुर (सरगुजा) | रिहन्द |
| कोरबा | हसदेव |
| कटघोरा | अहिरन |
| चांपा | हसदेव [CGVyapam(AAF)2013] |
| पीथमपुर (जां.चा.) | हसदेव |
| मुंगेली | आगर |
| लोरमी (मुंगेली) | मनियारी |
| तखतपुर (बिलासपुर) | मनियारी |
| तालागांव (बिलासपुर) | मनियारी |
| मदकूद्वीप (मुंगेली) | मनियारी + शिवनाथ |
| बिलासपुर | अरपा |
| मल्हार (बिलासपुर) | लीलागर |
| शिवरीनारायण (जां.चा.) | महानदी + शिवनाथ + जोंक |
| चन्द्रपुर (सक्ती) | महानदी + माण्ड नदी + लात नदी |
| रायगढ़ | केलो |
| सारंगढ़ | घोघरानाला |
| खैरागढ़ | आमनेर + मुस्का + पिपरिया |
| नांदघाट (बेमेतरा) | शिवनाथ [CG PSC(CMO) 2019] |
| दुर्ग | शिवनाथ |
| राजिम (गरियाबंद) | महानदी |
| सिरपुर (महासमुंद) | महानदी |
| आरंग (रायपुर) | महानदी |
| सोमनाथ (बलौदाबाजार) | शिवनाथ + खारून |
| रायपुर | खारून |
| कांकेर | दूध नदी |
| कोण्डागांव | नारंगी नदी [CG PSC (Pre.)2016] |
| बारसूर (दंतेवाड़ा) | इन्द्रावती |
| दंतेवाड़ा | शंखिनी + डंकिनी |
| जगदलपुर (बस्तर) | इन्द्रावती |
| कोंटा (सुकमा) | शबरी + सिलेरू |
| भोपालपट्टनम (बीजापुर) | इंद्रावती |
नदी जोड़ो परियोजना 🔗
- उद्देश्य: प्रदेश में सिंचाई संकट को दूर करने के लिए निम्नलिखित नदियों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
- महानदी + तांदुला लिंक परियोजना
- पैरी + महानदी लिंक परियोजना
- रेहर + अटेम लिंक परियोजना
- अहिरन + खारंग लिंक परियोजना
- हसदेव + केवई लिंक परियोजना
- केवई + हंसिया लिंक परियोजना
नदी के तट स्थित मंदिर 🙏
| मंदिर | नदी |
| गंधेश्वर महादेव मंदिर (सिरपुर) | महानदी |
| कलेश्वर महादेव मंदिर (पीथमपुर) | हसदेव |
| कुलेश्वर महादेव मंदिर (राजिम) | महानदी |
| चन्द्रहासिनी माता मंदिर (चन्द्रपुर) | महानदी |
| नाथलदाई माता मंदिर (टिमरलगा) | महानदी |
| हटकेश्वर महादेव मंदिर (महादेवघाट) | खारून |
| रूद्रशिव मंदिर (तालागांव) | मनियारी |
| देवरानी-जेठानी मंदिर (तालागांव) | मनियारी |
| दंतेश्वरी माता मंदिर (दंतेवाड़ा) | शंखिनी-डंकिनी |
| सर्वमंगला माता मंदिर (कोरबा) | हसदेव |
| सोमनाथ (बलौदाबाजार) | शिवनाथ एवं खारून |
| सिद्धेश्वर महादेव मंदिर (पलारी) | महानदी |
| सरनादेवी मंदिर (डीपाडीह) | कन्हार |
| नारायण मंदिर, नारायणपाल (बस्तर) | नारंगी एवं इंद्रावती |
तीर्थ नाम की उपाधि 🏅
| तीर्थ स्थल | उपाधि |
| केदार तीर्थ | मदकूद्वीप (मुंगेली) |
| वैष्ण तीर्थ, गुप्त तीर्थ, तीर्थ राज | शिवरीनारायण |
| बद्री तीर्थ | राजिम |
छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपात 🏞️
छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में पर्वतों और पठारों की मौजूदगी की वजह से, इन इलाकों में जलप्रपातों का निर्माण मध्य छत्तीसगढ़ की तुलना में ज़्यादा हुआ है। राज्य के प्रमुख जलप्रपातों का ब्यौरा नीचे दिया गया है।
सरगुजा संभाग ⛰️
| जिला | जलप्रपात | विशेष तथ्य |
| म.-चि.-भ. | अमृतधारा | 🏞️ हसदेव नदी पर। यह मनेन्द्रगढ़ तहसील के बरबसपुर में है। (इसके निकट तपसी बाबा का आश्रम है)। [CG Vyapam(VFM), CG PSC(Pre)2019,(ACF)2017,(MI), CG Vyapam (MFA)] |
| गावरघाट | 💧 हसदेव नदी पर स्थित। [CG Vyapam (Chemist)] | |
| अकुरीनाला जलप्रपात | 🧊 इसे ‘कोरिया का एयर कंडीशनर’ कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित क्षेत्र है। [CG Vyapam(TET)] | |
| रामदाह / रमदहा | 🙏 बनास नदी पर (भंवरखोह गांव के समीप)। [CG (VSAM)2024], [CG Vyapam (VFM)] | |
| अन्य जलप्रपात | ननकी घाट, च्यूल जलप्रपात, कर्मघोघा जलप्रपात। | |
| कोरिया | आनंदपुर, बिहारपुर जलप्रपात, नीलकंठ जलप्रपात। | |
| सरगुजा | सरभंजा जलप्रपात | 🌿 मांड नदी पर (मैनपाट क्षेत्र में)। |
| टाइगर प्वाइंट जलप्रपात | 🐅 महादेवमुड़ा नदी, मैनपाट। [CG Vyapam (HW)] | |
| फिश प्वांइट | 🐠 मछली नदी पर (यहाँ मछली की अधिकता होने के कारण)। | |
| सेदम प्रपात | 🛣️ सेदम गांव, अम्बिकापुर-रायगढ़ सड़क मार्ग पर। | |
| अन्य जलप्रपात | इको प्वाइंट, मेहता प्वाइंट, मराठी, गुंजा, बूढ़ानाग, पंचधारा, घाघी, परपटिया, देवप्रवाह, जामा जलप्रपात। | |
| जशपुर | रानीदाह जलप्रपात | 👸 एक लोककथा के अनुसार, यहाँ एक रानी ने आत्मदाह किया था, जिस कारण इसका नाम रानीदाह पड़ा। [CG PSC(ADPO)2021] |
| गुल्लूप्रपात | 🌳 ईब नदी पर गुल्लूगांव के समीप, बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र में। [CG (VSAM)] | |
| बेने जलप्रपात | 💧 ईब नदी पर। | |
| छुरी जलप्रपात | 💧 ईब नदी पर। | |
| मकरभंजा जलप्रपात | 🗺️ जशपुर जिले में महनई के पास स्थित है। | |
| अन्य जलप्रपात | राजपुरी, दमेरा, खुड़ियारानी, दानपुरी, भृंगराज, सेधपानी, दनगरी, कैलाश, अलकनंदा, रजपुर, देवचार, महनई, दराबघाघ, छीपाघाट जलप्रपात। [CGPSC(ADPO)20] | |
| बलरामपुर | कोठली जलप्रपात | 🌊 कन्हार नदी पर। [CGPSC(ADPO)2021, (ACF) 2017 (ARO)2022] |
| पवई जलप्रपात | 🏞️ चिनार / चनान नदी पर (कन्हार की सहायक नदी)। [CGPSC(ACF) 2021], [CG PSC(VAS)2021] | |
| वेन/वेनगंगा जलप्रपात | 🙏 वेनगंगा नदी पर। (गंगा दशहरा पर आदिवासी शंकर भगवान की पूजा कर रात्रि जागरण करते हैं)। यह सामरीपाट के जमीर ग्राम के दक्षिण-पूर्व में सघन पर्वत श्रेणी के बीच से निकलती है। | |
| भेड़िया पत्थर | 🐺 इस जलप्रपात के पास भेड़िया छिपे रहते थे, इसी कारण इसका यह नामकरण हुआ। | |
| अन्य जलप्रपात | औंराझरिया, सतबहिनी, उभकापानी, परेवादाह, सुकलधारी (यह गर्म पानी का फव्वारा है, जलप्रपात नहीं)। | |
| सूरजपुर | रक्सगंडा जलप्रपात | 🌊 रिहन्द नदी पर। [CG PSC(ACF)2021, (ARO)2022] |
| कुंदरूघाघ | 💧 पिंगला नदी पर। | |
| कुमेली जलप्रपात | 🌳 पिंगला नदी पर, तमोर पिंगला अभ्यारण्य में स्थित। | |
| अन्य जलप्रपात | कुमेलीघाट, तुर्रापानी, मदन, झंखा, समुनदाई, अमर धाप, झोह, बांक जलप्रपात। |
बिलासपुर संभाग 🗺️
| जिला | जलप्रपात | विशेष तथ्य |
| कोरबा | केंदई जलप्रपात | 🏞️ केंदई नदी पर स्थित। (कटघोरा तहसील क्षेत्र में) [CGPSC(Reg.)2017(YWO)] |
| देवपहरी | 💧 चोरनई नदी पर। [CG PSC(ARO)] | |
| अन्य जलप्रपात | तीनझरिया, रानीझरिया, बाम्हरझुंझा, गोविंदझुंझा, सतरेंगा, नकिया, किलकिला-कोडा, बग्बूदा, खैराबहार, कपोत, जेमरा, परसाखोल, खेतार, सोल्वा जलप्रपात। | |
| सक्ती | दमाऊदहरा | 🙏 गुंजी तीर्थ के निकट स्थित है। |
| अन्य जलप्रपात | पनारी, नगरदा, सोनगुड़ा। | |
| रायगढ़ | रामझरना | 📜 यह एक रामायणकालीन स्थल है। [CG PSC(ACF)2021, (ARO)] |
| अन्य जलप्रपात | परसदा, रेगड़ा, सोखमुड़ा, पोरिया, बेलारिया, गुडरी झरना, टीपाखोल, चेरचेरी, दालधोवा जलप्रपात। | |
| सारंगढ़ | माडुसिल्ली | 🌳 गोमर्डा अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है। |
| मकरी दरहा | 🛣️ मल्दा से चन्द्रपुर मार्ग पर स्थित है। | |
| खपान जलप्रपात | 🌳 गोमर्डा अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है। | |
| बिलासपुर | नागखोल, चांदनी, औंरापानी, हन्डीकुन्डी जलप्रपात। | |
| गौ.पे.म. | झोझा जलप्रपात | |
| मुंगेली | डोलगी परसवारा जलप्रपात |
रायपुर संभाग 🏙️
| जिला | जलप्रपात | विशेष तथ्य |
| गरियाबंद | गोदना जलप्रपात | 🌊 उदंती नदी पर स्थित है। [CG PSC(ARO)2022] |
| अन्य जलप्रपात | घटारानी, जतमई, देवदहरा, बोतलधारा, चिंगरापगार, शेषपगार, कारीपगार, बूढ़ाराजा, गोडेना, कुपाल, आमाखोल, सिंदूरी, गजपल्ला, कोटेनचचरा, मातरकोट, नागधारा, घड़घड़ी जलप्रपात। [CGVyapam (TET)2022] | |
| बलौदाबाजार | आमाझरिया, कुटननाला, पिथौरा, सिद्धखोल (शीतबाबा), देवधारा। | |
| महासमुंद | सातदेवधारा | 🏞️ यह जलप्रपात बलमदेही नदी पर स्थित है। |
| अन्य जलप्रपात | घोड़ाघार (शिशुपाल पर्वत), धसकुण्ड (धरकुस), केशवा। | |
| धमतरी | पवईरानी, नरहरा जलप्रपात। |
दुर्ग संभाग 🏭
| जिला | जलप्रपात | विशेष तथ्य |
| कबीरधाम | रानीदहरा | 🌳 यह भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित है। |
| अन्य जलप्रपात | गोदगोदा, घोघरा, कवलधार, कार्पुर हरि, अर्ज होली, गवंगा, मांदाघाट, भैसा औदार, बादल पानी जलप्रपात। | |
| खै.-छु.-ग. | ठाड़पानी जलप्रपात | 📍 स्थान – सरईपतेरा। |
| राजनांदगांव | कुंआधास, हाजरा | |
| मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी | करियाडोंगरी जलप्रपात | |
| बालोद | सियादेवी जलप्रपात |
बस्तर संभाग 🌳
| जिला | जलप्रपात | विशेष तथ्य |
| कांकेर | मलाजकुण्डम जलप्रपात | 💧 यह दूध नदी पर स्थित है। [CG PSC(ADHIS)2008] |
| चरें-मर्रे जलप्रपात | 🏞️ यह कुतरी नदी / अंतागढ़ नदी / जोगीधारा नदी पर पिंजारिन घाटी (कांकेर) में मौजूद है। [CG Vyapam(TET) 2019] पिंजारिन घाटी में विभिन्न जगहों पर बने गड्ढों को “कड़ाही-खोदरा” कहा जाता है। [CG PSC(ADPO)2021] | |
| पिंजाडिन जलप्रपात | 🌊 यह पिंजाडिन नदी पर बना है। | |
| अन्य जलप्रपात | परलकोट, करतेलगेंदी, महादेव। | |
| कोण्डागांव | मुत्तेखड़का जलप्रपात | 🛖 इस इलाके को “कुएमारी डोंगरी” भी कहते हैं। [CG PSC(Mains)2024] इस जलप्रपात को नीचे से ऊपर की ओर देखने पर ऐसा लगता है, मानो कोई स्त्री चट्टान पर खड़ी होकर जल प्रवाहित कर रही हो। |
| अन्य जलप्रपात | मिरदे, उपरवेदी, उमरादाह, होनहेड़, लिंगदरहा, चेरबेड़ा, हखीकुड़म, बीजकुड़म, कोडकाल, कटुलकसा, आमाबेड़ा, कुएमारी जलप्रपात। | |
| बस्तर | चित्रकूट/चित्रकोट जलप्रपात | • 🌊 यह इंद्रावती नदी पर बना है। [CG Vyapam(Ameen) 2017],[CG PSC (Pre)2016] • 💡 इसका मुख्य स्रोत इंद्रावती नदी ही है। • यह भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात है (चौड़ाई – लगभग 300 फीट)। [CG PSC (PDD)2018] • ✨ यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जलप्रपात है। [CGVyapam (VFM)2021], [CGVyapam (FI)2022], [CG Vyapam(FDFG)2024] • 🗺️ यह दण्डकारण्य के पठार क्षेत्र में स्थित है। • 🏞️ इसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है। [CGVyapam(Patwari)2019] • 🌈 मौसम में परिवर्तन के साथ इस जलप्रपात के पानी का रंग भी बदल जाता है। • 🎨 बारिश के मौसम में इसका पानी रक्तिम लालिमा लिए होता है, जबकि गर्मियों की चांदनी रात में यह पूरी तरह सफेद दिखाई देता है। |
| तीरथगढ़ जलप्रपात | • 🌊 यह मुनगाबहार नदी पर है। [CG Vyapam(VSAM)2024][CGPSC(AP) 2019] • ✨ यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा जलप्रपात है (ऊँचाई – लगभग 300 फीट)। [CG PSC (EAP) 2016], [CG Vyapam (ADEO)2017] • 🏞️ यह जलप्रपात कई खण्डों में बहता है। • 🛖 यह कुटुमसर गुफा के पास स्थित है। [CGPSC(AP) 2019], [CGPSC(ACF)2021], [CGVyapam (VFM)2021], [CG PSC(ITI Pri.)2022] | |
| कांगेरधारा जलप्रपात | 💧 यह कांगेर नदी पर बना है। | |
| तामड़ाघूमर (मयूरा) | • 📍 यह जलप्रपात बस्तर की विनता घाटी में बना है। [CG Vyapam(LOI) 2018] • 🏞️ विनता घाटी को “बस्तर का कश्मीर” के नाम से भी जाना जाता है। • 🦚 यहाँ नाचते हुए मोरों का समूह दिखाई देता है, जिसके चलते इसे “मयूरा जल-प्रपात” कहते हैं। • 🌄 यह दण्डकारण्य क्षेत्र की सबसे सुंदर घाटी है। [CGPSC(IMO)2020] • ✨ इसे “मिनी नियाग्रा” के नाम से भी जाना जाता है। • 🌊 यह तामड़ाबहार नाला में स्थित है। | |
| कुडंगखोदरा, झूलनदरहा, शिवगंगा | 🏞️ यह कांगेरघाटी क्षेत्र में स्थित जलप्रपात है। [CGPSC(Pre)2022] | |
| मंडवा घूमर | यह मौलीभांठा गांव के पास स्थित है। |
इंद्रावती नदी – विस्तृत विवरण 📖
- प्राचीन नाम 📜: मंदाकिनी, इंद्र।
- उद्गम स्थल 🌱: इसका स्रोत मुंगेर पर्वत, कालाहांडी जिला (ओडिशा) है, जो छत्तीसगढ़ के बाहर स्थित है। [CG Vyapam (MBD)2024]
- संगम स्थल 🌊: यह भद्रकाली नामक जगह के पास (गोदावरी नदी में) विलीन हो जाती है।
- कुल लंबाई 📏: 264 किलोमीटर।
- छत्तीसगढ़ में प्रवेश 🚪: इंद्रावती नदी बस्तर जिले से राज्य में प्रवेश करती है। [CG Vyapam (MFA)2023]
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: यह बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बहती है।
- तटीय स्थल 🏙️: जगदलपुर, बारसूर और भोपालपट्टनम् इसके किनारे बसे हैं।
- जलप्रपात 🏞️: 1. चित्रकोट जलप्रपात (बस्तर), 2. सातधारा जलप्रपात (बीजापुर)। [CG Vyapam (Ameen)2017],[CG Vyapam (Patwari),(CROSS)2017]
- प्रवाह दिशा 🧭: यह पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है। [CG Vyapam (CROSS)2017],[CG Vyapam (ECH) 2017]
- सहायक नदियाँ 💧:
- उत्तर से: कोटरी, निबरा, गुडरा, बोरडिंग, नारंगी।
- दक्षिण से: तालपेरू, चिंतावागु, शंखिनी, डंकिनी।
- विशेषता ❤️:
- इसे बस्तर संभाग की “जीवन रेखा” या “जीवनदायिनी” कहा जाता है। [CG PSC (Engg.)2016]
- यह गोदावरी बेसिन और बस्तर पठार की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। [CG Vyapam (Patwari) 2019][CG PSC (ADI)2016]
- यह एक अध्यारोपित नदी है, जो ऊपरी चट्टानी परतों को काटकर निचली परतों तक पहुँचकर घाटी का निर्माण करती है।
- केशकाल घाटी गोदावरी और महानदी नदी प्रणालियों को अलग करती है।
- दण्डकारण्य की अपवाह प्रणाली वृक्षाकार (पेड़ की शाखाओं जैसी) है।
इंद्रावती की सहायक नदियाँ
उत्तर की ओर से
- कोटरी नदी
- प्राचीन नाम: परलकोट नदी। [CG Vyapam (CACC) 2018]
- उद्गम: राजहरा की पहाड़ी (दुर्ग उच्च भूमि मोहला-मानपुर)। [CG Vyapam (FNDM) 2019]
- लंबाई: 135 कि.मी. (यह इंद्रावती की सबसे बड़ी सहायक नदी है)। [CG Vyapam (CACC)2018]
- संगम: इंद्रावती नदी में (बीजापुर)।
- सहायक: वालर नदी, खण्डी नदी।
- प्रवाह क्षेत्र: मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, कांकेर, नारायणपुर और बीजापुर।
- बेसिन: कोटरी नदी बेसिन छत्तीसगढ़ के “दक्षिण-पश्चिम” हिस्से में स्थित है। [CG PSC (Registrar) 2017]
- निबरा नदी
- उद्गम: अंतागढ़।
- संगम: इंद्रावती (भैरमगढ़ के पास)।
- गुडरा: उद्गम – अबूझमाड़ (नारायणपुर), संगम – इंद्रावती (बारसूर)।
- बोरडिंग: उद्गम – कोण्डागांव, संगम – इंद्रावती (बोधघाट के समीप)।
- नारंगी नदी: उद्गम – माकड़ी (कोंडागांव), संगम – इंद्रावती (चित्रकूट के समीप)। [CG PSC (Pre)2016,(Lib)2017]
दक्षिण की ओर से
- डंकिनी नदी
- उद्गम: डांगरी-डोंगरी (दंतेवाड़ा)।
- संगम: इंद्रावती नदी में।
- सहायक: शंखिनी नदी।
- विशेष: डंकिनी और शंखिनी के संगम पर दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी मंदिर है। [CG PSC (ADJE)202]
- शंखिनी नदी
- उद्गम: नंदीराज चोटी, बैलाडीला पहाड़ी (दंतेवाड़ा)। [CG PSC (ITI Prin.)2022]
- संगम: डंकिनी नदी में।
- विशेष: इसका पानी रक्ताभ (लाल) है और यह राज्य की सबसे प्रदूषित नदी मानी जाती है। [CG PSC (SEE)201]
- चिंतावागु नदी: उद्गम – कुटरू (बीजापुर पठार), संगम – इंद्रावती (बीजापुर)।
2. शबरी नदी (Shabri River)
- प्राचीन नाम 📜: कोलाब नदी।
- उद्गम स्थल 🌱: नन्दपुर पर्वत, कोरापुट क्षेत्र (सिनकारम पहाड़ी) (ओडिशा)। [CG Vyapam (SEDT)201]
- संगम स्थल 🌊: आंध्रप्रदेश के कुनावरम् के पास गोदावरी नदी में।
- कुल लम्बाई 📏: 173 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: बस्तर, सुकमा (यह छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा रेखा बनाती है)।
- तटीय स्थल 📍: कोंटा (यह शबरी व सिलेरू नदी के संगम पर है)। [CG Vyapam (E Chem.)2016]
- सहायक नदी: गेर, मालेंगर, कांगेर (जिसकी सहायक नदी मुनगाबहार है)।
- जलप्रपात: 1. गुप्तेश्वर जलप्रपात (सुकमा), 2. रानीदरहा (सुकमा)। [CG PSC(ACF)2017,(Pre)2016]
- भैंसादरहा: कांगेर नदी में यह स्थान मगरमच्छों के प्राकृतिक संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। [CG PSC(AP)2019]
- जल परिवहन ⛵: राज्य की एकमात्र नदी जिसमें जल परिवहन उपलब्ध है (कोंटा से कुनावरम् तक, 36 कि.मी.)। [CG PSC (ADVHS)2013]
- माल्गेर/मालेंगर नदी:
- उद्गम: बैलाडीला की पहाड़ी से। [CG PSC(Pre)2021]
- प्रवाह क्षेत्र: दंतेवाड़ा, सुकमा।
- संगम: केरलापाल के समीप शबरी नदी में।
- जलप्रपात: मल्गेर इंदुल जलप्रपात (सुकमा)।
3. बाघ नदी
- उद्गम 🌱: कुलझारी/कुलहारी पहाड़ी (मो.-मा.-अ.)।
- संगम 🌊: वेनगंगा नदी के माध्यम से गोदावरी नदी में।
- विशेष: यह नदी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच सीमा बनाती है। [CG Vyapam (E Chem.)2016]
छत्तीसगढ़ में गठित नदी बेसिन विकास प्राधिकरण 🏛️
1. इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण
- गठन 📅: 28 अगस्त 2021।
- सम्मिलित जिले (07) 🗺️: दंतेवाड़ा, बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोण्डागांव, राजनांदगांव (नोट: सुकमा जिला शामिल नहीं है)।
- अध्यक्ष: मुख्यमंत्री।
2. अरपा बेसिन विकास प्राधिकरण
- सम्मिलित जिले (04) 🗺️: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, बिलासपुर, कोरबा।
- अध्यक्ष: मुख्यमंत्री।
13.3 सोन/गंगा नदी अपवाह तंत्र (SON/GANGA DRAINAGE SYSTEM)
- प्रवाह दिशा 🧭: उत्तर छत्तीसगढ़ का ढाल उत्तर की ओर होने के कारण यहाँ की नदियाँ उत्तर की ओर बहती हैं।
- जलग्रहण 💧: 13.63 प्रतिशत (राज्य का तीसरा बड़ा अपवाह तंत्र)।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: 18.789 लाख हेक्टेयर।
- उप-नाम: गंगा नदी अपवाह तंत्र (क्योंकि सोन नदी गंगा की सहायक है)। संस्कृत में सोन को ‘हिरण्यबाहु नदी’ कहा गया है। [CG PSC(AMO)2]
- सहायक नदियाँ: रिहन्द, कन्हार।
सोन नदी अपवाह तंत्र की प्रमुख सहायक नदियाँ
- 1. बनास नदी:
- उद्गम: मांजटोली की पहाड़ी, कुड़िया क्षेत्र, भरतपुर तहसील (म.चि.भ.)।
- विसर्जन: डेम्भा गांव के समीप (सोन नदी में) शहडोल (मध्यप्रदेश)। [CG PSC(Pre)2]
- जलप्रपात: रामदा/रमदहा जलप्रपात (म.चि.भ.)।
- 2. गोपद नदी:
- उद्गम: सोनहत पठार (म.चि.भ.)।
- विसर्जन: सोन नदी पर। [CG PSC(ABEO)20]
- सहायक: गोइनी, नेयुर, सेहरा, कंदास एवं मोहन नदी।
- संगम: गोपद + बनास + नेऊर = भंवरसेन (कोरिया)।
- विशेष: यह म.प्र. के सीधी व छ.ग. के म.चि.भ. जिले के मध्य सीमा बनाती है।
3. नेयुर नदी 🏞️
- गुफा ⛰️: घाघरा गुफा।
- सीमा रेखा 🗺️: यह नदी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच एक सीमा रेखा का निर्माण करती है।
4. रिहन्द नदी 💧
- प्राचीन नाम 📜: रेणुका, रेहर, रेण्ड, रेणु।
- नामकरण का आधार ✨: एक लोककथा के अनुसार, जमदग्नि ऋषि की पत्नी (भगवान परशुराम की माता) रेणुका यहाँ एक नदी के रूप में प्रवाहित होती हैं।
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम छुरी-मतिरिंगा पहाड़ी, अंबिकापुर तहसील (सरगुजा) से होता है। [CG PSC(ADPO)2021]
- संगम स्थल 🌊: सोन नदी (सोनभद्र जिला)।
- कुल लम्बाई 📏: 145 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर।
- राज्यों में प्रवाह 🧭: इसका प्रवाह छत्तीसगढ़ ➔ मध्यप्रदेश ➔ उत्तरप्रदेश की ओर है।
- तटीय स्थल 考古: पुरातात्विक स्थल महेशपुर (सरगुजा)।
- सहायक धाराएँ 🏞️: घुनघुट्टा, मोरनी, महान, सूर्या, गोबरी, खरपारी, गोकनाई, पीपरकछार, रामदिया। [CG Vyapam (PHEH)2023]
- जलप्रपात 🏞️: रक्सगण्डा (सूरजपुर)।
- परियोजना 댐: गोविंद वल्लभ पंत/रिहन्द बांध (उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में)। [CG Vyapam (AGDO)2018][CG PSC(Pre.)2016]
- बेसिन 🌍: सिंगरौली बेसिन (इसे रिहन्द बेसिन भी कहते हैं)।
- विशेषता ❤️: रिहन्द नदी को “सरगुजा की जीवन रेखा” के रूप में जाना जाता है। [CG PSC(RDSP MI)2022]
5. कन्हार नदी
- उद्गम स्थल 🌱: बखोना चोटी, गिधा-धोधी (खुड़िया पठार), जशपुर।
- संगम स्थल 🌊: सोन नदी में (सोनभद्र जिला)।
- कुल लम्बाई 📏: 115 किलोमीटर।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: जशपुर, बलरामपुर। यह नदी बलरामपुर क्षेत्र में डीपाडीह और घुघरी के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है।
- तटीय स्थल 考古: पुरातात्विक स्थल डीपाडीह (बलरामपुर)। यह स्थान कन्हार, गलफुआ और सूर्या नदी के त्रिवेणी संगम पर स्थित है। [CG PSC(CMO)2019] [CG PSC(ADPO)2021]
- सहायक धाराएँ 💧:
- बायें तट पर: सूर्या, चनान, सेन्दूर तथा कुर्सा।
- दायें तट पर: गलफुल्ला, सेमरखार, रिगर तथा चेर्रा।
- जलप्रपात 🏞️: कोठली जलप्रपात (कन्हार नदी पर) और चनान नदी में पवई जलप्रपात स्थित है। [CG PSC(AP)2014] [CG PSC(ACF)2017]
- विशेषता ✨: यह नदी छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा बनाती है।
6. मवई नदी
- उद्गम स्थल 🌱: भरतपुर तहसील (म.चि.भ.)।
- तटीय स्थल 📍: सीतामढ़ी हरचौका (ऐसी मान्यता है कि वनवास काल में प्रभु श्रीराम यहाँ रुके थे)।
- संगम स्थल 🌊: बनास नदी में (भरतपुर के पास बरवाही ग्राम के समीप)।
ब्राह्मणी नदी अपवाह तंत्र (BRAHMANI DRAINAGE SYSTEM)
- कुल हिस्सेदारी 📊: यह पूरे अपवाह तंत्र का 1.03 प्रतिशत हिस्सा रखता है।
- प्रवाह क्षेत्र 🗺️: इसका प्रवाह क्षेत्र 1.423 लाख हेक्टेयर में फैला हुआ है।
- प्रमुख सहायक नदियाँ 🏞️: 1. शंख नदी (छत्तीसगढ़), 2. कोयल नदी (झारखंड)।
नर्मदा नदी अपवाह तंत्र (NARMADA DRAINAGE SYSTEM)
- उद्गम स्थल 🌱: इसका उद्गम अमरकंटक के नर्मदा कुण्ड से होता है। इसके अन्य नाम नामदोस, मैकल सुता, सौमोदेवो, रेवा हैं।
- विशेषता 📉: यह राज्य का सबसे छोटा अपवाह तंत्र है, जो कुल अपवाह तंत्र का 0.55 प्रतिशत हिस्सा अपने में समाहित करता है। [CG Vyapam (E Chem)]
- प्रमुख सहायक नदियाँ 🏞️:
- जोहिला नदी (अमरकंटक से उद्गम)।
- बंजर नदी (पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे लम्बी नदी)। [CG PSC (SEI)]
- ताड़ा नदी। [CG Vyapam (Patwar)]
- 💡 जानकारी: बंजर नदी खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के बंजरपुर से और ताड़ा नदी कवर्धा जिले से निकलती है।
नदी विविध 🧩
त्रिवेणी संगम (तीन नदियों का संगम)
| संगम स्थान | नदियाँ | PYQ |
| 1. राजिम (गरियाबंद) | महानदी + पैरी + सोंदूर | [CG PSC (Sci. Off.) 2018] |
| 2. शिवरीनारायण (जांजगीर-चाम्पा) | महानदी + शिवनाथ + जोंक | [CG Vyapam (FNDM) 2019] |
| 3. चंद्रपुर (सक्ती) | महानदी + मांड + लात | |
| 4. खैरागढ़ (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) | आमनेर + मुस्का + पिपरिया | [CGPSC(Sci. Off.)2022] |
| 5. परलकोट (कांकेर) | कोटरी + निबरा + गुडरा | [CG Vyapam (SMS)2008] |
| 6. डीपाडीह (बलरामपुर) | कन्हार + गलफुआ + सूर्या | [CG PSC (ADPO)2021] |
| 7. चौरेल ग्राम (बालोद) | तांदूला + भोथली + लोहार | |
| 8. चोंडीघाट (बस्तर का प्रयाग) | इंद्रावती + मारकण्डी + आंजर नाला | |
| 9. भंवरसेन (कोरिया) | बनास + गोपद + नेऊर | |
| 10. देवरघटा (पामगढ़, जांजगीर-चाम्पा) | महानदी + शिवनाथ + लीलागर | |
| 11. सिल्ली शक्ति घाट (दुर्ग) | शिवनाथ + आमनेर + नंदकठी |
द्विवेणी संगम (दो नदियों का संगम)
| संगम स्थल | नदियाँ |
| 1. सोमनाथ (बलौदाबाजार) | शिवनाथ + खारून |
| 2. भद्रकाली (बीजापुर) | इंद्रावती + गोदावरी |
| 3. दंतेवाड़ा (दंतेवाड़ा) | शंखिनी + डंकिनी |
| 4. मानिकचौरी (बिलासपुर) | अरपा + शिवनाथ |
| 5. सिलादेही, केरा (जांजगीर-चांपा) | महानदी + हसदेव |
| 6. मदकूद्वीप (मुंगेली) | मनियारी + शिवनाथ |
| 7. कोंटा (सुकमा) | शबरी + सिलेरू |
| 8. बोदरागढ़ का किला (बस्तर) | इंद्रावती + नारंगी |
| 9. डेम्भा (शहडोल, म.प्र.) | सोननदी + बनासनदी |
| 10. महादेवपाली (ओड़िशा) | महानदी + केलोनदी |
नदी के तट पर स्थित घाट
| घाट का नाम | नदी |
| 1. महादेव घाट (रायपुर) | खारून नदी |
| 2. तरीघाट (दुर्ग) | खारून नदी |
| 3. नांदघाट (बेमेतरा) | शिवनाथ नदी |
| 4. सग्नीघाट (दुर्ग) | शिवनाथ नदी |
| 5. महमरा घाट (दुर्ग) | शिवनाथ नदी |
| 6. छठघाट (बिलासपुर) | अरपा नदी |
| 7. खर्राघाट (मुंगेली) | आगर नदी |
| 8. शिवघाट (मुंगेली) | मनियारी नदी |
नदियों के प्राचीन नाम 📜
| वर्तमान नाम | प्राचीन नाम |
| महानदी | नीलोत्पला, चित्रोत्पला, कनकनंदनी |
| लीलागर नदी | निडिला |
| इंद्रावती नदी | मंदाकिनी |
| शबरी नदी | कोलाब |
| कोटरी नदी | परलकोट |
| रिहन्द नदी | रेण्ड, रेणुका, रेहर |
| पैरी नदी | पयोधरा |
| हसदेव नदी | हस्तुसोमा, महानद |
| माण्ड नदी | मंदगा, मंदवाहिनी |
| खारंग नदी | कुरंग नदी |
| शिवनाथ नदी | शुनि नदी, शिवा नदी |
| अरपा नदी | कृपा नदी |
| जोंक नदी | पलाशिनी |
| सोन नदी | हिरण्यबाहु [CG PSC (AMO) 2022] |
अन्य नदियाँ एवं उनके प्रवाह क्षेत्र 🗺️
| नदी | प्रवाह क्षेत्र |
| नेयुर, पतले, रांपा, दौना नदी | मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर |
| शंख नदी | जशपुर |
| तेल नदी [CG PSC(AP)2016] | देवभोग तहसील, गरियाबंद |
| संकरी | कबीरधाम |
| सुरही [CG PSC(AP)2016] | राजनांदगाँव |
| सुरंगी नदी | सारंगढ़ |
| सारंगी, बलमदेही | महासमुंद |
| जाटलुर, कुकुर | नारायणपुर |
| नयनी, देवधा | कांकेर |
| तमुरा, लसुरा | कोण्डागांव |
| लमती नदी | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई |
| मारी (मोरल) नदी | भैरमगढ़ (बीजापुर) |
| वेनगंगा | बलरामपुर |
नदियों की लम्बाई 📏
| नदी का नाम | लम्बाई (कि.मी. में) |
| महानदी | 858 (286 छ.ग. में) |
| शिवनाथ नदी | 290 |
| इंद्रावती नदी | 264 |
| जोंक नदी | 210 |
| ईब नदी | 202 (87 छ.ग. में) |
| हसदेव नदी | 176 |
| शबरी नदी | 173 |
| मांड नदी | 155 |
| रिहंद नदी | 145 |
जीवन रेखा नदी ❤️
| नदी का नाम | किस क्षेत्र की जीवन रेखा |
| महानदी | छत्तीसगढ़ की [CG PSC (Lib.)2017] |
| रिहन्द नदी | सरगुजा की |
| केलो नदी | रायगढ़ की |
| अरपा नदी | बिलासपुर की |
| हसदेव नदी | कोरबा, जांजगीर-चांपा की |
| आगर नदी | मुंगेली की |
| खारून नदी | रायपुर की |
| इंद्रावती नदी | बस्तर क्षेत्र की/दण्डकारण्य प्रदेश की [CG PSC(Engg.)2016] |
नदी के तट पर स्थित स्थल 🏙️
| शहर (जिला) | नदियाँ |
| भरतपुर-जनकपुर | बनास नदी |
| डीपाडीह (बलरामपुर) | कन्हार |
| महेशपुर (सरगुजा) | रिहन्द |
| कोरबा | हसदेव |
| चांपा | हसदेव [CGVyapam(AAF)2013] |
| मुंगेली | आगर |
| राजिम (गरियाबंद) | महानदी |
| रायपुर | खारून |
| कोण्डागांव | नारंगी नदी [CG PSC (Pre.)2016] |
नदी जोड़ो परियोजना 🔗
- उद्देश्य: प्रदेश में सिंचाई संकट को दूर करने के उद्देश्य से निम्नलिखित नदियों को जोड़ने की पहल की गई है:
- महानदी + तांदुला लिंक परियोजना
- पैरी + महानदी लिंक परियोजना
- रेहर + अटेम लिंक परियोजना
- अहिरन + खारंग लिंक परियोजना
- हसदेव + केवई लिंक परियोजना
- केवई + हंसिया लिंक परियोजना
नदी के तट पर स्थित मंदिर 🙏
| मंदिर | नदी |
| गंधेश्वर महादेव मंदिर (सिरपुर) | महानदी |
| कलेश्वर महादेव मंदिर (पीथमपुर) | हसदेव |
| कुलेश्वर महादेव मंदिर (राजिम) | महानदी |
| चन्द्रहासिनी माता मंदिर (चन्द्रपुर) | महानदी |
| दंतेश्वरी माता मंदिर (दंतेवाड़ा) | शंखिनी-डंकिनी |
| सर्वमंगला माता मंदिर (कोरबा) | हसदेव |
| नारायण मंदिर, नारायणपाल (बस्तर) | नारंगी एवं इंद्रावती |
तीर्थ नाम की उपाधि 🏅
| तीर्थ स्थल | उपाधि |
| केदार तीर्थ | मदकूद्वीप (मुंगेली) |
| वैष्ण तीर्थ, गुप्त तीर्थ, तीर्थ राज | शिवरीनारायण |
| बद्री तीर्थ | राजिम |