सर्वाधिक पाई जाने वाली चट्टानें: आर्कियन शैल समूह (50 प्रतिशत)
प्रथम किसान शॉपिंग मॉल: राजनांदगाँव (2010 में) [CG PSC(Pre)20]
टाइगर किड: चेंदरू मंडावी (नारायणपुर से)
प्रथम हस्तलिखित बजट पेश: वित्तमंत्री श्री ओ.पी.चौधरी जी द्वारा
छत्तीसगढ़ के प्रतीक चिन्ह एवं राजभाषा आयोग
🌟 प्रस्तावना
छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को देश के 26वें राज्य के रूप में हुई। राज्य के गौरव को दर्शाने वाले प्रतीक चिन्हों में राजकीय पशु, पक्षी, वृक्ष, प्रतीक चिन्ह, गमछा, प्रतीक वाक्य, गीत और राजभाषा को सम्मिलित किया गया है।
🔄 राजकीय प्रतीकों की तुलना
आधार
🐾 राजकीय पशु
🐦 राजकीय पक्षी
🌳 राजकीय वृक्ष
नाम
वन भैंसा
पहाड़ी मैना
साल (सरई)
वैज्ञानिक नाम
Bubalus Bubalise
Gracula religiosa peninsularis
Shorea Robusta
घोषणा वर्ष
2001
2001
संरक्षण स्थल
उदन्ती अभ्यारण्य, पामेड़ अभ्यारण्य
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
विशेष जानकारी
नर को ‘अरना’ और मादा को ‘अरनी’ कहते हैं।
बस्तर को साल वनों का द्वीप कहा जाता है। यह एक पतझड़ वन है। प्रदेश में सबसे उत्तम किस्म के साल केशकाल घाटी (कोंडागांव) में मिलते हैं।
🐃 राजकीय पशु: वनभैंसा (Wild Buffalo)
वैज्ञानिक नाम: Bubalus Bubalise/ Bubalus Arnee [CG PSC(RDA)2014], [CG VS(AG-3)2021]
घोषित: वर्ष 2001 में
अन्य नाम: नर वनभैंसा को ‘अरना‘ तथा मादा वनभैंसा को ‘अरनी‘ कहा जाता है।
संरक्षण: उदंती अभ्यारण्य, पामेड़ अभ्यारण्य और भैरमगढ़ अभ्यारण्य में इनका संरक्षण किया जा रहा है।
मुख्य संकट: शेर, मानवीय शिकार, और रिंडरपेस्ट नामक बीमारी इनके अस्तित्व के लिए प्रमुख खतरे हैं।
राजकीय पक्षी, वृक्ष एवं आकृति
🐦 राजकीय पक्षी: पहाड़ी मैना (Hill Myna)
वैज्ञानिक नाम: Gracula religiosa peninsularis [CG Vyapam(MFA)2017], [CGPSC(ARO,APO)2014, (PEO)2022]
घोषित: वर्ष 2001 में
प्रमुख प्राप्ति स्थल: दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव, जगदलपुर, कांगेर घाटी, गुप्तेश्वर, तिरिया, और कुन्चा आदि क्षेत्रों में।
संरक्षण: कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में इसका संरक्षण किया जाता है।
🌳 राजकीय वृक्ष: साल/सरई (Sal/Sarai)
वैज्ञानिक नाम: Shorea Robusta [CGPSC(ARO,APO)2014], [CGPSC(Registrar)2021]
विस्तार: बस्तर के कोमलनार एवं मटनार क्षेत्र में नेपाल के तराई जैसे ऊँचे-ऊँचे साल के वृक्ष पाए जाते हैं। [CGVyapam(CBAS)2023] प्रदेश में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले साल वन केशकाल घाटी (कोंडागांव) में पाए जाते हैं।
विशेषता: इसे “साल वनों का द्वीप” भी कहा जाता है। यह एक पतझड़ वन है, जिसका प्रतिशत लगभग 40.56% है। [CGPSC(MI)2014][CGVyapam(RI)2017] राज्य के वनों में सबसे अधिक संख्या साल वृक्षों की है। [CG Vyapam(VSAM)2024]
🗺️ राज्य की आकृति
आकृति: समुद्री घोड़ा (Sea Horse/Hippocampus) के समान। [CG Vyapam(MFA)2015], [CG PSC(MI)2010]
मानचित्र निर्माण:
1905 में भौगोलिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ का पहला मानचित्र स्वतः बना था।
1918 में पंडित सुंदरलाल शर्मा ने अपनी पांडुलिपि में राज्य का एक स्पष्ट रेखाचित्र तैयार किया था।
राजकीय प्रतीक चिन्ह एवं महतारी प्रतिमा
🛡️ राजकीय प्रतीक चिन्ह
गोलाकार चिन्ह: 36 गढ़ों से घिरा हुआ, हरे रंग का।
अशोक स्तम्भ: मध्य में भारत का प्रतीक, लाल रंग में।
धान की बालियां: सुनहरे रंग की।
ऊर्जा: नीले रंग का प्रतीक।
नदियां: तिरंगे के रंगों में लहरों के रूप में।
ध्यान दें: प्रतीक चिन्ह में साल वृक्ष शामिल नहीं है।
स्वीकृति: इस प्रतीक चिन्ह को 4 सितम्बर 2001 को राज्य शासन द्वारा मंजूरी दी गई। हर्बल स्टेट की घोषणा 4 जुलाई 2001 को हुई थी। [CG PSC(Pre)2008]
####🧣 राजकीय गमछा
लोकार्पण: 14 अक्टूबर, 2021
निर्माण सामग्री: टसर सिल्क और खादी (कॉटन गमछा)
बुनकर: सिवनी-चांपा के बुनकरों द्वारा
माप: लंबाई 84 इंच और चौड़ाई 24 इंच
अंकित कलाकृतियाँ:
राजकीय पक्षी: पहाड़ी मैना
राजकीय पशु: वनभैंसा
गोदना चित्रकारी
बस्तर का प्रसिद्ध गौर मुकुट
मांदर के साथ नृत्य करते लोक कलाकार
हल चलाते किसान और धान की बाली
सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्रकला
🌺 छत्तीसगढ़ महतारी प्रतिमा
अनावरण: 1 नवम्बर, 2022
स्थान: कलेक्टोरेट चौक, रायपुर
मूर्तिकार: पद्मश्री जे. एम. नेल्सन
धातु: कांस्य
ऊँचाई: 11 फुट
प्रावधान: प्रदेश के सभी जिलों में प्रतिमा स्थापित की जाएगी तथा सभी शासकीय कार्यक्रमों में इसे अनिवार्य किया गया है।
विशेष: यह चित्र 90 के दशक में चले “छत्तीसगढ़ राज्य बनाओ” आंदोलन के दौरान प्रस्तुत किया गया था।
राजकीय गीत एवं प्रमुख दिवस
🎶 राजकीय गीत: “अरपा पैरी के धार”
रचयिता: डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा
लागू: 2 फरवरी 2020
गायन: प्रत्येक शासकीय कार्यक्रम की शुरुआत में गाया जाता है।
रचना काल: यह गीत 1973 में लिखा गया था। [CG Vyapam(FDFG)2024]
अवधि: 1 मिनट 15 सेकेण्ड (पूर्व में 6.36 मिनट)।
🗓️ प्रमुख दिवस
01 मई: मजदूर दिवस/बोरे बासी दिवस [CG PSC(Peon)2022]
14 अगस्त: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग स्थापना दिवस
01 नवम्बर: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस
15 नवम्बर: जनजाति गौरव दिवस
28 नवम्बर: छ.ग. राजभाषा दिवस/छत्तीसगढ़ी भाषा दिवस [CG PSC(ARO)2022,(Pre)2023]
14 दिसम्बर: विधानसभा स्थापना दिवस (प्रथम सत्र 14-19 दिसम्बर 2000)
14 फरवरी: मातृ-पितृ दिवस
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग
📜 आयोग का गठन
छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लक्ष्य के साथ अगस्त 2008 में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन किया गया। इसकी विधायी प्रक्रिया इस प्रकार थी:
IIIT: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर), नवा रायपुर।
HNLU: हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, उपरवारा, नवा रायपुर।
IIM: भारतीय प्रबंधन संस्थान, नवा रायपुर।
पर्यटन एवं अन्य स्थल:
जंगल सफारी: नंदनवन जंगल सफारी।
पुरखौती मुक्तांगना: उपरवारा, नवा रायपुर। [CGPSC(Mains)20]
प्रमुख पार्क:
आईटी पार्क 💻
साइंस पार्क 🔬
इलेक्ट्रानिक मेन्युफेक्चरिंग पार्क 🏭
जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क (SEZ परियोजना के तहत P.P.P. मोड पर) 💍
लॉजिस्टिक पार्क 🚚
फॉर्मास्युटिकल पार्क (प्रस्तावित) 💊
ट्रेड सेंटर: दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर, तूताग्राम (नवा रायपुर) में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर एक व्यापार केंद्र स्थापित किया गया है।
छत्तीसगढ़ का नामकरण
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्तमान छत्तीसगढ़, जिसे प्राचीन काल में ‘दक्षिण कोसल’ के नाम से जाना जाता था, का एक समृद्ध इतिहास रहा है। इस क्षेत्र का नाम दक्षिण कोसल और छत्तीसगढ़ कैसे पड़ा, और इसका विस्तार कहाँ तक था, इस पर विभिन्न ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोतों में अलग-अलग मत मिलते हैं। नीचे इन्हीं संदर्भों का विश्लेषण किया गया है। [CG PSC(MI)2014,(AROAPO)2014]
📖 ‘दक्षिण कोसल’ के रूप में पहचान
रामायण काल में:
उल्लेख: रामायण के अनुसार, इस क्षेत्र में राजा भानुमंत का शासन था।
श्लोक: रामायण का श्लोक “तथा कोसल राजानं भानुमन्तं, सुसंस्कृतम्” इस बात की पुष्टि करता है।
ग्रंथों के अनुसार:
कोसल खण्ड: इस ग्रंथ में बताया गया है कि विंध्य पर्वत के दक्षिण में नागपत्तन/नागपट्टम नामक क्षेत्र में कोसल नाम के राजा का शासन था। बाद में इसी वंश में राजा भानुमंत हुए, जिनकी पुत्री भानुमति का विवाह राजा दशरथ से हुआ। विवाह के बाद भानुमति ‘कौशल्या’ कहलाईं क्योंकि वह कोसल क्षेत्र से थीं। राजा भानुमंत के कोई पुत्र न होने के कारण यह राज्य राजा दशरथ को मिल गया और तभी से इसे ‘दक्षिण कोसल’ कहा जाने लगा।
साहित्यिक साक्ष्य:
पाणिनी का अष्टाध्यायी: पाणिनी के इस ग्रंथ में ‘दक्षिण कोसल’ शब्द का पहली बार साहित्यिक रूप में प्रयोग मिलता है।
🏹 कोसल और उत्तर कोसल
कालिदास का रघुवंशम्:
उल्लेख: कालिदास की इस रचना में कोसल और उत्तर कोसल दोनों का वर्णन मिलता है।
जानकारी: इस ग्रंथ में कौशल्या को कोसल देश की राजकुमारी बताया गया है।
🌏 महाकोसल
प्रो. कृष्णदत्त बाजपेयी के अनुसार:
स्थापना: प्रारंभ में दक्षिण कोसल, विदर्भ क्षेत्र का हिस्सा था। बाद में यह एक बड़े राज्य के रूप में स्थापित हुआ और इसे ‘महाकोसल’ कहा गया।
छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति
🏰 चेदिसगढ़ से छत्तीसगढ़
प्रो. हीरालाल के अनुसार:
उत्पत्ति: महाजनपद काल में यह क्षेत्र चेदि महाजनपद के अंतर्गत आता था। समय के साथ, यही ‘चेदिसगढ़’ शब्द अपभ्रंश होकर ‘छत्तीसगढ़’ बन गया।
🏡 छत्तीस घर से छत्तीसगढ़
वेगलर के अनुसार:
उत्पत्ति: जरासंध के शासनकाल में इस क्षेत्र में छत्तीस परिवार पलायन करके बस गए थे, जहाँ उनके छत्तीस घर थे। इसी ‘छत्तीस घर’ के अपभ्रंश से इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
⚔️ 36 गढ़ (किला) से छत्तीसगढ़
चिस्म के अनुसार:
उत्पत्ति: कल्चुरी शासक कल्याण साय ने अपने राज्य में जमाबंदी प्रथा लागू की और 36 गढ़ (किले) बनवाए। शिवनाथ नदी के उत्तर में 18 और दक्षिण में 18 गढ़ों में यह क्षेत्र विभाजित था। इन्हीं 36 गढ़ों के आधार पर इसका नाम छत्तीसगढ़ पड़ा।
कोसल प्रदेश के ऐतिहासिक उल्लेख
अभिलेख/ताम्रपत्र
शासक
उल्लेख
प्रयाग प्रशस्ति
समुद्रगुप्त (हरिषेण द्वारा रचित)
कोसल क्षेत्र एवं महाकांतार
बालाघाट
पृथ्वीसेन द्वितीय (वाकाटक नरेश)
मैकल, कोसल एवं मालवा क्षेत्र
अड़भार
नन्नराज (पांडुवंशी शासक)
कोसल एवं उत्कल
एहोल
पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य शासक)
कोसल एवं कलिंग
दशावतार मंदिर लेख
दंतिदुर्ग (राष्ट्रकूट शासक)
कोसल एवं कलिंग
अन्य अभिलेख
राजेन्द्र प्रथम (चोल शासक)
कोसलनाडु एवं ओड्र/उड्र
📝 अभिलेखों का विवरण
प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार: समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में कोसल क्षेत्र और महाकांतार का उल्लेख है।
बालाघाट ताम्रपत्र के अनुसार: वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन द्वितीय के ताम्रपत्र में उल्लेख है कि मैकल, कोसल और मालवा के शासक उनकी आज्ञाओं का पालन करते थे।
अड़भार ताम्रपत्र लेख: इसमें पांडुवंशीय शासक नन्नराज द्वारा तीवरदेव को कोसल और उत्कल का अधिपति बताया गया है।
एहोल अभिलेख: चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय के एहोल अभिलेख में कोसल और कलिंग क्षेत्र का वर्णन मिलता है।
दशावतार मंदिर लेख: राष्ट्रकूट शासक दन्तिदुर्ग के एलोरा स्थित इस लेख में कोसल व कलिंग का उल्लेख है।
अन्य अभिलेख: चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम ने अपने अभिलेख में कोसलनाडु और ओड्र पर विजय अभियान का जिक्र किया है।
कोसल प्रदेश की स्थिति एवं विस्तार
travellers’ Accounts
चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार:
विवरण: ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत ‘कि-या-स-लो’ (कोसल) में इसकी स्थिति कलिंग के उत्तर-पश्चिम में बताई है। इस क्षेत्र में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ और संबलपुर जिले शामिल थे।
🗺️ विभिन्न इतिहासकारों के अनुसार
कनिंघम के अनुसार:
विस्तार: उत्तरी सीमा उज्जैन तक, दक्षिणी सीमा आंध्रप्रदेश तक, पूर्वी सीमा ओडिशा तक, और पश्चिमी सीमा महाराष्ट्र तक।
प्रोफेसर हीरालाल के अनुसार:
विस्तार: पश्चिमी सीमा में बरार (महाराष्ट्र) जिला और पूर्वी सीमा में संबलपुर (ओडिशा) जिला स्थित था।
राजधानी: इस क्षेत्र की प्राचीन राजधानी भान्दक थी।
लोचन प्रसाद पाण्डेय के अनुसार:
विस्तार: उत्तर में गंगा तक, दक्षिण में गोदावरी तक, पूर्व में समुद्रवर्ती पाली (बालासोर, ओडिशा) तक और पश्चिम में उज्जैन तक।
हेमलाल यदु के अनुसार:
विस्तार: उत्तरी सीमा अमरकंटक तक और पश्चिमी सीमा शुक्तमत श्रेणी के समीप तक फैली हुई थी।
‘छत्तीसगढ़’ शब्द का ऐतिहासिक प्रयोग
वर्ष
प्रयोगकर्ता
उल्लेख/स्रोत
1487 / 1494 ई.
दलपतराव
साहित्यिक रचना में
1689 ई.
कवि गोपाल मिश्र
खूब तमाशा
1795 ई.
मि. जे.टी. ब्लंट
बिलासपुर गजेटियर
1839 ई.
बाबू रेवाराम
विक्रम विलास
🖋️ साहित्यिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ
दलराम राव (दलपत राव):
प्रयोग: इन्होंने अपनी साहित्यिक रचना में सर्वप्रथम ‘छत्तीसगढ़’ शब्द का प्रयोग किया। [CG PSC(MI)2014], [CG Vyapam(MahaLekhakar)2]
रचना: लक्ष्मीनिधि राय सुनो चित्त दें। गढ़ छत्तीसगढ़ में न गढ़ेया रही।।
दरबारी कवि: ये खैरागढ़ रियासत के राजा लक्ष्मीनिधि कर्ण राय के दरबारी एवं चारण कवि थे। राजकवि दलपत राव ने 1487 ई. (या कुछ स्रोतों के अनुसार 1494 ई.) में एक प्रशस्ति में इस शब्द का प्रयोग किया।
कवि गोपाल मिश्र:
उल्लेख: अपनी रचना ‘खूब तमाशा‘ (1689 ई.) में ‘छत्तीसगढ़’ शब्द का उल्लेख किया।
दरबारी कवि: ये कल्चुरी शासक राजसिंह के दरबारी कवि थे।
मि. जे. टी. ब्लंट:
उल्लेख: इन्होंने 1795 ई. में अपने यात्रा वृत्तांत का वर्णन बिलासपुर गजेटियर में किया, जिसमें शासकीय रूप से पहली बार किसी ब्रिटिश अधिकारी द्वारा ‘छत्तीसगढ़’ शब्द का प्रयोग किया गया।
बाबू रेवाराम (1812 – 1873 ई.):
इतिहासकार: ये छत्तीसगढ़ के प्रथम आधुनिक इतिहासकार माने जाते हैं।
उल्लेख: अपनी रचना “विक्रम विलास” (1839 ई.) में छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग किया।
विशेष: बलदेव प्रसाद मिश्र ने छत्तीसगढ़ को ‘भारत का लघु संस्करण’ कहा है। [CG PSC(ADA)20]
छत्तीसगढ़ के प्राचीनकालीन नाम
इस सारणी में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के प्राचीन नामों को अलग-अलग कालक्रम के अनुसार दर्शाया गया है।
कालक्रम
मध्य छत्तीसगढ़
बस्तर (दक्षिण छत्तीसगढ़)
संदर्भ
1. वैदिक काल
–
दक्खिन दिक्
[CG PSC(ADJE)2020]
2. रामायण काल
दक्षिण कोसल
दण्डकारण्य
3. महाभारत काल
कोसल / प्राक्कोसल
कान्तार
4. महाजनपद काल
चेदिगढ़
–
5. टॉल्मी (सातवाहनकाल)
अधिष्ठी
–
[CG PSC(ADA)2023]
6. रघुवंशम् (कालिदास)
कोसल एवं उत्तर कोसल
–
7. गुप्त काल
कोसल / दक्षिणापथ
महाकान्तार
8. ह्वेनसांग (चीनी यात्री)
किया-स-लो
–
9. कल्चुरी काल
दक्षिण कोसल
–
10. मुगल काल
रतनपुर राज्य
–
11. ब्रिटिशकाल
छत्तीसगढ़
–
12. कनिंघम के अनुसार
महाकोसल
दण्डकारण्य
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का घटनाक्रम
1861: मध्यप्रांत (Central Provinces) का उदय
गठन तिथि: 2 नवम्बर, 1861 [CG PSC(ITI Prin.)2022]
अन्य नाम: इसे सी.पी. या केन्द्रीय प्रांत/मध्य प्रांत भी कहा जाता था।
शामिल क्षेत्र: इसमें छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से शामिल थे।
डिप्टी कमिश्नर: चार्ल्स सी. इलियट
राजधानी: नागपुर
जिला गठन: मध्यप्रांत के गठन के साथ ही छत्तीसगढ़ में तीन जिले बनाए गए:
रायपुर
बिलासपुर
संबलपुर (जो वर्तमान में ओड़िशा का हिस्सा है) [CG PSC(AP)2016][CG PSC(MI)2014]
1862: संभागों का निर्माण
मध्य प्रांत में प्रशासनिक सुविधा के लिए 5 संभाग बनाए गए। [CGVypam(Patwari)2017][CGPSC(EAP)2016],[CG PSC(MI)2014]
संभाग का नाम
अधीन जिले
1. नागपुर
नागपुर, वर्धा, भंडारा, चांदा
2. छत्तीसगढ़
बिलासपुर, रायपुर, सम्बलपुर
3. सागर
सागर, दमोह, होशंगाबाद, बैतूल
4. गोदावरी तालुका
गोदावरी तालुका, अपर गोदावरी, बस्तर
5. जबलपुर
जबलपुर, मंडला, सिवनी
छत्तीसगढ़ संभाग: इसी वर्ष छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र संभाग बना, जिसका मुख्यालय रायपुर को बनाया गया। इसे रायपुर कमिश्नरी के नाम से भी जाना जाता था। [CG PSC(Pre)2015,2016]
प्रथम डिप्टी कमिश्नर: चार्ल्स सी. इलियट (1854-1862) [CGPSC(Pre)2020][CGVypam(LOI)2015]
1903: सेन्ट्रल प्रॉविन्स और बरार का गठन
बरार क्षेत्र के विलय के पश्चात् इस पूरे क्षेत्र को ‘सेन्ट्रल प्रॉविन्स एण्ड बरार’ के नाम से जाना जाने लगा।
1905: भाषाई आधार पर छत्तीसगढ़ का भौगोलिक परिवर्तन
1905 के बंगाल विभाजन का प्रभाव छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर भी पड़ा और भाषाई आधार पर इसका पुनर्गठन किया गया:
संबलपुर का हस्तांतरण: छत्तीसगढ़ के एक जिले संबलपुर को उसकी 5 रियासतों (पटना, सोनपुर, रायखोल, बामरा, कालाहांडी) सहित बंगाल प्रांत के ओड़िशा क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया।
छत्तीसगढ़ में विलय: छोटा नागपुर क्षेत्र की 5 रियासतों—कोरिया, चांगभखार, सरगुजा, उदयपुर (वर्तमान-धरमजयगढ़), और जशपुर—को छत्तीसगढ़ में शामिल किया गया।
छत्तीसगढ़ का नक्शा: इसी भौगोलिक परिवर्तन के बाद 1905 में वर्तमान छत्तीसगढ़ का पहला मानचित्र बनकर तैयार हुआ।
पृथक् छत्तीसगढ़ की मांग का विकास
1918: पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा अपनी पांडुलिपि में छत्तीसगढ़ का पहला स्पष्ट रेखाचित्र खींचा गया। इसी कारण उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम स्वप्नदृष्टा और संकल्पनाकार कहा जाता है। [CGPSC(MI)2010]
नोट: व्यापम ने छत्तीसगढ़ के प्रथम कल्पनाकार के रूप में डॉ. खूबचंद बघेल को सही उत्तर माना है। [CG Vyapam(Asst. Teach)2023]
1924: पृथक् छत्तीसगढ़ की पहली औपचारिक मांग
मांगकर्ता: रायपुर जिला परिषद् में कांग्रेस इकाई द्वारा।
समक्ष: यह मांग प्रांतीय व्यवस्थापिका सभा के सामने रखी गई थी।
1925: छत्तीसगढ़ सुधी संघ का गठन
संस्थापक: पं. शिवदास पाण्डेय
उद्देश्य: छत्तीसगढ़ को एक पृथक् अस्तित्व दिलाकर उसके प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करना। [CG Vyapam(HW)2024]
1939: कांग्रेस अधिवेशन में मांग
अधिवेशन: त्रिपुरी अधिवेशन।
मांगकर्ता: पं. सुन्दरलाल शर्मा द्वारा पृथक् छत्तीसगढ़ की मांग उठाई गई।
1946: छत्तीसगढ़ शोषण विरोधी मंच का गठन
पृष्ठभूमि: यह राज्य निर्माण के लिए गठित पहला संगठन था।
संस्थापक: ठा. प्यारेलाल [CG Vyapam(HW)2024]
उद्देश्य: पृथक् छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की मांग करना।
1947: स्वतंत्रता के समय छत्तीसगढ़ ‘मध्यप्रांत व बरार’ (C.P. & BARAR) का हिस्सा था।
1948: भारतीय संघ में छत्तीसगढ़ की 14 देशी रियासतों का विलय 1 जनवरी, 1948 तक हुआ, जिसके पश्चात् बस्तर, सरगुजा और रायगढ़ जिलों का गठन हुआ।
1953: फजल अली की अध्यक्षता में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष भी पृथक् छत्तीसगढ़ राज्य की मांग रखी गई।
1955: प्रथम विधायी मांग
पृष्ठभूमि: मध्यप्रांत के विधानसभा में भाषाई आधार पर पृथक् छत्तीसगढ़ राज्य की मांग की गई।
मांगकर्ता: रायपुर के विधायक ठा. रामकृष्ण सिंह द्वारा।
1956: मध्यप्रदेश का गठन
तिथि: 1 नवम्बर, 1956
मुख्यमंत्री: पं. रविशंकर शुक्ल
छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश में शामिल किया गया।
1956: “छत्तीसगढ़ महासभा” का गठन
संस्थापक: डॉ. खूबचंद बघेल [CG PSC(Asst. Geo.)2011]
स्थान: राजनांदगांव
उद्देश्य: पृथक् छत्तीसगढ़ की मांग को आगे बढ़ाना। [CG Vyapam(HW)2024]
महासचिव: दशरथ चौबे
संघर्ष के विभिन्न चरण और संगठन
1967: छत्तीसगढ़ भ्रातृत्व संघ (Brotherhood Association) का गठन
संस्थापक: डॉ. खूबचंद बघेल [CG PSC(MI)2014]
स्थान: राजनांदगांव
उपाध्यक्ष: द्वारिका प्रसाद तिवारी
सदस्य: प्यारेलाल कंवर, रामाधार कश्यप एवं चन्दूलाल चन्द्राकर
इसी वर्ष रायपुर के ईदगाह मैदान में एक सम्मेलन कर राष्ट्रपति से पृथक् राज्य की मांग की गई।
1975: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए पहली बार एक सुनियोजित संघर्ष प्रारंभ हुआ। [CG Vyapam(SMS)201]
1976: छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का गठन
संस्थापक: शंकर गुहा नियोगी [CG PSC(MI)2014]
उद्देश्य: पृथक् छत्तीसगढ़ की मांग को तीव्र करना।
1980: छत्तीसगढ़ महिला मुक्ति मोर्चा का गठन
संस्थापक: शंकर गुहा नियोगी
1983: छत्तीसगढ़ संग्राम मंच का गठन
संस्थापक: शंकर गुहा नियोगी
उद्देश्य: पृथक् छत्तीसगढ़ की मांग को एक संगठित रूप देना।
1983: पृथक् छत्तीसगढ़ पार्टी का गठन
संस्थापक: पवन दीवान [CG Vyapam(HW)2024]
1992: राज्य निर्माण हेतु सर्वदलीय मंच का गठन
अध्यक्ष: चन्दूलाल चन्द्राकर
सदस्य: पुरुषोत्तम कौशिक, हरि ठाकुर
विशेष: इस मंच द्वारा 1993 में ‘छत्तीसगढ़ महाबंद’ का आह्वान किया गया था।
1994: अशासकीय संकल्प प्रस्तुत
प्रस्तुतकर्ता: गोपाल परमार (तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायक) [CG Vyapam(FDFG)2024]
विशेष: यह अशासकीय संकल्प विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ।
महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्न
प्रश्न: निम्नलिखित में से किस तिथि को भारत के राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम हस्ताक्षरित हुआ, जिसके द्वारा यह राज्य अस्तित्व में आया?
(A) 25 जुलाई, 2000
(B) 28 अगस्त, 2000
(C) 1 नवंबर, 2000
(D) 25 दिसंबर, 2000
उत्तर: (B) [CG Vyapam(FI)2017]
प्रश्न: छत्तीसगढ़ राज्य गठन के विधेयक पर भारत के राष्ट्रपति ने किस तिथि को हस्ताक्षर किये?
(A) 31 जुलाई, 2000
(B) 9 अगस्त, 2000
(C) 25 अगस्त, 2000
(D) 28 अगस्त, 2000
उत्तर: (C) [CG PSC(ACF)2008]
मध्यप्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2000: एक निर्णायक कदम
1995: छत्तीसगढ़ अस्मिता संस्थान की स्थापना हुई।
1998: पृथक् छत्तीसगढ़ निर्माण के लिए शासकीय संकल्प तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में पारित किया गया। यह संकल्प मंत्रिमंडल की आम सहमति से पारित हुआ था।
2000: मध्यप्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2000 संसद में प्रस्तुत किया गया।
विधेयक पारित होने की प्रक्रिया
लोकसभा में:
विधेयक प्रस्तुत: 25 जुलाई, 2000
विधेयक पारित: 31 जुलाई, 2000
राज्यसभा में:
विधेयक प्रस्तुत: 03 अगस्त, 2000
विधेयक पारित: 09 अगस्त, 2000
राष्ट्रपति की स्वीकृति:
हस्ताक्षर: 25 अगस्त, 2000
हस्ताक्षरकर्ता: तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन
[CG PSC(RDA)2014], [CG Vyapam(SI Mains )2023]
छत्तीसगढ़ राज्य का गठन (1 नवम्बर, 2000)
गठन: 01 नवंबर, 2000
कानूनी आधार: मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत [CG PSC(MI)2014,(Pre)2019]
संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत [CG Vyapam(FI)2013]
राज्य क्रम: देश का 26वां राज्य [CG Vyapam(VAJ)2022]
पंचवर्षीय योजना: 9वीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) के दौरान लागू [CG Vyapam(ANM)2014]
मातृ राज्य: मध्यप्रदेश [CG PSC(RDA)2014]
भौगोलिक विभाजन: मध्यप्रदेश के “दक्षिण-पूर्व” भाग को पृथक् कर राज्य का निर्माण किया गया।
क्षेत्रफल हिस्सा: मध्यप्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 30.47 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ को मिला। [CG Vyapam(ADEO)2017]
राज्य निर्माण के समय के प्रमुख पदाधिकारी
पद
पदाधिकारी
भारत के राष्ट्रपति
श्री के.आर. नारायणन
भारत के प्रधानमंत्री
अटल बिहारी बाजपेयी
म.प्र. के मुख्यमंत्री
दिग्विजय सिंह
छत्तीसगढ़ राज्य: गठन के समय और वर्तमान में
गठन के समय एवं वर्तमान में प्रशासनिक स्थिति
तथ्य
राज्य गठन के समय (2000)
वर्तमान में
संदर्भ
संभाग
03
05
जिला
16
33
[CGPSC(MI)2014]
तहसील
96
251
[CGPSC(TSI)2]
विकासखण्ड
146
146
[CGPSC(AG-3)]
नगर निगम
10
14
राज्य निर्माण हेतु गठित प्रमुख संगठन
गठन वर्ष
संगठन का नाम
संस्थापक
संदर्भ
1925
सुधी संघ
शिवदास पाण्डेय
[CG Vyapam(HW)20]
1946
छत्तीसगढ़ शोषण विरोधी मंच
ठा. प्यारेलाल सिंह
[CG Vyapam(HW)20]
1956
छत्तीसगढ़ महासभा
डॉ. खूबचंद बघेल
[CG PSC(Asst. Geo.)20]
1967
छत्तीसगढ़ भ्रातृत्व संघ
डॉ. खूबचंद बघेल
[CG PSC(MI)201]
1976
छत्तीसगढ़ मुक्तिमोर्चा
शंकर गुहा नियोगी
[CG PSC(MI)201]
1980
छत्तीसगढ़ महिला मुक्तिमोर्चा
शंकर गुहा नियोगी
1983
छत्तीसगढ़ संग्राम मंच
शंकर गुहा नियोगी
1983
पृथक् छत्तीसगढ़ पार्टी
पवन दीवान
[CG Vyapam(HW)2024]
1992
राज्य निर्माण हेतु सर्वदलीय मंच
चन्दूलाल चन्द्राकर
1998
छत्तीसगढ़ राज्य संघर्ष मोर्चा
विद्याचरण शुक्ल
छत्तीसगढ़ में जिलों के गठन का ऐतिहासिक क्रम
1861 में गठन (02 जिले)
पृष्ठभूमि: ब्रिटिश प्रांत के हिस्से के रूप में छत्तीसगढ़ में दो जिलों की स्थापना हुई।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
1.
रायपुर
रायपुर
2 नवंबर 1861
ब्रिटिश प्रांत
2.
बिलासपुर
बिलासपुर
2 नवंबर 1861
ब्रिटिश प्रांत
[CG PSC(ITI Prin.)2022]
1906 में गठन (01 जिला)
पृष्ठभूमि: प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत एक नए जिले का निर्माण किया गया।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
3.
दुर्ग
दुर्ग
1 जनवरी 1906
रायपुर + बिलासपुर के कुछ भाग
1948 में गठन (03 जिले)
पृष्ठभूमि: देशी रियासतों के विलय के पश्चात् तीन नए जिले अस्तित्व में आए।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
4.
रायगढ़
रायगढ़
1 जनवरी 1948
रियासत
5.
सरगुजा
अम्बिकापुर
1 नवम्बर 1948
रियासत
6.
बस्तर
जगदलपुर
1948
रियासत
1973 में गठन (01 जिला)
पृष्ठभूमि: दुर्ग जिले का विभाजन कर एक नया जिला बनाया गया।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
7.
राजनांदगांव
राजनांदगांव
26 जनवरी 1973
दुर्ग
[CG PSC(ACF)2016]
1998 में गठन (09 जिले)
पृष्ठभूमि: प्रदेश में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत एक साथ नौ नए जिले बनाए गए।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
8.
कोरिया
बैकुण्ठपुर
25 मई 1998
सरगुजा
[CG PSC(RDA)2014]
9.
जशपुर
जशपुरनगर
25 मई 1998
रायगढ़
10.
कोरबा
कोरबा
25 मई 1998
बिलासपुर
11.
जाँजगीर-चाँपा
जांजगीर
25 मई 1998
बिलासपुर
12.
उत्तर बस्तर कांकेर
कांकेर
25 मई 1998
बस्तर
13.
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा
25 मई 1998
बस्तर
14.
कबीरधाम
कवर्धा
06 जुलाई 1998
बिलासपुर + राजनांदगांव
15.
महासमुंद
महासमुंद
06 जुलाई 1998
रायपुर
16.
धमतरी
धमतरी
06 जुलाई 1998
रायपुर
2007 में गठन (02 जिले)
पृष्ठभूमि: बस्तर संभाग में दो नए जिलों का गठन किया गया।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
17.
नारायणपुर
नारायणपुर
1 मई 2007
बस्तर
18.
बीजापुर
बीजापुर
1 मई 2007
दंतेवाड़ा
2012 में गठन (09 जिले)
पृष्ठभूमि: राज्य के स्थापना दिवस पर एक बार फिर नौ नए जिलों की घोषणा की गई।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
19.
सूरजपुर
सूरजपुर
1 जनवरी 2012
सरगुजा
20.
बलरामपुर
बलरामपुर
1 जनवरी 2012
सरगुजा
21.
मुंगेली
मुंगेली
1 जनवरी 2012
बिलासपुर
22.
बेमेतरा
बेमेतरा
1 जनवरी 2012
दुर्ग
23.
बालोद
बालोद
1 जनवरी 2012
दुर्ग
24.
बलौदाबाजार-भाटापारा
बलौदाबाजार
1 जनवरी 2012
रायपुर
25.
गरियाबंद
गरियाबंद
1 जनवरी 2012
रायपुर
26.
कोण्डागांव
कोण्डागांव
1 जनवरी 2012
बस्तर
27.
सुकमा
सुकमा
1 जनवरी 2012
दंतेवाड़ा
2020 में गठन (01 जिला)
पृष्ठभूमि: बिलासपुर संभाग में एक नया जिला बनाया गया।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
28.
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
गौरेला
10 फरवरी 2020
बिलासपुर
2022 में गठन (05 जिले)
पृष्ठभूमि: राज्य में प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण को बढ़ावा देते हुए पाँच और नए जिले बनाए गए।
क्र.
जिले का नाम
जिला मुख्यालय
स्थापना वर्ष
मातृ जिला
संदर्भ
29.
मोहला-मानपुर-अ. चौकी
मोहला
02 सितम्बर 2022
राजनांदगांव
30.
सारंगढ़-बिलाईगढ़
सारंगढ़
03 सितम्बर 2022
रायगढ़ + बलौदाबाजार
31.
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
खैरागढ़
03 सितम्बर 2022
राजनांदगांव
32.
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
मनेन्द्रगढ़
09 सितम्बर 2022
कोरिया
[CGVyapam(VDAG)2021]
33.
सक्ती
सक्ती
09 सितम्बर 2022
जांजगीर-चांपा
जिलों के गठन का संक्षिप्त विवरण
वर्ष
गठन का विवरण
नवगठित/संबंधित जिले
1861
मध्य प्रांत के अंतर्गत गठन
बिलासपुर, रायपुर, सम्बलपुर
1862
छत्तीसगढ़ संभाग का निर्माण
मुख्यालय – रायपुर
1905
नक्शे का निर्धारण एवं रियासतों का विलय
कोरिया, चांगभखार, उदयपुर, सरगुजा, जशपुर छत्तीसगढ़ में शामिल
नोट: इन नवीनतम 05 जिलों के गठन के पश्चात् छत्तीसगढ़ में जिलों की कुल संख्या 33 हो गई है।
छत्तीसगढ़ के जिलों का क्षेत्रफलानुसार अवरोही क्रम (घटते क्रम में)
यह सारणी छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों को उनके क्षेत्रफल के आधार पर बड़े से छोटे के क्रम में दर्शाती है, साथ ही जनसंख्या और अन्य प्रशासनिक इकाइयों का विवरण भी प्रदान करती है।
क्र.
जिला
क्षेत्रफल (वर्ग किमी.)
जनसंख्या
विकासखण्ड
तहसील
1.
बीजापुर
8530
2,55,230
4
6
2.
उत्तर बस्तर कांकेर
7161
7,48,941
7
11
3.
रायगढ़
7086
11,42,982
7
10
4.
कोरबा
6598
12,06,642
5
12
5.
बलरामपुर
6265
7,30,491
6
12
6.
जशपुर
5838
8,91,669
8
10
7.
सूरजपुर
5456
7,89,043
6
9
8.
सुकमा
5452
2,50,159
3
7
9.
बस्तर
5373
8,34,375
7
10
10.
कोण्डागांव
5096
5,78,824
5
7
11.
गरियाबंद
4834
5,97,653
5
7
12.
महासमुंद
4790
10,32,754
5
6
13.
नारायणपुर
4653
1,39,820 (न्यूनतम)
2
4
14.
बलौदाबाजार
4652
10,78,911
5
9
15.
कबीरधाम
4235
8,22,526
4
8
16.
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
4226
3,81,287
3
6
17.
धमतरी
4084
7,99,781
4
7
18.
सरगुजा
4010
8,40,352
7
8
19.
बिलासपुर
3536
16,25,502
4
12
20.
बालोद
3372
8,26,165
5
7
21.
राजनांदगांव
3245
8,84,742
4
7
22.
रायपुर
2896
21,60,876 (अधिकतम)
4
8
23.
बेमेतरा
2863
7,95,759
4
9
24.
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा
2845
2,83,479
4
6
25.
मुंगेली
2757
7,01,707
3
6
26.
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी
2490
2,83,947
3
5
27.
कोरिया
2370
2,77,630
2
4
28.
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
2333
3,68,444
2
4
29.
दुर्ग
2298
17,21,948
3
6
30.
जांजगीर-चांपा
2220
9,66,671
5
9
31.
सारंगढ़-बिलाईगढ़
2204
6,07,434
3
6
32.
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
1978
3,66,420
3
4
33.
सक्ती
1632
6,53,036
4
9
छत्तीसगढ़ (कुल)
1,35,192
2,55,45,198
146
251
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक इकाइयों की संरचना
यह सारणी छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक इकाइयों की वर्तमान संख्या और स्थिति को दर्शाती है।
प्रशासनिक इकाई
वर्तमान संख्या/स्थिति
विशेष विवरण
संभाग
05
जिला
33
अनुविभाग
117
तहसील
251
विकासखण्ड
146
अनुसूचित विकासखण्ड
85
(इसके अंतर्गत 5050 ग्राम पंचायतें आती हैं)
अनुसूचित क्षेत्र (पूर्ण रूप से)
16
अनुसूचित क्षेत्र (आंशिक रूप से)
05
आकांक्षी जिला
10
(सम्पूर्ण भारत में कुल 112 आकांक्षी जिले हैं)
संभाग, जिला, तहसील एवं विकासखंड व्यवस्था का निर्माण
निर्माण का आधार: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा-13 के अंतर्गत राज्य सरकार को संभागों, जिलों, उपखण्डों (अनुविभागों) तथा तहसीलों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं में परिवर्तन करने, उन्हें बनाने या समाप्त करने का अधिकार प्राप्त है।
संभाग (Division) की व्यवस्था
विभाजन: प्रशासनिक दृष्टिकोण से प्रदेश को 5 संभागों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक संभाग के लिए संभागायुक्त पद का सृजन किया गया है।
उद्देश्य: संभाग के अधीन आने वाले जिलों, अनुविभागों, तहसीलों एवं जनपद स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यों पर नियंत्रण रखना तथा उनके कार्यों की समय-समय पर समीक्षा करना। [CG PSC(ADVS)]
संभागों का गठन: एक ऐतिहासिक अवलोकन
राज्य निर्माण के समय: छत्तीसगढ़ में तीन संभाग अस्तित्व में थे:
रायपुर (1862) – छत्तीसगढ़ का पहला निर्मित संभाग, जिसका मुख्यालय रायपुर था।
बिलासपुर (1956)
बस्तर (1981)
मध्यवर्ती चरण: राज्य निर्माण के कुछ समय बाद संभागीय व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन अप्रैल, 2008 में इसे पुनः बहाल किया गया।
पुनर्गठन और नए संभाग:
अप्रैल 2008: संभागों का पुनः गठन किया गया और सरगुजा को प्रदेश का चौथा संभाग बनाया गया।
15 अगस्त, 2013: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रायपुर संभाग से अलग कर दुर्ग को एक नवीन (पाँचवाँ) संभाग बनाने की घोषणा की गई।
सितंबर, 2013: दुर्ग संभाग ने आधिकारिक रूप से कार्य करना प्रारंभ किया। यह वर्तमान में प्रदेश का नवीनतम संभाग है।
📌 छत्तीसगढ़ के संभाग: एक अवलोकन
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुविधा के लिए कुल 5 संभाग हैं। पेश है इनसे जुड़ी विस्तृत जानकारी:
🔸 सबसे नया संभाग और राज्य गठन के बाद बना 🔸 क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा संभाग
Previous Year Questions (PYQs): [CG Vyapam (Chemist)2016], [CG Vyapam (DCAG)2016]
🔑 जिले (Districts)
कलेक्टर 🕴️: जिले का शीर्ष अधिकारी कलेक्टर होता है, जो कानून-व्यवस्था, विकास और समन्वय के कार्यों के लिए जिम्मेदार है।
राज्य निर्माण के समय 🏗️: वर्ष 2000 में राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में कुल 16 राजस्व जिले थे।
जिलों का विकास क्रम 📈:
1 मई, 2007: नारायणपुर और बीजापुर जिले बनने से प्रदेश में जिलों की संख्या 18 हो गई।
1 जनवरी, 2012: 9 नए जिले अस्तित्व में आए, जिससे प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 27 हो गई।
10 फरवरी, 2020: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बनने के बाद जिलों की संख्या 28 हो गई।
9 सितंबर, 2022: 5 नए जिलों के निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ में जिलों की कुल संख्या 33 हो गई है।
PYQs: [CGPSC(MI),(ARO)2014]
💡 अनुविभाग (Sub-Division)
प्रशासनिक व्यवस्था 🏛️: जिले में प्रभावी शासन के लिए जिलों को अनुविभागों में बांटा जाता है।
प्रमुख अधिकारी 🤵: इसका प्रमुख अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)/एसडीएम/एसडीओ होता है, जो सामान्यतः राज्य प्रशासनिक सेवा (डिप्टी कलेक्टर) संवर्ग का अधिकारी होता है।
कुल संख्या 🔢: वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 117 अनुविभाग हैं।
🌍 तहसील (Tehsils)
कार्य 📄: तहसील, राजस्व संग्रहण के लिए एक भौगोलिक इकाई के रूप में काम करती है।
गठन का अधिकार ✍️: तहसीलों के गठन का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है।
संरचना 🧱: जिला कई राजस्व तहसीलों में बंटा होता है और तहसील का मुख्य राजस्व अधिकारी तहसीलदार होता है।
वर्तमान संख्या 📊: राजस्व विभाग के प्रशासकीय प्रतिवेदन 2023-24 के अनुसार, प्रदेश में कुल तहसीलों की संख्या 251 है।
PYQs: [CG PSC(TSI)202]
🌱 विकासखण्ड (Blocks)
उद्देश्य 🎯: विकासखंड ग्रामीण विकास के लिए एक भौगोलिक इकाई के रूप में कार्य करता है।
गठन का अधिकार 📜: विकासखण्ड गठन से संबंधित अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
कुल संख्या 🔢: प्रदेश में कुल 146 विकासखण्ड हैं, जिनमें से 85 आदिवासी विकासखण्ड हैं। इन विकासखंडों में 5050 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य 🧠: विकासखण्ड, राजस्व प्रशासन की इकाई नहीं होता है।
PYQs: [CG PSC(AG-3)201]
📊 संभागवार तुलनात्मक अध्ययन
संभाग
जिले
विकास-खण्ड
तहसीलें
नगर निगम
नगर पालिका
नगर पंचायत
1. रायपुर
05
23
37
3
10
23
2. बिलासपुर
08
34
68
3
13
36
3. बस्तर
07
32
51
01
08
14
4. दुर्ग
07
25
46
05
11
29
5. सरगुजा
06
32
49
02
06
19
योग
33
146
251
14
48
122
PYQs: [CG PSC(ACF)2017], [CG Vyapam(Chemist)20]
📖 छत्तीसगढ़ के विकासखण्ड एवं अनुसूचित विकासखण्ड
पांचवीं अनुसूची में वर्णित क्षेत्र
📜 अधिसूचना: भारत सरकार के 20 फरवरी, 2003 के असाधारण राजपत्र द्वारा संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों को परिभाषित किया गया है।
आदिवासी विकासखण्ड:** राज्य के कुल 146 विकासखण्डों में से 85 विकासखण्ड ‘आदिवासी विकासखण्ड’ के रूप में चिन्हित हैं।
संभागवार विवरण:
बस्तर संभाग: 32 विकासखण्ड (सभी 7 जिलों के सारे विकासखण्ड)।
सरगुजा संभाग: 32 विकासखण्ड (सभी 6 जिलों के संपूर्ण विकासखण्ड)।
दुर्ग संभाग: 04 विकासखण्ड (मोहला-मानपुर-चौकी के सभी विकासखण्ड और बालोद का डौंडी विकासखण्ड)।
बिलासपुर संभाग: 13 विकासखण्ड (कोरबा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सभी विकासखण्ड, साथ ही रायगढ़ जिले के रायगढ़ व पुसौर को छोड़कर शेष विकासखण्ड तथा बिलासपुर का कोटा राजस्व निरीक्षक खण्ड)।
रायपुर संभाग: 04 विकासखण्ड (गरियाबंद जिले के गरियाबंद, मैनपुर, छुरा और धमतरी जिले का सिहावा नगरी विकासखण्ड)।
नोट: * चिह्न वाले विकासखण्ड आदिवासी विकासखण्ड हैं।
आंशिक रूप से अनुसूचित जिले 🧩: प्रदेश के कुल 33 जिलों में से 5 जिले ऐसे हैं जिन्हें आंशिक रूप से अनुसूचित क्षेत्र में रखा गया है।
महत्वपूर्ण आँकड़े 📊:
आदिवासी विकासखण्ड: प्रदेश के कुल 146 विकासखण्डों में से 85 आदिवासी विकासखण्ड हैं, जिनके तहत 5,050 ग्राम पंचायतें आती हैं।
राज्य का अनुसूचित क्षेत्र: 81,861.88 वर्ग किलोमीटर।
आदिवासी उपयोजना क्षेत्र: 91,253 वर्ग किलोमीटर। [PYQ: CG PSC (Pre)2022]
प्रतिशत: राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 67.50% हिस्सा आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। [PYQ: CG PSC (ARO)2022]
** आंशिक रूप से अनुसूचित क्षेत्र में शामिल जिले **
जिला
शामिल तहसील/क्षेत्र
1. रायगढ़
खरसिया, घरघोड़ा, धरमजयगढ़, लैलूंगा एवं तमनार
2. बालोद
डौंडी
3. धमतरी
सिहावा-नगरी
4. बिलासपुर
कोटा (खण्ड-1)
5. गरियाबंद
मैनपुर, छुरा, गरियाबंद
PYQ: निम्नलिखित में से छत्तीसगढ़ के किन स्थानों पर संविधान की पाँचवीं अनुसूची लागू है? – (धरमजयगढ़, मानपुर और मोहला विकास खण्ड, कांकेर जिला)। [CG PSC(ADA)2023]
🇮🇳 छत्तीसगढ़ राज्य के लिए पाँचवी अनुसूची के तहत घोषित अनुसूचित क्षेत्र
भारत सरकार के 20 फरवरी 2003 के राजपत्र में छत्तीसगढ़ के निम्नलिखित क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है:
सरगुजा जिला: (वर्तमान सरगुजा, बलरामपुर और सूरजपुर जिले)
कोरिया जिला: (वर्तमान कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले)
बस्तर जिला: (वर्तमान बस्तर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले)
दंतेवाड़ा जिला: (वर्तमान दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले)
कांकेर जिला
कोरबा जिला
जशपुर जिला
बिलासपुर जिला: (वर्तमान में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला) मरवाही, गौरेला-1 और गौरेला-2 आदिवासी विकासखण्ड, साथ ही बिलासपुर जिले का कोटा राजस्व निरीक्षक खंड।
दुर्ग जिला: (वर्तमान बालोद जिला) में स्थित डौण्डी आदिवासी विकासखण्ड।
रायपुर जिला: (वर्तमान गरियाबंद जिला) में गरियाबंद, मैनपुर और छुरा आदिवासी विकास खण्ड।
धमतरी जिला: में नगरी (सिहावा) आदिवासी विकासखण्ड।
रायगढ़ जिला: में धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया आदिवासी विकासखण्ड।
✨ 6.4 आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Program)
उद्देश्य 🎯: इस कार्यक्रम का लक्ष्य देश भर के सबसे कम विकसित जिलों में तेजी से और प्रभावी ढंग से सकारात्मक बदलाव लाना है।
चयन प्रक्रिया 🇮🇳: भारत सरकार ने विभिन्न पैमानों के आधार पर पूरे भारत में 112 जिलों को आकांक्षी जिलों के रूप में चुना है। इनमें छत्तीसगढ़ के 10 जिले भी शामिल हैं।PYQs: [CG PSC (Pre)2019], [CG Vyapam (VPR)2]
छत्तीसगढ़ के 10 आकांक्षी जिले
कांकेर
कोण्डागांव
बस्तर
सुकमा
दंतेवाड़ा
बीजापुर
नारायणपुर
महासमुंद
कोरबा
राजनांदगांव (इसमें मो.-मा.-अ. एवं खै.-छु.-ग. जिले भी शामिल हैं)PYQ: [CG Vyapam (B.Ed.)2021]
🗺️ छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों का तुलनात्मक अध्ययन
यहाँ छत्तीसगढ़ के उन जिलों की सूची दी गई है जो अन्य जिलों की सीमाओं को स्पर्श करते हैं।
वर्तमान में सर्वाधिक जिलों से स्पर्श करने वाले जिले:
राष्ट्रीय संदर्भ: यह रेखा भारत के 8 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, प. बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम) से गुजरती है।
प्रमुख तथ्य: कर्क रेखा छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा बलरामपुर जिले से और सबसे कम कोरिया जिले से गुजरती है।
निकटतम शहर: कर्क रेखा के सबसे निकट बैकुण्ठपुर शहर स्थित है। [PYQ: CG PSC(AP)20]
लम्बाई (North-South): छत्तीसगढ़ की उत्तर से दक्षिण की अधिकतम लंबाई लगभग 700 से 800 किलोमीटर है। [PYQ: CG PSC(Pre)20]
📍 अक्षांशीय अंतिम बिंदु (Latitudinal Extreme Points)
सबसे उत्तरी जिला 🔼: बलरामपुर (24°5″ उत्तरी अक्षांश)
सबसे उत्तरी बिंदु 🔼: सुन्दरीगांव (रामानुजगंज) (24°5″ उत्तरी अक्षांश)
सबसे दक्षिणी जिला 🔽: सुकमा (17°46″ उत्तरी अक्षांश) [PYQ: CGVyapam(ECH)2017]
सबसे दक्षिणी बिंदु 🔽: कोंटा (17°46″ उत्तरी अक्षांश)
🧭 देशांतरीय विस्तार (Longitude)
विस्तार: राज्य का देशांतरीय विस्तार 80°15′ पूर्वी देशांतर से 84°25′ पूर्वी देशांतर तक है।
भारतीय मानक समय रेखा (IST):
82.5° पूर्वी देशांतर रेखा को भारतीय मानक समय रेखा कहते हैं।
राष्ट्रीय संदर्भ: यह भारत के 5 राज्यों (उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश) से गुजरती है।
छत्तीसगढ़ के जिले: राज्य में यह 7 जिलों से होकर गुजरती है: 1. सूरजपुर, 2. कोरिया, 3. कोरबा, 4. जांजगीर-चांपा, 5. बलौदाबाजार, 6. महासमुंद, 7. गरियाबंद। [PYQ: CG PSC(ARTO)2017]
चौड़ाई (East-West): छत्तीसगढ़ की पूर्व से पश्चिम की अधिकतम चौड़ाई 435 किलोमीटर है।
📍 देशांतरीय अंतिम बिंदु (Longitudinal Extreme Points)
सबसे पूर्वी जिला ⏩: जशपुर (84°25″ पूर्वी देशांतर)
सबसे पूर्वी बिंदु ⏩: गिरला, जशपुर (84°25′ पूर्वी देशांतर)
सबसे पश्चिमी जिला ⏪: बीजापुर (80°15″ पूर्वी देशांतर)
सबसे पश्चिमी बिंदु ⏪: भद्रकाली, भोपालपट्टनम (80°15″ पूर्वी देशांतर)
💡 विशेष तथ्य: प्रदेश का देशांतरीय विस्तार (435 कि.मी.) उसके अक्षांशीय विस्तार (700-800 कि.मी.) की तुलना में कम है। [PYQ: CG PSC(YWO)2017]
✂️ कटान बिन्दु (Intersection Point)
स्थान: कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा का मिलन बिंदु कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र की बालम की पहाड़ी पर स्थित है। यह जानकारी चिप्स (CHIPS) के आंकड़ों और आयोग द्वारा माने गए उत्तर पर आधारित है।
दोहरी रेखा वाले जिले: छत्तीसगढ़ में कर्क रेखा और भारतीय मानक समय रेखा, ये दोनों ही रेखाएँ केवल दो जिलों – सूरजपुर और कोरिया – से होकर गुजरती हैं।
PYQ: छत्तीसगढ़ के किस जिले में कर्क रेखा और भारतीय मानक समय देशांतर का कटान स्थित है? उत्तर: (A) कोरिया [CG PSC(ADJ) 201]
भौगोलिक हिस्सा ⛰️: छत्तीसगढ़, भारत के प्रायद्वीपीय पठार का एक हिस्सा है। [PYQ: CGPSC(Pre)2017]
⏳ छत्तीसगढ़ में समयांतराल (Time Difference)
छत्तीसगढ़ का सबसे पश्चिमी बिंदु भद्रकाली (बीजापुर) 80°15’ पूर्वी देशांतर पर है, और सबसे पूर्वी बिंदु गिरला (जशपुर) 84°25’ पूर्वी देशांतर पर है। चूँकि दो देशांतरों के बीच 4 मिनट का अंतर होता है, इसलिए इन दोनों बिंदुओं के बीच समय का अंतर 16 मिनट 36 सेकण्ड का होता है। [PYQ: CG Vyapam (Patwari)2022]
🌊 समुद्र तल से दूरी एवं ऊँचाई
निकटतम समुद्र ⚓: छत्तीसगढ़ के सबसे पास बंगाल की खाड़ी है, जो लगभग 400 कि.मी. दूर है।
औसत ऊँचाई 📊: राज्य की समुद्र तल से औसत ऊँचाई 500 मीटर है।
सर्वाधिक ऊँचाई 🔼: जशपुर (753 मीटर)।
न्यूनतम ऊँचाई 🔽: सुकमा (197 मीटर)।
PYQ: रायपुर शहर की समुद्र तल से ऊँचाई कितनी है? उत्तर: 298.15 मीटर। [CG Vyapam (LECT. Maths)]
संभागवार जिलों की समुद्र तल से ऊँचाई
सरगुजा संभाग
ऊँचाई
रायपुर संभाग
ऊँचाई
म.चि.भ.
579 मीटर
राजनांदगांव
307 मीटर
कोरिया
550 मीटर
बेमेतरा
378 मीटर
बलरामपुर
270 मीटर
दुर्ग
289 मीटर
सरगुजा
609 मीटर
बालोद
324 मीटर
सूरजपुर
553 मीटर
रायपुर संभाग
ऊँचाई
जशपुर
753 मीटर (सर्वाधिक)
बलौदाबाजार
270 मीटर
बिलासपुर संभाग
ऊँचाई
रायपुर
298.15 मीटर
रायगढ़
219 मीटर
महासमुंद
318 मीटर
सारंगढ़
217 मीटर
गरियाबंद
250 मीटर
सक्ती
237 मीटर
धमतरी
305 मीटर
जांजगीर-चांपा
297.4 मीटर
बस्तर संभाग
ऊँचाई
बिलासपुर
265 मीटर
कांकेर
398.14 मीटर
कोरबा
316 मीटर
कोण्डागांव
593 मीटर
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
618.4 मीटर
बस्तर
586 मीटर
मुंगेली
288 मीटर
दंतेवाड़ा
351 मीटर
दुर्ग संभाग
ऊँचाई
सुकमा
197 मीटर (न्यूनतम)
कवर्धा
353 मीटर
बीजापुर
278 मीटर
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
337 मीटर
नारायणपुर
288 मीटर
🗺️ छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक सीमा रेखा
🏞️ भू-आवेष्ठित (Land-Locked) राज्य: छत्तीसगढ़ की एक प्रमुख भौगोलिक विशेषता इसका भू-आवेष्ठित होना है। यह भारत के उन 5 राज्यों (अन्य हैं – मध्यप्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, हरियाणा) में से एक है, जिनकी सीमाएं न तो किसी समुद्र तट को छूती हैं और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगती हैं।
🤝 छत्तीसगढ़ के समीपवर्ती राज्य
छत्तीसगढ़ की सीमाएं भारत के 7 पड़ोसी राज्यों से मिलती हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
Previous Year Questions (PYQs): [CGPSC(TSI)2024, (Pre)2023][CG Vyapam (E-Chem.)2016]
🛑 नोट: राज्य की सबसे दक्षिणी सीमा सुकमा जिले द्वारा बनाई जाती है। [PYQ: CG Vyapam (ECH) 2017]
⚖️ पड़ोसी राज्यों की तुलना: क्षेत्रफल एवं जनसंख्या (भारत में रैंक)
राज्य का नाम
क्षेत्रफल में स्थान
जनसंख्या में स्थान
1. मध्यप्रदेश
दूसरा
छठवां
2. महाराष्ट्र
तीसरा
दूसरा
3. उत्तरप्रदेश
चौथा
पहला
4. आंध्रप्रदेश
सातवां
पांचवां
5. ओडिशा
आठवां
ग्यारहवां
6. तेलंगाना
ग्यारहवां
बारहवां
7. झारखंड
पंद्रहवां
तेरहवां
💡 प्रमुख तथ्य (Key Facts)
🔼 सबसे लम्बी सीमा वाला राज्य: ओडिशा [PYQ: CG Vyapam (LOI)2023]
🔽 सबसे कम सीमा वाला राज्य: आंध्रप्रदेश
🗺️ क्षेत्रफल में सबसे बड़ा पड़ोसी राज्य: मध्यप्रदेश
🗾 क्षेत्रफल में सबसे छोटा पड़ोसी राज्य: झारखंड
➖ सबसे कम अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला: धमतरी [PYQ: CG PSC(AP)2016]
➕ सबसे अधिक अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला: बलरामपुर
🌍 10. छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना
परिभाषा 📜: किसी भी क्षेत्र की भूमि के गर्भ में स्थित चट्टानों की विशेष संरचना को उस स्थान की ‘भू-गर्भिक संरचना’ कहा जाता है। इसका निर्माण विभिन्न शैल समूहों (चट्टानी परतों) के योगदान से होता है।
प्रभाव 💡: भू-गर्भिक संरचना का सीधा असर धरातलीय स्वरूप, भूमि की प्रकृति, मिट्टी के प्रकार, खनिजों की उपलब्धता और कृषि योग्य भूमि की गुणवत्ता पर पड़ता है।
भारत में विविधता 💎: भारत में पृथ्वी के सभी भू-वैज्ञानिक कालों में बनी चट्टानें पाई जाती हैं, जिनका निर्माण क्रम इस प्रकार है:
आर्कियन क्रम
धारवाड़ क्रम
कड़प्पा क्रम
विंध्यन क्रम
गोंडवाना क्रम
दक्कन ट्रैप क्रम
टर्शियरी क्रम
छत्तीसगढ़ के शैल समूह 🗺️: राज्य की भू-गर्भिक संरचना में मुख्य रूप से 6 शैल समूहों का विस्तार है: आर्कियन, धारवाड़, कड़प्पा, विंध्यन, गोंडवाना और दक्कन ट्रैप।
छत्तीसगढ़ के शैल समूहों का वर्गीकरण (टी. एस. हॉलैण्ड के अनुसार)
आद्यमहाकल्प / आर्कियन
आर्कियन
धारवाड़
पुराणमहाकल्प / पुरानासंघ
कड़प्पा
विन्ध्यन
आर्यमहाकल्प
गोंड़वाना
दक्कन
छत्तीसगढ़ में शैल समूहों का विस्तार एवं विशेषताएँ
क्र.
शैल समूह
विस्तार (%)
विशेष तथ्य
1.
आर्कियन शैल समूह
50% (सम्पूर्ण छत्तीसगढ़)
• बस्तर पठार के अधिकांश भाग में विस्तृत। • बैलाडीला की पहाड़ियाँ सबसे पुरानी शैलों से बनी हैं। [PYQs: CGPSC(ADJE)20, CGPSC(ADPPO)20]
2.
धारवाड़ शैल समूह
(1. पूर्वी बघेलखण्ड, 2. छ.ग. का मैदान, 3. दण्डकारण्य)
• इसमें नीस/नाइस चट्टानें मिलती हैं। • दण्डकारण्य में यह जगदलपुर, भानुप्रतापपुर, दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में है। [PYQs: CG Vyapam(TET)2017, CG PSC(Pre)2018]
3.
कड़प्पा शैल समूह
25-30% (महानदी बेसिन)
• यह अवसादी (Sedimentary) शैल समूह है। • महानदी बेसिन की लगभग 50% चट्टानें कड़प्पा समूह की हैं।
4.
विन्ध्यन शैल समूह
(चिल्फी घाटी क्षेत्र)
• इस समूह के चूना पत्थर से सीमेंट का निर्माण होता है। [PYQ: CG PSC(IMO)202]
5.
गोंडवाना शैल समूह
17% (बघेलखण्ड का पठार)
• मेटलीक कांट ने इसका नामकरण (1872) किया। • इसका मुख्य खनिज कोयला है। [PYQ: CG Vyapam(SEAT)201]
6.
दक्कन ट्रेप
(मैकल श्रेणी का पूर्वी भाग)
• यह मुख्यतः पाट प्रदेशों में मिलती है। • इसका रूपांतरण लमेटा या लैटेराइट समूह में हुआ है।
शैल समूहों का विस्तृत विवरण
1. आर्कियन / आद्य महाकल्पीय शैल समूह
अर्थ 🧠: ‘आर्कियन’ का मतलब होता है ‘सबसे प्राचीन’।
निर्माण 🔥: मैग्मा (लावा) के ठंडे होने से बनी।
जीवाश्म 🦖: इसमें जीवाश्म नहीं पाए जाते।
वितरण 🗺️: छत्तीसगढ़ के 50% से अधिक हिस्से में मौजूद है और यह राज्य की धरातलीय बनावट का मुख्य आधार है। [PYQ: CG PSC(ADH)20]
महानदी बेसिन: रायगढ़ बेसिन, बिलासपुर के कोटा, पेंड्रा, लोरमी, कवर्धा, बालोद, गरियाबंद, राजिम और धमतरी में।
दण्डकारण्य: कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा में (लगभग 75% हिस्सा)। [PYQ: CGPSC(ADJE)20]
जशपुर सामरीपाट और पूर्वी बघेलखण्ड: बलरामपुर, सरगुजा, जशपुर और अंबिकापुर के क्षेत्रों में भी इसका विस्तार है।
प्रमुख चट्टानें ⛰️:
ग्रेनाइट: डोंगरगढ़ के पास गुलाबी ग्रेनाइट पाया जाता है। [PYQ: CGPSC(AMO)202]
नीस-शिष्ट, क्वार्टजाइट और नीस-पट्टी।
2. धारवाड़ शैल समूह
युग: प्री-कैम्ब्रियन युग।
निर्माण 🔨: आर्कियन चट्टानों के अपरदन (Toot-Phoot) से बनी सबसे पुरानी अवसादी चट्टान।
नामकरण 🏷️: कर्नाटक के धारवाड़ जिले के नाम पर।
खनिज 💎: लौह अयस्क, टिन, और कोरंडम। [PYQ: CGPSC(ARTO)2022]
वितरण 🗺️:
पूर्वी बघेलखण्ड: बलरामपुर के रामानुजगंज, वाड्रफनगर में।
प्रमुख चट्टान 🗿: हेमेटाइट-क्वार्टजाइट (अत्यधिक कठोर) जो दल्लीराजहरा क्षेत्र में मिलती है।
3. कड़प्पा शैल समूह
अन्य नाम: पुराना संघ।
नामकरण 🏷️: आंध्रप्रदेश के कड़प्पा जिले के नाम पर।
निर्माण ⏳: प्री-कैम्ब्रियन युग के बाद ग्रेनाइट चट्टानों के अपरदन से।
खनिज ⛏️: चूना पत्थर, डोलोमाइट, क्वार्ट्ज (यह सीमेंट उद्योग का आधार है)।
प्रतिशत 📊: छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे विस्तृत शैल समूह (25 से 30%)।
वितरण 🗺️:
छत्तीसगढ़ का मैदान: महानदी बेसिन की लगभग 50% चट्टानें कड़प्पा की हैं। यह रायगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग, बालोद, रायपुर और महासमुंद जिलों में फैला है।
दण्डकारण्य का पठार: पूर्वी बस्तर (जगदलपुर) और पश्चिमी बीजापुर (भोपालपटनम) में विस्तृत।
4. विंध्यन शैल समूह
निर्माण: प्री-कैम्ब्रियन युग के बाद कड़प्पा चट्टानों पर अवसादों के जमाव से।
खनिज 💎: छत्तीसगढ़ में पाया जाने वाला चूना पत्थर निम्न विंध्यन काल से संबंधित है। [PYQ: CGPSC(IMO)2021]
विस्तार 🗺️: छत्तीसगढ़ में इसका विस्तार आंशिक रूप से है, मुख्यतः चिल्फी घाटी क्षेत्र में। [CG PSC(AP)201]
5. गोंडवाना शैल समूह
नामकरण 🏷️: मध्यप्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र के नाम पर।
युग: कार्बोनीफेरस से जुरासिक काल तक। [CG PSC(SEE)2022]
निर्माण 🌱: नदियों द्वारा जमा किए गए वनस्पतियों और जीवों के अवशेषों से। इन्हीं से कोयले का निर्माण हुआ।
मध्य गोंडवाना: इसका अधिक विकास छत्तीसगढ़ में नहीं हुआ है।
निचली गोंडवाना: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के दक्षिणी भाग, सरगुजा, कटघोरा, खरसिया और मांड नदी घाटी में विस्तृत है।
6. दक्कन ट्रैप शैल समूह
युग: मेसोजोइक युग (क्रिटेशियस काल)।
निर्माण 🌋: दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट लावा से सीढ़ीनुमा आकार में।
खनिज 💎: बॉक्साइट। [CG Vyapam (TET-2)2024]
विस्तार 🗺️: मैकल श्रेणी के पूर्वी हिस्से, कोरबा, कबीरधाम, सरगुजा और जशपुर जिलों में।
विशेष ✨: प्रदेश के जशपुर-सामरी क्षेत्र में मौजूद दक्कन ट्रैप, लमेटा या लैटेराइट समूह में बदल गया है। इसी के अपरदन से काली मिट्टी बनती है।
सारांश तालिका: खनिज, चट्टान और निर्माण
शैल समूह
प्रमुख खनिज
चट्टान
निर्माण प्रक्रिया
प्रतिशत
आर्कियन शैल
क्वार्ट्ज, फेल्सपार
ग्रेनाइट, नीस, सिस्ट
मैग्मा के ठंडे होने से
50%
धारवाड़ शैल
लौह अयस्क, टिन
नइस, ग्रेनाइट, साइनाइट
आर्कियन के अपरदन से
3%
कड़प्पा शैल
चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, डोलोमाइट
अवसादी चट्टान
ग्रेनाइट के अपरदन से
25-30%
विंध्यन शैल
चूना पत्थर
–
कड़प्पा के अवसादों के निक्षेपण से
0.005%
गोंडवाना ट्रेप
कोयला, बेरिल
–
नदियों के अवसादों और वनस्पतियों के जमने से
17%
दक्कन ट्रेप
बॉक्साइट
–
दरारी ज्वालामुखी के बेसाल्ट लावा से
उच्च प्रदेश
PYQ: [CG PSC(ARTO)2022] में मिलान करने वाला प्रश्न पूछा गया था, जिसका सही उत्तर (A) है: (a) दक्कन ट्रैप – (iii) बॉक्साइट, (b) आर्कियन – (ii) नीस, (c) कड़प्पा – (iv) चूना-पत्थर, (d) धारवाड़ – (i) टिन।
🌾 11. छत्तीसगढ़ की मिट्टियाँ (Soils of Chhattisgarh)
किसी भी क्षेत्र में मौजूद चट्टानों से उस क्षेत्र की मिट्टी का निर्माण और उसकी प्रकृति तय होती है। छत्तीसगढ़ प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है, इसलिए यहाँ अवशिष्ट प्रकार (Residual Soil) की मिट्टी पाई जाती है, जो कृषि और वन संसाधनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रदेश की चट्टानी संरचना के आधार पर यहाँ मुख्य रूप से 5 प्रकार की मिट्टियाँ मिलती हैं।
छत्तीसगढ़ की मिट्टियों का तुलनात्मक अध्ययन
तथ्य
लाल-पीली मिट्टी
लाल रेतीली मिट्टी
लाल दोमट मिट्टी
लैटेराइट मिट्टी
काली मिट्टी
1. स्थानीय नाम
मटासी
टिकरा
परिया
मुरूमी / भाठा / बंजर भूमि
कन्हार / भर्री / रेगुर
2. निर्माण
ग्रेनाइट-शिष्ट चट्टानों से
आर्कियन-धारवाड़ चट्टानों के अपरदन से
नीस, डायोराइट जैसी चट्टानों से
निक्षालन (Leaching) विधि से
बेसाल्ट लावा चट्टानों के अपरदन से
3. प्रकृति (pH)
अम्लीय (6.8)
अम्लीय (6.6)
अम्लीय (6.8)
उच्च अम्लीय (5.2)
क्षारीय (7.6)
4. जलधारण क्षमता
सीमित
न्यूनतम
–
–
सर्वाधिक
5. प्रतिशत (%)
50-55%
25-30%
10-15%
–
–
6. विस्तार
महानदी बेसिन, पूर्वी बघेलखण्ड, दण्डकारण्य
दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर, बालोद, मो.-मा.-अ.-चौ.
दंतेवाड़ा, सुकमा
जशपुर-सामरी पाट, सीमांत उच्च भूमि
मैकल श्रेणी का पूर्वी भाग, सरगुजा, जशपुर
7. उपयुक्त फसल
धान
कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी
मोटे अनाज
चाय, बागवानी फसलें
कपास, गेहूँ, गन्ना, चना
8. अधिकता
लोहा, रेत, चूना
लोहा, रेत (बालू), ग्रेनाइट
लोहा, क्ले (Clay)
कंकड़-पत्थर, आयरन
लोहा, एल्युमिनियम, चूना, पोटाश
9. कमी
नाइट्रोजन, ह्यूमस
नाइट्रोजन, ह्यूमस
नाइट्रोजन, ह्यूमस
फॉस्फेट, नाइट्रोजन, जीवाश्म
10. उपजाऊपन
द्वितीय उपजाऊ
कम उपजाऊ
अनुपजाऊ
कृषि हेतु अनुपयुक्त
सर्वाधिक उपजाऊ
छत्तीसगढ़ में मिट्टियों का वर्गीकरण और वितरण
(यह सेक्शन दिए गए पेज में मैप और चार्ट के रूप में है, जिसे यहाँ टेक्स्ट और टेबल में प्रस्तुत किया गया है।)
🌱 मिट्टी का वर्गीकरण (Soil Orders)
मृदा वर्ग
मिट्टी का प्रकार
स्थानीय नाम
इन्सेप्टीसॉल
लाल-पीली मिट्टी
मटासी
एन्टीसॉल
लैटेराइट
मुरूमी, भाठा
अल्फीसॉल
लाल-बलुई
टिकरा
वरटीसॉल
काली
कन्हार
🧪 मिट्टी का pH मान (प्रकृति)
मिट्टी का प्रकार
pH मान (प्रकृति)
लाल-पीली मिट्टी
6.8 (अम्लीय)
लाल रेतीली मिट्टी
6.6 (अम्लीय)
लाल दोमट मिट्टी
6.8 (अम्लीय)
लैटेराइट मिट्टी
5.2 (उच्च अम्लीय)
काली मिट्टी
7.6 (क्षारीय)
डोरसा मिट्टी
6.0 से 7.5
🌾 छत्तीसगढ़ की प्रमुख मिट्टियाँ: एक विस्तृत अवलोकन
🧱 निर्माण: इसका निर्माण ग्रेनाइट-शिष्ट और आर्कियन क्रम की चट्टानों के अपरदन (टूट-फूट) से होता है।
🧪 प्रकृति: यह अम्लीय (Acidic) होती है, जिसका pH मान 6.8 है। [PYQ: CG PSC(Pre)2020]
🎨 रंग:
🔴 लाल रंग: यह रंग लोहे (फेरस ऑक्साइड – Fe₂O₃) की मौजूदगी के कारण होता है।
🟡 पीला रंग: जब इस मिट्टी में जल का अंश मिलता है (जलयोजन), तो फेरिक ऑक्साइड (Fe₃O₄) के कारण इसका रंग पीला हो जाता है।
💧 जलधारण क्षमता: इसमें रेत की मात्रा अधिक होने के कारण जल धारण करने की क्षमता सीमित होती है।
🌱 उपजाऊपन: यह प्रदेश की दूसरी सबसे उपजाऊ मिट्टी है (सबसे उपजाऊ काली मिट्टी है)। इसमें मुख्य रूप से धान, अलसी, तिल आदि की फसलें उगाई जाती हैं। [PYQ: CG Vyapam(SI Mains)2023]
💎 खनिज: इसमें चूना, लोहे और रेत की अधिकता होती है, जबकि नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है। [PYQ: CG PSC(Pre)2021]
🗺️ वितरण/विस्तार: यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े क्षेत्र (लगभग 50-55% भाग) में पाई जाने वाली मिट्टी है। [PYQ: CG PSC(MI)2010(Pre)2021]
महानदी बेसिन: महानदी और मांड नदी घाटी क्षेत्रों में यह उत्तम किस्म में मिलती है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों में इसका विस्तार है।
पूर्वी बघेलखण्ड का पठार: पूर्वी सीतापुर, दक्षिणी अम्बिकापुर, मध्य सूरजपुर और प्रतापपुर में यह मिट्टी पाई जाती है।
दण्डकारण्य का पठार: कोटरी, इंद्रावती जैसी नदियों के मैदानी क्षेत्रों में यह मिलती है।
2. लाल बलुई / लाल रेतीली मिट्टी (टिकरा)
🌾 स्थानीय नाम: टिकरा मिट्टी। [PYQ: CG PSC(AP)2009]
🏞️ परिभाषा: बस्तर के ऊँचे मैदानी ढलानों पर पाई जाने वाली मिट्टी को टिकरा कहते हैं। [PYQ: CG PSC(AP)2016]
🧱 निर्माण: इसका निर्माण आर्कियन एवं धारवाड़ क्रम की चट्टानों के अपरदन से होता है।
🧪 प्रकृति: यह अम्लीय (Acidic) होती है, जिसका pH मान 6.6 है।
🎨 रंग: लौह तत्व की अधिकता के कारण इसका रंग लाल होता है।
🌱 फसलें: यह कम उपजाऊ होती है, इसलिए इसमें मोटे अनाज जैसे- कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का आदि उगाए जाते हैं। [CG Vyapam(SI Mains)]
💎 खनिज: इसमें लौह तत्व और रेत की अधिकता होती है, जबकि नाइट्रोजन और ह्यूमस का अभाव होता है।
🗺️ वितरण/विस्तार: यह राज्य के 25-30% भू-भाग पर फैली है, मुख्यतः छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से में (दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, बालोद)।
3. लाल दोमट मिट्टी
🧱 निर्माण: यह नीस और डायोराइट जैसी चट्टानों से बनती है।
🎨 रंग: लौह अयस्क की अधिकता के कारण लाल होती है।
💧 जलधारण क्षमता: बहुत कम (न्यूनतम), क्योंकि इसके कण बड़े (बोल्डर) आकार के होते हैं, जिससे पानी रुक नहीं पाता। यह मिट्टी कम आर्द्रताग्राही होती है, इसलिए पानी की कमी होने पर कठोर हो जाती है। [CG PSC(Eng.G-1)20]
🌱 उपजाऊपन: यह कम उपजाऊ होती है।
🗺️ वितरण/विस्तार: यह राज्य के 10-15% भू-भाग पर, मुख्यतः दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों तथा हसदेव-रामपुर बेसिन में पाई जाती है। [CG PSC(Eng.G-1)20]
4. लैटेराइट मिट्टी (मुरूमी/भाठा)
🌾 स्थानीय नाम: मुरूमी मिट्टी (यह छोटे पत्थरों के साथ मिलती है), भाठा मिट्टी, बंजर भूमि। [PYQs: CG PSC(AP)20, CGPSC(Pre)20]
🧱 निर्माण: इसका निर्माण ‘निक्षालन’ (Leaching) या लेटेराइजेशन प्रक्रिया द्वारा होता है।
🧪 प्रकृति: यह उच्च अम्लीय (Highly Acidic) होती है, जिसका pH मान 5.2 है। यह कृषि के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है। [PYQ: CGPSC(TSI)202]
🎨 रंग: कत्था (लाल-भूरा) रंग। [CGPSC(Pre)202]
🌱 फसलें: बागवानी फसलों जैसे चाय, लीची, आलू, टमाटर आदि के लिए उपयुक्त है। [CG Vyapam(SI Mains)202]
🏗️ उपयोग: एल्युमिनियम और लोहे की अधिकता के कारण यह कठोर होती है, इसलिए इसका उपयोग भवन एवं ईंट निर्माण में किया जाता है।
🗺️ वितरण/विस्तार: यह पाट प्रदेशों (सरगुजा संभाग) और जगदलपुर के उच्चावच क्षेत्रों में पाई जाती है।