महानदी एवं उसकी सहायक नदियों के प्रवाह क्षेत्र को महानदी बेसिन कहते हैं। जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| उपनाम | छत्तीसगढ़ का मैदान / महानदी का मैदान / मध्य भारत का धान का कटोरा [CG PSC(Lib)2014]। राज्य का हृदय स्थल भी कहा जाता है। |
| विस्तार | इसके अंतर्गत राजनांदगांव, खै.-छु.-ग., दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, रायपुर, धमतरी, महासमुंद, गरियार्वद, बलीदाबाजार, बिलासपुर, गुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा, रायगढ़ एवं सारंगढ़ आते हैं। |
| स्थिति | मध्य छत्तीसगढ़ में (बिलासपुर, रायपुर एवं दुर्ग संभाग में)। |
| क्षेत्रफल | 68,064 वर्ग किमी. (प्रदेश का सबसे बड़ा भौतिक विभाग)। |
| प्रतिशत | 50.34 प्रतिशत (यह छत्तीसगढ़ के आधे भाग में फैला हुआ है।) [CG Vyapam(SI Mains)2023] |
| आकृति | चापाकार (पंखाकार) / तस्तरी नुमा [CGVyapam(ABA),(MLVI)2025] |
| ढाल | पूर्व [CG PSC(Pre)2011] |
| ऊँचाई | मध्य क्षेत्र में : 300 मी. से कम; पूर्वी सीमा क्षेत्र : 220-330 मी. तक। |
| निर्माण/बनावट | कड़प्पा शैल समूह के क्षेत्रिक अवसादी शैलों पर [CG PSC(AAD&SO)2018],[CGVyapam(VDAG)2021] |
| शैल समूह | महानदी बेसिन के लगभग 50% क्षेत्र में कड़प्पा शैल समूह विद्यमान है तथा कुछ भाग पर आकियन, गोंडवाना (रायगढ़, कोरबा), दक्कन ट्रेप, धारवाड़ क्रम का शैल समूह पाया जाता है। [CG PSC(VAS)2021] |
| खनिज | चूना पत्थर, डोलोमाईट, कोयला। |
| सबसे ऊँची चोटी | बदरगढ़ (1176 मी.), कबीरधाम [CG PSC(Pre)2008] |
| मिट्टी | लाल-पीली एवं काली मिट्टी। |
| नदी अपवाह तंत्र | महानदी अपवाह तंत्र। |
*यह एक योजनाबद्ध (schematic) चित्र है जो बेसिन के पंखाकार आकार, पूर्व की ओर ढाल और राज्य में इसके विशाल विस्तार को दर्शाता है।
महानदी बेसिन को ‘मध्य भारत का धान का कटोरा’ और ‘राज्य का हृदय स्थल’ कहा जाता है।
क्षेत्रफल: 68,064 वर्ग किमी (राज्य का 50.34%), जो आधे छत्तीसगढ़ में फैला है।
चापाकार (पंखाकार) या तस्तरी नुमा (Bowl shaped)।
कड़प्पा शैल समूह (क्षेत्रिक अवसादी शैल)। लगभग 50% क्षेत्र में यही पाई जाती है।
बदरगढ़ (1176 मी.) — कबीरधाम जिले में स्थित।
चूना पत्थर, डोलोमाईट, कोयला।