महानदी बेसिन (उपविभाग) एवं सीमांत उच्च भूमि
छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन (पृष्ठ 20–23)
📘 स्रोत-आधारित विस्तृत नोट्स📖 विस्तृत नोट्स
1. छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन) एवं उपविभाग
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महानदी बेसिन को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है: (A) छ.ग. का मध्यवर्ती क्षेत्र और (B) सीमांत उच्च भूमि।
(A) छत्तीसगढ़ का मैदान
- उपनाम: महानदी बेसिन।
- क्षेत्रफल: 31,600 वर्ग किमी।
- आकृति: पंखाकार/कटोरानुमा।
- उत्पत्ति: कडप्पा शैल समूह के क्षेत्रतिजक अवसादी शैलों पर महानदी एवं उनकी सहायक नदियों के अपरदन जमाव के परिणामस्वरूप।
प्रमुख उपविभाग
- शिवनाथ-महानदी दोआब: यह क्षेत्र महानदी बेसिन के दक्षिण भाग में स्थित है। इसका विस्तार दुर्ग से रायपुर संभाग के जिलों में है। इसके अंतर्गत दुर्ग तथा रायपुर जिले के सभी क्षेत्र तथा बलौदाबाजार जिले के अधिकांश क्षेत्र शामिल हैं। बेमेतरा, बालोद, महासमुंद जिलों के कुछ भाग शामिल हैं। ढाल दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर है। प्रवाह क्षेत्र शिवनाथ और खारुन नदी है। यहां की नदियाँ लम्बवत् प्रवाहित होती हैं। इनकी सहायक नदियाँ पहाड़ों से अर्द्धचंद्राकार रूप में प्रवाह होती हुई विपरीत दिशा से आकर मुख्य नदियों से मिल जाती हैं। शैल समूह कडप्पा, खनिज चूना पत्थर, मिट्टी काली/मिश्रित लाल और रेलीली मिट्टी।
- महानदी पार का संकरा मैदान: विस्तार: धमतरी का उत्तर-पूर्वी भाग, रायपुर व बलौदाबाजार के पश्चिमी भाग। स्थिति: महानदी के पूर्व में स्थित एक संकरी पेटी है। पूर्व में: रायपुर की उच्च भूमि, पश्चिम में: महानदी-शिवनाथ दोआब क्षेत्र। औसत ऊँचाई 305 मीटर है (उत्तरी भाग 245 मी.)। पूर्वी भाग में चौड़ाई 13–16 किमी तक है। चट्टानें: कड्घ्यायुगीन शैल और चूना युक्त चट्टानें पायी जाती हैं।
[पृष्ठ 21: मूल स्रोत में अस्पष्ट – केवल संख्याओं की पुनरावृत्ति]
2. दलहा पहाड़ (सिन्दुरगिरी/सिंघुलगिरी)
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- स्थान: अकलतरा, जांजगीर-चांपा।
- अन्य नाम: सिन्दुरगिरी/सिंघुलगिरी।
- नामकरण: जनश्रुति के अनुसार भगवती महासती का सिन्दुर इसी स्थल पर गिरा था। आस-पास का क्षेत्र दलदली था इसलिए यह दलदला पहाड़ कहलाने लगा। यहां छोटी-छोटी पहाड़ियों के अनेक दल हैं, दलबद्ध होने के कारण इस पहाड़ को दलहा कहा।
- ऊँचाई: 760 मी.
- मंदिर: 1. नागेश्वर शिव मंदिर, 2. मगवती विश्वेश्वरी मंदिर (इसकी प्रतिमा छिन्नमस्ता अर्थात् सिर विहिन है)।
- आश्रम: सिद्ध बाबा का आश्रम।
- मेला: नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी) के दिवस स्थानीय लोग सर्प को दूध पिलाने के लिए जाते हैं। कुशली प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
- विशेष: विश्वेश्वरी देवी को स्थानीय लोग हिंगलाज माई के नाम से जानते हैं। लोग इसे सिन्दुर शक्ति पीठ के रूप में पूजते हैं।
3. (B) सीमांत उच्च भूमि (Border Highlands)
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- क्षेत्रफल: 36,464 वर्ग कि.मी.
- स्थिति: छत्तीसगढ़ का मैदान के चारों ओर स्थित उच्च भूमि।
- विस्तार: कवर्धा, खै.-छु.-ग., राजनांदगांव, मो.-मा.-अ., बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद।
- निर्माण: आकियन, गोंडवाना और दक्कन ट्रेप इत्यादि शैल समूहों द्वारा निर्मित।
- उप-विभाग: भू-वैज्ञानिक संरचना में विविधता के कारण तथा नदियों द्वारा विच्छेदन के कारण सीमांत उच्च भूमि निम्नलिखित उप-विभागों में विभक्त है –
- मैकल श्रेणी
- उत्तरी उच्चभूमि
- दक्षिणी उच्चभूमि
- पूर्वी उच्चभूमि (रायपुर उच्च भूमि)
छत्तीसगढ़ का मैदान एवं सीमांत उच्च भूमि (योजनाबद्ध मानचित्र)
*यह एक योजनाबद्ध (schematic) चित्र है जो मध्यवर्ती मैदान (महानदी बेसिन) और चारों ओर फैली सीमांत उच्च भूमि को दर्शाता है।
4. मैकल श्रेणी (Maikal Range)
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- विस्तार: राजनांदगाँव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कबीरधाम, लोरमी एवं पेण्डा तक।
- ढाल: पश्चिम से पूर्व की ओर (West to East)।
- भाग: सतपुड़ा पर्वत का पूर्वी छोर।
- निर्धारण: 1. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा कवर्धा की दक्षिण-पश्चिमी सीमा बनाती है। 2. मध्यप्रदेश के मण्डला जिले एवं छत्तीसगढ़ के गौ-पे-म. जिले की सीमा रेखा बनाती है।
- जल विभाजक: शिवनाथ नदी व वेनगंगा नदी के मध्य।
- ऊँची चोटी:
- बदरगढ़ (1176 मी.) : कबीरधाम जिले में स्थित है। छत्तीसगढ़ के पश्चिम भाग की सबसे ऊँची चोटी है।
- झाला पहाड़ (1136 मी.)
- देवसानी पहाड़ (1125 मी.)
- बाह्यनगढ़ (1127 मी.), लीलावनी, भरकुण्ड।
- घाटी: 1. हिल्फी घाटी, कवर्धा (NH-30), 2. बृजवानी घाटी (NH-53), 3. शिवनाथ घाटी।
- श्रेणियाँ: 1. कांदावनी (कबीरधाम) : यहीं से हाफ नदी का उद्गम होता है। 2. फूलहाड़ी/कुलहारी की पहाड़ी (मो.-मा.-अ.) : यहां से बाघ नदी का उद्गम होता है।
- वृद्धिष्ठाया: मैकल श्रेणी के पूर्वी भाग – मैकल श्रेणी के कारण कबीरधाम जिला वृद्धिष्ठाया क्षेत्र में आता है।
- वन: साल वृक्ष (Sal Forest)।
- जनजाति: 1. बैगा, 2. अगरिया।
- अभ्यारण्य: अचानकमार।
- खनिज: लौह अयस्क (चिल्कीघाटी, एकलामा-चेलिकलामा), चूना पत्थर (रणजीतपुर)।
- विशेष: यह खै-छु-गं. की उत्तरी-पश्चिमी तथा कबीरधाम की दक्षिण-पश्चिम सीमा बनाती है। इसके दक्षिण-पश्चिम में महोबा डोंगर पवत है जिसकी समुद्र सतह से औरत ऊँचाई लगभग 617 मी. है।
💡 महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts / Flashcards)
🌊 महानदी पार का संकरा मैदान
महानदी के पूर्व में 13-16 किमी चौड़ी संकरी पेटी, औसत ऊँचाई 305 मीटर।
⛰️ दलहा पहाड़
अकलतरा (जांजगीर-चांपा) में स्थित, ऊँचाई 760 मी., इसे सिन्दुरगिरी/सिंघुलगिरी भी कहते हैं।
📏 सीमांत उच्च भूमि
क्षेत्रफल: 36,464 वर्ग किमी, मैदान के चारों ओर स्थित।
🏔️ मैकल श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी
बदरगढ़ (1176 मी.) — कबीरधाम जिले में, पश्चिम छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी।
🐅 मैकल श्रेणी का अभ्यारण्य
अचानकमार वन्यजीव अभ्यारण्य।
🌿 मैकल श्रेणी की जनजाति
बैगा और अगरिया जनजातियाँ यहाँ निवास करती हैं।
आधिकारिक शोध एवं सत्यापन (Official Research & Updates)
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- दलहा पहाड़: जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा में स्थित 760 मीटर ऊँचा यह पहाड़ सिन्दुर शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध है। (स्रोत: जिला प्रशासन जांजगीर-चांपा)।
- मैकल श्रेणी: यह सतपुड़ा का पूर्वी विस्तार है, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा बनाता है। बदरगढ़ (1176 मी.) इसकी सबसे ऊँची चोटी है। (स्रोत: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण)।
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