सीमांत उच्च भूमि एवं प्रमुख बेसिन
छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन (पृष्ठ 25–28)
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उत्तरी उच्च भूमि को छुरी-उदयपुर की पहाड़ी के नाम से भी जानते हैं। इसका विस्तार कोरबा से रायगढ़ जिले तक है। यह महानदी बेसिन के उत्तर दिशा में स्थित है। इसके दो भाग हैं –
1. छुरी पहाड़ी (कोरबा)
- विस्तार: कोरबा (सर्वाधिक)।
- स्थिति: महानदी बेसिन के उत्तर में स्थित है।
- सीमाएँ: पश्चिमी: हसदो नदी, पेण्डा पठार; पूर्वी: मांड नदी; उत्तर: महादेव पहाड़; दक्षिण-पश्चिम: हसदो-रामपुर बेसिन।
- चोटियाँ: कौरता/कौरला पहाड़ (967 मी.), पउनाखेडा (969 मी.), पुटका पहाड़, बिजौरा पहाड़ (1089 मी.)।
- विशेष: रिहन्द नदी का उद्गम स्थल है।
- ऊँचाई: 450–1000 मी.
- चट्टानें: यहाँ गोडवाना शैल समूह, तालचेर और बाराकर श्रेणी की चट्टानें पाई जाती हैं। रेत, पत्थर तथा शैल संस्तरों के बीच में कोयले का बहुत बड़ा निक्षेप है।
2. उदयपुर पहाड़ी/पठार (रायगढ़)
- पहाड़: बारखोवा डोंगर, महादेव पहाड़ (988 मी.), जनता पहाड़, बड़नानी पहाड़, महातीन एवं धजक पहाड़ और मारगोण्डगर।
- विशेष: गज एवं चोरनई नदियाँ क्रमशः पूर्व एवं पश्चिम दिशा से आकर हसदेव नदी में मिलती हैं। यह श्रेणी हसदेव नदी द्वारा मैकल श्रेणी से अलग होती है।
- छुरी-उदयपुर पहाड़ी का विस्तार रायगढ़ से कोरबा तक है।
चंवरढाल पहाड़ श्रृंखला
- विस्तार: जांजगीर-चांपा, सक्ती एवं रायगढ़ का मैदान (रायगढ़)।
- परिचय: छत्तीसगढ़ बेसिन के उत्तरी उच्च भूमि से अलग करने के लिए रायगढ़ के दक्षिण-उत्तरी भाग में छोटे पहाड़ों की एक श्रृंखला है, जिसे चंवरढाल कहते हैं।
- अन्य नाम: कुम्हार पहाड़।
- स्थित: सिंघनपुर की गुफा।
पेण्ड्रा-लोरीमी का पठार
- भाग: यह मैकल-श्रेणी का विच्छेदित पठार है। इस क्षेत्र में वर्षा कम होती है।
- विस्तार: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, कोरबा जिले में।
- प्रमुख चोटियाँ:
- पलमा चोटी (1080 मी.) : गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
- लाफागढ़ (1048 मी.) : कोरबा
- चंदेली पहाड़ (821 मी.) : लोरीमी
- पर्यटन स्थल: चैतुरगढ़ (लाफागढ़)।
- क्षेत्र: पण्डरिया तहसील, लोरीमी, पेण्ड्रा एवं कटघोरा तहसील।
- सीमा रेखा: हाफ नदी इसकी पश्चिमी सीमा रेखा का निर्धारण करती है।
- अभ्यारण्य: अचानकमार वन्य जीव अभ्यारण्य इसी श्रृंखला पर स्थित है।
लाफागढ़
- स्थान: यह पहाड़ी कटघोरा पाली के समीप कोरबा जिले में स्थित है।
- भाग: पेण्ड्रा-लोरीमी पठार का हिस्सा है।
- ऊँचाई: 1048 मी.
- पर्यटन स्थल: चैतुरगढ़।
- मंदिर: महिषासुर मर्दिनी।
- निर्माण: नीष एवं शिष्ट क्रम के चट्टान से।
3. दक्षिणी उच्चभूमि
- विस्तार: इस क्षेत्र के अंतर्गत मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर के दक्षिण-पूर्वी भाग आता है।
- जल विभाजक: गोदावरी अपवाह तंत्र तथा महानदी की सहायक नदी शिवनाथ के मध्य।
- चोटी: 1. डोंगरबोर (700 मी.), 2. कौचार (697 मी.)।
- स्थिति: बालोद जिले का खरखरा और तान्दुला के मध्य।
- ऊँचाई: 674 मीटर।
- निक्षेप: लौह निक्षेप।
4. पूर्वी उच्च भूमि (रायपुर उच्च भूमि)
- अन्य नाम: रायपुर उच्च भूमि।
- विस्तार: रायपुर संभाग।
- स्थिति: रायपुर संभाग के दक्षिण-पूर्वी भाग में अर्द्धचन्द्राकार में फैली हुई है।
- प्रमुख भाग: 1. सोनबेरा पडार (सबसे ऊँचा भाग), 2. सिहावा पहाड़ी, 3. बसना बेसिन, 4. सोनाखान पहाड़ी, 5. छाता पहाड़।
सोनबेरा पडार
- विस्तार: गरियाबंद, महासमुंद जिले में।
- भाग: पूर्वी उच्च भूमि का सर्वाधिक ऊँचा भाग है।
- उद्गम: जोक नदी।
- बेसिन: इसके उत्तर-पूर्वी भाग में बसना बेसिन स्थित है।
सिहावा पर्वत
- जिला: धमतरी / महासमुंद।
- प्राचीन नाम: सुवितमती / सुवर्णमती।
- ऊँचाई: 586 मीटर (धमतरी)।
- उद्गम: महानदी (फरसिया के गणेश घाट नामक स्थान से)।
- आश्रम: सप्तभृंगी ऋषि का आश्रम। सप्त ऋषियों के नाम – 1. श्रृंगी, 2. अगस्त्य, 3. गौतम, 4. मुचकंद, 5. अंगिरा, 6. कंक, 7. शरमंग।
- मंदिर: कणेश्वर महादेव मंदिर (हारा : सोमवंशी शासक कणेश्वर)।
- मेला: 1. कणेश्वर महादेव मेला (महाशिवरात्रि), 2. श्रृंगी ऋषि का मेला (माघ पूर्णिमा)।
- अन्य पहाड़: 1. काटीगांव (631 मी.), 2. गिरधावा पर्वत (732 मी.)।
- सत्याग्रह: 21 जनवरी 1922 को सिहावा नगरी जनसत्याग्रह हुआ था जो प्रदेश का प्रथम जंगल सत्याग्रह था।
- (नोट: महासमुंद में सिहावा पर्वत की ऊँचाई 899 मी. (ऊँची चोटी का नाम – धारीओमरी) और घोड़ाघाड़ी जलप्रपात भी है, जैसा कि मूल स्रोत में दर्शाया गया है।)
बसना बेसिन
- स्थिति: उत्तर-पूर्वी भाग (रायपुर की उच्च भूमि के)।
- जिला: महासमुंद।
अन्य पहाड़ियाँ
- भातूनवाबाबद की पहाड़ी: जिला – गरियाबंद।
- छाता पहाड़: जिला – बलौदाबाजार। संबंध – सतनाम पंथ के प्रवर्तक संत गुरू घासीदास जी से संबंधित पवित्र तीर्थ स्थल है।
अन्य स्थलाकृतियाँ
- दल्लीराजहरा की पहाड़ी: विस्तार – डोंडीलोहारा (बालोद), अम्बागढ़ चौकी। दल्लीराजहरा की पहाड़ी का विस्तार मानपुर क्षेत्र तथा बालोद जिले में है जो खरखरा व तांदुला में स्थित है। पहाड़ियाँ – राजहरा की पहाड़ी एवं डोंगरगढ़ की पहाड़ी।
- कुटेल की पहाड़ी: जिला – रायगढ़ (धरमजयगढ़ तथा लैलूंगा क्षेत्र)। नदी – केलो नदी का उद्गम (लैलूंगा क्षेत्र से)।
- कुटकुराजहरा की पहाड़ी: जिला – बालोद। खनिज – लौह अयस्क (हेमेटाईट प्रकार का)। आपूर्ति – पूर्व में भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति की जाती थी। स्वामित्व – भिलाई इस्पात संयंत्र।
- बौरियाटिब्बू: जिला – मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी। खनिज – लौह अयस्क।
पर्वतों के प्राचीन नाम
- सिहावा पर्वत – सुविधात्मक (सुवर्णमती)
- अमरकंटक पर्वत – सोम पर्वत
- कोरबा, रायगढ़ क्षेत्र के पर्वत – हस्तु पर्वत
छ.ग. के प्रमुख बेसिन एवं उनकी स्थिति
| बेसिन | स्थिति |
|---|---|
| कन्हार बेसिन | रामानुजगंज (बलरामपुर) |
| सिंगरौली (रिहन्द) बेसिन | बाड़फनगर (बलरामपुर) |
| सरगुजा बेसिन | सरगुजा एवं सूरजपुर |
| हसदो-रामपुर बेसिन | बिलासपुर से सरगुजा |
| हसदो-मांड बेसिन | कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती एवं रायगढ़ |
| बसना बेसिन | महासमुंद |
| कोटरी/कांकरे बेसिन | कांकेर |
| उर्मिल (गोदावरी-शबरी) बेसिन | बीजापुर से सुकमा |
| कोरबा बेसिन | कटघोरा से कोरबा-पेण्डा-छुरी पहाड़ |
सीमांत उच्च भूमि एवं मध्यवर्ती मैदान (योजनाबद्ध मानचित्र)
*यह एक योजनाबद्ध (schematic) चित्र है जो मध्यवर्ती मैदान के चारों ओर फैली सीमांत उच्च भूमि (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) को दर्शाता है।
💡 महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts / Flashcards)
⛰️ उत्तरी उच्चभूमि
छुरी-उदयपुर की पहाड़ी, कोरबा से रायगढ़ तक। रिहन्द नदी का उद्गम स्थल।
🌊 सिहावा पर्वत
महानदी का उद्गम (धमतरी)। 21 जनवरी 1922 को प्रदेश का पहला जंगल सत्याग्रह हुआ।
🪨 दल्लीराजहरा
बालोद जिले में स्थित, भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) को लौह अयस्क की आपूर्ति का केंद्र।
🏞️ चैतुरगढ़
लाफागढ़ (कोरबा) में स्थित पर्यटन स्थल, ऊँचाई 1048 मी.।
📜 पर्वतों के प्राचीन नाम
सिहावा – सुवर्णमती, अमरकंटक – सोम, कोरबा/रायगढ़ – हस्तु पर्वत।
⛏️ कोरबा बेसिन
कटघोरा से कोरबा-पेण्डा-छुरी पहाड़ तक विस्तृत।
📝 ऑनलाइन MCQ टेस्ट (10 प्रश्न)
- सिहावा सत्याग्रह: 21 जनवरी 1922 को हुआ सिहावा जंगल सत्याग्रह छत्तीसगढ़ का पहला जंगल सत्याग्रह था, जिसका नेतृत्व स्थानीय आदिवासियों ने किया था। (स्रोत: छत्तीसगढ़ राज्य पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग)।
- दल्लीराजहरा: बालोद जिले में स्थित यह स्थान भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के लिए लौह अयस्क का मुख्य आपूर्तिकर्ता है। (स्रोत: SAIL / छत्तीसगढ़ खनिज विभाग)।