पूर्वी बघेलखण्ड का पठार एवं प्रमुख स्थलाकृतियाँ
छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन
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1. पूर्वी बघेलखण्ड का पठार (12.2)
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- विस्तार: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा (मैनपाट को छोड़कर), बलरामपुर (सामरी को छोड़कर)।
- भाग: बघेलखण्ड के पठार का पूर्वी भाग है (47.32% बघेलखण्ड के पठार का)।
- क्षेत्रफल: 21,863 वर्ग किमी।
- प्रतिशत: 16.16 प्रतिशत (छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का)।
- ढाल: उत्तर की ओर।
- नदी अपवाह तंत्र: सोन/गंगा नदी अपवाह तंत्र।
- प्रमुख नदियाँ: बनास, गोपद, रिहन्द, कन्हार, बीजाल इत्यादि।
- घेराव: पूर्वी बघेलखण्ड का पठार देवगढ़ तथा छुरी पहाड़ियों के मध्य है।
- बनावट: गोंडवाना शैल क्रम (सरगुजा बेसिन)।
- युग: जुरासिक युगीन।
- खनिज: कोयला।
- मिट्टी: लाल-पीली मिट्टी।
- फसल: मक्का एवं मोटे अनाज।
- जल विभाजक: महानदी अपवाह तंत्र एवं गंगा नदी अपवाह तंत्र के मध्य।
- घाटी: बनास, रम्पर और गोपद नदियाँ उत्तर-पश्चिम सीमा और उत्तर से प्रवाहित होती हुई संकरी घाटी का निर्माण करती हैं।
- पहाड़ियां: प्रदेश के पश्चिमी भाग चांगमखार कोरिया क्षेत्र में मटीले बलुआ पत्थर की विषम पहाड़ियां हैं।
- ऊँची चोटी: देवगढ़ की पहाड़ी (1033 मी.)।
- अन्य चोटियां: 1. गुल्की (1086 मी.), 2. रेनडाहा, 3. तंजारा राजपुरी (1030 मी.), 4. बदा (920 मी.), 5. जतरसुखा (990 मी.), 6. धोबोताल, 7. उमारता।
- उपविभाग (उत्तर से दक्षिण क्रम):
- सोहागपुर बेसिन (छ.ग. के अंतर्गत स्थित नहीं है)
- कन्हार बेसिन
- रिहन्द बेसिन
- देवगढ़ की पहाड़ियां
- सरगुजा बेसिन
- हसदो-रामपुर बेसिन
2. कन्हार बेसिन, रिहन्द बेसिन एवं देवगढ़ की पहाड़ियाँ
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कन्हार बेसिन
- प्रदेश के उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित है।
- यह कन्हार नदी द्वारा निर्मित बेसिन है।
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में स्थित है।
रिहन्द (सिंगरौली) बेसिन
- उत्तरी सीमांत – सिंगरौली (रिहन्द बेसिन को कहा जाता है)।
- उत्तर में: देवगढ़ की पहाड़ियों।
- पश्चिम में: कन्हार बेसिन।
- स्थान: बाड़फनगर तहसील (बलरामपुर)।
देवगढ़ की पहाड़ी
- स्थान: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया। जनकपुर, बैकुंठपुर, मनेन्द्रगढ़, उत्तरी सूरजपुर, प्रतापपुर, उत्तरी अम्बिकापुर, पश्चिमी कुसमी एवं दक्षिणी रामानुजगंज।
- दिशा: प्रदेश के उत्तरी दिशा में।
- ऊँचाई: देवगढ़ (1033 मी.)।
- देवगढ़ की पहाड़ी का उत्तरी हिस्सा बहुत अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।
- यह उत्तरी छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक ऊँची भूमि है।
- प्रमुख शिखर: मुस्की पहाड़, सोनहत पहाड़। अन्य उच्चभाग: बिजली मैना पहाड़, दियागढ़ पहाड़, जोग पहाड़, बार पहाड़।
- खनिज: 1. कोयला, 2. बेरिल।
- नदी: महानदी की सहायक नदी हसदो इसी पहाड़ी से निकलती है तथा अपेक्षतया नीची घाटी बनाती है।
- यह पहाड़ी पूर्वी बघेलखण्ड पठार के अन्तर्गत आती है।
3. सरगुजा बेसिन एवं हसदो-रामपुर बेसिन
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5. सरगुजा बेसिन/मध्यवर्ती उच्च मैदान
- अन्य नाम: मध्यवर्ती उच्च मैदान (पूर्वी बघेलखण्ड पठार का)।
- विस्तार: अम्बिकापुर, दक्षिण सूरजपुर, दक्षिण प्रतापपुर, पश्चिम सीतापुर आदि।
- देवगढ़, मैनपाट और छुरी पहाड़ियों के मध्य रिहन्द बेसिन से निर्मित है।
- बनावट: गोंडवाना शैल समूह।
- खनिज: कोयला।
- नदी: इसके मध्य से रेहर और गुंगाटा नदी दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती है।
- बघेलखण्ड पठार के उत्तर और दक्षिण में बहने वाली नदियों के कटाव के कारण इस क्षेत्र में कष्टे पहाड़ियां, घाटियां और स्पर मिलते हैं।
- पहाड़ी: इस बेसिन पर रामगढ़ की पहाड़ी (विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला) स्थित है।
- श्रेणी: छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर में मुख्यतः सतपुड़ा उच्च श्रेणी वाले पठार हैं।
- स्थिति: पूर्वी बघेलखण्ड पठार के दक्षिण भाग एवं दक्षिण-पूर्व में स्थित खुला भू-भाग है।
- दक्षिण-पूर्व में: पाट प्रदेश (मैनपाट, जारंगपाट, सामरीपाट, जशपुरपाट)।
- दक्षिण-पश्चिम में: हसदेव-रामपुर बेसिन।
- दक्षिण-पश्चिम में: तॉंगलेवा, दुला पहाड़ और पतरा हिल।
- उत्तर में: चिरवेन तथा हराई पहाड़ी।
6. हसदो-रामपुर बेसिन
- दिशा: राज्य के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में।
- विस्तार: सरगुजा से बिलासपुर तक।
- खनिज: कोयला खनिज।
- स्थिति:
- उत्तर में: देवगढ़ की पहाड़ी।
- उत्तर-पूर्व में: सरगुजा बेसिन।
- दक्षिण-पूर्व में: कोरबा बेसिन एवं छुरी-उदयपुर की पहाड़ी।
- दक्षिण-पश्चिम में: पेंड्रा-लोरमी पठार।
- निर्माण: हसदेव एवं उनकी सहायक छोटी नदियों द्वारा।
4. रामगढ़ की पहाड़ी एवं सीताबेंगरा गुफा
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- स्थिति: सरगुजा में स्थित है।
- पर्वत: सतपुड़ा पर्वत।
- गुफाएँ: सीताबेंगरा, जोगीमारा, लक्ष्मणबेंगरा।
- रामगढ़ की पहाड़ी मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है।
- खोज: कर्नल आउस्ले के द्वारा (1848 ई.)। जर्मन पूरातत्वविद डॉ. ब्लॉस ने इसे 1904 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे की स्पिरोट्टी मूं प्रकाशित कराया।
- इतिहास के कई काल खण्डों का साक्ष्य संजोय रखा है:
- रामायणकालीन साक्ष्य: सीताबेंगरा की गुफा, सीता कुंड, लक्ष्मण बेंगरा, रावण दरवाजा, तुर्रा पानी, रामगढ़ का किला।
- मौर्यकालीन साक्ष्य: जोगीमारा की गुफा।
- गुप्तकालीन साक्ष्य: महाकवि कालिदास जी की यात्रा वृतांत, जिसमें रामगढ़ को रामगिरी के रूप में उल्लेखित किया गया है।
सीताबेंगरा
- उपाधि: इसे विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला कहा जाता है।
- उपनाम: इसे सरगुजा की अजन्ता गुफा भी कहते हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: यहां आषाढ़ माह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता था, जिसका वर्णन कालिदास कृत मेघदूतम् में है।
- ऐतिहासिकता: यहां 200 ई.पू. में भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र की रचना की थी।
5. जोगीमारा गुफा, हाथीपोल गुफा, मंजटोली एवं सोनहत की पहाड़ी
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जोगीमारा
- संज्ञा: यरुंडेव का मंदिर।
- काल: यह मौर्यकालीन गुफा है।
- यह मौर्य काल में नृत्यांगनाओं का विश्राम कक्ष था।
- स्थिति: यह गुफा सीताबेंगरा गुफा से निकट स्थित/सटी हुई है।
- वर्णन: यहां नर्तक देवदत्त और सुतनुका की प्रेम गाथा का वर्णन मिलता है।
- शिलालेख: सम्राट अशोक के समय के शिलालेख की प्राप्ति हुई है जिसकी भाषा ब्राह्मी है।
लक्ष्मण बेंगरा
- यह गुफा जोगीमारा गुफा के समक्ष स्थित है।
हाथीपोल की गुफा
- प्रकृति: यह एक प्राकृतिक सुरंग है।
- नामकरण: इस गुफा में विशाल सुरंग है जहां एक हाथी आसानी से गुजर सकता है। इस कारण इसे हाथीपोल गुफा कहते हैं।
- कुंड: इस गुफा के अंदर एक कुंड है जिसे सीता कुंड के नाम से जानते हैं।
4. मंजटोली की पहाड़ी
- जिला: मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी।
- नदी उद्गम: यहां से बनास नदी का उद्गम होता है।
5. सोनहत की पहाड़ी
- जिला: मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी।
- खनिज: यह कोयला क्षेत्र है जहां प्रमुख रूप से अर्द्ध-कोकिंग कोयला प्राप्त होता है।
6. आधिकारिक शोध एवं सत्यापन (Official Research & Updates)
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- सीताबेंगरा गुफा: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, यह गुफा अपने अद्वितीय स्थापत्य और इतिहास के कारण विश्व की प्राचीनतम नाट्यशालाओं में गिनी जाती है। (स्रोत: ASI, रायपुर सर्कल)।
- जोगीमारा शिलालेख: यहाँ का ब्राह्मी शिलालेख मौर्यकालीन है, जो ‘देवदत्त’ और ‘सुतनुका’ की कथा का वर्णन करता है। इसे 1904 में डॉ. ब्लॉस द्वारा प्रकाशित किया गया था। (स्रोत: ASI, एपिग्राफी विभाग)।
- हसदेव-रामपुर बेसिन: यह क्षेत्र कोयला खनन के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ कोरबा और रायगढ़ के कोयला क्षेत्र आते हैं। (स्रोत: छत्तीसगढ़ खनिज विभाग)।
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💡 महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts)
🏞️ पूर्वी बघेलखण्ड का क्षेत्रफल
21,863 वर्ग किमी (16.16%) — देवगढ़ और छुरी पहाड़ियों के बीच स्थित।
⛰️ देवगढ़ की सबसे ऊँची चोटी
देवगढ़ (1033 मी.) — उत्तरी छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक ऊँची भूमि।
🪨 प्रमुख खनिज
कोयला और बेरिल — देवगढ़ की पहाड़ियों में पाए जाते हैं।
🎭 विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला
सीताबेंगरा गुफा (रामगढ़ की पहाड़ी) — इसे सरगुजा की अजंता भी कहा जाता है।
✍️ जोगीमारा शिलालेख
ब्राह्मी भाषा में मौर्यकालीन शिलालेख — सम्राट अशोक के समय का।
🌊 बनास नदी का उद्गम
मंजटोली की पहाड़ी (मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी)।